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विज्ञान (Science)हिंदी माध्यम2026-27

RBSE Class 10 Science Chapter 6 Solutions in Hindi — नियंत्रण एवं समन्वय | पासबुक हल, नोट्स

📅 अंतिम अपडेट: 2026-09-10📖 RBSE/NCERT Solutions
भाग 1 — समाधान (Solutions)

📖 1. समाधान: पाठगत एवं पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

राजस्थान बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान — सभी पाठगत (In-text) एवं अभ्यास (Exercise) प्रश्नों के सटीक एवं संपूर्ण हल।

पाठगत प्रश्न

पृष्ठ 117

प्रश्न 1. प्रतिवर्ती क्रिया तथा टहलने के बीच क्या अन्तर है?

उत्तर- प्रतिवर्ती क्रिया तथा टहलने के बीच अन्तर (Differences between Reflex Action and Walking)

क्र.सं.

प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex action)

टहलना (Walking)

1.

यह अनैच्छिक क्रिया होती है।

यह ऐच्छिक क्रिया होती है।

2.

इसमें मेरुरज्जु तथा मस्तिष्क दोनों भाग लेते हैं।

यह मस्तिष्क द्वारा नियंत्रित होती है।

3.

प्रतिवर्ती क्रिया की तीव्रता (Intensity) को परिवर्तित नहीं किया जा सकता है।

परिवर्तित किया जा सकता है।

4.

यह जीवन एवं सुरक्षात्मक महत्व रखती है।

जीवन एवं सुरक्षात्मक महत्व के अतिरिक्त विभिन्न कार्य करता है।

प्रश्न 2. दो तंत्रिका कोशिकाओं (न्यूरॉन) के मध्य अंतर्ग्रथन (सिनेप्स) में क्या होता है?

उत्तर- एक्सॉन के अंत में विद्युत आवेग कुछ रसायनों का विमोचन करता है। ये रसायन रिक्त स्थान या सिनेप्स (सिनेप्टिक दरार) को पार करते हैं और अगली तंत्रिका कोशिका की द्रुमिका में इसी तरह का विद्युत आवेग प्रारंभ करते हैं।

प्रश्न 3. मस्तिष्क का कौनसा भाग शरीर की स्थिति तथा संतुलन का अनुरक्षण करता है?

उत्तर- मस्तिष्क का अनुमस्तिष्क (Cerebellum) भाग शरीर की स्थिति तथा संतुलन का अनुरक्षण करता है।

प्रश्न 4. हम अगरबत्ती की गंध का पता कैसे लगाते हैं?

उत्तर- हम अगरबत्ती की गंध का पता नासिका में स्थित घ्राण ग्राही (Olfactory receptors) द्वारा लगाते हैं। हमारी नाक के भीतर तंत्रिकाओं के सिरों के उत्तेजन से उत्पन्न संदेश मस्तिष्क के प्रमस्तिष्क भाग तक पहुँचता है जो अगरबत्ती की गंध का ज्ञान कराता है।

प्रश्न 5. प्रतिवर्ती क्रिया में मस्तिष्क की क्या भूमिका है?

उत्तर- सामान्यतया दैहिक प्रतिवर्ती क्रियाएँ मेरुरज्जु द्वारा नियंत्रित की जाती हैं तथापि मध्य मस्तिष्क सिर, गर्दन एवं धड़ की प्रतिवर्ती क्रियाओं का नियंत्रण करता है। पश्च मस्तिष्क का मस्तिष्क पुच्छ (medulla oblongata), हृदय स्पंदन, श्वास दर, खांसना, छींकना, लार श्रवण, रुधिर दाब, वमन, पसीना आदि क्रियाओं का नियमन करता है।

पृष्ठ 121

प्रश्न 1. पादप हार्मोन क्या हैं?

उत्तर- पादप हार्मोन (Phytohormones)- पौधों में उत्पन्न विशेष प्रकार के रासायनिक पदार्थ, जो पौधों की वृद्धि, विकास एवं अनुक्रियाओं का नियमन करते हैं, पादप हार्मोन कहलाते हैं। इन्हें वृद्धि नियामक (Growth regulators) भी कहते हैं।

पादपों में मुख्यतः पाँच प्रकार के हार्मोन पाए जाते हैं- (i) ऑक्सिन, (ii) जिब्बरेलिन, (iii) साइटोकाइनिन, (iv) एब्सिसिक अम्ल (v) इथाइलीन।

प्रश्न 2. छुई-मुई पादप की पत्तियों की गति, प्रकाश की ओर प्ररोह की गति से किस प्रकार भिन्न है?

उत्तर- छुई-मुई पादप की पत्तियों की गति एवं प्रकाश की ओर प्ररोह की गति में भिन्नता-

क्र.सं.

छुई-मुई पादप की पत्तियों की गति

प्रकाश की ओर प्ररोह की गति

1.

स्पर्श करने पर छुई-मुई पादप की पत्तियों में गति होती है।

प्ररोह में गति प्रकाश के उद्दीपन से होती है।

2.

इस प्रकार की गति को स्पर्शानुकुंचन कहते हैं।

जबकि इस प्रकार की गति को प्रकाशानुवर्तन (Phototropism) कहते हैं।

3.

यह उद्दीपन की दिशा पर निर्भर नहीं होती है।

यह उद्दीपन की दिशा पर निर्भर करता है।

4.

यह कोशिकाओं में से अचानक जल निकल जाने से उत्पन्न होती है।

यह प्ररोह की दोनों ओर असमान वृद्धि से उत्पन्न होती है।

5.

यह वृद्धि गति नहीं है।

यह वृद्धि गति है।

6.

यह तीव्र गति से होती है।

यह धीमी गति से होती है।

7.

छुई-मुई पादप की पत्तियों की गति उत्क्रमणीय होती है।

जबकि प्रकाश की ओर प्ररोह की गति एक दिशा में होती है।

प्रश्न 3. एक पादप हार्मोन का उदाहरण दीजिए जो वृद्धि को बढ़ाता है।

उत्तर- ऑक्सिन (Auxin) एक पादप हार्मोन है जो वृद्धि को बढ़ाता है।

प्रश्न 4. किसी सहारे के चारों ओर एक प्रतान की वृद्धि में ऑक्सिन किस प्रकार सहायक है?

उत्तर- प्रतान (Tendril) स्पर्श के प्रति संवेदनशील है अर्थात् स्पर्शानुवर्तन (Thigmotropism) गति प्रदर्शित करता है। जब ये किसी आधार के सम्पर्क में आता है, तो इसमें स्थित ऑक्सिन स्पर्श के दूसरी ओर विसरित हो जाता है, जिससे दूसरी ओर की कोशिकाएँ अधिक विवर्धन करने लगती हैं और प्रतान विपरीत दिशा में मुड़ जाता है। इस प्रकार प्रतान सहारे के चारों ओर कुंडलित होकर वृद्धि करता है।

प्रश्न 5. जलानुवर्तन दर्शाने के लिए एक प्रयोग की अभिकल्पना कीजिए।

उत्तर- जलानुवर्तन (Hydrotropism)- जब पौधे के किसी अंग की गति जल के उद्दीपन के कारण होती है तो इसे जलानुवर्तन गति कहते हैं। जड़ें नमी की ओर बढ़ती हैं, अतः इसे धनात्मक जलानुवर्ती (Positively hydrotropic) कहते हैं।

प्रयोग- एक गमला लेकर, उसके नीचे के छेद में कॉर्क लगा देते हैं और गमले को पानी से भर देते हैं। अब

[जलानुवर्तन का प्रदर्शन]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 6 नियंत्रण एवं समन्वय चित्र 1

*(चित्र-जलानुवर्तन का प्रदर्शन)*

इसे बुरादा भरे एक बड़े बर्तन में रखते हैं तथा बुरादे में गमले से कुछ दूरी पर बीज बो देते हैं। हम देखते हैं कि कॉर्क द्वारा धीरे-धीरे बुरादे में पानी जाता है, जिससे बीज अंकुरित होने लगते हैं। अंकुरित होते हुए बीज की जड़ें गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव के विपरीत जल स्रोत की तरफ वृद्धि करती हैं। अतः स्पष्ट है कि जड़ें जलानुवर्तन गति प्रदर्शित करती हैं।

पृष्ठ 123

प्रश्न 1. जन्तुओं में रासायनिक समन्वय कैसे होता है?

उत्तर- जन्तुओं में रासायनिक समन्वय अन्तःस्रावी ग्रन्थियों द्वारा स्रावित हार्मोन द्वारा होता है। ये हार्मोन विशिष्ट ग्रन्थियों से स्रावित होते हैं तथा रासायनिक संदेशवाहकों के रूप में लक्ष्य कोशिकाओं में पहुँचते हैं और उनके कार्यों पर नियंत्रण एवं समन्वय करते हैं।

प्रश्न 2. आयोडीनयुक्त नमक के उपयोग की सलाह क्यों दी जाती है?

उत्तर- आयोडीनयुक्त नमक के उपयोग की सलाह इसलिए दी जाती है क्योंकि अवटु ग्रन्थि (थॉयराइड ग्रन्थि) को थायरॉक्सिन हार्मोन बनाने के लिए आयोडीन आवश्यक है। थायरॉक्सिन कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन तथा वसा के उपापचय का, हमारे शरीर में नियंत्रण करता है, ताकि वृद्धि के लिए उत्कृष्ट संतुलन उपलब्ध कराया जा सके। यदि हमारे आहार में आयोडीन की कमी होगी तो थायरॉक्सिन का संश्लेषण नहीं हो पायेगा और हम गॉइटर (Goiter) नामक रोग से ग्रसित हो जायेंगे।

इस बीमारी का लक्षण फूली हुई गर्दन या बाहर की ओर उभरे हुए नेत्र-गोलक हो सकते हैं। अतः इस रोग से बचने तथा शरीर में आयोडीन की कमी को दूर करने के लिए आयोडीनयुक्त नमक के उपयोग की सलाह दी जाती है।

प्रश्न 3. जब एड्रीनलीन रुधिर में स्रावित होती है तो हमारे शरीर में क्या अनुक्रिया होती है?

अथवा

एड्रीनलीन हार्मोन स्रावण से हमारे शरीर में क्या अनुक्रिया होती है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर- एड्रीनलीन (Adrenaline) हार्मोन सीधा रुधिर में स्रावित होता है एवं शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचा दिया जाता है। एड्रीनलीन हृदय सहित लक्ष्य अंगों या विशिष्ट ऊतकों पर कार्य करता है। परिणामस्वरूप हृदय की धड़कन बढ़ जाती है ताकि पेशियों को अधिक O2O_{2} की आपूर्ति हो सके। पाचन तन्त्र तथा त्वचा में रुधिर की आपूर्ति कम हो जाती है क्योंकि इन अंगों की छोटी धमनियों के आसपास की पेशियाँ सिकुड़ जाती हैं। यह रुधिर की दिशा हमारी कंकाल पेशियों की ओर कर देता है।

डायाफ्राम तथा पसलियों की पेशी के संकुचन से श्वसन दर भी बढ़ जाती है। ये सभी अनुक्रियाएँ मिलकर शरीर को संकट से निपटने के लिए तैयार करती हैं।

प्रश्न 4. मधुमेह के कुछ रोगियों की चिकित्सा इंसुलिन का इंजेक्शन देकर क्यों की जाती है?

उत्तर- इंसुलिन हार्मोन का उत्पादन अग्न्याशय में होता है। यह रुधिर में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में सहायता करता है। यदि यह उचित मात्रा में स्रावित नहीं होता है तो रुधिर में शर्करा का स्तर बढ़ जाता है, जिस कारण शरीर पर अनेक हानिकारक प्रभाव पड़ते हैं।

इसलिए मधुमेह के कुछ रोगियों की चिकित्सक इंसुलिन का इंजेक्शन देते हैं ताकि रुधिर में शर्करा का स्तर नियंत्रित रह सके।

हार्मोन का स्रावण एक परिशुद्ध मात्रा में होना चाहिए। इसके लिए हमें एक क्रियाविधि की जरूरत है। इसमें स्रावित होने वाले हार्मोन का समय और मात्रा का नियंत्रण पुनर्भरण क्रियाविधि से किया जाता है। जैसे रुधिर में शर्करा के स्तर में वृद्धि होती है तो इसे अग्न्याशय की कोशिका संसूचित कर लेती है तथा इसकी अनुक्रिया में ज्यादा इंसुलिन स्रावित करती है। जब रुधिर में शर्करा स्तर कम हो जाता है तो इंसुलिन का स्रावण कम हो जाता है।

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौन-सा पादप हार्मोन है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25; माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)

(a) इंसुलिन
(b) थायरॉक्सिन
(c) एस्ट्रोजन
(d) साइटोकाइनिन

उत्तर-(d) साइटोकाइनिन।

प्रश्न 2. दो तंत्रिका कोशिका के मध्य खाली स्थान को कहते हैं- (प्रश्न बैंक)

(a) द्रुमिका (b) सिनेप्स (c) एक्सॉन (d) आवेग
(a) सोचने के लिए (b) हृदय स्पंदन के लिए
(c) शरीर का संतुलन बनाने के लिए (d) उपर्युक्त सभी

उत्तर-(d) उपर्युक्त सभी।

प्रश्न 4. हमारे शरीर में ग्राही का क्या कार्य है? ऐसी स्थिति पर विचार कीजिए जहाँ ग्राही उचित प्रकार से कार्य नहीं कर रहे हों। क्या समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं?

उत्तर- हमारे शरीर में बाह्य वातावरण में होने वाले विभिन्न प्रकार के उद्दीपनों को ग्रहण करने के लिए विशेष प्रकार की संरचनाएँ पाई जाती हैं, जिन्हें ग्राही अंग या संवेदी अंग या ज्ञानेन्द्रियाँ (Sense organs) कहते हैं। ग्राही अंगों द्वारा उद्दीपनों को ग्रहण करने के पश्चात् संवेदी तंत्रिकाओं द्वारा केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र को पहुँचाया जाता है। हमें गंध का ज्ञान घ्राणग्राही द्वारा, स्वाद का ज्ञान स्वादग्राही द्वारा, स्पर्श का ज्ञान त्वक्ग्राही (त्वचा) द्वारा, ध्वनि तथा संतुलन का ज्ञान श्रवणोसन्तुलनग्राही द्वारा होता है।

यदि ग्राही अपना कार्य सामान्य रूप से नहीं करते हैं, तो उपर्युक्त संवेदनाओं को ग्रहण नहीं किया जा सकेगा, जिससे कभी-कभी विषम परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। जैसे-गर्म वस्तु पर हाथ लगने से यदि ताप की पीड़ा का उद्दीपन संवेदी तंत्रिकाओं द्वारा केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र को नहीं मिलेगा तो हाथ जल सकता है।

सामान्य स्थिति में प्रतिवर्ती क्रिया के फलस्वरूप गर्म वस्तु पर हाथ लगने पर ताप का उद्दीपन संवेदी तंत्रिका द्वारा मेरुरज्जु में पहुँचता है और चालक तंत्रिका द्वारा सम्बन्धित कार्यकारी पेशी को पहुँचा दिया जाता है। कार्यकारी पेशी में संकुचन के फलस्वरूप हाथ गर्म वस्तु से हट जाता है।

प्रश्न 5. एक तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) की संरचना बनाइए तथा इसके कार्यों का वर्णन कीजिए।

अथवा

तंत्रिका कोशिका का नामांकित चित्र बनाकर इसके कार्य लिखिए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर-

[तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) की संरचना]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 6 नियंत्रण एवं समन्वय चित्र 2

चित्र-तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) की संरचना

तंत्रिका कोशिका- यह संदेशों का संवहन करने वाली मूल इकाई है। यह विशेष रूप से लम्बी होती है। एक तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) के द्रुमाकृतिक सिरे द्वारा सूचनाएँ उपार्जित की जाती हैं और एक रासायनिक क्रिया द्वारा यह एक विद्युत आवेग पैदा करती है। यह आवेग द्रुमिका से कोशिकाकाय (Cyton) तक जाता है और तब तंत्रिकाक्ष (Axon) में होता हुआ इसके अन्तिम सिरे तक पहुँच जाता है।

एक्सॉन के अन्त में विद्युत आवेग कुछ रसायनों का विमोचन करता है। ये रसायन रिक्त स्थान या सिनेप्स (Synapse) को पार करते हैं और अगली तंत्रिका कोशिका की द्रुमिका में इसी तरह का विद्युत आवेग प्रारम्भ करते हैं। इसी तरह का एक अंतर्ग्रथन (सिनेप्स) अन्ततः ऐसे आवेगों को तंत्रिका कोशिका से अन्य कोशिकाओं, जैसे कि पेशी कोशिकाओं या ग्रन्थि तक ले जाता है।

इस प्रकार कोई भी तंत्रिका कोशिका सीधी दूसरी तंत्रिका कोशिका से जुड़ी हुई नहीं होती है इनके मध्य कुछ रिक्त स्थान होता है, जिसमें बहुत सी सिनेप्स का संवहन होता है। इसे अन्तर्ग्रथन कहते हैं।

तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) के कार्य-

(i) ये उद्दीपनों को संवेदी अंग से मेरुरज्जु या मस्तिष्क तक ले जाती हैं।

(ii) ये कोशिकाएँ उद्दीपन या प्रेरणा संवहन के लिए विशिष्ट होती हैं।

(iii) तंत्रिकीय नियंत्रण द्वारा उन क्रियाओं का नियंत्रण तथा नियमन तुरन्त होता है।

(iv) अनुक्रिया का प्रसारण मेरुरज्जु या मस्तिष्क से कार्यकारी अंग की ओर यह द्रुत गति से करती है।

प्रश्न 6. पादप में प्रकाशानुवर्तन किस प्रकार होता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2025-26)

अथवा

पादपों में प्रकाशानुवर्तन गतियों को समझाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)

उत्तर- प्रकाशानुवर्तन (Phototropism)- पादप प्ररोह का प्रकाश की ओर गति करना प्रकाशानुवर्तन कहलाता है। प्ररोह तंत्र का प्रकाश के प्रति धनात्मक अनुवर्तन होता है और जड़ें ऋणात्मक अनुवर्तन दर्शाती हैं। जब वृद्धि करता पादप प्रकाश को संसूचित (detect) करता है, एक हॉर्मोन जिसे ऑक्सिन कहते हैं, प्ररोह के अग्रभाग (टिप) में संश्लेषित होता है तथा कोशिकाओं की लंबाई में वृद्धि में सहायक होता है। जब पादप पर एक ओर से प्रकाश आ रहा है तब ऑक्सिन विसरित होकर प्ररोह के छाया वाले भाग में आ जाता है। प्ररोह की प्रकाश से दूर वाली दिशा (साइड) में ऑक्सिन का सान्द्र कोशिकाओं की लंबाई में वृद्धि के लिए उद्दीपित करता है। अतः पादप प्रकाश की ओर मुड़ता हुआ दिखाई देता है।

प्रश्न 7. मेरुरज्जु आघात में किन संकेतों के आने में व्यवधान होगा?

उत्तर- मेरुरज्जु (Spinal cord) आघात में निम्न संकेतों के आने में व्यवधान होगा-

(1) संवेदी आवेगों को मस्तिष्क की ओर ले जाने हेतु मार्ग प्रदान करने में व्यवधान होगा।

(2) प्रेरक आवेगों को मस्तिष्क से ले जाने हेतु मार्ग प्रदान करने में व्यवधान होगा।

(3) ऐसी प्रतिवर्ती क्रियाओं (Reflex actions) के नियमन व संचालन में व्यवधान होगा जिनमें मस्तिष्क सम्बन्धित नहीं होता है।

प्रश्न 8. पादप में रासायनिक समन्वय किस प्रकार होता है?

उत्तर- पादप में रासायनिक समन्वय हॉर्मोन द्वारा होता है। पादपों में उद्दीपित कोशिकाएँ विभिन्न हॉर्मोन्स का स्रवण करती हैं। विभिन्न पादप हॉर्मोन वृद्धि, विकास तथा पर्यावरण के प्रति अनुक्रिया के समन्वय में सहायता करते हैं। इन हॉर्मोन का संश्लेषण का स्थान इनके क्रिया-क्षेत्र से दूर होता है और साधारण विसरण द्वारा वे क्रिया-क्षेत्र तक पहुँच जाते हैं। उदाहरण के लिए वृद्धि हॉर्मोन पादप प्ररोह के शीर्ष भाग में संश्लेषित होकर विभिन्न भागों में पहुँचता है, जो कि कोशिका प्रवर्धन, शीर्ष प्रभावन, जड़ों की वृद्धि में कमी उत्पन्न करता है।

इसी प्रकार साइटोकाइनिन हॉर्मोन कोशिका विभाजन को उत्प्रेरित करता है। एब्सिसिक अम्ल वृद्धि का संदमन करने वाला हॉर्मोन होता है। यह पतझड़ के मौसम में पत्तियों के गिरने की दर को बढ़ाता है। एथिलीन हॉर्मोन फलों को पकने में सहायता करता है।

प्रश्न 9. एक जीव में नियंत्रण एवं समन्वय के तंत्र की क्या आवश्यकता है?

उत्तर- जीवधारियों का शरीर कोशिकाओं का बना होता है। ये कोशिकाएँ समूह बनाते हुए विभेदित होकर ऊतक बनाती हैं और विभिन्न ऊतक मिलकर अंग बनाते हैं। विभिन्न अंग अपना-अपना कार्य सही समय पर करते हैं ताकि वे कारगर रूप में कार्य कर सकें। अतः जरूरी है कि उन पर किसी प्रकार का नियंत्रण हो ताकि वे समन्वय के साथ कार्य कर सकें।

उदाहरण के लिए, जब हम खाना खाते हैं तब हमारी आँखें देखती हैं कि भोजन कहाँ रखा हुआ है, नाक भोजन की गंध का पता लगा लेती है, हमारे हाथ भोजन को उठाकर मुँह में लाते हैं और हमारे जबड़ों की पेशियाँ दाँतों की सहायता करती हैं ताकि भोजन चबाया जा सके। ये सारे क्रियाकलाप एक समन्वित विधि से होते हैं और इनमें से कोई एक क्रियाकलाप किसी कारण नहीं हो पाता तो पोषण की प्रक्रिया में व्यवधान आ जाता है।

अतः जीव में नियंत्रण एवं समन्वय तंत्र की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 10. अनैच्छिक क्रियाएँ तथा प्रतिवर्ती क्रियाएँ एक-दूसरे से किस प्रकार भिन्न हैं?

उत्तर- अनैच्छिक एवं प्रतिवर्ती क्रियाओं में भिन्नता

क्र.सं.

अनैच्छिक क्रियाएँ (Involuntary Actions)

प्रतिवर्ती क्रियाएँ (Reflex Actions)

1.

ये मध्य मस्तिष्क व पश्च मस्तिष्क (Autonomous nervous system) द्वारा नियंत्रित होती हैं।

ये क्रियाएँ मेरुरज्जु (केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र) (Central nervous system) द्वारा नियंत्रित होती हैं।

2.

ये अचानक नहीं होती हैं।

ये अचानक होती हैं।

3.

कभी-कभी उद्दीपन व अनुक्रिया के बीच गेप (Gap) होता है।

ये तुरन्त होती हैं अर्थात् इनमें गेप (Gap) नहीं होता है।

4.

ये अनैच्छिक पेशियों (Smooth muscles) द्वारा होती हैं।

ये ऐच्छिक पेशियों तथा ग्रन्थियों द्वारा होती हैं।

5.

ये बाह्य प्रतिबन्धों द्वारा प्रभावित नहीं होती हैं।

ये प्रतिबन्धित (Conditioned) हो सकती हैं।

6.

ये शरीर के भीतरी अंगों में होती है।

ये बाहरी एवं चोटिल स्थान से नियंत्रित होती है।

7.

उदाहरण-हृदय की क्रिया।

उदाहरण-सूई चुभ जाने पर हाथ को झटके से पीछे खींचना।

प्रश्न 11. जन्तुओं में नियंत्रण एवं समन्वय के लिए तंत्रिका तथा हार्मोन क्रियाविधि की तुलना तथा व्यतिरेक (Contrast) कीजिए।

उत्तर- जन्तुओं में नियंत्रण एवं समन्वय के लिए तंत्रिका तथा हार्मोन क्रियाविधि की तुलना एवं व्यतिरेक निम्न प्रकार है-

क्र.सं.

तंत्रिका क्रियाविधि

हार्मोन क्रियाविधि

1.

यह केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र, परिधीय तंत्रिका तंत्र के मध्य तंत्रिकीय आवेगों से मिलकर बनती है।

यह अन्तःस्रावी ग्रन्थियों द्वारा स्रावित हॉर्मोन्स से होती है।

2.

इसमें प्रतिक्रिया समय अत्यन्त कम होता है।

इसमें प्रतिक्रिया समय लम्बा होता है।

3.

तंत्रिकीय आवेग कार्य में विशिष्टीकृत नहीं होते हैं।

प्रत्येक हार्मोन का विशिष्ट कार्य होता है।

4.

इसमें सूचना का प्रवाह तीव्र होता है।

इसमें सूचना का प्रवाह धीमी गति से होता है।

5.

तंत्रिकीय आवेग का उत्पन्न होना उद्दीपन की उपस्थिति पर निर्भर करता है।

हार्मोन का स्रवण पुनर्भरण क्रियाविधि द्वारा नियंत्रित होता है।

6.

इसके द्वारा वृद्धि एवं विकास का नियंत्रण अल्प होता है।

यह तंत्र वृद्धि एवं विकास को नियंत्रित करता है।

7.

संवेदीग्राही उपस्थित

संवेदीग्राही अनुपस्थित

प्रश्न 12. छुई-मुई पादप में गति तथा हमारी टाँग में होने वाली गति के तरीके में क्या अन्तर है?

उत्तर- छुई-मुई पादप में गति एवं हमारी टाँग में होने वाली गति में अन्तर

क्र.सं.

छुई-मुई पादप में गति

टाँग में गति

1.

छुई-मुई पादप में गति आघात करने या स्पर्श करने के फलस्वरूप होती है।

टाँग में गति हमारी इच्छाशक्ति एवं आवश्यकता के अनुसार होती है।

2.

इसमें सूचना स्थानान्तरण हेतु विशिष्ट ऊतक का अभाव होता है।

इसमें सूचना स्थानान्तरण हेतु तंत्रिकाएँ भाग लेती हैं अर्थात् तंत्रिकाएँ टाँग की गति के लिए संदेश लेकर जाती हैं।

3.

यह गति पर्णवृन्ततल्प (पलवीनस) की मृदूतक कोशिकाओं के श्लथ (Flaccid) होने के कारण होती है।

टाँग को मोड़ना एवं फैलाना पेशियों की सहायता से किया जाता है।

4.

छुई-मुई पादप में पाई जाने वाली गति को स्पर्शानुकुंचन गति कहते हैं।

टाँग में होने वाली गति को ऐच्छिक गति कहते हैं।

5.

पादप कोशिकाओं में गति हेतु विशिष्ट प्रोटीन नहीं होते हैं।

पेशी कोशिकाओं में गति हेतु विशिष्ट प्रोटीन पाये जाते हैं।

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भाग 2 — नोट्स (Notes & Summary)

📝 2. नोट्स: पाठ सार (Key Concepts & Summary)

महत्वपूर्ण परिभाषाएं, रासायनिक समीकरण, नियम, सूत्र एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।

पाठ सार

(1) हमारे शरीर में नियंत्रण एवं समन्वय का कार्य तंत्रिका तंत्र तथा अन्तःस्रावी तंत्र द्वारा किया जाता है।

(2) बहुकोशिकीय जीवों में गति नियंत्रण एवं समन्वय तंत्रिका तथा पेशी ऊतक द्वारा किया जाता है।

(3) तंत्रिका तंत्र हमारी ज्ञानेन्द्रियों द्वारा सूचना प्राप्त करता है। यह कार्य ज्ञानेन्द्रियों में स्थित तंत्रिका कोशिकाओं के विशिष्टीकृत सिरों या ग्राहियों द्वारा किया जाता है।

(4) तंत्रिका ऊतक सूचनाओं को विद्युत आवेग के द्वारा शरीर के एक भाग से दूसरे भाग तक भेजता है।

(5) न्यूरोन्स (Neurons) - तंत्रिका तंत्र का निर्माण तंत्रिका कोशिकाओं अथवा न्यूरोन्स द्वारा होता है। यह तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है।

(6) न्यूरोन्स के तीन भाग होते हैं -

(i) कोशिकाकाय (सोमा) - यह कोशिका का प्रमुख भाग होता है। जिसमें एक केन्द्रक तथा कोशिकाद्रव्य पाया जाता है।

(ii) द्रुमिकाएँ (Dendrites) - ये सूचनाएँ उपार्जित करते हैं।

(iii) एक्सॉन (Axon) - जिससे होकर सूचनाएँ विद्युत आवेश की तरह यात्रा करती हैं।

(7) प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex action) - किसी गर्म वस्तु को छूने अथवा सुई या कांटा चुभने पर हम तुरन्त अपने हाथ व पैर को हटाते हैं। किसी उद्दीपन के प्रति इस प्रकार की अचानक होने वाली प्रतिक्रिया को प्रतिवर्ती क्रिया कहते हैं।

(8) प्रतिवर्ती क्रिया में भाग लेने वाली आगत तंत्रिका, निर्गत तंत्रिका तथा मेरुरज्जु मिलकर प्रतिवर्ती चाप बनाते हैं।

(9) मनुष्य में तंत्रिका तंत्र दो प्रकार का होता है -

(i) केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) - यह तंत्र दो अंगों मस्तिष्क (Brain) व मेरुरज्जु (Spinal Cord) से मिलकर बना होता है। ये शरीर के सभी भागों से सूचनाएँ प्राप्त करते हैं तथा इनका समाकलन करते हैं।

(ii) परिधीय तंत्रिका तंत्र (Peripheral Nervous System) - मस्तिष्क से निकलने वाली कपाल तंत्रिकाएँ तथा मेरुरज्जु से निकलने वाली मेरु तंत्रिकाएँ (Spinal nerves) मिलकर परिधीय तंत्रिका तंत्र का निर्माण करती हैं।

(10) परिधीय तंत्रिका तंत्र दो प्रकार का होता है -

(i) स्वायत्त तंत्रिका तंत्र, (ii) कायिक तंत्रिका तंत्र

(11) मनुष्य के मस्तिष्क को तीन भागों में विभेदित किया गया है -

(i) अग्र मस्तिष्क (Fore Brain) - मस्तिष्क का मुख्य सोचने वाला भाग है। इसमें विभिन्न ग्राही से संवेदी आवेग (सूचनाएँ) प्राप्त करने के लिए क्षेत्र होते हैं। अग्र मस्तिष्क के अलग-अलग क्षेत्र सुनने, सूंघने, देखने आदि के लिए विशिष्टीकृत हैं।

(ii) मध्य मस्तिष्क (Mid Brain) - अनेक अनैच्छिक क्रियाएँ नियंत्रित करता है।

(iii) पश्च मस्तिष्क (Hind Brain) - यह ऐच्छिक क्रियाओं की परिशुद्धि तथा शरीर की संस्थिति तथा संतुलन के लिए उत्तरदायी है।

(12) तंत्रिकाएँ (Nerves) - कार्य के आधार पर तीन प्रकार की होती हैं -

(i) संवेदी तंत्रिकाएँ (Sensory Nerves) - ऐसी तंत्रिकाएँ जो तंत्रिकीय आवेग को संवेदी अंगों से मस्तिष्क की ओर ले जाती हैं, संवेदी तंत्रिकाएँ कहलाती हैं।

(ii) प्रेरक तंत्रिकाएँ (Motor Nerves) - ऐसी तंत्रिकाएँ जो तंत्रिकीय आवेग को मस्तिष्क से अथवा मेरुरज्जु से अपवाहक अंगों (Effector organs) तक ले जाती हैं, उन्हें चालक या प्रेरक तंत्रिकाएँ कहते हैं।

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(iii) मिश्रित तंत्रिकाएँ (Mixed Nerves) - ऐसी तंत्रिकाएँ जो संवेदी व प्रेरक दोनों के समान कार्य करती हैं, मिश्रित तंत्रिकाएँ कहलाती हैं।

(13) तंत्रिका आवेग (Nerve Impulse) - उद्दीपन के कारण तंत्रिका कोशिकाओं का उत्तेजित होना तंत्रिका आवेग कहलाता है।

(14) युग्मानुबंधन (Synaps) - वह सम्पर्क बिन्दु जो एक न्यूरॉन के एक्सॉन की अन्य शाखाओं एवं दूसरे न्यूरॉन के डेंड्राइटों के बीच बनता है। युग्मानुबंधन कहलाता है।

(15) उद्दीपक - वातावरण में परिवर्तन जिनके प्रति जीव प्रतिक्रिया दर्शाते हैं और सक्रिय रहते हैं, उद्दीपक कहलाते हैं। उद्दीपक के प्रति जीवों की अनुक्रिया प्राय: उनके शरीर अंग की किसी गति के रूप में होती है।

(16) मस्तिष्क हड्डियों के एक बॉक्स में अवस्थित होता है। बॉक्स के अन्दर तरलपूरित गुब्बारे में मस्तिष्क होता है जो प्रघात अवशोषक उपलब्ध कराता है। इसी प्रकार मेरुदण्ड मेरुरज्जु की सुरक्षा करता है।

(17) पादप दो भिन्न प्रकार की गतियाँ दर्शाते हैं -

(i) वृद्धि पर आश्रित गति (ii) वृद्धि से मुक्त गति।

(18) पादप कोशिकाएँ जल की मात्रा में परिवर्तन करके अपनी आकृति बदल लेती हैं, परिणामस्वरूप फूलने या सिकुड़ने में उनका आकार बदल जाता है।

(19) कंपानुकुंचनी गति - बलकृत उत्तेजना से यह गति होती है। माइमोसा पूडिका (छुई-मुई) के पर्ण वृन्त फूले हुए होते हैं, जिसे पर्णवृन्त तल्प कहते हैं। इनमें प्रेरक कोशिकाओं पर दाब पड़ते ही जल निकल जाने से, कोशिकाओं की स्फीत अवस्था समाप्त हो जाने से, श्लथ हो जाने से पत्तियाँ झुक जाती हैं। दाब हटने पर कुछ समय बाद यह वापस मूल अवस्था में आ जाती हैं।

(20) प्रकाश अनुवर्तन गति (Phototropism) - प्रकाश के प्रभाव से पादप अंग गति करते हैं। तना प्रकाश की ओर गति करता है अतः धनात्मक प्रकाश अनुवर्तक होता है। जड़ें प्रकाश से दूर की ओर गति करती हैं। अतः ऋणात्मक प्रकाश अनुवर्तक होती हैं।

(21) गुरुत्वानुवर्तन गति (Geotropism) - तना सदैव गुरुत्वाकर्षण से दूर अर्थात् ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्ती होता है जबकि जड़ें सदैव गुरुत्वाकर्षण बल की ओर वृद्धि करती हैं अतः धनात्मक गुरुत्वानुवर्ती होती हैं।

(22) जलानुवर्तन गति (Hydrotropism) - जड़ें सदैव जल की ओर अर्थात् धनात्मक जलानुवर्ती होती हैं परन्तु तना जल से दूर अर्थात् ऋणात्मक जलानुवर्ती होता है।

(23) स्पर्शानुवर्तन (Thigmotropism) - यह गति स्पर्श या सम्पर्क के कारण प्रेरित होती है। इससे पौधे का वह भाग जो स्पर्श में नहीं रहता, अधिक वृद्धि करता है, जैसे-मटर का प्रतान। प्रतान में वृद्धि के कारण कुंडली बन जाती है।

(24) रसायन अनुवर्ती गति (Chemotropism) - यदि गति रसायन उद्दीपन के कारण होती है, तो उसे रसायन अनुवर्ती गति कहते हैं। जैसे-पराग नली का बीजाण्ड की ओर वृद्धि करना।

(25) रासायनिक समन्वय पादप और जंतु दोनों में देखा जाता है।

(26) पादप हार्मोन (Phytohormones) - वृद्धि को नियंत्रित व संचालित करने वाले कुछ रासायनिक पदार्थ होते हैं जो पादपों के द्वारा संश्लेषित किए जाते हैं। इन रासायनिक पदार्थों को पादप हार्मोन कहते हैं। ये निम्न प्रकार के होते हैं-

(i) ऑक्सिन (ii) जिब्बेरेलिन (iii) साइटोकाइनिन

(27) वृद्धि निरोधक पदार्थ (Growth Inhibitor Substance) - पादप वृद्धि हार्मोन पौधों की वृद्धि को प्रेरित करते हैं, परन्तु कुछ ऐसे भी रसायन हैं जो वृद्धि को संदमित करते हैं। ऐसे पदार्थों को वृद्धि निरोधक पदार्थ कहते हैं। उदाहरण-एब्सिसिक अम्ल।

(28) अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ (Endocrine glands) - ये ग्रन्थियाँ अपना स्राव सीधे रक्त में छोड़ती हैं क्योंकि इनमें नलिका का अभाव होता है, इसलिए इन्हें नलिकाविहीन ग्रन्थियाँ भी कहते हैं। इन ग्रन्थियों के स्राव को हार्मोन कहते हैं।

(29) हार्मोन (Hormone) - ये अन्तःस्रावी ग्रन्थियों से स्रावित रासायनिक पदार्थ है जिसे सीधा रक्त में स्रावित किया जाता है। यह शरीर के विभिन्न अंगों में पहुँचकर कार्यों को प्रभावित करते हैं।

(30) मनुष्य की अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ - (i) पीयूष ग्रन्थि (ii) थाइरॉइड ग्रन्थि (iii) पैराथाइरॉइड ग्रन्थि (iv) अधिवृक्क या एड्रीनल ग्रन्थि (v) थाइमस ग्रन्थि (vi) पीनियल बॉडी (vii) लैंगरहैन्स की द्वीपिकाएँ (अग्न्याशय) (viii) वृषण एवं अण्डशय।

(31) पीयूष ग्रन्थि से निकलने वाले एक हार्मोन को वृद्धि हार्मोन (Growth Hormone) कहते हैं। यह हार्मोन शरीर की वृद्धि और विकास को नियंत्रित करता है। यदि बाल्यकाल में इस हार्मोन की कमी हो जाती है तो व्यक्ति बौना रह जाता है।

(32) वृषण एवं अण्डाशय (Testis and Ovary)- इनसे स्रावित होने वाले हार्मोन को क्रमशः नर हार्मोन (टेस्टोस्टेरॉन) एवं मादा हार्मोन (एस्ट्रोजन) कहते हैं। टेस्टोस्टेरॉन नर में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का विकास करता है जबकि एस्ट्रोजन मादा में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों का नियमन करता है।

(33) थायराइड ग्रन्थि (Thyroid gland)- इसके द्वारा स्रावित हार्मोन थायरॉक्सिन कहलाता है। थायरॉक्सिन हार्मोन के संश्लेषण हेतु थायराइड ग्रन्थि को आयोडीन की आवश्यकता होती है। भोजन में आयोडीन की कमी से गॉइटर नामक रोग हो जाता है।

थायरॉक्सिन कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन तथा वसा के उपापचय पर नियंत्रण रखता है।

(34) इंसुलिन हार्मोन- इसका निर्माण लैंगरहेन्स के द्वीप (अग्न्याशय) के द्वारा किया जाता है। इस हार्मोन की कमी से मधुमेह रोग हो जाता है।

(35) हार्मोन की क्रिया को पुनर्भरण क्रियाविधि नियंत्रित करती है।

(36) हार्मोन जीव के एक भाग में उत्पन्न होते हैं तथा दूसरे भाग में इच्छित प्रभाव पाने के लिए गति करते हैं।

(37) एड्रीनल ग्रन्थि एक जोड़ी के रूप में पाई जाती है जो वृक्कों के ऊपर टोपी के रूप में पाई जाती है। इससे स्रावित हार्मोन का नाम एड्रीनेलीन है।

(38) एड्रीनेलीन हार्मोन के प्रभाव से हृदय स्पंदन दर, रुधिर दाब आधार उपापचय दर तथा रक्त में ग्लूकोज की मात्रा सब बढ़ जाते हैं। इस हार्मोन के प्रभाव से रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

भाग 3 — परीक्षा उपयोगी प्रश्न (Important Q&A)

3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Important Questions)

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs), अतिलघूत्तरात्मक, लघूत्तरात्मक एवं निबंधात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न-

प्रश्न 1. कौन-सी अंतःस्रावी ग्रंथि रक्त में शर्करा स्तर का नियमन करती है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2026)

(अ) थाइमस ग्रंथि (ब) थायरॉइड ग्रंथि (स) एड्रीनल ग्रंथि (द) अग्न्याशय
(अ) पादप में (ब) जंतु में (स) पादप व जंतु में (द) उपरोक्त में से कोई नहीं

प्रश्न 3. तंत्रिका कोशिका से निकली छोटी-छोटी धागे जैसी शाखाओं को क्या कहते हैं?

(अ) डेंड्राइट (द्रुमाश्म) (ब) सिनेप्स (स) रेनवियर (द) एक्सॉन
(अ) तंत्रिका तंत्र (ब) अंतःस्रावी तंत्र (स) दोनों (द) कोई नहीं

प्रश्न 5. परिधीय तंत्रिका तंत्र किससे मिल के बना होता है— (प्रश्न बैंक)

(अ) कपाल तंत्रिकाएँ (ब) मेरुरज्जु तंत्रिकाएँ (स) दोनों (द) कोई नहीं
(अ) गुरुत्वानुवर्तन (ब) प्रकाशानुवर्तन (स) जलानुवर्तन (द) रसायन अनुवर्तन

प्रश्न 7. मटर के प्रतान आधार पर या सहारे से लिपट जाते हैं, यह किसका अच्छा उदाहरण है—

(अ) अनुकुंचन गतियाँ (ब) रसानुवर्तन (स) स्पर्शानुवर्तन (द) प्रकाशानुवर्तन
(अ) पत्ती के ऊतक की क्षति होती है। (ब) पौधे में स्नायु तंत्र होता है।
(स) पत्तियाँ कोमल होती हैं। (द) पर्णाधार पर स्फीती दाब बदलता है।

प्रश्न 9. पत्तियों का मुरझाना निम्न में से किसके प्रभाव से होता है—

(अ) एब्सिसिक अम्ल (ब) ऑक्सिन (स) साइटोकाइनिन (द) जिब्बेरेलिन
(अ) साइटोकाइनिन (ब) ऑक्सिन (स) जिब्बेरेलिन (द) एब्सिसिक अम्ल

प्रश्न 11. मस्तिष्क का मुख्य सोचने वाला भाग है—

(अ) अनुमस्तिष्क (ब) अग्रमस्तिष्क (स) मध्य मस्तिष्क (द) पश्च मस्तिष्क
(अ) ऑक्सिन (ब) जिब्बेरेलिन (स) साइटोकाइनिन (द) इथाइलीन

प्रश्न 13. एड्रीनल हॉर्मोन स्रावित किया जाता है—

(अ) अवटुग्रंथि (ब) अग्न्याशय (स) अधिवृक्क ग्रंथि (द) वृषण
(अ) इंसुलिन (ब) थायरॉक्सिन (स) टेस्टोस्टेरॉन (द) वृद्धि हॉर्मोन

प्रश्न 15. प्रतिवर्ती क्रिया है—

(अ) उद्दीपन \rightarrow संवेदी \rightarrow प्रेरक (मोटर) \rightarrow प्रतिक्रिया
(ब) उद्दीपन \rightarrow मोटर \rightarrow संवेदी \rightarrow प्रतिक्रिया
(स) ग्रहण \rightarrow मोटर \rightarrow संवेदी \rightarrow प्रतिक्रिया
(द) संवेदी \rightarrow उद्दीपन \rightarrow मोटर \rightarrow प्रतिक्रिया

प्रश्न 16. आयोडीन की कमी से कौनसा रोग होने की सम्भावना है—

(अ) जुकाम (ब) मधुमेह (स) गॉइटर (द) रतौंधी
(अ) थायरॉक्सिन (ब) एस्ट्रोजन (स) इंसुलिन (द) एड्रीनलिन

18. 'इंसुलिन' का कार्य है-

(अ) लैंगिक अंगों का विकास
(ब) रक्त में शर्करा स्तर का नियमन
(स) वृद्धि प्रेरित करना
(द) हार्मोन स्राव को नियंत्रित करना

19. निम्न में से कौनसी अन्तःस्रावी ग्रन्थि है जिसकी आकृति HH के समान है जो मानव के गले/कंठ में स्थित होती है-

(अ) थायराइड ग्रन्थि
(ब) पीयूष ग्रन्थि
(स) एड्रीनल ग्रन्थि
(द) पीनियल ग्रन्थि

20. टेस्टोस्टेरोन तथा एस्ट्रोजन सम्बन्धित हैं-

(अ) शर्करा स्तर नियमन
(ब) पाचन क्रिया से
(स) यौवनारम्भ से
(द) उत्सर्जन क्रिया से

21. मधुमेह रोग किस हार्मोन की कमी से होता है?

(अ) इंसुलिन
(ब) टेस्टोस्टेरोन
(स) एस्ट्रोजन
(द) एड्रीनलिन

22. इंसुलिन हार्मोन स्रावित किया जाता है-

(अ) आमाशय से
(ब) अधिवृक्क ग्रन्थि से
(स) थायराइड ग्रन्थि से
(द) अग्न्याशय से

23. निम्नलिखित में से कौनसा पादप हार्मोन है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)

(अ) जिब्बेरेलिन
(ब) एस्ट्रोजन
(स) इंसुलिन
(द) थायरॉक्सिन

24. कोशिका विभाजन को कौनसा हार्मोन प्रेरित करता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)

(अ) एब्सिसिक अम्ल
(ब) टेस्टोस्टेरोन
(स) ऑक्सिन
(द) साइटोकाइनिन

25. अवटुग्रन्थि को थायरॉक्सिन हार्मोन बनाने के लिए आवश्यक है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022; प्रश्न बैंक)

(अ) सोडियम
(ब) पोटेशियम
(स) आयोडीन
(द) मैग्नीशियम

26. सभी अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण मस्तिष्क का कौनसा भाग करता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022; प्रश्न बैंक)

(अ) मेडुला
(ब) अग्रमस्तिष्क
(स) प्रमस्तिष्क
(द) अनुमस्तिष्क

27. अन्तःस्रावी ग्रन्थियों के स्राव कहलाते हैं-

(अ) फीरामोन
(ब) एन्जाइम
(स) हार्मोन
(द) म्यूकस

28. अन्तःस्रावी ग्रन्थियां हैं-

(अ) नलिका युक्त ग्रन्थियां
(ब) अम्लीय ग्रन्थियां
(स) क्षारीय ग्रन्थियां
(द) नलिका रहित ग्रन्थियां

29. निम्न में से बहिस्रावी ग्रन्थि है-

(अ) पीयूष ग्रन्थि
(ब) थाइमस
(स) थायराइड
(द) स्वेद ग्रन्थि

30. पीयूष ग्रन्थि पाई जाती है-

(अ) मस्तिष्क में
(ब) श्वासनली में
(स) जननांगों में
(द) अग्न्याशय में

31. निम्न में से कौनसा पादप हार्मोन है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)

(अ) इंसुलिन
(ब) थायरॉक्सिन
(स) एस्ट्रोजन
(द) ऑक्सिन

32. मस्तिष्क का कौनसा भाग शरीर की संस्थिति एवं संतुलन के लिए उत्तरदायी है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023; प्रश्न बैंक)

(अ) प्रमस्तिष्क
(ब) अग्रमस्तिष्क
(स) अनुमस्तिष्क
(द) मध्य मस्तिष्क

33. वृद्धि का संदमन करने वाले हार्मोन का उदाहरण है- (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2023)

(अ) जिब्बेरेलिन
(ब) साइटोकाइनिन
(स) एब्सिसिक अम्ल
(द) इंसुलिन

34. एक न्यूरॉन में विद्युतीय संकेतों का रासायनिक संकेतों में परिवर्तन कहाँ पर होता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)

(अ) कोशिका काय में
(ब) तंत्रिकाक्ष पर
(स) द्रुमाशय पर
(द) कोशिका द्रव्य में

35. मानव में मस्तिष्क का कार्य है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24)

(अ) सोचना
(ब) संतुलन बनाना
(स) हृदय स्पंदन
(द) उपरोक्त सभी

36. कौनसी अन्तःस्रावी ग्रन्थि सभी अंगों में वृद्धि प्रेरित करती है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024)

(अ) पीयूष ग्रन्थि
(ब) थायराइड ग्रन्थि
(स) एड्रीनल ग्रन्थि
(द) अग्न्याशय

प्रश्न [37]. कौनसी अंतःस्रावी ग्रन्थि शरीर की वृद्धि के लिए उपापचय का नियमन करती है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)

(अ) थाइमस ग्रन्थि (ब) थाइरॉइड ग्रन्थि (स) एड्रीनल ग्रन्थि (द) अग्न्याशय
(अ) प्रमस्तिष्क (ब) मध्यमस्तिष्क (स) अनुमस्तिष्क (द) हाइपोथैलेमस

प्रश्न [39]. प्रतिवर्ती क्रिया का नियंत्रण होता है- (प्रश्न बैंक)

(अ) प्रमस्तिष्क (ब) मेरुरज्जु (स) पीयूष ग्रन्थि (द) न्यूरॉन
(अ) संवेदी तंत्रिका (ब) प्रेरक तंत्रिका (स) ग्राही (द) उद्दीपक

प्रश्न [41]. मानव मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग है- (प्रश्न बैंक)

(अ) प्रमस्तिष्क (ब) मध्यमस्तिष्क (स) अनुमस्तिष्क (द) हाइपोथैलेमस
(अ) गुरुत्वानुवर्तन (ब) रसायनानुवर्तन (स) जलानुवर्तन (द) प्रकाशानुवर्तन

प्रश्न [43]. आपातकालीन हार्मोन किसे कहते हैं- (प्रश्न बैंक)

(अ) वृद्धि (ब) एड्रीनलिन (स) इंसुलिन (द) मेलेटोनिन
(अ) द्रुमिका (ब) कोशिकाकाय (स) सिनेप्स (द) तंत्रिकाक्ष

प्रश्न [45]. छुई मुई की पत्तियों में गति होती है- (प्रश्न बैंक)

(अ) प्रकाशानुकुंचन (ब) निशानुकुंचन (स) कंपानुकुंचन (द) उपरोक्त सभी
(a) मेड्यूला
(b) अनुमस्तिष्क
(c) अग्रस्तिष्क
(d) न्यूरॉन
(a) नर हार्मोन
(b) मादा हार्मोन
(c) मधुमेह
(d) मेरुरज्जु
(a) ऑक्सिन
(b) साइटोकाइनिन
(c) जिब्बेरेलिन
(d) एब्सिसिक अम्ल
(a) थायरॉक्सिन
(b) वृद्धि हार्मोन
(c) एड्रीनलीन
(d) इन्सुलिन
(A) वृद्धि हार्मोन
(B) एड्रीनलीन
(C) थायरॉक्सिन
(D) इन्सुलिन
(b) वृषण (Testis)-

(i) वृषण द्वारा स्रावित हॉर्मोन टेस्टोस्टेरॉन है जिसे नर हॉर्मोन कहते हैं।

विज्ञान कक्षा-X 205

(ii) पुरुषों में दाढ़ी-मूँछ आना, स्वर में भारीपन, शरीर पर बालों का उगना, अस्थियों एवं पेशियों का मजबूत होना आदि द्वितीयक लैंगिक लक्षण टेस्टोस्टेरोन से प्रकट होते हैं।

(iii) यह नर लैंगिक व्यवहार को भी निर्धारित करता है। कामवासना का निर्धारण करना।

(iv) यह शुक्राणु निर्माण को उत्तेजित करता है।

(iii) मादा मानव में अंतःस्रावी ग्रंथियों की स्थिति का नामांकित चित्र-

[मादा मानव में अंतःस्रावी ग्रंथियों का नामांकित चित्र]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 6 नियंत्रण एवं समन्वय चित्र 10

  • हाइपोथैलमस ग्रन्थि
  • पिनियल ग्रन्थि
  • पीयूष ग्रन्थि
  • परावटु ग्रन्थि
  • अवटु ग्रन्थि
  • थाइमस ग्रन्थि
  • अग्न्याशय
  • अधिवृक्क ग्रन्थि
  • अण्डाशय