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विज्ञान (Science)हिंदी माध्यम2026-27

RBSE Class 10 Science Chapter 10 Solutions in Hindi — मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार | पासबुक हल, नोट्स

📅 अंतिम अपडेट: 2026-09-10📖 RBSE/NCERT Solutions
भाग 1 — समाधान (Solutions)

📖 1. समाधान: पाठगत एवं पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

राजस्थान बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान — सभी पाठगत (In-text) एवं अभ्यास (Exercise) प्रश्नों के सटीक एवं संपूर्ण हल।

पाठगत प्रश्न

#### पृष्ठ 181

प्रश्न 1. नेत्र की समंजन क्षमता से क्या अभिप्राय है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर- नेत्र लेंस की वह क्षमता जिसके कारण वह अपनी फोकस दूरी को समायोजित करके निकट तथा दूरस्थ वस्तुओं को फोकसित कर लेता है, नेत्र की समंजन क्षमता कहलाती है। सामान्य अवस्था में नेत्र की समंजन क्षमता 4डॉयप्टर4 \text{डॉयप्टर} होती है।

प्रश्न 2. निकट दृष्टि दोष का कोई व्यक्ति 1.2m1.2 m से अधिक दूरी पर रखी वस्तुओं को सुस्पष्ट नहीं देख सकता। इस दोष को दूर करने के लिए प्रयुक्त संशोधक लेंस किस प्रकार का होना चाहिये?

उत्तर- अवतल लेंस की सहायता से उस व्यक्ति को इस रोग से मुक्ति दिलायी जा सकती है।

प्रश्न 3. मानव नेत्र की सामान्य दृष्टि के लिये दूर बिन्दु तथा निकट बिन्दु नेत्र से कितनी दूरी पर होते हैं?

उत्तर- सामान्य दृष्टि के लिए दूर बिन्दु अनन्त पर तथा निकट बिन्दु नेत्र से 25cm25 cm की दूरी पर होता है।

प्रश्न 4. अंतिम पंक्ति में बैठे किसी विद्यार्थी को श्यामपट्ठ पढ़ने में कठिनाई होती है। यह विद्यार्थी किस दृष्टि दोष से पीड़ित है? इसे किस प्रकार संशोधित किया जा सकता है?

उत्तर- विद्यार्थी निकट दृष्टि दोष अथवा मायोपिया से पीड़ित है। इस रोग का निवारण अवतल (अपसारी) लेंस के प्रयोग से किया जा सकता है।

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1. मानव नेत्र अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी को समायोजित करके विभिन्न दूरियों पर रखी वस्तुओं को फोकसित कर सकता है। ऐसा हो पाने का कारण है-

(a) जरा-दूरदृष्टिता
(b) समंजन
(c) निकट-दृष्टि
(d) दीर्घ-दृष्टि

उत्तर-(b) समंजन।

318 संजय बुक्स

प्रश्न 2. मानव नेत्र जिस भाग पर किसी वस्तु का प्रतिबिंब बनाते हैं, वह है-

अथवा

मानव नेत्र में किसी वस्तु का प्रतिबिंब कहाँ बनता है? ( प्रश्न बैंक )

(a) कॉर्निया
(b) परितारिका
(c) पुतली
(d) दृष्टिपटल

उत्तर-(d) दृष्टिपटल।

प्रश्न 3. सामान्य दृष्टि के वयस्क के लिए सुस्पष्ट दर्शन की अल्पतम दूरी होती है, लगभग-

( माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2025-26 )

(a) 25m25 m
(b) 2.5cm2.5 cm
(c) 25cm25 cm
(d) 2.5m2.5 m

उत्तर-(c) 25cm25 cm

प्रश्न 4. अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी में परिवर्तन किया जाता है-

(a) पुतली द्वारा
(b) दृष्टिपटल द्वारा
(c) पक्षमाभी द्वारा
(d) परितारिका द्वारा

उत्तर-(c) पक्षमाभी द्वारा।

प्रश्न 5. किसी व्यक्ति को अपनी दूर की दृष्टि को संशोधित करने के लिए 5.5-5.5 डायोप्टर क्षमता के लेंस की आवश्यकता है। अपनी निकट की दृष्टि को संशोधित करने के लिये उसे +1.5+1.5 डायोप्टर क्षमता के लेंस की आवश्यकता है। संशोधित करने के लिए आवश्यक लेंस की फोकस दूरी क्या होगी-

(i) दूर की दृष्टि के लिए (ii) निकट की दृष्टि के लिए।

उत्तर-(i) दिया गया है- दूर की वस्तुओं को स्पष्ट देखने के लिए आवश्यक लेंस की क्षमता

P=5.5DP=-5.5 D

सूत्र P=1fP=\frac{1}{f} से

f=1Pmf=\frac{1}{P} m

f=15.5m=0.181mf=\frac{1}{-5.5} m=-0.181 m

(ii) दिया गया है- निकट की वस्तुओं को स्पष्ट देखने के लिए आवश्यक लेंस की क्षमता-

P=+1.5DP=+1.5 D

सूत्र P=1fP=\frac{1}{f} से f=1Pmf=\frac{1}{P} m

या f=1+1.5f=\frac{1}{+1.5}

f=+0.667mf=+0.667 m

प्रश्न 6. किसी निकट-दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति का दूर बिन्दु नेत्र के सामने 8080 सेमी दूरी पर है। इस दोष को संशोधित करने के लिये आवश्यक लेंस की प्रकृति तथा क्षमता क्या होगी?

अथवा

निकट दृष्टि दोष के कारण पीड़ित व्यक्ति का दूर बिन्दु 8080 सेमी. दूरी पर है। इस दोष को संशोधित करने के लिए आवश्यक लेंस की प्रकृति तथा क्षमता क्या होगी? ( प्रश्न बैंक )

उत्तर-लेंस की प्रकृति अपसारी (अवतल) लेंस होगी।

बिंब की दूरी ( uu ) = अनन्त ( )

प्रतिबिंब की दूरी ( vv ) = 80-80 सेमी

फोकस दूरी = ff

लेंस सूत्र से 1v1u=1f\frac{1}{v}-\frac{1}{u}=\frac{1}{f}

1801=1f-\frac{1}{80}-\frac{1}{∞}=\frac{1}{f}

विज्ञान कक्षा-X

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1f=180\frac{1}{f}=-\frac{1}{80}

f=80cm=0.8mf=-80 cm=-0.8 m

लेंस की क्षमता P=1fP=\frac{1}{f} से

P=10.8P=\frac{1}{-0.8}

P=1.25DP=-1.25 D

अतः इस दोष को दूर करने के लिए 1.25D-1.25 D क्षमता के अपसारी (अवतल) लेंस की आवश्यकता होगी।

प्रश्न 7. चित्र बनाकर दर्शाइए कि दीर्घ-दृष्टि दोष कैसे संशोधित किया जाता है? एक दीर्घ-दृष्टिमुक्त नेत्र का निकट बिंदु 1m1 m है। इस दोष को संशोधित करने के लिए आवश्यक लेंस की क्षमता क्या होगी? यह मान लीजिए कि सामान्य नेत्र का निकट बिंदु 25cm25 cm है।

उत्तर- दीर्घ दृष्टि दोष से पीड़ित व्यक्ति को पास रखी वस्तु स्पष्ट दिखाई नहीं देती है। इस दोष में 25cm25 cm दूर रखी वस्तु का प्रतिबिम्ब रेटिना के पीछे (बिन्दु PP ) बनता है, जिससे व्यक्ति समीप की वस्तुओं को स्पष्ट नहीं देख पाता है।

इस दोष के संशोधन के लिए उचित दूरी का उत्तल (अभिसारी) लेंस प्रयोग में लाया जाता है; जो वस्तु का प्रतिबिम्ब वस्तु से पहले बना देता है, जिससे व्यक्ति को पास में रखी वस्तु दिखाई देने लगती है।

[दीर्घ-दृष्टि दोषयुक्त नेत्र, तथा दीर्घ-दृष्टि दोष का संशोधन]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 10 मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार चित्र 1

चित्र-(a), (b) दीर्घ दृष्टि दोषयुक्त नेत्र, तथा (c) दीर्घ-दृष्टि दोष का संशोधन

N=दीर्घदृष्टिदोषयुक्तनेत्रकानिकटबिंदुN=\text{दीर्घ}-\text{दृष्टिदोषयुक्त} \text{नेत्र} \text{का} \text{निकट} \text{बिंदु}

N=सामान्यनेत्रकानिकटबिंदुN^{′}=\text{सामान्य} \text{नेत्र} \text{का} \text{निकट} \text{बिंदु}

मनुष्य के नेत्र का निकट बिंदु 25cm25 cm से दूर खिसक कर 1m1 m ( 100cm100 cm ) दूर पहुँच गया है।

अतः बिंब की दूरी ( uu ) =25सेमी.=-25 \text{सेमी}.

प्रतिबिंब की दूरी ( vv ) =100सेमी.=-100 \text{सेमी}.

फोकस दूरी =f=f

लेंस के सूत्र से-

1f=1v1u\frac{1}{f}=\frac{1}{v}-\frac{1}{u}

320

1f=1100125=1+4100\frac{1}{f}=\frac{1}{-100}-\frac{1}{-25}=\frac{-1+4}{100}

1f=3100cmया13m\frac{1}{f}=\frac{3}{100}cm \text{या} \frac{1}{3}m

अतः आवश्यक लेंस की क्षमता –

P=1f=113=3P=\frac{1}{f}=\frac{1}{\frac{1}{3}}=3

P=+3DP=+3D

अतः आवश्यक लेंस की क्षमता +3D+3D होगी।

प्रश्न 8. सामान्य नेत्र 25cm25 cm से निकट रखी वस्तुओं को सुस्पष्ट क्यों नहीं देख पाते?

उत्तर—सामान्य नेत्र 25सेमी25 \text{सेमी} से निकट रखी वस्तुओं को सुस्पष्ट नहीं देख पाते क्योंकि नेत्र के अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी तक निश्चित न्यूनतम सीमा ( 25सेमी25 \text{सेमी} ) से कम नहीं होती। यदि वस्तु को 25cm25 cm से कम दूरी पर रख दिया जाये तो नेत्र लेंस वस्तु का प्रतिबिम्ब रेटिना पर नहीं बना पाता तथा वस्तु स्पष्ट दिखाई नहीं देती है।

प्रश्न 9. जब हम नेत्र से किसी वस्तु की दूरी को बढ़ा देते हैं तो नेत्र में प्रतिबिम्ब-दूरी का क्या होता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2025-26)

उत्तर—जब हम नेत्र से किसी वस्तु की दूरी को बढ़ा देते हैं तो पक्षमाभी पेशियों में शिथिलन के कारण अभिनेत्र लेंस पतला हो जाता है जिससे इसकी फोकस दूरी बढ़ जाती है जिससे हम दूर रखी वस्तुओं को स्पष्ट देख पाने में समर्थ होते हैं क्योंकि इससे प्रतिबिम्ब रेटिना पर ही बनता है।

प्रश्न 10. तारे क्यों टिमटिमाते हैं? (प्रश्न बैंक)

अथवा

तारे टिमटिमाते क्यों प्रतीत होते हैं? समझाइये। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023; माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)

उत्तर—तारों से आने वाला प्रकाश हमारी आँख तक पहुँचने से पहले वायुमण्डल की विभिन्न परतों से गुजरता है। इन परतों का घनत्व, ताप में परिवर्तन के कारण अनियमित रूप से बदलता रहता है, जिस कारण अपवर्तनांक भी परिवर्तित होता रहता है। अपवर्तनांक परिवर्तन के कारण तारों से आने वाली किरणें लगातार अपना मार्ग बदलती रहती हैं तथा हमारी आँख तक पहुँचने वाले प्रकाश की मात्रा भी बदलती रहती है, जिस कारण तारे टिमटिमाते हुए दिखाई देते हैं।

प्रश्न 11. व्याख्या कीजिये कि ग्रह क्यों नहीं टिमटिमाते?

उत्तर—ग्रह तारों की अपेक्षा पृथ्वी के बहुत करीब हैं और इसलिए उन्हें विस्तृत स्रोत की तरह माना जा सकता है। यदि हम ग्रह को बिन्दु आकार के अनेक प्रकाश स्रोतों का संग्रह मान लें तो सभी बिन्दु आकार के प्रकाश-स्रोतों से हमारे नेत्रों में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा में कुल परिवर्तन का औसत मान शून्य होगा, इसी कारण वे टिमटिमाते प्रतीत नहीं होते।

प्रश्न 12. सूर्योदय के समय सूर्य रक्ताभ क्यों प्रतीत होता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)

उत्तर—प्रातःकाल के समय सूर्य क्षितिज के निकट होता है, सूर्य की किरणों को हम तक पहुँचने के लिए वातावरणीय मोटी परतों से गुजर कर पहुँचना पड़ता है। नीले और कम तरंगदैर्ध्य के प्रकाश का अधिकांश भाग वहाँ उपस्थित कणों के द्वारा प्रकीर्णित कर दिया जाता है। हमारी आँखों तक पहुँचने वाला प्रकाश अधिक तरंगदैर्ध्य का होता है। इसलिए सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य रक्ताभ प्रतीत होता है।

प्रश्न 13. किसी अंतरिक्ष यात्री को आकाश नीले की अपेक्षा काला क्यों प्रतीत होता है?

अथवा

किसी अंतरिक्ष यात्री को आकाश काला क्यों प्रतीत होता है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर—वायुमण्डल में प्रकीर्णन के कारण फैले हुए नीले प्रकाश के कारण, पृथ्वी तल पर खड़े किसी व्यक्ति को आकाश का रंग नीला दिखाई देता है।

परन्तु जब कोई अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी के वायुमण्डल से बाहर निकल जाता है, तब वहाँ निर्वात में सूर्य के प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं हो पाता है, जिस कारण अंतरिक्ष यात्री को आकाश नीले की अपेक्षा काला प्रतीत होता है।

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भाग 2 — नोट्स (Notes & Summary)

📝 2. नोट्स: पाठ सार (Key Concepts & Summary)

महत्वपूर्ण परिभाषाएं, रासायनिक समीकरण, नियम, सूत्र एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।

पाठ सार

(1) मानव की आँख- मनुष्य की आँख बहुत महत्वपूर्ण अंग है। इसकी क्रियाविधि कैमरे के समान होती है।

(2) मानव नेत्र के प्रमुख भाग- (1) श्वेत पटल (2) कॉर्निया (3) परितारिका (4) तारा या पुतली (5) नेत्रलेंस (6) रक्त पटल (7) दृष्टिपटल (8) जलीय द्रव (9) काचाभ द्रव।

(3) अभिनेत्र लेंस रेटिना पर किसी वस्तु का उल्टा तथा वास्तविक प्रतिबिंब बनाता है।

(4) आँख की समंजन क्षमता- नेत्र लेंस की फोकस दूरी उससे सम्बद्ध मांसपेशियों द्वारा आसानी से बदली जा सकती है। अतः अभिनेत्र लेंस की वह क्षमता जिसके कारण वह अपनी फोकस दूरी को समायोजित करके निकट तथा दूरस्थ वस्तुओं को फोकसित कर लेता है, नेत्र की समंजन क्षमता कहलाती है।

(5) वह न्यूनतम दूरी जिस पर रखी कोई वस्तु बिना किसी तनाव के अत्यधिक स्पष्ट देखी जा सकती है उसे सुस्पष्ट दर्शन की अल्पतम दूरी या नेत्र का निकट बिंदु कहते हैं। सामान्य दृष्टि के वयस्क के लिए यह दूरी लगभग 25cm25 cm होती है। वह दूरतम बिंदु जिस तक कोई नेत्र वस्तुओं को सुस्पष्ट देख सकता है, नेत्र का दूर-बिंदु (far point) कहलाता है। सामान्य नेत्र के लिए यह अनंत दूरी पर होता है।

(6) दृष्टि परास- स्वस्थ नेत्र का दूर बिंदु अनन्त पर होता है तथा निकटतम बिंदु 25सेमी.25 \text{सेमी}. पर होता है। निकटतम तथा दूर बिंदु के बीच की दूरी को दृष्टि परास (range of vision) कहते हैं।

(7) दृष्टि तंत्र के किसी भी भाग के क्षतिग्रस्त होने अथवा कुसंक्रियाओं से दृष्टि प्रकार्यों में सार्थक क्षति हो सकती है।

(8) दृष्टदोष और उनके उपचार- नेत्र में निम्न दोष पाये जाते हैं-

(i) निकट दृष्टि दोष (Myopia)- इस दोष में दूर की वस्तु स्पष्ट दिखाई नहीं देती है। इसे अवतल लेंस (अपसारी लेंस) के उपयोग से दूर किया जाता है।

(ii) दीर्घ अथवा दूर दृष्टि दोष (Hypermetropia)- इस दोष में पास की वस्तु स्पष्ट दिखाई नहीं देती है। इसे उत्तल लेंस (अभिसारी लेंस) द्वारा दूर किया जाता है।

(iii) जरा दृष्टि दोष (Presbyopia)- इस दोष में निकट और दूर दोनों प्रकार की वस्तुएँ साफ़ दिखाई नहीं देती हैं। इसे दूर करने के लिए द्वifoxिa/द्वifocसी लेंस का उपयोग किया जाता है।

(9) प्रिज्म से प्रकाश का अपवर्तन- दो असमानान्तर तल जो अपवर्तन क्रिया में भाग लेते हैं, अपवर्तक तल कहलाते हैं। दो अपवर्तक तलों के बीच का कोण प्रिज्म का कोण अथवा अपवर्तक कोण कहलाता है। इसे AA द्वारा निरूपित किया जाता है। ] प्रिज्म

[प्रिज्म का अपवर्तक कोण एवं किरण आरेख]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 10 मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार चित्र 2

(10) किसी प्रिज्म से होकर जाने वाली प्रकाश की किरण का विचलन कोण-

(i) प्रिज्म की विशेष आकृति के कारण निर्गत किरण, आपतित किरण की दिशा में एक कोण बनाती है जिसे विचलन कोण कहते हैं।

(ii) विभिन्न रंगों के प्रकाश का विचलन कोण भी भिन्न होता है।

(iii) लाल रंग के प्रकाश का विचलन कोण न्यूनतम तथा बैंगनी रंग के प्रकाश का विचलन कोण महत्तम होता है।

(11) काँच के प्रिज्म में से सफेद प्रकाश का विक्षेपण-

(i) सफेद रंग के प्रकाश से प्राप्त सात रंगों की पट्टी को स्पेक्ट्रम (spectrum) कहते हैं।

(ii) पर्दे पर प्राप्त रंग क्रमशः बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी तथा लाल है। इन्हें संक्षेप में 'VIBGYOR' भी कहते हैं। सफेद प्रकाश के सात घटक रंगों में विभाजन होने की प्रक्रिया विक्षेपण कहलाती है।

वर्षा के उपरान्त वायुमंडल में उपस्थित पानी की बूँदों पर जब सूर्य का प्रकाश पड़ता है तब सूर्य के प्रकाश के परिक्षेपण के कारण वायुमण्डल में इन्द्रधनुष बनता है।

(12) इन्द्रधनुष दिखाई देने की स्थितियाँ- इन्द्रधनुष हमें वर्षा के उपरान्त अथवा वर्षाकाल में अथवा उस समय दिखायी देता है जब हम फव्वारे से निकलते हुये पानी का अवलोकन करते हैं जिस समय सूर्य हमारी पीठ के पीछे होता है।

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(13) वायुमंडलीय अपवर्तन- जब सूर्य का प्रकाश पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करता है तब यह सतत रूप में विरल माध्यम से सघन माध्यम की ओर बढ़ता जाता है, फलतः उससे अपवर्तन की क्रिया होती है। वातावरण में होने वाली अपवर्तन की प्रक्रिया को वायुमंडलीय अपवर्तन कहते हैं। वायुमंडलीय अपवर्तन अनेक प्रकाशिक घटनाओं का कारण बनता है।

(14) प्रकाश का प्रकीर्णन- सूर्य के प्रकाश की किरणें जब पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करती हैं तब वातावरण में उपस्थित विभिन्न गैसों के अणु तथा परमाणु चारों ओर प्रकाश का उत्सर्जन करते हैं। इस क्रिया को प्रकाश का प्रकीर्णन कहते हैं।

परमाणु अथवा कण जो प्रकाश का प्रकीर्णन करते हैं, प्रकीर्णक कहलाते हैं।

(15) टिण्डल प्रभाव- वायु में उपस्थित धूल के कणों, धुओं तथा पानी की बूंदों के प्रकाश का प्रकीर्णन टिण्डल प्रभाव (Tyndall effect) कहलाता है।

प्रकीर्णित प्रकाश का वर्ण, प्रकीर्णन करने वाले कणों के साइज पर निर्भर करता है। अत्यन्त सूक्ष्म कण मुख्य रूप से नीले प्रकाश को प्रकीर्ण करते हैं, जबकि बड़े साइज के कण अधिक तरंगदैर्ध्य के प्रकाश को प्रकीर्ण करते हैं। यदि प्रकीर्ण करने वाले कणों का साइज बहुत अधिक है तो प्रकीर्णित प्रकाश श्वेत भी प्रतीत हो सकता है।

(16) यदि पृथ्वी का वायुमंडल न होता तब दिन के समय में भी आकाश काला दिखाई देता है। आकाश के प्रकीर्णन प्रकाश में नीले रंग की अधिकता होती है, यही कारण है कि हमें आकाश का रंग नीला दिखाई देता है।

(17) प्रकाश के प्रकीर्णन के कारण आकाश का रंग नीला तथा सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय सूर्य रक्ताभ प्रतीत होता है।

(18) खतरे के संकेत (सिग्नल) का प्रकाश लाल रंग का होता है क्योंकि यह सबसे कम प्रकीर्ण होता है। इसलिए यह दूर से भी दिखाई दे जाता है।

(19) हमारे नेत्रों तक पहुँचने वाला प्रकाश अधिक तरंगदैर्ध्य का होता है, इस कारण से सूर्योदय या सूर्यास्त के समय सूर्य लाल (रक्ताभ) प्रतीत होता है।

भाग 3 — परीक्षा उपयोगी प्रश्न (Important Q&A)

3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Important Questions)

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs), अतिलघूत्तरात्मक, लघूत्तरात्मक एवं निबंधात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न–

प्रश्न 1. एक प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश के सात अवयवी वर्णों में विभाजन की प्रक्रिया कहलाती है—

(माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2026)

(अ) विक्षेपण
(ब) प्रकीर्णन
(स) अपवर्तन
(द) परावर्तन

प्रश्न 2. तारों के टिमटिमाने का कारण है—

(माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2026)

(अ) व्यतिकरण
(ब) ध्रुवण
(स) वायुमंडलीय अपवर्तन
(द) आन्तरिक परावर्तन

प्रश्न 3. श्वेत प्रकाश में रंग (वर्ण) पाए जाते हैं—

(माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2025-26)

(अ) 7
(ब) 4
(स) 3
(द) 8

प्रश्न 4. 'खतरे' के संकेत (सिग्नल) के लिए किस रंग का प्रकाश प्रयुक्त होता है?

(अ) बैंगनी
(ब) नीला
(स) लाल
(द) हरा

प्रश्न 5. मानव आँख विभिन्न स्थितियों में स्थित वस्तुओं का स्पष्ट प्रतिबिम्ब बनाने में सक्षम है। इसका कारण है—

(अ) अबिन्दुकता
(ब) समंजन क्षमता
(स) जरा-दूरदर्शिता
(द) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 6. रेटिना पर किसी वस्तु का प्रतिबिम्ब बनता है—

(अ) सीधा एवं वास्तविक
(ब) सीधा एवं आभासी
(स) उल्टा एवं आभासी
(द) उल्टा एवं वास्तविक

प्रश्न 7. एक साधारण माइक्रोस्कोप में प्रयोग किया जाता है—

(अ) उत्तल लेंस जिसकी फोकस दूरी अधिक हो
(ब) कम फोकस दूरी का उत्तल लेंस
(स) अधिक फोकस दूरी का अवतल लेंस
(द) कम फोकस दूरी का अवतल लेंस

प्रश्न 8. आकाश का नीला रंग होने का कारण है—

(अ) प्रकाश का परावर्तन
(ब) प्रकाश का अपवर्तन
(स) प्रकाश का प्रकीर्णन
(द) प्रकाश का परिक्षेपण

प्रश्न 9. जब प्रकाश प्रिज्म में से होकर गुजरता है तब सबसे अधिक विचलन होता है—

(अ) पीले रंग में
(ब) लाल रंग में
(स) बैंगनी रंग में
(द) नारंगी रंग में

प्रश्न 10. इन्द्रधनुष के बनने का कारण है—

(अ) केवल प्रकाश का विचलन
(ब) केवल प्रकाश का अपवर्तन
(स) पानी की बूँद से प्रकाश का परावर्तन तथा विचलन
(द) पानी की बूँद में प्रकाश का परावर्तन, अपवर्तन तथा प्रकाश का विचलन

प्रश्न 11. प्रकाश नेत्र में एक पतली झिल्ली से होकर प्रवेश करता है, जिसे कहते हैं—

(अ) कॉर्निया
(ब) रेटिना
(स) परितारिका
(द) काचाभ द्रव

प्रश्न 12. नेत्र की कौनसी संरचना प्रकाश को विद्युत सिग्नल में परिवर्तित करने के लिए उत्तरदायी है—

(अ) कॉर्निया
(ब) अभिनेत्र लेंस
(स) रेटिना
(द) परितारिका

प्रश्न 13. वास्तविक सूर्यास्त तथा आभासी सूर्यास्त के बीच समय का अन्तर लगभग है—

(माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)

(अ) 1 मिनट
(ब) 2 मिनट
(स) 2 सेकण्ड
(द) 5 मिनट

प्रश्न 14. प्रकीर्णित प्रकाश का वर्ण निर्भर करता है—

(अ) प्रकाश की आवृत्ति पर
(ब) प्रकाश तरंगदैर्ध्य पर
(स) प्रकीर्णन करने वाले कणों के आकार पर
(द) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 15. लाल वर्ण के प्रकाश की तरंगदैर्ध्य का मान, नीले प्रकाश की अपेक्षा लगभग होता है—

(अ) 1.5 गुणा
(ब) 1.8 गुणा
(स) 2 गुणा
(द) 5 गुणा

प्रश्न 16. प्रकाश के दृश्य स्पेक्ट्रम में वर्णों की संख्या होती है—

(अ) 5
(ब) 6
(स) 7
(द) 1

322

प्रश्न 17. निकट दृष्टि दोष उत्पन्न होने का कारण है-

(अ) नेत्र गोलक का लम्बा हो जाना
(ब) नेत्र गोलक का छोटा हो जाना
(स) अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी का अत्यधिक हो जाना
(द) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 18. यदि किसी व्यक्ति में निकट-दृष्टि तथा दूर-दृष्टि दोनों दोष हों तो उन्हें वस्तुओं को सुस्पष्ट देखने के लिए किस प्रकार के लेंसों की आवश्यकता होगी-

(अ) अवतल लेंस
(ब) उत्तल लेंस
(स) द्वifokसी लेंस ( द्विफोक्सीलेंस\text{द्विफोक्सी} \text{लेंस} )
(द) कोई नहीं

प्रश्न 19. काँच के एक त्रिभुज प्रिज्म में होता है-

(अ) एक त्रिभुजाकार आधार तथा तीन आयताकार पार्श्व-पृष्ठ
(ब) दो त्रिभुजाकार आधार तथा तीन आयताकार पार्श्व-पृष्ठ
(स) दो त्रिभुजाकार आधार तथा दो आयताकार पार्श्व-पृष्ठ
(द) तीन त्रिभुजाकार आधार तथा तीन आयताकार पार्श्व-पृष्ठ

प्रश्न 20. मानव नेत्र के दूर-बिन्दु स्थित होता है-

(अ) 25 से.मी. से पहले
(ब) 25 सेमी. की दूरी पर
(स) 1 मीटर की दूरी पर
(द) अनन्त पर

प्रश्न 21. परितारिका की पेशियाँ नियंत्रित करती हैं- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)

(अ) प्रकाश नाड़ियाँ
(ब) नेत्र लेंस की फोकस दूरी
(स) पुतली का आकार (साइज)
(द) क्रिस्टलीय लेंस की आकृति

प्रश्न 22. सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय सूर्य दिखाई देता है-

(अ) काला
(ब) लाल
(स) पीला
(द) नीला

प्रश्न 23. परितारिका किसके पीछे स्थित है-

(अ) पुतली
(ब) रेटिना
(स) कॉर्निया
(द) नेत्र गोलक

प्रश्न 24. प्रकाश के विक्षेपण से प्राप्त सात रंग के समूह को कहते हैं-

(अ) प्रतिबिम्ब
(ब) छाया
(स) स्पेक्ट्रम
(द) इनमें से कोई नहीं

प्रश्न 25. निकट दृष्टिदोष के निवारण के लिए प्रयुक्त लेंस है-

(अ) उत्तल लेंस
(ब) अवतल लेंस
(स) गोलीय बेलनाकार लेंस
(द) समोत्तल लेंस

प्रश्न 26. बाह्य आघातों से आँख की सुरक्षा करता है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)

(अ) कॉर्निया
(ब) परितारिका
(स) रक्तक पटल
(द) श्वेतपटल

प्रश्न 27. अग्रिम सूर्योदय एवं विलंबित सूर्यास्त का कारण है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)

(अ) प्रकीर्णन
(ब) वायुमंडलीय अपवर्तन
(स) विक्षेपण
(द) परावर्तन

प्रश्न 28. दिए गए त्रिभुजाकार प्रिज्म के लिए विचलन कोण है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)

[प्रिज्म में अपवर्तन और विचलन कोण का रेखाचित्र]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 10 मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार चित्र 3

आपतित किरण

निर्गत किरण

विज्ञान कक्षा-X

323

(अ) ee
(ब) ii
(स) xx
(द) rr

29. श्वेत प्रकाश पुंज, प्रिज्म से गुजरने के पश्चात् इसके अवयवी वर्णों में विक्षेपित हो जाता है। प्रकाश जो सबसे कम झुकता (विचलित) होता है, वह है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)

(अ) लाल
(ब) बैंगनी
(स) पीला
(द) हरा

30. अन्तिम पंक्ति में बैठे किसी विद्यार्थी को श्यामपट्ट पढ़ने में कठिनाई होती है, यह विद्यार्थी किस दृष्टि दोष से पीड़ित है? (प्रश्न बैंक)

(अ) दीर्घ दृष्टि दोष
(ब) निकट दृष्टि दोष
(स) मोतियाबिन्द
(द) जरा-दूर दृष्टिता

31. मानव नेत्र में निकटतम बिन्दु है- (प्रश्न बैंक)

(अ) 25cm25 cm
(ब) 20cm20 cm
(स) 10cm10 cm
(द) 30cm30 cm

32. जरा दूर दृष्टिता का निवारण किस लेंस से किया जाता है? (प्रश्न बैंक)

(अ) उत्तल लेंस
(ब) अवतल लेंस
(स) द्वifोकसी लेंस
(द) बेलनाकार लेंस

33. मानव नेत्र में पुतली के आकार को नियंत्रित करता है? (प्रश्न बैंक)

(अ) पारितारिका
(ब) दृष्टि पटल
(स) लेंस
(द) कॉर्निया (स्वच्छ मंडल)

34. मानव नेत्र के रेटिना पर बनने वाले प्रतिबिम्ब की प्रकृति होती है- (प्रश्न बैंक)

(अ) काल्पनिक, सीधा, छोटा
(ब) काल्पनिक, उल्टा, बड़ा
(स) वास्तविक, सीधा, बड़ा
(द) वास्तविक, उल्टा, छोटा

उत्तर-तालिका

1. (अ)

2. (स)

3. (अ)

4. (स)

5. (ब)

6. (द)

7. (ब)

8. (स)

9. (स)

10. (द)

11. (अ)

12. (स)

13. (ब)

14. (स)

15. (ब)

16. (स)

17. (अ)

18. (स)

19. (ब)

20. (द)

21. (स)

22. (ब)

23. (स)

24. (स)

25. (ब)

26. (द)

27. (ब)

28. (स)

29. (अ)

30. (ब)

31. (अ)

32. (स)

33. (अ)

34. (द)

          

#### रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

1. अभिनेत्र लेंस रेटिना पर किसी वस्तु का उल्टा तथा .......................................... प्रतिबिम्ब बनाता है।

2. अभिनेत्र लेंस की वह क्षमता, जिसके कारण वह अपनी फोकस दूरी को समायोजित कर लेता है, .......................................... कहलाती है।

3. कुछ व्यक्तियों के नेत्र का क्रिस्टलीय लेंस दूधिया तथा धुँधला हो जाता है। इस स्थिति को .......................................... कहते हैं।

4. शब्द VIBGYOR आपको वर्णों के क्रम याद रखने में सहायता करेगा। प्रकाश के अवयवी वर्णों के इस बैण्ड को .......................................... कहते हैं।

5. लाल प्रकाश सबसे .......................................... झुकता है, जबकि बैंगनी सबसे .......................................... झुकता है।

6. ग्रह क्यों नहीं टिमटिमाते? ग्रह तारों की अपेक्षा पृथ्वी के .......................................... हैं।

7. लाल वर्ण के प्रकाश की तरंगदैर्ध्य नीले प्रकाश की अपेक्षा लगभग .......................................... गुनी है।

8. 'खतरे' के संकेत (सिग्नल) का प्रकाश सदैव .......................................... रंग होता है।

9. दीर्घ-दृष्टि दोष निवारण में .......................................... लेंस उपयोगी होता है। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)

उत्तरमाला- 1. वास्तविक 2. समंजन 3. मोतियाबिंद 4. स्पेक्ट्रम 5. कम, अधिक 6. बहुत पास 7. 1.81.8 8. लाल 9. उत्तल

324 संजीब बुक्स

सुमेलन सम्बन्धी प्रश्न-

1. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए-

कॉलम P

कॉलम Q

(i) तारों का टिमटिमाना (i) अभिनेत्र लेंस की वक्रता का अत्यधिक होना, (ii) नेत्र गोलक का लंबा हो जाना।

इस रोग का संशोधन अवतल (अपसारी) लेंस के प्रयोग से किया जा सकता है।

दीर्घउत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1. एक 14 वर्षीय छात्र, उससे 55 मीटर दूर रखे श्यामपट्ट पर लिखे प्रश्न को स्पष्ट नहीं देख पाता-

(क) दृष्टि दोष का नाम बताइए जिससे वह प्रभावित है।

(ख) नामांकित रेखाचित्र की सहायता से प्रदर्शित कीजिए कि कैसे इस दोष का निवारण हो सकता है?

उत्तर— (क) छात्र 55 मीटर दूर रखे श्यामपट्ट को स्पष्ट नहीं देख पाता है, अतः छात्र निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) से पीड़ित है।

(ख) निकट दृष्टि दोष का निवारण अवतल (अपसारी) लेंस के चश्मे के उपयोग से हो सकता है, जैसा कि चित्र में दिखाया गया है-

[निकट दृष्टि दोष का अवतल लेंस द्वारा निवारण का रेखाचित्र]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 10 मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार चित्र 5

व्याख्या— दूर से आने वाली किरणें अवतल लेंस से अपवर्तन के पश्चात् बिन्दु FF से आती हुई प्रतीत होती हैं। इससे ये किरणें नेत्र द्वारा अपवर्तित होकर रेटिना RR पर वस्तु का प्रतिविम्ब बनाती हैं और वस्तु को नेत्र स्पष्ट देख पाते हैं।

प्रश्न 2. अभिनेत्र लेंस क्या है? इसके आकार में परिवर्तन से देखने की क्षमता पर क्या प्रभाव पड़ता है? समझाइए।

उत्तर— अभिनेत्र लेंस, नेत्र में पाया जाने वाला लेंस है जो रेशेदार जेलीवत पदार्थ का बना होता है। यह रेटिना पर किसी वस्तु का उल्टा तथा वास्तविक प्रतिबिंब बनाता है। अभिनेत्र लेंस की वक्रता में कुछ सीमाओं तक पक्षमाभी पेशियों द्वारा रूपान्तरण किया जा सकता है। अभिनेत्र लेंस की वक्रता में परिवर्तन होने पर इसकी फोकस दूरी भी परिवर्तित हो जाती है। जब पेशियाँ शिथिल होती है तो अभिनेत्र लेंस पतला हो जाता है। इस प्रकार इसकी फोकस दूरी बढ़ जाती है। इस स्थिति में हम दूर रखी वस्तुओं को स्पष्ट देख पाने में समर्थ होते हैं। जब आप आँख के निकट की वस्तुओं को देखते हैं तब पक्षमाभी पेशियाँ सिकुड़ जाती है। इससे अभिनेत्र लेंस की वक्रता बढ़ जाती है। अभिनेत्र लेंस अब मोटा हो जाता है। परिणामस्वरूप, अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी घट जाती है। इससे हम निकट रखी वस्तुओं को स्पष्ट देख सकते हैं।

प्रश्न 3. हमें वर्षा के बाद ही आकाश में इंद्रधनुष क्यों दिखाई देता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)

उत्तर— इंद्रधनुष वर्षा के बाद ही दिखाई देता है क्योंकि वर्षा जल की सूक्ष्म बूँदे छोटे प्रिज्मों की भाँति कार्य करती है। सूर्य के आपतित प्रकाश को ये बूँदे अपवर्तित तथा विक्षेपित करती है, तत्पश्चात् इसे आंतरिक परावर्तित करती है। अंततः जल की बूँद से बाहर निकलते समय प्रकाश को पुनः अपवर्तित करती है। प्रकाश के इस परिक्षेपण तथा आंतरिक परावर्तन के कारण इन्द्रधनुष दिखाई देता है।

विज्ञान कक्षा-X

331

प्रश्न 4. ( अ ) टिंडल प्रभाव क्या है?

अथवा

टिण्डल प्रभाव किसे कहते हैं? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)

( ब ) स्वच्छ आकाश का रंग नीला क्यों दिखाई देता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24; प्रश्न बैंक; माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)

उत्तर- (अ) पृथ्वी का वायुमंडल सूक्ष्म कणों का एक विषमांगी मिश्रण है। इन कणों में धुआँ, जल की सूक्ष्म बूँदें, धूल के निलंबित कण तथा वायु के अणु सम्मिलित होते हैं। जब कोई प्रकाश किरण पुंज ऐसे महीन कणों से टकराता है तो उस किरण पुंज का मार्ग दिखाई देने लगता है। इन कणों से विसरित प्रकाश परावर्तित होकर हमारे पास तक पहुँचता है। कोलाइडी कणों द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन को टिण्डल प्रभाव कहते हैं।

उदाहरण- (i) धूल या धुएँ से भरे कमरे में किसी छिद्र से प्रवेश करने वाले प्रकाश पुंज में कणों को उड़ते हुए देखना।

(ii) घने जंगलों के वितान (Canopy) से सूर्य की किरणों का गुजरना। (iii) जंगल के कुहासे में जल की सूक्ष्म बूँदों का प्रकाश द्वारा प्रकीर्णन।
(ब) वायुमण्डल में वायु के अणु तथा अन्य सूक्ष्म कणों का साइज दृश्य प्रकाश की तरंगदैर्ध्य के प्रकाश की अपेक्षा नीले रंग की ओर कम तरंगदैर्ध्य के प्रकाश को प्रकीर्णित करने में अधिक प्रभावी है। लाल रंग के प्रकाश की तरंगदैर्ध्य नीले प्रकाश की अपेक्षा लगभग 1.81.8 गुनी है। अतः जब सूर्य का प्रकाश वायुमण्डल से गुजरता है, वायु के सूक्ष्म कण लाल रंग की अपेक्षा नीले रंग (छोटी तरंगदैर्ध्य) को अधिक प्रबलता से प्रकीर्ण करते हैं। प्रकीर्णित हुआ यह नीला प्रकाश हमारे नेत्रों में प्रवेश करता है, इसलिए स्वच्छ आकाश का रंग नीला दिखाई देता है।
(a) निकट-दृष्टि दोषयुक्त नेत्र

332

[दीर्घ-दृष्टि दोषयुक्त नेत्र (Hypermetropia eye defect diagram)]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 10 मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार चित्र 8

(b) दीर्घ-दृष्टि दोषयुक्त नेत्र
(a) निकट-दृष्टि दोषयुक्त नेत्र का दूर-बिन्दु
(b) निकट-दृष्टि दोषयुक्त नेत्र
(c) निकट-दृष्टि दोष का संशोधन

चित्र-(a), (b) निकट-दृष्टि दोषयुक्त नेत्र

(c) अवतल लेंस के उपयोग द्वारा निकट-दृष्टि दोष का संशोधन
(a) दीर्घ-दृष्टि दोषयुक्त नेत्र का निकट बिन्दु

विज्ञान कक्षा-X

335

(b) दीर्घ-दृष्टि दोषयुक्त नेत्र
(c) दीर्घ-दृष्टि दोष का संशोधन

चित्र-(a), (b) दीर्घ दृष्टि दोषयुक्त नेत्र तथा (c) दीर्घ-दृष्टि दोष का संशोधन

NN = दीर्घ-दृष्टि दोषयुक्त नेत्र का निकट बिन्दु

NN^{′} = सामान्य नेत्र का निकट बिन्दु

(3) जरा दृष्टि दोष (Presbyopia)–आयु में वृद्धि के साथ नेत्र के लेंस का लचीलापन कम हो जाता है तथा नेत्र की समंजन क्षमता भी घटती जाती है। इस कारण से दूर एवं पास दोनों ही वस्तुएँ स्पष्ट नहीं दिखाई देती हैं। इस दोष को जरा दृष्टि दोष कहते हैं। नेत्र के इस दोष को दूर करने के लिए द्वifokसी लेंस (bifocal lens) प्रयुक्त किए जाते हैं। सामान्य प्रकार के द्वifokसी लेंसों में नीचे का भाग उत्तल लेंस (पास की वस्तुओं को देखने के लिए) एवं ऊपरी भाग अवतल लेंस (दूर की वस्तुओं को देखने के लिए) होता है।

प्रश्न 3. नेत्रदान के महत्व को समझाते हुए बताइये कि नेत्रदान करते समय हमें किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए।

उत्तर–हमारे नेत्र हमारी मृत्यु के पश्चात् भी कुछ समय के लिए जीवित रहते हैं। अपनी मृत्यु के पश्चात् नेत्रदान करके हम किसी नेत्रहीन व्यक्ति के जीवन को प्रकाश से भर सकते हैं। विकासशील देशों के लगभग 3.5 करोड़ व्यक्ति दृष्टिहीन हैं तथा उनमें से अधिकांश की दृष्टि ठीक की जा सकती है। कॉर्निया अंधता से पीड़ित लगभग 45 लाख व्यक्तियों को नेत्रदान द्वारा प्राप्त कॉर्निया के प्रत्यारोपण से ठीक किया जा सकता है। इन 45 लाख व्यक्तियों में 60% बच्चे 12 वर्ष से कम आयु के हैं। अतः हम नेत्रदान करके जाएँ जिससे उनको दृष्टि का वरदान प्राप्त हो जिनके पास दृष्टि नहीं है।

नेत्रदान करते समय हमें निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए-

(1) नेत्रदान करने वाला व्यक्ति किसी भी आयु या लिंग का हो सकता है। चश्मा पहनने वाले या मोतियाबिंद का ऑपरेशन करा चुके व्यक्ति भी नेत्रदान कर सकते हैं। मधुमेह अथवा उच्च रक्तचाप से पीड़ित व्यक्ति, दमे के रोगी, तथा वे व्यक्ति जिन्हें कोई संक्रामक रोग नहीं है, भी नेत्रदान कर सकते हैं।

(2) मृत्यु के पश्चात् 4-6 घंटे के भीतर नेत्र निकाल लिए जाने चाहिए। अतः समीप के नेत्र बैंक को तुरंत सूचित करना चाहिए।

(3) नेत्र बैंक की टीम दिवंगत व्यक्ति के घर पर या अस्पताल में नेत्र निकाल सकती है।

(4) नेत्र निकालने में मात्र 10-15 मिनट का समय लगता है। यह एक सरल प्रक्रिया है तथा इसमें किसी प्रकार का विरूपण नहीं होता।

(5) ऐसे व्यक्ति जो एड्स, हेपेटाइटिस BB या CC , जलभीति, तीव्र ल्यूकीमिया, धनुस्तंभ, हैजा, तानिका शोथ या मस्तिष्क शोथ से संक्रमित हैं या जिनकी मृत्यु इनके कारण हुई हो, नेत्रदान नहीं कर सकते।

प्रश्न 4. वायुमण्डलीय अपवर्तन किसे कहते हैं? वायुमण्डलीय अपवर्तन अनेक प्रकाशिक घटनाओं का कारण बनता है। उन घटनाओं की विवेचना कीजिये।

उत्तर–वायुमण्डलीय अपवर्तन–जब सूर्य का प्रकाश पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करता है तब यह सतत रूप में विरल माध्यम से सघन माध्यम की ओर बढ़ता जाता है। फलतः उससे अपवर्तन की क्रिया होती है। वातावरण में होने वाली अपवर्तन की प्रक्रिया को वायुमण्डलीय अपवर्तन कहते हैं।

336 संजीब बुक्स

वामण्डलीय अपवर्तन अनेक प्रकाशिक घटनाओं का कारण बनता है। उन घटनाओं में से कुछ की विवेचना निम्न प्रकार से है -

1. तारों का टिमटिमाना - वातावरण की विभिन्न परतें गतिमान हैं तथा उनका तापमान तथा घनत्व बदलता रहता है। परिणामतः तारे की आभासी स्थिति में निरन्तर परिवर्तन होता रहता है। तारे की आभासी स्थिति के निरन्तर परिवर्तन के कारण तारे से आने वाले प्रकाश की तीव्रता भी बदलती रहती है। प्रकाश की तीव्रता में परिवर्तन जो कि तारे की आभासी स्थिति में निरन्तर परिवर्तन के कारण होता है, हमारी आँख में प्रवेश करता है, जिससे हमें तारे टिमटिमाते दिखाई देते हैं।

2. अग्रिमसूर्योदय तथा विलंबितसूर्यास्त -

वायुमण्डलीय अपवर्तन के कारण सूर्य हमें वास्तविक सूर्योदय से लगभग 2 मिनट पूर्व दिखाई देने लगता है तथा वास्तविक सूर्यास्त के लगभग 2 मिनट पश्चात् तक दिखाई देता रहता है। वास्तविक सूर्योदय से अर्थ है, सूर्य द्वारा वास्तव में क्षितिज को पार करना। चित्र में सूर्य की क्षितिज के सापेक्ष वास्तविक तथा आभासी स्थितियाँ दर्शायी गयी हैं। वास्तविक सूर्यास्त तथा आभासी सूर्यास्त के बीच समय का अंतर लगभग 2 मिनट है।

[वायुमण्डलीय अपवर्तन का सूर्योदय तथा सूर्यास्त पर प्रभाव जिसमें सूर्य की आभासी स्थिति और वास्तविक स्थिति दिखाई गई है]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 10 मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार चित्र 13

चित्र - वायुमण्डलीय अपवर्तन का सूर्योदय तथा सूर्यास्त पर प्रभाव

3. सूर्य उदय अथवा अस्त होते समय अंडाकार दिखाई देता है जबकि मध्यान्ह (दोपहर) के समय वह गोलाकार दिखाई देता है - सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय सूर्य क्षितिज के निकट होता है। उस समय उसके ऊपरी तथा नीचे के छोर से चलने वाली प्रकाश की किरणें वातावरण में गति करते समय असमान रूप से मुड़ती हैं। इस घटना के फलस्वरूप सूर्य अंडाकार अथवा फैला हुआ दिखाई देता है।

मध्यान्ह के समय सूर्य सिर पर होता है। सूर्य से चलने वाली प्रकाश की किरणें वातावरण में लम्बवत् प्रवेश करती हैं जिससे वे वातावरण में गति करते समय बिल्कुल भी मुड़ती नहीं हैं। यही कारण है कि मध्यान्ह के समय सूर्य गोलाकार दिखाई देता है।

प्रश्न 5. प्रिज्म के लिए प्रिज्म कोण एवं विचलन कोण को परिभाषित कीजिए। श्वेत प्रकाश को प्रिज्म से गुजरने पर प्राप्त स्पेक्ट्रम में वर्णों का क्रम लिखिए। इन्द्रधनुष के बनने की प्रक्रिया को समझाइए। ( प्रश्न बैंक )

उत्तर - प्रिज्म कोण - काँच के त्रिभुजाकार आधार तथा तीन आयताकार पार्श्व पृष्ठ से घिरा क्षेत्र प्रिज्म कहलाता है। आयताकार पृष्ठ एक-दूसरे पर झुके होते हैं। इस प्रकार के प्रिज्म के दो पार्श्व फलकों के बीच के कोण को प्रिज्म कोण कहते हैं।

विचलन कोण - प्रिज्म की विशेष आकृति के कारण निर्गत किरण आपतित किरण की दिशा से एक कोण बनाती है। इस कोण को विचलन कोण कहते हैं।

श्वेत प्रकाश को प्रिज्म से गुजरने पर प्राप्त वर्णों का क्रम निम्न प्रकार है, इसे संक्षिप्त रूप में VIBGYORVIBGYOR कहते हैं जैसे-(i) बैंगनी ( violetviolet ) (ii) जामुनी ( indigoindigo ) (iii) नीला ( blueblue ) (iv) हरा ( greengreen ) (v) पीला ( yellowyellow ) (vi) नारंगी ( orangeorange ) (vii) लाल ( redred ) ।

[इन्द्रधनुष का बनना जिसमें वर्षा की बूँद पर सूर्य का प्रकाश आपतित होकर अपवर्तित, आंतरिक परावर्तित और वर्ण-विक्षेपण दर्शाता है]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 10 मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार चित्र 14

इन्द्रधनुष बनने की प्रक्रिया - इन्द्रधनुष वर्षा के पश्चात् आकाश में जल के सूक्ष्म कणों में दिखाई देने वाला प्राकृतिक स्पेक्ट्रम है। यह वायुमण्डल में उपस्थित जल की सूक्ष्म बूँदों द्वारा सूर्य के प्रकाश में परिक्षेपण के कारण प्राप्त होता है। इन्द्रधनुष सदैव सूर्य की विपरीत दिशा में बनता है जबकि छोटी बूँदें प्रिज्म की भाँति कार्य करती हैं। सूर्य के आपतित प्रकाश को ये बूँदें अपवर्तित तथा विक्षेपित करती हैं। तत्पश्चात् इसे आंतरिक परावर्तित करती हैं अंततः जल की बूँद से बाहर निकलते समय प्रकाश को पुनः अपवर्तित करती हैं। प्रकाश के परिक्षेपण तथा आंतरिक परावर्तन के कारण विभिन्न वर्ण हमारे नेत्रों तक पहुँचते हैं जो हमें इन्द्रधनुष के रूप में दिखाई देते हैं।

चित्र - इन्द्रधनुष का बनना

विज्ञान कक्षा-X 337

प्रश्न 6. आप यह किस प्रकार दर्शा सकते हैं कि सूर्य का प्रकाश सात वर्णों से मिलकर बना है?

(प्रश्न बैंक)

[Recombination of white light spectrum using two identical prisms]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 10 मानव नेत्र तथा रंग-बिरंगा संसार चित्र 15

उत्तर- जब सूर्य के श्वेत प्रकाश को किसी प्रिज्म से गुजारा जाता है तो श्वेत प्रकाश प्रिज्म द्वारा इसके सात अवयवी वर्णों में विक्षेपित हो जाता है जो सुस्पष्ट वर्णों के बैंड या स्पेक्ट्रम के रूप में दिखाई देता है।

अब यदि एक दूसरा सर्व सम प्रिज्म पहले प्रिज्म के सापेक्ष उल्टी स्थिति में रखा जाए तो इससे स्पेक्ट्रम के सभी वर्ण दूसरे प्रिज्म से होकर गुजरेंगे। अब हम देखते हैं कि दूसरे प्रिज्म से श्वेत प्रकाश का किरण पुंज निर्गत हो रहा है। इस प्रेक्षण से सिद्ध होता है कि सूर्य का प्रकाश सात वर्णों से मिलकर बना है।

आंकिक प्रश्न-

प्रश्न 1. एक निकट दृष्टि दोष वाला व्यक्ति 20सेमी.20 \text{सेमी}. दूर स्थित पुस्तक को पढ़ सकता है। पुस्तक को 30सेमी.30 \text{सेमी}. दूर रखकर पढ़ने के लिए उसे कैसा व कितनी फोकस दूरी का लेंस अपने चश्मे में प्रयुक्त करना पड़ेगा?

हल- निकट दृष्टि दोष को दूर करने के लिए ऐसा अवतल लेंस जिसकी फोकस दूरी ff है, का प्रयोग करना होगा जो 30सेमी.30 \text{सेमी}. दूर रखी वस्तु का प्रतिबिम्ब 20सेमी.20 \text{सेमी}. पर बना दे।

दिया है-

v=20सेमी.v=-20 \text{सेमी}. , u=30सेमी.u=-30 \text{सेमी}. ,

f=?f=?

लेंस का सूत्र प्रयोग करने पर- 1f=1v1u\frac{1}{f}=\frac{1}{v}-\frac{1}{u}

मान रखने पर

1f=120130\frac{1}{f}=\frac{1}{-20}-\frac{1}{-30}

1f=120+130=3+260\frac{1}{f}=-\frac{1}{20}+\frac{1}{30}=\frac{-3+2}{60}

1f=160\frac{1}{f}=-\frac{1}{60}

f=60सेमी.∴f=-60 \text{सेमी}. (अवतल लेंस)

प्रश्न 2. किसी व्यक्ति के नेत्र का निकट बिन्दु 50सेमी.50 \text{सेमी}. है। नेत्र से 25सेमी.25 \text{सेमी}. दूरी पर स्थित वस्तुओं को स्पष्ट देख सकने के लिए उस व्यक्ति को जिस संशोधक लेंस की आवश्यकता होगी, उसकी प्रकृति और क्षमता ज्ञात कीजिए।

हल- दिया है-

v=50सेमी.v=-50 \text{सेमी}.

u=25सेमी.u=-25 \text{सेमी}.

लेंस सूत्र का प्रयोग करने पर- 1f=1v1u\frac{1}{f}=\frac{1}{v}-\frac{1}{u}

1f=150125\frac{1}{f}=\frac{1}{-50}-\frac{1}{-25}

1f=150+125=1+250\frac{1}{f}=-\frac{1}{50}+\frac{1}{25}=\frac{-1+2}{50}

1f=150\frac{1}{f}=\frac{1}{50}

f=+50सेमी.∴f=+50 \text{सेमी}.

लेंस की क्षमता P=1f(मीटरमें)P=\frac{1}{f (\text{मीटर} \text{में})}

P=150100=10050=+2DP=\frac{1}{\frac{50}{100}}=\frac{100}{50}=+2 D

अतः व्यक्ति को स्पष्ट देखने के लिए +2डाइऑप्टर+2 \text{डाइऑप्टर} क्षमता वाले उत्तल लेंस की आवश्यकता होगी।

प्रश्न 3. एक व्यक्ति 20सेमी.20 \text{सेमी}. दूरी पर रखी पुस्तक पढ़ सकता है। यदि पुस्तक को 30सेमी.30 \text{सेमी}. दूर रख दिया जाये, तो व्यक्ति को चश्मा प्रयुक्त करना पड़ता है। ज्ञात कीजिए-

(a) प्रयुक्त लेंस की फोकस दूरी (b) प्रयुक्त लेंस का प्रकार

हल-(a) दिया है-

v=20सेमी.,u=30सेमी.,f=?v=-20 \text{सेमी}.,u=-30 \text{सेमी}.,f=?

लेंस के सूत्र से-

1f=1v1u\frac{1}{f}=\frac{1}{v}-\frac{1}{u}

मान रखने पर-

1f=120130\frac{1}{f}=\frac{1}{-20}-\frac{1}{-30}

या

1f=120+130=3+260\frac{1}{f}=-\frac{1}{20}+\frac{1}{30}=\frac{-3+2}{60}

या

1f=160\frac{1}{f}=-\frac{1}{60}

अतः प्रयुक्त लेंस की फोकस दूरी =60सेमी.=-60 \text{सेमी}.

(b) फोकस दूरी ऋणात्मक होने के कारण प्रयुक्त अवतल लेंस होगा।

विज्ञान कक्षा-X

339