Purity is Power [पवित्रता ही ताकत है]

Prof. Dr. K. Subrahmanyam

About the Lesson (पाठ के बारे में)

प्रो. डॉ. के. सुब्रह्मण्यम जो भारत के सर्वाधिक जाने-पहचाने तथा प्रभावशाली लेखकों में से एक हैं व आपने विवेकानन्द कॉलेज, तिरुवेदागम (पश्चिम), मदुरई तथा राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, पुणे में प्रधानाचार्य के रूप में सेवा की है। आपकी अधिकतर रचनाओं में हमारे महाकाव्यों तथा पुराणों की नैतिक शिक्षा का वैशिष्ट्य है। आपकी ‘महावीर श्री हनुमान’ तथा ‘विभूति विवेकानंद’ दो प्रसिद्ध पुस्तकें हैं।

Purity is Power में प्रो. डॉ. के. सुब्रह्मण्यम पवित्रता के विभिन्न पहलुओं का कुछ प्राचीन भारतीय महाकाव्यों तथा कहानियों से सम्बन्धित नैतिक मूल्यों तथा सांस्कृतिक विरासत के उदाहरण लेकर विस्तार से वर्णन करते हैं। लेखक क्षमाशीलता, शिष्टाचार, विनम्रता, करुणा/दया, परोपकार, प्रीतिकर संगति और हृदय की पवित्रता की सर्वोच्चता की चर्चा करते हैं जो हमें हमारी आत्मा को शुद्ध कर देने में तथा यहाँ तक कि सर्वाधिक उग्र प्रकृतियों को भी परिवर्तित कर देने में सक्षम बनाती हैं। आप इस तथ्य पर भी ध्यान केन्द्रित करते हैं कि कर्त्तव्य का निष्ठावान निष्पादन तथा भले कार्यों का शीघ्र क्रियान्वयन, श्रेष्ठतम गुणों तथा पवित्रता के स्रोत हैं।

कठिन शब्दार्थ एवं हिन्दी अनुवाद

Purity is strength……… ………serenity. (Page 34)

कठिन शब्दार्थ : purity (प्युअरटि) = पवित्रता, शुद्धि। long for (लॉङ् फ(र)) = तीव्र इच्छा रखते हैं। surroundings (सराउन्डिंग्ज) = चारों तरफ का वातावरण । yearn (यन्) = अभिलाषा रखते हैं। environment (इन्वाइरन्मन्ट) = पर्यावरण। promotes (प्रमोट्स) = बढ़ाना। injurious (इन्जुअरियस्) = हानिकारक । provides (प्रवाइडिड्) = प्रदान करती है। impair (इम्पेअ(र)) = कमजोर करना। overall (ओवरऑल) = सम्पूर्ण । physical (फिजिक्ल्) = शारीरिक। unsullied (अनसलीड) = विकार रहित, निर्दोष। unselfish (अनसेल्फिश) = निःस्वार्थ। righteous (राइचस) = उपयुक्त, न्यायपूर्ण। wholesome (होल्सम्) = विशुद्ध, पूर्ण। harmonious (हामोनिअस्) = सामंजस्यपूर्ण, सन्तुलित। soul-elevating (सोल् एलिवेटिंग) = आत्मा का उत्थान करने वाली। serenity (सरेनटि) = शांति।

हिन्दी अनुवाद ‘पवित्रता ही शक्ति है -स्वामी विवेकानन्द हम पवित्रता चाहते हैं—पवित्र भोजन, पवित्र पानी, शुद्ध हवा। हम शुद्ध वातावरण चाहते हैं। हम पवित्र हृदय और शुद्ध प्रेम की अभिलाषा करते हैं। हम शुद्ध पर्यावरण और निर्मल समाज चाहते हैं। हम शुद्धि या पवित्रता चाहते हैं क्योंकि शुद्धता से स्वास्थ्य अच्छा रहता है। अपवित्रता स्वास्थ्य को हानि पहुँचाती है। पवित्रता से मानसिक शांति मिलती है। अपवित्रता से मन दूषित होता है। हमें शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के स्वास्थ्य के लिए शुद्धता आवश्यक है। सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए हम पर्यावरणीय पवित्रता (शुद्धता) चाहते हैं।

– शरीर की पवित्रता है—शारीरिक स्वास्थ्य । वाणी की पवित्रता है—दोष रहित सत्य । हृदय की पवित्रता है—नि:स्वार्थ प्रेम। विचारों की पवित्रता है—न्यायपूर्ण विवेक । मन की पवित्रता है—सम्पूर्ण शांति । कार्यों की पवित्रता है—सच्ची एवं निःस्वार्थ सेवा। समाज की पवित्रता है—सामंजस्यपूर्ण एकता । वातावरण की पवित्रता है-आत्मा का उत्थान करने वाली शांति।

In the Mahabharata………………… …………..of purity.

(Page 34) कठिन शब्दार्थ : episode (एपिसोड्) = कहानी, कथा illustrate (इलस्ट्रेट) = उदाहरण द्वारा समझाना। disciples (डिसाइप्ल्ज ) = शिष्य । summoned (समन्ड) = बुलाये गये। preceptor (प्रीसेप्टर) = गुरु । eldest (एल्डिस्ट्) = सबसे बड़े। fetch (फेच्) = लेकर आना | thorough (थरा) = सम्पूर्ण । empty-handed (एम्पटि हैण्ड्डि ) = खाली हाथ । pious (पाइअस्) = पवित्र, गुणवान । evil (ईव्ल) = बुरा । vision (विश्न्) = दृष्टि, विचार । deeds (डीड्ज) = कर्म, कार्य । purify (प्युअरिफाइ) = पवित्र कर देना। face (फेस्) = मुकाबला करना, सामने आना । scoff (स्कॉफ्) = हँसी उड़ाना। Villains (विलन्ज) = दुष्ट लोग। harm (हाम्) = नुकसान पहुँचाना। adoration (ऐडरेश्न्) = पूज्यभाव, सम्मान भाव। murderers (मर्डरर्ज) = हत्या करने वाले। votaries (वॉटरीज) = भक्त, अनुयायी।

हिन्दी अनुवाद-महाभारत में पवित्रता का तात्पर्य समझाने के लिए एक रोचक उदाहरण दिया गया है। पाण्डव और कौरव दोनों द्रोण के शिष्य थे। एक बार द्रोण ने उन दोनों को एक परीक्षा के लिए बुलाया। पाण्डवों में सबसे बड़े युधिष्ठिर को हस्तिनापुर के समाज में से कोई एक बुरा आदमी ढूँढ़ कर लाने के लिए कहा गया। कौरवों में सबसे बड़े दुर्योधन को भी उसी हस्तिनापुर के समाज में से कोई एक अच्छा आदमी ढूँढ़कर लाने के लिए कहा गया। पूरी तरह खोज कर लेने के बाद दोनों चचेरे भाई खाली हाथ ही वापस लौट आये। युधिष्ठिर जैसे शुद्ध हृदय के आदमी को समाज में सभी लोग गुणवान और सच्चे दिखाई पड़े। उधर अपवित्र हृदय के दुर्योधन को सभी लोग दुष्ट और बुरे दिखाई पड़े। जैसा मन वैसा दर्शन।

मन की शुद्धि हमारे मन, वचन एवं कर्म को भी शुद्ध बना देती है। यह शुद्धि अन्य लोगों को भी पवित्र बनाने की शक्ति रखती है। पवित्रता की मौजूदगी में दुष्टता को कोई स्थान नहीं है। बुराई उसी तरह पवित्रता के सामने नहीं आ सकती जिस प्रकार अन्धकार सूर्य के सामने नहीं ठहर सकता। यह स्वयं पवित्रता के रूप में बदल जाती है। जो मूर्ख लोग (किसी सज्जन की) खिल्ली उड़ाने के लिए आते हैं वे भी पवित्रता की उपस्थिति में उसकी प्रार्थना करने लगते हैं। दुष्ट लोग जो (सज्जन को) हानि पहुँचाने के इरादे से आते हैं पवित्रता की उपस्थिति में वहाँ आकर उसकी पूजा करने लगते हैं। पवित्र व्यक्ति के सामने आकर हत्यारे भी शांति के भक्त बन जाते हैं।

Pavaharibaba…………….. …………metamorphosing ability. (Pages 34-35)

कठिन शब्दार्थ : saint (सेंट्) = संत। dwelling place (ड्वेलिंग प्लेस) = निवास स्थान । vessel (वेस्ल) = बरतन। containing (कन्टेनिंग) = रखे हुए था। immediately (इमीडियटली) = तुरंत । remaining (रिमेनिंग) = शेष। boiled (बॉइल्ड) = उबली हुई। curd (कड्) = दही। approached (एप्रोच्ट) = पास में पहुँचा। insufficient (इनसफिश्न्ट्) = अपर्याप्त, कम। hurry (हरि) = जल्दबाजी। wonder struck (वन्ड(र) स्ट्रक) = आश्चर्यचकित । affectionate (अफेक्श्न ट्) = प्रेमपूर्ण । prostrated (प्रॉस्ट्रेट्ड) = पैरों में पड़ गया। imitates (इमिटेट्स) = नकल करता है। blow (ब्लो) = चोट मारना। genuine (जेन्युइन्) = असली, सच्ची। metamorphosing (मेटमॉफसिंग) = हृदय परिवर्तन कर देने वाली।

नवाद-पवहरि बाबा एक संत थे। वह पवित्र और शद्ध आत्मा के थे। वह बडा ही सादा जीवन बिताया करते थे। एक दिन जब वे सोये हुए थे तब एक चोर उनके निवास में घुस गया और भोजन रखे हुए एक बरतन को उठाकर ले गया। संत की नींद खुल गई और उन्होंने भागते हुए चोर को देखा। उन्होंने तुरन्त ही बचे हुए दो बरतनों को जिनमें उबली हुई सब्जी और दही थे, उठा लिया और उस चोर के पीछे भागे। चोर ठहर गया और संत बड़े स्नेहपूर्वक उसके पास पहुँच कर बोले-“बालक, वह भोजन तुम्हारे लिए कम रहता। तुम इसको भी ले लो। यहाँ बैठकर खाओ, जल्दबाजी मत करो।” उस शुद्धात्मा संत के स्नेहपूर्ण शब्द सुनकर चोर आश्चर्यचकित हो गया। उसमें एक परिवर्तन आ गया। वह संत के सामने साष्टांग दण्डवत् हो गया (पैरों में पड़ गया) । हृदय की पवित्रता के बिना अगर कोई संत की नकल करे तो परिणाम अलग ही होंगे। तब हो सकता है चोर आप पर चोट करके बरतन छीन ले जाए। असली पवित्रता की परीक्षा यही है कि यह दूसरे का हृदय परिवर्तन कर देती है।

Once upon a time…………transformed. (Page 35)

कठिन शब्दार्थ : particular (पटिक्यल(र)) = विशेष । obtain (अब्टेन) = प्राप्त करना। observed (अबजर्ल्ड) = पालन किया। rigorous (रिगरस्) = कठोर। austerities (ऑस्टेरिटीज) = तपस्या। controlled (कंट्रोल्ड) = नियन्त्रित। meditated (मेडिटेटिड) = ध्यान लगाया। chosen deity (चोजन डेइटी) = इष्टदेव। holy dip (होलिडिप्) = पवित्र स्थान। outstretching (आउट स्ट्रेचिंग) = फैली हुई थी। crane (क्रेन्) = सारस पक्षी। neck-deep (नेक् -डीप) = गर्दन तक गहरे। austere (ऑस्टिअ(र)) = तपस्या में लीन। droppings (ड्रॉपिज्) = मल पदार्थ, बीटें। annoyed (अनॉइड) = क्रुद्ध, गुस्से में। gaze (गेज)= तीखी निगाह । sought (सोट) = माँगा। alms (आम्ज) = भिक्षा । domestic (डमेस्टिक्) = पारिवारिक। chores (चॉ(२)ज) = घर के कामकाज । delay (डिले) = देरी। responding (रेस्पोंडिंग) = उत्तर मिलना । gently (जेट्ल) = विनम्रतापूर्वक । stare (स्टेअ(र)) = दृष्टि। feeding(फीडिंग) = खिला रही थी। shocked (शोक्ट) = चकित रह गया। short while ago (शॉट् वाइल अगो) = थोड़ी-सी देर पहले। further (फद(र)) = उसके बाद, आगे। attainment (अटेन्मेंट) = उपलब्धि, प्राप्ति। humbled (हम्बल्ड) = अपमानित होकर नम्र बन गया। crestfallen (क्रेस्ट्फॉलन्) = गर्व से रहित। ordinary (ऑर्डिनरि) = साधारण। delaying (डिलेइंग) = देरी करते हुए। engaged (इंगेज्ड) = व्यस्त हो गया। scriptures (स्क्रिप्च(र)स) = धर्म-ग्रन्थ । observe (अब्ज) = पालन करता था। transformed (ट्रैन्स्फॉम्ड) = बदल गया।

हिन्दी अनुवाद-एक बार की बात है एक गौतम नाम के ऋषि दिव्य शक्तियाँ प्राप्त करने के लिए तपस्या कर रहे थे। कई दिनों, महीनों और वर्षों तक वे कठोर तपस्या करते रहे। उन्होंने भोजन करना और पानी पीना भी छोड़ दिया, एक पैर पर खड़े रहे ; उन्होंने इन्द्रियों को नियन्त्रित कर लिया। वे अपने इष्टदेव के ध्यान में डूब गए। एक दिन सुबह वे नदी में स्नान करने के लिए उतरे। उस नदी के किनारे पर एक वृक्ष था। वृक्ष की शाखाएँ फैल कर नदी के ऊपर आ रही थीं। उन शाखाओं के बीच एक सारस पक्षी बैठा था। जब गौतम ऋषि गर्दन तक गहरे पानी में खड़े सूर्य की तरफ मुँह किये हुए तपस्या में लीन थे उसी समय उस पक्षी की बीट उनके सिर पर आकर गिरी। उन्हें बुरा लगा और क्रोध आ गया। उन्होंने क्रुद्ध होकर पक्षी की तरफ देखा। अगले ही क्षण वह पक्षी निष्प्राण होकर नीचे गिर गया। ऋषि को इस बात से प्रसन्नता हुई क्योंकि उन्होंने अपनी तीखी निगाह से पक्षी के मारने की शक्ति प्राप्त कर ली थी। थोड़ी देर बाद वे पास के गाँव में भिक्षा माँगने गये। वे एक घर के सामने खड़े हो गये और एक गृहिणी से भिक्षा माँगी। वह महिला अपने घर के कामों को निपटाने में व्यस्त थी। गौतम ने कुछ देर तक इन्तजार किया। महिला के ज्यादा देर लगाने पर ऋषि उससे नाराज हो गये। वह महिला आई, उसने नम्रतापूर्वक ऋषि को देखा और कहा, ” श्रीमान्, मैं सारस नहीं हूँ जो आपकी दृष्टि मात्र से मारी जाऊँ । देरी के लिए क्षमा करें। मैं अपने पति की सेवा कर रही थी और बच्चों को खाना खिला रही थी। कृपया भोजन स्वीकार करें।” ऋषि आश्चर्यचकित रह गये। उन्हें मालूम नहीं था कि थोडी देर पहले मरे हए सारस के बारे में इस स्त्री को कैसे पता चल गया। उस महिला ने आगे कहा श्रीमान आश्चर्य मत कीजिए। मैं एक मामूली गृहिणी हूँ। अगर आप तपस्या और रिद्धि-सिद्धि की प्राप्ति के बारे में और ज्यादा जानना चाहते हो तो मैं आपको एक सज्जन के पास जाने को कहूँगी और उनका पता-ठिकाना आपको बता दूंगी।” ऐसा कहकर महिला ने ऋषि को उस व्यक्ति का पता बता दिया । अपमानित और तिरस्कृत महसूस करता हुआ वह ऋषि बताये अनुसार पहुँचा। उसे यह देखकर और भी ज्यादा अचंभा हुआ कि वह व्यक्ति तो बहुत साधारण और सामान्य आदमी था। उस आदमी ने ज्यों ही ऋषि को देखा तो वह बोला “महात्मा जी, स्वागत है। मुझे सारस की मृत्यु और उस गृहिणी की आपको दी गई सलाह का पता है । कृपया थोड़ी देर इंतजार करें, मैं जल्दी ही आपको अपने घर ले चलता हूँ।’ घर जाने के बाद ऋषि को यह जानकर आश्चर्य हुआ कि वह आदमी और ज्यादा देरी लगा रहा है। वह अपने माता-पिता की सेवा में व्यस्त हो गया। ऋषि को लगा कि इस आदमी ने न तो कोई शास्त्र पढ़े हैं और न ही कभी कोई तपस्या की है। लेकिन पवित्रता से और मन की शुद्धि से वह प्रकाशमान था। उसकी मौजूदगी से उस ऋषि में सम्पूर्ण परिवर्तन हो गया।

His pride of Tapasya………………………………….made to shine. (Pages 35-36)

कठिन शब्दार्थ : disappeared (डिसपिअर्ड) = गायब हो गया। modest (मॉडिस्ट्) = विनम्र। ill-will (इल-विल) = दुर्भावना। haughtiness (हॉटिनिस) = घमण्ड, अविनम्रता । sincere (सिनसिअ) = ईमानदार, सच्चा । selfishness (सेल्फिश्नस) = स्वार्थ । priceless (प्राइस्लस्) = अमूल्य | elements (एलीमन्ट्स) = तत्त्व। purify (प्युअरिफाइ) = शुद्ध करना। beings (बीइंग्ज) = प्राणी। gem (जेम) = हीरे-मोती। sands (सेण्ड्ज ) = रेत। withers (विदर्ज) = मुरझा जाना। thorns (थॉन्ज) = कांटे। improper (इम्प्रॉप(र)) = अनुचित। spoils (स्पॉइल्ज) = बिगाड़ देना। inborn traits (इनबोर्न ट्रेट्स) = जन्मजात प्रवृत्तियाँ। nurture (नच(र)) = पालन-पोषण। brought up (ब्रॉट अप) = पाला हुआ। methodically (मथॉडिक्लि ) = अच्छे प्रकार से, सभ्यतापूर्वक। decently (डीस्न्टलि) = श्रेष्ठतापूर्वक। inherit (इनहेरिट) = विरासत में प्राप्त करना। samskars (संस्कार) = अच्छी शिक्षा-दीक्षा । legacy (लेगसि) = विरासत। latent (लेट्न्ट्) = अन्दर छिपी हुई।

हिन्दी अनुवाद-उसका (ऋषि का) तपस्या का अभिमान गायब हो गया। वह विनम्र हो गया। वह क्रोध, दुर्भावना और घमण्ड से मुक्त होकर शुद्ध हो गया। वही व्यक्ति पवित्र है, जो सेवा-कार्य में सच्चा है, कर्त्तव्य पूरा करने में विश्वसनीय है और प्रेम में नि:स्वार्थ है। इस पवित्रता की शक्ति बहुत ऊँची और अनमोल है।

प्रकृति के तत्त्वों में सिर्फ चीजों को ही नहीं, प्राणियों को भी पवित्र करने की क्षमता है। मनुष्य इन तत्त्वों से अपने शरीर को शुद्ध करता है। अक्सर उचित और शुद्ध वातावरण न मिलने के कारण बहुत से हीरे-मोती रेत में ही पड़े रह जाते हैं और बहुत से फूल काँटों पर लगे हुए ही मुरझा जाते हैं। कई बार अपर्याप्त और

• अनुचित प्रशिक्षण भी जन्मजात सद्गुणों को बिगाड़ देते हैं। अगर जन्मजात स्वभाव थोड़ा बहुत अपवित्र भी हो तो पालन-पोषण के द्वारा हम इसे शुद्ध करके अच्छा बना सकते हैं। गली के कुत्तों की आदतें गंदी होती हैं लेकिन एक अच्छी तरह प्रशिक्षित कुत्ता न सिर्फ साफ-सुथरा होता है बल्कि उसका व्यवहार भी सभ्यतापूर्ण होता है। मनुष्य में पशुओं की बहुत-सी बातें विरासत से आ गई हैं। लेकिन अच्छी शिक्षा से वह आदमी बन जाता है। अच्छे संस्कारों एवं प्रशिक्षण से पशुओं के अशुद्ध गुणों की विरासत धुल कर साफ हो जाती है और आदमी की छिपी हुई पवित्रता चमक उठती है।

Parrots speak,…. ……impure environment. (Page 36)

कठिन शब्दार्थ : Parrots (पैरट्स) = तोते। imitate (इमिटेट) = नकल करना। hunter (हन्ट(र)) = शिकारी। scholar (स्कॉल(र) = विद्वान्। pets (पेट्स) = पालतू जानवर। harshness (हाश्नेस) = कर्कशता। crude (क्रूड) = गंवार | rude (रूड्) = असभ्य| uncivilized (अनसिवलाइज्ड्) = जंगली। acquired (अक्वाइअ(र)ड) = विकसित कर ली। softness (सोफ्टनेस) = नम्रता, कोमलता। refinement (रिफाइन्मंट) = श्रेष्ठ तरीका। culture (कल्च(र)) = सुसंस्कृत । vulgar (वल्ग(र)) = अभद्र। slang (स्लैङ्) = बोलचाल । customers (कस्टमर्स) = ग्राहक। affectionate (अफेक्श्न ट्) = स्नेहपूर्ण । farewell (फेअवेल्) = विदाई। on account of (ओन अकाउण्ट ऑव) = के कारण। bringing up (ब्रिगिंग अप) = पालन-पोषण । available (अवेलबल) = प्राप्त है, उपलब्ध है। expressions (इक्स्प्रे शन्ज) = भाषा । wither away (विदरअवे) = मुरझा जाना, खत्म हो जाना । eclipsed (इक्लिप्स्ड) = ग्रहण लग जाना, छिप जाना । contaminating (कन्टैमिनेटिंग) = अशुद्ध बनाने वाला।

हिन्दी अनुवाद-तोते भी प्रशिक्षण देने पर बोलने लगते हैं। वे मनुष्य की भाषा की नकल कर लेते हैं। दो आदमियों ने दो तोते पाले : एक आदमी शिकारी था दूसरा एक विद्वान् । दोनों ने अपने पालतू तोतों को बोलना सिखाया। पहला तोता जो शिकारी ने पाला था कर्कशतापूर्ण भाषा बोलने लगा। उसके शब्द अभद्र, असभ्य और जंगली थे। दूसरे तोते की भाषा में कोमलता थी। यह मधुरता और सभ्यतापूर्वक बोलता था। पहले तोते ने शिकारी और उसके ग्राहकों की अभद्र बोलचाल की भाषा को सीख लिया। दूसरे तोते ने विद्वान् आदमी के घर रहते हुए स्नेहपूर्ण स्वागत और विदाई के मधुर शब्द सीख लिए। दोनों तोते एक ही माँ पक्षी की संतानें थे। लेकिन पालन-पोषण और चारों तरफ मौजूद वातावरण की विभिन्नता के कारण उनकी भाषा और व्यवहार में भारी परिवर्तन आ गया था। इतना ही काफी नहीं होता कि हम जन्म से ही पवित्र हों। हमारा पालन-पोषण भी पवित्र तरीके से शुद्ध सुसंस्कृत लोगों के बीच में होना चाहिए। ऐसा न होने पर जन्म-जात पवित्रता भी गंदे वातावरण के अशुद्धिकारक समय और स्थान के नीचे दबकर धुंधली पड़ जाएगी और मुरझा जाएगी।