RajBoardExam
विज्ञान (Science)हिंदी माध्यम2026-27

RBSE Class 10 Science Chapter 9 Solutions in Hindi — प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन | पासबुक हल, नोट्स

📅 अंतिम अपडेट: 2026-09-10📖 RBSE/NCERT Solutions
भाग 1 — समाधान (Solutions)

📖 1. समाधान: पाठगत एवं पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

राजस्थान बोर्ड कक्षा 10 विज्ञान — सभी पाठगत (In-text) एवं अभ्यास (Exercise) प्रश्नों के सटीक एवं संपूर्ण हल।

अध्याय 9 - प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन

260

सजीव बुक्स

9. प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन

(Light-Reflection and Refraction)

SECTION_SOLUTIONS_START: 1. समाधान: पाठगत एवं पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

पाठगत प्रश्न

#### पृष्ठ 157

प्रश्न 1. अवतल दर्पण के मुख्य फोकस की परिभाषा लिखिए।

उत्तर- अवतल दर्पण के मुख्य अक्ष पर स्थित ऐसा बिन्दु जहाँ पर दर्पण के मुख्य अक्ष के समान्तर आने वाली प्रकाश किरणें, परावर्तन के पश्चात् मिलती हैं, अवतल दर्पण का मुख्य फोकस कहलाता है। इसे FF से प्रदर्शित करते हैं।

[अवतल दर्पण का मुख्य फोकस और किरण आरेख]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 9 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन चित्र 1

प्रश्न 2. एक गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या 20cm20 cm है। इसकी फोकस दूरी क्या होगी?

उत्तर- दिया गया है - वक्रता त्रिज्या R=20cmR=20 cm

R=2f∵R=2f होता है

फोकसदूरीf=R2=202=10cm∴ \text{फोकस} \text{दूरी} f=\frac{R}{2}=\frac{20}{2}=10 cm

प्रश्न 3. उस दर्पण का नाम बताइये जो बिंब का सीधा तथा आवर्धित प्रतिबिम्ब बना सके?

उत्तर- अवतल दर्पण।

प्रश्न 4. हम वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में वरीयता क्यों देते हैं?

विज्ञान कक्षा-X

265

अथवा

वाहनों में पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में उत्तल दर्पण का उपयोग क्यों किया जाता है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— हम वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में वरीयता देते हैं, इसके निम्न कारण हैं-

(i) यह सदैव वस्तु का सीधा प्रतिबिम्ब बनाता है। यद्यपि वह छोटा होता है।

(ii) इनका दृष्टि क्षेत्र भी बहुत अधिक होता है क्योंकि ये बाहर की ओर वक्रित होते हैं। इसलिए ड्राइवर को अपने पीछे के बहुत बड़े क्षेत्र को देखने में समर्थ बनाते हैं।

पृष्ठ 160

प्रश्न 1. उस उत्तल दर्पण की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए जिसकी वक्रता-त्रिज्या 32cm32 cm है।

उत्तर— उत्तल दर्पण की वक्रता त्रिज्या R=+32cmR=+32 cm

अतः फोकस दूरी f=R2=+322=+16cmf=\frac{R}{2}=\frac{+32}{2}=+16 cm

अतः उत्तल दर्पण की फोकस दूरी =+16सेमी.=+16 \text{सेमी}. है।

प्रश्न 2. कोई अवतल दर्पण आमने-सामने 10cm10 cm दूरी पर रखे किसी बिंब का तीन गुना आवर्धित (बड़ा) वास्तविक प्रतिबिम्ब बनाता है। प्रतिबिम्ब दर्पण से कितनी दूरी पर है? (प्रश्न बैंक)

उत्तर— गोलीय दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन ( mm )

m=प्रतिबिंबकीऊँचाईबिंबकीऊँचाई=प्रतिबिंबकीदूरीvबिंबकीदूरीum=\frac{\text{प्रतिबिंब} \text{की} \text{ऊँचाई}}{\text{बिंब} \text{की} \text{ऊँचाई}}=-\frac{\text{प्रतिबिंब} \text{की} \text{दूरी} v}{\text{बिंब} \text{की} \text{दूरी} u}

m=hh=vum=\frac{h^{′}}{h}=-\frac{v}{u}

दिया हुआ है बिंब का तीन गुणा आवर्धित वास्तविक प्रतिबिंब बनता है अतः

h=3hh^{′}=-3h (वास्तविक प्रतिबिम्ब के लिए ऋणात्मक चिह्न)

मान रखने पर-

3hh=vuvu=3\frac{-3h}{h}=\frac{-v}{u}∴\frac{v}{u}=3

बिंब की दूरी ( uu ) =10cm=-10 cm

अतः:

v10=3\frac{v}{-10}=3

v=3×(10)=30cmv=3 \times (-10)=-30 cm

अतः प्रतिबिम्ब दर्पण से 30cm30 cm की दूरी पर उसके सामने बनेगा।

पृष्ठ 165

प्रश्न 1. वायु में गमन करती प्रकाश की एक किरण जल में तिरछी प्रवेश करती है। क्या प्रकाश किरण अभिलंब की ओर झुकेगी अथवा अभिलंब से दूर हटेगी? बताइए क्यों?

उत्तर— प्रकाश की किरण अभिलंब की तरफ झुकेगी क्योंकि जल, वायु की तुलना में सघन है। इसलिए जब प्रकाश की किरण वायु से (विरल माध्यम से) पानी में (सघन माध्यम) प्रवेश करती है तब प्रकाश की गति कम हो जाती है और वह अभिलम्ब की तरफ झुक जाती है।

प्रश्न 2. प्रकाश वायु से 1.501.50 अपवर्तनांक की काँच की प्लेट में प्रवेश करता है। काँच में प्रकाश की चाल कितनी है? निर्वात में प्रकाश की चाल 3×108m/s3 \times 10^{8} m/s है।

उत्तर— दिया गया है –

काँच का अपवर्तनांक ( nmn_{m} ) =1.50=1.50

निर्वात में प्रकाश की चाल ( cc ) =3×108m/s=3 \times 10^{8} m/s

nm=cvहोताहै∵n_{m}=\frac{c}{v} \text{होता} \text{है}

v=cnm∴v=\frac{c}{n_{m}}

अतः काँच में प्रकाश की चाल v=3×1081.50=2×108v=\frac{3 \times 10^{8}}{1.50}=2 \times 10^{8}

अतः v=2×108m/sv=2 \times 10^{8} m/s

प्रश्न 3. सारणी 9.3 (पाठ्यपुस्तक में देखें) से अधिकतम प्रकाशिक घनत्व के माध्यम को ज्ञात कीजिए। न्यूनतम प्रकाशिक घनत्व के माध्यम को भी ज्ञात कीजिए।

उत्तर— अधिकतम प्रकाशिक घनत्व का माध्यम हीरा है, चूँकि हीरे का निरपेक्ष अपवर्तनांक का मान ( 2.422.42 ) अधिकतम है।

इसी तरह से न्यूनतम प्रकाशिक घनत्व का माध्यम वायु है, चूँकि वायु का निरपेक्ष अपवर्तनांक का मान सबसे कम ( 1.00031.0003 ) है।

प्रश्न 4. आपको किरोसिन, तारपीन का तेल तथा जल दिए गए हैं। इनमें से किसमें प्रकाश सबसे अधिक तीव्र गति से चलता है? सारणी 9.3 (पाठ्यपुस्तक में देखें) में दिए गए आँकड़ों का उपयोग कीजिए।

उत्तर— जल का अपवर्तनांक 1.331.33 , मिट्टी के तेल का अपवर्तनांक 1.441.44 तथा तारपीन तेल का अपवर्तनांक 1.471.47 होता है। स्पष्ट है कि जल का अपवर्तनांक सबसे कम है। अतः जल में प्रकाश का वेग मिट्टी के तेल तथा तारपीन के तेल से अधिक होगा।

प्रश्न 5. हीरे का अपवर्तनांक 2.422.42 है। इस कथन का क्या अभिप्राय है?

उत्तर— इसका अभिप्राय यह है कि हीरे में प्रकाश की चाल, निर्वात में प्रकाश की चाल की 12.42\frac{1}{2.42} गुनी होगी।

पृष्ठ 174

प्रश्न 1. किसी लेंस की 11 डाइऑप्टर क्षमता को परिभाषित कीजिए।

उत्तर— 11 डाइऑप्टर उस लेंस की क्षमता है, जिसकी फोकस दूरी 11 मीटर हो ( 1D=1m11D=1m^{-1} )। अतः:

1डाइऑप्टर=1f(1मीटर)1 \text{डाइऑप्टर}=\frac{1}{f(1 \text{मीटर})}

प्रश्न 2. कोई उत्तल लेंस किसी सुई का वास्तविक तथा उल्टा प्रतिबिम्ब उस लेंस से 50cm50 cm दूर बनाता है। यह सुई, उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखी है, यदि इसका प्रतिबिम्ब उसी साइज का बन रहा है जिस साइज का बिंब है। लेंस की क्षमता भी ज्ञात कीजिये।

उत्तर— दिया गया है –

v=+50cmv=+50 cm

तथा प्रतिबिम्बकीलम्बाई(h)=वस्तुकीलम्बाई(h)\text{प्रतिबिम्ब} \text{की} \text{लम्बाई} (h^{′})=\text{वस्तु} \text{की} \text{लम्बाई} (h)

आवर्धनm=hh=1(प्रतिबिम्बवास्तविकवउल्टाहै)∴\text{आवर्धन} m=\frac{h^{′}}{h}=-1(∵\text{प्रतिबिम्ब} \text{वास्तविक} \text{व} \text{उल्टा} \text{है})

परन्तु लेंस के लिए

m=vuvu=1m=\frac{v}{u}∴\frac{v}{u}=-1

अतः u=v=50cmu=-v=-50 cm

अतः सुई उत्तल लेंस के सामने उससे 50cm50 cm दूरी पर रखी है।

लेंस के सूत्र से 1v1u=1f\frac{1}{v}-\frac{1}{u}=\frac{1}{f}

अतः 1f=150150\frac{1}{f}=\frac{1}{50}-\frac{1}{-50}

1f=150+150=250=125\frac{1}{f}=\frac{1}{50}+\frac{1}{50}=\frac{2}{50}=\frac{1}{25}

f=25cmया0.25m∴f=25 cm \text{या} 0.25 m

विज्ञान कक्षा-X

267

लेंसकीक्षमताP=1f(मी.में)∴\text{लेंस} \text{की} \text{क्षमता} P=\frac{1}{f(\text{मी}. \text{में})}

P=10.25=+4DP=\frac{1}{0.25}=+4D

वैकल्पिक विधि-दी गयी स्थिति (प्रतिबिम्ब की) वास्तविक, उल्टा व समान आकार [यह सम्भव 2F12F_{1} पर है]

किरण चित्र से-

[उत्तल लेंस द्वारा वास्तविक, उल्टा व समान आकार का प्रतिबिंब बनने का किरण आरेख जब बिंब 2F_1 पर हो]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 9 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन चित्र 2

चिन्ह परिपाटी से v=+50cmv=+50 cm

सीधे चित्र से FF का मान 2F2F का आधा होगा

f=v2=502=25cm=25100m∴f=\frac{v}{2}=\frac{50}{2}=25 cm=\frac{25}{100} m

लेंसक्षमता=P=1f=10.25=+4D\text{लेंस} \text{क्षमता} =P=\frac{1}{f}=\frac{1}{0.25}=+4D

प्रश्न 3. 2m2 m फोकस दूरी वाले किसी अवतल लेंस की क्षमता ज्ञात कीजिये।

उत्तर- दिया है- f=2मीटरf=-2 \text{मीटर}

क्षमताP=1f(मीटर)=12=0.5D∴\text{क्षमता} P=\frac{1}{f(\text{मीटर})}=\frac{1}{-2}=-0.5 D

P=0.5डायॉप्टरP=-0.5 \text{डायॉप्टर}

पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

प्रश्न 1. निम्न में से कौन-सा पदार्थ लेंस बनाने के लिए प्रयुक्त नहीं किया जा सकता?

(a) जल
(b) काँच
(c) प्लास्टिक
(d) मिट्टी

उत्तर-(d) मिट्टी।

प्रश्न 2. किसी बिंब का अवतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब आभासी, सीधा तथा बिंब से बड़ा पाया गया। वस्तु की स्थिति कहाँ होनी चाहिए?

(a) मुख्य फोकस तथा वक्रता केंद्र के बीच
(b) वक्रता केंद्र पर
(c) वक्रता केंद्र से परे
(d) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच

उत्तर-(d) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच।

प्रश्न 3. किसी बिंब का वास्तविक तथा समान साइज का प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए बिंब को उत्तर लेंस के सामने कहाँ रखें?

(a) लेंस के मुख्य फोकस पर
(b) फोकस दूरी की दुगुनी दूरी पर
(c) अनंत पर
(d) लेंस के प्रकाशिक केंद्र तथा मुख्य फोकस के बीच

उत्तर-(b) फोकस दूरी की दुगुनी दूरी पर।

प्रश्न 4. किसी गोलीय दर्पण तथा किसी पतले गोलीय लेंस दोनों की फोकस दूरियाँ 15cm-15 cm हैं। दर्पण तथा लेंस संभवतः हैं-

(a) दोनों अवतल
(b) दोनों उत्तल
(c) दर्पण अवतल तथा लेंस उत्तल
(d) दर्पण उत्तल तथा लेंस अवतल

उत्तर-(a) दोनों अवतल।

प्रश्न 5. किसी दर्पण से आप चाहे कितनी ही दूरी पर खड़े हों, आपका प्रतिबिंब सदैव सीधा प्रतीत होता है। संभवतः दर्पण है-

(a) केवल समतल
(b) केवल अवतल
(c) केवल उत्तल
(d) या तो समतल अथवा उत्तल

उत्तर-(d) या तो समतल अथवा उत्तल।

प्रश्न 6. किसी शब्दकोश (Dictionary) में पाए गए छोटे अक्षरों को पढ़ते समय आप निम्न में से कौन-सा लेंस पसंद करेंगे? (प्रश्न बैंक)

(a) 50cm50 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस
(b) 50cm50 cm फोकस दूरी का एक अवतल लेंस
(c) 5cm5 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस
(d) 5cm5 cm फोकस दूरी का एक अवतल लेंस

उत्तर-(c) 5cm5 cm फोकस दूरी का एक उत्तल लेंस।

प्रश्न 7. 15cm15 cm फोकस दूरी के एक अवतल दर्पण का उपयोग करके हम किसी बिंब का सीधा प्रतिबिंब बनाना चाहते हैं। बिंब का दर्पण से दूरी का परिसर (range) क्या होना चाहिए? प्रतिबिंब की प्रकृति कैसी है? प्रतिबिंब बिंब से बड़ा है अथवा छोटा? इस स्थिति में प्रतिबिंब बनने का एक किरण आरेख बनाइए।

अथवा

15cm15 cm फोकस दूरी के एक अवतल दर्पण का उपयोग करके हम किसी बिंब का सीधा प्रतिबिंब बनाना चाहते हैं। बिंब का दर्पण से दूरी का परिसर क्या होना चाहिए। प्रतिबिंब की प्रकृति व आकार पर टिप्पणी लिखिए। इस स्थिति में प्रतिबिंब बनने का किरण चित्र बनाइए। एक दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन +1+1 है। इसका क्या अर्थ है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)

उत्तर-(i) यदि वस्तु को अवतल दर्पण के ध्रुव तथा फोकस के मध्य स्थिर किया जाये तब वस्तु का सीधा प्रतिबिंब बनता है। अतः वस्तु की अवतल दर्पण के ध्रुव से दूरी 15cm.15 cm. से कुछ कम हो सकती है।

(ii) प्राप्त प्रतिबिंब कल्पित एवं सीधा होगा। (iii) प्रतिबिंब का आकार बिंब से बड़ा होगा। (iv) चित्र में किरण आरेख को प्रदर्शित किया गया है- (v) उत्पन्न आवर्धन m=+1m=+1

m=hh=1∴m=\frac{h^{′}}{h}=1

या

h=hh^{′}=h

इसका अर्थ है कि समतल दर्पण में बने प्रतिबिंब का आकार वस्तु के बराबर है। mm का धन चिह्न यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब आभासी तथा दर्पण के पीछे की ओर बन रहा है।

प्रश्न 8. निम्न स्थितियों में प्रयुक्त दर्पण का प्रकार बताइए- (प्रश्न बैंक)

(a) किसी कार का अग्र-दीप (हैड-लाइट)
(b) किसी वाहन का पार्श्व/पश्च-दृश्य दर्पण
(c) सौर भट्टी

अपने उत्तर की कारण सहित पुष्टि कीजिए।

उत्तर-(a) कार की हैडलाइटों में अवतल दर्पण प्रयुक्त होता है। बल्ब दर्पण के मुख्य फोकस पर स्थित होता है तथा बल्ब से निकलने वाली किरणें परावर्तन के पश्चात् दर्पण से समानान्तर होकर सड़क पर पड़ती हैं, जिससे वाहन के सामने का पथ प्रकाशित हो जाता है।

(b) उत्तल दर्पण; क्योंकि उत्तल दर्पण सदैव वस्तु का सीधा तथा छोटा प्रतिबिंब बनाता है। इसका दृष्टि क्षेत्र बड़ा होता है, जिससे चालक को अपने पीछे के बहुत बड़े क्षेत्र का प्रतिबिम्ब प्राप्त होता रहता है।
(c) सौर भट्टी में अवतल दर्पण का प्रयोग होता है। इसमें गर्म किए जाने वाले बर्तन को दर्पण के फोकस पर रखते हैं। अवतल दर्पण सूर्य की समान्तर किरणों के रूप में आती ऊर्जा को दर्पण से परावर्तन के उपरान्त फोकस पर रखे बर्तन पर केन्द्रित कर देता है। अतः सौर भट्टियों में सूर्य के प्रकाश को केन्द्रित करने के लिए अवतल दर्पणों का उपयोग किया जाता है।

विज्ञान कक्षा-X

269

प्रश्न 9. किसी उत्तल लेंस का आधा भाग काले कागज से ढक दिया गया है। क्या यह लेंस किसी बिंब का पूरा प्रतिबिम्ब बना पाएगा? अपने उत्तर की प्रयोग द्वारा जाँच कीजिए। अपने प्रेक्षणों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर—यह लेंस वस्तु का पूर्ण प्रतिबिम्ब बनायेगा, जैसा नीचे चित्र में दिखाया गया है-

[उत्तल लेंस द्वारा आधे भाग को ढकने पर प्रतिबिम्ब बनना]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 9 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन चित्र 3

प्रायोगिक सत्यापन—सर्वप्रथम एक प्रकाशित बैंच के स्टैण्ड पर उत्तल लेंस लगाते हैं, लेंस की फोकस दूरी से कुछ अधिक दूरी पर, स्टैण्ड में एक जलती मोमबत्ती लगाकर दूसरी ओर से मोमबत्ती को देखते हैं।

अब लेंस के आधे भाग को काले कागज से ढककर लेंस के दूसरी ओर से मोमबत्ती को देखते हैं।

व्याख्या—लेंस आधा काला कर देने पर भी उस बिन्दु पर किरणें आती हैं तथा मोमबत्ती का पूरा प्रतिबिम्ब प्राप्त होता है परन्तु किरणों की संख्या कम होने के कारण प्रतिबिम्ब की तीव्रता घट जाती है।

प्रश्न 10. 5cm5 cm लंबा कोई बिंब 10cm10 cm फोकस दूरी के किसी अभिसारी लेंस से 25cm25 cm दूरी पर रखा जाता है। प्रकाश किरण-आरेख खींचकर बनने वाले प्रतिबिम्ब की स्थिति, साइज तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।

उत्तर—प्रश्नुसार दिया गया है—

बिंब की दूरी u=25cmu=-25 cm

फोकस दूरी f=+10cmf=+10 cm

बिम्ब की ऊँचाई h=5cmh=5 cm

तो प्रतिबिम्ब की दूरी v=?v=?

प्रतिबिम्ब की ऊँचाई h=?h^{′}=?

[अभिसारी लेंस द्वारा निर्मित प्रतिबिम्ब का किरण आरेख]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 9 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन चित्र 4

लेंस सूत्र से

1v1u=1f\frac{1}{v}-\frac{1}{u}=\frac{1}{f} से

या

1v=1f+1u\frac{1}{v}=\frac{1}{f}+\frac{1}{u}

मान रखने पर—

1v=110+125=110125\frac{1}{v}=\frac{1}{10}+\frac{1}{-25}=\frac{1}{10}-\frac{1}{25}

=5250=\frac{5-2}{50}

या

1v=350v=503=16.66cm\frac{1}{v}=\frac{3}{50}∴v=\frac{50}{3}=16.66 cm

अतः प्रतिबिम्ब लेंस के दूसरी ओर 16.66cm16.66 cm दूरी पर बनेगा।

पुनः बिम्ब की लम्बाई h=5cmh=5 cm

माना प्रतिबिम्ब की लम्बाई hh^{′} है, तो

आवर्धन m=vu=hhm=\frac{v}{u}=\frac{h^{′}}{h} से

प्रतिबिम्ब की लम्बाई h=hvuh^{′}=h\frac{v}{u}

=550325=5\frac{\frac{50}{3}}{-25}

या h=5×5025×3h^{′}=\frac{5 \times 50}{-25 \times 3}

h=103=3.3cm∴h^{′}=-\frac{10}{3}=-3.3 cm (प्रतिबिम्ब नीचे की ओर बनता है)

अत: प्रतिबिम्ब की स्थिति 16.66cm16.66 cm दूर, प्रतिबिम्ब का साइज 3.3cm-3.3 cm तथा प्रकृति वास्तविक होगी।

प्रश्न 11. 15cm15 cm फोकस दूरी का कोई अवतल लेंस किसी बिंब का प्रतिबिंब लेंस से 10cm10 cm दूरी पर बनाता है। बिंब लेंस से कितनी दूरी पर स्थित है? किरण आरेख खींचिए।

उत्तर -

प्रश्नुसार दिया गया है -

f=15cmf=-15 cm

v=10cmv=-10 cm

u=?u=?

[Concave lens ray diagram showing object AB and virtual image A'B']

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 9 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन चित्र 5

लेंस सूत्र से

1v1u=1f\frac{1}{v}-\frac{1}{u}=\frac{1}{f} से

1u=1v1f\frac{1}{u}=\frac{1}{v}-\frac{1}{f}

मान रखने पर -

1u=110115\frac{1}{u}=-\frac{1}{10}--\frac{1}{15}

1u=110+115=3+230\frac{1}{u}=-\frac{1}{10}+\frac{1}{15}=\frac{-3+2}{30}

या 1u=130\frac{1}{u}=-\frac{1}{30}

u=30cm∴u=-30 cm

अतः वस्तु लेंस से 30cm30 cm की दूरी पर रखी जाये। किरण आरेख चित्र में प्रदर्शित है।

प्रश्न 12. 15cm15 cm फोकस दूरी के किसी उत्तल दर्पण से कोई बिंब 10cm10 cm दूरी पर रखा है। प्रतिबिंब की स्थिति तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।

उत्तर - प्रश्नानुसार दिया गया है -

u=10cmu=-10 cm , f=+15cmf=+15 cm , v=?v=?

दर्पण सूत्र से 1u+1v=1f\frac{1}{u}+\frac{1}{v}=\frac{1}{f}

या 1v=1f1u\frac{1}{v}=\frac{1}{f}-\frac{1}{u}

मान रखने पर 1v=115110=115+110\frac{1}{v}=\frac{1}{15}--\frac{1}{10}=\frac{1}{15}+\frac{1}{10}

या 1v=2+330=530=16\frac{1}{v}=\frac{2+3}{30}=\frac{5}{30}=\frac{1}{6}

v=6cm∴v=6 cm

अतः प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 6cm6 cm की दूरी पर आभासी, सीधा तथा छोटा होगा।

प्रश्न 13. एक समतल दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन +1+1 है। इसका क्या अर्थ है?

अथवा

समतल दर्पण द्वारा उत्पन्न +1+1 है। समझाइए। ( प्रश्न बैंक )

उत्तर - उत्पन्न आवर्धन m=1m=1

m=hh=1∴m=\frac{h^{′}}{h}=1

विज्ञान कक्षा-X

271

या h=hh^{′}=h

इसका अर्थ है कि समतल दर्पण में बने प्रतिबिम्ब का आकार वस्तु के बराबर है। mm का धन चिन्ह यह दर्शाता है कि प्रतिबिम्ब आभासी तथा दर्पण के पीछे की ओर बन रहा है।

प्रश्न 14. 5.0cm5.0 cm लंबाई का कोई बिंब 30cm30 cm वक्रता त्रिज्या के किसी उत्तल दर्पण के सामने 20cm20 cm दूरी पर रखा गया है। प्रतिबिम्ब की स्थिति, प्रकृति तथा साइज ज्ञात कीजिए।

उत्तर - प्रश्นานुसार दिया गया है -

  • वस्तु की दर्पण से दूरी u=20cmu=-20 cm
  • दर्पण की वक्रता त्रिज्या R=30cmR=30 cm
  • वस्तु की लम्बाई h=5.0cmh=5.0 cm

तब दर्पण की फोकस दूरी -

f=R2=302=15cm∴f=\frac{R}{2}=\frac{30}{2}=15 cm , v=?v=?

दर्पण सूत्र से

(i) 1u+1v=1f\frac{1}{u}+\frac{1}{v}=\frac{1}{f} (ii) यदि प्रतिबिम्ब की ऊँचाई hh^{′} हो, तब

m=vu=hhm=-\frac{v}{u}=\frac{h^{′}}{h} से

h=hvu=5×(60)20h^{′}=-h\frac{v}{u}=-5 \times \frac{(60)}{-20}

=5×607×20=5×37=\frac{5 \times 60}{7 \times 20}=\frac{5 \times 3}{7}

h=157cmh^{′}=\frac{15}{7} cm या 2.14cm2.14 cm

अतः वस्तु का प्रतिबिम्ब 2.14cm2.14 cm ऊँचा, सीधा तथा आभासी होगा तथा दर्पण से 8.57cm8.57 cm की दूरी पर बनेगा।

प्रश्न 15. 7.0cm7.0 cm साइज का कोई बिंब 18cm18 cm फोकस दूरी के किसी अवतल दर्पण के सामने 27cm27 cm दूरी पर रखा गया है। दर्पण से कितनी दूरी पर किसी पर्दे को रखें कि उस पर वस्तु का स्पष्ट फोकसित प्रतिबिम्ब प्राप्त किया जा सके? प्रतिबिम्ब का साइज तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।

उत्तर - प्रश्นานुसार

  • बिम्ब का आकार h=+7.0cmh=+7.0 cm
  • दर्पण की बिम्ब से दूरी u=27cmu=-27 cm
  • फोकस दूरी f=18cmf=-18 cm
  • प्रतिबिम्ब की दर्पण से दूरी v=?v=?
(i) दर्पण सूत्र से (ii) आवर्धन m=vu=hhm=-\frac{v}{u}=\frac{h^{′}}{h}

या\text{या} h=vu×hh^{′}=-\frac{v}{u} \times h

मानरखनेपर\text{मान} \text{रखने} \text{पर}- h=5427×7h^{′}=-\frac{-54}{-27} \times 7

h=14cmh^{′}=-14 cm

चूँकियहाँपरhकामानऋणात्मकहैअतःप्रतिबिम्बवास्तविकएवंउल्टाहोगातथाप्रतिबिम्बकीसाइज14cm\text{चूँकि} \text{यहाँ} \text{पर} h^{′} \text{का} \text{मान} \text{ऋणात्मक} \text{है} \text{अतः} \text{प्रतिबिम्ब} \text{वास्तविक} \text{एवं} \text{उल्टा} \text{होगा} \text{तथा} \text{प्रतिबिम्ब} \text{की} \text{साइज} 14 cm होगी।

प्रश्न 16. उस लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए जिसकी क्षमता 2.0D-2.0 D है। यह किस प्रकार का लेंस है?

अथवा

यदि किसी लेंस की क्षमता 2D-2 D है तो लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए तथा लेंस सम्भवतया कौनसा होगा? ( प्रश्न बैंक )

उत्तर-सूत्र लेंस की क्षमता P=1f(मीटरमें)P=\frac{1}{f (\text{मीटर} \text{में})}

f=1P=12=0.5m∴f=\frac{1}{P}=\frac{1}{-2}=-0.5 m

=0.5×100=50cm=-0.5 \times 100=-50 cm

चूँकि फोकस दूरी ऋणात्मक है अतः यह अवतल लेंस (concave lens) है।

प्रश्न 17. कोई डॉक्टर +1.5D+1.5 D क्षमता का संशोधक लेंस निर्धारित करता है। लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए। क्या निर्धारित लेंस अभिसारी है अथवा अपसारी?

उत्तर - लेंस की क्षमता P=+1.5DP=+1.5 D

लेंस की फोकस दूरी P=1fP=\frac{1}{f} से

फोकस दूरी f=1P=11.5=0.67m=+67cmf=\frac{1}{P}=\frac{1}{1.5}=0.67 m=+67 cm

चूँकि यहाँ पर फोकस दूरी धनात्मक है अतः लेंस अभिसारी है।

SECTION_NOTES_START: 2. नोट्स: पाठ सार (Key Concepts & Summary)

पाठ सार

(1) प्रकाश सरल रेखाओं में गमन करता प्रतीत होता है। प्रकाश के इस सरल रेखीय पथ को प्रकाश किरण कहते हैं।

(2) प्रकाश का विवर्तन-यदि प्रकाश के पथ में रखी अपारदर्शी वस्तु अत्यन्त छोटी हो तो प्रकाश सरल रेखा में चलने के बजाय इसके किनारों पर मुड़ने की प्रवृत्ति दर्शाता है-इस प्रभाव को प्रकाश का विवर्तन कहते हैं।

(3) विवर्तन जैसी परिघटनाओं की व्याख्या करने के लिए प्रकाश को तरंग के रूप में माना जाता है तो प्रकाश की द्रव्य के साथ अन्योन्य क्रिया के विवेचन में प्रकाश को कण रूप में माना जाता है।

(4) प्रकाश के आधुनिक क्वांटम सिद्धान्त में प्रकाश को न तो 'तरंग' माना गया न ही 'कण'। इस सिद्धान्त ने प्रकाश के कण संबंधी गुणों तथा तरंग प्रकृति के बीच सामंजस्य स्थापित किया।

(5) दर्पण तथा लेंस वस्तुओं के प्रतिबिंब बनाते हैं। बिंब की स्थिति के अनुसार प्रतिबिंब वास्तविक अथवा आभासी हो सकते हैं।

(6) सभी प्रकार के परावर्ती पृष्ठ परावर्तन के नियमों का पालन करते हैं। अपवर्ती पृष्ठ अपवर्तन के नियमों का पालन करते हैं।

(7) प्रकाश का परावर्तन-जब कोई प्रकाश की किरण एक माध्यम से चलकर दूसरे माध्यम की सतह से टकराकर वापस उसी माध्यम में लौट आती है तो इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।

(8) परावर्तन के नियम-(i) आपतन कोण व परावर्तन कोण बराबर होते हैं। i=r∠i=∠r

(ii) आपतित किरण, परावर्तित किरण एवं दर्पण के आपतन बिन्दु पर अभिलम्ब तीनों एक ही तल में होते हैं।

(iii) परावर्तित किरण की आवृत्ति एवं चाल अपरिवर्तित रहती है।

(9) जब किसी काँच की पट्टिका की किसी एक सतह पर परावर्तक पदार्थ की पॉलिश कर दी जाती है तो दर्पण बन जाता है। यह मुख्यतः दो प्रकार का होता है-

(i) समतल दर्पण-समतल दर्पण से प्राप्त प्रतिबिम्ब सदैव आभासी व सीधा होता है और दर्पण से वस्तु जितनी आगे होगी, प्रतिबिम्ब दर्पण से उतनी ही दूरी पर पीछे बनेगा और वस्तु के आकार के बराबर ही होगा। प्रतिबिम्ब पार्श्व परिवर्तित होता है तथा प्रतिबिम्ब व बिम्ब दोनों एक ही चाल से गति करते हैं।

(ii) गोलीय दर्पण-ऐसे दर्पण जिनका परावर्तक पृष्ठ गोलीय है, गोलीय दर्पण कहलाते हैं। गोलीय दर्पण दो प्रकार के होते हैं-

(अ) अवतल दर्पण (ब) उत्तल दर्पण।
(अ) वायु
(ब) जल
(स) निर्वात
(द) कोई नहीं
(अ) चाल
(ब) दिशा
(स) आवृत्ति
(द) प्रकाशिक घनत्व
(अ) 9090^{∘}
(ब) 180180^{∘}
(स) 00^{∘}
(द) 4545^{∘}
(अ) आभासी व सीधा
(ब) वास्तविक एवं सीधा
(स) काल्पनिक एवं उल्टा
(द) वास्तविक एवं उल्टा
(अ) फोकस दूरी का
(ब) आवर्धन का
(स) लेंस की शक्ति का
(द) विभेदन क्षमता का
(अ) परावर्तक के ध्रुव एवं फोकस के बीच
(ब) परावर्तक के फोकस के बहुत निकट
(स) परावर्तक के फोकस एवं वक्रता केन्द्र के बीच
(द) परावर्तक के वक्रता केन्द्र पर
(अ) परावर्तन
(ब) अपवर्तन
(स) विवर्तन
(द) वर्ण विक्षेपण
(अ) फोकस
(ब) प्रकाश केन्द्र
(स) प्रतिबिम्ब
(द) वक्रता केन्द्र
(अ) परावर्तन
(ब) अपवर्तन
(स) विवर्तन
(द) विक्षेपण
(अ) +1+1
(ब) 1-1
(स) शून्य
(द) अनन्त
(अ) ध्रुव
(ब) वक्रता केन्द्र
(स) मुख्य अक्ष
(द) मुख्य फोकस
(अ) R=fR=f
(ब) R=2fR=2f
(स) R=f2R=\frac{f}{2}
(द) f=2Rf=2R
(अ) उत्तल दर्पण
(ब) उत्तल लेंस
(स) अवतल दर्पण
(द) अवतल लेंस
(अ) 2×108MS12 \times 10^{8}MS^{-1}
(ब) 3×108MS13 \times 10^{8}MS^{-1}
(स) 3×108CMS13 \times 10^{8}CMS^{-1}
(द) 3×1011MS13 \times 10^{11}MS^{-1}
(अ) P=1fP=\frac{1}{f}
(ब) P=2fP=2f
(स) P=f2P=\frac{f}{2}
(द) कोई नहीं
(अ) 1.311.31
(ब) 1.331.33
(स) 1.361.36
(द) 2.422.42
(अ) वास्तविक व सीधा
(ब) वास्तविक व उल्टा
(स) आभासी तथा सीधा
(द) आभासी व उल्टा
(अ) 1v+1u=1f\frac{1}{v}+\frac{1}{u}=\frac{1}{f}
(ब) 1v1u=1f\frac{1}{v}-\frac{1}{u}=\frac{1}{f}
(स) 1u1v=1f\frac{1}{u}-\frac{1}{v}=\frac{1}{f}
(द) 1u+1v=1f\frac{1}{u}+\frac{1}{v}=\frac{1}{f}
(अ) 11 सेमी.
(ब) 1010 सेमी.
(स) 11 मी.
(द) 1010 मी.
(अ) आपतित किरण, परावर्तित किरण एक ही तल में होती है।
(ब) परावर्तित किरण की आवृत्ति परिवर्तित एवं चाल अपरिवर्तित रहती है।
(स) आपतन कोण व परावर्तन कोण बराबर होते हैं।
(द) परावर्तित किरण की आवृत्ति एवं चाल अपरिवर्तित रहती है।
(अ) फोकस बिन्दु
(ब) द्वारक
(स) प्रकाश केन्द्र
(द) वक्रता केन्द्र
(अ) i=ri=r
(ब) i>ri>r
(स) i<ri<r
(द) iri \ne r
(अ) केवल समतल दर्पण के लिए।
(ब) केवल उत्तल दर्पण के लिए।
(स) केवल अवतल दर्पण के लिए।
(द) उपरोक्त सभी के लिए।
(अ) 1.33×108m/s1.33 \times 10^{8} m/s
(ब) 3×108m/s3 \times 10^{8} m/s
(स) 2.26×108m/s2.26 \times 10^{8} m/s
(द) 2.56×108m/s2.56 \times 10^{8} m/s
(अ) परावर्तन
(ब) प्रकीर्णन
(स) विक्षेपण
(द) अपवर्तन
(अ) अपवर्तन
(ब) परावर्तन
(स) ध्रुवण
(द) विक्षेपण
(अ) 3030^{∘}
(ब) 4545^{∘}
(स) 9090^{∘}
(द) 6060^{∘}
(अ) वास्तविक
(ब) विवर्धित
(स) छोटा
(द) पाश्विंक परिवर्तित
(अ) 10cm10 cm
(ब) 20cm20 cm
(स) 5cm5 cm
(द) ज्ञात नहीं किया जा सकता
(अ) 2525^{∘}
(ब) 5050^{∘}
(स) 7575^{∘}
(द) 6565^{∘}
(अ) 6060^{∘}
(ब) 9090^{∘}
(स) 4545^{∘}
(द) 3030^{∘}
(अ) परावर्तन कोण से ज्यादा
(ब) परावर्तन कोण के समान
(स) परावर्तन कोण से कम
(द) उपरोक्त सभी
(अ) 1.51.5
(ब) 66
(स) 33
(द) 99
(अ) μ=abμ=ab
(ब) μ=baμ=\frac{b}{a}
(स) μ=abμ=\frac{a}{b}
(द) μ=abμ=\sqrt{ab}
(अ) आधी
(ब) चौथाई
(स) दुगुनी
(द) तिगुनी
(अ) माध्यम की प्रकृति पर
(ब) माध्यम के प्रकाशिक घनत्व पर
(स) प्रकाश की तरंगदैर्ध्य पर
(द) उपर्युक्त सभी
(अ) 2×108m/s2 \times 10^{8} m/s
(ब) 1.5×108m/s1.5 \times 10^{8} m/s
(स) 2.5×108m/s2.5 \times 10^{8} m/s
(द) 4×108m/s4 \times 10^{8} m/s
(अ) उत्तल दर्पण
(ब) अवतल दर्पण
(स) समतल दर्पण
(द) उपरोक्त सभी
(अ) 3030^{∘}
(ब) 6060^{∘}
(स) 9090^{∘}
(द) 120120^{∘}
(अ) वायु
(ब) कैरोसीन
(स) हीरा
(द) बर्फ
(A) 1f=1v1u\frac{1}{f}=\frac{1}{v}-\frac{1}{u}
(B) फोकस दूरी धनात्मक
(C) 1f=1u+1v\frac{1}{f}=\frac{1}{u}+\frac{1}{v}
(D) डाइऑप्टर
(A) R=2fR=2f
(B) 1f\frac{1}{f}
(C) =hh=\frac{h^{′}}{h}
(अ) दर्पण के पीछे
(ब) फोकस ( FF ) पर
(स) वक्रता केन्द्र पर
(द) अनन्त पर
(B) एक लेंस की शक्ति 4.0D-4.0D है। इस लेंस की प्रकृति क्या होगी?

उत्तर—(A) एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने पर प्रकाश की किरण अपवर्तन के कारण मुड़ जाती है।

(B) लेंस की क्षमता/शक्ति ऋणात्मक है। अतः इस लेंस की फोकस दूरी भी ऋणात्मक होगी, इस कारण लेंस की प्रकृति अवतल होगी।
(अ)
(ब)
(स)
(द)
(B) प्रकाश के परावर्तन के नियम चित्र की सहायता से लिखिए।

उत्तर—(A) प्रकाश का परावर्तन— जब कोई प्रकाश की किरण एक माध्यम से चलकर दूसरे माध्यम की सतह से टकराकर वापस उसी माध्यम में लौट जाती है, तो इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।

(B) प्रकाश के परावर्तन के नियम निम्न प्रकार से हैं—
(b) दर्पण व लेंस में दो अन्तर लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2022-23)

उत्तर-(a) उत्तल लेंस द्वारा बनने वाले प्रतिबिम्ब का किरण चित्र जबकि बिम्ब की स्थिति अनन्त पर हो-

[उत्तल लेंस द्वारा अनन्त पर स्थित बिम्ब का किरण आरेख]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 9 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन चित्र 32

(b) दर्पण व लेंस में अन्तर-

क्र.सं.

दर्पण

लेंस

1.

किसी काँच की पट्टिका के किसी एक ओर परावर्तक पदार्थ की पॉलिश करने पर दर्पण बनता है।

यह पूर्ण रूप से पारदर्शी माध्यम होता है जो दो पृष्ठों से घिरा होता है।

2.

इसमें एक ही गोलीय पृष्ठ पाया जाता है।

इसमें दो गोलीय पृष्ठ पाये जाते हैं।

प्रश्न 15. उत्तल दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्बों की स्थिति क्या होती है? ( माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2023-24 )

उत्तर— उत्तल दर्पण में बने प्रतिबिम्ब की स्थिति-

क्र.सं.

वस्तु की स्थिति

प्रतिबिम्ब की स्थिति

1

अनन्त पर

फोकस FF पर दर्पण के पीछे

2

अनन्त तथा दर्पण के ध्रुव PP के बीच

PP तथा FF के बीच दर्पण के पीछे

प्रश्न 16. 15cm15 cm फोकस दूरी के अवतल दर्पण से 25cm25 cm दूरी पर एक वस्तु रखी गई है। दर्पण से कितनी दूरी पर किसी पर्दे को रखा जाए कि पर्दे पर स्पष्ट प्रतिबिंब प्राप्त हो। ( माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25 )

उत्तर—अवतल दर्पण के लिए दिया गया है—

фокус दूरी, f=15cmf=-15 cm

बिंब दूरी, u=25cmu=-25 cm

प्रतिबिम्ब दूरी, v=?v=?

दर्पण सूत्र से—

1v+1u=1f\frac{1}{v}+\frac{1}{u}=\frac{1}{f}

या

1v=1f1u\frac{1}{v}=\frac{1}{f}-\frac{1}{u}

=115125=\frac{1}{-15}-\frac{1}{25}

=115+125=-\frac{1}{15}+\frac{1}{25}

=5+375=\frac{-5+3}{75}

1v=275\frac{1}{v}=\frac{-2}{75}

v=752=37.5cmv=-\frac{75}{2}=-37.5 cm

अतः पर्दे को दर्पण से 37.5cm-37.5 cm की दूरी पर रखने से स्पष्ट प्रतिबिम्ब प्राप्त होगा।

प्रश्न 17. एक अवतल दर्पण की फोकस दूरी 30सेमी.30 \text{सेमी}. है। यदि 20सेमी.20 \text{सेमी}. दूरी पर बिम्ब रखा गया है तो प्रतिबिम्बि की स्थिति ज्ञात करो। (प्रश्न बैंक)

उत्तर— वस्तु की दर्पण से दूरी u=20सेमी.u=-20 \text{सेमी}.

दर्पण की फोकस दूरी f=30सेमी.f=-30 \text{सेमी}. ( दर्पण अवतल है)

प्रतिबिम्ब की दूरी v=?v=?

दर्पण सूत्र से—

1v+1u=1f\frac{1}{v}+\frac{1}{u}=\frac{1}{f}

या

1v=1f1u\frac{1}{v}=\frac{1}{f}-\frac{1}{u}

मान रखने पर—

1v=130120\frac{1}{v}=\frac{1}{-30}-\frac{1}{-20}

=130+1202+360160=-\frac{1}{30}+\frac{1}{20}⇒\frac{-2+3}{60}⇒\frac{1}{60}

v=60सेमी.v=60 \text{सेमी}.

vv धनात्मक है, अतः प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे बनेगा।

प्रश्न 18. किसी बिम्ब को 16सेमी16 \text{सेमी} फोकस दूरी के अवतल दर्पण से 24सेमी24 \text{सेमी} की दूरी पर रखा है। दर्पण से कितनी दूरी पर पर्दे को रखा जाए कि स्पष्ट प्रतिबिम्ब प्राप्त हो? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)

उत्तर— वस्तु की दर्पण से दूरी u=24सेमी.u=-24 \text{सेमी}.

दर्पण की फोकस दूरी f=16सेमी.f=-16 \text{सेमी}. ( दर्पण अवतल है)

विज्ञान कक्षा-X

297

प्रतिबिम्ब की दूरी

v=?v=?

दर्पण सूत्र से—

1v+1u=1f\frac{1}{v}+\frac{1}{u}=\frac{1}{f}

या

1v=1f1u\frac{1}{v}=\frac{1}{f}-\frac{1}{u}

मान रखने पर—

1v=116124\frac{1}{v}=\frac{1}{-16}-\frac{1}{-24}

=116+1243+248148=-\frac{1}{16}+\frac{1}{24}⇒\frac{-3+2}{48}⇒-\frac{1}{48}

v=48सेमी.v=-48 \text{सेमी}.

अतः पर्दे को दर्पण के सामने 48सेमी.48 \text{सेमी}. दूरी पर रखना चाहिए।

निबन्धात्मक प्रश्न-

प्रश्न 1. विभिन्न किरणों के आधार पर गोलीय दर्पणों द्वारा बने प्रतिबिम्बों के स्थान का निर्धारण किरण आरेख बनाकर कीजिए।

उत्तर— गोलीय दर्पणों द्वारा किसी बिंब के बने प्रतिबिम्ब के स्थान निर्धारण के लिए बिंब के किसी बिंदु से निकलने वाली किरणों की विशाल संख्या में से सुविधाजनक कुछ को चुना जा सकता है। तथापि किरण आरेख की स्पष्टता के लिए दो किरणों पर विचार करना अधिक सुविधाजनक है। प्रतिबिम्ब के स्थान निर्धारण के लिए निम्न में से किन्हीं भी दो किरणों पर विचार किया जा सकता है-

(i) दर्पण के मुख्य अक्ष के समांतर प्रकाश किरण, परावर्तन के पश्चात् अवतल दर्पण के मुख्य फोकस से गुजरेगी अथवा उत्तल दर्पण के मुख्य फोकस से अपसरित होती प्रतीत होगी।

[अवतल एवं उत्तल दर्पणों में मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली प्रकाश किरणों का परावर्तन किरण आरेख]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 9 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन चित्र 33

(ii) अवतल दर्पण के मुख्य फोकस से गुजरने वाली किरण अथवा उत्तल दर्पण के मुख्य फोकस की ओर निर्देशित किरण परावर्तन के पश्चात् मुख्य अक्ष के समांतर निकलेगी।

[अवतल एवं उत्तल दर्पणों में फोकस से गुजरने वाली किरणों का परावर्तन किरण आरेख]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 9 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन चित्र 34

(iii) अवतल दर्पण के वक्रता केन्द्र से गुजरने वाली किरण अथवा उत्तल दर्पण के वक्रता केन्द्र की ओर निर्देशित किरण, परावर्तन के पश्चात् उसी पथ के अनुदिश वापस परावर्तित हो जाती है।

[अवतल एवं उत्तल दर्पण में तिरछी दिशा में आपतित किरण का परावर्तन ray diagrams]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 9 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन चित्र 35

प्रश्न 2. (अ) किसी गोलीय दर्पण के लिए आवर्धन का सूत्र लिखिए।

( ब ) उस दर्पण का नाम लिखिए, जो बिम्ब का सीधा तथा आवर्धित प्रतिबिम्ब बना सके।

( स ) उत्तल दर्पण के मुख्य फोकस की परिभाषा लिखिए।

उत्तर—(अ) गोलीय दर्पण का आवर्धन सूत्र-यदि hh बिम्ब की ऊँचाई हो तथा hh^{′} प्रतिबिम्ब की ऊँचाई हो तो गोलीय दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन ( mm ) प्राप्त होगा।

m=प्रतिबिम्बकीऊँचाई(h)बिम्बकीऊँचाई(h)m=\frac{\text{प्रतिबिम्ब} \text{की} \text{ऊँचाई} (h^{′})}{\text{बिम्ब} \text{की} \text{ऊँचाई} (h)}

m=hhm=\frac{h^{′}}{h}

आवर्धन mm बिम्ब की दूरी ( uu ) तथा प्रतिबिम्ब की दूरी ( vv ) से भी सम्बन्धित है। इसे निम्न प्रकार व्यक्त करते हैं-

आवर्धनm=hh=vu\text{आवर्धन} m=\frac{h^{′}}{h}=-\frac{v}{u}

( ब ) अवतल दर्पण बिम्ब का सीधा तथा आवर्धित प्रतिबिम्ब बना सकता है।

( स ) उत्तल लेंस पर मुख्य अक्ष के समान्तर प्रकाश की बहुत सी किरणें आपतित होती हैं तो ये किरणें लेंस से अपवर्तन के पश्चात् मुख्य अक्ष पर एक बिन्दु पर अभिसारित हो जाती हैं। मुख्य अक्ष पर यह बिन्दु उत्तल लेंस का मुख्य फोकस कहलाता है।

प्रश्न 3. किसी उत्तल दर्पण द्वारा वस्तु की निम्न स्थितियों के लिये बने हुए प्रतिबिम्बों की जानकारी दीजिये और प्रतिबिम्बों के किरण आरेखों को बनाइये-

(i) जब वस्तु अनन्त पर स्थित हो।

(ii) जब वस्तु अनन्त तथा दर्पण के ध्रुव PP के बीच में स्थित हो।

उत्तर—नीचे दी गयी सारणी में उत्तल दर्पण द्वारा बने हुए प्रतिबिम्ब की प्रकृति, स्थिति तथा उसका आपेक्षिक आकार के बारे में समझाया गया है।

वस्तु की स्थिति

प्रतिबिम्ब की स्थिति

प्रतिबिम्ब का आपेक्षिक आकार

प्रतिबिम्ब की प्रकृति

अनन्त पर

फोकस FF पर दर्पण के पीछे

अत्यधिक छोटा, बिंदु के आकार का

आभासी तथा सीधा

अनन्त तथा दर्पण के ध्रुव PP के बीच

PP तथा FF के बीच दर्पण के पीछे

छोटा

आभासी तथा सीधा

विज्ञान कक्षा-X

299

किरण आरेख-

(i) जब वस्तु की स्थिति अनन्त पर हो

(ii) जब वस्तु की स्थिति अनन्त तथा दर्पण के ध्रुव P के बीच में हो

प्रश्न 4. गोलीय दर्पणों के लिये नयी कार्तीय चिन्ह परिपाटी से आप क्या समझते हैं? चित्र बनाकर इसको विस्तार से समझाइये।

उत्तर—गोलीय दर्पणों के द्वारा प्रकाश के परावर्तन के समय हम एक निश्चित चिन्ह परिपाटी का पालन करते हैं, जिसे नयी कार्तीय चिन्ह परिपाटी कहते हैं। इसमें दर्पण के ध्रुव PP को मूलबिन्दु लेते हैं। दर्पण के मुख्य अक्ष को निर्देशांक पद्धति का XX -अक्ष ( XXXX^{′} ) लिया जाता है। परिपाटी निम्न प्रकार है—

(i) वस्तु को दर्पण के बायीं ओर रखा जाता है। इसका अर्थ है कि दर्पण पर वस्तु से प्रकाश बायीं ओर से आपसित होता है।

(ii) मुख्य अक्ष के समान्तर सभी दूरियाँ दर्पण के ध्रुव से मापी जाती हैं।

(iii) मूलबिन्दु के दायीं ओर ( +X+X -अक्ष के अनुदिश) की दूरियाँ धनात्मक और बायीं ओर ( X-X -अक्ष के अनुदिश) की दूरियाँ ऋणात्मक लेते हैं।

(iv) मुख्य अक्ष के लम्बवत् तथा ऊपर की ओर ( +Y+Y -अक्ष के अनुदिश) मापी जाने वाली दूरियाँ धनात्मक मानी जाती हैं।

(v) मुख्य अक्ष के लम्बवत् तथा नीचे की ओर ( Y-Y -अक्ष के अनुदिश) मापी जाने वाली दूरियाँ ऋणात्मक मानी जाती हैं।

नयी कार्तीय चिन्ह परिपाटी को चित्र में दर्शाया गया है।

प्रश्न 5. प्रकाश का अपवर्तन क्या है? अपवर्तन का कारण क्या है? किरण चित्र की सहायता से अपवर्तन के नियम समझाइये।

अथवा

अपवर्तन से आप क्या समझते हैं? काँच की प्लेट से अपवर्तन दर्शाते हुए चित्र बनाइए। (प्रश्न बैंक)

उत्तर—अपवर्तन—जब प्रकाश किरण एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती है तो दोनों माध्यमों को पृथक् करने वाले धरातल पर वह अपने मार्ग से विचलित हो जाती है। प्रकाश की इस क्रिया को अपवर्तन कहते हैं। अपवर्तन प्रकाश के एक माध्यम से दूसरे में प्रवेश करने पर प्रकाश की चाल में परिवर्तन के कारण होता है।

अपवर्तन का कारण—दोनों माध्यमों में प्रकाश का वेग अलग-अलग होने के कारण ही प्रकाश का अपवर्तन होता है।

अपवर्तन के नियम—(1) प्रथम नियम—आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा दोनों माध्यमों को पृथक् करने वाले पृष्ठ के आपतन बिन्दु पर अभिलम्ब तीनों एक ही तल में होते हैं।

(2) द्वितीय नियम (स्नेल का अपवर्तन नियम) - प्रकाश के किसी निश्चित रंग तथा निश्चित माध्यमों के युग्म के लिए आपतन कोण की ज्या ( sinisini ) एवं अपवर्तन कोण की ज्या ( sinrsinr ) का अनुपात निश्चित रहता है। अतः:

μ=sinisinrμ=\frac{sini}{sinr}

μμ एक स्थिरांक है। इस स्थिरांक के मान को दूसरे माध्यम का पहले माध्यम के सापेक्ष अपवर्तनांक (refractive index) कहते हैं।

अपवर्तन के नियमों का सत्यापन–

[काँच की आयताकार सिल्ली से प्रकाश का अपवर्तन]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 9 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन चित्र 36

अपवर्तन के प्रथम नियम की पुष्टि के लिये चित्रानुसार काँच की एक आयताकार सिल्ली ABCDABCD लेते हैं। सिल्ली को सफेद कागज पर रखते हैं।

PQPQ प्रकाश की एक किरण है जो सिल्ली के एक फलक ABAB पर (कागज के तल को स्पर्श करती हुई) आपतित है। जब बिन्दु QQ पर यह काँच में प्रवेश करती है तब अपनी मूल दिशा से विचलित होकर QRQR दिशा में अपवर्तित हो जाती है, तदुपरान्त RSRS दिशा में सिल्ली से बाहर निकल जाती है। QRQR और RSRS को क्रमशः अपवर्तित एवं निर्गत किरण कहते हैं। हम देखते हैं कि आपतित किरण PQPQ , अपवर्तित किरण QRQR तथा अभिलम्ब QNQN तीनों विभिन्न तल में न होकर कागज के एक तल में ही हैं। अर्थात् आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा अभिलम्ब तीनों एक ही तल में होते हैं। यही अपवर्तन का पहला नियम है।

QQ को RR से मिलाने पर अपवर्तित किरण QRQR प्राप्त होती है। अब सिल्ली की सतह पर QQ बिन्दु से अभिलम्ब खींचकर आपतन कोण ii और अपवर्तन कोण rr का मान ज्ञात करते हैं। सिल्ली पर प्रकाश की किरण अलग-अलग कोण पर आपतित करते हुए ii और rr के विभिन्न मान ज्ञात करते हैं। गणना करने पर हम देखते हैं कि sinisinr\frac{sini}{sinr} का मान सदैव निश्चित रहता है। इसे स्थिरांक μμ लिखते हैं। यही अपवर्तन का दूसरा नियम है। अतः 1μ21μ_{2} या μ12sinisinr=एकनियतांकμ_{12}\frac{sini}{sinr}=\text{एक} \text{नियतांक}

प्रश्न 6. प्रकाश के सघन माध्यम से विरल माध्यम में अपवर्तन का किरण आरेख बनाइए।

उत्तर–

[प्रकाश किरण का सघन से विरल माध्यम में अपवर्तन]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 9 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन चित्र 37

चित्र-प्रकाश किरण का सघन से विरल माध्यम में अपवर्तन

विज्ञान कक्षा-X

301

प्रश्न 7. माध्यम के अपवर्तनांक को परिभाषित कीजिये। इसको प्रभावित करने वाले तीन कारक लिखिये।

उत्तर— जब प्रकाश की किरण तिरछी गमन करती हुई एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे में प्रवेश करती है तो यह दूसरे माध्यम में अपनी दिशा परिवर्तित कर लेती है। किन्हीं दिये हुए माध्यमों के युग्म के लिये होने वाले दिशा परिवर्तन के विस्तार को अपवर्तनांक के रूप में व्यक्त किया जाता है।

चित्रानुसार प्रकाश की एक किरण माध्यम 1 से माध्यम 2 में प्रवेश कर रही है। माना प्रकाश की चाल माध्यम 1 में v1v_{1} तथा माध्यम 2 में v2v_{2} है। माध्यम 2 का माध्यम 1 के सापेक्ष अपवर्तनांक, माध्यम 1 में प्रकाश की चाल तथा माध्यम 2 में प्रकाश की चाल के अनुपात द्वारा व्यक्त करते हैं। इसे प्रायः संकेत n21n_{21} से निरूपित करते हैं। अतः:

n21=माध्यम1मेंप्रकाशकीचालमाध्यम2मेंप्रकाशकीचाल=v1v2n_{21}=\frac{\text{माध्यम} 1 \text{में} \text{प्रकाश} \text{की} \text{चाल}}{\text{माध्यम} 2 \text{में} \text{प्रकाश} \text{की} \text{चाल}}=\frac{v_{1}}{v_{2}}

[प्रकाश का अपवर्तनांक दर्शाने वाला किरण आरेख (माध्यम 1 वायु से माध्यम 2 काँच में)]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 9 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन चित्र 38

इसी तर्क से, माध्यम 1 का माध्यम 2 के सापेक्ष अपवर्तनांक n12n_{12} से निरूपित करते हैं। इसे निम्न प्रकार व्यक्त किया जाता है-

n12=माध्यम1मेंप्रकाशकीचालमाध्यम2मेंप्रकाशकीचाल=v1v2n_{12}=\frac{\text{माध्यम} 1 \text{में} \text{प्रकाश} \text{की} \text{चाल}}{\text{माध्यम} 2 \text{में} \text{प्रकाश} \text{की} \text{चाल}}=\frac{v_{1}}{v_{2}}

यदि माध्यम 1 निर्वात या वायु है, तब माध्यम 2 का अपवर्तनांक निर्वात के सापेक्ष माना जाता है। यह माध्यम का निरपेक्ष अपवर्तनांक कहलाता है। यह केवल n2n_{2} से निरूपित किया जाता है। यदि वायु में प्रकाश की चाल cc तथा माध्यम में प्रकाश की चाल vv है तब माध्यम का अपवर्तनांक nmn_{m} होगा-

nm=वायुमेंप्रकाशकीचालमाध्यममेंप्रकाशकीचाल=cvn_{m}=\frac{\text{वायु} \text{में} \text{प्रकाश} \text{की} \text{चाल}}{\text{माध्यम} \text{में} \text{प्रकाश} \text{की} \text{चाल}}=\frac{c}{v}

माध्यम का निरपेक्ष अपवर्तनांक केवल अपवर्तनांक कहलाता है। अपवर्तनांक को प्रभावित करने वाले कारक निम्न हैं-

(i) माध्यम की प्रकृति, (ii) घनत्व तथा (iii) प्रकाश का रंग।

प्रश्न 8. विभिन्न किरणों के आधार पर लेंसों द्वारा बने प्रतिबिंबों के स्थान का निर्धारण किरण आरेख बनाकर कीजिए।

उत्तर— लेंसों में किरण आरेख बनाने के लिए निम्न में से किन्हीं दो किरणों पर विचार कर सकते हैं-

(i) बिंब से मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली कोई प्रकाश किरण उत्तल लेंस से अपवर्तन के पश्चात् लेंस के दूसरी ओर मुख्य फोकस से गुजरेगी जबकि अवतल लेंस की स्थिति में लेंस के उसी ओर स्थित मुख्य फोकस से अपसरित होती प्रतीत होती है।

[उत्तल और अवतल लेंसों के लिए अपवर्तन के किरण आरेख]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 9 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन चित्र 39

(अ) (उत्तल लेंस)
(ब) (अवतल लेंस)

(ii) मुख्य फोकस से गुजरने वाली प्रकाश किरण, उत्तल लेंस से अपवर्तन के पश्चात् मुख्य अक्ष के समांतर निर्गत होगी। अवतल लेंस के मुख्य फोकस पर मिलती प्रतीत होने वाली प्रकाश किरण, अपवर्तन के पश्चात् मुख्य अक्ष के समांतर निर्गत होगी।

302

[लेंसों में प्रकाश किरणों का अपवर्तन - (a) उत्तल लेंस, (b) अवतल लेंस]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 9 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन चित्र 40

(a) (उत्तल लेंस)
(b) (अवतल लेंस)

(iii) लेंस के प्रकाशिक केन्द्र से गुजरने वाली प्रकाश किरण अपवर्तन के पश्चात् बिना किसी विचलन के निर्गत होती है।

[प्रकाशिक केन्द्र से गुजरने वाली किरण का अपवर्तन]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 9 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन चित्र 41

(a) (उत्तल लेंस)
(b) (अवतल लेंस)

प्रश्न 9. विभिन्न स्थितियों में रखी वस्तु का उत्तल लेंस से प्रतिबिम्ब का बनना आरेखित कीजिये-

(i) अनन्त पर

(माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)

(ii) 2F12F_{1} से परे (iii) 2F12F_{1} पर (iv) F1F_{1} तथा 2F12F_{1} के बीच

(माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025; 2023; माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25)

(v) फोकस F1F_{1} पर (vi) फोकस F1F_{1} तथा प्रकाशिक केन्द्र OO के बीच।

अथवा

एक उत्तल लेंस के लिए बिम्ब की निम्न स्थितियों में प्रतिबिम्ब की स्थिति, प्रकृति, आकार बताते हुए किरण आरेख चित्र बनाइए।

(प्रश्न बैंक)

(1) 2F12F_{1} से परे (2) 2F12F_{1} पर (3) F1F_{1}2F12F_{1} के बीच (4) फोकस F1F_{1} व प्रकाशिक केन्द्र के बीच।

उत्तर-वस्तु की विभिन्न स्थितियों के लिये उत्तल लेंस द्वारा बने प्रतिबिम्ब की प्रकृति, स्थिति तथा आपेक्षिक आकार के बारे में नीचे दी गयी सारणी में बताया गया है-

वस्तु की स्थिति

प्रतिबिम्ब की स्थिति

प्रतिबिम्ब का आपेक्षिक आकार

प्रतिबिम्ब की प्रकृति

(1) अनंत पर (2) 2F12F_{1} से परे (3) 2F12F_{1} पर (4) F1F_{1} तथा 2F12F_{1} के बीच (5) फोकस F1F_{1} पर (6) फोकस F1F_{1} तथा प्रकाशिक केन्द्र OO के बीच (1) जब बिंब वक्रता केन्द्र पर हो। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25) (2) जब बिंब फोकस पर हो। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2024-25) (3) जब बिंब फोकस व ध्रुव के मध्य हो। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)

उत्तर—प्रकाश का परावर्तन- जब कोई प्रकाश की किरण एक माध्यम से चलकर दूसरे माध्यम की सतह से टकराकर वापस उसी माध्यम में लौट जाती है, तो इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।

अवतल दर्पण की सहायता से प्रतिबिंब प्राप्त करने का किरण चित्र जब-

विज्ञान कक्षा-X

307

(i) बिंब (वस्तु) वक्रता केन्द्र ( CC ) पर स्थित हो- (ii) बिंब (वस्तु) फोकस ( ff ) पर स्थित हो-

प्रतिबिम्ब की स्थिति- अनन्त पर

प्रतिबिम्ब की प्रकृति- वास्तविक तथा उल्टा

प्रतिबिम्ब का आकार- अत्यधिक विवर्धित

(iii) बिम्ब (वस्तु) फोकस व ध्रुव के मध्य हो-

प्रतिबिम्ब की स्थिति- दर्पण के पीछे

प्रतिबिम्ब की प्रकृति- आभासी तथा सीधा

प्रतिबिम्ब का आकार- विवर्धित (बड़ा)

[अवतल दर्पण द्वारा विभिन्न स्थितियों में प्रतिबिंब बनने के किरण चित्र]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 9 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन चित्र 49

प्रश्न 18. (i) लेंस के आवर्धन को परिभाषित कीजिए।

(ii) प्रकाश के परावर्तन के दोनों नियमों को लिखिए।

(iii) एक उत्तल दर्पण से प्रतिबिंब का बनना दर्शाने का किरण चित्र बनाइए जबकि बिंब अनन्त पर स्थित हो।

(माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2026)

उत्तर-(i) लेंस का आवर्धन—किसी लेंस द्वारा उत्पन्न आवर्धन प्रतिबिंब की ऊँचाई ( hh^{′} ) तथा बिम्ब की ऊँचाई ( hh ) के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है।

लेंस आवर्धन m=प्रतिबिंबकीऊँचाई(h)बिम्बकीऊँचाई(h)m=\frac{\text{प्रतिबिंब} \text{की} \text{ऊँचाई} (h^{′})}{\text{बिम्ब} \text{की} \text{ऊँचाई} (h)}

(ii) प्रकाश के परावर्तन के नियम—1. आपतन कोण, परावर्तन कोण के बराबर होता है, तथा (iii) उत्तल दर्पण से प्रतिबिंब का बनना जबकि बिंब अनन्त पर स्थित हो

[उत्तल दर्पण द्वारा अनंत पर स्थित बिंब का किरण चित्र]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 9 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन चित्र 50

प्रश्न 19. (i) लेंस सूत्र लिखिए।

(ii) स्नेल का अपवर्तन नियम लिखिए।

(iii) एक उत्तल लेंस से प्रतिबिंब का बनना दर्शाने का किरण चित्र बनाइए जबकि बिंब अनन्त पर स्थित हो।

(माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2026)

उत्तर-(i) लेंस सूत्र— 1v1u=1f\frac{1}{v}-\frac{1}{u}=\frac{1}{f}

(ii) स्नेल का अपवर्तन नियम—प्रकाश की किसी निश्चित रंग तथा निश्चित माध्यमों के युग्म के लिए आपतन कोण की ज्या ( sinesine ) तथा अपवर्तन कोण की ज्या ( sinesine ) का अनुपात स्थिर रहता है। (यह कोण 0<i<900^{∘}<i<90^{∘} के लिए सत्य है।) यदि ii आपतन कोण हो तथा rr अपवर्तन कोण हो तब sinisinr=स्थिरांक\frac{sini}{sinr}=\text{स्थिरांक}

308 संजय बुक्स

(iii) उत्तल लेंस से प्रतिबिम्ब बनना जबकि बिंब अनन्त पर स्थित हो-

[उत्तल लेंस से प्रतिबिम्ब का बनना जब बिंब अनन्त पर हो (Ray diagram for convex lens when object is at infinity)]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 9 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन चित्र 51

(1) (अनन्त पर) (ii) प्रकाश का अपवर्तन के नियम लिखिए। (iii) अपवर्तनांक किसे कहते हैं? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2025-26)

उत्तर-(i) उत्तर हेतु निबंधात्मक प्रश्न नं. 5 का अवलोकन करें।

(ii) उत्तर हेतु निबंधात्मक प्रश्न नं. 5 का अवलोकन करें।

(iii) प्रकाश का हवा में वेग तथा प्रकाश के किसी माध्यम में वेग के अनुपात को उस माध्यम का अपवर्तनांक कहते हैं।

अपवर्तनांक का सूत्र n21=माध्यम1मेंप्रकाशकीचालमाध्यम2मेंप्रकाशकीचाल=v1v2n_{21}=\frac{\text{माध्यम} 1 \text{में} \text{प्रकाश} \text{की} \text{चाल}}{\text{माध्यम} 2 \text{में} \text{प्रकाश} \text{की} \text{चाल}}=\frac{v_{1}}{v_{2}}

प्रश्न 21. (i) गोलीय दर्पण किसे कहते हैं? इनके प्रकार समझाइये।

(ii) अवतल दर्पण के उपयोग लिखिए।

(iii) आवर्धन किसे कहते हैं? गोलीय दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन का सूत्र लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2025-26)

उत्तर-(i) उत्तर के लिए पृष्ठ 291 पर प्रश्न संख्या 4 का अवलोकन करें।

(ii) उत्तर के लिए पृष्ठ 285 पर प्रश्न 20 का अवलोकन करें।

(iii) गोलीय दर्पण के आवर्धन को प्रतिबिम्ब की ऊँचाई तथा वस्तु की ऊँचाई के अनुपात रूप में परिभाषित किया जाता है।

गोलीय दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन m=प्रतिबिम्बकीऊँचाई(h)बिम्बकीऊँचाई(h)=hhm=\frac{\text{प्रतिबिम्ब} \text{की} \text{ऊँचाई} (h^{′})}{\text{बिम्ब} \text{की} \text{ऊँचाई} (h)}=\frac{h^{′}}{h}

आंकीक प्रश्न-

प्रश्न 1. एक अवतल लेंस की फोकस दूरी 40सेमी40 \text{सेमी} है। इसकी क्षमता क्या होगी?

उत्तर– लेंस की क्षमता P=1fमीटरP=\frac{1}{f \text{मीटर}}

यहाँ f=40सेमीf=-40 \text{सेमी}

P=10040=2.5DP=-\frac{100}{40}=-2.5 D

प्रश्न 2. किसी ऑटोमोबाइल में पीछे का दृश्य देखने के लिये उपयोग होने वाले उत्तल दर्पण की वक्रता त्रिज्या 3.00m3.00 m है। यदि एक बस इस दर्पण से 5.00m5.00 m की दूरी पर स्थित है, तो प्रतिबिम्ब की स्थिति, प्रकृति तथा साइज ज्ञात कीजिये।

उत्तर– दिया गया है-

उत्तल दर्पण की वक्रता त्रिज्या R=+3.00mR=+3.00 m

(वस्तु की दूरी) बिंब की दूरी u=5.00mu=-5.00 m (चिन्ह परिपाटी से)

प्रतिबिम्ब की दूरी v=?v=?

विज्ञान कक्षा-X

309

प्रतिबिंब की ऊँचाई h=?h^{′}=?

हम जानते हैं फोकस दूरी

f=R2f=\frac{R}{2}

f=+3.002=+1.50mf=\frac{+3.00}{2}=+1.50 m

दर्पण सूत्र

1v+1u=1f\frac{1}{v}+\frac{1}{u}=\frac{1}{f} से

1v=1f1u∴\frac{1}{v}=\frac{1}{f}-\frac{1}{u}

मान रखने पर-

1v=11.5015.00\frac{1}{v}=\frac{1}{1.50}--\frac{1}{5.00}

1v=11.50+15=100150+15\frac{1}{v}=\frac{1}{1.50}+\frac{1}{5}=\frac{100}{150}+\frac{1}{5}

1v=23+15=10+315=1315\frac{1}{v}=\frac{2}{3}+\frac{1}{5}=\frac{10+3}{15}=\frac{13}{15}

v=1513=1.15m∴v=\frac{15}{13}=1.15 m

अतः: प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे 1.15m1.15 m की दूरी पर स्थित है।

आवर्धन ( mm ) = hh=vu\frac{h^{′}}{h}=-\frac{v}{u}

मान रखने पर-

m=1.15m5.00m=115500=+0.23m=-\frac{1.15 m}{-5.00 m}=\frac{115}{500}=+0.23

यहाँ पर आवर्धन का मान धनात्मक चिन्ह का है। अतः प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा तथा साइज में बिंब से छोटा ( 0.230.23 गुना) है।

प्रश्न 3. यदि कोई नेत्र चिकित्सक +2.5D+2.5 D तथा 4.0D-4.0 D क्षमता के संशोधक लेंस निर्धारित करता है तो लेंस की प्रकृति व फोकस दूरी ज्ञात कीजिए।

उत्तर - लेंस क्षमता P=1fP=\frac{1}{f} मीटर

(i) जहाँ P=+2.5DP=+2.5 D (ii) जब P=4.0DP=-4.0 D

तो 4.0=1f-4.0=\frac{1}{f}

f=14.0मीटर=1004सेमी.=25सेमी.∴f=\frac{1}{-4.0} \text{मीटर}=-\frac{100}{4} \text{सेमी}.=-25 \text{सेमी}.

अतः: ऋणात्मक चिह्न दर्शाता है कि लेंस अवतल लेंस होगा जिसकी फोकस दूरी 2525 सेमी है।

प्रश्न 4. 12cm12 cm फोकस दूरी के एक अवतल दर्पण के सामने 4cm4 cm लम्बाई की एक वस्तु (Object) उससे 6cm6 cm की दूरी पर रखी गयी है। प्राप्त प्रतिबिम्ब की स्थिति, प्रकृति तथा उसका आकार ज्ञात कीजिये।

उत्तर-दिया गया है-

u=6cmu=-6 cm (चिन्ह परिपाटी)

f=12cmf=-12 cm (चिन्ह परिपाटी)

वस्तु का आकार h=4cmh=4 cm

दर्पण सूत्र से

1u+1v=1f\frac{1}{u}+\frac{1}{v}=\frac{1}{f}

मान रखने पर—

16+1v=112-\frac{1}{6}+\frac{1}{v}=-\frac{1}{12}

या

1v=112+16=1+212\frac{1}{v}=-\frac{1}{12}+\frac{1}{6}=\frac{-1+2}{12}

या

1v=112\frac{1}{v}=\frac{1}{12}

या

v=12cmv=12 cm

अतः प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे, उससे 12cm12 cm की दूरी पर बना है। यहाँ पर vv का मान धनात्मक है। अतः प्रतिबिम्ब आभासी प्रकृति का है।

आवर्धन क्षमता सूत्र

m=hh=vum=\frac{h^{′}}{h}=-\frac{v}{u}

hh=vu∴\frac{h^{′}}{h}=-\frac{v}{u}

या

h=vu×hh^{′}=-\frac{v}{u} \times h

मान रखने पर—

=126×4=8cm=-\frac{12}{-6} \times 4=8 cm

अतः प्रतिबिम्ब की लम्बाई 8cm8 cm है। यहाँ पर चिन्ह धनात्मक है। अतः प्रतिबिम्ब सीधा है।

प्रश्न 5. किसी गतिमान वाहन में प्रयुक्त उत्तल दर्पण की वक्रता त्रिज्या 2.0m2.0 m है। इस वाहन के पीछे 3.5m3.5 m की दूरी पर एक ट्रक आ रहा है। ज्ञात कीजिये (i) प्रतिबिम्ब की स्थिति (ii) ट्रक के सापेक्ष उसके प्रतिबिम्ब का आकार/प्रतिबिम्ब की प्रकृति (Nature) क्या होगी?

उत्तर—प्रश्नानुसार

वक्रता त्रिज्या R=2.0mR=2.0 m

R=2f∵R=2f

f=R2=2.02=1m∴f=\frac{R}{2}=\frac{2.0}{2}=1 m

u=3.5mu=-3.5 m (चिन्ह परिपाटी से)

दर्पण सूत्र

1u+1v=1fसे\frac{1}{u}+\frac{1}{v}=\frac{1}{f} \text{से}

1v=1f1u\frac{1}{v}=\frac{1}{f}-\frac{1}{u}

=1113.5=1+13.5=\frac{1}{1}--\frac{1}{3.5}=1+\frac{1}{3.5}

=1+1035=1+27=7+27=97=1+\frac{10}{35}=1+\frac{2}{7}=\frac{7+2}{7}=\frac{9}{7}

v=79=0.78m∴v=\frac{7}{9}=0.78 m

अतः उत्तल दर्पण में ट्रक 0.78m0.78 m की दूरी पर दिखाई देगा।

प्रतिबिम्ब का आकार और प्रकृति का मान निम्न सूत्र से ज्ञात करते हैं—

m=vum=-\frac{v}{u}

विज्ञान कक्षा-X

311

=793.5=79×13.5=29=-\frac{7}{\frac{9}{-3.5}}=\frac{7}{9} \times \frac{1}{3.5}=\frac{2}{9}

अतः ट्रक के प्रतिबिम्ब का आकार उसके आकार का 29\frac{2}{9} गुना है। यहाँ पर mm का मान धनात्मक है। अतः प्रतिबिम्ब कल्पित एवं सीधा है।

प्रश्न 6. एक अवतल दर्पण के सामने 15सेमी.15 \text{सेमी}. की दूरी पर कोई वस्तु रखी है। दर्पण द्वारा बने प्रतिबिम्ब की प्रकृति, स्थिति व आवर्धन ज्ञात करो। दर्पण की फोकस दूरी 10सेमी.10 \text{सेमी}. है।

उत्तर - दर्पण सूत्र 1f=1v+1u\frac{1}{f}=\frac{1}{v}+\frac{1}{u}

यहाँ u=15सेमी.u=-15 \text{सेमी}.

f=10सेमी.f=-10 \text{सेमी}.

v=?v=?

110=1v+115\frac{1}{-10}=\frac{1}{v}+\frac{1}{-15}

1v=115110\frac{1}{v}=\frac{1}{15}-\frac{1}{10}

=130=-\frac{1}{30}

v=30सेमी.v=-30 \text{सेमी}.

अर्थात् प्रतिबिम्ब दर्पण की बायीं ओर बनेगा तथा वास्तविक एवं उल्टा होगा।

प्रश्न 7. प्रकाश वायु से काँच में प्रवेश करता है, जिसका अपवर्तनांक 1.51.5 है। 50सेमी.50 \text{सेमी}. मोटे काँच के गुटके को पार करने में प्रकाश का लगा समय ज्ञात करो।

उत्तर-दिया गया है -

प्रकाश का वायु में वेग c=3×108m/sc=3 \times 10^{8} m/s

काँच का अपवर्तनांक n=1.5n=1.5

चूँकि अपवर्तनांक n=cvn=\frac{c}{v}

v=cn∴v=\frac{c}{n}

मान रखने पर v=3×1081.5=2×108m/sv=\frac{3 \times 10^{8}}{1.5}=2 \times 10^{8} m/s

अतः प्रकाश का काँच में वेग =2×108m/s=2 \times 10^{8} m/s

लियागयासमय=दूरीवेग=0.5m2×108∴\text{लिया} \text{गया} \text{समय}=\frac{\text{दूरी}}{\text{वेग}}=\frac{0.5 m}{2 \times 10^{8}}

=2.5×109से.=2.5 \times 10^{-9} \text{से}.

प्रश्न 8. गोलीय लेंसों के लिए चिह्न की परिपाटी को समझाइये। किसी अवतल लेंस की फोकस दूरी 15cm15 cm है। किसी बिम्ब को लेंस से कितनी दूरी पर रखें कि इसका प्रतिबिम्ब लेंस से 10cm10 cm दूरी पर बने। लेंस द्वारा उत्पन्न आवर्धन भी ज्ञात कीजिए। उत्तल लेंस द्वारा बनने वाले प्रतिबिम्ब के लिए किरण चित्र बनाइये जबकि बिम्ब को 2F12F_{1} F1F_{1} के बीच रखा जाता है। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021-22)

उत्तर-गोलीय लेंसों के लिए चिह्न की परिपाटी - जब हम लेंसों की सहायता से प्रतिबिम्ब की रचना का अध्ययन करते हैं, तब हम कुछ कार्तीय चिह्न परिपाटी का प्रयोग करते हैं, जो कि निम्न हैं—

(1) समस्त दूरियाँ लेंस के प्रकाशिक केन्द्र से मापी जाती हैं।

(2) आपतित किरण की दिशा में मापी गयी दूरियाँ धनात्मक मानी जाती हैं तथा जो दूरियाँ आपतित किरण की विपरीत दिशा में मापी जाती हैं, वे दूरियाँ ऋणात्मक दूरियाँ मानी जाती हैं।

(3) मुख्य अक्ष से ऊर्ध्वाधरता ऊपर की ओर मापी जाने वाली दूरी धनात्मक मानी जाती है, जबकि मुख्य अक्ष के ऊर्ध्वाधरता नीचे की ओर मापी गई दूरियाँ ऋणात्मक मानी जाती हैं।

अवतल लेंस द्वारा सदैव ही आभासी, सीधा प्रतिबिंब उसी ओर बनता है जिस ओर बिंब रखा हुआ होता है।

प्रतिबिंब-दूरी v=10cmv=-10 cm

फोकस दूरी f=15cmf=-15 cm

बिंब-दूरी u=?u=?

क्योंकि 1v1u=1f\frac{1}{v}-\frac{1}{u}=\frac{1}{f}

या 1u=1v1f\frac{1}{u}=\frac{1}{v}-\frac{1}{f}

मान रखने पर- 1u=1101()=110+115\frac{1}{u}=\frac{1}{-10}-\frac{1}{()}=\frac{-1}{10}+\frac{1}{15}

या 1u=3+230=130\frac{1}{u}=\frac{-3+2}{30}=\frac{1}{-30}

या u=30cmu=-30 cm

इसी प्रकार बिंब की दूरी 30cm30 cm है।

आवर्धन, m=vum=\frac{v}{u}

m=10cm30cm=13+0.33m=\frac{-10 cm}{-30 cm}=\frac{1}{3}≃+0.33

यहाँ पर धनात्मक चिह्न यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब सीधा तथा आभासी है। प्रतिबिंब का आकार बिंब के आकार का एक-तिहाई है।

उत्तल लेंस द्वारा बनने वाले प्रतिबिंब का चित्र

[उत्तल लेंस द्वारा बनने वाले प्रतिबिंब का किरण आरेख (Ray diagram for image formation by convex lens)]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 9 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन चित्र 52

प्रश्न 9. कोई 2.0cm2.0 cm लंबा बिंब 10cm10 cm फोकस दूरी के किसी उत्तल लेंस के मुख्य अक्ष के लंबवत रखा है। बिंब की लेंस से दूरी 15cm15 cm है। प्रतिबिंब की प्रकृति, स्थिति तथा साइज ज्ञात कीजिए। इसका आवर्धन भी ज्ञात कीजिए।

( प्रश्न बैंक )

उत्तर -

बिंब की ऊँचाई h=+2.0cmh=+2.0 cm

फोकस दूरी f=+10cmf=+10 cm

बिंब-दूरी u=15cmu=-15 cm

प्रतिबिंब-दूरी v=?v=?

प्रतिबिंब की ऊँचाई h=?h^{′}=?

विज्ञान कक्षा-X

313

लेंस के सूत्र से 1v1u=1f\frac{1}{v}-\frac{1}{u}=\frac{1}{f}

या 1v=1u+1f\frac{1}{v}=\frac{1}{u}+\frac{1}{f}

मान रखने पर 1v=115++110=115+110\frac{1}{v}=-\frac{1}{15}++\frac{1}{10}=\frac{-1}{15}+\frac{1}{10}

या 1v=2+330=130\frac{1}{v}=\frac{-2+3}{30}=\frac{1}{30}

या v=+30cmv=+30 cm

vv का धनात्मक मान यह बताता है कि प्रतिबिम्ब लेंस के प्रकाशिक केन्द्र के दायीं ओर 30cm30 cm दूरी पर बनता है। अतः प्रतिबिम्ब वास्तविक तथा उल्टा है।

आवर्धन, m=hh=vum=\frac{h^{′}}{h}=\frac{v}{u}

अथवा h=vu×hh^{′}=\frac{v}{u} \times h

मान रखने पर h=+3015×2.0h^{′}=\frac{+30}{-15} \times 2.0

h=4.0cmh^{′}=-4.0 cm

प्रतिबिम्ब की ऊँचाई h=4.0cmh^{′}=-4.0 cm

आवर्धन, m=+30cm15cm=2m=\frac{+30 cm}{-15 cm}=-2

mm तथा hh^{′} के ऋणात्मक चिन्ह यह बताते हैं कि प्रतिबिम्ब उल्टा तथा वास्तविक है। यह मुख्य अक्ष के नीचे बनता है। इस प्रकार एक वास्तविक, उल्टा तथा 4.0cm4.0 cm लम्बा प्रतिबिम्ब लेंस के दायीं ओर लेंस से 30cm30 cm दूरी पर बनता है। यह प्रतिबिम्ब दोगुना विवर्धित है।

प्रश्न 10. 5D5 D क्षमता के अभिसारी लेंस को 3D3 D क्षमता के अपसारी लेंस से सटाकर रखा गया है। संयुक्त लेंस की फोकस दूरी का मान ज्ञात कीजिये।

उत्तर- अभिसारी लेंस या उत्तल लेंस की क्षमता P1=5DP_{1}=5 D

अपसारी लेंस (अवतल लेंस) की क्षमता P2=3DP_{2}=-3 D

संयुक्त लेंस की क्षमता P=P1+P2P=P_{1}+P_{2} से =5D3D=2D=5 D-3 D=2 D

P=1f(मीटरमें)∵P=\frac{1}{f (\text{मीटर} \text{में})}

या f=1P=12f=\frac{1}{P}=\frac{1}{2}

या f=12m=50cmf=\frac{1}{2} m=50 cm

संयुक्त लेंस उत्तल लेंस की तरह से कार्य करेगा।

प्रश्न 11. वायु के सापेक्ष काँच का अपवर्तनांक 32\frac{3}{2} है तथा वायु के सापेक्ष जल का अपवर्तनांक 43\frac{4}{3} है। यदि वायु में प्रकाश की चाल 3×108m/s3 \times 10^{8} m/s है, तो (a) काँच में (b) जल में, प्रकाश की चाल ज्ञात कीजिए।

उत्तर—दिया हुआ है ng=32-n_{g}=\frac{3}{2} तथा nw=43n_{w}=\frac{4}{3} व ( cc ) वायु में प्रकाश की चाल =3×108m/s=3 \times 10^{8} m/s है।

हम जानते हैं कि ng=वायुमेंप्रकाशकीचालकाँचमेंप्रकाशकीचाल=cvn_{g}=\frac{\text{वायु} \text{में} \text{प्रकाश} \text{की} \text{चाल}}{\text{काँच} \text{में} \text{प्रकाश} \text{की} \text{चाल}}=\frac{c}{v}

अतः: vv (काँच में प्रकाश की चाल) =cng=\frac{c}{n_{g}}

=3×10832=\frac{3 \times 10^{8}}{\frac{3}{2}}

=3×108×23=\frac{3 \times 10^{8} \times 2}{3}

=2×108m/sउत्तर=2 \times 10^{8} m/s \text{उत्तर}

पुनः: nw=वायुमेंप्रकाशकीचालजलमेंप्रकाशकीचाल=cvn_{w}=\frac{\text{वायु} \text{में} \text{प्रकाश} \text{की} \text{चाल}}{\text{जल} \text{में} \text{प्रकाश} \text{की} \text{चाल}}=\frac{c}{v}

अतः: vv (जल में प्रकाश की चाल) =cnw=\frac{c}{n_{w}}

=3×108×34=\frac{3 \times 10^{8} \times 3}{4}

=94×108=\frac{9}{4} \times 10^{8}

=2.25×108m/sउत्तर=2.25 \times 10^{8} m/s \text{उत्तर}

प्रश्न 12. अवतल दर्पण के मुख्य फोकस की परिभाषा लिखिए।

एक 4.0cm4.0 cm साइज का बिंब, किसी 12.0cm12.0 cm फोकस दूरी के अवतल दर्पण से 18cm18 cm दूरी पर रखा है। दर्पण से कितनी दूरी पर किसी परदे को रखा जाए कि स्पष्ट प्रतिबिम्ब प्राप्त हो? प्रतिबिम्ब की प्रकृति एवं साइज लिखिए। अवतल दर्पण के सामने मुख्य फोकस FF तथा वक्रता केन्द्र CC के मध्य स्थित बिम्ब का प्रतिबिम्ब बनना दर्शाने के लिए किरण आरेख बनाइये। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)

उत्तर— अवतल दर्पण का मुख्य फोकस—अवतल दर्पण की मुख्य अक्ष के समान्तर चलने वाली प्रकाश किरण दर्पण से परावर्तन के पश्चात् मुख्य अक्ष को जिस बिन्दु पर काटती (प्रतिच्छेद्) है, उसे अवतल दर्पण का मुख्य फोकस कहते हैं।

अवतल दर्पण के लिए दिया गया है—

बिंब-साइज, h=4.0cmh=4.0 cm

बिंब-दूरी, u=18cmu=-18 cm

फोकस दूरी, f=12cmf=-12 cm

प्रतिबिम्ब दूरी v=?v=?

प्रतिबिम्ब साइज h=?h^{′}=?

दर्पण सूत्र से— 1v+1u=1f\frac{1}{v}+\frac{1}{u}=\frac{1}{f}

या 1v=1f1u\frac{1}{v}=\frac{1}{f}-\frac{1}{u}

=112118=\frac{1}{-12}-\frac{1}{-18}

=112+118=-\frac{1}{12}+\frac{1}{18}

=3+236=\frac{-3+2}{36}

विज्ञान कक्षा-X

315

1v=136\frac{1}{v}=-\frac{1}{36}

या, v=36.0cmv=-36.0 cm

पर्दे को दर्पण के सामने 36cm36 cm दूरी पर रखना चाहिए।

प्रतिबिम्ब वास्तविक है।

इसी प्रकार, आवर्धन, m=hh=vum=\frac{h^{′}}{h}=-\frac{v}{u}

या, h=vhu=(36cm)(+4.0cm)()h^{′}=-\frac{vh}{u}=-\frac{(-36 cm)(+4.0 cm)}{()}

प्रतिबिम्ब की ऊँचाई, h=8.0cmh^{′}=-8.0 cm

प्रतिबिम्ब उल्टा तथा बिम्ब से दुगुना (आवर्धित) है।

अवतल दर्पण के सामने मुख्य फोकस FF तथा वक्रता केन्द्र CC के मध्य स्थित बिम्ब का प्रतिबिम्ब बनना दर्शाने के लिए किरण आरेख-

[अवतल दर्पण के सामने मुख्य फोकस F तथा वक्रता केन्द्र C के मध्य स्थित बिम्ब का किरण आरेख]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 9 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन चित्र 53

प्रश्न 13. लेंस की क्षमता से आपका क्या आशय है? एक डॉक्टर +2.0D+2.0D क्षमता का संशोधक लेंस निर्धारित करता है। लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए। यह किस प्रकार का लेंस है? एक अवतल लेंस द्वारा प्रतिबिम्ब का बन्ना दर्शाने के लिए कोई भी एक किरण चित्र बनाइये। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2022)

अथवा

एक डॉक्टर +2.0D+2.0D क्षमता का संशोधक लेंस निर्धारित करता है। लेंस की फोकस दूरी एवं प्रकृति ज्ञात कीजिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2025)

उत्तर—लेंस क्षमता—किसी लेंस द्वारा प्रकाश किरणों को अभिसरण या अपसरण करने की मात्रा को उसकी क्षमता के रूप में व्यक्त किया जाता है। किसी ff फोकस दूरी के लेंस की क्षमता P=1f(मीटरमें)P=\frac{1}{f (\text{मीटर} \text{में})}

लेंस की फोकस दूरी—

लेंस क्षमता P=1fमीटरP=\frac{1}{f} \text{मीटर}

दिया गया है P=+2.0D-P=+2.0D

तो +2=1f+2=\frac{1}{f}

f=1+2मीटर=100+2सेमी.=+50सेमी.∴f=\frac{1}{+2} \text{मीटर}=\frac{100}{+2} \text{सेमी}.=+50 \text{सेमी}.

अतः लेंस की फोकस दूरी 50सेमी.50 \text{सेमी}. है तथा धनात्मक चिन्ह बताता है कि यह एक 'उत्तल लेंस' है।

अवतल लेंस द्वारा प्रतिबिम्ब के बनने के लिए किरण आरेख—

[अवतल लेंस द्वारा प्रतिबिम्ब का किरण आरेख]

कक्षा 10 विज्ञान पाठ 9 प्रकाश-परावर्तन तथा अपवर्तन चित्र 54

316

भाग 2 — नोट्स (Notes & Summary)

📝 2. नोट्स: पाठ सार (Key Concepts & Summary)

महत्वपूर्ण परिभाषाएं, रासायनिक समीकरण, नियम, सूत्र एवं सम्पूर्ण अध्याय का सारांश।

भाग 3 — परीक्षा उपयोगी प्रश्न (Important Q&A)

3. अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Important Questions)

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs), अतिलघूत्तरात्मक, लघूत्तरात्मक एवं निबंधात्मक परीक्षा उपयोगी प्रश्नोत्तर।