Rajasthan Board RBSE Class 12 Political Science Chapter 12 नियोजन और विकास: नीति आयोग

RBSE Class 12 Political Science Chapter 12 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

RBSE Class 12 Political Science Chapter 12 बहुंचयनात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
नीति आयोग का गठन कब हुआ?
(अ) 1 मार्च 2015
(ब) 1 जनवरी 2015
(स) 1 अप्रैल 2015
(द) 1 मार्च 1950

प्रश्न 2.
नीति आयोग के पदेन अध्यक्ष कौन होते हैं?
(अ) प्रधानमंत्री
(ब) राष्ट्रपति
(स) मुख्य न्यायाधीश
(द) राज्य के राज्यपाल

प्रश्न 3.
‘प्लान्ड इकोनोमी फोर इण्डिया’ नामक पुस्तक के लेखक थे
(अ) आशिर्वादम्
(ब) अमर्त्यसेन
(स) एम. विश्वेश्वरैया
(द) डॉ. अरविन्द पनगड़िया

प्रश्न 4.
इनमें से कौन नीति आयोग के गवर्निग काउन्सिल के सदस्य हैं?
(अ) दिल्ली के उपराज्यपाल
(ब) राजस्थान के मुख्यमंत्री
(स) मध्यप्रदेश के राज्यपाल
(द) उपरोक्त सभी

प्रश्न 5.
वर्तमान में हमारे देश में नियोजन का कार्य कौन – सी संस्था कर रही है?
(अ) योजना आयोग
(ब) वित्त आयोग
(स) संघ लोक सेवा आयोग
(द) नीति आयोग

उत्तर:
1. (ब), 2. (अ), 3. (स), 4. (ब), 5. (द)

RBSE Class 12 Political Science Chapter 12 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
योजना आयोग की स्थापना कब की गई थी?
उत्तर:
15 मार्च 1950 ई. में।

प्रश्न 2.
NITI (नीति) आयोग का अंग्रेजी में पूरा नाम बताइए।
उत्तर:
National Institution for Transforming India.

प्रश्न 3.
नीति आयोग में पूर्णकालिक सदस्यों की वर्तमान संख्या कितनी है?
उत्तर:
02 (डॉ. विवेक देवरॉय व डॉ. वी.के. सारस्वत)।

प्रश्न 4.
क्षेत्रीय परिषदों की बैठकों की अध्यक्षता कौन करता है?
उत्तर:
क्षेत्रीय परिषदों की बैठकों की अध्यक्षता नीति आयोग के उपाध्यक्ष या प्रधानमंत्री का कोई प्रतिनिधि करता है।

प्रश्न 5.’सबका साथ, सबका विकास’ नारा किसने दिया?
उत्तर:
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 12 लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
नियोजन क्या है? समझाइए।
उत्तर:
नियोजन से आशय – सोच – समझकर सही दिशा में उठाया गया प्रथम कदम ही नियोजन है। नियोजन के लिए आवश्यक है कि उद्देश्य स्पष्ट हो, उसे प्राप्त करने के साधन व प्रयास व्यवस्थित हों एवं अवधि निश्चित हो। देश के आर्थिक साधनों का विस्तृत सर्वेक्षण करके देश की आवश्यकताओं के अनुसार उनका सर्वोत्तम उपयोग निर्धारित करना नियोजन कहलाता है। योजना आयोग के अनुसार, “नियोजन संसाधनों के संगठन की एक ऐसी विधि है जिसके माध्यम से साधनों का अधिकतम लाभप्रद उपयोग निश्चित सामाजिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु किया जाता है।”

प्रश्न 2.
अच्छे नियोजन के चार लक्षण बताइए।
उत्तर:
अच्छे नियोजन के लक्षण – अच्छे नियोजन के चार लक्षण निम्नलिखित हैं

  1. उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग
  2. औद्योगीकरण में क्रमबद्ध विधि
  3.  शिक्षा के क्षेत्र का आधुनिकीकरण व प्रसार
  4. बौद्धिक सम्पदा का समुचित उपयोग।

प्रश्न 3.
नीति आयोग के उपाध्यक्ष व स्थायी सदस्यों के नाम बताइए।
उत्तर:
नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. अरविन्द पनगड़िया हैं। स्थायी सदस्यों के नाम हैं – डॉ. विवेक देवरॉय एवं डॉ. वी.के. सारस्वत

प्रश्न 4.
भारत में नियोजन के प्रमुख उद्देश्य क्या हैं? समझाइए।
उत्तर:
भारत में नियोजन के प्रमुख उद्देश्य – भारत में नियोजन के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं

  1. संसाधनों का समुचित उपयोग करना जिससे उनके अपव्यय को रोककर राष्ट्रीय विकास किया जा सके।
  2. देश में फैली हुई बेरोजगारी दूर कर लोगों को सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्र में अधिकाधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना।
  3. देश के नागरिकों की छिपी हुई प्रतिभा को जागृत कर परम्परागत कौशलों को नवीनीकृत रूप में विकसित करना
  4. आर्थिक असमानता कम करना । निर्धन एवं धनिक वर्ग के मध्य आर्भिक आधार पर दूरियाँ कम करना।
  5. नियोजन के माध्यम से सभी राज्यों एवं क्षेत्रों का संतुलित विकास करना।
  6. प्रति व्यक्ति आय और राष्ट्रीय आय में वृद्धि करना।
  7. सत्ताधारी दल द्वारा जनता से किए गए वादों को पूर्ण करने के नियोजित प्रयासों के लिए भी योजना निर्माण किया जाना आवश्यक है।
  8.  सामाजिक उन्नति करना। व्यवस्थित विकास से लोगों का जीवन स्तर सुधरेगा एवं यह प्रक्रिया सम्पूर्ण समाज को प्रगति के रास्ते पर ले जाएगी।
  9. राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता को संभव बनाना जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में व्यवस्थित प्रयासों से उन्नति स्वाभाविक है, जो आगे चलकर राष्ट्रीय उन्नति एवं आत्मनिर्भरता में परिवर्तित होगी।
  10. जनकल्याण के कार्यों को करने की क्षमताएँ विकसित करना।
  11. आर्थिक मामलों में सरकार की भूमिकाओं को स्पष्ट करके एवं संसाधनों के समुचित उपयोग के उद्देश्य से नियोजन एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।

प्रश्न 5.
बौद्धिक सम्पदा के दोहन का व्यवस्थित प्रयास नीति आयोग ने किस रूप में प्रारम्भ किया है?
उत्तर:
1 जनवरी 2015 को गठित नीति आयोग ने बौद्धिक सम्पदा के दोहन का व्यवस्थित प्रयास करना प्रारम्भ कर दिया है। इस हेतु नीति आयोग देश में विद्यमान बौद्धिक सम्पदा का उचित दोहन कर उनके पलायन को रोकने का प्रयास कर रहा है तथा सुशासन में उनकी भागीदारी सुनिश्चित कर रहा है।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 12 निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
नियोजन क्या है?
इसकी आवश्यकता एवं उद्देश्यों पर विस्तृत प्रकाश डालिए।
उत्तर:
नियोजन से आशय – सोच समझकर सही दिशा में उठाया गया प्रथम कदम नियोजन कहलाता है। नियोजन आर्थिक विकास की एक पद्धति है जिसके अन्तर्गत राष्ट्र के सीमित एवं दुर्लभ साधनों का उपयोग इस प्रकार किया जाता है। कि पूर्व निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके। इसके अन्तर्गत समाज के अधिकतम कल्याण के लिए इन साधनों का श्रेष्ठतम उपयोग करने का प्रयास किया जाता है। नियोजन एक अनवरत चलने वाली प्रक्रिया है जिसके माध्यम से विकास को एक दिशा एवं गति प्रदान की जाती है।

इसमें आर्थिक साधनों का विस्तृत सर्वेक्षण करके देश की आवश्यकताओं के अनुसार उनका सर्वोत्तम उपयोग करने की कोशिश की जाती है। इसमें जनसंख्या, राष्ट्रीय आय, उपभोग, बचत, विनियोग, रोजगार, कीमत स्तर आदि के भावी अनुमान लगाए जाते हैं और विकास के लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं। योजना आयोग के अनुसार, “नियोजन संसाधनों के संगठन की एक ऐसी विधि है जिसके माध्यम से साधनों का अधिकतम लाभप्रद उपयोग निश्चित सामाजिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु किया जाता है।”

नियोजन की आवश्यकता:
जहाँ तक भारत का सम्बन्ध है, देश में कई कारणों से नियोजन की आवश्यकता महसूस की गई है; जैसे

  1. देश की निर्धनता,
  2. विभाजन से उत्पन्न आर्थिक असन्तुलन एवं अन्य समस्याएँ,
  3. बेरोजगारी की समस्या,
  4. औद्योगीकरण की आवश्यकता,
  5. सामाजिक – आर्थिक विषमताएँ,
  6. देश का पिछड़ापन, धीमी गति से विकास, जनसंख्या विस्फोट आदि।।

नियोजन के उद्देश्य:
हमारे देश में सामाजिक एवं आर्थिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु नियोजन अपनाया गया। स्वतन्त्रता के समय विरासत में मिली जर्जर अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने हेतु देश में पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से विकास का मार्ग अपनाया गया। आज की आवश्यकताओं एवं चुनौतियों के अनुसार नियोजन के उद्देश्य निम्नलिखित हैं

  1. संसाधनों का समुचित उपयोग करना जिससे कि उनके अपव्यय को रोककर राष्ट्रीय विकास किया जा सके।
  2. देश में फैली हुई बेरोजगारी को दूर करके, लोगों के लिए सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्र में अधिकाधिक रोजगार के अवसर सृजित करना।
  3. कौशल विकास द्वारा देश के नागरिकों की छिपी हुई प्रतिभा को जागृत कर उनके परम्परागत कौशलों को नवीनीकृत रूप में विकसित करना।
  4. आर्थिक असमानता कम करना। निर्धन एवं धनिक वर्ग के मध्य आर्थिक आधार पर दूरियाँ कम करना।
  5.  नियोजन के माध्यम से सभी राज्यों एवं क्षेत्रों का संतुलित विकास करना।
  6. प्रति व्यक्ति आय और राष्ट्रीय आय में वृद्धि करना।
  7. सत्ताधारी दल द्वारा जनता से किए गए वादों को पूर्ण करने के नियोजित प्रयासों के लिए भी योजना निर्माण किया जाना आवश्यक है।
  8. सामाजिक उन्नति करना। व्यवस्थित विकास से लोगों का जीवन स्तर सुधरेगा एवं यह प्रक्रिया सम्पूर्ण समाज को प्रगति के रास्ते पर ले जाएगी।
  9. राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता को संभव बनाना जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में व्यवस्थित प्रयासों से उन्नति स्वाभाविक है, जो आगे चलकर राष्ट्रीय उन्नति एवं आत्मनिर्भरता में परिवर्तित होगी।
  10. जनकल्याण के कार्यों को करने की क्षमताएँ विकसित करना।
  11. आर्थिक मामलों में सरकार की भूमिका को स्पष्ट करने एवं संसाधनों के समुचित उपयोग के उद्देश्य से नियोजन एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।

प्रश्न 2.
नीति आयोग के गठन एवं उद्देश्यों की वर्तमान परिप्रेक्ष्य में मीमांसा कीजिए।
उत्तर:
नीति आयोग को परिचय – नीति आयोग का पूरा नाम राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान (National Institution for Transforming India) है। नीति आयोग की स्थापना 1 जनवरी 2015 को भारत सरकार द्वारा की गई। इसने पूर्व में गठित योजना आयोग का स्थान लिया है। नीति आयोग सरकार के थिंक टैंक के रूप में काम करेगा एवं उसे निदेशात्मक तथा नीतिगत गतिशीलता प्रदान करेगा।

नीति आयोग के गठन के आधार: नीति आयोग के गठन के प्रमुख आधार निम्नलिखित हैं

  1.  विकास में राज्यों की भूमिका को सक्रिय बनाना। इससे राष्ट्रीय विकास में राज्य सहकारी संघवाद के अनुरुप योदान कर सकेंगे।
  2.  देश में विद्यमान बौद्धिक सम्पदा का समुचित दोहन कर उसे पलायन से रोकना एवं सुशासन में उसकी भागीदारी सुनिश्चित करना।
  3.  विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु केन्द्र तथा राज्यों का साझा मंच तैयार करना।

नीति आयोग की कार्यकारिणी

  1. अध्यक्ष – प्रधानमंत्री
  2. सदस्य गवर्निग परिषद् काउन्सिल – समस्त राज्यों के मुख्यमंत्री, केन्द्र शासित प्रदेश जहाँ विधानसभाएँ हैं, के मुख्यमंत्री एवं अन्य केन्द्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपाल
  3. क्षेत्रीय परिषद – एक से अधिक राज्यों को प्रभावित करने वाले क्षेत्रीय मसलों पर विचार एवं निर्णय हेतु विशेष अवधि के लिए क्षेत्रीय परिषद के गठन का प्रावधान है। ये परिषदें भी प्रधानमंत्री के निर्देश पर कार्य करेंगी सम्बन्धित राज्यों के मुख्यमंत्री एवं केन्द्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल बैठक में भाग लेंगे। बैठक की अध्यक्षता नीति आयोग के उपाध्यक्षों या प्रधानमंत्री का कोई प्रतिनिधि करेगा।
  4. प्रधानमंत्री द्वारा मनोनीत सदस्य – जो अपने क्षेत्र में विशेष योग्यता एवं जानकारी रखते हों।
  5.  पूर्णकालिक पदाधिकारी
    • उपाध्यक्ष – प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त
    • पूर्णकालिक सदस्य – दो
    • आंशिक सदस्य – दो (बौद्धिक सम्पदा से आवश्यकतानुसार)
    • ‘पदेन सदस्य – केन्द्रीय मंत्री परिषद के चार सदस्य जो प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त किए जाते हैं।
    • मुख्य कार्यकारी अधिकारी-सचिव स्तर का अधिकारी
    • सचिवालय – आवश्यकतानुसार
    • वर्तमान में नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. अरविन्द पनगड़िया हैं। दो पूर्णकालिक सदस्य डॉ.विवेक देवरॉय व डॉ. वी. के. सारस्वत हैं।

नीति आयोग के उद्देश्यों की वर्तमान परिप्रेक्ष्य में मीमांसा:  नीति आयोग के प्रमुख उद्देश्यों की मीमांसा निम्नलिखित है

  1. राष्ट्रीय उद्देश्यों को दृष्टिगत रखते हुए राज्यों की सक्रिय भागीदारी के साथ राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं, एवं रणनीतियों का एक साझा दृष्टिकोण विकसित करना। नीति आयोग का ‘विजन’ प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्रियों को राष्ट्रीय विकास के एजेण्डे का प्रारूप तैयार कर सौंपना है।
  2. राज्यों के साथ सतत् आधार पर संरचनात्मक सहयोग की पहल और प्रशासनिक तंत्र के माध्यम से सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना।
  3. ग्राम स्तर पर विश्वसनीय योजना निर्माण के लिए ढाँचागत विकास की पहल करना।
  4. नीति आयोग यह सुनिश्चित करेगा कि जो कार्य-क्षेत्र उसे विशेष रूप से सौंपे गए हैं, उनकी आर्थिक कार्य नीति राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों को शामिल किया जाए।
  5.  विकास की दीर्घकालीन नीतियाँ तैयार करना। इन नीतियों की निरन्तर समीक्षा तथा मध्यावधि संशोधन भी करना।
  6.  समाज के उन वर्गों पर विशेष ध्यान देना जिन पर आर्थिक प्रगति से उचित प्रकार से लाभान्वित नहीं हो पाने की संभावनाएँ बनी रहती हैं।
  7. विकास के एजेन्डे में तीव्रता लाने के उद्देश्य से अन्तर क्षेत्रीय तथा अन्तर विभागीय मुद्दों के समाधान के लिए एक साझा मंच प्रदान करना।
  8. देश के बुद्धिजीवियों तथा संस्थाओं को राष्ट्रीय विकास की भागीदारी में सक्रिय करना। इनके परामर्श तथा योजनाओं को राष्ट्र निर्माण में प्रयुक्त करना।
  9. कार्यक्रमों एवं नीतियों के क्रियान्वयन के लिए प्रौद्योगिकी उन्नयन तथा क्षमता निर्माण पर जोर देना।
  10. सुशासन एवं सतत् व न्याय संगत विकास की सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रणाली विकसित कर अनुसंधान एवं अध्ययन द्वारा परिणामों पर पहुँचना।
  11.  राष्ट्रीय विकास कार्यक्रम और मूल उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक गतिविधियाँ सम्पादित करना।

प्रश्न 3.
देश की वर्तमान जरूरतों के परिप्रेक्ष्य में ‘नीति आयोग के सशक्तिकरण हेतु अपने सुझाव दीजिए।
उत्तर:
नीति आयोग: भारत सरकार ने 1 जनवरी 2015 को नीति आयोग का गठन किया। इसने पूर्ववर्ती योजना आयोग का स्थान लिया है। नीति आयोग का पूरा नाम राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान (National Institution for Transforming India) है। नीति आयोग सरकार के थिंकटैंक के रूप में कार्य कर रहा है तथा उसे निदेशात्मक एवं नीतिगत गतिशीलता प्रदान कर रहा है।

नीति आयोग के गठन का मुख्य उद्देश्य अखिल भारतीय विकास में राज्यों की भूमिका को सक्रिय बनाना, देश में विद्यमान बौद्धिक समाज का समुचित दोहन कर उसे पलायन से रोकना एवं सुशासन में उसकी हिस्सेदारी सुनिश्चित करना तथा विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु केन्द्र व राज्यों का साझा मंच तैयार करना है।

देश की वर्तमान जरूरतों के परिप्रेक्ष्य में नीति आयोग के सशक्तिकरण हेतु सुझाव:  देश की वर्तमान जरूरतों के परिप्रेक्ष्य में नीति आयोग के सशक्तिकरण हेतु प्रमुख सुझाव निम्नलिखित हैं

  1. नये भारत का सपना पूरा करने के लिए केन्द्र व राज्य मिलकर प्रयास करें। उनके मध्य दलीय मतभेद न हों। राज्य भी नीति निर्धारण का हिस्सा बनें।
  2. नीति आयोग के माध्यम से समस्त महत्वपूर्ण मुद्दों पर राज्यों के मुख्यमंत्रियों की राय को भी प्रमुख स्थान दिया जाए।
  3. देश के विकास के लिए 3 या 5 वर्षीय एक्शन प्लान तैयार किया जाए तथा दीर्घ अवधि के लक्ष्य नियत किये जाएँ।
  4. देश भर के पिछड़े जिलों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सार्वजनिक परिवहन, सड़क एवं ढांचागत विकास पर जोर दिया जाए।
  5. स्वच्छ भारत मिशन को इसके साथ जोड़ा जाए।
  6. कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए कार्य करना।
  7. शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए मानक के अनुरूप विश्वविद्यालयों की स्थापना करना।
  8. सार्वजनिक क्षेत्र में घाटे में चल रहे उद्योगों की पहचान कर उनकी सम्पत्ति को अन्य उत्पादन कार्यों में लगाना
  9. कृषि विकास, निर्धनता, उन्मूलन, कौशल विकास आदि को इसके अन्दर समाहित करना।
  10. भ्रष्टाचार के समापन हेतु कार्य करना।
  11. केन्द्र द्वारा संचालित योजनाओं का राज्यों के माध्यम से प्रभावी कार्यान्वयन करवाना।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 12 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Political Science Chapter 12 बहुंचयनात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्न में से किस देश ने सर्वप्रथम अर्थव्यवस्था के विकास एवं वृद्धि हेतु नियोजन को स्वीकार किया?
(अ) सोवियत रूस
(ब) भारत
(स) चीन
(द) ग्रेट ब्रिटेन

प्रश्न 2.
भारत में योजना आयोग का गठन कब किया गया?
(अ) सन् 1931 में
(ब) सन् 1950 में
(स) सन् 1934 में
(द) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 3.
सोच – समझकर सही दिशा में उठाया गया प्रथम कदम कहलाता है
(अ) नियोजन
(ब) संसाधन
(स) उद्देश्य
(द) विकास

प्रश्न 4.
सर्वोदय योजना का सम्बन्ध किससे है?
(अ) महात्मा गाँधी
(ब) एम.एन.राय
(स) एम. विश्वेश्वरैया
(द) जयप्रकाश नारायण

प्रश्न 5.
जनयोजना का सम्बन्ध किस विद्वान से है?
(अ) श्री मन्नारायण से
(ब) एम.एन. राय से
(स) जयप्रकाश नारायण से
(द) उपरोक्त सभी

प्रश्न 6.
भारत में नियोजन का उद्देश्य है
(अ) संसाधनों का समुचित उपयोग करना
(ब) देश में बेरोजगारी दूर करना
(स) आर्थिक असमानता कम करना
(द) उपरोक्त सभी

प्रश्न 7.
नीति आयोग के उपाध्यक्ष हैं
(अ) अरुण जेटली
(ब) नरेन्द्र मोदी
(स) राजनाथ सिंह
(द) अरविंद पनगड़िया

उत्तर:
1. (अ), 2. (ब), 3. (अ), 4. (द), 5. (ब), 6. (द), 7. (द)।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 12 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
सर्वप्रथम कब व किस देश ने अर्थव्यवस्था के विकास में वृद्धि हेतु नियोजन को स्वीकार किया?
उत्तर:
1928 ई. में सोवियत रूस ने।

प्रश्न 2.
देश में आर्थिक नियोजन क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
देश में विद्यमान आर्थिक समस्याओं; यथा – गरीबी, बेरोजगारी, आर्थिक असमानता, उद्योग का विकास करने एवं सूचना प्रौद्योगिकी को गति देने हेतु आर्थिक नियोजन आवश्यक है।

प्रश्न 3.
योजना आयोग के अनुसार नियोजन को परिभाषित कीजिए।
उत्तर:
योजना आयोग के अनुसार, “नियोजन संसाधनों के संगठन की एक ऐसी विधि है जिसके माध्यम से साधनों का अधिकतम लाभप्रद उपयोग निश्चित सामाजिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु किया जाता है।”

प्रश्न 4.
भारत में नियोजन एवं विकास की दिशा में प्रथम प्रयास कब व किसने किया?
उत्तर:
भारत में नियोजन एवं विकास की दिशा में प्रथम प्रयास 1934 ई. में एम. विश्वेश्वरैया की पुस्तक ‘प्लान्ड इकोनोमी फोर इण्डिया’ द्वारा किया गया।

प्रश्न 5.
नियोजन के सन्दर्भ में ‘बम्बई योजना’ कब प्रस्तुत की गयी?
उत्तर:
1944 ई में।

प्रश्न 6.
हमारे देश में नियोजन के कोई दो उद्देश्य लिखिए।
उत्तर:

  1. संसाधनों का समुचित उपयोग करना जिससे कि उनके अपव्यय को रोककर राष्ट्रीय विकास किया जा सके।
  2. आर्थिक असमानता कम करना।

प्रश्न 7.
भारत में नियोजन के कोई दो लक्षण / विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:

  1. उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग,
  2. बौद्धिक सम्पदा का समुचित उपयोग।

प्रश्न 8.
वर्तमान समय में भी कौन – कौन से सामाजिक मुद्दे हमारे नियोजन से ओझल नहीं हुए हैं?
उत्तर:
सामाजिक क्षेत्र के मुद्दे; जैसे – कृषि, पेयजल, ग्रामीण स्वास्थ्य, ऊर्जा, साक्षरता एवं पर्यावरण आदि।

प्रश्न 9.
आर्थिक क्षेत्र में नियोजन को लक्ष्य क्या है?
उत्तर:
राष्ट्रीय विकास।

प्रश्न 10.
विकास और नियोजन का परस्पर सम्बन्ध क्या है?
उत्तर:
सहभागी और उत्तरदायी प्रबन्धन विकास की प्रथम सीढ़ी है तथा नियोजन संसाधनों को सहभागी उत्तरदायी बनाता है।

प्रश्न 11.
महात्मा गाँधी के अनुसार नियोजन का क्या लक्ष्य था?
उत्तर:
महात्मा गाँधी के अनुसार नियोजन का लक्ष्य अंतिम व्यक्ति का विकास करना था।

प्रश्न 12.
योजना आयोग के स्थान पर किसका गठन किया गया?
उत्तर:
नीति आयोग का।

प्रश्न 13.
नीति आयोग का हिंदी में पूरा नाम बताइए।
उत्तर:
राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान।

प्रश्न 14.
नीति आयोग की स्थापना कब व किसने की?
उत्तर:
1 जनवरी 2015 को भारत सरकार ने नीति आयोग की स्थापना की।

प्रश्न 15.
भारत सरकार के थिंक टैंक के रूप में कौन – सा आयोग कार्य करता है?
उत्तर:
नीति आयोग।

प्रश्न 16.
नीति आयोग के गठन का कोई एक आधार बताइए।
उत्तर:
विकास में राज्यों की भूमिका को सक्रिय बनाना

प्रश्न 17.
नीति आयोग के कोई दो उद्देश्य बताइए।
उत्तर:

  1. ग्राम स्तर पर विश्वसनीय योजना निर्माण के लिए ढाँचागत विकास की पहल करना।
  2. देश के बुद्धिजीवी एवं संस्थाओं को राष्ट्रीय विकास की भागीदारी में सक्रिय करना।

प्रश्न 18.
नीति आयोग के वर्तमान अध्यक्ष कौन हैं?
उत्तर:
नरेन्द्र मोदी।

प्रश्न 19.
नीति आयोग के वर्तमान उपाध्यक्ष कौन हैं?
उत्तर:
डॉ. अरविंद पनगड़िया।

प्रश्न 20.
डॉ. अरविन्द पनगड़िया किस राज्य के मूल निवासी हैं?
उत्तर:
राजस्थान राज्य के।

प्रश्न 21.
नीति आयोग की गवर्निग परिषद् के सदस्य कौन-कौन हैं?
उत्तर:
नीति आयोग की गवर्निग परिषद के सदस्य हैं – समस्त राज्यों के मुख्यमंत्री, केन्द्रशासित प्रदेश जहाँ विधानसभाएँ हैं, के मुख्यमंत्री एवं अन्य केन्द्रशासित प्रदेशों के उप राज्यपाल।

प्रश्न 22.
नीति आयोग में क्षेत्रीय परिषद के गठन का प्रावधान क्यों किया गया है?
उत्तर:
एक से अधिक राज्यों को प्रभावित करने वाले क्षेत्रीय मामलों पर विचार-विमर्श व निर्णयों हेतु विशेष अवधि के लिए क्षेत्रीय परिषदों के गठन का प्रावधान किया गया है।

प्रश्न 23.
नीति आयोग की क्षेत्रीय परिषदें किसके निर्देश पर कार्य करती हैं?
उत्तर:
प्रधानमंत्री के निर्देश पर।

प्रश्न 24.
नीति आयोग की क्षेत्रीय परिषदों की बैठक में कौन – कौन भाग लेता है?
उत्तर:
नीति आयोग की क्षेत्रीय परिषदों की बैठक में सम्बन्धित राज्यों के मुख्यमंत्री व केन्द्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री / उपराज्यपाल भाग लेते हैं।

प्रश्न 25.
नीति आयोग में कितने पदेन सदस्यों की नियुक्ति की जाती है?
उत्तर:
चार। ये चारों सदस्य केन्द्रीय मंत्रिपरिषद के सदस्य होते हैं?

प्रश्न 26.
नीति आयोग के दो पूर्णकालिक सदस्य कौन – कौन से हैं?
उत्तर:

  1. डॉ. विवेक देवरॉय
  2.  डॉ. वी.के. सारस्वत।

प्रश्न 27.
नीति आयोग के उपाध्यक्ष एवं दो पूर्णकालिक सदस्यों की नियुक्ति कौन करता है?
उत्तर:
प्रधानमंत्री।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 12 लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में नियोजन क्यों आवश्यक है? कोई पाँच बिंदु दीजिए।
उत्तर:
भारत में नियोजन की आवश्यकता: नियोजन की आवश्यकता भारत में निम्नलिखित कारणों से है

  1. संसाधनों का समुचित उपयोग करना जिससे कि उनके अपव्यय को रोककर राष्ट्रीय विकास किया जा सके।
  2. देश में फैली हुई बेरोजगारी दूर कर, लोगों को सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र में अधिकाधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना।
  3. आर्थिक असमानता को कम करना जिससे कि निर्धन व धनिक वर्ग के मध्य आर्थिक आधार पर दूरियाँ कम हो सकें।
  4. समस्त राज्यों एवं क्षेत्रों को संतुलित विकास करना।
  5. देश के नागरिकों की छिपी हुई प्रतिभाओं को जागृत कर उनमें परम्परागत कौशलों को नवीनीकृत रूप में विकसित करना।

प्रश्न 2.
भारत में नियोजन के लक्षण बताइए।
उत्तर:
भारत में नियोजन के लक्षण: भारत में नियोजन के लक्षण अथवा विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  1. उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना।
  2. औद्योगीकरण में क्रमबद्ध वृद्धि करना
  3. कृषि एवं पशुपालन का समानान्तर विकास करना।
  4. राजकीय कार्यतंत्र (नौकरशाही) में पारदर्शिता लाना।
  5. इलेक्ट्रॉनिक्स तथा सम्प्रेषण क्षेत्र में तीव्र गति से आगे बढ़ना।
  6. शिक्षा के क्षेत्र का आधुनिकीकरण व प्रसार करना।
  7. बौद्धिक सम्पदा को समुचित उपयोग करना।
  8. भौगोलिक दृष्टि से वंचित क्षेत्रों में निवेश को प्राथमिकता प्रदान कर क्षेत्रीय असंतुलन दूर करना।
  9. कौशल विकास पर ध्यान देना।

प्रश्न 3.
नियोजन का विकास से सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
नियोजन का विकास से सम्बन्ध – नियोजन का विकास से घनिष्ठ सम्बन्ध है। आर्थिक क्षेत्र में नियोजन का लक्ष्य राष्ट्रीय विकास है। सहभागी और उत्तरदायी प्रबन्धन विकास की प्रथम सीढ़ी है तथा नियोजन संसाधनों व प्रशासन को सहभागी व उत्तरदायी बनाता है।

पई पर्णधीकरण व क्षीर सागर जैसे विद्वानों ने विकास के लिए नीति निर्माणकर्ताओं के दृष्टिकोण की अभिवृत्ति – परिवर्तनशील परिणाम प्रदाता सहभागिता तथा कार्य के प्रति समर्पण होना आवश्यक माना है। हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने नियोजन का लक्ष्य अंतिम व्यक्ति का विकास माना है। गाँधीजी संसाधनों के विकेन्द्रीकरण पर बल देते हैं।

हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नारा ‘सबका साथ, सबका विकास’ इसी अवधारणा को मजबूती प्रदान करता है। विकास का अर्थ लोगों के जीवन स्तर में उन्नति से है। स्वतंत्रता के बाद से लेकर वर्तमान तक हुए नियोजित विकास के बल पर ही आज हम विश्व के अग्रणी देशों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। भारत में नियोजित विकास हेतु 1950 से 2014 ई. तक योजना आयोग ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया तत्पश्चात् वर्तमान में नीति आयोग विकास के नियोजित प्रयासों का नेतृत्व कर रहा है।

प्रश्न 4.
नीति आयोग का गठन का आधार बताइए।
उत्तर:
नीति आयोग का गठन का आधार:  नीति आयोग का पूरा नाम राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान (National Institution for Transforming India) है। इसका गठन 1 जनवरी 2015 को भारत सरकार ने किया। यह भारत सरकार के थिंक टैंक के रूप में कार्य कर रहा है। नीति आयोग के गठन के प्रमुख आधार निम्नलिखित हैं

  1. विकास में राज्यों की भूमिका को सक्रिय बनाना।
  2. देश में विद्यमान बौद्धिक सम्पदा का समुचित दोहन कर उसे पलायन से रोकना एवं सुशासन में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना।
  3. विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु केन्द्र व राज्यों का साझा मंच तैयार करना । राज्यों की आवश्यकताओं को विभिन्न मंत्रालयों के मध्य सम्प्रेषण अभाव दूर कर प्रक्रियागत स्वरूप में हल करना।

प्रश्न 5.
नीति आयोग के कोई पाँच उद्देश्य लिखिए।
उत्तर:
नीति आयोग के उद्देश्य – नीति आयोग के पाँच प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं

  1. राष्ट्रीय उद्देश्यों को दृष्टिगत रखते हुए, राज्यों की सक्रिय भागीदारी के साथ राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं, क्षेत्रों और रणनीतियों का एक साझा दृष्टिकोण विकसित करना। नीति आयोग का ‘विजन’ प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को ‘राष्ट्रीय एजेन्डा’ का प्रारूप तैयार कर सौंपना है।
  2. राज्यों के साथ सतत् आधार पर संरचनात्मक सहयोग की पहल और प्रशासनिक तंत्र के माध्यम से सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना।
  3. ग्राम स्तर पर विश्वसनीय योजना निर्माण के लिए ढाँचागत विकास की पहल करना।
  4. समाज के उन वर्गों पर विशेष ध्यान देना जो आर्थिक प्रगति से उचित प्रकार से लाभान्वित होने से वंचित रहे हैं।
  5. देश के बुद्धिजीवियों एवं संस्थाओं को राष्ट्रीय विकास की भागीदारी में सक्रिय करना। इनके परामर्श एवं योजनाओं को राष्ट्र निर्माण में प्रयुक्त करना।

प्रश्न 6.
नीति आयोग की कार्यकारिणी का उल्लेख कीजिए।अथवा नीति आयोग का गठन किस प्रकार किया गया?
उत्तर:
नीति आयोग का गठन / कार्यकारिणी: नीति आयोग का गठन। कार्यकारिणी निम्नलिखित है

  1. अध्यक्ष – प्रधानमंत्री।
  2. सदस्य गवर्निग परिषद / काउन्सिल-समस्त राज्यों के मुख्यमंत्री, केन्द्रशासित प्रदेश जहाँ विधानसभाएँ है, के मुख्यमंत्री व अन्य केन्द्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपाल।
  3. क्षेत्रीय परिषदें – एक से अधिक राज्यों को प्रभावित करने वाले क्षेत्रीय मसलों पर विचार व निर्णयों हेतु विशेष अवधि के लिए क्षेत्रीय परिषदों के गठन का प्रावधान है। ये परिषदें भी प्रधानमंत्री के निर्देश पर कार्य करेंगी एवं सम्बन्धित राज्यों के मुख्यमंत्री व केन्द्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री व उपराज्यपाल बैठक में भाग लेंगे। बैठकों की अध्यक्षता नीति आयोग उपाध्यक्षों या प्रधानमंत्री का कोई प्रतिनिधि करेगा।
  4. प्रधानमंत्री द्वारा मनोनीत सदस्य जो अपने क्षेत्र में विशेष योग्यता व जानकारी रखते हों।
  5. पूर्णकालिक पदाधिकारी – उपाध्यक्ष – प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त। पूर्णकालिक सदस्य – दो। आंशिक सदस्य – दो (बौद्धिक सम्पदा समूह से आवश्यकतानुसार)।

पदेन सदस्य – केन्द्रीय मंत्रिपरिषद के चार सदस्य जो प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त किये जाते हैं।
मुख्य कार्यकारी अधिकारी – सचिव स्तर का अधिकारी।
सचिवालय – आवश्यकतानुसार।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 12 निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में नियोजन के लक्षण बताते हुए इसका विकास से सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
उत्तर:
नियोजन से आशय: सोच – समझकर सही दिशा में उठाया गया प्रथम कदम ही नियोजन है। नियोजन के लिए आवश्यक है कि उद्देश्य स्पष्ट हो। उसे प्राप्त करने के साधन व प्रयास व्यवस्थित हों तथा अवधि निश्चित हो। हमारे योजना आयोग ने इसे परिभाषित करते हुए बताया कि -“नियोजन, संसाधनों के संगठन की एक ऐसी विधि है जिसके माध्यम से साधनों का अधिकतम लाभप्रद उपयोग निश्चित सामाजिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु किया जाता है।”

नियोजन आर्थिक विकास की एक पद्धति है जिसके अन्तर्गत राष्ट्र के सीमित एवं दुर्लभ साधनों का उपयोग इस प्रकार किया जाता है कि पूर्व निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।इसके अन्तर्गत समाज के अधिकतम कल्याण के लिए इन साधनों का श्रेष्ठतम उपयोग करने का प्रयास किया जाता है। राष्ट्र के विकास में आर्थिक नियोजन का महत्वपूर्ण स्थान है।रॉबिन्स के अनुसार, “आर्थिक नियोजन हमारे इस युग की महान औषधि है।”

नियोजन एक अनवरत चलने वाली प्रक्रिया है। जिसके माध्यम से विकास को एक दिशा एवं गति दी जाती है। इसमें आर्थिक साधनों का विस्तृत सर्वेक्षण करके देश की आवश्यकताओं के अनुसार उसका सर्वोत्तम उपयोग करने की कोशिश की जाती है। इसमें जनसंख्या, राष्ट्रीय आय, उपभोग, बचत, विनियोग, रोजगार, कीमत स्तर आदि के भावी अनुमान लगाये जाते हैं और विकास के लक्ष्य निर्धारित किये जाते हैं।

नियोजन का विकास से सम्बन्ध: समाज में उन्नति, प्रगति, कल्याण और बेहतर जीवन की अभिलाषा से सम्बन्धित होने वाले सकारात्मक परिवर्तनों की प्रक्रिया ही ‘विकास’ है। विकास ही किसी समाज में प्रगति की दशा व दिशा को तय करने वाला प्रमुख तत्व होता है। विकास की प्रक्रिया में समाज के सभी वर्गों व लोगों का समान हित निहित होता है। आर्थिक क्षेत्र में नियोजन का लक्ष्य राष्ट्रीय विकास है।

सहभागी तथा उत्तरदायी प्रबन्धन विकास की प्रथम सीढ़ी है एवं नियोजन संसाधनों व प्रशासन को सहभागी व उत्तरदायी बनता है।  पई पर्णधीकर व क्षीर सागर जैसे विद्वानों ने विकास के लिए नीति निर्माणकर्ता के दृष्टिकोण की अभिवृत्ति – परिवर्तनशील परिणाम प्रदाता, सहभागिता एवं कार्य के प्रति समर्पणवादी होना आवश्यक माना है। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी, नियोजन का लक्ष्य अन्तिम व्यक्ति का विकास’ कर संसाधनों के विकेन्द्रीकरण मानते हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ‘सबका साथ सबका विकास’ का नारा इसी अवधारणा को सुदृढ़ करता है। विकास का अर्थ है – कि लोगों के जीवन स्तर में उन्नति। आज हम विश्व के अग्रणी देशों के साथ खड़े नजर आते हैं तो कहीं न कहीं नियोजित विकास की हमारी रणनीति सफल नजर आ रही है। विकास के नियोजित प्रयासों का परिणाम है कि 1950 से 2015 तक योजना आयोग के स्थान पर ‘नीति आयोग’ विकास के नियोजित प्रयासों का नेतृत्व कर रहा है।