📖 1. समाधान: पाठगत एवं पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
राजस्थान बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान — सभी पाठगत (In-text) एवं अभ्यास (Exercise) प्रश्नों के सटीक एवं संपूर्ण हल।
पाठगत प्रश्न
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प्रश्न 1. यदि एक ‘लक्षण-A’ अलैंगिक प्रजनन वाली समष्टि के 10 प्रतिशत सदस्यों में पाया जाता है तथा ‘लक्षण-B’ उसी समष्टि में 60 प्रतिशत जीवों में पाया जाता है, तो कौनसा लक्षण पहले उत्पन्न हुआ होगा?
उत्तर : लक्षण B पहले उत्पन्न हुआ है क्योंकि यह अलैंगिक प्रजनन वाली समष्टि में 60% जीवों में पाया जाता है अर्थात् समष्टि के ज्यादा सदस्यों में यह लक्षण पाया जाता है जबकि लक्षण A समष्टि के सिर्फ 10% सदस्यों में ही मिलता है। अतः लक्षण B पहले उत्पन्न होगा।
प्रश्न 2. विभिन्नताओं के उत्पन्न होने से किसी स्पीशीज का अस्तित्व किस प्रकार बढ़ जाता है?
उत्तर : विभिन्नताओं के उत्पन्न होने से स्पीशीज का अस्तित्व बढ़ जाता है क्योंकि विभिन्नताओं से जंतुओं व पादपों में लाभदायक परिवर्तन होते हैं तथा विभिन्नताएँ जंतु को बदले हुए वातावरण के प्रति अनुकूलित करने में सहायता करती हैं। उदाहरण के लिए, उष्णता को सहन करने की क्षमता वाले जीवाणुओं को अधिक गर्मी से बचने की सम्भावना अधिक होती है।
इसके साथ ही विभिन्नताएँ जंतु को अस्तित्व के साथ संघर्ष में बेहतर बनाती हैं। अतः विभिन्नताएँ जैव विकास का आधार हैं।
पृष्ठ 146
प्रश्न 1. मेंडल के प्रयोगों द्वारा कैसे पता चला कि लक्षण प्रभावी अथवा अप्रभावी होते हैं?
उत्तर : मेंडल ने दो विकल्पी मटर के पौधों को अपने प्रयोग के लिए चुना, जैसे कि मटर के लम्बे पौधे, जो केवल मटर के लम्बे पौधे ही उत्पन्न करते थे तथा मटर के बौने पौधे, जो केवल मटर के बौने पौधे ही उत्पन्न करते थे। जब मेंडल ने इन दोनों पौधों में संकरण कराया तो प्रथम संतति पीढ़ी में सभी मटर के पौधे लम्बे प्राप्त हुए। इससे स्पष्ट हो गया कि पौधे का लम्बापन लक्षण ( ), बौनापन लक्षण ( ) पर प्रभावी हो गया तथा बौनापन लक्षण अप्रभावी होने के कारण छिपा रह गया।
जब मेंडल ने पीढ़ी के पौधों में स्वपरागण कराया और इससे प्राप्त बीजों को उगाया तो पीढ़ी में दोनों लक्षण प्राप्त हुए अर्थात् लम्बे पौधे भी एवं बौने पौधे भी ( के अनुपात में)। इसका अर्थ हुआ कि लम्बे होने का लक्षण प्रभावी और बौनेपन का लक्षण अप्रभावी होता है।
[मेंडल का संकरण आरेख (Monohybrid Cross)]

जनक (P) | शुद्ध लम्बे पौधे ( ) | शुद्ध बौने पौधे ( ) |
युग्मक | ( ) | ( ) |
पीढ़ी: सभी लम्बे पौधे ( )
पीढ़ी: (लम्बे पौधे), (लम्बे पौधे), (लम्बे पौधे), (बौने पौधे)
इस विवरण के आधार पर ही मेंडल का प्रथम नियम ‘प्रभाविता का नियम’ स्थापित हुआ।
प्रश्न 2. मेंडल के प्रयोगों से कैसे पता चला कि विभिन्न लक्षण स्वतन्त्र रूप से वंशागत होते हैं?
उत्तर- मेंडल ने अपने प्रयोगों में दो जोड़ी विपर्यासी (Contrasting) लक्षणों का चयन किया, जैसे-पीले एवं गोल तथा हरे एवं झुर्रीदार बीज वाले पौधे। मेंडल ने जब इन गोल एवं पीले ( ) बीज वाले पौधे का क्रॉस झुर्रीदार एवं हरे ( ) बीज वाले पौधे के साथ करवाया तो पीढ़ी में सभी पौधे पीले तथा गोल ( ) वाले प्राप्त हुए।
जब पीढ़ी के पौधों के बीच उन्होंने स्वपरागण होने दिया तो पीढ़ी में चार प्रकार के पौधे प्राप्त हुए-
इस प्रकार द्विसंकर क्रॉस की पीढ़ी के पौधों का लक्षणप्ररूप (Phenotype) होता है। इसे द्विसंकर अनुपात कहते हैं।
इसे हम निम्न प्रकार समझ सकते हैं-
[Dihybrid cross Punnett square and inheritance chart]

अनुपात
315 गोल, पीले बीज :
108 गोल, हरे बीज :
101 झुर्रीदार, पीले बीज :
32 झुर्रीदार, हरे बीज :
556 बीज :
चित्र-दो अलग-अलग लक्षणों (बीजों की आकृति एवं रंग) की स्वतन्त्र वंशानुगति
इस प्रकार इस प्रयोग से स्पष्ट होता है कि बीजों के रंग एवं आकृति की वंशागत पीढ़ी एक-दूसरे से प्रभावित नहीं होती। ये लक्षण स्वतंत्र रूप से वंशागत होते हैं। इसलिए इसे मेंडल का 'स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम' भी कहते हैं।
प्रश्न 3. एक 'A-रुधिर वर्ग' वाला पुरुष एक स्त्री जिसका रुधिर वर्ग 'O' है, से विवाह करता है। उनकी पुत्री का रुधिर वर्ग 'O' है। क्या यह सूचना पर्याप्त है यदि आपसे कहा जाए कि कौनसा विकल्प लक्षण रुधिर वर्ग 'A' अथवा 'O' प्रभावी लक्षण है? अपने उत्तर का स्पष्टीकरण दीजिए।
उत्तर- यह सूचना पर्याप्त नहीं हैं। रुधिर वर्ग का निर्धारण रुधिर में उपस्थित प्रतिजन एवं प्रतिरक्षी की उपस्थिति एवं अनुपस्थिति के आधार पर किया जाता है। A रुधिर वर्ग में 'a' प्रतिजन तथा 'b' प्रतिरक्षी पाया जाता है, जबकि O रुधिर वर्ग में कोई प्रतिजन नहीं होता किन्तु 'a' एवं 'b' दोनों प्रतिरक्षी होते हैं।
तथा जीन प्रतिजन के लिए उत्तरदायी होते हैं। क्रमशः पर प्रभावी होते हैं। अतः A रुधिर वर्ग वाले पुरुष की जीन संरचना तथा O रुधिर वर्ग वाली स्त्री की जीन संरचना होने पर पुत्री पिता से तथा माता से जीन प्राप्त करने के कारण O रुधिर वर्ग वाली होती है। इस आधार पर A प्रभावी होगा।
प्रश्न 4. मानव में बच्चे का लिंग निर्धारण कैसे होता है?
उत्तर- मानव में उपस्थित लिंग गुणसूत्र (Sex Chromosome) बच्चे के लिंग निर्धारण का कार्य करते हैं। मानव में बच्चे के लिंग निर्धारण के प्रक्रम निम्न प्रकार से हैं-
(1) पुरुषों में दोनों लिंग गुणसूत्र अलग-अलग होते हैं। इनमें एक X और एक Y होता है अर्थात् पुरुषों में लिंग गुणसूत्र XY होता है।
(2) स्त्री में दोनों लिंग गुणसूत्र समान अर्थात् XX होता है।
(3) पुरुष दो प्रकार के शुक्राणु उत्पन्न करते हैं। आधे शुक्राणुओं में X गुणसूत्र होता है जबकि शेष आधे शुक्राणुओं में Y गुणसूत्र होता है।
(4) स्त्री केवल एक प्रकार के अण्डाणु उत्पन्न करती है, जिसमें X गुणसूत्र होते हैं।
(5) जब X गुणसूत्र युक्त शुक्राणु, अण्डाणु X से संयोग करता है, तो उत्पन्न होने वाली सन्तान लड़की (XX) होती है।
(6) जब Y गुणसूत्र युक्त शुक्राणु, अण्डाणु X से संयोग करता है, तो उत्पन्न होने वाली सन्तान लड़का (XY) होती है।
(7) इस प्रकार बच्चे के लिंग निर्धारण हेतु पुरुष के शुक्राणु ही उत्तरदायी होते हैं।
पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
प्रश्न 1. मेंडल के एक प्रयोग में लम्बे मटर के पौधे जिनके बैंगनी पुष्प थे, का संकरण बौने पौधों जिनके सफेद पुष्प थे, से कराया गया। इनकी संतति के सभी पौधों में पुष्प बैंगनी रंग के थे। परन्तु उनमें से लगभग आधे बौने थे। इससे कहा जा सकता है कि लम्बे जनक पौधों की आनुवंशिक रचना निम्न थी- (प्रश्न बैंक)
उत्तर- (c) TtWW
प्रश्न 2. एक अध्ययन से पता चला कि हल्के रंग की आँखों वाले बच्चों के जनक (माता-पिता) की आँखें भी हल्के रंग की होती हैं। इसके आधार पर क्या हम कह सकते हैं कि आँखों के हल्के रंग का लक्षण प्रभावी है अथवा अप्रभावी? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।
उत्तर- चूंकि उपरोक्त माता-पिता (जनक) के सभी लक्षण बच्चों में आये हैं, माता-पिता आँखों के हल्के रंग के लिए होमोजाइगस (Homozygous) हैं। अतः प्रभावी लक्षण स्वतः ही प्रदर्शित होता है। इसलिए हम कह सकते हैं कि आँखों का हल्का रंग प्रभावी है।
प्रश्न 3. कुत्ते की खाल का प्रभावी रंग ज्ञात करने के उद्देश्य से एक प्रोजेक्ट बनाइए।
उत्तर-
(1) सबसे पहले अपने आसपास के क्षेत्र में सर्वे के द्वारा कुत्तों की आबादी के बारे में पता लगाते हैं।
(2) इसके पश्चात् विभिन्न रंग की खाल (त्वचा) वाले कुत्तों का प्रतिशत ज्ञात किया जाता है।
(3) अब ऐसे कुत्तों का पता लगाते हैं जिन कुत्तों के माता-पिता एवं उनके बच्चों की खाल का रंग समान होता है।
(4) अब दो विभिन्न रंग की खाल वाले कुत्तों में क्रॉस करवाते हैं, जैसे-
एक काले रंग का समयुग्मजी (Homozygous) नर कुत्ते का क्रॉस एक सफेद रंग की समयुग्मजी (Homozygous) मादा कुत्ते से करवाते हैं।
मादा से करवाते हैं, तो प्रथम पीढ़ी ( ) में तमाम कुत्ते काले रंग के उत्पन्न होते हैं। इसका तात्पर्य है कि त्वचा का काला रंग प्रभावी है।
इसे निम्न प्रकार प्रदर्शित कर सकते हैं-
कुत्ते का काला रंग कुत्ते का सफेद रंग
पीढ़ी
पीढ़ी के मध्य संकरण कराने पर
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[Punnett Square for F2 generation]

( के अनुपात में)
अतः पीढ़ी में कुत्ते काले और एक कुत्ता सफेद प्राप्त होता है, जो यह दर्शाता है कि काला रंग, सफेद रंग पर प्रभावी है।
प्रश्न 4. संतति में नर एवं मादा जनकों द्वारा आनुवंशिक योगदान में बराबर की भागीदारी किस प्रकार सुनिश्चित की जाती है?
उत्तर- सामान्यतः विकसित जीवधारियों की कोशिकाओं में विभिन्न प्रकार के गुणसूत्रों के दो जोड़े होते हैं, जिन्हें से प्रदर्शित करते हैं और ऐसी कोशिकाएँ द्विगुणित कहलाती हैं। इन गुणसूत्रों में ही आनुवंशिक पदार्थ स्थित होता है। जब अर्धसूत्री विभाजन जननांगों की जनन कोशिकाओं में होता है (वृषण-नर, अण्डाशय-मादा) तब ये मातृ कोशिकाएँ विभाजित होकर युग्मकों का निर्माण करती हैं। जिनमें अगुणित गुणसूत्र होते हैं। लैंगिक जनन के दौरान नर एवं मादा युग्मक का निषेचन होता है तो आधे गुणसूत्र माता (मादा) से एवं आधे गुणसूत्र पिता (नर) से आते हैं। इस प्रकार प्राप्त युग्मनज द्विगुणित होता है। इस युग्मनज से बनने वाली संतति में नर एवं मादा जनकों की आनुवंशिक योगदान में बराबर की भागीदारी होती है।
📝 2. नोट्स: पाठ सार (Key Concepts & Summary)
महत्वपूर्ण परिभाषाएं, रासायनिक समीकरण, नियम, सूत्र एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।
पाठ सार
(1) जनन प्रक्रमों द्वारा नए जीव (व्यष्टि) उत्पन्न होते हैं जो जनक के समान होते हुए भी कुछ भिन्न होते हैं।
(2) जनन के समय उत्पन्न विभिन्नताएँ वंशागत हो सकती हैं। इन विभिन्नताओं के कारण जीव की उत्तरजीविता में वृद्धि हो सकती है।
(3) अलैंगिक जनन में उत्पन्न संतति (जीव) में बहुत अधिक समानताएँ होती हैं लेकिन लैंगिक जनन में विविधता अपेक्षाकृत अधिक होती है।
(4) स्पीशीज में विभिन्नताओं के साथ अपने अस्तित्व में रहने की संभावना एकसमान नहीं होती है। प्रकृति की विविधता के आधार पर विभिन्न जीवों को विभिन्न प्रकार के लाभ हो सकते हैं। उष्णता को सहन करने की क्षमता वाले जीवाणुओं की अधिक गर्मी से बचने की संभावना अधिक होती है।
(5) आनुवंशिकी-जीव विज्ञान की वह शाखा जिसमें जीवधारियों के आनुवंशिक एवं विभिन्नताओं का अध्ययन करते हैं, आनुवंशिकी कहलाती है।
(6) आनुवंशिकता-जनक जीवों से संतति में गुणों एवं लक्षणों के स्थानान्तरण को आनुवंशिकता कहते हैं। आनुवंशिकता नियम इस बात का निर्धारण करते हैं जिनके द्वारा विभिन्न लक्षण पूर्ण विश्वसनीयता के साथ वंशागत होते हैं।
(7) वंशागत लक्षण-शिशु में मानव के सभी आधारभूत लक्षण होते हैं। फिर भी यह पूर्णरूप से अपने जनकों जैसा दिखाई नहीं पड़ता तथा मानव समष्टि में यह विभिन्नता स्पष्ट दिखाई देती है। उदाहरण-स्वतन्त्र तथा जुड़े कर्णपालि।
(8) मानव में लक्षणों की वंशागति के नियम इस बात पर आधारित हैं कि माता एवं पिता दोनों ही समान मात्रा में आनुवंशिक पदार्थ को संतति (शिशु) में स्थानान्तरित करते हैं।
(9) ग्रेगर जॉन मेंडल (1822-1884) ने प्रयोग कर आनुवंशिकी लक्षणों की वंशागति के नियमों का प्रतिपादन किया, इस कारण इन्हें आनुवंशिकी का जनक कहते हैं।
(10) मेंडल ने मटर के पौधे के अनेक विपर्यासी (विकल्पी) लक्षणों का अध्ययन किया जो स्थूल रूप से दिखाई देते हैं। उदाहरणतः गोल/झुर्रीदार बीज, लंबे/बौने पौधे, सफेद/बैंगनी फूल इत्यादि।
(11) कारक-मेण्डल ने जब प्रयोग किये थे उस समय तक गुणसूत्र व जीन सम्बन्धी खोज नहीं हुई थी। अतः मेण्डल ने इन लक्षणों को नियंत्रित करने वाली रचना को जीन के स्थान पर कारक कहा।
(12) संकरण-दो जाति के जीवों के बीच क्रॉस या निषेचन कर नई संतति प्राप्त करने की प्रक्रिया को संकरण कहते हैं।
(13) संकर-दो जाति के जीवों के बीच क्रॉस कराने से उत्पन्न संतति को संकर कहते हैं।
(14) पीढ़ी ( Generation)- अथवा प्रथम जनरेशन वह जनरेशन है जो आनुवंशिकी रूप से भिन्न जीवों, जिन्हें जनक कहते हैं, के मध्य क्रॉस कराने से उत्पन्न होती है।
(15) पीढ़ी- अथवा द्वितीय जनरेशन वह जनरेशन है जो जनरेशन के जीवों के मध्य संकरण के परिणामस्वरूप प्राप्त होती है।
(16) लैंगिक जनन वाले जीवों में एक अभिलक्षण (Trait) के जीन के दो प्रतिरूप (Copies) होते हैं। इन प्रतिरूपों के एकसमान न होने की स्थिति में जो अभिलक्षण व्यक्त होता है उसे प्रभावी लक्षण तथा अन्य को अप्रभावी लक्षण कहते हैं।
(17) जीन प्ररूप-जीवों के आनुवंशिक संगठन (अर्थात् जीनी संरचना) को जीन प्ररूप कहते हैं।
(18) लक्षण प्ररूप-जीव के बाहरी लक्षणों को लक्षण प्ररूप कहते हैं, जैसे-लम्बा, बौना, लाल, हरा रंग।
(19) युग्म विकल्पी- किसी प्राणी में एक गुण को नियंत्रित या अभिव्यक्त करने वाले जीन के दो विपर्यासी स्वरूप को युग्मविकल्पी (Allele) कहते हैं।
(20) समयुग्मजी- किसी गुण के लिए एक समान एलील वाला जीव समयुग्मजी कहलाता है। उदाहरण- एलील युक्त पादप बीज की आकृति के लिए समयुग्मजी होता है।
(21) विषमयुग्मजी- किसी गुण के लिए एक जीन के दोनों एलील असमान होने की स्थिति को विषमयुग्मजी कहते हैं। उदाहरण एलील वाला पादप बीज के आकार के लिए विषमयुग्मजी होता है।
(22) संकरपूर्वज संकरण- जब संकरण में पीढ़ी की संतति अर्थात् संकर जीव का संकरण किसी भी जनक के साथ किया जाये तो इसे संकरपूर्वज संकरण कहते हैं।
(23) एकल संकर संकरण- एक जोड़ी युग्म विकल्पी के लिए किया गया क्रॉस एकल संकर संकरण कहलाता है।
(24) द्विसंकर संकरण- दो जोड़ी युग्म विकल्पी के लिए किया गया क्रॉस द्विसंकर संकरण कहलाता है।
(25) शुद्ध किस्म- ऐसे जीव जो किसी लक्षण विशेष के लिए अनेक पीढ़ियों तक अपने समान लक्षण वाले जीव ही उत्पन्न करते हैं, उन्हें शुद्ध किस्म कहते हैं।
(26) परीक्षण संकरण- जब पीढ़ी के विषमयुग्मजी संकर का संकरण, समयुग्मजी अप्रभावी जनक के साथ कराया जाता है तो इसे परीक्षण संकरण कहते हैं। इस संकरण से प्राप्त संतति में अप्रभावी लक्षणों वाले जीव होते हैं।
(27) एकल लक्षण का नियम (Law of Unit Character)- जीव में पाये जाने वाले समस्त लक्षण जीन से नियंत्रित होते हैं। प्रत्येक लक्षण हेतु एक जीन होता है। यह जीन सदैव युग्म में रहता है। प्रत्येक युग्म में एक कारक (मेण्डल ने कारक कहा था तथा बाद में इसे जीन कहा गया) मातृक तथा दूसरा पैतृक से आता है।
**(28) डी.एन.ए. का वह भाग जिसमें किसी प्रोटीन संश्लेषण के लिए सूचना होती है, वह प्रोटीन का जीन कहलाता है।
(29) वंशागति के नियम- आस्ट्रिया के निवासी ग्रेगर जॉन मेंडल ने वंशागति के तीन नियम प्रस्तुत किये-
(i) प्रभाविता का नियम (Law of Dominance)- इसके अनुसार जब एक जोड़ी विपरीत लक्षणों को ध्यान में रखकर क्रॉस कराया जाता है, तो पहली पीढ़ी में उत्पन्न होने वाला लक्षण प्रभावी होता है तथा दूसरे लक्षण जो छिपे रहते हैं, अप्रभावी होते हैं।
(ii) युग्मकों की शुद्धता का नियम (Law of Segregation)- लैंगिक जनन के दौरान जब युग्मक बनते हैं तो युग्मविकल्पी में से केवल एक विकल्पी ही एक युग्मक में हो सकता है अर्थात् युग्मक उस विकल्पी के लिए पूर्णतः शुद्ध होता है। इस नियम के अनुसार संकर पीढ़ी के पौधों में दोनों विपरीत लक्षण जोड़े में विद्यमान रहते हैं। ये लक्षण में पृथक् हो जाते हैं। इस कारण इसे 'पृथक्करण का नियम' भी कहते हैं।
(iii) स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment)- इसके अनुसार दो जोड़ी विपरीत लक्षणों वाले दो पौधों के बीच संकरण कराने पर इन लक्षणों का पृथक्करण स्वतंत्र रूप से होता है तथा एक लक्षण की वंशागति दूसरे लक्षण की वंशागति को प्रभावित नहीं करती है।
(30) लिंग निर्धारण- विभिन्न स्पीशीज में लिंग निर्धारण के कारक भिन्न होते हैं। मानव में संतान का लिंग इस बात पर निर्भर करता है कि पिता से मिलने वाले गुणसूत्र 'X' (लड़कियों के लिए) अथवा 'Y' (लड़कों के लिए) किस प्रकार के हैं।
(31) जीनोम- गुणसूत्रों के अगुणित सेट में जीनों के कुल सेट जो आनुवंशिक इकाई के रूप में जनक से संतति में पहुंचते हैं जीनोम कहलाते हैं।
(32) पुनेट स्क्वायर- यह एक चेकर बोर्ड है, जो दो जीवों के बीच क्रॉस के परिणाम को प्रदर्शित करता है। यह जीनोटाइप तथा फीनोटाइप दोनों की संतति का वर्णन करता है।
(33) शुद्ध वंशक्रम- होमो जायगस जीवों की पीढ़ी जिसमें केवल एक ही प्रकार की संततियाँ उत्पन्न होती हैं। ये अपने फीनोटाइप तथा जीनोटाइप के लिए सत्य ब्रीड होते हैं।
विज्ञान कक्षा-X 239
⭐ 3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Important Questions)
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs), अतिलघूत्तरात्मक, लघूत्तरात्मक एवं निबंधात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
बहुविकल्पीय प्रश्न-
1. किसी जीव के एक विपर्यासी लक्षण के दोनों जीन एक साथ होने पर इसे कहते हैं- (प्रश्न बैंक)
3. मेण्डल की सफलता का मुख्य कारण था कि उन्होंने-
4. एक संकर संकरण की पीढ़ी का लक्षण प्ररूप अनुपात होता है-
6. जीन स्थित होते हैं-
8. मेण्डलिज्म किससे संबंधित है-
9. आनुवंशिकता एवं विभिन्नताओं से संबंधित विज्ञान की शाखा कहलाती है-
11. मेंडल का जन्म हुआ?
13. लक्षण जो संकर में प्रकट होता है, कहलाता है-
**15. द्विसंकर के स्व परागण से संतति में कितने प्रकार के जीनोटाइप बनते हैं-**
17. वंशागति की कार्यिकीय इकाई होती है-
19. मानव में गुणसूत्रों की संख्या होती है-
21. एक सामान्य स्त्री में ऑटोसोम की संख्या होती है-
23. गुणसूत्रों की संख्या निश्चित होती है-
(द)
उत्तर-तालिका
1. (द) | 2. (द) | 3. (द) | 4. (ब) | 5. (स) | 6. (अ) | 7. (अ) | 8. (अ) | 9. (स) | 10. (ब) | 11. (ब) |
12. (अ) | 13. (अ) | 14. (अ) | 15. (स) | 16. (अ) | 17. (ब) | 18. (अ) | 19. (अ) | 20. (ब) | 21. (द) | 22. (अ) |
23. (अ) | 24. (ब) | 25. (ब) | 26. (स) | 27. (स) | 28. (ब) | 29. (ब) | 30. (ब) | 31. (अ) | 32. (अ) |
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-
1. जनन के समय उत्पन्न .......................... वंशागत हो सकती है।
2. मानव में लिंग निर्धारण .......................... होता है।
3. मेंडल प्रत्येक पीढ़ी के एक-एक पौधे द्वारा प्रदर्शित लक्षणों का .......................... रखा तथा .......................... की।
4. पौधों में कुछ .......................... होते हैं जो लम्बाई का नियंत्रण करते हैं।
5. कोशिका के .......................... में प्रोटीन संश्लेषण के लिए एक सूचना स्रोत होता है।
6. घोंघा अपना .......................... बदल सकता है।
7. ऐसे लक्षण जो प्रथम पीढ़ी में छिपे रहते हैं .......................... कहलाते हैं।
8. लक्षणों की वंशाुक्रम के नियमों का प्रतिपादन .......................... ने किया था। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2026)
9. आनुवंशिक लक्षणों का नियंत्रण करने वाली इकाई को .......................... कहते हैं।
10. .......................... में लिंग निर्धारण आनुवंशिक नहीं है।
उत्तर- 1. विभिन्नताएं, 2. आनुवंशिक, 3. रिकॉर्ड, गणना, 4. हार्मोन, 5. , 6. लिंग, 7. अप्रभावी लक्षण, 8. ग्रेगर मेंडल, 9. जीन, 10. घोंघा।
निम्न को सुमेलित कीजिए-
(i)
कॉलम-I | कॉलम-II | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
(a) मेंडल |
(i) आनुवंशिक पदार्थ (ii) गिरजाघर (iii) (iv) (i) (ii) लिंग निर्धारण आनुवंशिक (iii) (iv) लिंग बदल सकता है (ii) गुणसूत्र क्या है? यह कोशिकाओं में कहां स्थित होते हैं?
उत्तर- (i) जीन– यह वे आनुवंशिक कारक होते हैं, जिनके द्वारा गुणों का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थानान्तरण होता है। ये में पाये जाते हैं। ये गुणसूत्रों पर लम्बाई में रैखिक क्रम में व्यवस्थित होते हैं। किसी भी जीव में वंशागत लक्षण जीन के द्वारा ही संचरित होते हैं। (ii) गुणसूत्र (Chromosome)– गुणसूत्र व प्रोटीन से निर्मित तन्तुमय संरचना हैं जो आनुवंशिक सूचनाओं या वंशागति की इकाई जीन का वहन करते हैं। गुणसूत्र कोशिकाओं में केन्द्रक के भीतर स्थित होते हैं। प्रश्न 3. (i) आनुवंशिकता किसे कहते हैं? (ii) एक जीन वंशागति एवं बहुजीनी वंशागति में अन्तर लिखिए। उत्तर- (i) आनुवंशिकता– जीवों में जनकों के लक्षणों का संतान में वंशागत स्थानान्तरण होना, आनुवंशिकता कहलाता है। (ii) एक जीन वंशागति एवं बहुजीनी वंशागति में अन्तर-
प्रश्न 4. आनुवंशिकता कार्यविधि किस प्रकार होती है? अथवा जीन लक्षणों को किस प्रकार नियंत्रित करते हैं? उत्तर- कोशिका के डी.एन.ए. में प्रोटीन संश्लेषण के लिए एक सूचना स्रोत होता है। डी.एन.ए. का वह भाग जिसमें किसी प्रोटीन संश्लेषण के लिए सूचना होती है, उस प्रोटीन का जीन कहलाता है। प्रोटीन विभिन्न लक्षणों की अभिव्यक्ति को नियंत्रित करती है। इसे एक उदाहरण द्वारा समझा जा सकता है- हम जानते हैं कि पौधों में कुछ हॉर्माेन होते हैं जो लंबाई का नियंत्रण करते हैं। अतः किसी पौधे की लंबाई पौधे में उपस्थित उस हॉर्माेन की मात्रा पर निर्भर करती है। पौधे के हॉर्माेन की मात्रा उस प्रक्रम की दक्षता पर निर्भर करेगी जिसके द्वारा यह उत्पादित होता है। एंजाइम इस प्रक्रम के लिए महत्वपूर्ण है। यदि यह एंजाइम दक्षता से कार्य करेगा तो हॉर्माेन पर्याप्त मात्रा में बनेगा तथा पौधा लंबा होगा। (एंजाइम प्रोटीन से बने होते हैं) यदि इस प्रोटीन के जीन में कुछ परिवर्तन आते हैं तो बनने वाली प्रोटीन (एंजाइम) की दक्षता पर प्रभाव पड़ेगा जिससे वह कम दक्ष होगी अतः बनने वाले हॉर्माेन की मात्रा भी कम होगी तथा पौधा बौना होगा। इस प्रकार जीन विभिन्न लक्षणों को नियंत्रित करते हैं। प्रश्न 5. मानव में लिंग निर्धारण का आरेख चित्र बनाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025) उत्तर- मानव में लिंग निर्धारण का आरेखित चित्र- [मानव में लिंग निर्धारण का आरेख]
चित्र-मानव में लिंग निर्धारण प्रश्न 6. विभिन्न जीवों में लिंग निर्धारण किस प्रकार होता है? उत्तर- अलग-अलग स्पीशीज इसके लिए अलग-अलग युक्ति अपनाते हैं- (1) कुछ पूर्ण रूप से पर्यावरण पर निर्भर करते हैं। इसलिए कुछ प्राणियों में (जैसे-कुछ सरीसृप) लिंग निर्धारण निषेचित अंडे (युग्मज) के ऊष्मायन ताप पर निर्भर करता है कि संतति नर होगी या मादा। विज्ञान कक्षा-X 249 (2) घोंघे जैसे कुछ प्राणी अपना लिंग बदल सकते हैं, जो इस बात का संकेत है कि इनमें लिंग निर्धारण आनुवंशिक नहीं है। (3) मानव में लिंग निर्धारण आनुवंशिक आधार पर होता है। अर्थात् जनक जीवों से वंशागत जीन ही इस बात का निर्णय करते हैं कि संतति लड़का होगा अथवा लड़की। प्रश्न 7. मेंडल की सफलता के कारणों की विवेचना कीजिए। उत्तर- मेंडल की सफलता के कारण- (1) मेंडल भाग्यशाली थे कि उन्होंने जिन सात युग्म लक्षणों का अध्ययन किया, वे सभी अलग-अलग गुणसूत्रों पर पाये जाते हैं। (2) मटर के पौधे का चयन संकरण प्रयोगों के लिए अधिक उपयुक्त सिद्ध हुआ क्योंकि- (i) मटर का पौधा सरलता से उद्यान में लगाया जा सकता है, यह एक वार्षिक पौधा तथा स्वपरागण होने के कारण इसमें पुनर्रोजन के अवसर नहीं रहते। (ii) इसके पुष्प की संरचना इस प्रकार की है जिसमें संकरण सरलता से हो जाता है। (iii) मटर की विभिन्न विपरीत लक्षणों वाली नस्लें सरलता से मिल जाती हैं। (3) पूर्व संतति अभिलेख अर्थात् पीढ़ी-दर-पीढ़ी का लेखा-जोखा रखा। (4) मेंडल ने प्रयोग को विधिवत् किया, आरम्भ में एक लक्षण की वंशागति का अध्ययन किया तथा फिर दो व अधिक लक्षणों का अध्ययन किया। (5) मेंडल ने गणित तथा सांख्यिकी का उपयोग करते हुए, प्रयोगों के परिणामों का विश्लेषण किया।
(6) किये गये प्रयोगों का परीक्षण क्रॉस से टेस्ट किया। (7) नियंत्रित प्रयोग किए।
प्रश्न 8. (i) शुद्ध लम्बे एवं अशुद्ध (संकर) लम्बे पौधों से आप क्या समझते हैं? (ii) प्रभावी लक्षणों तथा अप्रभावी लक्षणों में अन्तर लिखिए। उत्तर-(i) शुद्ध लम्बे पौधे - ऐसे पौधे जिनमें तने की ऊँचाई को नियंत्रित करने वाले दोनों कारक (जीन) लम्बेपन के हों ( ), शुद्ध लम्बे पौधे कहलाते हैं। अशुद्ध (संकर) लम्बे पौधे - ऐसे पौधे जिनसे पौधे की ऊँचाई नियंत्रित करने वाले दोनों कारकों में से एक लम्बेपन का व दूसरा बौनेपन ( ) का हो, लम्बेपन के लक्षण का प्रभावी होने के कारण ऐसे पौधे भी शुद्ध लम्बे पौधों के समान लम्बे होते हैं। (ii) प्रभावी लक्षणों तथा अप्रभावी लक्षणों में अन्तर -
प्रश्न 9. मेंडल ने यह किस प्रकार स्पष्ट किया कि सम्भव है कोई लक्षण वंशागत हो जाए किन्तु किसी जीव में व्यक्त न हो? उत्तर- मेंडल ने एक लक्षण वंशागति प्रयोग में शुद्ध लम्बे ( ) व शुद्ध बौने पौधे ( ) में संकरण कराया जिससे प्राप्त पीढ़ी के सभी पौधे लम्बे ( ) थे। पीढ़ी के पौधों में स्वपरागण द्वारा प्राप्त की गई पीढ़ी में लम्بے व बौने दोनों प्रकार के पौधे थे। इस प्रेक्षण से मेंडल ने यह निष्कर्ष निकाला की बौनेपन का लक्षण पीढ़ी के पौधों में तभी प्रकट होगा जब वह पीढ़ी के पौधों में उपस्थित रहा हो, किन्तु पीढ़ी में बौनेपन का लक्षण प्रकट ना होना यह दर्शाता है कि यह लक्षण पौधों में वंशागत होने के बाद भी लम्बेपन के लक्षण के प्रभावी होने के कारण प्रकट नहीं हो पाता है। इस प्रकार मेंडल ने यह स्पष्ट किया कि जीव में भले ही अप्रभावी लक्षण वंशागत हो जाए लेकिन प्रभावी लक्षण की उपस्थिति में यह व्यक्त नहीं होता है। 250 प्रश्न 10. मेण्डल ने मटर के कौन-कौनसे लक्षणों के बारे में संकरण प्रयोग किए? लक्षणों को सूचीबद्ध कीजिए। उत्तर- मेण्डल ने मटर के निम्नांकित सात जोड़ी विपर्यासी लक्षणों के सन्दर्भ में संकरण प्रयोग किए-
प्रश्न 11. शुद्ध गुण वाला पौधा किसे कहेंगे? समझाइए। उत्तर- मेण्डल ने अपने एक प्रयोग में लम्बे व बौने कद वाली किस्मों का चयन किया। लम्बे कद के पौधे से स्वपरागण कर, कई पीढ़ी तक लम्बे व इसी प्रकार बौने पौधे प्राप्त कर लिए। ऐसे पौधों को उसने क्रमशः लम्बाई व बौ네पन के 'शुद्ध गुण' वाला माना। इस प्रकार के दो शुद्ध गुण वाले लम्बे व बौने पौधों को जनक बनाकर इन दोनों से कृत्रिम परागण द्वारा बीज प्राप्त किये। प्रश्न 12. गुणसूत्र पर टिप्पणी लिखिए। उत्तर- गुणसूत्र-यह एक लिंग गुणसूत्र है। यह आकार में छोटा तथा आकृति में एक सिरे पर कुछ मुड़ा हुआ होता है। गुणसूत्र में डी.एन.ए. की बहुत कम मात्रा होती है अतः इसे आनुवंशिकी रूप से कम महत्वपूर्ण या निष्क्रिय माना जाता है। यह गुणसूत्र शिशु (नर) के लिंग निर्धारण में सहायक है। प्रश्न 13. मेण्डल के नियमों के महत्त्व लिखिए। उत्तर- मेण्डल के नियमों के महत्त्व निम्नलिखित हैं- (i) मेण्डल के नियमों की सहायता से उन्नत व संकर प्रजातियों को उत्पन्न किया जाता है। (ii) इन प्रजातियों में अधिक उत्पादन, अधिक अनुकूलता, रोधक क्षमता आदि गुण पाये जाते हैं। (iii) प्रजनन विज्ञान में मेण्डल के नियमों का बड़ा योगदान है। (iv) ये असाध्य रोगों की पहचान करने व उपचार में सहायक हैं। (v) मेण्डल के कार्यो से जैव तकनीक और जैव अभियांत्रिकी को भी बल मिला। (vi) सुजननिकी में मानव एवं अन्य जीवों में जीवन स्तर गुणवत्ता व श्रेष्ठ जर्मप्लाज्म संरक्षण को बढ़ावा देने में मेण्डल के नियम उपयोगी हैं। प्रश्न 14. लिंगसूत्र एवं अलिंगसूत्र क्या हैं? समझाइए। उत्तर- (i) लिंगसूत्र- वे गुणसूत्र जो लिंग का निर्धारण करते हैं, लिंग गुणसूत्र कहलाते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं। इन्हें एवं गुणसूत्र कहते हैं। गुणसूत्र आकार में बड़ा तथा आकृति में सीधा होता है किन्तु गुणसूत्र आकार में छोटा तथा आकृति में एक सिरे पर कुछ मुड़ा हुआ होता है। (ii) अलिंगसूत्र- लिंग गुणसूत्रों के अतिरिक्त शेष गुणसूत्र जो शरीर के सभी लक्षणों (केवल लिंग गुणों को छोड़कर) का निर्धारण करते हैं, अलिंगसूत्र कहलाते हैं। मानव में 22 जोड़ी अलिंगसूत्र होते हैं। प्रश्न 15. मेंडल ने अपने प्रयोगों के लिए मटर के जिन विपर्यासी लक्षणों का उपयोग किया उनकी सूची तालिका रूप में बनाइए। उत्तर -
विज्ञान कक्षा-X 251
प्रश्न 16. निम्न को परिभाषित कीजिए- (i) आनुवंशिकी (ii) जीनोम (iii) समयुग्मजी (iv) विषमयुग्मजी। उत्तर-(i) आनुवंशिकी (Genetics)- विज्ञान की वह शाखा जिसके अन्तर्गत आनुवंशिकता के नियमों तथा इसको नियंत्रित करने वाले कारकों एवं पदार्थों का अध्ययन किया जाता है उसे आनुवंशिकी या आनुवंशिक विज्ञान कहते हैं। (ii) जीनोम (Genome)- किसी जीव के युग्मक में उपस्थित गुणसूत्रों के अगुणित समुच्चय को जीनोम कहते हैं अथवा किसी भी जाति के अगुणित डी.एन.ए. अंश को जीनोम कहते हैं। (iii) समयुग्मजी (Homozygous)- जीव में प्रत्येक लक्षण को जीनों के अलग-अलग युग्म नियंत्रित करते हैं। जब युग्म के दोनों जीन समान प्रकार के होते हैं तो उसे समयुग्मजी कहते हैं; जैसे- , । (iv) विषमयुग्मजी (Heterozygous)- यदि जीन्स के किसी जोड़े में दो विपर्यासी (अलग-अलग) लक्षणों वाले कारक होते हैं, तो वह जोड़ा विषमयुग्मजी कहलाता है; जैसे- । प्रश्न 17. उस पादप का नाम लिखिए जिसका उपयोग मेंडल ने अपने प्रयोगों में किया था। जब उन्होंने लम्बे और बौने पादपों का संकराण कराया तो उन्हें और पीढ़ियों में संततियों के कौनसे प्रकार प्राप्त हुए? पीढ़ी में उन्हें प्राप्त पौधों में अनुपात लिखिए। उत्तर- मेंडल ने अपने प्रयोगों में मटर के पादप का उपयोग किया। पीढ़ी में सभी पादप लम्बे तथा पीढ़ी में लम्बे एवं बौने दोनों प्रकार के पादप प्राप्त हुए। चूंकि पीढ़ी में 3 पादप लम्बे तथा 1 पादप छोटा (बौना) प्राप्त हुआ इसलिए पीढ़ी में प्राप्त पादपों का अनुपात है। प्रश्न 18. मानव संतति का प्रत्येक लक्षण किससे प्रभावित होता है? उत्तर- मानव में लक्षणों की वंशागति के नियम इस बात पर आधारित हैं कि माता एवं पिता दोनों ही समान मात्रा में आनुवंशिक पदार्थ को संतति (शिशु) में स्थानान्तरित करते हैं। इसका अर्थ यह है कि प्रत्येक लक्षण पिता और माता के से प्रभावित हो सकता है। प्रश्न 19. विभिन्नताओं के कोई चार महत्त्व लिखिए। (i) विभिन्नताओं से जन्तुओं व पादपें में लाभदायक परिवर्तन भी होते हैं। (ii) विभिन्नताएँ जैव विकास प्रक्रिया का आधार हैं। (iii) विभिन्नताएँ जन्तु को बदले हुए वातावरण के प्रति अनुकूलित करने में सहायक होती हैं। (iv) प्राणी को अस्तित्व के साथ संघर्ष में बेहतर बनाती हैं। प्रश्न 20. ऐसे कारणों का वर्णन कीजिए जिनसे विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं। अथवा जीवों में विभिन्नताएँ उत्पन्न होने के लिए उत्तरदायी कारकों को लिखिए। विभिन्नता का क्या महत्त्व है? ( प्रश्न बैंक ) उत्तर- विभिन्नताओं के चार महत्त्व निम्न हैं- उत्तर- निम्न कारणों से विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं- (i) वातावरणीय परिस्थितियों, जैसे-प्रकाश, ताप, पोषक पदार्थों, विकिरणों आदि द्वारा जीवधारियों में विभिन्नताएँ उत्पन्न हो जाती हैं। (ii) आनुवंशिक पदार्थ जीन एवं गुणसूत्र की संख्या व रचना में परिवर्तन के फलस्वरूप विभिन्नताएँ उत्पन्न हो जाती हैं। (iii) नये जीव का जन्म नर व मादा युग्मकों के संयोजन से होता है। अतः इस द्विजनकता (Dual Parentage) के कारण दो जीवों के आनुवंशिक पदार्थ मिलते हैं, जिसके फलस्वरूप जीवों में जीन अन्तर-क्रिया होती है और विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं। नोट- विभिन्नता के महत्त्व के लिए प्रश्न 19 का उत्तर देखें। 252 प्रश्न 21. ग्रेगर जॉन मेण्डल का संक्षिप्त परिचय दीजिए। उत्तर— मेण्डल की प्रारम्भिक शिक्षा एक गिरजाघर में हुई तथा ये विज्ञान एवं गणित के अध्ययन के लिए वियना विश्वविद्यालय गए। अध्यापन हेतु सर्टिफिकेट की परीक्षा में असफल होना उनकी वैज्ञानिक खोज की प्रवृत्ति को दबा नहीं सका। वह अपने मोनेस्ट्री में वापस गए तथा मटर पर प्रयोग करना प्रारम्भ किया। उनसे पहले भी बहुत से वैज्ञानिकों ने मटर एवं अन्य जीवों के वशांगत गुणों का अध्ययन किया था परन्तु मेण्डल ने अपने विज्ञान एवं गणितीय ज्ञान को सम्मिलित किया। वे पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने प्रत्येक पीढ़ी के एक-एक पौधे द्वारा प्रदर्शित लक्षणों का रिकॉर्ड रखा तथा गणना की। इससे उन्हें वंशागत नियमों के प्रतिपादन में सहायता मिली। प्रश्न 22. प्रभावी एवं अप्रभावी लक्षण को समझाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22) उत्तर— जब एक जोड़ी विपर्यासी लक्षणों वाले, सम्युग्मजी या शुद्ध पौधों में क्रॉस करवाया जाता है, तो संतति पीढ़ी में जो लक्षण अपने को अभिव्यक्त या प्रकट (Express) करता है, उसे प्रभावी लक्षण एवं जो अभिव्यक्त नहीं हो पाता या छिप जाता (Masked) है, उसे अप्रभावी लक्षण कहते हैं। प्रश्न 23. एकसंकर एवं द्विसंकर प्ररूप में लक्षण प्ररूप अनुपात लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22) उत्तर— (i) एकसंकर प्ररूप में लक्षण प्ररूप अनुपात होता है। (ii) द्विसंकर प्ररूप में लक्षण प्ररूप अनुपात होता है। प्रश्न 24. निम्न को परिभाषित कीजिए— (i) संकर, (ii) पुनेट स्क्वायर, (iii) पीढ़ी, (iv) पीढ़ी उत्तर— (i) संकर— दो आनुवंशिक रूप से भिन्न जीवों के बीच संकरण के बाद उत्पन्न जीव को संकर (Hybrid) कहते हैं। (ii) पुनेट स्क्वायर— यह एक चेकर बोर्ड है, जो दो जीवों के बीच क्रॉस के परिणाम को प्रदर्शित करता है। यह जीनोटाइप तथा फीनोटाइप दोनों की संतति का वर्णन करता है। इसका विचार आर.सी. पुनेट (1927) द्वारा दिया गया था। (iii) **पीढ़ी ( Generation)—** अथवा प्रथम जनरेशन वह जनरेशन है जो आनुवंशिक रूप से भिन्न जीवों, जिन्हें जनक कहते हैं, के मध्य क्रास कराने से उत्पन्न होती है। (iv) **पीढ़ी ( Generation)—** या द्वितीय जनरेशन वह जनरेशन है जो जनरेशन के जीवों के मध्य संकरण के परिणामस्वरूप प्राप्त होती है। **प्रश्न 25. शुद्ध लंबे ( ) व शुद्ध बौने ( ) पौधों में पीढ़ी तक के लक्षणों की वंशागति को दर्शाने वाला रेखाचित्र बनाइए।** (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2024) उत्तर— [शुद्ध लंबे (TT) व शुद्ध बौने (tt) पौधों में F_2 पीढ़ी तक के लक्षणों की वंशागति का रेखाचित्र (क्रॉस)]
चित्र-लक्षणों की वंशागति विज्ञान कक्षा-X 253 प्रश्न 26. उपार्जित लक्षणों की वंशागति नहीं होती है? कैसे? ( प्रश्न बैंक ) उत्तर—उपार्जित लक्षण वातावरणीय प्रभावों या अंगों के उपयोग-अनुपयोग अथवा हॉर्मीन के अतिस्रवण या अल्पस्रवण के कारण किसी जीन के जीवनकाल में बनते हैं जो वंशागत नहीं होते हैं क्योंकि इनसे जनन कोशिकाओं के डीएनए में बदलाव नहीं होता है। ये केवल कायिक कोशिकाओं को ही प्रभावित करते हैं। प्रश्न 27. आनुवंशिक तथा उपार्जित लक्षणों में अन्तर स्पष्ट कीजिए। ( प्रश्न बैंक ) उत्तर—
प्रश्न 28. स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम को लिखिए। इसमें पीढ़ी में जीन प्रारूप तथा लक्षण प्रारूप क्या होगा? ( प्रश्न बैंक ) उत्तर— स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम-इसके अनुसार दो जोड़ी विपरीत लक्षणों के बीच संकरण कराने पर इन लक्षणों का पृथक्करण स्वतंत्र रूप से होता है तथा एक लक्षण की वंशागति दूसरे लक्षण की वंशागति को प्रभावित नहीं करती है। पीढ़ी में लक्षण प्रारूप = पीढ़ी में जीन प्रारूप = दीर्घउत्तरीय प्रश्न— प्रश्न 1. मानव में लिंग निर्धारण को समझाओ और इसका आरेख चित्र भी बनाओ। ( माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23 ) अथवा मानव में लिंग निर्धारण को आरेखित चित्र द्वारा समझाइए। ( माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25 ) अथवा मानव में लिंग निर्धारण की प्रक्रिया को समझाइए। संतति के लिंग निर्धारण का किरण आरेख चित्र बनाइए। ( प्रश्न बैंक ) [मानव में लिंग निर्धारण (Sex determination in humans)]
उत्तर—मानव में लिंग निर्धारण प्रकार का होता है। मानव में कुल 23 जोड़े अर्थात् 46 गुणसूत्र होते हैं। नर में 44 गुणसूत्र अलिंग गुणसूत्र (Autosomes) होते हैं तथा दो लिंग गुणसूत्र (Sex Chromosome) 'X' तथा 'Y' होते हैं। स्त्री या मादा में भी 44 गुणसूत्र ऑटोसोम (Autosomes) होते हैं तथा दो लिंग गुणसूत्र 'X' व 'X' होते हैं। जब शुक्राणु बनते हैं तो शुक्राणु गुणसूत्र वाले तथा शेष शुक्राणु गुणसूत्र वाले होते हैं। जबकि स्त्री या मादा के सभी अंडों में गुणसूत्र होते हैं। संतान में कितनी लड़कियाँ तथा कितने लड़के होंगे, यह इस पर निर्भर करता है कि कौनसा शुक्राणु अण्ड से निषेचित करता है। मानव में नर बच्चे का होना 'Y' गुणसूत्र की उपस्थिति पर निर्भर करता है। एक शुक्राणु में केवल 'X' या 'Y' लिंग गुणसूत्र ही हो सकता है, अतः पिता का 'X' गुणसूत्र लड़कियों में तथा 'Y' गुणसूत्र लड़कों में मिलता है। प्रश्न 2. (i) मेंडेल के आनुवंशिकता के द्वितीय सिद्धान्त (पृथक्करण का नियम) की व्याख्या कीजिए। अथवा मेंडेल द्वारा प्रतिपादित पृथक्करण के नियम को समझाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24) (ii) मेंडेल द्वारा अपने प्रयोगों में उद्यान मटर का चयन के कारण लिखिए। अथवा मेंडेल ने अपने प्रयोग के लिए मटर के पौधे को ही क्यों चुना? (प्रश्न बैंक) उत्तर-(i) पृथक्करण का नियम (Law of Segregation)- इस नियम के अनुसार जब दो विपरीत लक्षणों वाले शुद्ध नस्ल के एक ही जाति के दो पौधों या जनकों के बीच संकरण कराया जाता है, तो उसकी पीढ़ी में संकर पौधे प्राप्त होते हैं और सिर्फ प्रभावी लक्षण को ही प्रकट करते हैं। किन्तु इनकी दूसरी पीढ़ी ( ) के पौधों में परस्पर विपरीत लक्षणों का एक निश्चित अनुपात ( ) में पृथक्करण हो जाता है क्योंकि प्रथम पीढ़ी के साथ-साथ रहने पर भी गुणों का आपस में मिश्रण नहीं होता है और युग्मक निर्माण के समय गुण पृथक हो जाते हैं और युग्मकों की शुद्धता बनी रहती है इसलिए इसे युग्मकों की शुद्धता का नियम भी कहते हैं। यह नियम एक संकर संकरण के परिणामों पर आधारित है। **(ii) मेंडेल द्वारा अपने प्रयोगों में उद्यान मटर के चयन के कारण निम्न हैं- 1. मटर सरलता से उगाया जा सकता है। 2. इस पादप (मटर) का जीवन काल अत्यन्त अल्प (एक वर्ष से भी कम) होता है अतः अल्प समय में अनेक पीढ़ियों का अध्ययन किया जा सकता है। 3. इसके पुष्प में संकरण आसानी से करवाया जा सकता है। 4. मटर के पौधों में अनेक विपर्यासी लक्षण पाये जाते हैं, जिनमें भेद स्पष्ट होता है। अतः गणना में त्रुटि की सम्भावना नहीं रहती। प्रश्न 3. (i) लिंगसूत्र व अलिंगसूत्र क्या है? समझाइए। (ii) एक संकर क्रॉस व द्विसंकर क्रॉस में अन्तर लिखिए। उत्तर-(i) लिंगसूत्र- वे गुणसूत्र जो लिंग का निर्धारण करते हैं, लिंग गुणसूत्र कहलाते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं। इन्हें एवं गुणसूत्र कहते हैं। गुणसूत्र आकार में बड़ा होता है तथा आकृति में सीधा होता है किन्तु गुणसूत्र आकार में छोटा तथा आकृति में एक सिरे पर मुड़ा हुआ होता है। अलिंगसूत्र- लिंग गुणसूत्रों के अतिरिक्त शेष गुणसूत्र जो शरीर के सभी लक्षणों (केवल लिंग गुणों को छोड़कर) का निर्धारण करते हैं अलिंगसूत्र कहलाते हैं। मानव लिंग में 22 जोड़ी अलिंग गुणसूत्र होते हैं। **(ii) एक संकर क्रॉस व द्विसंकर क्रॉस में अन्तर-
प्रश्न 4. किसी दिए गये हरे तने वाले गुलाब के पौधे को से दर्शाया गया है तथा भूरे तने वाले गुलाब के पौधे को से दर्शाया गया है। इन दोनों पौधों के बीच संकरण कराया गया है- (अ) नीचे दिए गये अनुसार अपने प्रेक्षणों की सूची बनाइए। 1. इनकी संतति में तने का रंग, विज्ञान कक्षा-X 255 2. यदि संतति के पौधों का स्वपरागण कराया जाये तो संतति में भूरे तने वाले पौधों की प्रतिशतता, 3. संतति में और का अनुपात। ( ब ) इस संकरण की जाँच के आधार पर क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है? उत्तर-(अ) 1. संतति में तने का रंग हरा होगा। 2. संतति में भूरे तने वाले पौधों की प्रतिशतता 25 प्रतिशत होगी। 3. संतति में और का अनुपात होगा। ( ब ) इस संकरण की जाँच के आधार पर यह निष्कर्ष निकलता है कि गुलाब के पौधे में तने का हरे रंग का लक्षण प्रभावी लक्षण है जबकि तने के भूरे रंग का लक्षण अप्रभावी लक्षण है। ये दोनों लक्षण एक-दूसरे में समाते नहीं हैं किन्तु अगली संतति में एक-दूसरे से अलग-अलग हो जाते हैं। प्रश्न 5. मेंडल के किसी एक विकल्पीय जोड़े के संकरण को आरेख चित्र द्वारा समझाइए। उत्तर— एक विकल्पीय जोड़े के संकरण का आरेख चित्र- [मेंडल के एक विकल्पीय जोड़े के संकरण का आरेख चित्र (Monohybrid Cross Chart showing TT × tt, F_1 generation Tt, and F_2 generation TT, Tt, Tt, tt)]
मेंडल ने शुद्ध लम्बे पौधों तथा शुद्ध बौने पौधों के मध्य संकरण करवाया तो प्रथम संतति पीढ़ी में सभी मटर के पौधे लम्बे प्राप्त हुए। इससे स्पष्ट होता है कि पौधे के लम्बेपन का लक्षण ( ) बौनेपन के लक्षण ( ) पर प्रभावी हो गया तथा बौनेपन का लक्षण छिपा रहा। जब मेंडल ने पीढ़ी के पौधों में स्वपरागण करवाया तो पीढ़ी में दोनों लक्षण प्राप्त हुए अर्थात् लम्बे पौधे भी और बौने पौधे भी ( के अनुपात में)। इससे निष्कर्ष निकलता है कि लम्बे होने का लक्षण प्रभावी और बौनेपन का लक्षण अप्रभावी होता है। प्रश्न 6. मेंडल के पृथक्करण के नियम को लिखिए। शुद्ध लम्बे तथा शुद्ध बौने पौधों में संकरण द्वारा पीढ़ी में प्राप्त संतति का किरण आरेख बनाइए। ( प्रश्न बैंक ) उत्तर— मेंडल का पृथक्करण नियम - उत्तर के लिए दीर्घउत्तरेीय प्रश्न संख्या का अवलोकन करें। किरण आरेख - उत्तर हेतु लघूत्तरात्मक प्रश्न संख्या का अवलोकन करें। प्रश्न 7. मेंडल के प्रभाविता के नियम को समझाइए। आरेख चित्र बनाइए। ( प्रश्न बैंक ) उत्तर— प्रभाविता का नियम - इसके अनुसार जब एक जोड़ी विपरीत लक्षणों को ध्यान में रखकर संकरण कराया जाता है, तो प्रथम पीढ़ी में उत्पन्न होने वाला लक्षण प्रभावी होता है जबकि दूसरा लक्षण जो छिपा रहता है, अप्रभावी होता है। आरेख चित्र- [मेंडेलियन संकरण का आरेख - जनक (P) शुद्ध लम्बे पौधे TT और शुद्ध बौने पौधे tt से F_1 और F_2 पीढ़ी का बनना]
निबन्धात्मक प्रश्न- प्रश्न 1. (i) वंशागति से क्या तात्पर्य है? कर्णपालि का उदाहरण देकर समझाइए। (ii) समयुग्मजी व विषमयुग्मजी में अन्तर लिखिए। उत्तर-(i) वंशागति- एक ही परिवार के सदस्यों में पाई जाने वाली समानता वंशागति के कारण होती है। वंशागति का अर्थ है लक्षणों का माता-पिताओं से संतानों में पहुँचना। एक ही परिवार के सदस्यों के बीच पाये जाने वाले अन्तर जनकों के अभिलक्षणों के अलग-अलग संयोजन के कारण होते हैं। इन अन्तरों को विभिन्नताएँ कहते हैं। वंशागति तथा विभिन्नता जीवों तथा जीनों के संयोजनों द्वारा आती है तथा इस वंशागति के अध्ययन को आनुवंशिकी (Genetics) कहते हैं। कर्णपालि- कान के निचले भाग को कर्णपालि कहते हैं। यह कुछ लोगों में सिर के पार्श्व में पूर्ण रूप से जुड़ा होता है परन्तु कुछ में नहीं, देखिए नीचे चित्र में। [(a) स्वतंत्र कर्णपालि तथा (b) जुड़े कर्णपालि का चित्र]
चित्र-(a) स्वतंत्र तथा (b) जुड़े कर्णपालि। कान के निचले भाग को कर्णपालि कहते हैं। यह कुछ लोगों में सिर के पार्श्व में पूर्ण रूप से जुड़ा होता है परन्तु कुछ में नहीं। स्वतंत्र एवं जुड़े कर्णपालि मानव समष्टि में पाए जाने वाले दो परिवर्त हैं। यह कर्णपालि का लक्षण वंशागतীয় है अर्थात् यह लक्षण बच्चों में माता अथवा पिता से आया है। (ii) समयुग्मजी व विषमयुग्मजी में अन्तर-
विज्ञान कक्षा-X 257 प्रश्न 2. निम्नांकित तकनीकी पदों पर टिप्पणियाँ लिखिये- (i) जीनप्ररूप तथा लक्षणप्ररूप (ii) युग्मविकल्पी (iii) संकरण तथा संकर (iv) एकसंकर तथा द्विसंकर संकरण। उत्तर -(i) जीनप्ररूप तथा लक्षणप्ररूप (Genotype and Phenotype)- जीनप्ररूप- जीव की जीनी संरचना को जीनप्ररूप कहते हैं। जीनप्ररूप द्वारा जीव में किसी लक्षण विशेष के लिये उपस्थित जीनों का प्रतीकात्मक निरूपण किया जाता है। जीनप्ररूप से जीव की आनुवंशिकी संरचना व्यक्त होती है। भिन्न-भिन्न लक्षणों के लिए जीनप्ररूप को भिन्न-भिन्न अक्षरों से प्रकट करते हैं। जैसे-मटर के पौधे की लम्बाई के लिए जीनप्ररूप को , , से तथा बीजों की आकृति के लिए , , से प्रदर्शित करते हैं। लक्षणप्ररूप- जीव के लक्षण विशेष के भौतिक स्वरूप को इसका लक्षणप्ररूप कहते हैं। लक्षणप्ररूप जीव के बाह्य स्वरूप (external appearance) को व्यक्त करता है। जैसे-लाल, लम्बा या बौना आदि। (ii) युग्मविकल्पी (Allele or Allelomorph)-किसी प्राणी में एक गुण को नियंत्रित या अभिव्यक्त करने वाले जीन के दो विपर्यास स्वरूपों को युग्मविकल्पी कहते हैं। सामान्यतः प्रत्येक जीन के दो रूप या विकल्प होते हैं, जिन्हें क्रमश: प्रभावी एवं अप्रभावी कहते हैं। (iii) संकरण तथा संकर (Hybridization and Hybrid)- दो जाति के सम्युग्मजी जनक जीवों के बीच क्रॉस या निषेचन कराने से उत्पन्न संतति को संकर कहते हैं तथा इस क्रिया को संकरण कहते हैं। (iv) एकसंकर तथा द्विसंकर संकरण (Monohybrid and Dihybrid cross)- एकसंकर संकरण- एक जोड़ी युग्म विकल्पी (जैसे-लम्बापन व बौनापन) के लिए किया गया क्रॉस एकल संकर संकरण कहलाता है। इसका पीढ़ी में लक्षण प्ररूप अनुपात होता है। द्विसंकर संकरण- दो जोड़ी युग्मविकल्पी (जैसे-पौधे की लम्बाई तथा पुष्प का रंग) के लिये किया गया क्रॉस द्विसंकर संकरण कहलाता है। इसकी पीढ़ी के पौधों का लक्षण प्ररूप अनुपात होता है। प्रश्न 3. (i) सम्युग्मजी RR पुष्प के लाल रंग के लिए, विषमयुग्मजी Rr पुष्प के गुलाबी रंग के लिए तथा सम्युग्मजी rr पुष्प के श्वेत रंग के लिए उत्तरदायी है। विषमयुग्मजी गुलाबी पुष्पों से युक्त दो जनकों के क्रॉस से प्राप्त संतति का चैकर बोर्ड पद्धति से जीन प्ररूप व लक्षण प्ररूप में अन्तर बताइएं। (ii) जीन प्ररूप व लक्षण प्ररूप में अन्तर लिखिए। उत्तर -(i)
[Punnett square / Checker board for Monohybrid cross showing incomplete dominance (RR - red, Rr - pink, rr - white)]
जीन प्ररूप अनुपात:
लक्षण प्ररूप अनुपात:
(ii) जीन प्ररूप व लक्षण प्ररूप में अन्तर-
प्रश्न 4. मेंडल के द्विसंकर प्रयोग का सचित्र वर्णन कीजिए। इस प्रयोग पर आधारित मेंडल के निष्कर्ष के बारे में लिखिए। अथवा मेंडल के द्विसंकर संकरण के नियम को समझाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24) उत्तर— दो विकल्पी जोड़ों अर्थात् दो अलग-अलग लक्षणों की वंशागति के अध्ययन हेतु मेंडल ने द्विसंकर संकरण प्रयोग किए। इस प्रयोग में मेंडल ने दो लक्षणों (बीज का रंग व बीज की आकृति) का चयन कर उनके प्रभावी (गोल, पीले बीज) एवं अप्रभावी (झुर्रीदार हरे बीज) जनकों के मध्य क्रॉस करवाया। जिससे प्राप्त पीढ़ी के पौधों में केवल प्रभावी लक्षण प्रकट हुए। पीढ़ी के पौधों में स्वपरागण से प्राप्त पीढ़ी के पौधों में लक्षणों के प्रेक्षण से ज्ञात हुआ कि इस पीढ़ी के कुछ पौधे लक्षणों के जनकीय संयोजन (गोल, पीले बीज व झुर्रीदार, हरे बीज) एवं कुछ पौधे अजनकीय संयोजन (गोल, हरे बीज व झुर्रीदार, पीले बीज) प्रकट करते हैं। इस प्रयोग से प्राप्त परिणामों के आधार पर मेंडल ने यह निष्कर्ष निकाला कि पीढ़ी में जनकीय लक्षणों के साथ अजनकीय लक्षणों का प्रकट होना इस बात का इशारा करता है कि एक लक्षण के कारक दूसरे लक्षणों के कारकों की वंशागति को प्रभावित नहीं करते हैं वरन लक्षणों की वंशागति एक-दूसरे से स्वतंत्र होती है। कालान्तर में इस निष्कर्ष से स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम प्रतिपादित किया गया। [मेंडल का द्विसंकर संकरण (बीजों की आकृति एवं रंग) स्वतंत्र वंशागति का सचित्र प्रदर्शन और F_2 पीढ़ी के फिनोटाइप अनुपात 9:3:3:1]
चित्र — दो अलग-अलग लक्षणों (बीजों की आकृति एवं रंग) की स्वतंत्र वंशागति विज्ञान कक्षा-X 259 प्रश्न 5. मेंडल के प्रयोग ने यह किस प्रकार दर्शाया कि- ( अ ) लक्षण प्रभावी एवं अप्रभावी होते हैं, अथवा मेंडल के एकल संकर संकरण प्रयोग से आप कैसे समझाएँगे कि कौन-सा लक्षण प्रभावी है तथा कौन-सा अप्रभावी लक्षण है? ( प्रश्न बैंक ) ( ब ) विभिन्न लक्षण स्वतंत्र रूप से वंशागत होते है? उत्तर—( अ ) मेंडल ने अपने एक लक्षण वंशागति या एक संकर संकरण प्रयोग द्वारा सिद्ध किया कि लक्षण प्रभावी एवं अप्रभावी होते हैं। इस प्रयोग में जब इन्होंने शुद्ध लम्बे ( ) व शुद्ध बौने ( ) पौधे के मध्य संकरण कराया तो प्राप्त पीढ़ी के सभी पौधे लम्बे थे। पीढ़ी का यह लक्षण दोनों लक्षणों के कारकों का मिश्रित प्रभाव है या नहीं यह जाँचने के लिए मेंडल ने पीढ़ी के पौधे में स्वपरागण द्वारा निषेचन करवाकर पीढ़ी प्राप्त की। इन्होंने देखा कि पीढ़ी में लम्बे व बौने दोनों प्रकार के पौधे के अनुपात में प्राप्त हुए। इस प्रेक्षण से मेंडल ने यह निष्कर्ष निकाला की पीढ़ी में दोनों लक्षणों के कारक मिश्रित न होकर अलग-अलग रूप में उपस्थित थे, किन्तु उनमें से केवल वो ही लक्षण प्रकट हुआ जो दूसरे लक्षण पर प्रभावी था और अप्रभावी लक्षण केवल सम्युग्मजी अवस्था ( ) में प्रकट होता है। ( ब ) मेंडल ने अपने द्विलक्षण वंशागति या द्विसंकर प्रयोग द्वारा यह सिद्ध किया कि विभिन्न लक्षण स्वतंत्र रूप से एक-दूसरे को प्रभावित किये बिना वंशागत होते हैं। इस प्रयोग में मेंडल ने पीले गोल बीज वाले पौधे को हरे झुर्रीदार बीज वाले पौधे से संकरित करवाकर पीले गोल बीजयुक्त पौधों की पीढ़ी प्राप्त की। मेंडल ने यह देखा कि पीढ़ी के पौधों में स्वपरागण से प्राप्त पीढ़ी के कुछ पौधे जनकीय लक्षण (पीले, गोल बीज एवं हरे झुर्रीदार बीज) तथा कुछ पौधे अजनकीय लक्षण (पीले झुर्रीदार बीज एवं हरे गोल बीज) प्रकट करते हैं। इस प्रेक्षण से मेंडल ने यह निष्कर्ष निकाला कि एक लक्षण के दो विपर्यासी कारक युग्मक निर्माण के समय पृथक होकर किसी अन्य लक्षण के किसी भी कारक (प्रभावी या अप्रभावी) से मिल सकते हैं। ऐसी दशा में अजनकीय युग्मकों के संलयन से अजनकीय लक्षणों युक्त पौधे निर्मित होते हैं। इस प्रकार मेंडल ने उक्त प्रयोग द्वारा दर्शाया कि विभिन्न लक्षणों के स्वतंत्र वंशागति के कारण ही पीढ़ी में जनकीय लक्षणों के साथ अजनकीय लक्षणों वाले पौधे भी देखे जाते हैं। और अध्याय देखें / Explore More ChaptersScience रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरणपढ़ें रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण Scienceअम्ल, क्षारक एवं लवणपढ़ें अम्ल, क्षारक एवं लवण Scienceधातु एवं अधातुपढ़ें धातु एवं अधातु Scienceकार्बन एवं उसके यौगिकपढ़ें कार्बन एवं उसके यौगिक Scienceजैव प्रक्रमपढ़ें जैव प्रक्रम Scienceनियंत्रण एवं समन्वयपढ़ें नियंत्रण एवं समन्वय Scienceजीव जनन कैसे करते हैंपढ़ें जीव जनन कैसे करते हैं Scienceप्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तनपढ़ें प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन |







