Chapter- 4 The Rattrap

By- Selma Lagerlof

(Lesson with Vocabulary & Hindi Translation)

Once upon a time………..around the bait. (Page 77)

Once upon a time there was a man who went around selling small rattraps of wire. He made them himself at odd moments, from the material he got by begging in the stores or at the big farms. But even so, the business was not especially profitable, so he had to resort to both begging and petty thievery to keep body and soul together. Even so, his clothes were in rags, his cheeks were sunken, and hunger gleamed in his eyes.

No one can imagine how sad and monotonous life can appear to such a vagabond, who plods along the road, left to his own meditations. But one day this man had fallen into a line of thought, which really seemed to him entertaining. He had naturally been thinking of his rattraps when suddenly he was struck by the idea that the whole world about him — the whole world with its lands and seas, its cities and villages — was nothing but a big rattrap. It had never existed for any other purpose than to set baits for people. It offered riches and joys, shelter and food, heat and clothing, exactly as the rattrap offered cheese and pork, and as soon as anyone let himself be tempted to touch the bait, it closed in on him, and then everything came to an end.

The world had, of course, never been very kind to him, so it gave him unwonted joy to think ill of it in this way. It became a cherished pastime of his, during many dreary ploddings, to think of people he knew who had let themselves be caught in the dangerous snare, and of others who were still circling around the bait.

कठिन शब्दार्थ-Rattraps (रैटट्रेप्स) = चूहेदानियाँ। resort to (रिजोर्ट टू) = सहारा लेना। thievery (थीवरि) = चोरी। rags (रैग्ज) = चिथड़े। sunken (संकन) = अन्दर बैठे हुए। gleamed (ग्लीम्ड) = थी। monotonous (मॅनॉटॅनॅस) = नीरस, उबाऊ। vagabond (वैगॅबॉन्ड) = घुमक्कड़ व्यक्ति, गृह हीन। plods (प्लॉड्ज) = थका हुआ चलता है। meditations (मेडिटेशन्ज) = चिन्तन, विचार। line of thought (लाइन ऑफ थॉट) = चिन्तन-धारा, सोचने का तरीका। struck (स्ट्रक) = दिमाग में आया। baits (बेट्स) = ललचाने के लिए रखा जाने वाला भोजन आदि चारा | pork (पोर्क) = सूअर का माँस। tempted (टेम्प्टिड) = लालच में पड़ा। unwanted (अन्वॉन्टिड) = अस्वाभाविक। cherished (चेरिश्ट) = चहेता, प्रिय। pastime (पास्टाइम) = मनोरंजन | dreary (ड्रीअरि) = नीरस snare (स्नेअ(र)) = फंदा, जाल।

हिन्दी अनुवादएक समय एक आदमी था जो छोटी-छोटी तारों से बनी चूहेदानियाँ बेचता हुआ घूमता-फिरता था। वह इन्हें स्वयं इच्छानुसार कभी भी बना लेता था। इन्हें वह दुकानों तथा बड़े फार्मों से माँग कर लायी गयी सामग्री से तैयार करता था। लेकिन फिर भी यह काम बहुत फायदे का नहीं था, इसलिए उसे भिक्षावृत्ति एवं छोटी-मोटी चोरी का सहारा लेना पड़ता था ताकि वह स्वयं को जीवित रख सके। फिर भी उसके कपड़े चिथड़ों के रूप में थे, उसके गाल अन्दर बैठे हुए थे तथा भूख उसकी आंखों से झाँकती थी।

कोई भी कल्पना नहीं कर सकता कि ऐसे घुमक्कड व्यक्ति के लिए जीवन कितना नीरस एवं द:ख भरा प्रतीत हो सकता है जो सड़कों के किनारे थके हुए कदमों से चलता रहता है और अपने ही चिन्तन में खोया रहता है। लेकिन एक दिन यह व्यक्ति एक ऐसी चिन्तनधारा में पड़ गया था जो उसे वास्तव में मजेदार लगी। स्वाभाविक रूप से वह अपनी चूहेदानियों के बारे में सोच रहा था कि अचानक उसके दिमाग में एक विचार आया कि उसके चारों ओर की सारी दुनिया सारी दुनिया जिसमें इसकी जमीनें तथा समुद्र, इसके शहर एवं गाँव शामिल हैं—एक बड़ी चूहेदानी के अतिरिक्त कुछ नहीं थी। यह दुनिया किसी और उद्देश्य के लिए नहीं थी, सिवाय लोगों को ललचाने के लिए (फँसाने के लिए) चारा डालने के। यह लोगों को धन-दौलत एवं खुशियाँ, घर एवं भोजन, गर्माहट एवं कपड़े आदि प्रस्तुत करती थी, ठीक उसी तरह जैसे चूहेदानी चूहों को चीज एवं सूअर के माँस प्रस्तुत करती है और ज्यों ही कोई अपने-आप को ललचाये जाने तथा फँसाने के लिए रखी गयी सामग्री को छूने की इजाजत देता था, तो दुनिया-रूपी चूहेदानी बन्द हो जाती थी और फिर सबकुछ समाप्त हो जाता था।

यह दुनिया उसके लिए कभी भी बहुत दयालु नहीं रही थी, इसलिए इस तरह दुनिया के बारे में बुरा सोच कर उसे अस्वाभाविक आनन्द मिलता था। यह उसके लिए एक प्रिय मनोरंजन बन गया था, कई नीरस, थकाऊ पद-यात्राओं के दौरान, उन लोगों के बारे में सोचना जिन्हें वह जानता था, जिन्होंने स्वयं को खतरनाक फंदे में फँसने दिया तथा अन्य लोगों के बारे में सोचना, जो ललचाने वाले भोजन (चारे) के चारों ओर अभी भी चक्कर लगा रहे थे।

One dark evening……………………..its place and went away. (Pages 77-78)

One dark evening as he was trudging along the road he caught sight of a little gray cottage by the roadside, and he knocked on the door to ask shelter for the night. Nor was he refused. Instead of the sour faces which ordinarily met him, the owner, who was an old man without wife or child, was happy to get someone to talk to in his loneliness. Immediately he put the porridge pot on the fire and gave him supper; then he carved off such a big slice from his tobacco roll that it was enough both for the stranger’s pipe and his own. Finally he got out an old pack of cards and played ‘mjolis’ with his guest until bedtime.

The old man was just as generous with his confidences as with his porridge and tobacco. The guest was informed at once that in his days of prosperity his host had been a crofter at Ramsjo Ironworks and had worked on the land. Now that he was no longer able to do day labour, it was his cow which supported him. Yes, that bossy was extraordinary. She could give milk for the creamery every day, and last month he had received all of thirty kronor in payment.

The stranger must have seemed incredulous, for the old man got up and went to the window, took down a leather pouch which hung on a nail in the very window frame, and picked out three wrinkled ten-kronor bills. These he held up before the eyes of his guest, nodding knowingly, and then stuffed them back into the pouch.

The next day both men got up in good season. The crofter was in a hurry to milk his cow, and the other man probably thought he should not stay in bed when the head of the house had gotten up. They left the cottage at the same time. The crofter locked the door and put the key in his pocket. The man with the rattraps said good bye and thank you, and thereupon each went his own way.

But half an hour later the rattrap peddler stood again before the door. He did not try to get in, however. He only went up to the window, smashed a pane, stuck in his hand, and got hold of the pouch with the thirty kronor. He took the money and thrust it into his own pocket. Then he hung the leather pouch very carefully back in its place and went away.

कठिन शब्दार्थ : sour (साउअ(र)) = कडुवाहट भरे, अप्रसन्न। porridge (पॉरिज) = दलिया। carved off (कार्ल्ड ऑफ) = काटी। slice (स्लाइस) = टुकड़ा। confidences (कॉन्फिडेन्सिज) = गुप्त भेद। crofter (क्रॉफ्टं(र)) = बाड़े वाला, छोटा किसान। bossy (बॉसी) = तगड़ी (यहाँ गाय के लिए कहा है।) | extraordinary (इकस्ट्रोडरि) = असाधारण। creamery (क्रीमॅरि) = मक्खन-शाला। incredulous (इनक्रेड्युलॅस) = अविश्वसनीय। wrinkled (रिंकल्ड) = सलवटें पड़े हुए। nodding (नॉडिंग) = सिर हिलाते हुए। in good season (इन गुड सीजन) = समय पर जल्दी। peddler (पेडलॅ(र)) = फेरी वाला। smashed (स्मैश्ट) = तोड़ दिया।

हिन्दी अनुवाद-एक अंधेरी संध्या को जब वह सड़क के किनारे गिरते-पड़ते जा रहा था तो उसकी नजर सड़क के किनारे स्थित एक छोटी-सी मटमैले रंग की झोंपड़ी पर पड़ी और उसने इसके दरवाजे पर दस्तक दी ताकि रात-भर के लिए शरण माँग सके। उसे इनकार नहीं किया गया। बजाय कड़वाहट भरे चेहरों के, जो सामान्यतया उसे दिखाई देते थे, इस झोंपड़ी का मालिक, जो एक वृद्ध व्यक्ति था, बिना पत्नी अथवा बच्चे के, वह अपने अकेलेपन में बातचीत करने हेतु किसी व्यक्ति को पाकर प्रसन्न हुआ। उसने तुरन्त आग पर दलिया चढ़ा दिया और उसे शाम का भोजन दिया। फिर उसने अपने. तम्बाकू के पिण्ड से इतना बड़ा टुकड़ा काटा कि यह अजनबी तथा उसकी स्वयं की चिलम के लिए पर्याप्त था। अन्त में उसने ताश की एक पुरानी गड्डी निकाली और अपने मेहमान के साथ सो जाने के समय तक ‘म्जोलिस’ नामक खेल खेलता रहा।

वृद्ध व्यक्ति अपनी गोपनीय बातों में भी उतना ही उदार था जितना तम्बाकू एवं दलिये के मामले में था। मेहमान को तुरन्त बता दिया गया कि समृद्धि के दिनों में उसका मेजबान (वृद्ध व्यक्ति) रेम्सजो आइरन बाड़े वाला था और जमीन पर काम कर चुका था। अब जब वह दिन की मेहनत करने में समर्थ नहीं रहा तो उसकी गाय ही उसका सहारा थी। हाँ, वह तगडी गाय असाधारण थी। वह रोजाना में भेजने हेतु दूध देती थी और पिछले महीने वृद्ध व्यक्ति ने 30 क्रोनर की रकम दूध के बदले प्राप्त की थी।

अजनबी को अवश्य ही अविश्वसनीय लगा होगा, क्योंकि वृद्ध व्यक्ति उठा और खिड़की पर पहुँचा, एक चमड़े की थैली उतारी जो खिड़की के फ्रेम से एक खूटी पर लटकी हुई थी, और सलवटें पड़े हुए 10-10 क्रोनर के तीन नोट निकाले । इन नोटों को उसने मेहमान की आँखों के सामने पकड़े रखा, जानबूझ कर सिर हिलाते हुए तथा फिर इन्हें थैली में लूंस दिया।

अगले दिन दोनों व्यक्ति समय पर उठे। किसान गाय का दूध निकालने की जल्दी में था। दूसरे व्यक्ति ने सम्भवतया सोचा कि उसे बिस्तरों पर नहीं लेटे रहना चाहिए जब घर का मुखिया ही उठ चुका हो । वे दोनों झोंपड़ी से एक ही समय रवाना हुए। किसान ने दरवाजे पर ताला लगा दिया और अपनी जेब में चाबी रख ली। चूहेदानियों वाले व्यक्ति ने अलविदा कहा तथा धन्यवाद कहा, और फिर प्रत्येक अपने-अपने रास्ते चला गया।

लेकिन आधा घण्टे बाद चूहेदानियाँ बेचने वाला (फेरी वाला) पुनः दरवाजे पर आ खड़ा हुआ। फिर भी, उसने अन्दर घुसने की कोशिश नहीं की। वह केवल खिड़की पर पहुँचा, एक शीशा तोड़ा, हाथ अन्दर डाला और तीस क्रोनर वाली थैली को पकड़ा। उसने धन निकाला और इसे अपनी जेब में लूंस लिया। फिर उसने चमड़े की थैली को बहुत सावधानी के साथ इसके स्थान पर लटका दिया और चला गया।

As he walked along………………..against the brick-tiled roof. (Pages. 78-79)

As he walked along with the money in his pocket he felt quite pleased with his smartness. He realised, of course, that at first he dared not continue on the public highway, but must turn off the road, into the woods. During the first hours this caused him no difficulty. Later in the day it became worse, for it was a big and confusing forest which he had gotten into. He tried, to be sure, to walk in a definite direction, but the paths twisted back and forth so strangely! He walked and walked without coming to the end of the wood, and finally he realised that he had only been walking around in the same part of the forest. All at once he recalled his thoughts about the world and the rattrap. Now his own turn had come. He had let himself be fooled by a bait and had been caught. The whole forest, with its trunks and branches, its thickets and fallen logs, closed in upon him like an impenetrable prison from which he could never escape.

It was late in December. Darkness was already descending over the forest. This increased the danger, and increased also his gloom and despair. Finally he saw no way out, and he sank down on the ground, tired to death, thinking that his last moment had come. But just as he laid his head on the ground, he heard a sound—a hard regular thumping. There was no doubt as to what that was. He raised himself. ‘‘Those are the hammer strokes from an iron mill’’, he thought. ‘‘There must be people near by’’. He summoned all his strength, got up, and staggered in the direction of the sound.

The Ramsjo Ironworks, which are now closed down, were, not so long ago, a large plant, with smelter, rolling mill, and forge. In the summertime long lines of heavily loaded barges and scows slid down the canal, which led to a large inland lake, and in the wintertime the roads near the mill were black from all the coal dust which sifted down from the big charcoal crates.

During one of the long dark evenings just before Christmas, the master smith and his helper sat in the dark forge near the furnace waiting for the pig iron, which had been put in the fire, to be ready to put on the anvil. Every now and then one of them got up to stir the glowing mass with a long iron bar, returning in a few moments, dripping with perspiration, though, as was the custom, he wore nothing but a long shirt and a pair of wooden shoes.

All the time there were many sounds to be heard in the forge. The big bellows groaned and the burning coal cracked. The fire boy shovelled charcoal into the maw of the furnace with a great deal of clatter. Outside roared the waterfall, and a sharp north wind whipped the rain against the brick-tiled roof.

कठिन शब्दार्थ-Smartness (स्माटनॅस) = चातुर्य । twisted (ट्विस्टिड) = घूमते थे। recalled (रिकॉल्ड) = याद आया। trunks (ट्रंक्स) = पेड़ों के तने। thickets (थिकिट्स) = पेड़ों के झुरमुट। logs (लॉग्ज) = लढे । impenetrable (इमपेनिट्रॅबल) = अभेद्य। descending (डिसेंडिंग) = छा रही। gloom (ग्लूम) = निराशा। thumping (थम्पिंग) = ठोकने की आवाज। hammer strokes (हैमॅ(र) स्ट्रोक्स) = हथौड़े के धमाके । staggered (स्टेगॅड) = लड़खड़ाता चला। plant (प्लांट) = संयन्त्र, कारखाना । smelter (स्मेल्ट(र)) = धातु पिघलाने का स्थान। rolling mill (रोलिंग मिल) = बेलने का स्थान। forge (फोज) = ढलाई भट्ठी, लौहखाना। barges (बाजिज) = मालवाहक नौकाएँ। scows (स्काउस) = पटेला, चपटे पेंदे वाली नावें। sifted down (सिफ्टिड डाउन) = छन कर गिरती थी। crates (क्रेट्स) = खाँचे। anvil (एनविल) = अहरन (लौह-खण्ड) | stir (स्टॅ(र)) = हिलाना । dripping (ड्रिपिंग) = बहते हुए। perspiration (पॅस्परेशन) = पसीना। bellows (बेलौज) = धौंकनी । groaned (ग्रोन्ड) = कराहती थी। shovelled (शवल्ड) = झोंकता था। maw (मो) = पेट। clatter (क्लेटर) = खंड़खड़ाहट। whipped (व्हिप्ट) = कोड़े मारती थी।

हिन्दी अनुवादजब वह अपनी जेब में पैसा लेकर चला तो वह अपने चातुर्य पर बड़ा प्रसन्न हुआ। उसे महसूस हुआ कि शुरू में तो वह सार्वजनिक रास्ते पर चलने का साहस नहीं कर सकता था, बल्कि उसे सड़क से हटना होगा और जंगल में जाना होगा। शुरू के घंटों में तो इससे उसे कोई परेशानी नहीं हुई। दिन में देर से स्थिति बिगड़ गयी क्योंकि यह एक बड़ा एवं उलझन में डाल देने वाला जंगल था जिसमें वह प्रवेश कर गया था। उसने आश्वस्त होने के लिए एक निश्चित दिशा में चलने का प्रयास किया किन्तु रास्ते पीछे एवं आगे की और अजीब प्रकार से घमते थे! वह चलता रहा और चलता रहा. बिना जंगल के अन्त पर पहुँचे और अन्त में वह जान गया कि वह जंगल के एक ही हिस्से में चक्कर लगा रहा था। शीघ्र ही उसे दुनिया तथा चूहेदानी के बारे में अपने विचार याद आ गये। अब उसी की बारी आ गयी थी। उसने स्वयं को एक चारे के द्वारा मर्ख बन जाने दिया था और पकडा गया था। सारा जंगल इसके तनों एवं शाखाओं के साथ, इसके झुरमुटों तथा गिरे हुए लट्ठों के साथ, उस पर बन्द हो चुका था, एक अभेद्य जेल की भाँति जिससे वह कभी बच कर नहीं जा सकता था।

यह दिसम्बर का बाद वाला भाग था। अन्धेरा अब पहले से ही जंगल पर छाने लगा था। इसने खतरे को बढ़ा दिया था और उसकी उदासी एवं निराशा को भी। अन्त में उसे कोई रास्ता नहीं दिखाई दिया, और वह जमीन पर लुढ़क गया, थक कर मरे समान, यह सोच कर कि उसका अन्तिम क्षण आ पहुँचा था। लेकिन ज्यों ही उसने अपना सिर जमीन पर रखा कि उसने एक आवाज सुनी—एक जोरदार नियमित ठक-ठक की आवाज। इसमें सन्देह नहीं था कि वह क्या आवाज थी। उसने स्वयं को उठाया। “वे किसी लोहे के कारखाने में हथौड़ों की आवाज है”, उसने सोचा। “आस-पास अवश्य लोग होंगे।” उसने अपनी सारी शक्ति बटोरी, उठा और ध्वनि की दिशा में लड़खड़ाता हुआ चल दिया।

रेम्सजो आइरन वर्क्स, जो अब बन्द हो चुका है वह थोड़े समय पहले ही एक बड़ा कारखाना था जिसमें प्रगालक, बेलनी मिल तथा ढलाई भट्ठी थी। गर्मियों में ऊपर तक भरी चपटे तल की मालवाहक नावें, लम्बी कतारों में, नहर में तैर कर जाती थीं जो एक बड़ी अन्त:स्थलीय झील की ओर ले जाती थीं। और सर्दियों में कारखाने के निकट की सड़कें कोयले की धूल से काली हो जाती थीं जो कोयले के बड़े-बड़े खाँचों से छन कर गिरती थी।

क्रिसमस से ठीक पहले की लम्बी अंधेरी संध्याओं में से एक संध्या को मुख्य लोहार और उसका सहायक भट्ठी के पास लोहारखाने में बैठे हुए थे और पिग आइरन (कच्चा लोहा) जिसे आग में डाल दिया गया था, के अहरन पर पीटे जाने योग्य होने का इन्तजार कर रहे थे। थोड़ी-थोड़ी देर में उनमें से एक उठता और पिग आइरन के चमकते ढेर को लोहे की एक लम्बी छड़ से हिला देता, कुछ क्षणों में वापस लौट आता, पसीने से भीगा हुआ, यद्यपि जैसी कि प्रथा थी, वह एक लम्बी कमीज तथा लकड़ी के जूतों के सिवा कुछ नहीं पहनता था।

पूरे समय लौहखाने में कई ध्वनियाँ सुनी जाती थीं। बड़ी धौंकनी कराहती थी तथा जलता हुआ कोयला कड़कड़ाता था। आग जलाने वाला लड़का भट्ठी के पेट में कोयला झोकता था काफी खड़खड़ाहट क के साथ । बाहर जल-प्रपात दहाड़ता था और एक तीखी उत्तरी हवा बरसात को ईंटों से बनी छत पर कोड़े की तरह मारती थी।

It was probably on account……………..come home with me.” (Pages 79-80)

It was probably on account of all this noise that the blacksmith did not notice that a man had opened the gate and entered the forge, until he stood close up to the furnace.

Surely it was nothing unusual for poor vagabonds without any better shelter for the night to be attracted to the forge by the glow of light which escaped through the sooty panes, and to come in to warm themselves in front of the fire. The blacksmiths glanced only casually and indifferently at the intruder. He looked the way people of his type usually did, with a long beard, dirty, ragged, and with a bunch of rattraps dangling on his chest.

He asked permission to stay, and the master blacksmith nodded a haughty consent without honouring him with a single word.

The tramp did not say anything, either. He had not come there to talk but only to warm himself and sleep.

In those days the Ramsjo iron mill was owned by a very prominent ironmaster, whose greatest ambition was to ship out good iron to the market. He watched both night and day to see that the work was done as well as possible, and at this very moment he came into the forge on one of his nightly rounds of inspection.

Naturally the first thing he saw was the tall ragamuffin who had eased his way so close to the furnace that steam rose from his wet rags. The ironmaster did not follow the example of the blacksmiths, who had hardly deigned to look at the stranger. He walked close up to him, looked him over very carefully, then tore off his slouch hat to get a better view of his face.

‘But of course, it is you, Nils Olof!’’ he said. “How you do look!”

The man with the rattraps had never before seen the ironmaster at Ramsjo and did not even know what his name was. But it occurred to him that if the fine gentleman thought he was an old acquaintance, he might perhaps throw him a couple of kronor. Therefore he did not want to undeceive him all at once.

‘‘Yes, God knows things have gone downhill with me’’, he said.

‘You should not have resigned from the regiment’’, said the ironmaster. ‘‘That was the mistake. If only I had still been in the service at the time, it never would have happened. Well, now of course you will come home with me.’’

कठिन शब्दार्थ-Sooty panes (सूटी पेन्ज) = कालिख लगे शीशे। casually (केशुअलि) = लापरवाही से। intruder (इन्ट्रडॅ(र)) = घुसपैठिया। dangling (डैन्गलिंग) = झूलते हुए। haughty (होटि) = घमण्डभरी। consent (कॅनसेन्ट) = सहमति। prominent (प्रॉमिनॅन्ट) = प्रसिद्धि प्राप्त, प्रमुख। ragamuffin (रैगॅमफिन) = फटेहाल व्यक्ति। deigned (डेन्ड) = मानते थे, देते थे। slouch (स्लाउच) = झुका हुआ। undeceive (अनडिसीव) = भ्रम दूर करना । downhill (डाउनहिल) = दुर्गति की ओर।

हिन्दी अनुवाद-सम्भवतया इसी शोर के कारण लोहार ने नहीं देखा कि एक आदमी ने दरवाजा खोला था और लौहखाने में प्रवेश कर लिया था, जब तक कि वह आदमी भट्ठी के निकट खड़ा नहीं हो गया।

निश्चित ही गरीब घुमक्कड़ों के लिए जिनके पास रात के लिए कोई अच्छी जगह नहीं थी यह कोई असाधारण बात नहीं थी कि वे लौहखाने की ओर आकृष्ट हों, जिसकी रोशनी की चमक कालिमा लगे शीशों में से बाहर निकलती थी और आग के समक्ष स्वयं को गर्म करने हेतु वे इसमें प्रवेश कर जायें। लोहार लोगों ने केवल लापरवाही से एवं उदासीनता से इस घुसपैठिए की ओर नजर डाली। वह वैसा ही दिखाई देता था जैसे उसके जैसे लोग सामान्यतया दिखाई देते थे, लम्बी दाढ़ी वाले, गंदे, फटेहाल और उसकी छाती पर झूलती हुई चूहेदानियों का एक गुच्छा था।

उसने ठहरने की इजाजत माँगी, तथा मुख्य लोहार ने घमण्डभरी सहमति सिर हिलाकर दे दी, उसके सम्मान में एक भी शब्द बोले बिना।

घुमक्कड़ ने भी कुछ भी नहीं कहा। वह वहाँ बात करने नहीं आया था बल्कि स्वयं को गर्म करने एवं नींद लेने आया था।

उन दिनों रेम्सजो आइरन कारखाने का मालिक एक बहुत प्रसिद्धि प्राप्त लौहपति था जिसकी सबसे बड़ी महत्त्वाकांक्षा थी बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाला लोहा जहाजों में भेजना। वह दिन एवं रात यह देखता था कि काम जहाँ तक सम्भव हो बढ़िया हो और ठीक इस समय वह रात के दौरे पर निरीक्षण करने कारखाने पर आया था।

स्वाभाविक रूप से पहली चीज जो उसने देखी वह थी, लम्बा फटेहाल व्यक्ति जो भट्ठी के इतने निकट आ पहुँचा था कि उसके गीले चिथड़ों से वाष्प निकलती थी। लौहपति ने लोहारों के उदाहरण का अनुसरण नहीं किया जिन्होंने मुश्किल से ही अजनबी की ओर देखना स्वीकार किया था। वह उसके पास गया, उसे सावधानीपूर्वक निहारा, फिर उसने अपना झुका हुआ टोप हटाया ताकि अजनबी के चेहरे को बेहतर तरीके से देख सके।

लेकिन यह तो तुम हो, निल्स ओलोफ!” वह बोला। “तुम कैसे दिखाई दे रहे हो!”

चूहेदानियों वाले व्यक्ति ने उस लौहपति को पहले कभी रेम्सजो कारखाने पर नहीं देखा था और वह यह भी नहीं जानता था कि उसका नाम क्या था। लेकिन उसके दिमाग में आया कि अगर यह बढ़िया सज्जन व्यक्ति यह सोचता था कि वह (अजनबी) कोई पुराना परिचित था, तो वह उसको कुछ क्रोनर की राशि दे सकता था। इसलिए उसने यह नहीं चाहा कि उसका भ्रम तुरन्त दूर कर दिया जाये।

“हाँ, ईश्वर जानता है कि मेरे साथ सब कुछ बड़ा गड़बड़ हुआ है”, वह बोला।

“तुम्हें रेजिमेंट से इस्तीफा नहीं देना चाहिए था”, लौहपति ने कहा। “वह एक गलती थी। अगर मैं उस समय भी सेवा में होता, तो ऐसा कभी न हुआ होता। ठीक है, अब तुम मेरे साथ मेरे घर चलोगे।”

To go along up to……………………said his last word. (Page 80)

To go along up to the manor house and be received by the owner like an old regimental comrade — that, however, did not please the tramp.

‘No, I couldn’t think of it!’’ he said, looking quite alarmed.

He thought of the thirty kronor. To go up to the manor house would be like throwing himself voluntarily into the lion’s den. He only wanted a chance to sleep here in the forge and then sneak away as inconspicuously as possible. The ironmaster assumed that he felt embarrassed because of his miserable clothing.

‘‘Please don’t think that I have such a fine home that you cannot show yourself there’’, He said… ‘‘Elizabeth is dead, as you may already have heard. My boys are abroad, and there is no one at home except my oldest daughter and myself. We were just saying that it was too bad we didn’t have any company for Christmas. Now come along with me and help us make the Christmas food disappear a little faster.”

But the stranger said no, and no, and again no, and the ironmaster saw that he must give in.

‘It looks as though Captain von Stahle preferred to stay with you tonight, Stjernstrom’’, he said to the master blacksmith, and turned on his heel.

But he laughed to himself as he went away, and the blacksmith, who knew him, understood very well that he had not said his last word.

कठिन शब्दार्थManor house (मैनॅ(र) हाउस) = सामंत का घर। alarmed (अलाम्ड) = भयभीत। voluntarily (वॉलॅनट्रॅलि) = स्वेच्छा से। lion’s den (लाइअन्ज डेन) = शेर की गुफा। sneak away (स्नीक अवे) = चुपचाप चले जाना। inconspicuously (इन्कॅनस्पिक्युअसलि) = बिना किसी के देखे। assumed (अस्यूम्ड) = माना। embarrassed (इमबैरेंस्ट) = परेशान, शर्मिन्दा। miserable (मिजरॅबल) = दयनीय । give in (गिव इन) = समर्पण करना। turmed on his heel (टॅन्ड ऑन हिज हील) = एडी पर घूम गया। last word (लास्ट वॅड) = अन्तिम शब्द।

हिन्दी अनुवाद : सामंत के घर जाना तथा मालिक के द्वारा पुराने रेजीमेन्ट के साथी के रूप में स्वागत करवाना—यह बात घुमक्कड़ को नहीं झुंची।

“नहीं, मैं ऐसा नहीं सोच सकता!” वह बोला, बिल्कुल भयभीत दिखाई देता हुआ।

उसने 30 क्रोनर के बारे में सोचा । सामंत के घर जाना स्वयं को शेर की गुफा में स्वेच्छा से फेंक देना होगा। वह तो केवल लौहखाने में सोने का अवसर चाहता था और चुपचाप बिना किसी के द्वारा देखे हुए चले जाना चाहता था।

लौहपति ने यह माना कि वह उसके दयनीय वस्त्रों के कारण असमंजस में महसूस कर रहा था। “कृपया यह मत सोचो कि मेरे पास इतना बढ़िया घर है कि तुम अपने-आप को वहाँ प्रस्तुत नहीं कर सकते।” वह बोला—’एलिजाबेथ मर चुकी है, जैसा कि तुम पहले ही सुन चुके होंगे। मेरे लड़के विदेश में हैं और घर पर मेरी सबसे बड़ी पुत्री एवं मेरे सिवा और कोई नहीं है। हम यही कह रहे थे कि यह बड़ी खराब बात थी कि क्रिसमस के त्यौहार पर हमारे पास कोई नहीं था। अब मेरे साथ आओ और क्रिसमस के भोजन को थोड़ा जल्दी गायब करने में हमारी मदद करो।” 16 लेकिन अजनबी ने नहीं और नहीं, और पुनः नहीं कहा तथा लौहपति ने देखा कि उसे समर्पण ही करना पड़ेगा। “ऐसा लगता है कि कैप्टन वान स्टाहले आज रात तुम्हारे साथ रहना चाहता है, स्टजनस्ट्रम”, उसने मुख्य लोहार से कहा, और अपनी एड़ी पर घूम गया।। ARE परन्तु वह जाते-जाते हँसने लगा, और लोहार जो उसकी बात समझता था, अच्छी तरह जान गया कि उसने अपने अन्तिम शब्द नहीं बोले थे।

It was not more than……………………..never get out of it.” (Pages 80-81)

It was not more than half an hour before they heard the sound of carriage wheels outside the forge, and a new guest came in, but this time it was not the ironmaster. He had sent his daughter, apparently hoping that she would have better powers of persuasion than he himself.

She entered, followed by a valet, carrying on his arm a big fur coat. She was not at all pretty, but seemed modest and quite shy. In the forge everything was just as it had been earlier in the evening. The master blacksmith and his apprentice still sat on their bench, and iron and charcoal still glowed in the furnace. The stranger had stretched himself out on the floor and lay with a piece of pig iron under his head and his hat pulled down over his eyes. As soon as the young girl caught sight of him, she went up and lifted his hat. The man was evidently used to sleeping with one eye open. He jumped up abruptly and seemed to be quite frightened.

‘‘My name is Edla Willmansson,’’ said the young girl. ‘‘My father came home and said that you wanted to sleep here in the forge tonight, and then I asked permission to come and bring you home to us. I am so sorry, Captain, that you are having such a hard time.’’

She looked at him compassionately, with her heavy eyes, and then she noticed that the man was afraid. ‘‘Either he has stolen something or else he has escaped from, jail’’, she thought, and added quickly, “You may be sure, Captain, that you will be allowed to leave us just as freely as you came. Only please stay with us over Christmas Eve.’’

She said this in such a friendly manner that the rattrap peddler must have felt confidence in her.

‘It would never have occurred to me that you would bother with me yourself, miss,’’ he said. ‘’I will come at once.’’

He accepted the fur coat, which the valet handed him with a deep bow, threw it over his rags, and followed the young lady out to the carriage, without granting the astonished blacksmiths so much as a glance.

But while he was riding up to the manor house he had evil forebodings.

‘‘Why the devil did I take that fellow’s money?’’ he thought. ‘‘Now I am sitting in the trap and will never get out of it.’’

कठिन शब्दार्थApparently (अपैरॅन्टलि) = स्पष्ट रूप से। persuasion (पॅस्वेशन) = मना लेने की कला | valet (वैले/वैलिट) = व्यक्तिगत नौकर। fur (फॅ(र)) = समूर, बालों सहित जानवर की खाल। modest (मॉडिस्ट) = विनम्र, शालीन। apprentice (अप्रेन्टिस) = कला सीखने वाला, शागिर्द। evidently (एविडेंन्टलि) = प्रत्यक्ष रूप से। abruptly (अब्रप्टलि) = अचानक, फुर्ती से। compassionately (कॅमपैशनॅटलि) = सहानुभूतिपूर्वक। confidence (कॉन्फिडेंस) = भरोसा।

हिन्दी अनुवादआधा घण्टे से अधिक समय नहीं हुआ था कि उन्होंने घोड़ा-गाड़ी के पहियों की वाज लौहखाने के बाहर सनी और एक नया मेहमान अन्दर आया, लेकिन इस बार यह लौहपति नहीं था। उसने अपनी पुत्री को भेजा था, स्पष्टतः यह सोचकर कि मना लेने की बेहतर शक्तियाँ उसके पास होंगी।

उसने प्रवेश किया, उसके पीछे उसका नौकर था। वह उसकी भुजा पर एक समूर का कोट उठगे हुए था। वह बिल्कुल भी सुन्दर नहीं थी, लेकिन वह शालीन एवं संकोची दिखाई देती थी। लौहखाने में सब कुछ वैसा ही था जैसा पहले शाम को था। मुख्य लोहार तथा उसका प्रशिक्षु अभी भी अपनी बेंच पर बैठे थे तथा भट्ठी में लोहा एवं कोयला अभी भी चमक रहे थे। अजनबी ने स्वयं को फर्श पर पसार लिया था और सिर के नीचे कच्चे लोहे का एक टुकड़ा रख लिया था और उसका टोप उसकी आँखों पर खींच लिया था। ज्योंही युवती ने उसको देखा, वह गयी और उसके टोप को उठा लिया। वह व्यक्ति स्पष्ट रूप से एक आँख खोलकर सोने का आदी था। वह अचानक उछला और बिल्कुल डरा हुआ दिखाई दिया।

“मेरा नाम एडला विलमनसन है”, युवती ने कहा। “मेरे पिता घर आये और उन्होंने कहा कि तुम आज रात लौहखाने में सोना चाहते थे, और फिर मैंने इजाजत माँगी कि मैं आऊँ और तुम्हें अपने घर ले जाऊँ। मुझे बड़ा खेद है, कैप्टन, कि तुम ऐसा कठिन समय गुजार रहे हो।”

उसने अजनबी की ओर सहानुभूतिपूर्वक देखा, अपनी भारी आँखों से, और फिर उसने देखा कि वह व्यक्ति डरा हुआ था। “या तो उसने कोई चीज चुराई है अथवा वह जेल से बच निकला है”, उसने सोचा, और जल्दी से यह बात जोड़ दी, “आप आश्वस्त हो सकते हो, कैप्टन, कि आपको हमारे पास से उतने ही स्वतन्त्र रूप से चले जाने की अनुमति दे दी जायेगी जिस तरह आप आये थे। केवल क्रिसमस की पूर्व संध्या पर कृपया हमारे साथ ठहर जायें।”

उसने यह बात ऐसे मित्रतापूर्ण तरीके से कही कि चूहेदानियों को घूम-घूम कर बेचने वाले ने अवश्य उसमें विश्वास महसूस किया होगा।

ऐसा मेरे दिमाग में कभी नहीं आया कि आप मेरे लिए स्वयं को परेशान करेंगी, मिस” वह बोला। “मैं अभी चलता हूँ।”

उसने समूर के कोट को स्वीकार कर लिया, जिसे नौकर ने काफी झुककर उसे सौंपा था, उसने इसे अपने चिथडों पर पहन लिया तथा यवती के पीछे-पीछे बाहर घोडा-गाडी की ओर चल पडा। उसने आश्चर्यचकित लोहारों की ओर नजर तक डालने की भी कृपा नहीं की।

लेकिन जब वह सामंत के घर सवारी करता हुआ जा रहा था तो उसें अनिष्ट का पूर्वाभास हो रहा था।

आखिर मैंने उस व्यक्ति का पैसा क्यों चुरा लिया था?” उसने सोचा। “अब मैं फंदे में फंस गया हूँ और इससे कभी बाहर नहीं निकल पाऊँगा।”

The next day was …………………. an old acquaintance. (Page 81)

The next day was Christmas Eve, and when the ironmaster came into the dining room for breakfast, he probably thought with satisfaction of his old regimental comrade whom he had run across so unexpectedly.

First of all we must see to it that he gets a little flesh on his bones,” he said to his daughter, who was busy at the table. “And then we must see that he gets something else to do than to run around the country selling rattraps.”

“It is queer that things have gone downhill with him as badly as that,” said the daughter. “Last night I did not think there was anything about him to show that he had once been an educated man.”

“You must have patience, my little girl,” said the father. “As soon as he gets clean and dressed up, you will see something different. Last night he was naturally embarrassed. The tramp manners will fall away from him with the tramp clothes.”

Just as he said this the door opened and the stranger entered. Yes, now he was truly clean and well dressed. The valet had bathed him, cut his hair, and shaved him. Moreover he was dressed in a good-looking suit of clothes which belonged to the ironmaster. He wore a white shirt and a starched collar and whole shoes.

But although his guest was now so well groomed, the ironmaster did not seem pleased. He looked at him with puckered brow, and it was easy to understand that when he had seen the strange fellow in the uncertain reflection from the furnace he might have made a mistake, but that now, when he stood there in broad daylight, it was impossible to mistake him for an old acquaintance.

कठिन शब्दार्थ-Regimental comrade (रेजिमेंटल कॉमरेड) = सेना का साथी। run across (रन अक्रोस) = मिल गया था। unexpectedly (अनिकस्पेक्टिडलि) = अनायास, अचानक से। flesh (फ्लेश) = मांस। queer (क्विअर) = विचित्र | starched (स्टाच्ट) = कलफ लगायी हुई, कड़क। groomed (ग्रूम्ड) = बनाव श्रृंगार किया हुआ। pleased (प्लीज्ड) = प्रसन्न । puckered (पकॅड) = शिकन डाले, सलवटें पड़ी हुई। brow (बउ) = भौंह । uncertain (अनसॅटन) = अस्पष्ट। reflection (रिफ्लेक्शन) = रोशनी।

हिन्दी अनुवाद-अगले दिन क्रिसमस की पूर्व संध्या थी, और जब लौहपति नाश्ते के लिए भोज कक्ष में आया तो सम्भवतया उसने अपने पुराने सेना के साथी के बारे में सन्तुष्टि के साथ विचार किया जो उसे अचानक मिल गया था।

“सर्वप्रथम हमें यह देखना होगा कि वह अपनी हड्डियों पर थोड़ा मांस चढ़ा ले” उसने अपनी पुत्री से कहा जो टेबल पर भोजन जमाने में व्यस्त थी।”और फिर हमें यह भी देखना होगा कि उसके पास करने को कोई दूसरा काम हो बजाय गाँवों में घूम-घूम कर चूहेदानियाँ बेचते फिरने के।”

“यह बड़ी अजीब बात है कि उसके साथ सब कुछ इतना गड़बड़ हो गया है”, पुत्री ने कहा। “पिछली रात मैं नहीं सोचती थी कि उसके बारे में कोई भी बात ऐसी थी जिससे यह दिखाई दे कि वह कभी एक शिक्षित व्यक्ति रहा था।”

“तुम्हें धैर्य रखना होगा, मेरी छोटी-सी पुत्री”, पिता ने कहा। “ज्यों ही वह स्वच्छ एवं अच्छी तरह कपड़े पहन कर तैयार हो जायेगा, तो तुम उसे कुछ अलग ही पाओगी। पिछली रात स्वाभाविक रूप से वह संकोच में था। घुमक्कड़ों के तौर-तरीके उससे उसी तरह दूर हो जायेंगे जिस तरह घुमक्कड़ों के वस्त्र ।”

ज्यों ही उसने यह बात कही त्यों ही दरवाजा खुला और अजनबी ने प्रवेश किया। हाँ, अब वह वास्तव में स्वच्छ था और अच्छी तरह कपड़े पहने था। नौकर ने उसे नहलाया था, उसके बाल काटे थे और उसकी दाढ़ी बना दी थी। इसके अलावा उसने बढ़िया दिखने वाला सूट पहन रखा था जो लोहपति का था। वह एक सफेद कमीज पहने था एवं एक कलफ लगी कड़क कॉलर तथा साबुत जूते उसने पहन रखे थे।

लेकिन, यद्यपि उसका मेहमान अब इतना चुस्त-दुरुस्त बन गया था, लौहपति प्रसन्न नहीं दिखाई दे रहा था। उसने मेहमान की ओर भौंह पर शिकन (सलवट) के साथ देखा और यह समझ लेना आसान था कि

जब उसने दूर अजीब आदमी को भट्ठी की अनिश्चित (अस्पष्ट) रोशनी में देखा था तब उसने गलती कर दी थी, लेकिन अब जब वह (अजनबी) वहाँ दिन की रोशनी में खड़ा था, तो उसे एक पुराने परिचित के रूप में गलती से देखना असम्भव था।

“What does this mean?…………………….himself to oppose her. (Pages 81-82)

What does this mean?” he thundered.

The stranger made no attempt to dissimulate. He saw at once that the splendour had come to an end.

It is not my fault, sir,” he said. “I never pretended to be anything but a poor trader, and I pleaded and begged to be allowed to stay in the forge. But no harm has been done. At worst I can put on my rags again and go away”.

Well,” said the ironmaster, hesitating a little, “it was not quite honest, either. You must admit that, and I should not be surprised if the sheriff would like to have something to say in the matter.”

The tramp took a step forward and struck the table with his fist.

“Now I am going to tell you, Mr Ironmaster, how things are,” he said. “This whole world is nothing but a big rattrap. All the good things that are offered to you are nothing but cheese rinds and bits of pork, set out to drag a poor fellow into trouble. And if the sheriff comes now and locks me up for this, then you, Mr Ironmaster, must remember that a day may come when you yourself may want to get a big piece of pork, and then you will get caught in the trap.”

The ironmaster began to laugh.

“That was not so badly said, my good fellow. Perhaps we should let the sheriff alone on Christmas Eve. But now get out of here as fast as you can.”

But just as the man was opening the door, the daughter said, “I think he ought to stay with us today. I don’t want him to go.” And with that she went and closed the door.

What in the world are you doing?” said the father.

The daughter stood there quite embarrassed and hardly knew what to answer. That morning she had felt so happy when she thought how homelike and Christmassy she was going to make things for the poor hungry wretch. She could not get away from the idea all at once, and that was why she had interceded for the vagabond.

“I am thinking of this stranger here,” said the young girl. “He walks and walks the whole year long, and there is probably not a single place in the whole country where he is welcome and can feel at home. Wherever he turns he is chased away. Always he is afraid of being arrested and cross-examined. I should like to have him enjoy a day of peace with us here — just one in the whole year.”

The ironmaster mumbled something in his beard. He could not bring himself to oppose her

कठिन शब्दार्थ-Thundered (थंडॅड) = गरज। dissimulate (डिसिम्युलेट) = कपट करना, छि पाना। splendour (स्प्लेंड(र)) = शान-शौकत, महिमा। pretended (प्रिटेन्डिड) = बहाना किया। pleaded (प्लीडिड) = याचना की। sheriff (शेरिफ) = शासनाधिकारी। fist (फिस्ट) = मुक्का। rinds (राइन्ड्ज ) = छिलके। drag (ड्रैग) = ललचाना, खींचना। let alone (लेट अलोन) = रहने दें, छोड़ दें। interceded (इन्टॅसीडिड) = पक्ष लिया, बीच-बचाव किया। chased away (चेस्ट अवे) = भगा दिया जाता। cross-examined (क्रॉस-इग्जैमिन्ड) = जिरह की जाती। mumbled (मम्बल्ड) = बुदबुदाया।

हिन्दी अनुवाद-इसका क्या मतलब है?” वह गरजा।

अजनबी ने कपट करने का कोई प्रयास नहीं किया। उसने तुरन्त जान लिया कि शान-शौकत अब समाप्त हो चुकी थी।

“यह मेरा दोष नहीं है, श्रीमान्”, वह बोला, “मैंने कभी भी गरीब विक्रेता होने के अलावा कुछ और होने का बहाना नहीं किया और मैंने लौहखाने में ठहरने की इजाजत के लिए याचना की थी। लेकिन कोई भी हानि नहीं हुई है। बुरे से बुरा यह हो सकता है कि मैं अपने चिथड़े फिर से पहन लूँ और यहाँ से चला जाऊँ।”

“ठीक है”, लौहपति ने थोड़ा सकुचाते हुए कहा, “लेकिन यह बात पूरी तरह ईमानदारी की भी नहीं थी। तुम्हें यह स्वीकार करना ही होगा, और मुझे कोई आश्चर्य नहीं होगा अगर शासनाधिकारी इस बारे में कुछ कहना चाहें।”

घुमक्कड़ ने एक कदम आगे बढ़ाया और टेबल पर अपनी मुट्ठी को मारा।

“अब मैं आप को बताने जा रहा हूँ, लौहपति, कि असली बात क्या है”, वह बोला, “यह सारी दुनिया एक बड़ी चूहेदानी के अतिरिक्त कुछ नहीं है। आपको जिन अच्छी चीजों का प्रस्ताव दिया जाता है वे पनीर के छिलकों तथा मांस के टुकड़ों से अधिक कुछ नहीं होतीं जिन्हें किसी बेचारे आदमी को परेशानी में घसीट ले जाने को रखा जाता है। और अगर शासनाधिकारी अभी आ जाता है और मुझे इसके लिए जेल में बन्द कर देता है तो फिर आप, लौहपति, याद रखें कि एक दिन ऐसा आ सकता है जब आप स्वयं मांस का एक बड़ा टुकड़ा प्राप्त करना चाहें, और फिर आप उस फंदे में फंस जायें।”

लौहपति ने हँसना शुरू कर दिया।

“यह बात तुमने इतनी बुरी भी नहीं कही, भले आदमी। शायद क्रिसमस की पूर्व संध्या पर हम शासनाधिकारी की बात न करें। लेकिन अब यहाँ से जितना जल्दी तुम जा सकते हो चले जाओ।”

लेकिन जब वह व्यक्ति दरवाजा खोल ही रहा था, पुत्री ने कहा, “मैं सोचती हूँ कि आज उसे हमारे साथ ही ठहरना चाहिए। मैं नहीं चाहती कि वह चला जाये।” और इसके साथ ही वह गयी और दरवाजा बन्द कर दिया।

आखिर तुम कर क्या रही हो?” पिता ने कहा।

लड़की वहाँ अत्यधिक असमंजस में खड़ी रही और वह नहीं जानती थी कि क्या उत्तर दिया जाये। उस सुबह उसने यह सोचकर बड़ा प्रसन्न महसूस किया था कि वह उस गरीब, भूखे, दयनीय व्यक्ति के लिए सब कुछ कितना घर जैसा एवं क्रिसमस के अनुरूप बनाने जा रही थी। वह इस विचार से तुरन्त दूर न जा सकती थी और इसीलिए उसने इस घुमक्कड़ व्यक्ति के पक्ष में बीच-बचाव किया था।

“मैं यहाँ इस अजनबी के बारे में सोच रही हूँ”, उस युवती ने कहा, “वह पूरे साल चलता रहता है, और सम्भवतया पूरे देश में एक भी स्थान ऐसा नहीं है जहाँ उसका स्वागत हो और उसे घर जैसा लगे। वह जहाँ भी जाता है, उसे भगा दिया जाता है। वह हमेशा गिरफ्तारी से डरता रहता है और पूछताछ किए जाने से भयभीत रहता है। मैं चाहूँगी कि वह हमारे साथ शान्ति का एक दिन गुजार कर आनन्दित हो-पूरे वर्ष में केवल एक दिन।”

लौहपति अपनी दाढ़ी में ही कुछ बुदबुदाया। वह पुत्री का विरोध करने को तैयार न हो सका।

“It was all a mistake, …………………… boundless amazement. (Page 82)

“It was all a mistake, of course,” she continued. “But anyway I don’t think we ought to chase away a human being whom we have asked to come here, and to whom we have promised Christmas cheer.”

“You do preach worse than a parson,” said the ironmaster. “I only hope you won’t have to regret this.”

The young girl took the stranger by the hand and led him up to the table.

“Now sit down and eat,” she said, for she could see that her father had given in.

The man with the rattraps said not a word; he only sat down and helped himself to the food. Time after time he looked at the young girl who had interceded for him. Why had she done it? What could the crazy idea be?

After that, Christmas Eve at Ramsjo passed just as it always had. The stranger did not cause any trouble because he did nothing but sleep. The whole forenoon he lay on the sofa in one of the guest rooms and slept at one stretch. At noon they woke him up so that he could have his share of the good Christmas fare, but after that he slept again. It seemed as though for many years he had not been able to sleep as quietly and safely as here at Ramsjo.

In the evening, when the Christmas tree was lighted, they woke him up again, and he stood for a while in the drawing room, blinking as though the candlelight hurt him, but after that he disappeared again. Two hours later he was aroused once more. He then had to go down into the dining room and eat the Christmas fish and porridge.

As soon as they got up from the table he went around to each one present and said thank you and good night, but when he came to the young girl she gave him to understand that it was her father’s intention that the suit which he wore was to be a Christmas present — he did not have to return it; and if he wanted to spend next Christmas Eve in a place where he could rest in peace, and be sure that no evil would befall him, he would be welcomed back again.

The man with the rattraps did not answer anything to this. He only stared at the young girl in boundless amazement.

कठिन शब्दार्थ-preach (प्रीच) = उपदेश देना। parson (पासन) = पादरी, पुजारी। given in (गिवन इन) = समर्पण कर दिया था। crazy (क्रेजी) = सनकी। at one stretch (एट वन स्ट्रेच) = लगातार। fare (फेअ(र)) = भोजन। blinking (ब्लिंकिंग) = आँखें झपकाते हुए। evil (ईवल) = दु:ख। befall (बिफॉल) = घटित होना। stared (स्टेअड) = घूरा। amazement (अमेजमॅन्ट) = आश्चर्य। boundless (बाउन्डलॅस) = असीम।

हिन्दी अनुवाद-बिल्कुल यह एक गलती थी”, उसने कहना जारी रखा। “किन्तु फिर भी मुझे नहीं लगता कि हमें एक मनुष्य को भगा देना चाहिए जिसे हमने यहाँ आने को कहा है और जिसको हमने क्रिसमस की खुशियों का वादा किया है।”

“तुम तो एक पादरी से भी ज्यादा उपदेश देती हो” लौहपति ने कहा। “मैं केवल यही उम्मीद कर सकता हूँ कि तुम्हें पश्चात्ताप नहीं करना पड़े।”

युवती ने अजनबी का हाथ पकड़ा और उसे भोजन की टेबल पर ले गयी।

“अब बैठ जाओ और खाओ”, वह बोली, क्योंकि वह जान गयी थी कि उसके पिता अब समर्पण कर चुके थे।

चूहेदानियों वाले व्यक्ति ने एक शब्द भी नहीं कहा; वह केवल बैठ गया और भोजन खाने लगा। समय-समय पर वह युवती की ओर देखता था जिसने उसका पक्ष लिया था। उसने ऐसा क्यों किया था? आखिर वह सनकपूर्ण विचार क्या हो सकता था?

इसके बाद रेम्सजो पर क्रिसमस की पूर्व संध्या ठीक वैसे ही गुजर गयी जैसा हमेशा होता था। अजनबी ने कोई समस्या पैदा नहीं की क्योंकि सोने के अलावा उसने कुछ किया ही नहीं। पूरी दोपहर वह अतिथि कक्षों में से एक में सोफे पर लेटा रहा और लगातार सोता रहा। दोपहर में उन्होंने उसे जगाया ताकि वह क्रिसमस के अच्छे भोजन के अपने हिस्से का आनन्द ले सके, लेकिन इसके बाद वह फिर सो गया। ऐसा लगता था जैसे कई वर्षों से वह उतनी शान्ति से एवं सुरक्षा से नहीं सो पाया था जैसा वह यहाँ रम्सजो में सोया था।

शाम को जब क्रिसमस के पेड़ में रोशनी जला दी गयी तो उन्होंने उसे फिर जगा दिया, और वह वहाँ थोड़ी देर के लिए ड्रॉइंग रूम में खड़ा रहा, पलकें झपकाता हुआ जैसे कि मोमबत्ती की रोशनी उसकी आँखों में दर्द करती हो। लेकिन इसके बाद वह पुनः गायब हो गया। दो घण्टे बाद उसे फिर उठाया गया। तब उसे नीचे भोजन कक्ष में जाना पड़ा और क्रिसमस की मछली एवं दलिया खाना पड़ा।

ज्यों ही वे भोजन की टेबल से उठे वह प्रत्येक उपस्थित व्यक्ति के पास गया और धन्यवाद एवं शुभ रात्रि कहा, लेकिन जब वह युवती के पास आया तो उसने उसे यह समझाया कि उसके पिता का इरादा यह था कि जो सूट उसने पहन रखा था वह क्रिसमस का उपहार माना जाये—उसे इसे लौटाना नहीं होगा; वह अगली क्रिसमस की पूर्व संध्या ऐसे किसी स्थान पर गुजारना चाहे जहाँ वह शान्ति से आराम कर सके और आश्वस्त हो सके कि उसके साथ कुछ भी बुरा न हो, तो उसका वापस यहाँ आना स्वागत योग्य होगा।

चूहेदानियों वाले व्यक्ति ने इसका कोई उत्तर नहीं दिया। वह केवल युवती की ओर टकटकी लगाकर देखता रहा, असीम आश्चर्य के साथ।

The next morning………………..”Captain Von Stahle”. (Pages 82-83)

The next morning the ironmaster and his daughter got up in good season to go to the early Christmas service. Their guest was still asleep, and they did not disturb him.

When, at about ten o’clock, they drove back from the church, the young girl sat and hung her head even more dejectedly than usual. At church she had learned that one of the old crofters of the ironworks had been robbed by a man who went around selling rattraps.

“Yes, that was a fine fellow you let into the house,” said her father. “I only wonder how many silver spoons are left in the cupboard by this time.”

The wagon had hardly stopped at the front steps when the ironmaster asked the valet whether the stranger was still there. He added that he had heard at church that the man was a thief. The valet answered that the fellow had gone and that he had not taken anything with him at all. On the contrary, he had left behind a little package which Miss Willmansson was to be kind enough to accept as a Christmas present.

The young girl opened the package, which was so badly done up that the contents came into view at once. She gave a little cry of joy. She found a small rattrap, and in it lay three wrinkled ten kronor notes. But that was not all. In the rattrap lay also a letter written in large, jagged characters —

“Honoured and noble Miss, “Since you have been so nice to me all day long, as if I was a captain, I want to be nice to you, in return, as if I was a real captain — for I do not want you to be embarrassed at this Christmas season by a thief; but you can give back the money to the old man on the roadside, who has the money pouch hanging on the window frame as a bait for poor wanderers.

“The rattrap is a Christmas present from a rat who would have been caught in this world’s rattrap if he had not been raised to captain, because in that way he got power to clear himself.

“Written with friendship and high regard,

“Captain von Stahle.”

कठिन शब्दार्थ-Service (सर्विस) = (यहाँ) पूजा। dejectedly (डिजेक्टिडलि) = निराशा के साथ। robbed (रोब्ड) = लूट लिया गया। cupboard (कबॅड) = अलमारी। package (पैकिज) = पैकिट। contents (कॉन्टॅन्ट्स) = सामग्री। jagged (जैगिड) = कटे-फटे। characters (कैरॅक्टज) = अक्षर। honoured (ऑनॅड) = सम्मान योग्य । raised (रेज्ड) = (यहाँ) प्रतिष्ठा प्रदान की। –

हिन्दी अनुवाद-अगली सुबह लौहपति तथा उसकी पुत्री प्रसन्नचित्त उठे ताकि वे सुबह जल्दी होने वाली क्रिसमस की पूजा में जा सकें। उनका मेहमान अभी भी सोया हुआ था, और उन्होंने उसे छेड़ा नहीं।

जब करीब 10 बजे वे चर्च से गाडी में बैठ कर वापस चले तो यवती बैठी रही और उसने अपना सिर लिया, सामान्य से अधिक निराशा के साथ। चर्च में उसने सुना था कि आइरन वर्क्स के एक पुराने किसान को एक व्यक्ति ने लूट लिया था जो चूहेदानियाँ बेचता घूमता था।

“हाँ, वह अच्छा आदमी था जिसे तुमने घर में प्रवेश दे दिया”, उसके पिता ने कहा। “मुझे आश्चर्य है कि हमारी अलमारी में इस समय तक चाँदी के कितने चम्मच बचे होंगे।”

घोड़ा-गाड़ी सामने की सीढ़ियों के सामने रुकी ही थी जब लौहपति ने नौकर से पूछा कि क्या अजनबी अभी भी वहीं था। उसने यह भी कहा कि उसने चर्च में सुना था कि वह आदमी चोर था। नौकर ने उत्तर दिया कि वह व्यक्ति चला गया था और कि वह अपने साथ कुछ भी नहीं ले गया था। इसके विपरीत, उसने एक छोटा-सा पैकेट छोड़ दिया था जिसे कुमारी विलमनसन को क्रिसमस के उपहार के रूप में दयालुता के साथ स्वीकार करना था।

युवती ने पैकेट को खोला जिसे इतनी खराब तरह से बाँधा गया था कि उसमें बन्द वस्तुएँ तुरन्त दिखाई देने लगीं। उसने आनन्द की एक छोटी-सी चीख निकाली। उसे एक छोटी-सी चूहेदानी मिली और इसमें तीन सलवटें भरे 10-10 क्रोनर के नोट पड़े थे। लेकिन यही सब-कुछ नहीं था। चूहेदानी में एक पत्र भी पड़ा था जिसे बड़े तथा कटे-फटे अक्षरों में लिखा गया था

“सम्माननीय एवं महान मिस, चूँकि आप मेरे साथ इतनी भली रही हैं, पूरे दिन, जैसे कि मैं कोई कैप्टन था, मैं भी बदले में आपके प्रति भला बनना चाहता हूँ, जैसे कि मैं वास्तविक कैप्टन होऊँ—क्योंकि मैं नहीं चाहता कि इस क्रिसमस के अवसर पर आप एक चोर के द्वारा असमंजस में डाल दी जायें; लेकिन आप इस पैसे को उस वृद्ध व्यक्ति को वापस सौंप सकती हैं जो सड़क के किनारे रहता है, जो खिड़की के फ्रेम से पैसों की थैली लटका कर रखता है, जो गरीब घुमक्कड़ों के लिए ललचाने वाली वस्तु (चारा) बन जाती

“चूहेदानी एक चूहे की तरफ से क्रिसमस का उपहार है जो इस दुनिया की चूहेदानी में फँस गया होता अगर उसे कैप्टन न बना दिया गया होता, क्योंकि उस तरह से उसमें स्वयं को स्पष्ट करने को सामर्थ्य आ गयी।”

“मित्रता एवं अत्यधिक सम्मान के साथ लिखित,

“कैप्टन वॉन स्टाहले”