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21. Article Writing

1. Article (लेख) लेख किसी विशिष्ट विषय पर एक तथ्यपूर्ण रचना होती है।

2. Types of article लेख के प्रकार – लेख को सामान्य रूप से दो भागों में बाँट सकते हैं

  • मैगजीन/पत्रिका लेख
  • समाचार पत्र लेख।

3. Format of article- लेख का प्रारूप – सामान्यतः लेख का एक शीर्षक (Headline) होता है तथा आवश्यकता महसूस होने पर उपशीर्षक (Byline) दी जाती है । शीर्षक, हाशिए के पास से या पृष्ठ के बीचोंबीच लिखा जा सकता है। शीर्षक अमेरिकन स्टाइल या ब्रिटिश स्टाइल से लिखा जा सकता है, जैसा कि निबन्ध लेखन में समझाया जा चुका है।

शीर्षक के उपरांत एक लाइन का space छोड़कर लेखक का नाम व व्यवसाय, हाशिए के पास से लिखा जाता है। लेखक के नाम व व्यवसाय के नीचे एक लाइन का space छोड़कर, लेख की विषयवस्तु लिखी जाती है। विषयवस्तु के तीन स्तर होने चाहिए – प्रस्तावना, तथ्यपूर्ण विवेचन तथा निष्कर्ष, जैसाकि निबंध में होता है। लेख को पैरेग्राफ्स में विभक्त करना है । एक पैरेग्राफ में एक विचार होना चाहिए। सभी पैरेग्राफ्स में आपस में link होना चाहिए। अधिक जानकारी के लिए निबंध वाला टॉपिक देखें।

4. Sample Articles-नमूनार्थ लेख

Question 1. 
Write an article in 150-200 words on ‘Science fair in school : a necessity’, for your school magazine. 
Answer:

Science fair in school : a necessity 

By Amrita Meena 
Science student 

It is right that Science Fair’ in school is a necessity. There is need to hold ‘Science Fair’ at four levels – School Level, Block Level, District Level and State Level. This spreads the knowledge of science all over the state. Science fair should be incentive based. Money motivates the mind. 

And is preparations of models students have to spend money. A student may be talented but the scarcity of money may demoralise him. Science fair should be given wide media coverage. Reporters from print and electronic media should be invited and shown the innovative models. It will spread healthy competition among participants and encourge them too. 

Infrastructures for science stream should be provided. It will create environment for the study of science. This environment will develop, scientific temper in students which will root out superstitions, illogicality from society. Thus Science Fairs will lead the nations and the humanity to make rapid progress.

विद्यालय में विज्ञान मेला : एक आवश्यकता 

अमृता मीणा
विज्ञान विद्यार्थी

यह सच है कि विद्यालय में विज्ञान मेला’ एक आवश्यकता है। चार स्तर – विद्यालय स्तर, ब्लॉक स्तर, जिला स्तर तथा राज्य स्तर पर ‘विज्ञान मेला’ आयोजित करने की आवश्यकता है। इससे संपूर्ण राज्य में विज्ञान की समझ बढ़ती है। विज्ञान मेला प्रोत्साहन देने वाला पर आधारित होना चाहिए।

धन मस्तिष्क को प्रेरित करता है और मॉडल बनाने में भी विद्यार्थियों को पैसा खर्च करना होता है। विद्यार्थी मेधावी हो सकता है किंतु पैसे की कमी उसे हतोत्साहित कर सकती है। विज्ञान मेले को विस्तृत मीडिया कवरेज देनी चाहिए। प्रिन्ट तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों को बुलाना चाहिए तथा नवाचार मॉडल दिखाने चाहिए।

इससे प्रतिभागियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा फैलेगी तथा यह उनको प्रोत्साहित भी करेगी। विज्ञान स्ट्रीम/विषय के लिए आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इससे विज्ञान के अध्ययन का वायुमंडल तैयार होगा। यह वायुमंडल विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टि विकसित करेगा जिससे समाज में अंधविश्वास, तर्कहीनता का विनाश होगा। इस प्रकार विज्ञान मेले राष्ट्र व मानवता को तीव्र प्रगति की ओर ले जाएंगे।

Question 2. 
Write an article in 150-200 words on ‘Significance of Yoga and Pranayam in life’ for the Times of India, Jaipur.
Answer: 

Significance of Yoga and Pranayam in life 

By Invitation 
Baba Ramdeen, Yoga Guru 

Yoga means addition. Pranayam means regulation of breath. By Yoga we add certain physical powers. By Pranayam and meditation we add certain mental powers. There are a number of Yogic posturs which keep our muscles and bones fit, enhance immunity power and keep us free from diseases. 

Yoga has many branches like Raja Yoga, Karma Yoga, Jnana Yoga, Bhakthi Yoga and Hatha Yoga. Hatha Yoga consists of certain asanas. Pranayam is a mental discipline by regulations of breath. It achieves higher state of consciousness, greater focus, creativity, self-awareness, relaxation etc. Yoga and Pranayam cure diseases like diabetes, asthama, hypertension, obesity etc. 

Yoga and Pranayam are very much beneficial for us. They keep our body flexible, inner peace, better intuition, regularlise respiratory system, circulatory system, digestive system, endocrine system, heart rate, glandular secretions etc. Thus Yoga and Pranayam are very much significant in our life.

जीवन में योग व प्राणायाम का महत्व 

आमंत्रण द्वारा 
बाबा रामदीन, योग गुरु 

योग का अर्थ है ‘जोड़ना’। प्राणायाम का अर्थ है श्वास प्रक्रिया की नियमितता व नियंत्रण । योग द्वारा हम निश्चित शारीरिक ताकत जोड़ते हैं। प्राणायाम और चित्तस्थिरता के द्वारा हम कुछ मानसिक शक्तियाँ जोड़ते हैं । अनेक योग मुद्राएं हैं जो हमारी मांस-पेशियों तथा हड्डियों को मजबूत करती हैं, हमारी इक्यूनॅटि (बीमारी में लड़ने की क्षमता) पावर/ताकत बढ़ाती हैं तथा हमें बीमारियों से मुक्त रखती हैं । योग की अनेक शाखाएं हैं जैसे राज योग, कर्म योग, ज्ञान योग, भक्ति योग व हठ योग। 

हठ योग में कुछ प्रकार के आसन होते हैं। प्राणायाम, श्वास के नियंत्रण से मानसिक अनुशासन रखना है। इससे उच्च चेतनता का स्तर प्राप्त होता है, उच्च ध्यानकेन्द्रन प्राप्त होता है, सृजनात्मकता, स्व-जागरूकता, आरामदेयता प्राप्त होती है। योग व प्राणायाम बीमारियों जैसे डायबिटिज, अस्थमा, अत्यधिक तनाव, मोटापा आदि की चिकित्सा करते हैं।

योग व प्राणायाम हमारे लिए अत्यधिक लाभदायक हैं। ये हमारे शरीर को लोचदार रखते हैं, आंतरिक शांति देते हैं, बेहतर समझ देते हैं, श्वसन तंत्र को नियमित रखते हैं, रक्त संचरण तंत्र को सही रखते हैं, पाचन तंत्र सही रखते हैं, अन्तःस्रावी प्रणाली, हृदय धड़कन, ग्रंथियां स्राव आदि को सही रखते हैं । अतः योग व प्राणायाम हमारे जीवन में बहुत महत्त्वपूर्ण हैं।

Question 3. 
Write an article in about 150-200 words on Value of books for the newspaper Education Bhaskar, Jaipur. 
Answer:

Value of books 

By Invitation 
Mahesh Chandra Sharma, Principal, Rozadi

Today, we have a number of media to gain knowledge, such as schools, colleges, universities, training centres, internet, computer, TV, films, theatres, mobiles, radio, audio and so on. But all these media use a book at one stage or the other. Thus value of books is like the falling water of an unending cascade. Conferring of Nobel Prize on the literary book of the highest value of the year highlights the value of books. Books are valuable for a number of purposes. First, they are true friend, philosopher and guide. 

They never betray their reader or lover. Second, they always guide correctly in adversity and prosperity. They don’t have their self-interest like humans. Third, they give complete and sequential informations with diversified dimensions. Fourth, they give new meanings and new interpretations with every next heading. Fifth, their handling is easy. They cost only once. Sixth, they can be gifted. Thus, their values are innumerable.

पुस्तकों का महत्व


आमंत्रण द्वारा
महेश चन्द्र शर्मा, प्रधानाचार्य, रोजडी

आज ज्ञान प्राप्ति के अनेक माध्यम हैं जैसे कि विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, प्रशिक्षण केन्द्र, इंटरनेट, कम्प्यूटर, टी.वी., फिल्म, थिएटर, मोबाइल, रेडियो, ऑडियो आदि। परंतु ये सभी माध्यम एक स्तर या दूसरे स्तर पर पुस्तक का उपयोग करते हैं । इस प्रकार पुस्तक का महत्व एक गिरते झरने के कभी समाप्त न होने वाले जल के जैसे है। प्रत्येक वर्ष साहित्य की उच्चतम कृति को नोबेल प्राइज दिया जाना पुस्तकों के महत्व को दर्शाता है। पुस्तकें अनेक उद्देश्यों के कारण महत्त्वपूर्ण हैं । 

प्रथम, वे सच्ची मित्र, दर्शनिक तथा मार्गदशक हैं, वे अपने पाठक या प्रेमी से विश्वासघात नहीं करती हैं। द्वितीय वे विपरीतता व अनुकूलता दोनों में सही मार्गदर्शन देती हैं। मानव के जैसे उनके निहित स्वार्थ नहीं होते हैं । तृतीय, वे अनेक आयामों के साथ पूर्ण व क्रमबद्ध ज्ञान देती हैं । चतुर्थ, प्रत्येक नवीन अध्ययन पर ये नये अर्थ तथा नई व्याख्याएं देती हैं। पंचम, उनका रखरखाव सरल है। वे एक बार ही कीमत लेती हैं। षष्ठम, उन्हें उपहार में दिया जा सकता है। अतः उनके महत्व अगणित हैं।

Question 4. 
Write an article in 150-200 words on ‘Free bus-ride to senior citizens’ for DNA, Jaipur. 
Answer:

Free bus-ride to senior citizens 

Rani Kumari 
Chairperson, Senior Citizen Forum, Jaipur 

In advanced countries of this beautiful world, senior citizens have been enjoying a number of facilities including free bus ride. But in India, senior citizens have been deprived of this facility of free bus ride. Senior citizens urgently need this facility. There are several reasons for it. Buses are available for all the routes-rural or urban. Buses have stops even at small places. 

Buses have conductors to look after the passengers. Buses have reserved seats for senior citizens. Buses can be carried to a hospital or a police station in case of emergency. Boarding a bus or alighting from it is very easy. Bus services are available at short intervals. A good number of senior citizens are poor and unhealthy. They can’t walk long. They can’t afford auto or car charges. Govt. should take decision for the welfare of the senior citizens without further delay.

वरिष्ठ नागरिकों का निःशुल्क बस यात्रा 

रानी कुमारी 
चेअरपर्सन, वरिष्ठ नागरिक मंच, जयपुर 

इस सुंदर विश्व के विकसित देशों में वरिष्ठ नागरिक अनेक सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं जिसमें निःशुल्क बस यात्रा भी सम्मिलित है। परंतु भारत में वरिष्ठ नागरिकों को इस सुविधा से वंचित रखा हुआ है। वरिष्ठ नागरिकों को इस सुविधा की तत्काल आवश्यकता है। इसके अनेक कारण हैं । बसें, सभी मार्गों के लिए उपलब्ध हैं – ग्रामीण व शहरी ।

बस का छोटे-छोटे स्थानों पर भी ठहराव होता है। बसों में यात्रियों की देखभाल को एक परिचालक होता है। बसों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए आरक्षित सीट होती है। इमरजेन्सी में बस को एक हास्पिटल या थाने में ले जाया जा सकता है। बस में बैठना व इससे उतरना सरल है।

बस सुविधा थोड़े-थोड़े अंतराल पर उपलब्ध है।अनेक वरिष्ठ नागरिक गरीब व रोगग्रस्त हैं । वे लंबा नहीं चल सकते। वे ऑटो या कार का किराया वहन नहीं कर सकते हैं । सरकार को आगे बिना देरी किये वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए यह निर्णय लेना चाहिए।

Question 5. 
Write an article in 150-200 on the Use of smart mobile phones for your school magazine. 
Answer:

Uses of smart mobile phones

Bharati Meena
Student, Class XII

Nowadays millions of Indians have ‘smart phones’ in their hands. They aren’t luxury items now. They have beome necessity of our daily life. Smart touch mobile phones have attractive and colourful frame. They have long and wide touch screen.

They have front and rear cameras. They have facility for verbal and video calling. They have earphones’ facilities. They have call recording, call barring, call waiting, call making facilities. They have dual sim facility and so on. They are useful for making calls-verbal or video. We can send email, text message, videos, audio message etc. They can shoot an event.

They can click colourful pictures. They use internet so they can book bus, rail or air tickets. They can pay electricity, water or any other bill. They can do shopping on net or in the market. They can store millions of information and make available on net. Net banking is very easy on them. Online job applications can be sent to employers. Results of examinations can be seen on them. Thus, their uses are numerous.

स्मार्ट मोबाइल फोन के लाभ

भारती मीणा
विद्यार्थी, कक्षा XII

आजकल लाखों भारतीयों के हाथ में ‘स्मार्ट फोन’ हैं। आजकल ये विलासिता की चीज नहीं रह गई हैं । ये आज हमारे दैनिक जीवन की आवश्यकता बन गये हैं। स्मार्ट टच मोबाइल फोन के आकर्षक तथा रंगीन फ्रेम होता है। उनके लंबी व चौड़ी टच स्क्रीन होती है। उनमें आगे व पीछे का कैमरा होता है।

उनमें शाब्दिक व चित्रात्मक कॉल की सुविधा होती है। उनमें इअरफोन की सुविधा होती है। उनमें कॉल रिकॉडिंग, कॉल अवरोध, काल वेटिंग व काल करने की सुविधा होती है। उनमें दो सिम की सुविधा आदि होती है। वे मौखिक व वीडियो कॉल करने में उपयोगी होते हैं। उनसे हम इमेल, टेक्स्ट संदेश, वीडियो, ऑडियो संदेश आदि भेज सकते हैं ।

वे किसी कार्यक्रम की शूटिंग कर सकते हैं। वे रंगीन तस्वीर खींच सकते हैं । वे इंटरनेट का प्रयोग करते हैं इसलिए बस, रेल हवाईजहाज की टिकिट बुक कर सकते हैं। वे बिजली, पानी व अन्य बिल का भुगतान कर सकते हैं । वे नेट पर या बाजार में खरीददारी कर सकते हैं।

वे लाखों सूचनाएं संग्रहीत कर सकते हैं तथा उन्हें नेट पर उपलब्ध करा सकते हैं। उन पर नेट बैंकिंग बड़ी सरल है। नौकरी के प्रार्थनापत्रों को नियोक्ताओं को ऑनलाइन द्वारा भेजा जा सकता है। मोबाइलफोन पर परीक्षाओं के परिणाम देखे जा सकते हैं । इस प्रकार इनके अनेक लाभ हैं।

Question 6. 
Write an article in 150-200 words on the ‘Choice of a career’ for your school magazine. 
Answer:

Choice of a Career 

Narendra Kumar 
Student, Class XII 

The choice of a career is a difficult task. It is like establishing a solid business. The following suggestions may be very useful for choosing a career. The choice of a career should be based on the interest of the person who chooses a career. Choose the career in which you have interest. Never choose the imposed career either by parents, family, friends, relatives, teachers and so on. 

Then, the choice should be based on aptitude or innate qualities. Aptidude will help you to involve yourself deeply in that career. Next, judge your circumstances. If you have favourable circumstances for that career, choose it only then. Further, find out about the employment opportunities in that career. Never

choose the career which can’t give you lucrative and secure employment. Finally, you should choose the career in which you have job satisfaction and professional growth. Never choose a career which would keep you undertension. Thus the choice of the career must be prudent one otherwise you’ll have to face frustration throughout your life.

व्यवसाय का चुनाव

नरेन्द्र कुमार
विद्यार्थी, कक्षा XII

व्यवसाय का चुनाव एक कठिन कार्य है। यह एक ठोस व्यापार स्थापित करने के समान है। किसी व्यवसाय के चुनाव में निम्न सुझाव आपके लिए महत्त्वपूर्ण हो सकते हैं। व्यवसाय का चुनाव उस व्यक्ति की रुचि पर आधारित होना चाहिए जिसे व्यवसाय का चुनाव करना है। उस व्यवसाय को ही चुनें जिसमें आपकी रुचि है।

माता-पिता, परिवार, मित्र, संबंधियों, अध्यापकों आदि द्वारा लादे गये व्यवसाय को न चुनें। फिर, व्यवसाय का चुनाव उपयुक्तता अथवा जन्मजात गुणों पर आधारित होना चाहिए। उपयुक्तता/कुशलता आपको उस व्यवसाय में गंभीरता से सम्मिलित होने में सहायता करेगी। आगे, अपनी परिस्थितियों की जांच करें। यदि उस व्यवसाय के पक्ष में परिस्थितियां हैं केवल तब ही उस व्यवसाय को चुनें। आगे, उस व्यवसाय में रोजगार के अवसरों का भी पता लगाएं ।

उस व्यवसाय को न चुनें जो आपको आकर्षक तथा सुरक्षित रोजगार न दे सके। अंत में, आप उस व्यवसाय को चुनें, जिसमें आपको कार्य-संतोष तथा व्यावसायिक उन्नयन मिले। उस व्यवसाय को न चुनें जो आपको तनाव में रखे। इस प्रकार व्यवसाय का चुनाव विवेकशीलता से करें अन्यथा जीवनभर आपको कुंठा रहेगी।

Question 7. 
Write an article in 150-200 words on Kindness to animals for the newspaper the Hindu, New Delhi. 
Answer:

Kindness to animals

Prem Kumar
Retd. Director, Jaipur Zoo

Don’t we human being forgive one another? Do humans not show kindness to one another? Yes, we do so. Then, why shouldn’t we show kindness to animals? Yes, of course, we should show kindness to animals. Imagine a world without animals, how will you feel?

It is horrible! Humans can’t live without animals. If someone hits you with a stone, how will you feel? Likewise we should not throw stone at animals. If someone hits you with a stick, how will you feel? Likewise, we should not hit animals with a stick.

If someone tries to kill you, how will you feel? Likewise we should not kill animals. We should be kind to animals. Animals are useful to humans and the world. They are our teachers. We learn from a horse or a donkey or camel or an ox or a bullock how to do hardwork.

We learn humility or usefulness from a cow. We learn vigilance from a dog. We learn courage from a lion. Animals are colourful. They add beauty to the world. They preserve forests: Therefore, we should be kind to animals.

जानवरों के प्रति दयालुता

प्रेम कुमार
सेवानिवृत्त निदेशक, जयपुर चिड़ियाघर

क्या हम मानव एक-दूसरे को माफ नहीं करते हैं? क्या मानव एक-दूसरे के प्रति दया नहीं दिखाते हैं? हाँ, हम ऐसा करते हैं तो हमें जानवरों के प्रति दया क्यों नहीं दिखानी चाहिए? हाँ, निःसंदेह, हमें जानवरों के प्रति दया दिखानी चाहिए। जानवरों के बिना ही विश्व की कल्पना करें तो आपको कैसा महसूस होगा? यह भयानक है! मानव, जानवरों के बिना नहीं रह सकते हैं।

यदि कोई आपको पत्थर फेंक कर मारे, तो आपको कैसा लगेगा? ऐसे ही हमें भी जानवरों पर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए। यदि कोई आपको लकड़ी से मारे तो आपको कैसा लगेगा? ऐसे ही हमें भी जानवरों को लकड़ी से नहीं मारना चाहिए। यदि कोई आपको मारने का प्रयास करे तो आपको कैसा लगेगा, ऐसे ही हमें जानवरों को नहीं मारना चाहिए। हमें जीवों के प्रति दयालु होना चाहिए।

जानवर, मानवों व विश्व के लिए उपयोगी होते हैं। वे हमारे गुरु हैं। हम एक घोड़े या गधे या ऊँट या बैल या युवा बैल आदि से परिश्रम करना सीखते हैं। हम एक गाय से सज्जनता तथा उपयोगिता सीखते हैं। हम एक कुत्ते से चेतनता सीखते हैं । हम एक शेर से साहस सीखते हैं। जानवर रंगीन होते हैं । वे विश्व को सुंदर बनाते हैं। वे वनों की रक्षा करते हैं। अतः हमें जानवरों के प्रति दयालु होना चाहिए।

Question 8. 
Write an article in 150-200 words on ‘Social harmony’ for the newspaper The Rajasthan Patrika, Jaipur. 
Answer:

Social harmony

By Invitation
Rajni Kumari, Profressor

Everyday in the newspaper we read the news about violence in the name of religion or region or caste or race and so on. Why do these violent clashes take place? Obviously, there is lack of social harmony. There is an urgent need to take steps to promote social harmony.

Social harmony is a state in which people of different faiths, regions, races, castes, social strata live with peace, love, brotherhood, cooperating and helping for the development of one another. The following steps may prove outstanding to promote social harmony.

First, our education must teach social harmony at school, college, university etc. Second, cultural nationalism should be promoted to highlight cultural unity between different communities. Third, people’s representative should organise a feast on any cultural occasion for the people of different communities.

Fourth, govts. should confer social harmony award every year. Fifth, development policies of govts. should ensure development of all the communities. In these ways, we can promote social harmony.

सामाजिक समरसता

आमंत्रण द्वारा
रजनी कुमारी, पॅफेसॅर

नित्यप्रति समाचार पत्र में हम धर्म या क्षेत्र या जाति या प्रजाति आदि के नाम पर हिंसा के समाचार पढ़ते हैं। ये हिंसक झड़पें क्यों होती हैं? स्पष्ट है, सामाजिक समरसता का अभाव है। सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। सामाजिक समरसता वह स्थिति होती है

जिसमें विभिन्न धर्मों, क्षेत्रों, प्रजातियों, जातियों, सामाजिक स्तरों के लोग शांति, प्रेम भाईचारे से एक-दूसरे के विकास के लिए सहकारिता व सहयोग करते हुए एक साथ रहते हैं। सामाजिक समरसता को बढ़ाने में निम्न कदम श्रेष्ठ साबित हो सकते हैं। प्रथम, हमारी शिक्षा को स्कूल, कॉलिज, यूनिवर्सिटी आदि स्तर पर सामाजिक समरसता को अवश्य पढ़ाना चाहिए। द्वितीय, विभिन्न समुदायों के बीच सांस्कृतिक एकता को प्रदर्शित करने के लिए सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

तृतीय, जन प्रतिनिधियों को विभिन्न समुदायों के लोगों के लिए किसी सांस्कृतिक अवसर पर दावत का आयोजन करना चाहिए। चतुर्थ, सरकारों को प्रत्येक वर्ष सामाजिक समरसता पुरस्कार देने चाहिए। पंचम, सरकारों की विकास नीति में सभी समुदायों के विकास को सुनिश्चित करना चाहिए। इन तरीकों से, हम सामाजिक समरसता को बढ़ा सकते हैं।

Question 9. 
Write an article in 150-200 words on ‘Solutions to control pollution’ for the newspaper The Indian Express, Jaipur. 
Answer:

Solutions to control pollution

By Invitation
Neeraj Jain, Environmentalist

We know very well that the so-called development has polluted our environment. The air, water, land, vegetables, fruits etc. are polluted. We need practical solutions to control this growing pollution.

The following suggestions may prove valuable. The first and foremost is to grow more and more trees on fallow land. Plants should be grown as per the nature of the clay. Bushes, thorny plants etc. can be grown in desert land. Second, govt. should entirely ban the cutting of the green trees. Strict action should be taken against the offenders.

Third, govt. should confer awards to the greenest village and the greenest city of the district every year. Fourth, door to door garbage collection and its use for electricity generation is quite useful. Fifth, chemical water and dirty water should be recycled. Sixth, industrial and vehicle emission of harmful gases should be banned. In these ways, we can be gradually successful in controlling pollution.

प्रदूषण नियंत्रण के उपाय

आमंत्रण द्वारा
नीरज जैन, पर्यावरणविद्

हम अच्छी तरह से जानते हैं कि इस तथाकथित विकास ने हमारे पर्यावरण को प्रदूषित कर दिया है। वायु, जल, भूमि, सब्जियां, फल आदि प्रदूषित हैं। इस बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए हमें ठोस समाधानों की आवश्यकता है। निम्न समाधान महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। प्रथम व महत्वपूर्ण समाधान यह है कि हम परती भूमि पर अधिक से अधिक वृक्ष उगाएं।

पौधे, मिट्टी की प्रकृति के अनुरूप लगाने चाहिए। रेगिस्तानी भूमि में झाड़ियां व कंटीले पौधे उगाये जा सकते हैं । द्वितीय, सरकार को हरे वृक्षों की कटाई को पूर्णतः प्रतिबंधित कर देना चाहिए। दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जानी चाहिए। तृतीय, प्रत्येक वर्ष जिले की सर्वाधिक हरे-भरे गांव तथा हरे-भरे शहर को पुरस्कार दिया जाना चाहिए।

चतुर्थ, घर-घर कचरा संग्रहण तथा विद्युत उत्पादन में इसका उपयोग काफी लाभदायक है। पंचम, रसायनयुक्त जल तथा गंदे जल को पुन:चक्रित किया जाना चाहिए। षष्ठ, औद्योगिक एवं वाहन से नुकसानदेह गैसों के उत्सरण पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। इन तरीकों से, हम प्रदूषण को नियंत्रित करने में धीरे-धीरे सफल हो सकते हैं।

Question 10. 
Write an article in 150-200 words on ‘Solutions to reduce road accidents’ for the newspaper The Tribune, New Delhi. 
Answer:

Solutions to reduce road accidents

By Invitation
Manisha Kumari, IPS

Road accidents are growing day by day. It is necessary to reduce them. The following solutions may help reduce road accidents. The first and foremost solution to reduce road accidents is the installation of cameras on all the roads. Cameras function as deterrants.

Drivers don’t dare to violate traffic rules when they are under the surveillance of cameras. Then, strict action shoạld be taken against the overload vehicles. There are stringent punishments, even then overload vehicles are plying. Corruption may be the reason.

Next, there should be suspension and cancellation of driving licence after a certain number of offence. Further, mass awareness programme should be undertaken every year. Then, road safety measures should be included in the curricula of school, college, university etc. Finally, roads should be wide, smooth, electrified and with divider. In these ways, these valuable solutions will help reduce road accidents.

सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के समाधान

आमंत्रण द्वारा
मनीषा कुमारी, आई.पी.एस.

सड़क दुर्घटनाएँ दिन-प्रतिदिन बढ़ रही हैं। इन्हें कम करना आवश्यक है। निम्न समाधान सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में सहायक हो सकते हैं। सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए प्रथम एवं महत्वपूर्ण समाधान सभी सड़कों पर कैमरे लगाना है। कैमरे एक भय के रूप में कार्य करते हैं।

वाहन चालक जब कैमरों की निगरानी में होते हैं तो वे यातायात नियमों के उल्लंघन का साहस नहीं करते हैं। फिर, अत्यधिक भार वाले वाहनों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जानी चाहिए। कठोर दण्ड हैं फिर भी अत्यधिक भार वाले वाहन चल रहे हैं। भ्रष्टाचार एक कारण हो सकता है। आगे, एक निश्चित संख्या में उल्लंघन करने के बाद वाहन चलाने के कानूनी अनुमति-पत्र का स्थगन या रद्द कर देना चाहिए।

आगे, प्रतिवर्ष जन जागृति अभियान चलाया जाना चाहिए। फिर, स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी आदि के पाठ्यक्रमों में सुड़क सुरक्षा उपाय सम्मिलित किये जाने चाहिए। अंत में, सड़कें चौड़ी, सपाट, विद्युतीकृत तथा डिवाइडर सहित होनी चाहिए। इन तरीकों से ये कीमती समाधान सड़क दुर्घटनाओं की कम करने में सहायक होंगे।

Question 11. 
Write an article in 150-200 words on ‘Ways for generating employment for the newspaper The Pioneer, New Delhi. 
Answer:

Ways for generating employment

By Invitation
Laxmi Devi, Industrialist

India has been facing the problem of unemployment. There is an urgent need to find out ways for generating employment. The following ways may prove helpful. Small and cottage industries have been the backbone of Indian employment.

There is an urgent need to revive them once again. They provide employment not only to the owner but also to the workers. The opening of one’s own business is also helpful in generating employment. On opening even a shop will provide employment to more than two people.

Easy banking loan facilities will help generating employment. The unemployed youths may start or strengthes their family business. They can repay their loans in easy installments. Make in India programme can help generating employment.

When MNCs set up manufacturing units in India, it will generate employment. Creation of Indian MNCs will generate jobs not only in India but also in foreign lands. Skill Development Programmes of Centre and States will also generate employment for youths. Their skill in a trade will be developed. Therefore, these methods will generate employment.

रोजगार सृजन के तरीके

आमंत्रण द्वारा
लक्ष्मी देवी, उद्योगपति

भारत बेरोजगारी की समस्या का सामना कर रहा है। रोजगार सृजन के लिए तरीके तलाशने की तत्काल आवश्यकता है। निम्न तरीके सहायक सिद्ध हो सकते हैं। लघु एवं कुटीर उद्योग भारतीय रोजगार की रीढ़ की हड्डी रही है। उन्हें पुनः जीवित करने की एक बार फिर तत्काल आवश्यकता है।

ये न केवल मालिक को रोजगार देती है वरन् श्रमिकों को भी देती है। स्वयं का व्यवसाय खोलना भी रोजगार सृजन करता है । एक दुकान खोलने पर भी दो से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। सरल बैंक ऋण सुविधा भी रोजगार सृजन में सहायक सिद्ध होगा। बेरोजगार युवक अपने पारिवारिक व्यवसाय को खोल सकते हैं या बढ़ा सकते हैं । वे ऋण का पुनर्भुगतान आसान किश्तों में कर सकते हैं । मेक-इन-इंडिया कार्यक्रम’ भी रोजगार सृजन में सहायक सिद्ध हो सकता है ।

जब MNCs अपनी निर्माण यूनिट भारत में लगायेगी तो इससे रोजगार सृजन होगा। भारतीय MNCs का सृजन न केवल भारत में ही रोजगार सृजित करेंगीं बल्कि विदेशी भूमि पर भी रोजगार मिलेगा। केन्द्र व राज्यों के कौशल विकास कार्यक्रम युवाओं के लिए रोजगार का सृजन करेगा। एक व्यापार में उनके कौशल को विकसित किया जायेगा। अतः, ये तरीके रोजगार का सृजन करेंगे।

Question 12. 
Write an article in 150-200 words on ‘The need of vocational education for the newspaper DNA, Jaipur. 
Answer:

Need of vocational education

By Invitation
Priyanka Kumari, Educationist

Present ‘Academic Education’ hasn’t been entirely serving the needs and purposes of the nation. We have millions of unemployed youths with academic education. There is need of ‘Vocational Education’. Weneed skilled and trained hands. MNCs also need skilled manpower.

Vocational Education is needed because of the following reasons. The unemployment has been increasing day by day. If there were skilled hands, there wouldn’t be unemployment. A youth with vocational education can earn his livelihood.

There is need of professionals and not of generalists. The diploma or degree of a profession will help getting a job easily. This is the age of science and technology. Technology of articles, tools, appliances is changing rapidly. If youths don’t have knowledge of latest technology they will remain behind in the world. Therefore, vocational education is necessary.

व्यावसायिक शिक्षा की आवश्यकता

आमन्त्रण द्वारा
प्रियंका कुमारी, शिक्षाविद्

वर्तमान अकादमिक शिक्षा’ राष्ट्र की आवश्यकताओं एवं उद्देश्यों को भली-भाँति पूरा नहीं कर पा रही है। आज हमारे लाखों-करोड़ों युवा, जो अकादमिक शिक्षा लिये हैं, बेरोजगार है। व्यावसायिक शिक्षा की आज आवश्यकता है। हमें कुशल व प्रशिक्षित हाथ चाहिये। MNCs में भी कुशल मानव-शक्ति की आवश्यकता है।

निम्न कारणों से व्यावसायिक शिक्षा की आवश्यकता है। बेरोजगारी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। यदि हमारे पास कुशल हाथ होते तो बेरोजगारी नहीं होती। व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त युवक कहीं न कहीं आजीविका कमा लेगा। आज पेशेवरों की आवश्यकता है न कि सामान्यविदों की।

किसी पेशे में डिप्लोमा या डिग्री लेने पर आसानी से जॉब मिल जाती है। यह विज्ञान व तकनीकी का युग है। चीजों, औजारों, उपकरणों की तकनीक तेजी से बदल रही है। यदि युवाओं को अद्यतन तकनीक का ज्ञान नहीं होगा तो वे विश्व में पीछे रहेंगे। इसलिए व्यावसायिक शिक्षा आवश्यक है।

Question 13. 
Write an article in 150-200 words on ‘Ways to promote joint families’ for your school magazine. 
Answer:

Ways to promote joint families

Sheela Gupta
Student, Class XII

India has been a country of joint families. But nowadays joint families are countable. There is need to find out the ways to promote joint families. The following ways may be effective. People should rethink about the old concept of large family. China has allowed the birth of second child.

Russia gives incentive to large families. In India the govt. has restricted it to two children for govt. job. Relaxation should be given in it. The concept of joint families should be taught at school, college and university. The advantages of joint families for family, society and nation should be made clear. The disadvantages of single families should also be given there.

Let the youths know them and then make a choice. We are living in democracy. ‘Number’ is important in it. A joint family has more number’ which means more power. So a joint family becomes the power centre. Therefore, these ways can promote joint families.

संयुक्त परिवार बढ़ाने के तरीके

शीला गुप्ता
विद्यार्थी, कक्षा XII

भारत संयुक्त परिवारों का देश रहा है। लेकिन आजकल गिनती के संयुक्त परिवार रह गये हैं। संयुक्त परिवारों को बढ़ावा देने के रास्ते खोजने की आवश्यकता है। निम्न तरीके प्रभावी हो सकते हैं। लोगों को ‘बड़े परिवार’ की प्राचीन अवधारणा पर पुनर्विचार करना चाहिए। चीन ने दूसरा बच्चा पैदा करने की अनुमति दे दी है।

रूस, बड़े परिवारों को प्रोत्साहन राशि देता है। भारत में सरकार ने सरकारी नौकरियों के लिए इसे दो बच्चों तक सीमित कर दिया है। इसमें छूट दी जानी चाहिए। संयुक्त परिवारों की अवधारणा को स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी में पढ़ाया जाना चाहिए। संयुक्त परिवार के परिवार, समाज व राष्ट्र के लिए लाभों को स्पष्ट करना चाहिए।

एकल परिवार की हानियों को बताया जाना चाहिए। युवाओं को इनके बारे में जानकारी लेने दें तथा फिर चुनाव करने दें। हम लोकतन्त्र में रह रहे हैं। इसमें ‘संख्याबल’ महत्त्वपूर्ण है। एक संयुक्त परिवार में अधिक संख्याबल होता है अर्थात् अधिक ताकतवर होता है। अतः संयुक्त परिवार पावर सेन्टर (सत्ता का केन्द्र) बन जाता है। अतः ये तरीके संयुक्त परिवारों को बढ़ावा दे सकते हैं।

Question 14. 
Write an article in 150-200 words on ‘Need to grow cultural nationalism’ for the newspaper The Asian Age, New Delhi. 
Answer:

Need to grow cultural nationalism

Show unity in diversity
By Invitation
Jyoti Kumari, Professor

Ours is a large country. It has sprung up from one of the most ancient civilizations-Sindhu Valley Civilization. Therefore, it has rich cultural values which have become our national identity. We call this cultural unity, cultural nationalism. Cultural nationalism is the thread which keeps all the flowers of a garland together. We have different faiths, languages, dresses, food habits, pathies and so on.

People with vested interests augment these differences to destablise India. But cultural nationalism is strong enough to withstand it. There is need to grow cultural nationalism. Celebration of National Festivals’ together strengthens it.

The “emotional unity’grows from it. Participation in democratic process makes the people realize oneness. Almost all the communities participate during fairs and festivals, community feasts etc. Thus it grows.

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को बढ़ाने की आवश्यकता

विविधता में एकता दिखाता है
आमन्त्रण द्वारा
ज्योति कुमारी, प्रोफेसर

हमारा एक विशाल देश है। यह सर्वाधिक पुरातन सभ्यताओं में से एक से उत्पन्न हुआ है सिन्धु घाटी सभ्यता। इसीलिए इसके समृद्ध सांस्कृतिक मूल्य हैं जो हमारी राष्ट्रीय पहचान बन गये हैं। हम इस सांस्कृतिक एकता को ही सांस्कृतिक राष्ट्रवाद कहते हैं। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद वह धागा है जो माला के सभी फूलों को एक साथ बनाये रखता है।

हमारे यहाँ अनेक मत, भाषाएँ, भेषज, भूषज, चिकित्सा पद्धति हैं। निहित स्वार्थ वाले लोग भारत को अस्थिर करने के लिए इन विविधताओं को बढ़ावा देते हैं । किन्तु सांस्कृतिक राष्ट्रवाद इन सबको सहन करने के लिए काफी मजबूत है। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को बढ़ाने की आवश्यकता है।

राष्ट्रीय पर्यों का एक साथ मिलकर मनाया जाना इसे बढ़ाता है। इससे भावात्मक एकता बढ़ती है। लोकतान्त्रिक प्रक्रियाओं में भागीदारी लोगों को ऐक्य महसूस कराती है। लगभग सभी समुदाय मेले व त्यौहारों, सामुदायिक दावतों आदि के समय भागीदारी करते हैं । इस प्रकार यह बढ़ता है।

Question 15. 
Write an article in 150-200 words on ‘Ways to curb corruption’ for the newspaper The Tribune, Jaipur. 
Answer:

Ways to Curb Corruption

Kavita Kumari Retd.
Director ACB

Corruption in India seems to become a Suvidha Shulka’. If an applicant needs to get his work done fast, he or she will have to pay this ‘Shulka’. There is need to find ways to curb corruption. Govt. should digitalise all its departments.

There should only be online transactions. Online applications and scanned copies of documents should be accepted. There should be a fixed number of days for the completion of every activity. Reason for pendency should be shown otherwise compensation should be given to the applicant for the loss of his days.

Anti Corruption Bureau should make its process easy so that anybody can complain easily. Salaries of the subordinate staff should be increased so that they can meet their expenses and do not think about corruption. Thus, these are the ways to curb corruption. Then only India can develop work culture.

भ्रष्टाचार नियन्त्रण के तरीके

कविता कुमारी
से.नि. निदेशक भ्र.वि.ब्यू.

भारत में भ्रष्टाचार सुविधा शुल्क’ हो गया लगता है। यदि कोई निवेदक अपना कार्य तेजी से करवाना चाहे तो उसे यह शुल्क अदा करना होगा। भ्रष्टाचार नियन्त्रण के तरीके तलाशने की आवश्यकता है। सरकार को अपने सभी विभागों को डिजिटलाइज कर देना चाहिए। केवल ऑनलाइन कार्य ही होने देना चाहिए।

ऑनलाइन प्रार्थना पत्र तथा दस्तावेजों की स्कैन्ड कॉपी को स्वीकार करना चाहिए। प्रत्येक कार्य को पूर्ण करने के निश्चित दिन होने चाहिए। अधूरेपन का कारण बताना चाहिए अन्यथा निवेदक को दिनों के नुकसान के हिसाब से क्षतिपूर्ति राशि दी जानी चाहिए। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को अपनी प्रक्रियाएँ सरल करनी चाहिए ताकि कोई भी सरलता से शिकायत कर सके।

अधीनस्थ स्टॉफ का वेतन बढ़ाना चाहिए ताकि वे भी अपना खर्चा चला सकें तथा भ्रष्टाचार के बारे में न सोचे। इस प्रकार इन तरीकों द्वारा भ्रष्टाचार को नियन्त्रित किया जा सकता है। तब ही भारत कार्य संस्कृति विकसित कर सकता है।

Question 16. 
Write an article in 150-200 words on ‘How to be Positive’ for your school magazine. 
Answer:

How to be Positive

(By Mamta Kumari, Student Class XII)

It is difficult to remain positive in this modern world. There are troubles and stress all around. There are political and other pressures everyday. The targets are higher, the means are limited. Though the atmosphere is negative even then we can be positive.

Learn, how to be positive? First of all believe in yourself. God has given you a mind and thoughtfulness. Learn to think. Learn to think positively. Secondly, be patient. Never react at once and without thoughtfulness. For developing patience you’ll have to habituate yourself even listening to the bitter negative things. When patience is developed, start to live peacefully.

Peaceful life will keep you positive. Learn to live spiritual life. It will make you positive. Give a little room to yoga and pranayam in your daily life. It will make you highly positive. Be social. It will make you positive. Thus, these approaches will make you positive.

सकारात्मक कैसे बनें

(ममता कुमारी विद्यार्थी कक्षा XII)

इस आधुनिक संसार में सकारात्मक बना रहना बड़ा कठिन है। हमारे चारों ओर समस्याएँ व तनाव हैं। प्रतिदिन राजनैतिक व अन्य दबाव रहता है। ध्येय उच्च होते हैं, संसाधन सीमित होते हैं । यद्यपि वायुमण्डल नकारात्मक है फिर भी हम सकारात्मक हो सकते हैं। सीखें कि सकारात्मक कैसे रहा जा सकता है।

सर्वप्रथम स्वयं में विश्वास करना सीखें। ईश्वर ने आपको दिमाग व विचारशीलता दी है। सोच-विचार करना सीखें । सकारात्मक सोच-विचार करना सीखें। द्वितीय, धैर्य रखें। न तो तत्काल प्रतिक्रिया दें और न ही बिना सोचे-विचारे प्रतिक्रिया दें। धैर्य विकसित करने के लिए आपको अत्यधिक नकारात्मक बातें भी सुनने की आदत डालनी होगी।

जब धैर्य विकसित हो जाए तो शान्त रहना आरंभ कर दें। शान्त जीवन आपको सकारात्मक रखेगा। आध्यात्मिक जीवन जीना सीखें। यह आपको सकारात्मक बनायेगा। अपने दैनिक जीवन में योग व प्राणायाम को भी थोड़ी जगह दें। यह आपको अत्यधिक सकारात्मक बनायेंगे। सामाजिक बनें। यह आपको सकारात्मक बनायेगा। इस प्रकार, ये दृष्टिकोण आपको सकारात्मक बनायेंगे।

Question 17. 
Write an article in 150-200 words on ‘The Necessity of Afforestation’ for the newspaper DNA, Jaipur. 
Answer:

The Necessity of Afforestation

(By Apoorva Kumari, Forest Ranger)

The necessity of afforestation is felt by the people and the govt. According to the norms, the forest area should be 33% of the total land area. In India it is only 21.16%. In Europe, America, Australia we find lush green cities. In India the number of lush green cities is least.

The necessity of afforestation can be felt owing to poor precipitation. Because of less trees the rainfall is also less. For more rainfall more and more trees are required. There is scarcity of fodder and pastures are dry. Tree leaves are also less for the animals. We must grow more and more trees for the animals. Afforestation is necessary for clean and green environment.

We need fresh oxygen to be healthy. Trees absorb carbon dioxide and release oxygen. They also absorb other harmful gases.Afforestation is necessary for saving animals, birds and insects. Trees are the homes of them. Trees are also necessary for shade to travellers. Afforestation is necessary for soil erosion, flood control etc.

पुनर्वनीकरण की आवश्यकता

(अपूर्वा कुमारी, वन रेन्जर)

पुनर्वनीकरण की आवश्यकता लोगों व सरकार द्वारा महसूस की जा रही है। मानदण्ड के अनुसार वनीकरण कुल क्षेत्रफल का 33 प्रतिशत होना चाहिए। भारत में यह 24.16 प्रतिशत है। यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया में हमें शहरों में सघन हरियाली मिलती है। भारत में सघन हरे-भरे शहरों की संख्या न्यून है। कम वर्षा के कारण पुनर्वनीकरण की आवश्यकता महसूस की जाती है। कम वृक्षों के कारण वर्षा भी कम होती है।

अधिक वर्षा के लिए अधिक से अधिक वृक्ष चाहिए। चारे की कमी है व चरागाह सूखे हैं। जानवरों के लिए वृक्षों के पत्ते भी कम हैं । हमें जानवरों के लिए अधिकाधिक वृक्ष लगाने चाहिए। स्वच्छ व हरे-भरे पर्यावरण के लिए भी पुनर्वनीकरण आवश्यक है। स्वस्थ रहने के लिए हमें ताजा ऑक्सीजन चाहिए।

वृक्ष कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं तथा ऑक्सीजन छोड़ते हैं। वे अन्य हानिकारक गैसों को भी सोख लेते पशु, पक्षियों तथा कीट-पतंगों को बचाने के लिए भी वृक्ष चाहिए। वृक्ष उनका घर होते हैं। यात्रियों को छाया के लिए भी वृक्ष आवश्यक हैं । वनरोपण भूमि कटाव व बाढ़ नियन्त्रण आदि के लिए आवश्यक है।

Question 18. 
Write an article in 150-200 words on ‘Dignity of Labour’ for your school magazine.
Answer:

Dignity of Labour

(By Nisha Kumari, Student Class XII)

Mahatma Gandhi and others are the apostles of the dignity of labour. Mahatma Gandhi in his Ashrama cleaned his toilets himself. He had no peon or sweeper. The Ashramites swept the ashram themselves. We should never think that this work or that is below our dignity.

Gandhiji said, ‘No work is below dignity.’ If an officer or a politician or an industrialist or a richman does her or his work himself, will she or he become small? No, not at all. Society will respect such a person more and more. She or he will be an instance for them who are arrogant and consider manual labour below dignity on the work of servants.

In the ‘Shakha’ of Rashtria Swamsevak Sangh, dignity of labour is learnt. Swamsevaks do every piece of work themselves. They do not feel ashamed for doing any piece of work. In the Ashramas of the seers, the disciples perform every piece of activity. They take it as the service to God. Do animals or birds take any work below dignity? Ifyou are laboursome, you are independent.

श्रम की गरिमा

(निशा कुमारी, विद्यार्थी कक्षा XII)

महात्मा गाँधी व अन्य श्रम की गरिमा के पथ-प्रदर्शक हैं। महात्मा गाँधी अपने आश्रम में अपने शौचालय स्वयं साफ करते थे। उनके पास कोई चपरासी या सफाईकर्मी नहीं था। आश्रमवासी स्वयं आश्रम को साफ रखते थे। हमें कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि यह कार्य या वह कार्य हमारी गरिमा से नीचा है।

गाँधीजी ने कहा है, कोई कार्य गरिमा के नीचे नहीं होता है। यदि एक अफसर या एक राजनीतिज्ञ या एक उद्योगपति या एक धनवान अपना कार्य स्वयं करती या करता है तो क्या वह छोटा बन जायेगी/जायेगा। नहीं, बिल्कुल नहीं। समाज ऐसे व्यक्ति का अधिक से अधिक सम्मान करेगा।

वह तो उनके लिए उदाहरण बनेगी या बनेगा जो घमण्डी हैं, परिश्रम को गरिमा से नीचे जानते हैं या नौकरों का कार्य मानते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में श्रम की गरिमा सीखी जाती है। स्वयंसेवक अपना कार्य स्वयं करते हैं। वे किसी भी कार्य को करने में शर्म महसूस नहीं करते। संतों के आश्रमों में, शिष्य प्रत्येक कार्य स्वयं करते हैं । वे तो इसे ईश्वर के द्वारा किया गया कार्य समझते हैं। क्या पशु या पक्षी किसी कार्य को गरिमा से नीचे मानते हैं? यदि आप परिश्रमी हैं तो आप स्वतन्त्र हैं।

Question 19. 
Write an article in 150-200 words on “Democracy : Legal Provisions and Reality’ for the newspaper The Times of India, Jaipur.
Answer:

Democracy : Legal Provisions and Reality

(By Bindu Kumari, Advocate)

India had democracy. There is a constitution. There are constitutional and legal provisions for the people. Sometime we find differences between the legal provisions and the reality. Let us discuss some of them. We have traffic rules for two wheelers, four wheelers, passenger vehicles and goods vehicles even then the number of road accidents is rising.

Why? The reality is this that drivers violate traffic rules and the police, to some extent, are blamed for corruption, therefore accidents are caused. In govt. offices, it is the duty of ‘lok sevaks’ to do the work timely. In reality we find pendency to some extent and work is not done without graft in typical cases.

In contractual work of the govt. the legal provisions are tough. But newly constructed road gets damaged very early. The contractor pays graft so he uses substandard material. The more or less situation prevails is army, is judiciary, in health, in educations, in other departments too. Newspaper reports confirm it.

लोकतन्त्र : कानूनी प्रावधान तथा वास्तविकता

(बिन्दु कुमारी, वकील)

भारत में लोकतन्त्र है। यहाँ एक संविधान है। लोगों के संवैधानिक तथा कानूनी प्रावधान हैं। कभी-कभी हमें कानूनी प्रावधानों तथा वास्तविकता में अन्तर मिलता है। आइए उनमें से कुछ की चर्चा करते हैं। हमारे यहाँ दुपहिया, चौपहिया, यात्री वाहनों तथा मालवाहक वाहनों के लिए यातायात नियम हैं फिर भी सड़क दुर्घटना की संख्या बढ़ रही है। क्यों? वास्तविकता यह है कि वाहन चालक यातायात नियमों का उल्लंघन करते हैं

और पुलिस कुछ हद तक भ्रष्टाचार के लिये आरोपित की जाती है इसलिए दुर्घटनाएं होती हैं। सरकारी कार्यालयों में यह लोक सेवकों का कर्तव्य है कि वह लोगों के कार्य समय से करें। वास्तविकता में हम सरकार के ठेकेदारी के कार्यों के कानूनी प्रावधान काफी सख्त हैं । फिर भी एक नई बनी रोड बहुत जल्दी खराब हो जाता है। ठेकेदार रिश्वत देता है इसलिए वह निम्न कोटि की चीजें प्रयोग करता है। यह स्थिति कमोबेश सेना, न्यायालय, स्वास्थ्य, शिक्षा व अन्य विभागों में भी है। समाचार पत्रों की खबरें इसे पुष्ट करती हैं।

Question 20. 
Write an article in 150-200 words on “Rural Development : High Boast Little Roast’ for your school magazine.
Answer:

Rural Development : High Boast Little Roast

(By Dipti Kumari, Student Class XII)

India is a land of villages. Still, 68.16% people live in rural areas. Govts. boast of cent percent rural electrification, road connectivity, drinking water supply availability, education access and health facilities availability. It appears that this high boast of the govts.

has little roast in acutality. In case of electrification we find electric poles and wires there but electric current runs in them for a very limited time: In case of road connectivity we find only a narrow lane that converts into rough and pot road after a year of its construction.

Its repair is least done. In case of drinking water supply availability, the condition is most pitiable. A number of villages still don’t have water supply line. If it is there, then problem of pressureless supply or supply for a very short period is there.

In case of education access, the rural literacy rate is 68.9% only. There are shortage of teachers. Infrastructure is very poor. In case of health, it is only for name. Doctors go there off and on. There is scarcity of medicines and equipments.

ग्रामीण विकास : ऊँची दुकान फीके पकवान

(दीप्ति कुमारी, विद्यार्थी कक्षा XII)

भारत गाँवों का देश है। अभी भी 68.16 प्रतिशत लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं । सरकारें शत-प्रतिशत विद्युतीकृत, सड़क निर्माण, पीने योग्य जलापूर्ति उपलब्धता, शिक्षा पहुँच, स्वास्थ्य सुविधा उपलब्धता की शेखी मारती हैं । ऐसा लगता है कि सरकारों की इस शेखी में वास्तव में कुछ दम नहीं है।

जहाँ तक विद्युतीकृत करने का प्रश्न है तो हम वहाँ अधिकतर पोल व तार ही पाते हैं। बिजली तो उनमें बहुत कम समय के लिए दौड़ती है। जहाँ तक सड़क निर्माण/सम्पर्क की बात है तो हमें केवल एक सकड़ी सी लेन ही मिलती है और वह भी अपने निर्माण के एक वर्ष बाद ही खुरदरी व खड्डा सड़क में बदल जाती है।

इसकी मरम्मत भी शायद ही की जाती है। जहाँ तक पीने योग्य जलापूर्ति की उपलब्धता की बात है तो स्थिति बहुत दयनीय है। अनेक गाँवों में अभी जलापूर्ति लाइन नहीं है। अगर यह है भी तो प्रेशररहित जलापूर्ति है या कम समय जलापूर्ति है। शिक्षा की पहुँच की बात है तो ग्रामीण साक्षरता 68.9 प्रतिशत ही है। वहाँ अध्यापकों की कमी है। आधारभूत सुविधाएँ निम्न स्तरीय हैं। स्वास्थ्य के संबंध में, यह तो केवल नाम की है। डॉक्टर वहाँ कभी-कभार जाते हैं । वहाँ दवाओं व उपकरणों की कमी रहती है।

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