Rajasthan Board RBSE Class 12 Business Studies Chapter 11 उद्यमिता: परिचय, प्रकृति, महत्त्व एवं बाधायें

RBSE Class 12 Business Studies Chapter 11 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न एवं उनके उत्तर

RBSE Class 12 Business Studies Chapter 11 अतिलघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
उद्यमिता का अर्थ बताइए।
उत्तर:
उद्यमिता अपना स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने की प्रक्रिया है, जिसमें जोखिम का तत्व समाहित होता है।

प्रश्न 2.
उद्यामिता का कोई एक परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
प्रो. मुसेलमान तथा जेक्सन के अनुसार – “किसी व्यवसाय को प्रारम्भ करने तथा उसे सफल बनाने के लिए उसमें समय, धन तथा प्रयासों का निवेश करना एवं जोखिम उठाना ही उद्यमिता है।”

प्रश्न 3.
साहसी किसे कहते हैं ?
उत्तर:
व्यवसाय में जोखिम उठाने वाले व्यक्ति को साहसी कहते हैं।

प्रश्न 4.
जोखिम का अर्थ बताइए।
उत्तर:
व्यवसाय में आने वाली व्यावसायिक अनिश्चिताओं के कारण हानि की सम्भावनाओं को जोखिम कहते हैं।

प्रश्न 5.
नवाचार किसे कहते हैं?
उत्तर:
साधारण शब्दों में ‘नवाचार’ का अर्थ उत्पादन के नये डिजायन, नयी उत्पादन विधि यो एक नई विपणन तकनीक से लिया जाता है। संक्षेप में, नवाचार से तात्पर्य विद्यमान व्यवस्था में नवीनता लाना है।

RBSE Class 12 Business Studies Chapter 11 लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
उद्यमिता को विस्तार से समझाइए।
उत्तर:
उद्यमिता:
उद्यमिता एक क्रमबद्ध:
उद्देश्यपूर्ण तथा रचनात्मक क्रिया है ताकि आवश्यकताओं को स्पष्ट किया जा सके तथा स्रोतों के गतिशील बनाने तथा उत्पादन को ग्राहकों को बेचने के लिये संगठित करने, निवेशकों को आय दिलाने तथा स्वयं व्यवसाय को व्यापारिक जोखिमों तथा सम्बन्धित अनिश्चितताओं के अनुसार लाभ प्राप्त करने में सहायक होती है। अन्य शब्दों में, उद्यमिता अपना स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने की एक प्रक्रिया है। जिसमें जोखिम का तत्व विद्यमान होता है।

प्रो. उदय पारीक एवं मनोहर नादकर्णी के अनुसार – “उद्यमिता से आशय समाज के नये उपक्रम स्थापित करने की सामान्य प्रवृत्ति से है।”

पीटर किलबाई के अनुसार – “उद्यमिता विभिन्न क्रियाओं का सम्मिश्रण है, जिसमें बाजार अवसरों का ज्ञान प्राप्त करना, उत्पादन के साधनों का समायोजन एवं प्रबन्ध करना, उत्पादन, तकनीक एवं वस्तुओं को अपनाना सम्मिलित है।”

प्रश्न 2.
उद्यमिता की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
उद्यमिता की प्रमुख विशेषताएँ निम्नवत् हैं –

  1. उद्यमिता में नवीन तकनीक, नवीन उत्पाद या अन्य किसी प्रकार के नवाचार का समावेश होता है।
  2. उद्यमिता में उद्यमी द्वारा वस्तु या सेवा के स्थान, रंग रूप आदि उपयोगिताओं का सृजन करके उसको समाज के लिए अधिक उपयोगी बनाया जाता है।
  3. उद्यामिता जोखिम उठाने की क्षमता का प्रयोग है।
  4. उद्यमिता अवसर खोजने की एक प्रक्रिया है।
  5. उद्यमिता उच्च उपलब्धि की आकांक्षा का परिणाम होती है।
  6. उद्यमिता व्यवसाय शास्त्र, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान, कानून, सांख्यिकी, प्रबन्ध शास्त्र आदि के सिद्धान्तों पर आधारित होती है।
  7. उद्यमिता एक पेशेवर एवं अर्जित योग्यता है।
  8. उद्यमिता त्वरित गति से हो रहे सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, तकनीकी, सरकारी नीतियों व नियम आदि में हो रहे बदलाव का परिणाम है।
  9. उद्यमिता, उद्यमी के द्वारा किया गया व्यय होता है न कि उसके व्यक्तित्व का लक्षण।
  10. यह ज्ञान पर आधारित होती है एवं व्यक्तित्व निर्माण की क्रिया को सम्पादित करती है।

प्रश्न 3.
एक सफल उद्यमी के किन्हीं पाँच गुणों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
(1) प्रभावशाली व्यक्तित्व – एक सफल उद्यमी के लिये प्रभावशाली व्यक्तित्व होना अत्यन्त आवश्यक है। प्रभावशाली व्यक्तित्व के अन्तर्गत सुन्दर आकृति, हँसमुख स्वभाव, अच्छा स्वास्थ्य, व्यवसाय में रुचि, आत्म निश्चय आदि गुणों का समावेश होता है। इन गुणों से वह अपने कर्मचारियों में विश्वास उत्पन्न कर सकता है और बाहरी व्यक्तियों को प्रभावित कर सकता है।

(2) परिश्रमी – “एक उद्यमी को सफल होने के लिए उसका परिश्रमी होना अति आवश्यक है कहा भी गया है कि परिश्रम सफलता की कुंजी है।” “जितना परिश्रम करोगे फलस्वरूप उतनी ही सफलता प्राप्त होगी। तथा व्यवसाय प्रतिष्ठित होगा।” यदि किसी व्यवसायं का मालिक स्वयं आलसी होगा तो उसके नियन्त्रण में कार्यरत कर्मचारी भी कामचोर होंगे। अतः वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक युग में अपने आपको बाजार में बनाये रखने हेतु कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है।

(3) सहयोगी – उद्यमी को व्यवसाय के स्वामियों, कर्मचारियों ऋणदाताओं, पूर्तिकर्ताओं, ग्राहकों एवं यहाँ तक कि अपने प्रतिस्पद्धियों के साथ भी सहयोग एवं सामंजस्यपूर्ण व्यवहार रखना चाहिए। उद्यमी में समझौता करने की एवं अपनी भूलों तथा गलतियों को स्वीकार करने की योग्यता होनी चाहिए।

(4) निष्ठावान – एक सफल उद्यमी को न केवल सामान्य अपितु विशेष एवं संकटकालीन परिस्थितियों में भी अपने सहयोगियों, ग्राहकों, पूर्तिकर्ताओं, सरकार आदि के प्रति निष्ठावान रहना चाहिए। उद्यमी को कालाबाजारी वस्तुओं का कृत्रिम अभाव, मुनाफाखोरी, चोरबाजारी जैसे हथकंडे अपनाकर विभिन्न वर्गों के प्रति अपनी निष्ठा भंग नहीं करनी चाहिए।

(5) मानवीयता – कर्मचारियों के साथ मधुर सम्बन्धों के साथ निर्माण से श्रम आवर्तन कम होता है जिससे अनुभवी व योग्य कर्मचारियों का ठहराव एवं उद्यमी के प्रति मान, सम्मान व अपनत्व की भावना में वृद्धि होती है। एक उद्यमी को उपक्रम में कार्यरत विभिन्न कर्मचारियों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण रखना चाहिए।

प्रश्न 4.
उद्यमी के शारीरिक व मानसिक गुणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
उद्यमी के शारीरिक व मानसिक गुण निम्नलिखित हैं –
(1) उत्तम स्वास्थ्य एवं कार्य करने की शक्ति – स्वस्थ्य शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है, स्वस्थ मस्तिष्क से व्यावसायिक क्रिया बिना तनाव, थकावट, झुंझलाहट के आसानी से सम्पन्न हो जाती है अतः उद्यमी का स्वास्थ्य अच्छा होना चाहिए। यही नहीं उद्यमी की कार्य शक्ति भी अच्छी होनी चाहिए। उसमें लम्बे समय तक कार्य करने की शक्ति होने पर ही वह पूर्ण मनोयोग एवं उत्साह से अपना कार्य सम्पन्न कर पायेगा।

(2) कल्पनाशील – “उद्यम की स्थापना से लेकर उसके संचालन तक उद्यमी को विभिन्न नवाचार करने होते हैं जो कि कल्पनाशील होने पर ही सम्भव हो पाते हैं। अत: उद्यमी में कल्पना शक्ति का होना नितान्त अनिवार्य है। आर्थर आल्पस के शब्दों में केवल उसी व्यक्ति की महत्वाकाक्षायें पूरी होती हैं जो कर्मवीर होता है। केवल कल्पना करने वाले व्यक्ति की महत्वाकांक्षायें कभी भी पूरी नहीं होती हैं।”

(3) दूरदर्शिता – एक दूरदर्शी उद्यमी उपक्रम को उन्नति के चरम शिखर पर ले जा सकता है। ग्राहकों की भावी रुचि, सरकारी नीति, प्रतिस्पर्धा, बाजार सम्भावना आदि का ठीक से पूर्वानुमान करके एक उद्यमी अपने उपक्रम का विकास एवं विस्तार कर सकता है। अत: उद्यमी को दूरदर्शी होना चाहिए।

(4) निर्णयन क्षमता – एक उद्यमी को किसी समस्या के समाधान के लिए वर्तमान व भावी परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए निर्णय लेने होते हैं एवं सही समय पर लिया गया सही निर्णय ही उद्यमी के लिए सफलता का द्वार खोलता है। अतः एक सफल उद्यमी में निर्णयन क्षमता होनी चाहिए।

प्रश्न 5.
उद्यमी के सामाज्ञिक गुणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
एक उद्यमी में निम्न सामाजिक गुणों को होना चाहिए –
(1) उद्यमी की सफलता में उसकी मिलनसारिता का बहुत बड़ा योगदान होता है। उद्यमी को सबके साथ स्नेहपूर्ण वार्तालाप करनी चाहिए।

(2) उद्यमी को सभी वर्गी का सहयोगी होना चाहिए। उसे व्यवसाय के स्वामियों, कर्मचारियों, ऋणदाताओं, पूर्तिकर्ताओं, ग्राहकों एवं प्रतिस्पर्धियों के साथ सहयोग एवं सामंजस्यपूर्ण व्यवहार रखना चाहिए।

(3) एक उद्यमी को उपक्रम में कार्यरत विभिन्न कर्मचारियों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण रखना चाहिए। उसे अपने कर्मचारियों एवं अधीनस्थों के साथ स्नेह, अपनत्व, प्यार व सुहानुभूतिपूर्वक व्यवहार करना चाहिए।

(4) एक उद्यमी में आदर भाव का गुण होना चाहिए। उसे अपने सम्पर्क में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति छोटे – बड़े, गरीब – अमीर, शिक्षित – अशिक्षित आदि सभी को सम्मान देना चाहिए।

RBSE Class 12 Business Studies Chapter 11 निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
उद्यमिता से आप क्या समझते हैं? इसकी विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उद्यमिता का अर्थ:
सामान्य अर्थ में उद्यमिता का तात्पर्य जोखिम वहन करने एवं अनिश्चिताओं का सामना करने की योजना एवं साहस से है। आधुनिक समय में उद्यमिता के क्षेत्र में विस्तार हुआ है फलतः नवीन उपक्रमों की स्थापना, उनका निर्देशन एवं नियन्त्रण, उपक्रम में परिवर्तन एवं सृजनशीलता, सुधारात्मक कार्यवाही की जोखिम उठाने की क्षमता को उद्यमिता कहा जाता है। जो व्यक्ति ये योग्यता रखते हैं उन्हें उद्यमी अथवा साहसी के नाम से जाना जाता है।

पीटर किलबाई के अनुसार – “उद्यमिता विभिन्न क्रियाओं का सम्मिश्रण है, जिसमें बाजार अवसरों का ज्ञान प्राप्त करना, उत्पादन के साधनों का समायोजन एवं प्रबन्ध करना, उत्पादन, तकनीक एवं वस्तुओं को अपनाना सम्मिलित है।”

फ्रेंकलिन लिण्डसे के अनुसार – “उद्यमिता समाज की भावी आवश्यकताओं का पूर्वानुमान लगाना तथा उन्हें संसाधनों के नये सृजनात्मक एवं कल्पनाशील संयोजकों के द्वारा सफलतापूर्वक पूरा करना है।”

उद्यमिता की विशेषतायें:
उद्यमिता की विशेषतायें निम्नवत् हैं –
(1) नवाचार – नवाचार से तात्पर्य विद्यमान व्यवस्था में नवीनता लाना है। इसमें नवीन तकनीक, नवीन उत्पाद या अन्य किसी प्रकार के नवाचार का समावेश होता है। उद्यमी अपने व्यवसाय में जब किसी नवाचार को अपनाता है तब ही उसे उद्यमी की श्रेणी में रखा जाना न्यायोचित होता है। पीटर एफ. डुकर ने लिखा है कि, “नवाचार उद्यमिता का विशिष्ट उपकरण है।”

(2) सृजनात्मक क्रिया – उद्यमिता एक सृजनात्मक प्रक्रिया है जिसमें उद्यमी द्वारा वस्तु या सेवा के स्थान, रंग रूप आदि उपयोगिताओं का सृजन करके उसको समाज के लिये अधिक उपयोगी बनाया जाता है। हिजरिच एवं पीटर्स के अनुसार, “उद्यमिता उपयोगिता सृजित करने की प्रक्रिया है।” उद्यमिता द्वारा अनुपयोगी वस्तुओं को उपयोगी सृजित करने की प्रक्रिया है।” उद्यमिता द्वारा अनुपयोगी वस्तुओं को उपयोगी वस्तुओं में परिवर्तित करके सृजनात्मक कार्य किया जाता है। पीटर एफ. डुकर ने भी स्पष्ट किया है कि, “उद्यमिता मिट्टी के ढेर को भी सोने में बदल सकती है।”

(3) जोखिम वहन करना – उद्यमिता जोखिम उठाने की समता का पर्याय है। इसमें एक उद्यमी नवीन उपक्रम की स्थापना एवं संचालन, बाजार में नवीन उत्पादन का प्रस्तुतिकरण, बाज़ार की अनिश्चिताओं के मध्य मूल्य निर्धारण करने के लिये उसमें अपना धन, समय व मेहनत का निवेश कर जोखिम उठाता है।

(4) अंवसर खोजने की प्रक्रिया – उद्यमिता अवसर तलाशने की प्रक्रिया है जिसमें एक उद्यमी व्यक्तियों की समस्याओं, उनकी आवश्यकताओं व आकांक्षाओं, सामाजिक व तकनीकी परिवर्तनों, प्रतिस्पर्धा आदि में भी उद्यमिता के अवसर खोजता है एवं उन्हें क्रियान्वित करता है। जैसे एक औद्योगिक क्षेत्र में खाने हेतु छोटा होटल या रेस्टोरेन्ट नहीं है तो व्यक्तियों की इस समस्या में उद्यमी टिफिन सेन्टर खोलकर नये अवसर खोज लेता है।

(5) उपक्रम की स्थापना व संचालन – उद्यमिता व्यक्तियों को इस बात की प्रेरणा देती है कि वे नवीन व्यवसायों की स्थापना करें एवं उसका सफलतापूर्वक संचालन करें। उद्यमिता द्वारा ही समाज के नवीन उपक्रमों की स्थापना सम्भव हो पाती है। इसके अभाव में नवीन औद्योगिक इकाइयों का निर्माण असम्भव है।

(6) उच्च उपलब्धि की आकांक्षा का परिणाम – उद्यमिता उच्च उपलब्धि की आकांक्षा का परिणाम होती है। उद्यमी अपनी उच्च उपलब्धि की महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत एवं संघर्ष को सदैव तत्पर रहता है। वह अपने लक्ष्य को किसी भी तरह प्राप्त करना चाहती है। गैलरमैन ने लिखा है कि “उद्यमी उच्च उपलब्धियों के लक्ष्य के प्रति समर्पित होते हैं, तथा इन्हें प्राप्त किये बिना सन्तुष्ट नहीं होते हैं।”

(7) पेशेवर क्रिया – उद्यमिता एक पेशेवर एवं अर्जित योग्यता है। यदि कोई व्यक्ति इस योग्यता को प्राप्त करना चाहता है तो विभिन्न शिक्षण – प्रशिक्षण संस्थानों में शिक्षण प्रशिक्षण प्राप्त कर इस योग्यता को प्राप्त कर सकता है। वर्तमान में विभिन्न सहकारी संगठनों द्वारा उद्यमिता प्रकृति को विकसित करने हेतु विभिन्न कार्यक्रमों तथा योजनाओं का संचालन किया जा रहा है।

(8) उद्यमिता एक व्यवहार – उद्यमिता उद्यमी द्वारा किया जाने वाला व्यवहार है न कि उसके व्यक्तित्व का लक्षण जो उद्यमी अपने व्यवहार से जितनी अधिक जोखिम वहन करेगा, नवीन कार्य करेगा, नवाचार करेगा, वह उतना ही प्रखर व बड़ा उद्यमी बनता जाता है। पीटर एफ. डुकर ने लिखा है कि, “उद्यमिता न विज्ञान है और न कला। यह तो व्यवहार है।”

प्रश्न 2.
उद्यमिता के महत्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
उद्यमिता का महत्व:
किसी भी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था चाहे वह विकसित हो या विकासशील हो, उस राष्ट्र की विचारधारा चाहे पूँजीवादी हो या समाजवादी हो, उस राष्ट्र का नेतृत्व चाहे प्रजातान्त्रिक या राजशाही या अधिनायकवादी हो सभी स्थितियों में उद्यमिता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह किसी देश की आर्थिक एवं औद्योगिक प्रगति का आधार स्तम्भ है तथा सम्पूर्ण अर्थव्यस्था को विकासात्मक दिशा प्रदान करती है। इसके महत्व के बारे में डोलिंगंर ने लिखा है, “आधुनिक बाजार आधारित अर्थव्यवस्था में नये व्यवसायों का सृजन करना ही तकनीकी एवं आर्थिक विकास की कुंजी है। उद्यमिता के माध्यम से लोग बेहतर, दीर्घायु एवं अधिक समृद्ध जीवन जीते रहेंगे।” उद्यमिता के महत्व को निम्न बिन्दुओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है –
(1) देश को आर्थिक विकास – उद्यमिता किसी देश के आर्थिक विकास की आधारशिला है। कृषि, विनिर्माण एवं सेवाओं से सम्बन्धित उत्पादन करके उद्यमी आय पैदा करते हैं। यह आय लगान, मजदूरी, वेतन, ब्याज में बँट जाती है तथा जो शेष बचता है वह लाभ कहलाता है। इससे पूँजी निर्माण होता है तथा आर्थिक विकास को बेल मिलता है।

(2) नवीन उत्पाद व तकनीकी विकास में सहायक – उद्यमिता के द्वारा नवीन उत्पाद व तकनीकी विकास में सहायता मिलती है। मानव जीवन में काम आने वाली विभिन्न वस्तुओं का उत्पादन उद्यमिता के द्वारा ही सम्भव होता है तथा विद्यमान उत्पादन विधियों में सुधार एवं परिवर्तन करके नवीन तकनीकों को विकसित किया जाता है।

(3) रोजगार के अवसरों का सृजन – उद्यमिता, उद्यमी को स्व रोजगार प्राप्त करती है तथा कितने ही व्यक्तियों को रोजगार देकर रोजगार के नये अवसरों का निर्माण करती है। ऐसे लोग जिनके पास कोई रोजगार नहीं है या अकुशल हैं वे कोई भी छोटा या बड़ा उद्यम स्थापित करके स्वयं रोजगार पा सकेंगे तथा दूसरों को भी रोजगार उपलब्ध करा सकेंगे। रिब्सान के शब्दों ने, “विकासशील देशों में उद्यमी रोजगार के अवसर पैदा करने वाला होता है।”

(4) मानवीय क्षमता के पूर्ण उपयोग का अवसर – उद्यमिता में उद्यमी को अपनी क्षमताओं को पूर्ण विकसित करने में सहायता मिलती है। वह अपने व्यवसाय के विकास एवं विस्तार हेतु अपनी पूर्ण शारीरिक, मानसिक एवं दौहिक क्षमता से कार्य करता है। जिससे न्यूनतम लागत पर श्रेष्ठ एवं सस्ती वस्तुयें उत्पादित करने में सहायता मिलती है।

(5) पूँजी निर्माण को प्रोत्साहन – एक उद्यमी जब अपनी बचतों का प्रयोग अपने उद्यम में निवेश के लिए करता है तो वह अपने आस-पास के मित्रों, रिश्तेदारों तथा घनिष्ठ व्यक्तियों को बचत करने के लिये उत्साहित करता है ताकि उनकी बचतों को व्यवसाय में निवेश कर सके। उद्यमियों द्वारा सर्वसाधारण को भी उद्यमों में पूँजी निवेश के लिये आमन्त्रित किया जाता है।

रेजर नस्कर्ट के अनुसार – “विकासशील देशों में केवल उद्यमिता ही पूँजी के अभेद्य दुर्ग को तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है और पूँजी निर्माण में आर्थिक शक्तियों को गति प्रदान कर सकती है।

(6) सन्तुलित आर्थिक विकास – देश के विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक विषमतायें पायी जाती हैं जिसका कारण है, उद्योगों का विकास न होना। उद्यमिता के द्वारा देश के विभिन्न क्षेत्रों में उद्योगों की स्थापना की जा सकती है जो क्षेत्र कम विकसित है वहाँ उद्यमियों को विशेष रियायत व छूट प्रदान करके सन्तुलित आर्थिक विकास किया जा सकता है। प्रो. नर्कसे ने लिखा है कि, उद्यमी सन्तुलित आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

(7) शोध एवं अन्वेषण को बढ़ावा – उद्यमिता नवीनता पर बल देती है। यह नवीनता उत्पाद, तकनीकी या बाजार से सम्बन्धित हो सकती है। उद्यमी से कुछ नया करने की चाहत होना या परिवर्तन को अवसर के रूप में देखना, परिवर्तन से अपने विचारों का परीक्षण करना उनके लिये नया बाजार तैयार करते हैं।

(8) सामाजिक परिवर्तन में सहायक – उद्यमिता रोजगार का महत्वपूर्ण साधन है। जिसके द्वारा देश के विभिन्न क्षेत्रों में व्यक्तियों को रोजगार के अवसरों की प्राप्ति होती है जिसके फलस्वरूप उनके जीवन स्तर में वृद्धि होती है और समाज में सकारात्मक परिवर्तन आसानी से सम्भव हो जाता है।

प्रश्न 3.
एक सफल उद्यमी के गुणों की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
एक सफल उद्यमी के गुणों के सम्बन्ध में विद्वान एक मत नहीं हैं। अनेक प्रबन्धशास्त्रियों एवं अर्थशास्त्रियों ने उद्यमी के गुणों का वर्णन किया है जो शारीरिक एवं मानसिक, सामाजिक एवं नैतिक तथा व्यावसायिक गुणों से सम्बन्धित है। जिनका विवरण निम्नवत् है –
(1) प्रभावशाली व्यक्तित्व – एक सफल उद्यमी के लिए प्रभावशाली व्यक्तित्व होना अत्यन्त आवश्यक है। प्रभावशाली व्यक्तित्व के अन्तर्गत सुन्दर प्राकृति, हँसमुख स्वभाव, अच्छा स्वास्थ्य, व्यवसाय में रुचि, आत्म निश्चय आदि गुणों का समावेश होता है। इन गुणों से वह अपने कर्मचारियों में विश्वास उत्पन्न कर सकता है और बाहरी व्यक्तियों को प्रभावित कर सकता है।

(2) परिश्रमी – एक उद्यमी को सफल होने के लिए उसका परिश्रमी होना अति आवश्यक है। कहा भी गया है कि परिश्रम सफलता की कुंजी है। जितना परिश्रम करोगे फलस्वरूप उतनी ही सफलता प्राप्त होगी तथा व्यवसाय प्रतिष्ठित होगा। यदि किसी व्यवसाय का मालिक स्वयं आलसी होगा तो उसके नियन्त्रण में कार्यरत कर्मचारी भी कामचोर होंगे, अतः वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक युग में अपने आपको बाजार में बनाये रखने हेतु कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है।

(3) सहयोगी – उद्यमी को व्यवसाय के स्वामियों, कर्मचारियों, ऋणदाताओं, पूर्तिकर्ताओं, ग्राहकों एवं यहाँ तक कि अपने प्रतिस्पर्धियों के साथ भी सहयोग एवं सामंजस्यपूर्ण व्यवहार रखना चाहिए। उद्यमी में समझौता करने की एवं अपनी भूलों तथा गलतियों को स्वीकार करने की योग्यता होनी चाहिए।

(4) निष्ठावान – एक सफल उद्यमी को न केवल सामान्य अपितु विशेष एवं संकटकालीन परिस्थितियों में भी अपने सहयोगियों, ग्राहकों, पूर्तिकर्ताओं, सरकार आदि के प्रति निष्ठावान रहना चाहिए। उद्यमी को कालाबाजारी, वस्तुओं का कृत्रिम अभाव, मुनाफाखोरी, चोर बाजारी जैसे हथकंडे अपनाकर विभिन्न वर्गों के प्रति अपनी निष्ठा भंग नहीं करनी चाहिए।

(5) मानवीयता – कर्मचारियों के साथ मधुर सम्बन्धों के निर्माण से श्रम आवर्तन कम होता है जिससे अनुभवी व योग्य कर्मचारियों का ठहराव एवं उद्यमी के प्रति मान, सम्मान व अपनत्व की भावना में वृद्धि होती है। एक उद्यमी को उपक्रम में कार्यरत विभिन्न कर्मचारियों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण रखना चाहिए।

(6) उत्तम स्वास्थ्य एवं कार्य करने की शक्ति – स्वस्थ्य शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क विकास करता है, स्वस्थ मस्तिष्क से व्यावसायिक क्रियायें बिना तनाव, थकावट, झुंझलाहट के आसानी से सम्पन्न हो जाती हैं। अत: उद्यमी का स्वास्थ्य अच्छा होना चाहिए। यही नहीं उद्यमी की कार्य शक्ति भी अच्छी होनी चाहिए। उसमें लम्बे समय तक कार्य करने की शक्ति होने पर ही वह पूर्ण मनोयोग एवं उत्साह से अपना कार्य सम्पन्न कर पायेगा।

(7) कल्पनाशील – “उद्यम की स्थापना से लेकर उसके संचालन तक उद्यमी को विभिन्न नवाचार करने होते हैं जोकि कल्पनाशील होने पर ही सम्भव हो पाते हैं। अतः उद्यमी में कल्पना शक्ति का होना नितान्त अनिवार्य है। आर्थर आल्पस के शब्दों में, केवल उसी व्यक्ति की महत्वाकाक्षायें पूरी होती हैं जो कर्मवीर होता है। केवल कल्पना करने वाले व्यक्ति की महत्वाकांक्षायें कभी भी पूरी नहीं होर्ती।”

(8) दूरदर्शिता – एक दूरदर्शी उद्यमी उपक्रम को उन्नति के चरम शिखर पर ले जा सकता है। ग्राहकों की भावी रुचि, सरकारी नीति, प्रतिस्पर्धा, बाजार सम्भावना आदि को ठीक से पूर्वानुमान करके एक उद्यमी अपने उपक्रम का विकास एवं विस्तार कर सकता है। अतः उद्यमी को दूरदर्शी होना चाहिए।

(9) निर्णयन क्षमता – एक उद्यमी को किसी समस्या के समाधान के लिए वर्तमान व भावी परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए निर्णय लेने होते हैं एवं सही समय पर लिया गया सही निर्णय ही उद्यमी के लिये सफलता का द्वार खोलता है। अतः एक सफल उद्यमी में निर्णयन क्षमता होनी चाहिए।

(10) व्यावसायिक योग्यता – स्पर्धा के आधुनिक युग में केवल पैतृक गुणों या अनुभव से ही काम नहीं चलता है इसके लिए सैद्धान्तिक तथा व्यावहारिक दोनों ही प्रकार की शिक्षा प्राप्त करना आवश्यक है। हेनरी पी. डटन के अनुसार, “वह व्यक्ति जिसने एक बार भी व्यवसाय के कार्यों का ज्ञान प्राप्त कर लिया हो, जिसने संगठन, आर्थिक प्रबन्ध, लेखा – विधि, सहयोगियों के साथ कार्य करने एवं उनका नेतृत्व करने तथा क्रय-विक्रय के आधारभूत सिद्धान्तों को समझ लिया हो, वह बहुत शीघ्र ही व्यवसाय में कुशलता एवं सफलता प्राप्त कर लेता है।”

RBSE Class 12 Business Studies Chapter 11 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उनके उत्तर

RBSE Class 12 Business Studies Chapter 11 बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1.
उद्यम होता है एक –
(अ) बाजार
(ब) मेला
(स) व्यवसाय
(द) इनमें से कोई नहीं।
उत्तरमाला:
(स)

प्रश्न 2.
उद्यमी होता है –
(अ) व्यवसायी
(ब) व्यवसाय स्थापित करने वाला
(स) (अ) और (ब) दोनों
(द) इनमें से कोई नहीं।
उत्तरमाला:
(ब)

प्रश्न 3.
उद्यमिता को कहा जाता है –
(अ) प्रयत्न करना।
(ब) उधार देना
(स) व्यावसायिक क्रिया करना
(द) ये सभी।
उत्तरमाला:
(स)

प्रश्न 4.
उद्यमिता जोखिम कहते हैं –
(अ) निश्चितता को।
(ब) व्यावसायिक अनिश्चितता को
(स) निरन्तरता को
(द) इनमें से कोई नहीं।
उत्तरमाला:
(ब)

प्रश्न 5.
“उद्यमिता एक नव प्रवर्तनकारी कार्य है। यह स्वामित्व की अपेक्षा नेतृत्व कार्य है।” यह कथन है –
(अ) जोसेफ ए. शुम्पीटर का
(ब) पीटर किलबाई का
(स) हाबर्ड जॉनसन का
(द) फ्रेंकलिन लिण्डसे का।
उत्तरमाला:
(अ)

प्रश्न 6.
उद्यमिता है –
(अ) सृजनात्मक क्रिया
(ब) अवसर खोजने की प्रक्रिया
(स) पेशेवर क्रिया।
(द) उपरोक्त क्रिया।
उत्तरमाला:
(द)

प्रश्न 7.
“उद्यमिता ने विज्ञान है और न कला यह तो व्यवहार है, ये कथन है –
(अ) मार्शल का
(ब) पीटर एफ. डुकर.का.
(स) गैलरमैन को
(द) इनमें से कोई नहीं।
उत्तरमाला:
(ब)

प्रश्न 8.
उद्यमिता का महत्व है –
(अ) देश के आर्थिक विकास का आधार।
(ब) नवीन उपक्रमों की स्थापना में सहायक
(स) रोजगार के अवसरों का सृजन।
(द) उपरोक्त संभी।
उत्तरमाला:
(द)

प्रश्न 9.
उद्यमी सन्तुलित आर्थिक विकास का मार्ग प्रशस्त करते हैं।” यह कथन है –
(अ) प्रो. नर्कसे को
(ब) रेजर नस्कर्ट का
(स) पीटर एफ. डुकर का
(द) इनमें से कोई नहीं।
उत्तरमाला:
(अ)

प्रश्न 10.
मेक्क्लीलैंड के अनुसार सफल उद्यमी में गुण पाया जाता है –
(अ) असाधारण सृजनशीलता
(ब) जोखिम वहन करने की क्षमता
(स) सफलता प्राप्त करने की उच्च आकांक्षा
(द) उपरोक्त सभी
उत्तरमाला:
(द)

RBSE Class 12 Business Studies Chapter 11 अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
देश के आर्थिक विकास में उद्यमी की क्या भूमिका है?
उत्तर:
उद्यमी द्वारा देश के संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग किया जाता है एवं नव सृजन का कार्य सम्पन्न किया जाता है।

प्रश्न 2.
सामान्यतः आज का युवा वर्ग किन उद्यमियों को अपना आदर्श मानते हैं?
उत्तर:
आज के युवा बिल गेट्स, मुकेश अम्बानी, मार्क जुकरवर्ग, नारायणमूर्ति, मंगलम आदि जैसे उद्यमियों को अपना आदर्श मानते हैं।

प्रश्न 3.
अमरीका की ओपिनियन रिसर्च काउन्सिल के द्वारा किये गये सर्वेक्षण में 18 से 24 वर्ष के मध्य आयु के युवा वर्ग में कितने प्रतिशत युवाओं ने अपना व्यवसाय करने की इच्छा प्रकट की।
उत्तर:
58 प्रतिशत युवाओं ने।

प्रश्न 4.
“78 प्रतिशत प्रभावशाली अमरीकियों का विश्वास है कि क्यमिता ही इस शताब्दी का रुख निर्धारित करेगी।” इस तथ्य की पुष्टि किस संस्था द्वारा की गयी?
उत्तर:
अर्नस्ट एवं यंग नामक संस्था के सर्वेक्षण।

प्रश्न 5.
व्यवसाय एवं उपक्रम की स्थापना से सम्बन्धित उद्यमिता की व ई एक परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
प्रो. मुसेलमान तथा जेक्सन के अनुसार – “किसी व्यवसाय को प्रारम्भ करने तथा उसे सफल बनाने के लिये उसमें समय, धन तथा प्रयासों का निवेश करना एवं जोखिम उठाना ही उद्यमिता है।”

प्रश्न 6.
“उद्यमिता तीन मूलभूत तत्वों आविष्कार, नवाचार एवं अंगीकरण का मिश्रण है।” यह कथन किसका है?
उत्तर:
हावर्ड जॉनसन का।

प्रश्न 7.
नवाचार सम्बन्धी उद्यमिता की कोई एक परिभाषा दीजिए।
उत्तर:
प्रो. राव एवं मेहता के अनुसार – “उद्यमिता को वातावरण के सृजनात्मक एवं नवाचारी प्रत्युतर के रूप में वर्णित किया जा सकता है।”

प्रश्न 8.
उद्यमिता की कोई दो विशेषतायें बताइए।
उत्तर:

  1. उद्यमिता एक सृजनात्मक क्रिया है।
  2. उद्यमिता अवसर खोजने की प्रक्रिया है।

प्रश्न 9.
“नवाचार उद्यमिता का विशिष्ट उपकरण है।” यह कथन किसका है?
उत्तर:
पीटर एफ. डुकर का।

प्रश्न 10.
“उद्यमी उच्च उपलब्धियों के लक्ष्य के प्रति समर्पित होते हैं, तथा इन्हें प्राप्त किये बिना सन्तुष्ट नहीं होते यह कथन किसका है?”
उत्तर:
गैलरमैन का।

प्रश्न 11.
उद्यमिता के कोई दो महत्व बताइए।
उत्तर:

  1. नवीन उपक्रमों की स्थापना में सहायक।
  2. विद्यमान उपक्रमों के विकास एवं विस्तार में योगदान।

प्रश्न 12.
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जे. बी. से के अनुसार एक सफल उद्यमी में कौन – कौन से गुण होने चाहिए?
उत्तर:

  1. निर्णयन क्षमता
  2. दृढ़निश्चयी
  3. व्यावसायिक ज्ञान
  4. पर्यवेक्षण एवं प्रशासकीय क्षमता।

प्रश्न 13.
जेम्स बर्ना ने अपने निष्कर्षों द्वारा उद्यमी में किन – किन गुणों को आवश्यक माना
उत्तर:

  1. संगठनात्मक एवं प्रशासकीय योग्यता।
  2. तकनीकी एवं व्यावसायिक ज्ञान।
  3. अवसरों के प्रति सजगता।
  4. परिवर्तनों को स्वीकार करने में रुचि।
  5. जोखिम उठाने की मनोवैज्ञानिक क्षमता।

प्रश्न 14.
एक उद्यमी के कोई दो शारीरिक एवं मानसिक गुण बताइए।
उत्तर:

  1. परिश्रमी
  2. दूरदर्शिता

प्रश्न 15.
उद्यमी के कोई दो सामाजिक एवं नैतिक गुण बताइए।
उत्तर:

  1. नम्रता
  2. चरित्रवान।

प्रश्न 16.
“चरित्रवान व्यक्ति अपनी आँखों के द्वारा, अपने हाव-भाव द्वारा अपनी वाणी द्वारा, अपने कथन व तथ्यों द्वारा, अपने लोगों में अपना मन डाल देता है।” यह कथन किसका है?
उत्तर:
प्रो. हाबिन्स का।

प्रश्न 17.
एक सफल उद्यमी के कोई दो व्यावसायिक गुण बताइए।
उत्तर:

  1. व्यावसायिक योग्यता
  2. निर्णायक शक्ति।

RBSE Class 12 Business Studies Chapter 11 लघु उत्तरीय प्रश्न (SA – I)

प्रश्न 1.
निर्णय लेने से सम्बन्धित उद्यमिता की परिभाषा बताइए।
उत्तर:
एच, एन. पाठक के अनुसार – “उद्यमिता उन व्यापक क्षेत्रों को सम्मिलित करती है, जिनके सम्बन्ध में अनेक निर्णय लेने होते हैं। इन निर्णयों को तीन श्रेणियों में विभक्त किया जा सकता है –

  1. अवसर का ज्ञान करना
  2. औद्योगिक इकाई का संगठन करना,
  3. “औद्योगिक इकाई को लाभदायक, गतिशील एवं विकासशील संस्था के रूप में संचालित करना।”

प्रश्न 2.
रोबिन्स तथा कौलटर द्वारा उद्यमिता को किस प्रकार परिभाषित किया गया है?
उत्तर:
“उद्यमिता वह प्रक्रिया है जिसमें कोई व्यक्ति अथवा व्यक्तियों का समूह अपने नियन्त्रण के अधीन संसाधनों की परवाह किये बिना, उपयोगिता का सृजन करने एवं नवाचार द्वारा विकास के अवसरों को खोजने में समय व धन का जोखिम उठाता है।

प्रश्न 3.
उद्यमिता को रचनात्मक क्रिया क्यों माना गया है ?
उत्तर:
उद्यमिता को रचनात्मक या उद्देश्यपूर्ण क्रिया जाता है क्योंकि उद्यमी द्वारा आवश्यकताओं को पहचान कर उनकी प्राप्ति के गतिशील स्रोतों का प्रयोग करके, उपभोक्ताओं को उनकी आवश्यकतानुसार, उचित मूल्य पर वस्तुएँ उपलब्ध कराने, शेयर धारकों को आय दिलाने तथा उद्यमी को व्यावसायिक जोखिमों तथा अनिश्चितताओं के अनुसार लाभ प्राप्त कराने में सहायक होती है। अतः उपरोक्त के अनुसार कहा जा सकता है कि उद्यमिता रचनात्मक क्रिया है।

प्रश्न 4.
“उद्यमी सामान्य जोखिम उठाते हैं।” कथन की व्याख्या कीजिए।
उत्तर:
एक उद्यमी अपने उद्यम के हित में उत्पादन के लिए कच्चे माल की पूर्ति को सुनिश्चित करता है ताकि उसका उत्पादन बाधित न हो। इसी प्रकार उद्यमी भूमिधारक को उसका किराया, पूँजीपति को पूँजी के बदले ब्याज तथा श्रमिक को कार्य के बदले पारिश्रमिक देता है। लेकिन उद्यमी को अपने प्रतिफल के (लाभ को) मिलाने का कोई निश्चय नहीं होता। प्रत्येक उद्यमी द्वारा अपनी क्षमतानुसार यह प्रयास किया जाता है कि व्यवसाय को हानि न हो, बल्कि उद्यम लाभ अर्जित करे। अत: यह कहना सही प्रतीत होता है कि उद्यमी सामान्य जोखिम ही उठाते हैं।

प्रश्न 5.
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री मार्शल ने उद्यमिता के महत्व को किस प्रकार परिभाषित किया है?
उत्तर:
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री मार्शल ने उद्यमिता के महत्व को रेखांकित करते हुए लिखा है कि, “उद्यमी व्यवसाय का कप्तान होता है वह केवल जोखिम एवं अनिश्चितता का वाहक ही नहीं होता है अपितु एक प्रबन्धक, भविष्यदृष्टा, नवीन उत्पाद विधियों का आविष्कारक और देश के आर्थिक ढाँचे का निर्माता भी होता है।”

प्रश्न 6.
उद्यामिता के कोई पाँच महत्व बताइए?
उत्तर:

  1. उद्यमिता देश के आर्थिक विकास का आधार है।
  2. विद्यमान उपक्रमों के विकास एवं विस्तार में योगदान।
  3. नवीन उत्पाद व तकनीक विकास में सहायक।
  4. रोजगार के अवसरों का सृजन।
  5. पूँजी निर्माण को प्रोत्साहन।

प्रश्न 7.
उद्यमिता देश के सन्तुलित आर्थिक विकास में सहयोगी है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
उद्यमिता के विकास से देश के प्रत्येक कोने में उद्योगों की स्थापना की जा सकती है। जो क्षेत्र कम विकसित होते हैं वहाँ उद्यमियों को विभिन्न प्रकार की रियायतें व छूटें प्रदान करके अल्पविकसित क्षेत्रों का विकास करके सन्तुलित आर्थिक विकास किया जा सकता है। प्रो. नर्कसे ने स्पष्ट लिखा है, “उद्यमी सन्तुलित आर्थिक विकास की मार्ग प्रशस्त करते हैं।”

प्रश्न 8.
उद्यमिता सामाजिक परिवर्तन में किस प्रकार सहायक है?
उत्तर:
उद्यमिता रोजगार प्रदान करके व्यक्तियों की आय में वृद्धि करती है परिणामत: उनके जीवन स्तर में वृद्धि होती है जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन आसानी से सम्भव हो जाता है तथा समाज में शिक्षा एवं जागृति की अलख जगाकर वैज्ञानिक अनुसन्धान व शोध के परिणाम प्रस्तुत करके अन्धविश्वास, रूढ़िवादिता व कुप्रथाओं को समाप्त किया जा सकता है।

प्रश्न 9.
“व्यवसाय चातुर्य का खेल है जिसे प्रत्येक व्यक्ति नहीं खेल सकता है।” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
एक उद्यमी को यदि सफलता के सोपानों पर पहुँचना है तो उसमें विभिन्न प्रकार के चातुर्य एवं कौशल का होना आवश्यक है। उद्यमी में एक सामान्य व्यक्ति के गुणों के साथ – साथ व्यावसायिक योग्यता, निर्णयन क्षमता, सृजनशीलता, प्रबन्धकीय एवं प्रशासनिक क्षमता जैसे गुणों का समावेश होना आवश्यक है। अन्यथा की स्थिति में वह असफल हो जायेगा।

प्रश्न 10.
एक उद्यमी की सफलता के लिये उसमें व्यावसायिक गुणों का होना क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
एक उद्यमी की सफलता के लिये उसमें व्यावसायिक गुणों का होना अत्यन्त आवश्यक है क्योंकि व्यावसायिक गुण उद्यमी की सफलता को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते हैं। हेनरी पी. डटन ने लिखा है कि, “वह व्यक्ति जिसने एक बार भी व्यवसाय के कार्यों का ज्ञान प्राप्त कर लिया हो, जिसने संगठन, आर्थिक प्रबन्ध, लेखा – विधि सहयोगियों के साथ कार्य करने एवं उनका नेतृत्व करने तथा क्रय विक्रय के आधारभूत सिद्धान्तों को समझ लिया हो, वह बहुत शीघ्र ही व्यवसाय में कुशलता एवं सफलता प्राप्त कर लेता है।”

RBSE Class 12 Business Studies Chapter 11 लघु उत्तरीय प्रश्न (SA – II)

प्रश्न 1.
किसी भी देश के आर्थिक विकास में उद्यमी को क्या योगदान रहता है?
उत्तर:
किसी भी देश के आर्थिक विकास में उद्यमी का महत्वपूर्ण योगदान होता है। उद्यमी द्वारा व्यवसायं का चुनाव करना, जोखिम उठाना, देश में उपलब्ध संसाधनों का कुशलता से प्रयोग करना, उत्पादन के पैमाने का निर्धारण करना, उत्पादन के साधनों को एकत्रित करना, वितरण व्यवस्था करना एवं नवसृजन का महत्वपूर्ण कार्य किया जाता है। वर्तमान समय में उद्यमी युवाओं के प्रेरणा के स्रोत के रूप में उभर कर आ रहे हैं। आज के युवा बिल गेट्स, मुकेश अम्बानी, मार्क जुकरबर्ग, नारायणमूर्ति, जैसे उद्यमियों को अपना आदर्श मानते हैं एवं यही कारण है कि अमरीका की ऑपिनियन रिसर्च काउन्सिल के द्वारा किये गये सर्वेक्षण में 18 से 24 वर्ष की मध्य आयु के युवा वर्ग में से 58 प्रतिशत ने अपना व्यवसाय प्रारम्भ करने की इच्छा प्रकट की। अतः किसी देश में जितने अधिक कुशल व योग्य उद्यमी होते हैं, उस देश का उतना ही अधिक आर्थिक विकास होता है।

प्रश्न 2.
भारत में उद्यमिता विकास पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
भारत में उद्यमिता का विकास बहुत ही तीव्र गति से हो रहा है। विश्व में हमारा देश उद्यमिता विकास सूचकांक में दूसरे संकेत हैं कि भारतीय युवा वर्ग अब स्वयं का व्यवसाय स्थापित करने में रुचि ले रहा है। भारत में उद्यमियों के विकास हेतु पर्याप्त आधारभूत सुविधायें उपलब्ध हैं, सरकारी नीति र नियन्त्रणों में उद्यमिता विकास हेतु छूटें एवं रियायतें प्रदान की जा रही हैं। नये उपक्रमों हेतु ‘कर रहित’ योजनायें बनाई जा रही हैं, शिक्षण-प्रशिक्षण की सुविधाओं का विकास किया जा रहा है, तीव्र गति से तकनीकी परिवर्तनों को लागू किया जा रहा है, जिससे भारत में उद्यमिता का विकास तीव्र गति से हो रहा है।

प्रश्न 3.
किसी उद्यमी की अपने उद्यम में भूमिका एवं कार्यों को संक्षेप में लिखिए।
उत्तर:
किसी उद्यमी की अपने उद्यम में भूमिका एवं कार्य निम्नलिखित होते हैं –
(1) विनियम सम्बन्धों का विकास –

  1. बाजार में अवसरों की पहचान करना।
  2. दुर्लभ संसाधनों पर अधिकार करना।
  3. आगत का क्रय करना।
  4. उत्पादों को विपणन प्रतियोगिता हेतु तैयार रहना।

(2) राजनीतिक प्रशासन –

  1. राज्य की अफसरशाही को साधना (स्वीकृति, छूट व टैक्स)।
  2. फर्म के अन्दर मानवीय सम्बन्धों का प्रबन्धन।
  3. ग्राहक एवं आपूर्तिकर्ता के मध्य सम्बन्धों का प्रबन्धन।

(3) प्रबन्ध नियन्त्रण –

  1. वित्त प्रबन्धक।
  2. उत्पाद प्रबन्धन।

(4) तकनीकी –

  1. कारखाने का अधिग्रहण करना और उसके समुच्चयन की निगरानी करना।
  2. उत्पादन प्रक्रिया में आगत को न्यूनतम रखना (औद्योगिक यान्त्रिकी)।
  3. उत्पादन प्रक्रिया एवं उत्पादन की गुणवत्ता के स्तर में सुधार करना।
  4. नवीन उत्पाद तकनीकी को अपनाना।
  5. नवीन उत्पादों को बाजार में लाना।

प्रश्न 4.
स्पष्ट कीजिए कि उद्यमिता में जोखिम को तत्व निहित होता है?
उत्तर:
एक उद्यमी उद्यम स्थापित करते समय उद्यम के हित में निश्चित आपूर्ति के लिए विभिन्न प्रकार की संविदायें (समझौते) करता है। साथ ही भविष्य में यदि कोई हानि हो तो उसके जोखिम को उठाने का वायदा भी करता है। वह उत्पादित वस्तु या सेवा के विक्रय से प्राप्त राशि में से भूमिधारी को लगान, पूँजीपति को ब्याज, श्रमिकों को वेतन तथा मजदूरी प्रदान करने का आश्वासन देता है। लेकिन उद्यमी को लाभ प्राप्त होने का आश्वासन नहीं होता है क्योंकि अन्य सभी तत्वों के योगदाने का प्रतिफल चुका देने के बाद यदि कुछ बचता है तो वह उसका लाभ होता है अन्यथा उसे हानि उठानी पड़ती है। अतः स्पष्ट है कि उद्यमिता में जोखिम का तत्व निहित होता है।

प्रश्न 5.
उद्यमिता की आवश्यकता क्यों होती है? समझाइए।
उत्तर:
उद्यमिता की आवश्यकता:
उद्यमिता की आवश्यकता प्रत्येक देश की होती है क्योंकि सभी देश आर्थिक विकास करना चाहते हैं। विकसित देश अपने विकास की गति को बनाये रखने के लिए उद्यमिता को आवश्यक समझते हैं जबकि विकासशील देश उद्यमिता की आवश्यकता अपना आर्थिक विकास करने के लिए महसूस करते हैं। उद्यमिता के कारण ही नये – नये उद्योगों की स्थापना होती है तथा नये – नये उत्पाद समाज को मिलते हैं जिसमें समाज पहले की अपेक्षा अधिक आरामदायक जीवन व्यतीत कर सकता है। क्योंकि उद्यमिता अन्वेषण, प्रयोग एवं साहस की भावना को पुष्ट कर पूँजी निर्माण करती है तथा रोजगार के अवसर पैदा करती है। जिससे देश एवं समाज का आर्थिक विकास होता है तथा उच्च मनोबल के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। अत: उद्यमिता प्रत्येक देश एवं समाज के लिए आवश्यक होती है।

प्रश्न 6.
उद्यमी के व्यावसायिक गुणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
एक उद्यमी में निम्न व्यावसायिक गुण होने चाहिए –
(1) नेतृत्व – उद्यमी व्यवसाय का सेनापति होता है। वह नीतियों का निर्धारण करता है और आवश्यक दिशा – निर्देश देता है। इसमें निर्णय लेने और अपने अधीनस्थ व्यक्तियों को उत्तम कार्य के लिये प्रोत्साहित और अभिप्रेरित करने की योग्यता होनी चाहिए।

(2) व्यावसायिक योग्यता – उद्यमी को व्यवसाय के विभिन्न पहलुओं की व्यावसायिक योग्यता होनी चाहिए, तभी वह जोखिम पर नियन्त्रण रख सकता है। उसे उद्यम की नई – नई उत्पादन विधियों और प्रबन्ध का ज्ञान होना चाहिए।

(3) तकनीकी ज्ञान – एक सफल उद्यमी में उत्पादन की नयी – नयी उत्पादन विधियों का ज्ञान होना चाहिए। उसे उत्पादन कार्य में होने वाले सुधारों तथा आविष्कारों की जानकारी भी होनी चाहिए।

(4) समन्वय शक्ति – एक सफल उद्यमी में समन्वय शक्ति का गुण होना चाहिए। समन्वय वह प्रक्रिया होती है जिसमें उद्यमी अपने अधीनस्थों के सामूहिक प्रयासों से एक सुव्यवस्थित स्वरूप का विकास करता है और उद्यम के उद्देश्य की प्राप्ति हेतु क्रियाओं में एकरूपता लाता है।

RBSE Class 12 Business Studies Chapter 11 विस्तृत उतरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
उद्यमिता एवं आर्थिक विकास के बीच सम्बन्ध की प्रकृति का आकलन कीजिए।
उत्तर:
उद्यमिता एवं आर्थिक विकास:
उद्यमी उत्पादक तन्त्र की व्यवस्था करते हैं। इसके माध्यम से विज्ञान एवं तकनीकी के विकास का वाणिज्यिक उपयोग में उनकी भूमिका अन्य संसाधनों को उत्पादक एवं उपयोगी बनाती है। इसके परिणामस्वरूप आर्थिक विकास होता है। उद्यमिता एवं आर्थिक विकास के सम्बन्ध को निम्नलिखित बिन्दुओं में स्पष्ट किया जा सकता है –
(1) सकल घरेलू उत्पाद में योगदान – सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि आर्थिक विकास का सर्वमान्य मानक है। कृषि, विनिर्माण एवं सेवाओं से सम्बन्धित उत्पादन करके उद्यमी आय पैदा करते हैं। यह आय लागत, मजदूरी, वेतन, ब्याज में बँट जाती है तथा जो शेष बचता है वह लाभ कहलाता है। इसमें पूँजी निर्माण होता है तथा आर्थिक विकास को बल मिलता है।

(2) पूँजी का निर्माण – एक उद्यमी जब अपनी बचतों का प्रयोग अपने उद्यम में निवेश के लिए करता है तो वह अपने आस-पास के मित्रों, रिश्तेदारों तथा घनिष्ठ व्यक्तियों को बचत करने के लिए उत्साहित करता है ताकि उनकी बचतों को व्यवसाय में निवेश कर सके। उद्यमियों द्वारा सर्वसाधारण को भी उद्यमों में पूँजी निवेश के लिए आमन्त्रित किया जाता है।

(3) रोजगार का सृजन – उद्यमिता उद्यमी को स्व – रोजगार प्रदान करती है तथा कितने ही व्यक्तियों को रोजगार देकर रोजगार के नये अवसरों का निर्माण करती है। ऐसे लोग जिनके पास कोई रोजगार नहीं है या अकुशल हैं वे कोई भी छोटा या बड़ा उद्यम स्थापित करके स्वयं रोजगार पा सकेंगे तथा दूसरों को भी रोजगार उपलब्ध करा सकेंगे।

(4) व्यावसायिक अवसरों का सृजन – एक उद्यम न केवल रोजगार के अवसरों का सृजन करता है अपितु वह उस व्यवस्था से जुड़े हुए लोगों के लिए भी अवसरों का सृजन करता है। उदाहरण के लिए, एक फ्रिज उत्पादक कम्पनी की स्थापना से विज्ञापन जगत को मिलने वाले विज्ञापनों से रोजगार की वृद्धि।

(5) आर्थिक कुशलताओं में सुधार – प्रत्येक उद्यमी द्वारा उद्यम के सुचारु संचालन के लिए उद्यम में प्रबन्ध कुशलता एवं श्रम तथा पूँजी की मितव्ययता पर जोर दिया जाता है। वह संसाधनों के इष्टतम प्रयोग पर भी बल देता है जिससे उसके अपव्यय तथा अप्रयोज्य उपयोग को कम किया जा सके। इसलिए उद्यमी उन क्रियाओं के उपयोग को प्रोत्साहित करते हैं। जिनसे उद्यम की आर्थिक क्रियाओं में सुधार आता है।

(6) आर्थिक क्रियाकलापों में वृद्धि – आधुनिक व्यावसायिक युग में उदारीकरण की नीति को अपनाने से रोजगार और व्यवसाय के अवसरों की वृद्धि हो रही है। ये उद्यमिता का परिणाम है। व्यवसाय द्वारा माँग तथा पूर्ति के तत्वों में सन्तुलन लाने का प्रयास किया जाता है। जैसे किसी माल की माँग ज्यादा और पूर्ति कम है तो उत्पादक अपने उत्पाद को कमी वाले क्षेत्रों में भेजकर माँग और पूर्ति में सन्तुलन लाने का प्रयास करते हैं।

(7) स्थानीय समुदायों के जीवन – स्तर में सुधार – स्थानीय समुदायों के जीवन – स्तर में वृद्धि हेतु सरकार अल्पविकसित क्षेत्रों में लघु उद्योगों की स्थापना पर जोर दे रही है। इन लघु उद्यमों द्वारा उस क्षेत्र के स्थानीय निवासियों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये जायेंगे। लघु उद्योग स्थानीय संसाधनों को खोजकर उनका मितव्ययी प्रयोग करते हैं। इन लघु उद्योगों की अल्प विकसित प्रदेशों में स्थापना से वहाँ के जन – जीवन का विकास करना आसान हो जाता है तथा स्थानीय समुदाय के जीवन – स्तर में वृद्धि होती है।

(8) अन्वेषण, परीक्षण तथा साहस की भावना में वृद्धि – उद्यमी में कुछ नया करने की चाहत होना या परिवर्तन को अवसर के रूप में देखना, परिवर्तन से अपने विचारों का परीक्षण करना उसके लिए नया बाजार तैयार करते हैं। यह उद्यमी के लिए एक तरह का जोखिम होता है। परिवर्तन से अपने विचार के अन्तर्गत वह कोई नयी वस्तु बाजार में लाना चाहता है तो यह जरूरी नहीं कि वह वस्तु उपभोक्ता द्वारा पसन्द ही की जाय, उसे नापसन्द भी किया जा सकता है। अतः कहा जा सकता है कि उद्यमिता साहस भावना का दूसरा नाम है।