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Chapter 10 आंतरिक व्यापार

Textbook Questions and Answers

लघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. 
आन्तरिक व्यापार से क्या तात्पर्य है? 
उत्तर:
आन्तरिक व्यापार का अर्थ-जब वस्तुओं एवं सेवाओं का क्रय-विक्रय एक ही देश की सीमाओं के भीतर किया जाता है तो इसे आन्तरिक व्यापार कहा जाता है। चाहे वस्तुओं का क्रय एक क्षेत्र के पास की दुकान से है या केन्द्रीय बाजार से या विभागीय भण्डार से, मॉल से, या फेरी लगाकर माल का विक्रय करने वाले विक्रेता से। ये सभी आन्तरिक व्यापार के उदाहरण हैं। इस व्यापार में चूँकि वस्तुएँ घरेलू उत्पाद का भाग हैं तथा घरेलू उपयोग के लिए होती हैं, व्यापार में कोई सीमा शुल्क अथवा आयात कर आदि नहीं लगता है। आन्तरिक व्यापार में भुगतान देश की सरकारी मुद्रा में अथवा किसी अन्य मान्य मुद्रा में किया जाता है। आन्तरिक व्यापार थोक व्यापार के रूप में तथा फुटकर व्यापार के रूप में हो सकता है। आन्तरिक व्यापार का लक्ष्य देश के भीतर वस्तुओं के समान मात्रा में शीघ्र एवं कम लागत पर वितरण करने से है। 

प्रश्न 2. 
स्थायी दुकान फुटकर व्यापारियों की विशेषताएँ बताइये। 
उत्तर:
स्थायी दुकान फुटकर व्यापारियों की विशेषताएँ- 

  • अधिक संसाधन-स्थायी दुकान फुटकर व्यापारियों के पास अधिक संसाधन होते हैं। फलतः ये अपेक्षाकृत बड़े पैमाने पर कार्य करते हैं। 
  • अनेक आकारों में-स्थायी दुकान फुटकर व्यापारी आकार के आधार पर छोटे तथा बड़े आकार के हो सकते हैं। 
  • विभिन्न वस्तुओं का व्यापार-स्थायी दुकान फुटकर व्यापारी विभिन्न वस्तुओं का व्यापार करते हैं जो उपभोग योग्य टिकाऊ तथा गैर-टिकाऊ हो सकते हैं। 
  • अधिक साख-ग्राहकों में इनकी अधिक साख होती है। 
  • अनेक सेवाएँ प्रदान करना-ये व्यापारी ग्राहकों को वस्तुएँ घर पहुँचाने, गारण्टी प्रदान करने, मरम्मत, उधार आदों के सम्बन्ध में सूचना देने, चयन के पर्याप्त अवसर देने तथा क्रय में सुविधा देने आदि जैसी अनेक सुविधाएँ प्रदान करते हैं। 

प्रश्न 3. 
थोक व्यापारी द्वारा भण्डारण की सुविधा किस उद्देश्य के लिए दी जाती है? 
उत्तर:
निर्माताओं या उत्पादकों द्वारा जैसे ही अपने कारखानों में उत्पादन किया जाता है, थोक व्यापारी उसे खरीद लेते हैं तथा माल को अपने गोदामों या भण्डारगृहों में संगृहीत कर लेते हैं । इससे निर्माताओं को तैयार माल का स्टॉक/संग्रहण करने की आवश्यकता नहीं होती है। 

इसी प्रकार थोक व्यापारी अपने फुटकर व्यापारियों को विभिन्न उत्पादकों की वस्तुएँ तुरन्त उपलब्ध कराते हैं क्योंकि वे निर्माताओं से बड़ी मात्रा में माल खरीदकर अपने यहाँ स्टॉक कर लेते हैं। इससे फुटकर व्यापारियों को अनेकों उत्पादकों से वस्तुओं को एकत्रित करने एवं बड़ी मात्रा में उनके संगृहीत करने की आवश्यकता नहीं होती है। थोक व्यापारी फुटकर व्यापारियों को बड़ी मात्रा में संग्रहण के दायित्व से मुक्ति दिलाते हैं तथा उन्हें उधार की सुविधा भी प्रदान करते हैं। 

प्रश्न 4. 
थोक व्यापारी से मिलने वाली बाजार जानकारी से निर्माता को किस प्रकार के लाभ मिलते हैं? 
उत्तर:
थोक व्यापारी फुटकर व्यापारियों से सीधे सम्पर्क में बने रहते हैं। इसलिए ये निर्माताओं को विभिन्न पहलुओं या पक्षों के सम्बन्ध में सलाह एवं परामर्श प्रदान करते हैं। ये पक्ष है ग्राहकों की रुचि एवं पसन्द, बाजार की स्थिति, प्रतिस्पद्धियों की गतिविधियों एवं उपभोक्ता की आवश्यकतानुसार वस्तुएँ आदि। थोक व्यापारी इन सबके सम्बन्ध में एवं अन्य सम्बन्धित मामलों के सम्बन्ध में बाजार की जानकारी प्रदान करने का महत्त्वपूर्ण स्रोत है। 

प्रश्न 5.
थोक व्यापारी निर्माता को बड़े पैमाने की मितव्ययता में किस प्रकार मदद करता है? 
उत्तर:
थोक व्यापारी बड़ी संख्या में फुटकर व्यापारियों से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में आदेश प्राप्त करते हैं। इन आदेशों को एकत्रित करके उसके अनुसार ही निर्माताओं या उत्पादकों से माल खरीदते हैं। जब निर्माताओं या उत्पादकों को थोक व्यापारियों से बड़ी मात्रा में क्रयादेश प्राप्त होते हैं तो उत्पादक या निर्माता उसके हिसाब से बड़े पैमाने पर वस्तुओं का उत्पादन करते हैं। परिणामस्वरूप निर्माताओं को बड़े पैमाने के लाभ प्राप्त होते हैं, जैसे- कच्चा माल सस्ती दर पर प्राप्त होना, उत्पादन एवं वितरण की लागत कम आना, उत्पादन क्षमता का अधिकतम उपयोग करना आदि। 

प्रश्न 6. 
एक वस्तु भण्डार और विशिष्टीकृत भण्डार के बीच अन्तर स्पष्ट कीजिए। क्या आप ऐसे भण्डारों को ज्ञात कर सकते हैं? 
उत्तर:
एक वस्तु के भण्डार वे भण्डार होते हैं जो एक ही श्रेणी की वस्तुओं का विक्रय करते हैं जैसे पहनने के तैयार वस्त्र, घड़ियाँ, जूते, कारें, टायर, कम्प्यूटर, पुस्तकें, स्टेशनरी आदि। ये भण्डार एक ही श्रेणी की अनेक प्रकार की वस्तुएँ रखते हैं तथा केन्द्रीय स्थल पर स्थित होते हैं। इनमें से अधिकांश स्वतंत्र बिक्री संगठन होते हैं जो एकल स्वामित्व या साझेदारी फर्म के रूप में चलाये जाते हैं। 

विशिष्टीकृत भण्डार विशेषतः शहरी क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की वस्तुओं का विक्रय नहीं करके एक ही प्रकार की वस्तुओं की बिक्री करते हैं तथा ये विशेषज्ञ होते हैं। उदाहरण के लिए दुकानें जो केवल बच्चों के सिले-सिलाए वस्त्र बेचती हैं या फिर पुरुषों के वस्त्र, महिलाओं के जूते, खिलौने एवं उपहार की वस्तुएँ, स्कूल यूनिफॉर्म, कॉलेज की पुस्तकें या फिर इलैक्ट्रॉनिक वस्तुएँ आदि की दुकानें। ये बाजार में पायी जाने वाली इस प्रकार की दुकानें हैं। विशिष्टीकृत भण्डार सामान्यतः केन्द्रीय स्थल पर स्थित होते हैं, जहाँ पर बड़ी संख्या में ग्राहक आते हैं तथा ये ग्राहकों को वस्तुओं का चयन करने का भारी अवसर प्रदान करते हैं। 

प्रश्न 7. 
पटरी व्यापारी और सस्ते दर की दुकान में किस प्रकार अन्तर्भेद करेंगे? 
उत्तर:
पटरी व्यापारी और सस्ते दर की दुकानों में अन्तर्भेद-पटरी व्यापारी ऐसे लघु विक्रेता होते हैं जो ऐसे स्थानों पर पाये जाते हैं और अपना व्यापार करते हैं जहाँ लोगों का भारी आवागमन रहता है, जैसे-रेलवे स्टेशन, बस स्टैण्ड इत्यादि। पटरी व्यापारी या पटरी विक्रेता सामान्य रूप से उपयोग में आने वाली वस्तुओं का ही विक्रय करते हैं, जैसे कि स्टेशनरी का सामान, खाने-पीने की चीजें, समाचार-पत्र, रेडीमेड वस्त्र आदि। ये अपने बिक्री के स्थान को आसानी से नहीं बदलते हैं। 

सस्ते दर की दुकान वाले वे छोटे फुटकर विक्रेता होते हैं जिनकी किसी व्यावसायिक क्षेत्र में स्वतंत्र अस्थायी दुकानें होती हैं । ये अपने व्यापार को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में बदलते रहते हैं लेकिन यह फेरी वाले या बाजार विक्रेताओं के समान शीघ्रता से नहीं बदलते हैं। ये उपभोक्ता वस्तुओं का व्यापार करते हैं एवं वस्तुओं को उपभोक्ता के उपभोग स्थान पर उपलब्ध कराते हैं। 

प्रश्न 8. 
थोक व्यापारी द्वारा निर्माता को दी जाने वाली सेवाओं की व्याख्या कीजिये। 
उत्तर:
थोक व्यापारी द्वारा निर्माता को दी जाने वाली सेवाएँ- 

  • थोक व्यापारी निर्माताओं से बड़ी मात्रा में माल क्रय करते हैं। इससे निर्माता बड़े पैमाने पर उत्पादन करते हैं और बड़े पैमाने पर उत्पादन करने से प्राप्त होने वाले लाभों को प्राप्त करते हैं। 
  • थोक व्यापारी वस्तुओं का क्रय-विक्रय अपने नाम से करते हैं। माल को अपने भण्डारगृह में रखते हैं। इस प्रक्रिया में मूल्य कम होने की जोखिम, चोरी, छीजत, खराब हो जाना आदि की जोखिमें उठाते हैं। 
  • ये निर्माताओं से माल का नकद क्रय करते हैं। इस प्रकार से निर्माताओं को वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं। 
  • थोक व्यापारी फुटकर विक्रेताओं से सीधे सम्पर्क में रहते हैं और उनसे प्राप्त सूचनाओं को निर्माताओं को विभिन्न पहलुओं के सम्बन्ध में विशेषज्ञ सलाह देते हैं। 
  • थोक व्यापारी उत्पादकों या निर्माताओं को अनेक विपणन कार्यों से मुक्ति दिलाते हैं। इससे निर्माता अपना पूरा ध्यान उत्पादन की ओर लगा सकते हैं। 
  • थोक व्यापारी निर्माताओं से नियमित रूप से माल खरीदते रहते हैं। इससे निर्माता अपनी उत्पादन क्रिया वर्ष पर्यन्त जारी रखकर अपने संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर सकते हैं। 
  • थोक व्यापारी निर्माताओं से माल तैयार होते ही खरीद लेते हैं। इससे निर्माताओं को तैयार माल को स्टोर करने की सुविधाएँ जुटाने की आवश्यकता नहीं होती है। 

प्रश्न 9. 
फुटकर व्यापारी द्वारा थोक व्यापारी और उपभोक्ता को दी जाने वाली सेवाएँ बताइए। 
उत्तर:
फुटकर व्यापारी द्वारा थोक व्यापारी को दी जाने वाली सेवाएँ 

  • वस्तुओं के वितरण में सहायता करना। 
  • वस्तुओं का व्यक्तिगत रूप से विक्रय करना। 
  • थोक व्यापारियों को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में वस्तुओं की बिक्री करने से मुक्ति दिलाना। 
  • बाजार से सम्बन्धित सूचनाओं को एकत्रित कर थोक व्यापारियों को उपलब्ध कराना। 
  • थोक व्यापारी की बिक्री बढ़ाने में सहायता करना। 

फुटकर व्यापारी द्वारा उपभोक्ताओं को दी जाने वाली सेवाएँ 

  • विभिन्न उत्पादकों के उत्पादों को नियमित रूप से उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराना। 
  • उपभोक्ताओं को नये उत्पादों के आगमन एवं उनकी विशिष्टताओं के सम्बन्ध में सूचनाएँ प्रदान करना। 
  • उपभोक्ताओं को उनकी आवश्यकतानुसार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में वस्तुएँ खरीदने की सुविधा प्रदान करना। 
  • उपभोक्ताओं को वस्तुएँ खरीदते समय अनेक विकल्प उपलब्ध करवाकर वस्तु के चयन के पर्याप्त अवसर प्रदान करना। 
  • विक्रयोपरान्त सेवाएँ प्रदान करना। 
  • नियमित उपभोक्ताओं को उधार की सुविधा प्रदान करना। 

दीर्घउत्तरात्मक प्रश्न- 

प्रश्न 1. 
भारत में भ्रमणशील फुटकर विक्रेता आन्तरिक व्यापार का महत्त्वपूर्ण अंग है। थोक फुटकर व्यापारी से उसकी प्रतिस्पर्धा के बजाय बचाव के कारणों का विश्लेषण कीजिए। 
उत्तर:
भारत में भ्रमणशील फुटकर विक्रेता वे फुटकर व्यापारी होते हैं जो किसी एक स्थायी जगह से अपना व्यापार नहीं करते हैं। ये अपने माल के साथ अपने ग्राहकों की तलाश में गली-गली, शहरों, कस्बों आदि में एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमते रहते हैं और घूम-घूमकर माल बेचते हैं। भ्रमणशील फुटकर विक्रेताओं द्वारा सामान्यतः ऐसी वस्तुओं का विक्रय किया जाता है जो उपभोक्ताओं के लिए प्रतिदिन काम में आने वाली होती हैं, जैसे प्रसाधन सामग्री, फल-सब्जियाँ, महिलाओं के लिए साड़ियाँ, बेडशीट्स आदि। भ्रमणशील फुटकर विक्रेताओं में फेरी वाले, साविधिक बाजार व्यापारी, पटरी विक्रेता, सस्ते दर की दुकानों आदि को सम्मिलित किया जाता है। बड़े व्यापारियों अर्थात् थोक फुटकर व्यापारियों के व्यापार में होने व उनसे प्रतिस्पर्धा होने के बावजूद भी इन लघु फुटकर व्यापारियों (भ्रमणशील फुटकर विक्रेता) के महत्त्व को कम नहीं किया जा सकता है, ये अपना अस्तित्व आज भी बनाये हुए हैं। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं- 

  • ये अपने सीमित साधनों से व्यापार करते हैं। इनका प्रयास यही रहता है कि दिनभर में अपने पूरे माल को बेच लें। फलतः पूरे माल को बेचने के प्रयास में ग्राहकों से अच्छी व ताजी वस्तुएँ कम कीमत पर उपलब्ध कराने का कार्य करते हैं। 
  • भ्रमणशील फुटकर विक्रेता रोजमर्रा की काम आने वाली वस्तुओं में ही व्यापार करते हैं और ऐसी वस्तुओं को अपने ग्राहकों को घर बैठे ही उपलब्ध कराने का प्रयास करते हैं। 
  • सामान्यतः इन व्यापारियों द्वारा कम कीमत पर ही अपना माल बेचने का प्रयास करते हैं। अतः ग्राहकों को घर बैठे ही सस्ती वस्तुएँ उपभोग के लिए प्राप्त हो जाती हैं। 
  • इनके द्वारा उपभोक्ताओं या ग्राहकों को नियमित रूप से रोजाना उनकी आवश्यकतानुसार वस्तुएँ उपलब्ध कराते हैं। अतः उपभोक्ताओं को अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वस्तुएँ प्राप्त करने एवं उनका चुनाव करने में आसानी रहती है। 
  • इनका कोई निश्चित व्यापारिक स्थान भी नहीं होता है। इसीलिये इन्हें माल का स्टॉक घर में या फिर किसी अन्य स्थान पर रखना पड़ता है। 
  • ये उपभोक्ता वस्तुओं में ही व्यापार करते हैं एवं वस्तुओं को उस स्थान पर उपलब्ध कराते हैं जहाँ उपभोक्ता को इसकी आवश्यकता होती है। 

प्रश्न 2. 
विभागीय भण्डार की विशेषताओं का वर्णन कीजिए। ये श्रृंखला भण्डार या बहुसंख्यक दुकानों से किस प्रकार भिन्न हैं? 
उत्तर: 
विभागीय भण्डार की विशेषताएँ 
विभागीय भण्डार की कुछ प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं- 
1. सभी प्रकार की सुविधाएँ प्रदान करना आधुनिक विभागीय भण्डार अपने यहाँ आने वाले ग्राहकों को जलपान-गृह, यात्रा एवं सूचना ब्यूरो, टेलीफोन बूथ, विश्राम-गृह आदि सभी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध करवाते हैं। ये उन उच्च श्रेणी के ग्राहकों को अधिकतम सेवाएं प्रदान करने का प्रयास करते हैं जिनके लिए वस्तुओं की कीमतें कोई महत्त्व नहीं रखती हैं। 

2. क्रय की केन्द्रीय व्यवस्था-विभागीय भण्डारों में माल के क्रय की केन्द्रीय व्यवस्था होती है अर्थात् इसका क्रय विभाग ही भण्डार में बेचे जाने वाले पूरे माल को क्रय करता है। 

3. विभिन्न विक्रय विभागों के माध्यम से विक्रय-विभागीय भण्डारों में बेचे जाने का माल विभिन्न विभागों के माध्यम से बेचा जाता है। विक्रय विभागों की स्थापना भी विभागीय भण्डार अपनी सुविधा से करता है।

4. शहर के केन्द्र में स्थित-विभागीय भण्डारों की एक प्रमख विशेषता यह भी होती है कि ये शहर के केन्द्र में ही स्थित होते हैं। विशेषकर ऐसे स्थानों पर जहाँ ग्राहक बड़ी संख्या में आते हैं। 

5. संयुक्त पूँजी कम्पनी प्रारूप में संचालन-विभागीय भण्डार चूँकि बहुत बड़े होते हैं इसीलिए ये संयुक्त पूँजी कम्पनी प्रारूप में ही संचालित किये जाते हैं। इनका प्रबन्धन निदेशक मण्डल द्वारा किया जाता है। जनरल मैनेजर एवं अन्य विभागीय प्रबन्धक इस निदेशक मण्डल को सहायता करते हैं। 

6. अनावश्यक मध्यस्थों को समाप्त करना-विभागीय भण्डार सीधे उत्पादकों से माल खरीदते हैं तथा अपने भण्डार-गृहों में माल का संग्रह भी करते हैं। इसके साथ ही ये ग्राहकों को बिना मध्यस्थों की सहायता के माल का विक्रय भी करते हैं। इस प्रकार विभागीय भण्डार उत्पादक एवं ग्राहकों के बीच अनावश्यक मध्यस्थों को समाप्त करते हैं। 

विभागीय भण्डार तथा श्रृंखला भण्डार (बहुसंख्यक दुकानें) में अन्तर 
विभागीय भण्डार तथा श्रृंखला भण्डार या बहुसंख्यक दुकानों में अन्तर निम्न प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है- 
1. स्थिति-विभागीय भण्डार किसी ऐसे केन्द्रीय स्थान पर स्थित होते हैं जहाँ काफी बड़ी संख्या में ग्राहक आ सकते हैं, जबकि बहुसंख्यक दुकानें अलग-अलग स्थानों पर स्थित होती हैं जहाँ बड़ी संख्या में ग्राहक पहुँचते हैं। इस प्रकार इनके लिये किसी केन्द्रीय स्थिति की आवश्यकता नहीं होती है। 

2. उत्पादों की श्रेणी-विभागीय भण्डारों का उद्देश्य एक ही छत के नीचे ग्राहकों की सभी प्रकार की आवश्यक वस्तुओं की पूर्ति करना होता है। साथ ही ये विभिन्न प्रकार के अलग-अलग उत्पादों का विक्रय करते हैं, जबकि बहुसंख्यक दुकानों का उद्देश्य किसी वस्तु की विभिन्न किस्मों की (ग्राहकों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए) पूर्ति करना होता है। 

3. उधार की सुविधा-विभागीय भण्डार अपने कुछ प्रतिष्ठित नियमित ग्राहकों को उधार की सुविधा भी प्रदान करते हैं, जबकि बहुसंख्यक दुकानों में सभी बिक्री पूर्णतः नकद में होती है। 

4. वस्तुओं में लचीलापन-विभागीय भण्डार बड़ी संख्या में विभिन्न प्रकार की वस्तुओं का व्यापार करते हैं तथा विक्रय उत्पादों की विभिन्न श्रेणियाँ रखते हैं। जिनके कारण इनके यहाँ वस्तुओं में लचीलापन पाया जाता है, जबकि बहसंख्यक दकानों में वस्तओं में लोचपर्णता की संभावना नहीं रहती है क्योंकि ये सीमित श्रेणी की वस्तुओं का ही व्यापार करते हैं। 

5. प्रदत्त सेवाएँ-विभागीय भण्डार अपने ग्राहकों को अधिक से अधिक सेवाएँ जैसे डाकघर, जलपान-गृह, मनोरंजन आदि प्रदान करते हैं जबकि बहुसंख्यक दुकानें सीमित सेवाएँ ही प्रदान करती हैं, जैसे-वस्तुओं को गारण्टी देना, मरम्मत की सुविधाएँ प्रदान करना। 

6. कीमतें/मूल्य-विभागीय भण्डारों में सभी विभागों में मूल्य नीति समान नहीं होती है। कई बार इनके द्वारा माल के स्टॉक को निकालने के लिए वस्तुओं एवं किस्मों पर छूट दी जाती है। जबकि बहुसंख्यक दुकानें निर्धारित मूल्य पर माल बेचती हैं तथा उनकी सभी दुकानों पर एक ही मूल्य रहता है। 

7. ग्राहकों का वर्ग-विभागीय भण्डार ज्यादातर समाज के उच्च आय वर्ग के ग्राहकों की आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं। विशेषकर ऐसे ग्राहकों की आवश्यकताओं की पूर्ति जो सेवाएँ चाहते हैं किन्तु मूल्य की परवाह नहीं करते हैं। बहुसंख्यक दुकानें ग्राहकों के विभिन्न वर्गों की आवश्यकताओं की पूर्ति करती हैं जिनमें कम आय वर्ग के ग्राहक भी हैं जो कम कीमत पर अच्छी किस्म वाली वस्तुओं को खरीदने में रुचि रखते हैं। 

प्रश्न 3. 
उपभोक्ता सहकारी भण्डार को कम खर्चीला क्यों माना जाता है? थोक फुटकर व्यापारी से सम्बन्धित लाभ क्या हैं? 
उत्तर:
उपभोक्ता सहकारी भण्डार-उपभोक्ता सहकारी भण्डार उपभोक्ताओं द्वारा स्थापित स्वैच्छिक संगठन है, जो निर्माताओं या थोक व्यापारियों से दैनिक उपयोग की वस्तुएँ खरीदकर अपने सदस्यों को विक्रय कर उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं। इनका मुख्य उद्देश्य अपने सदस्यों की सेवा करना होता है। 

उपभोक्ता सहकारी भण्डारों को कम खर्चीला निम्न कारणों से कहा जाता है- 

  • उपभोक्ता सहकारी भण्डार सामान्यतया माल सीधे उत्पादक थोक विक्रेता से बड़ी मात्रा में क्रय करते हैं और उन्हें उपभोक्ताओं को उचित दर पर विक्रय करते हैं। इस प्रकार ग्राहकों को उचित मूल्य पर वस्तुएँ प्राप्त हो जाती हैं। 
  • इनका उद्देश्य मध्यस्थों को समाप्त करना भी होता है। 
  • मध्यस्थों के समाप्त हो जाने से सदस्यों को अच्छी गुणवत्ता की वस्तुएँ सस्ते मूल्य पर उपलब्ध हो जाती हैं। 
  • उपभोक्ता सहकारी भण्डारों द्वारा वर्ष के दौरान अर्जित लाभों को सदस्यों में उनके क्रय के अनुपात में बाँट दिया जाता है। 
  • उपभोक्ता सहकारी भण्डारों की स्थापना करना आसान होता है। 
  • उपभोक्ता सहकारी भण्डारों पर उपभोक्ताओं का अपना स्वयं का प्रबन्ध एवं नियन्त्रण होता है। 
  • इन भण्डारों में प्रजातान्त्रिक प्रबन्ध के कारण सभी सदस्यों के हितों की रक्षा होती है। 
  • उपभोक्ता सहकारी भण्डार वस्तुओं की नकद बिक्री करते हैं। फलतः इन्हें कार्यशील पूँजी की आवश्यकता कम होती है। इससे उन्हें अधिक पूँजी नहीं जुटानी पड़ती है। 
  • उपभोक्ता सहकारी भण्डारों द्वारा समस्त विक्रय नकद में किये जाने के कारण इनमें उधार डूबने की जोखिम नहीं रहती है।
  • उपभोक्ता सहकारी भण्डार को सभी सदस्य मिलकर चलाते हैं, अतः इनमें पारस्परिक सद्भाव एवं सहयोग बढ़ता है। 
  • सहकारी भण्डार सुविधा के अनुसार सार्वजनिक स्थानों पर खोले जाते हैं, जहाँ से सदस्य एवं अन्य लोग आसानी से अपनी आवश्यकता की वस्तुओं का क्रय कर सकते हैं। 

थोक फुटकर व्यापारी से सम्बन्धित लाभ- 

  • ये बड़े पैमाने पर उत्पादन करने में निर्माताओं को सहायता करते हैं; क्योंकि इनके द्वारा बड़ी मात्रा में निर्माताओं से माल क्रय किया जाता है। 
  • निर्माताओं से माल नकद क्रय करते हैं। इस प्रकार ये उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं। निर्माताओं को स्टॉक बनाये रखने में अपनी पूँजी फँसाने की आवश्यकता नहीं होती है। 
  • ये विशेषज्ञ के रूप में भी निर्माताओं को सलाह देने का कार्य करते हैं; क्योंकि ग्राहकों से इनका प्रत्यक्ष सम्पर्क बना रहता है। 
  • ये बड़ी मात्रा में उपभोक्ताओं को माल का विक्रय करते हैं। इससे निर्माताओं को विपणन में सहायता मिलती 
  • थोक फुटकर व्यापारी कारखानों में माल का उत्पादन होते ही उसे खरीद लेते हैं। फलतः निर्माताओं को तैयार माल का स्टॉक करने की सुविधाएँ जुटाने की आवश्यकता नहीं होती है। 
  • ये अपने उपभोक्ताओं को उनकी आवश्यकतानुसार वस्तुएँ उपलब्ध कराते हैं। 
  • ये अपने ग्राहकों को नये उत्पादों, उनकी गुणवत्ता, उपयोगिता तथा मूल्य आदि के सम्बन्ध में सूचनाएँ प्रदान करने का कार्य करते हैं। 
  • थोक फुटकर व्यापारी विपणन के विभिन्न कार्य करते हैं और अपने ग्राहकों को सहायता प्रदान करते हैं। इससे नये उत्पादों की मांग में वृद्धि होती है तथा फुटकर विक्रेताओं अर्थात् ग्राहकों को लाभ होता है। 

प्रश्न 4. 
स्थानीय बाजार के बिना अपने जीवन की कल्पना कीजिये। फुटकर दुकान के नहीं होने पर उपभोक्ता को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है? 
उत्तर:
स्थानीय बाजार अर्थात् फुटकर व्यापार व्यवसाय की एक ऐसी महत्त्वपूर्ण कड़ी है, जो अन्तिम उपभोक्ताओं को उनके व्यक्तिगत उपभोग एवं गैर व्यावसायिक उपभोगों की वस्तुओं के विक्रय का कार्य करती है। यह उपभोक्ताओं को उनके द्वारा उपभोग की जाने वाली सभी प्रकार की वस्तुओं को उपलब्ध कराने का कार्य करता है। यदि यह कड़ी नहीं हो तो उपभोक्ता अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं कर सकते, यहाँ तक कि वे अपना जीवन-यापन ठीक ढंग से नहीं कर सकते। स्थानीय बाजार में फुटकर व्यापारी चाहे वह जनरल स्टोर की दुकान हो या विशिष्टीकृत भण्डार या गली में स्टाल या पुरानी वस्तुओं की दुकान या फिर पटरी विक्रेता हों या सस्ते दर की दुकानें सभी उपभोक्ताओं के लिए वस्तुओं एवं सेवाओं के वितरण के कई कार्य करते हैं। इनके बिना अपने जीवन की कल्पना तक नहीं की जा सकती है। 

फुटकर दुकानों या फुटकर व्यापार के नहीं होने पर उपभोक्ता को निम्नलिखित कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है- 
1. उत्पादों की नियमित उपलब्धता नहीं-फुटकर दुकानों की उपभोक्ता को सबसे बड़ी सेवा विभिन्न उत्पादकों के उत्पादों को नियमित रूप से उपलब्ध कराना है। इससे उपभोक्ताओं को अपनी रुचि की वस्तु के चयन का अवसर तो मिलता ही है साथ ही जब चाहे तब वस्तुओं का क्रय कर सकते हैं। फुटकर दुकानों के नहीं होने पर उपभोक्ताओं को नियमित रूप से उत्पाद या वस्तुएँ उपलब्ध नहीं हो सकेंगी। 

2. नये उत्पादों के सम्बन्ध में सूचना उपलब्ध नहीं-फुटकर विक्रेता प्रभावी ढंग से वस्तुओं का प्रदर्शन करते हैं एवं बेचने में व्यक्तिगत रूप से प्रयत्न करते हैं। इस प्रकार से वह ग्राहकों को नये उत्पादों के आगमन एवं उनकी विशिष्टताओं के सम्बन्ध में सूचना प्रदान करते हैं। यह वस्तुओं के क्रय का निर्णय लेने की प्रक्रिया का एक महत्त्वपूर्ण तत्व होता है। यदि फुटकर दुकानें नहीं होंगी तो उपभोक्ताओं को नये उत्पादों के सम्बन्ध में सूचना प्राप्त नहीं होगी। 

3. क्रय में सुविधा नहीं-फुटकर विक्रेता बड़ी मात्रा में माल क्रय करते हैं तथा उन्हें ग्राहकों आवश्यकतानुसार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बेचते हैं। वह अधिकांश आवासीय क्षेत्रों के समीप होते हैं एवं देर रात तक दुकान खोले रहते हैं। इससे ग्राहकों के लिए अपनी आवश्यकता की वस्तुओं को खरीदना सुविधाजनक होता है। फुटकर दुकानों के नहीं होने से उपभोक्ताओं को इस प्रकार की क्रय की सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकेगी। 

4. चयन के पर्याप्त अवसर नहीं प्राप्त होना-फुटकर विक्रेता विभिन्न उत्पादकों के विभिन्न उत्पादों का संग्रह करके देखते हैं। ग्राहकों को वस्तु बेचते समय उनके समक्ष कई विकल्प प्रस्तुत करते हैं। इस प्रकार उपभोक्ताओं को चयन के पर्याप्त अवसर मिल जाते हैं। फुटकर दुकानों के नहीं होने से उपभोक्ताओं को वस्तुओं के चयन के भी पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं हो सकेंगे। 

5. विक्रयोपरान्त सेवाएँ उपलब्ध नहीं-फुटकर विक्रेता घर पर सुपुर्दगी, अतिरिक्त पुों की आपूर्ति एवं ग्राहकों की ओर ध्यान देना आदि विक्रय के पश्चात् की सेवाएं प्रदान करते हैं । ग्राहक दोबारा माल खरीदने के लिए आये, इस हेतु इस कारक की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। फुटकर दुकानों के नहीं होने से उपभोक्ताओं को विक्रयोपरान्त सेवाएँ उपलब्ध होने में भी कठिनाई होगी। 

6. उधार की सुविध वधा नहीं-फटकर विक्रेता या फटकर दकानें अपने नियमित ग्राहकों को उधार की भी सविधा प्रदान करते हैं। इससे उपभोक्ता अधिक खरीददारी कर सकते हैं। फुटकर दुकानों के नहीं होने से उपभोक्ताओं को उधार की सुविधा भी मिलने में कठिनाई होगी। 

प्रश्न 5. 
डाक आदेश गृहों की उपयोगिता का वर्णन कीजिए। इनके द्वारा किस प्रकार की वस्तुएँ दी जाती हैं? स्पष्ट कीजिए। 
उत्तर: 
डाक आदेश गृहों की उपयोगिता 
डाक आदेश गृहों की उपयोगिता निम्न प्रकार से स्पष्ट की जा सकती है- 
1. सीमित पूँजी की आवश्यकता-डाक द्वारा व्यापार में भवन तथा अन्य आधारगत ढाँचे पर भारी खर्चा करने की आवश्यकता नहीं होती है। इसीलिए इस प्रकार के व्यापार में तुलनात्मक रूप से कम पूँजी की आवश्यकता से प्रारंभ किया जा सकता है। 

2. सुविधा-डाक द्वारा व्यापार पद्धति में वस्तुओं की ग्राहकों के घर पर ही सुपुर्दगी कर दी जाती है। इसलिए इससे ग्राहकों द्वारा वस्तुओं का क्रय करना आसान हो जाता है। 

3. विस्तृत क्षेत्र-इस पद्धति में हर उन स्थानों पर माल भेजा जा सकता है, जहाँ डाक सेवाएँ उपलब्ध हैं। इस प्रकार से डाक द्वारा पूरे देश में बड़ी संख्या में लोगों को माल बेचा जा सकता है। जिससे व्यवसाय का क्षेत्र अत्यधिक विस्तृत हो जाता है। 

4. मध्यस्थों की समाप्ति-डाक द्वारा व्यापार का सबसे बड़ा फायदा यही है कि इसमें विक्रेता एवं क्रेता के बीच से अनावश्यक मध्यस्थ समाप्त हो जाते हैं। इससे ग्राहकों को भी सस्ते मूल्य पर वस्तुएँ उपलब्ध हो जाती हैं। निर्माताओं को भी अनावश्यक ही मध्यस्थों आदि को कमीशन आदि का भुगतान नहीं करना पड़ता है। इससे क्रेता एवं विक्रेता दोनों की बचत होती है। 

5. अशोध्य ऋण सम्भव नहीं-डाक द्वारा ग्राहकों को माल उधार नहीं बेचा जाता है। इसलिए ग्राहकों के द्वारा माल का भुगतान करने से अशोध्य ऋणों की सम्भावना नहीं रहती है। 

डाक द्वारा व्यापार की वस्तुएँ
डाक द्वारा व्यापार सभी प्रकार के उत्पादों के लिए उपयुक्त नहीं रहता है। उदाहरणार्थ, जो वस्तुएँ शीघ्र नष्ट होने वाली हों अथवा वजन में भारी हैं तथा जिन्हें सरलता से उठाना और रखना संभव नहीं है, का डाक द्वारा व्यापार नहीं हो सकता है। डाक द्वारा व्यापार केवल निम्नलिखित वस्तुओं का ही हो सकता है-

  • वे वस्तुएँ जिनका श्रेणीकरण एवं मानकीकरण हो सकता है। 
  • ऐसी वस्तुएँ जिन्हें कम लागत पर एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है। 
  • ऐसी वस्तुएँ जिनकी बाजार में माँग है। 
  • ऐसी वस्तुएँ जो पूरे वर्ष बड़ी मात्रा में उपलब्ध हैं। 
  • ऐसी वस्तुएँ जिनमें बाजार में न्यूनतम प्रतियोगिता है। 
  • ऐसी वस्तुएँ जिनका चित्र आदि के द्वारा वर्णन किया जा सकता है। 

यहाँ यह ध्यान देने योग्य बात है कि डाक द्वारा व्यापार तभी सफलतापूर्वक चलाया जा सकता है कि जबकि शिक्षा का पर्याप्त प्रसार हो। क्योंकि शिक्षित लोगों तक ही विज्ञापन एवं अन्य प्रकार के लिखित सम्प्रेषण के माध्यम से पहुँचा जा सकता है। 

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