Rajasthan Board RBSE Class 12 Sociology Chapter 2 जनसांख्यिकीय संरचना एवं भारतीय समाज, ग्रामीण-नगरीय संलग्नता और विभाजन

RBSE Class 12 Sociology Chapter 2 अभ्यासार्थ प्रश्न

RBSE Class 12 Sociology Chapter 2 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
जनसंख्या के गुणोत्तर का सिद्धान्त निम्न में से किसने दिया है?
(अ) माल्थस
(ब) डार्विन
(स) लामार्क
(द) स्पेन्सर
उत्तरमाला:
(अ) माल्थस

प्रश्न 2.
जनसंख्या की दृष्टि से भारत का विश्व में कौन – सा स्थान है?
(अ) प्रथम
(ब) द्वितीय
(स) तृतीय
(द) चतुर्थ
उत्तरमाला:
(ब) द्वितीय

प्रश्न 3.
संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट 2015 के अनुसार 2022 में भारत का जनसंख्या की दृष्टि से विश्व में स्थान होगा –
(अ) तृतीय
(ब) द्वितीय
(स) प्रथम
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तरमाला:
(स) प्रथम

प्रश्न 4.
स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् भारत में कितनी जनगणनाएँ 2011 तक हो चुकी हैं?
(अ) पाँच
(ब) छः
(स) चार
(द) सात
उत्तरमाला:
(द) सात

प्रश्न 5.
2011 की जनगणना के अनुसार भारत में जनसंख्या की दशकीय वृद्धि दर है –
(अ) 15.64
(ब) 17.64
(स) 16.64
(द) 14.64
उत्तरमाला:
(स) 16.64

प्रश्न 6.
2011 में भारत की कुल जनसंख्या में 15 – 59 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों का अनुपात है –
(अ) 6%
(ब) 63%
(स) 64%
(द) 7%
उत्तरमाला:
(ब) 63%

प्रश्न 7.
राजस्थान में जन घनत्व (2011) कितना है?
(अ) 11 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी.
(ब) 21 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी.
(स) 31 व्यक्ति/किमी.2
(द) 41 व्यक्ति/किमी.
उत्तरमाला:
(ब) 21 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी.

प्रश्न 8.
भारत में सबसे कम जन घनत्व किस राज्य में है?
(अ) राजस्थान
(ब) बिहार
(स) पश्चिम बंगाल
(द) अरुणाचल प्रदेश
उत्तरमाला:
(द) अरुणाचल प्रदेश

प्रश्न 9.
भारत के पास विश्व की कितनी फीसद भूमि है?
(अ) 2.4%
(ब) 3.4%
(स) 4.4%
(द) 4.6%
उत्तरमाला:
(अ) 2.4%

प्रश्न 10.
भारत में विश्व की जनसंख्या का कितना प्रतिशत निवास करता है?
(अ) 17%
(ब) 18%
(स) 19%
(द) 20%
उत्तरमाला:
(ब) 18%

प्रश्न 11.
भारत की जनगणना 2011 के अनुसार भारत में स्त्री साक्षरता दर कितनी है?
(अ) 65.16
(ब) 65.26
(स) 65.36
(द) 65.46
उत्तरमाला:
(द) 65.46

प्रश्न 12.
2011 की जनगणना के अनुसार भारत में लिंगानुपात कितना है?
(अ) 934
(ब) 927
(स) 940
(द) 933
उत्तरमाला:
(स) 940

प्रश्न 13.
भारत की जनगणना 2011 के अनुसार ग्रामीण जनसंख्या का प्रतिशत कितना है?
(अ) 68.84
(ब) 67.84
(स) 69.84
(द) 72.2
उत्तरमाला:
(अ) 68.84

प्रश्न 14.
ग्राम पंचायत स्थानीय स्वशासन की इकाई है –
(अ) कस्बे की
(ब) शहर की
(स) नगर की
(द) गाँव की
उत्तरमाला:
(द) गाँव की

प्रश्न 15.
श्रम विभाजन एवं श्रम विशेषीकरण की बहुतायत देखने को मिलती है –
(अ) गाँवों में
(ब) नगरों में
(स) दोनों में
(द) दोनों में से कोई नहीं
उत्तरमाला:
(ब) नगरों में

प्रश्न 16.
द्वैतीयीक सम्बन्ध निम्न में से कहाँ अधिक पाए जाते हैं?
(अ) नगरों में
(ब) गाँवों में
(स) दोनों में
(द) दोनों में से कोई नहीं
उत्तरमाला:
(अ) नगरों में

प्रश्न 17.
“समाज का प्रत्येक व्यक्ति सिपाही होता है।” यह कथन लागू होता है –
(अ) ग्रामीण समाज पर
(ब) नगरीय समाज पर
(स) भारतीय समाज पर
(द) सभी पर
उत्तरमाला:
(अ) ग्रामीण समाज पर

RBSE Class 12 Sociology Chapter 2 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय उप महाद्वीप जनसंख्या के किस चरण से गुजर रहा है?
उत्तर:
भारतीय उप – महाद्वीप जनसंख्या के द्वितीय चरण जनसंख्या – विस्फोट से गुजर रहा है। जहाँ जनसंख्या में अत्यधिक तीव्र गति से वृद्धि होती है।

प्रश्न 2.
शिशु एवं मातृ मृत्यु – दर का ऊँचा होना किसका सूचक है?
उत्तर:
समाज में शिशु एवं मातृ मृत्यु – दर का ऊँचा होना पिछड़ेपन व गरीबी का सूचक है।

प्रश्न 3.
जनसंख्या की दृष्टि से विश्व में प्रथम स्थान किसका है?
उत्तर:
चीन का जनसंख्या की दृष्टि से विश्व में प्रथम स्थान है।

प्रश्न 4.
2011 की जनगणनानुसार भारत में जनघनत्व कितना है?
उत्तर:
2011 की जनगणनानुसार भारत में जनघनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है।

प्रश्न 5.
आजादी के पश्चात् जनसंख्या में सर्वाधिक वृद्धि दर किस दशक में रही है?
उत्तर:
आजादी के पश्चात् जनसंख्या में सर्वाधिक वृद्धि दर 1961 – 71 के दशक में 24.8 प्रतिशत रही है।

प्रश्न 6.
2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान में भारत की जनसंख्या का कितना प्रतिशत लोग निवास करते हैं?
उत्तर:
2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान में भारत की कुल जनसंख्या का 5.66 प्रतिशत लोग निवास करते हैं।

प्रश्न 7.
2011 में भारत में मृत्यु – दर कितनी रही है?
उत्तर:
2011 में भारत में मृत्यु – दर 7.1 प्रति हजार रही है।

प्रश्न 8.
शिक्षित होने की प्राथमिक एवं अपरिहार्य शर्त क्या है?
उत्तर:
शिक्षित होने की प्राथमिक एवं अपरिहार्य शर्त व्यक्ति का साक्षर होना है।

प्रश्न 9.
2011 की जनगणना के अनुसार शहरी क्षेत्र में बाल लिंगानुपात कितना है?
उत्तर:
2011 की जनगणना के अनुसार शहरी क्षेत्र में बाल लिंगानुपात 914 है।

प्रश्न 10.
नातेदारी के सम्बन्धों में सृदृढ़ता किस क्षेत्र में पाई जाती है?
उत्तर:
नातेदारी के सम्बन्धों में सुदृढ़ता ग्रामीण क्षेत्रों में पाई जाती है।

प्रश्न 11.
जन्म के स्थान पर व्यक्तिगत योग्यता को महत्त्व किस क्षेत्र में मिलता है?
उत्तर:
जन्म के स्थान पर व्यक्तिगत योग्यता को महत्त्व शहरी क्षेत्र को मिलता है।

प्रश्न 12.
जजमानी प्रथा किस क्षेत्र की पहचान है?
उत्तर:
जजमानी प्रथा ग्रामीण क्षेत्र की पहचान है जो गाँवों में ही पाई जाती थी।

प्रश्न 13.
परम्परागत भारतीय सामाजिक व्यवस्था में वस्तु विनिमय प्रचलित कहाँ रहा है?
उत्तर:
परम्परागत भारतीय सामाजिक व्यवस्था में वस्तु विनिमय ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित रहा है।

प्रश्न 14.
नगरीय समाज की विशेषता सामूहिकता है अथवा व्यक्तिवादिता?
उत्तर:
नगरीय समाज की विशेषता मुख्य रूप से व्यक्तिवादिता है जो नगरों में रहने वाले सदस्यों में पाई जाती है।

प्रश्न 15.
विभिन्नता पर आधारित समाज कौन – सा है?
उत्तर:
विभिन्नता पर आधारित समाज नगरीय समाज है।

RBSE Class 12 Sociology Chapter 2 लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
माल्थस के गुणोत्तर वृद्धि के सिद्धान्त पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
माल्थस के गुणोत्तर वृद्धि के सिद्धान्त को निम्न बिन्दुओं के माध्यम से स्पष्ट कर सकते हैं –

  1. माल्थस ने अपनी पुस्तक “An Essay on the Principle of Population” में जनसंख्या वृद्धि सम्बन्धी सिद्धान्त का प्रतिपादन किया है।
  2. माल्थस के अनुसार जनसंख्या गुणोत्तर क्रम के (2, 4, 8, 16…) के रूप में वृद्धि होती है और कृषि उत्पादन में खाद्य सामग्री गणितीय क्रम (1, 3, 5…) में वृद्धि होती है।
  3. माल्थस के अनुसार जनसंख्या वृद्धि गरीबी का मूल कारण है।

प्रश्न 2.
जनसांख्यिकीय संक्रमण का सिद्धान्त क्या है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जनसांख्यिकीय संक्रमण के सिद्धान्त को तीन चरणों के माध्यम से स्पष्ट कर सकते हैं –
(1) प्रथम चरण:

  • इसमें देश में जनसंख्या वृद्धि कम होती है।
  • समाज अल्प विकसित अवस्था में होता है।
  • इसमें समाज में जन्म – दर व मृत्यु – दर दोनों ही अधिक होती है।

(2) द्वितीय चरण:

  • इस चरण में जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि होती है।
  • इसमें तकनीति विकास व चिकित्सीय सुविधाओं के फलस्वरूप मृत्यु – दर कम हो जाती है व जन्म – दर ऊँची बनी रहती है।

(3) तृतीय चरण:

  • इसमें देश विकसित अवस्था में होता है।
  • इसमें जन्म – दर व मृत्यु – दर दोनों ही कम पाई जाती हैं।

प्रश्न 3.
भारत में मृत्यु – दर पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
मृत्यु – दर से तात्पर्य उस स्थिति से है, जब किसी क्षेत्र में एक वर्ष में प्रति हजार जनसंख्या पर मरने वालों के बच्चों की संख्या से है।
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मृत्यु – दर में कमी के कारण:

  • स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार।
  • रोगों पर नियंत्रण।
  • जीवन – स्तर में सुधार।
  • अकाल एवं महामारी पर नियंत्रण।

प्रश्न 4.
वर्तमान में भारत में साक्षरता की स्थिति को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जब व्यक्ति किसी भाषा को समझ, लिखना व पढ़ सकता हो, तो वह व्यक्ति साक्षर कहलाता है।
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भारत में साक्षरता की स्थिति:

  • भारत में आजादी के बाद साक्षरता में वृद्धि हुई है।
  • 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की साक्षरता दर 74.04 प्रतिशत है।
  • महिलाओं की साक्षरता (64.46%) पुरुषों की (82.14) तुलना में कम है।
  • अनुसूचित जातियों व अनुसूचित जनजातियों में साक्षरता की दर काफी कम पाई जाती है।

प्रश्न 5.
बाल – लिंगानुपात क्या है? वर्तमान स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए भावी तस्वीर बताइए।
उसर:
बाल – लिंगानुपात से अभिप्राय है – एक हजार बालकों पर जन्म लेने वाली बालिकाओं की संख्या से है। बाल – लिंगानुपात की वर्तमान स्थिति:

  • वर्तमान में बालिकाओं की संख्या निरंतर घट रही है।
  • 2001 में बाल लिंगानुपात 927 था, जो 2011 की जनगणना के अनुसार 914 ही रह गई है।
  • पंजाब, हरियाणा व राजस्थान आदि में लड़कियों की संख्या में काफी कमी आ रही है।
  • कमी का कारण कन्या भ्रूण हत्या है।
  • पुत्रों की इच्छा व दहेज के परिणामस्वरूप भी इसमें कमी आई है।

प्रश्न 6.
भारत में वर्तमान समय में ग्रामीण तथा नगरीय जनसंख्या की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
भारत में वर्तमान समय में ग्रामीण तथा नगरीय जनसंख्या को निम्न बिन्दुओं के आधार पर स्पष्ट कर सकते हैं –

  • नगरीकरण की प्रक्रिया के प्रभाव से ग्रामीण तथा नगरीय जनसंख्या में तीव्र गति से परिवर्तन हो रहा है।
  • रोजगार के अवसरों की प्रधानता ने लोगों का आकर्षण गाँवों से नगरों की ओर किया है।
  • 2011 की जनगणना के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्र में निवास करने वाली जनसंख्या घटकर 68.84 प्रतिशत रह गई है।
  • नगरों में जनसंख्या का प्रतिशत अब 31.16 हो गया है।
  • ग्रामीण कृषि आधारित जीवन शैली में कमी आई है।

प्रश्न 7.
भारत में गाँव तथा नगरीय समाज में विवाह, परिवार एवं नातेदारी के सन्दर्भ में विभिन्नता की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
(1) परिवार के सन्दर्भ में:

  • गाँवों में संयुक्त परिवारों की प्रधानता होती है, जबकि नगरों में एकाकी परिवारों की।
  • गाँवों में परिवारों के सदस्य में सामूहिकता की भावना पाई जाती है, जबकि नगरों में व्यक्तिवादिता की भावना पाई जाती है।

(2) विवाह के सन्दर्भ में:

  • गाँव में विवाह को एक अनिवार्य संस्था माना जाता है, जबकि नगरों में इसे एक समझौता माना जाने लगा है।
  • गाँवों में तलाक को बुरा माना जाता है, जबकि नगरों में तलाक की प्रवृत्ति में काफी वृद्धि हुई है।
  • गाँव में कम आयु में विवाह होते हैं, जबकि नगरों में देर से विवाह करने का चलन पाया जाता है।

(3) नातेदारी के सन्दर्भ में:

  • गाँवों में नातेदारी सम्बन्धों की प्रधानता होती है, जबकि नगरों में नातेदारी सम्बन्ध अब कमजोर पड़ने लगे हैं।
  • गाँवों में ‘हम’ की भावना का समावेश होता है, जबकि नगरों में ‘में’ की भावना पाई जाती है।

प्रश्न 8.
नगरीय सामाजिक संरचना में जाति की भूमिका की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
नगरीय सामाजिक संरचना में जाति की भूमिका को निम्न बिन्दुओं के आधार पर स्पष्ट कर सकते हैं –

  • नगरों में जाति का महत्त्व दिन – प्रतिदिन कम होता जा रहा है।
  • नगरों में जाति में पाई जाने वाली प्रदत्त प्रस्थिति के स्थान पर अर्जित प्रस्थिति का महत्त्व बढ़ा है।
  • नगरों में जातिगत निर्योग्यताओं पर अब जोर नहीं दिया जाता है।
  • नगरों में व्यक्ति को उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके कर्मों से पहचाना जाता है।
  • नगरों में जाति की भाँति बंद व्यवस्था का नहीं, बल्कि मुक्त व्यवस्था को महत्त्व दिया जाता है।

प्रश्न 9.
ग्रामीण आर्थिक संरचना पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
ग्रामीण आर्थिक संरचना की विशेषताएँ:

  • कृषि तथा पशुपालन ग्रामीण आर्थिक संरचना का एक प्रमुख आधार है।
  • गाँवों में जजमानी प्रथा भी पाई जाती है। जिससे निम्न जाति के सदस्य सेवा के बदले में वस्तु या नकद राशि प्राप्त करती है।
  • गाँव में प्रत्येक जाति का एक परम्परागत व्यवसाय होता है, व उसी के आधार पर उनके व्यवसाय का निर्धारण होता है जैसे – लुहार, सुनार, धोबी तथा तेली आदि।
  • गाँव की आर्थिक प्रणाली में अब बदलाव होने लगे हैं।

प्रश्न 10.
भारत में धर्म की स्थिति की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
भारत में धर्म की स्थिति:

  • गाँव में धर्म का विशेष महत्त्व है, जबकि नगरों में अब धर्म को लोग तार्किकता के आधार पर स्वीकारने लगे हैं।
  • गाँव में अंधविश्वास व रूढ़िवादी विचारों की प्रधानता होती है, जबकि नगरों में बुद्धिवादी विचारों की प्रधानता होती है।
  • गाँव में धर्म का पालन व्यक्ति भावनात्मक आधार पर करते हैं जबकि नगरों में धर्मनिरपेक्षता के महत्त्व में वृद्धि हुई है।
  • गाँव में धर्म ने व्यक्तियों को भाग्यवादी बना दिया है, जबकि नगरों में लोग धर्म के स्थान पर कर्म को महत्त्व देते हैं।

प्रश्न 11.
ग्रामीण तथा नगरीय समाज के सन्दर्भ में परिवर्तन, प्रतिमान तथा मूल्यों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:

  • गाँवों में अनौपचारिक नियंत्रण के साधनों की प्रधानता होती है, जबकि नगरों में औपचारिक साधनों की।
  • गाँवों में किसी भी सदस्य के द्वारा किए गए अपकृत्य के आधार पर उसे गाँव से बहिष्कृत कर दिया जाता है, जबकि नगरों में उसे न्यायालयों के माध्यम से कठोर दंड दिया जाता है।
  • गाँवों में परिवर्तन अब दृष्टिगोचर होने लगा है, जबकि नगरों में परिवर्तनों की गति अति तीव्र है।
  • गाँव के सदस्य प्रतिमानों व मूल्यों का पालन एक कर्त्तव्य के रूप में करते हैं, जबकि नगरों में व्यक्ति अपनी इच्छानुसार किसी भी कार्य के संपादन को महत्त्व देते हैं।

प्रश्न 12.
गाँव में मनोरंजन के साधनों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
गाँव में मनोरंजन के साधनों की भूमिका:

  • गाँवों में मनोरंजन के परम्परागत साधनों की ही अधिक प्रधानता होती है।
  •  गाँवों में प्रचलित कहानियाँ, लोक – गीत व उत्सव आदि मनोरंजन के मुख्य साधन हैं।
  • गाँवों में तीज – त्यौहारों पर मेले का आयोजन किया जाता है।
  • तकनीकी प्रगति एवं क्रान्ति के कारण अब गाँवों में टी. वी., मोबाइल व रेडियो के साधन भी पाए जाते हैं।

प्रश्न 13.
नगरीय लोगों की फैशन सम्बन्धित अभिरुचियों पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
नगरीय लोगों की फैशन सम्बन्धित अभिरुचियाँ:

  • नगरीय लोगों पर पश्चिमी सभ्यता का विशेष प्रभाव देखने को मिलता है।
  • नगरीय लोगों के रहन-सहन व जीवन – शैली में काफी बदलाव दृष्टिगोचर हुए हैं।
  • नगरों में महिलाओं व पुरुषों के पहनावे में काफी अन्तर पाया जाता है।
  • नगरों में महिलाओं व पुरुषों में बालों की कटिंग, जींस आदि में तीव्र आधुनिक बदलाव देखने को मिलते हैं।

प्रश्न 14.
गाँव तथा शहरों में पारस्परिक अतनिर्भरता को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
गाँव तथ नगरों में पारस्परिक अतर्निर्भरता:

  • गाँव व नगरों की अवधारणा अलग जरूर है, किन्तु वे एक – दूसरे के पूरक भी हैं।
  • प्राचीन काल से ही वस्तुओं व सेवाओं का आदान – प्रदान गाँव से नगरों की ओर होता रहा है।
  • गाँव में भी अब नगरों की भाँति लोग रहन – सहन को अपनाने लगे हैं।
  • कच्चा माल, अनाज, फल – सब्जियाँ आदि के लिए नगर आज भी गाँवों पर निर्भर हैं, जबकि चिकित्सा, उच्च शिक्षा व आजीविका के लिए गाँव नगरों पर निर्भर हैं।

प्रश्न 15.
भारत में जनसंख्या की आयु – संरचना तथा जीवन – प्रत्याशा पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर:
(1) भारत में जनसंख्या की आयु – संरचना:

  • 15 वर्ष से 60 वर्ष आयु वर्ग के लोगों का कुल हिस्सा 1971 में 53 प्रतिशत था, जो कि 2011 में बढ़कर 63 प्रतिशत हो गया है।
  • भारत में 1971 में 15 वर्ष से कम आयु वर्ग के लोगों का प्रतिशत 42 था, जो कि 2011 की जनगणना के अनुसार घटकर 29 प्रतिशत पर ही रह गई है।

(2) जीवन – प्रत्याशा:

  • भारत में जीवन प्रत्याशा अन्य देशों की तुलना में कम है।
  • भारत में 2001 में जीवन प्रत्याशा 66.1 वर्ष थी, जो अब 2011 में 69.6 वर्ष है।
  • अब कुछ कारणों से जीवन – प्रत्याशा में वृद्धि हुई है, जैसे – पोषण स्तर में सुधार, शिक्षा एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता व स्वच्छता आदि।

RBSE Class 12 Sociology Chapter 2 निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
जनांकिकी से सम्बन्धित अवधारणाओं को समझाइए।
उत्तर:
जनांकिकी से सम्बन्धित अवधारणाएँ निम्न प्रकार से हैं –
1. लिंगानुपात: प्रति हजार पुरुषों पर पाई जाने वाली स्त्रियों की संख्या को लिंगानुपात कहते हैं।
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भारत में लिंगानुपात 943 है। केरल में सबसे अधिक लिंगानुपात है 1,084 तथा राजस्थान में सबसे कम।

2. जन्म – दर: प्रति हजार पर प्रति वर्ष जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या को जन्म – दर कहते हैं। भारत में जन्म – दर 21.8 है।
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3. मृत्यु – दर: प्रति हजार बच्चों पर मरने वाले बच्चों की संख्या को मृत्यु – दर कहते हैं। भारत में मृत्यु – दर 7.1 है।
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4. जीवन – प्रत्याशा: एक व्यक्ति औसत कितने वर्ष तक जीवित रहता है, अर्थात् व्यक्ति की औसत आयु को जीवन – प्रत्याशा कहते हैं। भारत में जीवन – प्रत्याशा 69.6 वर्ष है, जो कि 2020 तक 72 वर्ष होने की संभावना है।

5. पराश्रितता या आश्रितता अनुपात: भारत में 15 वर्ष से कम तथा 64 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों की संख्या को कार्यशील जनसंख्या से भाग देने पर प्राप्त संख्या पराश्रितता जनसंख्या कहलाती है। भारत में 15 वर्ष से कम एवं 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति पराश्रितता जनसंख्या के अंतर्गत आते हैं। भारत में कुल 37 प्रतिशत लोग इसके (आश्रितता) श्रेणी में आते हैं।

6. मातृ मृत्यु – दर: जीवित प्रसूति के प्रति 1000 मामलों में बच्चे को जन्म देते समय मृत्यु को प्राप्त या मरने वाली स्त्रियों की संख्या को मातृ मृत्यु – दर कहते हैं।

प्रश्न 2.
भारत में जनसंख्या की रचना पर निबन्ध लिखिए।
उत्तर:
भारत जनसंख्या की दृष्टि से विश्व का दूसरा अधिक जनसंख्या वाला देश है। चीन जनसंख्या विश्व में सबसे अधिक है। 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत की कुल जनसंख्या 121 करोड़ है। संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुमान के अनुसार 2022 तक भारत विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश हो जाएगा। भारत में प्रथम जनगणना 1872 में हुई थी। प्रति दस वर्ष में देश की जनगणना होती है। भारत की जनसंख्या की रचना को जानने के लिए जनसंख्या वृद्धि दर, जनघनत्व व साक्षरता आदि अवधारणाओं को जानना आवश्यक है।
1. जनसंख्या का आकार और जनसंख्या वृद्धि:
2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या 121 करोड़ है। आजादी के समय भारत में जनसंख्या वृद्धि अधिक नहीं थी, इस समय देश में जनसंख्या वृद्धि 21.8 है। इसका मुख्य कारण मृत्यु – दर में कमी आना है। उत्तर – प्रदेश सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है, जिसकी जनसंख्या 19.98 करोड़ है। उत्तर – प्रदेश, बिहार, प. बंगाल, महाराष्ट्र तथा राजस्थान राज्य में देश की कुल जनसंख्या का 47.58 प्रतिशत निवास करते हैं।

2. प्रजनन दर – भारत में एक महिला की औसत प्रजनन दर अपने जीवन काल में 1971 में 5.2 थी, जो 2011 में घटकर 2.4 रह गई है। यह अभी भी विकसित राष्ट्रों की प्रजनन दर से अधिक है।

3. जन – घनत्व – एक वर्ग किमी. में निवास करने वाले लोगों की संख्या जन-घनत्व कहलाती है। भारत का जन – घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. है। भारत में सर्वाधिक जन – घनत्व बिहार राज्य में 1,102 तथा सबसे कम अरुणाचल प्रदेश में 17 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. है। राजस्थान में जन – घनत्व 201 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. है।

4. साक्षरता – भारत में साक्षरता तेजी से बढ़ी है। 1951 में भारत में साक्षरता दर 18.3 थी, जो 1971 में बढ़कर 34.5 हो गई। 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में साक्षरता दर 74.04 प्रतिशत है, जिसमें 82.14 प्रतिशत पुरुष साक्षर हैं, जबकि 64.46 प्रतिशत महिलाएँ भी साक्षर हैं। भारत में केरल उच्च साक्षरता वाला राज्य है, जिसमें साक्षरता 91.91 है, जबकि सबसे कम साक्षरता वाला राज्य बिहार है, जहाँ साक्षरता 63.8 प्रतिशत है। अनुसूचित जाति एवं जनजातियों में भी साक्षरता दर नीची है।
अतः उपरोक्त तथ्यों से यह विदित होता है कि भारत में जनसंख्या की संरचना में अनेक विभिन्नताएँ पाई जाती हैं।

प्रश्न 3.
ग्रामीण – नगरीय विभाजन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
ग्रामीण एवं नगरीय विभाजन को निम्न बिन्दुओं के आधार पर स्पष्ट किया जा सकता है –
1. परिवार:
गाँवों में संयुक्त परिवार पाए जाते हैं, जहाँ सब लोग साथ में रहते हैं, जबकि नगरों में एकाकी परिवार पाए जाते हैं, जहाँ पति – पत्नी व उनके अविवाहित बच्चे साथ में रहते हैं।

2. स्थानीय स्वशासन:
गाँव में पंचायती राज व्यवस्था स्वशासन की इकाई के रूप में कार्य करती है, जबकि नगरों में नगर पालिका व निगम स्वशासन का कार्य करते हैं।

3. धर्म:
गाँव में धर्म का विशेष महत्त्व होता है, जबकि नगरों में धर्म के स्थान पर अब तर्कवाद व बुद्धिवाद की प्रवृत्ति में बढ़ोतरी हुई, जिससे धर्मनिरपेक्षता का विकास हुआ है।

4. आर्थिक संस्थाएँ:
गाँव में सदस्यों का मुख्य व्यवसाय कृषि व पशुपालन होता है तथा जजमानी प्रथा भी पाई जाती है। जबकि नगरों में विभिन्न प्रकार के व्यवसाय पाए जाते हैं। नगरों में मुद्रा प्रणाली प्रचलित है।

5. भावना के आधार पर:
गाँवों में सदस्यों के मध्य ‘हम’ की भावना पाई जाती है। जो उन्हें आपस में बांध कर रखती है, जबकि नगरों में ‘में’ की भावना पाई जाती है।

6. नियंत्रण के साधनों के आधार पर:
गाँवों में अनौपचारिक नियंत्रण के साधनों पर लोगों के व्यवहार पर नियंत्रण रखा जाता है, जबकि नगरों में औपचारिक नियंत्रण के साधनों का प्रयोग किया जाता है।

7. सामूहिकता व व्यक्तिवादिता:
गाँवों में सामुदायिक भावना पाई जाती है तथा नगरों में व्यक्तिवादी भावना की प्रधानता होती है।

8. सहयोग व प्रतिस्पर्धा:
गाँव के सदस्यों में सहयोग की भावना का समावेश होता है, जबकि नगरों में प्रतिस्पर्धा व होड़ की भावना की प्रधानता होती है।

9. तकनीकी विकास:
गाँव तकनीकी के क्षेत्र में काफी पिछड़े होते हैं, जबकि नगरों में तकनीकी शिक्षा तथा प्रशिक्षण की सुविधा पाई जाती है।

10. विचारधारा:
गाँव के सदस्यों में परम्परागत विचारधारा पाई जाती है, जबकि नगरों में आधुनिक विचारधारा की प्रवृत्ति पाई जाती है।

11. समरूपता एवं विभिन्नता:
गाँव में व्यवसायों, पहनावा, खान – पान, रहन – सहन, धर्म व जाति आदि में समरूपता पाई जाती है, जबकि नगरों में व्यवसायों, रिवाजों व खान-पान के तरीकों में विषमताएँ पाई जाती है।

प्रश्न 4.
समकालीन भारत में ग्रामीण – नगरीय संलग्नता की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
समकालीन भारत में ग्रामीण – नगरीय संलग्नता को निम्न बिन्दुओं के माध्यम से स्पष्ट किया जा सकता है –
1. पारस्परिक आत्मनिर्भरता:
गाँव शिक्षा, चिकित्सा, बिजली, सड़क, संचार, उद्योग व यातायात आदि के लिए नगरों पर निर्भर हैं, जबकि नगर कच्चा माल, फल, सब्जियाँ, अनाज व सेवा कार्य हेतु श्रमिकों के लिए गाँवों पर निर्भर हैं।

2. मिश्रित जीवन:
गाँव व नगर एक – दूसरे के पूरक हैं। दोनों में ही मिली – जुली संस्कृति का अस्तित्त्व पाया जाता है। दोनों में ही मिश्रित जीवन पाया है।

3. गतिशीलता:
दोनों ही क्षेत्रों में गतिशीलता पाई जाती है। गाँवों में लोग अब परम्परागत व्यवसायों को छोड़कर नगरों की ओर अपनी आजीविका कमाने के लिए जाने लगे हैं। नगरीकरण के प्रभाव से लोगों ने गाँव से नगरों की ओर पलायन किया है।

4. जीवन – शैली:
अब गाँवों में भी नगरों की भाँति जीवन – शैली को अपनाया जाता है, जैसे खान – पान में, वेशभूषा में, तौर – तरीकों में आदि में। वही नगरों के लोग गाँवों के सादा जीवन की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

5. जनशक्ति का प्रभाव:
भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था है। लोकतंत्र में अपने अधिकार की प्राप्ति हेतु अब गाँवों के सदस्य भी नगरों में निवास करने वाले लोगों की भाँति सजग व जागरूक हुए हैं।

6. सांस्कृतिक प्रसार:
गाँव व नगरों में संस्कृति आज भी पाई जाती है। गाँव के लोग कस्बों एवं नगरों में देवी – देवताओं तथा धार्मिक स्थलों पर आते – जाते हैं व अपनी आजीविका कमाने के लिए नगरों की ओर पलायन करते हैं। कभी – कभी नगरों के लोग भी गाँव के प्रसिद्ध स्थलों की ओर आते हैं।

7. व्यावसायिक निर्भरता:
आज गाँव एवं शहर एक – दूसरे के निकट आ रहे हैं। आज यातायात व जनसंचार के साधनों ने ग्रामीण तथा नगरीय संलग्नता को और भी अधिक बढ़ा दिया है।
अत: उपरोक्त तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि आज नगरों में ग्रामीण समाज की व ग्रामीण समाजों में नगरों की अनेक विशेषताएँ देखने को मिलती हैं।

RBSE Class 12 Sociology Chapter 2 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Sociology Chapter 2 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1.
‘जनांकिकी’ का सम्बन्ध किससे है?
(अ) जनसंख्या से
(ब) सामाजिक व्यवस्था से
(स) विकास से
(द) किसी से भी नहीं
उत्तरमाला:
(अ) जनसंख्या से

प्रश्न 2.
भारत में सर्वप्रथम जनगणना किस वर्ष हुई थी?
(अ) 1782
(ब) 1872
(स) 1950
(द) 1972
उत्तरमाला:
(ब) 1872

प्रश्न 3.
किस वर्ष जनगणना अधिनियम बनाया गया था?
(अ) 1748
(ब) 1848
(स) 1948
(द) कोई भी नहीं
उत्तरमाला:
(स) 1948

प्रश्न 4.
‘An Essay on the Principle of Population’ पुस्तक के रचयिता कौन हैं?
(अ) कर्वे
(ब) डेविस
(स) पेज
(द) माल्थस
उत्तरमाला:
(द) माल्थस

प्रश्न 5.
सर्वप्रथम जनगणना किस काल में हुई थी?
(अ) वैदिक काल
(ब) सामंतवादी काल
(स) औपनिवेशिक काल
(द) कोई भी नहीं
उत्तरमाला:
(स) औपनिवेशिक काल

प्रश्न 6.
भौगोलिक क्षेत्र की दृष्टि से भारत किस स्थान पर है?
(अ) तीसरा
(ब) सातवाँ
(स) आठवाँ
(द) दसवाँ
उत्तरमाला:
(ब) सातवाँ

प्रश्न 7.
2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान में भारत की कुल जनसंख्या के कितने प्रतिशत लोग निवास करते हैं?
(अ) 5 प्रतिशत
(ब) 5.66 प्रतिशत
(स) 6 प्रतिशत
(द) 6.8 प्रतिशत
उत्तरमाला:
(द) 6.8 प्रतिशत

प्रश्न 8.
भारत की कुल जनसंख्या का 16.5 प्रतिशत लोग किस राज्य में निवास करते हैं?
(अ) राजस्थान
(ब) मध्य प्रदेश
(स) उत्तर प्रदेश
(द) हरियाणा
उत्तरमाला:
(स) उत्तर प्रदेश

प्रश्न 9.
भारत में 2011 की जनगणनानुसार मृत्यु – दर कितनी है?
(अ) 7.5 प्रति हजार
(ब) 7.1 प्रति हजार
(स) 8 प्रति हजार
(द) 9 प्रति हजार
उत्तरमाला:
(ब) 7.1 प्रति हजार

प्रश्न 10.
भारत का जनसंख्या घनत्व है –
(अ) 182 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी.
(ब) 282 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी.
(स) 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी.
(द) 482 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी.
उत्तरमाला:
(स) 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी.

प्रश्न 11.
भारत में सबसे कम साक्षरता दर वाला राज्य कौन – सा है?
(अ) राजस्थान
(ब) उत्तर प्रदेश
(स) बिहार
(द) पंजाब
उत्तरमाला:
(अ) राजस्थान

प्रश्न 12.
भारत में 2011 में नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत है?
(अ) 31.16%
(ब) 30%
(स) 28%
(द) 35%
उत्तरमाला:
(अ) 31.16%

प्रश्न 13.
भारत में बाल लिंगानुपात कितना है?
(अ) 930
(ब) 920
(स) 914
(द) 921
उत्तरमाला:
(स) 914

प्रश्न 14.
जजमानी प्रथा कहाँ पाई जाती है?
(अ) नगरों में
(ब) गाँवों में
(स) कस्बों में
(द) सभी में
उत्तरमाला:
(ब) गाँवों में

प्रश्न 15.
व्यक्तिवादिता कहाँ की विशेषता है?
(अ) नगरों
(ब) गाँव
(स) दोनों में
(द) कोई भी नहीं
उत्तरमाला:
(अ) नगरों

प्रश्न 16.
2011 में भारत की कुल जनसंख्या में 15 वर्ष से कम आयु वर्ग के लोगों का अनुपात है –
(अ) 42%
(ब) 40%
(स) 29%
(द) 35%
उत्तरमाला:
(स) 29%

प्रश्न 17.
वर्ग का निर्धारण किससे होता है?
(अ) जाति से
(ब) जन्म से
(स) कर्म से
(द) किसी से भी नहीं
उत्तरमाला:
(स) कर्म से

प्रश्न 18.
गाँव में सबसे छोटी सामाजिक इकाई कौन – सी है?
(अ) परिवार
(ब) जाति
(स) समुदाय
(द) समूह
उत्तरमाला:
(अ) परिवार

प्रश्न 19.
ग्रामीण समुदाय किस पर आधारित होता है?
(अ) सहयोग
(ब) प्रतिस्पर्धा
(स) संघर्ष
(द) कोई भी नहीं
उत्तरमाला:
(अ) सहयोग

प्रश्न 20.
सर्वाधिक साक्षरता किस राज्य में पाई जाती है?
(अ) बिहार
(ब) पंजाब
(स) उत्तर प्रदेश
(द) केरल
उत्तरमाला:
(द) केरल

RBSE Class 12 Sociology Chapter 2 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
डेविस ने जनसंख्या के निर्धारण के कितने आधार बताए हैं?
उत्तर:
डेविस ने जनसंख्या के निर्धारण के दो आधार बताए हैं –

  • सामाजिक व्यवस्था।
  • सामाजिक संगठन।

प्रश्न 2.
आजादी के बाद कितनी बार जनगणना हुई है?
उत्तर:
आजादी के बाद अब तक (2011) 7 बार जनगणना हो चुकी है।

प्रश्न 3.
भारत में जनगणना किस अधिनियम के आधार पर की जाती है?
उत्तर:
भारत में जनगणना अधिनियम 1948 के आधार पर जनगणना की जाती है।

प्रश्न 4.
गुणोत्तर वृद्धि के सिद्धान्त का प्रतिपादन किसने किया है?
उत्तर:
‘माल्थस’ ने गुणोत्तर वृद्धि के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया है।

प्रश्न 5.
‘माल्थस’ के द्वारा रचित पुस्तक का क्या नाम है?
उत्तर:
‘माल्थस’ की पुस्तक का नाम ‘An Essay on the Principle of Population’ (1798) है।

प्रश्न 6.
उदारवादी विचारकों के अनुसार गरीबी व भुखमरी का क्या कारण है?
उत्तर:
संसाधनों का समाज में असमान वितरण ही गरीबी व भुखमरी का एकमात्र कारण है।

प्रश्न 7.
विकसित देशों के नाम लिखिए।
उत्तर:
अमेरिका, रूस व ब्रिटेन आदि विकसित देश हैं।

प्रश्न 8.
भारत की कुल जनसंख्या का कितना प्रतिशत भाग उत्तर – प्रदेश में निवास करता है?
उत्तर:
भारत की कुल जनसंख्या का 16.5% भाग उत्तर प्रदेश में निवास करता है।

प्रश्न 9.
भारत की आधी जनसंख्या किन पाँच राज्यों में निवास करती है?
उत्तर:
भारत की आधी जनसंख्या उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र तथा राजस्थान में निवास करती है।

प्रश्न 10.
कार्यशील जनसंख्या किसे कहते हैं?
उत्तर:
15 वर्ष से 64 वर्ष के आयु वर्ग में आने वाले सदस्यों की संख्या को कार्यशील जनसंख्या कहा जाता है।

प्रश्न 11.
भारत में उच्च साक्षरता दर वाला राज्य कौन – सा है?
उत्तर:
केरल (91.91) उच्च साक्षरता दर वाला राज्य है।

प्रश्न 12.
भारत का जनघनत्व कितना है?
उत्तर:
भारत का जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. है।

प्रश्न 13.
भारत में 1872 के पश्चात् जनगणना किस वर्ष में हुई थी?
उत्तर:
1872 के पश्चात् भारत में 1881 में जनगणना हुई थी। यह प्रत्येक 10 वर्ष के बाद की जाती है।

प्रश्न 14.
2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या कितनी है?
उत्तर:
2011 की जनगणना के अनुसार भारत की जनसंख्या 121 करोड़ है।

प्रश्न 15.
2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान की जनसंख्या कितनी है?
उत्तर:
2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान की जनसंख्या 6.86 करोड़ है।

प्रश्न 16.
‘Vital Statistics’ या जन्म – मरण आंकड़े किसे कहते हैं?
उत्तर:
जन्म – मृत्यु, स्वास्थ्य तथा औसत आयु से सम्बन्धी आंकड़ों को जन्म – मरण आंकड़े कहते हैं।

प्रश्न 17.
विकसित देशों की तुलना में भारत में जन्म – दर कैसी है?
उत्तर:
विकसित देशों की तुलना में भारत में जन्म – दर ऊँची है।

प्रश्न 18.
नगरीय समुदायों में किस प्रस्थिति को महत्त्व दिया जाता है?
उत्तर:
नगरीय समुदायों में अर्जित प्रस्थिति को महत्त्व दिया जाता है।

प्रश्न 19.
गाँव में व्यक्ति की पहचान किन आधारों पर होती है?
उत्तर:
गाँव में व्यक्ति की पहचान उसके परिवार एवं नातेदारी सम्बन्धों के आधार पर होती है।

प्रश्न 20.
गाँवों में किन सम्बन्धों की प्रधानता होती है?
उत्तर:
गाँवों में प्राथमिक सम्बन्धों की प्रधानता होती है?

प्रश्न 21.
कौन – सी निम्न जातियाँ उच्च जातियों को सेवाएँ प्रदान करती थीं?
उत्तर:
कुम्हार, धोबी, सुनार, तेली व नाई आदि निम्न जातियाँ सेवाएँ प्रदान करती थी।

प्रश्न 22.
जन – सम्पर्क के प्रमुख साधन कौन – कौन से हैं?
उत्तर:
रेडियो, टी. वी, मोबाइल, इंटरनेट तथा समाचार – पत्र आदि जन – संपर्क के मुख्य कारक हैं।

प्रश्न 23.
नगरों में किस प्रकार के सम्बन्ध पाए जाते हैं?
उत्तर:
नगरों में द्वितीयक सम्बन्धों की प्रधानता होती है।

प्रश्न 24.
सबसे कम जनसंख्या घनत्व किस राज्य का है?
उत्तर:
अरुणाचल प्रदेश (17) में सबसे कम जनसंख्या घनत्व पाया जाता है।

प्रश्न 25.
महिलाओं की साक्षरता दर पुरुषों से कितनी फीसदी कम है?
उत्तर:
महिलाओं की साक्षरता दर पुरुषों से 17 फीसदी कम है।

RBSE Class 12 Sociology Chapter 2 लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
जनांकिकी से क्या आशय है?
उत्तर:
‘Demography’ शब्द जिसका हिन्दी अनुवाद जनांकिकी है। इसकी उत्पत्ति ग्रीक भाषा से हुई है। ‘Demography’ ग्रीक भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है। प्रथम शब्द है – Demas (डिमास) जिसका अर्थ होता है मनुष्य व दूसरा शब्द है – Grapho (ग्राफो) जिसका अर्थ होता है – लिखना या अंकित करना। इस प्रकार Demography का शब्दिक अर्थ मनुष्य या जनसंख्या के बारे में लिखना या अंकित करना हुआ।
अतः संक्षेप में शाब्दिक अर्थ में डिमोग्राफी को “जनसंख्या की विशेषताओं का अध्ययन व विश्लेषण करने वाले विज्ञान” के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।

प्रश्न 2.
जनांकिकी की प्रकृति तथा उद्देश्य बताइए।
उत्तर:
जनांकिकी की प्रकृति-जनांकिकी वह विज्ञान है, जिसके अंतर्गत जनसंख्या के सभी पक्षों का अध्ययन बड़ी बारीकी से किया जाता है जैसे कि यदि जनसंख्या में परिवर्तन हो रहे हैं तो क्यों हो रहे हैं, इनके क्या परिणाम होंगे। साथ ही इनसे प्राप्त परिणामों से भविष्यवाणी भी की जाती है। अत: यह एक समाजशास्त्रीय श्रेणी का विज्ञान है जो कि अवलोकन पर आधारित है।
जनांकिकी के उद्देश्य:

  • जनसंख्या की वर्तमान अवस्था क्या है व भविष्य में क्या होगी, इस तथ्य का पता लगाना।
  • किसी क्षेत्र में विशेष धर्म, जाति आदि के विषय में जानकारी प्राप्त करना।
  • किसी समाज में जनसंख्या की संरचना को जानना आदि।

प्रश्न 3.
जनांकिकी के क्षेत्र बताइए।
उत्तर:
जनांकिकी के निम्नलिखित क्षेत्र हैं, जिसके अंतर्गत जनसंख्या सम्बन्धी तथ्यों का अध्ययन किया जाता है –

  • भूगोल सम्बन्धी क्षेत्र – इसमें भौगोलिक वातावरण व उसके घटकों का अध्यययन किया जाता है।
  • समाजशास्त्र सम्बन्धी क्षेत्र – इसके अंतर्गत वैवाहिक स्थिति, पारिवारिक संरचना, जाति, धर्म, शिक्षा आदि के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण का अध्ययन किया जाता है।
  • जैवशास्त्र सम्बन्धी क्षेत्र – इसमें लिंगानुपात, आयु, स्वास्थ्य स्तर आदि का अध्ययन किया जाता है।
  • अर्थशास्त्र सम्बन्धी क्षेत्र – इसमें पूँजी, खाद्य सामग्री, जीवन – स्तर व उत्पादकता आदि का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 4.
जनांकिकी का राजनीतिक महत्त्व लिखिए।
उत्तर:
जनांकिकी का राजनीतिक महत्त्व निम्नलिखित है –

  • जनसंख्या विषयक समंकों के आधार पर संसद तथा विधानसभाओं के क्षेत्र निश्चित किए जाते हैं।
  • अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों से सम्बन्धित नियम जनसंख्या के आधार पर ही तैयार किए जाते हैं।
  • जनसंख्या के आधार पर ही नगरपालिका व नगर – निगम की स्थापना होती है तथा नगरों को श्रेणियों में विभाजित किया जाता है, महँगाई भत्ते के नियम तैयार किए जाते हैं।
  • भाषा सम्बन्धी प्रांतों के विभाजन में भी जनसंख्या के भाषा सम्बन्धी आँकड़ों से बड़ी सहायता मिलती है।

प्रश्न 5.
जनसंख्या घनत्व से आप क्या समझते हैं? इसके प्रकार बताइए।
उत्तर:
जनसंख्या घनत्व:
किसी क्षेत्र विशेष की जनसंख्या एवं उस क्षेत्र विशेष के क्षेत्रफल (Area) का अनुपात जनसंख्या घनत्व कहलाता है जिसका सूत्र निम्नलिखित है –
जनसंख्या घनत्व = \frac { P }{ A }
जहाँ
P – सम्पूर्ण क्षेत्र की जनसंख्या है।
A – उस क्षेत्र का क्षेत्रफल (वर्ग किमी.) है।
इसी को किसी विशेष क्षेत्र के लिए इस प्रकार लिख सकते हैं –
जनसंख्या घनत्व = \frac { { P }_{ i } }{ { A }_{ i } }
जहाँ Pव Ai क्रमशः i वें क्षेत्र की जनसंख्या एवं क्षेत्रफल है।
प्रकार:

  • सरल घनत्व।
  • आर्थिक घनत्व।
  • कृषि घनत्व।
  • पोषण घनत्व।

प्रश्न 6.
प्रजननता का अर्थ बताइए।
उत्तर:
प्रजनन से आशय किसी स्त्री अथवा उसके किसी समूह द्वारा किसी विशेष समग्र में कुल जन्मे सजीव बच्चों की वास्तविक संख्या से होता है। यदि किसी स्त्री ने कभी भी किसी बच्चे को जन्म दिया हो तो उस स्त्री को प्रजननीय (Fertile) कहा जाएगा।

बैंजामिन के अनुसार, “प्रजननता उस दर का माप है जिसके द्वारा कोई जनसंख्या जन्मों द्वारा अपनी वृद्धि करती है, तथा सामान्यतः इसका मूल्यांकन जन्मे बच्चों की संख्या को जनसंख्या के किसी वर्ग से, जैसे विवाहित युगलों की संख्या अथवा संतानोत्पादक आयु वर्ग की स्त्रियों की संख्या अर्थात् संभावित प्रजननता के किसी उपर्युक्त मापदंड से सम्बन्धित किया जाता है।”

प्रश्न 7.
प्रजननता एवं संतानोत्पादकता में अंतर लिखिए।
उत्तर:
प्रजननता एवं संतानोत्पादकता में निम्न प्रकार से अंतर को दर्शाया जा सकता है –
संतानोत्पादकता – इससे आशय महिलाओं की बच्चों को जन्म देने की शक्ति से है। चाहे उसने बच्चों को जन्म दिया हो या न दिया हो। किन्तु प्रजननता से आशय वास्तव में बच्चों को जन्म देने से है अर्थात् समस्त औरतों को दो भागों में बाँटा जा सकता है, वे औरतें जिनमें संतानोत्पादन की शक्ति ही न हो, उन्हें गैर – संतानोत्पादक कहा जाता है।

संतानोत्पादन शक्ति से युक्त महिलाओं में ही उर्वरता या प्रजननता हो सकती है। संतानोत्पादक महिलाओं में से जो औरतें विवाह करती हैं तथा जिनके विवाह के उपरांत बच्चे हो जाते हैं, उन्हीं में प्रजननता (Fertility) होती है।
अतः वे सभी महिलाएँ जिनमें प्रजननता होती है, उनमें संतानोत्पादकता भी होती है। किन्तु सभी संतानोत्पादक औरतों में उर्वरता होना अनिवार्य नहीं है। प्रजननता हेतु उनका विवाहित होना आवश्यक है।

प्रश्न 8.
जन्म – दर व प्रजननता – दर में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जन्म – दर व प्रजननता – दर में अंतर निम्नलिखित है –

जन्म – दर प्रजननता – दर
जन्म – दर प्रति एक हजार व्यक्तियों के आधार पर ज्ञात की जाती है। यह प्रति एक हजार प्रजनन योग्य अवधि वाली स्त्रियों के आधार पर ज्ञात की जाती है।
साधारणतया जन्म – दर उर्वरता दर से अपेक्षाकृत कम होती है। साधारणतया प्रजननता – दर जन्म – दर से अपेक्षाकृत अधिक है।
जन्म – दर कुल बच्चों की संख्या एवं जनसंख्या वृद्धि के अध्ययन के लिए ज्ञात की जाती है। यह स्त्रियों की प्रजननता का अध्ययन करने के लिए ज्ञात की जाती है।

प्रश्न 9.
शिशु – स्त्री अनुपात की अवधारणा को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जनगणना विषयक आंकड़ों के आधार पर प्रजननता को मापने के लिए प्रचलित विधि शिशु – स्त्री अनुपात है। जिसे किसी जनसंख्या के 5 वर्ष से कम आयु के शिशुओं तथा प्रजनन आयु वर्ग के अंतर्गत कुल स्त्रियों की संख्या (अर्थात् 15 – 49 वर्ष आयु वर्ग की स्त्रियों की संख्या) के अनुपात के रूप में व्यक्त किया जाता है। मानव के रूप में इसकी गणना प्रति एक हजार जन्म दे सकने वाली आयु वर्ग की स्त्रियों की जनसंख्या के पीछे 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों के रूप में की जाती है।
RBSE Class 12 Sociology 2 6
प्रश्न 10.
भारत में ऊँची जन्म – दर के क्या कारण हैं?
उत्तर:
भारत में ऊँची जन्म – दर के निम्नलिखित कारण है –
1. जलवायु का गर्म होना:
भारत एक गर्म जलवायु वाला देश है परिणामस्वरूप यहाँ गर्म जलवायु के कारण न केवल कम उम्र में ही लड़कियाँ स्त्रीत्व को प्राप्त कर लेती हैं, बल्कि उनकी प्रजनन अवधि भी लम्बी होती है जिसके कारण जन्म – दर यहाँ अन्य शीत जलवायु वाले देशों से अधिक है।

2. विवाह की अनिवार्यता व सर्वव्यापकता:
भारत में विवाह धार्मिक दृष्टि से एक पवित्र तथा सामाजिक दृष्टि से आवश्यक कार्य है। यह एक धार्मिक संस्कार होने के कारण उसकी अवहेलना नहीं की जा सकती। धार्मिक दृष्टि से हिन्दुओं में संतानोत्पत्ति स्वर्ग की प्राप्ति व पितृ ऋण से मुक्त होने के लिए अनिवार्य मानी जाती है। इस कारण भारत का प्रत्येक व्यक्ति इन धार्मिक तथा अनेक सामाजिक मान्यताओं के दबाव व प्रभाव से विवाह जैसे कृत्य को आवश्यक ही नहीं अनिवार्य मानता है।

प्रश्न 11.
भारत में जीवन – प्रत्याशा वृद्धि के कारण लिखिए।
उत्तर:
एक व्यक्ति औसत कितने वर्षों तक जीवित रहता है, इसे जीवन – प्रत्याशा कहते हैं। भारत की औसत जीवन – प्रत्याशा 69.6 प्रतिवर्ष है, जिसकी 2021 तक 72 वर्ष होने की संभावना है।
जीवन – प्रत्याशा के वृद्धि के कारण:

  • देश में चिकित्सा सुविधाओं में वृद्धि होने से समाज में सदस्यों की जीवन – प्रत्याशा में वृद्धि हुई है।
  • साफ – सफाई एवं स्वच्छता के प्रति लोगों की मानसिकता में बदलाव आया तथा वे इन सब के प्रति अधिक सजग व जागरूक हुए हैं।
  • शिक्षा के प्रसार से लोगों में बुद्धिवादी विचारधारा का जन्म हुआ है जिससे उनके जीवन जीने के तरीकों में बदलाव दृष्टिगोचर हुआ है। जिस कारण उनकी जीवन प्रत्याशा में बढ़ोतरी हुई है।

प्रश्न 12.
जनसंख्या विस्फोट किसे कहते हैं?
उत्तर:
जनसंख्या विस्फोट का तात्पर्य जनसंख्या की अप्रत्याशित वृद्धि से है जिसका दुष्प्रभाव व्यक्ति के सुख, स्वास्थ्य एवं सम्पत्ति पर, राष्ट्र की प्रगति एवं समृद्धि पर तथा अन्तर्राष्ट्रीय सुरक्षा एवं शांति पर पड़ता है व जिसके परिणामस्वरूप आज मानव जाति का अस्तित्त्व खतरे में पड़ गया है। भारत में प्रतिवर्ष जनसंख्या वृद्धि बड़ी ही तेजी से बढ़ रही है जिसने हमारे आर्थिक विकास, प्रशासन, सामाजिक कल्याण आदि को काफी प्रभावित किया है।

भारत आज विश्व में जनसंख्या की दृष्टि से दूसरे स्थान पर है। बढ़ती जनसंख्या ने हमारे यहाँ बेकारी तथा गरीबी में वृद्धि की है। इसलिए कहा जाता है कि भारत में जनसंख्या विस्फोट हो रहा है और यदि इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो इसके समाज पर काफी नकारात्मक प्रभाव होंगे।

प्रश्न 13.
जलवायु किस प्रकार जनसंख्या घनत्व को निर्धारित करती है?
उत्तर:
जलवायु जनसंख्या के घनत्व को निर्धारित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करती है। उन क्षेत्रों में जनसंख्या अधिक है, जो मानसूनी तथा समशीतोष्ण जलवायु वाले हैं। जहाँ की जलवायु अत्यंत ही उष्ण है, वहाँ मानव आवास अत्यंत ही कम है, उदाहरण के लिए – अरब, कालाहारी, याकोहामा, थार आदि का प्रदेश। इसके विपरीत जहाँ की जलवायु अत्यन्त ही ठण्डी है, वहाँ की जनसंख्या की मात्रा अत्यन्त ही न्यून है।

जैसे – ग्रीनलैंड, नार्वे, टुण्ड्रा तथा अलास्का आदि प्रदेश। भारत में केरल, बंगाल तथा बिहार आदि की जलवायु उत्तम है, यही कारण है कि वहाँ जनसंख्या का घनत्व अधिक है। असम तथा अरुणाचल प्रदेश की जनवायु अच्छी नहीं है यही कारण है कि वहाँ जनसंख्या का घनत्व न्यून है।

प्रश्न 14.
भारत में तथा नगरों के लोगों के जीवन – शैली में पाए जाने वाले अंतरों का स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:

  • गाँव में लोगों की जीवन – शैली परम्परागत होती है, जबकि नगरों में जीवन – शैली गतिशील होती है।
  • गाँव में लोगों की जीवन – शैली सरल व सादगीपूर्ण होती है, जबकि नगरों में जटिल व विषमतापूर्वक होती है।
  • गाँवों में सदस्यों के कार्यों में सरल श्रम – विशेषीकरण पाया जाता है, जबकि नगरों में जटिल श्रम – विशेषीकरण पाया जाता है।

प्रश्न 15.
जनसम्पर्क एवं जनसंचार के साधन किस प्रकार ग्रामीण – नगरीय संलग्नता को बढ़ाते हैं?
उत्तर:
जनसम्पर्क एवं जनसंचार के साधन निम्न आधारों पर ग्रामीण व नगरीय संलग्नता को बढ़ाते हैं जो इस प्रकार से है –

  • इन साधनों से गाँव के लोगों को नगरीय जीवन के विषय में जानकारी प्राप्त होती है।
  • पक्की सड़कों के निर्माण से गाँव व नगरों की दूरी कम हुई है।
  • नगरों से गाँव तक सरकारी योजनाओं के पहुंचने में कारगर रही है।
  • गाँव भी अब उपभोक्ता बाजारों से जुड़ते जा रहे हैं।

प्रश्न 16.
जनगणना का समाजशास्त्रियों के लिए क्या महत्त्व है?
उत्तर:
समाजशास्त्रियों के लिए जनगणना का महत्त्व – जनगणना से प्राप्त समंकों द्वारा समाजशास्त्रियों को देश की विभिन्न सामाजिक सूचनाओं की जानकारी प्राप्त हो जाती है। जनसंचार समंकों से देश में जन्म – दर, मृत्यु – दर, स्त्री – पुरुष अनुपात, ग्रामीण – नगरीय जनसंख्या अनुपात तथा जनसंख्या की संरचना आदि की जानकारी भी प्राप्त हो जाती है।

समाज में व्याप्त कुरीतियों जैसे बाल – विवाह, सती प्रथा, दहेज – प्रथा आदि की जानकारी भी प्राप्त होती है। जनगणना के अंतर्गत रोजगार तथा श्रमिक की आयु आदि के विषय में भी सूचनाएँ एकत्र की जाती हैं जिससे देश में बाल – श्रम की स्थिति की जानकारी भी प्राप्त हो जाती है। इन समंकों के आधार पर रोजगार की स्थिति, परिवार नियोजन, देशांतरण आदि की समस्याओं का अध्ययन भी किया जाता है।

प्रश्न 17.
मृत्यु – दर की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
मृत्यु – दर की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  • मृत्यु – दर जीवन की ऐसी प्रमुख घटना है जो जनसंख्या के आकार, गठन एवं वितरण में कमी लाती है।
  • मृत्यु – दर का सम्बन्ध व्यक्ति विशेष से न होकर व्यक्तियों के समूह से होता है।
  • ऊँची मृत्यु – दर अर्द्धविकसित अर्थव्यवस्था का संकेतक है।
  • सामान्यतया, मृत्यु – दर और मृत्यु का प्रयोग समानार्थक रूप में किया जाता है।
  • मृत्यु एक अनैच्छिक घटना है। इस पर मनुष्य का नियंत्रण नहीं रहता है।

प्रश्न 18.
व्यावसायिक निर्भरता को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
यातायात के साधन एवं जनसंचार के द्रुतगामी साधनों ने ग्रामीण एवं नगरीय एकता को तेजी से बढ़ाया है। अब लोग उच्च शिक्षा प्राप्त करने, व्यापार या व्यवसाय करने, कृषि में उत्पादित वस्तुओं के बेचने तथा वस्तुएँ प्राप्त करने एवं अन्य सेवाओं के लिए कस्बों तथा नगरों पर निर्भर रहना पड़ता है। नगरों के कारखानों में उत्पादित माल की ब्रिकी के लिए उपर्युक्त बाजार के रूप में गाँव से अपना सम्पर्क बढ़ाते हैं, जिससे उनके उद्योगों से निर्मित माल गाँव तक आसानी से पहुँचकर बिक सके। उद्योगों में श्रमिकों के रूप में कार्य करके उद्योगों की माँग पूरा करते हैं। साथ ही अपनी आजीविका अर्जित कर अपने स्तर में सुधार लाते हैं और अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं।

प्रश्न 19.
भारत में बाल – लिंगानुपात कम होने के क्या कारण हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत में बाल – लिंगानुपात कम होने के निम्नलिखित कारण हैं –

  • कन्याओं के साथ भेद – भाव पूर्व व्यवहार का किया जाना।
  • भ्रूण लिंग की जाँच द्वारा कन्या भ्रूण हत्या का होना।
  • पुत्र प्राप्ति की इच्छा का होना।
  • देश के कानून का कठोर न होना।
  • शिक्षित लोगों के द्वारा चिकित्सकीय सुविधा का अधिक दुरुपयोग किया जाना आदि कारण भारत में बाल – लिंगानुपात के कम होने के लिए जिम्मेदार हैं।

प्रश्न 20.
व्यक्ति का साक्षर होना क्यों आवश्यक है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
व्यक्ति का साक्षर होना निम्न कारणों से आवश्यक है –

  • भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास के लिए व्यक्तियों का साक्षर होना आवश्यक है।
  • शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति को अनेक रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं।
  • शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति के जीवन की दशाओं में बदलाव आता है।
  • शिक्षा के द्वारा ही व्यक्तियों को अपने अधिकारों व कर्त्तव्यों की जानकारी उपलब्ध होती है।
  • शिक्षा के द्वारा व्यक्ति की सोचने – समझने की शक्ति का विकास होता है।

RBSE Class 12 Sociology Chapter 2 निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में जनांकिकी के अध्ययन का महत्त्व लिखिए।
उत्तर:
जनांकिकी के अध्ययन के महत्त्व को निम्न बिंदुओं के माध्यम से स्पष्ट किया जा सकता है जो इस प्रकार से है –
1. जनांकिकी मानव ज्ञान की वह शाखा है, जो जनसंख्या का क्रमबद्ध और व्यवस्थित ज्ञान प्राप्त करने में सहायता करती है।

2. आज विश्व की सबसे बड़ी समस्या और सामाजिक आर्थिक कार्यक्रम का केन्द्र – बिन्दु जनसंख्या है। इस दृष्टि से भी जनांकिकी का अध्ययन महत्त्वपूर्ण है।

3. रोजगार मानव समाज की मूलभूत आवश्यकता है। जनांकिकी के अंतर्गत रोजगार का भी अध्ययन किया जाता है। इस दृष्टि से भी जनांकिकी का अध्ययन महत्त्वपूर्ण है।

4. जनांकिकी के अंतर्गत हम जनसंख्या वृद्धि की दर का अध्ययन करते हैं। जनसंख्या में वृद्धि की यह दर किसी भी विकास कार्यक्रम का आधार होती है।

5. किसी क्षेत्र विशेष की जनसंख्या के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त करने में यह सहायक सिद्ध होती है।

6. जनांकिकी का अध्ययन इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है कि इसके अंतर्गत शिक्षा, स्वास्थ्य व रहन – सहन के स्तर का अध्ययन किया जाता है। यह अध्ययन किसी भी समाज के संतुलित विकास का महत्त्वपूर्ण अंग है।

7. जनसंख्या की खाद्य सामग्री एक – दूसरे से अंत: सम्बन्धित है। हमारी कोई खाद्य नीति तब तक सफल नहीं हो सकती है, तब तक कि हम जनसंख्या के बारे में वैज्ञानिक ज्ञान प्राप्त न कर लें। जनांकिकी का अध्ययन इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है कि इसके अंतर्गत जनसंख्या और खाद्य सामग्री का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है।

8. जनांकिकी का अध्ययन जनसंख्या के झुकाव तथा उसके परिणामस्वरूप सामाजिक संगठन की विशेषताओं का अध्ययन करने की दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है। भारत जैसे देश में जनांकिकी के अध्ययन की बहुत अधिक आवश्यकता है। देश में जनसंख्या ही शक्ति का आधार है, इसलिए यह देश की समस्याओं को प्रमाणित करती है। यही कारण है कि आज के युग में जनांकिकी या जनसंख्याशास्त्र के अध्ययन के महत्त्व में निरंतर वृद्धि होती जा रही है।

प्रश्न 2.
जनांकिकी और समाजशास्त्र का सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
जनांकिकी और समाज आपस में घनिष्ठ रूप से अंत:सम्बन्धित हैं। जनांकिकी तथा समाजशास्त्र में पाए जाने वाले सम्बन्धों को निम्न बिन्दुओं के आधार पर स्पष्ट कर सकते हैं, जो इस प्रकार से है –
1. जनांकिकी जनसंख्या का अध्ययन है और समाज विज्ञान समाज का अध्ययन है, समाज और जनसंख्या एक दूसरे से अंतः सम्बन्धित हैं। जनसंख्या का वास्तविक अध्ययन तब तक पूरा नहीं हो सकता है, जब तक कि समाज का पूर्ण ज्ञान न हो।

2. जनांकिकी में जनसंख्या की प्रकृति और स्वरूप का अध्ययन किया जाता है। जनसंख्या की इस प्रकृति और स्वरूप का अध्ययन करने के लिए समाज की प्रकृति और स्वरूप का ज्ञान अनिवार्य है, क्योंकि ज्ञान की यह शाखा सामाजिक परिस्थितियों की पृष्ठभूमि में ही जनसंख्या का अध्ययन करती है।

3. मैकाइवर ने समाज को सम्बन्धों का जाल माना है। सामाजिक सम्बन्धों के निर्माण के लिए व्यक्ति का होना अनिवार्य है। जनांकिकी इन्हीं व्यक्तियों का अध्ययन करती है।

4. जनांकिकी में मृत्यु – दर का भी अध्ययन किया जाता है, मृत्यु – दर के अनेक कारण हो सकते हैं। इन सभी कारकों का समाज की परिस्थितियों से सीधा सम्बन्ध होता है।

5. जनांकिकी में जनस्वास्थ्य का अध्ययन किया जाता है। जनस्वास्थ्य का यह अध्ययन विज्ञान से घनिष्ठ रूप से सम्बन्धित है। इसका कारण यह है कि जनस्वास्थ्य की योजना बनाते समय समाज की परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाता है।

6. जनांकिकी में जनगणना का अध्ययन किया जाता है। जनगणना में जनसंख्या की प्रकृति और उसके विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया जाता है। एक देश की जनसंख्या का विश्लेषण दूसरे देश से भिन्न होता है। इस भिन्नता का कारण यह है कि प्रत्येक देश की सामाजिक परिस्थितियों में अंतर होता है, जिसके आधार पर जनसंख्या का विश्लेषण किया जाता है। सामाजिक परिस्थितियों का अध्ययन समाज विज्ञान के अंतर्गत किया जाता है। इस दृष्टि से भी समाज विज्ञान और जनांकिकी परस्पर अन्तः सम्बन्धित है।

7. जनांकिकी में जनसंख्या नीति का अध्ययन किया जाता है। इसके अंतर्गत जनसंख्या के सम्बन्ध में विभिन्न विद्वानों के विचारों का अध्ययन किया जाता है। एक देश के विद्वानों के विचार दूसरे देश के विद्वानों के विचारों से अलग होते हैं। ये विद्वान जनसंख्या नीति का प्रतिपादन करते हैं। इस नीति का प्रतिपादन करते समय देश की परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाता है। स्पष्टत: जनांकिकी और समाज विज्ञान अन्त:सम्बन्धित हैं।

8. जनांकिकी में जनसंख्या का अध्ययन किया जाता है। जनसंख्या व्यक्तियों का समूह ही होता है। जनसंख्या पर सामाजिक व्यवस्था, समाजीकरण, शिक्षा तथा सामाजिक एकता का भी प्रभाव होता है व समाजशास्त्रीय घटना जनसंख्या के अस्तित्व के लिए आवश्यक होती है। इस प्रकार जनांकिकी विषय – सामग्री और समाजशास्त्री विषय – सामग्री परस्पर घनिष्ठ रूप से सम्बन्धित है। अतः दोनों विान न केवल परस्पर संबंधित वरन् एक दूसरे के अध्ययन में सहयोगी भी हैं।

9. जनांकिकी में जन्म – दर, मृत्यु – दर, विकास आदि का अध्ययन किया जाता है। जनसंख्या के इन कारकों का प्रत्यक्ष सम्बन्ध समाज की परिस्थितियों से है। इस प्रकार जनांकिकी और समाज विज्ञान परस्पर अन्तःसम्बन्धित हैं।

10. जनांकिकी में खाद्य सामग्री व परिवार नियोजन आदि ऐसे विषय हैं, जो समाज की परिस्थितियों पर आधारित होती है। इस प्रकार से ये सभी तत्त्व ऐसे हैं, जिनका समान रूप में जनांकिकी और समाज विज्ञान में अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 3.
प्रजननता को प्रभावित करने वाले सामाजिक तत्त्वों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
विकसित एवं विकासशील देशों में प्रजननता दरों में अंतर पाया जाता है। किसी एक देश के विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक तथा धार्मिक आदि समुदायों में देश की औसत जन्म – दर से कम अथवा अधिक होने की प्रवृत्ति दिखाई देती है। प्रजननता को प्रभावित करने वाले अनेक सामाजिक तत्त्व हैं, जो निम्नलिखित हैं –
1. जैविकीय तत्त्व:
इन तत्त्वों में स्वास्थ्य सम्बन्धी परिस्थितियाँ, विभिन्न रोग, गुप्त रोग अथवा बांझपन आदि का समावेश होता है। ये विभिन्न तत्त्व स्वास्थ्य विषयक हैं तथा देश में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं पर आधारित रहते हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार संतानोत्पादन शक्ति में वृद्धि करता है तथा मृत्यु-दर में कमी आ जाती है। विगत वर्षों में विश्व जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि का एक प्रमुख कारण स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार का होना है।

2. परोक्ष सामाजिक तत्त्व:
ऐसे तत्त्व सामाजिक रीति-रिवाजों के मार्ग से प्रजननता को प्रभावित करते हैं। सामान्यतः इन्हें सामाजिक तत्त्व कहा जाता है। ये विभिन्न तत्त्व प्रजननता को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं। इसमें प्रमुख तत्त्व हैं –

  • विवाह की आयु।
  • तलाक एवं अलगाव।
  • बहुपत्नी प्रथा।
  • पति – पत्नी के बीच सामाजिक अथवा धार्मिक कारणों से अलगाव।
  • प्रसव के उपरान्त अलगाव की समयावधि।
  • विवाहोपरान्त अस्थायी आत्मसंयम आदि।

3. प्रत्यक्ष सामाजिक तत्त्व – प्रत्यक्ष सामाजिक तत्त्वों के अंतर्गत उन तत्त्वों का समावेश किया जाता है, जो जनसंख्या वृद्धि को प्रभावित करते हैं। इन तत्त्वों के अंतर्गत जनसंख्या नियंत्रण के विभिन्न उपायों का सामवेश किया जाता है। ये तत्त्व प्रजननता को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं। ये तत्त्व अनेक हैं; जैसे –

  • महिलाओं का सामाजिक स्तर।
  • परिवार का आकार एवं संरचना।
  • सामाजिक तथा सांस्कृतिक मूल्य।
  • रोजगार एवं व्यवसाय।
  • सामाजिक गतिशीलता।
  • नगरीकरण।
  • शिक्षा एवं आय।

4. अन्य सामाजिक तत्त्व:
1. सामाजिक:
आर्थिक स्तर – लोगों का सामाजिक – आर्थिक स्तर भी प्रजननता को प्रभावित करता है। सामान्य तौर पर यह देखा जाता है कि उच्च सामाजिक स्तर के लोगों की अपेक्षा निम्न सामाजिक स्तर के लोगों में प्रजननता दर अधिक पाई जाती है। निम्न आर्थिक स्तर के लोग बच्चों को स्वयं पर भार नहीं मानते हैं, क्योंकि एक ओर तो उनके लालन – पालन पर कोई विशेष व्यय नहीं होता है तथा दूसरी ओर वे कम आयु में ही परिवार की आय में वृद्धि करना प्रारम्भ कर देते हैं।

2. बच्चों के प्रति दृष्टिकोण:
परिवार में बच्चों की संख्या का निर्धारण एक व्यक्तिगत विषय है। इस सम्बन्ध में निर्णय लेते समय एक परिवार अपनी प्रतिष्ठा, सामाजिक स्तर तथा आर्थिक साधनों का अत्यधिक ध्यान रखता है। निम्न आर्थिक स्तर के लोगों में प्रजननता अधिक पाई जाती है, क्योंकि उनके लिए संतानें मौद्रिक आय में वृद्धि का प्रमुख साधन होती हैं। दूसरी ओर उच्च आर्थिक स्थिति के लोगों में प्रजननता कम होती है क्योंकि बच्चों के लालन – पालन, शिक्षा आदि पर अधिक व्यय करना पड़ता है तथा बच्चे ऊँची आयु में ही आर्थिक गतिविधियाँ प्रारम्भ करते हैं।

प्रश्न 4.
भारत में जन्म – दर के उच्च होने के कारणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
भारत में जन्म – दर के उच्च होने के कारणों का वर्णन निम्न प्रकार से है –
1. कम आयु में विवाह करने की प्रथा:
धार्मिक मान्यताओं के प्रभाव के कारण भारत में बाल – विवाह की प्रथा सभी जगह पाई जाती है। धर्मशास्त्रों में यह कहा गया है कि यदि माता – पिता कन्या का विवाह उसके रज:स्राव के पूर्व नहीं कर देते तो वह घोर पाप के भागी होते हैं। आज भी बाल – विवाह सम्पूर्ण भारत में एक लोकप्रिय प्रथा के रूप में प्रचलित है जिसका स्वाभाविक परिणाम उच्च जन्म – दर है।

2. सामाजिक एवं धार्मिक अंधविश्वासों का होना:
विवाह की अनिवार्यता, संतान को ईश्वरीय देन के रूप में स्वीकार करने की प्रवृत्ति तथा जन्म नियंत्रण के कृत्रिम साधनों को धर्म विरोधी मानने सम्बन्धी रूढ़ियों व अंधविश्वासों आदि सामाजिक व धार्मिक कारणों से भारत में जन्म – दर ऊँची है।

3. परिवार कल्याण के प्रति उदासीनता:
अनेक धार्मिक व सामाजिक मान्यताओं व विश्वासों के कारण भारतीय जनता अभी भी परिवार कल्याण के प्रति उदासीन दिखाई देती है। इन परिस्थितियों में जन्म – दर ऊँची होना बहुत ही सामान्य व स्वाभाविक है।

4. लोगों का निम्न जीवन स्तर:
संतान उत्पादन की प्रबलता भारतीयों में अधिक पाई जाती है। फलतः जन्म – दर उच्च होती है। इस निम्न जीवन स्तर की आर्थिक परिस्थिति में संतान अतिरिक्त आय का एक साधन होती हैं। इस प्रकार निम्न जीवन स्तर को भारत की उच्च जन्म – दर के लिए उत्तरदायी ठहराया जा सकता है।

5. अशिक्षा:
अशिक्षा, अज्ञानता तथा अदूरदर्शिता के कारण जनता अधिक संतानों के सामाजिक व आर्थिक परिणामों को समझ ही नहीं पाती, जिसके कारण समाज में जन्म – दर उच्च रहती है।

6. अविवेकपूर्ण मातृत्त्व:
देश में अशिक्षित महिलाओं का प्रतिशत बहुत अधिक है। वे अशिक्षित माताएँ मातृत्त्व की भूमिका को समझ ही नहीं सकती हैं। अधिक बच्चों को जन्म देने से स्वयं माता व बच्चों के ऊपर इसका क्या दुष्प्रभाव होगा वे इस तथ्य से वाकिफ ही नहीं होती हैं। फलतः देश में जन्म – दर ऊँची है।

7. संतति निग्रह का अभाव:
भारत में अशिक्षा, निर्धनता व अज्ञानता के कारण इन उपायों का प्रयोग अभी भी आवश्यकता से बहुत कम मात्रा में होता है। परिणामस्वरूप संयम तथा इन साधनों के प्रयोग के अभाव में जन्म – दर अधिक है।

प्रश्न 5.
भारत में जनसंख्या – वृद्धि के कारणों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
भारत में जनसंख्या वृद्धि के निम्नलिखित कारण हैं –
1. जन्म – दर की अधिकता तथा मृत्यु – दर में कमी:
भारत में जन्म – दर अपेक्षाकृत बहुत अधिक है। इसका मुख्य कारण अशिक्षा, रूढ़िवादिता व अंधविश्वास है। मृत्यु – दर में कमी का कारण बीमारियों की रोकथाम व स्वास्थ्य स्तर का उच्च होना है।

2. बाल – विवाह:
भारत में बाल – विवाह का प्रचलन है जिसके अंतर्गत कम आयु में ही बच्चों का विवाह करा दिया जाता है जिसके परिणामस्वरूप संतानोत्पत्ति में निरंतर वृद्धि होती है।

3. पुत्र का अधिक महत्त्व:
वंश को चलाने के लिए तथा पिंडदान के लिए पुत्रों की आवश्यकता होती है। पुत्र की लालसा में व्यक्ति अधिक संतानोत्पत्ति करते हैं जिससे जनसंख्या में वृद्धि होती है।

4. संयुक्त परिवार प्रणाली:
यह परिवार सामूहिकता पर आधारित होते हैं। अत: उनका प्रभाव व्यक्ति विशेष पर न पड़कर परिवार पर पड़ता है। इस कारण भी दम्पत्ति यह सोचकर अधिक संतान उत्पन्न करती है कि उसका प्रभाव अकेले उस पर नहीं पड़ेगा।

5. भाग्यवादिता:
भारत के लोग भाग्यवादी होते हैं। वह यह सोचते हैं कि संतान ईश्वर की देन है और वह अपना भाग्य अपने साथ लाते हैं। इस प्रकार की भाग्यवादी विचारधारा से अधिक संतान उत्पन्न होती है। .

6. शिक्षा का अभाव:
शिक्षा के अभाव में लोग जनसंख्या वृद्धि के दुष्परिणामों से अनभिज्ञ रहते हैं तथा निरंतर गति से बच्चों को जन्म देते रहते हैं।

7. निर्धनता:
इसके कारण लोग अधिक संतानोत्पत्ति करते हैं। उनका मानना है कि जितनी संतान अधिक होगी, उतनी ही आर्थिक सुविधा उन्हें उपलब्ध होगी। यही कारण है कि भारत में बाल – श्रमिकों की संख्या बहुत अधिक है।

8. अन्य कारण:

  • परिवार कल्याण के साधनों के प्रति अनभिज्ञता।
  • शरणार्थियों का आगमन।
  • औसत आयु में वृद्धि।
  • प्रवासी भारतीयों का वापस होना। ये समस्त कारण समाज में जनसंख्या वृद्धि के लिए उत्तरदायी हैं।

प्रश्न 6.
जनसंख्या वृद्धि के सामाजिक प्रभावों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या वृद्धि के सामाजिक प्रभाव निम्नलिखित हैं –
1. स्वास्थ्य स्तर का गिरना:
जनसंख्या की वृद्धि से खाद्य तथा पौष्टिक पदार्थों की कमी होना स्वाभाविक है। इनके अभाव में लोग शीघ्र ही अनेक बीमारियों व दुर्बलता के शिकार हो जाते हैं।

2. बेरोजगारी में वृद्धि:
जनसंख्या की वृद्धि के परिणामस्वरूप बेकारी का बढ़ना स्वाभाविक है। आज भारत में एक ओर भूमि पर जनसंख्या का दबाव अधिक होने के कारण हजारों ग्रामीणवासी रोजगार के लिए नगरों में जाते हैं दूसरी ओर नगरों में स्वयं बहुत से पढ़े एवं गैर – पढ़े बेकारी से पीड़ित हैं।

3. व्यक्तिगत विघटन:
जनसंख्या की वृद्धि से देश में अनेक कारक जैसे – भुखमरी, बेकारी तथा मानसिक संघर्ष इत्यादि उत्पन्न हो जाते हैं, जिनके कारण समाज में अपराध, बाल – अपराध, पागलपन तथा आत्महत्या इत्यादि विघटन के विभिन्न रूपों की उत्पत्ति होती है।

4. पारिवारिक विघटन:
घर के सदस्य सीमित साधनों के कारण आपस में लड़ने – झगड़ने लगते हैं। इतना ही नहीं कभी – कभी विवाह – विच्छेद तथा पृथक्करण की स्थिति आ जाती है।

5. सामुदायिक विघटन:
जनसंख्या के वृद्धि से विभिन्न रूप जैसे – निर्धनता, बेरोजगारी, अराजकता तथा विभेदीकरण इत्यादि विकसित हो जाते हैं जिससे सामुदायिक विघटन को बढ़ावा मिलता है।

6. शिक्षित बेरोजगारी:
जनसंख्या वृद्धि का सबसे बड़ा दुष्परिणाम शिक्षित बेरोजगारी के रूप में देखने को मिलता है। यह बेरोजगारी की स्थिति न केवल छात्रों के लिए दुखदायी व अभिशाप सिद्ध होती है बल्कि यह स्थिति परिवार, समाज तथा देश के लिए भी हानिकारक साबित होती है।

7.जीवन स्तर का गिरना:
निर्धनता के कारण देश का तीव्र गति से प्रौद्योगिक तथा आर्थिक विकास नहीं हो पाता है। इसके अतिरिक्त जनसंख्या के आधिक्य से रोटी, कपड़ा और मकान तथा अन्य सामग्रियों का सदैव अभाव बना रहता है। फलस्वरूप लोगों के रहन – सहन का स्तर निरंतर गिरता जाता है।

8. शिक्षा के स्तर में हास:
शिक्षण संस्थाओं में छात्रों की संख्या में वृद्धि के कारण शिक्षा का परिमाणात्मक विकास तो अवश्य हुआ, किन्तु गुणात्मक विकास न हो सका।

प्रश्न 7.
मृत्यु समंकों के प्रभावों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
मृत्यु सम्बन्धी घटनाओं का अध्ययन एवं प्रमापन न केवल जनांकिकीय विश्लेषण के लिए आवश्यक है, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य के स्तर को प्राप्त करने के लिए स्वास्थ्य एवं चिकित्सीय दृष्टि से भी आवश्यक होता है। इसके प्रभावों को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से स्पष्ट कर सकते हैं –
1. परिवार का आकार:
मृत्यु की बारंबारता परिवार के आकार को निश्चित करती है। जिस समाज में मृत्यु – दर उच्च होती है, वहाँ प्रायः संयुक्त परिवार व्यवस्था पनपती है किन्तु जहाँ मृत्यु – दर नीची होती है, वहाँ एकाकी परिवार व्यवस्था होती है।

2. आत्मविश्वास को ठेस पहुँचना:
मृत्यु की घटनाएँ मनुष्य के आत्मविश्वास को ठेस पहुँचाती हैं। निरंतर होने वाली पारिवारिक मृत्यु से मनुष्य हतोत्साहित एवं उदासीन बन सकता है। कभी – कभी वह ईश्वर को कोसने लगता है और नास्तिक बन जाते हैं।

3. भविष्य के प्रति मानसिकता:
जिस समाज में मृत्यु – दर ऊँची होती है वहाँ व्यक्ति भविष्य के प्रति उदासीन रहता है। बच्चों की शिक्षा पर भी व्यय करने में संकोच करता है।

4. स्वास्थ्य सेवाएँ:
मृत्यु सम्बन्धी समंकों में किसी समाज की स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धि पर प्रकाश डाला जा सकता है। ये मृत्यु के कारणों का भी पंजीकरण करते हैं।

5. शिशुओं के प्रति उदासीनता:
यदि मृत्यु – दर ऊँची होती है, तो माता – पिता अपने बच्चे को अधिक प्यार नहीं करते हैं, उसके प्रति वे अधिक महत्त्वाकांक्षी और आशावादी नहीं होते हैं। फलत: बच्चों का पालन – पोषण अच्छी तरह से नहीं हो पाती है।

6. जीवन – प्रत्याशा:
मृत्यु सम्बन्धी घटनाएँ जीवन प्रत्याशा को भी प्रभावित करती हैं। यह मृत्यु – दर की भूतकालीन प्रवृत्तियों को दर्शाती है। वर्तमान एवं भूतकालीन मृत्यु सम्बन्धी सूचनाओं के आधार पर भविष्य की मृत्यु – दर का अनुमान लगाया जा सकता है, जिससे भविष्य की जनसंख्या का प्रक्षेपण किया जा सकता है।

7. मानसिक संतुलन का विकृत हो जाना:
बाहरी दिखावे की प्रवृत्ति ने व्यक्ति की मानसिकता को पूरी तरह से झुंझला दिया है, जिसके परिणामस्वरूप असंतुलन की बीमारी में वृद्धि होने लगी है।

8. विवाह का स्वरूप:
ऊँची मृत्यु – दर वाले समाज में प्राय: माता – पिता के द्वारा निश्चित की गई शादियाँ की जाती हैं। यही कारण है कि अर्द्ध – विकसित देशों में जहाँ मृत्यु – दर अधिक होती है, तय विवाहों की परम्परा है।

प्रश्न 8.
मृत्यु क्रम को नियंत्रित करने वाले घटकों पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
उत्तर:
वर्तमान में अधिकांश देशों में मृत्यु – दर घट रही है। पिछली शताब्दी में बढ़ती हुई मृत्यु – दर को नियंत्रित करके उसे बहुत कम कर देना एक अविश्वसनीय उपलब्धि रही है।
जनांकिकीय अध्ययनों के आधार पर मृत्यु क्रम में गिरावट आने के निम्नलिखित कारण हैं –
(1) सामाजिक सुधारों का गहन प्रभाव:

  • 19वीं सदी के मध्य में शहरों के पर्यावरण में काफी सुधार किया गया।
  • कार्य की दशाओं में काफी क्रांतिकारी परिवर्तन किए गए, जिसका अच्छा प्रभाव लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ा।
  • देशों में कारखानों के नियम निश्चित किए गए, जिनके द्वारा बच्चों एवं औरतों के काम करने के अधिकतम घंटों को निर्धारित किया गया।
  • कार्य करने की कम – से – कम उम्र में वृद्धि की गई तथा काम करने के भौतिक वातावरण में सुधार किए गए।

(2) आर्थिक विकास एवं आय में वृद्धि हो जाना:

  • आय बढ़ने के कारण लोगों के जीवन स्तर में सुधार हुआ।
  • आर्थिक विकास के परिणामस्वरूप सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ।
  • आर्थिक विकास के होने से महामारियों पर भी नियंत्रण कर लिया गया, जिसके कारण मृत्यु – दर में अत्यधिक कमी आई।

(3) जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों का तीव्र विकास:

  • इन कार्यक्रमों से संक्रामक रोगों से होने वाले मृत्यु को नियंत्रित किया गया है।
  • इन कार्यक्रमों से लोगों के स्वास्थ्य में भी सुधार हुआ है।

(4) स्वयं की एवं वातावरण की स्वच्छता:

  • 19वीं सदी के अंत तक पानी में वाटर – फिल्टर का प्रयोग प्रारम्भ हो गया था।
  • पानी से उत्पन्न बीमारियों जैसे पीलिया, हैजा, प्लेग तथा पेचिश से होन वाली मौतों पर नियंत्रण किया गया।
  • स्वयं की स्वच्छता के लिए भी लोगों ने अनेक वस्तुओं का प्रयोग किया।

प्रश्न 9.
जनसंख्या घनत्व को निर्धारित करने वाले कारकों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
जनसंख्या घनत्व को निर्धारित करने वाले कारकों को निम्नलिखित आधारों पर स्पष्ट कर सकते हैं –
1. जनवायु:
जहाँ की जलवायु अधिकतम उष्ण है; वहाँ मानव आवास अत्यंत ही कम है, जबकि उन क्षेत्रों में जनसंख्या अधिक है, जो मानसूनी तथा समशीतोष्ण जलवायु वाले हैं। भारत में केरल, बंगाल व बिहार में जलवायु अच्छी है, इस कारण वहाँ जनसंख्या का घनत्व अधिक है, जबकि असम व अरुणाचल प्रदेश की जलवायु अच्छी नहीं है। इस कारण वहाँ जनसंख्या का घनत्व न्यून है।

2. यातायात के साधन:
जहाँ यातायात के साधनों का आभाव होता है, वहाँ जनसंख्या का घनत्व कम होता है, जबकि जिन क्षेत्रों में इन साधनों की उपलब्धता होती है वहाँ जनसंख्या का घनत्व भी अधिक पाया जाता है।

3. राजनीतिक कारण:
उन नगरों में जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है, जो राज्य सरकारों की राजधानी होते हैं। दिल्ली की जनसंख्या में इस गति से वृद्धि का कारण दिल्ली का भारत की राजधानी होना है।

4. ऐतिहासिक कारण:
ऐतिहासिक कारण भी जनसंख्या के घनत्व को प्रभावित करते हैं। भारत में आगरा, बनारस, अजमेर आदि में ऐतिहासिकता के कारण ही जनसंख्या का घनत्व अधिक पाया जाता है।

5. सुरक्षा – सुविधाएँ:
प्रत्येक व्यक्ति अपनी सम्पत्ति व जीवन की सुरक्षा चाहता है। उन क्षेत्रों में जनसंख्या का घनत्व अधिक होता है, जहाँ व्यक्ति को अपने जान – माल का भय न हो। इसके विपरीत जहाँ सुरक्षा न हो वहाँ घनत्व कम पाया जाता है।

6. धार्मिक कारण:
भारत एक धर्मप्रधान देश है। भारत के धार्मिक स्थानों पर जनसंख्या का घनत्व अधिक पाया जाता है, जबकि साधारण शहरों व स्थानों पर जनसंख्या का घनत्व कम पाया जाता है।

7. आवास – प्रवास:
किसी भी क्षेत्र में जनसंख्या के घनत्व को प्रभावित करने में आवास-प्रवास की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। 1947 के बाद भारत में काफी आवास – प्रवास हुआ है, इसके कारण भी जनसंख्या के घनत्व में अन्तर आया है।

8. शैक्षणिक कारण:
जहाँ शिक्षा की सुविधाएँ नहीं होती हैं वहाँ जनसंख्या का घनत्व कम होता है, जबकि शिक्षा की सुविधाएँ अधिक होती हैं, वहाँ जनसंख्या काफी अधिक पाई जाती है।

प्रश्न 10.
ग्राम – नगरीय नैरन्तर्य (सातत्य/संलग्नता) की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए इसकी स्थिति पर प्रकाश डालिए।
उत्तर:
आज ग्राम एवं नगर आदर्श रूप में विद्यमान नहीं हैं वरन् गाँव नगरों की विशेषताओं को ग्रहण करते जा रहे हैं तथा नगर भी ग्रामीण जीवन की अनेक बातों को नवीन रूप में स्वीकार कर रहे हैं। इन दोनों में परस्पर यह आदान-प्रदान की प्रक्रिया ही ग्राम – नगर नैरन्तर्य (Rural urban continuum) के नाम से जानी जाती है।
निम्नलिखित आधारों पर हम ग्रामीण-नगरीय संलग्नता को स्पष्ट कर सकते हैं –
1. गतिशीलता:
नगरीय प्रभावों के कारण गाँवों में भी गतिशीलता बढ़ रही है। अब ग्रामीण लोग अपने पुराने व्यवसायों को त्यागकर शहरों में रोजगार के लिए पलायन कर रहे हैं।

2. परिवार की प्रवृत्ति पर प्रभाव:
गाँव की संयुक्त परिवार प्रणाली भी अब विघटित होने लगी है, उसके स्थान पर एकाकी परिवारों का चलन बढ़ रहा है।

3. मानवशक्ति का प्रभाव:
प्रजातंत्र में दबाव समूह बनाने के लिए प्रदर्शन व आंदोलन आदि करने पड़ते हैं, इसके लिए जनशक्ति गाँवों से उपलब्ध होती है।

4. मिश्रित जीवन:
ग्रामीण जीवन पर नगरीय प्रभाव तथा नगरीय जीवन पर ग्रामीण प्रभाव स्पष्ट देखे जा सकते हैं, अब गाँवों में भी नगरों की तरह मिली – जुली संस्कृति व जीवन – शैली दृष्टिगोचर होती है।

5. तकनीक का प्रसार:
नगरों के सम्पर्क के कारण गाँवों में तकनीक का प्रसार हो रहा है। जैसे मोबाइल, वाहन व अन्य उपकरणों का प्रयोग गाँवों में दृष्टिगोचर होने लगे हैं।

6. फैशन की प्रवृत्ति:
नगरों के भाँति गाँवों में भी अब सदस्यों में फैशन की प्रवृत्ति पाई जाती है। वे भी नगरों की भाँति वेशभूषा व रहन – सहन को अब अपनाने लगे हैं।

7. सांस्कृतिक प्रसार:
दोनों ही स्थानों पर सांस्कृतिक प्रसार दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। नगरों के सदस्य भी गाँवों की संस्कृति, उनके रिवाज व स्थलों पर जाकर उनका अनुसरण किया करते हैं।