Rajasthan Board RBSE Class 10 Social Science Solutions Chapter 2 संघर्षकालीन भारत-1206 ई० से 1757 ई० तक

पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न [Textbook Questions Solved]

संघर्षकालीन भारत-1206 ई० से 1757 ई० तक अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
गुलाम वंश का अन्य नाम क्या है?
उत्तर:
यामिनी या इल्बरी वंश ।

प्रश्न 2.
रजिया सुल्तान ने याकूत को किस पद पर नियुक्त किया था?
उत्तर:
अमीर अखूर (अश्वशाला का प्रधान)।

प्रश्न 3.
‘लौह एवं रक्त’ की नीति को लागू करनेवाला शासक कौन था?
उत्तर:
बलबन।

प्रश्न 4.
बाबरनामा का फ़ारसी में अनुवाद किसने किया था?
उत्तर:
अब्दुर्ररहीम खानखाना।

प्रश्न 5.
“अँड ट्रंक रोड’ किस शासक ने बनवाई थी?
उत्तर:
शेरशाह सूरी।

प्रश्न 6.
पानीपत की दूसरी लड़ाई कब हुई थी?
उत्तर:
1556 ई०

प्रश्न 7.
हेमू ने कौन-सी उपाधि धारण की थी?
उत्तर:
राजा विक्रमजीत की उपाधि धारण की थी।

प्रश्न 8.
विश्व प्रसिद्ध हल्दीघाटी युद्ध कब हुआ था?
उत्तर:
1576 ई० में

प्रश्न 9.
अकबर ने कौन-से धर्म का प्रवर्तन किया था?
उत्तर:
दीन-ए-इलाही।

प्रश्न 10.
बहमनी साम्राज्य का संस्थापक कौन था?
उत्तर:
हसन (जफरशाह)।

प्रश्न 11.
‘अकालतख्त’ का निर्माण सिखों के किस गुरु ने करवाया था?
उत्तर:
सिखों के छठे गुरु हरगोविन्द सिंह ने।

प्रश्न 12.
शिवाजी का राज्याभिषेक कहाँ हुआ था?
उत्तर:
रायगढ़ के दुर्ग में।

प्रश्न 13.
हम्मीर चौहान कहाँ का शासक था?
उत्तर:
रणथम्भौर का शासक था।

प्रश्न 14.
‘अमर सिंह का फाटक’ कहाँ पर है?
उत्तर:
दिल्ली के लाल किले में।

संघर्षकालीन भारत-1206 ई० से 1757 ई० तक लघूत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
मुहम्मद तुगलक की पाँच योजनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर:
मुहम्मद तुगलक की पाँच योजनाओं में दोआब में कर वृद्धि, देवगिरी को राजधानी बनाना, सांकेतिक मुद्रा का प्रचलन, खुरासान पर आक्रमण, कराचल की ओर अभियान प्रमुख है।

प्रश्न 2.
‘सिकंदरी गज’ के बारे में बताइए।
उत्तर:
सिकंदर लोदी ने एक गज चलाया जो प्राय: 30 इंच का होता था। यह गज लंबे समय तक सिकंदरी गज के नाम से चलता रहा। इस गज का उपयोग भूमि की नाप के लिए किया गया था जिससे कि भूमिकर को आसानी से वसूला जा सके।

प्रश्न 3.
फरीद को शेर खाँ की उपाधि किसने एवं क्यों दी? ।
उत्तर:
दक्षिणी बिहार के तत्कालीन शासक बहार खाँ ने निहत्थे फरीद द्वारा शेर मार दिए जाने पर उसे शेर खाँ की उपाधि प्रदान की।

प्रश्न 4.
विजयनगर साम्राज्य का परिचय दीजिए।
उत्तर:
संगम के पाँच पुत्रों ने जिसमें हरिहर तथा बुक्का सर्वाधिक प्रसिद्ध थे, तुंगभद्रा नदी के उत्तरी तट पर विजयनगर राज्य की नींव डाली। वे वारंगल के काकतियों के सामंत थे। 1336 ई० में हरिहर तथा बुक्का ने विजयनगर साम्राज्य की नींव डाली थी, जो कि शीघ्र ही दक्षिण भारत का शक्तिशाली राज्य बन गया। हरिहर ने होयसल के सारे प्रदेश को 1346 ई० में विजयनगर के अधिकार में ला दिया। बुक्का 1346 ई० में अपने भाई हरिहर का उतराधिकारी बना। उसने 1377 ई० राज्य किया। सारे दक्षिण भारत, रामेश्वरम, तमिल व चेर प्रदेश तक बुक्का ने विजयनगर सम्राज्य को फैलाया।

प्रश्न 5.
राव शेखा के बारे में आप क्या जानते हैं?
उत्तर:
महाराव शेखा का जन्म 1433 ई० को हुआ था। इनके पिता मोकल एवं माता का नाम निर्वाण था। राव मोकल आमेर राज्य के अंतर्गत आने वाले नान के शासक थे। 1445 ई० में बारह वर्ष की उम्र में शेखा ने अपने पिता का उत्तरदायित्व सँभाला। आमेर के शासक उदयकरण ने शेखा को महाराव की उपाधि प्रदान की थी। 16 वर्ष की उम्र में मुल्ताने, सेवार, नगरचल के साखला राजपूत पर अचानक आक्रमण कर विजय प्राप्त करना शेखा का पहला सफल अभियान था।

1473 ई० से 1477 ई० में राव शेखा ने पन्नी पढ़ानों की सहायता से नोपसिंह जादू से दादरी और अन्य जाटू राजपूतों से भिवानी पर विजय प्राप्त की। उसने इस्तर खान से हांसी, हेदाखान कायमखानी से हिसार को जीतकर अपने राज्य की सीमा का विस्तार किया। 1449 ई० में आमेरसर को अपने राज्य की राजधानी बनाया। उसे जयपुर के कछवाहा वंश के उपवर्ग शेखावत का संस्थापक माना जाता है।

प्रश्न 6.
बन्दा बैरागी कौन था?
उत्तर:बन्दा बैरागी का मूल नाम माधोदास था। इनका 1670 ई० में राजपूत परिवार में जन्म हुआ था और गोदावरी के तट पर आश्रम में निवास करते थे। गुरु गोविन्द सिंह के दक्षिण प्रवास के समय इन्होंने स्वयं को गुरु का बन्दा कहा, अतः बन्दा बैरागी के नाम से पहचाने गए। गुरु की आज्ञा से वे गुरु की शेष कार्य पूरा करने पंजाब पहुँचे। बन्दा बैरागी ने वजीर खाँ को हराकर सरहिंद पर कब्जा कर लिया। सरहिंद की विजय से उत्साहित होकर सिक्खों ने अमृतसर, कालानौर, बटाला और पठानकोट पर अधिकार कर लिया।

पंजाब में मुगल प्रशासन समाप्त हो गया। नये मुगल बादशाह फारुखसियर ने सफदर खाँ के नेतृत्व में मुगल सेना बन्दा के खिलाफ भेजी। डेरा बाबा में लंबे समय तक घिरे रहने के बाद बंदा ने आत्मसमर्पण किया। दिल्ली में वह अपने सैकड़ों साथियों के साथ मौत के घाट उतार दिए गए।

संघर्षकालीन भारत-1206 ई० से 1757 ई० तक निबंधात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
दिल्ली सल्तनत के प्रशासन के बारे में बताइए।
उत्तर:
सल्तनत कालीन प्रशासन
(i) सुल्तानः सुल्तान की उपाधि तुर्की शासकों द्वारा प्रारंभ की गयी। राज्य की संपूर्ण शक्ति सुल्तान के हाथ में थी। | वह प्रधान न्यायाधीश, राजनीति एवं महत्व दोनों क्षेत्रों का अधिपति होता था।

(ii) अमीरः सुल्तान की शक्ति पर अमीर वर्ग का प्रभाव रहा। अमीरों के दो वर्ग तुर्क तथा गैर तुर्क थे।

(iii) केंद्रीय शासनः मजलिस-ए-खलअत मंत्री परिषद की तरह होती थी। वजीर, आरिजे मुमालिक, दीवाने इंशा, दीवाने
रिसालत इसके चार स्तंभ थे।

(iv) वजीरः वजीर का कार्यालय दीवाने-ए-विजारत कहलाता था। इसे वित्त विभाग कहा जा सकता है। मुस्तौफी (महालेखा परीक्षक), खजीन (खजाँची), मजम आदार (हिसाब संग्रहकर्ता) इस विभाग के कर्मचारी होते थे।

(v) दीवान-ए-मुस्तखराजः जलालुद्दीन खिलजी ने दीवाने वक्फ एवं अलाउद्दीन ने दीवान-ए-मुस्तखराज विभाग की स्थापना की थी। ये वित्त विभाग के अन्तर्गत ही आते थे। मुहम्मद बिन तुगलक ने भूमि को कृषि योग्य बनाने हेतु दीवाने-अमीर-कोही की स्थापना की।

(vi) दीवाने इंशाः शाही पत्र व्यवहार का दायित्व था।

(vii) दीवाने रियासतः इसका कार्य विदेश मंत्री की तरह था।

(viii) सेद्र उस सुदूरः धर्म विभाग का प्रमुख होता था।

(iv) काजी उल-कुजातः न्याय विभाग ।

(iX) वरीद-ए-मुमालिकः सूचना विभाग

प्रश्न 2.
सवाई जयसिंह के योगदान को स्पष्ट करें।
उत्तर:
सवाई जयसिंह ने 1725 ई० में नक्षत्रों की गति की गणना करने के लिए एक शुद्ध सारणी का निर्माण करवाया।
जयसिंह ने ज्योतिष विद्या पर जयसिंह कारिका नामक ग्रंथ लिखा। जयसिंह ने भारत में ज्योतिष के अध्ययन के लिए पाँच वेधशालाएँ बनवाई। ये जयपुर, दिल्ली, मथुरा, बनारस और उज्जैन में स्थित थीं। जयपुर का जंतर-मंतर पाँचों वेधशालाओं में सबसे बड़ी वेधशाला है।

जुलाई 2010 ई० में इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित कर लिया गया है। जयपुर का प्राचीन नाम जयनगर था। सवाई जयसिंह ने आमेर की जगह जयपुर को कछवाहा राजवंश की राजधानी बनाया। जयपुर की स्थापना से पूर्व इस स्थान पर एक शिकार होदी स्थित थी। इसी होदी को सवाई जयसिंह ने बादल महल का रूप दे दिया और जयपुर शहर के निर्माण की शुरुआत की। सवाई जयसिंह अंतिम हिंदू शासक था, जिसने 1740 ई० में राजसूय/वाजपेय/अश्वमेध यज्ञ करवाया। यह यज्ञ करने
वाले ब्राह्ममणों के रहने के लिए सवाई जयसिंह ने जलमहलों का निर्माण करवाया।

प्रश्न 3.
‘हल्दीघाटी युद्ध’ पर निबंध लिखिए।
उत्तर:
महाराणा प्रताप ने और मुगलों की सेना के बीच हल्दी घाटी का युद्ध हुआ था। मुगलों की सेना का नेतृत्व मानसिंह कर रहे थे और दूसरी तरफ महाराणा प्रताप की सेना थी। महाराणा प्रताप ने गोगुंदा और खमनौर की पहाड़ियों के मध्य स्थित हल्दी घाटी नामक तंग घाटी में अपना पड़ाव डाला। इस घाटी में एक बार में एक आदमी ही प्रवेश कर सकता था। इसलिए सैनिकों की कमी होते हुए भी महाराणा प्रताप के लिए मोर्चाबंदी के लिए यह सर्वोत्तम स्थान था, जहाँ प्रताप के पहाड़ों से परिचित सैनिक आसानी से छिपकर आक्रमण कर सकते थे।

वहीं मुगल सैनिक भटक कर मेवाड़ के सैनिकों से टकराकर या भूखे प्यासे मरकर जीवन गॅवा सकते थे। अंत में दोनों सेनाएँ 18 जून, 1576 ई० को प्रात:काल युद्ध भेरी के साथ आमने-सामने हुई। राजपूतों ने मुगलों पर पहला वार इतना आक्रामक किया कि मुगल सैनिक चारों ओर जान बचाकर भागे। इस प्रथम चरण के युद्ध में हकीम खाँ सूर का नेतृत्व सफल रहा। मुगल इतिहासकार बदायूँनी खाँ जो कि मुगल सेना के साथ था, वह स्वयं भी उस युद्ध से भाग खड़ा हुआ। मुगलों की आरक्षित फौज के प्रभारी मिहतर खाँ ने यह झूठी अफवाह फैला दी की बादशाह अकबर स्वयं शाही सेना लेकर आ रहे हैं। अकबर के सहयोग की बात सुनकर मुगल सेना की हिम्मत बँधी और वो पुनः युद्ध के लिए तत्पर होकर आगे बढ़ी।

महाराणा प्रताप की नजर मुगल सेना के सेनापति मानसिंह पर पड़ी। स्वामीभक्त घोड़े चेतक ने स्वामी का संकेत समझकर अपने कदम उस ओर बढाए जिधर मुगल सेनापति मानसिंह ‘मरदाना’ नामक हाथी पर बैठा हुआ था। चेतक ने अपने पैर हाथी के सिर पर टिका दिए। महाराणा प्रताप ने अपने भाले का भरपूर प्रहार मानसिंह पर किया परंतु मानसिंह हौदे में छिप गया और उसके पीछे बैठा अंगरक्षक मारा गया व हौदे की छतरी का एक खंभा टूट गया।

इसी समय हाथी की पूँड़ में बँधे हुए जहरीले खंजर से चेतक की टाँग कट गई। उसी समय मुगलों की शाही सेना ने प्रताप को चारो ओर से घेर लिया। बड़ी सादड़ी का झाला मन्ना सेना को चीरते हुए राणा के पास पहुँचा और महाराणा से निवेदन किया कि आप राजचिह्न उतार कर मुझे दे दीजिए और आप इस समय युद्ध के मैदान से चले जाएँ इसी में मेवाड़ की की भलाई है। चेतक के घायल होने की स्थिति को देखकर राणा ने वैसा ही किया। राजचिह्न के बदलते ही सैकड़ों तलवारें झाला मन्ना पर टूट पड़ी। झाला मन्ना इन प्रहारों का भरपूर सामना करते हुए वीरगति को प्राप्त हुआ।
महाराणा प्रताप का स्वामी भक्त घोड़ा चेतक बलीचा गाँव में स्थित एक छोटा नाला पार करते हुए परलोक सिधार गया।
महाराणा प्रताप जो कभी भी किसी परिस्थिति में नहीं रोए परंतु चेतक की मृत्यु पर उनकी औखों से आँसू निकल पड़े।

प्रश्न 4.
मराठों के उदय में शिवाजी का योगदान बताइए।
उत्तर:
12 वर्ष की अल्प आयु में शिवाजी ने अपने पिता से पूना की जागीर प्राप्त की। सर्वप्रथम 1646 ई० में 19 वर्ष की
आयु में उन्होंने कुछ मावले युवकों का एक दल बनाकर पूना के निकट स्थित तोरण दुर्ग पर अधिकार कर लिया। 1646 ई० में ही उन्होंने बीजापुर के सुल्तान से रायगढ़, चाकन तथा 1647 ई० में बारामती, इन्द्रपुर, सिंहगढ़ तथा पुरंदर का दुर्ग छीन लिया। 1656 ई० में शिवाजी ने कोंकण में कल्याण और जावली का दुर्ग भी अधिकृत कर लिया। 1656 में ही उन्होंने अपनी राजधानी रायगढ़ में बनायी। शिवाजी के साम्राज्य विस्तार की नीति से रूष्ट होकर बीजापुर के सुल्तान ने 1659 ई० में अफजल खाँ नामक अपने सेनापति को उनका दमन करने के लिए भेजा। संधिवार्ता के दौरान अफजल खाँ द्वारा धोखा देने पर शिवाजी ने बघनखे से उसका पेट फाड़ डाला।

1663 ई० में दक्कन के मुगल वायसराय शाइस्ता खाँ को शिवाजी के दमनार्थ औरंगजेब ने नियुक्त किया, जिसने शिवाजी के केंद्र स्थल पूना पर अधिकार कर लिया। लेकिन शीघ्र ही शिवाजी ने शाइस्ता खाँ के शिविर पर रात्रि में आक्रमण किया, जिसमें उसे अपना एक पुत्र और अपनी तीन उँगलियाँ आँवाकर भागना पड़ा। 1664 ई० में शिवाजी ने मुगलों के अधीन सूरत को लूटा। इन सभी गतिविधियों से क्रुद्ध होकर औरंगजेब ने अपने मंत्री आमेर के राजा मिर्जा जयसिंह और दिलेर खान को भेजा। मुगल सेना ने उनके अनेक किले अधिकृत कर लिए। विवश होकर शिवाजी ने जयसिंह के साथ 1665 ई० में संधि कर ली जो पुरंदर की संधि के नाम से जाना जाता है।

1666 ई में शिवाजी को आगरा किले में नजरबंद कर लिया गया। लेकिन नवम्बर 1666 ई० में वे अपने पुत्र शम्भाजी के साथ गुप्त रूप से कैद से निकल भागे और सुरक्षित अपने घर पहुँचे। अगले वर्ष ही औरंगजेब ने शिवाजी को राजा की उपाधि और बरार की जागीर प्रदान की। दो वर्ष तक शिवाजी ने शांति बनाए रखी। लेकिन 1670 ई० में उन्होंने विद्रोह करके मुगलों की अधीनता में चले जानेवाले अपने सभी किलों पर कब्जा कर लिया। खान देश के कुछ भू-भागों में स्थानीय मुगल पदाधिकारियों को सुरक्षा का वचन देकर उनसे चौथ वसूलने का लिखित समझौता भी उन्होंने किया। 1670 ई० में उन्होंने सूरत को दुबारा लूटा। 1674 ई० में रायगढ़ के दुर्ग में शिवाजी ने महाराष्ट्र के स्वतंत्र शासक के रूप में अपना राज्याभिषेक कराया। इस अवसर पर उन्होंने ‘छत्रपति’ की उपाधि भी धारण की। 1680 ई० में शिवाजी की मृत्यु हो गई। इस समय उनका मराठा राज्य बेलगाँव से लेकर तुंगभद्रा नदी के तट तक समस्त पश्चिमी कर्नाटक में विस्तृत था।

प्रश्न 5.
गुरुनानक देव का परिचय देते हुए सिख धर्म की प्रमुख शिक्षाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
15 अप्रैल, 1469 ई० को गुरुनानक देव का जन्म हुआ। इनका विवाह सुलखनी के साथ हुआ। नानक की अध्यात्म
के प्रति रुचि थी। नानक ने ‘मानुष की जात सबै एक’ इसी तत्व का प्रचार करते हुए भारत भ्रमण किया। इनकी इस तरह की यात्राओं को उदासियाँ कहा जाता है। गुरुनानक देव की शिक्षाएँ

(i) एक ईश्वर में विश्वास, नाम की महानता और उपासना, गुरु की महानता।
(ii) मानव को शुभ कर्म करने पर बल दिया एवं जाति, पाति, ऊँच-नीच का विरोध कर समाज सुधार का कार्य किया।
(iii) लंगरप्रथा का प्रचलन, सत्संग के केंद्र मन्झियाँ की स्थापना की जानी चाहिए।

अतिरिक्त प्रश्नोत्तर (More questions solved)

संघर्षकालीन भारत-1206 ई० से 1757 ई० तक अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
भारत में अरबों द्वारा पहला समुद्री आक्रमण कब और कहाँ हुआ? ।
उत्तर:
उमर खलीफा के समय 636 ई० में अरबों द्वारा पहला समुद्री आक्रमण ढाणे पर हुआ।

प्रश्न 2.
कुतुबुद्दीन ऐबक को दूसरे किस नाम से पुकारा जाता था?
उत्तर:
कुतुबुद्दीन ऐबक को लाख बख्श भी कहा जाता था।

प्रश्न 3.
कुतुबमीनार किस सूफी संत की स्मृति में बनवाया गया?
उत्तर:
प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा कुतुबददीन बख्तियार काकी की स्मृति में कुतुबमीनारे का निर्माण करवाया गया था।

प्रश्न 4.
कुतुबमीनार को किसने बनवाया?
उत्तर:
कुतुबमीनार की पहली मंजिल कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा बनवायी गयी। कुतुबमीनार का शेष भाग इल्तुतमिश ने पूरा कराया।

प्रश्न 5.
बलबन ने किस प्रथा की शुरुआत की?
उत्तर:
बलबन ने सिजदा और पाबोस (सम्राट के सम्मुख झुककर उसके पैरों को चूमना) की प्रथा को दरबार में शुरू की।

प्रश्न 6.
बलबन की लौह और रक्त की नीति क्या थी?
उत्तर:
बलबन ने शत्रुओं के प्रति लौह और रक्त की नीति अपनायी, जिसमें पुरुषों को मार दिया जाता था व बच्चों और स्त्रियों को गुलाम बनाया जाता था।

प्रश्न 7.
अमीर खुसरो ने अलाउद्दीन को कैसी पदवियों से विभूषित किया है?
उत्तर:
खजाइनुल फुतूह में अमीर खुसरों ने अलाउद्दीन को विश्व का सुल्तान और जनता का चरवाहा जैसी पदवियों से विभूषित किया है।

प्रश्न 8.
अलाउद्दीन खिलजी ने कौन-कौन सी उपाधि धारण की थी?
उत्तर:
अलाउद्दीन खिलजी ने खलीफा की सत्ता को मान्यता देते हुए स्वयं यास्मिन उल खिलाफत, नासिरी अमीर उल मुमिनिन की उपाधि धारण की।

प्रश्न 9.
फिरोज तुगलक ने दिल्ली में किस तरह की खेती को प्रोत्साहित किया?
उत्तर:
फिरोज तुगलक ने दिल्ली में खरबूजों तथा अंगूरों की खेती को प्रोत्साहित किया और अनेक बाग लगवाए।

प्रश्न 10.
तैमूरलंग ने भारत पर कब और किसके शासन काल में आक्रमण किया और किसे अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया?
उत्तर:
तैमूरलंग ने भारत पर 1398 ई० में नासिरूद्दीन महमूद के शासन काल में आक्रमण किया। तैमूर ने दिल्ली को जीतकर खिज्र खाँ को अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया।

प्रश्न 11.
बाबर और राणा सांगा के बीच युद्ध कब, कहाँ हुआ? यह युद्ध बाबर ने किस पद्धति से लड़ा था?
उत्तर:
आगरा से 40 कि०मी० दूर खानवा में बाबर एवं राणा सांगा का युद्ध मार्च 1527 ई० में हुआ। बाबर ने यह युद्ध तुलगुमा पद्धति से लड़ा एवं जेहाद का नारा दिया।

प्रश्न 12.
अकबर ने धर्मशास्त्रीय चर्चा करने के लिए कौन-सी इमारत बनावाया?
उत्तर:
अकबर ने गोवा से पुर्तगाली मिशनरियों को बुलवाया। उसने धर्मशास्त्रीय चर्चा करने के लिए फतेहपुर सीकरी में 1575 ई० में इबादतखाना बनवाया।

प्रश्न 13.
विश्व प्रसिद्ध मयूर सिहांसन (तख्ते ताऊस) किसने बनवाया था?
उत्तर:
जहाँगीर ने मयूर सिंहासन (तख्ते ताऊस) बनवाया।

प्रश्न 14.
जहाँगीर के दरबार में कौन-सा ब्रिटिश दूत आया था?
उत्तर:
जहाँगीर के दरबार में ब्रिटिश दूत कैप्टन हॉकिन्स तथा सर टामस रो आए थे।

प्रश्न 15.
‘पुरंदर की संधि’ किसके-किसके बीच हुआ था?
उत्तर:
पुरंदर की संधि जून 1665 ई० में शिवाजी एवं राजा जय सिंह के मध्य हुई।

प्रश्न 16.
अलाउद्दीन खिलजी ने बाजार नियंत्रण के तहत कौन-कौन से नये पद सृजित किए?
उत्तर:
अलाउद्दीन खिलजी ने बाजार नियंत्रण के तहत दीवान-ए-रियासत (व्यापार का नियंत्रक), शाहना या दण्डाधिकारी (बाजार का दरोगा), मुहतसिब (जनसाधारण का रक्षक एवं नाप-तौल का निरीक्षण कर्ता), बरीद-ए-मुमलिक (गुप्तचर अधिकारी) आदि नये पद सृजित कर प्रशासन को ठीक किया।

प्रश्न 17.
किस शासक ने सरकारी एवं सेना की नौकरी को वंशानुगत बना दिया?
उत्तर:
फिरोजशाह ने सरकारी एवं सेना की नौकरी को वंशानुगत बना दिया।

प्रश्न 18.
फिरोजशाह तुगलक ने कौन-कौन से नगर की स्थापना की?
उत्तर:
फिरोजशाह तुगलक ने हिसार फिरोजा, फिरोजाबाद एवं जौनपुर आदि नगर बसाए।

प्रश्न 19.
फिरोजशाह तुगलक की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या थी?
उत्तर:
फिरोजशाह की सबसे बड़ी उपलब्धि थी हाँसी तथा सिरसा के क्षेत्रों में पानी की कमी दूर करने के लिए नहरों की खुदाई। एक नहर सतलज नदी से दीपालपुर के बीच तथा दूसरी यमुना नदी से सिरमूर के पास खुदवाई गई।

प्रश्न 20.
अकबर और औरंगजेब के शासन काल में कितने सूबे (प्रांत) थे?
उत्तर:
अकबर के समय 15 सूबे थे जो औरंगजेब के समय बढ़कर 21 हो गए थे।

संघर्षकालीन भारत-1206 ई० से 1757 ई० तक लघूत्तरात्मक प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
बलबन का राजत्व सिद्धान्त क्या है?
उत्तर:
बलबन के राजत्व सिद्धान्त के अनुसार राजा पृथ्वी पर ईश्वर को प्रतिनिधि है। राजा साधारण जनता से अलग व्यक्तित्व है वह ईश्वर द्वारा प्रदत्त गुणों से युक्त है जो उसे शासन करने की शक्ति प्रदान करता है।

प्रश्न 2.
अलाउद्दीन खिलजी ने विद्रोहों पर नियंत्रण के लिए कौन से आदेश जारी किए?
उत्तर:
अलाउद्दीन खिलजी ने विद्रोहों पर नियंत्रण के लिए चार आदेश जारी किए

(i) अमीर वर्ग की सम्पति जब्त करना।
(ii) खालसा भूमि को कृषि योग्य बनाना।
(iii) राजस्व में वृद्धि करना, दिल्ली में मद्य निषेध करना।
(iv) गुप्तचर प्राणाली का गठन, अमीरों के परस्पर मेल-मिलाप पर रोक लगाना।

प्रश्न 3.
अलाउद्दीन खिलजी के प्रशासनिक तथा आर्थिक सुधार के बारे में व्याख्या करें।
उत्तर:
अलाउद्दीन खिलजी ने पुलिस, गुप्तचर, डाक पद्धति एवं प्रांतीय प्रशासन में कई सुधार किए। सबसे महत्वपूर्ण सुधार बाजार नियंत्रण था। दीवान-ए-रियासत। (व्यापार का नियंत्रक), शाहना या दण्डाधिकारी (बाजार का दारोगा), मुहतसिब (जनसाधारण का रक्षक एवं नाप-तौल का निरीक्षण कर्ता), बरीद-ए-मुमालिक (गुप्तचर अधिकारी) आदि नए पद सृजित कर प्रशासन को ठीक किया। उसने अपनी एक विशाल सेना के रख-रखाव हेतु आर्थिक सुधार किए। मोलभावे सुनिश्चित करके सुल्तान ने कालाबाजारी और मुनाफाखोरी पर रोक लगा दी। सराय-ए-अदल स्थानीय एवं विदेशी वस्तुओं का बाजार था।

प्रश्न 4.
मुहम्मद बिन तुगलक के राजधानी परिवर्तन और सांकेतिक मुद्रा के बारे में व्याख्या करें।
उत्तर:
मुहम्मद बिन तुगलक अपनी राजधानी दिल्ली से दौलताबाद (देवगिरि) ले गया। सुल्तान ने 1327 से 1335 ई० में ताँबे
एवं कांसे के मिश्रित सांकेतिक सिक्के चलाए। लोगों ने जाली सिक्के बनाना आरंभ कर दिया। अतः उसे सांकेतिक मुद्रा बंद करनी पड़ी।

प्रश्न 5.
अकबर की धार्मिक नीति के बारे में व्याख्या करें।
उत्तर:
अकबर सभी धर्मों के प्रति उदारता से पेश आता था। उसने हिन्दुओं पर से जजिया कर (धार्मिक कर) को समाप्त कर दिया। अकबर ने गोवा से पुर्तगाली मिशनरियों को बुलवाया। उसने धर्मशास्त्रीय चर्चा करने के लिए फतेहपुर सीकरी में 1575 ई० में इबादतखाना बनवाया। 1581 ई० में उसने दीन-ए-इलाही धर्म की स्थापना की। अकबर ने सूफी मत के चिश्ती सम्प्रदाय को संरक्षण दिया। लाहौर एवं आगरा में ईसाइयों के लिए गिरजाघर बनवाया। उसने जैन मुनि हरिविजय सूरि को जगद्गुरु की उपाधि से संरक्षण प्रदान किया। 1583 ई० में अकबर न इलाही संवत के नाम से एक नया
कैलेण्डर जारी किया था।

प्रश्न 6.
औरंगजेब की धार्मिक नीति के बारे में व्याख्या करें।
उत्तर:
औरंगजेब एक कट्टर सुन्नी मुसलमान था। उसके शासन काल में हिन्दू व्यापारियों पर 5 प्रतिशत कर बढ़ाया गया। 1669 ई० में मंदिरों को ध्वस्त करने का आदेश औरंगजेब ने दिया। 1679 ई० में हिन्दुओं पर पुनः जजिया कर लगाया गया। औरंगजेब की धार्मिक नीति से तंग आकर इसके शासनकाल में 1668 ई० में गोकुल के नेतृत्व में जाटों व 1672 ई० में सतनामियों ने विद्रोह किया। सिक्खों के गुरु तेगबहादुर ने भी औरंगजेब के अत्याचारों के विरुद्ध आवाज उठायी। इस कारण उन्हें मार दिया गया।

प्रश्न 7.
बीकानेर के रायसिंह की उपलब्धियों के बारे में व्याख्या करें।
उत्तर:
रायसिंह ने 1589-94 ई० के मध्य अपने प्रधानमंत्री कर्मचंद की देखरेख में जूनागढ़ (बीकानेर) का निर्माण करवाया तथा वहाँ एक प्रशस्ति लगवाई, जिसे रायसिंह प्रशस्ति के नाम से जाना जाता है। रायसिंह साहित्यकार भी था, उसने रायसिंह महोत्सव, वैधक वंशावली, ज्योतिष रत्नमाला, ज्योतिष ग्रंथों की भाषा पर बाल बोधिनी नामक टीका लिखी। रायसिंह के शासन काल में बीकानेर में आकाल पड़ा। रायसिंह ने जगह-जगह सदाव्रत खोले एवं पशुओं के लिए चारे पानी की व्यवस्था की। बीकानेरी चित्रकला की शुरुआत रायसिंह के शासनकाल में मानी जाती है।

प्रश्न 8.
पुरंदर की संधि में क्या प्रावधान थे?
उत्तर:
पुरंदर की संधि में निम्न प्रावधान थे

(i) शिवाजी ने अपने कुल 35 दुर्गों में से 23 मुगलों को सौंप दिए और मात्र 12 अपने पास रखे।
(ii) शिवाजी के बड़े पुत्र शम्भाजी को मुगल दरबार में पाँच हजारी मनसबदार बनाया गया।
(iii) शिवाजी को आगरा स्थित मुगले दरबार में उपस्थित होने के लिए कहा गया।
(iv) शिवाजी को जयसिंह ने दक्षिण के मुगल सूबों का सूबेदार बनवाने का भरोसा दिया।

प्रश्न 9.
महाराजा रणजीत सिंह के बारे में व्याख्या करें।
उत्तर:
रणजीत सिंह का जन्म 1780 ई० में गुजरांवाला में हुआ। इनके दादा सुकरचकिया मिसल के वीर नेता थे। इनके पिता मान सिंह थे। आठरहवीं शताब्दी के अन्त में सिक्ख मिसलें विघटित अवस्था में थी। रणजीत सिंह ने इस स्थिति को लाभ उठाया व शीघ्र ही शक्ति के बल पर मध्य पंजाब में एक राज्य स्थापित कर लिया। रणजीत सिंह ने 1799 ई० में लाहौर पर तथा 1805 ई० में अमृतसर की नंगी मिसल पर अधिकार कर लिया। 1803 में अकालगढ़ पर कब्जा कर लिया। 1803 में अकालगढ़ पर कब्जा कर लिया। 1804 ई० में गुजरात के साहिब सिंह पर हमला कर पराजित । किया। 1808 ई० में रणजीत सिंह ने सतलज नदी पार करके फरीदकोट, मलेरकोला तथा अंबाला को जीत लिया।
1818 ई० में मुल्तान, 1834 ई० में पेशावर पर कब्जा किया। 1839 ई० में रणजीत सिंह की मृत्यु हो गई।

प्रश्न 10.
गुरु रामदास के बारे में व्याख्या करें।
उत्तर:
गुरु रामदास ने धार्मिक केंद्रों की संख्या को बढ़ाया और 500 बीघा जमीन पर विशाल सरोवर बनाया जो अमृतसर कहलाया। सिक्खों का विख्यात नगर अमृतसर इसी नाम से है। यहाँ के शक्तिशाली, समृद्ध किसान सिक्ख धर्म के अनुयायी बने। गुरु रामदास के कहने पर हरिद्वार यात्रा पर लगने वाला कर अकबर ने हटाया। अकबर से मित्रता रखकर रामदास ने सिक्खों की संख्या में वृद्धि की। गुरु रामदास ने गरीबों को दान देने की मसन्द प्रथा का प्रचलन किया। अब गुरु सतगुरु के साथ-साथ सच्चा पातशाह भी कहलाने लगे।

प्रश्न 11.
गुरु अर्जुन देव सिक्ख धर्म के सच्चे संगठनकर्ता थे। व्याख्या करें।
उत्तर:
गुरु अर्जुन देव सिक्खों के पाँचवें गुरु थे। ये सिक्ख धर्म सच्चे संगठनकर्ता सिद्ध हुए। धार्मिक अधिकारों के साथ राजनीतिक अधिकार से भी गुरु को सम्पन्न किया। जहाँगीर के विद्रोही खुसरो को आशीर्वाद देने से नाराज जहाँगीर ने इन्हें प्राणदण्ड दिया। आदिग्रन्थ का संकलन, मसन्द प्रथा को सुनिश्चित स्वरूप प्रदान करना, धन संग्रह हेतु विदेशों में अनुयायी भेजना ऐसे कार्य थे जिनसे सिक्ख धर्म आर्थिक दृष्टि से आत्मनिर्भर हुआ। अर्जुनदेव का प्राण बलिदान सिक्खों में सैन्य शक्ति के रूप में शक्तिशाली बनने का बदलाव ले आया। अर्जुनदेव को शहीद हो जाना सिक्ख धर्म के इतिहास की
एक युगांतकारी घटना भी जिससे शांतिप्रिय सिक्ख संघर्ष प्रेमी हो गए।

प्रश्न 12.
सिक्खों के गुरु हरगोविन्द सिंह के बारे में व्याख्या करें।
उत्तर:
गुरु अर्जुनदेव के बाद उनके पुत्र गुरु हरगोविन्द सिंह सिक्ख गुरु बने। इन्होंने सैली (ऊन की माला) की जगह दो तलवार धारण की। एक तलवार ‘पीरी’ धार्मिक गद्दी एवं दूसरी ‘मीरी’ राजनीतिक पदवी की प्रतीक थी। भेंट में धन के स्थान पर अस्त्र-शस्त्र लेना प्रारंभ किया। हरमन्दिर के पास एक भवन बनवाया जिसमें एक ऊँचा तख्त बनाया गया।

इसका निर्माण 1699 ई० में हुआ। इसे अकाल तख्त कहा गया। यह सिक्खों की राजनीतिक प्रभुता का प्रतीक बनकर उभरा। जहाँगीर ने गुरु अर्जुनदेव का आर्थिक जुर्माना उनके पुत्र गुरु हरगोविन्द से वसूल करना चाहा। इनकार करने पर गुरु हरगोविन्द को जेल में बंदी बनाकर ग्वालियर के किले में रखा। हालाँकि हरगोविन्द ने सिक्ख पंथ को सैनिक रूप देने का कार्य आरम्भ कर दिया था।

संघर्षकालीन भारत-1206 ई० से 1757 ई० तक निबंधात्मक प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1.
शेरशाह सूरी के शासन तथा उसकी उपलब्धियों के बारे में व्याख्या करें।
उत्तर:
शेरशाह हसन खाँ का पुत्र था जो जौनपुर राज्य के अन्तर्गत सासाराम का जमींदार था। शेरशाह और हुमायूँ के बीच चौसा का युद्ध 1539 ई० में हुआ जिसमें मुगलों की पराजय हुई। 1540 ई० में कन्नौज या बिलग्राम का युद्ध शेरशाह और हुमायूँ के मध्य हुआ। हुमायूँ हार कर भाग गया। दिल्ली की सल्तनत शेरशाह के अधिकार में चली गई। उसने अपने साम्राज्य का विस्तार किया। उसका साम्राज्य पश्चिम में कन्नौज से लेकर पूर्व में असम की पहाड़ियों तक तथा उत्तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में बंगाल की खाड़ी तक फैला हुआ था।

मालवा भी शेरशाह ने जीत लिया था। 1544 ई० में मालदेव को हराकर शेरशाह ने अजमेर, जोधपुर एवं मेवाड़ पर अधिकार कर लिया था। 1544 ई० में कालिंजर के युद्ध के दौरान बारूद में विस्फोट होने से शेरशाह की मृत्यु हो गई। शेरशाह के बाद इस्लामशाह ने 1553 ई० तक शासन किया लेकिन बाद में अयोग्य उतराधिकारियों के आपसी संघर्ष से सूर साम्राज्य का पतन हुआ।

शेरशाह के सुधार एवं निर्माण प्रसिद्ध हैं। उसने भूमि माप एवं लगान को व्यवस्थित कर गल्लाबख्शी या बंटाई, नश्क, मुकताई या कनकूत और नकदी या जब्ती प्रणाली प्रचलित की। 4 बड़ी सड़कें एवं अनेक सरायों का निर्माण करवाया। उसकी सबसे लम्बी सड़क बंगाल के सोनार गाँव से लेकर पेशावर तक थी। जिसका अस्तित्व आज भी है। यह सड़क ग्रांड ट्रंक रोड के नाम से विख्यात है। मुद्रा ढलाई में सुधार करते हुए उसने तांबे के 380 ग्रेन का दाम तथा चाँदी का 178
ग्रेन दाम का रुपया जारी किया। सासाराम में एक झील के मध्य अपने मकबरे का निर्माण करवाया।

प्रश्न 2.
हम्मीर देव चौहान के साम्राज्य विस्तार और उसके द्वारा लड़े गए प्रमुख युद्धों के बारे में व्याख्या करें।
उत्तर:
हम्मीर देव चौहान रणथम्भौर का शासक बना। हम्मीर देव ने सिंहासन पर बैठते ही दिग्विजय की नीति अपनाते हुए भीमरस के राजा अर्जुन को पराजित करके मण्लगढ़ से कर वसूल किया। दक्षिण के परमार शासक भोज को पराजित करके उत्तर की ओर चितौड़, आबू, वर्धनपुर (काठियावाड़), पुष्कर, चंपा होता हुआ वापस रणथम्भौर पहुँचा। रणथम्भौर पहुँचकर विजय के उपलक्ष्य में उसने कोटियजन यज्ञ का आयोजन करवाया। हम्मीर ने 17 युद्ध लडे, जिनमें से 16 युद्धों में विजयी रहा।

दिल्ली के जलालुद्दीन खिलजी ने हम्मीर देव की बढ़ती हुई शक्ति को देखा तो रणथम्भौर की ओर रवाना हुआ। दुर्ग की घेराबंदी कर दी। काफी दिनों के प्रयास के बाद भी सुल्तान को सफलता नहीं मिली। इसके बाद अलाउद्दीन खिलजी ने 1299 ई० में उलूग खाँ और नुसरत खाँ के नेतृत्व में शाही सेना को रणथम्भौर दुर्ग पर आक्रमण करने के लिए भेजा। हम्मीर ने अपने दो सैनिक अधिकारियों भीम सिंह और धर्म सिंह को शत्रु का मुकाबला करने के लिए भेजा।

दोनों ने अलाउद्दीन की सेना को बुरी तरह पराजित किया। कुछ ही दिनों बाद उलूग खाँ ने रणथम्भौर पर आक्रमण करके राजपूतों की सेना को परास्त किया। जिसमें भीम सिंह लड़ते हुए मारा गया। उलूग खाँ रणथम्भौर की ओर नहीं बढ़कर वापस दिल्ली लौट गया। अलाउद्दीन खिलजी के कई प्रयासों के बाद 1301 ई० में रणथम्भौर पर अलाउद्दीन खिलजी का शासन स्थापित हो गया। अलाउद्दीन की सेना और हम्मीर की सेना के बीच होने वाले युद्ध में हम्मीर चौहान वीरतापूर्वक लड़ता हुआ मारा गया था। अलाउद्दीन खिलजी ने रणथम्भौर पर कब्जा करने के लिए कूटनीति का सहारा लिया था। अलाउद्दीन ने उसके दो सेनापति रणमल और रतिपाल को लालच देकर अपने पक्ष में मिला लिया था।

प्रश्न 3.
राव चन्द्रसेन कहाँ का राजा था? अकबर और उसके बीच होने वाले युद्ध के बारे में व्याख्या करें।
उत्तर:
राव चन्द्रसेन मारवाड़ को शासक था। उसके दो बड़े भाइयों ने नाराज होकर अकबर के शरण में जाकर शाही सहायता की प्रार्थना की। अकबर भी इसी समय का इंतजार कर रहा था। अकबर ने शीघ्र ही हुसैन कुली खाँ के नेतृत्व में अपनी सेना जोधपुर की ओर भेजी जिसने मई 1564 ई० में जोधपुर के किले पर अधिकार कर लिया। मारवाड़ के राजा चंद्रसेन ने जोधपुर से भागकर भाद्राजून में जाकर शरण ली।

1570 ई० में अकबर द्वारा लगाए नए नागौर दरबार में चन्द्रसेन गया परन्तु वहाँ पर अकबर के व्यवहार एवं अपने प्रतिस्पर्धी उदय सिंह को देखकर नागौर दरबार छोड़कर वहाँ से वापस चला आया। इसका पता अकबर को चला तो उसने बीकानेर के रायसिंह को जोधपुर का अधिकारी नियुक्त कर दिया। राव चन्द्रसेन को दबाने के लिए अकबर ने अपनी सेना भाद्राजून भेजी। भाद्राजून से चन्द्रसेन अपने भतीजे कल्ला के पास सोजत पहुँचा। यहाँ पर भी उसका पीछा करते हुए मुगल सेना आ गई। राव चन्द्रसेन वहाँ से बाड़मेर पहुँचा। बाड़मेर से चंद्रसेन सारण के पहाड़ों में संचियाय नामक स्थान पर पहुँचा। जहाँ 11 जनवरी, 1581 को उसका देहांत हो गया।

प्रश्न 4.
अमरसिंह राठौर एक पराक्रमी व निडर शासक था। व्याख्या करें।
उत्तर:
अमरसिंह राठौर एक पराक्रमी व निडर शासक था। उसके पास उसी के स्वभाव के कई राजपूत युवक जमा हो गए।
गजसिंह ने अनारा नामक पासवान के बहकावे में आकर अमर सिंह को राज्याधिकार से वंचित कर देश से निकाल दिया। अमर सिंह राठौर मुगल बादशाह शाहजहाँ की सेवा में जा पहुँचा। जहाँ उसकी बहादुरी से प्रसन्न होकर शाहजहाँ ने उसे ‘राव’ की उपाधि दी। एक बार अमर सिंह राठौर 15 दिनों तक मुगल दरबार से अनुपस्थित रहा। बादशाह शाहजहाँ ने उससे उसकी अनुपस्थिति का कारण पूछा तो अमर ने स्वाभिमान के साथ उत्तर दिया कि मैं केवल शिकार के लिए गया था अतः दरबार में नहीं आ सका। जहाँ तक जुर्माना अदा करने की बात है मेरी तलवार ही मेरी सम्पत्ति है।

जुर्माने को वसूल करने के लिए बख्शी सलावत खाँ को उसके पास भेजा। अमर सिंह ने जुर्माना देने से इनकार कर दिया। बादशाह ने अमर सिंह को तुरंत हाजिर होने का आदेश भिजवाया। अमर सिंह राठौर ने आदेश का पालन किया और दीवाने खास में पहुँचकर बादशाह का अभिवादन किया। वहाँ पहुँचते ही दरबार में उपस्थित सलावत खाँ ने उसको आँवार कहा। यह शब्द अमर सिंह सुन नहीं सका और सलावत खाँ पर आक्रमण कर उसके सीने में कटार भोंक दी। इसके बाद अमर सिंह ने बादशाह शाहजहाँ पर आक्रमण कर दिया किंतु शाहजहाँ खंभे की ओट में छिपकर बच गया।

भयभीत बादशाह जनाना महलों में भाग गया। अमर सिंह के साले अर्जुन गौड़ ने इनाम के लालच में धोखे से अमर सिंह पर आक्रमण कर उसे मार दिया। यह सुनकर अमर सिंह के सरदारों और सैनिकों के खून में उबाल आ गया और उन्होंने उसी समय दिल्ली जाकर शाहजहाँ के निवास स्थान लाल किले में बुखारा द्वार से प्रवेश किया। राठौरों की संख्या मुगलों की सेना के सामने नाममात्र की थी इसलिए सभी राठौर लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। लाल किले के बुखारा द्वार को उसी दिन ईंटों से बंद करा दिया गया और उसी दिन से वह द्वार अमर सिंह का फाटक के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

प्रश्न 5.
बहमनी साम्राज्य के बारे में व्याख्या करें।
उत्तर:
दक्षिण में बहमनी राज्य एवं राजवंश का आरंभ मुहम्मद तुगलक के एक अधिकारी हसन (जफरशाह) ने 1347 ई० में किया। हसन ने दक्षिण के अमीरों की सहानुभूति प्राप्त करके, तुगलक के खिलाफ फैले विद्रोह का फायदा उठाकर अपना राज्य स्थापित किया। यह फारस के वीर योद्धा बहमन का वंशज था। इसने अल्लाउद्दीन बहमनशाह का खिताब धारण किया। कुलबर्ग में अपनी राजधानी बनाई। इसकी मृत्यु के समय बहमनी राज्य उत्तर में पेनगंगा से दक्षिण में कृष्णा नदी और पश्चिम में गोवा से पूर्व में भोगिर तक फैल गया था।

विजयनगर की पश्चिमी सीमा बहमनी राज्य से टकराती थी। अतः दोनों साम्राज्यों में संघर्ष चलता रहा। मुकदल एवं रायचूर दो सीमांत किलों पर अधिकार भी युद्ध का कारण रहा। बहमनी के नयें सुल्तान अहमद ने कुलबर्ग से राजधानी हटाकर बीदर को राजधानी बनाया। बहमनी राज्य में मुस्लिम बहमनी जाकर बस गए। इस कारण दक्षिणी और अबीसीनियाई सुन्नी मुस्लिम नराज हो गए। 13 वें सुल्तान मुहम्मद तृतीय ने महमूद गॅवा जो राज्य का सेवक रहा था को फाँसी दे दी। गंवा की मृत्यु के बाद बहमनी राज्य का पतन प्रारम्भ हो गया। आखिरी सुल्तान महमूद के राज्यकाल में बहमनी साम्राज्य के पाँच स्वतंत्र राज्य-बरार, बीदर, अहमदनगर, गोलकुंडा और बीजापुर बन गए जिनके सूबेदारों ने अपने को स्वतंत्र शासक घोषित कर दिया।

प्रश्न 6.
सिक्खों के दसवें गुरु गोविन्द सिंह के बारे में व्याख्या करें।
उत्तर:
ये गुरु तेगबहादुर के पुत्र थे। गुरु गोविन्द सिंह सिक्खों के दसवें और अंतिम गुरु हुए। पंजाब पर औरंगजेब के अत्याचारों
का विरोध करने हेतु उन्होंने शस्त्र एवं शास्त्र शिक्षा हेतु शिक्षण केंद्रों का विकास किया। इससे सिक्ख समुदाय सक्षम बना। लाहौर के सूबेदार को ‘नदौण के युद्ध में पराजित किया। सिक्खों को सुसंगठित करने, उनकी कुरीतियाँ हटाने एवं नवचेतना जागृत करने के उद्देश्य से खालसा पंथ की स्थापना 1699 में की। बलिदानी पाँच भक्तों द्वारा पंज प्यारों, पाहुल (चरणामृत) एवं अमृत छकाणा (पताशे जुला पानी) की नई प्रथा प्रारंभ की। खालसा पंथ के सिक्खों को पाँच ‘ककार’ अर्थात कड़ा, केश, कच्छा, कृपाण, और कंघा रखना आवश्यक था।

औरंगजेब से युद्ध की आशंका के कारण उन्होंने 1699 ई० में ही आनंदपुर साहिब में एक सैनिक केंद्र खोल दिया। 1705 ई० में मुगलों के आक्रमण के कारण उन्हें आनंदपुर छोड़ना पड़ा। आनंदपुर में छूटे दोनों पुत्रों जोरावर सिंह एवं फतहसिंह को कैद कर सरहिंद के किले में दीवार में जिंदा चुनवा दिया गया, परन्तु उन्होंने धर्म परिवर्तन नहीं किया। चमकोर के युद्ध में उनके अन्य दो पुत्र अजीत सिंह व जुझार सिंह शहीद हुए। खुदराना के संघर्ष में चालीस सिक्खों ने वीरगति प्राप्त की उन्हें मुक्ता एवं स्थान को मुक्तासर कहा गया। गुरु गोविन्द सिंह आनंदपुर से अंतत: तलवंडी पहुँचे जहाँ एक वर्ष तक उन्होंने साहित्यिक लेखन का कार्य किया। औरंगजेब के निमत्रंण पर वे मिलने जा रहे थे तभी उन्हें औरंगजेब की मृत्यु का समाचार मिला। 1708 ई० को नांदेड़ में ध्यान करते समय एक अफगान द्वारा छुरा मारने से गुरु गोविन्द सिंह की मृत्यु हो गई।