📖 1. समाधान: पाठगत एवं पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
राजस्थान बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान — सभी पाठगत (In-text) एवं अभ्यास (Exercise) प्रश्नों के सटीक एवं संपूर्ण हल।
पाठगत प्रश्न
पृष्ठ 117
प्रश्न 1. प्रतिवर्ती क्रिया तथा टहलने के बीच क्या अन्तर है?
उत्तर- प्रतिवर्ती क्रिया तथा टहलने के बीच अन्तर (Differences between Reflex Action and Walking)
क्र.सं. | प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex action) | टहलना (Walking) |
1. | यह अनैच्छिक क्रिया होती है। | यह ऐच्छिक क्रिया होती है। |
2. | इसमें मेरुरज्जु तथा मस्तिष्क दोनों भाग लेते हैं। | यह मस्तिष्क द्वारा नियंत्रित होती है। |
3. | प्रतिवर्ती क्रिया की तीव्रता (Intensity) को परिवर्तित नहीं किया जा सकता है। | परिवर्तित किया जा सकता है। |
4. | यह जीवन एवं सुरक्षात्मक महत्व रखती है। | जीवन एवं सुरक्षात्मक महत्व के अतिरिक्त विभिन्न कार्य करता है। |
प्रश्न 2. दो तंत्रिका कोशिकाओं (न्यूरॉन) के मध्य अंतर्ग्रथन (सिनेप्स) में क्या होता है?
उत्तर- एक्सॉन के अंत में विद्युत आवेग कुछ रसायनों का विमोचन करता है। ये रसायन रिक्त स्थान या सिनेप्स (सिनेप्टिक दरार) को पार करते हैं और अगली तंत्रिका कोशिका की द्रुमिका में इसी तरह का विद्युत आवेग प्रारंभ करते हैं।
प्रश्न 3. मस्तिष्क का कौनसा भाग शरीर की स्थिति तथा संतुलन का अनुरक्षण करता है?
उत्तर- मस्तिष्क का अनुमस्तिष्क (Cerebellum) भाग शरीर की स्थिति तथा संतुलन का अनुरक्षण करता है।
प्रश्न 4. हम अगरबत्ती की गंध का पता कैसे लगाते हैं?
उत्तर- हम अगरबत्ती की गंध का पता नासिका में स्थित घ्राण ग्राही (Olfactory receptors) द्वारा लगाते हैं। हमारी नाक के भीतर तंत्रिकाओं के सिरों के उत्तेजन से उत्पन्न संदेश मस्तिष्क के प्रमस्तिष्क भाग तक पहुँचता है जो अगरबत्ती की गंध का ज्ञान कराता है।
प्रश्न 5. प्रतिवर्ती क्रिया में मस्तिष्क की क्या भूमिका है?
उत्तर- सामान्यतया दैहिक प्रतिवर्ती क्रियाएँ मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित की जाती हैं तथापि मध्य मस्तिष्क सिर, गर्दन एवं धड़ की प्रतिवर्ती क्रियाओं का नियंत्रण करता है। पश्च मस्तिष्क का मस्तिष्क पुच्छ (medulla oblongata), हृदय स्पंदन, श्वास दर, खांसना, छींकना, लार श्रवण, रुधिर दाब, वमन, पसीना आदि क्रियाओं का नियमन करता है।
पृष्ठ 121
प्रश्न 1. पादप हार्मोन क्या हैं?
उत्तर- पादप हार्मोन (Phytohormones)- पौधों में उत्पन्न विशेष प्रकार के रासायनिक पदार्थ, जो पौधों की वृद्धि, विकास एवं अनुक्रियाओं का नियमन करते हैं, पादप हार्मोन कहलाते हैं। इन्हें वृद्धि नियामक (Growth regulators) भी कहते हैं।
पादपों में मुख्यतः पाँच प्रकार के हार्मोन पाए जाते हैं- (i) ऑक्सिन, (ii) जिब्बरेलिन, (iii) साइटोकाइनिन, (iv) एब्सिसिक अम्ल (v) इथाइलीन।
प्रश्न 2. छुई-मुई पादप की पत्तियों की गति, प्रकाश की ओर प्ररोह की गति से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर- छुई-मुई पादप की पत्तियों की गति एवं प्रकाश की ओर प्ररोह की गति में भिन्नता-
क्र.सं. | छुई-मुई पादप की पत्तियों की गति | प्रकाश की ओर प्ररोह की गति |
1. | स्पर्श करने पर छुई-मुई पादप की पत्तियों में गति होती है। | प्ररोह में गति प्रकाश के उद्दीपन से होती है। |
2. | इस प्रकार की गति को स्पर्शानुकुंचन कहते हैं। | जबकि इस प्रकार की गति को प्रकाशानुवर्तन (Phototropism) कहते हैं। |
3. | यह उद्दीपन की दिशा पर निर्भर नहीं होती है। | यह उद्दीपन की दिशा पर निर्भर करता है। |
4. | यह कोशिकाओं में से अचानक जल निकल जाने से उत्पन्न होती है। | यह प्ररोह की दोनों ओर असमान वृद्धि से उत्पन्न होती है। |
5. | यह वृद्धि गति नहीं है। | यह वृद्धि गति है। |
6. | यह तीव्र गति से होती है। | यह धीमी गति से होती है। |
7. | छुई-मुई पादप की पत्तियों की गति उत्क्रमणीय होती है। | जबकि प्रकाश की ओर प्ररोह की गति एक दिशा में होती है। |
प्रश्न 3. एक पादप हार्मोन का उदाहरण दीजिए जो वृद्धि को बढ़ाता है।
उत्तर- ऑक्सिन (Auxin) एक पादप हार्मोन है जो वृद्धि को बढ़ाता है।
प्रश्न 4. किसी सहारे के चारों ओर एक प्रतान की वृद्धि में ऑक्सिन किस प्रकार सहायक है?
उत्तर- प्रतान (Tendril) स्पर्श के प्रति संवेदनशील है अर्थात् स्पर्शानुवर्तन (Thigmotropism) गति प्रदर्शित करता है। जब ये किसी आधार के सम्पर्क में आता है, तो इसमें स्थित ऑक्सिन स्पर्श के दूसरी ओर विसरित हो जाता है, जिससे दूसरी ओर की कोशिकाएँ अधिक विवर्धन करने लगती हैं और प्रतान विपरीत दिशा में मुड़ जाता है। इस प्रकार प्रतान सहारे के चारों ओर कुंडलित होकर वृद्धि करता है।
प्रश्न 5. जलानुवर्तन दर्शाने के लिए एक प्रयोग की अभिकल्पना कीजिए।
उत्तर- जलानुवर्तन (Hydrotropism)- जब पौधे के किसी अंग की गति जल के उद्दीपन के कारण होती है तो इसे जलानुवर्तन गति कहते हैं। जड़ें नमी की ओर बढ़ती हैं, अतः इसे धनात्मक जलानुवर्ती (Positively hydrotropic) कहते हैं।
प्रयोग- एक गमला लेकर, उसके नीचे के छेद में कॉर्क लगा देते हैं और गमले को पानी से भर देते हैं। अब
[जलानुवर्तन का प्रदर्शन]

*(चित्र-जलानुवर्तन का प्रदर्शन)*
इसे बुरादा भरे एक बड़े बर्तन में रखते हैं तथा बुरादे में गमले से कुछ दूरी पर बीज बो देते हैं। हम देखते हैं कि कॉर्क द्वारा धीरे-धीरे बुरादे में पानी जाता है, जिससे बीज अंकुरित होने लगते हैं। अंकुरित होते हुए बीज की जड़ें गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव के विपरीत जल स्रोत की तरफ वृद्धि करती हैं। अतः स्पष्ट है कि जड़ें जलानुवर्तन गति प्रदर्शित करती हैं।
पृष्ठ 123
प्रश्न 1. जन्तुओं में रासायनिक समन्वय कैसे होता है?
उत्तर- जन्तुओं में रासायनिक समन्वय अन्तःस्रावी ग्रन्थियों द्वारा स्रावित हार्मोन द्वारा होता है। ये हार्मोन विशिष्ट ग्रन्थियों से स्रावित होते हैं तथा रासायनिक संदेशवाहकों के रूप में लक्ष्य कोशिकाओं में पहुँचते हैं और उनके कार्यों पर नियंत्रण एवं समन्वय करते हैं।
प्रश्न 2. आयोडीनयुक्त नमक के उपयोग की सलाह क्यों दी जाती है?
उत्तर- आयोडीनयुक्त नमक के उपयोग की सलाह इसलिए दी जाती है क्योंकि अवटु ग्रन्थि (थॉयराइड ग्रन्थि) को थायरॉक्सिन हार्मोन बनाने के लिए आयोडीन आवश्यक है। थायरॉक्सिन कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन तथा वसा के उपापचय का, हमारे शरीर में नियंत्रण करता है, ताकि वृद्धि के लिए उत्कृष्ट संतुलन उपलब्ध कराया जा सके। यदि हमारे आहार में आयोडीन की कमी होगी तो थायरॉक्सिन का संश्लेषण नहीं हो पायेगा और हम गॉइटर (Goiter) नामक रोग से ग्रसित हो जायेंगे।
इस बीमारी का लक्षण फूली हुई गर्दन या बाहर की ओर उभरे हुए नेत्र-गोलक हो सकते हैं। अतः इस रोग से बचने तथा शरीर में आयोडीन की कमी को दूर करने के लिए आयोडीनयुक्त नमक के उपयोग की सलाह दी जाती है।
प्रश्न 3. जब एड्रीनलीन रुधिर में स्रावित होती है तो हमारे शरीर में क्या अनुक्रिया होती है?
अथवा
एड्रीनलीन हार्मोन स्रावण से हमारे शरीर में क्या अनुक्रिया होती है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर- एड्रीनलीन (Adrenaline) हार्मोन सीधा रुधिर में स्रावित होता है एवं शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचा दिया जाता है। एड्रीनलीन हृदय सहित लक्ष्य अंगों या विशिष्ट ऊतकों पर कार्य करता है। परिणामस्वरूप हृदय की धड़कन बढ़ जाती है ताकि पेशियों को अधिक की आपूर्ति हो सके। पाचन तन्त्र तथा त्वचा में रुधिर की आपूर्ति कम हो जाती है क्योंकि इन अंगों की छोटी धमनियों के आसपास की पेशियाँ सिकुड़ जाती हैं। यह रुधिर की दिशा हमारी कंकाल पेशियों की ओर कर देता है।
डायाफ्राम तथा पसलियों की पेशी के संकुचन से श्वसन दर भी बढ़ जाती है। ये सभी अनुक्रियाएँ मिलकर शरीर को संकट से निपटने के लिए तैयार करती हैं।
प्रश्न 4. मधुमेह के कुछ रोगियों की चिकित्सा इंसुलिन का इंजेक्शन देकर क्यों की जाती है?
उत्तर- इंसुलिन हार्मोन का उत्पादन अग्न्याशय में होता है। यह रुधिर में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में सहायता करता है। यदि यह उचित मात्रा में स्रावित नहीं होता है तो रुधिर में शर्करा का स्तर बढ़ जाता है, जिस कारण शरीर पर अनेक हानिकारक प्रभाव पड़ते हैं।
इसलिए मधुमेह के कुछ रोगियों की चिकित्सक इंसुलिन का इंजेक्शन देते हैं ताकि रुधिर में शर्करा का स्तर नियंत्रित रह सके।
हार्मोन का स्रावण एक परिशुद्ध मात्रा में होना चाहिए। इसके लिए हमें एक क्रियाविधि की जरूरत है। इसमें स्रावित होने वाले हार्मोन का समय और मात्रा का नियंत्रण पुनर्भरण क्रियाविधि से किया जाता है। जैसे रुधिर में शर्करा के स्तर में वृद्धि होती है तो इसे अग्न्याशय की कोशिका संसूचित कर लेती है तथा इसकी अनुक्रिया में ज्यादा इंसुलिन स्रावित करती है। जब रुधिर में शर्करा स्तर कम हो जाता है तो इंसुलिन का स्रावण कम हो जाता है।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौन-सा पादप हार्मोन है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25; माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)
उत्तर-(d) साइटोकाइनिन।
प्रश्न 2. दो तंत्रिका कोशिका के मध्य खाली स्थान को कहते हैं- (प्रश्न बैंक)
उत्तर-(b) सिनेप्स।
प्रश्न 3. मस्तिष्क उत्तरदायी है-
उत्तर-(d) उपर्युक्त सभी।
प्रश्न 4. हमारे शरीर में ग्राही का क्या कार्य है? ऐसी स्थिति पर विचार कीजिए जहाँ ग्राही उचित प्रकार से कार्य नहीं कर रहे हों। क्या समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं?
उत्तर- हमारे शरीर में बाह्य वातावरण में होने वाले विभिन्न प्रकार के उद्दीपनों को ग्रहण करने के लिए विशेष प्रकार की संरचनाएँ पाई जाती हैं, जिन्हें ग्राही अंग या संवेदी अंग या ज्ञानेन्द्रियाँ (Sense organs) कहते हैं। ग्राही अंगों द्वारा उद्दीपनों को ग्रहण करने के पश्चात् संवेदी तंत्रिकाओं द्वारा केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र को पहुँचाया जाता है। हमें गंध का ज्ञान घ्राणग्राही द्वारा, स्वाद का ज्ञान स्वादग्राही द्वारा, स्पर्श का ज्ञान त्वक्ग्राही (त्वचा) द्वारा, ध्वनि तथा संतुलन का ज्ञान श्रवणोसन्तुलनग्राही द्वारा होता है।
यदि ग्राही अपना कार्य सामान्य रूप से नहीं करते हैं, तो उपर्युक्त संवेदनाओं को ग्रहण नहीं किया जा सकेगा, जिससे कभी-कभी विषम परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। जैसे-गर्म वस्तु पर हाथ लगने से यदि ताप की पीड़ा का उद्दीपन संवेदी तंत्रिकाओं द्वारा केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र को नहीं मिलेगा तो हाथ जल सकता है।
सामान्य स्थिति में प्रतिवर्ती क्रिया के फलस्वरूप गर्म वस्तु पर हाथ लगने पर ताप का उद्दीपन संवेदी तंत्रिका द्वारा मेरुरज्जु में पहुँचता है और चालक तंत्रिका द्वारा सम्बन्धित कार्यकारी पेशी को पहुँचा दिया जाता है। कार्यकारी पेशी में संकुचन के फलस्वरूप हाथ गर्म वस्तु से हट जाता है।
प्रश्न 5. एक तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) की संरचना बनाइए तथा इसके कार्यों का वर्णन कीजिए।
अथवा
तंत्रिका कोशिका का नामांकित चित्र बनाकर इसके कार्य लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर-
[तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) की संरचना]

चित्र-तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) की संरचना
तंत्रिका कोशिका- यह संदेशों का संवहन करने वाली मूल इकाई है। यह विशेष रूप से लम्बी होती है। एक तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) के द्रुमाकृतिक सिरे द्वारा सूचनाएँ उपार्जित की जाती हैं और एक रासायनिक क्रिया द्वारा यह एक विद्युत आवेग पैदा करती है। यह आवेग द्रुमिका से कोशिकाकाय (Cyton) तक जाता है और तब तंत्रिकाक्ष (Axon) में होता हुआ इसके अन्तिम सिरे तक पहुँच जाता है।
एक्सॉन के अन्त में विद्युत आवेग कुछ रसायनों का विमोचन करता है। ये रसायन रिक्त स्थान या सिनेप्स (Synapse) को पार करते हैं और अगली तंत्रिका कोशिका की द्रुमिका में इसी तरह का विद्युत आवेग प्रारम्भ करते हैं। इसी तरह का एक अंतर्ग्रथन (सिनेप्स) अन्ततः ऐसे आवेगों को तंत्रिका कोशिका से अन्य कोशिकाओं, जैसे कि पेशी कोशिकाओं या ग्रन्थि तक ले जाता है।
इस प्रकार कोई भी तंत्रिका कोशिका सीधी दूसरी तंत्रिका कोशिका से जुड़ी हुई नहीं होती है इनके मध्य कुछ रिक्त स्थान होता है, जिसमें बहुत सी सिनेप्स का संवहन होता है। इसे अन्तर्ग्रथन कहते हैं।
तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) के कार्य-
(i) ये उद्दीपनों को संवेदी अंग से मेरुरज्जु या मस्तिष्क तक ले जाती हैं।
(ii) ये कोशिकाएँ उद्दीपन या प्रेरणा संवहन के लिए विशिष्ट होती हैं।
(iii) तंत्रिकीय नियंत्रण द्वारा उन क्रियाओं का नियंत्रण तथा नियमन तुरन्त होता है।
(iv) अनुक्रिया का प्रसारण मेरुरज्जु या मस्तिष्क से कार्यकारी अंग की ओर यह द्रुत गति से करती है।
प्रश्न 6. पादप में प्रकाशानुवर्तन किस प्रकार होता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2025-26)
अथवा
पादपों में प्रकाशानुवर्तन गतियों को समझाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)
उत्तर- प्रकाशानुवर्तन (Phototropism)- पादप प्ररोह का प्रकाश की ओर गति करना प्रकाशानुवर्तन कहलाता है। प्ररोह तंत्र का प्रकाश के प्रति धनात्मक अनुवर्तन होता है और जड़ें ऋणात्मक अनुवर्तन दर्शाती हैं। जब वृद्धि करता पादप प्रकाश को संसूचित (detect) करता है, एक हॉर्मोन जिसे ऑक्सिन कहते हैं, प्ररोह के अग्रभाग (टिप) में संश्लेषित होता है तथा कोशिकाओं की लंबाई में वृद्धि में सहायक होता है। जब पादप पर एक ओर से प्रकाश आ रहा है तब ऑक्सिन विसरित होकर प्ररोह के छाया वाले भाग में आ जाता है। प्ररोह की प्रकाश से दूर वाली दिशा (साइड) में ऑक्सिन का सान्द्र कोशिकाओं की लंबाई में वृद्धि के लिए उद्दीपित करता है। अतः पादप प्रकाश की ओर मुड़ता हुआ दिखाई देता है।
प्रश्न 7. मेरुरज्जु आघात में किन संकेतों के आने में व्यवधान होगा?
उत्तर- मेरुरज्जु (Spinal cord) आघात में निम्न संकेतों के आने में व्यवधान होगा-
(1) संवेदी आवेगों को मस्तिष्क की ओर ले जाने हेतु मार्ग प्रदान करने में व्यवधान होगा।
(2) प्रेरक आवेगों को मस्तिष्क से ले जाने हेतु मार्ग प्रदान करने में व्यवधान होगा।
(3) ऐसी प्रतिवर्ती क्रियाओं (Reflex actions) के नियमन व संचालन में व्यवधान होगा जिनमें मस्तिष्क सम्बन्धित नहीं होता है।
प्रश्न 8. पादप में रासायनिक समन्वय किस प्रकार होता है?
उत्तर- पादप में रासायनिक समन्वय हॉर्मोन द्वारा होता है। पादपों में उद्दीपित कोशिकाएँ विभिन्न हॉर्मोन्स का स्रवण करती हैं। विभिन्न पादप हॉर्मोन वृद्धि, विकास तथा पर्यावरण के प्रति अनुक्रिया के समन्वय में सहायता करते हैं। इन हॉर्मोन का संश्लेषण का स्थान इनके क्रिया-क्षेत्र से दूर होता है और साधारण विसरण द्वारा वे क्रिया-क्षेत्र तक पहुँच जाते हैं। उदाहरण के लिए वृद्धि हॉर्मोन पादप प्ररोह के शीर्ष भाग में संश्लेषित होकर विभिन्न भागों में पहुँचता है, जो कि कोशिका प्रवर्धन, शीर्ष प्रभावन, जड़ों की वृद्धि में कमी उत्पन्न करता है।
इसी प्रकार साइटोकाइनिन हॉर्मोन कोशिका विभाजन को उत्प्रेरित करता है। एब्सिसिक अम्ल वृद्धि का संदमन करने वाला हॉर्मोन होता है। यह पतझड़ के मौसम में पत्तियों के गिरने की दर को बढ़ाता है। एथिलीन हॉर्मोन फलों को पकने में सहायता करता है।
प्रश्न 9. एक जीव में नियंत्रण एवं समन्वय के तंत्र की क्या आवश्यकता है?
उत्तर- जीवधारियों का शरीर कोशिकाओं का बना होता है। ये कोशिकाएँ समूह बनाते हुए विभेदित होकर ऊतक बनाती हैं और विभिन्न ऊतक मिलकर अंग बनाते हैं। विभिन्न अंग अपना-अपना कार्य सही समय पर करते हैं ताकि वे कारगर रूप में कार्य कर सकें। अतः जरूरी है कि उन पर किसी प्रकार का नियंत्रण हो ताकि वे समन्वय के साथ कार्य कर सकें।
उदाहरण के लिए, जब हम खाना खाते हैं तब हमारी आँखें देखती हैं कि भोजन कहाँ रखा हुआ है, नाक भोजन की गंध का पता लगा लेती है, हमारे हाथ भोजन को उठाकर मुँह में लाते हैं और हमारे जबड़ों की पेशियाँ दाँतों की सहायता करती हैं ताकि भोजन चबाया जा सके। ये सारे क्रियाकलाप एक समन्वित विधि से होते हैं और इनमें से कोई एक क्रियाकलाप किसी कारण नहीं हो पाता तो पोषण की प्रक्रिया में व्यवधान आ जाता है।
अतः जीव में नियंत्रण एवं समन्वय तंत्र की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 10. अनैच्छिक क्रियाएँ तथा प्रतिवर्ती क्रियाएँ एक-दूसरे से किस प्रकार भिन्न हैं?
उत्तर- अनैच्छिक एवं प्रतिवर्ती क्रियाओं में भिन्नता
क्र.सं. | अनैच्छिक क्रियाएँ (Involuntary Actions) | प्रतिवर्ती क्रियाएँ (Reflex Actions) |
1. | ये मध्य मस्तिष्क व पश्च मस्तिष्क (Autonomous nervous system) द्वारा नियंत्रित होती हैं। | ये क्रियाएँ मेरुरज्जु (केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र) (Central nervous system) द्वारा नियंत्रित होती हैं। |
2. | ये अचानक नहीं होती हैं। | ये अचानक होती हैं। |
3. | कभी-कभी उद्दीपन व अनुक्रिया के बीच गेप (Gap) होता है। | ये तुरन्त होती हैं अर्थात् इनमें गेप (Gap) नहीं होता है। |
4. | ये अनैच्छिक पेशियों (Smooth muscles) द्वारा होती हैं। | ये ऐच्छिक पेशियों तथा ग्रन्थियों द्वारा होती हैं। |
5. | ये बाह्य प्रतिबन्धों द्वारा प्रभावित नहीं होती हैं। | ये प्रतिबन्धित (Conditioned) हो सकती हैं। |
6. | ये शरीर के भीतरी अंगों में होती है। | ये बाहरी एवं चोटिल स्थान से नियंत्रित होती है। |
7. | उदाहरण-हृदय की क्रिया। | उदाहरण-सूई चुभ जाने पर हाथ को झटके से पीछे खींचना। |
प्रश्न 11. जन्तुओं में नियंत्रण एवं समन्वय के लिए तंत्रिका तथा हार्मोन क्रियाविधि की तुलना तथा व्यतिरेक (Contrast) कीजिए।
उत्तर- जन्तुओं में नियंत्रण एवं समन्वय के लिए तंत्रिका तथा हार्मोन क्रियाविधि की तुलना एवं व्यतिरेक निम्न प्रकार है-
क्र.सं. | तंत्रिका क्रियाविधि | हार्मोन क्रियाविधि |
1. | यह केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र, परिधीय तंत्रिका तंत्र के मध्य तंत्रिकीय आवेगों से मिलकर बनती है। | यह अन्तःस्रावी ग्रन्थियों द्वारा स्रावित हॉर्मोन्स से होती है। |
2. | इसमें प्रतिक्रिया समय अत्यन्त कम होता है। | इसमें प्रतिक्रिया समय लम्बा होता है। |
3. | तंत्रिकीय आवेग कार्य में विशिष्टीकृत नहीं होते हैं। | प्रत्येक हार्मोन का विशिष्ट कार्य होता है। |
4. | इसमें सूचना का प्रवाह तीव्र होता है। | इसमें सूचना का प्रवाह धीमी गति से होता है। |
5. | तंत्रिकीय आवेग का उत्पन्न होना उद्दीपन की उपस्थिति पर निर्भर करता है। | हार्मोन का स्रवण पुनर्भरण क्रियाविधि द्वारा नियंत्रित होता है। |
6. | इसके द्वारा वृद्धि एवं विकास का नियंत्रण अल्प होता है। | यह तंत्र वृद्धि एवं विकास को नियंत्रित करता है। |
7. | संवेदीग्राही उपस्थित | संवेदीग्राही अनुपस्थित |
प्रश्न 12. छुई-मुई पादप में गति तथा हमारी टाँग में होने वाली गति के तरीके में क्या अन्तर है?
उत्तर- छुई-मुई पादप में गति एवं हमारी टाँग में होने वाली गति में अन्तर
क्र.सं. | छुई-मुई पादप में गति | टाँग में गति |
1. | छुई-मुई पादप में गति आघात करने या स्पर्श करने के फलस्वरूप होती है। | टाँग में गति हमारी इच्छाशक्ति एवं आवश्यकता के अनुसार होती है। |
2. | इसमें सूचना स्थानान्तरण हेतु विशिष्ट ऊतक का अभाव होता है। | इसमें सूचना स्थानान्तरण हेतु तंत्रिकाएँ भाग लेती हैं अर्थात् तंत्रिकाएँ टाँग की गति के लिए संदेश लेकर जाती हैं। |
3. | यह गति पर्णवृन्ततल्प (पलवीनस) की मृदूतक कोशिकाओं के श्लथ (Flaccid) होने के कारण होती है। | टाँग को मोड़ना एवं फैलाना पेशियों की सहायता से किया जाता है। |
4. | छुई-मुई पादप में पाई जाने वाली गति को स्पर्शानुकुंचन गति कहते हैं। | टाँग में होने वाली गति को ऐच्छिक गति कहते हैं। |
5. | पादप कोशिकाओं में गति हेतु विशिष्ट प्रोटीन नहीं होते हैं। | पेशी कोशिकाओं में गति हेतु विशिष्ट प्रोटीन पाये जाते हैं। |
--- | ---
📝 2. नोट्स: पाठ सार (Key Concepts & Summary)
महत्वपूर्ण परिभाषाएं, रासायनिक समीकरण, नियम, सूत्र एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।
पाठ सार
(1) हमारे शरीर में नियंत्रण एवं समन्वय का कार्य तंत्रिका तंत्र तथा अन्तःस्रावी तंत्र द्वारा किया जाता है।
(2) बहुकोशिकीय जीवों में गति नियंत्रण एवं समन्वय तंत्रिका तथा पेशी ऊतक द्वारा किया जाता है।
(3) तंत्रिका तंत्र हमारी ज्ञानेन्द्रियों द्वारा सूचना प्राप्त करता है। यह कार्य ज्ञानेन्द्रियों में स्थित तंत्रिका कोशिकाओं के विशिष्टीकृत सिरों या ग्राहियों द्वारा किया जाता है।
(4) तंत्रिका ऊतक सूचनाओं को विद्युत आवेग के द्वारा शरीर के एक भाग से दूसरे भाग तक भेजता है।
(5) न्यूरोन्स (Neurons) - तंत्रिका तंत्र का निर्माण तंत्रिका कोशिकाओं अथवा न्यूरोन्स द्वारा होता है। यह तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है।
(6) न्यूरोन्स के तीन भाग होते हैं -
(i) कोशिकाकाय (सोमा) - यह कोशिका का प्रमुख भाग होता है। जिसमें एक केन्द्रक तथा कोशिकाद्रव्य पाया जाता है।
(ii) द्रुमिकाएँ (Dendrites) - ये सूचनाएँ उपार्जित करते हैं।
(iii) एक्सॉन (Axon) - जिससे होकर सूचनाएँ विद्युत आवेश की तरह यात्रा करती हैं।
(7) प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex action) - किसी गर्म वस्तु को छूने अथवा सुई या कांटा चुभने पर हम तुरन्त अपने हाथ व पैर को हटाते हैं। किसी उद्दीपन के प्रति इस प्रकार की अचानक होने वाली प्रतिक्रिया को प्रतिवर्ती क्रिया कहते हैं।
(8) प्रतिवर्ती क्रिया में भाग लेने वाली आगत तंत्रिका, निर्गत तंत्रिका तथा मेरुरज्जु मिलकर प्रतिवर्ती चाप बनाते हैं।
(9) मनुष्य में तंत्रिका तंत्र दो प्रकार का होता है -
(i) केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) - यह तंत्र दो अंगों मस्तिष्क (Brain) व मेरुरज्जु (Spinal Cord) से मिलकर बना होता है। ये शरीर के सभी भागों से सूचनाएँ प्राप्त करते हैं तथा इनका समाकलन करते हैं।
(ii) परिधीय तंत्रिका तंत्र (Peripheral Nervous System) - मस्तिष्क से निकलने वाली कपाल तंत्रिकाएँ तथा मेरुरज्जु से निकलने वाली मेरु तंत्रिकाएँ (Spinal nerves) मिलकर परिधीय तंत्रिका तंत्र का निर्माण करती हैं।
(10) परिधीय तंत्रिका तंत्र दो प्रकार का होता है -
(i) स्वायत्त तंत्रिका तंत्र, (ii) कायिक तंत्रिका तंत्र
(11) मनुष्य के मस्तिष्क को तीन भागों में विभेदित किया गया है -
(i) अग्र मस्तिष्क (Fore Brain) - मस्तिष्क का मुख्य सोचने वाला भाग है। इसमें विभिन्न ग्राही से संवेदी आवेग (सूचनाएँ) प्राप्त करने के लिए क्षेत्र होते हैं। अग्र मस्तिष्क के अलग-अलग क्षेत्र सुनने, सूंघने, देखने आदि के लिए विशिष्टीकृत हैं।
(ii) मध्य मस्तिष्क (Mid Brain) - अनेक अनैच्छिक क्रियाएँ नियंत्रित करता है।
(iii) पश्च मस्तिष्क (Hind Brain) - यह ऐच्छिक क्रियाओं की परिशुद्धि तथा शरीर की संस्थिति तथा संतुलन के लिए उत्तरदायी है।
(12) तंत्रिकाएँ (Nerves) - कार्य के आधार पर तीन प्रकार की होती हैं -
(i) संवेदी तंत्रिकाएँ (Sensory Nerves) - ऐसी तंत्रिकाएँ जो तंत्रिकीय आवेग को संवेदी अंगों से मस्तिष्क की ओर ले जाती हैं, संवेदी तंत्रिकाएँ कहलाती हैं।
(ii) प्रेरक तंत्रिकाएँ (Motor Nerves) - ऐसी तंत्रिकाएँ जो तंत्रिकीय आवेग को मस्तिष्क से अथवा मेरुरज्जु से अपवाहक अंगों (Effector organs) तक ले जाती हैं, उन्हें चालक या प्रेरक तंत्रिकाएँ कहते हैं।
विज्ञान कक्षा-X
177
(iii) मिश्रित तंत्रिकाएँ (Mixed Nerves) - ऐसी तंत्रिकाएँ जो संवेदी व प्रेरक दोनों के समान कार्य करती हैं, मिश्रित तंत्रिकाएँ कहलाती हैं।
(13) तंत्रिका आवेग (Nerve Impulse) - उद्दीपन के कारण तंत्रिका कोशिकाओं का उत्तेजित होना तंत्रिका आवेग कहलाता है।
(14) युग्मानुबंधन (Synaps) - वह सम्पर्क बिन्दु जो एक न्यूरॉन के एक्सॉन की अन्य शाखाओं एवं दूसरे न्यूरॉन के डेंड्राइटों के बीच बनता है। युग्मानुबंधन कहलाता है।
(15) उद्दीपक - वातावरण में परिवर्तन जिनके प्रति जीव प्रतिक्रिया दर्शाते हैं और सक्रिय रहते हैं, उद्दीपक कहलाते हैं। उद्दीपक के प्रति जीवों की अनुक्रिया प्राय: उनके शरीर अंग की किसी गति के रूप में होती है।
(16) मस्तिष्क हड्डियों के एक बॉक्स में अवस्थित होता है। बॉक्स के अन्दर तरलपूरित गुब्बारे में मस्तिष्क होता है जो प्रघात अवशोषक उपलब्ध कराता है। इसी प्रकार मेरुदण्ड मेरुरज्जु की सुरक्षा करता है।
(17) पादप दो भिन्न प्रकार की गतियाँ दर्शाते हैं -
(i) वृद्धि पर आश्रित गति (ii) वृद्धि से मुक्त गति।
(18) पादप कोशिकाएँ जल की मात्रा में परिवर्तन करके अपनी आकृति बदल लेती हैं, परिणामस्वरूप फूलने या सिकुड़ने में उनका आकार बदल जाता है।
(19) कंपानुकुंचनी गति - बलकृत उत्तेजना से यह गति होती है। माइमोसा पूडिका (छुई-मुई) के पर्ण वृन्त फूले हुए होते हैं, जिसे पर्णवृन्त तल्प कहते हैं। इनमें प्रेरक कोशिकाओं पर दाब पड़ते ही जल निकल जाने से, कोशिकाओं की स्फीत अवस्था समाप्त हो जाने से, श्लथ हो जाने से पत्तियाँ झुक जाती हैं। दाब हटने पर कुछ समय बाद यह वापस मूल अवस्था में आ जाती हैं।
(20) प्रकाश अनुवर्तन गति (Phototropism) - प्रकाश के प्रभाव से पादप अंग गति करते हैं। तना प्रकाश की ओर गति करता है अतः धनात्मक प्रकाश अनुवर्तक होता है। जड़ें प्रकाश से दूर की ओर गति करती हैं। अतः ऋणात्मक प्रकाश अनुवर्तक होती हैं।
(21) गुरुत्वानुवर्तन गति (Geotropism) - तना सदैव गुरुत्वाकर्षण से दूर अर्थात् ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्ती होता है जबकि जड़ें सदैव गुरुत्वाकर्षण बल की ओर वृद्धि करती हैं अतः धनात्मक गुरुत्वानुवर्ती होती हैं।
(22) जलानुवर्तन गति (Hydrotropism) - जड़ें सदैव जल की ओर अर्थात् धनात्मक जलानुवर्ती होती हैं परन्तु तना जल से दूर अर्थात् ऋणात्मक जलानुवर्ती होता है।
(23) स्पर्शानुवर्तन (Thigmotropism) - यह गति स्पर्श या सम्पर्क के कारण प्रेरित होती है। इससे पौधे का वह भाग जो स्पर्श में नहीं रहता, अधिक वृद्धि करता है, जैसे-मटर का प्रतान। प्रतान में वृद्धि के कारण कुंडली बन जाती है।
(24) रसायन अनुवर्ती गति (Chemotropism) - यदि गति रसायन उद्दीपन के कारण होती है, तो उसे रसायन अनुवर्ती गति कहते हैं। जैसे-पराग नली का बीजाण्ड की ओर वृद्धि करना।
(25) रासायनिक समन्वय पादप और जंतु दोनों में देखा जाता है।
(26) पादप हार्मोन (Phytohormones) - वृद्धि को नियंत्रित व संचालित करने वाले कुछ रासायनिक पदार्थ होते हैं जो पादपों के द्वारा संश्लेषित किए जाते हैं। इन रासायनिक पदार्थों को पादप हार्मोन कहते हैं। ये निम्न प्रकार के होते हैं-
(i) ऑक्सिन (ii) जिब्बेरेलिन (iii) साइटोकाइनिन
(27) वृद्धि निरोधक पदार्थ (Growth Inhibitor Substance) - पादप वृद्धि हार्मोन पौधों की वृद्धि को प्रेरित करते हैं, परन्तु कुछ ऐसे भी रसायन हैं जो वृद्धि को संदमित करते हैं। ऐसे पदार्थों को वृद्धि निरोधक पदार्थ कहते हैं। उदाहरण-एब्सिसिक अम्ल।
(28) अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ (Endocrine glands) - ये ग्रन्थियाँ अपना स्राव सीधे रक्त में छोड़ती हैं क्योंकि इनमें नलिका का अभाव होता है, इसलिए इन्हें नलिकाविहीन ग्रन्थियाँ भी कहते हैं। इन ग्रन्थियों के स्राव को हार्मोन कहते हैं।
(29) हार्मोन (Hormone) - ये अन्तःस्रावी ग्रन्थियों से स्रावित रासायनिक पदार्थ है जिसे सीधा रक्त में स्रावित किया जाता है। यह शरीर के विभिन्न अंगों में पहुँचकर कार्यों को प्रभावित करते हैं।
(30) मनुष्य की अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ - (i) पीयूष ग्रन्थि (ii) थाइरॉइड ग्रन्थि (iii) पैराथाइरॉइड ग्रन्थि (iv) अधिवृक्क या एड्रीनल ग्रन्थि (v) थाइमस ग्रन्थि (vi) पीनियल बॉडी (vii) लैंगरहैन्स की द्वीपिकाएँ (अग्न्याशय) (viii) वृषण एवं अण्डशय।
(31) पीयूष ग्रन्थि से निकलने वाले एक हार्मोन को वृद्धि हार्मोन (Growth Hormone) कहते हैं। यह हार्मोन शरीर की वृद्धि और विकास को नियंत्रित करता है। यदि बाल्यकाल में इस हार्मोन की कमी हो जाती है तो व्यक्ति बौना रह जाता है।
(32) वृषण एवं अण्डाशय (Testis and Ovary)- इनसे स्रावित होने वाले हार्मोन को क्रमशः नर हार्मोन (टेस्टोस्टेरॉन) एवं मादा हार्मोन (एस्ट्रोजन) कहते हैं। टेस्टोस्टेरॉन नर में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का विकास करता है जबकि एस्ट्रोजन मादा में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का नियमन करता है।
(33) थायराइड ग्रन्थि (Thyroid gland)- इसके द्वारा स्रावित हार्मोन थायरॉक्सिन कहलाता है। थायरॉक्सिन हार्मोन के संश्लेषण हेतु थायराइड ग्रन्थि को आयोडीन की आवश्यकता होती है। भोजन में आयोडीन की कमी से गॉइटर नामक रोग हो जाता है।
थायरॉक्सिन कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन तथा वसा के उपापचय पर नियंत्रण रखता है।
(34) इंसुलिन हार्मोन- इसका निर्माण लैंगरहेन्स के द्वीप (अग्न्याशय) के द्वारा किया जाता है। इस हार्मोन की कमी से मधुमेह रोग हो जाता है।
(35) हार्मोन की क्रिया को पुनर्भरण क्रियाविधि नियंत्रित करती है।
(36) हार्मोन जीव के एक भाग में उत्पन्न होते हैं तथा दूसरे भाग में इच्छित प्रभाव पाने के लिए गति करते हैं।
(37) एड्रीनल ग्रन्थि एक जोड़ी के रूप में पाई जाती है जो वृक्कों के ऊपर टोपी के रूप में पाई जाती है। इससे स्रावित हार्मोन का नाम एड्रीनेलीन है।
(38) एड्रीनेलीन हार्मोन के प्रभाव से हृदय स्पंदन दर, रुधिर दाब आधार उपापचय दर तथा रक्त में ग्लूकोज की मात्रा सब बढ़ जाते हैं। इस हार्मोन के प्रभाव से रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
⭐ 3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Important Questions)
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs), अतिलघूत्तरात्मक, लघूत्तरात्मक एवं निबंधात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
बहुविकल्पीय प्रश्न-
प्रश्न 1. कौन-सी अंतःस्रावी ग्रंथि रक्त में शर्करा स्तर का नियमन करती है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2026)
प्रश्न 2. रासायनिक समन्वय देखा जाता है— (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2025-26)
प्रश्न 3. तंत्रिका कोशिका से निकली छोटी-छोटी धागे जैसी शाखाओं को क्या कहते हैं?
प्रश्न 4. शरीर में नियंत्रण एवं समन्वय किसके द्वारा होता है— (प्रश्न बैंक)
प्रश्न 5. परिधीय तंत्रिका तंत्र किससे मिल के बना होता है— (प्रश्न बैंक)
प्रश्न 6. अण्डाशय की ओर परागनली की वृद्धि किस प्रकार की गति है—
प्रश्न 7. मटर के प्रतान आधार पर या सहारे से लिपट जाते हैं, यह किसका अच्छा उदाहरण है—
प्रश्न 8. छुई-मुई ( ) की पत्तियाँ छूने से लटक जाती हैं, क्यों?
प्रश्न 9. पत्तियों का मुरझाना निम्न में से किसके प्रभाव से होता है—
प्रश्न 10. फल एवं बीजों में निम्न में से किस हार्मोन की सान्द्रता अधिक होती है?
प्रश्न 11. मस्तिष्क का मुख्य सोचने वाला भाग है—
प्रश्न 12. प्रोह की प्रकाश की ओर गति किसके कारण होती है—
प्रश्न 13. एड्रीनल हॉर्मोन स्रावित किया जाता है—
प्रश्न 14. किस हॉर्मोन के निर्माण हेतु आयोडीन आवश्यक है—
प्रश्न 15. प्रतिवर्ती क्रिया है—
प्रश्न 16. आयोडीन की कमी से कौनसा रोग होने की सम्भावना है—
प्रश्न 17. कौनसा हॉर्मोन शरीर को लड़ने के लिए या भाग जाने के लिए तैयार करता है?
18. 'इंसुलिन' का कार्य है-
19. निम्न में से कौनसी अन्तःस्रावी ग्रन्थि है जिसकी आकृति के समान है जो मानव के गले/कंठ में स्थित होती है-
20. टेस्टोस्टेरोन तथा एस्ट्रोजन सम्बन्धित हैं-
21. मधुमेह रोग किस हार्मोन की कमी से होता है?
22. इंसुलिन हार्मोन स्रावित किया जाता है-
23. निम्नलिखित में से कौनसा पादप हार्मोन है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)
24. कोशिका विभाजन को कौनसा हार्मोन प्रेरित करता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)
25. अवटुग्रन्थि को थायरॉक्सिन हार्मोन बनाने के लिए आवश्यक है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022; प्रश्न बैंक)
26. सभी अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण मस्तिष्क का कौनसा भाग करता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022; प्रश्न बैंक)
27. अन्तःस्रावी ग्रन्थियों के स्राव कहलाते हैं-
28. अन्तःस्रावी ग्रन्थियां हैं-
29. निम्न में से बहिस्रावी ग्रन्थि है-
30. पीयूष ग्रन्थि पाई जाती है-
31. निम्न में से कौनसा पादप हार्मोन है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)
32. मस्तिष्क का कौनसा भाग शरीर की संस्थिति एवं संतुलन के लिए उत्तरदायी है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023; प्रश्न बैंक)
33. वृद्धि का संदमन करने वाले हार्मोन का उदाहरण है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)
34. एक न्यूरॉन में विद्युतीय संकेतों का रासायनिक संकेतों में परिवर्तन कहाँ पर होता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)
35. मानव में मस्तिष्क का कार्य है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)
36. कौनसी अन्तःस्रावी ग्रन्थि सभी अंगों में वृद्धि प्रेरित करती है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)
प्रश्न [37]. कौनसी अंतःस्रावी ग्रन्थि शरीर की वृद्धि के लिए उपापचय का नियमन करती है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)
प्रश्न [38]. सीधी रेखा में चलने के लिए मस्तिष्क का कौनसा भाग उत्तरदायी है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)
प्रश्न [39]. प्रतिवर्ती क्रिया का नियंत्रण होता है- (प्रश्न बैंक)
प्रश्न [40]. संरचना जो उद्दीपन की पहचान करती है- (प्रश्न बैंक)
प्रश्न [41]. मानव मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग है- (प्रश्न बैंक)
प्रश्न [42]. पराग नलिका का बीजांड की ओर वृद्धि करना किस प्रकार की गति का उदाहरण है- (प्रश्न बैंक)
प्रश्न [43]. आपातकालीन हार्मोन किसे कहते हैं- (प्रश्न बैंक)
प्रश्न [44]. तंत्रिका कोशिका का वह भाग जो सूचनाओं को उपार्जित करता है- (प्रश्न बैंक)
प्रश्न [45]. छुई मुई की पत्तियों में गति होती है- (प्रश्न बैंक)
उत्तर-तालिका
1. (द) | 2. (स) | 3. (अ) | 4. (स) | 5. (स) | 6. (द) | 7. (स) | 8. (द) | 9. (अ) | 10. (अ) | 11. (ब) |
12. (अ) | 13. (स) | 14. (ब) | 15. (अ) | 16. (स) | 17. (द) | 18. (ब) | 19. (अ) | 20. (स) | 21. (अ) | 22. (द) |
23. (अ) | 24. (द) | 25. (स) | 26. (अ) | 27. (स) | 28. (द) | 29. (द) | 30. (अ) | 31. (द) | 32. (स) | 33. (स) |
34. (ब) | 35. (द) | 36. (अ) | 37. (ब) | 38. (स) | 39. (ब) | 40. (अ) | 41. (अ) | 42. (ब) | 43. (ब) | 44. (अ) |
45. (स) |
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. तंत्रिका आवेगों का एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन तक संचरण .................... द्वारा होता है।
2. प्रतिवर्ती क्रियाओं का संचालन .................... द्वारा किया जाता है।
3. मधुमेह के मरीजों का .................... द्वारा सफलतापूर्वक उपचार किया जा सकता है।
4. बाल्यकाल में पीयूष ग्रन्थि के वृद्धि हार्मोन के अल्प स्रावण से व्यक्ति .................... रह जाता है।
5. हार्मोन की क्रिया को .................... क्रियाविधि नियंत्रित करती है। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)
6. मस्तिष्क एक हड्डियों के .................... में अवस्थित होता है।
7. अनैच्छिक क्रिया जैसे वमन पश्चमस्तिष्क में स्थित .................... द्वारा नियंत्रित होती है।
8. मादा हार्मोन को .................... कहते हैं।
9. शरीर के विभिन्न अंगों के समस्त कार्यों में संतुलन एवं सामंजस्य बनाकर शरीर पर नियंत्रण करने वाले तंत्र को .................... कहते हैं।
10. दो तंत्रिका कोशिका के मध्य खाली स्थान को .................... कहते हैं। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024) (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)
11. पादप में पत्तियों का मुरझाना .................... हार्मोन के प्रभाव से होता है। (प्रश्न बैंक)
12. पादप में साइटोकाइनिन हार्मोन .................... प्रेरित करता है। (प्रश्न बैंक)
13. .................... हार्मोन प्ररोह के अग्र भाग में संश्लेषित होता है जो पादप की लम्बाई में वृद्धि करता है। (प्रश्न बैंक)
14. धूसर द्रव्य .................... में पाया जाता है। (प्रश्न बैंक)
15. नर जनन ग्रन्थि वृषण से .................... हार्मोन स्रावित होता है। (प्रश्न बैंक)
16. सभी अन्तःस्रावी ग्रन्थियों के हार्मोन स्रावण के लिए .................... को मास्टर ग्रन्थि कहते हैं। (प्रश्न बैंक)
17. अन्तःस्रावी ग्रन्थियों द्वारा हार्मोन स्रावण की क्रिया को .................... क्रियाविधि से नियंत्रित किया जाता है। (प्रश्न बैंक)
18. तंत्रिका कोशिकाओं में सूचना संचरण .................... के रूप में होता है। (प्रश्न बैंक)
19. .................... के संगठित जाल से तंत्रिका ऊतक बना होता है। (प्रश्न बैंक)
20. .................... तथा .................... मिलकर केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र बनाते हैं। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)
उत्तर- 1. सिनेप्सिस, 2. मेरुरज्जु, 3. इन्सुलिन, 4. बौना, 5. पुनर्भरण, 6. बॉक्स, 7. मेड्यूला, 8. एस्ट्रोजन, 9. तंत्रिका तंत्र, 10. सिनेप्स (Synapse), 11. एब्सिसिक अम्ल, 12. कोशिका विभाजन, 13. ऑक्सिन, 14. मेरुरज्जु, 15. टेस्टोस्टेरोन, 16. पीयूष ग्रन्थि, 17. पुनर्भरण, 18. विद्युत आवेग, 19. तंत्रिका कोशिकाओं, 20. मस्तिष्क, मेरुरज्जु।
निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए-
(i)
कॉलम- I | कॉलम- II |
(a) मेड्यूला | (i) साइकिल चलाना |
(b) अनुमस्तिष्क | (ii) लार आना |
(c) अग्रस्तिष्क | (iii) एक्सॉन |
(d) न्यूरॉन | (iv) सोचने का केन्द्र |
उत्तर- (a) (ii), (b) (i), (c) (iv), (d) (iii)
(ii)
कॉलम- I | कॉलम- II |
(a) नर हार्मोन | (i) मेरु तंत्रिकाएँ |
(b) मादा हार्मोन | (ii) इन्सुलिन |
(c) मधुमेह | (iii) टेस्टोस्टेरोन |
(d) मेरुरज्जु | (iv) एस्ट्रोजन |
उत्तर- (a) (iii), (b) (iv), (c) (ii), (d) (i)
(iii)
कॉलम- I | कॉलम- II |
(a) ऑक्सिन | (i) पत्तियों का मुरझाना |
(b) साइटोकाइनिन | (ii) शीर्ष प्रमुखता |
(c) जिब्बेरेलिन | (iii) कोशिका विभाजन |
(d) एब्सिसिक अम्ल | (iv) पुष्पन को प्रेरित |
उत्तर- (a) (ii), (b) (iii), (c) (iv), (d) (i)
(iv)
कॉलम- I | कॉलम-II |
(a) थायरॉक्सिन | (i) पीयूष ग्रन्थि |
(b) वृद्धि हार्मोन | (ii) थायराइड ग्रन्थि |
(c) एड्रीनलीन | (iii) अग्न्याशय |
(d) इन्सुलिन | (iv) अधिवृक्क ग्रन्थि |
उत्तर-(a) (ii), (b) (i), (c) (iv), (d) (iii)
(v) सुमेलित कीजिए- ( प्रश्न बैंक )
हार्मोन | कार्य |
(A) वृद्धि हार्मोन | (i) शरीर की वृद्धि व विकास का नियंत्रण |
(B) एड्रीनलीन | (ii) शरीर को संकटकालीन स्थिति का सामना करना |
(C) थायरॉक्सिन | (iii) उपापचयी क्रियाओं का नियंत्रण |
(D) इन्सुलिन | (iv) रुधिर में शर्करा स्तर का नियंत्रण |
(E) मिलेटोनिन | (v) दैनिक लय गति का नियंत्रण |
उत्तर-(A) (i), (B) (ii), (C) (iii), (D) (iv), (E) (v)
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. आयोडीन युक्त नमक के उपयोग की सलाह क्यों दी जाती है?
(माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2025-26)
उत्तर- आयोडीनयुक्त नमक के उपयोग की सलाह इसलिए दी जाती है क्योंकि अवटु ग्रन्थि (थायराइड ग्रन्थि) को थायरॉक्सिन हार्मोन बनाने के लिए आयोडीन आवश्यक है। थायरॉक्सिन कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन तथा वसा के उपापचय का, हमारे शरीर में नियंत्रण करता है, ताकि वृद्धि के लिए उत्कृष्ट संतुलन उपलब्ध कराया जा सके। यदि हमारे आहार में आयोडीन की कमी होगी तो थायरॉक्सिन का संश्लेषण नहीं हो पायेगा और हम गॉइटर (Goiter) नामक रोग से ग्रसित हो जायेंगे।
प्रश्न 2. अधिवृक्क ग्रन्थि से कौनसा हार्मोन स्रावित होता है? हार्मोन का एक कार्य लिखिए।
उत्तर- अधिवृक्क ग्रन्थि से एड्रीनलीन हार्मोन स्रावित होता है।
हार्मोन का कार्य- हार्मोन कोशिकाओं के कार्यों पर नियंत्रण रखते हुए समन्वय स्थापित करता है।
प्रश्न 3. पादपों में कौन-सा हार्मोन कोशिका विभाजन को प्रेरित करता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2026)
उत्तर- साइटोकाइनिन (Cytokinin)।
प्रश्न 4. मानव शरीर का मुख्य समन्वय केंद्र कौन सा अंग है?
उत्तर- मस्तिष्क शरीर का मुख्य समन्वय केंद्र है।
प्रश्न 5. केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र का मुख्य कार्य क्या है?
उत्तर- यह शरीर के सभी भागों से सूचनाएँ प्राप्त कर उनका समाकलन करता है।
प्रश्न 6. प्रतिवर्ती क्रिया को परिभाषित करें तथा कोई एक उदाहरण लिखिए।
उत्तर- किसी उद्दीपन के कारण अपने आप शीघ्रता से होने वाली अनैच्छिक क्रियाएँ, प्रतिवर्ती क्रिया कहलाती हैं। जैसे- तेज प्रकाश में अचानक आँखों का बन्द होना।
प्रश्न 7. इन्सुलिन हार्मोन की कमी से रुधिर के ग्लूकोज स्तर पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर- ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है, जिससे मधुमेह नामक रोग हो जाता है।
प्रश्न 8. कौनसा हार्मोन रुधिर में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है?
उत्तर- इन्सुलिन हार्मोन।
प्रश्न 9. मानव शरीर में पाई जाने वाली कौनसी ग्रन्थि अन्तःस्रावी और बहिःस्रावी दोनों हैं?
उत्तर- अग्न्याशय (Pancreas)।
प्रश्न 10. पश्च मस्तिष्क के उस भाग का नाम बताइए जो श्वसन को नियंत्रित करता है।
उत्तर- मेड्यूला ऑबलांगेटा (Medulla oblongata)।
प्रश्न 11. ऐसी दो गतियों के उदाहरण दीजिए जो वृद्धि से सम्बन्धित नहीं हैं।
उत्तर- (i) जुगाली करती भैंस (ii) एक दौड़ती बिल्ली।
प्रश्न 12. हमारे शरीर में पाई जाने वाली किन्हीं दो ज्ञानेन्द्रियों के नाम लिखिए।
उत्तर- (i) नाक (ii) जिह्वा।
प्रश्न 13. मस्तिष्क तथा मेरुरज्जु मिलकर कौनसे तंत्रिका तंत्र का निर्माण करते हैं?
उत्तर- मस्तिष्क तथा मेरुरज्जु मिलकर केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र (Central nervous system) का निर्माण करते हैं।
प्रश्न 14. मस्तिष्क से निकलने वाली तंत्रिकाएँ क्या कहलाती हैं?
उत्तर- मस्तिष्क से निकलने वाली तंत्रिकाएँ कपाल तंत्रिकाएँ (Cranial nerves) कहलाती हैं।
प्रश्न 15. मस्तिष्क के तीन भागों के नाम लिखिए।
उत्तर- (i) अग्र मस्तिष्क (Fore Brain) (ii) मध्य मस्तिष्क (Mid Brain) (iii) पश्च मस्तिष्क (Hind Brain)।
प्रश्न 16. पादप किस प्रकार की गतियाँ दर्शाते हैं?
उत्तर- पादप दो भिन्न प्रकार की गतियाँ दर्शाते हैं- एक वृद्धि पर आश्रित और दूसरी वृद्धि से मुक्त।
प्रश्न 17. पादपों में वृद्धि से मुक्त होने वाली किसी एक गति का उदाहरण दीजिए।
उत्तर- छुई-मुई के पौधे की पत्तियों में होने वाली स्पर्शानुकंचन गति।
प्रश्न 18. पादपों में हॉर्मोन का संचरण किस प्रकार होता है?
उत्तर- पादपों में हॉर्मोन साधारण विसरण द्वारा क्रिया क्षेत्र तक पहुँचते हैं।
प्रश्न 19. ऑक्सिन हॉर्मोन प्ररोह के किस भाग में संश्लेषित होते हैं?
उत्तर- ऑक्सिन हॉर्मोन प्ररोह के अग्र भाग (टिप) में संश्लेषित होते हैं।
प्रश्न 20. पादप हॉर्मोन कौनसी वृद्धि को नियंत्रित करते हैं?
उत्तर- पादप हॉर्मोन दिशिक वृद्धि को नियंत्रित करते हैं।
प्रश्न 21. शरीर की सबसे बड़ी अन्तःस्रावी ग्रन्थि का नाम लिखिए।
उत्तर- शरीर की सबसे बड़ी अन्तःस्रावी ग्रन्थि थायरॉइड ग्रन्थि (Thyroid gland) है।
प्रश्न 22. कौनसा ग्राही अंग संतुलन से सम्बन्धित है?
उत्तर- अन्तःकर्ण (Internal ear) संतुलन से सम्बन्धित है।
प्रश्न 23. मस्तिष्क का मुख्य सोचने वाला भाग कौनसा है?
उत्तर- मस्तिष्क का मुख्य सोचने वाला भाग अग्र-मस्तिष्क है।
प्रश्न 24. पेशी कोशिका कैसे गति करती है?
उत्तर- पेशी कोशिकाएँ अपनी आकृति बदलकर गति करती हैं।
प्रश्न 25. पेशी कोशिकाएँ अपनी आकृति कैसे बदलती हैं?
उत्तर- पेशी कोशिकाओं में विशेष प्रकार की प्रोटीन होती है जो पेशी कोशिकाओं की आकृति तथा व्यवस्था दोनों को ही बदल देती है।
प्रश्न 26. मोचक हॉर्मोन का कार्य बताइए।
उत्तर- मोचक हॉर्मोन पीयूष ग्रंथि से हॉर्मोन के स्राव को प्रेरित करता है।
प्रश्न 27. किस हॉर्मोन द्वारा नर में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों (Secondary Sexual Character) का निर्माण होता है?
उत्तर- टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) हॉर्मोन (नर हॉर्मोन) द्वारा नर में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का निर्माण होता है।
प्रश्न 28. तंत्रिका-तंत्र (Nervous system) किसे कहते हैं?
उत्तर-प्राणी का वह अंग-तंत्र जो शरीर के भीतर की तमाम कार्यकीय प्रणालियों का नियमन एवं नियंत्रण करता है, तंत्रिका तंत्र कहलाता है।
प्रश्न 29. संवेदी अंग किसे कहते हैं? कोई एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर- संवेदी अंग वे होते हैं जो बाहरी पर्यावरण में होने वाले परिवर्तनों को पहचान लेते हैं। उदाहरण-आँख, नाक एवं कर्ण।
प्रश्न 30. एक तंत्रिका कोशिका के एक्सॉन की अन्तिम शाखाओं और दूसरी तंत्रिका के कोशिकाकाय अथवा डेंड्राइटों के बीच की सन्धि को क्या कहते हैं?
उत्तर- सिनेप्स (Synapse)।
प्रश्न 31. मेरुरज्जु की रक्षा कौन करता है?
उत्तर- मेरुरज्जु की रक्षा कशेरुक दंड (Vertebral column) या रीढ़ की हड्डी करती है।
प्रश्न 32. मधुमेह रोग किस हार्मोन की कमी से होता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)
उत्तर- मधुमेह रोग इंसुलिन (Insulin) हार्मोन की कमी से होता है।
प्रश्न 33. तंत्रिका ऊतक किसके संगठित जाल का बना होता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)
उत्तर- तंत्रिका ऊतक तंत्रिका कोशिकाओं या न्यूरॉन के एक संगठित जाल का बना होता है।
प्रश्न 34. मानव में नर एवं मादा में अपरिपक्व जनन अंगों का परिपक्व होकर जनन क्षमता का विकास होना क्या कहलाता है?
उत्तर- मानव में नर एवं मादा में अपरिपक्व जनन अंगों का परिपक्व होकर जनन क्षमता का विकास होना यौवनारम्भ (Puberty) कहलाता है।
प्रश्न 35. हमारे शरीर में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन तथा वसा के उपापचय को कौन सा हार्मोन नियंत्रित करता है?
उत्तर- थायराक्सिन हार्मोन हमारे शरीर में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन तथा वसा के उपापचय को नियंत्रित करता है।
प्रश्न 36. थायराइड ग्रन्थि को थायराक्सिन हार्मोन बनाने के लिए किस तत्व की आवश्यकता होती है?
उत्तर- थायराइड ग्रन्थि को थायराक्सिन हार्मोन बनाने के लिए आयोडीन की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 37. हड्डियों के बॉक्स के अन्दर तरलपूरित गुब्बारे में मस्तिष्क होता है जो क्या उपलब्ध करवाता है?
उत्तर- प्रघात अवशोषक उपलब्ध कराता है।
प्रश्न 38. हमारे शरीर की पेशियों की गतियों पर नियंत्रण कौन करता है?
उत्तर- अनुमस्तिष्क हमारे शरीर की पेशियों की गतियों का नियंत्रण करता है।
प्रश्न 39. प्रतिवर्ती चाप को परिभाषित कीजिए।
उत्तर- तंत्रिका आवेग का मेरुरज्जु पहुँचने तथा मेरुरज्जु से निर्देशों को अंगों तक पहुँचाने के मार्ग को प्रतिवर्ती चाप कहते हैं।
प्रश्न 40. एक तंत्रिका कोशिका में कितने तंत्रिकाक्ष निकलते हैं?
उत्तर- एक तंत्रिका कोशिका में एक तंत्रिकाक्ष निकलता है।
प्रश्न 41. तंत्रिका आवेग किसे कहते हैं?
उत्तर- उद्दीपन के कारण तंत्रिका कोशिकाओं का उत्तेजित होना तंत्रिका आवेग कहलाता है।
प्रश्न 42. बाल्यकाल में वृद्धि हार्मोन ( ) के अतिस्रावण पर शरीर पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर- बाल्यकाल अथवा बाल्यावस्था में वृद्धि हार्मोन के अतिस्रावण से शरीर सामान्य की तुलना में अत्यधिक भीमकाय (Giant) हो जाता है।
प्रश्न 43. किस हार्मोन के अतिस्रावण से हृदय की स्पंदन दर अथवा रुधिर दाब बढ़ जाता है?
उत्तर- एड्रीनलिन हार्मोन के अतिस्रावण से हृदय की स्पंदन दर अथवा रुधिर दाब बढ़ जाता है।
प्रश्न 44. शरीर का संतुलन मस्तिष्क का कौन सा भाग करता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)
उत्तर- शरीर का संतुलन अनुमस्तिष्क (Cerebellum) करता है।
प्रश्न 45. कौन सी अंतःस्रावी ग्रंथि मानव शरीर की वृद्धि का नियमन करती है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)
उत्तर- पीयूष ग्रन्थि।
प्रश्न 46. हार्मोन की क्रिया को कौनसी क्रियाविधि नियंत्रित करती है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)
उत्तर- हार्मोन की क्रिया को पुनर्भरण (Feedback) क्रियाविधि नियंत्रित करती है।
प्रश्न 47. नर में पाये जाने वाले लैंगिक हार्मोन का नाम लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)
उत्तर- नर में पाये जाने वाले लैंगिक हार्मोन का नाम टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) है।
प्रश्न 48. तंत्रिका तंत्र की रचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई क्या है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)
अथवा
मानव तंत्रिका तंत्र की सबसे छोटी संरचनात्मक इकाई का नाम बताइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)
उत्तर- तंत्रिका कोशिका (Neuron)।
प्रश्न 49. मस्तिष्क का कौन सा भाग रक्तदाब, लार आना तथा वमन का नियंत्रण करता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2026, 2024)
उत्तर- पश्चमस्तिष्क स्थित मेडुला (Medulla) द्वारा नियंत्रित।
प्रश्न 50. मस्तिष्क का कौनसा भाग सीधी रेखा में चलना, साइकिल चलाना व पेंसिल उठाने को नियंत्रण करता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)
उत्तर- पश्चमस्तिष्क में स्थित भाग अनुमस्तिष्क (Cerebellum)।
प्रश्न 51. थॉयराइड ग्रन्थि के द्वारा स्रावित हार्मोन का नाम तथा इसका कार्य लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर- थॉयराइड ग्रन्थि द्वारा 'थॉयरोक्सिन' हार्मोन स्रावित किया जाता है।
कार्य- थॉयरोक्सिन कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन तथा वसा के उपापचय का नियंत्रण करता है ताकि वृद्धि के लिए उत्कृष्ट संतुलन उपलब्ध कराया जा सके।
प्रश्न 52. निम्नलिखित पादप भाग में किस हार्मोन की सान्द्रता अधिक होती है— (प्रश्न बैंक)
(1) प्ररोह शीर्ष (2) फलों व बीजों में (3) तने की पार्श्व शाखाओं में।
उत्तर-
लघूत्तरात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. पादपों में रासायनिक समन्वय कैसे होता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2026)
उत्तर- पादपों में रासायनिक समन्वय हार्मोन के द्वारा होता है। हार्मोन संश्लेषण का स्थान इनके क्रिया क्षेत्र से दूर होता है और साधारण विसरण द्वारा वे क्रिया क्षेत्र तक पहुँच जाते हैं।
प्रश्न 2. शरीर में तंत्रिका आवेग की यात्रा की सामान्य योजना क्या है?
उत्तर- पर्यावरण से सभी सूचनाओं का पता कुछ तंत्रिका कोशिकाओं के विशिष्टकृत सिरों-द्रुमाकृतिक सिरों द्वारा लगाया जाता है और यह एक रासायनिक क्रिया द्वारा विद्युत आवेग पैदा करता है। यह आवेग द्रुमिका से कोशिकाकाय तक जाता है और तब तंत्रिकाक्ष (एक्सॉन) में होता हुआ इसके अंतिम सिरे तक पहुँच जाता है। एक्सॉन के अंत में विद्युत आवेग कुछ रसायनों का विमोचन कराता है। ये रसायन रिक्त स्थान या सिनेप्स (सिनेप्टिक दरार) को पार करते हैं और अगली तंत्रिका कोशिका की द्रुमिका में इसी तरह का विद्युत आवेग प्रारंभ करते हैं। यह शरीर में तंत्रिका आवेग की यात्रा की सामान्य योजना है।
प्रश्न 3. मनुष्य में बौनेपन का क्या कारण है?
उत्तर- मनुष्य में बौनापन पीयूष ग्रन्थि द्वारा स्रावित वृद्धि हार्मोन ( ) की कमी से होता है। वृद्धि हार्मोन हमारे शरीर की अस्थियों तथा ऊतकों की वृद्धि को नियंत्रित करता है। अगर बाल्यावस्था में इस हार्मोन के स्राव में कमी हो जाती है, तो मनुष्य में बौनापन आ जाता है।
प्रश्न 4. प्रकाशानुवर्तन और गुरुत्वानुवर्तन में क्या अन्तर है?
उत्तर-पादप के प्ररोह तंत्र के द्वारा प्रकाश स्रोत की दिशा में गति करना प्रकाशानुवर्तन कहलाता है, जबकि पौधे के किसी भाग का पृथ्वी के गुरुत्व की ओर अथवा उसके विपरीत दिशा में गति करने को गुरुत्वानुवर्तन कहते हैं। जैसे-तने का ऊपर की ओर तथा जड़ का नीचे की ओर वृद्धि करना।
प्रश्न 5. पर्यावरण में होने वाले परिवर्तनों का ज्ञान हमारे शरीर को किस प्रकार होता है?
उत्तर-हमारे पर्यावरण से सभी सूचनाओं का पता कुछ तंत्रिका कोशिकाओं के विशिष्टीकृत सिरों द्वारा लगाया जाता है। ये ग्राही प्राय: हमारी ज्ञानेन्द्रियों में स्थित होते हैं, जैसे-आंतरिक कर्ण, नाक, जिह्वा आदि। रस संवेदी ग्राही स्वाद का पता लगाते हैं जबकि घ्राणग्राही गंध का पता लगाते हैं।
प्रश्न 6. पौधों में प्रकाशानुवर्तन, गुरुत्वानुवर्तन, जलानुवर्तन और रसानुवर्तन का एक-एक उदाहरण लिखें।
उत्तर-(i) प्रकाशानुवर्तन-पादप के प्ररोह तंत्र का प्रकाश की दिशा में मुड़ना।
प्रश्न 7. पीयूष ग्रन्थि को मास्टर ग्रन्थि क्यों कहते हैं?
उत्तर-यह ग्रन्थि मस्तिष्क के निचले तल से लगी रहती है और मटर के दाने के बराबर बड़ी होती है। इस ग्रन्थि से लगभग 13 प्रकार के हॉर्मोन्स स्रावित होते हैं, जो हमारे शरीर की विभिन्न क्रियाओं पर नियंत्रण रखते हैं। सामूहिक रूप से यह हॉर्मोन्स 'पिट्यूटराइन हॉर्मोन' कहलाते हैं। इस ग्रन्थि द्वारा स्रावित कुछ हॉर्मोन्स हमारे शरीर की अन्य अन्तःस्रावी ग्रन्थियों का नियमन करते हैं। इस कारण इस ग्रन्थि को 'मास्टर ग्रन्थि' भी कहा जाता है।
प्रश्न 8. किन्हीं तीन पादप हॉर्मोन का नाम लिखिए एवं प्रत्येक का एक-एक कार्य बताइए।
अथवा
ऑक्सिन व जिबरेलिन पादप हॉर्मोन के कार्य लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर-तीन पादप हॉर्मोन्स के नाम एवं कार्य निम्न प्रकार से हैं-
(i) ऑक्सिन हॉर्मोन-यह वृद्धि हॉर्मोन है जो कोशिकाओं की लंबाई में वृद्धि में सहायक होता है।
(ii) जिबरेलिन हॉर्मोन-यह भी वृद्धि हॉर्मोन है। यह तनों की लंबाई में वृद्धि करता है।
(iii) एब्सिसिक अम्ल-यह वृद्धि का संदमन करने वाला हॉर्मोन है। पत्तियों का मुरझाना इसका उदाहरण है।
प्रश्न 9. जन्तुओं में प्रतिवर्ती चाप क्यों विकसित हुआ है? समझाइए।
उत्तर-अधिकांश जन्तुओं में प्रतिवर्ती चाप इसलिए विकसित हुआ है क्योंकि इनके मस्तिष्क के सोचने का प्रक्रम बहुत तेज नहीं है। वास्तव में अधिकांश जन्तुओं में सोचने के लिए आवश्यक जटिल न्यूरॉन जाल या तो अल्प है या अनुपस्थित है। अतः स्पष्ट है कि वास्तविक विचार प्रक्रम की अनुपस्थिति में प्रतिवर्ती चाप का दक्ष कार्यप्रणाली के रूप में विकास हुआ है। यद्यपि जटिल न्यूरॉन जाल के अस्तित्व में आने के बाद भी प्रतिवर्ती चाप तुरन्त अनुक्रिया के लिए अधिक दक्ष प्रणाली के रूप में कार्य करता है।
प्रश्न 10. परिधीय तंत्रिका तंत्र किसे कहते हैं?
उत्तर-वह तंत्र जो कपाल तंत्रिकाओं एवं मेरु तंत्रिकाओं से मिलकर बना हो, उसे परिधीय तंत्रिका तंत्र (Peripheral Nervous System) कहते हैं।
(i) कपाल तंत्रिकाएँ (Cranial Nerves)-मनुष्य के मस्तिष्क से निकलने वाली तंत्रिकाओं को कपाल तंत्रिकाएँ कहते हैं। मनुष्य में बारह जोड़ी कपाल-तंत्रिकाएँ पाई जाती हैं, जिनमें से कुछ संवेदी, कुछ प्रेरक एवं कुछ मिश्रित प्रकार की होती हैं।
(ii) मेरु तंत्रिकाएँ (Spinal Nerves)-मेरुरज्जु से निकलने वाली तंत्रिकाओं को मेरु तंत्रिकाएँ कहते हैं। मनुष्य में 31 जोड़ी मेरु तंत्रिकाएँ पाई जाती हैं। ये सभी मेरु तंत्रिकाएँ मिश्रित प्रकार की होती हैं।
प्रश्न 11. ऐच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण किस प्रकार होता है? समझाइए।
अथवा
अग्रमस्तिष्क के कार्य को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-मस्तिष्क का मुख्य सोचने वाला भाग अग्रमस्तिष्क है। इसमें विभिन्न ग्राहियों से संवेदी आवेग (सूचनाएँ) प्राप्त करने के लिए क्षेत्र होते हैं। अग्रमस्तिष्क के अलग-अलग क्षेत्र सुनने, सूँघने, देखने आदि के लिए विशिष्टीकृत हैं। इसमें साहचर्य के क्षेत्र पृथक् होते हैं जहाँ इन संवेदी सूचनाओं, अन्य ग्राही से प्राप्त सूचनाओं एवं पहले से मस्तिष्क में एकत्र
सूचनाओं का अर्थ लगाया जाता है। इस सब पर आधारित, एक निर्णय लिया जाता है कि अनुक्रिया तथा सूचनाएँ प्रेरक क्षेत्र तक पहुँचाई जाएँ जो ऐच्छिक पेशी की गति को नियंत्रित करती हैं।
प्रश्न 12. हार्मोन एवं एन्जाइम में अन्तर लिखो।
उत्तर- हार्मोन एवं एन्जाइम में अन्तर
क्र.सं. | हार्मोन | एन्जाइम |
1. | हार्मोन किसी क्रिया को उत्तेजित या संदमित करते हैं। | ये किसी क्रिया में उत्प्रेरक का कार्य करते हैं। |
2. | हार्मोन प्रोटीन व स्टेरॉयड, वसा, अम्ल टायरोसिन के समान प्रकृति के होते हैं। | सभी एन्जाइम प्रोटीन के बने होते हैं। |
3. | हार्मोन का अणुभार कम और अणु छोटे होते हैं। | इनके अणु बड़े और अणुभार अधिक होता है। |
4. | हार्मोन रासायनिक क्रियाओं में विघटित हो जाते हैं अतः पुनः भाग नहीं ले सकते हैं। | एन्जाइम रासायनिक क्रियाओं में विघटित नहीं होते हैं और पुनः भाग ले सकते हैं। |
5. | इनका वहन रुधिर द्वारा होता है। | इनका वहन नलिकाओं द्वारा होता है। |
6. | हार्मोन अन्तःस्रावी ग्रन्थियों में स्रावित होते हैं तथा इनका कार्यक्षेत्र उत्पत्ति स्थान से दूर होता है। | एन्जाइम कोशिका व बहिःस्रावी ग्रन्थियों के स्राव में पाए जाते हैं तथा इनका कार्यक्षेत्र पास होता है। |
7. | यह शरीर में संचित नहीं हो सकते। | यह कुछ समय के लिए संचित हो सकते हैं। |
प्रश्न 13. कार्य के आधार पर तंत्रिकाओं के प्रकार बताइए।
उत्तर- कार्य के आधार पर तंत्रिकाएँ तीन प्रकार की होती हैं-
(1) संवेदी तंत्रिकाएँ (Sensory Nerves)- ऐसी तंत्रिकाएँ जो तंत्रिकीय आवेग को संवेदी अंगों से मस्तिष्क की ओर ले जाती हैं, उन्हें संवेदी तंत्रिकाएँ कहते हैं।
(2) प्रेरक तंत्रिकाएँ (Motor Nerves)- ऐसी तंत्रिकाएँ जो तंत्रिकीय आवेग को मस्तिष्क से अथवा मेरुरज्जु से अपवाहक अंगों (Effector Organs) तक ले जाती हैं, उन्हें चालक या प्रेरक तंत्रिकाएँ कहते हैं।
(3) मिश्रित तंत्रिकाएँ (Mixed Nerves)- ऐसी तंत्रिकाएँ जो संवेदी व प्रेरक दोनों के समान कार्य करती हैं अर्थात् संवेदनाओं को मस्तिष्क की ओर तथा मस्तिष्क से पेशियों की ओर ले जाती हैं, उन्हें मिश्रित तंत्रिकाएँ कहते हैं।
प्रश्न 14. शरीर में सूचना प्रवाह के माध्यम के रूप में विद्युत आवेग के उपयोग के लिए क्या सीमाएँ हैं?
उत्तर- 1. सर्वप्रथम वे केवल उन्हीं कोशिकाओं तक पहुँचेगा जो तंत्रिका ऊतक से जुड़ा है, शरीर की प्रत्येक कोशिका तक नहीं।
2. एक बार एक कोशिका में विद्युत आवेग जनित होता है तथा संचारित होता है तो पुनः नया आवेग जनित करने के लिए कुछ समय लेगी। अर्थात् कोशिकाएँ सतत विद्युत आवेग न जनित करती हैं और न ही संचारित कर सकती हैं।
प्रश्न 15. स्पर्शानुकुंचन किसे कहते हैं? वृद्धि गति एवं स्फीति गति में दो अंतर लिखिए।
उत्तर- स्पर्शानुकुंचन- किसी वस्तु के स्पर्श के प्रति अनुक्रिया में पौधों के भाग की गति को स्पर्शानुकुंचन कहते हैं।
वृद्धि गति एवं स्फीति गति में अन्तर-
क्र.सं. | वृद्धि गति | स्फीति गति |
1. | यह एक दिशा से हो रहे उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया करती है। | इसमें उद्दीपन की दिशा का कोई प्रभाव नहीं होता है। |
2. | यह कोशिकाओं की असमान वृद्धि के कारण होती है। | स्फीति गति कोशिकाओं की स्फीति में परिवर्तन आने के कारण होती है। |
प्रश्न 16. मस्तिष्क के विभिन्न भाग विशिष्ट कार्यों से संबद्ध हैं। मानव मस्तिष्क के उस भाग का नाम लिखिए जो निम्न कार्य करता है-
(i) गंध का ज्ञान, (ii) लार का आना, (iii) उल्टी आना, (iv) साइकिल चलाना, (v) पेन्सिल को उठाना, (vi) पेट पूरा भरा होने की संवेदना।
उत्तर-
प्रश्न 17. प्रतिवर्ती क्रियाओं के कोई पाँच उदाहरण दीजिए।
उत्तर- प्रतिवर्ती क्रियाओं के उदाहरण-
प्रश्न 18. मानव के अनुमस्तिष्क को नष्ट करने पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर- मानव का अनुमस्तिष्क या सेरीबेलम (Cerebellum) मस्तिष्क का दूसरा सबसे बड़ा भाग होता है। यह ऐच्छिक गतियों के लिए आवश्यक पेशियों में समन्वय स्थापित करता है। यह कंकाल पेशियों के समुचित संकुचन द्वारा चलने-फिरने, दौड़ने-लिखने इत्यादि क्रियाओं को आसान बनाता है। यह शरीर को संतुलित बनाये रखता है तथा साम्यावस्था का नियमन करता है।
यदि अनुमस्तिष्क या सेरीबेलम (Cerebellum) को नष्ट कर दिया जाये तो ऐच्छिक पेशियों का समन्वय नहीं हो पायेगा जिससे ऐच्छिक पेशियों के तनाव का नियमन नहीं होगा। फलस्वरूप शरीर की गतियाँ अनियंत्रित होने लगेंगी।
प्रश्न 19. तंत्रिका संबंधन के बिना भी शरीर में सूचनाओं का संप्रेषण किस प्रकार हो सकता है? समझाइए।
अथवा
जीवों में रासायनिक संचरण की प्रक्रिया को समझाइए।
उत्तर- यदि एक विद्युत आवेग जनित करने के अलावा उद्दीपित कोशिकाएँ एक रासायनिक यौगिक निर्मित करना प्रारंभ कर दें तो यह यौगिक आस-पास की सभी कोशिकाओं में विसरित हो जाएगा। यदि आस-पास की अन्य कोशिकाओं के पास इस यौगिक को संसूचित (detect) करने के साधन हों तो उनकी सतह पर विशेष अणुओं का उपयोग करके वे सूचनाओं का अभिज्ञान (Recognise) करने योग्य होंगे तथा इन्हें संचारित भी करेंगे। हालाँकि यह प्रक्रम बहुत धीमा होगा, लेकिन यह तंत्रिका संबंधन के बिना भी शरीर की सभी कोशिकाओं तक पहुँचेगा तथा इसे अपरिवर्ती तथा स्थायी बनाया जा सकता है।
प्रश्न 20. यदि किसी स्तनी की अवटु ग्रन्थि (थॉयराइड ग्रन्थि) निकाल दें, तो कौनसे प्रभाव दृष्टिगोचर होंगे?
उत्तर- थॉयराइड ग्रन्थि के हार्मोन कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन एवं वसा के उपापचय का शरीर में नियंत्रण तथा कोशिकाओं में माइटोकॉन्ड्रिया के बनने की क्रिया को प्रेरित करते हैं। यह शरीर की वृद्धि तथा हृदय स्पंदन दर को भी नियंत्रित करते हैं। अतः थॉयराइड ग्रन्थि को शरीर से निकाल देने पर उपर्युक्त क्रियाएँ नहीं होंगी तथा इससे स्रावित थायरॉक्सिन हार्मोन की कमी से घेंघा, हॉशीमोटो आदि रोग हो जायेंगे।
प्रश्न 21. तंत्रिका ऊतक कैसे क्रिया करता है? समझाइए।
अथवा
पेशियों में गति की क्रियाविधि को समझाइए।
उत्तर- तंत्रिका ऊतक सूचना एकत्र करता है, उन्हें मस्तिष्क में भेजता है, सूचनाओं को संसाधित करता है, सूचनाओं के आधार पर निर्णय लेता है और पेशियों तक क्रिया के लिए निर्णय को संवाहित करता है। जब तंत्रिका आवेग पेशी तक पहुँचता है तो पेशी कोशिकाएँ अपनी आकृति बदलकर गति करती हैं। पेशी कोशिकाओं में विशेष प्रकार की प्रोटीन होती है जो उनकी आकृति तथा व्यवस्था दोनों को ही बदल देती है। कोशिका में यह तंत्रिका विद्युत आवेग की अनुक्रिया के फलस्वरूप होता है। जब यह घटना होती है तो इन प्रोटीन की नयी व्यवस्था पेशी को नयी आकृति देती है।
प्रश्न 22. उत्तेजना तथा विपत्ति के समय रुधिर में किस हार्मोन की मात्रा बढ़ जाती है? उस हार्मोन के अतिस्राव से शरीर में होने वाले परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर : उत्तेजना तथा विपत्ति के समय रक्त में एड्रिनल ग्रन्थि के मेड्यूला से स्रावित एड्रिनलीन या एपीनेफ्रिन (Epinephrine) नामक हार्मोन की मात्रा बढ़ जाती है। यह हार्मोन संकटकालीन परिस्थितियों में प्राणी को संकट से सामना करने के लिए तैयार करता है।
अतिस्राव से शरीर में होने वाले परिवर्तन निम्न हैं- (1) हृदय की स्पंदन दर (Heart beat rate), रुधिर दाब (Blood pressure) तथा आधार उपापचय दर (Basal metabolic rate) बढ़ जाती है। (2) रोंगटे (Gooseflesh) खड़े हो जाते हैं। (3) नेत्रों की पुतलियाँ (Pupil) फैल जाती हैं। (4) रक्त में थक्का (Blood clotting) जमने का समय घट जाता है। (5) श्वासनाल (Trachea) एवं ब्रान्काई (Bronchi) की पेशियाँ शिथिल हो जाती हैं। (6) हृदय निर्गम (cardiac output) बढ़ जाता है। (7) रक्त प्रवाह त्वचा में कम माँसपेशियों में अधिक हो जाता है।
विशेष- यह हार्मोन लड़ाई (Fight), पलायन (Flight) तथा भय (Fear) के समय अधिक स्रावित होकर जन्तुओं को इन प्रतिकूल परिस्थितियों के प्रति तैयार करता है इसलिए इस हार्मोन को हार्मोन तथा इस ग्रन्थि को ग्रन्थि भी कहते हैं।
प्रश्न 23. मनुष्य में पाये जाने वाले नर हार्मोन (टेस्टोस्टेरॉन) के कोई चार कार्य लिखिए।
उत्तर-नर हार्मोन (टेस्टोस्टेरॉन) के चार कार्य-
(1) पुरुषों में मूँछ व दाढ़ी आना, स्वर में भारीपन आना, शरीर पर बालों का उगना, अस्थियों एवं पेशियों का मजबूत होना सभी लक्षण इन हार्मोन्स के द्वारा प्रेरित होते हैं। अर्थात् पुरुष में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का विकास करना।
(2) यह शुक्रजनन (Spermatogenesis) में सहायक होता है।
(3) यह हार्मोन यौन आचरण को प्रेरित करता है।
(4) ये हार्मोन्स नर जन्तुओं की त्वचा पर भी प्रभाव डालते हैं, जिससे त्वचा लाल रंग की व मजबूत हो जाती है।
प्रश्न 24. मेहंदी की झाड़ियों को अधिक घनी बनाने के लिए माली उनकी शाखाओं के शीर्ष काट देता है, क्यों?
उत्तर- जब मुख्य स्तम्भ के शीर्ष पर लगी कलिका वृद्धि करती रहती है तो मुख्य स्तम्भ के नीचे लगी पार्श्व कक्षीय कलिकाओं की वृद्धि नहीं हो पाती। इसे शीर्ष प्रमुखता कहते हैं। अतः पार्श्व कलिकाओं की उचित वृद्धि हेतु माली झाड़ियों की शीर्ष कलिकाओं को काट देता है, इससे वे सघन हो जाती हैं।
प्रश्न 25. (i) पादप गति किसे कहते हैं?
(ii) अनुवर्तनी गति एवं अनुचलन गति में कोई दो अन्तर लिखिए।
उत्तर-(i) पादप गति (Plant Movement)- पौधे या इसके किसी भाग में किसी उद्दीपन के प्रति होने वाली गति को पादप गति कहते हैं।
(ii) अनुवर्तनी गति एवं अनुचलन गति में अंतर-
क्र.सं. | अनुवर्तनी गति | अनुचलन गति |
1. | इसमें उद्दीपन गति की दिशा का निर्धारण करता है। | जबकि इसमें उद्दीपन गति की दिशा का निर्धारण नहीं करता है। |
2. | यह स्थिर पादपों द्वारा प्रदर्शित वक्रता गति होती है। अतः यह अनुवर्तन गति होती है। | इसमें सम्पूर्ण पादप या उसके किसी भाग में स्थान परिवर्तन होता है, अतः यह अनुचलन गति है। |
प्रश्न 26. शीर्षस्थ प्रभाविता क्या होती है?
अथवा
एक पौधा लम्बाई में तो सामान्य वृद्धि कर रहा है लेकिन इसकी पार्श्व शाखाएँ विकसित नहीं हो रही हैं। ऐसा क्यों होता है? आप पौधे की पार्श्व शाखाओं के विकास हेतु क्या सुझाव देंगे?
उत्तर- प्राय: पौधों में शीर्षस्थ कलिका की उपस्थिति में पार्श्व व कक्षस्थ कलिकाओं की वृद्धि पूर्णरूप से या आंशिक रूप से अवरुद्ध हो जाती है। इस लक्षण को शीर्षस्थ प्रभाविता कहते हैं। यह ऑक्सिन नामक पादप हार्मोन का एक प्रमुख गुण है। ऑक्सिन प्ररोह शीर्ष में स्रावित होता है। इसके प्रभाव से प्ररोह पर स्थित कक्षस्थ/पार्श्व कलिकाओं की वृद्धि रुक जाती है और पौधे में शीर्ष वृद्धि अधिक होती है। यदि शीर्षस्थ कलिका को हटा दिया जाए तो पार्श्व या कक्षस्थ कलिकायें विकसित होने लगती हैं।
प्रश्न 27. हॉर्मोन स्रावण की मात्रा का नियमन किस प्रकार होता है? समझाइए।
अथवा
हॉर्मोन नियंत्रण पुनर्भरण क्रियाविधि को समझाइए।
उत्तर— हॉर्मोन का स्रावण परिशुद्ध मात्रा में होना चाहिए अन्यथा कई हानिकारक प्रभाव उत्पन्न हो सकते हैं। इसलिए स्रावित होने वाले हॉर्मोन का समय और मात्रा का नियंत्रण पुनर्भरण क्रियाविधि से किया जाता है। उदाहरण के लिए यदि रुधिर में शर्करा स्तर बढ़ जाता है तो इसे अग्न्याशय की कोशिका संसूचित (detect) कर लेती है तथा इसकी अनुक्रिया में अधिक इंसुलिन स्रावित करती है। जब रुधिर में शर्करा स्तर कम हो जाता है तो इंसुलिन का स्रावण कम हो जाता है।
प्रश्न 28. मादा में पाये जाने वाले एस्ट्रोजन हॉर्मोन के कार्य लिखिए।
उत्तर— एस्ट्रोजन हॉर्मोन के कार्य-
(1) यह हॉर्मोन नारीत्व हॉर्मोन (Feminizing hormone) कहलाता है।
(2) यह हॉर्मोन मादा जनन अंगों के सम्पूर्ण विकास हेतु आवश्यक है।
(3) एस्ट्रोजन हॉर्मोन द्वारा मादा में गौण लैंगिक लक्षणों (Secondary sexual characters) का विकास होता है। जैसे- मादा की आवाज महीन होना, वसा का संचय, रज चक्र का प्रारम्भ होना, स्तनों का विकास, बाह्य जननांगों पर रोम विकास।
प्रश्न 29. मधुमेह रोग से पीड़ित रोगी को डॉक्टर शुगर कम खाने की सलाह क्यों देता है? (प्रश्न बैंक)
उत्तर— मधुमेह रोग से पीड़ित रोगी में इंसुलिन हॉर्मोन का उचित मात्रा में स्राव नहीं होता है। इंसुलिन का उत्पाद अग्न्याशय में होता है जो रुधिर में शर्करा स्तर को नियंत्रित करने में सहायता करता है। मधुमेह रोगी में इंसुलिन की कमी से शर्करा का स्तर रुधिर में बढ़ जाता है इसलिए डॉक्टर रोगी को शुगर कम खाने की सलाह देता है।
प्रश्न 30. प्रतिवर्ती क्रिया किसे कहते हैं? कोई दो उदाहरण लिखिए। (प्रश्न बैंक)
उत्तर— किसी उद्दीपन के प्रति अचानक होने वाली प्रतिक्रिया को प्रतिवर्ती क्रिया कहते हैं।
प्रतिवर्ती क्रिया के उदाहरण—
दीर्घउत्तरीय प्रश्न-
प्रश्न 1. (i) मानव में अग्न्याशय ग्रंथि से निकलने वाले हॉर्मोन का नाम तथा कार्य लिखो। इसकी कमी से होने वाले रोग का नाम लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)
(ii) संवेदी तंत्रिका एवं प्रेरक तंत्रिका में अन्तर लिखिए।
उत्तर—(i) अग्न्याशय ग्रंथि से स्रावित होने वाले हॉर्मोन का नाम इंसुलिन (Insulin) है।
इंसुलिन का कार्य-
(ii) संवेदी तंत्रिका एवं प्रेरक तंत्रिका में अन्तर-
क्र.सं. | संवेदी तंत्रिका | प्रेरक तंत्रिका |
1. | ऐसी तंत्रिकाएं जो तंत्रिकीय आवेग को संवेदी अंगों से मस्तिष्क की ओर ले जाती है, उन्हें संवेदी तंत्रिकाएं कहते हैं। | ऐसी तंत्रिकाएं जो तंत्रिकीय आवेग को मस्तिष्क से अथवा मेरुरज्जु से अपवाहक अंगों तक ले जाती हैं उन्हें प्रेरक तंत्रिकाएं कहते हैं। |
2. | ये एक ध्रुवीय (unipolar) होती हैं। | ये बहुध्रुवीय (multipolar) होती हैं। |
प्रश्न 2. वृद्धि निरोधक पदार्थ किसे कहते हैं? पादप स्ट्रेस हॉर्मोन के रूप में किसे जाना जाता है? वृद्धि निरोधक के कोई चार कार्य लिखिए।
उत्तर— वृद्धि निरोधक पदार्थ- पादप वृद्धि हॉर्मोन पौधों की वृद्धि को प्रेरित करते है, परन्तु कुछ ऐसे रसायन या पदार्थ हैं जो वृद्धि को संदमित करते हैं। ऐसे पदार्थों को वृद्धि निरोधक पदार्थ (Growth Inhibitor) कहते हैं। एब्सिक अम्ल भी वृद्धि रोधक है। यह अम्ल प्राकृतिक रूप से पादपों में पाया जाता है। इसे स्ट्रेस हॉर्मोन भी कहते हैं।
विज्ञान कक्षा-X 197
एब्सिक अम्ल के कार्य-
प्रश्न 3. (i) प्रेरित गतियाँ किसे कहते हैं? रसायन अनुचलन को उदाहरण सहित समझाइए।
(ii) गुरुत्वानुवर्तन को चित्र की सहायता से समझाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)
उत्तर- (i) प्रेरित गतियाँ (Induced movements)- प्रेरित गतियाँ बाह्य उद्दीपकों द्वारा प्रेरित होती हैं व इन गतियों को अनुचलनीय गतियाँ भी कहते हैं। प्रकाश, रासायनिक पदार्थ या ताप इन गतियों को प्रेरित करने वाले उद्दीपक हो सकते हैं। गति की दिशा उद्दीपक के स्रोत पर निर्भर रहती है।
रसायन अनुचलन (Chemotaxis movements)- रासायनिक उद्दीपन की अनुक्रिया के कारण जीव में जो गति होती है, उसे रसायन अनुचलन कहते हैं। फर्न व मॉस पादपों के पुमणु, स्त्रीधानी द्वारा स्रावित विशेष रासायनिक पदार्थ मैलिक अम्ल के कारण अण्ड कोशिका की ओर गति करते हैं।
[गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism) दर्शाने वाला पादप चित्र]

चित्र-गुरुत्वानुवर्तन दिखाता पादप
(ii) गुरुत्वानुवर्तन- पादप विभिन्न उद्दीपकों के लिए अनुक्रिया करके अनुवर्तन दिखाते हैं। पर्यावरणीय प्रेरण जैसे प्रकाश या गुरुत्व पादप की वृद्धि वाले भाग में दिशा परिवर्तित कर देते हैं। ये दिशिक या अनुवर्तन गतियाँ उद्दीपक की ओर या इससे विपरीत दिशा में हो सकती हैं। वस्तुतः एक पादप की जड़ सदैव नीचे की ओर वृद्धि करती है जबकि प्ररोह प्रायः ऊपर की ओर तथा पृथ्वी से दूर वृद्धि करके अनुक्रिया करते हैं।
यह प्ररोह तथा जड़ में क्रमशः उपरिगामी तथा अधोगामी वृद्धि पृथ्वी या गुरुत्व के खिंचाव की अनुक्रिया गुरुत्वानुवर्तन (Geotropism) कहलाती है। (देखिए ऊपर चित्र में) अतः पौधे के किसी भाग का पृथ्वी के गुरुत्व की ओर अथवा उसके विपरीत गति गुरुत्वानुवर्तन कहलाती है।
प्रश्न 4. (i) हार्मोन किसे कहते हैं? इसके कोई दो गुणधर्म लिखिए।
(ii) निम्न अन्तःस्रावी ग्रन्थियों द्वारा स्रावित हार्मोन के नाम तथा उनके कार्य लिखिए।
(1) पीयूष ग्रन्थि, (2) थायराइड, (3) एड्रिनल ग्रन्थि, (4) अण्डाशय, (5) वृषण, (6) अग्न्याशय।
उत्तर- (i) हार्मोन (Hormone)- अन्तःस्रावी ग्रन्थियों से स्रावित रासायनिक पदार्थ जिसे सीधा रक्त में स्रावित किया जाता है। यह शरीर के विभिन्न अंगों में पहुँचकर कार्यों को प्रभावित करते हैं, इन्हें हार्मोन कहते हैं। इन्हें रासायनिक उत्प्रेरक भी कहते हैं।
हार्मोन के गुणधर्म- (i) ये अन्तःस्रावी ग्रन्थियों द्वारा स्रावित होते हैं। उत्पत्ति में जैविक होते हैं।
(ii) ये सूक्ष्म मात्रा में क्रियाशील होते हैं।
अन्तःस्रावी ग्रन्थियों द्वारा स्रावित हार्मोन एवं कार्य-
क्र.सं. | अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ | हार्मोन | कार्य |
1. | पीयूष ग्रन्थि | वृद्धि हार्मोन | सभी अंगों में वृद्धि को प्रेरित करता है। |
2. | थायराइड ग्रन्थि | थायरॉक्सिन | शरीर की वृद्धि के लिए उपापचय का नियमन करती है। |
3. | एड्रिनल ग्रन्थि | एड्रिनलीन | शरीर को विषम परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार करती है। |
4. | अण्डाशय | एस्ट्रोजन | मादा में लैंगिक अंगों का विकास व मासिक चक्र का नियमन करना। |
5. | वृषण | टेस्टोस्टेरॉन | नर में लैंगिक लक्षणों का विकास करना। |
6. | अग्न्याशय | इंसुलिन | रक्त में शर्करा स्तर का नियमन करता है। |
प्रश्न 5. (i) हार्मोन किसे कहते हैं? इसका एक महत्व लिखिए।
(ii) पादप हार्मोन एवं जन्तु हार्मोन में कोई चार अन्तर लिखिए।
उत्तर—
(i) हार्मोन— अन्तःस्रावी ग्रन्थियों से स्रावित रासायनिक पदार्थ जिसे सीधा रक्त में स्रावित किया जाता है। यह शरीर के विभिन्न अंगों में पहुँचकर कार्यों को प्रभावित करते हैं, इन्हें हार्मोन कहते हैं।
महत्व— हार्मोन वृद्धि, परिवर्धन परिपक्व और जनन का नियंत्रण करते हैं।
(ii) पादप हार्मोन एवं जन्तु हार्मोन में अन्तर
(Differences between Plant and Animal Hormones)
क्र.सं. | पादप हार्मोन (Plant Hormone) | जन्तु हार्मोन (Animal Hormone) |
1. | पादप हार्मोन के स्रावण के लिए कोई विशिष्ट ग्रन्थि नहीं होती है। | जबकि जन्तु हार्मोन अन्तःस्रावी ग्रन्थियों द्वारा स्रावित किए जाते हैं। |
2. | ये संख्या में कम होते हैं। | ये विभिन्न प्रकार के होते हैं। |
3. | ये वृद्धि एवं विकास का नियमन करते हैं। | ये प्रत्येक प्रकार के कार्यों का नियमन करते हैं, जिसमें वृद्धि एवं विकास भी सम्मिलित हैं। |
4. | उदाहरण—ऑक्सिन, जिब्बेरेलिन। | उदाहरण—वृद्धि हार्मोन, थायरॉक्सिन हार्मोन। |
प्रश्न 6. (i) सिनेप्स किसे कहते हैं? समझाइए।
(ii) सिनेप्स के कार्य लिखिए।
उत्तर—
(i) एक तंत्रिका कोशिका का एक्सॉन अगली तंत्रिका कोशिका के डेंड्राइटों के समीप स्थित होता है। दो तंत्रिका-कोशिकाओं की इस संधि को सिनेप्स कहते हैं। सिनेप्स पर एक तंत्रिका कोशिका के एक्सॉन-सिरे तथा दूसरी तंत्रिका कोशिका के डेंड्राइट के बीच थोड़ा-सा अवकाश होता है। इस अवकाश को सिनेप्स दरार (Synaptic cleft) कहते हैं।
सिनेप्सों में से आवेग एक तंत्रिका-कोशिका से अगली तंत्रिका-कोशिका में पहुँचता है।
जब कोई आवेग किसी एक तंत्रिका कोशिका के एक्सॉन के सिरे पर पहुँच जाता है तब एक रसायन सिनेप्स की सिनेप्स-दरार में विमोचित होता है और यह पदार्थ भी आगे न्यूरॉन में आवेग पैदा करता है।
प्रश्न 7. अण्डाशय से स्रावित हार्मोन का नाम तथा दो कार्य लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)
उत्तर— अण्डाशय से स्रावित हार्मोन का नाम एस्ट्रोजन (Estrogen) है।
कार्य— एस्ट्रोजन हार्मोन द्वारा मादा में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का विकास होता है। जैसे—(i) स्तनों का विकास, (ii) रजचक्र का प्रारम्भ होना।
प्रश्न 8. पादप हॉर्मोन से आप क्या समझते हैं? किन्हीं दो पादप हॉर्मोन के नाम एवं एक-एक कार्य लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)
उत्तर— पादप हॉर्मोन (Phytohormones)— पौधों में उत्पन्न विशेष प्रकार के रासायनिक पदार्थ, जो पौधों की वृद्धि, विकास एवं अनुक्रियाओं का नियमन करते हैं, पादप हॉर्मोन कहलाते हैं। इन्हें वृद्धि नियामक (Growth regulators) भी कहते हैं।
पादप हॉर्मोन्स के नाम एवं कार्य निम्न प्रकार से हैं-
(i) ऑक्सिन हॉर्मोन- यह वृद्धि हॉर्मोन है जो कोशिकाओं की लंबाई में वृद्धि में सहायक होता है।
(ii) जिब्वेरेलिन हॉर्मोन- यह भी वृद्धि हॉर्मोन है। यह तनों की लंबाई में वृद्धि करता है।
प्रश्न 9. मानव में अग्र-मस्तिष्क के विभिन्न भागों के नाम एवं कार्य लिखिए।
(माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)
उत्तर : अग्र-मस्तिष्क के निम्न भाग हैं-
(i) प्रमस्तिष्क (Cerebrum)- यह शरीर की मोटर की गतिविधि को नियंत्रित और प्रेरित करती है, जो कि शरीर की गतिविधि के लिए महत्त्वपूर्ण है।
(ii) डाइएनसेफेलॉन (Diencephalon)- यह तंत्रिका तंत्र से संकेत प्राप्त करता है और संकेतों की व्याख्या करता है।
प्रश्न 10. अनैच्छिक क्रियाएँ मस्तिष्क के कौन से भाग से नियंत्रित होती हैं? एक उदाहरण द्वारा समझाइए।
(माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)
उत्तर : अनैच्छिक क्रियाएँ मध्य-मस्तिष्क तथा पश्च-मस्तिष्क से नियंत्रित होती हैं।
उदाहरण के लिए रक्तदाब, लार आना तथा वमन पश्च-मस्तिष्क स्थित मेडुला द्वारा नियंत्रित होती है।
प्रश्न 11. वृषण से स्रावित हॉर्मोन का नाम तथा दो कार्य समझाइए।
(माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)
उत्तर : वृषण द्वारा 'टेस्टोस्टेरोन' हॉर्मोन स्रावित होता है।
वृषण के कार्य-
(1) वृषण के द्वारा नर हॉर्मोन टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) का निर्माण किया जाता है जिसके कारण पुरुषों/लड़कों में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का विकास होता है।
(2) शुक्राणुओं का निर्माण भी वृषण के द्वारा ही होता है।
प्रश्न 12. पादप की प्रकाश के प्रति अनुक्रिया को चित्र के द्वारा समझाइए।
(प्रश्न बैंक)
उत्तर : पर्यावरणीय प्रेरण जैसे प्रकाश पादप की वृद्धि वाले भाग में दिशा परिवर्तित कर देते हैं। ये दिशिक या अनुवर्तन गतियाँ उद्दीपन की ओर या इसके विपरीत दिशा में हो सकती हैं। अतः इन दो भिन्न प्रकार की प्रकाशानुवर्तन गतियों में प्ररोह प्रकाश की ओर मुड़कर अनुक्रिया या जड़ इससे दूर मुड़कर अनुक्रिया करते हैं।
[पादप का प्रकाश की ओर मुड़ना (प्रकाशानुवर्तन)]

चित्र : प्रकाश की दिशा में पादप की अनुक्रिया
निबन्धात्मक प्रश्न-
प्रश्न 1. (i) तंत्रिका पेशीय संधि का नामांकित चित्र बनाते हुए इसकी क्रियाविधि को समझाइए।
(ii) प्रमस्तिष्क और अनुमस्तिष्क में दो अन्तर लिखिए।
उत्तर :
(i) तंत्रिका कोशिका के अंतिम सिरे तथा पेशी कोशिका के मध्य संधि स्थल पर रिक्त स्थान पाया जाता है जिसे सिनेप्स कहते हैं। जब तंत्रिका कोशिका में विद्युत आवेग इसके अंतिम सिरे तक पहुँच जाता है तो विद्युत आवेग कुछ रसायनों का विमोचन कराता है। ये रसायन सिनेप्स को पार कर पेशी कोशिका तक पहुँच कर विद्युत आवेग प्रारंभ करते हैं जो पेशी कोशिका में संकुचन को प्रेरित करता है।
[तंत्रिका पेशीय संधि (Neuromuscular junction)]

चित्र-तंत्रिका पेशीय संधि
(ii) प्रमस्तिष्क और अनुमस्तिष्क में अन्तर-
क्र.सं. | प्रमस्तिष्क | अनुमस्तिष्क |
1. | यह अग्र-मस्तिष्क का मुख्य भाग है। | यह पश्च-मस्तिष्क का मुख्य भाग है। |
2. | यह दायें-बायें प्रमस्तिष्क गोलार्द्धों से बना होता है। | यह दायें-बायें अनुमस्तिष्क गोलार्द्धों से बना होता है। |
3. | प्रमस्तिष्क गोलार्द्ध खोखले होते हैं अथवा गुहा पाई जाती है। | ये ठोस होते हैं। |
4. | यह बुद्धि, इच्छा शक्ति, ज्ञान, स्मृति का केन्द्र है। | यह शरीर के संतुलन को बनाये रखता है। |
प्रश्न 2. प्रतिवर्ती क्रिया तथा प्रतिवर्ती चाप क्या है? इस क्रिया को उदाहरण देकर समझाइए तथा इस क्रिया से होने वाले लाभ लिखिए।
अथवा
प्रतिवर्ती चाप का सचित्र वर्णन कीजिए। (प्रश्न बैंक)
अथवा
प्रतिवर्ती चाप का नामांकित चित्र बनाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)
उत्तर- बाह्य परिवर्तनों अर्थात् उद्दीपनों के प्रति प्राणियों की प्रक्रियाएँ दो प्रकार की होती हैं- ऐच्छिक एवं अनैच्छिक। अनैच्छिक क्रियाएँ प्राणी की इच्छाशक्ति के अधीन नहीं होती हैं।
किसी गर्म वस्तु के छूने अथवा सुई या कांटा चुभने पर हम तुरन्त अपने हाथ व पैर को हटाते हैं। किसी उद्दीपन के प्रति इस प्रकार की अचानक होने वाली प्रतिक्रिया ही प्रतिवर्ती क्रिया कहलाती है। इन क्रियाओं का संचालन मेरुरज्जु द्वारा होता है।
[प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arc)]

चित्र-प्रतिवर्ती चाप
प्रतिवर्ती क्रियाओं में संवेदी अंग उद्दीपन को ग्रहण कर संवेदी तंतुओं द्वारा मेरुरज्जु तक पहुँचाते हैं, इसके फलस्वरूप मेरुरज्जु से अनुक्रिया के लिए आवेश चालक तंतुओं द्वारा सम्बन्धित मांसपेशियों को मिलता है और अंग अनुक्रिया करता है। इस प्रकार संवेदी अंगों से, संवेदनाओं को संवेदी तंतुओं द्वारा मेरुरज्जु तक आने या मेरुरज्जु से प्रेरणा के रूप में अनुक्रिया करने वाले अंगों की मांसपेशियों तक संदेश पहुँचाने वाले मार्ग को प्रतिवर्ती चाप (Reflex arc) तथा होने वाली क्रिया को प्रतिवर्ती क्रिया कहते हैं।
प्रतिवर्ती क्रिया के लाभ-
(i) प्रतिवर्ती चाप छोटा होने के कारण ये क्रियाएं शीघ्र सम्पन्न होती हैं जिससे प्राणियों के संवेदनाओं के घातक प्रभाव से बचाया जा सकता है।
(ii) बाह्य तथा आन्तरिक उद्दीपनों के फलस्वरूप होने वाली ये क्रियाएं मेरुरज्जु (Spinal cord) द्वारा नियंत्रित होती है। इससे मस्तिष्क पर कार्य का दबाव कम हो जाता है। क्रिया होने के बाद मस्तिष्क को सूचना प्रेषित कर दी जाती है।
प्रश्न 3. (i) जंतु अपने शरीर को विषम परिस्थिति से लड़ने या भाग जाने के लिए किस प्रकार तैयार करते हैं?
(ii) अन्तःस्रावी तथा बाह्यस्रावी ग्रंथियों में चार अन्तर लिखिए।
उत्तर-(i) जंतु जब विषम परिस्थिति में होते हैं तो वे अपना शरीर लड़ने के लिए या भाग जाने के लिए तैयार करते हैं। दोनों ही बहुत जटिल क्रियाएँ हैं जिसे नियंत्रित तरीके से अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। अनेक प्रकार के ऊतकों का उपयोग होता है तथा उनकी एकीकृत क्रियाएँ मिलकर ये कार्य करती हैं। यद्यपि लड़ना या दौड़ना, दो एकांतर क्रियाएँ एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न हैं परन्तु कुछ सामान्य तैयारियाँ दोनों के लिए की जाती हैं।
यह एड्रिनल (अधिवृक्क) ग्रन्थि से स्रावित एड्रीनलिन हॉर्मोन द्वारा किया जाता है। एड्रीनलिन सीधा रुधिर में स्रावित हो जाता है और शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचा दिया जाता है। हृदय सहित यह लक्ष्य अंगों या विशिष्ट ऊतकों पर कार्य करता है। परिणामस्वरूप हृदय की धड़कन बढ़ जाती है ताकि पेशियों को अधिक ऑक्सीजन की आपूर्ति हो सके। पाचन तंत्र तथा त्वचा में रुधिर की आपूर्ति कम हो जाती है क्योंकि इन अंगों की छोटी धमनियों के आसपास की पेशियाँ सिकुड़ जाती हैं। यह रुधिर की दिशा कंकाल पेशियों की ओर कर देता है। डायफ्राम तथा पसलियों की पेशी के संकुचन से श्वसन दर भी बढ़ जाती है। ये सभी अनुक्रियाएँ मिलकर जंतु शरीर को स्थिति से निपटने के लिए तैयार करती हैं।
(ii) अन्तःस्रावी तथा बाह्यस्रावी ग्रंथियों में अन्तर-
क्र.सं. | अन्तःस्रावी ग्रंथियाँ | बाह्यस्रावी ग्रंथियाँ |
1. | ये ग्रंथियाँ अपने स्राव को सीधे रक्त में छोड़ती हैं। | जबकि ये ग्रंथियाँ अपने स्राव को वाहिनियों में युक्त करती हैं। |
2. | ये नलिकाविहीन होती हैं। | जबकि ये नलिकायुक्त होती हैं। |
3. | इनके द्वारा स्रावित पदार्थ को हॉर्मोन कहते हैं। | जबकि इनके स्राव को एन्जाइम कहते हैं। |
4. | उदाहरण-पीयूष ग्रन्थि, थायराइड ग्रन्थि। | उदाहरण-स्वेद ग्रंथियाँ, दुग्ध ग्रंथियाँ। |
प्रश्न 4. अन्तःस्रावी ग्रंथियाँ क्या हैं? मनुष्य में पाई जाने वाली ग्रंथियों के नाम लिखकर उनकी अवस्थिति को चित्र की सहायता से बताइए एवं किन्हीं दो ग्रंथियों से स्रावित हॉर्मोन के कार्य लिखिए।
उत्तर- अन्तःस्रावी ग्रंथियाँ (Endocrine glands)-ये ग्रंथियाँ अपना स्राव सीधे रक्त में छोड़ती हैं क्योंकि इनमें नलिका का अभाव होता है, इसीलिए इन्हें नलिकाविहीन ग्रंथियाँ भी कहते हैं। इन ग्रंथियों के स्राव को हॉर्मोन कहते हैं।
मनुष्य में निम्न अन्तःस्रावी ग्रंथियाँ पाई जाती हैं एवं इनकी अवस्थिति निम्न प्रकार से है-(देखिए आगे चित्र में)
(i) पीयूष ग्रन्थि (ii) थायराइड ग्रन्थि (iii) पैराथायराइड (iv) अधिवृक्क ग्रन्थि या एड्रीनल ग्रन्थि (v) थाइमस ग्रन्थि (vi) पीनियल काय (vii) लैंगरहेन्स के द्वीप (अग्न्याशय) (viii) जनन ग्रन्थि (वृषण एवं अण्डशय)।
(1) थायराइड ग्रन्थि- यह ग्रन्थि मनुष्य के गले में श्वास नलिका ट्रेकिया के दोनों ओर लैरिक्स के नीचे स्थित होती है। इससे निकलने वाला हॉर्मोन थायरॉक्सिन एवं ट्रायोडोथायरोनिन है। इनमें आयोडीन अधिक मात्रा में होता है। थायरॉक्सिन हॉर्मोन के कार्य निम्न हैं-
(i) यह कोशिकीय श्वसन की गति को तीव्र करता है।
(ii) यह शरीर की सामान्य वृद्धि विशेषतः हड्डियों, बाल आदि के विकास के लिए अनिवार्य हैं।
(iii) जनन-अंगों के सामान्य कार्य इन्हीं की सक्रियता पर आधारित रहते हैं।
(iv) पीयूष ग्रन्थि के हार्मोन के साथ मिलकर शरीर के जल-संतुलन का नियंत्रण करते हैं।
[मानव की अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ (नर एवं मादा)]

चित्र-मानव की अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ (a) नर, (b) मादा।
(2) अग्न्याशय-यह मानव शरीर की दूसरी सबसे बड़ी ग्रन्थि है। यह एक साथ अन्तःस्रावी और बहिःस्रावी दोनों प्रकार की ग्रन्थि है। इसके द्वारा स्रावित इन्सुलिन हार्मोन निम्न कार्य करता है-
(i) इन्सुलिन रुधिर में ग्लूकोज का सामान्य स्तर बनाये रखता है तथा आवश्यकता से अधिक ग्लूकोज को यकृत एवं पेशियों में ग्लाइकोजन में बदलने की क्रिया को प्रेरित करता है।
(ii) यह शरीर कोशिकाओं द्वारा रक्त से ग्लूकोज को ग्रहण कर इसके उपयोग को बढ़ाता है।
इस प्रकार यह रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को बढ़ने से रोकता है। यह हार्मोन उपचय तथा वृद्धि को प्रेरित करता है।
प्रश्न 5. (i) जंतुओं में समन्वित वृद्धि में हार्मोन कैसे सहायता करते हैं? समझाइए।
उत्तर- (i) जंतु प्रकाश या गुरुत्व पर आश्रित किसी एक दिशा में अधिक वृद्धि नहीं करते हैं बल्कि जंतु शरीर में सावधानीपूर्वक नियंत्रित स्थानों पर वृद्धि होती है। जंतुओं में इस प्रकार की समन्वित वृद्धि में हार्मोन सहायता करते हैं। इसे कुछ उदाहरणों द्वारा समझा जा सकता है। जैसे-अवटुग्रंथि थायरॉक्सिन हार्मोन स्रावित करती है जो कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन तथा वसा के उपापचय का शरीर में नियंत्रण करता है ताकि वृद्धि के लिए उत्कृष्ट संतुलन उपलब्ध कराया जा सके।
इसी प्रकार पीयूष ग्रन्थि से स्रावित होने वाला वृद्धि हार्मोन शरीर की वृद्धि और विकास को नियंत्रित करता है। यदि बाल्यकाल में इस हार्मोन की कमी हो जाती है तो यह बौनापन का कारण बनता है।
नर में टेस्टोस्टेरोन तथा मादा में एस्ट्रोजन का स्रावण होता है जो यौवनारंभ से संबद्ध परिवर्तनों को प्रेरित करते हैं। इसी प्रकार अग्न्याशय द्वारा उत्पादित इन्सुलिन हार्मोन रुधिर में शर्करा स्तर को नियंत्रित करने में सहायता करता है। यदि यह उचित मात्रा में स्रावित नहीं होता है तो रुधिर में शर्करा स्तर बढ़ जाता है और कई हानिकारक प्रभाव का कारण बनता है।
(ii) घेंघा या गलगण्ड (Goiter) रोग में थायरॉइड ग्रन्थि बड़ी होकर फूल जाती है, जिससे गर्दन भी फूलकर मोटी हो जाती है। यह रोग भोजन में आयोडीन की कमी के कारण होता है।
प्रायः पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में यह रोग अधिक होता है क्योंकि वहां पानी में आयोडीन की कमी होती है।
(iii) यह शरीर के अन्दर तंत्रिका आवेगों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँचाने का कार्य करता है।
प्रश्न 6. (i) सिनेप्स किसे कहते हैं? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)
(ii) तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) के कार्य बताइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)
(iii) तंत्रिका कोशिका का नामांकित चित्र बनाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)
उत्तर—(i) दो न्यूरोन्स (Neurons) के बीच वाले सन्धि स्थानों को युग्मानुबंधन या सिनेप्स कहते हैं।
(ii) तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) के कार्य-
(1) ये कोशिकाएँ उद्दीपन या प्रेरणा संवहन के लिए विशिष्ट होती हैं।
(2) ये उद्दीपनों को संवेदी अंग से मेरुरज्जु या मस्तिष्क की ओर ले जाती हैं।
(3) तंत्रिकीय नियंत्रण द्वारा उन क्रियाओं का नियंत्रण तथा नियमन तुरन्त होता है।
(4) अनुक्रिया का प्रसारण मेरुरज्जु या मस्तिष्क से कार्यकारी अंग की ओर यह द्रुत गति से करती है।
(iii) तंत्रिका कोशिका का चित्र-
[तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) का नामांकित चित्र]

प्रश्न 7. (i) मस्तिष्क का कौनसा भाग शरीर की स्थिति तथा संतुलन का अनुरक्षण करता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)
(ii) अनैच्छिक क्रियाओं के दो उदाहरण लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)
(iii) मानव मस्तिष्क का नामांकित चित्र बनाइए। (प्रश्न बैंक; माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)
उत्तर—(i) अनुमस्तिष्क शरीर की स्थिति तथा संतुलन का अनुरक्षण करता है।
(ii) 1. लार का निकलना, 2. जलने या चुभने से हाथ को जल्दी हटा लेना, (3) आंखों का झपकना।
(iii) मानव मस्तिष्क का नामांकित चित्र-
[मानव मस्तिष्क का नामांकित चित्र]

चित्र-मानव मस्तिष्क
प्रश्न 8. (1) मानव मस्तिष्क को कितने भागों में विभेदित किया गया है? प्रत्येक के कार्यों का वर्णन कीजिए।
(2) द्रुमाशय और तंत्रिकाक्ष में अन्तर लिखिए।
उत्तर—(1) मानव मस्तिष्क को तीन भागों में विभेदित किया गया है।
(i) अग्र मस्तिष्क (Fore Brain) (ii) मध्य मस्तिष्क (Mid Brain) (iii) पश्च मस्तिष्क (Hind Brain)
(i) अग्र मस्तिष्क (Fore Brain) - यह पूरे मस्तिष्क का दो-तिहाई भाग होता है। यह मस्तिष्क का प्रमुख भाग है, इसलिए इसे 'बड़ा मस्तिष्क' भी कहा जाता है।
यह मस्तिष्क का सबसे विकसित भाग है। यह निपुणता, बुद्धिमत्ता, चेतना और स्मरण शक्ति का आधार है। हमारी पाँचों ज्ञानेन्द्रियों (आँख, नाक, कान, त्वचा और जिह्वा) का सीधा सम्बन्ध इसी से होता है। यही उनसे प्राप्त प्रेरणाओं का विश्लेषण और समन्वय करता है। ऐच्छिक क्रियाओं को कराने वाला प्रमुख तंत्र यही है।
अग्रमस्तिष्क के कार्य-
(1) यह सभी संवेदी अंगों के संदेशों को प्राप्त करता है।
(2) यह उद्दीपनों एवं क्रियाओं के बीच संतुलन करता है।
(3) यह सभी पेशियों, ग्रन्थियों व अंगों को उचित कार्यवाही का आदेश देता है।
(4) यह पिछले अनुभव और स्मृतियों के आधार पर हमारे व्यवहार में परिवर्तन लाता है।
(5) यह सभी सूचनाओं और ज्ञान को प्राप्त कर उनका संग्रह कर लेता है।
(ii) मध्य मस्तिष्क - यह दृष्टि एवं श्रवण शक्ति पर नियंत्रण का केन्द्र है।
(iii) पश्च मस्तिष्क - इसे अनुमस्तिष्क भी कहते हैं। यह शरीर का संतुलन बनाए रखता है अर्थात् यह गतियों का ठीक प्रकार से नियंत्रण करता है। हमारा चलना, दौड़ना, भागना, उठना, बैठना आदि इसी के द्वारा नियंत्रित होता है। अतः यह ऐच्छिक पेशियों के संकुचन पर नियंत्रण करता है और आन्तरिक कान के संतुलन भाग से संवेदनाएँ ग्रहण करता है।
(2) द्रुमाशय और तंत्रिकाक्ष में अन्तर-
क्र.सं. | द्रुमाशय (Dendrites) | तंत्रिकाक्ष (Axon) |
1. | कोशिकाय (Cyton) से कई शाखाएं निकलती हैं जिन्हें द्रुमाशय कहते हैं। | कोशिकाय (Cyton) से एक लम्बा प्रवर्ध निकलता है जिसे तंत्रिकाक्ष कहते हैं। |
2. | कम लम्बाई के पतले सूक्ष्म प्रवर्ध होते हैं। | जबकि ये द्रुमाशय की तुलना में आकार में बड़े व मोटे होते हैं। |
3. | यह तंत्रिका आवेग को कोशिकाय की ओर लाते हैं। | जबकि तंत्रिकाक्ष तंत्रिका आवेग को कोशिकाय से दूर अथवा तंत्रिकीय पेशी संधि पर पहुँचाते हैं। |
प्रश्न 9. (i) प्रतिवर्ती क्रिया का एक उदाहरण लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)
(ii) जंतुओं में प्रतिवर्ती चाप क्यों विकसित हुआ है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)
उत्तर- (i) प्रतिवर्ती क्रिया का उदाहरण - अचानक तेज रोशनी पर आँखों का सिकुड़ना।
(ii) जंतुओं में प्रतिवर्ती चाप का विकास - जंतुओं में प्रतिवर्ती चाप इसलिए विकसित हुआ है क्योंकि इनके मस्तिष्क के सोचने का प्रक्रम बहुत तेज नहीं है। अधिकांश जंतुओं में सोचने के लिए आवश्यक जटिल न्यूरॉन जाल या तो अल्प है या अनुपस्थित होता है। अतः वास्तविक विचार प्रक्रम की अनुपस्थिति में प्रतिवर्ती चाप का दक्ष कार्य प्रणाली के रूप में विकास हुआ है। यद्यपि जटिल न्यूरॉन जाल के अस्तित्व में आने के बाद भी प्रतिवर्ती चाप तुरंत अनुक्रिया के लिए एक अधिक दक्ष प्रणाली के रूप में कार्य करता है।
प्रश्न 10. (i) अण्डाशय द्वारा स्रावित हॉर्मोन का नाम लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)
(ii) किन्हीं दो अंतःस्रावी ग्रन्थियों का कार्य लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)
(iii) मादा मानव में अंतःस्रावी ग्रंथियों की स्थिति का नामांकित चित्र बनाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)
उत्तर- (i) अण्डाशय द्वारा स्रावित हॉर्मोन - एस्ट्रोजन
(ii) (a) पीयूष ग्रन्थि के कार्य-
(i) इससे स्रावित वृद्धि हॉर्मोन (Growth Hormone) शरीर की वृद्धि तथा शरीर के वजन को बढ़ाता है।
(ii) यह शरीर में प्रोटीन संश्लेषण को प्रभावित करता है।
(iii) वृद्धि हार्मोन शरीर को कोशिकाओं के विभाजन, हड्डियों और पेशियों तथा संयोजी ऊतकों कोलेजन एवं म्यूकोपॉलीसेकराइड के संश्लेषण प्रेरित करता है।
(b) वृषण (Testis)-
(i) वृषण द्वारा स्रावित हॉर्मोन टेस्टोस्टेरॉन है जिसे नर हॉर्मोन कहते हैं।
विज्ञान कक्षा-X 205
(ii) पुरुषों में दाढ़ी-मूँछ आना, स्वर में भारीपन, शरीर पर बालों का उगना, अस्थियों एवं पेशियों का मजबूत होना आदि द्वितीयक लैंगिक लक्षण टेस्टोस्टेरोन से प्रकट होते हैं।
(iii) यह नर लैंगिक व्यवहार को भी निर्धारित करता है। कामवासना का निर्धारण करना।
(iv) यह शुक्राणु निर्माण को उत्तेजित करता है।
(iii) मादा मानव में अंतःस्रावी ग्रंथियों की स्थिति का नामांकित चित्र-
[मादा मानव में अंतःस्रावी ग्रंथियों का नामांकित चित्र]

- हाइपोथैलमस ग्रन्थि
- पिनियल ग्रन्थि
- पीयूष ग्रन्थि
- परावटु ग्रन्थि
- अवटु ग्रन्थि
- थाइमस ग्रन्थि
- अग्न्याशय
- अधिवृक्क ग्रन्थि
- अण्डाशय