📖 1. समाधान: पाठगत एवं पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
राजस्थान बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान — सभी पाठगत (In-text) एवं अभ्यास (Exercise) प्रश्नों के सटीक एवं संपूर्ण हल।
पाठगत प्रश्न
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प्रश्न 1. हमारे जैसे बहुकोशिकीय जीवों में ऑक्सीजन की आवश्यकता पूरी करने में विसरण क्यों अपर्याप्त है?
उत्तर- हमारे जैसे बहुकोशिकीय जीवों में सभी कोशिकाएँ अपने आसपास के पर्यावरण के सीधे संपर्क में नहीं रह सकतीं। इसलिए साधारण विसरण सभी कोशिकाओं की ऑक्सीजन की आवश्यकता की पूर्ति करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
प्रश्न 2. कोई वस्तु सजीव है, इसका निर्धारण करने के लिए हम किस मापदण्ड का उपयोग करेंगे?
उत्तर- कोई वस्तु सजीव है, इसके लिए उसमें निम्नलिखित लक्षण होने चाहिए-
प्रश्न 3. किसी जीव द्वारा किन कच्ची सामग्रियों का उपयोग किया जाता है?
उत्तर- किसी जीव द्वारा कच्ची सामग्रियों का उपयोग कार्बन आधारित अणुओं के रूप में किया जाता है क्योंकि पृथ्वी पर जीवन कार्बन आधारित अणुओं पर निर्भर है अतः अधिकांश खाद्य पदार्थ भी कार्बन आधारित होते हैं।
प्रश्न 4. जीवन के अनुरक्षण के लिए आप किन प्रक्रमों को आवश्यक मानेंगे?
उत्तर- जीवन के अनुरक्षण के लिए निम्न प्रक्रमों को आवश्यक मानते हैं-
(i) पोषण, (ii) उपापचय, (iii) श्वसन, (iv) उत्सर्जन, (v) परिवहन, (vi) पदार्थों का आदान-प्रदान।
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प्रश्न 1. स्वयंपोषी पोषण तथा विषमपोषी पोषण में क्या अन्तर है?
उत्तर- स्वयंपोषी पोषण तथा विषमपोषी पोषण में अन्तर
क्र.सं. | स्वयंपोषी पोषण (Autotrophic Nutrition) | विषमपोषी पोषण (Heterotrophic Nutrition) |
1. | पोषण की वह विधि, जिसमें जीवधारी सरल अकार्बनिक पदार्थों से कार्बनिक भोज्य पदार्थों | पोषण की वह विधि, जिसमें जीवधारी सरल अकार्बनिक पदार्थों से भोजन निर्मित नहीं कर पाते और इसे दूसरे |
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का निर्माण स्वयं कर लेते हैं, स्वयंपोषी पोषण कहलाती है तथा ऐसे जीवधारी स्वयंपोषी कहलाते हैं। | जीवों से प्राप्त करते हैं, विषमपोषी पोषण कहलाती है तथा ऐसे जीवधारी विषमपोषी कहलाते हैं।
2. सभी हरे पौधे स्वयंपोषी पोषण विधि अपनाते हैं और सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में पर्णहरित (क्लोरोफिल) द्वारा जल एवं से ग्लूकोज का निर्माण करते हैं। | सभी जन्तु विषमपोषी पोषण विधि अपनाते हैं और ये शाकाहारी, मांसाहारी, परजीवी या मृतोपजीवी हो सकते हैं।
3. उदाहरण-सभी हरे पौधे, नील-हरित शैवाल एवं प्रकाश-संश्लेषी जीवाणु। | उदाहरण-सभी जन्तु, कवक, अधिकांश जीवाणु, परजीवी पादप (जैसे-अमरबेल)।
प्रश्न 2. प्रकाशसंश्लेषण के लिए आवश्यक कच्ची सामग्री पौधा कहाँ से प्राप्त करता है?
(माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2025-26)
उत्तर- पौधे प्रकाशसंश्लेषण के लिए आवश्यक कच्ची सामग्री के रूप में, प्रकाश सूर्य से प्राप्त करते हैं और जल की पूर्ति जड़ों द्वारा मिट्टी में उपस्थित जल के अवशोषण से करते हैं। विभिन्न पोषक तत्व, जैसे-नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, लोहा, मैग्नीज, मैग्नीशियम आदि भी मिट्टी से लिए जाते हैं। कार्बन डाइऑक्साइड वायुमण्डल से ली जाती है।
प्रश्न 3. हमारे आमाशय में अम्ल की भूमिका क्या है?
अथवा
आमाशय में पाये जाने वाले अम्ल का नाम व कार्य लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)
उत्तर- आमाशय की भित्ति में उपस्थित जठर ग्रंथियों द्वारा हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ( ) का स्रावण किया जाता है। इस अम्ल की भूमिका निम्नलिखित है-
(i) यह भोजन को सड़ने से बचाता है।
(ii) यह अम्लीय माध्यम प्रदान करता है, जो पेप्सिन एंजाइम की क्रिया में सहायक होता है।
(iii) कठोर ऊतकों को घोलने में सहायता करता है।
(iv) यह भोजन को रोगाणुरहित (sterilize) करता है।
(v) यह लार में एमाइलेज की क्रिया को समाप्त करता है।
(vi) एवं लोहे के अवशोषण में सहायता करता है।
प्रश्न 4. पाचक एन्जाइमों का क्या कार्य है?
उत्तर- एन्जाइम कार्बनिक जैव-उत्प्रेरक होते हैं, जो विभिन्न जैव-रासायनिक क्रियाओं की दर को बढ़ाते हैं। पाचक एन्जाइमों का मुख्य कार्य भोजन का पाचन करना है अर्थात् जटिल एवं अघुलनशील भोजन को सरल एवं घुलनशील भोजन में बदलना है।
प्रश्न 5. पचे हुए भोजन को अवशोषित करने के लिए क्षुद्रांत्र को कैसे अभिकल्पित किया गया है?
उत्तर- क्षुद्रांत्र के आंतरिक स्तर पर अनेक अंगुली जैसे प्रवर्ध होते हैं, जिन्हें दीर्घरोम कहते हैं। ये अवशोषण का सतही क्षेत्रफल बढ़ा देते हैं। दीर्घरोम में रुधिर वाहिकाओं की बहुतायत होती है, जो भोजन को अवशोषित करके शरीर की प्रत्येक कोशिका तक पहुँचाते हैं।
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प्रश्न 1. श्वसन के लिए ऑक्सीजन प्राप्त करने की दिशा में एक जलीय जीव की अपेक्षा स्थलीय जीव किस प्रकार लाभप्रद है?
उत्तर- जलीय जीव जल में विलेय ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं क्योंकि जल में विलेय ऑक्सीजन की मात्रा वायु में ऑक्सीजन की मात्रा की तुलना में बहुत कम है, इसलिए जलीय जीवों की श्वास दर स्थलीय जीवों की अपेक्षा अधिक तेज होती है।
इसके विपरीत स्थलीय जीव श्वसन के लिए वायुमण्डल की ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं। विभिन्न जीवों में यह ऑक्सीजन भिन्न-भिन्न अंगों द्वारा ग्रहण की जाती है। इन सभी अंगों में एक रचना होती है जो उस सतही क्षेत्रफल को बढ़ाती है जो ऑक्सीजन बाहुल्य वायुमण्डल के सम्पर्क में रहता है।
अर्थात् वायु में करीब 21 प्रतिशत होती है। जबकि जल में एक प्रतिशत से भी कम होती है। अतः स्थलीय जीव जलीय जीव की तुलना में अधिक ग्रहण करता है।
प्रश्न 2. ग्लूकोज के ऑक्सीकरण से भिन्न जीवों में ऊर्जा प्राप्त करने के विभिन्न पथ क्या हैं?
अथवा
श्वसन में ग्लूकोज के विखण्डन के विभिन्न पथों को समझाइए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर- विभिन्न जैविक क्रियाओं के लिए आवश्यक ऊर्जा ग्लूकोज के ऑक्सीकरण से प्राप्त होती है, जो कि के रूप में संचित रहती है। विभिन्न जीवधारियों में ग्लूकोज का ऑक्सीकरण निम्न प्रकार से हो सकता है-
1. वायवीय श्वसन- जब ग्लूकोज का ऑक्सीकरण कोशिका द्रव्य में ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है, तब उसे वायवीय श्वसन कहते हैं। अधिकांश जीवों में इसी प्रकार से ऊर्जा उत्पादन होता है।
2. अवायवीय श्वसन- यदि ग्लूकोज का ऑक्सीकरण ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है, तो उसे अवायवीय श्वसन कहते हैं। यह प्रक्रम किण्वन के समय यीस्ट में होता है, यहाँ पायरुवेट, इथेनॉल तथा में परिवर्तित हो जाता है।
कभी-कभी जब हमारी पेशी कोशिकाओं में ऑक्सीजन का अभाव हो जाता है, तब पायरुवेट एक अन्य तीन कार्बन वाले अणु लैक्टिक अम्ल में परिवर्तित हो जाता है।
[ग्लूकोज के विखण्डन के विभिन्न पथों का प्रवाह आरेख]

चित्र-भिन्न पथों द्वारा ग्लूकोज का विखंडन
प्रश्न 3. मनुष्यों में ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन कैसे होता है?
उत्तर- मानव में श्वसन वर्णक वस्तुतः हीमोग्लोबिन होता है, जो ऑक्सीजन के लिए उच्च बंधुता रखता है। यह वर्णक लाल रुधिर कणिकाओं में उपस्थित होता है। अतः वायु कूपिकाओं से विसरित होकर ऑक्सीजन, हीमोग्लोबिन के अणुओं से बंध जाती है। रुधिर इस ऑक्सीजन को ऑक्सीजन कमी वाले ऊतकों में पहुँचा देता है।
कार्बन डाइऑक्साइड जल में अधिक विलेय है, इसलिए इसका परिवहन हमारे रुधिर में विलेय अवस्था में होता है। रुधिर में विलेय होकर फेफड़ों तक लाई जाती है। वायु कूपिकाओं में की सान्द्रता कम होने के कारण रुधिर से यह विसरित होकर फेफड़ों में आ जाती है। यह युक्त वायु निःश्वसन द्वारा शरीर से बाहर निकाल दी जाती है।
प्रश्न 4. गैसों के विनिमय के लिए मानव फुफ्फुस में अधिकतम क्षेत्रफल को कैसे अभिकल्पित किया गया है?
उत्तर- मनुष्य में दो फेफड़े होते हैं जिन्हें क्रमशः दायां व बायां फेफड़ा कहते हैं। फेफड़ों के अन्दर मार्ग छोटी और छोटी नलिकाओं में विभाजित हो जाता है जो अंत में गुब्बारे जैसी रचना में अंतकृत हो जाता है जिसे कूपिका कहते हैं। कूपिका एक सतह उपलब्ध कराती है जिससे गैसों का विनिमय हो सकता है। कूपिकाओं के चारों ओर रुधिर केशिकाओं का घना जाल होता है, जो श्वसनीय सतह का कार्य करती हैं। यदि मनुष्य के दोनों फेफड़ों की कूपिकाओं की सतह को फैला दिया जाये तो यह लगभग वर्गमीटर क्षेत्र ढक लेती हैं। अतः फेफड़ों में स्थित कूपिकाएं गैसों के विनिमय के लिए विस्तृत स्थान उपलब्ध करवाती हैं।
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प्रश्न 1. मानव में वहन तंत्र के घटक कौनसे हैं? इन घटकों के क्या कार्य हैं?
उत्तर- मानव में वहन तंत्र के दो मुख्य घटक हैं जिन्हें क्रमशः (अ) परिसंचरण तंत्र (Circulatory system) (ब) लसीका तंत्र (Lymphatic system) कहते हैं।
(अ) परिसंचरण तंत्र (Circulatory system)- परिसंचरण तंत्र के निम्न तीन भाग होते हैं-
(1) हृदय (Heart)- यह एकपेशीय अंग है जो पूरे शरीर में रुधिर पम्प करने के लिए संकुचन करता है।
(2) रुधिर (Blood)-यह एक तरल संयोजी ऊतक है, जिसमें तरल प्लाज्मा एवं रुधिर कोशिकाओं के रूप में स्वतन्त्र कोशिकाएँ होती हैं। ये रुधिर कोशिकाएँ तीन प्रकार की होती हैं-
(i) लाल रुधिर कोशिकाएँ (Red Blood Corpuscles) के कार्य-ये ऑक्सीजन को फेफड़ों से ऊतकों तक पहुँचाती हैं एवं कार्बन डाइऑक्साइड को कोशिकाओं से फेफड़ों तक संवहन करती हैं।
(ii) श्वेत रुधिर कोशिकाएँ (White Blood Corpuscles) के कार्य-ये भक्षाणु (phagocytosis) का कार्य करती हैं एवं ये एंटीबॉडीज का निर्माण करती हैं।
(iii) प्लेटलेट्स (Platelets) के कार्य-ये रक्त स्कंदन (clotting) में सहायता करती हैं, जिससे रक्तवाहिनी के कटे भाग से रक्तस्राव बंद हो जाता है।
प्लाज्मा (Plasma) के कार्य-(i) यह भोजन, कार्बन डाइऑक्साइड तथा नाइट्रोजनी वर्ज्य पदार्थ का विलीन रूप में वहन करता है।
(ii) अकार्बनिक पदार्थ का नियमन करते हैं।
(iii) प्लाज्मा में स्थित फाइब्रिनोजन व प्रोथ्रोम्बिन रुधिर स्कंदन में मदद करता है।
(3) रुधिर वाहिकाएँ (Blood Vessels)-ये तीन प्रकार की होती हैं-
(i) धमनियाँ (Arteries)-ये मोटी भित्ति वाली रुधिर वाहिकाएँ हैं, जो रुधिर को हृदय से विभिन्न अंगों में ले जाने का कार्य करती हैं।
(ii) शिराएँ (Veins)-ये पतली भित्ति वाली वाहिकाएँ होती हैं, जो रुधिर को विभिन्न अंगों से हृदय की ओर लाने का कार्य करती हैं।
(iii) केशिकाएँ (Capillaries)-ये अत्यधिक पतली एवं संकीर्ण वाहिकाएँ हैं, जो धमनियों को शिराओं से जोड़ती हैं।
(ब) लसिका तन्त्र (Lymphatic system)-केशिकाओं की भित्ति में उपस्थित छिद्रों द्वारा कुछ प्लाज्मा, प्रोटीन तथा रुधिर कोशिकाएँ बाहर निकलकर ऊतक के अंतर्कोशिकीय अवकाश में आ जाते हैं तथा ऊतक तरल या लसिका का निर्माण करते हैं। यह रुधिर के प्लाज्मा की तरह ही है, लेकिन यह रंगहीन होता है तथा इसमें अल्प मात्रा में प्रोटीन होते हैं।
लसिका अंतर्कोशिकीय अवकाश से लसिका केशिकाओं में चला जाता है, जो आपस में मिलकर बड़ी लसिका वाहिका बनाती हैं और अंत में बड़ी शिरा में खुलती हैं। पचा हुआ तथा क्षुद्रांत्र द्वारा अवशोषित वसा का वहन लसिका द्वारा होता है और अतिरिक्त तरल को बाह्य कोशिकीय अवकाश से वापस रुधिर में ले जाता है।
प्रश्न 2. स्तनधारी तथा पक्षियों में ऑक्सीजनित तथा विऑक्सीजनित रुधिर को अलग करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर- स्तनधारियों तथा पक्षियों को उच्च ऊर्जा की आवश्यकता होती है क्योंकि इन्हें अपने शरीर का तापक्रम बनाये रखने के लिए निरन्तर ऑक्सीजन एवं ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इसलिए स्तनधारी एवं पक्षियों में ऑक्सीजनित तथा विऑक्सीजनित रुधिर को अलग करना आवश्यक है।
प्रश्न 3. उच्च संगठित पादप में वहन तंत्र के घटक क्या हैं?
उत्तर- उच्च संगठित पादप में वहन तंत्र के निम्न दो घटक हैं-
(1) जाइलम (Xylem) (2) फ्लोएम (Phloem)
(1) जाइलम (Xylem)-इसे जल संवहन ऊतक (Water conducting tissue) भी कहते हैं। इसका प्रमुख कार्य जड़ों द्वारा अवशोषित जल तथा खनिज लवणों को पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाना है।
यह निम्न कोशिकाओं से बना होता है-
(i) वाहिनिकाएँ, (ii) वाहिकाएँ, (iii) जाइलम पैरेनकाइमा, (iv) जाइलम तन्तु।
(2) फ्लोएम (Phloem)-फ्लोएम का प्रमुख कार्य पर्ण में प्रकाश-संश्लेषण के फलस्वरूप बने कार्बनिक भोज्य पदार्थों तथा हार्मोन्स को पौधे के प्रत्येक भाग तक पहुँचाना है।
फ्लोएम निम्न कोशिकाओं से बना होता है-
(i) चालनी नलिका, (ii) सहकोशिका, (iii) फ्लोएम तन्तु, (iv) फ्लोएम पैरेनकाइमा।
प्रश्न 4. पादप में जल और खनिज लवण का वहन कैसे होता है?
उत्तर- पादप में जल और खनिज लवणों का परिवहन जाइलम ऊतक द्वारा किया जाता है। जाइलम में जड़ों, तनों और पत्तियों की वाहिनिकाएँ तथा वाहिकाएँ आपस में जुड़कर जल संवहन वाहिकाओं का एक सतत् जाल बनाती हैं जो पादप के सभी भागों से सम्बद्ध होता है। जड़ों की कोशिकाएँ मृदा के सम्पर्क में रहती हैं तथा वे सक्रिय रूप से आयन प्राप्त करती हैं।
यह जड़ और मृदा के मध्य आयन सान्द्रण में एक अन्तर उत्पन्न करता है। इस अन्तर को समाप्त करने के लिए मृदा से जल
जड़ में प्रवेश कर जाता है। जल अनवरत गति से जड़ के जाइलम में जाता है और जल के स्तम्भ का निर्माण करता है जो लगातार ऊपर की ओर धकेला जाता है।
जल की रंध्र के द्वारा हुई हानि का प्रतिस्थापन पत्तियों में जाइलम वाहिकाओं द्वारा हो जाता है। वास्तव में कोशिका से जल के अणुओं का वाष्पन एक चूषण उत्पन्न करता है जो जड़ों में उपस्थित जाइलम कोशिकाओं द्वारा खींचता है। अतः वाष्पोत्सर्जन जल के अवशोषण एवं जड़ से पत्तियों तक जल तथा उसमें खनिज लवणों के उपरिमुखी गति में सहायक है।
प्रश्न 5. पादप में भोजन का स्थानांतरण कैसे होता है?
उत्तर- प्रकाश-संश्लेषण के विलेय उत्पादों का वहन स्थानांतरण कहलाता है और यह संवहन ऊतक के फ्लोएम नामक भाग द्वारा होता है। प्रकाश-संश्लेषण के उत्पादों के अलावा फ्लोएम अमीनो अम्ल तथा अन्य पदार्थों का परिवहन भी करता है। ये पदार्थ विशेष रूप से जड़ के भण्डारण अंगों, फलों, बीजों तथा वृद्धि वाले अंगों में ले जाए जाते हैं। भोजन तथा अन्य पदार्थों का स्थानांतरण संलग्न साथी-कोशिका की सहायता से चालनी नलिका में उपरिमुखी तथा अधोमुखी-दोनों दिशाओं में होता है।
फ्लोएम द्वारा भोजन का स्थानांतरण ऊर्जा के उपयोग से पूरा होता है। सुक्रोज सरीखे पदार्थ फ्लोएम ऊतक में से प्राप्त ऊर्जा से ही स्थानांतरित होते हैं। यह ऊतक का परासरण दाब बढ़ा देता है जिससे जल इसमें प्रवेश कर जाता है। यह दाब पदार्थों को फ्लोएम से उस ऊतक तक ले जाता है जहाँ दाब कम होता है। अतः फ्लोएम पादप की आवश्यकता के अनुसार पदार्थों का स्थानांतरण करता है।
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प्रश्न 1. वृक्काणु (नेफ्रॉन) की रचना तथा क्रियाविधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर- नेफ्रॉन की रचना (Structure of Nephron)- प्रत्येक वृक्क में अनेक निस्यंदन एकक होते हैं जिन्हें वृक्काणु (नेफ्रॉन) कहते हैं। निस्यंदन एकक में, फुफ्फुस की तरह ही बहुत पतली भित्ति वाली रुधिर केशिकाओं का गुच्छ होता है जिसे केशिका गुच्छ (ग्लोमेरुलस) कहते हैं। वृक्क में प्रत्येक केशिका गुच्छ, एक नलिका के रूप के आकार के सिरे के अन्दर होता है जिसे बोमन सम्पुट कहते हैं। नलिका छने हुए मूत्र को एकत्र करती है।
[वृक्काणु (नेफ्रॉन) की संरचना]

वृक्काणु (नेफ्रॉन) की क्रियाविधि- प्रारम्भिक निस्यंद में कुछ पदार्थ, जैसे-ग्लूकोस, अमीनो अम्ल, लवण और प्रचुर मात्रा में जल रह जाते हैं। जैसे-जैसे मूत्र इस नलिका में प्रवाहित होता है इन पदार्थों का चयनित पुनरवशोषण हो जाता है। जल की मात्रा का पुनरवशोषण, शरीर में उपलब्ध अतिरिक्त जल की मात्रा पर तथा कितना विलेय वर्ज्य उत्सर्जित करना है, पर निर्भर करता है। शेष बचे पदार्थों को संग्राहक वाहिनी में स्रावित कर दिया जाता है।
प्रश्न 2. उत्सर्जी उत्पाद से छुटकारा पाने के लिए पादप किन विधियों का उपयोग करते हैं?
उत्तर- उत्सर्जी उत्पाद से छुटकारा पाने के लिए पादप अग्र विधियों का उपयोग करते हैं-
(i) पादपों में श्वसन क्रिया के दौरान बनी मुख्य उत्सर्जी पदार्थ है। अतः श्वसन क्रिया में उत्पन्न एवं जलवाष्प का निष्कासन सामान्य विसरण द्वारा रन्ध्रों एवं वातरन्ध्रों द्वारा किया जाता है।
(ii) पौधों के उत्सर्जी वर्ज्य पदार्थ को पत्तियों, छाल एवं फलों में पहुँचा दिया जाता है। इनके पौधों से पृथक् होने पर पौधों को इनसे छुटकारा मिल जाता है।
(iii) अनेक उत्सर्जी पदार्थ कोशिकाओं की रिक्तिकाओं में संचित कर दिए जाते हैं।
(iv) अनेक अपशिष्ट उत्पाद रेजिन तथा गोंद के रूप में विशेष रूप से पुराने जाइलम में संचित रहते हैं।
(v) कुछ अपशिष्ट पदार्थों को पौधों की जड़ों द्वारा मृदा में स्रावित कर दिया जाता है।
चित्र-एक वृक्काणु (नेफ्रॉन) की रचना
प्रश्न 3. मूत्र बनने की मात्रा का नियमन किस प्रकार होता है?
उत्तर- वेसोप्रेसिन हार्मोन मूत्र बनने की मात्रा का नियमन करता है। यह हार्मोन मूत्र में स्थित जल की मात्रा का नियमन करता है। यह नेफ्रॉन की दूरस्थ कुण्डलित नलिका तथा संग्रह नलिका की जल पारगम्यता में वृद्धि करता है जिसके कारण जल का अवशोषण बढ़ता है। इस हार्मोन की कमी से जल का अवशोषण कम हो जाता है तथा मूत्र में जल की मात्रा बढ़ जाती है। इस डायूरेसिस कहा जाता है। इस प्रकार मूत्र बनने की मात्रा का नियमन होता है।
वेसोप्रेसिन को एन्टीडायूरेटिक हार्मोन (ADH) भी कहते हैं।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
प्रश्न 1. मनुष्य में वृक्क एक तंत्र का भाग है जो संबंधित है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)
उत्तर-(c) उत्सर्जन।
प्रश्न 2. पादप में जाइलम उत्तरदायी है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)
उत्तर-(a) जल का वहन।
प्रश्न 3. स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक है-
उत्तर-(d) उपर्युक्त सभी।
प्रश्न 4. पायरुवेट के विखंडन से यह कार्बन डाइऑक्साइड, जल तथा ऊर्जा देता है और यह क्रिया होती है- (प्रश्न बैंक)
उत्तर-(b) माइटोकॉन्ड्रिया।
प्रश्न 5. हमारे शरीर में वसा का पाचन कैसे होता है? यह प्रक्रम कहाँ होता है?
उत्तर- हमारे शरीर में वसा का पाचन आहार नाल में लाइपेज नामक एंजाइम द्वारा होता है। पित्त रस में उपस्थित पित्त लवण वसा का इमल्सीकरण करते हैं अर्थात् वसा को छोटी गोलिकाओं में खंडित कर देते हैं। इससे एंजाइम की क्रियाशीलता बढ़ जाती है। जठर रस, अग्न्याशयी रस तथा आंत्र रस में उपस्थित लाइपेज एंजाइम इस इमल्सीकृत वसा को वसीय अम्ल तथा ग्लिसरॉल में बदल देता है। इस प्रकार वसा का पाचन हो जाता है। वसा के पाचन की क्रिया छोटी आंत्र (क्षुदांत्र) में होती है।
प्रश्न 6. भोजन के पाचन में लार की क्या भूमिका है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22; प्रश्न बैंक)
उत्तर-
(i) लार द्वारा भोजन को गीला किया जाता है ताकि इसका मार्ग आसान हो जाए।
(ii) लार में एक एंजाइम होता है जिसे लार एमिलेस टायलिन (Ptylin) कहते हैं, यह मंड जटिल अणु को सरल शर्करा में खंडित कर देता है।
(iii) मुँह व दांतों को साफ रखती है।
(iv) लार में उपस्थित लाइसोजाइम्स जीवाणुओं को नष्ट करने में सहायता प्रदान करती है।
प्रश्न 7. स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ कौनसी हैं और उसके उपोत्पाद क्या हैं?
उत्तर- स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ निम्न हैं-
स्वपोषी क्लोरोफिल की सहायता से सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में तथा जल द्वारा भोजन (कार्बोहाइड्रेट) का निर्माण करते हैं।
इस क्रिया का प्रमुख उत्पाद (ग्लूकोज) तथा उपोत्पाद जल एवं ऑक्सीजन होती है।
(ग्लूकोज)
इस क्रिया का मुख्य उत्पाद ग्लूकोज ( ) तथा उपोत्पाद जल तथा ऑक्सीजन होते हैं।
प्रश्न 8. वायवीय तथा अवायवीय श्वसन में क्या अन्तर है? कुछ जीवों के नाम लिखिए जिनमें अवायवीय श्वसन होता है।
अथवा
वायवीय तथा अवायवीय श्वसन में क्या अन्तर है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025; प्रश्न बैंक; माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)
उत्तर- वायवीय तथा अवायवीय श्वसन में अन्तर
क्र.सं. | वायवीय श्वसन | अवायवीय श्वसन |
1. | यह क्रिया ऑक्सीजन की उपस्थिति में होती है। | यह क्रिया ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होती है। |
2. | इसमें ग्लूकोज का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है। | इसमें ग्लूकोज का अपूर्ण ऑक्सीकरण होता है। |
3. | इसमें अपेक्षाकृत अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है। | इसमें अपेक्षाकृत कम ऊर्जा प्राप्त होती है। |
4. | इस क्रिया के अन्त में और जल बनता है। | इस क्रिया के अन्त में और एथिल ऐल्कोहॉल ( ) बनता है। |
5. | यह क्रिया कोशिका के जीवद्रव्य एवं माइटोकॉण्ड्रिया दोनों में पूर्ण होती है। | यह क्रिया केवल जीवद्रव्य में ही पूर्ण होती है। |
6. | यह साधारण श्वसन क्रिया है जो समस्त जीवों में होती है। | यह असाधारण श्वसन क्रिया है जो प्रमुख रूप से कवक, जीवाणुओं तथा जन्तुओं के कुछ विशेष ऊतकों में ही होती है। |
7. | इस क्रिया में ग्लूकोज के अणु से अणु मुक्त होते हैं। | जबकि इस क्रिया में ग्लूकोज के एक अणु से मुक्त होते हैं। |
निम्नलिखित जीवों में अवायवीय श्वसन होता है-
(i) यीस्ट (yeast) (ii) जीवाणुओं में (iii) अंत:परजीवियों में।
प्रश्न 9. गैसों के अधिकतम विनिमय के लिए कूपिकाएँ किस प्रकार अभिकल्पित हैं?
उत्तर- फेफड़ों की सबसे छोटी इकाई कूपिकाएँ (Alveoli) हैं। कूपिका एक सतह उपलब्ध कराती है जिससे गैसों का विनिमय हो सकता है। कूपिकाओं की भित्ति में रुधिर वाहिकाओं का विस्तीर्ण जाल होता है।
मनुष्य के यदि दोनों फेफड़ों की कूपिकाओं की सतह को फैला दिया जाये तो यह लगभग वर्गमीटर क्षेत्र ढक लेगी।
अतः कूपिकाएँ विनिमय के लिए विस्तृत सतह उपलब्ध करवाती हैं जिससे गैस-विनिमय अधिक दक्षतापूर्वक होता है।
प्रश्न 10. हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी के क्या परिणाम हो सकते हैं? (प्रश्न बैंक)
अथवा
हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी से क्या प्रभाव पड़ेगा? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)
उत्तर- हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन का मुख्य कार्य फेफड़ों से ऑक्सीजन ग्रहण करके शरीर के विभिन्न ऊतकों तक पहुँचाना है। अतः इसे श्वसन वर्णक भी कहते हैं। शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी के कारण फेफड़ों से शरीर की कोशिकाओं के लिए ऑक्सीजन की उपलब्धता में कमी हो जाएगी। परिणामस्वरूप भोज्य पदार्थों के ऑक्सीकरण में बाधा उत्पन्न होगी। ऐसा होने से शरीर की विभिन्न क्रियाओं के संचालन के लिए आवश्यक ऊर्जा में कमी हो जाएगी। इसके कारण स्वास्थ्य खराब हो सकता है तथा शरीर में थकान महसूस हो सकती है।
हीमोग्लोबिन की कमी से होने वाला रोग रक्ताल्पता (एनीमिया) कहलाता है। इसकी अत्यधिक कमी से रोगी की मृत्यु भी हो सकती है।
प्रश्न 11. मनुष्य में दोहरा परिसंचरण की व्याख्या कीजिए। यह क्यों आवश्यक है?
उत्तर- मानव में रुधिर प्रत्येक चक्र में हृदय से दो बार गुजरता है अर्थात् रुधिर शरीर में एक बार पहुँचने के लिए मानव हृदय से दो बार गुजरता है। इसे ही दोहरा परिसंचरण कहते हैं। इसके अन्तर्गत विऑक्सीजनित रुधिर शरीर के विभिन्न भागों...
से शिराओं द्वारा इकट्ठा करके महाशिरा में पहुँचाया जाता है और अन्त में यह रुधिर दाएँ आलिन्द में पहुँचता है। दाएँ आलिन्द से बाएँ निलय में जाता है।
विऑक्सीजनित रुधिर दाएँ निलय से ऑक्सीजनित होने के लिए फेफड़ों में भेजा जाता है। ऑक्सीजनित रुधिर फिर से मानव हृदय के बाएँ आलिन्द में आता है। फिर बाएँ आलिन्द से बाएँ निलय में, बाएँ निलय से महाधमनी में और फिर शरीर में चला जाता है।
इस प्रकार हृदय में एक परिसंचरण चक्र में दो बार रुधिर आता है-एक बार दायीं तरफ से तथा दूसरी बार बायीं तरफ से। इसलिए यह दोहरा परिसंचरण कहलाता है।
आवश्यकता-मानव हृदय का दायां व बायां भाग ऑक्सीजनित व विऑक्सीजनित रुधिर को मिलने नहीं देता है। इस तरह का बँटवारा शरीर को उच्च दक्षतापूर्ण ऑक्सीजन की पूर्ति कराता है ताकि मानव अपने शरीर का तापक्रम बनाए रखने के लिए निरन्तर उच्च ऊर्जा प्राप्त कर सके।
[मानव में दोहरा परिसंचरण]

प्रश्न 12. जाइलम तथा फ्लोएम में पदार्थों के वहन में क्या अन्तर है?
अथवा
जाइलम व फ्लोएम पदार्थों के संवहन में क्या अन्तर है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर-जाइलम एवं फ्लोएम में पदार्थों के वहन में अन्तर-
क्र.सं. | जाइलम (Xylem) में वहन | फ्लोएम (Phloem) में वहन |
1. | जाइलम मृदा प्राप्त जल और खनिज लवणों का वहन करता है। | फ्लोएम पत्तियों से प्रकाश संश्लेषण के संश्लेषित उत्पादों को पादप के अन्य भागों तक वहन करता है। |
2. | जाइलम में वहन केवल ऊपर की ओर होता है। | जबकि फ्लोएम में वहन ऊपर एवं नीचे दोनों दिशाओं में होता है। |
3. | जाइलम में वहन भौतिक बलों द्वारा पूर्ण होता है। | जबकि फ्लोएम में वहन ऊर्जा का उपयोग करके होता है। |
प्रश्न 13. फुफ्फुस में कूपिकाओं की तथा वृक्क में वृक्काणु (नेफ्रॉन) की रचना तथा क्रियाविधि की तुलना कीजिए।
उत्तर-
कूपिका-रचना | नेफ्रॉन-रचना |
1. कूपिका गोल गुब्बारे जैसी रचना है। | 1. नेफ्रॉन-कुण्डलित नलिकाकार रचना है। |
2. कूपिका एकल कोशिकीय स्तर से बनी होती है। | 2. नेफ्रॉन भी एकल कोशिकीय स्तर से बनी होती है। |
3. कूपिका की भित्ति में रुधिर वाहिकाओं का विस्तीर्ण जाल होता है। | 3. नेफ्रॉन की नलकीय रचना के चारों ओर रुधिर वाहिकाओं का जाल पाया जाता है। |
4. केशिका गुच्छ जैसी रचना नहीं पायी जाती है। | 4. केशिका गुच्छ पाया जाता है। |
कूपिका-क्रियाविधि | नेफ्रॉन-क्रियाविधि |
1. कूपिका फुफ्फुस की संरचनात्मक व क्रियात्मक इकाई है। | 1. नेफ्रॉन वृक्क की संरचनात्मक व क्रियात्मक इकाई है। |
2. कूपिका श्वसनीय सतह उपलब्ध कराती है जहाँ गैसों का विनिमय होता है।
3. कूपिका में विसरण क्रिया द्वारा गैसों का विनिमय होता है।
2. नेफ्रॉन में रुधिर निस्यंदन होता है जिससे अपशिष्ट पदार्थ पृथक् किए जाते हैं।
3. नेफ्रॉन में निस्यंदन चयनित पुनरवशोषण व स्रवण की क्रियाएँ होती हैं।
📝 2. नोट्स: पाठ सार (Key Concepts & Summary)
महत्वपूर्ण परिभाषाएं, रासायनिक समीकरण, नियम, सूत्र एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।
पाठ सार
(1) जैव प्रक्रम (Life Process) - वे सभी प्रक्रम, जो सम्मिलित रूप से अनुरक्षण का कार्य करते हैं, जैव प्रक्रम कहलाते हैं, अर्थात् जीवधारियों में जीवित रहने के लिए होने वाली समस्त क्रियाओं को सामूहिक रूप से जैव प्रक्रम कहा जाता है।
(2) जीवन के अनुरक्षण के लिए पोषण, श्वसन, शरीर के अन्दर पदार्थों का संवहन तथा अपशिष्ट उत्पादों का उत्सर्जन आदि प्रक्रम आवश्यक हैं।
(3) स्वपोषी (Autotrophs) - ऐसे जीव अकार्बनिक स्रोतों जैसे वातावरणीय एवं जल, सरल पदार्थ का उपयोग कर अपने लिए जटिल कार्बनिक पदार्थ का निर्माण करते हैं, स्वपोषी कहलाते हैं। उदाहरण-हरे पादप एवं कुछ जीवाणु।
(4) स्वपोषी पोषण - स्वपोषी जीव प्रकाश संश्लेषण द्वारा वातावरणीय एवं जल को क्लोरोफिल की उपस्थिति में कार्बोहाइड्रेट में बदल देते हैं। स्वपोषी कार्बोहाइड्रेट का उपयोग कर जैव प्रक्रम हेतु ऊर्जा प्राप्त करते हैं तथा अतिरिक्त कार्बोहाइड्रेट को मण्ड (Starch) के रूप में संचित करते हैं।
(5) प्रकाश संश्लेषण की रासायनिक अभिक्रिया :
(6) पौधों में प्रकाश संश्लेषण निम्न पदों में पूर्ण होती है-
(i) प्रकाश ऊर्जा का क्लोरोफिल अणुओं द्वारा अवशोषण।
(ii) जल के अणुओं का हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन में टूटना तथा प्रकाश ऊर्जा का रासायनिक ऊर्जा में रूपान्तरण।
(iii) के अपचयन से कार्बोहाइड्रेट का निर्माण।
(7) विषमपोषी (Heterotrophs) - प्राणी (मनुष्य सहित) जो अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते हैं और दूसरों पर भोजन के लिए परोक्ष या अपरोक्ष रूप से निर्भर रहते हैं, विषमपोषी कहलाते हैं तथा इनकी पोषण विधि को विषमपोषी पोषण कहते हैं।
(i) कुछ जीव अन्य जीवों के भीतर या सतह पर वास करते हुए पोषी जीव को मारे बिना उससे पोषण प्राप्त करते हैं, ऐसे जीव परजीवी कहलाते हैं। उदाहरण-फीताकृमि, अमरबेल, कवक एवं जीवाणु।
(ii) एक कोशिक जीव शरीर की सतह से भोजन का अन्तर्ग्रहण करते हैं जैसे अमीबा (कूटपाद की सहायता से) एवं पैरामीशियम (पक्ष्माभ की सहायता से)।
(8) पाचन तन्त्र (Digestive system) - मानव के पाचन तन्त्र का निर्माण आहार नाल एवं पाचक ग्रन्थियों द्वारा होता है। जटिल पोषक पदार्थों को जल अपघटन द्वारा सरल पोषक पदार्थों में बदलने की क्रिया को पाचन कहते हैं।
(9) मनुष्य में खाए गए भोजन का विखण्डन आहार नाल के अन्दर कई चरणों में होता है तथा पाचित भोजन क्षुद्रान्त्र में अवशोषित करके शरीर की सभी कोशिकाओं में भेज दिया जाता है।
(10) श्वसन (Respiration) - कार्बनिक भोज्य पदार्थों का ऑक्सीकरण द्वारा विघटन श्वसन कहलाता है। श्वसन दो प्रकार का होता है-
(i) वायवीय श्वसन - वह श्वसन प्रक्रम जिसमें ऑक्सीजन का उपयोग किया जाता है, वायवीय श्वसन कहलाता है।
(ii) अवायवीय श्वसन - वह श्वसन प्रक्रम जो ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है, अवायवीय श्वसन कहलाता है।
(11) श्वसन तन्त्र (Respiratory system) - मानव के श्वसन तन्त्र में उन सभी अंगों को सम्मिलित किया जाता है, जो गैसों के विनिमय में योगदान देते हैं जो निम्नलिखित हैं-(i) नासाद्वार (ii) नासापथ (iii) ग्रसनी (iv) कंठ (v) श्वासनली (vi) श्वसनी (vii) फेफड़े।
(12) श्वसन की क्रियाविधि (Mechanism of Respiration)-श्वसन की क्रियाविधि दो चरणों में पूर्ण होती है-
श्वसन प्रक्रम में ग्लूकोज जैसे जटिल कार्बनिक यौगिकों का विखंडन होता है जिससे ए.टी.पी. का उपयोग कोशिका में होने वाली अन्य क्रियाओं को ऊर्जा प्रदान करने के लिए किया जाता है।
(13) परिसंचरण तन्त्र (Circulatory system)-मनुष्य में व , पोषक पदार्थों, उत्सर्जी पदार्थों तथा स्रावी पदार्थों को शरीर के एक भाग से दूसरे भाग में पहुँचाने तथा लाने वाले तन्त्र को ही रुधिर परिसंचरण तन्त्र कहते हैं।
(14) मानव परिसंचरण तंत्र के तीन भाग होते हैं-(i) हृदय (Heart) (ii) रुधिर (Blood) (iii) रुधिर वाहिकाएँ (Blood vessels)।
(15) हृदय (Heart)-यह एक पेशीय अंग है जो पूरे शरीर में रुधिर पम्प के लिए संकुचन करता है।
(16) रुधिर (Blood)-यह एक परिसंचारी तरल है जिसमें तरल प्लाज्मा एवं रुधिर कोशिकाओं के रूप में स्वतन्त्र कोशिकाएँ होती हैं। ये रुधिर कोशिकाएँ तीन प्रकार की होती हैं-
रुधिर वाहिकाएँ (Blood Vessels)-ये तीन प्रकार की होती हैं-
(i) धमनी (Arteries)-ये रुधिर को हृदय से विभिन्न अंगों में ले जाने का कार्य करती हैं।
(ii) शिरा (Veins)-ये रुधिर को विभिन्न अंगों से हृदय की ओर लाने का कार्य करती हैं।
(iii) केशिकाएँ (Capillaries)-विभिन्न पदार्थों का रुधिर एवं शरीर की कोशिकाओं के मध्य विनिमय करना इनका कार्य है।
(17) लसीका तन्त्र (Lymphatic system)-इस तन्त्र में लसीका, लसीका वाहिनियाँ एवं लसीका पर्वसन्धि होती हैं।
(18) लसीका (Lymph)-प्लाज्मा व रुधिर कोशिकाओं को भेदकर ऊतक कोशिकाओं के बीच के स्थान में पहुँच जाते हैं। इस छनने की क्रिया द्वारा निर्मित द्रव को लिम्फ या लसीका कहते हैं।
(19) दोहरा परिसंचरण (Double Circulation)-रक्त का एक चक्र में दो बार हृदय से गुजरना-पहली बार शरीर का समस्त अशुद्ध रुधिर हृदय के दाहिने आलिन्द में एकत्रित होकर निलय से होते हुए फेफड़ों में जाता है तथा दूसरी बार हृदय के बायें आलिन्द में फेफड़ों से फुफ्फुस शिराओं द्वारा एकत्रित शुद्ध रुधिर महाधमनी द्वारा समस्त शरीर में पम्प किया जाता है। इस प्रकार के रुधिर परिभ्रमण को दोहरा परिसंचरण (Double Circulation) कहते हैं।
(20) वहन-शरीर में विभिन्न पदार्थों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर संचरण वहन कहलाता है। निम्न श्रेणी के जन्तुओं में वहन देहगुहीय द्रव, रुधिर प्लाज्मा द्वारा होता है। उच्च श्रेणी के जन्तुओं में वहन रुधिर एवं लसीका द्वारा होता है।
(21) फुफ्फुस-महाधमनी से अशुद्ध रुधिर फेफड़ों तक पहुँचाया जाता है तथा फुफ्फुस शिरा द्वारा शुद्ध रुधिर फेफड़ों से हृदय में लाया जाता है। शेष सभी धमनियाँ शुद्ध रुधिर तथा सभी शिरायें अशुद्ध रुधिर का वहन करती हैं।
(22) पादपों में परिवहन-पादपों में जल एवं इससे घुलित लवणों तथा कार्बनिक भोज्य पदार्थों का स्थानान्तरण परिवहन कहलाता है।
पादपों में संवहन ऊतक दो प्रकार का होता है-
(i) जाइलम (Xylem)-इसे जल संवहन ऊतक (Water conducting tissue) भी कहते हैं। इसका प्रमुख कार्य जड़ों द्वारा अवशोषित जल तथा जल में घुले खनिज लवणों को पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाना है।
(ii) फ्लोएम (Phloem)-फ्लोएम का प्रमुख कार्य पर्ण में बने खाद्य पदार्थ को पौधे के प्रत्येक भाग तक पहुँचाना होता है।
(23) विसरण-पदार्थ के अणुओं का अधिक सान्द्रता से कम सान्द्रता वाले स्थान की ओर गति करना विसरण कहलाता है।
(24) परासरण-वह प्रक्रिया जिसमें जल के अणु अर्द्ध-पारगम्य कला से होकर अधिक सान्द्रता वाले घोल की ओर प्रसरण करते हैं, परासरण कहलाता है।
(25) मूलदाब-मूलदाब वह दाब है जो जड़ों के वल्कुट की पैरेनकाइमा कोशिकाओं में स्फीति की अवस्था में उत्पन्न होता है तथा जिसके द्वारा एकत्रित जल न केवल जाइलम वाहिनियों में पहुँचाया जाता है अपितु (तने के अन्दर भी) कुछ दूरी तक धकेला जाता है।
(26) वाष्पोत्सर्जन-पादप के वायवीय भागों द्वारा वाष्प के रूप में जल की हानि वाष्पोत्सर्जन कहलाती है।
(27) उत्सर्जन तन्त्र (Excretory system)-उपापचयी प्रक्रियाओं के फलस्वरूप निर्मित अपशिष्ट उत्पादों एवं अतिरिक्त लवणों को शरीर से बाहर त्यागना उत्सर्जन कहलाता है। उत्सर्जन से सम्बन्धित अंगों को उत्सर्जन अंग कहते हैं। उत्सर्जन अंगों को सामूहिक रूप से उत्सर्जन तन्त्र कहते हैं।
(28) मनुष्य के उत्सर्जन तंत्र में निम्न अंग पाये जाते हैं-(i) वृक्क (Kidney) (ii) मूत्र वाहिनियाँ (Ureters) (iii) मूत्राशय (Urinary Bladder) (iv) मूत्र मार्ग (Urethra)।
(29) नेफ्रॉन (Nephron)-ये वृक्क की क्रियात्मक एवं संरचनात्मक इकाई हैं। उत्सर्जी उत्पाद विलेय नाइट्रोजनी यौगिकों के रूप में वृक्क में नेफ्रॉन द्वारा निकाले जाते हैं।
(30) पादपों में उत्सर्जन (Excretion in plants)-पादप अपशिष्ट पदार्थों से छुटकारा प्राप्त करने के लिए विविध तकनीकों का उपयोग करते हैं। उदाहरण के लिए, अपशिष्ट पदार्थ कोशिका रिक्तिका में संचित किए जा सकते हैं या गोंद व रेजिन के रूप में तथा इन्हें गिरती पत्तियों द्वारा दूर किया जा सकता है या ये अपने आसपास की मृदा में उत्सर्जित कर देते हैं।
⭐ 3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Important Questions)
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs), अतिलघूत्तरात्मक, लघूत्तरात्मक एवं निबंधात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
बहुविकल्पीय प्रश्न-
प्रश्न 1. पायरुवेट के विखंडन से यह कार्बन-डाइऑक्साइड, जल तथा ऊर्जा देता है, यह क्रिया कहाँ होती है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2026)
प्रश्न 2. इथाइल अल्कोहल बनता है-
प्रश्न 3. श्वसन का मुख्य उद्देश्य है-
प्रश्न 4. मछली के हृदय में कोष्ठ होते हैं-
प्रश्न 5. रुधिर के थक्का बनाने में सहायता करने वाली कोशिकाएँ हैं-
प्रश्न 6. मानव रक्त परिवहन तंत्र में सबसे कम व्यास की रक्त वाहिनी क्या कहलाती है?
प्रश्न 7. एक स्वस्थ वयस्क में प्रतिदिन कितना लीटर आरम्भिक निस्यंद वृक्क में होता है-
प्रश्न 8. हीमोग्लोबिन रुधिर में पाया जाता है- (प्रश्न बैंक)
प्रश्न 9. हृदय के किस प्रकोष्ठ की दीवार मोटी और मजबूत होती है?
प्रश्न 10. निम्न में से कौन फेफड़ों से ऑक्सीजन युक्त रक्त प्राप्त करता है?
प्रश्न 11. रक्त दाब मापने के लिए प्रयुक्त किया जाने वाला उपकरण है- अथवा कौनसे यंत्र द्वारा रक्तदाब नापा जाता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)
प्रश्न 12. श्वसन में ग्लूकोज पायरुवेट में विखण्डित हो जाता है- (प्रश्न बैंक)
प्रश्न 13. शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने का प्रक्रम कहलाता है-
प्रश्न 14. जैव-उत्प्रेरक क्या कहलाते हैं?
प्रश्न 15. प्रकाश संश्लेषण की क्रिया के लिए आवश्यक नहीं है- (प्रश्न बैंक)
16. प्रकाश संश्लेषण की क्रिया सम्पन्न होती है-
17. 'पेप्सिन' एन्जाइम द्वारा पाचन किया जाता है-
18. हमारे शरीर की कौनसी कोशिकाओं में लैक्टिक अम्ल का निर्माण होता है-
19. अधिकांश कोशिकीय प्रक्रमों के लिए ऊर्जा मुद्रा का कार्य करता है-
20. के अंतस्थ फॉस्फेट के विखण्डन से मुक्त ऊर्जा का मान है-
21. मानव में श्वसन वर्णक का कार्य करता है-
22. सामान्य वयस्क का रक्तदाब होता है- (प्रश्न बैंक)
23. पादप में फ्लोएम उत्तरदायी है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)
24. मनुष्य में आमाशय एक तंत्र का भाग है, जो संबंधित है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)
25. अग्न्याशय में पाये जाने वाला एन्जाइम है-
26. वसा का पाचन करने वाला एंजाइम है-
27. तीन कोष्ठीय हृदय पाया जाता है-
28. अवशोषित वसा का वहन होता है-
29. मानव उत्सर्जन के आधार पर है-
30. मानव में फुफ्फुस (फेफड़े) किस तंत्र का भाग है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)
31. संकुचन के समय हृदय के अंदर रक्त के पश्च प्रवाह को रोकता है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)
32. पर्ण में छिद्रों के खुलने व बंद होने का कार्य किसके द्वारा होता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)
33. मानव में हृदय एक तंत्र का भाग है, जो संबंधित है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)
34. बोमेन सम्पुट निम्नलिखित में से किस तंत्र का भाग है? (प्रश्न बैंक)
35. जठर रस में कौनसा अम्ल पाया जाता है? (प्रश्न बैंक)
36. उत्सर्जन तंत्र की इकाई क्या है- (प्रश्न बैंक)
37. मानव में श्वसन तंत्र की क्रियात्मक इकाई कौनसी है? (प्रश्न बैंक)
38. पत्तियों का हरा रंग किस वर्णक के कारण होता है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर-तालिका
1. (ब) | 2. (स) | 3. (ब) | 4. (अ) | 5. (स) | 6. (अ) | 7. (स) | 8. (अ) | 9. (द) | 10. (अ) | 11. (अ) |
12. (अ) | 13. (स) | 14. (ब) | 15. (द) | 16. (द) | 17. (स) | 18. (द) | 19. (ब) | 20. (स) | 21. (ब) | 22. (स) |
23. (अ) | 24. (स) | 25. (स) | 26. (अ) | 27. (स) | 28. (ब) | 29. (स) | 30. (स) | 31. (अ) | 32. (स) | 33. (द) |
34. (अ) | 35. (अ) | 36. (ब) | 37. (ब) | 38. (ब) |
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. जीवों में वे सभी प्रक्रम जो सम्मिलित रूप से अनुरक्षण का कार्य करते हैं .................... कहलाते हैं। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2026)
2. अमीबा अँगुली रूपी प्रवर्ध से भोजन के कणों को घेर लेते हैं तथा संगठित होकर .................... बनाते हैं। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2026)
3. हृदय एक पेशीय अंग है जो हमारी .................... के आकार का होता है।
4. घास खाने वाले शाकाहारी का सेल्युलोज पचाने के लिए लम्बी .................... की आवश्यकता होती है।
5. जब हम श्वास अंदर लेते हैं हमारी पसलियाँ ऊपर उठती हैं और हमारा डायफ्राम .................... हो जाता है।
6. रुधिर में एक तरल माध्यम होता है जिसे .................... कहते हैं।
7. शिराओं में रुधिर को एक ही दिशा में प्रवाहित करने के लिए .................... होते हैं। (प्रश्न बैंक)
8. बसंत में जड़ व तने के ऊतकों में संचित शर्करा का स्थानांतरण .................... में होता है। (प्रश्न बैंक)
9. पौधों में गिरने वाली पत्तियों में भी .................... संचित रहते हैं।
10. धमनी की भित्ति मोटी तथा .................... होती है।
11. लार में भी एक एंजाइम होता है जिसे लारिय .................... कहते हैं। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)
12. सभी हरे पौधे एवं नील-हरित शैवाल जिनमें प्रकाश संश्लेषण की क्षमता पाई जाती है, .................... कहलाते हैं। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)
13. एक कृत्रिम वृक्क नाइट्रोजनी अपशिष्ट उत्पादों को रुधिर से .................... द्वारा निकालने की एक युक्ति है। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)
14. अमीबा में पाचन .................... में होता है। (प्रश्न बैंक)
15. श्वसन में सामान्यतः जन्तु वायु को .................... और .................... क्रिया करते हैं। (प्रश्न बैंक)
16. आमाशय के आन्तरिक अस्तर की अम्ल से रक्षा .................... करती है। (प्रश्न बैंक)
17. जैव उत्प्रेरक .................... कहलाते हैं। (प्रश्न बैंक)
18. रक्त दाब को मापने के लिए .................... का प्रयोग करते हैं। (प्रश्न बैंक)
19. रंध्र के खुलने व बन्द होने की क्रियाविधि को .................... नियंत्रित करती है। (प्रश्न बैंक)
20. मानव आहारनाल में भोजन में मिलने वाला प्रथम एंजाइम .................... है। (प्रश्न बैंक)
21. कोशिका स्तर पर ऊर्जा का संग्रहण स्रोत .................... अणु है। (प्रश्न बैंक)
उत्तर- 1. जैव प्रक्रम 2. खाद्य रिक्तिका 3. मुट्ठी, 4. क्षुद्रांत्र, 5. चपटा, 6. प्लाज्मा, 7. वाल्व, 8. कलिकाओं, 9. अपशिष्ट पदार्थ, 10. लचीली, 11. एमाइलेज, 12. स्वपोषी, 13. अपोहन, 14. खाद्यधानी, 15. निःश्वसन, उच्छ्वसन, 16. श्लेष्मा, 17. एंजाइम, 18. स्फाइग्मोमैनोमीटर, 19. द्वार कोशिका, 20. एमिलेज, 21. एटीपी।
निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए-
(i)
कॉलम- I | कॉलम- II |
(a) एमाइलेज | (i) लार-ग्रन्थियाँ |
(b) पेप्सिन | (ii) आमाशय की जठर ग्रन्थियाँ |
(c) लाइपेज | (iii) अग्न्याशय |
(d) लाइसो जाइम | (iv) लार ग्रन्थियाँ |
उत्तर- (a) (iv), (b) (ii), (c) (iii), (d) (i)
(ii)
कॉलम- I | कॉलम- II |
(a) रुधिर | (i) प्रकाश संश्लेषी वर्णक |
(b) पर्णहरित | (ii) संयोजी ऊतक |
(c) | (iii) जैविक उत्प्रेरक |
(d) एंजाइम | (iv) आमाशय |
उत्तर- (a) (ii), (b) (i), (c) (iv), (d) (iii)
(iii)
कॉलम- I | कॉलम- II |
(a) आहारनाल का सबसे बड़ा भाग | (i) यकृत |
(b) ग्रहणी के घुमाव वाले भाग में स्थित ग्रंथि | (ii) दांत |
(c) इनेमल | (iii) क्षुद्रांत्र |
(d) पित्त रस | (iv) अग्न्याशय |
उत्तर- (a) (iii), (b) (iv), (c) (ii), (d) (i)
(iv) सुमेलित कीजिए- ( प्रश्न बैंक )
खाद्य पदार्थ | पाचन के उत्पाद |
(A) कार्बोहाइड्रेट | (i) ग्लूकोज |
(B) प्रोटीन | (ii) अमीनो अम्ल |
(C) वसा | (iii) वसीय अम्ल व ग्लिसरॉल |
उत्तर- (A) (i), (B) (ii), (C) (iii)
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. 'जैव प्रक्रम' को परिभाषित कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)
उत्तर- वे सभी प्रक्रम जो सम्मिलित रूप से अनुरक्षण का कार्य करते हैं, जैव प्रक्रम कहलाते हैं।
प्रश्न 2. 'भोजन' व 'पोषण' से क्या तात्पर्य है?
उत्तर- जीव के लिए ऊर्जा के स्रोत को भोजन तथा उसे शरीर के अंदर लेने के प्रक्रम को पोषण कहते हैं।
प्रश्न 3. फेफड़ों में तथा का विनिमय कहाँ होता है?
उत्तर- कूपिकाओं में।
प्रश्न 4. प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट तथा वसा के पाचन से क्या प्राप्त होता है?
उत्तर- प्रोटीन के पाचन से अमीनो अम्ल, कार्बोहाइड्रेट से ग्लूकोज तथा वसा से वसा अम्ल तथा ग्लिसरॉल प्राप्त होता है।
प्रश्न 5. ए.टी.पी. के एक अणु के विखण्डन से कितनी ऊर्जा प्राप्त होती है?
उत्तर- ए.टी.पी. में जब अंतस्थ फॉस्फेट सहलग्नता खंडित होती है तो के तुल्य ऊर्जा मोचित होती है।
प्रश्न 6. कंठ में उपास्थि के वलयों की उपस्थिति महत्वपूर्ण क्यों है?
उत्तर- कंठ में उपास्थि के वलय यह सुनिश्चित करते हैं कि वायु मार्ग निपतित न हो।
प्रश्न 7. प्रकाश-संश्लेषण की रासायनिक अभिक्रिया/रासायनिक सूत्र लिखिए।
उत्तर-
(कार्बन डाइऑक्साइड) (जल) (ग्लूकोज) (जल) (ऑक्सीजन)
प्रश्न 8. पौधों के जाइलम को निकाल देने पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर- चूँकि जाइलम एक संवहन ऊतक है, अतः इसे निकाल देने पर पादपों में जल तथा खनिज लवण का संवहन नहीं होगा और पौधा सूखकर नष्ट हो जाएगा।
प्रश्न 9. 'एंजाइम' क्या होते हैं?
उत्तर- एंजाइम कार्बनिक जैव उत्प्रेरक होते हैं जो विभिन्न जैव-रासायनिक क्रियाओं की दर को बढ़ाते हैं।
प्रश्न 10. 'कवक' अपना पोषण किस प्रकार प्राप्त करते हैं?
उत्तर- फफूँदी, यीस्ट तथा मशरूम आदि कवक भोज्य पदार्थों का विघटन शरीर के बाहर ही कर देते हैं और उसके बाद उसका अवशोषण कर पोषण प्राप्त करते हैं।
प्रश्न 11. किसी जीव द्वारा लिया जाने वाला भोजन तथा पाचन की विधि किस पर निर्भर करती है?
उत्तर- जीव द्वारा किस भोजन का अन्तर्ग्रहण किया जाए तथा उसके पाचन की विधि उसके शरीर की अभिकल्पना तथा कार्यशैली पर निर्भर करती है।
प्रश्न 12. अमीबा तथा पैरामीशियम की पोषण विधि में क्या अन्तर है?
उत्तर- अमीबा अनिश्चित आकार का होता है जो कोशिकीय सतह से अँगूली जैसे अस्थायी प्रवर्ध की मदद से भोजन ग्रहण करता है जबकि पैरामीशियम का आकार निश्चित होता है इसलिए भोजन एक विशिष्ट स्थान से ही ग्रहण किया जाता है।
प्रश्न 13. क्षुद्रांत्र में भोजन के किन अवयवों का पूर्ण पाचन होता है?
उत्तर- प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा।
प्रश्न 14. मनुष्य में वृक्क एक तंत्र का भाग है, जो किससे संबंधित है?
उत्तर- उत्सर्जन तंत्र।
प्रश्न 15. किन्हीं दो एककोशिक जीवों के नाम लिखिए।
उत्तर- अमीबा एवं पैरामीशियम।
प्रश्न 16. ऐसे दो पौधों के नाम लिखिए जो पौधों को बिना मारे उनसे पोषण प्राप्त करते हैं।
उत्तर- (i) अमरबेल (ii) आर्किड।
प्रश्न 17. एककोशिक जीवों में भोजन किस अंग से प्राप्त किया जाता है?
उत्तर- एककोशिक जीवों में भोजन सम्पूर्ण सतह से लिया जाता है।
प्रश्न 18. क्षुद्रांत्र के आन्तरिक स्तर पर पाये जाने वाले अंगुली जैसे प्रवर्ध को क्या कहते हैं?
उत्तर- क्षुद्रांत्र के आन्तरिक स्तर पर पाये जाने वाले अंगुली जैसे प्रवर्ध को दीर्घरोम कहते हैं।
प्रश्न 19. अधिकांश कोशिकीय प्रक्रमों के लिए किसे ऊर्जा मुद्रा कहा गया है?
उत्तर- अधिकांश कोशिकीय प्रक्रमों के लिए ए.टी.पी. को ऊर्जा मुद्रा कहा गया है।
प्रश्न 20. यदि कूपिकाओं की सतह को फैला दिया जाए तो यह लगभग कितने वर्गमीटर क्षेत्र को ढक लेगी?
उत्तर- यदि कूपिकाओं की सतह को फैला दिया जाए तो यह लगभग क्षेत्र को ढक लेगी।
प्रश्न 21. उस प्राणी का नाम लिखिए जिसके शरीर में एक चक्र में केवल एक बार ही रुधिर हृदय में जाता है।
उत्तर- मछली के शरीर में एक चक्र में केवल एक बार ही रुधिर हृदय में जाता है।
प्रश्न 22. किस यंत्र से रक्त दाब (Blood Pressure) नापा जाता है?
अथवा
रक्तदाब मापने वाले यंत्र का नाम बताइये। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)
उत्तर- स्फाईग्मोमैनोमीटर नामक यंत्र से रक्त दाब नापा जाता है।
प्रश्न 23. रन्ध्रों को खोलने व बन्द करने का कार्य किसका है?
उत्तर- द्वार कोशिकाओं का।
प्रश्न 24. 'पेप्सिन' क्या है? इसका क्या कार्य है?
उत्तर- पेप्सिन पाचक एंजाइम है जो प्रोटीन का पाचन करता है।
प्रश्न 25. आलिंद की अपेक्षा निलय की पेशीय भित्ति मोटी क्यों होती है?
उत्तर- आलिंद की अपेक्षा निलय की पेशीय भित्ति मोटी होती है क्योंकि निलय को पूरे शरीर में रुधिर भेजना होता है।
प्रश्न 26. हृदय में 'वाल्व' क्यों पाये जाते हैं?
उत्तर- हृदय में जब आलिंद या निलय संकुचित होते हैं तो वाल्व उल्टी दिशा में रुधिर प्रवाह को रोकना सुनिश्चित करते हैं।
प्रश्न 27. पादपों को जंतुओं की तुलना में कम ऊर्जा की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर- पादप शरीर का एक बड़ा अनुपात अनेक ऊतकों की मृत कोशिकाओं का होता है। इसके परिणामस्वरूप पादपों को कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 28. मनुष्य के किस अंग में मूत्र का निर्माण होता है?
उत्तर- मनुष्य के वृक्क में मूत्र का निर्माण होता है।
प्रश्न 29. प्रारम्भिक निस्यंद में पाये जाने वाले कोई चार प्रमुख पदार्थों के नाम लिखिए।
उत्तर- (i) ग्लूकोज (ii) अमीनो अम्ल (iii) लवण (iv) जल।
प्रश्न 30. रक्त के छनाव को क्या कहते हैं?
उत्तर- रक्त के छनाव को लसिका (Lymph) कहते हैं।
प्रश्न 31. प्लेटलेट्स का कार्य लिखिए।
अथवा
रुधिर प्लेटलेट्स का क्या कार्य है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर- रक्त स्कन्दन (Clotting) में सहायता करती है जिससे रक्तवाहिनी के कटे भाग से रक्तस्राव बन्द हो जाता है।
प्रश्न 32. मरीजों में यूरिया का निष्कासन किसके द्वारा किया जाता है।
उत्तर- मरीजों में यूरिया का निष्कासन होमोडायलेसिस (रक्त अपोहन) द्वारा किया जाता है।
प्रश्न 33. उन दो गैसों के नाम लिखिए जिनका श्वसन के दौरान विनिमय होता है।
उत्तर- (i) ऑक्सीजन, (ii) कार्बन डाइऑक्साइड।
प्रश्न 34. फेफड़ों की सबसे छोटी क्रियात्मक इकाई (Smallest functional unit) को क्या कहते हैं?
उत्तर- फेफड़ों की सबसे छोटी क्रियात्मक इकाई को वायुकोष्ठक या कूपिका (alveoli) कहते हैं।
प्रश्न 35. अवशिष्ट आयतन किसे कहते हैं?
उत्तर- बलपूर्वक बहि:श्वसन के पश्चात् फेफड़ों में बची हुई वायु की मात्रा को अवशिष्ट आयतन कहते हैं।
प्रश्न 36. और के परिवहन का माध्यम क्या होता है?
उत्तर- और के परिवहन का माध्यम रुधिर (Blood) होता है।
प्रश्न 37. मूत्र बनने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर- मूत्र बनने का मुख्य उद्देश्य रुधिर में से वर्ज्य पदार्थों को छानकर बाहर करना होता है।
प्रश्न 38. वृक्क की इकाई को क्या कहते हैं?
उत्तर- वृक्क की इकाई को नेफ्रॉन (Nephron) कहते हैं।
प्रश्न 39. A व B के नाम लिखो- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)
उत्तर- (A) क्लोरोफिल, (B) सूर्य का प्रकाश।
प्रश्न 40. पादपों के कोई दो अपशिष्ट उत्पादों के नाम लिखिए। ये उत्पाद किस ऊतक में संचित रहते हैं?
उत्तर- रेजिन तथा गोंद। ये अपशिष्ट उत्पाद विशेष रूप से पुराने जाइलम नामक ऊतक में संचित रहते हैं।
प्रश्न 41. फेफड़ों में श्वासनली की शाखा के अन्तिम भाग को क्या कहते हैं?
उत्तर- वायुकोष।
प्रश्न 42. यदि मनुष्य के डायफ्राम में छिद्र कर दिया जाये तो श्वसन क्रिया पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर- मनुष्य के डायफ्राम में छिद्र कर दिया जाये तो श्वास लेने की क्रिया बन्द हो जायेगी।
प्रश्न 43. परानिस्पंदन कहाँ होता है?
उत्तर- वृक्क कोशिका में।
प्रश्न 44. पचित भोजन का अवशोषण किस भाग में होता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)
उत्तर- पचित भोजन का अवशोषण आंत्र में होता है।
प्रश्न 45. उपापचय के फलस्वरूप बने नाइट्रोजनी वर्ज्य पदार्थों को शरीर से बाहर निकाला जाना क्या कहलाता है?
उत्तर- उपापचय के फलस्वरूप बने नाइट्रोजनी वर्ज्य पदार्थों को शरीर से बाहर निकालना उत्सर्जन (Excretion) कहलाता है।
प्रश्न 46. पादपों की पत्तियाँ हरी क्यों दिखाई देती हैं?
उत्तर- पादपों की पत्तियाँ पर्णहरित की उपस्थिति के कारण हरी दिखाई देती हैं।
प्रश्न 47. मनुष्य के कोई एक बाह्य परजीवी का नाम लिखिए।
उत्तर- मनुष्य के बाह्य परजीवी का नाम जूँ (Pediculus) है।
प्रश्न 48. पित्त रस (Bile Juice) किस अंग में एकत्रित किया जाता है?
उत्तर- पित्त रस पित्ताशय (gallbladder) में एकत्रित किया जाता है।
प्रश्न 49. पृथ्वी पर ऊर्जा का अन्तिम स्रोत क्या है?
उत्तर- सूर्य पृथ्वी पर ऊर्जा का अन्तिम स्रोत है।
प्रश्न 50. ऐसे जीव जो भोजन दूसरे जीवों से प्राप्त करते हैं उन्हें क्या कहते हैं?
उत्तर- ऐसे जीव जो भोजन दूसरे जीवों से प्राप्त करते हैं उन्हें परजीवी (Parasite) कहते हैं।
प्रश्न 51. (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल) आमाशय में किस प्रकार का माध्यम तैयार करता है?
उत्तर- (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल) आमाशय में अम्लीय माध्यम तैयार करता है।
प्रश्न 52. बाघ जैसे मांसाहारी की क्षुद्रांत्र कैसी होती है?
उत्तर- बाघ जैसे मांसाहारी की क्षुद्रांत्र छोटी होती है।
प्रश्न 53. रक्त दाब किसे कहते हैं?
उत्तर- रुधिर वाहिकाओं की भित्ति के विरुद्ध जो दाब लगता है उसे रक्तदाब कहते हैं।
प्रश्न 54. रेज़िन तथा गोंद पादप के कौनसे भाग में संचित होते हैं? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)
उत्तर- पुराने जाइलम में।
प्रश्न 55. श्वसन को परिभाषित कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)
उत्तर- शरीर के बाहर से ऑक्सीजन को ग्रहण करना तथा कोशिकीय आवश्यकता के अनुसार खाद्य स्रोत के विघटन में उसका उपयोग श्वसन कहलाता है।
प्रश्न 56. पचित भोजन से पानी व खनिज लवणों का अवशोषण कहाँ होता है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर- क्षुद्रांत्र।
प्रश्न 57. विभिन्न स्तरों पर भोजन, पचित रस व अवशिष्ट की गति को नियंत्रित करने वाली पेशियों को क्या कहते हैं? (प्रश्न बैंक)
उत्तर- अवरोधिनी पेशी।
प्रश्न 58. आहार नाल में भोजन का पूर्णतया पाचन व अवशोषण कहाँ होता है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— क्षुद्रांत्र।
प्रश्न 59. शरीर में सर्वप्रथम भोजन के किस घटक का पाचन होता है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— मंड (कार्बोहाइड्रेट)।
प्रश्न 60. प्रोटीन व वसा के पाचन के पाचक एन्जाइमों के नाम बताओ। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— प्रोटीन पाचक एंजाइम = पेप्सिन, ट्रिप्सिन
वसा पाचक एंजाइम = लाइपेज
प्रश्न 61. शरीर में पाये जाने वाली सबसे बड़ी ग्रन्थि का नाम क्या है? इसका मुख्य कार्य क्या है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— शरीर में पाये जाने वाली सबसे बड़ी ग्रन्थि—यकृत है।
कार्य— यकृत द्वारा पित्त रस स्रावित किया जाता है जो भोजन को क्षारीय बनाता है तथा वसा के पाचन में सहायक होता है।
प्रश्न 62. अचानक किसी क्रिया के होने से मांसपेशियों में क्रैम्प होने का क्या कारण है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— पेशियों में लैक्टिक अम्ल का निर्माण होना क्रैम्प का कारण है।
प्रश्न 63. मानव में उत्सर्जन में सहायक शरीर के दो अंगों के नाम लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— (i) वृक्क (ii) मूत्राशय।
प्रश्न 64. पादप में किन्हीं दो अपशिष्ट पदार्थों के नाम लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— (i) रेजिन (ii) गोंद।
प्रश्न 65. उत्सर्जन किसे कहते हैं? मानव में मुख्य उत्सर्जी पदार्थ क्या है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— वह जैव प्रक्रम, जिसमें हानिकारक उपापचयी वर्ज्य पदार्थों का निष्कासन होता है, उत्सर्जन कहलाता है। मानव में मुख्य उत्सर्जी पदार्थ—'यूरिया' है।
प्रश्न 66. श्वसन में विसरण की क्या भूमिका है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— श्वसन के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड तथा ऑक्सीजन का आदान-प्रदान विसरण द्वारा होता है।
प्रश्न 67. मानव हृदय में ऑक्सीजनित व वि-ऑक्सीजनित रुधिर का पृथक्करण कैसे हो पाता है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— मानव हृदय का दायाँ व बायाँ बँटवारा ऑक्सीजनित तथा वि-ऑक्सीजनित रुधिर के पृथक्करण में सहायक होता है।
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. भोजन के पाचन में लार की भूमिका को समझाइये। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2026)
उत्तर— भोजन के पाचन में लार भोजन को गीला करती है जिससे भोजन नली में भोजन का मार्ग आसान हो जाता है। लार में एंजाइम होता है जिसे लार एमिलेस कहते हैं। यह एंजाइम भोजन में उपस्थित मंड जटिल अणु को सरल शर्करा में खंडित कर पाचन में सहायक बनाता है।
प्रश्न 2. अमीबा में पोषण विधि का चित्र बनाकर वर्णन कीजिए। अथवा अमीबा में पोषण विधि को सचित्र समझाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)
उत्तर— अमीबा में पोषण—अमीबा कोशिकीय सतह से अंगुली जैसी अस्थायी प्रवर्ध (कूटपाद) की मदद से भोजन ग्रहण करता है। ये प्रवर्ध भोजन के कणों को घेर लेते हैं तथा संगलित होकर खाद्य रिक्तिका बनाते हैं।
खाद्य रिक्तिका के अन्दर जटिल पदार्थों का विघटन सरल पदार्थों में किया जाता है और वे कोशिकाद्रव्य में विसरित हो जाते हैं। बचा हुआ अपच पदार्थ कोशिका की सतह की ओर गति करता है तथा शरीर से बाहर निष्कासित कर दिया जाता है।
[अमीबा में पोषण की प्रक्रिया (a) से (d) तक]

प्रश्न 3. पौधों द्वारा जो कार्बोहाइड्रेट प्रकाश संश्लेषण के बाद तुरंत प्रयुक्त नहीं होते हैं उनका क्या होता है? हमारे शरीर में इसके लिए क्या क्रियाविधि होती है?
उत्तर- जो कार्बोहाइड्रेट प्रकाश संश्लेषण के बाद तुरंत प्रयुक्त नहीं होते हैं उन्हें मंड के रूप में संचित कर लिया जाता है। यह रक्षित आंतरिक ऊर्जा की तरह कार्य करता है तथा पौधे द्वारा आवश्यकतानुसार प्रयुक्त कर लिया जाता है। कुछ इसी तरह की स्थिति हमारे अंदर भी देखी जाती है, हमारे द्वारा खाए गए भोजन से उत्पन्न ऊर्जा का कुछ भाग हमारे शरीर में 'ग्लाइकोजन' के रूप में संचित हो जाता है।
प्रश्न 4. मरुद्भिद पौधों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया अन्य पौधों से किस प्रकार भिन्न होती है?
उत्तर- मरुद्भिद पौधे रात्रि में कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं और एक मध्यस्थ उत्पाद बनाते हैं। दिन में क्लोरोफिल ऊर्जा अवशोषित करके अंतिम उत्पाद बनाता है। जबकि अन्य सामान्य पौधों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया दिन में ही पूर्ण हो जाती है।
प्रश्न 5. नाइट्रोजन पौधों के लिए किस प्रकार आवश्यक है? पौधे इसे किस प्रकार प्राप्त करते हैं?
उत्तर- नाइट्रोजन एक आवश्यक तत्व है जिसका उपयोग प्रोटीन तथा अन्य यौगिकों के संश्लेषण में किया जाता है। इसे अकार्बनिक नाइट्रेट या नाइट्राइट के रूप में लिया जाता है। इसे उन कार्बनिक पदार्थों के रूप में भी लिया जाता है जिन्हें जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन से बनाते हैं।
प्रश्न 6. शिरा व धमनी में क्या अन्तर है?
उत्तर- शिरा व धमनी में अन्तर
क्र.सं. | शिरा (Vein) | धमनी (Artery) |
1. | रुधिर को अंगों से हृदय में या हृदय की ओर लाती है। | रुधिर को हृदय से अंगों में ले जाती है। |
2. | फुफ्फुसीय शिरा के अतिरिक्त सब में अशुद्ध रुधिर होता है। | फेफड़ों में जाने वाली फुफ्फुसीय धमनी के अतिरिक्त सब में शुद्ध रुधिर होता है। |
3. | इसमें रक्त दाब कम होता है। | इनमें रक्त दाब उच्च होता है। |
4. | इनकी दीवार पतली होती है। | इनकी दीवार मोटी व लचीली होती है। |
5. | इनका बाह्य स्तर मोटा होता है। | इनका मध्य स्तर (Tunica Media) मोटा होता है। |
6. | इनकी गुहा बड़ी होती है। | इनकी गुहा संकरी होती है। |
7. | दीवार पतली होने के कारण खाली होने पर पिचक जाती है। | दीवार मोटी होने के कारण खाली होने पर पिचकती नहीं है। |
8. | अधिकांश शिरायें सतह पर पाई जाती हैं। | अधिकांश धमनियां गहराई में पाई जाती हैं। |
9. | इनके भीतर कपाट होते हैं। | इनके भीतर कपाट नहीं होते हैं। |
10. | इनका रंग गहरा लाल या नीला होता है। | इनका रंग गुलाबी या चटक लाल होता है। |
प्रश्न 7. कोशिकीय श्वसन किसे कहते हैं? निःश्वसन तथा उच्छ्वसन में दो अंतर लिखिए।
उत्तर- कोशिकीय श्वसन- कोशिका के अंदर ऑक्सीजन की उपस्थिति से खाद्य पदार्थों के ऑक्सीकरण की क्रिया को कोशिकीय श्वसन कहते हैं।
निःश्वसन (Inspiration) तथा उच्छ्वसन (Expiration) में अन्तर
क्र.सं. | निःश्वसन (Inspiration) | उच्छ्वसन (Expiration) |
1. | निःश्वसन में वक्षीय गुहा का आयतन बढ़ जाता है। | जबकि उच्छ्वसन क्रिया में वक्षीय गुहा का आयतन घट जाता है। |
2. | वायु ( ) बाहर से भीतर की ओर आती है, इसे निःश्वसन कहते हैं। | इस क्रिया में वायु ( ) भीतर से बाहर निकलती है। इसे उच्छ्वसन कहते हैं। |
प्रश्न 8. एकल परिसंचरण तन्त्र किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर- एकल परिसंचरण तन्त्र (Single Circulatory System)- शरीर में एक चक्र में केवल एक बार ही रुधिर का हृदय में आना एकल परिसंचरण तन्त्र कहलाता है।
इस प्रकार का परिसंचरण मछलियों में पाया जाता है। मछलियों के हृदय में केवल दो कोष्ठ होते हैं जिन्हें क्रमशः आलिन्द व निलय कहते हैं। अर्थात् एक आलिन्द व एक निलय होता है। यहाँ से रुधिर क्लोमों में भेजा जाता है जहाँ यह ऑक्सीजनित होता है और सीधा शरीर में भेज दिया जाता है।
इस तरह मछलियों के शरीर में एक चक्र में केवल एक बार ही रुधिर हृदय में जाता है।
प्रश्न 9. स्वपोषी पौधे किसे कहते हैं? पत्ती के अनुप्रस्थ काट का चित्र बनाइए। (प्रश्न बैंक)
[पत्ती की अनुप्रस्थ काट (Cross-section of leaf)]

उत्तर- स्वपोषी (Autotrophs)- वे पौधे, जो क्लोरोफिल की सहायता से सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में जल व द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, स्वपोषी कहलाते हैं।
प्रश्न 10. तरल संयोजी ऊतक किसे कहते हैं? इसके कार्य लिखिए।
उत्तर- रुधिर (Blood) को तरल संयोजी ऊतक कहते हैं। रुधिर के निम्न कार्य हैं-
(1) रुधिर की लाल रुधिर कोशिकाओं में उपस्थित हीमोग्लोबिन द्वारा व का परिवहन होता है।
(2) रुधिर द्वारा पचित व अवशोषी पदार्थों का परिवहन विभिन्न कोशिकाओं तक किया जाता है।
(3) ताप नियमन में सहायक होता है।
(4) रुधिर में स्कंदन की क्षमता पाई जाती है, अतः चोट लगने पर अधिक रुधिर नहीं बहता।
(5) हार्मोन का परिवहन।
(6) रुधिर प्रतिरक्षा प्रदान करता है।
प्रश्न 11. पैरामीशियम में पोषण विधि को समझाइए।
उत्तर- पैरामीशियम एककोशिक जीव है। इसकी कोशिका का एक निश्चित आकार होता है तथा भोजन एक विशिष्ट स्थान से ही ग्रहण किया जाता है। भोजन इस स्थान तक पक्ष्माभ की गति द्वारा पहुँचता है जो कोशिका की पूरी सतह को ढके होते हैं।
प्रश्न 12. विभिन्न जंतुओं में क्षुद्रांत्र की लम्बाई किस पर निर्भर करती है? उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर- विभिन्न जंतुओं में क्षुद्रांत्र की लम्बाई उनके भोजन के प्रकार के अनुसार अलग-अलग होती है। घास खाने वाले शाकाहारी के सेल्युलोज पचाने के लिए लंबी क्षुद्रांत्र की आवश्यकता होती है। मांस का पाचन सरल है अतः बाघ जैसे मांसाहारी की क्षुद्रांत्र छोटी होती है।
प्रश्न 13. पित्त रस क्या है? पाचन में इसकी भूमिका समझाइए।
उत्तर- यकृत द्वारा स्रावित पाचक रस को पित्त रस कहते हैं। पित्त रस पाचन में निम्न प्रकार से सहायक है-
(i) आमाशय से आने वाला भोजन अम्लीय होता है जिसे अग्न्याशयिक एंजाइमों की क्रिया के लिए क्षारीय बनाया जाता है। यह कार्य पित्त रस द्वारा किया जाता है।
(ii) क्षुद्रांत्र में वसा बड़ी गोलिकाओं के रूप में होता है जिससे उस पर एंजाइम का कार्य करना मुश्किल हो जाता है। पित्त रस में उपस्थित पित्त लवण उन्हें छोटी गोलिकाओं में खंडित कर देता है जिससे एंजाइम की क्रियाशीलता बढ़ जाती है।
प्रश्न 14. मनुष्य के रुधिर परिसंचरण तन्त्र में कौनसी दो विशेषताएँ मिलती हैं?
उत्तर- मनुष्य के रुधिर परिसंचरण तन्त्र में निम्न दो विशेषताएँ मिलती हैं-
(i) युक्त रुधिर तथा रहित रुधिर हृदय तथा रक्त-वाहिनियों में कभी नहीं मिलता अर्थात् यह हमेशा पृथक् रहता है।
(ii) रक्त शरीर में एक चक्र पूरा करने के लिए हृदय से दो बार गुजरता है। पहली बार शरीर का समस्त अशुद्ध रुधिर दाहिने आलिन्द तथा निलय में होकर फेफड़ों में जाता है तथा दूसरी बार फेफड़ों से फुफ्फुस शिराओं द्वारा शुद्ध रुधिर बायें आलिन्द में होकर बायें निलय में और वहाँ से एक महाधमनी द्वारा समस्त शरीर में आ जाता है।
प्रश्न 15. मनुष्य में आहारनाल से संबंधित ग्रंथियों के नाम लिखिए तथा पित्त रस के दो कार्य लिखिए।
उत्तर- मनुष्य में आहारनाल से संबंधित ग्रंथियाँ निम्न हैं- (1) लार ग्रंथियाँ, (2) अग्न्याशय, (3) यकृत।
पित्त रस के कार्य-
प्रश्न 16. मानव में पाई जाने वाली रुधिर वाहिनियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर- मानव में तीन प्रकार की रुधिर वाहिनियाँ पाई जाती हैं-
(1) धमनियाँ- ये वाहिनियाँ रुधिर को हृदय से शरीर के विभिन्न अंगों तक ले जाती हैं। इनमें रुधिर दाब के साथ बहता है इसीलिए इनकी दीवार मोटी एवं लचीली होती है।
(2) शिराएँ- इनके द्वारा रुधिर शरीर के विभिन्न भागों से हृदय की ओर प्रवाहित होता है। इनकी दीवार पतली व पिचकने वाली होती है। अतः इनमें रुधिर का दाब बहुत कम होता है। रुधिर दाब कम होने के कारण इन शिराओं में स्थान-स्थान पर अर्धचन्द्राकार कपाट होते हैं जो रुधिर को उल्टी दिशा में बहने से रोकते हैं।
(3) केशिकाएँ- किसी अंग या ऊतक तक पहुँचकर धमनी उत्तरोत्तर छोटी-छोटी वाहिकाओं में विभाजित हो जाती है जिससे सभी कोशिकाओं से रुधिर का संपर्क हो सके। सबसे छोटी वाहिकाओं की भित्ति एक कोशिकीय मोटी होती है और रुधिर एवं आस-पास की कोशिकाओं के मध्य पदार्थों का विनिमय इस पतली भित्ति के द्वारा ही होता है। केशिकाएँ तब आपस में मिलकर शिराएँ बनाती है तथा रुधिर को अंग या ऊतक से दूर ले जाती हैं।
प्रश्न 17. विषमपोषी (Heterotrophs) किसे कहते हैं? ये कितने प्रकार के होते हैं? प्रत्येक का वर्णन कीजिए।
उत्तर- विषमपोषी (Heterotrophs)- प्राणी (मनुष्य सहित) जो अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते हैं और दूसरों पर भोजन के लिए परोक्ष या अपरोक्ष रूप से निर्भर रहते हैं, विषमपोषी कहलाते हैं। ये निम्न पाँच प्रकार के होते हैं-
(1) शाकाहारी (Herbivores)- वे जन्तु जो पौधों पर निर्भर रहते हैं, शाकाहारी कहलाते हैं। जैसे- गाय, बकरी आदि।
(2) माँसाहारी (Carnivores)- वे जन्तु जो दूसरे जन्तुओं को अपने भोजन के रूप में लेते हैं, माँसाहारी कहलाते हैं। जैसे- शेर, चीता आदि।
(3) मृतजीवी (Saprophyte)- बैक्टीरिया एवं फंजाई जैसे जीव, जो अपना भोजन सड़े-गले कार्बनिक पदार्थों से प्राप्त करते हैं, मृतजीवी कहलाते हैं।
(4) परजीवी (Parasites)- कुछ जीव पौधों और जन्तुओं को बिना मारे उनसे पोषण प्राप्त करते हैं, उन्हें परजीवी कहते हैं। जैसे- अमरबेल, जूँ, लीच, फीताकृमि, आर्किड आदि।
(5) सर्वाहारी (Omnivores)- वे जन्तु जो पौधे एवं जन्तु दोनों को भोजन के रूप में लेते हैं, सर्वाहारी कहलाते हैं। जैसे- चूहे, सूअर, मनुष्य आदि।
प्रश्न 18. श्वसन को परिभाषित कीजिए। नासामार्ग अथवा वायुमार्ग के कार्य लिखिए।
उत्तर- श्वसन (Respiration)- वायुमंडलीय और कोशिकाओं में उत्पन्न के आदान-प्रदान (विनिमय) की इस प्रक्रिया को श्वसन कहते हैं।
नासामार्ग/वायुमार्ग के कार्य-
1. लगातार श्लेष्म स्रावण के कारण नासामार्ग, नम व लसदार बने रहते हैं, जो फेफड़ों तक जाने वाली वायु को नम बना देते हैं।
2. वायु के साथ आये हानिकारक, वायरस, जीवाणु, धूल आदि के कण श्लेष्म के साथ चिपक जाते हैं, इस प्रकार वायु का फिल्ट्रेशन होता है।
प्रश्न 19. 'दीर्घरोम' क्या होते हैं? इनका महत्त्व बताइए।
अथवा
दीर्घरोम क्या है? इसका क्या कार्य है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर- क्षुद्रांत्र के आंतरिक आस्तर पर अनेक अँगुली जैसे प्रवर्ध होते हैं जिन्हें दीर्घरोम कहते हैं। ये अवशोषण का सतही क्षेत्रफल बढ़ा देते हैं। दीर्घरोम में रुधिर वाहिकाओं की बहुतायत होती है जो भोजन को अवशोषित करके शरीर की प्रत्येक कोशिका तक पहुँचाती हैं। वृहदांत्र में उपस्थित दीर्घरोम बिना पचे भोजन से जल का अवशोषण कर लेते हैं।
प्रश्न 20. रुधिर एवं लसीका में अन्तर लिखिए।
उत्तर- रुधिर एवं लसीका में अन्तर
क्र.सं. | रुधिर (Blood) | लसीका (Lymph) |
1. | सामान्यतः लाल रंग का होता है। | यह रंगविहीन होता है। |
2. | लाल रक्त कणिकाओं (RBC) से युक्त होता है। | इसमें RBC का अभाव होता है। |
--- | ---
3. इसमें प्रोटीन की उच्च मात्रा उपस्थित होती है। | इसमें प्रोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है।
4. पचित भोजन की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है। | पचित भोजन की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है।
5. फाइब्रिनोजन अधिक होता है। | फाइब्रिनोजन की मात्रा कम होती है।
6. अधिक। | कम।
7. उपापचयी उत्सर्जी अन्तः उत्पाद कम होते हैं। | उपापचयी उत्सर्जी अन्तः उत्पाद अधिक होते हैं।
8. न्यूट्रोफिल्स की अधिकता। | लिम्फोसाइट्स की अधिकता।
9. यह सामान्य तरल संयोजी ऊतक है। | यह छना हुआ रुधिर है।
प्रश्न 21. पेशियों में क्रैम्प उत्पन्न होने के कारण को समझाइए।
उत्तर- कभी-कभी जब हमारी पेशी कोशिकाओं में ऑक्सीजन का अभाव हो जाता है, तो श्वसन क्रिया के दौरान पायरुवेट के विखंडन के लिए सामान्य पथ के स्थान पर दूसरा पथ अपनाया जाता है, यहाँ पायरुवेट एक अन्य तीन कार्बन वाले अणु लैक्टिक अम्ल में परिवर्तित हो जाता है। इसीलिए अचानक किसी क्रिया के होने से हमारी पेशियों में लैक्टिक अम्ल का निर्माण होने लगता है जिससे क्रैम्प उत्पन्न हो जाता है।
प्रश्न 22. जलीय जीवों की श्वास दर स्थलीय जीवों की अपेक्षा द्रुत क्यों होती है?
उत्तर- जो जीव जल में रहते हैं वे जल में विलेय ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं। क्योंकि जल में विलेय ऑक्सीजन की मात्रा वायु में ऑक्सीजन की मात्रा की तुलना में बहुत कम है, इसलिए जलीय जीवों की श्वास दर स्थलीय जीवों की अपेक्षा द्रुत होती है।
प्रश्न 23. 'अति तनाव' किसे कहते हैं? इसके उत्पन्न होने के कारण तथा इसके दुष्परिणाम बताइए।
उत्तर- उच्च रक्तदाब की स्थिति को अति तनाव भी कहते हैं। इसका कारण धमनिकाओं का सिकुड़ना है, इससे रक्त प्रवाह में प्रतिरोध बढ़ जाता है। इससे धमनी फट सकती है तथा आंतरिक रक्तस्राव हो सकता है।
प्रश्न 24. यकृत के कार्य लिखिए।
उत्तर- यकृत के कार्य (Functions of Liver)-
(1) यह पित्त रस का संश्लेषण करता है।
(2) यकृत कोशिकाएँ यूरिया का संश्लेषण करती हैं।
(3) यकृत कोशिकाएँ हिपेरिन नामक प्रोटीन का स्रावण करती हैं जो रुधिर वाहिनियों में रक्त को जमने से रोकता है।
(4) वसा का पायसीकरण करता है।
(5) यकृत की कोशिकाएँ आवश्यकता से अधिक ग्लूकोज की मात्रा को ग्लाइकोजन में बदलकर संग्रह कर लेती हैं। इस क्रिया को ग्लाइकोजिनेसिस कहते हैं।
(6) शरीर में उत्पन्न विषैले पदार्थों का निराविषीकरण भी यकृत द्वारा किया जाता है।
प्रश्न 25. बंद एवं खुले परिसंचरण तंत्र की तुलना कीजिए।
उत्तर- बंद व खुले परिसंचरण तंत्र की तुलना
क्र.सं. | बंद परिसंचरण तंत्र | खुला परिसंचरण तंत्र |
1. | ऐसा रुधिर परिसंचरण तंत्र जिसमें रुधिर बंद नलिकाओं में बहता है, बंद परिसंचरण तंत्र कहलाता है। | वह रुधिर परिसंचरण तंत्र जिसमें रुधिर पूर्ण रूप से बंद नलिकाओं में नहीं बहता है, खुला परिसंचरण तंत्र कहलाता है। |
2. | इसमें रुधिर ऊतकों के सम्पर्क में नहीं रहता है। | इसमें रुधिर ऊतकों के सम्पर्क में रहता है। |
3. | इसमें रुधिर का प्रवाह तेज होता है। | इसमें रुधिर का प्रवाह धीमा होता है। |
4. | उदाहरण-मनुष्य, केंचुआ, खरगोश आदि। | उदाहरण-कीट, मकड़ी, कॉकरोच, सीपी आदि। |
प्रश्न 26. रक्तदाब (Blood Pressure) किसे कहते हैं? सामान्य रक्तदाब का मान बताइए। इसे किस यन्त्र द्वारा नापा जाता है?
उत्तर- रक्तदाब (Blood Pressure)- रुधिर वाहिकाओं की भित्ति के विरुद्ध जो दाब लगता है उसे रक्तदाब कहते हैं।
हैं। यह दाब शिराओं की अपेक्षा धमनियों में बहुत अधिक होता है। धमनी के अन्दर रुधिर का दाब निलय प्रकुंचन (संकुचन) के दौरान प्रकुंचन दाब तथा निलय अनुशिथिलन (शिथिलन) के दौरान अनुशिथिलन दाब कहलाता है। सामान्य प्रकुंचन दाब लगभग (पारा) तथा अनुशिथिलन दाब लगभग (पारा) होता है।
रक्तदाब को स्फाईग्मोमैनोमीटर नामक यन्त्र द्वारा नापा जाता है।
प्रश्न 27. धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए किस प्रकार हानिकारक है? समझाइए।
उत्तर : फेफड़े का कैंसर दुनिया में मौत के सामान्य कारणों में से एक है। श्वास नली के ऊपरी हिस्से में छोटी-छोटी बालों जैसी संरचनाएँ होती हैं, जिन्हें सीलिया कहते हैं। ये सीलिया साँस लेते वक्त अंदर ली जाने वाली वायु से रोगाणु, धूल और अन्य हानिकारक कणों को हटाने में मदद करती हैं। धूम्रपान करने से ये बालों जैसी संरचनाएँ नष्ट हो जाती हैं, जिससे रोगाणु, धूल, धुआँ और अन्य हानिकारक रसायन फेफड़ों में प्रवेश कर जाते हैं जो संक्रमण, खाँसी और यहाँ तक कि फेफड़ों के कैंसर का भी कारण बनते हैं।
प्रश्न 28. अवशोषण किसे कहते हैं? पेप्सिन एवं ट्रिप्सिन एंजाइम में कोई तीन अन्तर लिखिए।
उत्तर : अवशोषण (Absorption)- पचे हुए खाद्य पदार्थों, विटामिनों, लवणों एवं जल का आंत्र की उपकला कोशिकाओं के माध्यम से रुधिर में स्थानांतरण को अवशोषण कहते हैं।
क्र.सं. | पेप्सिन (Pepsin) | ट्रिप्सिन (Trypsin) |
1. | पेप्सिन एंजाइम जठर रस में पाया जाता है | जबकि ट्रिप्सिन एंजाइम अग्न्याशय रस में पाया जाता है। |
2. | इसका उत्पादन निष्क्रिय पेप्सिनोजन के रूप में होता है। | जबकि इसका उत्पादन ट्रिप्सिनोजन के रूप में होता है। |
3. | यह जठर रस के द्वारा सक्रिय होता है। | आन्त्रीय रस के एन्टेरोकाइनेज एंजाइम द्वारा सक्रिय होता है। |
4. | यह अम्लीय माध्यम में क्रिया करता है। | जबकि यह क्षारीय माध्यम में क्रिया करता है। |
5. | यह आमाशय में क्रियाशील होता है। | यह ग्रहणी में क्रियाशील होता है। |
प्रश्न 29. जंतुओं को ऑक्सीजन परिवहन के लिए श्वसन वर्णकों की आवश्यकता क्यों पड़ती है?
उत्तर : जैसे-जैसे जंतुओं के शरीर का आकार बढ़ता है, अकेला विसरण दाब शरीर के सभी अंगों में ऑक्सीजन पहुँचाने के लिए अपर्याप्त होता है तथा उसकी दक्षता भी कम हो जाती है। इसलिए जंतुओं में फुफ्फुस की वायु से श्वसन वर्णक ऑक्सीजन लेकर, उन ऊतकों तक पहुँचाते हैं जिनमें ऑक्सीजन की कमी है। मानव में श्वसन वर्णक हीमोग्लोबिन है जो ऑक्सीजन के लिए उच्च बंधुता रखता है।
प्रश्न 30. अवायवीय श्वसन को रासायनिक समीकरण के माध्यम से समझाइए।
उत्तर : अवायवीय श्वसन (Anaerobic respiration)- यह श्वसन ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है। इस प्रकार का श्वसन यीस्ट (yeast), जीवाणुओं, परजीवियों तथा कुछ निम्न स्तर के जंतुओं में होता है, जिन्हें वायुमण्डल की स्वतंत्र ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है। इस प्रकार ऑक्सीजन की कमी अथवा अनुपस्थिति में ग्लूकोस इथाइल अल्कोहल (ethyl alcohol) अथवा लैक्टिक अम्ल (lactic acid) में बँट जाता है जिससे कम मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है। इस क्रिया को शर्करा किण्वन (sugar fermentation) भी कहते हैं।
(क)
ग्लूकोस लैक्टिक अम्ल (पेशियों तथा जीवाणुओं में)
(ख)
ग्लूकोस इथाइल अल्कोहल (यीस्ट में)
प्रश्न 31. वाष्पोत्सर्जन किसे कहते हैं? इसके महत्त्व लिखिए।
उत्तर : वाष्पोत्सर्जन (Transpiration)- पौधे की सतह से जल-वाष्प के रूप में जल की हानि होने को वाष्पोत्सर्जन (Transpiration) कहते हैं।
वाष्पोत्सर्जन का महत्त्व (Importance of Transpiration)
(i) वाष्पोत्सर्जन से कोशिकाओं के भीतर अनुकूलतम स्फीति बन जाती है।
(ii) वाष्पोत्सर्जन से पौधे के भीतर जल तथा खनिज लवणों की गति होती है।
(iii) वाष्पोत्सर्जन के द्वारा अधिक तापमान पर भी पौधा और उसकी पत्तियाँ ठण्डी बनी रहती हैं।
(iv) अतिरिक्त जल से छुटकारा पाया जा सकता है।
प्रश्न 32. निम्नलिखित को किस रूप में संग्रहित किया जाता है?
उत्तर- (i) मनुष्यों में भोजन से प्राप्त ऊर्जा (एडीनोसिन ट्राइ फास्फेट) के रूप में संग्रहित होती है।
(ii) पादपों में अनुपयोगी कार्बोहाइड्रेट्स स्टार्च (मंड) के रूप में संचित/संग्रहित किया जाता है।
प्रश्न 33. श्वसन तथा प्रकाश-संश्लेषण में अन्तर लिखिए।
उत्तर- श्वसन तथा प्रकाश-संश्लेषण में अन्तर
क्र.सं. | श्वसन (Respiration) | प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis) |
1. | इसमें शर्करा का विघटन होता है। | इसमें शर्करा का निर्माण होता है। |
2. | यह प्रकाश (दिन) और अंधकार (रात्रि) दोनों में होता है। | यह केवल प्रकाश (दिन) में होता है। |
3. | इसमें का उपभोग तथा व का उत्पादन होता है। | इसमें तथा का उपभोग व का उत्पादन होता है। |
4. | यह सभी जीवित कोशिकाओं में होती है। | यह केवल पर्णहरित कोशिकाओं में होती है। |
5. | यह प्रत्येक कोशिका के कोशिकाद्रव्य व माइटोकॉण्ड्रिया में होती है। | यह केवल कोशिका के क्लोरोप्लास्ट में होती है। |
प्रश्न 34. लसिका किसे कहते हैं? लसिका के कार्य लिखिए।
उत्तर- लसिका (Lymph)-रुधिर कोशिकाओं की भित्ति में उपस्थित छिद्रों द्वारा कुछ प्लाज्मा, प्रोटीन तथा रुधिर कोशिकाएँ बाहर निकलकर ऊतक के अंतर्कोशिकीय अवकाश में आ जाते हैं तथा ऊतक तरल या लसिका का निर्माण करते हैं। यह रुधिर के प्लाज्मा की तरह ही है लेकिन यह रंगहीन होता है तथा इसमें अल्पमात्रा में प्रोटीन होते हैं।
लसिका के कार्य-
प्रश्न 35. पादपों में धीमे वहन तंत्र के पाये जाने के कारणों को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
पादपों में जंतुओं के समान पम्पिंग प्रणाली (जैसे हृदय) क्यों नहीं पायी जाती है?
उत्तर- विभिन्न शरीर अभिकल्पना के लिए ऊर्जा की आवश्यकता भिन्न होती है। पादप प्रचलन नहीं करते हैं, और पादप शरीर का एक बड़ा अनुपात अनेक ऊतकों में मृत कोशिकाओं का होता है। इसके परिणामस्वरूप पादपों को कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है इसलिए वे अपेक्षाकृत धीमे वहन प्रणाली का उपयोग कर सकते हैं।
प्रश्न 36. सामान्यतया जंतुओं में किस प्रकार का श्वसन पाया जाता है? इसमें ऊर्जा उत्पादन को रासायनिक समीकरण से समझाइए।
उत्तर- सामान्यतया जंतुओं में वायवीय श्वसन पाया जाता है। यह श्वसन ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है। इस प्रकार के श्वसन में वायुमण्डल की ऑक्सीजन की उपस्थिति में ग्लूकोस का विघटन होता है जिसके फलस्वरूप कार्बन डाइऑक्साइड, जल तथा अधिक मात्रा में ऊर्जा निकलती है।
अतः इस प्रकार के श्वसन में प्राणी अपने वातावरण से ऑक्सीजन लेता है और बदले में कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ता है।
प्रश्न 37. रुधिर परिसंचरण तंत्र किसे कहते हैं? एकल परिसंचरण और दोहरे परिसंचरण में चार अन्तर लिखिए।
उत्तर- मनुष्य में व , पोषक पदार्थों, उत्सर्जी पदार्थों, स्रावी पदार्थों को शरीर के एक भाग से दूसरे भाग में पहुँचाने वाले तंत्र को रुधिर परिसंचरण तंत्र कहते हैं।
एकल परिसंचरण व दोहरे परिसंचरण में अन्तर
क्र.सं. | एकल परिसंचरण | दोहरे परिसंचरण |
1. | एक पूरे चक्र में रुधिर हृदय से एक बार गुजरता है। | रुधिर हृदय से दो बार गुजरता है। |
2. | गिल्स द्वारा रुधिर को ऑक्सीजनित किया जाता है। | फेफड़ों द्वारा रुधिर को ऑक्सीजनित किया जाता है। |
3. | हृदय में दो कक्ष होते हैं जिन्हें क्रमशः आलिन्द व निलय कहते हैं। | हृदय में चार कक्ष होते हैं जिन्हें क्रमशः दो आलिन्द व दो निलय कहते हैं। |
4. | इस प्रकार का परिसंचरण मछलियों में पाया जाता है। | इस प्रकार का परिसंचरण, स्तनधारियों, पक्षी वर्ग, सरीसृप आदि में पाया जाता है। |
प्रश्न 38. विभिन्न जंतुओं के हृदय में कोष्ठों की संख्या में भिन्नता क्यों पायी जाती है? समझाइए।
उत्तर- जंतुओं में हृदय का कोष्ठों में बँटवारा ऑक्सीजनित तथा विऑक्सीजनित रुधिर को मिलने से रोकने में लाभदायक होता है। इस तरह का बँटवारा शरीर को उच्च दक्षतापूर्ण ऑक्सीजन की पूर्ति कराता है। पक्षी और स्तनधारी जैसे जंतुओं को जिन्हें उच्च ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह बहुत लाभदायक है क्योंकि इन्हें अपने शरीर का तापक्रम बनाए रखने के लिए निरंतर ऊर्जा की आवश्यकता होती है उन जंतुओं में जिन्हें इस कार्य के लिए ऊर्जा का उपयोग नहीं करना होता है, जैसे-जल, थल, चर या बहुत से सरीसृप उनमें तीन कोष्ठीय हृदय होता है और ये ऑक्सीजनित तथा विऑक्सीजनित रुधिर धारा को कुछ सीमा तक मिलना भी सहन कर लेते हैं इसीलिए दूसरी ओर मछली के हृदय में केवल दो कोष्ठ ही होते हैं।
प्रश्न 39. प्लाज्मा किसे कहते हैं? इसका कार्य बताइए।
उत्तर- रुधिर के तरल माध्यम को प्लाज्मा/प्लैज्मा कहते हैं। इसमें रुधिर कोशिकाएँ निलंबित होती हैं।
प्लाज्मा का कार्य- प्लाज्मा भोजन, कार्बन डाइऑक्साइड तथा नाइट्रोजनी वर्ज्य पदार्थों का विलीन रूप में वहन करता है।
प्रश्न 40. ए.टी.पी. का निर्माण किस प्रकार से होता है?
उत्तर- अधिकांश कोशिकीय प्रक्रमों के लिए ऊर्जा मुद्रा है। श्वसन प्रक्रम में मोचित ऊर्जा का उपयोग ए.डी.पी. ( ) तथा अकार्बनिक फास्फेट से ए.टी.पी. अणु बनाने में किया जाता है।
आंतरोषम प्रक्रम कोशिका के अन्दर तब इसी का उपयोग क्रियाओं के परिचालन में करते हैं।
प्रश्न 41. मनुष्य के आमाशय में श्लेष्मा की क्या भूमिका है?
उत्तर- आमाशय में श्लेष्मा की भूमिका- आमाशय की जठर ग्रंथियों द्वारा स्रावित जठर रस में अम्ल तथा एंजाइम के साथ श्लेष्मा भी उपस्थित होता है। सामान्य परिस्थितियों में श्लेष्मा आमाशय के आंतरिक संस्तर की अम्ल तथा पाचक एंजाइमों से रक्षा करता है। इसी के कारण आहार नाल ऊतकों का पाचन नहीं हो पाता है।
प्रश्न 42. पत्तियों को प्रकाशसंलेषी अंग क्यों कहा जाता है?
उत्तर- चूँकि प्रकाशसंलेषण की क्रिया प्रारम्भ से अन्त तक हरितलवक या क्लोरोप्लास्ट में ही होती है और यह क्लोरोप्लास्ट पत्तियों के पेलीसेड तथा स्पंजी पैरेनकाइमा में भरे रहते हैं, इसलिए पत्तियों को प्रकाशसंलेषी अंग कहते हैं।
प्रश्न 43. रुधिर क्या है और इसका कौनसा घटक गैसीय परिवहन में सहायक है?
उत्तर- रुधिर एक तरल संयोजी ऊतक होता है। इसमें एक तरल माध्यम होता है, जिसे प्लैज्मा कहते हैं, इसमें कोशिकाएँ निलंबित होती हैं। रुधिर के द्वारा शरीर के भीतर एक स्थान से दूसरे स्थान तक पदार्थों का परिवहन होता है।
शरीर में श्वसन गैसों ( एवं ) का परिवहन रुधिर की लाल रुधिर कोशिकाओं में मौजूद हीमोग्लोबिन द्वारा किया जाता है।
प्रश्न 44. यदि रुधिर नलिकाओं से रुधिर रिसना प्रारम्भ हो जाए तो क्या होगा? इसको किस प्रकार रोका जाता है?
अथवा
प्लेटलेट्स द्वारा अनुरक्षण प्रक्रिया को समझाइए।
उत्तर- यदि रुधिर नलिकाओं से रक्तस्राव होने लगे तो शरीर में रुधिर की कमी हो जाएगी जिससे ऑक्सीजन व अन्य पदार्थों के वहन में कमी आने लगेगी। इसके अतिरिक्त रक्तस्राव से दाब में कमी आ जाएगी जिससे पंपिंग प्रणाली की दक्षता में कमी आ जाएगी। इसे रोकने के लिए रुधिर में प्लेटलेट्स कोशिकाएँ होती हैं जो पूरे शरीर में भ्रमण करती है और रक्तस्राव के स्थान पर रुधिर का थक्का बनाकर मार्ग अवरुद्ध कर देती हैं।
प्रश्न 45. प्रकाश संश्लेषण प्रक्रम की रासायनिक अभिक्रिया तथा इस प्रक्रम के दौरान होने वाली घटनाएँ लिखिए।
उत्तर- प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis)- जल तथा कार्बन डाइऑक्साइड ( व ) द्वारा पर्णहरित युक्त पादप कोशिकाओं में प्रकाश की उपस्थिति में सरल कार्बनिक पदार्थों के निर्माण को प्रकाश-संश्लेषण कहते हैं। इसमें ऑक्सीजन एवं जल उप-उत्पाद के रूप में बनते हैं।
(ग्लूकोज)
इस प्रक्रम के दौरान निम्नलिखित घटनाएँ होती हैं-
(i) क्लोरोफिल द्वारा प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करना।
(ii) प्रकाश ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में रूपान्तरित करना तथा जल अणुओं का हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन में अपघटन।
(iii) कार्बन डाइऑक्साइड का कार्बोहाइड्रेट में अपचयन।
प्रश्न 46. प्रकाश संश्लेषण का महत्व बताइए। प्रकाश संश्लेषण को प्रभावित करने वाले कारकों के नाम लिखिए।
उत्तर- प्रकाश संश्लेषण का महत्व- जीवन के निरन्तर अस्तित्व हेतु प्रकाश संश्लेषण परम आवश्यक है। सजीवों को कार्बनिक भोजन तथा की प्राप्ति इस क्रिया के फलस्वरूप होती है।
प्रकाश-संश्लेषण उत्पादन केवल भोजन ही प्रदान नहीं करते अपितु इनमें विभिन्न उपापचयी क्रियाओं तथा गतियों के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं।
प्रभावित करने वाले कारक निम्न हैं-
(i) प्रकाश, (ii) तापमान, (iii) जल, (iv) कार्बन डाइऑक्साइड। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)
प्रश्न 47. मानव में दोहरा परिसंचरण क्यों आवश्यक है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)
अथवा
स्तनधारियों में दोहरे रक्त परिसंचरण की आवश्यकता क्यों है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर- मानव हृदय का दायां व बायां भाग ऑक्सीजनित व विऑक्सीजनित रुधिर को मिलने नहीं देता है। इस तरह का बँटवारा शरीर को उच्च दक्षतापूर्ण ऑक्सीजन की पूर्ति कराता है ताकि मानव अपने शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए निरन्तर उच्च ऊर्जा प्राप्त सके। इसलिए मानव में दोहरे परिसंचरण की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 48. प्रकाश संश्लेषण प्रक्रम के दौरान होने वाली तीनों घटनाओं को समझाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)
अथवा
हरे पौधों में प्रकाश संश्लेषण के विभिन्न चरणों को लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर- प्रकाश संश्लेषण प्रक्रम के दौरान होने वाली घटनाएँ-
(i) क्लोरोफिल द्वारा प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करना।
(ii) प्रकाश ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में रूपान्तरित करना तथा जल अणुओं का हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन में अपघटन।
(iii) कार्बन डाइऑक्साइड का कार्बोहाइड्रेट में अपचयन।
प्रश्न 49. गैसों के विनिमय के लिए मानव फुफ्फुस की कार्यप्रणाली को समझाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)
अथवा
मानव श्वसन तंत्र में गैसों के विनिमय को समझाइए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर—फुफ्फुस के अंदर वायु मार्ग छोटी और छोटी नलिकाओं में विभाजित हो जाता है, जो अंत में गुब्बारे जैसी रचना में अंतकृत हो जाता है, जिसे कूपिका कहते हैं। कूपिका एक सतह उपलब्ध कराती है जिससे गैसों का विनिमय हो सकता है। कूपिकाओं की भित्ति में रुधिर वाहिकाओं का विस्तीर्ण जाल होता है। जब श्वास अंदर ली जाती है तो पसलियाँ ऊपर उठती हैं और डायफ्राम चपटा हो जाता है, इसके परिणामस्वरूप वक्षगुहिका बड़ी हो जाती है। इस कारण वायु फुफ्फुस के अंदर चूस ली जाती है और विस्तृत कूपिकाओं को भर लेती है। रुधिर शेष शरीर से कार्बन डाइऑक्साइड कूपिकाओं में छोड़ने के लिए लाता है। कूपिका रुधिर वाहिका का रुधिर कूपिका वायु से ऑक्सीजन लेकर शरीर की सभी कोशिकाओं तक पहुँचाता है।
प्रश्न 50. पौधे के शरीर में पोषण कैसे होता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)
उत्तर— पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा वातावरणीय एवं जल को क्लोरोफिल की उपस्थिति में कार्बोहाइड्रेट में बदल देते हैं।
प्रकाश संश्लेषण की रासायनिक अभिक्रिया :
पौधे कार्बोहाइड्रेट का उपयोग कर जैव प्रक्रम हेतु ऊर्जा प्राप्त करते हैं तथा अतिरिक्त कार्बोहाइड्रेट को मण्ड के रूप में संचित करते हैं।
प्रश्न 51. वायवीय श्वसन के दौरान ग्लूकोज के विखण्डन को समझाइये। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)
उत्तर— वायवीय श्वसन के दौरान ग्लूकोज का विखण्डन-
(i) प्रथम चरण में छह कार्बन वाले ग्लूकोज अणु का विखण्डन तीन कार्बन वाले अणु पायरुवेट में होता है। यह प्रक्रम कोशिकाद्रव्य में होता है।
(ii) पायरुवेट का विखण्डन ऑक्सीजन का उपयोग करके माइटोकॉण्ड्रिया में होता है। इस प्रक्रम में तीन कार्बन वाले पायरुवेट अणु के विखण्डन से तीन कार्बन डाइऑक्साइड के अणु प्राप्त होते हैं तथा दूसरा उत्पाद जल होता है।
प्रश्न 52. वृक्काणु की संरचना का नामांकित चित्र बनाइए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर—
[वृक्काणु (Nephron) की संरचना का नामांकित चित्र]

चित्र—एक वृक्काणु की रचना
प्रश्न 53. पादप में रन्ध्र के क्या कार्य हैं? रन्ध्र के खुलने व बन्द होने की क्रियाविधि का चित्र बनाइए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर—
[रन्ध्र (Stomata) का चित्र जिसमें (a) खुला रन्ध्र और (b) बन्द रन्ध्र दर्शाया गया है]

चित्र-(a) खुला तथा (b) बन्द रन्ध्र
प्रश्न 54. लाल रुधिर कणिकाओं का निर्माण और विनाश कहाँ होता है व श्वेत रक्त कणिकाओं का क्या कार्य है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— लाल रुधिर कणिकाओं का निर्माण 'अस्थि मज्जा' में तथा विनाश 'प्लीहा' में होता है।
श्वेत रक्त कणिकाओं का कार्य—ये भक्षकाणु का कार्य करती है तथा प्रतिरक्षियों का निर्माण करती है।
दीर्घउत्तरीय प्रश्न-
प्रश्न 1. रन्ध्र किसे कहते हैं? इनके खुलने एवं बन्द होने की क्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर— रन्ध्र (Stomata)—पर्ण की अधिचर्म पर अनेक छोटे-छोटे छिद्र पाये जाते हैं, जिन्हें रन्ध्र कहते हैं। प्रकाशसंश्लेषण के लिए गैसों का अधिकांश आदान-प्रदान इन्हीं छिद्रों के द्वारा होता है। इन रन्ध्रों से पर्याप्त मात्रा में जल की हानि होती है अतः जब प्रकाशसंश्लेषण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड ( ) की आवश्यकता नहीं होती है तब पौधा इन छिद्रों को बन्द कर लेता है।
छिद्रों का खुलना और बन्द होना द्वार कोशिकाओं (Guard cells) पर निर्भर करता है। प्रत्येक द्वार/रक्षक कोशिका की बाह्य भित्ति पतली तथा भीतरी भित्ति मोटी होती है। द्वार कोशिकाओं में जब जल अंदर जाता है तो वे फूल जाती हैं और रन्ध्र का छिद्र खुल जाता है। इसी तरह जब द्वार कोशिकाएं सिकुड़ती हैं तो छिद्र बन्द हो जाता है।
[रन्ध्र का संरचनात्मक चित्र (खुला रन्ध्र और बन्द रन्ध्र)]

चित्र-रन्ध्र
प्रश्न 2. मानव के श्वसन तन्त्र का नामांकित चित्र बनाकर वर्णन कीजिए।
उत्तर— मनुष्य में, वायु शरीर के अंदर नासाद्वार द्वारा जाती है। नासाद्वार द्वारा जाने वाली वायु मार्ग में उपस्थित महीन बालों द्वारा निस्पंदित हो जाती है जिससे शरीर में जाने वाली वायु धूल तथा दूसरी अशुद्धियाँ रहित होती हैं। इस मार्ग में श्लेष्मा की परत होती है जो इस प्रक्रम में सहायक होती है। यहाँ से वायु कंठ द्वारा फुफ्फुस में प्रवाहित होती है। कंठ में उपास्थि के वलय उपस्थित होते हैं जो यह सुनिश्चित करते हैं कि वायु मार्ग निपतित न हो।
फुफ्फुस के अंदर मार्ग छोटी और छोटी नलिकाओं में विभाजित हो जाता है।
[मानव श्वसन तन्त्र का नामांकित चित्र जिसमें नासाद्वार, ग्रसनी, कंठ, श्वासनली, फुफ्फुस, पसलियाँ, डायाफ्राम, कूपिका आदि दर्शाए गए हैं]

चित्र-मानव का श्वसन तन्त्र
जो अंत में गुब्बारे जैसी रचना में अंतकृत हो जाता है जिसे कूपिका कहते हैं। कूपिका एक सतह उपलब्ध कराती है जिससे गैसों का विनिमय हो सकता है। कूपिकाओं की भित्ति में रुधिर वाहिकाओं का विस्तीर्ण जाल होता है।
प्रश्न 3. वाष्पोत्सर्जन को परिभाषित कीजिए। प्रयोग द्वारा वाष्पोत्सर्जन की क्रिया को चित्र बनाकर समझाइए।
उत्तर-वाष्पोत्सर्जन- सबसे पहले एक अच्छी तरह से सींचा गया गमले में लगा पौधा लेते हैं। पूरे गमले और मिट्टी के भाग को पॉलीथीन से इस प्रकार लपेट देते हैं कि गमले की मिट्टी के जल का वाष्पीकरण न हो सके। अब इस गमले को एक काँच की समतल प्लेट पर रखकर बेलजार से ढक देते हैं। देखिए सामने चित्र में।
[पौधों में वाष्पोत्सर्जन का प्रदर्शन]

बेलजार और काँच की प्लेट के मध्य दरारों पर वैसलीन लगा देते हैं जिससे बाहर की नम हवा अन्दर न जा सके। अब इस उपकरण को धूप में रख दिया जाता है। इस प्रयोग का कुछ समय पश्चात् अवलोकन करने पर हमें जल की छोटी-छोटी बूंदें बेलजार की भीतरी सतह पर दिखाई देती हैं। ये पानी की बूंदें उस वाष्प से बनी होती हैं जो पौधे के वायवीय भागों से वाष्पोत्सर्जित हुआ होता है। इससे सिद्ध होता है कि पौधों में वाष्पोत्सर्जन क्रिया होती है।
प्रश्न 4. पाचन किसे कहते हैं? आमाशय में होने वाली पाचन क्रिया का वर्णन कीजिए।
उत्तर-पाचन (Digestion)- जटिल पोषक पदार्थों को जल अपघटन द्वारा सरल पोषक पदार्थों में बदलने की क्रिया को पाचन कहते हैं।
आमाशय में पाचन- आमाशय में भोजन पहुँचने पर इसकी क्रमाकुंचन क्रिया से भोजन की लुगदी बन जाती है जिसे काइम कहते हैं। आमाशय की दीवारों में उपस्थित जठर ग्रन्थियाँ जठर रस का स्रावण करती हैं। जठर रस में , प्रोटीन पाचक एंजाइम पेप्सिन और श्लेष्मा होता है। अम्ल निष्क्रिय पेप्सिनोजन को सक्रिय पेप्सिन में बदलता है तथा भोजन के साथ आये जीवाणु
एवं सूक्ष्म जीवों को मारता है। यह भोजन को सड़ने से बचाता है तथा आमाशय में भोजन का माध्यम क्षारीय से अम्लीय बनाता है।
पेप्सिन एंजाइम प्रोटीन को प्रोटीओजेज तथा पेप्टोन्स में बदल देता है।
जठर रस में उपस्थित रेनिन एंजाइम प्रोरेनिन के रूप में स्रावित होता है जो के प्रभाव से सक्रिय रेनिन में बदल जाता है। रेनिन दूध को
कैसीन प्रोटीन को अघुलनशील कैल्शियमपैराकैसीनेट में बदला जाता है। आमाशय में भोजन (काइम) तीन चार घण्टे तक रहता है। उसके पश्चात् पाइरोलिक कपाट थोड़ी-थोड़ी देर में खुलता रहता है एवं काइम ग्रहणी में प्रवेश करता है।
प्रश्न 5. (अ) रुधिर के किन्हीं दो अवयवों का उल्लेख कीजिए।
(ब) शरीर में ऑक्सीजन-प्रचुर रुधिर के गमन का पथ लिखिए।
(स) आलिन्द और निलय के बीच वाल्वों का कार्य लिखिए।
(द) धमनी और शिरा के संघटकों के बीच कोई एक संरचनात्मक अन्तर लिखिए।
उत्तर-(अ) रुधिर के दो अवयव निम्न हैं-
(i) लाल रुधिर कणिकाएं (RBC), (ii) श्वेत रुधिर कणिकाएं (WBC)
(ब) शरीर में ऑक्सीजन-प्रचुर रुधिर सबसे पहले बायें आलिन्द में एकत्र होता है। फिर रक्त बायें आलिन्द से बायें निलय में प्रवेश करता है। इस दौरान बायां आलिन्द संकुचित हो जाता है तथा बायां निलय शिथिल हो जाता है। बायें निलय की भित्ति मोटी होती है, अतः जब यह संकुचित होता है तो ऑक्सीजनित रुधिर धमनियों द्वारा शरीर के सम्पूर्ण अंग तंत्रों तक पहुँच जाता है।
बायां आलिन्द बायां निलय महाधमनी-धमनियां अंगों तक
(स) आलिन्द और निलय के बीच वाल्व (कपाट) रुधिर के वापस प्रवाह को रोकता है।
(द) धमनियों की भित्ति मोटी, मजबूत व लचीली होती है क्योंकि हृदय रुधिर को अधिक दाब से प्रवाहित करता है, जिससे धमनियों पर दबाव पड़ता है। शिराओं की भित्ति पतली होती है।
प्रश्न 6. निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
उत्तर- (अ) पौधों में परिवहन वाष्पोत्सर्जन पर निर्भर करता है और वाष्पोत्सर्जन क्रिया दिन में तेजी से होती है क्योंकि जब रन्ध्र खुले होते हैं तब वाष्पोत्सर्जन कर्षण, जाइलम में जल की गति के लिए मुख्य प्रेरक बल होता है।
(ब) दिन में जाइलम में जल और खनिजों की गति रात्रि की तुलना में अधिक होती है क्योंकि दिन में रन्ध्र खुले होते हैं और वाष्पोत्सर्जन कर्षण, जाइलम में जल की गति के लिए मुख्य प्रेरक बल होता है।
(स) आलिन्द की तुलना में निलय की पेशीय भित्तियाँ मोटी होती है क्योंकि निलय सम्पूर्ण शरीर में रुधिर भेजता है, जबकि आलिन्द विभिन्न अंगों से आये रुधिर को ग्रहण करता है। जिसके कारण आलिन्द में रुधिर दाब कम होता है।
प्रश्न 7. निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(i) दंतक्षरण क्या है?
(ii) रुधिर वाहिकाएँ किसे कहते हैं? धमनी, केशिका एवं शिरा में कोई चार अन्तर लिखिए।
उत्तर- (i) दंतक्षरण या दंतक्षय- दंतक्षरण या दंतक्षय इनैमल तथा डैटीन के शनैः-शनैः मृदुकरण के कारण होता है। इसका प्रारम्भ होता है जब जीवाणु शर्करा पर क्रिया करके अम्ल बनाते हैं। तब इनैमल मृदु या विखनिजीकृत हो जाता है। अनेक जीवाणु कोशिका खाद्य कणों के साथ मिलकर दांतों पर चिपक कर दंतप्लाक बना देते हैं। प्लाक दांतों को ढक लेता है इसलिए लार अम्ल को उदासीन करने के लिए दंत सतह तक नहीं पहुँच पाती है। इससे पहले कि जीवाणु अम्ल पैदा करे भोजनोपरांत दांतों में ब्रश करने से प्लाक हट सकता है। यदि अनुपचारित रहता है तो सूक्ष्म जीव मज्जा में प्रवेश कर सकते हैं तथा जलन व संक्रमण कर सकते हैं।
(ii) रुधिर वाहिकाएँ- रुधिर को लाने-ले जाने वाली नलिकाओं को रुधिर वाहिकाएँ कहते हैं।
धमनी, केशिका और शिरा में अन्तर
क्र.सं. | धमनी | केशिका | शिरा |
1. | ये रुधिर को हृदय से दूर ले जाती है। | धमनियां शिराओं से जोड़ती है। रुधिर और ऊतकों के बीच पदार्थों का आदान-प्रदान यहीं होता है। | रुधिर को हृदय की ओर लाती है। |
2. | रुधिर तेजी से बहता है। | रुधिर की गति मंद होती है। | रुधिर मंद गति से बहता है। |
3. | अर्धचन्द्रकार कपाट नहीं होते हैं। | कपाट नहीं होते हैं। | कपाट पाये जाते हैं। |
4. | रुधिर का आयतन उच्च होता है। | रुधिर का आयतन कम होता है। | रुधिर आयतन में वृद्धि। |
प्रश्न 8. (i) मानव की श्वसन क्रिया की कार्यप्रणाली का वर्णन करें।
(ii) रक्त के दो कार्य लिखिए।
उत्तर- (i) मानव की श्वसन क्रिया- फुफ्फुस के अंदर मार्ग छोटी और छोटी नलिकाओं में विभाजित हो जाता है जो अंत में गुब्बारे जैसी रचना में अंतकृत हो जाता है जिसे कूपिका कहते हैं। कूपिका एक सतह उपलब्ध कराती है जिससे गैसों का विनिमय हो सकता है। कूपिकाओं की भित्ति में रुधिर वाहिकाओं का विस्तीर्ण जाल होता है।
जब हम श्वास अंदर लेते हैं, हमारी पसलियाँ ऊपर उठती हैं और हमारा डायाफ्राम चपटा हो जाता है, इसके परिणामस्वरूप वक्ष गुहिका बड़ी हो जाती है। इस कारण वायु फुफ्फुस के अंदर चूस ली जाती है और विस्तृत कूपिकाओं को भर लेती है।
भर लेती है। रुधिर शेष शरीर से कार्बन डाइऑक्साइड कूपिकाओं में छोड़ने के लिए लाता है। कूपिका रुधिर वाहिका का रुधिर कूपिका वायु से ऑक्सीजन लेकर शरीर की सभी कोशिकाओं तक पहुँचाता है। श्वास चक्र के समय जब वायु अंदर और बाहर होती है, फुफ्फुस सदैव वायु का अवशिष्ट आयतन रखते हैं जिससे ऑक्सीजन के अवशोषण तथा कार्बन डाइऑक्साइड के मोचन के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।
(ii) रक्त के कार्य-
(1) रक्त द्वारा पचे हुए पोषक पदार्थ शरीर के विभिन्न भागों तक ले जाये जाते हैं।
(2) लाल रुधिर कणिकाएं हीमोग्लोबिन द्वारा ऑक्सीजन व का परिवहन करती हैं।
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. (i) निःश्वसन के दौरान निकाली गई कार्बन डाइऑक्साइड गैस की मात्रा वायुमण्डल में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड गैस की मात्रा से अधिक होती है। समझाइए।
अथवा
प्रयोग द्वारा सिद्ध कीजिए कि श्वसन के दौरान हम कार्बन डाइऑक्साइड गैस बाहर निकालते हैं।
(ii) वायवीय तथा अवायवीय श्वसन में कोई दो अन्तर लिखिए।
उत्तर-(i) प्रयोग- एक परखनली में ताजा तैयार किया हुआ चूने का पानी लेते हैं। इस चूने के पानी में नलिका के द्वारा मुँह से निःश्वास द्वारा निकली वायु को चित्र (a) के अनुसार प्रवाहित करते हैं।
[श्वसन प्रयोग का चित्र]

हम देखते हैं कि परखनली में उपस्थित चूने का पानी तत्काल दूधिया (milky) हो जाता है।
अब एक दूसरी परखनली लेते हैं। इसमें भी ताजा तैयार किया हुआ चूने का पानी लेते हैं। चित्र (b) के अनुसार एक पिचकारी की सहायता से वायु को चूने के पानी युक्त परखनली में प्रवाहित करते हैं।
हम देखते हैं कि परखनली में उपस्थित चूने का पानी दूधिया रंग में परिवर्तित होने में अधिक समय लगता है।
इससे यह सिद्ध होता है कि निःश्वसन के द्वारा निकाली गई कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा वायु में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा से बहुत अधिक होती है। इसी कारण से परखनली (a) में उपस्थित चूने का पानी तत्काल दूधिया हो जाता है।
अतः हम कह सकते हैं कि श्वसन के दौरान हम गैस बाहर निकालते हैं।
(ii) वायवीय तथा अवायवीय श्वसन में अन्तर
क्र.सं. | वायवीय श्वसन | अवायवीय श्वसन |
1. | वायवीय श्वसन ऑक्सीजन की उपस्थिति में होती है। | जबकि यह ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है। |
2. | इसमें अपेक्षाकृत अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है। | इसमें अपेक्षाकृत कम ऊर्जा प्राप्त होती है। |
प्रश्न 2. (i) हृदय रुधिर को किस प्रकार से पम्प करता है? नामांकित चित्र द्वारा समझाइए।
(ii) धमनी व शिरा में दो अन्तर लिखिए।
उत्तर-(i) मानव का हृदय एक पम्प के समान कार्य करता है क्योंकि हृदय के दोनों पार्श्वी भाग (दायां भाग व बायां भाग) परस्पर सम्पर्क में नहीं होते हैं अतः हृदय एक साथ दो पम्पों के समान कार्य करता है। दोनों भाग स्वतन्त्र रूप से किन्तु एक साथ कार्य करते हैं।
ऑक्सीजन प्रचुर रुधिर फुफ्फुस से हृदय में बाईं ओर स्थित कोष्ठ-बायां आलिंद में आता है। इस रुधिर को एकत्रित करते समय बायां आलिंद शिथिल रहता है। जब अगला कोष्ठ, बायां निलय, फैलता है तब यह संकुचित होता है जिससे...
रुधिर इसमें स्थानांतरित हो जाता है। अपनी बारी पर जब पेशीय बायां निलय संकुचित होता है, तब रुधिर शरीर में पंपित हो जाता है।
ऊपर वाला दायां कोष्ठ (दायां आलिन्द) जब फैलता है तब शरीर से विऑक्सीजनित रुधिर इसमें आ जाता है। जैसे ही दायां आलिन्द संकुचित होता है, नीचे वाला संगत कोष्ठ, दायां निलय फैल जाता है। यह रुधिर को दाएं निलय में स्थानांतरित कर देता है जो रुधिर को ऑक्सीजनीकरण हेतु फुफ्फुस में पम्प कर देता है। आलिन्द की अपेक्षा निलय की पेशीय भित्ति मोटी होती है क्योंकि निलय को पूरे शरीर में रुधिर भेजना होता है। जब आलिन्द या निलय संकुचित होते हैं तो वाल्व उल्टी दिशा में रुधिर प्रवाह को रोकना सुनिश्चित करते हैं।
[ऑक्सीजनीकरण तथा कार्बन डाइऑक्साइड के परिवहन तथा विनिमय का व्यवस्थात्मक निरूपण]

(ii) धमनी व शिरा में अन्तर-
क्र.सं. | धमनी (Artery) | शिरा (Vein) |
1. | इनमें रुधिर दाब उच्च होता है। | जबकि इनमें रुधिर दाब कम होता है। |
2. | इनके भीतर कपाट नहीं होते हैं। | जबकि शिराओं के भीतर कपाट होते हैं। |
प्रश्न 3. (i) मानव के पाचन तंत्र का नामांकित चित्र बनाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2026)
(ii) पचे हुए भोजन को अवशोषित करने के लिए छोटी आंत के कार्य को समझाइए।
अथवा
(i) मानव में भोजन का पाचन किसे कहते हैं। मानव पाचन तंत्र का नामांकित चित्र बनाओ।
(ii) भोजन के पाचन में लार का एक कार्य बताओ। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)
उत्तर-(i) पाचन (Digestion)- जटिल पोषक पदार्थों को जल अपघटन द्वारा सरल पोषक पदार्थों में बदलने की क्रिया को पाचन कहते हैं।
मनुष्य में पाचन क्रिया- मनुष्य के पाचन तंत्र में एक लम्बी आहार नलिका होती है। इस आहार नाल के विभिन्न भागों में निम्न प्रकार से भोजन का पाचन होता है-
(1) मुख (Mouth)- प्राकृतिक रूप से भोजन को एक प्रक्रम से गुजरना होता है जिससे वह छोटे-छोटे कणों में बदल जाता है। इसे दांतों से चबाकर पूरा करते हैं। क्योंकि आहार नाल का आस्तर बहुत कोमल होता है, अतः भोजन को गीला किया जाता है ताकि इसका मार्ग आसान हो जाए। यह कार्य लाला ग्रंथि (लार ग्रंथि) द्वारा स्रावित लालारस/लार द्वारा किया जाता है। लार में एक एंजाइम होता है जिसे लार एमिलेस कहते हैं, यह मंद जटिल अणु को सरल शर्करा में खंडित कर देता है। भोजन को चबाने के दौरान पेशीय जिह्वा भोजन को लार के साथ पूरी तरह मिला देती है।
(2) ग्रसिका (Oesophagus)- आहार नली के हर भाग में भोजन की नियमित रूप से गति क्रमाकुंचन गति द्वारा होती है। इसी गति द्वारा मुँह से आमाशय तक भोजन ग्रसिका या इसोफेगस द्वारा ले जाया जाता है।
(3) आमाशय (Stomach)- आमाशय एक वृहत अंग है जो भोजन के आने पर फैल जाता है। आमाशय की पेशीय भित्ति भोजन को अन्य पाचक रसों के साथ मिश्रित करने में सहायक होती है। ये पाचन कार्य आमाशय की भित्ति में उपस्थित जठर ग्रंथियों के द्वारा संपन्न होते हैं। ये हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, एक प्रोटीन पाचक एंजाइम पेप्सिन तथा श्लेष्मा का स्राव करते हैं। हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एक अम्लीय माध्यम तैयार करता है जो पेप्सिन एंजाइम की क्रिया में सहायक होता है।
(4) छोटी आंत (Small Intestine)- आमाशय से भोजन अब क्षुद्रांत्र में प्रवेश करता है। यह अवरोधिनी पेशी द्वारा नियंत्रित होता है। क्षुद्रांत्र आहारनाल का सबसे लंबा भाग है, अत्यधिक कुंडलित होने के कारण यह संहत स्थान में अवस्थित होती है। विभिन्न जंतुओं में क्षुद्रांत्र की लंबाई उनके भोजन के प्रकार के अनुसार अलग-अलग होती है।
क्षुद्रांत्र कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन तथा वसा के पूर्ण पाचन का स्थल है। इस कार्य के लिए यह यकृत तथा अग्न्याशय से स्रावण प्राप्त करती है। आमाशय से आने वाला भोजन अम्लीय है और अग्न्याशयिक एंजाइमों की क्रिया के लिए उसे क्षारीय बनाया जाता है। यकृत से स्रावित पित्तरस इस कार्य को करता है। क्षुद्रांत्र में वसा बड़ी गोलिकाओं के रूप में होता है जिससे...
उस पर एंजाइम का कार्य करना मुश्किल हो जाता है। पित्त लवण उन्हें छोटी गोलिकाओं में खंडित कर देता है जिससे एंजाइम की क्रियाशीलता बढ़ जाती है।
अग्न्याशय अग्न्याशयिक रस का स्रावण करता है जिसमें प्रोटीन के पाचन के लिए ट्रिप्सिन एंजाइम होता है तथा इमल्सीकृत वसा का पाचन करने के लिए लाइपेज एंजाइम होता है।
क्षुद्रांत्र की भित्ति में ग्रंथि होती है जो आंत्र रस स्रावित करती है। इसमें उपस्थित एंजाइम अंत में प्रोटीन को अमीनो अम्ल, जटिल कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोस में तथा वसा को वसा अम्ल तथा ग्लिसरॉल में परिवर्तित कर देते हैं। पचित भोजन को आंत्र की भित्ति अवशोषित कर लेती है। क्षुद्रांत्र के आन्तरिक आस्तर पर अनेक अँगुली जैसे प्रवर्ध होते हैं जिन्हें दीर्घरोम कहते हैं, ये अवशोषण का सतही क्षेत्रफल बढ़ा देते हैं।
(5) बृहदांत्र (Large Intestine)-बिना पचा भोजन बृहदांत्र में भेज दिया जाता है जहाँ दीर्घरोम इन पदार्थों में से जल का अवशोषण कर लेते हैं। अन्य पदार्थ गुदा द्वारा शरीर के बाहर निकाल दिये जाते हैं।
मानव पाचन तंत्र का चित्र-
(ii) लार का कार्य- लार भोजन को गीला एवं चिकना करती है जिससे भोजन को चबाने तथा निगलने में आसानी होती है।
[मानव पाचन तंत्र]

प्रश्न 4. (i) मानव उत्सर्जन तंत्र का नामांकित चित्र बनाइए। रुधिर से नाइट्रोजनी उत्सर्जी पदार्थों को बाहर निकालने की क्रियाविधि को समझाइए।
(ii) लसिका के दो कार्य लिखिए।
अथवा
मानव उत्सर्जन तंत्र का नामांकित चित्र बनाते हुए, मूत्र निर्माण की प्रक्रिया को समझाइए।
उत्तर- (i) मूत्र बनाने का उद्देश्य रुधिर में से वर्ज्य पदार्थों को छानकर बाहर करना है। फुफ्फुस में रुधिर से अलग हो जाती है जबकि नाइट्रोजनी वर्ज्य पदार्थ, जैसे-यूरिया या यूरिक अम्ल वृक्क में रुधिर से अलग कर लिए जाते हैं। वृक्क में आधारी निस्यंदन एकक, फुफ्फुस की तरह ही, बहुत पतली भित्ति वाली रुधिर कोशिकाओं का गुच्छ होता है। वृक्क में प्रत्येक केशिका गुच्छ, एक नलिका के कप के आकार के सिरे के अंदर होता है। यह नलिका छने हुए मूत्र को एकत्र करती है।
प्रत्येक वृक्क में ऐसे अनेक निस्यंदन एकक होते हैं जिन्हें वृक्काणु (नेफ्रॉन) कहते हैं जो आपस में निकटता से पैक रहते हैं। प्रारंभिक निस्यंद में कुछ पदार्थ, जैसे-ग्लूकोस, अमीनो अम्ल, लवण और प्रचुर मात्रा में जल रह जाते हैं। जैसे-जैसे मूत्र इस नलिका में प्रवाहित होता है इन पदार्थों का चयनित पुनरावशोषण हो जाता है। जल की मात्रा पुनरावशोषण शरीर में उपलब्ध अतिरिक्त जल की मात्रा, पर तथा कितना विलेय वर्ज्य उत्सर्जित करना है, पर निर्भर करता है।
प्रत्येक वृक्क में बनने वाला मूत्र एक लंबी नलिका, मूत्रवाहिनी में प्रवेश करता है जो वृक्क को मूत्राशय से जोड़ती है। मूत्राशय में मूत्र भंडारित रहता है जब तक कि फैले हुए मूत्राशय का दाब मूत्रमार्ग द्वारा उसे बाहर न कर दे।
[मानव उत्सर्जन तंत्र]

प्रश्न 5. निम्न प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
उत्तर-
(i) डायलिसिस (अपोहन): कभी-कभी संक्रमण या उचित रुधिर आपूर्ति न होने या अन्य कारणों से वृक्क क्षतिग्रस्त होकर काम करना बंद कर देता है। ऐसी स्थिति में रुधिर में नाइट्रोजनी अपशिष्ट उत्पादों (यूरिया) की मात्रा बढ़ जाती है। रुधिर से इन नाइट्रोजनी अपशिष्ट उत्पादों को निकालने के लिए कृत्रिम वृक्कीय युक्ति अपनाई जाती है जिसे अपोहन (Dialysis) कहा जाता है।
अपोहन की क्रियाविधि (Mechanism of Dialysis): कृत्रिम वृक्क बहुत-सी अर्धपारगम्य आस्तर वाली नलिकाओं से युक्त होती है। ये नलिकाएँ अपोहन द्रव से भरी टंकी में लगी होती हैं। इस द्रव का परासरण दाब रुधिर जैसा ही होता है लेकिन इसमें नाइट्रोजनी अपशिष्ट नहीं होते हैं। रोगी के रुधिर को इन नलिकाओं से प्रवाहित कराते हैं। इस मार्ग में रुधिर से अपशिष्ट उत्पाद विसरण द्वारा अपोहन द्रव में आ जाते हैं। शुद्धिकृत रुधिर वापस रोगी के शरीर में पंपित कर दिया जाता है। यह वृक्क के कार्य के समान है लेकिन एक अन्तर है कि इसमें कोई पुनरावशोषण नहीं होता है।
(ii) अंगदान एक उदार कार्य है: अंगदान एक उदार कार्य है जिसमें किसी ऐसे व्यक्ति को अंगदान किया जाता है जिसका कोई अंग ठीक से कार्य न कर रहा हो। यह दानदाताओं और उनके परिवार वालों की सहमति द्वारा किया जा सकता है। अंग और ऊतक दान में दानदाता की उम्र व लिंग मायने नहीं रखता। प्रत्यारोपण किसी व्यक्ति के जीवन को बचा या बदल सकता है। ग्राही के अंग खराब अथवा बीमारी या चोट की वजह से क्षतिग्रस्त होने के कारण अंग प्रत्यारोपण आवश्यक हो जाता है। अंगदान में किसी एक व्यक्ति (दाता) के शरीर से शल्य चिकित्सा द्वारा अंग निकालकर किसी अन्य व्यक्ति (ग्राही) के शरीर में प्रत्यारोपित किया जाता है। सामान्य प्रत्यारोपण में कॉर्निया, गुर्दे, दिल, यकृत, आँत, अग्न्याशय, फेफड़े और अस्थिमज्जा शामिल हैं।
अधिकांशतः अंगदान व ऊतक दान दाता की मृत्यु के ठीक बाद होते हैं या जब डॉक्टर किसी व्यक्ति के मस्तिष्क को मृत घोषित करता है तब। लेकिन कुछ अंगों, जैसे- गुर्दे, यकृत का कुछ भाग, फेफड़े इत्यादि और ऊतकों का दान दाता के जीवित होने पर भी किया जा सकता है।
प्रश्न 6. जैव प्रक्रम किसे कहते हैं? जीवन का अनुरक्षण करने वाले महत्त्वपूर्ण/आवश्यक प्रक्रमों का वर्णन कीजिए।
उत्तर- जैव प्रक्रम (Life Process): वे सभी प्रक्रम जो सम्मिलित रूप से अनुरक्षण का कार्य करते हैं, जैव प्रक्रम कहलाते हैं।
जीवन का अनुरक्षण करने वाले आवश्यक प्रक्रमों का वर्णन निम्न प्रकार से है-
(1) पोषण (Nutrition): क्षति तथा टूट-फूट रोकने के लिए अनुरक्षण प्रक्रम की आवश्यकता होती है। अतः इसके लिए उन्हें ऊर्जा की आवश्यकता होगी। यह ऊर्जा एकल जीव में शरीर के बाहर से आती है। इसलिए ऊर्जा के स्रोत का बाहर से जीव के शरीर में स्थानांतरण के लिए कोई प्रक्रम होना चाहिए। इस ऊर्जा के स्रोत को हम भोजन तथा शरीर के अन्दर लेने के प्रक्रम को पोषण कहते हैं। यदि जीव में शारीरिक वृद्धि होती है तो इसके लिए उसे बाहर से अतिरिक्त कच्ची सामग्री की आवश्यकता होगी। क्योंकि पृथ्वी पर जीवन कार्बन आधारित अणुओं पर निर्भर है अतः अधिकांश खाद्य पदार्थ भी कार्बन आधारित हैं। इन कार्बन स्रोतों की जटिलता के अनुसार विविध जीव भिन्न प्रकार के पोषण प्रक्रम को प्रयुक्त करते हैं।
(2) श्वसन (Respiration): शरीर के अन्दर ऊर्जा के स्रोतों के विघटन या निर्माण की आवश्यकता होती है जिससे ये अन्ततः ऊर्जा के एकसमान स्रोत में परिवर्तित हो जाने चाहिए। यह विभिन्न आण्विक गतियों के लिए एवं विभिन्न जीव शरीर के अनुरक्षण तथा शरीर की वृद्धि के लिए आवश्यक अणुओं के निर्माण में उपयोगी है। इसके लिए शरीर के अन्दर रासायनिक क्रियाओं की एक श्रृंखला की आवश्यकता है। उपचयन-अपचयन अभिक्रियाएँ अणुओं के विघटन की कुछ सामान्य रासायनिक युक्तियाँ हैं। इसके लिए बहुत से जीव शरीर के बाहरी स्रोत से प्रयुक्त करते हैं। शरीर के बाहर से को ग्रहण करना तथा कोशिकीय आवश्यकता के अनुसार खाद्य स्रोत के विघटन में उसका उपयोग श्वसन कहलाता है।
(3) वहन-तन्त्र (Transportation): भोजन एवं ऑक्सीजन का अन्तर्ग्रहण कुछ विशिष्ट अंगों द्वारा ही होता है, परन्तु शरीर के सभी भागों को इनकी आवश्यकता होती है। इस स्थिति में भोजन एवं ऑक्सीजन को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए वहन-तन्त्र की आवश्यकता होती है।
(4) उत्सर्जन (Excretion): जब रासायनिक अभिक्रियाओं में कार्बन स्रोत तथा का उपयोग ऊर्जा प्राप्ति के लिए होता है, तब ऐसे उत्पाद भी बनते हैं जो शरीर की कोशिकाओं के लिए न केवल अनुपयोगी होते हैं बल्कि वे हानिकारक भी होते हैं।
भी हो सकते हैं। इन अपशिष्ट उपोत्पादों को शरीर से बाहर निकालना अतिआवश्यक होता है। इस प्रक्रम को उत्सर्जन कहते हैं।
प्रश्न 7. प्रयोग द्वारा सिद्ध कीजिए कि प्रकाश-संश्लेषण क्रिया के लिए क्लोरोफिल की उपस्थिति आवश्यक होती है।
उत्तर-प्रयोग- सबसे पहले हम एक क्रोटन की चित्तीदार पत्ती को पौधे से तोड़कर पेन्सिल या किसी और चीज से पत्ती के हरे और सफेद भागों पर निशान लगा लेते हैं। अब इस पत्ती को कुछ देर पानी में उबालते हैं। एक पेट्रीडिश में ऐल्कोहॉल को डालकर इसमें उबाली गई पत्ती को डाल देते हैं। ऐल्कोहॉल में डालने से पत्ती में मौजूद क्लोरोफिल घुल जाता है और पत्ती रंगहीन हो जाती है। अब इस पत्ती को ऐल्कोहॉल से निकालकर अच्छी तरह से धो लेते हैं। अब इस पत्ती को एक ग्लास प्लेट के ऊपर रखते हैं और इसको आयोडीन के घोल से ढक देते हैं। थोड़ी देर बाद पत्ती को घोल से निकालकर और पानी से धोकर निरीक्षण करने से पता चलता है कि पत्ती के हरे रंग वाले भाग गहरे नीले रंग के हो जाते हैं, पर सफेद वाले भाग नीले नहीं होते हैं।
[पत्ती का मंड परीक्षण प्रयोग]

इसका कारण यह है कि पत्ती के हरे भाग में क्लोरोफिल मौजूद होने के कारण उनमें मंड (स्टार्च) का निर्माण होता है, इसलिए यह भाग आयोडीन घोल के कारण गहरे नीले हो जाते हैं क्योंकि आयोडीन घोल का यह गुण होता है कि यह मंड कणों (स्टार्च के कण) को नीला कर देता है। सफेद भागों में क्लोरोफिल न होने के कारण उनमें मंड या स्टार्च नहीं बनता, इसलिए वे भाग आयोडीन घोल के कारण नीले नहीं होते हैं। अतः यह सिद्ध होता है कि प्रकाश-संश्लेषण क्रिया के लिए हरितलवक (क्लोरोफिल) की उपस्थिति आवश्यक होती है।
प्रश्न 8. (i) हृदय का नामांकित चित्र बनाकर वर्णन कीजिए।
(ii) प्रंकुचन तथा अनुशिथिलन में दो अन्तर लिखिए।
उत्तर-(i) हृदय (Heart)- हृदय मनुष्य के वक्षगुहा में बायीं ओर स्थित होता है। यह गुलाबी रंग की एक पेशीय संरचना है जो मुट्ठी के माप का होता है। हृदय चार वेश्म में बंटा होता है। ऊपर के दो वेश्म आलिन्द (atrium) तथा नीचे के दो वेश्म निलय (Ventricle) कहलाते हैं। निलय की दीवारें आलिन्द की दीवारों की तुलना में मोटी भित्ति की होती हैं। प्रत्येक आलिन्द अपनी ओर के निलय में आलिन्द निलय छिद्र द्वारा खुलता है। इन छिद्रों में कपाट पाये जाते हैं। बायें आलिन्द तथा बायें निलय के बीच द्विवलनी कपाट तथा दायें आलिन्द तथा दायें निलय के बीच त्रिवलनी कपाट होता है। ये कपाट रक्त को विरुद्ध दिशा में जाने से रोकते हैं। दोनों आलिन्दों के बीच एक पट पाया जाता है जिसे अन्तर आलिन्दी पट कहते हैं। इसी प्रकार दोनों निलयों के बीच का पट अन्तर्निलयी पट कहलाता है। बायें निलय का संबंध अर्धचन्द्राकार कपाट द्वारा महाधमनी से तथा दायें निलय का संबंध अर्धचन्द्राकार कपाट द्वारा फुफ्फुसीय महाधमनी से होता है। दाएं आलिन्द से महाशिरा आकर मिलती है तथा बायें आलिन्द से फुफ्फुस (पल्मोनरी) शिरा आकर मिलती है।
[मानव हृदय का व्यवस्थात्मक काट दृश्य]

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(ii) प्रकुंचन तथा अनुशिथिलन में अन्तर
क्र.सं. | प्रकुंचन (Systole) | अनुशिथिलन (Diastole) |
1. | हृदय के सिकुड़ने को प्रकुंचन कहते हैं। | हृदय के फैलने को अनुशिथिलन कहते हैं। |
2. | प्रकुंचन के फलस्वरूप हृदय रुधिर को विभिन्न अंगों में भेजने हेतु प्रेषित करता है। | अनुशिथिलन के फलस्वरूप देह के विभिन्न भागों से लाया गया रुधिर हृदय में आता है। |
प्रश्न 9. (a) मानव में उत्सर्जन किसे कहते हैं? मानव उत्सर्जन तंत्र का नामांकित चित्र बनाओ।
(b) मानव में अपोहन (डायलिसिस) क्रिया को समझाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)
उत्तर-(a) उत्सर्जन (Excretion)- उपापचयी प्रक्रियाओं के फलस्वरूप निर्मित नाइट्रोजन मुक्त अपशिष्ट उत्पादों एवं अतिरिक्त लवणों को बाहर त्यागना उत्सर्जन कहलाता है। मानव उत्सर्जन तंत्र के चित्र हेतु निबंधात्मक प्रश्न नं. 4 का अवलोकन करें।
(b) अपोहन की क्रियाविधि हेतु निबंधात्मक प्रश्न नं. 5 के बिन्दु सं. (i) का अवलोकन करें।
प्रश्न 10. (i) वायवीय श्वसन को परिभाषित कीजिए।
(ii) मानव श्वसन तंत्र के वायु-मार्ग को समझाइए।
(iii) मानव श्वसन तंत्र का नामांकित चित्र बनाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)
उत्तर-(i) वायवीय श्वसन- ऑक्सीजन की उपस्थिति में होने वाले श्वसन को वायवीय श्वसन कहते हैं।
प्रश्न 11. (i) पाचन को परिभाषित कीजिए।
(ii) भोजन के पाचन में अग्न्याशयिक रस की भूमिका को समझाइए।
(iii) मानव के पाचन तंत्र (आहारनाल) की संरचना का नामांकित चित्र बनाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)
उत्तर-(i) पाचन (Digestion)- जटिल पोषक पदार्थों को जल अपघटन द्वारा सरल पोषक पदार्थों में बदलने की क्रिया को पाचन कहते हैं।
(ii) अग्न्याशयिक रस की पाचन में भूमिका- अग्न्याशय अग्न्याशयिक रस का स्रावण करता है। इस रस में तीन प्रकार के एंजाइम होते हैं-
(1) ट्रिप्सिन (Trypsin)- यह प्रोटीन पाचक एंजाइम है। जो पेप्टोन्स तथा प्रोटिओजेज को छोटे पेप्टाइड्स में परिवर्तित करता है।
(2) लाइपेज (Lipase)- यह वसा का पाचन करता है। वसा को वसीय अम्ल व ग्लिसरोल में परिवर्तित करता है।
(3) एमाइलेज (Amylase)- यह स्टार्च का पाचन करता है। स्टार्च को माल्टोज में बदल देता है।
(iii) मानव के पाचन तंत्र (आहारनाल) के चित्र हेतु निबंधात्मक प्रश्न नं. 3 का अवलोकन करें।
प्रश्न 12. (i) आमाशय से कौनसा अम्ल निकलता है?
(ii) आमाशय में अम्ल के दो कार्य लिखो। क्या होगा यदि आमाशय में श्लेष्मा का स्राव नहीं होगा? समझाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)
उत्तर-(i) आमाशय से अम्ल निकलता है।
(ii) आमाशय में अम्ल के दो कार्य-
आमाशय में श्लेष्मा का स्राव नहीं होने की स्थिति- सामान्य परिस्थितियों में श्लेष्मा आमाशय के आंतरिक आस्तर की हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से रक्षा करता है। इसलिए यदि आमाशय में श्लेष्मा का स्राव नहीं होगा तो आमाशय का आंतरिक आस्तर अम्ल द्वारा क्षतिग्रस्त हो जाएगा।
प्रश्न 13. (i) प्रकाश-संश्लेषण प्रक्रम के दौरान घटित घटनाओं को समझाइए।
(ii) एक पत्ती के अनुप्रस्थ काट का नामांकित चित्र बनाइए। (प्रश्न बैंक; माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)
उत्तर-(i) प्रकाश संश्लेषण के दौरान अग्रलिखित घटनाएँ होती हैं-
विज्ञान कक्षा-X 173
(i) क्लोरोफिल द्वारा प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करना।
(ii) प्रकाश ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में रूपान्तरित करना तथा जल अणुओं का हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन में अपघटन।
(iii) कार्बन डाइऑक्साइड का कार्बोहाइड्रेट में अपचयन।
(ii)
[एक पत्ती की अनुप्रस्थ काट]

चित्र-एक पत्ती की अनुप्रस्थ काट
प्रश्न 14. (i) पत्तियों में रंध्रों के खुलने व बंद होने की प्रक्रिया समझाइए।
(ii) खुले व बंद रंध्र का नामांकित चित्र बनाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)
उत्तर- (i) पत्तियों में छिद्रों का खुलना और बन्द होना द्वार कोशिकाओं (Guard cells) पर निर्भर करता है। प्रत्येक द्वार/रक्षक कोशिका की बाह्य भित्ति पतली तथा भीतरी भित्ति मोटी होती है।
द्वार कोशिकाओं में जब जल अन्दर जाता है तो वे फूल जाती हैं और रंध्र का छिद्र खुल जाता है। इसी तरह जब द्वार कोशिकाएँ सिकुड़ती हैं तो छिद्र बन्द हो जाता है।
(ii)
[(a) खुला तथा (b) बन्द रंध्र]

चित्र-(a) खुला तथा (b) बन्द रंध्र
प्रश्न 15. (i) अमीबा में पोषण की विधि को समझाइए।
(ii) अग्न्याशय द्वारा स्रावित प्रोटीन पाचक एंजाइम का नाम लिखिए।
(iii) क्षुद्रांत्र में पाये जाने वाले दीर्घरोमों का कार्य स्पष्ट कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)
उत्तर- (i) अमीबा में पोषण विधि—उत्तर हेतु लघूत्तरात्मक प्रश्न संख्या 2 का अवलोकन करें।
(ii) अग्न्याशय द्वारा स्रावित प्रोटीन पाचक एंजाइम—'ट्रिप्सिन'
(iii) दीर्घरोमों का कार्य—उत्तर हेतु लघूत्तरात्मक प्रश्न संख्या 19 का अवलोकन करें।
प्रश्न 16. (i) पैरामीशियम में पोषण की विधि को समझाइए।
(ii) मानव में जठरग्रन्थि द्वारा स्रावित प्रोटीन पाचक एंजाइम का नाम लिखिए।
(iii) बाघ की क्षुद्रांत्र की लम्बाई कम क्यों होती है? कारण स्पष्ट कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)
उत्तर—
(i) पैरामीशियम में पोषण विधि—उत्तर हेतु लघूत्तरात्मक प्रश्न संख्या 11 का अवलोकन करें।
(ii) मानव में जठरग्रन्थि द्वारा स्रावित प्रोटीन पाचक एंजाइम—'पेप्सिन'
(iii) विभिन्न जन्तुओं में क्षुद्रांत्र की लम्बाई उनके भोजन के प्रकार के अनुसार अलग-अलग होती है। मांस का पाचन सरल होता है इसलिए बाघ जैसे मांसाहारी की क्षुद्रांत्र छोटी होती है।
प्रश्न 17. (i) मानव पाचन तंत्र का नामांकित चित्र बनाइये।
(ii) आमाशय से उत्सर्जित अम्ल का नाम व कार्य बताइये।
(iii) शाकाहारी जन्तुओं में क्षुद्रांत्र की लम्बाई ज्यादा क्यों होती है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)
उत्तर—
(i) मानव पाचन तंत्र का नामांकित चित्र—चित्र हेतु निबंधात्मक प्रश्न नं.-3 का अवलोकन करें।
(ii) आमाशय की भित्ति में उपस्थित जठर ग्रन्थियों द्वारा हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ( ) का स्रावण किया जाता है। इस अम्ल की भूमिका निम्नलिखित है—
(e) यह लार में एमाइलेज की क्रिया को समाप्त करता है।
(f) एवं लोहे के अवशोषण में सहायता करता है।
(iii) विभिन्न जन्तुओं में क्षुद्रांत्र की लंबाई उनके भोजन के प्रकार के अनुसार अलग-अलग होती है। घास खाने वाले शाकाहारी के सेल्युलोज पचाने के लिए लंबी क्षुद्रांत्र की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 18. (i) मानव उत्सर्जन तंत्र का नामांकित चित्र बनाइये।
उत्तर—
(i) मानव उत्सर्जन तंत्र का नामांकित चित्र—चित्र हेतु निबंधात्मक प्रश्न संख्या 4 का अवलोकन करें।
(ii) वृक्क के कार्य—
(iii) डायलिसिस (अपोहन)—कभी-कभी संक्रमण या उचित रुधिर आपूर्ति न होने या अन्य कारणों से वृक्क क्षतिग्रस्त होकर काम करना बंद कर देता है। ऐसी स्थिति में रुधिर में नाइट्रोजन अपशिष्ट उत्पादों (यूरिया) की मात्रा बढ़ जाती है। रुधिर से इन नाइट्रोजनी अपशिष्ट उत्पादों को निकालने के लिए कृत्रिम वृक्कीय युक्ति अपनाई जाती है जिसे अपोहन (Dialysis) कहा जाता है।
प्रश्न 19. (i) मानव श्वसन तंत्र का नामांकित चित्र बनाइये।
(ii) मनुष्य में ऑक्सीजन व कार्बन डाईऑक्साइड का परिवहन कैसे होता है?
(iii) गैसों के विनिमय के लिए मानव फुफ्फुस में अधिकतम क्षेत्रफल को कैसे अभिकल्पित किया है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2025-26)
विज्ञान कक्षा-X 175
उत्तर—(i) श्वसन तंत्र का नामांकित चित्र के लिए पृष्ठ 164 पर प्रश्न संख्या 2 का अवलोकन करें।
प्रश्न 20. (i) मानव हृदय का नामांकित चित्र बनाइये।
(माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2025-26)
उत्तर—(i) चित्र हेतु निबंधात्मक प्रश्न 8 (i) का अवलोकन करें।
प्रश्न 21. (i) मानव के श्वसन तंत्र का नामांकित चित्र बनाइए।
(ii) गैसों के विनिमय के लिए मानव फुफ्फुस के कार्य को समझाइए।
(माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2026)
उत्तर—(i) मानव के श्वसन तंत्र का नामांकित चित्र—चित्र हेतु दीर्घ उत्तरीय प्रश्न नं. 2 का अवलोकन करें।
(ii) श्वास चक्र के समय जब वायु अन्दर और बाहर होती है, फुफ्फुस सदैव वायु का अवशिष्ट आयतन रखते हैं, जिससे ऑक्सीजन के अवशोषण तथा कार्बन डाइऑक्साइड ( ) के मोचन के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।