Rajasthan Board RBSE Class 12 Political Science Chapter 20 संसद, लोकसभा एवं राज्यसभा

RBSE Class 12 Political Science Chapter 20 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

RBSE Class 12 Political Science Chapter 20 बहुंचयनात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
हमारी संसद मुख्य रूप से कौन – सा कार्य करती है?
(अ) कानून लागू करना
(स) कानून तोड़ने वालों को दंडित करना
(ब) कानून बनाना
(द) पंचायतों के चुनाव कराना

प्रश्न 2.
संसद के दो सदन हैं
(अ) राज्यसभा व लोकसभा
(स) राष्ट्रपति व विधानसभा
(ब) लोकसभा व विधानसभा
(द) महाधिवक्ता व राष्ट्रपति

प्रश्न 3.
धन विधेयक सर्वप्रथम किस सदन में प्रस्तुत किया जाता है?
(अ) राज्यसभा
(ब) विधानसभा
(स) लोकसभा
(द) ग्राम पंचायत

प्रश्न 4.
राजस्थान से राज्यसभा के लिए अधिकतम कितने सदस्य निर्वाचित हो सकते हैं?
(अ) 25
(ब) 15
(स) 250
(द) 10

उत्तर:
1. (ब), 2. (अ), 3. (स), 4. (द)

RBSE Class 12 Political Science Chapter 20 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय संसद के कितने सदन हैं?
उत्तर:
भारतीय संसद के दो सदन हैं – राज्यसभा व लोकसभा।

प्रश्न 2.
लोकसभा सदस्य की न्यूनतम आयु क्या है?
उत्तर:
लोकसभा सदस्य की न्यूनतम आयु 25 वर्ष है।

प्रश्न 3.
राष्ट्रपति राज्यसभा में कितने सदस्य मनोनीत करता है?
उत्तर:
राष्ट्रपति राज्यसभा में 12 सदस्य मनोनीत करता है।

प्रश्न 4.
लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव कौन करता है?
उत्तर:
लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव लोकसभा के सदस्य अपने में से स्वयं करते हैं।

प्रश्न 5.
उपराष्ट्रपति किस सदन का पदेन सभापति होता है?
उत्तर:
उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 20 लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
संसद सदस्य बनने की योग्यता बताइए।
उत्तर:
संसद सदस्य बनने की योग्यताएँ-संसद का सदस्य बनने के लिए किसी व्यक्ति में निम्नलिखित योग्यताएँ होनी चाहिए-

  1. वह भारत का नागरिक हो।
  2. लोकसभा का सदस्य बनने के लिए उसकी न्यूनतम उम्र 25 वर्ष होनी चाहिए।
  3. वह भारत राज्य में सरकार के अधीन किसी लाभ के पद पर कार्यरत न हो।
  4. वह किसी न्यायालय द्वारा दिवालिया न ठहराया गया हो तथा पागल न हो।
  5. वह संसद द्वारा कानून के अन्तर्गत निर्धारित अन्य योग्यताएँ पूरी करता हो।

प्रश्न 2.
संसद के दो कार्य लिखिए।
उत्तर:
संसद के कार्य – संसद के दो कार्य निम्नलिखित हैं
(1) विधि निर्माण करना – संसद को संघीय सूची तथा समवर्ती सूची के सभी विषयों पर कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है। इसके अतिरिक्त सभी संघीय क्षेत्रों के लिए संसद को सदैव ही सभी विषयों पर कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है।

संकटकाल की उद्घोषणा के काल में राज्य सूची के विषयों पर संसद कानून बना सकती है। जब कभी दो या अधिक राज्यों के विधानमंडल प्रस्ताव पास करके संसद से किसी विषय के बारे में कानून बनाने की प्रार्थना करें तो संसद कानून बना सकती है।

(2) कार्यपालिका पर नियंत्रण सम्बन्धी कार्य-संसद कार्यपालिका पर नियंत्रण संबंधी कार्य करती है। वह विभिन्न तरीकों से कार्यपालिका को नियंत्रित करती है यथा प्रश्नकाल, शून्यकाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, काम रोको प्रस्ताव आदि के द्वारा। लेकिन कार्यपालिका पर नियंत्रण की सबसे बड़ी शक्ति लोकसभा को प्राप्त है। वह विश्वास प्रस्ताव तथा अविश्वास प्रस्ताव पारित करके कार्यपालिका पर नियंत्रण रखती है।

प्रश्न 3.
धन विधेयक पर एक टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
सरकार के आय – व्यय यथा किसी कर को लगाने, घटाने, बढ़ाने एवं सरकारी कोष से किसी राशि को निकालने व जमा करने आदि से सम्बन्धित विधेयक को धन विधेयक कहा जाता है। धन विधेयक से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों को निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर स्पष्ट कर सकते हैं

  1. अनुच्छेद 109 में धन विधेयक की प्रक्रिया का वर्णन है तथा अनुच्छेद 110 में इसे परिभाषित किया गया है।
  2. धन विधेयक राज्यसभा में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। वह राष्ट्रपति की सिफारिश पर केवल लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है।
  3. धन विधेयक लोकसभा द्वारा पारित किए जाने के पश्चात् राज्यसभा की सिफारिशों के लिए उसके पास भेजा जाता है।
  4. राज्यसभा के लिए विधेयक की उसे प्राप्ति की तिथि से 14 दिन के भीतर लोकसभा को लौटाना अनिवार्य है। यदि 14 दिन में वह लौटाया नहीं जाता तब भी वह दोनों सदनों द्वारा पारित किया गया माना जाएगा।
  5. धन विधेयक अनिवार्य रूप से सरकारी विधेयक ही होता है, गैर-सरकारी विधेयक नहीं।

प्रश्न 4.
संविधान संशोधन विधेयक क्या है?
उत्तर:
संविधान की विभिन्न धाराओं में संशोधन से सम्बन्धित विधेयक को संविधान संशोधन विधेयक कहा जाता है। भारत में संविधान संशोधन प्रक्रिया का वर्णन संविधान के अनुच्छेद 368 में है। संविधान संशोधन विधेयक पर लोकसभा व राज्यसभा दोनों सदनों को समान शक्ति प्राप्त है। यदि एक सदन इसे पारित करे तथा दूसरा सदन पारित नही करे तब संविधान संशोधन विधेयक समाप्त समझा जाएगा।

संविधान संशोधन विधेयक किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है। इसे दोनों सदनों द्वारा अलग-अलग पारित करना आवश्यक है, अर्थात् इसमें संयुक्त अधिवेशन का प्रावधान नहीं होता है। दोनों सदनों द्वारा पारित संविधान संशोधन विधेयक राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से पारित समझा जाता है। राष्ट्रपति इस पर हस्ताक्षर करने से इंकार नहीं कर सकते हैं।

प्रश्न 5.
गणपूर्ति (कोरम) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
गणपूर्ति (कोरम) का अर्थ-

  1. गणपूर्ति अथवा कोरम सदस्यों की वह न्यूनतम संख्या होती है, जिनकी उपस्थिति से सदनों की कार्यवाही को वैधानिकता प्राप्त होती है।
  2. गणपूर्ति प्रत्येक सदन (लोकसभा/राज्यसभा) में पीठासीन अधिकारी सहित सदन की कुल सदस्य संख्या का दसवाँ भाग होता है।
  3. लोकसभा की कार्यवाही का संचालन करने हेतु सदन में कम से कम 55 सदस्य (कुल सदस्य संख्या 545 का दसवाँ भाग) एवं राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन करने हेतु सदन में कम से कम 25 सदस्य (कुल सदस्य संख्या 245 का दसवाँ भाग) अवश्य होने चाहिए।
  4. यदि सदन के किसी अधिवेशन में किसी समय गणपूर्ति न हो तो सदस्यों की सूचनार्थ एक घंटी बजती है। यदि घंटी बजने के पश्चात् भी गणपूर्ति न हो तो अध्यक्ष सदन की बैठक स्थागित कर देता है।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 20 निबंधात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय संसद के गठन व संरचना को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारतीय संसद का गठन वे उसकी संरचना – किसी भी लोकतांत्रिक शासन में सरकार के तीन अंग होते हैं- व्यवस्थापिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिको। व्यवस्थापिका के प्रत्येक देश में अलग – अलग नाम होते हैं।

भारत की व्यवस्थापिका को संसद कहा जाता है, जिसका गठन संविधान के अनुच्छेद 79 में किया गया है- “भारतीय संघ के लिए। संसद होगी जो राष्ट्रपति और दो सदनों से मिलकर बनेगी, जिसके नाम राज्यसभा और लोकसभा होंगे।” संविधान के भाग V के अन्तर्गत अनुच्छेद 79 -122 में संसद के गठन, संरचना, अवधि, अधिकार एवं शक्तियाँ आदि के बारे में वर्णन किया गया है।

(अ) लोकसभा: लोकसभा के गठन व संरचना का वर्णन निम्नलिखित बिदुओं के अन्तर्गत प्रस्तुत है
1. सदस्य संख्या – संघीय संसद के निम्न सदन को लोकसभा कहा जाता है। लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 552 निर्धारित की गई है, जिसमें 530 सदस्य राज्यों से, 20 सदस्य संघशासित प्रदेशों से तथा 2 सदस्य एंग्लो इंडियन होते हैं। वर्तमान में लोकसभा की सदस्य संख्या 545 है। जिसमें 530 सदस्य राज्यों से, 13 सदस्य संघ राज्य क्षेत्रों से तथा दो सदस्य राष्ट्रपति द्वारा नामित एंग्लो इंडियन समुदाय से हैं।

2. निर्वाचन: लोकसभा के सदस्यों का चुनाव जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से वयस्क मताधिकार के आधार पर गुप्त मतदान द्वारा होता है। अनुसूचित जातियों एवं जनजातियों के लिए कुछ स्थान निश्चित कर दिए गए हैं।

3. कार्यकाल: लोकसभा एक अस्थायी सदन है। मूल रूप से इसका कार्यकाल 5 वर्ष है। प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद की सलाह पर राष्ट्रपति इसे समय से पूर्व भी भंग कर सकते हैं।

4. सदस्यों की योग्यताएँ: लोकसभा का सदस्य बनने के लिए निम्नलिखित योग्यताएँ आवश्यक हैं-

  • वह भारत का नागरिक हो।
  • उसकी आयु 25 वर्ष या इससे अधिक हो।
  • वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी लाभ के पद पर न हो।
  • वह किसी न्यायालय द्वारा दिवालिया न ठहराया गया हो तथा पागल न हो।
  • संसद द्वारा कानून के अन्तर्गत निर्धारित अन्य योग्यताएँ पूरी करता हो।

5. पदाधिकारी: लोकसभा सदस्य अपने में से एक अध्यक्ष व एक उपाध्यक्ष चुनते हैं। अध्यक्ष लोकसभा की बैठकों का संचालन करता है। अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष अध्यक्ष के समस्त कार्य करता है। लोकसभा के सदस्य को संसद या एम.पी. कहा जाता है।

(ब) राज्यसभा: राज्यसभा संसद का द्वितीय सदन या उच्च सदन है। इसका गठन व संरचना निम्न प्रकार होती है

  1. सदस्य संख्या – अनुच्छेद 80 में राज्यसभा के गठन एवं निर्वाचन सम्बन्धी प्रावधान है। राज्यसभा के कुल 250 सदस्य होते हैं, जिसमें से 12 सदस्यों को जिन्हें साहित्य, कला, विज्ञान, कला, खेल एवं समाज सेवा के क्षेत्र में विशिष्ट ज्ञान अथवा व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हो , राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किया जाता है। शेष 238 सदस्य निर्वाचित होते हैं, जो राज्यों और संघीय क्षेत्रों के प्रतिनिधि होते हैं। वर्तमान में राज्यसभा में 245 सदस्य हैं। इनमें से 229 सदस्य राज्यों से, 4 संघ शासित क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत हैं।
  2. निर्वाचन – राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव सीधे मतदाताओं द्वारा नही होता है। अपितु अनुच्छेद 80 (4) के अनुसार राज्य विधानमंडल (विधानसभा) के निर्वाचित सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा अप्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली द्वारा होता है, जिससे अल्पसंख्यक समुदायों और दलों का प्रतिनिधित्व हो सके।
  3. कार्यकाल – राज्यसभा एक स्थायी सदन है। इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष है। इसके 1 / 3 सदस्य प्रति दो वर्ष पश्चात् अवकाश ग्रहण करते हैं और 1 / 3 नवीन सदस्य पद ग्रहण करते हैं।
  4. सदस्यों की योग्यताएँ – राज्यसभा की सदस्यता के लिए उसकी आयु 30 वर्ष होना आवश्यक है। शेष सभी योग्यताएँ वही हैं, जो लोकसभा सदस्य की हैं।
  5. पदाधिकारी – भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है, जो राज्यसभा की बैठकों व अन्य गतिविधियों का संचालन करता है। इसके अतिरिक्त राज्यसभा अपने सदस्यों में से एक उपसभापति चुनती है, जो सभापति की अनुपस्थिति में उसका सम्पूर्ण कार्य करता है।

प्रश्न 2.
संसद की विधि निर्माण प्रक्रिया को समझाइए।
उत्तर;
संसद में कानून या विधि निर्माण की प्रक्रिया – संसद में कोई विधेयक किस प्रकार पारित होकर कानून बनता है, यह जानना आवश्यक है। सामान्यतः विधेयक दो प्रकार के होते हैं-

  1. साधारण विधेयक
  2. धन विधेयक।

(अ) साधारण विधेयक के पारित होने की प्रक्रिया: साधारण विधेयक संसद के किसी भी सदन में प्रस्तावित किए जा सकते हैं। किसी भी विधेयक को कानून बनने के लिए उसके तीन वाचन होते हैं और उसे सदन में पाँच अवस्थाओं से गुजरना पड़ता है तभी वह संसद के किसी सदन द्वारा पारित माना जा सकता है। ये पाँच अवस्थाएँ अग्रलिखित हैं

(1) विधेयक की प्रस्तुति तथा प्रथम वाचन: मुख्य रूप से किसी विधेयक का पेश होना ही उसका प्रथम वाचन मान लिया जाता है। प्रथम वाचन में कोई विवाद नहीं होता है, परंतु यदि विधेयक बहुत महत्वपूर्ण है तो प्रस्तुतकर्ता विधेयक के संबंध में संक्षिप्त भाषण दे सकता है और विरोधी सदस्य भी संक्षेप में उसका उत्तर देते हुए आलोचना कर सकते हैं।

(2) द्वितीय वाचन: यह किसी भी विधेयक की सबसे निर्णायक अवस्था होती है। इस अवस्था में विधेयक पर प्रवर समिति का गठन किया जाता है, जो विधेयक पर विचार करती है। प्रत्येक धारा पर चर्चा करती है। निर्धारित अवधि में समिति अपना प्रतिवेदन सदन को प्रस्तुत करती है। इस प्रतिवेदन पर सदन में बहस एवं विचार – विमर्श होता है, उसकी प्रत्येक धारा पर मतदान होता है। यह पूरी प्रक्रिया विधेयक का द्वितीय वाचन कहलाती है।

(3) तृतीय वाचन: द्वितीय वाचन के पश्चात् विधेयक में आवश्यक शाब्दिक एवं औपचारिक संशोधन किए जाते हैं एवं अंतिम रूप से पारित करने के लिए सदन में प्रस्तुत किया जाता है। इसके पश्चात् तृतीय वाचन में सामान्य चर्चा के उपरांत मतदान होता है। यदि उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का साधारण बहुमत विधेयक के पक्ष में हो तब वह उस सदन में पारित समझा जाएगा।

(4) विधेयक दसरे सदन में-जिस सदन में विधेयक पेश किया गया हो वहाँ से पारित किए जाने के पश्चात् उसे पारित करने के लिए यदि दूसरे सदन में भेजा जाता है तो वहाँ पर भी विधेयक के तीन वाचन होते हैं। यदि दूसरा सदन विधेयक को पारित कर दे तब वह दोनों सदनों द्वारा पारित समझा जाता है एवं राष्ट्रपति के समक्ष हस्ताक्षर के लिए प्रस्तुत किया जाता है।

लेकिन दूसरा सदन विधेयक को अस्वीकार कर दे अथवा उसमें ऐसे संशोधन करे जिससे पहला सदन सहमत नहीं हो अथवा सदन विधेयक पर 6 माह तक चर्चा न करे तब उस साधारण बहुमत पर दोनों सदनों में मतभेद उत्पन्न हो जाता है।

दोनों सदनों में साधारण विधेयक पर असहमति के कारण उत्पन्न गतिरोध का समाधान संयुक्त बैठक में होता है। लोकसभा के अध्यक्ष की अध्यक्षता में आयोजित संयुक्त बैठक में निर्णय दोनों सदनों के उपस्थित एवं मतदान करने वाले कुल सदस्यों के बहुमत द्वारा किया जाता है।

(5) राष्ट्रपति की स्वीकृति: दोनों सदनों द्वारा पारित विधेयक को राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाता है। राष्ट्रपति विधेयक को स्वीकृत कर सकता है या उसे अपनी सिफारिशों के साथ संसद को पुनः विचार के लिए लौटा सकता है। यदि दोनों सदन विधेयक को पुनः संशोधन सहित या बिना किसी संशोधन के दूसरी बार पारित कर देते हैं तो राष्ट्रपति को विधेयक पर हस्ताक्षर करने ही होते हैं। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के बाद विधेयक कानून बन जाता है।

(ब) धन विधेयक के पारित होने की प्रक्रिया – धन विधेयक केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है, राज्यसभा में नहीं। वह राष्ट्रपति की सिफारिश पर केवल लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है। लोकसभा द्वारा पारित किए जाने के बाद राज्यसभा की सिफारिशों के लिए उसके पास भेजा जाता है।

राज्यसभा के लिए विधेयक को उसकी प्राप्ति की तिथि से 14 दिन के भीतर लोकसभा को लौटाना अनिवार्य है। यदि 14 दिन में विधेयक लौटाया नहीं जाता तब भी वह दोनों सदनों द्वारा पारित किया गया समझा जाता है। यह भी उल्लेखनीय है कि धन विधेयक अनिवार्य रूप से सरकारी विधेयक ही होगा, गैर – सरकारी विधेयक नहीं।

प्रश्न 3.
भारतीय संसद दुनिया की शक्तिशाली विधायिकाओं में से एक है। इसके कार्यों एवं शक्तियों के आलोक में समीक्षा कीजिए।
उत्तर:
भारतीय संसद दुनिया की शक्तिशाली विधायिकाओं में से एक है। भारत में संसद से तात्पर्य राज्यसभा, लोकसभा एवं राष्ट्रपति से है। यद्यपि राष्ट्रपति संसद से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा नही होता है लेकिन संसद द्वारा पारित विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के पश्चात् ही कानून का रूप लेते हैं। इसलिए राष्ट्रपति को संसद का अभिन्न अंग माना गया है। भारतीय संसद के कार्य एवं शक्तियाँ

1. विधि निर्माण – सरकार के व्यवस्थापिका अंग का सबसे प्रमुख कार्य विधि निर्माण होता है। संसद भारत की व्यवस्थापिका है। इसका मुख्य कार्य विधि निर्माण करना है। संसद को संघीय सूची में और समवर्ती सूची में उल्लिखित विषयों पर कानून निर्माण का अधिकार प्राप्त है यद्यपि समवर्ती सूची के विषयों पर संघीय संसद और राज्य विधानमण्डल दोनों के द्वारा ही कानूनों का निर्माण किया जा सकता है किन्तु इन दोनों द्वारा निर्मित कानूनों में पारस्परिक विरोध होने की स्थिति में संसद द्वारा निर्मित कानून ही मान्य होंगे। संसद के द्वारा अवशिष्ट विषयों पर भी कानून का निर्माण किया जा सकता है।

2. धन विधेयक पारित करना – संसद का दूसरा महत्वपूर्ण कार्य धन विधेयक को पारित करना है। अनुच्छेद 109 में धन विधेयक की प्रक्रिया का वर्णन है तथा अनुच्छेद 110 में इसे परिभाषित किया गया है। धन विधेयक राज्यसभा में प्रस्तुत नही किया जा सकता। वह राष्ट्रपति की सिफारिश पर केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है।

लोकसभा द्वारा पारित किए जाने के पश्चात् राज्यसभा की सिफारिशों के लिए उसकी प्राप्ति की तिथि से 14 दिन के भीतर लोकसभा को लौटाना अनिवार्य है। यदि 14 दिन में लौटाया नही जाता तब भी वह दोनों सदनों द्वारा पारित किया गया समझा जाएगा।

3. संविधान में संशोधन की शक्ति – संविधान में संशोधन के सम्बन्ध में भी संसद को महत्वपूर्ण शक्ति प्राप्त है। संसद के दोनों सदनों द्वारा संविधान के संशोधन का कार्य किया जाता है और संविधान के कुछ भाग में अकेली संसद के द्वारा ही सामान्य बहुमत से परिवर्तन किया जा सकता है।

संविधान के अनुच्छेद 3 के अनुसार दो या अधिक राज्यों को मिलाकर नए राज्य का निर्माण करने, नए राज्य बनाने तथा वर्तमान राज्यों के क्षेत्र, सीमाओं एवं नाम में परिवर्तन करने के लिए संसद सामान्य बहुमत से संविधान में संशोधन कर सकती है।

संविधान के कुछ भाग में संसद 2 / 3 बहुमत से संशोधन कर सकती है और संविधान की केवल कुछ ही व्यवस्थाएँ ऐसी हैं जिनमें संशोधन के लिये भारतीय संघ के आधे राज्यों के विधानमण्डलों की स्वीकृति आवश्यक होती है। संविधान संशोधन विधेयक किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है संशोधन को दोनों सदनों द्वारा अलग – अलग पारित करना आवश्यक है अर्थात् इसमें संयुक्त अधिवेशन का प्रावधान नही होता है। दोनों सदनों द्वारा पारित संविधान संशोधन विधेयक राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से पारित समझा जाता है। राष्ट्रपति इस पर हस्ताक्षर करने से इनकार नहीं कर सकते हैं।

4. कार्यपालिका पर नियन्त्रण का कार्य – संविधान के अनुसार संघीय कार्यपालिका अर्थात् मंत्रिमंडल संसद के प्रति उत्तरदायी होता है। संसद अनेक प्रकार से कार्यपालिका पर नियंत्रण रख सकती है। यथा-

  1. संसद काम रोको प्रस्ताव के आधार पर सरकारी नीतियों और कार्यो की त्रुटियों पर प्रकाश डाल सकती है।
  2. संसद सदस्य कार्यपालिका के सदस्यों से सरकारी नीतियों एवं कार्यों के सम्बन्ध में प्रश्न एवं पूरक प्रश्न पूछ सकते हैं।
  3. संसद सरकारी विधेयक को स्वीकार करके, मंत्रियों के वेतन में कटौती का प्रस्ताव स्वीकार करके अथवा किसी सरकारी विधेयक में
  4. ऐसा कोई संशोधन करके, जिससे सरकार सहमत न हो, अपना विरोध प्रदर्शित कर सकती है।
  5. संसद के द्वारा बजट में कटौती की जा सकती है। बजट में कटौती की जाने पर मंत्रिमंडल को पद त्याग करना होता है।
  6. मंत्रिपरिषद के प्रति अविश्वास प्रस्ताव पारित कर उसे अपदस्थ करने की शक्ति लोकसभा के पास है।

5. निर्वाचन सम्बन्धी शक्तियाँ-भारत के राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति की निर्वाचन प्रक्रिया में संसद के सदस्य भाग लेते हैं। राष्ट्रपति के चुनाव में संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य, राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य निर्वाचक मण्डल के सदस्य होते हैं। उपराष्ट्रपति के चुनाव में संसद के दोनों सदनों के सदस्य भाग लेते हैं, लोकसभा अपने अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का निर्वाचन करती है। राज्यसभा भी अपने उप सभापति का निर्वाचन करती है।

6. महाभियोग सम्बन्धी शक्ति – संसद के दोनों सदनों द्वारा राष्ट्रपति, उच्चतम एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों पर महाभियोग लगाया जा सकता है। संसद के दोनों सदन संविधान द्वारा निर्धारित विशेष प्रक्रिया के आधार पर राष्ट्रपति के विरुद्ध महाभियोग का प्रस्ताव पारित कर उसे पदच्युत कर सकते हैं।

इसी प्रकार ये दोनों सदन सर्वोच्च या उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश को अक्षमता या दुराचरण के आधार पर पदच्युत करने का प्रस्ताव पारित कर सकते हैं। इस प्रकार का प्रस्ताव प्रत्येक सदन में दो – तिहाई बहुमत से पारित होना आवश्यक है। भारतीय संसद के उपरोक्त कार्यों के आधार पर कहा जा सकता है कि विश्व की शक्तिशाली विधायिकाओं में संसद महत्वपूर्ण स्थान रखती है।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 20 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Political Science Chapter 20 बहुंचयनात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
लोकतांत्रिक शासन में सरकार के कितने अंग होते हैं?
(अं) तीन
(ब) चार
(स) पाँच
(द) छः

प्रश्न 2.
जापान में व्यवस्थापिका को क्या कहा जाता है?
(अ) कांग्रेस
(ब) डायट
(स) बुण्डेस्टांग
(द) पार्लियामेंट

प्रश्न 3.
भारत में व्यवस्थापिका को कहते हैं
(अ) कार्यपालिका
(ब) न्यायपालिका
(स) संसद
(द) कांग्रेस

प्रश्न 4.
अष्टाध्यायी’ किसकी रचना है?
(अ) कौटिल्य की
(ब) तुलसीदास की
(स) चाणक्य की
(द) पाणिनी की

प्रश्न 5.
सभा और समिति नामक दो संस्थाओं का उल्लेख मिलता है
(अ) ऋग्वेद में
(ब) सामवेद में
(स) अष्टध्यायी में
(द) उपरोक्त सभी में।

प्रश्न 6.
भारत सरकार अधिनियम किस वर्ष अस्तित्व में आया?
(अ) 1819.
(ब) 1919
(स) 1920
(द) 1921

प्रश्न 7.
‘राष्ट्रपति के अलावा संसद में दो सदन होंगे। यह संविधान के किस अनुच्छेद में वर्णित है?
(अ) अनुच्छेद 59 में
(ब) अनुच्छेद 69 में
(स) अनुच्छेद 79 में
(द) अनुच्छेद 89 में

प्रश्न 8.
लोकसभा के सदस्यों का कार्यकाल निर्धारित है
(अ) 6 वर्ष
(ब) 4 वर्ष
(स) 7 वर्ष।
(द) 5 वर्ष

प्रश्न 9.
राज्यसभा का सभापति कौन होता है?
(अ) उप राष्ट्रपति
(ब) राष्ट्रपति
(स) लोकसभाध्यक्ष
(द) प्रधानमंत्री

प्रश्न 10.
लोकसभा में कार्यवाही का संचालन कौन करता है?
(अ) उपाध्यक्ष
(ब) अध्यक्ष
(स) विपक्ष का नेता
(द) सभापति

प्रश्न 11.
राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल होता है
(अ) 5 वर्ष
(ब) 4 वर्ष
(स) 6 वर्ष
(द) 8 वर्ष

प्रश्न 12.
संसद के सदस्यों को क्या कहा जाता है?
(अ) अध्यक्ष
(ब) लोकसभाध्यक्ष
(स) सभापति
(द) सांसद

प्रश्न 13.
राज्यसभा का गठन किस अनुच्छेद के तहत हुआ है
(अ) अनुच्छेद 80
(ब) अनुच्छेद 81
(स) अनुच्छेद 82
(द) अनुच्छेद 83

प्रश्न 14.
लोकसभा का गठन किस अनुच्छेद के तहत् हुआ है?
(अ) अनुच्छेद 71
(ब) अनुच्छेद 81
(स) अनुच्छेद 83
(द) अनुच्छेद 85

प्रश्न 15.
अनुसूचित जाति के लिए लोकसभा में कितने स्थान आरक्षित हैं?
(अ) 21
(ब) 31
(स) 84
(द) 51

प्रश्न 16.
पहली लोकसभा का गठन किस वर्ष हुआ था?
(अ) 1922
(ब) 1932
(स) 1942
(द) 1952

प्रश्न 17.
राष्ट्रपति किसकी सलाह पर लोकसभा को भंग कर सकता है?
(अ) प्रधानमंत्री
(ब) उप राष्ट्रपति।
(स) मंत्री
(द) सभापति

प्रश्न 18.
लोकसभा का अध्यक्ष अपना त्यागपत्र किसे देगा?
(अ) राष्ट्रपति को
(ब) उपाध्यक्ष को
(स) सभापति को
(द) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 19.
अब तक कितने विधेयक संसद की संयुक्त बैठक में पास किए गए है?
(अ) 1
(ब) 2
(द) 4

प्रश्न 20.
विधेयक कितने प्रकार के होते हैं?
(अ) 5
(ब) 6
(स) 4
(द) 3

उत्तर:
1. (अ), 2. (ब), 3. (स), 4. (द), 5. (अ), 6. (ब), 7. (स), 8. (द), 9. (अ), 10. (ब), 11. (स)
12. (द), 13. (अ), 14. (ब), 15. (स), 16. (द), 17. (अ), 18. (ब), 19. (स), 20. (द)।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 20 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
सरकार के तीन अंग कौन-कौन से हैं?
उत्तर:
सरकार के तीन अंग हैं-व्यवस्थापिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका।

प्रश्न 2.
मजलिस किसे कहते हैं?
उत्तर:
इराक की व्यवस्थापिका को मजलिस कहते हैं।

प्रश्न 3.
संसद क्या है?
उत्तर:
संसद भारत की व्यवस्थापिका है।

प्रश्न 4.
भारतीय संघ की कार्यपालिका का संवैधानिक प्रमुख कौन है?
उत्तर:
राष्ट्रपति भारतीय संघ की कार्यपालिका का संवैधानिक प्रमुख होता है।

प्रश्न 5.
‘सभा’ व ‘समिति’ का उल्लेख किस वेद में देखने को मिलता है?
उत्तर:
‘ऋग्वेद’ में सभा व समिति नामक दो संस्थाओं का उल्लेख देखने को मिलता है।

प्रश्न 6.
भारतीय संसद के तीन अंग कौन – कौन से हैं?
उत्तर:

  1. लोकसभा
  2. राज्य सभा
  3. राष्ट्रपति

प्रश्न 7.
लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य की योग्यता में आयु संबंधी अंतर बताइए।
उत्तर:
लोकसभा की सदस्यता के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष है और राज्यसभा की सदस्यता के लिए न्यूनतम आयु 30 वर्ष है।

प्रश्न 8.
एम. पी. किसे कहा जाता है?
उत्तर:
‘एम. पी.’ (मेम्बर ऑफ पार्लियामेण्ट) संसद के सदस्यों को कहा जाता है।

प्रश्न 9.
भारतीय संसद के प्रतिवर्ष कितने सत्र होते हैं?
उत्तर:
भारतीय संसद के प्रतिवर्ष तीन सत्र होते हैं।

प्रश्न 10.
पीठासीन अधिकारी’ किसे कहते हैं?
उत्तर:
लोकसभा में अध्यक्ष तथा राज्यसभा में सभापति को पीठासीन अधिकारी कहते हैं।

प्रश्न 11.
सत्रावसान करने का अधिकार किसे प्राप्त है?
उत्तर:
सत्रावसान करने का अधिकार राष्ट्रपति’ को प्राप्त है।

प्रश्न 12.
भारतीय संसद के सदनों में गणपूर्ति (कोरम) का आधार क्या है?
उत्तर:
भारतीय संसद अर्थात् लोकसभा और राज्यसभा दोनों के लिए गणपूर्ति (कोरम) का आधार उसकी सदस्य संख्या का 1/10 वाँ भाग है।

प्रश्न 13.
राज्यसभा में कार्यवाही का संचालन करने के लिए कितने सदस्य होने चाहिए?
उत्तर:
राज्यसभा में कार्यवाही का संचालन करने के लिए कम से कम 25 सदस्य अवश्य होने चाहिए।

प्रश्न 14.
महान्यायवादी की संसद में मतदान विषयक स्थिति क्या है?
उत्तर:
‘महान्यायवादी’ को संसद में मतदान का अधिकार प्राप्त नहीं है।

प्रश्न 15.
राज्यसभा को किन-किन नामों से जाना जाता है?
उत्तर:
राज्यसभा को संसद का उच्च सदन, स्थायी सदन अथवा राज्यों के सदन के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 16.
राज्यसभा में राष्ट्रपति द्वारा नाम निर्देशित व्यक्तियों का प्रावधान किस देश के संविधान से प्रेरित है?
उत्तर:
यरलैण्ड के संविधान से।

प्रश्न 17.
राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन अधिकार किस संस्था को है?
उत्तर:
राज्यों की विधानसभाओं को।

प्रश्न 18.
राजस्थान से राज्यसभा के कितने सदस्य चुने जाते हैं?
उत्तर:
सदस्य।

प्रश्न 19.
राष्ट्रपति लोकसभा में कितने सदस्य मनोनीत कर सकता है?
उत्तर:
राष्ट्रपति लोकसभा में दो आँग्ल भारतीय सदस्य मनोनीत कर सकता है।

प्रश्न 20.
राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन किस पद्धति के आधार पर होता है?
उत्तर:
राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन एकल संक्रमणीय मत एवं आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के आधार पर होता है।

प्रश्न 21.
राज्यसभा का निर्वाचन कराने की जिम्मेदारी किसकी है?
उत्तर:
राज्यसभा का निर्वाचन कराने की जिम्मेदारी भारत के निर्वाचन आयोग की है।

प्रश्न 22.
वर्तमान में लोकसभा के कुल सदस्य संख्या कितनी है?
उत्तर:
545

प्रश्न 23.
राजस्थान से लोकसभा के कितने सदस्य चुने जाते हैं?
उत्तर:
25 सदस्य।

प्रश्न 24.
लोकसभा के सदस्यों का निर्वाचन किस प्रकार होता है?
उत्तर:
लोकसभा के सदस्यों को निर्वाचन जनता द्वारा वयस्क मताधिकार के आधार पर प्रत्यक्ष रूप से गुप्त मतदान द्वारा होता है।

प्रश्न 25.
16 वीं लोकसभा का गठन कब हुआ?
उत्तर:
16 वीं लोकसभा का गठन मई, 2014 में हुआ है।

प्रश्न 26.
स्वतंत्र भारत के प्रथम लोकसभा अध्यक्ष कौन थे?
उत्तर:
स्वतंत्र भारत के प्रथम लोकसभा अध्यक्ष गणेश वासुदेव मावलंकर’ थे।

प्रश्न 27.
सरकारी विधेयक किसे कहते हैं?
उत्तर:
जो विधेयक सरकार की ओर से किसी मंत्री द्वारा संसद में प्रस्तुत किया जाता है, उसे सरकारी विधेयक कहते हैं।

प्रश्न 28.
धन विधेयक सर्वप्रथम किसे सदन में प्रस्तुत किया जाता है?
उत्तर:
लोकसभा में।

प्रश्न 29.
धन विधेयक क्या है?
उत्तर:
आय – व्यय से सम्बन्धित समस्त विधेयक धन विधेयक कहलाते हैं।

प्रश्न 30.
धन विधेयक को प्रमाणीकरण किसके द्वारा किया जाता है?
उत्तर:
लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा।

प्रश्न 31.
राज्यसभा धन विधेयक पर अधिकतम कितने समय तक विचार कर सकती है?
उत्तर:
14 दिन तक।

प्रश्न 32.
संविधान के किस अनुच्छेद में धन विधेयक को परिभाषित किया गया है?
उत्तर:
अनुच्छेद 110 में धन विधेयक को परिभाषित किया गया है।

प्रश्न 33.
किस प्रकार के विधेयक के सम्बन्ध में लोकसभा और राज्यसभा को समान शक्ति प्राप्त होती है?
उत्तर:
संविधान संशोधन विधेयक के सम्बन्ध में।

प्रश्न 34.
ऐसे दो क्षेत्र बताइए जिनमें राज्यसभा, लोकसभा की तुलना में कम शक्तिशाली है।
उत्तर:

  1. कार्यपालिका पर नियंत्रण रखने के क्षेत्र में।
  2. वित्त विधेयक के क्षेत्र में।

प्रश्न 35.
विधेयक कितने प्रकार के होते हैं? नाम बताइए।
उत्तर:
विधेयक तीन प्रकार के होते हैं-

  1. साधारण विधेयक
  2. धन विधेयक
  3. संविधान संशोधन विधेयक।

प्रश्न 36.
संविधान संशोधन प्रक्रिया का वर्णन किस अनुच्छेद में किया गया है?
उत्तर:
संविधान संशोधन प्रक्रिया का वर्णन संविधान के अनुच्छेद 368 में किया गया है।

प्रश्न 37.
संसद के संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता किसके द्वारा की जाती है?
उत्तर:
लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा।

प्रश्न 38.
भारतीय संसद का निम्न सदन किसे कहा जाता है?
उत्तर:
लोकसभा को।

प्रश्न 39.
राजस्थान विधानसभा में कितने विधायक हैं?
उत्तर:
200

RBSE Class 12 Political Science Chapter 20 लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय संसद के दोनों सदनों के नाम एवं उनके कार्यकाल का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
भारतीय संसद के दोनों सदनों के नाम इस प्रकार हैं

  1. ऊपरी सदन अर्थात् उच्च सदन या द्वितीय सदन को राज्यसभा कहा जाता है। यह स्थायी सदन होता है। इसे कभी भंग नही किया जा सकता। यह भारत संघ की विभिन्न राजनीतिक इकाइयों का प्रतिनिधित्व करता है। इसका प्रत्येक सदस्य 6 वर्ष के लिए चुना जाता है परन्तु हर दो वर्ष बाद एक तिहाई सदस्य कार्यमुक्त हो जाते हैं।
  2. निम्न सदन अथवा प्रथम सदन लोक सभा है। इस सदन का कार्यकाल 5 वर्ष है। राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सिफारिश पर 5 वर्ष से पूर्व भी इसे भंग कर सकता है। इस सदन में बहुमत प्राप्त दल / दलों का नेता प्रधानमंत्री बनता है। का कार्यकाल है। राष्ट्रपति प्रधानमन्त्री की

प्रश्न 2.
राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए कौन-कौन सी योग्यताएँ होनी आवश्यक हैं?
उत्तर:
राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए निम्नलिखित योग्यताएँ होनी आवश्यक हैं

  1. वह भारत का नागरिक हो।
  2. उसकी आयु 30 वर्ष से कम न हो।
  3. वह भारत सरकार अथवा किसी राज्य सरकार के अधीन किसी लाभ के पद पर कार्यरत न हो।
  4. वह ऐसी अन्य योग्यताएँ रखता हो जो संसद के किसी कानून द्वारा निश्चित की जाएँ।
  5. उस राज्य में संसदीय क्षेत्र का मतदाता हो जिस राज्य से वह चुनाव लड़ रहा है।
  6. वह किसी न्यायालय द्वारा दिवालिया व ठहराया गया हो तथा पागल न हो।

प्रश्न 3.
कौन-कौन सी निर्योग्यताओं वाला व्यक्ति संसद का सदस्य नहीं बन सकता।
उत्तर:
निम्नलिखित निर्योग्यताओं वाला व्यक्ति संसद का सदस्य नहीं बन सकता

  1. कोई विकृत चित्त व्यक्ति अथवा पागल व दिवालिया व्यक्ति संसद का सदस्य नही बन सकता है।
  2. कोई व्यक्ति एक समय में संसद के दोनों सदनों का सदस्य नही बन सकता।
  3. संसद सदस्य के चुनावी अपराध अथवा चुनाव में भ्रष्ट आचरण का दोषी पाये जाने पर सदस्यता से बर्खास्त किया जा सकता है।
  4. कोई व्यक्ति अधिकतम दो स्थानों से लोकसभा का चुनाव लड़ सकता है। यदि वह दोनों स्थानों से निर्वाचित होता, है तब उसे एक माह के अंदर उसे एक स्थान रिक्त करना होता है।
  5. किसी संसद सदस्य को दल-बदल का दोषी पाये जाने पर सदस्यता से बर्खास्त किया जा सकता है।

प्रश्न 4.
संसद के सत्र (अधिवेशन) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
संसद के सत्र: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 85 के अनुसार राष्ट्रपति समय-समय पर संसद के प्रत्येक सदन को ऐसे समय तथा स्थान पर जो वह ठीक समझे अधिवेशन के लिए आहूत करेगा, लेकिन संसद के एक सत्र की अंतिम बैठक तथा आगामी सत्र की प्रथम बैठक के लिए नियत तिथि के मध्य 6 माह का अंतर नही होगा। भारत की संसद के प्रतिवर्ष तीन सत्र (अधिवेशन) होते हैं यथा

  1. बजट सत्र (फरवरी-मई)
  2. मानसून सत्र (जुलाई – सितम्बर)
  3. शीतकालीन सत्र (नवम्बर – दिसम्बर)।

संसद की कार्यवाही के दौरान सदनों को स्थगित करने का अधिकार पीठासीन अधिकारियों को होता है । लोकसभा में यह अधिकार लोकसभाध्यक्ष तथा राज्यसभा में यह अधिकार सभापति को होता है। लेकिन सत्रावसान का अधिकार राष्ट्रपति को प्राप्त होता है। वही अधिवेशन की समाप्ति का आदेश जारी कर सकता है।

प्रश्न 5.
मंत्रियों एवं महान्यायवादी के संसद में अधिकारों को बताइए।
उत्तर:
मंत्रियों एवं महान्यायवादी के संसद में अधिकार: भारत में संसद में मंत्रिपरिषद के सदस्यों (मंत्रियों) एवं महान्यायवादी को कई अधिकार प्राप्त हैं। संविधान के अनुच्छेद 88 में यह उल्लेख किया गया है कि मंत्रिपरिषद के प्रत्येक सदस्य (मंत्री) और भारत के महान्यायवादी को संसद के किसी भी सदन में बोलने, कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार होगा। किसी विधेयक या प्रस्ताव पर महान्यायवादी को संसद में मतदान का अधिकार नही होगा, वहीं दूसरी ओर मंत्री केवल उसे सदन में मतदान कर सकेगा जिसका वह सदस्य है।

प्रश्न 6.
राज्यसभा के गठन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
राज्यसभा का गठन: राज्यसभा को संसद का उच्च सदन, स्थायी सदन अथवा राज्यों के सदन के नाम से जाना जाता है। राज्यसभा का गठन संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत हुआ है जिसके अनुसार इसकी कुल सदस्य संख्या 250 हो सकती है। इनमें से 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाते हैं जो साहित्य, कला, विज्ञान, खेल अथवा समाजसेवा में विशेष ज्ञान अथवा व्यवहारिक अनुभव प्राप्त व्यक्ति होते हैं।

शेष 238 व्यक्ति राज्य एवं संघ शासित क्षेत्रों से निर्वाचित होते हैं। वर्तमान में राज्यसभा की कुल सदस्य संख्या 245 निर्धारित है, जिनमें से 229 सदस्य विभिन्न राज्यों से तथा 4 सदस्य संघ शासित क्षेत्रों से निर्वाचित हैं जबकि 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत हैं।

राज्यसभा में राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों को स्थानों का आवंटन संविधान की चौथी अनुसूची के द्वारा जनसंख्या के आधार पर किया गया है। राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन उस राज्य की विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा किया जाता है।

राज्यसभा एक स्थाई सदन है जो कभी भंग नहीं होता। इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष होता है। राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए भारतीय नागरिकता व न्यूनतम उम्र 30 वर्ष निर्धारित है। उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है। उपसभापति राज्यसभा के सदस्य अपने में से चुनते हैं।

प्रश्न 7.
राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन किस प्रकार होता है। बताइए।
उत्तर:
राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन: राज्यसभा का गठन संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत होता है। संविधान के अनुसार राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन उस राज्य की विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा किया जाता है। इस प्रकार राज्यसभा के सदस्यों का निर्वाचन अप्रत्यक्ष रूप से होता है। राज्यसभा का निर्वाचन सम्पन्न कराने का कार्य भारत का निर्वाचन आयोग करता है। राज्यसभा चुनाव के लिए हाल में ही दो संशोधन किए गए हैं-

  1. प्रत्याशियों के लिए उस राज्य का निवासी होने की शर्त का निवारण किया गया, जिस राज्य से वह निर्वाचित होना चाहता है।
  2. गुप्त मतदान प्रणाली के स्थान पर खुली मतदान प्रणाली को स्वीकार किया गया है।

प्रश्न 8.
राज्यसभा की अवधि पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
राज्यसभा की अवधि-भारत की संसद के उच्च सदन को राज्यसभा के नाम से जाना जाता है। यह एक स्थायी सदन है। यह कभी भी भंग नही होता है। भारतीय संविधान में राज्यसभा के सदस्यों की पदावधि का निर्धारण नहीं किया गया था। इसे संसद पर ही छोड़ दिया गया था।

इसके आधार पर संसद ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 पारित किया जिसके द्वारा राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष निर्धारित किया गया। व्यवस्था ऐसी की गयी कि प्रत्येक दो वर्ष पश्चात् राज्यसभा के एक तिहाई सदस्यों का कार्यकाल पूर्ण हो जाता है, जिनके स्थान पर पुनः 6 वर्ष के लिए सदस्यों का निर्वाचन किया जाता है। राज्यसभा के सदस्य को पुन:निर्वाचित होने के लिए कोई निश्चित अवधि निर्धारित नहीं है।

प्रश्न 9.
राज्यसभा के कौन-कौन से पदाधिकारी होते हैं? बताइए।
अथवा
राज्यसभा में कौन – कौन से पदाधिकारी होते हैं। उनके कार्य लिखिए।
उत्तर:
राज्यसभा के पदाधिकारी एवं उनके कार्य-संविधान के अनुच्छेद 64 के अनुसार भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सभापति होता है। अनुच्छेद 89 के अनुसार राज्यसभा का एक उपसभापति भी होता है। उपराष्ट्रपति को राज्यसभा के सभापति के रूप में वेतन मिलता है। सभापति का दायित्व अथवा कार्य सदन की बैठकों का संचालन करना और अनुशासन बनाए रखना होता है।

सभापति की अनुपस्थिति में राज्यसभा का सभापतित्व उपसभापति करता है। यह सदन का सदस्य होता है और सदन द्वारा ही चुना जाता है। जब उपराष्ट्रपति भारत के कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है अथवा सदन से अनुपस्थित रहता है तो उस समय उपसभापति राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन करता है।

प्रश्न 10.
लोकसभा का गठन किस प्रकार होता है? बताइए।
उत्तर:
लोकसभा का गठन – लोकसभा भारतीय संसद का निम्न सदन या लोकप्रिय सदन कहलाता है। लोकसभा का गठन संविधान के अनुच्छेद 81 के अनुसार होता है। प्रारम्भ में लोकसभा की कुल सदस्य संख्या 500 निर्धारित की गयी थी। 1974 के 31 वें संविधान संशोधन के पश्चात् लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 552 निर्धारित की गयी है, जिनमें से

  1. 530 सदस्य विभिन्न राज्यों से निर्वाचित होंगे।
  2. 20 सदस्य संघ शासित क्षेत्रों से निर्वाचित होंगे।
  3. इनके अतिरिक्त राष्ट्रपति लोकसभा में आंग्ल भारतीय समुदाय को पर्याप्त प्रतिनिधित्व प्रदान करने के लिए उस समुदाय से दो सदस्य मनोनीत कर सकता है।

वर्तमान में लोकसभा की कुल सदस्य संख्या 545 है, जिनमें से 530 विभिन्न राज्यों से, 13 सदस्य संघ शासित क्षेत्रों से निर्वाचित हैं जबकि दो सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत हैं। विभिन्न राज्यों को लोकसभा के स्थानों का आवंटन जनसंख्या के आधार पर होता है।

लोकसभा की कुल सदस्य संख्या 2026 तक यथावत रहेगी। वर्तमान में लोकसभा में अनुसूचित जाति के लिए 84 व अनुसूचित जनजाति के लिए 47 स्थान आरक्षित हैं। 18 वर्ष या अधिक उम्र के वयस्क नागरिक जिनका नाम मतदाता सूची में दर्ज है, वे मतदान द्वारा लोकसभा के सदस्यों का निर्वाचन करते हैं। लोकसभा सदस्य बनने हेतु भारतीय नागरिकता के साथ न्यूनतम उम्र 25 वर्ष होनी चाहिए।

प्रश्न 11.
लोकसभा के सदस्यों का निर्वाचन किस प्रकार होता है?
उत्तर-लोकसभा के सदस्यों का निर्वाचन-लोकसभा का सदस्य बनने के लिए उम्मीदवार को भारतीय नागरिक होना चाहिए तथा उसकी न्यूनतम उम्र 25 वर्ष होनी चाहिए। भारत में लोकसभा के सदस्यों का निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से वयस्क मताधिकार द्वारा होता है।

अनुच्छेद 326 के अनुसार 18 वर्ष या अधिक उम्र के वयस्क नागरिक जिनका मतदाता सूची में नाम दर्ज है, वे मतदान द्वारा लोकसभा के सदस्यों का निर्वाचन कर सकते हैं। विभिन्न राजनीतिक दल प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र से अपने प्रत्याशियों को खड़ा करते हैं।

साथ ही निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनाव में उम्मीदवार होते हैं। भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित तिथि को उस लोकसभा क्षेत्र के पंजीकृत मतदाता अपने मत का प्रयोग करते हैं एवं जिस प्रत्याशी को सबसे अधिक मत प्राप्त होते हैं, वह निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है। वर्तमान में लोकसभा के 545 में से 543 सदस्यों का निर्वाचन होता है। 2 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाते हैं।

प्रश्न 12.
लोकसभा का कार्यकाल बताइए।
उत्तर:
लोकसभा का कार्यकाल – भारतीय संविधान के अनुच्छेद 83 के अनुसार लोकसभा का कार्यकाल अपनी प्रथम बैठक से 5 वर्ष निर्धारित किया गया है। पाँच वर्ष की समाप्ति के पश्चात् लोकसभा स्वत: ही भंग हो जाती है लेकिन अनुच्छेद 85 के अनुसार राष्ट्रपति प्रधनमंत्री की सलाह पर लोकसभा को कभी भी भंग कर सकता है।

राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में लोकसभा के कार्यकाल को एक बार में एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। 1976 -77 में लोकसभा का कार्यकाल बढ़ाया गया था। भारत के प्रथम लोकसभा का गठन अप्रैल 1952 में हुआ था। वर्तमान में 16 वीं लोकसभा कार्यरत है, जिसका गठन मई, 2014 में हुआ है।

प्रश्न 13.
लोकसभा के अध्यक्ष पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
संसद के कार्य को सुचारु रूप से सम्पन्न करने के उद्देश्य से भारतीय संविधान में संसद के लिए अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष की व्यवस्था की गई है। संसद अपने पहले अधिवेशन में सबसे पहले अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष का अपने सदस्यों में से ही चुनाव करती है। लोकसभा का अध्यक्ष लोकसभा का एक अहम् सदस्य होता है। वही लोकसभा के अधिवेशनों की अध्यक्षता करता है और इसके काम को सुचारु रूप से संचालित करता है।

लोकसभा में बिल या विधेयक उसकी आज्ञा से ही पेश हो सकते हैं। यह वही निश्चित करता है कि कोई विधेयक धन संबंधी विधेयक है या साधारण विधेयक। इसके साथ ही वही लोकसभा के अधिवेशनों को स्थगित करता है। सभी सदस्यों को यहाँ तक कि सरकारी सदस्यों व मंत्रियों तक को उसकी आज्ञा माननी पड़ती है।

प्रश्न 14.
सरकारी व गैर सरकारी विधेयक में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
सरकारी व गैर सरकारी विधेयक में अंतर-सरकारी व गैर सरकारी विधेयक में निम्नलिखित अन्तर हैं

  1. यदि संसद में विधेयक मंत्रिपरिषद के किसी सदस्य द्वारा सदन में रखा जाता है तो उसे सरकारी विधेयक कहते हैं जबकि साधारण सदस्यों द्वारा सदन में रखा गया विधेयक गैर सरकारी विधेयक कहलाता है।
  2.  सरकारी विधेयक को पारित करने का दायित्व मंत्रिपरिषद का होता है जबकि निजी विधेयक को पारित कराने की मंत्रिमंडल की कोई जिम्मेदारी नहीं होती।
  3.  सरकारी विधेयक पर किसी भी दिन विचार हो सकता है जबकि निजी या गैर-सरकारी विधेयक पर केवल शुक्रवार के दिन ही विचार हो सकता है।

प्रश्न 15.
धन विधेयक के पारित करने की प्रक्रिया का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
धन विधेयक को पारित करने की प्रक्रिया – यह संसद का एक महत्वपूर्ण कार्य है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 109 में धन विधेयक की प्रक्रिया का वर्णन है तथा अनुच्छेद 110 में इसे परिभाषित किया गया है। धन विधेयक को राज्यसभा में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। यह राष्ट्रपति की सिफारिश पर केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है।

लोकसभा द्वारा पारित किए जाने के पश्चात् राज्यसभा में विचार – विमर्श के लिए यह उसके पास भेजा जाता है। राज्यसभा को यह विधेयक उसे प्राप्ति की तिथि से 14 दिन के भीतर लोकसभा को लौटाना अति आवश्यक होता है। यदि राज्यसभा 14 दिनों के भीतर धन विधेयक को लोकसभा को वापस नहीं लौटाती है तो यह दोनों सदनों द्वारा पारित किया हुआ मान लिया। जाता है।

प्रश्न 16.
साधारण विधेयक तथा धन विधेयक में अंतर स्पष्ट कीजिए। उत्तर-साधारण व धन विधेयक में निम्नलिखित अंतर हैं

  1. साधारण विधेयक संसद के किसी भी सदन में प्रस्तावित किए जा सकते हैं। धन विधेयक सर्वप्रथम लोकसभा में ही प्रस्तावित किए जा सकते हैं।
  2. साधारण विधेयकों के लिए राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त करना आवश्यक नहीं है। धन विधेयक को प्रस्तावित करने के पूर्व राष्ट्रपति की स्वीकृति लेना आवश्यक है।
  3. राज्यसभा साधारण विधेयक को 6 माह तक रोक सकती है। धन विधेयक को राज्यसभा केवल 14 दिन तक अपने पास रोक सकती है।
  4. साधारण विधेयक को एक सदन द्वारा अस्वीकृत कर देने पर 6 माह के बाद संसद के दोनों सदनों का संयुक्त अधिवेशन होता है। धन विधेयक 14 दिन बाद राज्यसभा द्वारा पारित समझा जाता है।

प्रश्न 17.
विधेयक के द्वितीय वाचन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
कानूनकानून बनाने के प्रस्ताव को विधेयक कहते हैं। विधेयक के प्रत्येक सदन में तीन वाचन होते हैं। द्वितीय वाचन किसी भी विधेयक की सबसे महत्वपूर्ण एवं निर्णायक अवस्था होती है। साधारणतया इस अवस्था में विधेयक पर प्रवर समिति का गठन किया जाता है जो विधेयक पर वादों की सुनवाई करती है। निर्धारित अवधि में समिति अपना प्रतिवेदन सदन को प्रस्तुत करती है। इस प्रतिवेदन पर सदन में बहस और विचार-विमर्श होता है तथा उसकी प्रत्येक धारा पर मतदान होता है। यही सम्पूर्ण प्रक्रिया विधेयक को द्वितीय वाचन कहलाती है।

प्रश्न 18.
संविधान संशोधन की प्रक्रिया का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
संविधान संशोधन की प्रक्रिया – भारतीय संविधान में संशोधन की शक्ति संसद को प्राप्त है। संविधान में संशोधन की प्रक्रिया का वर्णन संविधान के अनुच्छेद 368 में है। इसके अनुसार संविधान में संशोधन दो प्रकार से हो सकता है।

संविधान की अधिकांश धाराओं में परिवर्तन प्रत्येक सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत एवं उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों से कम से कम दो तिहाई बहुमत द्वारा पारित प्रस्ताव से होता है परन्तु ऐसा कोई संशोधन जो संघ व राज्यों की कार्यपालिका शक्ति में परिवर्तन, राज्यों के विधायी सम्बन्धों में परिवर्तन, संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व एवं स्वयं अनुच्छेद 368 में संशोधन आदि से सम्बन्धित हो तो ऐसे संशोधनों वाले विधेयक के लिए संसद के विशेष बहुमत के साथ-साथ कम से कम आधे राज्यों के विधानमण्डलों द्वारा उसे समर्थन प्राप्त होना आवश्यक होता है।

संविधान संशोधन विधेयक को संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है तथा उसे दोनों सदनों द्वारा अलग-अलग पारित होना आवश्यक होता है। दोनों सदनों द्वारा पारित संविधान संशोधन विधेयक राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के पश्चात् पारित माना जाता है।

प्रश्न 19.
वे कौन – कौन से तरीके हैं जिनके माध्यम से संसद राजनीतिक कार्यकारिणी पर नियंत्रण रखती है?
अथवा।
संसद किस प्रकार कार्यपालिका पर नियंत्रण का कार्य करती है? बताइए।
उत्तर:
लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार जनता के प्रति उत्तरदायी होती है एवं जनता मताधिकार के माध्यम से उसे नियंत्रित करती है लेकिन कार्यपालिका को दिन-प्रतिदिन के कार्यों में नियंत्रित करने का कार्य जनता की प्रतिनिधि संस्था अर्थात् संसद को प्राप्त है। भारतीय संसद निम्नलिखित तरीके से कार्यपालिका को नियंत्रित करती है

  1. प्रश्न तथा पूरक प्रश्न पूछकर।
  2. सरकारी विधेयक को अस्वीकार करके।
  3. कटौती प्रस्ताव कर।
  4.  निंदा प्रस्ताव द्वारा।
  5. अविश्वास का प्रस्ताव पारित करके।
  6. काम रोको प्रस्ताव लाकर सरकार की गलतियों को प्रकाश में । ला सकती है।
    कार्यपालिका के नियंत्रण की सबसे बड़ी शक्ति लोकसभा को प्राप्त है। लोकसभा ही विश्वास तथा अविश्वास प्रस्ताव पारित करती है।

प्रश्न 20.
काम रोको प्रस्ताव का क्या अर्थ है?
उत्तर:
काम रोको प्रस्ताव – यदि अचानक कोई घटना या दुर्घटना घटित हो जाए तो संसद सदस्य यह प्रस्ताव रख सकते हैं कि विचाराधीन मामले को कुछ समय के लिए रोककर उस घटना पर विचार कर लिया जाए। उठाया जाने वाला मामला गंभीर होना चाहिए। अध्यक्ष को यह अधिकार है कि वह उस मामले पर वाद – विवाद की अनुमति दे अथवा न दे। काम रोको प्रस्ताव के माध्यम से संसद सदस्यों को यह मौका मिलता है कि वे मंत्रियों के कार्यों और उनकी भूलों को प्रकाश में ला सके। काम रोको प्रस्ताव के आवश्यक तत्व इस प्रकार हैं-

  1. मामला निश्चित स्वरूप का हो।
  2. उसका आधार तथ्यात्मक हो।
  3. मामला अविलम्बीय हो।
  4. वह लोक महत्व का हो।

RBSE Class 12 Political Science Chapter 20 निबंधात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
लोकसभा के गठन और शक्तियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
लोकसभा का गठन: लोकसभा, जो प्रथम या निम्न यो लोकप्रिय सदन है। इसके गठन को निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत स्पष्ट किया गया है।

1. सदस्य संख्या – मूल संविधान में लोकसभा की सदस्य संख्या 300 निश्चित की गई थी लेकिन लोकसभा की अधिकतम संख्या 352 हो सकती है। वर्तमान में लोकसभा की सदस्य संख्या 545 है।

उनमें 530 सदस्य 28 राज्यों से और 13 सदस्य संघीय क्षेत्रों से निर्वाचित होते हैं तथा 2 सदस्य आंग्ल-भारतीय वर्ग के प्रतिनिधि के रूप में राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किये जाते हैं।

2. निर्वाचन – लोकसभा के सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से वयस्क मताधिकार के आधार पर होता है। भारत में 18 वर्ष की आयु प्राप्त व्यक्ति को वयस्क माना गया है।

3. लोकसभा के सदस्यों के लिए योग्यताएँ-संविधान के अनुसार लोकसभा की सदस्यता के लिए निम्न योग्यताएँ आवश्यक हैं-

  1. वह भारत का नागरिक हो।
  2. उसकी आयु 25 वर्ष या उससे अधिक हो।
  3. वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अन्तर्गत लाभ के पद पर न हो।
  4. वह न्यायालय द्वारा पागल, दिवालिया न ठहराया गया हो।
  5. संसद द्वारा बनायी गयी किसी विधि द्वारा या उसके अधीन वह योग्य हो तथा अयोग्य सिद्ध नहीं हो।

4. कार्यकाल – लोकसभा का कार्यकाल 5 वर्ष है। प्रधानमंत्री के परामर्श पर राष्ट्रपति लोकसभा को समय से पूर्व भी भंग कर सकता है।

5. अधिवेशन – लोकसभा के अधिवेशन राष्ट्रपति द्वारा बुलाये तथा स्थगित किये जाते हैं। लेकिन लोकसभा की दो बैठकों के बीच 6 माह से अधिक़ का अंतर नही होना चाहिए।

6. गणपूर्ति – कुल सदस्यों के दसवें भाग को उपस्थिति होना सदन के संचालन के लिए आवश्यक है।

7. लोकसभा के पदाधिकारी-लोकसभा के दो पदाधिकारी हैं-

  1. अध्यक्ष और
  2. उपाध्यक्ष, जिनका चुनाव लोकसभा स्वयं ही करती है।

8. सदस्यों के वेतन – भत्ते-लोकसभा के सदस्यों को संसद द्वारा निर्धारित विधि के प्रावधानों के अनुसार वेतन भत्ते प्राप्त होते हैं। संसद ने कानून बनाकर अब संसद के पूर्व सदस्यों के लिए पेंशन का प्रावधान भी कर दिया है।

लोकसभा की शक्तियाँ: लोकसभा की शक्तियाँ निम्नलिखित हैं
1. विधायी शक्तियाँ – लोकसभा संसद का निम्न सदन है। साधारण विधेयक लोकसभा या राज्यसभा किसी में भी प्रस्तुत किये जा सकते हैं लेकिन व्यवहार में महत्वपूर्ण विधेयक पहले लोकसभा में ही प्रस्तुत किये जाते हैं। दोनों सदनों से पारित विधेयक राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिये जाते हैं। यदि दोनों सदनों में किसी विधेयक पर मतभेद हो तो राष्ट्रपति द्वारा दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलायी जा सकती है।

संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा की जाती है। संयुक्त बैठक में उपस्थित व मतदान में भाग ले रहे दोनों सदनों के कुल सदस्यों के बहुमत के आधार पर विधेयक को पारित किये जाने के प्रश्न पर निर्णय किया जाता है।

2. वित्तीय शक्तियाँ – धन विधेयक केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किये जा सकते हैं। लोकसभा से पारित वित्त विधेयकों को राज्यसभा में भेजा जाता है। राज्यसभा को 14 दिन की अवधि में ऐसे विधेयकों को पारित करके या अपनी अनुशंसाओं के साथ लोकसभा को लौटाना पड़ता है।

यदि राज्यसभा 14 दिन के अन्दर विधेयक को पारित कर लोकसभा को वापस नहीं भेजती है तो उसे स्वत: पारित हुआ मान लिया जाता है। वित्त विधेयक पर राज्यसभा द्वारा भेजी गयी अनुशंसाओं को स्वीकार करना या अस्वीकार करना लोकसभा का अधिकार है। इस प्रकार वित्तीय विषयों में लोकसभा को राज्यसभा से अधिक शक्तियाँ प्राप्त हैं।

3. कार्यपालिका पर नियन्त्रणकारी शक्तियाँ – संसदात्मक शासन व्यवस्था में मंत्रिपरिषद संसद के लोकप्रिय सदन के प्रति ही उत्तरदायी होती है। भारत में मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है। कार्यपालिका के सदस्यों से सरकारी नीतियों के सम्बन्ध में प्रश्न, पूरक प्रश्न पूछकर लोकसभा के सदस्य उस पर नियन्त्रण रख सकते हैं।

लोकसभा में काम रोको प्रस्ताव, निन्दा प्रस्ताव एवं कटौती प्रस्तावों के माध्यम से भी कार्यपालिका को जवाबदेह बनाया जाता है। संसदीय समितियों के माध्यम से भी कार्यपालिका को नियन्त्रित किया जाता है। अविश्वास प्रस्ताव द्वारा कार्यपालिका को पदमुक्त करने का अधिकार केवल लोकसभा को ही है।

बजट प्रस्तावों पर बहस करके कटौती प्रस्तावों के माध्यम से लोकसभा के सदस्य कार्यपालिका के प्रति उसका विरोध व्यक्त कर सकते हैं। सरकारी विधेयकों में संशोधन प्रस्तुत करके भी लोकसभा के सदस्य सरकार की नीतियों के प्रति विरोध प्रकट करते हैं।

4. संविधान संशोधन की शक्ति – इस सम्बन्ध में दोनों सदनों को समान शक्ति प्राप्त है । संविधान में संशेधन का प्रस्ताव किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है। संशोधन प्रस्ताव तभी स्वीकृत माना जायेगा जबकि उसे संसद के दोनों सदनों द्वारा अलग – अलग अपने कुल बहुमत एवं उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के दो तिहाई बहुमत से पारित कर दिया जाये। संविधान संशोधन विधेयक पर दोनों सदनों में मतभेद पर संयुक्त बैठक का प्रावधान नहीं है।

5. निर्वाचन सम्बन्धी शक्तियाँ – लोकसभा, राज्यसभा एवं राज्य विधानसभा के सभी निर्वाचित सदस्य राष्ट्रपति के निर्वाचन में भाग लेते हैं। लोकसभा के सदस्य राज्यसभा के साथ उपराष्ट्रपति के निर्वाचन में भाग लेते हैं। लोकसभा अपने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का निर्वाचन करती है तथा अविश्वास के प्रस्ताव के माध्यम से उन्हें पद से हटा सकती है।
विविध शक्तियाँ: उपर्युक्त वर्णित शक्तियों के अलावा कुछ अन्य शक्तियाँ भी लोकसभा को प्राप्त हैं

  1. लोकसभा राज्यसभा के साथ मिलकर राष्ट्रपति तथा उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों पर महाभियोग लगा सकती है। यह प्रस्ताव दोनों सदनों में अलग – अलग पारित होना आवश्यक है।
  2. उपराष्ट्रपति को पदमुक्त करने के लिए राज्यसभा से पारित बहुमत का प्रस्ताव तभी पारित समझना जायेगा, जबकि लोकसभा बहुमत द्वारा उसे प्रस्ताव का अनुमोदन कर दे।

प्रश्न 2.
राज्यसभा का गठन एवं शक्तियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत में व्यवस्थापिका या संसद के द्वितीय सदन को राज्यसभा कहा जाता है। इसे उच्च सदन या स्थायी सदन या राज्यों के सदन की भी संज्ञा दी जाती है। यह एक स्थायी सदन है जिसका कभी विघटन नही होता।
राज्यसभा का गठन – राज्यसभा संसद का द्वितीय या उच्च सदन है। इसके गठन को निम्नलिखित तरह से स्पष्ट किया जा सकता है

1. सदस्य संख्या और निर्वाचन पद्धति-संविधान के अनुसार राज्यसभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या 250 हो सकती है परन्तु वर्तमान समय में यह संख्या 245 ही है इनमें से 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किये जाते हैं। ये ऐसे व्यक्ति होते हैं जिन्हें कला, साहित्य, विज्ञान, समाज सेवा या खेल के क्षेत्र में विशेष ज्ञान या अनुभव प्राप्त हो।

राज्य विधानमण्डलों द्वारा 233 सदस्य निर्वाचित होते हैं एवं इन सदस्यों को चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमणीय पद्धति के अनुसार संघ के विभिन्न राज्यों और संघीय क्षेत्रों की विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा किया जाता है।

2. सदस्यों की योग्यताएँ-राज्यसभा के सदस्यों के लिये योग्यताएँ इस प्रकार हैं-

  1. वह भारत का नागरिक हो।
  2. उसकी आयु 30 वर्ष से कम न हो।
  3. वह ऐसी योग्यताएँ रखता हो जो संसद समय-समय पर निर्धारित करे।
  4. प्रत्याशी को उस राज्य का संसदीय मतदाता होना चाहिए जिससे वह चुनाव लड़ रहा है।
  5. वह सरकार के अधीन लाभ के पद पर न हो।
  6. वह पागल व दिवालिया न हो।

3. सदस्यों का कार्यकाल – राज्यसभा एक स्थायी सदन है, जो कभी भंग नहीं होता। इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष है। राज्यसभा के एक तिहाई सदस्य प्रति दो वर्ष बाद सेवानिवृत्त हो जाते हैं।

4. गणपूर्ति – सदन में कुल सदस्यों के 1 / 10 वें भाग के उपस्थित होने पर सदन की बैठकों की गणपूर्ति हो जाती है।

5. प्रमुख पदाधिकारी – राज्यसभा के दो प्रमुख पदाधिकारी होते हैं-सभापति और उपसभापति। भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है और उसका कार्यकाल 5 वर्ष है। राज्यसभा अपने सदस्यों में से किसी एक को 6 वर्ष के लिए उपसभापति निर्वाचित करती है।
6. राज्यसभा की शक्तियाँ/कार्य – राज्यसभा की शक्तियों एवं कार्यों का विवेचन निम्नलिखित बिन्दुओं के अन्तर्गत किया गया है

7.विधायी शक्तियाँ-लोकसभा के साथ – साथ राज्यसभा भी विधि निर्माण सम्बन्धी कार्य करती है। संविधान के द्वारा अवित्तीय विधेयकों के सम्बन्ध में लोकसभा और राज्यसभा दोनों को बराबर शक्तियाँ प्रदान की गई हैं।

8. संविधान संशोधन की शक्ति – संविधान संशोधन के सम्बन्ध में राज्यसभा को लोकसभा के समान ही शक्ति प्राप्त है। संशोधन प्रस्ताव पर संसद के दोनों सदनों में असहमति होने पर संविधान में संशोधन का प्रस्ताव गिर जायेगा।

9. वित्तीय शक्ति – राज्यसभा को कुछ वित्तीय शक्ति प्राप्त है यद्यपि इस सम्बन्ध में संविधान द्वारा राज्यसभा को लोकसभा की तुलना में निर्बल स्थिति प्रदान की गयी है। संविधान के अनुसार धन विधेयक पहले लोकसभा में ही प्रस्तावित

किये जायेंगे। लोकसभा से स्वीकृत होने पर धन विधेयक राज्यसभा में भेजे जायेंगे, जिसके द्वारा अधिक से अधिक 14 दिन तक इस विधेयक पर विचार किया जा सकेगा। राज्यसभा धन विधेयक के सम्बन्ध में अपने सुझाव लोकसभा को दे सकती है, लेकिन यह लोकसभा की इच्छा पर निर्भर है कि वह उन प्रस्तावों को माने या न माने ।

10. कार्यपालिका सम्बन्धी शक्ति – संसदात्मक शासन व्यवस्था में मंत्रिपरिषद संसद के लोकप्रिय सदन के प्रति ही उत्तरदायी है।

अतः भारत में भी मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है, राज्यसभा के प्रति नहीं। राज्यसभा के सदस्य मंत्रियों से प्रश्न पूछ सकते हैं और उनकी आलोचना भी कर सकते हैं, परन्तु इन्हें अविश्वास प्रस्ताव द्वारा मंत्रियों को हटाने का अधिकार नही हैं।

11. निर्वाचन सम्बन्धी एवं अन्य शक्तियाँ-उपर्युक्त शक्तियों के अतिरिक्त राज्यसभा को कुछ अन्य शक्तियाँ भी प्राप्त हैं जिनका प्रयोग वह लोकसभा के साथ मिलकर करती है। ये शक्तियाँ व कार्य इस प्रकार हैं-

  1. राज्यसभा के निर्वाचित सदस्य राष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेते हैं।
  2. राज्यसभा के सदस्य लोकसभा के सदस्यों के साथ मिलकर उपराष्ट्रपति का चुनाव करते हैं।
  3. राज्यसभा लोकसभा के साथ मिलकर राष्ट्रपति, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं कुछ पदाधिकारियों पर महाभियोग लगा सकती है। महाभियोग का प्रस्ताव तभी पारित समझा जाता है, जब दोनों सदन इस प्रकार के प्रस्ताव को स्वीकार कर लें।
  4. राज्यसभा लोकसभा के साथ मिलकर बहुमत से प्रस्ताव पास कर उपराष्ट्रपति को उसके पद से हटा सकती है। उपराष्ट्रपति को पद से हटाने का प्रस्ताव प्रथम बार राज्यसभा में ही पारित होकर लोकसभा के पास जाता है।

12. राज्यसभा की विशिष्ट व अनन्य शक्तियाँ-राज्यसभा को निम्नलिखित ऐसे अन्य अधिकार भी प्राप्त हैं ज़ो लोकसभा को प्राप्त नहीं हैं और जिनका प्रयोग अकेले राज्यसभा ही करती है

  1. अनुच्छेद 249 के अनुसार राज्यसभा उपस्थित और मतदान में भाग लेने वाले सदस्यों के दोतिहाई बहुमत से राज्य सूची के किसी विषय को राष्ट्रीय महत्व का विषय घोषित कर सकती है।
  2. अनुच्छेद 312 के अनुसार राज्यसभा ही अपने दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पास कर नयी अखिल भारतीय सेवायें स्थापित करने का अधिकार केन्द्रीय सरकार को दे सकती है।
  3. यदि आपातकालीन उद्घोषणा के समय लोकसभा का विघटन हो गया हो, अथवा ऐसी उद्घोषणा के दो महीने के अन्दर वह विघटित हो जाए तो केवल राज्यसभा की स्वीकृति से ही आपातकालीन उद्घोषणा उस समय तक प्रभावी रह सकती है जब तक कि नई लोकसभा में उसकी पहली बैठक से एक माह के अन्दर वह स्वीकार या अस्वीकार न हो जाये।

प्रश्न 3.
राज्यसभा और लोकसभा की तुलना कीजिए।
उत्तर:
राज्यसभा और लोकसभा की तुलना निम्न प्रकार हैराज्यसभा लोकसभा

राज्यसभा लोकसभा
1. राज्यसभा के सदस्यों की संख्या 250 है। 1. लोकसभा में अधिकतम 552 सदस्य हो सकते हैं। परन्तु वर्तमान में सदस्यों की संख्या 545 है।
2. यह राज्यों एवं संघीय क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती है। 2. यह समस्त जनता का प्रतिनिधित्व करती है।
3. राज्यसभा एक स्थायी सदन है, जिसका विघटन नहीं इसका कार्यकाल पाँच किया जा सकता।इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है। कार्यकाल पूर्ण होने के पहले भी वर्षों का होता है  प्रत्येक दो वर्ष बाद एक तिहाई राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की सलाह पर इसे भंग किया सदस्य अवकाश ग्रहण कर लेते हैं एवं उतने ही जा सकता है। नवनिर्वाचित भी हो जाते हैं 3. लोकसभा स्थायी सदन नहीं है
4. राष्ट्रपति द्वारा 12 सदस्यों को मनोनीत किया जाता है।  4. राष्ट्रपति द्वारा आंग्ल-भारतीय समुदाय के 2 सदस्यों को मनोनीत किया जाता है।
5. राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से । आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर खुली मतदानप्रक्रिया द्वारा होता है। 5. लोकसभा के सदस्यों का चुनाव वयस्क मताधिकार के | आधार पर प्रत्यक्ष रूप से गुप्त मतदान प्रक्रिया द्वारा होता
6. मंत्रिपरिषद् राज्यसभा के प्रति उत्तरदायी नही होती है।  6. मंत्रिपरिषद केवल लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
7. धन विधेयक राज्यसभा में प्रस्तुत नही किए जा सकते। 7. धन विधेयक केवल लोकसभा में प्रस्तुत किए जा सकते है।
8. राज्यसभा द्वारा राज्यसूची के किसी विषय का राज्यसभा में उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के कम – से – कम दो तिहाई सदस्यों द्वारा समर्पित संकल्प द्वारा राष्ट्रीय महत्व का घोषित किया जा सकता है। 8. लोकसभा को यह अधिकार प्राप्त नहीं है।
9. राज्यसभा को अखिल भारतीय सेवाओं का सृजन |  करने का अधिकार प्राप्त है। 9. लोकसभा को यह अधिकार प्राप्त नहीं है।
10. उपराष्ट्रपति को हटाने हेतु प्रस्ताव का आरम्भ राज्यसभा में ही किया जाता है। 10. लोकसभा राज्यसभा द्वारा पारित प्रस्ताव का अनुमोदन में ही किया जाता है। करती है।
11. लोकसभा के भंग होने की स्थिति में आपातकाल की उद्घोषणा का अनुमोदन राज्यसभा द्वारा किया जाता है। 11. लोकसभा को इस प्रकार के विशेषाधिकार की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि राज्यसभा विघटित नही

होती है।

12. राज्यसभा का सभापति इसका सदस्य नही होता भारत का उपराष्ट्रपति ही इसका पदेन सभापति होता है। उपसभापति राज्यसभा का सदस्य होता है। जिसका निर्वाचन सदस्यों द्वारा किया जाता है। 12. लोकसभा के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष इसके सदस्य होते। इनका निर्वाचन सदस्यों द्वारा किया जाता है।

प्रश्न 4.
लोकसभा के अध्यक्ष की शक्तियों के कार्यों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
लोकसभा के अध्यक्ष की शक्तियाँ एवं कार्य-लोकसभा के अध्यक्ष की शक्तियों व कार्यों को निम्नलिखित बिंदुओं के द्वारा स्पष्ट कर सकते हैं

  1. जब किसी विधेयक के पक्ष तथा विपक्ष में बराबर – बराबर मत आते हैं तो लोकसभाध्यक्ष (स्पीकर) निर्णायक मत देता है।
  2. अध्यक्ष को लोकसभा में दलों तथा समूहों को मान्यता देने की शक्ति प्राप्त है।
  3. वह लोकसभा की कार्यवाही का संचालन करता है।
  4. संविधान के अनुसार उसे लोकसभा की बैठक स्थगित करने या गणपूर्ति न होने की स्थिति में बैठक निलंबित करने की भी शक्ति प्राप्त है।
  5. लोकसभा में व्यवस्था बनाए रखना अध्यक्ष की जिम्मेदारी है और वह सदस्यों से नियमों का पालन करवाता है।
  6. लोकसभा में याचिकाएँ पेश करने के लिए भी अध्यक्ष की स्वीकृति आवश्यक है।
  7. लोकसभा के नेता के परामर्श से वह बजट, विनियोग विधेयक और वित्त विधेयक पर सभा द्वारा विचार के लिए दिन और समय निश्चित करता है।
  8. उसकी सहमति के बिना किसी सदस्य, सभा या उसकी सहमति के विशेषाधिकार भंग से सम्बद्ध कोई भी प्रश्न सभा में नहीं उठाया जा सकता।
  9. प्रवर समितियों के सभापतियों की नियुक्ति भी अध्यक्ष के द्वारा ही होती है।
  10. वह सदन में दर्शकों तथा प्रेस के प्रतिनिधियों के प्रवेश पर रोक लगा सकता है।
  11. समस्त औपचारिक अवसरों पर अध्यक्ष ही लोकसभा का प्रतिनिधित्व करता है।
  12. अध्यक्ष अनेक सम्मानजनक पदों को भी सुशोभित करता है।
  13. लोकसभा के सदस्यों के विशेषाधिकारों की रक्षा करना भी अध्यक्ष का कार्य है। विरोधी दलों के हितों की रक्षा भी उसी के द्वारा की जाती है।
  14. ‘काम रोको प्रस्ताव’ भी उसी की अनुमति मिलने पर पेश हो सकते हैं।
  15. लोकसभा के सभी भाषण उसी को संबोधित करके दिए जाते हैं।
  16. बजट पर होने वाले भाषणों की सीमा भी उसी के द्वारा निर्धारित होती है।
  17. सदन में अनुशासन स्थापित करना भी अध्यक्ष का ही कार्य है।
  18. कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं। इसका निर्णय अध्यक्ष ही करता है।
  19. सदन के निर्णयों को उचित अधिकारियों तक पहुँचाता है।
  20. संयुक्त अधिवेशन की स्थिति में लोकसभा का अध्यक्ष ही अध्यक्षता करता है।