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विज्ञान (Science)हिंदी माध्यम2026-27

RBSE Class 10 Science Chapter 13 Solutions in Hindi — हमारा पर्यावरण | पासबुक हल, नोट्स

📅 अंतिम अपडेट: 2026-09-10📖 RBSE/NCERT Solutions
भाग 1 — समाधान (Solutions)

📖 1. समाधान: पाठगत एवं पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

राजस्थान बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान — सभी पाठगत (In-text) एवं अभ्यास (Exercise) प्रश्नों के सटीक एवं संपूर्ण हल।

पाठगत प्रश्न

पृष्ठ 234

प्रश्न 1. पोषी स्तर क्या है? एक आहार श्रृंखला का उदाहरण दीजिए तथा इसमें विभिन्न पोषी स्तर बताइए।

अथवा

पोषी स्तर किसे कहते हैं? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2025-26; प्रश्न बैंक)

उत्तर- पोषी स्तर-स्वपोषी अर्थात् हरे पौधे सौर ऊर्जा का उपयोग करके अपना भोजन बनाते हैं। इन स्वपोषियों को शाकाहारी जन्तु खाते हैं, जिन्हें मांसाहारी जन्तु भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं। इस प्रकार से खाद्य के आहार के अनुसार विभिन्न प्राणियों में एक श्रृंखला बन जाती है, जो आहार श्रृंखला कहलाती है। आहार श्रृंखला की प्रत्येक कड़ी/चरण पोषी स्तर (food level) कहलाती है।

एक आहार श्रृंखला निम्न प्रकार से है-

घास \rightarrow टिड्डा \rightarrow गिरगिट \rightarrow बाज

इस आहार श्रृंखला में चार पोषी स्तर हैं-

(i) प्रथम पोषी स्तर- यह घास है, जो स्वयंकोषी है और उत्पादक कहलाती है।

(ii) द्वितीय पोषी स्तर- यह टिड्डा है, जो शाकाहारी है और प्राथमिक उपभोक्ता कहलाता है।

(iii) तृतीय पोषी स्तर- यह गिरगिट है, जो मांसाहारी है और द्वितीयक उपभोक्ता कहलाता है।

(iv) चतुर्थ पोषी स्तर- यह बाज है, जो मांसाहारी है और तृतीयक उपभोक्ता कहलाता है।

प्रश्न 2. पारितंत्र में अपमार्जकों की क्या भूमिका है?

अथवा

पारितंत्र में अपघटकों की क्या भूमिका है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर- पारितंत्र में अपमार्जकों का विशिष्ट स्थान है। पारितंत्र में जीवाणु तथा अन्य सूक्ष्म जीव अपमार्जकों का कार्य करते हैं। ये पेड़-पौधों एवं जीव-जन्तुओं के मृत शरीरों पर आक्रमण कर जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल पदार्थों में बदल देते हैं। इसी प्रकार कचरा, जैसे-सब्जियों एवं फलों के छिलके, जन्तुओं के मल-मूत्र, पौधों के सड़े-गले भाग अपमार्जकों द्वारा ही विघटित किए जाते हैं। इस प्रकार पदार्थों के पुनः चक्रण में अपमार्जार्यक सहायता करते हैं और वातावरण को स्वच्छ रखते हैं।

पृष्ठ 236

प्रश्न 1. क्या कारण है कि कुछ पदार्थ जैव निम्नीकरणीय होते हैं और कुछ अजैव निम्नीकरणीय?

उत्तर- कुछ पदार्थ जैव निम्नीकरणीय और कुछ अजैव निम्नीकरणीय होते हैं क्योंकि इसमें सूक्ष्मजीवों जैसे जीवाणु, कवक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ये केवल प्राकृतिक पदार्थों जैसे कागज, लकड़ी आदि का अपघटन कर सकते हैं परन्तु मानव निर्मित पदार्थ जैसे प्लास्टिक, पीड़नाशनी आदि का अपघटन नहीं कर सकते हैं; इसलिए कुछ पदार्थ जैव निम्नीकरणीय और कुछ अजैव निम्नीकरणीय होते हैं।

प्रश्न 2. ऐसे दो तरीके सुझाइए जिनमें जैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं।

उत्तर- निम्न दो तरीके हैं, जिनमें जैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं-

(i) निम्नीकरणीय पदार्थ जैसे पेड़ों के पत्ते, सब्जियों के छिलके आदि खाद बनाने के काम आ सकते हैं।

(ii) जैव निम्नीकरणीय पदार्थों में कार्बन की मात्रा ज्यादा होती है। इनके पदार्थों के अपघटन से वातावरण में कार्बन की मात्रा बढ़ जाती है।

प्रश्न 3. ऐसे दो तरीके बताइए जिनमें अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं।

(माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)

अथवा

ऐसे दो क्रियाकलाप बताइए जिनमें अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ पर्यावरण को प्रभावित करते हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर- (i) कृषि की उपज बढ़ाने में उपयोगी शाकनाशी (herbicides), कीटनाशी (Insecticides),

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पेस्टीसाइड्स (Pesticides) आदि का उपयोग किया जाता है। ये रसायन बहकर मिट्टी में तथा जलस्रोतों में मिल जाते हैं तथा उन्हें प्रदूषित कर देते हैं।

(ii) ये पदार्थ खाद्य श्रृंखला में जैव आवर्धित हो जाते हैं और अन्त में मानव को प्रभावित करते हैं।

प्रश्न 1. ओजोन क्या है तथा यह किसी पारितंत्र को किस प्रकार प्रभावित करती है?

उत्तर- ओजोन ' O3O_{3} ' के अणु ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से निर्मित होते हैं। ओजोन एक घातक विष है। परन्तु वायुमण्डल के ऊपरी स्तर (समताप मंडल) में ओजोन एक आवश्यक प्रकायं सम्पादित करती है। यह सूर्य से आने वाली पराबैंगनी विकिरण से पृथ्वी को सुरक्षा प्रदान करती है। यह पराबैंगनी जीवों के लिए अत्यन्त हानिकारक है। उदाहरणतः यह मानव में त्वचा कैंसर उत्पन्न करती है।

प्रश्न 2. आप कचरा निपटान की समस्या कम करने में क्या योगदान कर सकते हैं? किन्हीं दो तरीकों का वर्णन कीजिए।

अथवा

औद्योगिक अपशिष्ट (कचरे) के निपटान में आप क्या योगदान कर सकते हैं? कोई दो तरीके बताइए। (प्रश्न बैंक)

अथवा

कचरा निपटान की समस्या को कम करने के दो तरीकों को समझाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)

उत्तर- कचरा निपटान की समस्या कम करने में हम निम्न योगदान कर सकते हैं-

(i) अजैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट पदार्थों का पुनःचक्रण (Recycling) के बाद पुनः उपयोग (reuse) करना चाहिए।

(ii) जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट पदार्थ जैसे रसोई की बेकार सामग्री, खाना बनाने के बाद बची सामग्री, पत्तियाँ आदि को जमीन में गड्ढा खोदकर इन्हें दबाकर खाद तैयार किया जा सकता है, जिससे पौधों को उच्च कोटि की खाद उपलब्ध हो सके।

पाठ्यपुस्तकों के प्रश्न

प्रश्न 1. निम्न में से कौन-से समूहों में केवल जैव निम्नीकरणीय पदार्थ हैं-

(a) घास, पुष्प तथा चमड़ा
(b) घास, लकड़ी तथा प्लास्टिक
(c) फलों के छिलके, केक एवं नींबू का रस
(d) केक, लकड़ी एवं घास।

उत्तर- (a), (c) व (d) में।

प्रश्न 2. निम्न में से कौन आहार श्रृंखला का निर्माण करते हैं? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2025-26; प्रश्न बैंक)

(a) घास, गेहूँ तथा आम
(b) घास, बकरी तथा मानव
(c) बकरी, गाय तथा हाथी
(d) घास, मछली तथा बकरी

उत्तर- (b) घास, बकरी तथा मानव।

प्रश्न 3. निम्न में से कौन पर्यावरण-मित्र व्यवहार कहलाते हैं?

(a) बाजार जाते समय सामान के लिए कपड़े का थैला ले जाना।
(b) कार्य समाप्त हो जाने पर लाइट (बल्ब) तथा पंखे का स्विच बंद करना।
(c) माँ द्वारा स्कूटर से विद्यालय छोड़ने के बजाय तुम्हारा विद्यालय तक पैदल जाना।
(d) उपर्युक्त सभी।

उत्तर- (d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 4. क्या होगा यदि हम एक पोषी स्तर के सभी जीवों को समाप्त कर दें (मार डालें)? (प्रश्न बैंक)

उत्तर- यदि हम एक पोषी स्तर के सभी जीवों को समाप्त कर देंगे तो आहार श्रृंखला समाप्त हो जाएगी एवं पारिस्थितिक संतुलन प्रभावित होगा। प्रकृति में सभी आहार श्रृंखलाएँ एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। यदि किसी भी एक कड़ी

(पोपी स्तर) को समाप्त कर दें तो उससे पहले के पोपी स्तर में जीवों की संख्या अत्यधिक बढ़ जाएगी और उसके बाद के पोषी स्तर के लिए भोजन अनुपलब्ध हो जाने के कारण संख्या घट जाएगी। उदाहरण के लिए-

(i) यदि शाकाहारियों को नष्ट करते हैं तो मांसाहारी अपना भोजन प्राप्त करने में असमर्थ होंगे तथा मृत्यु को प्राप्त हो जायेंगे।

(ii) यदि पोषी स्तर के मांसाहारी को समाप्त कर दें तो शाकाहारियों की संख्या इतनी ज्यादा बढ़ जाएगी कि वे जीवित रहने के लायक नहीं रहेंगे।

(iii) यदि पोषी स्तर के उत्पादकों को समाप्त कर दें तो उस क्षेत्र के पोषक तत्वों का चक्र पूर्ण नहीं होगा।

प्रश्न 5. क्या किसी पोषी स्तर के सभी सदस्यों को हटाने का प्रभाव भिन्न-भिन्न पोषी स्तरों के लिए अलग-अलग होगा? क्या किसी पोषी स्तर के जीवों को पारितंत्र को प्रभावित किए बिना हटाना सम्भव है?

अथवा

क्या किसी पोषी स्तर के सभी सदस्यों को हटाने का प्रभाव भिन्न-भिन्न पोषी स्तरों के लिए अलग-अलग होगा? ( प्रश्न बैंक )

उत्तर : नहीं, यदि किसी पोषी स्तर के जीवों को नष्ट कर दिया जाए तो पहले तथा बाद के पोषी स्तरों में आने वाले सभी जीवधारी प्रभावित होंगे। सभी पोषी स्तर प्रारम्भ में तीव्रता से एवं बाद में धीमी गति से प्रभावित होंगे।

किसी भी पोषी स्तर के जीवों को पारितंत्र को प्रभावित किए बिना हटाना सम्भव नहीं है क्योंकि प्रकृति की सभी खाद्य श्रृंखलाएँ एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।

प्रश्न 6. जैविक आवर्धन (Biological magnification) क्या है? क्या पारितंत्र के विभिन्न स्तरों पर जैविक आवर्धन का प्रभाव भी भिन्न-भिन्न होगा? ( प्रश्न बैंक )

उत्तर : जैविक आवर्धन (Biological magnification) - अजैव निम्नीकरणीय पीड़कनाशियों जैसे DDTDDT का फसलों के बचाव के लिए व्यापक उपयोग किया जाता है। एक बार वे आहार श्रृंखला में प्रविष्ट हो जाएँ तो उसके बाद प्रत्येक पोषण स्तर (आहार श्रृंखला के चरण) पर उनका सान्द्रण बढ़ता जाता है। परिणामतः लम्बी अवधि में ये यौगिक शीर्ष उपभोगताओं के भीतर संचित होते जाते हैं।

हानिकारक अजैव निम्नीकरणीय रसायनों का खाद्य श्रृंखला में प्रवेश होना और फिर प्रत्येक उच्चतर पोषण स्तर पर उनका अधिकाधिक सान्द्रण बढ़ते जाना ही जैव आवर्धन कहलाता है।

हाँ, विभिन्न पोषी स्तरों में रसायनों की सान्द्रता भिन्न-भिन्न होती है। जैसे-जैसे आहार श्रृंखला की श्रेणी बढ़ती जाती है, रसायनों की सान्द्रता में भी अधिकता होती रहती है और उसका प्रभाव भी बढ़ता जाता है।

प्रश्न 7. हमारे द्वारा उत्पादित अजैव निम्नीकरणीय कचरे से कौन-सी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं? ( प्रश्न बैंक )

उत्तर : हमारे द्वारा उत्पादित अजैव निम्नीकरणीय कचरे से निम्न समस्याएँ उत्पन्न होती हैं-

(i) अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटित नहीं होते हैं।

(ii) इनकी बढ़ती मात्रा का निपटान करना गंभीर समस्या होती है।

(iii) अजैव निम्नीकरणीय कचरे से जल प्रदूषण उत्पन्न हो जाएगा एवं पानी पीने योग्य नहीं होगा।

(iv) नदी-नालों में इस कचरे के कारण पानी का बहाव रुक जाएगा।

(v) प्लास्टिक की थैलियों को जानवरों द्वारा खा लिए जाने के फलस्वरूप उनकी मृत्यु हो जाएगी।

(vi) मृदा कृषि योग्य नहीं रहेगी एवं भूमि उत्पादकता कम हो जाएगी। अर्थात् मृदा प्रदूषण बढ़ता है।

(vii) अजैव निम्नीकरणीय रसायनों का खाद्य श्रृंखला में प्रवेश करने पर विभिन्न बीमारियों से मानव ग्रसित हो जाएगा। उदाहरण के लिए गायों के दूध में और माँ के दूध में डी.डी.टी. का उच्च सान्द्रण पाया गया जिससे नवजात शिशुओं में कई प्रकार के दोष पाए गए।

(viii) पारितन्त्र संतुलन में अवरोध उत्पन्न होता है।

(ix) वायु प्रदूषण बढ़ता है।

प्रश्न 8. यदि हमारे द्वारा उत्पादित सारा कचरा जैव निम्नीकरणीय हो तो क्या इनका हमारे पर्यावरण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा?

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उत्तर—यदि हमारे द्वारा उत्पादित सारा कचरा जैव निम्नीकरणीय हो तो इनका निपटान आसानी से हो जाएगा। जैव निम्नीकरण पदार्थ सरलता से सूक्ष्म जीवों द्वारा अपघटित कर दिए जाते हैं। यह अपशिष्ट लम्बे समय तक नहीं रहते हैं। परन्तु इनकी मात्रा बढ़ जाती है तो कई समस्याएँ भी उत्पन्न हो जाती हैं। जैसे-

(i) चूँकि इनका अपघटन धीमी गति से होता है तो इस प्रक्रिया में दुर्गन्ध एवं विषाक्त गैसें उत्पन्न होती हैं जो जीवों पर हानिकारक प्रभाव डालती हैं।

(ii) कचरा निस्तारण स्थलों पर इनकी मात्रा बढ़ने पर हानिकारक सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ने लगेगी जिसका जीवों पर दुष्प्रभाव पड़ेगा।

(iii) ऐसे पदार्थ जल के साथ बहकर जलाशयों में आ सकते हैं जहाँ ये पोषक पदार्थों का कार्य करेंगे जिससे जलीय जीवों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हो जाएगी जिसका प्रभाव अन्य जीवों पर भी होगा।

प्रश्न 9. ओजोन परत की क्षति हमारे लिए चिन्ता का विषय क्यों है? इस क्षति को सीमित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?

अथवा

ओजोन परत की क्षति के क्या कारण हैं? इस क्षति को सीमित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? ( प्रश्न बैंक )

उत्तर—पृथ्वी के वायुमण्डल में मौजूद ओजोन परत सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों को पृथ्वी की सतह तक आने से रोकती है। रेफ्रिजरेशन, वातानुकूलन, शोधन विलायकों, अग्निशամकों तथा एरोसालों (इत्रों, कीटनाशियों, औषधियों आदि के फुहार डिब्बों में काम आते हैं) आदि से उत्सर्जित रसायन, जैसे- क्लोरो-फ्लोरो कार्बन ( CFCsCFCs ) ओजोन परत को हानि पहुँचाते हैं।

ओजोन परत की क्षति से निम्नलिखित खतरे हो सकते हैं-

(i) त्वचा का कैंसर, त्वचा का जीर्णन, धूपताप्रा (चेहरा आदि का काला पड़ जाना), मोतियाबिन्द (आँख के लैन्स का धुंधला हो जाना, जिससे नजर कमजोर हो जाती है), आँख का रेटिना अर्थात् संवेदी परत जिस पर प्रतिबिम्ब बनता है, का कैंसर।

(ii) आनुवंशिक दोष।

(iii) समुद्र तथा वनों में उत्पादकता में हास।

ओजोन परत की क्षति को सीमित करने के लिए 1987 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ( UNEPUNEP ) में सर्वानुमति बनी कि CFCCFC के उत्पादन को 1986 के स्तर पर ही सीमित रखा जाए। अब CFCsCFCs की जगह हाइड्रोफ्लोरो carbons का प्रयोग आरम्भ किया गया है, जिसमें ओजोन परत को क्षति पहुँचाने वाले क्लोरीन या ब्रोमीन नहीं होते हैं। धीरे-धीरे अब सभी देश इस समस्या से निपटने के लिए अग्रसर हो रहे हैं।

भाग 2 — नोट्स (Notes & Summary)

📝 2. नोट्स: पाठ सार (Key Concepts & Summary)

महत्वपूर्ण परिभाषाएं, रासायनिक समीकरण, नियम, सूत्र एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।

पाठ सार

(1) पर्यावरण- पर्यावरण उन सब सजीव एवं निर्जीव वस्तुओं का, घटनाओं का एवं प्रभावों का सामूहिक स्वरूप है जिसके बीच कोई एक जीव रहता है। सभी जीव अपने अस्तित्व के लिए पर्यावरण पर निर्भर रहते हैं। जीवन की आधारभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पर्यावरण एवं जीव के बीच एक बहुत ही निकट की परस्पर क्रिया होती है।

जीव अपने लिए पर्यावरण की अनेक चीजों पर निर्भर करते हैं- जैसे ऊर्जा, जल, ऑक्सीजन, आहार, आश्रय तथा संगमियों पर।

पर्यावरण का शाब्दिक अर्थ है- सभी ओर से घेरने वाला (परि + आवरण) जीव के चारों ओर पाये जाने वाला परिस्थितियों का समूह जो जीव की वृद्धि एवं विकास को प्रभावित करता है।

(2) जीवविज्ञान की वह शाखा जो जीव व पर्यावरण की पारस्परिक क्रियाओं के अध्ययन से संबंधित है पारिस्थितिकी (Ecology) कहते हैं।

(3) जैव निम्नीकरणयी- वे पदार्थ जिनका जैविक प्रक्रम द्वारा अपघटन हो जाता है जैव निम्नीकरणयी कहलाते हैं। यदि विघटन या अपघटन की दर कम हो जाये तब ये पदार्थ एकत्रित होकर प्रदूषक का कार्य करते हैं। उदाहरण- शाक, फल, मल-मूत्र, कपड़ा, कागज आदि।

(4) अजैव निम्नीकरणयी- वे पदार्थ जिनका जैविक प्रक्रम द्वारा अपघटन नहीं होता है, अजैव निम्नीकरणयी कहलाते हैं। ये पदार्थ सामान्यतः अक्रिय (inert) हैं तथा लम्बे समय तक पर्यावरण में बने रहते हैं। उदाहरण- प्लास्टिक, डी.डी.टी., ऐलुमिनियम के डिब्बे, धातु ऑक्साइड आदि।

(5) पारितंत्र- जैविक समुदाय तथा उसके साथ भौतिक पर्यावरण को मिलाकर परस्पर क्रिया करता हुआ एक तंत्र बन जाता है जिसे पारितंत्र (इकोसिस्टम) कहते हैं।

(6) पारितंत्र में दो प्रकार के घटक आते हैं-

(i) जैविक घटक- इसमें सभी जीव आते हैं, जैसे-सूक्ष्मजीव, पौधे तथा प्राणी।

(ii) अजैविक घटक- भौतिक कारक जैसे मृदा, थल, जल, प्रकाश, तापमान, आर्द्रता, वर्षा, वायु, खनिज आदि अजैव घटक हैं।

(7) पारितंत्र के विभिन्न घटक अन्योन्याश्रित होते हैं।

(8) पारितंत्र के प्रकार-पारितंत्र मुख्य रूप से प्राकृतिक तथा कृत्रिम दो प्रकार का होता है।

(i) प्राकृतिक पारितंत्र-तालाब, झील एवं वन एक प्राकृतिक पारितंत्र हैं। सभी हरे पौधे एवं नील हरित शैवाल, जिनमें प्रकाश-संश्लेषण की क्षमता होती है, उत्पादक होते हैं, शाकभक्षी मछलियाँ एवं कीट आदि प्राथमिक उपभोक्ता होते हैं जो पौधों पर आश्रित होते हैं। बड़े आकार की मांसभक्षी मछलियाँ, मेंढक, टोड आदि द्वितीयक उपभोक्ता होते हैं।

(ii) कृत्रिम पारितंत्र-बगीचा, खेत, जलजीवशाला मानव निर्मित कृत्रिम पारितंत्र हैं। जलजीवशाला एक प्रकार का संतुलित पारितंत्र होता है।

(9) जीवन निर्वाह के आधार पर जीवों को उत्पादक, उपभोक्ता एवं अपघटक वर्गों में बाँटा गया है।

(10) उत्पादक-ये क्लोरोफिल युक्त पादप हैं, जिनमें शैवाल, घास एवं पेड़ आते हैं। ये प्रकाश-संश्लेषण द्वारा सूर्य ऊर्जा (Solar Energy) को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं। यह अधिकतर प्राणियों के लिए भोजन का स्रोत है। हरे पादप को स्वपोषी भी कहते हैं क्योंकि वे अपना भोजन स्वयं बनाते हैं।

(11) उपभोक्ता-वे प्राणी जो स्वयं का भोजन नहीं बना सकते हैं एवं किसी अन्य पर जीवित रहते हैं, उन्हें उपभोक्ता अथवा विषमपोषी (Heterotrophs) कहते हैं। ये ज्यादातर जन्तु होते हैं। वे जन्तु जो सीधे पादपों पर निर्भर रहते हैं, उन्हें शाकभक्षी (Herbivores) कहते हैं।

(12) उपभोक्ताओं को तीन प्रकारों में विभाजित किया गया है-(i) प्राथमिक उपभोक्ता, (ii) द्वितीयक उपभोक्ता, (iii) तृतीयक उपभोक्ता।

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(13) प्राथमिक उपभोक्ता- ये पादपों शैवालों और जीवाणुओं को खाते हैं, प्राथमिक उपभोक्ताओं को शाकाहारी भी कहा जाता है।

(14) द्वितीयक उपभोक्ता- ये शाकाहारियों को मारते हैं और खाते हैं। इन्हें मांसाहारी भी कहते हैं। जब ये मांसाहारी सीधे शाकाहारी पर आश्रित होते हैं तो इन्हें विशिष्ट रूप से प्रथम मांसाहारी कहते हैं। लोमड़ी, भेड़िया आदि स्थलीय पारितंत्र के द्वितीयक उपभोक्ता होते हैं।

(15) तृतीयक उपभोक्ता- ये द्वितीयक उपभोक्ताओं को मारते एवं खाते हैं इन्हें द्वितीयक मांसाहारी भी कहते हैं। उदाहरण-शेर, चीता आदि।

(16) मांसाहारी- वे जंतु जो भोजन के रूप में अन्य जंतुओं को खाते हैं, मांसाहारी (Carnivorous) कहलाते हैं। जैसे-शेर, बिल्ली आदि। ये परजीवी एवं परभक्षी भी हो सकते हैं।

(17) अपघटक- जीवाणु और कवक जैसे सूक्ष्मजीव मृतजैव अवशेषों का अपमार्जन करते हैं। ये सूक्ष्मजीव अपमार्जक/अपघटक हैं क्योंकि ये जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल अकार्बनिक पदार्थों में बदल देते हैं, जो मिट्टी (भूमि) में चले जाते हैं तथा पौधों द्वारा पुनः उपयोग में लाए जाते हैं।

(18) उत्पादक सूर्य से प्राप्त ऊर्जा को पारितंत्र के अन्य सदस्यों को उपलब्ध कराते हैं।

(19) खाद्य श्रृंखला- पारिस्थितिक तंत्र में उत्पादकों से खाद्य ऊर्जा का स्थानान्तरण जीवों द्वारा होता है जिसमें बार-बार खाते हैं व बार-बार खाये जाते हैं। इस श्रृंखला में शाकाहारी, मांसाहारी व अपघटक होते हैं। ऐसी श्रृंखला को खाद्य श्रृंखला कहते हैं।

(20) खाद्य श्रृंखला में किसी भी ऊपरी स्तर की व्यष्टियों की संख्या उससे निचले स्तर की व्यष्टियों की संख्या से कम होती है। उच्चतम स्तर में सबसे कम संख्या होती है। इससे एक प्रकार की संख्याओं का पिरामिड बन जाता है।

(21) खाद्य जाल- अनेक खाद्य श्रृंखलाएँ मिलकर खाद्य जाल बनाती हैं। इसमें जीवधारियों को भोजन प्राप्त करने के अनेक वैकल्पिक रास्ते होते हैं।

(22) ऊर्जा का प्रवाह उत्पादक से उपभोक्ताओं की उच्चतर श्रेणियों में पहुँच जाता है तथा खाद्य श्रृंखला में निचले स्तर से ऊपर के अगले स्तर को ऊर्जा का केवल 10 प्रतिशत ही उपलब्ध होता है। इसे 10 प्रतिशत का नियम कहते हैं। ऊर्जा का प्रवाह एकदिशिक होता है।

जब हम एक पोषी स्तर से दूसरे पोषी स्तर पर जाते हैं तो ऊर्जा का ह्रास होता है, यह आहार श्रृंखला में पोषी स्तरों को सीमित कर देता है।

(23) इकोलॉजिकल (पारिस्थितिक) पिरामिड्स- उत्पादक स्तर से उपभोक्ता स्तर तक जीवों की संख्या जैवभार और ऊर्जा धीरे-धीरे कम होती है। इसे पिरामिड के रूप में भी प्रदर्शित किया जा सकता है। इसे इकोलॉजिकल (पारिस्थितिक) पिरामिड कहते हैं।

**(24) जैविक आवर्धन- DDTDDT ** व अन्य क्लोरीन युक्त हाइड्रोकार्बन पीडकनाशी अविघटनीय यौगिक होते हैं। ये यौगिक या रसायन भोजन के साथ किसी स्व-आहार श्रृंखला में प्रवेश कर जाता है तो इसका सांद्रण धीरे-धीरे प्रत्येक पोषी स्तर में बढ़ जाता है, इस घटना को जैविक आवर्धन कहते हैं।

**(25) ओजोन- O3'O_{3}' ** के अणु ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से बनते हैं। ओजोन एक घातक विष है किन्तु सूर्य से आने वाली पराबैंगनी विकिरण से पृथ्वी को सुरक्षा प्रदान करती है। ये पराबैंगनी विकिरण जीवों के लिए अत्यन्त हानिकारक होते हैं।

**(26) क्लोरोफ्लोरो कार्बन ( CFCCFC )** यौगिक जिन्हें शीतलक में, ठण्डक प्रदान करने वाले रेफ्रिजरेटर, अग्निशमन तथा शीत भंडारण सुविधाओं, प्लास्टिक के रूप में फिलिंग एजेन्ट तथा एरोसॉल पैकेज में उपयोग करने के कारण ये वातावरण में उपस्थित रहते हैं। ये ओजोन परत को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाते हैं।

(27) पराबैंगनी विकिरण जीवों के लिए अत्यन्त हानिकारक हैं उदाहरणतः:

(i) यह मानव में त्वचा का कैंसर उत्पन्न करता है। (ii) आंखों में सूजन, घाव, मोतियाबिन्द उत्पन्न करता है। (iii) मौसम परिवर्तन तथा जलवायु प्रभावित करता है। (iv) शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम करता है।

(28) पैकेजिंग के तरीकों में बदलाव से अजैव निम्नीकरणीय वस्तुओं के कचरे में पर्याप्त वृद्धि हुई है। हमारे द्वारा उत्पादित कचरे का निपटान एक गम्भीर पर्यावरणीय समस्या है।

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भाग 3 — परीक्षा उपयोगी प्रश्न (Important Q&A)

3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Important Questions)

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs), अतिलघूत्तरात्मक, लघूत्तरात्मक एवं निबंधात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न—

प्रश्न 1. आहार श्रृंखला में सूक्ष्मजीवों की प्रमुख भूमिका है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2026)

(अ) अपमार्जक की
(ब) उत्पादक की
(स) उपभोक्ता की
(द) द्वितीय उपभोक्ता की

प्रश्न 2. पीड़नाशकी की आहार श्रृंखला में बढ़ती हुई मात्रा कहलाती है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2026)

(अ) खाद्य जाल
(ब) उपभोक्ता
(स) उत्पादक
(द) जैव आवर्धन

प्रश्न 3. बड़े क्षेत्र में ओजोन की परत काफी पतली हो गई है जिसे सामान्यतः कहा जाता है-

(अ) नाइट्रोजन छिद्र
(ब) हिम अंधता
(स) ऑक्सीजन छिद्र
(द) ओजोन छिद्र

प्रश्न 4. वायुमण्डल का वह क्षेत्र जिसमें ओजोन परत मुख्यतः उपस्थित है-

(अ) आयन मंडल
(ब) मध्य मंडल
(स) क्षोभ मंडल
(द) समताप मंडल

प्रश्न 5. अपघटको का कार्य है-

(अ) भोजन का निर्माण करना
(ब) वायु को शुद्ध करना
(स) वायु को अशुद्ध करना
(द) पदार्थों का चक्रीकरण करना

6. जैव आवर्धन उत्पन्न करने वाला पदार्थ है-

(अ) पीड़कनाशी
(ब) डी.डी.टी.
(स) शाकनाशी
(द) उपर्युक्त सभी

7. खाद्य जाल में ऊर्जा का प्रवाह होता है-

(अ) एक-दिशीय
(ब) द्वि-दिशीय
(स) चतुर्दिशीय
(द) त्रि-दिशीय

8. जैवमण्डल से CO2CO_{2} निकाल दी जाए तो सर्वप्रथम कौनसे जीवों में ऋणात्मक प्रभाव होगा-

(अ) अपघटक
(ब) प्राथमिक उपभोक्ता
(स) द्वितीयक उपभोक्ता
(द) तृतीयक उपभोक्ता

9. यदि किसी पारिस्थितिक तंत्र में से अपघटककों को पूरी तरह से अलग कर दिया जाए, तो पारिस्थितिक तंत्र के कार्य करने पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा, ऐसा इसलिए कि-

(अ) शाकाभक्षियों को सौर ऊर्जा प्राप्त नहीं होगी
(ब) अन्य तत्वों की अपघटन दर बहुत ज्यादा हो जाएगी
(स) खनिज प्रवाह अवरुद्ध हो जाएगा
(द) ऊर्जा प्रवाह रुक जाएगा

10. किसी पारिस्थितिक तंत्र के जैव घटक होते हैं-

(अ) प्रकाश एवं जल
(ब) पौधे एवं मृदा
(स) हरे पौधे एवं जल
(द) पौधे, जानवर, मनुष्य एवं सूक्ष्मजीव

11. निम्न में से कृत्रिम पारिस्थितिक तंत्र है-

(अ) फुलवारी
(ब) पार्क
(स) जल जीवशाला
(द) उपर्युक्त सभी

12. पारिस्थितिक तंत्र के जैव घटकों में जीवाणु एवं कवकों को कहते हैं-

(अ) उत्पादक
(ब) अपमार्जक
(स) अपघटक
(द) सूक्ष्म उपभोक्ता

13. जो पदार्थ जैविक प्रक्रम द्वारा अपघटित हो जाते हैं, उन्हें क्या कहते हैं-

(अ) अजैव निम्नीकरणीय
(ब) जैव-निम्नीकरणीय
(स) अक्रिय
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं

14. ओजोन के एक अणु में कितने परमाणु होते हैं-

(अ) 1
(ब) 2
(स) 3
(द) 4

15. अधिकतम ऊर्जा किस स्तर पर संचित होती है?

(अ) उत्पादक स्तर पर
(ब) प्राथमिक उपभोक्ता में
(स) तृतीयक उपभोक्ता में
(द) अपघटककों में

16. ऊर्जा का प्रवाह होता है-

(अ) दो दिशाओं में
(ब) अनेक दिशाओं में
(स) एक दिशा में
(द) इनमें से कोई नहीं

17. जैव अनिम्नीकरणीय पदार्थों की मात्रा एक पोषी स्तर से अगले पोषी स्तर में बढ़ने की प्रक्रिया कहलाती है-

(अ) ऊर्जा प्रवाह
(ब) आहार जाल
(स) जैव आवर्धन
(द) उपर्युक्त सभी

18. किसी भी आहार श्रृंखला में प्रथम पोषी स्तर किससे निर्मित होता है?

(अ) शाकाहारी
(ब) मांसाहारी
(स) उत्पादक
(द) परिमार्जक

19. निम्नलिखित खाद्य श्रृंखला में सम्भावित कड़ी 'A' क्या हो सकती है-

पौधा \rightarrow कीट \rightarrow मेढ़क \rightarrow 'A' \rightarrow गिद्ध

(अ) खरगोश
(ब) भेड़िया
(स) नाग
(द) तोता

20. तालाब के पारितंत्र में कौनसा जीव एक से अधिक पोषक स्तर पर स्थान ग्रहण करता है-

(अ) पादप प्लवक
(ब) जन्तु प्लवक
(स) मछली
(द) मेढ़क

21. खाद्य श्रृंखला का प्रारम्भ होता है-

(अ) नाइट्रोजन स्थिरीकरण जीवों से
(ब) प्रकाश संश्लेषण से
(स) अपघटककों से
(द) श्वसन से

22. प्रत्येक पोषक स्तर के जीव द्वारा ऊर्जा का कितना प्रतिशत उपयोग होता है-

(अ) 20%
(ब) 30%
(स) 90%
(द) 10%

23. पारिस्थितिक तंत्र में अजैविक व जैविक घटकों के मध्य की योजक कड़ी है-

(अ) अकार्बनिक पदार्थ
(ब) खाद्य जाल
(स) कार्बनिक पदार्थ
(द) पोष रीति

24. ओजोन छिद्र का परिणाम है-

(अ) अम्लीय वर्षा
(ब) पराबैंगनी विकिरण
(स) ग्लोबल वार्मिंग
(द) ग्रीन हाउस प्रभाव

विज्ञान कक्षा-X

421

प्रश्न [25]. अपघटक होते हैं-

(अ) स्वयंंपोषी
(ब) परपोषी
(स) स्वयं परपोषी
(द) कार्बनिकपोषी

प्रश्न [26]. एक्वेरियम (जल जीवशाला) से हरे पौधे समाप्त कर दिए जाये तो-

(अ) मछलियां जीवित नहीं रह पायेगी
(ब) मछलियों का आकार बढ़ जायेगा
(स) मछलियों का आकार घट जायेगा
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं

प्रश्न [27]. " O3O_{3} " किसका रासायनिक प्रतीक है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)

(अ) ऑक्सीजन
(ब) ऑक्साइड
(स) ओजोन
(द) ऑर्गन

प्रश्न [28]. निम्नलिखित में से कौन सौर ऊर्जा का स्थिरीकरण करके उसे विषमपोषियों के लिए उपलब्ध करवाते हैं? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)

(अ) प्राथमिक उपभोक्ता
(ब) द्वितीय उपभोक्ता
(स) तृतीय उपभोक्ता
(द) उत्पादक

प्रश्न [29]. निम्नलिखित में से जैविक घटक है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)

(अ) पादप
(ब) मृदा
(स) वायु
(द) जल

प्रश्न [30]. सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी विकिरणों (Wave) से हमारी सुरक्षा कौनसी परत करती है- (प्रश्न बैंक)

(अ) क्षोभ मण्डल
(ब) समताप
(स) ओजोन
(द) आयन

प्रश्न [31]. किसी आहार श्रृंखला में मान लीजिए कि चौथे पोषी स्तर पर ऊर्जा की मात्रा 5KJ5KJ है तो बताइए कि प्रथम उत्पादक पोषी स्तर पर कितनी ऊर्जा उपलब्ध होगी- (प्रश्न बैंक)

(अ) 5KJ5KJ
(ब) 50KJ50KJ
(स) 500KJ500KJ
(द) 5000KJ5000KJ

प्रश्न [32]. प्राथमिक उपभोक्ता किस पोषी स्तर का निर्माण करते हैं? (प्रश्न बैंक)

(अ) प्रथम
(ब) द्वितीय
(स) तृतीय
(द) चतुर्थ

प्रश्न [33]. हरे पौधे, नीले-हरित शैवाल व कुछ जीवाणु जिनमें प्रकाश संश्लेषण द्वारा स्वपोषी क्षमता होती है, कहलाते हैं- (प्रश्न बैंक)

(अ) उत्पादक
(ब) उपभोक्ता
(स) अपघटक
(द) अपमार्जक

प्रश्न [34]. प्रकाश संश्लेषण की क्रिया के लिए सभी हरे पौधों द्वारा प्राप्त होने वाली सौर ऊर्जा का लगभग कितने प्रतिशत भाग खाद्य ऊर्जा के रूप में अवशोषण होता है- (प्रश्न बैंक)

(अ) 11%
(ब) 22%
(स) 33%
(द) 55%

प्रश्न [35]. प्रत्येक पोषी स्तर पर उपलब्ध कार्बनिक पदार्थ की मात्रा का औसतन कितने प्रतिशत उपभोक्ता के अगले पोषी स्तर तक पहुँचता है- (प्रश्न बैंक)

(अ) 1010%
(ब) 55%
(स) 1515%
(द) 2020%

प्रश्न [36]. ओजोन परत के क्षरण (क्षय) के लिए उत्तरदायी कारक है- (प्रश्न बैंक)

(अ) कार्बन मोनो ऑक्साइड
(ब) मैथेन
(स) क्लोरोफ्लोरो कार्बन
(द) कार्बन डाई ऑक्साइड

प्रश्न [37]. वे जीव जो सौर ऊर्जा का उपयोग कर रासायनिक ऊर्जा (कार्बोहाइड्रेट) का संश्लेषण करते हैं- (प्रश्न बैंक)

(अ) उत्पादक
(ब) उपभोक्ता
(स) अपघटक
(द) अपमार्जक

#### उत्तर-तालिका

1. (अ)

2. (द)

3. (द)

4. (द)

5. (द)

6. (द)

7. (अ)

8. (अ)

9. (स)

10. (द)

11. (द)

12. (स)

13. (ब)

14. (स)

15. (अ)

16. (स)

17. (स)

18. (स)

19. (स)

20. (स)

21. (ब)

22. (द)

23. (स)

24. (ब)

25. (ब)

26. (अ)

27. (स)

28. (द)

29. (अ)

30. (स)

31. (द)

32. (ब)

33. (अ)

34. (अ)

35. (अ)

36. (स)

37. (अ)

       

#### रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

1. पदार्थ जो जैविक प्रक्रम द्वारा अपघटित हो जाते हैं, ...................... कहलाते हैं। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)

2. जीवाणु और कवक मृत जैव अवशेषों का ...................... करते हैं।

3. स्वपोषी सौर प्रकाश में निहित ऊर्जा को ग्रहण करके .................... में बदलते हैं।

4. एक स्थलीय पारितंत्र में हरे पौधे की पत्तियों द्वारा प्राप्त होने वाली सौर ऊर्जा का लगभग .................... भाग खाद्य ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं।

5. ओजोन एक .................... है।

6. सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणें मानव में .................... उत्पन्न करती हैं। (प्रश्न बैंक)

7. अग्निशमन में .................... का उपयोग किया जाता है।

8. पारितंत्र के घटक .................... होते हैं।

9. हमारे द्वारा उत्पादित कचरे का .................... एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या है।

10. जो जीव उत्पादक द्वारा उत्पादित भोजन पर प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से निर्भर करते हैं .................... कहलाते हैं।

11. शाखाण्वित आहार श्रृंखलाओं से बना जाल '....................' कहलाता है। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)

12. पारितंत्र में ऊर्जा का प्रवाह हमेशा .................... होता है। (प्रश्न बैंक)

13. एक पारितंत्र में .................... एवं .................... घटक शामिल हैं। (प्रश्न बैंक)

14. प्राथमिक उपभोक्ता .................... पोषी स्तर का निर्माण करते हैं। (प्रश्न बैंक)

15. द्वितीयक उपभोक्ता .................... पोषी स्तर का निर्माण करते हैं। (प्रश्न बैंक)

16. ओजोन परत सूर्य से आने वाली .................... से सुरक्षा प्रदान करती है। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)

उत्तर- 1. जैव निम्नीकरणीय, 2. अपमार्जन, 3. रासायनिक ऊर्जा, 4. एक प्रतिशत, 5. घातक विष, 6. त्वचा का कैंसर, 7. क्लोरोफ्लुओरो कार्बन, 8. अन्योन्याश्रित, 9. निपटान, 10. उपभोक्ता, 11. आहार जाल, 12. एकदिशीय, 13. जैविक-अजैविक, 14. द्वितीयक, 15. तृतीयक, 16. पराबैंगनी विकिरण।

निम्न को सुमेलित कीजिए-

(i) (ii) मॉथ, गिलहरी, खरगोश, चूहा, टिड्डा। (iii) बाघ, मोर।

प्रश्न 9. 'अपमार्जक' क्या होते हैं? पारितंत्र में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण क्यों है?

विज्ञान कक्षा-X

427

उत्तर-जीवाणु और कवक जैसे सूक्ष्मजीव जो मृतजैविक अवशेषों का अपमार्जन करते हैं, अपमार्यक कहलाते हैं। अपमार्यक किसी भी पारितंत्र के लिए महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि ये जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल अकार्बनिक पदार्थों में बदल देते हैं जो मृदा में चले जाते हैं तथा उत्पादकों द्वारा पुनः उपयोग में लाए जा सकते हैं।

प्रश्न 10. (i) कोई ऐसी विधि लिखिए जिसका अनुप्रयोग करके पीड़कनाशियों का भोजन द्वारा अपने शरीर में प्रवेश कुछ सीमा तक कम कर सकते हैं।

(ii) मानवों के शरीर में पीड़कनाशियों की सांद्रता अधिकतम क्यों पाई जाती है? (1) जैविक कृषि के उत्पादों का उपयोग करना चाहिए। (2) फलों एवं सब्जियों के छिलके हटाकर खाना चाहिए।

(ii) मानवों के शरीर में पीड़कनाशियों की सांद्रता अधिकतम इसलिए क्योंकि खाद्य श्रृंखला में मनुष्य शीर्षस्थ है और पोषण स्तर में ऊपर की ओर जाने पर जैव आवर्धन की मात्रा बढ़ती है।

प्रश्न 11. खाद्य श्रृंखला में एक निचले खाद्य स्तर से उसके ऊपर के स्तर पर जाने में ऊर्जा की हानि क्यों होती है?

अथवा

दस प्रतिशत का नियम क्या है?

उत्तर-किसी खाद्य श्रृंखला में जब हम एक पोषण स्तर से अगले उच्चतर स्तर पर जाते हैं तब ऊर्जा की हानि होती है। क्योंकि खाए हुए भोजन की मात्रा का लगभग 1010% ही जैव मात्रा में बदल पाता है तथा अगले स्तर के उपभोक्ता को उपलब्ध हो पाता है, शेष 90 प्रतिशत विकिरण द्वारा वायुमंडल में खो जाती है। इसे 10 प्रतिशत का नियम भी कहते हैं। अर्थात् प्रकृति में किसी समष्टि द्वारा प्राप्त की गई कुल ऊर्जा का या प्रत्येक स्तर पर उपलब्ध कार्बनिक पदार्थों की मात्रा का औसतन 1010% ही उपभोक्ता के अगले स्तर तक पहुँचता है।

प्रश्न 12. उत्पादक एवं अपमार्यक में कोई चार अन्तर लिखिए।

उत्तर-

क्र.सं.

उत्पादक (Producers)

अपमार्यक (Decomposers)

1.

ये हरे पादप होते हैं।

ये सूक्ष्म जीव (Microorganisms) होते हैं।

2.

उत्पादकों की प्रकृति स्वपोषी प्रकार की होती है।

इनकी प्रकृति विषमपोषी प्रकार की होती है।

3.

इन्हें अकार्बनिक पोषकों की आवश्यकता होती है।

ये अकार्बनिक पोषकों का निर्माण करते हैं।

4.

ये सभी जीवों को भोजन प्रदान करते हैं।

ये कच्ची सामग्री उत्पन्न करते हैं एवं नई पीढ़ी के लिए जगह उत्पन्न करते हैं।

5.

ये प्रथम पोषी स्तर में स्थित होते हैं।

ये अन्तिम पोषी स्तर में आते हैं।

प्रश्न 13. मानव-निर्मित पदार्थ जैसे कि प्लास्टिक का अपघटन जीवाणु अथवा दूसरे मृतजीवियों द्वारा क्यों नहीं हो सकता?

उत्तर-जीवों द्वारा खाए गए भोजन का पाचन विभिन्न एंजाइमों द्वारा किया जाता है। एंजाइम अपनी क्रिया में विशिष्ट होते हैं। किसी विशेष प्रकार के पदार्थ के पाचन/अपघटन के लिए विशिष्ट एंजाइम की आवश्यकता होती है। प्राकृतिक खाद्य वस्तुओं के पाचन/अपघटन के लिए तो जीवों में एंजाइम पाए जाते हैं परन्तु मानव निर्मित पदार्थ जैसे कि प्लास्टिक के अपघटन हेतु कोई एंजाइम नहीं पाया जाता है। यही कारण है प्लास्टिक का अपघटन जीवाणु अथवा दूसरे मृतजीवियों द्वारा नहीं हो सकता।

प्रश्न 14. यदि सूर्य से पौधे को 2,0002,000 जूल ऊर्जा उपलब्ध हो तो निम्नलिखित आहार श्रृंखला में शेर को कितनी ऊर्जा उपलब्ध होगी? गणना कीजिए।

पौधेहिरणशेर\text{पौधे} \rightarrow \text{हिरण} \rightarrow \text{शेर}

उत्तर-ऊर्जा के प्रवाह के 1010% नियम के अनुसार ऊर्जा की केवल 1010% मात्रा ही एक पोषी स्तर से दूसरे पोषी स्तर पर स्थानान्तरित होती है। अतः पौधे को प्राप्त ऊर्जा में से हिरण को 200200 जूल तथा हिरण से शेर को केवल 2020 जूल ऊर्जा ही प्राप्त होगी।

प्रश्न 15. खाद्य स्तर तथा खाद्य श्रृंखला किसे कहते हैं?

उत्तर—पारिस्थितिक तंत्र में प्रत्येक जीव भोजन प्राप्ति हेतु अन्य जीवों पर निर्भर रहता है। भोजन प्राप्ति का क्रम निम्न प्रकार से होता है-

उत्पादक \rightarrow प्राथमिक उपभोक्ता \rightarrow द्वितीयक उपभोक्ता \rightarrow तृतीयक उपभोक्ता \rightarrow सर्वोच्च उपभोक्ता

इस प्रकार खाने व खाये जाने वाले जीवों की श्रृंखला को खाद्य श्रृंखला कहते हैं तथा इसके प्रत्येक स्तर को खाद्य स्तर कहते हैं।

प्रश्न 16. (अ) नीचे दिए गये जीवों की आहार श्रृंखला का सृजन कीजिए- कीट, बाज, घास, सांप, मेढक।

(ब) इस सृजित आहार श्रृंखला के तृतीय पोषी के जीव का नाम लिखिए।
(स) इस आहार श्रृंखला के किस जीव में अजैविक निम्नीकरण रसायनों की सान्द्रता अधिकतम होगी?
(द) इससे संबद्ध परिघटना का नाम लिखिए।

उत्तर—(अ) घासकीटमेढकसांपबाज\text{घास} \rightarrow \text{कीट} \rightarrow \text{मेढक} \rightarrow \text{सांप} \rightarrow \text{बाज}

(ब) इस सृजित आहार श्रृंखला में तृतीय पोषी का नाम मेढक एवं सांप है।
(स) बाज में अजैविक निम्नीकरण रसायनों की सान्द्रता अधिकतम होगी।
(द) इससे संबंधित परिघटना का नाम जैव-आवर्धन है।

प्रश्न 17. जैव निम्नीकरणीय पदार्थों एवं अजैविक निम्नीकरणीय पदार्थों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर— जैव निम्नीकरणीय पदार्थों एवं अजैविक निम्नीकरणीय पदार्थों में अन्तर

(Differences between Biodegradable and Non-biodegradable Wastages)

क्र.सं.

जैव निम्नीकरणीय पदार्थ<br>(Biodegradable Wastage)

अजैविक निम्नीकरणीय पदार्थ<br>(Non-biodegradable Wastage)

1.

वे पदार्थ जो जैविक प्रक्रम द्वारा अपघटित हो जाते हैं, जैव निम्नीकरणीय कहलाते हैं।

ऐसे पदार्थ जो जैविक प्रक्रम द्वारा अपघटित नहीं होते हैं, अजैविक निम्नीकरणीय कहलाते हैं।

2.

इनकी उत्पत्ति जैविक होती है।

ये सामान्यतः मानव द्वारा निर्मित होते हैं।

3.

ये पदार्थ प्रकृति में इकट्ठे नहीं होते हैं।

इनका ढेर लग जाता है एवं प्रकृति में इकट्ठे हो जाते हैं।

4.

जैव निम्नीकरणीय पदार्थ जैव आवर्धन (Biomagnification) प्रदर्शित नहीं करते हैं।

घुलनशील अजैविक निम्नीकरणीय पदार्थ खाद्य श्रृंखला में प्रवेश करते हैं अर्थात् जैव आवर्धन प्रदर्शित करते हैं।

5.

प्रकृति में इनका पुनः चक्रण सम्भव है।

प्रकृति में इन पदार्थों का पुनः चक्रण सम्भव नहीं है।

6.

उदाहरण—मलमूत्र, कागज़, शाक, फल, कपड़ा आदि।

उदाहरण—प्लास्टिक, डी.डी.टी., ऐलुमिनियम के डिब्बे आदि।

प्रश्न 18. सामान्यतः पारितंत्र में खाद्य श्रृंखलाओं में पोषी स्तर अधिकतम चौथे स्तर तक ही क्यों होते हैं? समझाइए।

उत्तर—पारितंत्र में खाद्य श्रृंखलाओं के प्रत्येक स्तर पर उपलब्ध कार्बनिक पदार्थों की मात्रा का औसतन 1010% ही अगले उपभोक्ता स्तर तक पहुँच पाता है। क्योंकि उपभोक्ता के अगले स्तर के लिए ऊर्जा की बहुत कम मात्रा उपलब्ध हो पाती है। प्रत्येक चरण पर ऊर्जा का ह्रास इतना अधिक होता है कि चौथे पोषी स्तर के बाद उपयोगी ऊर्जा की मात्रा बहुत कम हो जाती है। इसीलिए सामान्यतः पारितंत्र में खाद्य श्रृंखलाओं में पोषी स्तर अधिकतम चौथे स्तर तक ही होते हैं।

प्रश्न 19. पर्यावरण से क्या तात्पर्य है? समझाइए।

उत्तर—पर्यावरण (Environment)—किसी जीवधारी के आसपास का वातावरण, जो उसे प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रभावित करता है, पर्यावरण कहलाता है। जीवन की आधारभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के वास्ते पर्यावरण और जीव के बीच परस्पर क्रिया होती है। जीव अपने पर्यावरण की अनेक चीजों पर निर्भर करते हैं—जैसे ऊर्जा, जल, ऑक्सीजन, आहार, आश्रय तथा अपने संगीमियों पर।

वस्तुतः पर्यावरण में दो प्रकार के घटक आते हैं—(1) सजीव अर्थात् जैविक (biotic) घटक जिसमें सभी जीव आते हैं (सूक्ष्मजीव, पौधे तथा प्राणी) (2) निर्जीव अर्थात् अजैविक (abiotic) घटक (इन्हें भौतिक पर्यावरण भी कहा जाता है)। इनमें मृदा, स्थल अथवा जल, प्रकाश, तापमान, आर्द्रता तथा उस क्षेत्र की वर्षा आदि भी शामिल हैं जिनमें वह जीव रहता है।

अतः किसी जीव का पर्यावरण उन तमाम सजीव एवं निर्जीव वस्तुओं का बना होता है जो उसके परिवेश में होती हैं।

विज्ञान कक्षा-X

429

प्रश्न 20. प्राकृतिक पारितंत्रों के उदाहरण देते हुए संक्षिप्त में वर्णन कीजिए।

उत्तर— प्राकृतिक पारितंत्रों के कुछ उदाहरण-

जलीय (Aquatic) पारितंत्र—

(i) तालाब एक पारितंत्र है, जिसके भीतर हरे पौधे (बड़े, छोटे और सूक्ष्मदर्शीय भी) उत्पादक होते हैं एवं शाकभक्षी मछलियाँ एवं कीट आदि प्राथमिक उपभोक्ता होते हैं जो पौधों को भोजन बनाते हैं। बड़े आकार की मांसभक्षी मछलियाँ, मेंढक, टोड आदि द्वितीयक उपभोक्ता होते हैं।

(ii) समुद्र भी एक पारितंत्र है, जिसके भीतर हरे शैवाल ऊपरी परतों में पाए जाते हैं जो प्रथम स्तर पर आहार का उत्पादन करते हैं। शाकभक्षी मछलियाँ, घोंघे एवं अन्य विविध प्राणी प्राथमिक उपभोक्ता होते हैं, बड़ी मछलियाँ द्वितीयक उपभोक्ता होते हैं और इस प्रकार क्रम आगे चलता जाता है।

स्थलीय (Terrestrial) पारितंत्र—

वन एक स्थलीय पारितंत्र होता है जिसके भीतर हरे वृक्ष, हरी झाड़ियाँ तथा हरी घास उत्पादक हैं। हिरण, खरगोश, चूहे और गिलहरियाँ प्राथमिक उपभोक्ता हैं एवं बाघ, भेड़िया, लोमड़ी, उल्लू आदि द्वितीयक उपभोक्ता हैं।

प्रश्न 21. जैव निम्नीकरणीय किसे कहते हैं? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)

उत्तर— वे पदार्थ जो जैविक प्रक्रम द्वारा अपघटित हो जाते हैं, जैव निम्नीकरणीय कहलाते हैं। इनकी उत्पत्ति जैविक होती है तथा प्रकृति में ये पदार्थ एकत्रित नहीं होते हैं। इनका प्रकृति में पुनः चक्रण सम्भव है।

उदाहरण— मानव एवं पशुओं का मलमूत्र, शाक, खाद्य पदार्थ, कपड़ा आदि।

प्रश्न 22. पारितंत्र में उत्पादक व उपभोक्ता किसे कहते हैं? समझाइये। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)

उत्तर— उत्पादक— सभी हरे पौधे एवं नील-हरित शैवाल जो प्रकाश संश्लेषण द्वारा खाद्य पदार्थ बनाते हैं, उत्पादक कहलाते हैं।

उपभोक्ता— वे जीव जो उत्पादक द्वारा उत्पादित भोजन पर प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से निर्भर करते हैं, उपभोक्ता कहलाते हैं।

प्रश्न 23. पर्यावरण के विभिन्न घटकों के बीच ऊर्जा के प्रवाह को समझाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)

उत्तर— उत्तर हेतु निबन्धात्मक प्रश्न नं. 6 के भाग (i) का अवलोकन करें।

प्रश्न 24. आहार श्रृंखला के विभिन्न पोषी स्तरों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)

उत्तर— आहार श्रृंखला का प्रत्येक चरण अथवा कड़ी एक पोषी स्तर बनाते हैं। स्वपोषी अथवा उत्पादक प्रथम पोषी स्तर है तथा सौर ऊर्जा का स्थिरीकरण करके उसे विषमपोषियों अथवा उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कराते हैं। शाकाहारी अथवा प्राथमिक उपभोक्ता द्वितीय पोषी स्तर, छोटे मांसाहारी अथवा द्वितीयक उपभोक्ता तीसरे पोषी स्तर तथा बड़े मांसाहारी अथवा तृतीय उपभोक्ता चौथे पोषी स्तर का निर्माण करते हैं।

प्रश्न 25. स्वपोषी एवं विषमपोषी में अन्तर बताइये। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)

उत्तर— स्वपोषी एवं विषमपोषी में अंतर—

स्वपोषी

विषमपोषी

(a) वे जीवधारी जो सरल अकार्बनिक पदार्थों से कार्बनिक भोज्य पदार्थों का निर्माण स्वयं कर लेते हैं, स्वपोषी कहलाते हैं।

(a) वे जीवधारी जो स्वयं भोज्य पदार्थ निर्मित नहीं करते बल्कि दूसरे जीवों से प्राप्त करते हैं, विषमपोषी कहलाते हैं।

(b) पारितंत्र में सभी स्वपोषी जीव उत्पादक कहलाते हैं।

(b) पारितंत्र में विषमपोषी उपभोक्ता कहलाते हैं। कुछ विषमपोषी अपघटक के रूप में कार्य करते हैं।

(c) उदाहरण—सभी हरे पौधे, नील हरित शैवाल एवं प्रकाश संश्लेषी जीवाणु।

(c) उदाहरण—सभी जन्तु, कवक, अधिकांश जीवाणु, परजीवी पादप (जैसे-अमरबेल)।

प्रश्न 26. वायुमंडल में ओजोन की मात्रा में गिरावट का एक मुख्य कारक किस रसायन को माना गया है व इसकी रोकथाम के लिए क्या कदम उठाया गया था? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)

उत्तर—वायुमण्डल में ओजोन की मात्रा में गिरावट का एक मुख्य कारक 'क्लोरोफ्लोरो कार्बन' CFCCFC को माना गया है।

रोकथाम के लिए कदम- 1987 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) में सर्वानुमति बनी कि CFCCFC के उत्पादन को 1986 के स्तर पर ही सीमित रखा जाए। अब यह अनिवार्य है कि दुनियाभर की सभी विनिर्माण कम्पनियाँ CFCCFC रहित रेफ्रिजरेटर बनाएँ।

प्रश्न 27. अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ को उदाहरण सहित समझाइए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर—बहुत से मानव निर्मित पदार्थ जैसे कि प्लास्टिक का अपघटन जीवाणु अथवा दूसरे मृतजीवियों द्वारा नहीं हो सकता। इन पदार्थों पर भौतिक प्रक्रम जैसे कि ऊष्मा तथा दाब का प्रभाव होता है, परन्तु सामान्य अवस्था में लम्बे समय तक पर्यावरण में बने रहते हैं। ऐसे पदार्थ जो इस प्रकार अपघटित नहीं होते 'अजैव निम्नीकरणीय' कहलाते हैं। ये पदार्थ सामान्यतः अक्रिय होते हैं तथा लम्बे समय तक पर्यावरण में बने रहते हैं।

प्रश्न 28. नगरीय अजैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट के निपटान में आप क्या योगदान कर सकते हैं? किन्हीं दो तरीकों को समझाइए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर—नगरीय अजैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट के निपटान में हम निम्न योगदान कर सकते हैं-

(1) अजैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट पदार्थों का पुनःचक्रण (Recycling) के बाद पुनः उपयोग (Reuse) कर सकते हैं।

(2) पॉलीथीन बैग के स्थान पर जूट, कपड़े या कागज से बने बैग का उपयोग प्राथमिकता से कर सकते हैं।

दीर्घउत्तरीय प्रश्न-

प्रश्न 1. (i) वायुमण्डल में ओजोन का निर्माण किस प्रकार होता है? समझाइए।

अथवा

वायुमण्डल के उच्चतर स्तर पर ओजोन बनने की क्रिया को समीकरण द्वारा समझाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)

(ii) जैव निम्नीकरणीय पदार्थ और अजैव निम्नीकरणीय पदार्थों में कोई तीन अन्तर लिखिए।

उत्तर—(i) वायुमण्डल के उच्चतर स्तर पर पराबैंगनी ( UVUV ) विकिररण के प्रभाव से ऑक्सीजन ( O2O_{2} ) अणुओं से ओजोन बनती है, उच्च ऊर्जा वाले पराबैंगनी विकिरण ऑक्सीजन अणुओं ( O2O_{2} ) को विघटित कर स्वतंत्र ऑक्सीजन ( OO ) परमाणु बनाते हैं। ऑक्सीजन के ये स्वतंत्र परमाणु संयुक्त होकर ओजोन बनाते हैं जैसा कि समीकरण में दर्शाया गया है-

O2पराबैंगनी(UV)O+OO_{2} \rightarrow \text{पराबैंगनी} (UV)O+O

O+OO3O+O \rightarrow O_{3} (ओजोन)

(ii) जैव निम्नीकरणीय पदार्थ और अजैवनिम्नीकरणीय पदार्थ में अन्तर-

क्र.सं.

जैव निम्नीकरणीय पदार्थ

अजैव निम्नीकरणीय पदार्थ

1.

वे पदार्थ जो जैविक प्रक्रम द्वारा अपघटित हो जाते हैं। जैव निम्नीकरणीय कहलाते हैं।

ऐसे पदार्थ जो जैविक प्रक्रम द्वारा अपघटित नहीं होते हैं, अजैव निम्नीकरणीय कहलाते हैं।

2.

इनकी उत्पत्ति जैविक होती है।

ये सामान्यतः मानव द्वारा निर्मित होते हैं।

3.

ये पदार्थ प्रकृति में इकट्ठे नहीं होते हैं। <br> उदाहरण : मलमूत्र, कागज, शाक फल कपड़ा आदि।

इनका ढेर लग जाता है। <br> उदाहरण-प्लास्टिक, डी.डी.टी. आदि।

प्रश्न 2. (i) किसी पारितंत्र में ऊर्जा प्रवाह की दो विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

(ii) खाद्य श्रृंखला व खाद्य जाल में अन्तर लिखिए।

उत्तर—(i) किसी भी पारितंत्र में ऊर्जा प्रवाह की दो मुख्य विशेषताएँ होती हैं। जो निम्न हैं-

(1) ऊर्जा का प्रवाह एक ही दिशा में होता है। स्वपोषी जीवों द्वारा ग्रहण की गई ऊर्जा पुनः सौर ऊर्जा में परिवर्तित नहीं होती तथा शाकाहारीयों को स्थानांतरित की गई ऊर्जा पुनः स्वपोषी जीवों को उपलब्ध नहीं होती। जिसे यह विभिन्न पोषी स्तरों पर क्रमिक स्थानांतरित होती है। अपने से पहले स्तर के लिए उपलब्ध नहीं होती।

(2) प्रत्येक स्तर पर ऊर्जा की हानि के कारण प्रत्येक पोषी स्तर पर उपलब्ध ऊर्जा में उत्तरोत्तर ह्रास होता है।

(ii) खाद्य श्रृंखला तथा खाद्य जाल में अन्तर-

क्र.सं.

खाद्य श्रृंखला (Food Chain)

खाद्य जाल (Food Web)

1.

खाद्य श्रृंखला जीवों का वह क्रम है जिसमें समुदाय के एक जीव से दूसरे जीव में ऊर्जा भोज्य पदार्थ के रूप में स्थानान्तरित होती है।

अनेक खाद्य श्रृंखलाएँ मिलकर खाद्य जाल बनाती हैं इसमें जीवधारियों को भोजन प्राप्त करने के लिए अनेक वैकल्पिक रास्ते होते हैं।

2.

इसमें जीवों की संख्या सीमित होती है।

अपेक्षाकृत जीवों की संख्या अधिक या असीमित होती है।

3.

एक खाद्य स्तर का जीव दूसरे खाद्य स्तर के जीव से जुड़ता है।

एक जीव का उपयोग खाद्य पदार्थ के रूप में एक से अधिक खाद्य श्रृंखलाओं के जीवों द्वारा किया जा सकता है।

प्रश्न 3. पारितंत्र किसे कहते हैं? किसी जलीय प्राकृतिक पारितंत्र का चित्र बनाकर वर्णन कीजिए।

उत्तर - पारितंत्र (Ecosystem) - किसी विशिष्ट स्थान पर पाये जाने वाले सभी जीव तथा पर्यावरण के पारस्परिक संबंधों द्वारा बने तंत्र को पारितंत्र (Ecosystem) कहते हैं।

तालाब पारितंत्र, पारितंत्र का उचित उदाहरण है। यह एक स्थिर जलीय पारितंत्र है। तालाब पारितंत्र जैवीय एवं अजैवीय घटकों का बना होता है-

(1) अजैविक कारक - तालाब पारितंत्र के अजैविक कारक जल, CO2CO_{2} , O2O_{2} अकार्बनिक यौगिक होते हैं और कार्बनिक यौगिक, प्रकाश, तापमान, दाब pH आदि होते हैं।

(2) जैविक कारक - तालाब पारितंत्र के जैविक कारक उत्पादक, उपभोक्ता एवं अपघटक होते हैं।

(i) उत्पादक - उत्पादक अजैविक पदार्थों से ऊर्जा का संश्लेषण करते हैं। तालाब के उत्पादों से नील हरित शैवाल, हरित शैवाल, जलमग्न पादप और तैरने वाले पादप सम्मिलित हैं।

(ii) उपभोक्ता - उपभोक्ता दूसरे जीवों को खाते हैं, वे जीव जो उत्पादकों पर निर्भर रहते हैं उन्हें प्राथमिक उपभोक्ता या शाकाहारी कहते हैं। उदाहरण - प्लवक जन्तु, साइक्लोपस, कीट आदि।

[तालाब का जलीय पारिस्थितिक तंत्र जिसमें उत्पादक तथा विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ता दर्शाए गए हैं]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 13 हमारा पर्यावरण चित्र 2

चित्र - एक तालाबीय जल पारिस्थितिक तंत्र में उत्पादक तथा विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ता।

मांसाहारी या द्वितीयक उपभोक्ताओं द्वारा प्राथमिक उपभोक्ताओं को खाया जाता है। इन मांसाहारी को प्राथमिक उपभोक्ता कहते हैं क्योंकि खाद्य श्रृंखला में ये पहले मांसाहारी होते हैं। उदाहरण - छोटी मछलियां, मेढक आदि। द्वितीयक उपभोक्ताओं को तृतीयक उपभोक्ताओं या द्वितीयक मांसाहारियों द्वारा खाया जाता है। उदाहरण- बड़ी मछलियाँ।

432

(iii) अपघटक-जीवाणु, कवक तथा एक्टिनोयाइसिटीज़ इस समूह को प्रदर्शित करते हैं। उदाहरण - एस्परजिलस।

प्रश्न 4. (i) जीवाणु एवं कवक अपघटक क्यों कहलाते हैं? पर्यावरण के लिए अपघटकों का महत्व लिखिए।

(ii) उत्पादक तथा उपभोक्ता में दो अन्तर लिखिए।

उत्तर—(i) जीवाणु तथा कवक अपघटक कहलाते हैं क्योंकि ये मृत पेड़-पौधों एवं जीव जन्तुओं के शरीर में उपस्थित जटिल कार्बनिक यौगिकों को सरल पदार्थों में अपघटित कर देते हैं।

अपघटकों का महत्व -

1. अपघटक पर्यावरण की स्वच्छता के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान अदा करते हैं।

2. अपघटक पदार्थों के चक्रण की क्रिया में योगदान करते हैं।

(ii) उत्पादक तथा उपभोक्ता में अन्तर -

क्र.सं.

उत्पादक

उपभोक्ता

1.

उत्पादक एक ही प्रकार के होते हैं।

जबकि उपभोक्ता प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक प्रकार के हो सकते हैं।

2.

उत्पादक प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा भोजन का निर्माण करते हैं।

उपभोक्ता स्वयं अपने भोजन के निर्माण में असमर्थ होते हैं अर्थात् भोजन नहीं बना सकते हैं।

3.

उत्पादक सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं।

जबकि ये पादपों से प्राप्त ऊर्जा का उपयोग करते हैं।

प्रश्न 5. (i) खाद्य जाल क्या है? समझाइए एवं इसका उदाहरण दीजिए।

(ii) खाद्य जाल का महत्व लिखिए। (ii) पारितंत्र के कोई तीन महत्व लिखिए।

उत्तर—(i) पारिस्थितिक पिरामिड— उत्पादक स्तर से उपभोक्ता स्तर, जीवों की संख्या, जैव भार और ऊर्जा धीरे-धीरे कम हो जाती है। इसे पिраमिड (स्तूप) के रूप में भी प्रदर्शित किया जा सकता है। इसे पारिस्थितिक पिरामिड कहते हैं।

विज्ञान कक्षा-X

433

[पोषी स्तर पिरामिड (Trophic level pyramid showing Producer, Primary consumer, Secondary consumer, Tertiary consumer)]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 13 हमारा पर्यावरण चित्र 3

चित्र-पोषी स्तर

(ii) पारितंत्र का महत्त्व-

(1) प्रत्येक पारितंत्र चाहे वह प्राकृतिक हो या मानव जनित हो, उसे प्रदूषकों और पीड़कियों से सुरक्षा की आवश्यकता होती है।

(2) पारितंत्र का अध्ययन विभिन्न प्रकार के जीवों और उनके अजैविक वातावरण के बीच के संबंधों के बारे में सूचनाएं प्रदान करता है।

(3) पारितंत्र की वाहक क्षमता को ज्ञात करके उत्पादकता और उपभोक्ता की संख्या ज्ञात की जा सकती है, जिसे कि उस पारितंत्र के द्वारा संभाला जा सकता है।

प्रश्न 7. दैनिक जीवन में कोई चार गतिविधियाँ सुझाएँ जो पर्यावरण के अनुकूल हों।

(माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)

उत्तर— दैनिक जीवन की गतिविधियाँ जो पर्यावरण के अनुकूल हैं-

(i) प्लास्टिक की थैलियों के स्थान पर कपड़े, कागज व जूट के थैलों का उपयोग करना।

(ii) आने-जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना और कम दूरी के लिए पैदल या साइकिल का उपयोग करना।

(iii) उपयोग में न होने पर लाइट व पंखे बंद करना।

(iv) जैव निम्नीकरणीय और अजैविक निम्नीकरणीय कचरे को अलग-अलग डिब्बों में संग्रहित करना।

प्रश्न 8. जलीय जीवों के नाम उसी क्रम में लिखिए जिसमें एक जीव दूसरे को खाता है तथा एक ऐसी श्रृंखला की स्थापना कीजिए जिसमें कम से कम 3 (तीन) चरण हों।

(माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)

[जलीय खाद्य श्रृंखला के तीन बॉक्स (Box 1 → Box 2 → Box 3)]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 13 हमारा पर्यावरण चित्र 4

उत्तर— जलीय खाद्य श्रृंखला-

हरे पौधे, हरे शैवाल \rightarrow शाकभक्षी मछली, घोंघे, सूक्ष्मजीव \rightarrow पक्षी, माँसभक्षी मछलियाँ

घास के मैदान में आहार श्रृंखला- घास के मैदान में आहार श्रृंखला को निम्न उदाहरण द्वारा समझा जा सकता है—

घास \rightarrow कीट \rightarrow मेंढक \rightarrow साँप \rightarrow बाज

उत्पादक \rightarrow प्राथमिक उपभोक्ता \rightarrow द्वितीयक उपभोक्ता \rightarrow तृतीयक उपभोक्ता \rightarrow चतुर्थ उपभोक्ता

घास के मैदान में घास उत्पादक के रूप में कार्य करती है जिसे प्राथमिक उपभोक्ता अर्थात् शाकाहारियों द्वारा भोजन के रूप में खाया जाता है। कीट जैसे शाकाहारियों को द्वितीयक उपभोक्ता अथवा प्राथमिक मांसाहारियों जैसे मेंढक द्वारा खाया जाता है। मेंढक को तृतीयक उपभोक्ता अथवा द्वितीयक मांसाहारियों जैसे साँप द्वारा भोजन के रूप में ग्रहण किया जाता है। साँप को चतुर्थ या सर्वोच्च उपभोक्ता जैसे बाज द्वारा अपना भोजन बनाया जाता है। एक प्रकार घास के मैदान में खाने एवं खाये जाने के क्रम से आहार श्रृंखला का निर्माण होता है।

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निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. ( क ) आहार श्रृंखला से क्या अभिप्राय है?

( ख ) घास के मैदान में आहार श्रृंखला को उदाहरण सहित समझाइए।

( ग ) एक पारितन्त्र में ऊर्जा प्रवाह को आरेख द्वारा स्पष्ट कीजिए।

अथवा

एक पारितन्त्र में ऊर्जा प्रवाह दर्शाइए। ( प्रश्न बैंक )

उत्तर—( क ) खाद्य श्रृंखला–पारिस्थितिक तंत्र में प्रत्येक जीव भोजन प्राप्ति हेतु अन्य जीवों पर निर्भर रहता है। इनका क्रम निम्न है-

उत्पादकप्राथमिकउपभोक्ताद्वितीयकउपभोक्तातृतीयकउपभोक्तासर्वोच्चउपभोक्ता\text{उत्पादक} \rightarrow \text{प्राथमिक} \text{उपभोक्ता} \rightarrow \text{द्वितीयक} \text{उपभोक्ता} \rightarrow \text{तृतीयक} \text{उपभोक्ता} \rightarrow \text{सर्वोच्च} \text{उपभोक्ता}

इस प्रकार खाने व खाये जाने वाले जीवों की श्रृंखला को खाद्य श्रृंखला कहते हैं।

( ख ) घास के मैदान में आहार श्रृंखला–घास के मैदान में आहार श्रृंखला को निम्न उदाहरण द्वारा समझा जा सकता है-

घास \rightarrow कीट \rightarrow मेंढक \rightarrow साँप \rightarrow बाज

उत्पादक, प्राथमिक उपभोक्ता, द्वितीयक उपभोक्ता, तृतीयक उपभोक्ता, चतुर्थ उपभोक्ता

घास के मैदान में घास उत्पादक के रूप में कार्य करती है जिसे प्राथमिक उपभोक्ता अर्थात् शाकाहारियों द्वारा भोजन के रूप में खाया जाता है। कीट जैसे शाकाहारियों को द्वितीयक उपभोक्ता अथवा प्राथमिक मांसाहारियों जैसे मेंढक द्वारा खाया जाता है। मेंढक को तृतीयक उपभोक्ता अथवा द्वितीयक मांसाहारियों जैसे साँप द्वारा भोजन के रूप में ग्रहण किया जाता है। साँप को चतुर्थ या सर्वोच्च उपभोक्ता जैसे बाज द्वारा अपना भोजन बनाया जाता है। एक प्रकार घास के मैदान में खाने एवं खाये जाने के क्रम से आहार श्रृंखला का निर्माण होता है।

( ग ) पारितंत्र में ऊर्जा प्रवाह–पर्यावरण के विभिन्न घटकों की परस्पर अन्योन्यक्रिया में निकाय के एक घटक से दूसरे में ऊर्जा का प्रवाह होता है। स्वपोषी सौर प्रकाश में निहित ऊर्जा को ग्रहण करके रासायनिक ऊर्जा में बदल देते हैं। यह ऊर्जा संसार के सम्पूर्ण जैव समुदाय की सभी क्रियाओं के संपादन में सहायक है। स्वपोषी से ऊर्जा विषमपोषी एवं अपघटक तक जाती है। ऊर्जा संरक्षण के नियम के आधार पर ऊर्जा का एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तन होता है तो पर्यावरण में ऊर्जा की कुछ मात्रा का अनुपयोगी ऊर्जा के रूप में ह्रास हो जाता है। यह हम निम्नलिखित प्रकार से समझ सकते हैं-

[पारितंत्र में ऊर्जा का प्रवाह आरेख चित्र]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 13 हमारा पर्यावरण चित्र 5

चित्र-एक पारितंत्र में ऊर्जा के प्रवाह का आरेख चित्र

प्रश्न 2. 'पोषी स्तर' से आप क्या समझते हैं? पारितंत्र में पोषी स्तरों को एक अनुपात चित्र द्वारा दर्शाइए।

उत्तर—पारितंत्र में विभिन्न जैविक स्तरों पर भाग लेने वाले जीव आहार श्रृंखला का निर्माण करते हैं। आहार श्रृंखला का प्रत्येक चरण अथवा कड़ी एक पोषी स्तर बनाते हैं। स्वपोषी अथवा उत्पादक प्रथम पोषी स्तर हैं तथा सौर ऊर्जा का स्थिरीकरण करके उसे विषमपोषियों अथवा उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कराते हैं। शाकाहारी, अथवा प्राथमिक उपभोक्ता द्वितीय पोषी स्तर, छोटे मांसाहारी अथवा द्वितीय उपभोक्ता तीसरे पोषी स्तर तथा बड़े मांसाहारी अथवा तृतीय उपभोक्ता चौथे पोषी स्तर का निर्माण करते हैं।

विज्ञान कक्षा-X

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[पोषी स्तर का पिरामिड (Pyramid of trophic levels showing producers, primary, secondary, and tertiary consumers)]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 13 हमारा पर्यावरण चित्र 6

चित्र-पोषी स्तर

प्रश्न 3. पारितंत्र को परिभाषित कीजिए। इसके विभिन्न घटकों का वर्णन कीजिए।

उत्तर— पारितंत्र-वातावरण के सभी जीवित और निर्जीव घटकों के सम्पूर्ण संतुलन के फलस्वरूप बनी इकाई पारितंत्र कहलाती है अर्थात् जीवधारी तथा वातावरण के पारस्परिक सम्बन्धों को पारितंत्र कहते हैं। पारितंत्र में इसके घटक पारस्परिक गतिज संतुलन में बने रहते हैं।

पारितंत्र के घटक- पारितंत्र के मुख्यत: दो घटक होते हैं- (क) अजैविक घटक (ख) जैविक घटक।

(क) अजैविक/निर्जीव घटक- इसके अन्तर्गत निम्नलिखित को सम्मिलित किया जाता है-

(i) अकार्बनिक पदार्थ- नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, सल्फर आदि की मात्रा पुन: चक्रण द्वारा वातावरण में निश्चित बनी रहती है।

(ii) कार्बनिक पदार्थ- कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन, वसा आदि का जैविक तथा अजैविक वातावरण में चक्रण होता रहता है। हरे पौधे तथा अपघटक इनके चक्रण को बनाए रखते हैं।

(iii) जलवायुवीय कारक- इसमें ताप, वर्षा, वायु, मृदा, जल आदि भौतिक कारकों को सम्मिलित किया जाता है।

(ख) जैविक घटक- इसके अन्तर्गत निम्नलिखित घटक आते हैं-

(i) उत्पादक- यह स्वपोषी अर्थात् हरे पौधे एवं नील हरित शैवाल होते हैं, जो प्रकाश-संश्लेषण द्वारा कार्बनिक भोज्य पदार्थों का निर्माण करते हैं। यह प्रकाश ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलकर कार्बनिक पदार्थों में संचित कर देते हैं।

(ii) उपभोक्ता- यह अपने भोजन के लिए प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से उत्पादकों पर निर्भर रहते हैं। इनको मुख्यत: शाकाहारी, मांसाहारी, सर्वाहारी तथा परजीवी में बाँटा गया है। सामान्यत: इन्हें निम्न वर्गों में बाँटते हैं-

( अ ) प्राथमिक उपभोक्ता- यह अपना भोजन सीधे उत्पादकों से प्राप्त करते हैं। यह शाकाहारी जन्तु होते हैं, जैसे-गाय, खरगोश, चूहा आदि।

( ब ) द्वितीयक उपभोक्ता- यह मांसाहारी होते हैं और अपना भोजन शाकाहारी जन्ुओं को बनाते हैं, जैसे-सर्प, मेंढक आदि।

( स ) तृतीयक उपभोक्ता- यह भी मांसाहारी होते हैं और अपने भोजन के लिए द्वितीयक उपभोक्ताओं पर निर्भर रहते हैं।

इसी प्रकार इनसे उच्च श्रेणी के उपभोक्ता भी हो सकते हैं। अन्त में सर्वाहारी आते हैं, जो अपना भोजन मांसाहारी एवं शाकाहारी, दोनों प्रकार से प्राप्त करते हैं, जैसे-मानव।

(iii) अपघटक (Decomposers)- कवक और कुछ बैक्टीरिया मृत तथा सड़ते गलते पादप अथवा प्राणी शरीरों पर मृतजीवी (saprophytic) तौर पर रहते हैं और उनका सरलतर पदार्थों में विघटन करते हैं। ये पदार्थ फिर से वापस पर्यावरण में पहुँच जाते हैं और एक बार पुन: हरे पौधों को उपलब्ध हो जाते हैं। इन जीवों को अपघटक कहते हैं।

436

प्रश्न 4. पारितंत्र किसे कहते हैं? एक कृत्रिम पारितंत्र का चित्र बनाकर वर्णन कीजिए।

अथवा

एक्वेरियम एक संतुलित पारितंत्र होता है। समझाइए।

उत्तर—पारितंत्र (Ecosystem)—वातावरण के सभी जीवित और निर्जीव घटकों के सम्पूर्ण संतुलन के फलस्वरूप बनी इकाई पारितंत्र कहलाती है अर्थात् जीवधारी तथा वातावरण के पारस्परिक सम्बन्धों को पारितंत्र कहते हैं।

एक कृत्रिम पारितंत्र-जलजीवशाला (एक्वेरियम)

जलजीवशाला (एक्वेरियम) जल से भरा काँच का एक पात्र होता है। इसमें मिट्टी होती है जिसके भीतर कुछ जलीय पौधे लगा दिए जाते हैं, जिससे यह स्व-निर्वाह तंत्र बन जाता है। इसके भीतर कुछ मछलियाँ तैरती रहती हैं। इसके भीतर खाद्य-श्रृंखलाएँ स्थापित हो जाती हैं। मछलियों द्वारा छोड़ी गई CO2CO_{2} पौधों द्वारा भोजन बनाने में इस्तेमाल हो जाती है एवं पौधों द्वारा छोड़ी गई ऑक्सीजन को मछलियाँ श्वसन के लिए उपयोग में ले लेती हैं। मछलियों का मल-मूत्र पौधों के लिए पोषक बन जाता है। कुछ अपघटक (बैक्टीरिया) मिट्टी में मौजूद हो सकते हैं जो मृत जैविक पदार्थ (उदाहरण के लिए टूटी अथवा मृत पत्तियों) को विघटित करते हैं। इस प्रकार एक्वेरियम एक संतुलित पारितंत्र है।

[एक्वेरियम (जलजीवशाला) जिसमें जल, मछली, मृदा, हरे पौधे तथा घोंघा दर्शाये गए हैं]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 13 हमारा पर्यावरण चित्र 7

चित्र-एक्वेरियम (जलजीवशाला)

प्रश्न 5. खाद्य श्रृंखला तथा खाद्य जाल का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।

उत्तर—(i) खाद्य श्रृंखला (Food Chain)—पारिस्थितिक तंत्र में विभिन्न जैविक स्तरों पर भाग लेने वाले जीवों की श्रृंखला खाद्य या आहार श्रृंखला कहलाती है।

इसका प्रत्येक चरण या कड़ी एक पोषी स्तर बनाते हैं। प्रथम पोषी स्तर स्वपोषी अथवा उत्पादकों का होता है, जो सौर ऊर्जा का स्थिरीकरण करके उसे विषमपोषियों अथवा उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध कराते हैं। शाकाहारी (प्राथमिक उपभोक्ता) द्वितीय पोषी स्तर, छोटे मांसाहारी जीव (द्वितीय उपभोक्ता) तीसरे पोषी स्तर तथा बड़े मांसाहारी जीव (तृतीयक उपभोक्ता) चौथे पोषी स्तर का निर्माण करते हैं।

[अनेक आहार श्रृंखलाओं से बना आहार जाल (शेर, सारस, चील, उल्लू, मोर, मछली, साँप, सूअर, कुत्ता, मेंढक, कबूतर, बिल्ली, भेड़, बिच्छू, टिड्डा, कीड़े, चूहा, खरगोश, हिरन, शैवाल, घास, झाड़ियाँ, पेड़)]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 13 हमारा पर्यावरण चित्र 8

चित्र-अनेक आहार श्रृंखलाओं से बना आहार जाल

विज्ञान कक्षा-X

437

पर्यावरण के विभिन्न घटकों की परस्पर अन्योन्य क्रिया में निकाय के एक घटक से दूसरे घटक में ऊर्जा का प्रवाह होता है। इस प्रकार खाद्य श्रृंखला पारिस्थितिक तंत्र में भोजन तथा ऊर्जा के प्रवाह को प्रदर्शित करती है।

आहार श्रृंखला सामान्यतः तीन अथवा चार चरण की होती है। प्रत्येक चरण पर ऊर्जा का ह्रास इतना अधिक होता है कि चौथे पोषी स्तर के बाद उपयोगी ऊर्जा की मात्रा बहुत कम हो जाती है।

कुछ आहार श्रृंखलाएँ निम्न प्रकार से हैं-

(i) पेड़ \rightarrow हिरण \rightarrow शेर

(ii) घास \rightarrow टिड्डा \rightarrow मेंढक \rightarrow साँप \rightarrow बाज

(iii) शैवाल \rightarrow कीट/कीड़ा \rightarrow मछली \rightarrow सारस

(ii) खाद्य जाल (Food Web)—विभिन्न आहार श्रृंखलाओं की लम्बाई एवं जटिलता में काफी अन्तर होता है। सामान्यतः प्रत्येक जीव दो अथवा अधिक प्रकार के जीवों द्वारा खाया जाता है, जो स्वयं अनेक प्रकार के जीवों का आहार बनते हैं। अतः एक सीधी आहार श्रृंखला के बजाय जीवों के मध्य आहार सम्बन्ध शाखान्वित होते हैं तथा शाखान्वित श्रृंखलाओं का जाल बनाते हैं, जिसे खाद्य या आहार जाल कहते हैं।

इस प्रकार खाद्य जाल बहुत जटिल एवं बड़ा होता है, जिसमें ऊर्जा का प्रवाह बहुमुखी होता है। इसमें पोषण स्तर पारितंत्र में प्राकृतिक संतुलन को प्रदर्शित करते हैं।

प्रश्न 6. (i) पर्यावरण के विभिन्न घटकों के बीच ऊर्जा के प्रवाह का विस्तृत अध्ययन करने पर कौनसी प्रमुख बातें ज्ञात होती है?

(ii) ओजोन परत के ह्रास से होने वाले दो दुष्प्रभाव लिखिए।

उत्तर-(i) पर्यावरण के विभिन्न घटकों के बीच ऊर्जा के प्रवाह का विस्तृत अध्ययन करने पर निम्न बातें ज्ञात होती हैं-

(i) एक स्थलीय पारितंत्र में हरे पौधे की पत्तियों द्वारा प्राप्त होने वाली सौर ऊर्जा का लगभग 11% भाग खाद्य ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं।

(ii) जब हरे पौधे प्राथमिक उपभोक्ता द्वारा खाए जाते हैं, ऊर्जा की बड़ी मात्रा का पर्यावरण में ऊष्मा के रूप में ह्रास होता है। कुछ मात्रा का उपयोग पाचन, विभिन्न जैव कार्यों में, वृद्धि एवं जनन में होता है। खाए हुए भोजन की मात्रा का लगभग 1010% ही जैव मात्रा में बदल पाता है तथा अगले स्तर के उपभोक्ता को उपलब्ध हो पाता है।

(iii) अतः प्रत्येक स्तर पर उपलब्ध कार्बनिक पदार्थों की मात्रा का औसतन 1010% ही उपभोक्ता के अगले स्तर तक पहुँचता है।

(iv) क्योंकि उपभोक्ता के अगले स्तर के लिए ऊर्जा की बहुत कम मात्रा उपलब्ध हो पाती है, अतः आहार श्रृंखला सामान्यतः तीन अथवा चार चरण की होती है। प्रत्येक चरण पर ऊर्जा का ह्रास इतना अधिक होता है कि चौथे पोषी स्तर के बाद उपयोगी ऊर्जा की मात्रा बहुत कम हो जाती है।

(v) सामान्यतः निचले पोषी स्तर पर जीवों की संख्या अधिक होती है। अतः उत्पादक स्तर पर यह संख्या सर्वाधिक होती है।

(vi) विभिन्न आहार श्रृंखलाओं की लंबाई एवं जटिलता में काफी अंतर होता है। आमतौर पर प्रत्येक जीव दो या अधिक प्रकार के जीवों द्वारा खाया जाता है, जो स्वयं अनेक प्रकार के जीवों का आहार बनता है। अतः एक सीधी खाद्य श्रृंखला के बजाय जीवों के मध्य खाद्य संबंध शाखान्वित होते हैं तथा ये सब मिलकर खाद्य श्रृंखलाओं का एक जाल बनाते हैं जिसे 'खाद्य जाल' कहते हैं।

(ii) ओजोन परत के ह्रास से होने वाले दुष्प्रभाव निम्न हैं-

(i) मनुष्य के शरीर की त्वचा की उपरी कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। (ii) त्वचा के कैंसर की सम्भावना बढ़ जायेगी। (iii) पराबैंगनी किरणें आँखों में सूजन, घाव, मोतियाबिंद का कारण होती हैं।

प्रश्न 7. (i) वर्तमान समय में प्रदूषण से सम्बन्धित दो प्रमुख चिन्ताजनक घटनाएँ क्या हैं?

(ii) ओजोन परत के ह्रास को रोकने के कोई तीन उपाय लिखिए। (1) ओजोन परत का अपक्षय। (2) अपशिष्ट निपटान (कचरा प्रबंधन)।

438

(1) ओजोन परत का अपक्षय—ओजोन ( O3O_{3} ) के अणु ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से बनते हैं। ओजोन एक घातक गैस है परन्तु यह सूर्य से आने वाले पराबैंगनी विकिरणों (UV-विकिरण) से पृथ्वी को सुरक्षा प्रदान करती है। यह पराबैंगनी विकिरण जीवों के लिए अत्यन्त हानिकारक है। उदाहरण के लिए, यह विकिरण मानव में त्वचा कैंसर उत्पन्न करती है।

वायुमण्डल के उच्चतर स्तर पर पराबैंगनी विकिरण के प्रभाव से ऑक्सीजन ( O2O_{2} ) अणुओं से ओजोन बनती है, जो सुरक्षा आवरण का कार्य करती है। परन्तु 1980 से वायुमण्डल में ओजोन की मात्रा में तीव्रता से गिरावट आने लगी है। क्लोरो-फ्लोरो कार्बन ( CFCsCFCs ) जैसे मानव संश्लेषित रसायनों को इसका मुख्य कारक माना गया है। इन रसायनों का उपयोग रेफ्रीजेरेटर (शीतलन) एवं अग्निशमन के लिए किया जाता है। ओजोन की घटती मात्रा के कारण ही 1987 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) में सर्वानुमति बनी कि CFCsCFCs के उत्पादन को 1986 के स्तर पर ही सीमित रखा जाए।

(2) कचरा प्रबंधन—वर्तमान में किसी भी नगर एवं कस्बे में जाने पर चारों तरफ कचरे के ढेर दिखाई देते हैं। हमारी जीवन शैली में हो रहे सुधार के साथ-साथ उत्पादित कचरे की मात्रा भी बहुत अधिक होती जा रही है। हमारी अभिवृत्ति में परिवर्तन भी एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निर्वाह करता है। हम प्रयोज्य (निवर्तनीय) वस्तुओं का प्रयोग अधिक करने लग गये हैं। पैकेजिंग के तरीकों में बदलाव से अजैव निम्नीकरण वस्तु के कचरे में पर्याप्त वृद्धि हुई है।

उदाहरण के लिए कुछ वर्ष पूर्व रेलगाड़ियों में चाय काँच के गिलासों में दी जाती थी, जो चाय वाले को वापस कर दिए जाते थे। परन्तु बाद में स्वच्छता एवं स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए डिस्पोजेबल कप एवं गिलास के उपयोग को बढ़ावा दिया गया। उस समय किसी ने भी कल्पना नहीं की थी कि प्रतिदिन लाखों की संख्या में उपयोग किए जाने वाले इन कपों का प्रभाव (impact) क्या होगा। अत्यधिक उपयोग के कारण वर्तमान में इन अजैव निम्नीकरणीय वस्तुओं के कचरे में पर्याप्त वृद्धि हो रही है, जिसका हमारे पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इस प्रकार हमारे द्वारा उत्पादित कचरे का निपटान एक गम्भीर पर्यावरणीय समस्या बनती जा रही है।

(ii) ओजोन परत के ह्रास को रोकने के उपाय निम्न हैं—

(i) ओजोन परत को नष्ट करने वाले सबसे घातक पदार्थ CFC तथा हैलोन का उत्पादन पूर्णरूपेन बंद कर देना चाहिए।

(ii) वायुमण्डल में क्लोरीन का स्तर कम किया जाना चाहिए।

(iii) वृक्षों की कटाई पर रोक लगानी चाहिए तथा वृक्षारोपण को बढ़ाना देना चाहिए।