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📚 कक्षा 10 विज्ञान (Science)हिंदी माध्यमसत्र 2026-27 सम्पूर्ण हल

पाठ 3: धातु एवं अधातु

Metals and Non-metals

📅 शैक्षणिक सत्र: 2026-27•📖 RBSE/NCERT डिजिटल पासबुक•🎯 संपूर्ण प्रश्नोत्तर
भाग 1 — समाधान (Solutions)

📖 1. समाधान: पाठगत एवं पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

राजस्थान बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान — सभी पाठगत (In-text) एवं अभ्यास (Exercise) प्रश्नों के सटीक एवं संपूर्ण हल।

पाठगत प्रश्न

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प्रश्न 1. ऐसी धातु का उदाहरण दीजिए जो

(i) कमरे के ताप पर द्रव होती है। (ii) चाकू से आसानी से काटा जा सकता है। (iii) ऊष्मा की सबसे अच्छी चालक होती है। (iv) ऊष्मा की कुचालक होती है।

उत्तर- (i) पारद या पारा या मरकरी ( HgHg ) ऐसी धातु है जो कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में पायी जाती है।

(ii) लीथियम ( LiLi ), सोडियम ( NaNa ), पोटैशियम ( KK ) आदि धातुओं को चाकू से आसानी से काटा जा सकता है।

(iii) सिल्वर ( AgAg ) ऊष्मा की सबसे अच्छी चालक होती है।

(iv) लैड ( PbPb ) तथा मरकरी ( HgHg ) ऊष्मा की कुचालक होती हैं।

प्रश्न 2. आघातवर्ध्य तथा तन्य का अर्थ बताइए।

उत्तर- आघातवर्ध्य-कुछ धातुओं को पीटकर पतली चादर के रूप में बदला जा सकता है। इस गुण को आघातवर्ध्यनीयता तथा ऐसी धातुओं को आघातवर्ध्य धातु कहते हैं। सोना तथा चाँदी सबसे अधिक आघातवर्ध्य धातुएँ हैं।

तन्व्य-धातुओं को एक पतले तार के रूप में खींचने की क्षमता को तन्व्यता कहते हैं। सोना सबसे अधिक तन्व्य धातु है। एक ग्राम सोने से 22 किलोमीटर लम्बा तार बनाया जा सकता है।

पृष्ठ 51

प्रश्न 1. सोडियम को केरोसिन में डुबोकर क्यों रखा जाता है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर- सोडियम ऑक्सीजन के साथ इतनी तेजी से अभिक्रिया करती है कि खुले में रखने पर आग पकड़ लेती है। इसलिए इसे सुरक्षित रखने तथा आकस्मिक आग को रोकने के लिए केरोसिन तेल में डुबोकर रखा जाता है। यह नमी से भी अभिक्रिया करता है।

प्रश्न 2. इन अभिक्रियाओं के लिए समीकरण लिखिए-

(i) भाप के साथ आयरन (ii) जल के साथ कैल्सियम तथा पोटैशियम।

उत्तर-

(i) 3Fe(s)+4H2O(g)→Fe3O4(s)+4H2(g)3Fe_{(s)}+4H_{2}O_{(g)} \rightarrow Fe_{3}O_{4}(s)+4H_{2}(g)

(ii) Ca(s)+2H2O(l)→Ca(OH)2(aq)+H2(g)Ca_{(s)}+2H_{2}O_{(l)} \rightarrow Ca(OH)_{2}(aq)+H_{2}(g)

2K(s)+2H2O(l)→2KOH(aq)+H2(g)+ऊष्मीयऊर्जा2K_{(s)}+2H_{2}O_{(l)} \rightarrow 2KOH(aq)+H_{2}(g)+\text{ऊष्मीय} \text{ऊर्जा}

प्रश्न 3. A, B, C एवं D चार धातुओं के नमूनों को लेकर एक-एक करके निम्न विलयन में डाला गया। इससे प्राप्त परिणाम को निम्न प्रकार से सारणीबद्ध किया गया है-

धातु

आयरन (II) सल्फेट

कॉपर (II) सल्फेट

जिंक सल्फेट

सिल्वर नाइट्रेट

A

कोई अभिक्रिया नहीं

विस्थापन

  

B

विस्थापन

 

कोई अभिक्रिया नहीं

 

C

कोई अभिक्रिया नहीं

कोई अभिक्रिया नहीं

कोई अभिक्रिया नहीं

विस्थापन

D

कोई अभिक्रिया नहीं

कोई अभिक्रिया नहीं

कोई अभिक्रिया नहीं

कोई अभिक्रिया नहीं

इस सारणी का उपयोग कर धातु A, B, C एवं D के सम्बन्ध में निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

(i) सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु कौनसी है? (ii) धातु B को कॉपर (II) सल्फेट के विलयन में डाला जाए तो क्या होगा? (iii) धातु A, B, C एवं D को अभिक्रियाशीलता के घटते हुए क्रम में व्यवस्थित कीजिए।

उत्तर-

(i) सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु B है। क्योंकि यह आयरन (II) सल्फेट के साथ विस्थापन अभिक्रिया देता है।

(ii) धातु B को कॉपर (II) सल्फेट के विलयन में डालने पर विस्थापन अभिक्रिया होती है जिसके कारण कॉपर (II) सल्फेट विलयन का नीला रंग फीका हो जाता है तथा कॉपर ( CuCu ) विस्थापित होकर धातु B पर निक्षेपित हो जाती है।

(iii) धातु B सबसे अधिक अभिक्रियाशील है क्योंकि यह आयरन को अपने विलयन से विस्थापित कर देती है। धातु A कम अभिक्रियाशील है क्योंकि यह कॉपर को अपने विलयन से विस्थापित कर देती है। धातु C और भी कम अभिक्रियाशील होती है क्योंकि यह केवल सिल्वर को ही अपने विलयन से विस्थापित कर सकती है। धातु D सबसे कम अभिक्रियाशील है क्योंकि यह किसी भी धातु को अपने विलयन से विस्थापित नहीं कर पाती है। इसलिए धातुओं की अभिक्रियाशीलता का घटता क्रम निम्नानुसार होगा-

B>A>C>DB>A>C>D

**प्रश्न 4. अभिक्रियाशील धातु को तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल में डाला जाता है तो कौनसी गैस निकलती है? आयरन के साथ तनु H2SO4H_{2}SO_{4} की रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।**

उत्तर- किसी अभिक्रियाशील धातु को तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ( HClHCl ) में डालने पर H2H_{2} (हाइड्रोजन) गैस निकलती है।

आयरन के साथ तनु H2SO4H_{2}SO_{4} की अभिक्रिया:

Fe(s)+H2SO4(aq)→FeSO4(aq)+H2(g)↑Fe_{(s)}+H_{2}SO_{4}(aq) \rightarrow FeSO_{4}(aq)+H_{2}(g) \uparrow

विज्ञान कक्षा-X 69

आयरन के साथ तनु H2SO4H_{2}SO_{4} की रासायनिक अभिक्रिया का समीकरण निम्न प्रकार से है-

Fe(s)+H2SO4(aq)→FeSO4(aq)+H2(g)↑Fe_{(s)}+H_{2}SO_{4(aq)} \rightarrow FeSO_{4(aq)}+H_{2(g)} \uparrow

प्रश्न 5. जिंक को आयरन (II) सल्फेट के विलयन में डालने से क्या होता है? इसकी रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।

उत्तर- जिंक आयरन की तुलना में अधिक अभिक्रियाशील होता है इसलिए जिंक आयरन को आयरन (II) सल्फेट विलयन से विस्थापित कर देता है जिससे हल्के हरे रंग का आयरन सल्फेट विलयन रंगहीन हो जाता है।

Zn(s)+FeSO4(aq)→ZnSO4(aq)+Fe(s)Zn_{(s)}+FeSO_{4(aq)} \rightarrow ZnSO_{4(aq)}+Fe_{(s)}

(आयरन (II) सल्फेट) (जिंक सल्फेट) (आयरन)

(हरा विलयन) (रंगहीन विलयन)

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प्रश्न 1. (i) सोडियम, ऑक्सीजन एवं मैग्नीशियम के लिए इलेक्ट्रॉन-बिन्दु संरचना लिखिए।

उत्तर-

सोडियम की इलेक्ट्रॉन बिन्दु संरचना →Na•\rightarrow Na^{•}

ऑक्सीजन की इलेक्ट्रॉन बिन्दु संरचना →••O••\rightarrow ••O•• (with 8 dots)

मैग्नीशियम की इलेक्ट्रॉन बिन्दु संरचना →Mg••\rightarrow Mg^{••}

**(ii) इलेक्ट्रॉन के स्थानांतरण के द्वारा Na2ONa_{2}O एवं MgOMgO का निर्माण दर्शाइए।**

उत्तर- Na2ONa_{2}O का बनना-

Na→Na++e−Na \rightarrow Na^{+}+e^{-}

2,8,12,82,8,12,8

(सोडियम धनायन)

O+2e−→O2−O+2e^{-} \rightarrow O^{2-}

(2,6)(2,8)(2,6)(2,8)

(ऑक्सीजन ऋणायन)

[Electron transfer for Na_2O formation]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 3 धातु एवं अधातु चित्र 1

MgOMgO का बनना-

Mg→Mg2++2e−Mg \rightarrow Mg^{2+}+2e^{-}

2,8,22,82,8,22,8

(मैग्नीशियम धनायन)

O+2e−→O2−O+2e^{-} \rightarrow O^{2-}

2,62,82,62,8

(ऑक्सीजन ऋणायन)

[Electron transfer for MgO formation]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 3 धातु एवं अधातु चित्र 2

(iii) इन यौगिकों में कौनसे आयन उपस्थित हैं?

उत्तर- Na2ONa_{2}O में उपस्थित आयन-

धनायन = Na+Na^{+} (सोडियम धनायन)

ऋणायन = O2−O^{2-} (ऑक्सीजन ऋणायन)

MgOMgO में उपस्थित आयन-

धनायन = Mg2+Mg^{2+} (मैग्नीशियम धनायन)

ऋणायन = O2−O^{2-} (ऑक्सीजन ऋणायन)

प्रश्न 2. आयनिक यौगिकों का गलनांक उच्च क्यों होता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22; प्रश्न बैंक)

उत्तर : आयनिक यौगिकों में धनायन एवं ऋणायन निश्चित क्रम में संयोजित होते हैं तथा इनमें अन्तर-आयनिक बल अधिक होता है। आयनिक यौगिकों को जब गर्म किया जाता है, तब इनमें उपस्थित प्रबल अन्तर-आयनिक आकर्षण बल को समाप्त करने के लिए अधिक मात्रा में ऊष्मीय ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इस कारण इनका गलनांक उच्च होता है।

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प्रश्न 1. निम्न पदों की परिभाषा दीजिए-

(i) खनिज (ii) अयस्क (iii) गैंग।

उत्तर :

(i) खनिज : पृथ्वी की भूपर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले तत्वों या यौगिकों को खनिज कहते हैं।

(ii) अयस्क : कुछ स्थानों पर खनिजों में कोई विशेष धातु काफी मात्रा में होती है, जिन्हें निकालना लाभकारी होता है। इन खनिजों को अयस्क (Ore) कहते हैं। जैसे-लैड का अयस्क गैलेना ( PbSPbS ) होता है।

(iii) गैंग : पृथ्वी से प्राप्त खनिज अयस्कों में मिट्टी, रेत आदि जैसी कई अशुद्धियाँ होती हैं जिन्हें गैंग (gangue) कहा जाता है।

प्रश्न 2. दो धातुओं के नाम बताइए जो प्रकृति में मुक्त अवस्था में पाई जाती हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर : गोल्ड (सोना) तथा प्लैटिनम प्रकृति में मुक्त अवस्था में पाई जाने वाली धातुएँ हैं।

प्रश्न 3. धातु को उसके ऑक्साइड से प्राप्त करने के लिए किस रासायनिक प्रक्रम का उपयोग किया जाता है?

उत्तर : धातु को उसके ऑक्साइड से प्राप्त करने के लिए अपचयन प्रक्रम का उपयोग करते हैं। इसके लिए अपचायक के रूप में कार्बन तथा सक्रिय धातुएँ जैसे-सोडियम, कैल्शियम, ऐलुमिनियम आदि का उपयोग करते हैं।

पृष्ठ 61

प्रश्न 1. जिंक, मैग्नीशियम एवं कॉपर के धात्विक ऑक्साइडों को निम्न धातुओं के साथ गर्म किया गया-

धातु

जिंक

मैग्नीशियम

कॉपर

जिंक ऑक्साइड

   

मैग्नीशियम ऑक्साइड

   

कॉपर ऑक्साइड

   

किस स्थिति में विस्थापन अभिक्रिया घटित होगी?

उत्तर : विस्थापन अभिक्रिया में एक अधिक अभिक्रियाशील धातु किसी कम अभिक्रियाशील धातु को उसके धात्विक लवण से विस्थापित कर देती है। जिंक, मैग्नीशियम एवं कॉपर में से मैग्नीशियम सबसे अधिक अभिक्रियाशील है जबकि कॉपर सबसे कम अभिक्रियाशील है। इसलिए इनकी क्रियाशीलता का क्रम निम्न प्रकार होगा-

Mg>Zn>CuMg>Zn>Cu

अतः दी गई तालिका में निम्न प्रकार से विस्थापन अभिक्रिया होगी-

धातु

जिंक

मैग्नीशियम

कॉपर

जिंक ऑक्साइड

विस्थापन अभिक्रिया नहीं होगी।

विस्थापन अभिक्रिया होगी।

विस्थापन अभिक्रिया नहीं होगी।

मैग्नीशियम ऑक्साइड

विस्थापन अभिक्रिया नहीं होगी।

विस्थापन अभिक्रिया नहीं होगी।

विस्थापन अभिक्रिया नहीं होगी।

कॉपर ऑक्साइड

विस्थापन अभिक्रिया होगी।

विस्थापन अभिक्रिया होगी।

विस्थापन अभिक्रिया नहीं होगी।

प्रश्न 2. कौनसी धातु आसानी से संक्षारित नहीं होती है?

उत्तर : वे धातुएँ, जो वायु, जल तथा अम्लों से अभिक्रिया नहीं करतीं, वे शीघ्रता से संक्षारित नहीं होती हैं। जैसे-सोना एवं प्लैटिनम।

प्रश्न 3. मिश्र धातु क्या होते हैं?

उत्तर : दो या दो से अधिक धातुओं के समांगी मिश्रण को मिश्र धातु कहते हैं। इसके लिए पहले मूल धातु को गलित अवस्था में लाते हैं। तत्पश्चात् दूसरे तत्वों को एक निश्चित अनुपात में इसमें मिलाकर फिर इसे कमरे के ताप पर ठण्डा किया जाता है।

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1. निम्न में कौनसा युगल विस्थापन अभिक्रिया प्रदर्शित करता है-

(a) NaClNaCl विलयन एवं कॉपर धातु
(b) MgCl2MgCl_{2} विलयन एवं ऐलुमिनियम धातु
(c) FeSO4FeSO_{4} विलयन एवं सिल्वर धातु
(d) AgNO3AgNO_{3} विलयन एवं कॉपर धातु

उत्तर-(d) AgNO3AgNO_{3} विलयन एवं कॉपर धातु।

प्रश्न 2. लोहे के फ्राइंग पैन (frying pan) को जंग से बचाने के लिए निम्न में से कौनसी विधि उपयुक्त है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)

(a) ग्रीज़ लगाकर
(b) पेंट लगाकर
(c) जिंक की परत चढ़ाकर
(d) ऊपर के सभी

उत्तर-(c) जिंक की परत चढ़ाकर।

प्रश्न 3. कोई धातु ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया कर उच्च गलनांक वाला यौगिक निर्मित करती है। यह यौगिक जल में विलेय है। यह तत्व क्या हो सकता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2025-26; प्रश्न बैंक)

(a) कैल्सियम
(b) कार्बन
(c) सिलिकन
(d) लोहा

उत्तर-(a) कैल्सियम।

प्रश्न 4. खाद्य पदार्थ के डिब्बों पर जिंक की बजाय टिन का लेप होता है क्योंकि- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22; प्रश्न बैंक)

(a) टिन की अपेक्षा जिंक महँगा है।
(b) टिन की अपेक्षा जिंक का गलनांक अधिक है।
(c) टिन की अपेक्षा जिंक अधिक अभिक्रियाशील है।
(d) टिन की अपेक्षा जिंक कम अभिक्रियाशील है।

उत्तर-(c) टिन की अपेक्षा जिंक अधिक अभिक्रियाशील है।

प्रश्न 5. आपको एक हथौड़ा, बैटरी, बल्ब, तार एवं स्विच दिया गया है-

(a) इनका उपयोग कर धातुओं एवं अधातुओं के नमूनों के बीच आप विभेद कैसे कर सकते हैं?
(b) धातुओं एवं अधातुओं में विभेदन के लिए इन परीक्षणों की उपयोगिताओं का आकलन कीजिए।

उत्तर-(a) (i) हथौड़े की चोट से यदि दिया गया नमूना टूट जाता है, तो वह अधातु है। परन्तु यदि वह एक पतली चादर के रूप में परिवर्तित हो जाता है, तो वह धातु है आघातवर्ध्य होती है।

(ii) दिए गए उपकरणों (बैटरी, बल्ब, तार एवं स्विच) को जोड़कर एक परिपथ तैयार करते हैं और इसके दोनों टर्मिनलों के बीच नमूनों को रखते हैं। स्विच ऑन करने पर यदि बल्ब जलता है, तो नमूना धातु है क्योंकि धातुएँ विद्युत की सुचालक होती हैं और यदि बल्ब नहीं जलता है तो नमूना अधातु है।

(b) (i) धातुएँ आघातवर्धनीय होती हैं अतः इनकी चादर बनाकर विभिन्न प्रकार के बर्तन, पात्र व अन्य विभिन्न वस्तुएँ बनाई जाती हैं जबकि अधातुओं में ऐसा नहीं हो सकता।

(ii) धातुएँ विद्युत की सुचालक होती हैं, अतः इनसे विद्युत परिपथ के तार आदि बनाए जाते हैं जबकि अधातुओं से नहीं।

प्रश्न 6. उभयधर्मी ऑक्साइड क्या होते हैं? दो उभयधर्मी ऑक्साइडों का उदाहरण दीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2025-26, 2024-25; प्रश्न बैंक)

उत्तर- उभयधर्मी ऑक्साइड-ऐसे धातु ऑक्साइड जो अम्ल तथा क्षारक दोनों से अभिक्रिया करके लवण तथा जल बनाते हैं, उन्हें उभयधर्मी ऑक्साइड कहते हैं।

उदाहरण-ऐलुमिनियम ऑक्साइड ( Al2O3Al_{2}O_{3} ) एवं जिंक ऑक्साइड ( ZnOZnO )।

अम्ल तथा क्षारक के साथ ऐलुमिनियम ऑक्साइड निम्न प्रकार से अभिक्रिया करता है-

Al2O3+6HCl→2AlCl3+3H2OAl_{2}O_{3}+6HCl \rightarrow 2AlCl_{3}+3H_{2}O (क्षारीय व्यवहार)

Al2O3+2NaOH→2NaAlO2+H2OAl_{2}O_{3}+2NaOH \rightarrow 2NaAlO_{2}+H_{2}O (सोडियम ऐलुमिनेट (अम्लीय व्यवहार))

प्रश्न 7. दो धातुओं के नाम बताइए जो तनु अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित कर देंगे तथा दो धातुएँ जो ऐसा नहीं कर सकती हैं।

उत्तर- MgMg तथा ZnZn तनु अम्लों के साथ क्रिया करके हाइड्रोजन को विस्थापित करते हैं जबकि CuCu तथा AgAg ऐसा नहीं करते क्योंकि MgMg तथा ZnZn हाइड्रोजन से अधिक अभिक्रियाशील हैं जबकि CuCu व AgAg कम अभिक्रियाशील हैं।

प्रश्न 8. किसी धातु MM के विद्युत अपघटनी परिष्करण में आप ऐनोड, कैथोड एवं विद्युत अपघट्य कैसे बनाएंगे?

अथवा

किसी धातु के विद्युत अपघटनी परिष्करण में आप ऐनोड, कैथोड एवं विद्युत अपघट्य के रूप में किसे प्रयुक्त करेंगे? (प्रश्न बैंक)

उत्तर- किसी धातु MM के विद्युत अपघटनी परिष्करण में अशुद्ध धातु को ऐनोड तथा शुद्ध धातु की पतली परत को कैथोड बनाया जाता है। धातु के लवण के विलयन का उपयोग विद्युत अपघट्य के रूप में किया जाता है। जैसे- CuCu (कॉपर) के शोधन में CuSO4CuSO_{4} का विलयन विद्युत अपघट्य के रूप में प्रयुक्त किया जाता है।

प्रश्न 9. प्रत्यूष ने सल्फर चूर्ण को स्पैचुला में लेकर उसे गर्म किया। चित्र के अनुसार एक परखनली को उल्टा करके उसने उत्सर्जित गैस को एकत्र किया।

(a) गैस की क्रिया क्या होगी-

(i) सूखे लिटमस पत्र पर? (ii) आर्द्र लिटमस पत्र पर?

(b) ऊपर की अभिक्रियाओं के लिए संतुलित रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।

[सल्फर चूर्ण को गर्म करके गैस एकत्र करना]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 3 धातु एवं अधातु चित्र 3

उत्तर- जब सल्फर चूर्ण को वायु में गर्म किया जाता है तो सल्फर-डाइ-ऑक्साइड ( SO2SO_{2} ) गैस का निर्माण होता है।

(a) (i) उत्सर्जित गैस ( SO2SO_{2} ) सूखे लिटमस पत्र पर कोई प्रभाव नहीं डालती है।

(ii) यदि दिया गया लिटमस पत्र आर्द्र है तो SO2SO_{2} गैस लिटमस पत्र में उपस्थित नमी ( H2OH_{2}O ) से क्रिया कर सल्फ्यूरस अम्ल बनाएगी। अतः यह अम्ल नीले लिटमस पत्र को लाल कर देगा।

(b) अभिक्रियाओं के संतुलित रासायनिक समीकरण:

S(s)+O2(g)→SO2(g)S(s)+O_{2}(g) \rightarrow SO_{2}(g)

SO2(g)+H2O→H2SO3(aq)SO_{2}(g)+H_{2}O \rightarrow H_{2}SO_{3}(aq)

(हाइड्रोजन सल्फाइट (सल्फ्यूरस अम्ल))

प्रश्न 10. लोहे को जंग से बचाने के लिए दो तरीके बताइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)

उत्तर- (i) लोहे पर तेल अथवा ग्रीस लगाना।

(ii) लोहे पर पेन्ट करके।

प्रश्न 11. ऑक्सीजन के साथ संयुक्त होकर अधातुएँ कैसा ऑक्साइड बनाती हैं?

उत्तर- अधातुएँ ऑक्सीजन के साथ संयुक्त होकर दो प्रकार के ऑक्साइड बनाती हैं- अम्लीय व उदासीन। उदाहरण के लिए- SO2SO_{2} , SO3SO_{3} , NO2NO_{2} तथा NO3NO_{3} अम्लीय ऑक्साइड हैं जबकि COCO तथा H2OH_{2}O उदासीन ऑक्साइड हैं।

प्रश्न 12. कारण बताइए-

(a) प्लैटिनम, सोना तथा चाँदी का उपयोग आभूषण बनाने के लिए किया जाता है। (प्रश्न बैंक)
(b) सोडियम, पोटैशियम एवं लीथियम को तेल के अन्दर संग्रहित किया जाता है।
(c) ऐलुमिनियम अत्यंत अभिक्रियाशील धातु है, फिर भी इसका उपयोग खाना बनाने वाले बर्तन बनाने के लिए किया जाता है।
(d) निष्कर्षण प्रक्रम में कार्बोनेट एवं सल्फाइड अयस्क को ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है।

उत्तर- (a) प्लैटिनम, सोना एवं चाँदी सक्रियता श्रेणी में नीचे होते हैं अर्थात् इनकी क्रियाशीलता बहुत कम होती है। अतः ये वायुमण्डल में उपस्थित ऑक्सीजन व नमी तथा अम्लों से भी आसानी से क्रिया नहीं करते। इनका संक्षारण भी नहीं होता जिससे इनकी चमक बरकरार रहती है। ये धातुएँ आघातवर्धनीय तथा तन्य होती हैं। इन्हीं कारणों से इनका उपयोग आभूषण बनाने के लिए किया जाता है।

(b) सोडियम, पोटैशियम एवं लीथियम बहुत ही क्रियाशील धातुएँ हैं। ये वायुमण्डल में उपस्थित ऑक्सीजन तथा नमी से क्रिया करके ऑक्साइड तथा हाइड्रॉक्साइड बनाती हैं। ये अभिक्रियाएँ तेजी से होती हैं। अतः खुले में रखने पर ये आग पकड़ लेती हैं। अतः इन्हें सुरक्षित रखने तथा आकस्मिक आग को रोकने के लिए इन्हें किरोसिन तेल में संग्रहित किया जाता हैं।

(c) ऐलुमिनियम अत्यन्त क्रियाशील धातु है लेकिन फिर भी इसका उपयोग खाना बनाने वाले बर्तन बनाने में किया जाता है क्योंकि सामान्य ताप पर इस धातु पर ऑक्साइड की पतली परत चढ़ जाती है। यह परत धातु को पुनः ऑक्सीकरण से सुरक्षित रखती है। यह परत इसे संक्षारण से भी बचाती है। यह धातु ऊष्मा की अच्छी सुचालक भी है। इसी कारण ऐलुमिनियम को बर्तन बनाने में प्रयुक्त करते हैं।

(d) निष्कर्षण प्रक्रम में कार्बोनेट एवं सल्फाइड अयस्क को ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है क्योंकि सल्फाइड या कार्बोनेट की तुलना में धातु को उसके ऑक्साइड से प्राप्त करना अधिक आसान है।

प्रश्न 13. आपने ताँबे के मलिन बर्तन को नींबू या इमली के रस से साफ करते अवश्य देखा होगा। यह खट्टे पदार्थ बर्तन को साफ करने में क्यों प्रभावी हैं?

उत्तर- ताँबा (कॉपर) वायु में उपस्थित आर्द्र CO2CO_{2} से अभिक्रिया करके बेसिक कॉपर कार्बोनेट बनाता है जिसके कारण बर्तन मलिन हो जाते हैं। जब बर्तन को नींबू या इमली के रस से साफ करते हैं तो इनमें उपस्थित अम्ल बर्तन पर उपस्थित बेसिक-कॉपर कार्बोनेट से क्रिया करके उसे विलेय कर देता है, जिससे बर्तन साफ हो जाता है।

प्रश्न 14. रासायनिक गुणधर्मों के आधार पर धातुओं एवं अधातुओं में विभेद कीजिए।

उत्तर- रासायनिक गुणधर्मों के आधार पर धातुओं एवं अधातुओं में अन्तर निम्न प्रकार से हैं-

(1) धातुएँ विद्युत धनी होती हैं अतः ये आसानी से इलेक्ट्रॉन देकर धनायन बनाती हैं जबकि अधातुएँ विद्युत ऋणी होती हैं अतः ये इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाती हैं।

(2) धातुएँ वायु में दहन से क्षारीय ऑक्साइड बनाती हैं जबकि अधातुएँ वायु में दहन से अम्लीय एवं उदासीन ऑक्साइड बनाती हैं।

(3) धातुओं के ऑक्साइड जल से क्रिया करके क्षार बनाते हैं तथा अम्ल से क्रिया करके लवण बनाते हैं। जबकि अधातुओं के ऑक्साइड जल से क्रिया करके अम्ल बनाते हैं तथा क्षार से क्रिया करके लवण बनाते हैं।

(4) धातुएँ जल से क्रिया करके धातु ऑक्साइड तथा H2H_{2} देती हैं जबकि अधातुओं में ऐसा नहीं होता।

(5) धातुएँ तनु हाइड्रोजन अम्लों से क्रिया करके लवण व H2H_{2} बनाती हैं जबकि अधातुएँ तनु अम्लों से क्रिया नहीं करतीं।

प्रश्न 15. एक व्यक्ति प्रत्येक घर में सुनार बनकर जाता है। उसने पुराने एवं मलिन सोने के आभूषणों में पहले जैसी चमक पैदा करने का ढोंग रचाया। कोई संदेह किए बिना ही एक महिला अपने सोने के कंगन उसे देती है जिसे वह एक विशेष विलयन में डाल देता है। कंगन नए की तरह चमकने लगते हैं लेकिन उनका वजन अत्यन्त कम हो जाता है। वह महिला बहुत दुःखी होती है तथा तर्क-वितर्क के पश्चात् उस व्यक्ति को झुकना पड़ता है। एक जासूस की तरह क्या आप उस विलयन की प्रकृति के बारे में बता सकते हैं?

उत्तर- उस व्यक्ति द्वारा प्रयुक्त किया गया विलयन अम्लराज होगा जो कि सान्द्र HClHCl तथा सान्द्र HNO3HNO_{3} का मिश्रण होता है जो इन्हें क्रमशः 3:13:1 के अनुपात में मिलाने पर बनता है। सोना (गोल्ड) अम्लराज (ऐक्वा-रेजिया) में घुलनशील है इसलिए महिला के कंगनों का भार कम हो जाता है।

प्रश्न 16. गर्म जल का टैंक बनाने में ताँबे का उपयोग होता है परन्तु इस्पात (लोहे की मिश्र धातु) का नहीं। इसका कारण बताइए।

उत्तर- ताँबा बहुत कम अभिक्रियाशील धातु है। यह जल तथा भाप के साथ बिल्कुल अभिक्रिया नहीं करता और न ही यह ऑक्सीजन व खनिज लवणों से अभिक्रिया करता है। ताँबा इस्पात की अपेक्षा ताप का अच्छा चालक भी होता है। इसके विपरीत इस्पात में आसानी से जंग लग जाता है। इसीलिए गर्म जल का टैंक बनाने में ताँबे का उपयोग किया जाता है।

भाग 2 — नोट्स (Notes & Summary)

📝 2. नोट्स: पाठ सार (Key Concepts & Summary)

महत्वपूर्ण परिभाषाएं, रासायनिक समीकरण, नियम, सूत्र एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।

पाठ सार

(1) तत्वों को उनके गुणधर्मों के आधार पर धातु एवं अधातु में वर्गीकृत किया जाता है।

(2) धातुएँ तन्य, आघातवर्धनीय, चमकीली एवं ऊष्मा तथा विद्युत की सुचालक होती हैं तथा धातुएँ ध्वानिक (सोनोरस) होती हैं। उदाहरण-आयरन, कॉपर, ऐलुमिनियम, मैग्नीशियम, सोडियम, जिंक, लेड आदि।

(3) पारद (मर्करी) के अलावा सभी धातुएँ कमरे के ताप पर ठोस अवस्था में होती हैं लेकिन पारद कमरे के ताप पर द्रव होता है।

(4) धातुएँ सामान्यतः कठोर होती हैं लेकिन सोडियम, पोटैशियम आदि धातुएँ मुलायम होती हैं।

(5) धात्विक चमक-धातु की सतह अपने शुद्ध रूप में चमकदार होती है। धातु के इस गुणधर्म को धात्विक चमक कहते हैं।

(6) आघातवर्धनीयता-धातुओं को पीटकर पतली चादर के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है। इस गुणधर्म को आघातवर्धनीयता कहते हैं। सोना तथा चाँदी की आघातवर्धनीयता सबसे अधिक होती है।

(7) तन्यता-धातुओं को पतले तार के रूप में खींचने की क्षमता को तन्यता कहते हैं। सोना सबसे अधिक तन्य धातु है।

(8) ध्वानिक (सोनोरस)-जो धातुएँ कठोर सतह से टकराने पर आवाज उत्पन्न करती है उन्हें ध्वानिक (सोनोरस) कहते हैं।

(9) सिल्वर तथा कॉपर ऊष्मा के सबसे अच्छे चालक हैं जबकि लेड तथा मर्करी ऊष्मा के कुचालक हैं।

(10) धातुएँ विद्युत धनात्मक तत्व होते हैं क्योंकि यह अधातुओं को इलेक्ट्रॉन देकर स्वयं धनायन बनाती हैं।

(11) क्षारीय धातुएँ जैसे-पोटैशियम, सोडियम, लीथियम इतनी मुलायम होती हैं कि इनको चाकू से भी काटा जा सकता है।

(12) अधातुओं के गुण धातुओं के विपरीत होते हैं। ये न तो आघातवर्धनीय होती हैं, और न ही तन्य।

(13) ग्रेफाइट के अलावा सभी अधातुएँ ऊष्मा एवं विद्युत की कुचालक होती हैं। ग्रेफाइट विद्युत का सुचालक होता है।

(14) अधातुएँ विद्युत ऋणात्मक तत्व होती हैं क्योंकि ये धातुओं के साथ अभिक्रिया में इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाती हैं।

(15) धातुओं की तुलना में अधातुओं की संख्या कम होती है।

(16) अधातुएँ सामान्यतः ठोस या गैस होती हैं जबकि ब्रोमीन ऐसी अधातु है जो द्रव है।

(17) धातुओं के गलनांक एवं क्वथनांक उच्च होते हैं लेकिन गैलियम तथा सीजियम के गलनांक बहुत कम होते हैं।

(18) आयोडीन अधातु होते भी चमकीला होता है।

(19) अपररूप-एक ही तत्व के भिन्न-भिन्न रूप, जिनके गुणों में भिन्नता होती है, उन्हें अपररूप कहते हैं। जैसे-ग्रेफाइट तथा हीरा कार्बन के अपररूप हैं।

(20) धातुएँ, ऑक्सीजन से क्रिया करके ऑक्साइड बनाती हैं जो कि क्षारकीय होती हैं परन्तु ऐलुमिनियम ऑक्साइड ( Al2O3Al_{2}O_{3} ), जिंक ऑक्साइड ( ZnOZnO ) जैसे कुछ धातु ऑक्साइड उभयधर्मी होते हैं अर्थात् इनमें अम्लीय तथा क्षारकीय दोनों गुणधर्म होते हैं।

(21) अधिकांश धातु ऑक्साइड जल में अघुलनशील हैं लेकिन इनमें से कुछ जल में घुलकर क्षार प्रदान करते हैं जैसे-सोडियम ऑक्साइड एवं पोटैशियम ऑक्साइड।

(22) अधातुओं के ऑक्साइड अम्लीय या उदासीन होते हैं।

(23) सामान्य ताप पर MgMg , AlAl , ZnZn तथा PbPb आदि जैसी धातुओं की सतह पर ऑक्साइड की पतली परत चढ़ जाती है। ऑक्साइड की यह परत धातुओं को पुनः ऑक्सीकरण से सुरक्षित रखती है।

(24) एल्युमिनियम पर मोटी ऑक्साइड की परत बनाने की प्रक्रिया ऐनोडीकरण (Anodizing) कहलाती है।

(25) जल के साथ विभिन्न धातुओं की क्रियाशीलता भिन्न-भिन्न होती है। धातुएँ जल से क्रिया करके धातु ऑक्साइड व H2H_{2} गैस बनाती हैं। यह धातु ऑक्साइड पुनः जल से क्रिया कर धातु हाइड्रॉक्साइड में बदल जाता है।

(i) पोटैशियम एवं सोडियम धातुएँ ठंडे जल से क्रिया कर लेती हैं।

(ii) कैल्सियम एवं मैग्नीशियम गर्म जल से क्रिया करते हैं।

(iii) ऐल्यूमिनियम, आयरन एवं जिंक जल वाष्प (भाप) के साथ क्रिया करते हैं।

(iv) लेड, कॉपर, सिल्वर तथा गोल्ड जल के साथ अभिक्रिया नहीं करते हैं।

(26) धातुओं की तनु अम्लों के साथ क्रियाशीलता की दर भिन्न-भिन्न होती है। धातुएँ तनु अम्ल से क्रिया कर लवण व H2H_{2} गैस बनाती हैं।

धातुओं की क्रियाशीलता का घटता क्रम- Mg>Al>Zn>FeMg>Al>Zn>Fe

(27) ऐक्वा रेजिया (Aqua Regia)-यह नाम लैटिन शब्द 'रॉयल जल' से लिया गया है। यह 3:13:1 के अनुपात में सान्द्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एवं सान्द्र नाइट्रिक अम्ल का मिश्रण होता है। यह गोल्ड एवं प्लैटिनम को गलाने में समर्थ होता है।

(28) सक्रियता श्रेणी-जब धातुओं को क्रियाशीलता के अवरोही क्रम में व्यवस्थित किया जाता है तो प्राप्त सूची को सक्रियता श्रेणी कहते हैं। धातुओं की अभिक्रियाशीलता का घटता क्रम (अवरोही क्रम) निम्न है-

K>Na>Ca>Mg>Al>Zn>Fe>Pb>[H]>Cu>Hg>Ag>AuK>Na>Ca>Mg>Al>Zn>Fe>Pb>[H]>Cu>Hg>Ag>Au

(29) सक्रियता श्रेणी में हाइड्रोजन के ऊपर स्थित धातुएँ तनु अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित कर सकती हैं। उदाहरण: जिंक, आयरन, लेड, मैग्नीशियम आदि।

(30) अधातुएँ तनु अम्लों में से हाइड्रोजन का विस्थापन नहीं करती हैं। ये हाइड्रोजन के साथ अभिक्रिया कर हाइड्राइड बनाती हैं।

(31) अधिक क्रियाशील धातुएँ अपने से कम क्रियाशील धातुओं को उनके लवण के विलयन से विस्थापित कर सकती हैं। उदाहरण-जिंक धातु कॉपर सल्फेट के विलयन से कम क्रियाशील धातु कॉपर को विस्थापित कर देती है।

Zn(s)+CuSO4(aq)→ZnSO4(aq)+Cu(s)Zn_{(s)}+CuSO_{4(aq)} \rightarrow ZnSO_{4(aq)}+Cu_{(s)}

(कॉपर सल्फेट - नीला रंग) (जिंक सल्फेट - रंगहीन)

(32) जब धातुएँ नाइट्रिक अम्ल ( HNO3HNO_{3} ) के साथ अभिक्रिया करती हैं तब H2H_{2} गैस उत्सर्जित नहीं होती क्योंकि HNO3HNO_{3} एक प्रबल ऑक्सीकारक होता है, जो उत्पन्न H2H_{2} को ऑक्सीकृत करके जल बना देता है तथा स्वयं नाइट्रोजन के किसी ऑक्साइड ( N2O,NO,NO2N_{2}O,NO,NO_{2} ) में अपचयित हो जाता है।

(33) धातु से अधातु में इलेक्ट्रॉन के स्थानान्तरण से बने यौगिकों को आयनिक यौगिक या वैद्युत संयोजक यौगिक कहते हैं। जैसे- NaCl,MgCl2NaCl,MgCl_{2} आदि।

(34) आयनिक यौगिक ठोस, कठोर तथा भंगुर होते हैं। इनका गलनांक एवं क्वथनांक उच्च होता है।

(35) आयनिक यौगिक जल में घुलनशील लेकिन केरोसिन, पेट्रोल आदि विलायकों में अविलेय होते हैं।

(36) आयनिक यौगिक गलित अवस्था तथा विलयन की अवस्था में विद्युत का चालन करते हैं। परन्तु ठोस अवस्था में स्वतंत्र आयनों की अनुपस्थिति के कारण कुचालक होते हैं।

(37) प्रकृति में धातुएँ स्वतंत्र अवस्था में या अपने यौगिकों के रूप में पाई जाती हैं।

(38) खनिज (Mineral)-पृथ्वी की भूपर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले तत्वों या यौगिकों को खनिज कहते हैं।

(39) अयस्क (Ore)-वे खनिज जिनमें कोई विशेष धातु काफी मात्रा में होती है तथा जिनसे धातु का निकालना आसान तथा आर्थिक रूप से लाभकारी होता है, उन्हें अयस्क (ore) कहते हैं।

(40) धातुकर्म (Metallurgy)-अयस्क से धातु का निष्कर्षण तथा उसका परिष्करण कर उपयोगी बनाने के प्रक्रम को धातुकर्म कहते हैं।

(41) गोल्ड (सोना), सिल्वर (चाँदी), प्लैटिनम तथा कॉपर (ताँबा) स्वतंत्र अवस्था में पाए जाते हैं।

(42) पृथ्वी से खनित अयस्कों में मिट्टी, रेत आदि जैसी कई अशुद्धियाँ होती हैं जिन्हें गैंग (gangue) कहते हैं।

(43) अयस्क का सान्द्रण-अयस्क से मिट्टी, रेत आदि (गैंग) को हटाना, अयस्क का सान्द्रण कहलाता है।

(44) निस्तापन (Calcination)-धातु कार्बोनेट या जलयोजित धातु ऑक्साइड अयस्कों को सीमित वायु में अधिक ताप पर गर्म करने से ये ऑक्साइडों में परिवर्तित हो जाते हैं। इस प्रक्रिया को निस्तापन कहते हैं।

ZnCO3(s)→तापनZnO(s)+CO2(g)ZnCO_{3(s)} \rightarrow \text{तापन}ZnO_{(s)}+CO_{2(g)}

(45) भर्जन (Roasting)-धातु सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में अधिक ताप पर गर्म करने पर यह धातु ऑक्साइड में बदल जाता है। इस प्रक्रिया को भर्जन कहते हैं।

2ZnS(s)+3O2(g)→तापन2ZnO(s)+2SO2(g)2ZnS_{(s)}+3O_{2(g)} \rightarrow \text{तापन}2ZnO_{(s)}+2SO_{2(g)}

(46) थर्मिट अभिक्रिया-आयरन (III) ऑक्साइड ( Fe2O3Fe_{2}O_{3} ) की क्रिया ऐलुमिनियम धातु से कराने पर अत्यधिक मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न होती है जिससे धातुएँ गलित अवस्था में आ जाती हैं। इन दोनों के बीच की अभिक्रिया का उपयोग रेल की पटरी एवं मशीनी पुर्जों की दरारों को जोड़ने के लिए किया जाता है।

Fe2O3(s)+2Al(s)→2Fe(l)+Al2O3(s)+ऊष्माFe_{2}O_{3}(s)+2Al(s) \rightarrow 2Fe(l)+Al_{2}O_{3}(s)+\text{ऊष्मा}

(47) धातुओं के परिष्करण की सबसे अधिक प्रचलित विधि विद्युत अपघटनी परिष्करण विधि है। इस प्रक्रम में अशुद्ध धातु ऐनोड तथा शुद्ध धातु की पतली परत को कैथोड बनाया जाता है।

(48) ऐनोड पंक-विद्युत अपघट्य से जब धारा प्रवाहित की जाती है तब ऐनोड पर स्थित अशुद्ध धातु विद्युत अपघट्य में घुल जाती है, इतनी ही मात्रा में शुद्ध धातु विद्युत अपघट्य से कैथोड पर निक्षेपित हो जाती है। विलेय अशुद्धियाँ विलयन में चली जाती हैं तथा अविलेय अशुद्धियाँ ऐनोड तली पर निक्षेपित हो जाती हैं जिसे ऐनोड पंक कहते हैं।

(49) मिश्र धातु-दो या दो से अधिक धातुओं अथवा एक धातु या एक अधातु के समांगी मिश्रण को मिश्र धातु कहते हैं। उदाहरण-(i) पीतल — ताँबा + जस्ता, (ii) काँसा — कॉपर + टिन, (iii) सोल्डर — सीसा + टिन, (iv) अमलगम — किसी अन्य धातु की पारद (पारा) धातु से क्रिया द्वारा बनी मिश्रधातु।

(50) शुद्ध सोने को 24 कैरेट कहते हैं तथा यह काफी नर्म होता है। इसलिए आभूषण बनाने के लिए यह उपयुक्त नहीं होता है। इसे कठोर बनाने के लिए इसमें चाँदी या ताँबा मिलाया जाता है।

(51) संक्षारण (Corrosion)-लम्बे समय तक आर्द्र वायु के सम्पर्क में रखने से कुछ धातुओं की सतह संक्षारित हो जाती है। इस प्रक्रिया को संक्षारण कहते हैं।

जैसे-(i) लोहे पर जंग लगना (भूरी परत) (ii) चाँदी के ऊपर काली परत चढ़ना (iii) ताँबे के ऊपर हरी परत चढ़ना।

(52) यशदलेपन-लोहे एवं इस्पात को जंग से सुरक्षित रखने के लिए उन पर जस्ते (जिंक) की पतली परत चढ़ाने की विधि को यशदलेपन कहते हैं।

भाग 3 — परीक्षा उपयोगी प्रश्न (Important Q&A)

⭐ 3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Important Questions)

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs), अतिलघूत्तरात्मक, लघूत्तरात्मक एवं निबंधात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न-

1. ठण्डे जल के साथ अभिक्रिया करके H2H_{2} गैस प्रस्तुत करने वाली धातु है— (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2026)

(अ) NaNa
(ब) AgAg
(स) FeFe
(द) MnMn

प्रश्न 2. अभिक्रियाशीलता का सही घटता क्रम है— (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2026)

(अ) Zn>Mg>FeZn>Mg>Fe
(ब) Mg>Zn>FeMg>Zn>Fe
(स) Zn>Fe>MgZn>Fe>Mg
(द) Mg>Fe>ZnMg>Fe>Zn

प्रश्न 3. धातुओं की अभिक्रियाशीलता के आधार पर सबसे अधिक क्रियाशील धातु है— (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2025-26)

(अ) जिंक
(ब) पोटैशियम
(स) गोल्ड
(द) कॉपर

प्रश्न 4. पीतल एक मिश्र धातु है—

(अ) ताँबा + टिन
(ब) जिंक + टिन
(स) ताँबा + जिंक
(द) ताँबा + ऐलुमिनियम

प्रश्न 5. सल्फाइड अयस्क से धातु का ऑक्साइड प्राप्त करने के लिए किस विधि का उपयोग किया जाता है—

(अ) भर्जन
(ब) निस्तापन
(स) संक्षारण
(द) थर्मिट प्रक्रम

प्रश्न 6. निम्नलिखित में से कौनसी अधातु द्रव अवस्था में पायी जाती है? (प्रश्न बैंक)

(अ) कार्बन
(ब) ब्रोमीन
(स) फास्फोरस
(द) सल्फर

प्रश्न 7. वह अधातु जो चमकीली होती है—

(अ) सीजियम
(ब) सल्फर
(स) आयोडीन
(द) फॉस्फोरस

प्रश्न 8. निम्न में से कौनसी अधातु विद्युत की सुचालक है?

(अ) आयोडीन
(ब) ग्रेफाइट (कार्बन)
(स) हीरा (कार्बन)
(द) सल्फर

प्रश्न 9. आयनिक यौगिक निम्न में से किसमें घुलनशील होते हैं?

(अ) बेन्जीन
(ब) पेट्रोल
(स) जल
(द) केरोसिन

प्रश्न 10. विद्युत तारों की परस्पर वेल्डिंग के लिए प्रयुक्त मिश्र धातु है—

(अ) काँसा
(ब) पीतल (ब्रास)
(स) सोल्डर
(द) घटा धातु

प्रश्न 11. कुछ धातुओं को पीटकर पतली चादर बनाया जा सकता है। इस गुणधर्म को कहते हैं—

(अ) तन्यता
(ब) आघातवर्ध्यता
(स) ध्वानिकता
(द) चालकता

प्रश्न 12. सोल्डर नामक मिश्रधातु के अवयव हैं—

अथवा

सोल्डर मिश्रधातु का गलनांक बहुत कम होता है—इसमें शामिल है— (प्रश्न बैंक)

(अ) लेड व टिन
(ब) लेड व जस्ता
(स) तांबा व जस्ता
(द) लोहा व निकिल

प्रश्न 13. अति शुद्ध सोना कितने कैरेट का होता है—

(अ) 18 कैरेट
(ब) 20 कैरेट
(स) 22 कैरेट
(द) 24 कैरेट

प्रश्न 14. कौनसी धातु हथेली पर रखने से पिघलने लगती है—

(अ) पारा
(ब) कॉपर
(स) सीजियम
(द) आयरन

प्रश्न 15. अम्लराज (ऐक्वा-रेजिया) है—

(अ) सान्द्र HNO3HNO_{3} + सान्द्र NaClNaCl
(ब) सान्द्र HNO3HNO_{3} + सान्द्र HClHCl
(स) तनु HNO3HNO_{3} + तनु HClHCl
(द) तनु HClHCl + सान्द्र NaClNaCl

प्रश्न 16. सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है—

(अ) ग्रेफाइट
(ब) हीरा
(स) लीथियम
(द) गैलियम

प्रश्न 17. उभयधर्मी ऑक्साइड है—

(अ) जिंक ऑक्साइड
(ब) कॉपर ऑक्साइड
(स) सोडियम ऑक्साइड
(द) पोटैशियम ऑक्साइड

प्रश्न 18. किरोसिन तेल में किस धातु को डुबोकर रखा जाता है?

(अ) मैग्नीशियम
(ब) जिंक
(स) पोटैशियम
(द) ऐलुमिनियम

प्रश्न 19. जल या भाप के साथ अभिक्रिया नहीं करने वाली धातु है—

(अ) आयरन
(ब) जिंक
(स) ऐलुमिनियम
(द) कॉपर

प्रश्न 20. सबसे अधिक अभिक्रियाशील धातु है—

(अ) सोडियम
(ब) कैल्सियम
(स) मैग्नीशियम
(द) पोटैशियम

प्रश्न 21. निम्न में से उत्कृष्ट गैस है— (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)

(अ) O2O_{2}
(ब) H2H_{2}
(स) HeHe
(द) CO2CO_{2}

22. प्रकृति में स्वतंत्र अवस्था में पाई जाने वाली धातु है-

(अ) MgMg
(ब) AuAu
(स) PbPb
(द) AlAl

23. 'सिनाबार' किसका अयस्क है?

(अ) सीसा
(ब) आयरन
(स) कॉपर
(द) मर्करी

24. एक तत्व QQ मुलायम है और चाकू से आसानी से काटा जा सकता है। तत्व ठंडे जल के साथ तेजी से अभिक्रिया करता है।

अग्रलिखित में से तत्व को पहचानिये- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)

(अ) KK
(ब) AgAg
(स) CuCu
(द) PbPb

25. पीतल तथा कांसा दोनों में उपस्थित धातु है-

(अ) CuCu
(ब) ZnZn
(स) SnSn
(द) PbPb

26. एक्वारेजिया में सांद्र HClHCl तथा सांद्र HNO3HNO_{3} किस अनुपात में होते हैं- (प्रश्न बैंक)

(अ) 3:13:1
(ब) 2:12:1
(स) 1:21:2
(द) 1:31:3

27. सोने को कठोर बनाने के लिए उसमें मिलायी गई धातु है-

(अ) सीसा
(ब) ताँबा
(स) जिंक
(द) टिन

28. यशदलेपन विधि में लोहे व इस्पात को जंग से बचाने के लिए किस धातु की परत चढ़ाई जाती है?

(अ) जस्ता
(ब) ताँबा
(स) ऐलुमिनियम
(द) टिन

29. AlAl , FeFe तथा ZnZn की अभिक्रियाशीलता का सही बढ़ता क्रम हैं- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)

(अ) Fe<Zn<AlFe<Zn<Al
(ब) Fe<Al<ZnFe<Al<Zn
(स) Al<Fe<ZnAl<Fe<Zn
(द) Al<Zn<FeAl<Zn<Fe

30. धातुएं संयोजकता कोश से इलेक्ट्रॉन त्याग कर किसका निर्माण करती हैं? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)

(अ) ऋणायन
(ब) धनायन
(स) धनायन एवं ऋणायन दोनों
(द) किसी भी एक का निर्माण कर सकती हैं

31. वातावरण में लोहे के ऊपर भूरी परत चढ़ने की प्रक्रिया है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)

(अ) अपचयन
(ब) संक्षारण
(स) विकृतगंधिता
(द) द्विविस्थापन

32. ऊष्मा का सबसे अच्छा चालक है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)

(अ) कॉपर
(ब) लेड
(स) मर्करी
(द) जिंक

33. फॉस्फोरस परमाणु के MM कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)

(अ) 33
(ब) 55
(स) 66
(द) 77

34. कार्बन का क्रिस्टलीय अपररूप है- (प्रश्न बैंक)

(अ) हीरा
(ब) ग्रेफाइट
(स) फुलरीन
(द) उपर्युक्त सभी

35. स्टेनलेस स्टील में आयरन को किनके साथ मिश्रित किया जाता है- (प्रश्न बैंक)

(अ) NiNi व CrCr
(ब) CuCu व CrCr
(स) NiNi व CuCu
(द) CuCu व PbPb

36. विद्युत तारों की परस्पर वेल्डिंग के लिए कौनसी मिश्र धातु को प्रयुक्त करते हैं? (प्रश्न बैंक)

(अ) सोल्डर
(ब) पीतल
(स) कांसा
(द) कोई नहीं

37. निम्नलिखित में से आयनिक यौगिक नहीं है? (प्रश्न बैंक)

(अ) KClKCl
(ब) NaClNaCl
(स) CCl4CCl_{4}
(द) AgClAgCl

38. धातु जो कमरे के ताप पर द्रव अवस्था में पायी जाती है? (प्रश्न बैंक)

(अ) तांबा
(ब) पारा
(स) सोडियम
(द) कैल्शियम

39. निम्नलिखित में से कौनसा तत्व अम्लीय ऑक्साइड बनाएगा? (प्रश्न बैंक)

(अ) NaNa
(ब) LiLi
(स) KK
(द) CC

40. वायु में लम्बे समय तक उद्भासन से सिल्वर की वस्तुएँ काली हो जाती है। यह किसके बनने से होता है? (प्रश्न बैंक)

(अ) Ag3NAg_{3}N
(ब) Ag2OAg_{2}O
(स) Ag2SAg_{2}S
(द) AgNO3AgNO_{3}

उत्तर-तालिका

1.(अ)

2.(ब)

3.(ब)

4.(स)

5.(अ)

6.(ब)

7.(स)

8.(ब)

9.(स)

10.(स)

11.(ब)

 

12.(अ)

13.(द)

14.(स)

15.(ब)

16.(ब)

17.(अ)

18.(स)

19.(द)

20.(द)

21.(स)

22.(ब)

 

23.(द)

24.(अ)

25.(अ)

26.(अ)

27.(ब)

28.(अ)

29.(अ)

30.(ब)

31.(ब)

32.(अ)

33.(ब)

 

34.(द)

35.(अ)

36.(अ)

37.(स)

38.(ब)

39.(द)

40.(स)

     

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

1. जो धातुएँ कठोर सतह से टकराने पर आवाज उत्पन्न करती हैं उन्हें .................... कहते हैं।

2. परमाणु के किसी कोश में इलेक्ट्रॉन की अधिकतम संख्या ज्ञात करने का सूत्र .................... है। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)

3. भूपर्पटी में प्राकृतिक रूप में पाए जाने वाले तत्वों या यौगिकों को .................... कहते हैं।

4. शुद्ध सोना .................... कैरेट का होता है।

5. दो या दो से अधिक धातुओं के .................... मिश्रण को मिश्रधातु कहते हैं। (प्रश्न बैंक)

6. .................... मर्करी (पारद) का एक अयस्क है।

7. उत्कृष्ट गैस आर्गन (Ar) के M कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या .................... होती है।

8. विद्युत अपघटनी परिष्करण में शुद्ध धातु विद्युत अपघट्य से .................... पर निक्षेपित हो जाती है।

9. प्रकृति में सबसे अधिक क्रियाशील तत्व .................... है। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)

10. धातु तथा अधातु में इलेक्ट्रॉन के .................... से बने यौगिक को आयनिक यौगिक कहते हैं। (प्रश्न बैंक)

11. आयनिक यौगिकों का गलनांक व क्वथनांक बहुत अधिक होता है, क्योंकि विपरीत आवेशित आयनों में मजबूत .................... होता है। (प्रश्न बैंक)

12. सोने और लोहे में से .................... अधिक तन्य धातु है। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)

13. 3MnO2(s)+4Al(s)→Δ....................+....................+ऊष्मा3MnO_{2}(s)+4Al(s) \rightarrow \Delta ....................+....................+\text{ऊष्मा} (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)

उत्तर : 1. ध्वानिक (सोनोरस), 2. 2n22n^{2} , 3. खनिज, 4. 24, 5. समांगी, 6. सिनाबार ( HgSHgS ), 7. 8, 8. कैथोड, 9. फ्लुओरीन, 10. स्थानांतरण, 11. अन्तर आयनिक आकर्षण बल, 12. सोना, 13. 3Mn(l)3Mn(l) , 2Al2O3(s)2Al_{2}O_{3(s)}

सुमेलन संबंधी प्रश्न-

प्रश्न 1. निम्न को सुमेलित कीजिए-

तत्व

M कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या

A. आर्गन ( ArAr )

(i) 2

B. सोडियम ( NaNa )

(ii) 1

C. मैग्नीशियम ( MgMg )

(iii) 8

D. ऐलुमिनियम ( AlAl )

(iv) 3

उत्तर- A-(iii), B-(ii), C-(i), D-(iv)

प्रश्न 2. निम्न को सुमेलित कीजिए-

मिश्रधातु का नाम

मिश्रधातु में उपस्थित धातु/अधातु

A. पीतल

(i) Cu+SnCu+Sn

B. काँसा

(ii) Cu+ZnCu+Zn

C. सोल्डर

(iii) Fe+Ni+CrFe+Ni+Cr

D. स्टेनलेस इस्पात

(iv) Pb+SnPb+Sn

उत्तर- A-(ii), B-(i), C-(iv), D-(iii)

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. सबसे अधिक तन्य धातु का नाम लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2026)

उत्तर- सोना सबसे अधिक तन्य धातु है।

प्रश्न 2. धातुओं के कुछ भौतिक गुण लिखिए।

उत्तर- धातुएँ भारी, चमकदार, तन्य तथा आघातवर्ध्य होती हैं। ये ऊष्मा और विद्युत की सुचालक होती हैं।

प्रश्न 3. ऐलुमिनियम के किसी एक अयस्क का नाम तथा सूत्र बताइए।

उत्तर- ऐलुमिनियम का अयस्क-बॉक्साइट

सूत्र- Al2O3⋅2H2OAl_{2}O_{3}·2H_{2}O

प्रश्न 4. 'धात्विक चमक' किसे कहते हैं?

उत्तर- अपने शुद्ध रूप में धातु की सतह चमकदार होती है। धातु के इस गुण धर्म को 'धात्विक चमक' कहते हैं।

प्रश्न 5. भर्जन किसे कहते हैं?

उत्तर- सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में अधिक ताप पर गर्म करने पर यह ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है। यह प्रक्रिया भर्जन कहलाती है।

प्रश्न 6. 'ध्वानिक (सोनोरस)' धातुएँ क्या होती हैं?

उत्तर- जो धातुएँ कठोर सतह से टकराने पर आवाज उत्पन्न करती है उन्हें 'ध्वानिक (सोनोरस)' कहते हैं।

प्रश्न 7. विद्युत तार पर PVCPVC अथवा रबड़ जैसी सामग्री की परत क्यों चढ़ी होती है?

उत्तर- विद्युत तार विद्युत सुचालक धातु से बने होते हैं। जबकि PVCPVC अथवा रबड़ जैसी सामग्री विद्युत की कुचालक होती है जिसके कारण परत चढ़ी विद्युत तार को छूने पर लगने वाले विद्युत आघात से बचा जा सकता है।

प्रश्न 8. स्कूल की घंटी धातु की क्यों बनी होती है?

उत्तर- धातुएँ कठोर सतह से टकराकर आवाज उत्पन्न करती हैं इसलिए स्कूल की घंटी धातु से बनाई जाती है ताकि आवाज दूर तक सुनाई दे सके।

प्रश्न 9. दो धातुओं के नाम बताइए जो अत्यंत अधिक ताप पर भी ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया नहीं करती हैं?

उत्तर- 'सिल्वर' एवं 'गोल्ड' अत्यंत अधिक ताप पर भी ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया नहीं करते हैं।

प्रश्न 10. लोहे पर जंग क्यों लगता है?

उत्तर- लम्बे समय तक आर्द्र वायु में रहने पर लोहे पर भूरे रंग की परत चढ़ जाती है, जिसे जंग कहते हैं। जंग आयरन ऑक्साइड ( Fe2O3Fe_{2}O_{3} ) तथा आयरन हाइड्रॉक्साइड का मिश्रण होता है।

प्रश्न 11. अति शुद्ध सोना कितने कैरेट का होता है?

उत्तर- 2424 कैरेट का।

प्रश्न 12. उन धातुओं का नाम बताइए जो न तो शीतल जल के साथ और न ही गर्म जल के साथ अभिक्रिया करती हैं, परन्तु भाप के साथ अभिक्रिया कर ऑक्साइड व हाइड्रोजन प्रदान करती हैं?

उत्तर- ऐलुमिनियम, आयरन तथा जिंक।

प्रश्न 13. सोल्डर नामक मिश्रधातु के कौन-कौनसे अवयव हैं?

उत्तर- सोल्डर मिश्रधातु के दो अवयव हैं-सीसा तथा टिन।

प्रश्न 14. कई धातुओं के अयस्क ऑक्साइड क्यों होते हैं?

उत्तर- ऑक्सीजन की अत्यधिक अभिक्रियाशीलता एवं पृथ्वी पर इसके प्रचुर मात्रा में पाए जाने के कारण कई धातुओं के अयस्क ऑक्साइड होते हैं।

प्रश्न 15. अत्यधिक सक्रिय धातुओं का निष्कर्षण किस विधि द्वारा किया जाता है?

उत्तर- अत्यधिक सक्रिय धातुओं का निष्कर्षण उनके लवणों के विद्युत अपघटन द्वारा किया जाता है।

प्रश्न 16. ताँबे के शुद्धिकरण में प्रयुक्त विद्युत अपघट्य बताइए।

उत्तर- कॉपर सल्फेट ( CuSO4CuSO_{4} ) का विलयन।

प्रश्न 17. सबसे अधिक आघातवर्धनीय धातुएँ कौनसी होती हैं?

उत्तर- सोना तथा चाँदी सबसे अधिक आघातवर्धनीय धातुएँ हैं।

प्रश्न 18. ऐसी कौनसी धातुएँ हैं जो हथेली पर रखने पर पिघलने लगती हैं?

उत्तर—गैलियम तथा सीजियम, क्योंकि इनका गलनांक बहुत कम होता है।

प्रश्न 19. मर्करी (पारद) के एक अयस्क का नाम बताइए।

उत्तर—सिनाबार ( HgSHgS )

प्रश्न 20. अपररूप किसे कहते हैं?

उत्तर—एक ही तत्व के भिन्न-भिन्न रूप जिनके गुणों में भिन्नता होती है, उन्हें अपररूप कहते हैं। हीरा तथा ग्रेफाइट कार्बन के अपररूप हैं।

प्रश्न 21. सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ कौनसा होता है?

उत्तर—हीरा सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है।

प्रश्न 22. धातुएँ तनु अम्लों से क्रिया करके क्या बनाती हैं?

उत्तर—धातुएँ तनु अम्लों से क्रिया करके लवण तथा हाइड्रोजन बनाती हैं।

धातु+तनुअम्ल→लवण+H2\text{धातु}+\text{तनु} \text{अम्ल} \rightarrow \text{लवण}+H_{2}

जैसे- Mg,Al,Zn,FeMg, Al, Zn, Fe

प्रश्न 23. अम्लराज (ऐक्वा-रेजिया) का संघटन क्या है?

उत्तर—अम्लराज सान्द्र HNO3+HNO_{3}+ सान्द्र HClHCl का 1:31:3 में मिश्रण है।

प्रश्न 24. 'निस्तापन' किसे कहते हैं?

उत्तर—कार्बोनेट अयस्क को सीमित वायु में अधिक ताप पर गर्म करने से यह ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है। इस प्रक्रिया को निस्तापन कहते हैं।

प्रश्न 25. आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करते। क्यों?

उत्तर—ठोस अवस्था में दृढ़ संरचना के कारण आयनों की गति सम्भव नहीं होती अतः विद्युत का चालन नहीं होता।

प्रश्न 26. अभिक्रियाशीलता के आधार पर धातुओं को कौनसे भागों (वर्गों) में विभाजित किया जाता है?

उत्तर—तीन भागों में-(i) निम्न अभिक्रियाशील धातुएँ (ii) मध्यम अभिक्रियाशील धातुएँ (iii) उच्च अभिक्रियाशील धातुएँ।

प्रश्न 27. जंग (Rust) क्या होती है?

उत्तर—लम्बे समय तक आर्द्र वायु में रहने पर लोहे पर भूरे रंग की परत जम जाती है, इसे जंग कहते हैं।

प्रश्न 28. यशदलेपन (Galvanisation) या गैल्वेनीकरण किसे कहते हैं?

उत्तर—लोहे एवं इस्पात को जंग से सुरक्षित रखने के लिए उन पर जस्ते (जिंक) की एक पतली परत चढ़ाई जाती है। इस प्रक्रिया को यशदलेपन कहते हैं।

प्रश्न 29. थर्मिट अभिक्रिया का संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए।

उत्तर— Fe2O3(s)+2Al(s)→2Fe(l)+Al2O3(s)+ऊष्माFe_{2}O_{3}(s)+2Al(s) \rightarrow 2Fe(l)+Al_{2}O_{3}(s)+\text{ऊष्मा}

प्रश्न 30. अमलगम किसे कहते हैं?

उत्तर—मिश्र धातु बनाते समय यदि एक धातु पारद (मर्करी) है, तो इसके मिश्र धातु को अमलगम कहते हैं।

प्रश्न 31. उत्कृष्ट गैसों की क्रियाशीलता बहुत कम होती है। क्यों?

उत्तर—उत्कृष्ट गैसों का संयोजक कोश पूर्ण होने के कारण इनकी क्रियाशीलता बहुत कम होती है।

प्रश्न 32. सक्रियता श्रेणी किसे कहते हैं? इसकी एक उपयोगिता लिखिए।

अथवा

सक्रियता श्रेणी किसे कहते हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर—सक्रियता श्रेणी-धातुओं की क्रियाशीलता को अवरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर जो सूची (श्रेणी) प्राप्त होती है, उसे सक्रियता श्रेणी कहते हैं।

उपयोगिता-इसके द्वारा किसी अयस्क से धातु के निष्कर्षण में सहयोग मिलता है।

प्रश्न 33. कौनसी धातुओं को विद्युत अपघटनी परिष्करण विधि द्वारा शुद्ध रूप में प्राप्त किया जा सकता है?

उत्तर—कॉपर, जिंक, टिन, निकैल, सिल्वर, गोल्ड आदि।

प्रश्न 34. 'ऐनोड पंक' किसे कहते हैं?

उत्तर—जब धातुओं को विद्युत अपघटनी परिष्करण विधि द्वारा शुद्ध रूप में प्राप्त करते हैं तो अविलेय अशुद्धियाँ ऐनोड तली पर निक्षेपित हो जाती हैं जिसे ऐनोड पंक कहते हैं।

प्रश्न 35. 'काँसा' नामक मिश्र धातु के कौन-कौन से अवयव हैं? इस मिश्र धातु की एक विशेषता बताइए।

उत्तर— काँसा ताम्र ( CuCu ) एवं टिन ( SnSn ) की मिश्र धातु है। काँसा विद्युत का कुचालक है।

प्रश्न 36. धातुओं का उपयोग खाना पकाने के बर्तन बनाने के लिए क्यों किया जाता है?

उत्तर— धातु ऊष्मा के सुचालक होते हैं तथा इनका गलनांक भी बहुत अधिक होता है इसलिए इनका उपयोग खाना पकाने के बर्तन बनाने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 37. मिश्र धातु के दो उदाहरण लिखो। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)

उत्तर— (i) पीतल, (ii) काँसा।

प्रश्न 38. आयोडीन, हीरा तथा सोडियम में से सबसे कठोर पदार्थ का नाम लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)

उत्तर— आयोडीन, हीरा तथा सोडियम में से सबसे कठोर पदार्थ का नाम हीरा है।

प्रश्न 39. निम्नलिखित तत्वों के युग्मों के संयोजन से बनने वाले स्थिर द्विआधारी यौगिकों के सूत्र दीजिए— MgMg और Cl2Cl_{2} (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)

उत्तर— MgCl2MgCl_{2}

प्रश्न 40. सल्फर, ब्रोमीन तथा आयोडीन में से चयन करके द्रव अधातु का नाम लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)

उत्तर— ब्रोमीन

प्रश्न 41. पीतल में ताँबा के साथ मिश्रित दूसरी धातु का नाम लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)

उत्तर— जस्ता ( ZnZn )

प्रश्न 42. सोडियम क्लोराइड की इलेक्ट्रॉन बिन्दु संरचना का निर्माण करो। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)

उत्तर—

Na→Na++e−Na \rightarrow Na^{+}+e^{-}

2,8,12,82,8,12,8

(सोडियम धनआयन)

Cl+e−→Cl−Cl+e^{-} \rightarrow Cl^{-}

2,8,72,8,82,8,72,8,8

(क्लोराइड ऋणआयन)

Na+⋅Cl××××→(Na+)Cl××××−Na+·Cl \times \times \times \times \rightarrow (Na^{+})Cl \times \times \times \times ^{-}

[सोडियम क्लोराइड की इलेक्ट्रॉन बिन्दु संरचना]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 3 धातु एवं अधातु चित्र 4

चित्र—सोडियम क्लोराइड की इलेक्ट्रॉन बिन्दु संरचना

प्रश्न 43. लोहे व इस्पात को जंग से बचाने के लिए इस पर जस्ते की परत चढ़ाना क्या कहलाता है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— यशदलेपन

प्रश्न 44. विद्युत अपघटनी परिष्करण विधि में अविलेय अशुद्धियों में ऐनोड तली पर निक्षेपित हो जाती है, कहते हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— ऐनोड पंक।

प्रश्न 45. खनिज व अयस्क में क्या अन्तर है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— पृथ्वी की भूपर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले तत्वों या यौगिकों को खनिज कहते हैं। कुछ स्थानों पर खनिजों में कोई विशेष धातु काफी मात्रा में होती है; जिसे निकालना लाभकारी होता है। इन खनिजों को अयस्क कहते हैं।

लघूत्तरात्मक प्रश्न—

प्रश्न 1. निष्कर्षण प्रक्रम में जिंक सल्फाइड को ऑक्साइड में क्यों परिवर्तित किया जाता है? कारण लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2026)

उत्तर-निष्कर्षण प्रक्रम में जिंक सल्फाइड को ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है जिससे कि कार्बन जैसे उपयुक्त अपचायक का उपयोग कर धातु ऑक्साइड से धातु प्राप्त किया जा सके।

2ZnS(s)+3O2(g)→तापन2ZnO(s)+2SO2(g)2ZnS_{(s)}+3O_{2(g)} \rightarrow \text{तापन}2ZnO_{(s)}+2SO_{2(g)} (भर्जन)

ZnO(s)+C(s)→तापनZn(s)+CO(g)ZnO_{(s)}+C_{(s)} \rightarrow \text{तापन}Zn_{(s)}+CO_{(g)}

प्रश्न 2. लोहे को जंग से बचाने के लिए दो तरीके बताइये। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2025-26)

उत्तर-

(i) लोहे पर तेल अथवा ग्रीस लगाना। (ii) लोहे पर पेन्ट करना।

प्रश्न 3. धातुओं के सामान्य गुणधर्म बताइये।

उत्तर- धातुओं के सामान्य गुणधर्म-

(i) शुद्ध अवस्था में धातु की सतह चमकदार होती है, इसे धात्विक चमक कहते हैं।

(ii) धातुएँ सामान्यतः ठोस व कठोर होती हैं तथा भिन्न-भिन्न धातुओं की कठोरता अलग-अलग होती है।

(iii) धातुएँ आघातवर्धनीय एवं तन्य होती हैं।

(iv) धातुएँ ऊष्मा की सुचालक होती हैं तथा इनका गलनांक भी उच्च होता है अतः इनको खाना पकाने के बर्तन बनाने में प्रयुक्त करते हैं।

(v) धातुएँ सामान्यतः विद्युत की सुचालक होती हैं। अतः बिजली के तारों पर पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC) या रबड़ की परत चढ़ाते हैं। यह परत विद्युत की कुचालक होती है।

(vi) धातुएँ ध्वानिक (सोनोरस) होती हैं अर्थात् कठोर सतह से टकराने पर आवाज उत्पन्न करती हैं।

प्रश्न 4. अधातुओं के सामान्य गुण क्या हैं? लिखिए।

उत्तर- अधातुओं के सामान्य गुण-

(i) सामान्यतः अधातुएँ कमरे के ताप पर ठोस, द्रव (ब्रोमीन) या गैस हो सकती हैं।

(ii) अधातुओं में चमक नहीं होती लेकिन आयोडीन अधातु होते हुए भी चमकीला होता है।

(iii) अधातुओं का गलनांक व क्वथनांक धातुओं से कम होता है।

(iv) अधातुएँ आघातवर्धनीय एवं तन्य नहीं होती हैं।

(v) अधातुएँ विद्युत की कुचालक होती हैं। अपवाद- ग्रेफाइट विद्युत का सुचालक होता है।

(vi) अधातुएँ सोनोरस नहीं होती हैं।

प्रश्न 5. मैग्नीशियम तथा सल्फर को दहन करने पर क्या होगा? प्राप्त यौगिक का पानी में विलयन बनाकर लिटमस से जाँच करके बताइए कि कौनसा तत्व अम्लीय ऑक्साइड बनाता है तथा कौनसा क्षारीय? समीकरण सहित समझाइए।

उत्तर- (1) मैग्नीशियम को वायु में गर्म करने पर चमकदार श्वेत ज्वाला के साथ दहन होकर मैग्नीशियम ऑक्साइड बनता है जो कि क्षारीय होता है क्योंकि MgMg धातु है तथा धातुओं के ऑक्साइड सामान्यतः क्षारीय होते हैं। इस ऑक्साइड को पानी में घोलने पर मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड बनता है जो क्षार होने के कारण लाल लिटमस पत्र को नीला कर देता है।

2Mg(s)+O2(g)→2MgO(s)2Mg_{(s)}+O_{2(g)} \rightarrow 2MgO_{(s)}

MgO+H2O→Mg(OH)2MgO+H_{2}O \rightarrow Mg(OH)_{2}

(2) सल्फर भी वायु से क्रिया करके सल्फर डाइऑक्साइड बनाता है जो कि अम्लीय है क्योंकि सल्फर अधातु है। इस ऑक्साइड को पानी में घोलने पर अम्लीय विलयन बनेगा जो नीले लिटमस पत्र को लाल कर देता है।

S(s)+O2(g)→SO2(g)S_{(s)}+O_{2(g)} \rightarrow SO_{2(g)}

SO2(g)+H2O(l)→H2SO3(aq)SO_{2(g)}+H_{2}O_{(l)} \rightarrow H_{2}SO_{3}(aq)

सल्फ्यूरस अम्ल

प्रश्न 6. एनोडीकरण क्या होता है? इसके क्या उपयोग हैं?

उत्तर- एनोडीकरण-ऐलुमिनियम पर मोटी ऑक्साइड की परत बनाने की प्रक्रिया को एनोडीकरण कहते हैं। वायु के सम्पर्क में आने पर ऐलुमिनियम पर ऑक्साइड की एक पतली परत का निर्माण होता है। ऐलुमिनियम ऑक्साइड की यह परत इसे संक्षारण से बचाती है। इस परत को मोटा करके इसे संक्षारण से अधिक सुरक्षित कर सकते हैं। एनोडीकरण के लिए ऐलुमिनियम की एक साफ वस्तु को एनोड बनाकर तनु सल्फ्यूरिक अम्ल ( H2SO4H_{2}SO_{4} ) के साथ इसका विद्युत-अपघटन किया जाता है। एनोड पर उत्सर्जित ऑक्सीजन गैस ऐलुमिनियम के साथ अभिक्रिया करके ऑक्साइड की एक मोटी परत बना देती है। इस ऑक्साइड की परत को रंगकर ऐलुमिनियम की आकर्षक वस्तुएँ बनाई जा सकती हैं।

प्रश्न 7. कैल्शियम तथा मैग्नीशियम धातु की जल के साथ अभिक्रिया कराने पर ये तैरने क्यों लगते हैं?

उत्तर- जल के साथ अभिक्रिया करके धातुएँ हाइड्रोजन गैस तथा धातु ऑक्साइड उत्पन्न करती हैं।

जल के साथ कैल्शियम की अभिक्रिया थोड़ी धीमी होती है।

Ca(s)+2H2O(l)→Ca(OH)2(aq)+H2(g)+ऊष्मीयऊर्जाCa(s)+2H_{2}O(l) \rightarrow Ca(OH)_{2}(aq)+H_{2}(g)+\text{ऊष्मीय} \text{ऊर्जा}

यहाँ उत्सर्जित ऊष्मा हाइड्रोजन के प्रज्वलित होने के लिए पर्याप्त नहीं होती है इसीलिए अभिक्रिया में उत्पन्न हाइड्रोजन गैस के बुलबुले कैल्शियम धातु की सतह पर चिपक जाते हैं जिससे कैल्शियम तैरना प्रारंभ कर देता है। इसी प्रकार मैग्नीशियम गर्म जल के साथ अभिक्रिया करके मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड एवं हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करता है। चूँकि हाइड्रोजन गैस के बुलबुले मैग्नीशियम धातु की सतह से चिपक जाते हैं अतः यह भी तैरना प्रारंभ कर देता है।

प्रश्न 8. धातुओं की अम्लों के साथ अभिक्रिया की व्याख्या कीजिए।

उत्तर- सामान्यतः धातुएँ अम्ल के साथ अभिक्रिया करके संगत लवण तथा H2H_{2} गैस देती हैं।

धातु + तनु अम्ल →\rightarrow लवण + हाइड्रोजन

Mg(s)+2HCl(aq)→MgCl2(aq)+H2(g)Mg(s)+2HCl(aq) \rightarrow MgCl_{2}(aq)+H_{2}(g)

Zn(s)+H2SO4(aq)→ZnSO4(aq)+H2(g)Zn(s)+H_{2}SO_{4}(aq) \rightarrow ZnSO_{4}(aq)+H_{2}(g)

Mg,Al,Zn,FeMg, Al, Zn, Fe तथा CuCu की तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से क्रियाशीलता का क्रम निम्न होता है-

Mg>Al>Zn>Fe>CuMg>Al>Zn>Fe>Cu

मैग्नीशियम के साथ अभिक्रिया सर्वाधिक ऊष्माक्षेपी है। कॉपर की तनु HClHCl से कोई अभिक्रिया नहीं होती है।

जब धातुएँ नाइट्रिक अम्ल ( HNO3HNO_{3} ) के साथ अभिक्रिया करती हैं तब हाइड्रोजन गैस उत्सर्जित नहीं होती है लेकिन मैग्नीशियम ( MgMg ) एवं मैंगनीज ( MnMn ), अति तनु HNO3HNO_{3} के साथ अभिक्रिया कर H2H_{2} गैस उत्सर्जित करते हैं।

प्रश्न 9. धातुएँ अम्ल के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस प्रदान करती हैं परन्तु नाइट्रिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करने पर हाइड्रोजन गैस उत्सर्जित क्यों नहीं होती है?

उत्तर- जब धातुएँ नाइट्रिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करती हैं तब हाइड्रोजन गैस उत्सर्जित नहीं होती है क्योंकि HNO3HNO_{3} एक प्रबल ऑक्सीकारक होता है जो उत्पन्न H2H_{2} को ऑक्सीकृत करके जल में परिवर्तित कर देता है एवं स्वयं नाइट्रोजन के किसी ऑक्साइड ( N2O,NO,NO2N_{2}O, NO, NO_{2} ) में अपचयित हो जाता है। जैसे-

Zn+4HNO3→Zn(NO3)2+2NO2+2H2OZn+4HNO_{3} \rightarrow Zn(NO_{3})_{2}+2NO_{2}+2H_{2}O

प्रश्न 10. क्या होगा, (a) जब सिल्वर नाइट्रेट के विलयन में कॉपर की एक पट्टी (strip) डाली जाती है।

**(b) जब कॉपर सल्फेट के विलयन में ZnZn की पट्टी (strip) डाली जाती है।**

उत्तर- (a) जब सिल्वर नाइट्रेट के विलयन में कॉपर की पट्टी डालते हैं तो विलयन से AgAg पृथक हो जाता है तथा कॉपर नाइट्रेट बनता है, जिसके कारण विलयन नीला हो जाता है, क्योंकि सिल्वर की तुलना में कॉपर अधिक क्रियाशील है।

2AgNO3(aq)+Cu(s)→Cu(NO3)2(aq)+2Ag(s)2AgNO_{3}(aq)+Cu(s) \rightarrow Cu(NO_{3})_{2}(aq)+2Ag(s)

(b) जब कॉपर सल्फेट के विलयन में जिंक की पट्टी डाली जाती है तो विलयन से CuCu पृथक हो जाता है। कॉपर सल्फेट के विलयन का नीला रंग गायब होने लगता है तथा जिंक सल्फेट बनता है क्योंकि जिंक, कॉपर से अधिक क्रियाशील है।

CuSO4(aq)+Zn(s)→ZnSO4(aq)+CuCuSO_{4}(aq)+Zn(s) \rightarrow ZnSO_{4}(aq)+Cu

(नीला) (रंगहीन)

प्रश्न 11. प्रकृति में धातुएँ किस अवस्था में पाई जाती हैं? समझाइए।

उत्तर- पृथ्वी की भूपर्पटी धातुओं का मुख्य स्रोत है। समुद्री जल में भी NaCl,MgCl2NaCl, MgCl_{2} आदि विलेय लवण उपस्थित रहते हैं। कुछ धातुएँ भूपर्पटी में स्वतंत्र अवस्था में पाई जाती हैं। कुछ धातुएँ यौगिकों के रूप में मिलती हैं। सक्रियता

श्रेणी में नीचे आने वाली धातुएँ जैसे-गोल्ड, सिल्वर, प्लैटिनम आदि स्वतंत्र अवस्था में पाई जाती हैं। कॉपर एवं सिल्वर, अपने सल्फाइड या ऑक्साइड अयस्क के रूप में संयुक्त अवस्था में भी पाए जाते हैं।

सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर की धातुएँ ( KK , NaNa , CaCa , MgMg एवं AlAl ) इतनी अधिक अभिक्रियाशील होती हैं कि ये कभी भी स्वतंत्र अवस्था में नहीं पाई जातीं। सक्रियता श्रेणी के मध्य की धातुएँ ( ZnZn , FeFe , PbPb आदि) की अभिक्रियाशीलता मध्यम होती है। पृथ्वी की भूपर्पटी में ये मुख्यतः ऑक्साइड, सल्फाइड या कार्बोनेट के रूप में पाई जाती हैं। कई धातुओं के अयस्क ऑक्साइड होते हैं। ऑक्सीजन की अत्यधिक अभिक्रियाशीलता एवं पृथ्वी पर इसके प्रचुर मात्रा में पाए जाने के कारण ऑक्साइड बनते हैं।

प्रश्न 12. भर्जन तथा निस्तापन में अन्तर बताइए।

अथवा

निस्तापन तथा भर्जन में क्या अन्तर है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर-

भर्जन

निस्तापन

1. यह प्रक्रिया सल्फाइड अयस्कों हेतु प्रयुक्त की जाती है।

1. यह प्रक्रिया कार्बोनेट अयस्कों हेतु प्रयुक्त की जाती है।

2. इसमें अयस्क को वायु की उपस्थिति में अधिक ताप पर गर्म करके ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है।

2. इसमें अयस्क को सीमित वायु में अधिक ताप पर गर्म करके ऑक्साइड में बदला जाता है।

3. उदाहरण- 2ZnS(s)+3O2(g)→तापन2ZnO(s)+2SO2(g)2ZnS(s)+3O_{2}(g) \rightarrow \text{तापन}2ZnO(s)+2SO_{2}(g)

3. उदाहरण- ZnCO3(s)→तापनZnO(s)+CO2(g)ZnCO_{3}(s) \rightarrow \text{तापन}ZnO(s)+CO_{2}(g)

प्रश्न 13. सोने की शुद्धता किसमें मापी जाती है? शुद्ध सोने के आभूषण क्यों नहीं बनाए जाते हैं?

उत्तर- सोने की शुद्धता कैरेट में मापी जाती है। शुद्ध सोने को 24 कैरेट कहते हैं तथा यह काफी नर्म होता है। इसलिए यह आभूषण बनाने के लिए उपयुक्त नहीं होता है। इसे कठोर बनाने के लिए इसमें चाँदी या ताँबा मिलाया जाता है। भारत में अधिकांश आभूषण बनाने के लिए 22 कैरेट सोने का उपयोग किया जाता है। इसका अर्थ यह है कि 22 भाग शुद्ध सोने में 2 भाग ताँबा या चाँदी का मिलाया जाता है।

प्रश्न 14. (a) खुली वायु में कुछ दिन रखने पर सिल्वर (चाँदी) की वस्तुएँ काली हो जाती हैं। क्यों?

(b) आर्द्र वायु में कॉपर की भूरे रंग की चमक धीरे-धीरे क्यों खत्म हो जाती है?

उत्तर- (a) खुली वायु में कुछ दिन छोड़ देने पर सिल्वर की वस्तुएँ काली हो जाती हैं क्योंकि वायु में उपस्थित सल्फर, सिल्वर के साथ क्रिया करता है, जिससे सिल्वर पर सल्फाइड की परत बन जाती है।

(b) कॉपर वायु में उपस्थित आर्द्र कार्बन-डाइऑक्साइड ( CO2CO_{2} ) के साथ अभिक्रिया करता है जिससे हरे रंग के बेसिक कॉपर कार्बोनेट की परत इसकी सतह पर चढ़ने लगती है और इसकी सतह से भूरे रंग की चमक धीरे-धीरे खत्म हो जाती है।

प्रश्न 15. जिंक, आयरन से भी अधिक विद्युत धनी है, अतः इसका संक्षारण, आयरन से अधिक तेजी से होना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं होता जबकि इसे आयरन के रक्षण (गैल्वेनीकरण) हेतु प्रयुक्त करते हैं। क्यों?

उत्तर- जिंक जब आर्द्र वायु के सम्पर्क में आता है तो इस पर क्षारीय जिंक कार्बोनेट (Zn(OH)2ZnCO3)(Zn(OH)_{2}ZnCO_{3}) की रक्षी परत बन जाती है। यह परत जिंक की पुनः अभिक्रिया से रक्षा करती है। अतः जिंक का संक्षारण नहीं होता इस कारण इसे लोहे को जंग लगने से बचाने के लिए प्रयोग में लिया जाता है।

प्रश्न 16. थर्मिट अभिक्रिया किसे कहते हैं? अभिक्रिया का संतुलित रासायनिक समीकरण दीजिए।

उत्तर- अत्यधिक अभिक्रियाशील धातुएँ जैसे-सोडियम, कैल्शियम, ऐलुमिनियम आदि निम्न अभिक्रियाशीलता वाले धातुओं को उनके यौगिकों से विस्थापित कर सकती है। यह विस्थापन अभिक्रियाएँ अत्यधिक ऊष्माक्षेपी होती हैं। इनमें उत्सर्जित ऊष्मा की मात्रा इतनी अधिक होती है कि धातुएँ गलित अवस्था में प्राप्त होती हैं। इसलिए आयरन (III) ऑक्साइड ( Fe2O3Fe_{2}O_{3} ) के साथ ऐलुमिनियम की अभिक्रिया का उपयोग रेल की पटरी एवं मशीनी पुर्जों की दरारों को जोड़ने के लिए किया जाता है। इस अभिक्रिया को थर्मिट अभिक्रिया कहते हैं।

Fe2O3(s)+2Al(s)→2Fe(l)+Al2O3(s)+ऊष्माFe_{2}O_{3}(s)+2Al(s) \rightarrow 2Fe(l)+Al_{2}O_{3}(s)+\text{ऊष्मा}

प्रश्न 17. (a) लोहे का शुद्ध अवस्था में उपयोग नहीं किया जाता। क्यों?

(b) लोहे की कठोरता बढ़ाने के लिए क्या किया जाता है? इससे स्टेनलेस इस्पात (स्टील) किस प्रकार बनाया जाता है?

उत्तर :

(a) लोहे को शुद्ध अवस्था में उपयोग में नहीं लिया जाता क्योंकि शुद्ध लोहा अत्यंत नरम होता है एवं गर्म करने पर सुगमतापूर्वक खिंच जाता है।
(b) लोहे की कठोरता बढ़ाने के लिए इसमें थोड़ा कार्बन (लगभग 0.050.05 प्रतिशत) मिलाते हैं। इससे लोहा कठोर एवं प्रबल हो जाता है। स्टेनलेस इस्पात बनाने के लिए लोहे के साथ निकल एवं क्रोमियम मिलाया जाता है। स्टेनलेस इस्पात कठोर होता है तथा इस पर जंग नहीं लगता है।

इस प्रकार लोहे के साथ अन्य पदार्थ मिलाने से इसके गुण बदल जाते हैं।

प्रश्न 18. शुद्ध धातु की तुलना में मिश्र धातु में गलनांक व विद्युत चालकता में क्या परिवर्तन आ जाता है? उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तर : शुद्ध धातु की अपेक्षा उसके मिश्र धातु की विद्युत चालकता तथा गलनांक कम होता है। उदाहरण के लिए ताँबा एवं जस्ते ( CuCu एवं ZnZn ) की मिश्र धातु 'पीतल' तथा ताम्र एवं टिन ( CuCu एवं SnSn ) की मिश्र धातु 'काँसा' विद्युत के कुचालक हैं, जबकि ताम्र का उपयोग विद्युतीय परिपथ बनाने में किया जाता है। सीसा एवं टिन ( PbPb एवं SnSn ) की मिश्र धातु 'सोल्डर' है जिसका गलनांक बहुत कम होता है इसलिए इसका उपयोग विद्युत तारों की परस्पर वेल्डिंग के लिए किया जाता है।

प्रश्न 19. सक्रियता श्रेणी में नीचे आने वाली धातुओं का निष्कर्षण किस प्रकार किया जाता है? समझाइए।

उत्तर : सक्रियता श्रेणी में नीचे आने वाली धातुएँ बहुत कम क्रियाशील होती हैं। इन धातुओं के ऑक्साइड को केवल गर्म करने से ही धातु प्राप्त किया जा सकता है। जैसे-सिनाबार ( HgSHgS ) मर्करी (पारद) का एक अयस्क है। इसे वायु में गर्म करने पर यह सबसे पहले मर्क्यूरिक ऑक्साइड ( HgOHgO ) में परिवर्तित होता है और अधिक गर्म करने पर मर्क्यूरिक ऑक्साइड मर्करी (पारद) में अपचयित हो जाता है।

2HgS(s)+3O2(g)→तापन2HgO(s)+2SO2(g)2HgS_{(s)}+3O_{2(g)} \rightarrow \text{तापन}2HgO_{(s)}+2SO_{2(g)}

2HgO(s)→तापन2Hg(l)+O2(g)2HgO_{(s)} \rightarrow \text{तापन}2Hg_{(l)}+O_{2(g)}

इसी प्रकार, प्राकृतिक रूप से Cu2SCu_{2}S के रूप में उपलब्ध ताँबे (कॉपर) को केवल वायु में गर्म करके इसको अयस्क से अलग किया जा सकता है।

2Cu2S+3O2(g)→तापन2Cu2O(s)+2SO2(g)2Cu_{2}S+3O_{2(g)} \rightarrow \text{तापन}2Cu_{2}O_{(s)}+2SO_{2(g)}

2Cu2O+Cu2S→तापन6Cu(s)+SO2(g)2Cu_{2}O+Cu_{2}S \rightarrow \text{तापन}6Cu_{(s)}+SO_{2(g)}

प्रश्न 20. अयस्कों का सान्द्रण क्यों किया जाता है?

उत्तर : खनिज अयस्कों में अनेक अशुद्धियाँ, जैसे-पत्थर के टुकड़े, मिट्टी, रेत आदि होती हैं, जिन्हें गैंग या आधात्री कहते हैं। सान्द्रण की क्रिया द्वारा इन अशुद्धियों को दूर किया जाता है। सान्द्रण की क्रिया कर लेने के बाद अयस्क धातु के निष्कर्षण के लिए अधिक उपयुक्त बन जाते हैं।

प्रश्न 21. अयस्कों के समृद्धिकरण तथा धातुओं के परिष्करण में अन्तर कीजिए।

उत्तर :

अयस्कों का समृद्धिकरण

धातुओं का परिष्करण

1. अयस्कों से मिट्टी, रेत आदि जैसी अशुद्धियों (गैंग) को हटाना अयस्कों का समृद्धिकरण कहलाता है।

1. विभिन्न अपचयन प्रक्रमों से प्राप्त धातुओं में अनेक अपद्रव्य होते हैं जिन्हें हटाकर शुद्ध धातु प्राप्त करने की प्रक्रिया धातुओं का परिष्करण कहलाती है।

2. इस प्रक्रिया के लिए विभिन्न भौतिक व रासायनिक प्रक्रमों का उपयोग किया जाता है।

2. इस प्रक्रिया के लिए विद्युत अपघटनी परिष्करण जैसी विधियों का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 22. किसी धातु की तनु H2SO4H_{2}SO_{4} अम्ल से क्रिया कराई जाती है। उत्सर्जित गैस को चित्र में दिखाई विधि से एकत्र किया जाता है। निम्नलिखित के उत्तर दीजिए-

(a) गैस का नाम बताइए।
(b) गैस को एकत्र करने की विधि का नाम बताइए।
(c) क्या गैस जल में विलेय है अथवा नहीं?
(d) क्या गैस वायु से हल्की है अथवा भारी?

(e) गैस का रासायनिक सूत्र लिखें।

[गैस एकत्र करने की विधि (अधोमुखी विस्थापन)]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 3 धातु एवं अधातु चित्र 5

उत्तर-

(a) हाइड्रोजन गैस।
(b) गैस को एकत्र करने की विधि 'गैस का जल के ऊपर अधोमुखी विस्थापन' है।
(c) गैस जल में विलेय नहीं है।
(d) गैस वायु से हल्की है।

(e) गैस का रासायनिक सूत्र = H2H_{2}

प्रश्न 23. आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में विद्युत का चालन नहीं करते परन्तु गलित अवस्था में या जलीय विलयन के रूप में विद्युत का चालन करते हैं। इसके पीछे क्या वैज्ञानिक कारण है?

उत्तर- ठोस अवस्था में आयनिक यौगिक विद्युत का चालन नहीं करते क्योंकि ठोस अवस्था में दृढ़ संरचना के कारण आयनों की गति संभव नहीं होती है। परन्तु आयनिक यौगिक गलित अवस्था या जलीय विलयन के रूप में विद्युत का चालन करते हैं क्योंकि इन अवस्थाओं में विपरीत आवेश वाले आयनों के मध्य स्थिर वैद्युत आकर्षण बल ऊष्मा के कारण कमजोर पड़ जाता है। इसलिए आयन स्वतंत्र रूप से गमन करते हैं और विद्युत का चालन करते हैं।

प्रश्न 24. ताँबे के विद्युत अपघटनी परिष्करण का नामांकित चित्र बनाइये। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22; प्रश्न बैंक)

[ताँबे का विद्युत अपघटनी परिष्करण]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 3 धातु एवं अधातु चित्र 6

उत्तर-

चित्र- ताँबे का विद्युत अपघटनी परिष्करण

प्रश्न 25. लवण के विलयन की चालकता की जाँच का नामांकित चित्र बनाइये। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)

[लवण के विलयन की चालकता की जाँच]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 3 धातु एवं अधातु चित्र 7

उत्तर-

चित्र- लवण के विलयन की चालकता की जाँच

प्रश्न 26. तन्यता को परिभाषित कीजिए और सबसे अधिक तन्य धातु का नाम लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)

उत्तर- तन्यता- धातु को पतले तार के रूप में खींचने की क्षमता को तन्यता कहते हैं।

सबसे अधिक तन्य धातु- सोना।

प्रश्न 27. भर्जन तथा निस्तापन को परिभाषित कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)

उत्तर- (i) भर्जन- सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में अधिक ताप पर गर्म करने पर यह ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है। यह प्रक्रिया भर्जन कहलाती है।

(ii) निस्तापन- कार्बोनेट अयस्क को सीमित वायु में अधिक ताप पर गर्म करने से यह ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है। इस प्रक्रिया को निस्तापन कहते हैं।

प्रश्न 28. "धातुएँ विद्युत की सुचालक होती हैं।"

उपरोक्त कथन के प्रयोगशाला परीक्षण के लिए प्रयुक्त व्यवस्थित उपकरण को चित्रित कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)

उत्तर-

[विद्युत चालकता परीक्षण हेतु परिपथ]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 3 धातु एवं अधातु चित्र 8

चित्र- धातुएँ विद्युत की सुचालक हैं

प्रश्न 29. यदि कॉपर आर्द्र कार्बन डाइऑक्साइड में पड़ा रहता है तो इसकी सतह पर क्या प्रभाव पड़ेगा? वर्णन कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)

उत्तर- कॉपर वायु में उपस्थित आर्द्र कार्बन डाइऑक्साइड के साथ अभिक्रिया करता है, जिससे इसकी सतह से भूरे रंग की चमक धीरे-धीरे खत्म हो जाती है तथा इस पर हरे रंग की परत चढ़ जाती है। यह हरा पदार्थ बेसिक कॉपर कार्बोनेट होता है।

प्रश्न 30. धातुकर्म क्या है? गैंग से आप क्या समझते हैं? (प्रश्न बैंक)

उत्तर- धातुकर्म- अयस्क से धातु के निष्कर्षण तथा उसका परिष्करण कर उपयोगी बनाने के प्रक्रम को धातुकर्म कहते हैं।

गैंग- पृथ्वी से खनिज अयस्कों में मिट्टी, रेत आदि जैसी कई अशुद्धियाँ होती हैं जिन्हें गैंग कहते हैं।

प्रश्न 31. आयनिक यौगिकों के 3 गुणधर्म लिखिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर- (i) गलनांक एवं क्वथनांक- आयनिक यौगिकों का गलनांक एवं क्वथनांक बहुत अधिक होता है, क्योंकि मजबूत अन्तर-आयनिक आकर्षण को तोड़ने के लिए ऊर्जा की पर्याप्त मात्रा की आवश्यकता होती है।

(ii) घुलनशीलता- वैद्युत संयोजक यौगिक सामान्यतः जल में घुलनशील तथा किरोसिन, पेट्रोल आदि जैसे विलायकों में अविलेय होते हैं।

(iii) विद्युत चालकता- आयनिक यौगिक जलीय विलयन एवं गलित अवस्था में विद्युत का चालन करते हैं लेकिन ठोस अवस्था में आयनिक यौगिक विद्युत का चालन नहीं करते हैं।

प्रश्न 32. धातु एवं अधातु के ऑक्साइडों की प्रकृति कैसी होती है? उदाहरण देकर समझाइए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर- धातुओं के ऑक्साइड की प्रकृति- अधिकांश धातु ऑक्साइडों की प्रकृति 'क्षारीय' होती है क्योंकि ये अम्ल के साथ क्रिया कर लवण व जल बनाते हैं। जैसे- कॉपर ऑक्साइड।

लेकिन एल्युमिनियम ऑक्साइड, जिंक ऑक्साइड जैसी कुछ धातु ऑक्साइड अम्लीय या क्षारीय दोनों प्रकार के व्यवहार प्रदर्शित करती है। ऐसे धातु ऑक्साइड जो अम्ल तथा क्षारक दोनों से अभिक्रिया करके लवण तथा जल प्रदान करते हैं, उभयधर्मी ऑक्साइड कहलाते हैं।

अधातुओं के ऑक्साइड की प्रकृति—अधातुओं के ऑक्साइड अम्लीय या उदासीन होते हैं। जैसे— CO2CO_{2} कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड जो एक क्षारक है के, साथ क्रिया कर लवण व जल का निर्माण करते हैं।

प्रश्न 33. निम्न में अभिक्रियाओं के आधार पर पदार्थ 'X' को पहचानिए। (प्रश्न बैंक)

A, B और C के नाम व सूत्र भी लिखिए।

[Flowchart showing X reacting with Zn, HCl, and CH_3COOH]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 3 धातु एवं अधातु चित्र 9

उत्तर— पदार्थ 'X' = सोडियम हाइड्रॉक्साइड ( NaOHNaOH )

A = सोडियम जिंकट ( Na2ZnO2Na_{2}ZnO_{2} )

B = सोडियम क्लोराइड ( NaClNaCl )

C = सोडियम ऐसीटेट ( CH3COONaCH_{3}COONa )

प्रश्न 34. एक यौगिक जिसका उपयोग टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने में प्लास्टर हेतु किया जाता है, यह पदार्थ जल अवशोषित करने पर कठोर हो जाता है। उस पदार्थ को पहचानिए और रासायनिक सूत्र लिखिए। उसके निर्माण की रासायनिक समीकरण लिखिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— यौगिक का नाम—कैल्सियम सल्फेट हेमिहाइड्रेट

यौगिक का सूत्र— CaSO4⋅12H2OCaSO_{4}·\frac{1}{2}H_{2}O

रासायनिक समीकरण—

CaSO4⋅12H2O+112H2O→CaSO4⋅2H2OCaSO_{4}·\frac{1}{2}H_{2}O+1\frac{1}{2}H_{2}O \rightarrow CaSO_{4}·2H_{2}O

(प्लास्टर ऑफ पेरिस) (जिप्सम)

प्रश्न 35. एक तत्व A ऑक्साइड A2O3A_{2}O_{3} बनाता है जो अम्लीय प्रकृति का है। धातु या अधातु के रूप में A को पहचानिए। यह ऑक्साइड अम्लीय या क्षारीय किस प्रकृति का होगा? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— तत्व 'A' = 'धातु' है।

4Al+3O2→2Al2O34Al+3O_{2} \rightarrow 2Al_{2}O_{3}

(एल्युमिनियम) (एल्युमिनियम ऑक्साइड)

एल्युमिनियम ऑक्साइड अम्लीय तथा क्षारीय दोनों प्रकार का व्यवहार प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 36. विद्युत हीटर का तापन तार किसका बना होता है? किसी विद्युत हीटर का क्रोड नहीं चमकता जबकि तापन तार चमकता है, कैसे? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— विद्युत हीटर का तापन तार 'नाइक्रोम' नामक मिश्र धातु से बना होता है। विद्युत हीटर में, तापन तार का प्रतिरोध ज्यादा होता है, जबकि हीटर के क्रोड का प्रतिरोध कम होता है। ज्यादा प्रतिरोध के कारण तापन तार में ज्यादा ऊष्मा उत्पन्न होती है, जिससे वह गर्म होकर चमकता है, जबकि कम प्रतिरोध के कारण क्रोड में कम ऊष्मा उत्पन्न होती है, इसलिए वह गर्म तो होता है, लेकिन चमकता नहीं।

दीर्घउत्तरीय प्रश्न—

प्रश्न 1. समझाइए कि किस प्रकार निम्न धातुओं को अपचयन विधि द्वारा उनके यौगिकों से प्राप्त कर सकते हैं-

(A) धातु M जो कि सक्रियता श्रेणी के आधार पर मध्यम अभिक्रियाशील धातु है। एक उदाहरण भी दीजिए।
(B) धातु N जो कि सक्रियता श्रेणी के आधार पर उच्च अभिक्रियाशील धातु है। एक उदाहरण भी दीजिए।

उत्तर— (A) दिया गया है कि धातु M सक्रियता श्रेणी में मध्यम अभिक्रियाशील धातु है। अतः यह आयरन, जिंक, लैड, कॉपर आदि हो सकती है। ये धातुएँ मध्यम अभिक्रियाशील हैं अतः इन धातुओं को इनके कार्बोनेट एवं सल्फाइड यौगिकों से प्राप्त करने के लिए पहले इन्हें धातु ऑक्साइड में परिवर्तित किया जाता है। इस परिवर्तन के लिए भर्जन एवं निस्तापन प्रक्रिया काम में...

विज्ञान कक्षा-X 87

ली जाती है। निस्तापन प्रक्रिया में धातु कार्बोनेटों को सीमित वायु की उपस्थिति में अधिक ताप पर गर्म करते हैं जबकि भर्जन प्रक्रिया में धातु सल्फाइडों को वायु की उपस्थिति में अधिक ताप पर गर्म करते हैं। इस प्रकार प्राप्त धातु ऑक्साइडों का कार्बन (कोयला) या किसी अपचायक से अपचयन करवाकर धातु को प्राप्त किया जाता है।

उदाहरण- जिंक धातु को उसके ऑक्साइड से प्राप्त करने की समीकरण निम्न हैं-

ZnCO3(s)→तापन2ZnO(s)+2SO2(g)ZnCO_{3(s)} \rightarrow \text{तापन}2ZnO_{(s)}+2SO_{2(g)}

ZnO(s)+C(s)→तापनZnS(s)+CO(g)ZnO_{(s)}+C_{(s)} \rightarrow \text{तापन}ZnS_{(s)}+CO_{(g)}

(B) दिया गया है कि धातु N सक्रियता श्रेणी में उच्च अभिक्रियाशील धातु है अतः यह सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम, ऐलुमिनियम धातु हो सकती है। इन धातुओं को कार्बन अपचयन द्वारा प्राप्त नहीं किया जा सकता है। इन धातुओं की बंधुता कार्बन की अपेक्षा ऑक्सीजन के प्रति अधिक होती है। अतः इन धातुओं को विद्युत अपघटनी अपचयन द्वारा प्राप्त किया जाता है।

उदाहरण- सोडियम धातु को गलित सोडियम क्लोराइड के विद्युत अपघटनी अपचयन से प्राप्त करते हैं।

कैथोड पर (−)→Na++e−→Na(s)(-) \rightarrow Na^{+}+e^{-} \rightarrow Na_{(s)}

एनोड पर (+)→2Cl−→Cl2(g)+2e−(+) \rightarrow 2Cl^{-} \rightarrow Cl_{2(g)}+2e^{-}

प्रश्न 2. (A) थर्मिट प्रक्रिया का उपयोग कहाँ किया जाता है? इस प्रक्रिया में कौनसी धातु गलित अवस्था में प्राप्त होती है?

(B) इस प्रक्रिया में उपयोग होने वाली धातु ऐलुमिनियम का, धातु की सक्रियता श्रेणी में स्थान कहाँ पर है?

(C) इस प्रक्रिया में उपचयित तथा अपचयित होने वाले पदार्थों के नाम लिखिए।

उत्तर- (A) थर्मिट प्रक्रिया का उपयोग रेल की पटरी एवं मशीनी पुर्जों की दरारों को जोड़ने के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया में ऐलुमिनियम धातु की आयरन ऑक्साइड से क्रिया कराने पर आयरन (लोहा) धातु गलित अवस्था में प्राप्त होता है।

(B) ऐलुमिनियम धातु को सक्रियता श्रेणी में अधिक अभिक्रियाशील श्रेणी में सम्मिलित किया जाता है।

(C) थर्मिट प्रक्रिया का रासायनिक समीकरण निम्न है-

Fe2O3(s)+2Al(s)→गर्मकरनेपर2Fe(l)+Al2O3(s)+ऊष्माFe_{2}O_{3}(s)+2Al(s) \rightarrow \text{गर्म} \text{करने} \text{पर}2Fe(l)+Al_{2}O_{3}(s)+\text{ऊष्मा}

इस प्रक्रिया में आयरन ऑक्साइड ( Fe2O3Fe_{2}O_{3} ) से ऑक्सीजन का ह्रास (कमी) होकर आयरन (लोहा) बन रहा है अतः Fe2O3Fe_{2}O_{3} का अपचयन होगा तथा ऐलुमिनियम धातु ( AlAl ) में ऑक्सीजन का योग (वृद्धि) होकर ऐलुमिनियम ऑक्साइड ( Al2O3Al_{2}O_{3} ) बन रहा है अतः AlAl धातु का उपचयन (ऑक्सीकरण) होगा।

प्रश्न 3. कोई धातु XX जिसका उपयोग थर्मिट प्रक्रिया में होता है, ऑक्सीजन में गर्म किए जाने पर कोई ऑक्साइड YY बनाती है जो प्रकृति में उभयधर्मी है। XX और YY को पहचानिए। ऑक्साइड YY की हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और सोडियम हाइड्रोक्साइड के साथ अभिक्रियाओं के संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए।

उत्तर- थर्मिट प्रक्रिया में आयरन ऑक्साइड ( Fe2O3Fe_{2}O_{3} ) की क्रिया ऐलुमिनियम धातु से होती है। जब ऐलुमिनियम धातु को ऑक्सीजन की उपस्थिति में गर्म करते हैं तो ऐलुमिनियम ऑक्साइड बनता है जो प्रकृति में उभयधर्मी होता है।

Fe2O3(s)+2Al(s)→गर्मकरनेपर2Fe(l)+Al2O3(s)+ऊष्माFe_{2}O_{3}(s)+2Al(s) \rightarrow \text{गर्म} \text{करने} \text{पर}2Fe(l)+Al_{2}O_{3}(s)+\text{ऊष्मा} (थर्मिट अभिक्रिया)

4Al(s)+3O2(g)→2Al2O3(s)4Al(s)+3O_{2}(g) \rightarrow 2Al_{2}O_{3}(s) (उभयधर्मी ऑक्साइड)

अतः धातु ' XX ' का नाम 'ऐलुमिनियम' है तथा धात्विक ऑक्साइड ' YY ' का नाम ऐलुमिनियम ऑक्साइड ( Al2O3Al_{2}O_{3} ) है।

ऐलुमिनियम ऑक्साइड की हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया-

Al2O3+6HCl→2AlCl3+3H2OAl_{2}O_{3}+6HCl \rightarrow 2AlCl_{3}+3H_{2}O

ऐलुमिनियम ऑक्साइड की सोडियम हाइड्रोक्साइड के साथ अभिक्रिया-

Al2O3+2NaOH→2NaAlO2+H2OAl_{2}O_{3}+2NaOH \rightarrow 2NaAlO_{2}+H_{2}O

(सोडियम मेटा ऐलुमिनेट)

प्रश्न 4. एक धातु MM प्रकृति में अपने कार्बोनेट अयस्क के रूप में पाया जाता है। इसका उपयोग लोहे के जस्तीकरण (यशदलेपन) के लिए भी किया जाता है। इस धातु MM को पहचानिए तथा इसके इस अयस्क का नाम लिखिए। इस अयस्क से इस धातु को कैसे प्राप्त किया जा सकता है?

उत्तर- लोहे के यशदलेपन में जस्ता (जिंक) धातु का उपयोग किया जाता है। जिंक धातु के कार्बोनेट अयस्क का नाम कैलेमाइन है जिसका सूत्र ZnCO3ZnCO_{3} है। अतः ' MM ' धातु का नाम जिंक (जस्ता) है।

**कैलेमाइन ( ZnCO3ZnCO_{3} ) अयस्क से जिंक धातु प्राप्त करना-**

(i) कैलेमाइन एक कार्बोनेट अयस्क है अतः इसे सर्वप्रथम अधिक ताप पर गर्म करके निस्तापन प्रक्रिया द्वारा जिंक ऑक्साइड में बदला जाता है। वायु की सीमित मात्रा में गर्म करने पर ZnCO3ZnCO_{3} जिंक ऑक्साइड तथा कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है।

ZnCO3(s)→निस्तापनगर्मकरनेपरZnO(s)+CO2(g)↑ZnCO_{3(s)} \rightarrow \text{निस्तापन} \text{गर्म} \text{करने} \text{पर}ZnO_{(s)}+CO_{2}(g) \uparrow

कैलेमाइन जिंक ऑक्साइड

(ii) अब इस जिंक ऑक्साइड ( ZnOZnO ) को कार्बन (कोयला या कोक) के साथ गर्म करने पर ऑक्साइड का अपचयन हो जाता है तथा जिंक धातु प्राप्त होती है।

ZnO(s)+C(s)→ΔZn(s)+CO2(g)↑ZnO_{(s)}+C_{(s)} \rightarrow \Delta Zn_{(s)}+CO_{2}(g) \uparrow

जिंक ऑक्साइड (कोक) जिंक धातु कार्बन डाइऑक्साइड

प्रश्न 5. कारण बताइए-

(A) प्लैटिनम, सोना तथा चांदी का उपयोग आभूषण बनाने के लिए किया जाता है।
(B) सोडियम, पोटैशियम धातुओं को केरोसिन तेल में डुबोकर रखा जाता है।

उत्तर- (A) प्लैटिनम, सोना एवं चांदी का उपयोग आभूषण बनाने के लिए किया जाता है क्योंकि ये धातुएँ सक्रियता श्रेणी में निम्नतम स्थान पर होती हैं। इस कारण जल, ऑक्सीजन, अम्लों या क्षारकों से अभिक्रिया नहीं करता है। ये धातुएँ आघातवर्धनीय तथा तन्य भी होती हैं इस कारण आभूषणों के विभिन्न डिजाइन सरलतापूर्वक बनाए जा सकते हैं।

(B) सोडियम तथा पोटैशियम धातु का ज्वलन ताप काफी कम होता है इस कारण ये वायु तथा नमी के संपर्क में आते ही आग पकड़ लेती हैं। इन धातुओं को वायु तथा नमी के सीधे सम्पर्क से बचाये रखने के लिए इन्हें केरोसिन तेल में डुबोकर रखा जाता है।

प्रश्न 6. कॉपर ( CuCu ) तथा ऐलुमिनियम ( AlAl ) को वायु की उपस्थिति में गर्म करने पर क्या होगा? प्राप्त ऑक्साइडों की प्रकृति कैसी है? अभिक्रिया सहित बताइए। क्या धातु ऑक्साइड जल में घुलनशील होते हैं?

उत्तर- जब कॉपर को वायु की उपस्थिति में गर्म किया जाता है तो यह ऑक्सीजन के साथ क्रिया करके काले रंग का कॉपर (II) ऑक्साइड बनाता है।

2Cu+O2→2CuO2Cu+O_{2} \rightarrow 2CuO

(कॉपर) [कॉपर (II) ऑक्साइड]

इसी प्रकार ऐलुमिनियम, ऐलुमिनियम ऑक्साइड बनाता है।

4Al+3O2→2Al2O34Al+3O_{2} \rightarrow 2Al_{2}O_{3}

(ऐलुमिनियम) (ऐलुमिनियम ऑक्साइड)

धातु ऑक्साइड सामान्यतः क्षारीय होते हैं लेकिन ऐलुमिनियम ऑक्साइड, जिंक ऑक्साइड जैसे कुछ धातु ऑक्साइड अम्लीय तथा क्षारकीय दोनों व्यवहार प्रदर्शित करते हैं। ऐसे धातु ऑक्साइड जो अम्ल तथा क्षारक दोनों से अभिक्रिया करके लवण तथा जल प्रदान करते हैं, उभयधर्मी ऑक्साइड कहलाते हैं। अम्ल तथा क्षारक के साथ ऐलुमिनियम ऑक्साइड निम्न प्रकार से अभिक्रिया करता है-

विज्ञान कक्षा-X 89

Al2O3+6HCl→2AlCl3+3H2OAl_{2}O_{3}+6HCl \rightarrow 2AlCl_{3}+3H_{2}O

Al2O3+2NaOH→2NaAlO2+H2OAl_{2}O_{3}+2NaOH \rightarrow 2NaAlO_{2}+H_{2}O

(सोडियम ऐलुमिनेट)

अधिकांश धातु ऑक्साइड जल में अघुलनशील हैं लेकिन इनमें से कुछ ऑक्साइड जल में घुलकर क्षार प्रदान करते हैं। सोडियम ऑक्साइड एवं पोटैशियम ऑक्साइड अग्र प्रकार से जल में घुलकर क्षार प्रदान करते हैं-

Na2O(s)+H2O(l)→2NaOH(aq)Na_{2}O(s)+H_{2}O(l) \rightarrow 2NaOH(aq)

K2O(s)+H2O(l)→2KOH(aq)K_{2}O(s)+H_{2}O(l) \rightarrow 2KOH(aq)

प्रश्न 7. धातुओं की जल के साथ अभिक्रिया, धातु की क्रियाशीलता पर निर्भर करती है। विभिन्न धातुओं के उदाहरण से इसकी व्याख्या कीजिए।

उत्तर- जल के साथ अभिक्रिया करके धातुएँ, धातु ऑक्साइड तथा H2H_{2} गैस बनाती हैं। कुछ धातु ऑक्साइड जल में विलेय होकर धातु हाइड्रॉक्साइड बनाते हैं। लेकिन सभी धातुएँ जल के साथ अभिक्रिया नहीं करती हैं। KK तथा NaNa जैसी धातुएँ ठंडे जल के साथ तेजी से अभिक्रिया करती हैं तथा यह अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी होती है जिससे उत्पन्न H2H_{2} गैस तत्काल प्रज्वलित हो जाती है।

2K(s)+2H2O(l)→2KOH(aq)+H2(g)+ऊष्मीयऊर्जा2K(s)+2H_{2}O(l) \rightarrow 2KOH(aq)+H_{2}(g)+\text{ऊष्मीय} \text{ऊर्जा}

2Na(s)+2H2O(l)→2NaOH(aq)+H2(g)+ऊष्मीयऊर्जा2Na(s)+2H_{2}O(l) \rightarrow 2NaOH(aq)+H_{2}(g)+\text{ऊष्मीय} \text{ऊर्जा}

जल के साथ कैल्शियम की अभिक्रिया थोड़ी धीमी गति से होती है।

Ca(s)+2H2O(l)→Ca(OH)2(aq)+H2(g)Ca(s)+2H_{2}O(l) \rightarrow Ca(OH)_{2}(aq)+H_{2}(g)

मैग्नीशियम ठंडे जल के साथ अभिक्रिया नहीं करता है परन्तु गर्म जल के साथ अभिक्रिया करके वह मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड एवं हाइड्रोजन गैस देता है।

ऐलुमिनियम, आयरन तथा जिंक जैसी धातुएँ न तो ठंडे जल के साथ और न ही गर्म जल के साथ अभिक्रिया करती हैं। लेकिन भाप के साथ अभिक्रिया करके ये धातु ऑक्साइड तथा हाइड्रोजन बनाती हैं।

2Al(s)+3H2O(g)→Al2O3(s)+3H2(g)2Al(s)+3H_{2}O(g) \rightarrow Al_{2}O_{3}(s)+3H_{2}(g)

3Fe(s)+4H2O(g)→Fe3O4(s)+4H2(g)3Fe(s)+4H_{2}O(g) \rightarrow Fe_{3}O_{4}(s)+4H_{2}(g)

लेड, कॉपर, सिल्वर तथा गोल्ड जैसी धातुएँ जल के साथ बिल्कुल अभिक्रिया नहीं करती हैं।

प्रश्न 8. किसी अयस्क से शुद्ध धातु के निष्कर्षण में प्रयुक्त पदों (चरण) का एक चार्ट बनाइए।

उत्तर- किसी अयस्क से शुद्ध धातु के निष्कर्षण में प्रयुक्त विभिन्न पदों को निम्न चार्ट द्वारा दर्शाया जा सकता है-

[Flowchart of metal extraction process]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 3 धातु एवं अधातु चित्र 10

चित्र-अयस्क से धातु के निष्कर्षण में प्रयुक्त पद

प्रश्न 9. सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर स्थित धातुओं का निष्कर्षण किस विधि से किया जाता है? उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।

उत्तर- सक्रियता श्रेणी में सबसे ऊपर स्थित धातुएँ ( K,Na,Ca,MgK, Na, Ca, Mg एवं AlAl ) अत्यन्त अभिक्रियाशील होती हैं। इन्हें कार्बन के साथ गर्म करके इनके यौगिकों से प्राप्त नहीं कर सकते। उदाहरण के लिए, कार्बन के द्वारा सोडियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम, ऐलुमिनियम आदि के ऑक्साइड का अपचयन कर उन्हें धातुओं में परिवर्तित नहीं किया जा सकता है। इन धातुओं की बंधुता कार्बन की अपेक्षा ऑक्सीजन के प्रति अधिक होती है। इन धातुओं को विद्युत अपघटनी अपचयन द्वारा प्राप्त किया जाता है। जैसे-सोडियम, मैग्नीशियम एवं कैल्शियम को उनके गलित क्लोराइडों के विद्युत अपघटन से प्राप्त किया जाता है। कैथोड (ऋण आवेशित इलेक्ट्रोड) पर धातुएँ निक्षेपित हो जाती हैं तथा एनोड (धन आवेशित इलेक्ट्रोड) पर क्लोरीन मुक्त होती है। अभिक्रियाएँ इस प्रकार हैं-

कैथोड पर: Na++e−→Na(s)Na^{+}+e^{-} \rightarrow Na_{(s)}

एनोड पर: 2Cl−→Cl2+2e−2Cl^{-} \rightarrow Cl_{2}+2e^{-}

इसी प्रकार, ऐलुमिनियम ऑक्साइड के विद्युत अपघटनी अपचयन से ऐलुमिनियम प्राप्त किया जाता है।

MgCl2MgCl_{2} (गलित) से MgMg प्राप्त किया जाता है।

MgCl2(s)→गर्मMg2++2Cl−MgCl_{2(s)} \rightarrow \text{गर्म}Mg^{2+}+2Cl^{-} (गलित)

कैथोड पर: Mg2++2e−→Mg(s)Mg^{2+}+2e^{-} \rightarrow Mg_{(s)}

एनोड पर: 2Cl⊖→Cl2(g)+2e−2Cl^{⊖} \rightarrow Cl_{2}(g)+2e^{-}

कैथोड पर अपचयन होता है तथा एनोड पर ऑक्सीकरण होता है।

प्रश्न 10. यौगिक (X) और ऐलुमिनियम का उपयोग रेल की पटरियों को जोड़ने के लिए किया जाता है।

(i) यौगिक (X) को पहचानिए। (प्रश्न बैंक) (ii) अभिक्रिया का नाम लिखिए। (iii) इसकी अभिक्रिया लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)

उत्तर-

(i) यौगिक X फेरिक ऑक्साइड ( Fe2O3Fe_{2}O_{3} ) है। (ii) यह अभिक्रिया 'थर्मिट अभिक्रिया' कहलाती है। (iii) अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण-

Fe2O3(s)+2Al(s)→2Fe(l)+Al2O3(s)+ऊष्माFe_{2}O_{3}(s)+2Al(s) \rightarrow 2Fe(l)+Al_{2}O_{3}(s)+\text{ऊष्मा}

(यहाँ Fe2O3Fe_{2}O_{3} का अपचयन और AlAl का उपचयन/ऑक्सीकरण हो रहा है)

निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. धातुओं तथा अधातुओं की क्रिया से आयनिक यौगिक बनने को समझाइए तथा आयनिक यौगिकों के सामान्य गुणधर्म भी बताइए।

अथवा

MgMg व ClCl परमाणु के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास दीजिए।**

MgMg व ClCl के मध्य इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण से MgCl2MgCl_{2} यौगिक का बनना दर्शाइए।**

उत्तर- धातुएँ विद्युत धनी होती हैं अतः आसानी से इलेक्ट्रॉन देकर धनायन बनाती हैं तथा अधातुएँ विद्युत ऋणी होती हैं। अतः धातु से इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाती हैं। इन आयनों के मध्य आकर्षण को ही आयनिक बन्ध कहते हैं। जिन यौगिकों में आयनिक बन्ध होता है, उन्हें आयनिक यौगिक कहते हैं। उदाहरण- NaClNaCl का बनना।

विज्ञान कक्षा-X 91

सोडियम परमाणु के बाह्यतम कोश में केवल एक इलेक्ट्रॉन होता है। यदि यह अपने MM कोश से एक इलेक्ट्रॉन त्याग देता है तब LL कोश इसका बाह्यतम कोश बन जाता है, जिसमें स्थायी अष्टक उपस्थित है। इस परमाणु के नाभिक में 1111 प्रोटॉन हैं लेकिन इलेक्ट्रॉनों की संख्या 1010 होने के कारण इसमें धन आवेश की अधिकता होती है तथा यह सोडियम धनायन Na+Na^{+} बनाता है। परन्तु क्लोरीन के बाह्यतम कोश में 77 इलेक्ट्रॉन होते हैं तथा अष्टक पूर्ण होने के लिए इसे एक इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता है।

जब सोडियम एवं क्लोरीन अभिक्रिया करते हैं तब सोडियम द्वारा त्यागा गया एक इलेक्ट्रॉन क्लोरीन ग्रहण कर लेता है। एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके क्लोरीन-परमाणु, इकाई ऋण आवेश प्राप्त करता है क्योंकि इसके नाभिक में 1717 प्रोटॉन होते हैं तथा इसके सभी कोशों ( K,LK, L एवं MM कोश) में कुल 1818 इलेक्ट्रॉन होते हैं। इससे क्लोराइड ऋणायन Cl−Cl^{-} प्राप्त होता है। इसलिए इन दोनों तत्वों के बीच निम्न प्रकार से आदान-प्रदान का सम्बन्ध स्थापित हो जाता है-

Na→Na++e−Na \rightarrow Na^{+}+e^{-}

2,8,12,82,8,12,8

(सोडियम धनायन)

Cl+e−→Cl−Cl+e^{-} \rightarrow Cl^{-}

2,8,72,8,82,8,72,8,8

(क्लोराइड ऋणायन)

[सोडियम क्लोराइड का निर्माण]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 3 धातु एवं अधातु चित्र 11

चित्र-सोडियम क्लोराइड का निर्माण

विपरीत आवेश होने के कारण सोडियम तथा क्लोराइड आयन परस्पर आकर्षित होते हैं तथा प्रबल स्थिरवैद्युत आकर्षण बल से बँधकर सोडियम क्लोराइड ( NaClNaCl ) के रूप में उपस्थित रहते हैं। यहाँ सोडियम क्लोराइड अणु के रूप में नहीं पाया जाता है बल्कि यह विपरीत आयनों का समूह होता है।

MgCl2MgCl_{2} का बनना- MgMg , दो इलेक्ट्रॉन देकर Mg2+Mg^{2+} बनाता है तथा ये दोनों इलेक्ट्रॉन दो क्लोरीन परमाणु ग्रहण करते हैं जिससे दो Cl−Cl^{-} बनते हैं।

Mg→Mg2++2e−Mg \rightarrow Mg^{2+}+2e^{-}

2,8,22,82,8,22,8

(मैग्नीशियम धनायन)

Cl+e−→Cl−Cl+e^{-} \rightarrow Cl^{-}

2,8,72,8,82,8,72,8,8

(क्लोराइड ऋणायन)

[मैग्नीशियम क्लोराइड का निर्माण]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 3 धातु एवं अधातु चित्र 12

चित्र-मैग्नीशियम क्लोराइड का निर्माण

धातु से अधातु में इलेक्ट्रॉन के स्थानान्तरण से बने यौगिकों को आयनिक यौगिक या वैद्युत संयोजक यौगिक कहा जाता है।

सामान्य गुणधर्म-आयनिक यौगिकों के सामान्य गुण निम्न प्रकार से हैं-

(1) भौतिक प्रकृति (Physical State)-धन एवं ऋण आयनों के बीच प्रबल आकर्षण बल के कारण आयनिक यौगिक ठोस एवं कठोर होते हैं। ये यौगिक सामान्यतः भंगुर होते हैं तथा दाब डालने पर छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाते हैं।

(2) गलनांक एवं क्वथनांक (Melting and Boiling Point)-आयनिक यौगिकों का गलनांक एवं क्वथनांक बहुत अधिक होता है क्योंकि प्रबल अंतर-आयनिक आकर्षण बल को तोड़ने के लिए ऊर्जा की अधिक मात्रा की आवश्यकता होती है।

(3) घुलनशीलता (Solubility)-वैद्युत संयोजक यौगिक सामान्यतः जल में घुलनशील तथा केरोसिन, पेट्रोल आदि कार्बनिक विलायकों में अविलेय होते हैं।

(4) विद्युत चालकता (Electrical conductance)- किसी विलयन से विद्युत के चालन के लिए आवेशित कणों की गतिशीलता आवश्यक होती है। आयनिक यौगिकों के जलीय विलयन में आयन उपस्थित होते हैं। जब विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है तो यह आयन विपरीत इलेक्ट्रोड की ओर गमन करने लगते हैं। ठोस अवस्था में आयनिक यौगिक विद्युत का चालन नहीं करते हैं क्योंकि ठोस अवस्था में दृढ़ संरचना के कारण आयनों की गति नहीं होती है। लेकिन आयनिक यौगिक गलित अवस्था में विद्युत का चालन करते हैं क्योंकि गलित अवस्था में भी विपरीत आवेश वाले आयनों के मध्य स्थिरवैद्युत आकर्षण बल ऊष्मा के कारण कमजोर पड़ जाता है। इसलिए आयन स्वतंत्र रूप से गमन करते हैं एवं विद्युत का चालन करते हैं।

प्रश्न 2. प्रयोग द्वारा सिद्ध कीजिए कि धातु ऊष्मा के सुचालक होते हैं।

अथवा

प्रयोग द्वारा समझाइये कि धातु ऊष्मा के सुचालक होते हैं। आवश्यक चित्र भी बनाइये।

(माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)

उत्तर- धातु ऊष्मा के सुचालक होते हैं, इसे सिद्ध करने के लिए निम्न प्रयोग करते हैं-

1. ऐलुमिनियम या कॉपर का तार लेकर उसे क्लैंप की सहायता से स्टैंड से बाँध देते हैं।

2. तार के खुले सिरे पर मोम का उपयोग कर एक पिन चिपका देते हैं।

3. स्पिरिट लैंप, मोमबत्ती या बर्नर से क्लैंप के निकट तार को गर्म करते हैं।

4. थोड़ी देर बाद प्रेक्षित करने पर देखते हैं कि मोम के पिघलने से पिन नीचे गिर जाती है परन्तु तार नहीं पिघलता।

[धातु ऊष्मा के सुचालक होते हैं]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 3 धातु एवं अधातु चित्र 13

उपरोक्त प्रयोग से पता चलता है कि धातु ऊष्मा के सुचालक हैं तथा इनका गलनांक बहुत अधिक होता है।

प्रश्न 3. सक्रियता श्रेणी के मध्य में स्थित धातुओं के निष्कर्षण की विस्तृत विवेचना कीजिए।

उत्तर- सक्रियता श्रेणी के मध्य में स्थित धातुएँ; जैसे-आयरन, जिंक, लेड, कॉपर आदि की क्रियाशीलता मध्यम होती है। प्रकृति में ये धातुएँ प्राय: सल्फाइड या कार्बोनेट के रूप में पाई जाती हैं। सल्फाइड या कार्बोनेट की तुलना में धातु को उसके ऑक्साइड से प्राप्त करना अधिक आसान होता है। इसलिए अपचयन से पहले धातु के सल्फाइड एवं कार्बोनेट को धातु ऑक्साइड में परिवर्तित करते हैं।

सल्फाइड अयस्क को वायु की उपस्थिति में अधिक ताप पर गर्म करने पर यह ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है। इस प्रक्रिया को भर्जन कहते हैं। इसी प्रकार कार्बोनेट अयस्क को सीमित वायु में अधिक ताप पर गर्म करने से यह ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाता है। इस प्रक्रिया को निस्तापन कहा जाता है।

जिंक के अयस्कों के भर्जन एवं निस्तापन के समय निम्न रासायनिक अभिक्रिया होती है-

भर्जन- 2ZnS(s)+3O2(g)→तापन2ZnO(s)+2SO2(g)2ZnS_{(s)}+3O_{2(g)} \rightarrow \text{तापन}2ZnO_{(s)}+2SO_{2(g)}

निस्तापन- ZnCO3(s)→तापनZnO(s)+CO2(g)ZnCO_{3(s)} \rightarrow \text{तापन}ZnO_{(s)}+CO_{2(g)}

इसके पश्चात् कार्बन जैसे उपयुक्त अपचायक का उपयोग कर धातु ऑक्साइड से धातु प्राप्त किया जाता है। उदाहरण- जब जिंक ऑक्साइड को कार्बन के साथ गर्म किया जाता है तो यह जिंक धातु में अपचयित हो जाता है।

ZnO(s)+C(s)→तापनZn(s)+CO(g)ZnO_{(s)}+C_{(s)} \rightarrow \text{तापन}Zn_{(s)}+CO_{(g)}

धातुओं को उनके यौगिकों से प्राप्त करना अपचयन प्रक्रम है। इसके अलावा विस्थापन अभिक्रिया का भी उपयोग किया जाता है। अत्यधिक क्रियाशील धातुएँ; जैसे-सोडियम, कैल्शियम, ऐलुमिनियम आदि को अपचायक के रूप में...

उपयोग किया जा सकता है क्योंकि ये निम्न क्रियाशीलता वाले धातुओं को उनके यौगिकों से विस्थापित कर देती हैं। जैसे- मैंगनीज डाइऑक्साइड को ऐलुमिनियम चूर्ण के साथ गर्म किया जाता है तो निम्न अभिक्रिया होती है-

3MnO2(s)+4Al(s)→3Mn(l)+2Al2O3(s)+ऊष्मा3MnO_{2(s)}+4Al_{(s)} \rightarrow 3Mn_{(l)}+2Al_{2}O_{3(s)}+\text{ऊष्मा}

इसमें MnO2MnO_{2} का अपचयन तथा AlAl का ऑक्सीकरण हो रहा है।

यह विस्थापन अभिक्रियाएँ अत्यधिक ऊष्माक्षेपी होती हैं। इनमें उत्सर्जित ऊष्मा की मात्रा इतनी अधिक होती है कि धातुएँ गलित अवस्था में प्राप्त होती हैं।

प्रश्न 4. धातुओं एवं अधातुओं के बीच कैसे विभेद करेंगे?

उत्तर- धातुओं एवं अधातुओं के गुणों में विभेद-

भौतिक गुणों में विभेद

धातुएँ

अधातुएँ

1. ये सामान्य ताप पर ठोस होती हैं। (अपवाद-पारा (मर्करी) द्रव अवस्था में पाया जाता है।)

ये सामान्य ताप पर तीनों अवस्थाओं में पाई जाती हैं। सल्फर और फॉस्फोरस ठोस रूप में, H2,O2H_{2},O_{2} एवं N2N_{2} गैसीय रूप में तथा ब्रोमीन तरल रूप में पाये जाते हैं।

2. ये तन्य तथा आघातवर्ध्य होती हैं।

ये प्रायः भंगुर होती हैं।

3. इनमें धात्विक चमक पाई जाती है।

इनमें चमक नहीं होती परन्तु हीरा, ग्रेफाइट तथा आयोडीन अपवाद हैं।

4. ये ऊष्मा तथा विद्युत की सुचालक होती हैं। (बिस्मथ अपवाद है)

ग्रेफाइट को छोड़कर शेष सभी अधातुएँ विद्युत की कुचालक होती हैं।

5. इनके गलनांक तथा क्वथनांक बहुत अधिक होते हैं।

इनके गलनांक तथा क्वथनांक कम होते हैं। (अपवाद-ग्रेफाइट)

6. प्रत्येक धातु की कठोरता दूसरी धातु से भिन्न होती है। Fe,Cu,AlFe, Cu, Al धातुएँ अत्यन्त कठोर होती हैं। इसके विपरीत Na,K,LiNa, K, Li धातुएँ इतनी मुलायम होती हैं कि उन्हें चाकू से भी काटा जा सकता है।

अधिकतर ठोस अधातुएँ बहुत मुलायम होती हैं। केवल एक अधातु हीरा (कार्बन का अपररूप) बहुत कठोर होती है।

7. ये अपारदर्शक होती हैं।

गैसीय अधातुएँ पारदर्शक होती हैं।

धातुओं एवं अधातुओं के रासायनिक गुणों में विभेद

धातुएँ

अधातुएँ

1. धातुएँ क्षारीय ऑक्साइड बनाती हैं।

अधातुएँ अम्लीय तथा उदासीन ऑक्साइड बनाती हैं।

2. ये अम्लों से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस तथा लवण बनाती हैं।

ये अम्लों में से हाइड्रोजन गैस को उत्सर्जित नहीं करती हैं।

3. इनकी प्रकृति धनात्मक होती है।

इनकी प्रकृति ऋणात्मक होती है।

4. ये क्लोरीन से संयोग करके क्लोराइड बनाती हैं, जो वैद्युत संयोजक होते हैं।

ये क्लोरीन से संयोग करके क्लोराइड बनाती हैं, परन्तु वे सहसंयोजक होते हैं।

5. धातुएँ अपचायक हैं।

अधातुएँ ऑक्सीकारक हैं।

6. ये जलीय विलयन में धनायन बनाती हैं।

अधातुएँ जलीय विलयन में ऋणायन बनाती हैं।

प्रश्न 5. धातु पर भाप की क्रिया को नामांकित चित्र बनाते हुए समझाइए।

अथवा

लोह धातु पर भाप की क्रिया का नामांकित चित्र बनाइये। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)

[धातु पर भाप की क्रिया (Reaction of metal with steam)]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 3 धातु एवं अधातु चित्र 14

चित्र-धातु पर भाप की क्रिया

जल के साथ अभिक्रिया करके धातुएँ हाइड्रोजन गैस तथा धातु ऑक्साइड उत्पन्न करती हैं। परन्तु एल्युमिनियम, आयरन तथा जिंक जैसी धातुएँ न तो शीतल जल के साथ और न ही गर्म जल के साथ अभिक्रिया करती हैं। लेकिन भाप के साथ अभिक्रिया करके ये धातु ऑक्साइड तथा हाइड्रोजन प्रदान करती हैं।

2Al(s)+3H2O(g)→Al2O3(s)+3H2(g)2Al_{(s)}+3H_{2}O_{(g)} \rightarrow Al_{2}O_{3(s)}+3H_{2(g)}

3Fe(s)+4H2O(g)→Fe3O4(s)+4H2(g)3Fe_{(s)}+4H_{2}O_{(g)} \rightarrow Fe_{3}O_{4(s)}+4H_{2(g)}

प्रश्न 6. मिश्र धातु किसे कहते हैं? इनके बनाने के उद्देश्यों का वर्णन करो।

उत्तर- मिश्र धातु-किसी धातु का किसी अन्य धातु या अधातु के साथ मिलाकर बनाया गया समांगी मिश्रण, मिश्रधातु कहलाता है। इसे तैयार करने के लिए पहले मूल धातु को गलित अवस्था में लाया जाता है। फिर दूसरे तत्वों को एक निश्चित अनुपात में विलीन किया जाता है। फिर इसे कमरे के ताप पर ठण्डा किया जाता है।

शुद्ध धातु की अपेक्षा उसके मिश्रधातु की विद्युत चालकता तथा गलनांक कम होता है। स्टेनलेस स्टील, ताँबा, पीतल, कांसा, सोल्डर आदि सभी मिश्र धातुएँ हैं।

मिश्र धातु बनाने के उद्देश्य-

(1) कठोरता बढ़ाने के लिए- लोहे में कार्बन की मात्रा मिलाकर स्टील (इस्पात) बनाया जाता है, जो लोहे से अधिक कठोर होता है। सोने में ताँबा तथा चाँदी में सीसा मिलाने से उनकी कठोरता अधिक हो जाती है।

(2) शक्ति बढ़ाने के लिए- इस्पात, ड्यूरेलियम (एल्युमिनियम से बना मिश्र धातु) आदि मिश्र धातुएँ कठोर होने के कारण शक्तिशाली भी होती हैं।

(3) संक्षारण रोकने के लिए- लोहे के साथ निकल एवं क्रोमियम मिलाने पर स्टेनलेस स्टील प्राप्त होता है, जो कठोर होता है उसमें जंग नहीं लगता है। जैसे-लोहे तथा जिंक से बनी मिश्रधातु पर जंग नहीं लगता।

(4) गलनांक कम करने के लिए- सीसा एवं टिन ( PbPb एवं SnSn ) की मिश्र धातु सोल्डर है, जिसका गलनांक बहुत कम होता है। इस कारण इसका उपयोग विद्युत तारों की परस्पर वेल्डिंग के लिए किया जाता है।

(5) घरेलू उपयोग- घरों, कारखानों, दफ्तरों में सभी जगह मिश्र धातुओं का उपयोग होता है, जैसे-घर के बर्तन, अलमारी, पंखे, फ्रिज, आभूषण, मशीनों और वाहनों के गियर, यातायात के साधन, मूर्तियाँ आदि को बनाने में मिश्र धातुओं का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 7. जंग किसे कहते हैं? इसके लिए किन-किन आवश्यकताओं का पूरा होना आवश्यक होता है? लोहे को जंग से बचाने की मुख्य विधियाँ लिखिए।

उत्तर- जंग-लम्बे समय तक आर्द्र वायु के सीधे सम्पर्क में रहने पर लोहे पर भूरे रंग के पदार्थ की परत चढ़ जाती है, जिसे जंग कहते हैं। यह आयरन (III) ऑक्साइड और आयरन (III) हाइड्रॉक्साइड का यौगिक होता है।

जंग लोहे की सतह को कमजोर कर देता है। इसके कारण लोहे की बनी वस्तुओं का बहुत नुकसान होता है।

लोहे पर जंग लगने के लिए वायु एवं नमी की आवश्यकता होती है। इसे अग्र क्रियाकलाप द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है-

विज्ञान कक्षा-X 95

क्रियाकलाप-

(1) तीन परखनलीयाँ A, B और C लेकर प्रत्येक में स्वच्छ लोहे की कीलें डालते हैं तथा परखनली A में थोड़ा जल डालकर उसे कॉर्क से बंद कर देते हैं।

(2) परखनली B में उबलता हुआ आसवित जल डालकर उसमें 1mL1mL तेल मिलाकर कॉर्क से बन्द कर देते हैं। परखनली B में तेल डालने के कारण यह वायु को जल में विलीन होने से रोकता है।

(3) परखनली C में थोड़ा-सा निर्जल कैल्शियम क्लोराइड डालकर उसे कॉर्क से बन्द कर देते हैं। कैल्शियम क्लोराइड वायु की नमी को सोख लेता है।

इन परखनलियों को कुछ दिन छोड़ देने के बाद उनका प्रेक्षण करते हैं।

प्रेक्षण एवं परिणाम- हम देखते हैं कि परखनली A में रखी लोहे की कीलों पर जंग लग गया है परन्तु परखनली B एवं C में रखी कीलों पर जंग नहीं लगता है। परखनली A की कीलें वायु व जल दोनों में रहती हैं। परखनली B वाली कील केवल जल के सम्पर्क में रहती है एवं परखनली C की कीलें शुष्क वायु के सम्पर्क में रहती हैं। इस कारण इन पर जंग नहीं लगता है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि लोहे पर जंग लगने के लिए वायु व नमी दोनों की आवश्यकता होती है।

लोहे को जंग से बचाने के उपाय- लोहे को निम्न उपाय अपनाकर जंग से बचाया जा सकता है-

(i) लोहे पर तेल या ग्रीस की तह जमाकर। (ii) लोहे की सतह पर पेंट करके। (iii) लोहे की सतह पर प्लास्टिक की परत लगाकर। (iv) यशदलेपन द्वारा (लोहे की वस्तुओं पर जस्ते की परत चढ़ाकर)। (v) लोहे पर क्रोमियम लेपन करके। (vi) एनोडीकरण द्वारा। (vii) मिश्रधातु बनाकर।

[लोहे पर जंग लगने की स्थिति की जाँच करना]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 3 धातु एवं अधातु चित्र 15

प्रश्न 8. अयस्क किसे कहते हैं? ताँबे के परिष्करण की विद्युत अपघटनी विधि का सचित्र वर्णन कीजिए।

उत्तर-

अयस्क- जिन खनिजों में किसी विशेष धातु की मात्रा अधिक रूप से होती है, जिसे निकालना लाभकारी होता है, उन्हें अयस्क कहते हैं।

ताँबे के परिष्करण की विद्युत अपघटनी विधि- कॉपर, जिंक, टिन, निकल, सिल्वर, गोल्ड आदि जैसी धातुओं का परिष्करण विद्युत अपघटन द्वारा किया जाता है। इस विधि में, अशुद्ध धातु को एनोड तथा शुद्ध धातु की पतली परत को कैथोड बनाया जाता है। धातु के लवण के विलयन को विद्युत अपघट्य के रूप में लेते हैं। चित्र के अनुसार उपकरण व्यवस्थित किया जाता है। विद्युत अपघट्य से जब विद्युत प्रवाहित की जाती है तब एनोड पर स्थित अशुद्ध धातु विद्युत अपघट्य में घुल जाती है। इतनी ही मात्रा में शुद्ध धातु विद्युत अपघट्य से कैथोड पर जमा हो जाती है। विलेय अशुद्धियाँ विलयन में चली जाती हैं तथा अविलेय अशुद्धियाँ एनोड के नीचे निक्षेपित हो जाती हैं जिसे एनोड पंक कहते हैं।

[ताँबे का विद्युत अपघटनी परिष्करण]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 3 धातु एवं अधातु चित्र 16

प्रश्न 9. धातुओं की लवण विलयन के साथ अभिक्रिया को उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तर- धातुओं की अन्य धातु लवणों के विलयन के साथ अभिक्रिया को निम्न प्रयोग द्वारा समझा जा सकता है-

(1) दो परखनलीयाँ लेकर एक में कॉपर सल्फेट विलयन तथा दूसरी में आयरन सल्फेट विलयन डाल देते हैं।

(2) कॉपर का एक स्वच्छ तार एवं आयरन की एक कील लेते हैं।

(3) कॉपर के तार को आयरन सल्फेट के विलयन में जबकि आयरन की कील को कॉपर सल्फेट के विलयन में डाल देते हैं।

(4) 20 मिनट बाद प्रेक्षण करने पर देखते हैं कि कॉपर सल्फेट का नीला विलयन हल्के हरे रंग के विलयन में बदल जाता है जबकि आयरन सल्फेट के विलयन में किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं होता है।

(5) इस अभिक्रिया को निम्न समीकरण द्वारा प्रदर्शित कर सकते हैं-

Fe(s)+CuSO4(aq)→Cu(s)+FeSO4(aq)Fe_{(s)}+CuSO_{4(aq)} \rightarrow Cu_{(s)}+FeSO_{4(aq)}

(नीला रंग) (हल्का हरा रंग)

[धातुओं की लवण विलयन के साथ अभिक्रिया का प्रायोगिक प्रदर्शन]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 3 धातु एवं अधातु चित्र 17

इस प्रयोग में आयरन अपने से कम अभिक्रियाशील धातु कॉपर को उसके यौगिक के विलयन से विस्थापित कर देता है।

इस प्रकार निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि अभिक्रियाशील धातु अपने से कम अभिक्रियाशील धातु को उसके लवण विलयन से विस्थापित कर देती है।

चित्र-धातु की लवण विलयन के साथ अभिक्रिया