Poets and Pancakes :Asokamitran

किठिन शब्दार्थ एवं हिन्दी अनुवाद)

Pancake was the brand name of the make-up material that Gemini Studios bought in truck-loads. Greta Garbo1 must have used it, Miss Gohar must have used it, Vyjayantimala2 must also have used it but Rati Agnihotri may not have even heard of it. The make-up department of the Gemini Studios was in the upstairs of a building that was believed to have been Robert Clive’s stables. A dozen other buildings in the city are said to have been his residence. For his brief life and an even briefer stay in Madras, Robert Clive seems to have done a lot of moving, besides fighting some impossible battles in remote corners of India and marrying a maiden in St. Mary’s Church in Fort St. George in Madras.

कठिन शब्दार्थ : Pancake (पैन्केक) = श्रृंगार-प्रसाधनों का एक ट्रेडमार्क। brand name (बॅन्डनेम्) = व्यापारिक नाम। make-up (मेक-अप) = शृंगार। stables (स्टेब्ल्ज्) = अस्तबल, घुड़साल । moving (मूविङ्) = मकान बदलना। maiden (मेड्न्) = अविवाहित युवती।

हिन्दी अनुवाद : पैनकेक शृंगार की सामग्री का एक व्यापारिक नाम था जिसे जेमिनी स्टुडियोज ट्रक के ट्रक भरे हुए खरीदता था। ग्रेटा गारबो ने इसे अवश्य प्रयोग किया होगा, मिस गोहर ने भी इसे अवश्य प्रयोग किया होगा, वैजयन्तीमाला ने भी इसका प्रयोग अवश्य किया होगा लेकिन रति अग्निहोत्री ने शायद इसके बारे में सुना भी न होगा। जेमिनी स्टुडियोज का श्रृंगार विभाग एक इमारत की ऊपरी मंजिल में स्थित था। इस इमारत को रॉबर्ट क्लाइव की घुड़साल माना जाता था। शहर की एक दर्जन अन्य इमारतों के बारे में कहा जाता है कि वे उसका निवास रही हैं। उसके संक्षिप्त जीवन तथा और भी संक्षिप्त उसके मद्रास में ठहराव के दौरान रॉबर्ट क्लाइव ने काफी निवास-परिवर्तन किए होंगे, ऐसा लगता है। इसके अलावा भारत के सुदूर कोनों में उसने असम्भव लड़ाइयाँ भी लड़ी तथा सेंट जॉर्ज किले के सेंट मेरीज चर्च में एक युवती से विवाह भी किया।

The make-up room had the look of a hair-cutting salon with lights at all angles around half a dozen large mirrors. They were all incandescent lights, so you can imagine the fiery misery of those subjected to make-up. The make-up department was first headed by a Bengali who became too big for a studio and left. He was succeeded by a Maharashtrian who was assisted by a Dharwar Kannadiga, an Andhra, a Madras Indian Christian, an Anglo-Burmese and the usual local Tamils. All this shows that there was a great deal of national integration long before A.I.R. and Doordarshan began broadcasting programmes on national integration. This gang of nationally integrated make-up men could turn any decent-looking person into a hideous crimson hued monster with the help of truck-loads of pancake and a number of other locally made potions and lotions. Those were the days of mainly indoor shooting, and only five per cent of the film was shot outdoors. I suppose the sets and studio lights needed the girls and boys to be made to look ugly in order to look presentable in the movie. A strict hierarchy was maintained in the make-up department. The chief make-up man made the chief actors and actresses ugly, his senior assistant the ‘second’ hero and heroine, the junior assistant the main comedian, and so forth. The players who played the crowd were the responsibility of the office boy. (Even the make-up department of the Gemini Studio had an ‘office boy’!) On the days when there was a crowdshooting, you could see him mixing his paint in a giant vessel andslapping it on the crowd players. The idea was to close every pore on the surface of the face in the process of applying make-up. He wasn’t exactly a ‘boy’; he was in his early forties, having entered the studios years ago in the hope of becoming a star actor or a top screen writer, director or lyrics writer. He was a bit of a poet.

कठिन शब्दार्थ : Salon (सैलॉन्) = हॉल। angles (ऐङ्ग्लज) = कोण। incandescent (इनकैनडिसेन्ट) = तापदीप्त । fiery (फाइअरि) = झुलसाने वाली। misery (मिजरि) = कष्ट। integration (इनटिग्रेशन) = एकता। hideous (हिडिअस्) = भयानक, घिनौना। hued (यूड) = रंग वाला। potions (पोशनज) = चॅट। lotions (लोशन्ज) = चमड़ी को तरोताजा बनाने वाला द्रव। sets (सेट्स) = मंच सज्जा | presentable (प्रिजेन्टब्ल) = देखे जाने योग्य, सुन्दर। hierarchy (हाइअराकि) = पदानुक्रम. क्रम .

comedian (कमीडिअन्) = हास्य-विनोद करने वाला। office boy (ऑफिस बॉइ) = छोटे-मोटे काम करने वाला I slapping (स्लैपिङ्) = चुपड़ देना। pore (पॉ(र)) = छिद्र । screen-writer (स्क्रीन राइट(र)) = कहानी-लेखक। lyrics-writer (लिरिक्स्-राइट(र)) = गीत-लेखक।

हिन्दी अनुवाद : शृंगार-कक्ष एक केशचर्या वाले हॉल जैसा दिखाई देता था जिसमें आधे दर्जन बड़े-बड़े दर्पणों के चारों ओर सभी कोणों पर रोशनियाँ लगी थीं। ये सब तापदीप्त रोशनियाँ थीं, इसलिए आप कल्पना कर सकते हैं कि जो लोग शृंगार कराते थे वे किस झुलसाने वाले कष्ट को सहन करते थे। शृंगार-विभाग सर्वप्रथम एक बंगाली द्वारा संभाला जाता था जो एक स्टूडियो के लिए ज्यादा बड़ा हो गया था और छोड़कर चला गया था। उसके बाद एक महाराष्ट्र निवासी व्यक्ति ने इसे संभाला जिसकी सहायता एक धारवाड़ कन्नाडिगा, एक आन्ध्र वाले, एक मद्रासी भारतीय ईसाई, एक एंग्लो-बर्मीज़ तथा सामान्य स्थानीय तमिलों के द्वारा की जाती थी। यह सब दिखाता है ऑल इन्डिया रेडियो तथा दूरदर्शन द्वारा राष्ट्रीय एकता पर कार्यक्रम प्रसारित करने से काफी पहले ही वहाँ अत्यधिक राष्ट्रीय एकता मौजूद थी। राष्ट्रीय स्तर पर एकता में बँधे इन शृंगार करने वाले लोगों का दल किसी भी अच्छे दिखने वाले व्यक्ति को अपने ट्रक-भर पैनकेक श्रृंगार-प्रसाधन एवं अन्य स्थानीय निर्मित पेय पदार्थों तथा चमड़ी पर लगाये जाने वाले द्रव पदार्थों की मदद से, एक भयानक, घिनौने लाल-बैंगनी रंग के दानव में बदल सकता था। वे दिन मुख्य रूप से अन्दर की शूटिंग के हुआ करते थे और केवल फिल्म का पाँच प्रतिशत हिस्सा ही बाहर शूट किया जाता था। मैं ऐसा मानता हूँ कि मंच-सज्जा तथा स्टूडियो की रोशनियों को इस बात की आवश्यकता थी कि लड़के तथा लड़कियों को कुरूप बनाया जाए ताकि फिल्म में वे सुन्दर, प्रस्तुत करने योग्य दिखाई दे सकें। श्रृंगार विभाग में एक कठोर पदानुक्रम बनाये रखा जाता था। मुख्य शृंगारको मुख्य अभिनेताओं एवं अभिनेत्रियों को उसका वरिष्ठ सहायक ‘दुसरे’ नायक तथा नायिका को कनिष्ठ सहायक मुख हास्यानता का इसी क्रम में चलता रहता था। जो लोग भीड़ की भूमिका निभात थ, व आफिस ब्वाय की जिम्मेदारी होते थे। उन दिनों जब भीड़ के दृश्य फिल्माए जाते थे तब आप उस आफिस बॉइ को एक विशाल बर्तन में पेंट मिलाते देख सकते थे और इसे भीड़ की भूमिका वाले लोगों पर पोतते देख सकते थे। विचार यह था कि श्रृंगार सामग्री से पुताई करते समय उनके चेहरों की सतह का प्रत्येक छिद्र बन्द कर दिया जाए |

वह वास्तव में लडका नहीं था, वह चालीस की उम्र से आगे था, जो वर्षों पूर्व इस उम्मीद से स्टूडियो में आया था , कि वह एक स्टार अभिनेता अथवा शीर्ष कहानी-लेखक, निर्देशक अथवा गीत-लेखक बन जाएगा| वह थोडा-सा कवि भी था।

In those days I worked in a cubicle, two whole sides of which were French windows. (I didn’t know at that time they were called French windows.) Seeing me sitting at my desk tearing up newspapers day in and day out, most people thought I was doing next to nothing. It is likely that the Boss thought likewise too. So anyone who felt I should be given some occupation would barge into my cubicle and deliver an extended lecture. The ‘boy’ in the make-up department had decided I should be enlightened on how great literary talent was being allowed to go waste in a department fit only for barbers and perverts. Soon I was praying for crowd-shooting all the time. Nothing short of it could save me from his epics.

कठिन शब्दार्थ : cubicle (क्यूबिक्ल) = कोठरी । French window (फ्रेन्च विन्डो) = दरवाजे जैसी बड़ी खिड़की। occupation (ऑक्युपेशन्) = काम-काज। barge into (बाज इनट) = घस आना। extended (इक्स्टेन्ड्ड) = लम्बा। enlightened (इन्लाइट्न्ड्) = जानकारी दिया जाना। perverts (पवट्स) = पथभ्रष्ट। epics (एपिक्स) = महाकाव्य।

हिन्दी अनुवाद : उन दिनों मैं एक कोठरी में काम किया करता था, जिसकी दो पूरी बगलें दरवाजों की भाँति खुलने वाली खिड़कियों से बनी थीं। । मुझे रात-दिन डेस्क के पास बैठे अखबारों को फाड़ते देख अधिकतर लोग सोचते थे कि मैं कुछ नहीं करता था। यह सम्भव है कि बॉस भी ऐसा ही सोचते थे। इसलिए कोई भी व्यक्ति जिसे लगता था कि मुझे भी कोई काम दिया जाना चाहिए, मेरी कोठरी में घुस आता और एक लम्बा भाषण दे डालता। शृंगार विभाग का बॉइ’ यह तय कर चुका था कि मुझे जानकारी दी जानी चाहिए कि किस प्रकार महान् साहित्यिक प्रतिभा एक ऐसे विभाग में बरबाद होने दी जा रही थी जो केवल नाइयों तथा पथ-भ्रष्ट लोगों के लिए ही उपयुक्त था। जल्दी ही मैं भीड़ के दृश्यों का फिल्मांकन हर समय होते रहने के लिए प्रार्थना करने लगा। इससे कम चीज मुझे उसके महाकाव्यों से नहीं बचा सकती थी।

In all instances of frustration, you will always find the anger directed towards a single person openly or covertly and this man of the make-up department was convinced that all his woes, ignominy and neglect were due to Kothamangalam Subbu. Subbu was the No. 2 at Gemini Studios. He couldn’t have had a more encouraging opening in films than our grown-up make-up boy had. On the contrary he must have had to face more uncertain and difficult times, for when he began his career, there were no firmly established film producing companies or studios. Even in the matter of education, specially formal education, Subbu couldn’t have had an appreciable lead over our boy. But by virtue of being born a Brahmin — a virtue, indeed! — he must have had exposure to more affluent situations and people. He had the ability to look cheerful at all times even after having had a hand in a flop film. He always had work for somebody — he could never do things on his own — but his sense of loyalty made him identify himself with his principal completely and turn his entire creativity to his principal’s advantage. He was tailor-made for films. Here was a man who could be inspired when commanded. “The rat fights the tigress underwater and kills her but takes pity on the cubs and tends them lovingly — I don’t know how to do the scene,” the producer would say and Subbu would come out with four ways of the rat pouring affection on its victim’s offspring. “Good, but I am not sure it is effective enough,” the producer would say and in a minute Subbu would come out with fourteen more alternatives. Film-making must have been and was so easy with a man like Subbu around and if ever there was a man who gave direction and definition to Gemini Studios during its golden years, it was Subbu. Subbu had a separate identity as a poet and though he was certainly capable of more complex and higher forms, he deliberately chose to address his poetry to the masses. His success in films overshadowed and dwarfed his literary achievements — or so his critics felt. He composed several truly original ‘story poems’ in folk refrain and diction and also wrote a sprawling novel Thillana Mohanambal with dozens of very deftly etched characters. He quite successfully recreated the mood and manner of the Devadasis of the early 20th century. He was an amazing actor — he never aspired to the lead roles — but whatever subsidiary role he played in any of the films, he performed better than the supposed main players. He had a genuine love for anyone he came across and his house was a permanent residence for dozens of near and far relations and acquaintances. It seemed against Subbu’s nature to be even conscious that he was feeding and supporting so many of them. Such a charitable and improvident man, and yet he had enemies! Was it because he seemed so close and intimate with The Boss? Or was it his general demeanour that resembled a sycophant’s? Or his readiness to say nice things about everything? In any case, there was this man in the make-up department who would wish the direst things for Subbu.

कठिन शब्दार्थ : Instances (इन्स्टन्स्ज) = उदाहरण। frustration (फ्रस्ट्रेश्न्) = हताशा, कुण्ठा | covertly (कट्लि ) = गुप्त रूप से। woes (वोज) = मुसीबतें। ignominy (इग्नॉमिनि) = अपमान, बदनामी। neglect (निगलेक्ट) = उपेक्षा, अनादर। appreciable (अप्रीशब्ल) = अच्छा खासा । by virtue of (बाइ वचू ऑव्) = के बल पर। exposure (इक्स्पोश(र)) = प्रभाव। affluent (ऐफ्लुअन्ट्) = समृद्ध । flop (फ्लॉप) = असफल। creativity (क्रिएटिवटि) = रचनात्मकता। tailor made (टेल(र)-मेड्) = के अनुकूल बना हुआ। inspired (इन्स्पाइअड्) = प्रेरित। tend (टेन्ड्) = देखभाल करना। offspring (ऑस्प्रिङ्) = संतान । alternative (आल्टनटिव्) = वैकल्पिक। complex (कॉम्प्लेक्स्) = जटिल। deliberately (डिलिबरट्लि) = जानबूझ कर। masses (मैस्ज) = जनसामान्य। over-shadowed (ओवशैडोड्) = छा गया। dwarf (ड्वॉफ्) = बौना कर देना। refrain (रिफ्रेन्) = गीत में टेक। diction (डिक्श्न् ) = शब्द चयन। sprawling (स्पॉलिङ्) = फैला हुआ। subsidiary. (सॅबसिडिअरि) = सहायक । genuine (जेन्युइन्) = सच्चा। acquaintances (अक्वेन्टन्स्ज) = परिचित लोग। improvident (इमप्रॉविडन्ट) = लापरवाह, खर्चीला व्यक्ति। intimate (इन्टिमट) = घनिष्ठ। demeanour (डिमीन(र)) = तौर-तरीका। sycophant (सिइकफन्ट) = चापलूस। direst (डाइअरिस्ट्) = भयानकतम।

हिन्दी अनुवाद : कुण्ठा के सभी मामलों में आप हमेशा पायेंगे कि क्रोध एक व्यक्ति को खुले में अथवा गुप्त रूप से निशाना बनाता है, और श्रृंगार विभाग के इस व्यक्ति की दृढ़ आस्था थी कि उसके सारे कष्ट, अपमान तथा उपेक्षा कोठमंगलम सुब्बू के कारण थे। सुब्बू जेमिनी स्टूडियो में नं. 2 पर था। उसे फिल्मों में अधिक प्रोत्साहनपूर्ण स्थान नहीं मिला होगा जैसा कि हमारे वयस्क शृंगार बॉइ को मिला हुआ था। इसके विपरीत उसने अधिक अनिश्चित एवं मुश्किल दिनों का सामना किया होगा, क्योंकि जब उसने अपना व्यवसाय शुरू किया था, तब पूर्ण रूप से स्थापित फिल्म कम्पनियाँ अथवा स्टूडियो नहीं थे। शिक्षा के मामले में भी, विशेष रूप से औपचारिक शिक्षा के मामले में, सुब्बू ने हमारे बॉइ से ज्यादा अधिक बढ़ोत्तरी नहीं पायी होगी। लेकिन ब्राह्मण के रूप में जन्म लेने के कारण—एक खूबी वास्तव में! उसे अधिक समृद्ध परिस्थितियों एवं लोगों के साथ सम्मिलन का अवसर मिला होगा। उसमें सभी परिस्थितियों में प्रसन्न रहने की सामर्थ्य थी फिर चाहे उसने किसी असफल फिल्म में अपना हाथ क्यों न रखा हो। उसके पास किसी भी व्यक्ति के लिए काम रहता था—वह अपने आप काम नहीं कर सकता था लेकिन उसकी वफादारी की भावना ने उसे अपने मुखिया के साथ पूरी तरह एकाकार कर दिया था और उसने अपनी समस्त रचनात्मकता को अपने मुखिया के लाभ की ओर मोड़ दिया था। वह फिल्मों के लिए अनुकूल बन गया था। यहाँ एक ऐसा व्यक्ति था जो आदेश पाकर प्रेरित हो सकता था। “चूहा पानी के नीचे बाघिन से युद्ध करता है और उसे मार देता है लेकिन उसके बच्चों पर दया दिखाता है और प्रेम के साथ उन्हें दुलारता है—मैं नहीं जानता कि इस दृश्य को कैसे किया जाये”, निर्माता कहता और सब्ब चार भिन्न तरीके सझा देता जिनसे चहा अपने शिकार के बच्चों पर स्नेह उँडेल सकता था।”ठीक, किन्तु मैं आश्वस्त नहीं हूँ कि यह पर्याप्त रूप से प्रभावशील रहेगा”, निर्माता कहता और एक ही मिनट में सुब्बू चौदह अन्य विकल्प सामने रख देता। फिल्म निर्माण अवश्य इतना आसान रहा होगा और था जब सुब्बू जैसा व्यक्ति पास में हो और अगर कभी कोई ऐसा व्यक्ति था जिसने जेमिनी स्टूडियोज को दिशा एवं परिभाषा प्रदान की, इसके स्वर्णिम दिनों के दौरान, तो यह सुब्बू ही था। कवि के रूप में सुब्बू एक अलग ही पहचान रखता था और यद्यपि वह निश्चित रूप से अधिक जटिल तथा ऊँची प्रकार के काव्यों के लिए समर्थ था तथापि उसने अपने काव्य को जानबूझ कर जनसामान्य को संबोधित करना पसन्द किया। फिल्मों में उसकी सफलता ने उसकी साहित्यिक उपलब्धियों को ढक दिया एवं उन्हें छोटा कर दिया—अथवा उसके आलोचकों को ऐसा प्रतीत हुआ। उसने लोकसंगीत एवं शब्दावली में कई सारी सच्ची मौलिक कथात्मक कविताएँ’ रची और एक विस्तृत उपन्यास ‘थिल्लाना मोहनमबाल’ लिखा जिसमें दर्जनों कुशलतापूर्वक तराशे हुए पात्र हैं। उसने बड़ी सफलतापूर्वक आरम्भिक 20वीं शताब्दी की देवदासियों के भाव व तौर-तरीके पैदा किये। वह आश्चर्यजनक अभिनेता था—उसने कभी भी मुख्य भूमिका की चाहत नहीं की—परन्तु जो भी सहायक भूमिका उसे फिल्मों में मिली, उसने उनमें मुख्य कलाकार समझे जाने वालों से बेहतर प्रदर्शन किया। जिससे भी वह मिलता था उसके प्रति उसके मन में सच्चा प्यार होता था और उसका घर दूर तथा पास के दर्जनों जान-पहचान के लोगों व मित्रों का स्थायी निवास था। यह सुब्बू के स्वभाव के विरुद्ध प्रतीत होता था कि वह इस बारे में संचेत भी हो कि वह इतने लोगों को भोजन करा रहा था अथवा उनको सहारा दे रहा था। ऐसा दानी एवं फिजूल-खर्ची वाला व्यक्ति, और फिर भी उसके दुश्मन थे। क्या यह इस कारण था कि वह बॉस के साथ इतना निकट एवं घनिष्ठ दिखाई देता था? अथवा क्या उसका सामान्य तौर-तरीका ऐसा था जो किसी चापलूस से मेल खाता हो? अथवा हर चीज के बारे में अच्छी बातें बोलने में उसकी तत्परता? जो भी हो, शृंगार विभाग का यह एक व्यक्ति था जो सुब्बू के लिए भयानकतम चीजों की कामना किया करता था।

You saw Subbu always with The Boss but in the attendance rolls, he was grouped under a department called the Story Department comprising a lawyer and an assembly of writers and poets. The lawyer was also officially known as the legal adviser, but everybody referred to him as the opposite. An extremely talented actress, who was also extremely temperamental, once blew over on the sets. While everyone stood stunned, the lawyer quietly switched on the recording equipment. When the actress paused for breath, the lawyer said to her, “One minute, please,” and played back the recording. There was nothing incriminating or unmentionably foul about the actress’s tirade against the producer. But when she heard her voice again through the sound equipment, she was struck dumb. A girl from the countryside, she hadn’t gone through all the stages of worldly experience that generally precede a position of importance and sophistication that she had found herself catapulted into. She never quite recovered from the terror she felt that day. That was the end of a brief and brilliant acting career — the legal adviser, who was also a member of the Story Department, had unwittingly brought about that sad end. While every other member of the Department wore a kind of uniform — khadi dhoti with a slightly oversized and clumsily tailored white khadi shirt — the legal adviser wore pants and a tie and sometimes a coat that looked like a coat of mail. Often he looked alone and helpless — a man of cold logic in a crowd of dreamers — a neutral man in an assembly of Gandhiites and khadiites. Like so many of those who were close to The Boss, he was allowed to produce a film and though a lot of raw stock and pancake were used on it, not much came of the film. Then one day The Boss closed down the Story Department and this was perhaps the only instance in all human history where a lawyer lost his job because the poets were asked to go home.

कठिन शब्दार्थ : Attendance rolls (अटेन्डन्स् रोल्ज) = उपस्थिति पत्र। comprising (कॉम्प्राइजिङ्) = शामिल करते हुए। Legal adviser (लीगल अड्वाइज(र)) = कानूनी सलाहकार । talented (टैलन्ड) = प्रतिभाशाली। temperamental (टेम्प्रमेन्ट्ल) = तुनकमिजाज । blew over (ब्लू ओव(र)) = क्रुद्ध हो गयी। stunned (स्टन्ड) = हक्का-बक्का रह गये । equipment (इक्विप्मन्ट) = साज-सामान। incriminating (इन्क्रिमिनेटिङ्) = दोषारोपण वाले। foul (फाउल) = गन्दा । tirade (टाइरेड) = क्रोधपूर्ण भाषण । struck dumb (स्ट्रक् डम्) = बोल न सकी। precede (प्रिसीड्) = से पहले आना। sophistication (सफिस्टिकेश्न्) = दुनियादारी। catapulted (कैटपल्ट्ड) = तेजी से चढ़ा दिया । oversized (ओवसाइज्ड) = सामान्य से थोड़े बड़े आकार का। clumsily (क्लम्जिलि) = अनाड़ीपन से। coat of mail (कोट ऑव् मेल) = कवच। cold logic (कोल्ड लॉजिक्) = रूखा तर्क। neutral (न्यूट्रल) = तटस्थ । raw stock (रॉ स्टॉक्) = कच्चा माल।

हिन्दी अनुवाद : आप सुब्बू को हमेशा बॉस के साथ देख सकते थे किन्तु उपस्थिति पत्रकों में उसे एक विभाग, कहानी विभाग, के अन्तर्गत समाहित किया गया था जिसमें एक वकील, बहुत सारे लेखक तथा कवि शामिल थे। वकील को अधिकृत रूप से कानूनी सलाहकार के रूप में जाना जाता था, लेकिन प्रत्येक व्यक्ति उसे इससे उल्टा ही बोलते थे। एक अत्यधिक प्रतिभाशाली अभिनेत्री, जो अत्यधिक तुनकमिजाज भी थी, एक बार मंच पर क्रुद्ध हो उठी। जब प्रत्येक व्यक्ति भौचक्का होकर खड़ा था, तो वकील ने चुपचाप आवाज रिकार्ड करने वाला यन्त्र चालू कर दिया। जब अभिनेत्री सांस लेने को रुकी, तो वकील उससे बोला, “कृपया एक मिनट,” और उसने रिकार्ड को वापस बजा दिया। इसमें निर्माता के विरुद्ध अभिनेत्री के क्रोधपूर्ण भाषण में कुछ भी दोषारोपण से परिपूर्ण अथवा अकथनीय रूप से गंदी बात नहीं थी। लेकिन जब उसने अपनी ही आवाज का ध्वनि-यन्त्र पर पुनः सुना, तो वह कुछ बोल न सकी। ग्रामीण क्षेत्र से आयी यह लड़की दुनियादारी. के अनुभव की उन सभी अवस्थाओं से नहीं गुजरी थी जो अवस्थाएँ सामान्यतः महत्त्वपूर्ण एवं दुनियादारा का समय पद पर पहुंचने से पूर्व आती हैं, जिस पद पर उसने स्वयं को अचानक चढ़े हुए पाया। उस दिन महसूस किये किए गए आतंक से वह कभी पूरी तरह उभर न पायी। एक संक्षिप्त एवं शानदार अभिनय पेशे का यह अन्त था कानूनी सलाहकार जो कहानी विभाग का एक सदस्य भी था वह बिना सोचे-समझ ही इस दुखद अंत को ले आया था। जबकि कहानी विभाग का

हर दूसरा व्यक्ति एक प्रकार की वर्दी पहनता था-खादी की धोती तथा साथ में थोड़ी बड़ी साइज की तथा अनाड़ीपन से सिली हुई सफेद खादी की कमीज-कानूनी सलाहकार पैंट तथा टाई पहनता था, और कभी-कभी एक कोट पहनता था जो एक कवच की भाँति दिखाई देता था। प्रायः वह अकेला तथा विवश दिखाई देता था—एक रूखे तर्क वाला व्यक्ति, स्वप्न-दृष्टाओं की भीड़ में एक तटस्थ व्यक्ति, गाँधीवादियों तथा खादीवादियों के समूह में। बॉस के निकट वाले बहुत सारे लोगों की तरह उसे भी एक फिल्म के निर्माण की अनुमति दी गयी और यद्यपि बहुत सारा कच्चा माल एवं पैनकेक इस पर काम में लिए गये किन्तु फिल्म का कुछ न बना। फिर एक दिन बॉस ने कहानी विभाग को बंद कर दिया और यह शायद एक मात्र उदाहरण ही था, पूरे मानव-इतिहास में, जहाँ एक वकील की नौकरी इसलिए चली गयी क्योंकि कवियों को घर जाने को कह दिया गया।

Gemini Studios was the favourite haunt of poets like S.D.S.Yogiar3 , Sangu Subramanyam, Krishna Sastry and Harindranath Chattopadhyaya4 . It had an excellent mess which supplied good coffee at all times of the day and for most part of the night. Those were the days when Congress rule meant Prohibition and meeting over a cup of coffee was rather satisfying entertainment. Barring the office boys and a couple of clerks, everybody else at the Studios radiated leisure, a pre-requisite for poetry. Most of them wore khadi and worshipped Gandhiji but beyond that they had not the faintest appreciation for political thought of any kind. Naturally, they were all averse to the term ‘Communism’. A Communist was a godless man — he had no filial or conjugal love; he had no compunction about killing his own parents or his children; he was always out to cause and spread unrest and violence among innocent and ignorant people. Such notions which prevailed everywhere else in South India at that time also, naturally, floated about vaguely among the khadi-clad poets of Gemini Studios. Evidence of it was soon forthcoming.

कठिन शब्दार्थ : Favourite (फेवरिट) = मनपसन्द । haunt (हॉन्ट) = अड्डा, बसेरा। mess मेस्) = भोजनालय। prohibition (प्रोइबिश्न्) = मद्य-निषेध। barring (बारिङ्) = सिवाय। radiated (रेडिएटड) = प्रसारित करते थे। leisure (लेश(र)) = खाली समय । prerequisite (प्रिरेक्वजिट) = पूर्व शर्त, पूर्वापेक्षा । averse (अवस्) = प्रतिकूल । filial (फिलिअल्) = पुत्रोचित । conjugal (कॉन्जग्ल) = दाम्पत्य । compunction (कम्पन्क्श्न् ) = हिचकिचाहट। notions (नोश्न्ज ) = विचार, धारणाएँ। prevailed (प्रिवेल्ड) = प्रचलित थे।.floated about (फ्लोट्ड अबाउट) = मंडराते रहते। vaguely (वेलि ) = अस्पष्ट रूप से । evidence (एविडन्स्) = प्रमाण।

हिन्दी अनुवाद : जेमिनी स्टूडियोज एस.डी.एस. योगिआर’, सांगु सुब्रमन्यम, कृष्णा शास्त्री तथा हरिन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय’ जैसे कवियों का प्रिय बसेरा था। इसमें एक शानदार भोजनालय था जो दिनभर और रात को. बहुत समय तक अच्छी कॉफी उपलब्ध कराता था। उन दिनों कांग्रेस शासन का अर्थ होता था मद्य-निषेध तथा कॉफी के कप पर मिलना संतोषजनक मनोरंजन होता था। दफ्तरियों तथा दो-एक क्लर्कों को छोड़कर हर अन्य व्यक्ति स्टुडियोज में खाली समय का एहसास कराता था, जो काव्य के लिए एक पूर्व शर्त थी। इनमें से अधिकतर लोग खादी पहनते थे तथा गाँधीजी की प्रशंसा करते थे, लेकिन इसके आगे उन्हें किसी भी प्रकार के राजनैतिक विचार की थोड़ी भी समझ न थी। स्वाभाविक था वे सब ‘कम्युनिज्म’ शब्द के प्रतिकूल. (चिढ़े हुए) थे। एक कम्युनिस्ट एक ईश्वरहीन व्यक्ति होता था—उसे न माता-पिता से प्रेम होता था और न ही पति अथवा पत्नी से; उसे अपने माता-पिता अथवा बच्चों को मार देने में कोई हिचकिचाहट नहीं होती, वह हमेशा निर्दोष एवं अज्ञानी लोगों के बीच अशान्ति एवं हिंसा फैलाने को तैयार रहता था। ऐसे विचार जो उस समय दक्षिण भारत में सर्वत्र प्रचलित थे, स्वाभाविक रूप से, जेमिनी स्टुडियोज के खादी पहने हुए कवियों के बीच अस्पष्ट रूप से मंडराते रहते थे। इसका प्रमाण कुछ समय पश्चात् ही मिल गया।

When Frank Buchman’s Moral Re-Armament army, some two hundred strong, visited Madras sometime in 1952, they could not have found a warmer host in India than the Gemini Studios. Someone called the group an international circus. They weren’t very good on the trapeze and their acquaintance with animals was only at the dinner table, but they presented two plays in a most professional manner. Their ‘Jotham Valley’ and ‘The Forgotten Factor’ ran several shows in Madras and along with the other citizens of the city, the Gemini family of six hundred saw the plays over and over again. The message of the plays were usually plain and simple homilies, but the sets and costumes were first-rate. Madras and the Tamil drama community were terribly impressed and for some years almost all Tamil plays had a scene of sunrise and sunset in the manner of ‘Jotham Valley’ with a bare stage, a white background curtain and a tune played on the flute. It was some years later that I learnt that the MRA was a kind of countermovement to international Communism and the big bosses of Madras like Mr. Vasan simply played into their hands. I am not sure however, that this was indeed the case, for the unchangeable aspects of these big bosses and their enterprises remained the same, MRA or no MRA, international Communism or no international Communism. The staff of Gemini Studios had a nice time hosting two hundred people of all hues and sizes of at least twenty nationalities. It was such a change from the usual collection of crowd players waiting to be slapped with thick layers of make-up by the office-boy in the make-up department.

कठिन शब्दार्थ : Trapeze (ट्रॅपीज्) = कलाबाजी का झूला। homilies (हॉमिलिज) = प्रवचन, नैतिकता के भाषण । professional manner (प्रफेशन्ल् मैन(र)) = व्यावसायिक ढंग। costumes (कॉस्ट्यू म्ज) = पोशाक । bare (बेअ(र)) = खाली। counter-movement (काउन्ट(र) मूवमन्ट) = विपरीत आन्दोलन। unchangeable (अन्चेन्जेब्ल्) = अपरिवर्तनीय। aspects (ऐसपेक्ट्स) = रंग-ढंग। enterprises (एन्टॅप्राइजिज) = उद्यम। hues and sizes (यूज एन्ड साइज्ज) = रंग एवं आकार।

हिन्दी अनुवाद : जब फ्रेंक बुचमैन की दो सौ लोगों की मोरल रि-आरमामेंट सेना 1952 में कभी मद्रास आयी थी तो उन्हें भारत में जेमिनी स्टुडियो से अधिक स्नेही मेजबान अन्य नहीं मिला। किसी ने इस समह को अन्तर्राष्ट्रीय सर्कस कह दिया। वे कलाबाजी के झूले पर बहुत अच्छे न थे और जानवरों से उनकी जान-पहचान केवल भोजन की मेज पर ही होती थी, लेकिन उन्होंने सर्वाधिक व्यावसायिक तरीके से दो नाटक पस्तत किए। उनके ‘जोथम वैली’ तथा ‘द फॉरगोटन फैक्टर’ के मद्रास में कई शो हुए तथा शहर के अन्य नागरिकों के साथ-साथ जेमिनी परिवार के छ: सौ सदस्यों ने इन नाटकों को बार-बार देखा। इन नाटकों के सन्देश सामान्यतया सीधे-सादे नैतिक उपदेश थे, परन्तु मंच-सज्जा व पोशाकें अति उत्तम थीं। मद्रास व तमिल नाटक समदाय पर इनका गहरा प्रभाव पड़ा और कुछ वर्षों तक लगभग सभी तमिल नाटक ‘जोथम वैली’ के ‘ के ढंग से सूर्योदय एवं सूर्यास्त के दृश्य प्रस्तुत करते रहे जिनमें खाली मंच होता था और पीछे सफेद पर्दा होता था और बांसुरी की धुन बजती थी। कुछ वर्षों बाद मुझे पता चला कि एम.आर.ए. एक प्रकार का विपरीत आन्दोलन था, अन्तर्राष्ट्रीय साम्यवाद के विरुद्ध तथा मद्रास के बड़े-बड़े लोग, जैसे मि. वासन, केवल उनके हाथों में खेल गये। मैं यद्यपि आश्वस्त नहीं हूँ कि बात वास्तव में यही थी, क्योंकि इन बड़े लोगों के अपरिवर्तनीय रंग-ढंग तथा उनके उद्योग वैसे ही बने रहे, एम.आर.ए. अथवा बिना एम.आर.ए. के, अन्तर्राष्ट्रीय साम्यवाद अथवा बिना अन्तर्राष्ट्रीय साम्यवाद के। जेमिनी स्टुडियोज के स्टाफ ने दो सौ लोगों, जो सभी प्रकार के रंगों एवं आकारों तथा कम-से-कम बीस राष्ट्रीयताओं के थे, का आतिथ्य करते हुए अच्छा समय गुजारा । यह एक अच्छा परिवर्तन था, भीड़ की भूमिका खेलने वाले लोगों के समूह की अपेक्षा जो अपने चेहरों पर ऑफिस-बॉइ द्वारा श्रृंगार के पेन्ट की मोटी परत चुपड़वाने के लिए शृंगार विभाग में प्रतीक्षा करते रहते थे।

A few months later, the telephone lines of the big bosses of Madras buzzed and once again we at Gemini Studios cleared a whole shooting stage to welcome another visitor. All they said was that he was a poet from England. The only poets from England the simple Gemini staff knew or heard of were Wordsworth and Tennyson; the more literate ones knew of Keats, Shelley and Byron; and one or two might have faintly come to know of someone by the name Eliot. Who was the poet visiting the Gemini Studios now?

“He is not a poet. He is an editor. That’s why The Boss is giving him a big reception.” Vasan was also the editor of the popular Tamil weekly Ananda Vikatan.

He wasn’t the editor of any of the known names of British publications in Madras, that is, those known at the Gemini Studios. Since the top men of The Hindu were taking the initiative, the surmise was that the poet was the editor of a daily — but not from The Manchester Guardian or the London Times. That was all that even the most wellinformed among us knew.

At last, around four in the afternoon, the poet (or the editor) arrived. He was a tall man, very English, very serious and of course very unknown to all of us. Battling with half a dozen pedestal fans on the shooting stage, The Boss read out a long speech. It was obvious that he too knew precious little about the poet (or the editor). The speech was all in the most general terms but here and there it was peppered with words like ‘freedom’ and ‘democracy’. Then the poet spoke. He couldn’t have addressed a more dazed and silent audience — no one knew what he was talking about and his accent defeated any attempt to understand what he was saying. The whole thing lasted about an hour; then the poet left and we all dispersed in utter bafflement — what are we doing? What is an English poet doing in a film studio which makes Tamil films for the simplest sort of people? People whose lives least afforded them the possibility of cultivating a taste for English poetry? The poet looked pretty baffled too, for he too must have felt the sheer incongruity of his talk about the thrills and travails of an English poet. His visit remained an unexplained mystery.

कठिन शब्दार्थ : Buzzed (बज्ड) = घनघनाए। literate (लिटरट्) = पढ़े-लिखे। surmise (समाइज्) = अनुमान। battling (बैल्लिङ्) = सामना करते हुए। pedestal (पेडिस्ट्ल ) = खड़ा हुआ। peppered (पेप(र)ड) = छिड़काव किया हुआ। democracy (डिमॉक्रसि) = प्रजातन्त्र । daved (डेज्ड्) = हैरान। accent (ऐक्सन्ट्) = उच्चारण का ढंग। dispersed (डिस्पस्ट) = बिखर गये। bafflement (बैफल्मॅन्ट) = किंकर्तव्यविमूढ़ता, असमंजस । cultivating (कल्टिवेटिङ्) = पोषित करना । sheer (शीअ(र)) = विशुद्ध । incongruity (इन्कॉग्रुअटि) = असंगति । thrills (थ्रिल्ज्) = रोमांच। travails (ट्रैवेल्ज) = पीड़ा। mystery (मिस्टरि) = रहस्य।

हिन्दी अनुवाद : कुछ महीनों बाद, मद्रास के बड़े लोगों की टेलिफोन लाइनें घनघनाने लगीं और एक बार फिर जेमिनी स्टुडियोज में हम लोगों ने एक पूरे शूटिंग मंच को खाली कर दिया ताकि हम एक और

आगन्तुक का स्वागत कर सकते। उन्होंने केवल इतना बताया कि वह इंग्लैण्ड से आये एक कवि थे। इंग्लैण्ड के जिन कवियों को जेमिनी का स्टाफ जानता था अथवा जिनके बारे में सुन रखा था, वे थे वर्ड्सवर्थ एवं टेनिसन; अधिक पढ़े-लिखे लोग कीट्स शैली तथा बायरन के बारे में जानते थे; तथा एक या दो लोगों ने हल्के से इलियट के बारे में जान लिया होगा। अब जेमिनी स्टुडियोज. में कौनसा कवि आ रहा था?

. “वह कवि नहीं है। वह एक सम्पादक है। इसलिए बॉस उसका बड़ा स्वागत करने जा रहा है।” वासन लोकप्रिय तमिल साप्ताहिक ‘आनन्द विकतन’ का सम्पादक भी था।

मद्रास में जिन ब्रिटिश प्रकाशनों के नाम पता थे, अर्थात् जिनका जेमिनी स्टूडियोज में पता था, उनमें से वह किसी का भी सम्पादक नहीं था। क्योंकि ‘द हिन्दू’ के उच्चतम लोग अगवाई कर रहे थे, अतः अनुमान यही था कि वह कवि किसी दैनिक समाचार पत्र का सम्पादक था—परन्तु ‘मैनचेस्टर गार्डियन’ या ‘लन्दन टाइम्स’ का नहीं था। हममें से सर्वाधिक जानकारी रखने वालों को भी बस इतना ही पता था।

अन्त में, अपराह्न के लगभग चार बजे कवि आ गया। वह लम्बा आदमी था, बिल्कुल अंग्रेज, बहुत गम्भीर और निःसन्देह हम सबसे पूर्णतः अपरिचित। शूटिंग मंच पर आधा दर्जन खड़े पंखों का सामना करते हुए, बॉस ने एक लम्बा भाषण पढ़ा। यह स्पष्ट था कि उसे भी कवि के बारे में बहुत कम जानकारी थी। भाषण सामान्य शब्दों से भरा था, परन्तु कहीं-कहीं पर ‘स्वतन्त्रता’ और ‘प्रजातन्त्र’ जैसे शब्द छिड़के हुए थे। फिर कवि बोला। उसे इससे अधिक असमंजस में पड़े तथा शान्त श्रोतागण नहीं मिल सकते थे—किसी को पता नहीं चला कि वह किस बारे में बोल रहा था और उसके उच्चारण के ढंग ने उसके कथन को समझने के किसी भी प्रयास को पराजित कर दिया। यह सब एक घण्टा चला, फिर कवि चला गया और हम सब पूर्ण किंकर्तव्यविमूढ़ता की स्थिति में बिखर गये—हम क्या कर रहे हैं? उस फिल्म स्टूडियो में जो साधारण लोगों के लिए तमिल फिल्में बनाता है, उसमें अंग्रेज कवि का क्या काम? लोग जिनका जीवन उन्हें अंग्रेजी काव्य में रुचि बनाने की कोई सम्भावना नहीं दे सकता था? कवि भी काफी असमंजस में दिखाई दिया क्योंकि उसने भी एक अंग्रेज कवि के रोमांच तथा कष्टों की बात की विशुद्ध असंगतता को अवश्य महसूस कर लिया होगा। उसका आगमन एक अबूझ पहेली बना रहा।

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The great prose-writers of the world may not admit it, but my conviction grows stronger day after day that prosewriting is not and cannot be the true pursuit of a genius. It is for the patient, persistent, persevering drudge with a heart so shrunken that nothing can break it; rejection slips don’t mean a thing to him; he at once sets about making a fresh copy of the long prose piece and sends it on to another editor enclosing postage for the return of the manuscript. It was for such people that The Hindu had published a tiny announcement in an insignificant corner of an unimportant page — a short story contest organised by a British periodical by the name The Encounter. Of course, The Encounter wasn’t a known commodity among the Gemini literati. I wanted to get an idea of the periodical before I spent a considerable sum in postage sending a manuscript to England. In those days, the British Council Library had an entrance with no long winded signboards and notices to make you feel you were sneaking into a forbidden area. And there were copies of The Encounter lying about in various degrees of freshness, almost untouched by readers. When I read the editor’s name, I heard a bell ringing in my shrunken heart. It was the poet who had visited the Gemini Studios — I felt like I had found a long lost brother and I sang as I sealed the envelope and wrote out his address. I felt that he too would be singing the same song at the same time — long lost brothers of Indian films discover each other by singing the same song in the first reel and in the final reel of the film. Stephen Spender Stephen — that was his name.

 

कठिन शब्दार्थ : Admit (अड्मिट्) = स्वीकार करना। conviction (कन्विक्श्न्) = दृढ़ विश्वास। pursuit (पस्यूट्) = व्यवसाय । genius (जीनिअस्) = प्रतिभाशाली व्यक्ति। persistent (पसिस्टन्ट्)

The great prose-writers………………….that was his name. (Pages 64-65)

कठिन शब्दार्थ : Admit (अमिट्) = स्वीकार करना। conviction (कन्विक्शन्) = दृढ़ विश्वास। pursuit (पस्यूट्) = व्यवसाय। genius (जीनिअस्) = प्रतिभाशाली व्यक्ति । persistent (पसिस्टन्ट) = लगनशील। persevering (पसिविअरिङ्) = दृढ़ प्रतिज्ञ.। drudge (ड्रज) = कोल्हू का बैल। manuscript (मैन्युस्क्रिप्ट) = हस्तलेख। commodity (कमॉडटि) = उपयोगी वस्तु। literati (लिटॅराटि) = विद्वान् मंडली। long-winded (लॉङ् वाइन्ड्ड) = लम्बे घुमावदार । sneaking (स्नीकिङ्) = चुपके से घुसना । forbidden. (फबिड्न) = निषिद्ध। degrees (डिग्रीज) = अवस्थाएँ।

हिन्दी अनुवाद : दुनिया के महान् गद्य-लेखक शायद इस बात को स्वीकार न करें, लेकिन दिनों-दिन । मेरा विश्वास अधिक मजबूत होता चला जाता है कि गद्य-लेखन किसी प्रतिभाशाली व्यक्ति का सच्चा व्यवसाय नहीं है तथा नहीं हो सकता है। यह एक लगनशील, दृढ़ प्रतिज्ञ, धैर्यवान कोल्हू के बैल के लिए है जिसका हृदय इतना सिकुड़ चुका है कि उसे कुछ भी नहीं तोड़ सकता है; अस्वीकृति की पर्चियों का उसके लिए कोई महत्त्व नहीं; वह तुरन्त लम्बी गद्य-रचना की ताजी प्रतिलिपि बनाना शुरू कर देता है और इसे दूसरे सम्पादक को भेज देता है और साथ में हस्तलिखित रचना की वापसी के लिए डाक के टिकट भी रख देता है। ऐसे ही लोगों के लिए ‘द हिन्दू’ ने एक छोटी-सी घोषणा एक महत्त्वहीन पन्ने पर मामूली कोने में प्रकाशित कर दी थी—एक लघु-कथा प्रतियोगिता जिसे एक ब्रिटिश पत्रिका ‘एनकाउन्टर’ ने आयोजित किया था। बिल्कुल, ‘एनकाउन्टर’ जेमिनी की विद्वान्-मण्डली के लिए कोई जानी-पहचानी वस्तु न थी। मैंने चाहा कि मैं इस पत्रिका के बारे में जानकारी जुटाऊँ इससे पहले कि मैं अपनी हस्तलिखित रचना को इंग्लैण्ड भेजने हेतु इतना पैसा डाक में खर्च करूँ। उन दिनों ब्रिटिश कौंसिल लाइब्रेरी के प्रवेश-द्वार पर कोई लम्बे-चौड़े सूचना-पट्ट नहीं होते थे जिससे आपको लगे कि आप किसी निषिद्ध क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं। और वहाँ ‘द एनकाउन्टर’ नामक पत्रिका की प्रतियाँ इधर-उधर पड़ी थीं जो नई-पुरानी सभी अवस्थाओं में थीं, जिन्हें पाठकों ने छुआ भी न था। जब मैंने सम्पादक का नाम पढ़ा तो मेरे सिकुड़े हुए दिल में एक घण्टी बजने लगी। यह वही कवि था जो जेमिनी स्टूडियोज में आया था—मुझे लगा जैसे मुझे काफी समय पूर्व खोया हुआ एक भाई मिल गया, और लिफाफा बन्द करते समय और उसका पता लिखते हुए, मैंने गाया। मुझे लगा कि वह भी वही गीत उसी समय गा रहा होगा—भारतीय फिल्मों के काफी पुराने बिछुड़े हुए भाई एक-दूसरे को फिल्म की प्रारम्भिक एवं अन्तिम रील में वही गीत गाकर खोज लेते हैं। स्टीफन स्पेन्डर। स्टीफन—यह उसका नाम था।

And years later, when I was out of Gemini Studios and I had much time but not much money, anything at a reduced price attracted my attention. On the footpath in front of the Madras Mount Road Post Office, there was a pile of brand new books for fifty paise each. Actually they were copies of the same book, an elegant paperback of American origin. ‘Special low-priced student edition, in connection with the 50th Anniversary of the Russian Revolution’, I paid fifty paise and picked up a copy of the book, The God That Failed. Six eminent men of letters in six separate essays described ‘their journeys into Communism and their disillusioned return’; Andre Gide6 , Richard Wright7 , Ignazio Silone8 , Arthur Koestler9 , Louis Fischer10 and Stephen Spender. Stephen Spender! Suddenly the book assumed tremendous significance. Stephen Spender, the poet who had visited Gemini Studios! In a moment I felt a dark chamber of my mind lit up by a hazy illumination. The reaction to Stephen Spender at Gemini Studios was no longer a mystery. The Boss of the Gemini Studios may not have much to do with Spender’s poetry. But not with his god that failed.

कठिन शब्दार्थ: Reduced (रिड्यूस्ट) = घटी हुई। pile (पाइल) = ढेर । elegant (एलिगन्ट्) = सुन्दर। men of letters (मेन ऑव लेट()ज) = लेखक, विद्वान् । disillusioned (डिसिलूश्न्ड् ) = निराशापूर्ण। tremendous (ट्रमेन्डस्) = भारी। hazy illumination (हेजि इलूमिनेश्न्) = अस्पष्ट

यादें।

 

हिन्दी अनुवाद : और वर्षों बाद, जब मैं जेमिनी स्टूडियोज को छोड़ चुका था और मेरे पास समय ज्यादा और पैसा थोड़ा था, तो कोई भी घटी हुई कीमत की चीज मेरा ध्यान खींच लेती थी। मद्रास माउन्ट रोड पोस्ट ऑफिस के सामने फुटपाथ पर, बिल्कुल नई पुस्तकों का ढेर लगा था जिनकी कीमत प्रति पुस्तक 50 पैसे थी। वस्तुतः वे एक ही किताब की प्रतियाँ थीं, सुन्दर अमेरीकी पेपरबैक संस्करण में। विशेष घटी कीमत वाला छात्र संस्करण, रूसी क्रान्ति की 50वीं वर्ष-गांठ के सम्बन्ध में।’ मैंने 50 पैसे दिए और इस पुस्तक की एक प्रति ले ली. ‘द गॉड दैट फेल्ड’। छ: जाने-माने विद्वानों ने, छः भिन्न-भिन्न निबन्धों में, साम्यवाद में अपनी यात्रा तथा निराशपूर्ण वापसी का वर्णन इस पुस्तक में किया था। ये विद्वान थे, एन्ड़े गाइड रिचर्ड राइट। इग्नेजिओ सिलोन, आर्थर कोसलर’, लुई फिशर और स्टीफन स्पेंडर। स्टीफन स्पेंडर यकायक पुस्तक का महत्त्व अत्यधिक हो गया। स्टीफन स्पेंडर वह कवि था जो जेमिनी स्टूडियोज में आया था। एक क्षण में मेरे मन का अँधेरा कमरा धुंधले प्रकाश से चमक उठा। स्टीफन स्पेंडर के जेमिनी स्टूडियोज में आने पर जो प्रतिक्रिया हुई थी. वह अब कोई रहस्य न रह गया था। जेमिनी स्टूडियोज के बॉस को स्पेंडर के काव्य से बहुत सरोकार न रहा हो। किन्तु उसके ‘गॉड दैट फेल्ड’ के साथ यह बात नहीं थी।