Madam Rides the Bus Summary and Translation in Hindi

कठिन शब्दार्थ एवं हिन्दी अनुवाद

There was a girl…………..planned and replanned. (Pages 117-118)

कठिन शब्दार्थ-curious (क्युअरिअस्) = उत्सुक। elaborate (इलैबरेट) = विस्तृत/परिष्कृत। fascinating (फैसिनेटिक) = आकर्षक।’ crept into (क्रेप्ट इनटु) = प्रारम्भ हुई। (ओववेल्मिङ्) = प्रबल। desire (डिजाइअ(र)) = इच्छा। wistfully (विस्टूक्लि ) = आतुरता से। kindle (किन्ड्ल ) = प्रज्वलित होना। longings (लॉङ्गिग्ज) = लालसा । slang expression (स्लैङ् इक्स्प्रेशन्) = अनौपचारिक शब्द जो अक्सर बहुत नजदीकी सम्बन्ध वाले समूह के भीतर प्रयुक्त होते हैं (कभी-कभी अशिष्ट भी होते हैं)। disapproval (डिसप्रूवल) = अस्वीकृत। discreet (डिस्क्रीट) = विवेकशील। calculated (कैल्क्यु लेट्ड) = गणना की/हिसाब लगाया।

हिन्दी अनुवाद – एक वल्लिअमाई नाम की लड़की थी जिसे संक्षिप्त में वल्लि कहते थे । वह 8 वर्ष की थी और वस्तुओं को जानने को बहुत उत्सुक रहती थी। उसका पसंदीदा मनोरंजन अपने घर के सामने के द्वार मार्ग में खड़े रहना था, यह ध्यान से देखते हुए कि बाहर गली में सड़क पर क्या घटित हो रहा था। उसकी गली में उसकी उम्र के कोई खेल-साथी नहीं थे, और (उसके लिए) यदि सब कुछ था जो उसे करना पड़ता था।

किन्तु वल्लि के लिए, मुख्य दरवाजे के पास खड़ा होना प्रत्येक क्षण इतना आनन्ददायक था जितना कि परिष्कृत विस्तृत खेलों में से कोई भी, जो दूसरे बच्चे खेलते थे। गली की सड़क पर ध्यानपूर्वक देखते रहने से उसे अनेक नए असाधारण अनुभव दिए। उन सभी में से सर्वाधिक आकर्षक चीज वह बस थी जो उसके गाँव व नजदीकतम कस्बे के बीच चलती थी। यह उसकी गली के बीच से प्रत्येक घण्टे गुजरती थी, एक बार कस्बे तक जाते हुए और एक बार वापस आते हुए। प्रत्येक बार यात्रियों के एक नए समूह से भरी बस का दृश्य वल्लि के लिए आनन्द का एक असमाप्य (कभी खत्म न होने वाला) स्त्रोत था।

दिन-प्रति-दिन वह बस को ध्यानपूर्वक देखती थी, और शनैः-शनैः (धीरे-धीरे) एक कामना उसके मस्तिष्क/मन में प्रारम्भ हो गई और अभिवृद्धि (बढ़ोतरी) कर गई : वह बस में सवारी करना चाहती थी, भले ही एक बार। यह कामना बलशाली व बलशाली बनती गई जब तक कि यह एक प्रबल इच्छा नहीं बन गई। ‘वल्लि आतुरता से उन लोगों की ओर एकटक देखती जो बस में चढ़ते या उतरते जब यह गली के कोने पर रुकती।

उनके (यात्रियों के) चेहरे उसकी लालसा, (उसके) ख्वाबों व (उसकी) आशाओं में प्रज्वलित होते थे। यदि उसकी सहेलियों में से एक, बस की सवारी कर लेती और कस्बे के दृश्यों का उसको वर्णन करती, तो वल्लि इतनी ईर्ष्या करती कि उसे सुनती नहीं और अंग्रेजी में चिल्लाती : “घमण्डी! घमण्डी!” न तो वह और न ही उसकी सहेलियाँ। वास्तव में उस शब्द का अर्थ समझते थे, किन्तु वे अक्सर इसका प्रयोग अस्वीकृति की एक अशिष्ट अभिव्यक्ति के रूप में करते थे।

बहुत से दिनों व महीनों से भी अधिक वल्लि उसके पड़ोसियों व उन लोगों के बीच के वार्तालापों को सावधानी से सुनती थी जो बस का नियमित प्रयोग करते थे, और वह यहाँ-वहाँ (बीच-बीच में) कुछ विवेकशील प्रश्न भी पूछ लेती थी। इस तरीके से उसने बस यात्रा के बारे में विविध संक्षिप्त ब्यौरा एकत्रित कर लिया था। कस्बा उसके गाँव से 6 मील था। एक तरफ का किराया 30 पैसे था-“जो कि लगभग कुछ भी नहीं था,” उसने एक सजे-धजे व्यक्ति को यह कहते सुना था, किन्तु वल्लि के लिए, जिसने एक महीने से दूसरे तक उतना पैसा बमुश्किल देखा हो (अर्थात् नहीं देखा हो), यह (30 पैसे) एक बड़ी धन-राशि प्रतीत हुई थी।

कस्बे तक की संक्षिप्त यात्रा में 45 मिनट लगते थे। कस्बे पहुँच कर यदि वह अपनी सीट पर ही रुकी रहे और दूसरे/अतिरिक्त 30 पैसे का भुगतान कर दे, तो वह उस ही बस से घर लौट सकती थी। इसका अर्थ था कि वह एक बजे वाली अपराह्न की बस पकड़ सकती थी, 1.45 पर कस्बे पहुँच सकती थी, और लगभग 2.45 के आस-पास वापस घर हो सकती थी। उसके विचार चलते गए जैसे-जैसे वह हिसाब लगाती रही और (फिर) पुनः हिसाब लगाती रही, योजना बनाती गई और (फिर) पुनः योजना बनाती गई।

Well, one fine……………….Sit down”. (Pages 119-120)

कठिन शब्दार्थ : commandingly (कमान्डिलि ) = आदेश के साथ। crawl (क्रॉल) = रेंगना । sticking out (स्टिकिङ् आउट) = बाहर की ओर निकालते हुए। stretched out (स्ट्रेचट आउट) = बाहर की ओर फैलाया। slack time (स्लैक टाइम्) = मंदी/कम ग्राहकों का समय | overcome with shyness (ओवकम् विद् शाइनॅस) = संकोच से भर जाना/झेंप जाना। gleaming (ग्लीमिङ्) = चमकदार। stripes (स्ट्राइप्स) = पट्टियाँ। windshield (विन्ड्शील्ड्) = वाहनों आदि में ड्राइवर के आगे लगे बड़े-बड़े शीशे जो हवा से रक्षा करते हैं। devoured (डिवाउअ(र)ड) = भक्षण किया (नजरों से)। canvas blind (कैन्वस् ब्लाइन्ड्) = तिरपाल से. बना खिड़की का पर्दा । peered (पीअ(र)ड) = झाँका। bank (बैंक) = किनारा। canal (कनैल) = नहर। ditch (डिच) = खाई।

हिन्दी अनुवाद – खैर, वसंत के एक सुहाने दिन जब अपराह्न वाली बस गाँव को छोड़कर मुख्य राजमार्ग पर मुड़ने ही वाली थी कि एक छोटी-सी (बालिका की) आवाज को चिल्लाते हुए सुना गया : “बस रोको! बस रोको!” और एक छोटा-सा हाथ आदेशात्मक रूप से उठा। बस धीमी होकर रेंगने लगी, और कंडक्टर, अपना सिर दरवाजे से बाहर निकालते हुए बोला, “जल्दी करो! जो कोई भी हो, कह दो, जल्दी से आ जाए।”

“मैं ही तो हूँ।” वल्लि चिल्लाई। “मैं ही वह हूँ जिसे चढ़ना है।” अब तक बस ठहर चुकी थी, और कंडक्टर ने कहा, “ओह, वास्तव में! तुमने ऐसा नहीं बताया!”
“हाँ, मुझे केवल कस्बे तक जाना है” वल्लि ने कहा, अभी भी बस के बाहर खड़े रहते हुए, “और ये रहे मेरे पैसे (मेरा किराया)।” उसने (वल्लि ने) उसे (कंडक्टर को) कुछ सिक्के दिखाए।

“ठीक है, ठीक है, लेकिन पहले तुम बस में चढ़ो तो सही,” कंडक्टर ने कहा, और उसने उसे ऊपर चढ़ाने में सहायता करने के लिए एक हाथ बाहर की ओर फैलाया।
“चिन्ता न करें” उसने कहा, “मैं अपने आप चढ़ सकती हूँ। आपको मेरी सहायता करने की आवश्यकता नहीं है।” कंडक्टर मजाकिया किस्म का व मजाक का शौकीन था। “ओह, कृपया, मुझसे नाराज न होइए, मेरी अच्छी मैडम”. उसने कहा। “यहाँ, दाएँ ऊपर (आगे) वहाँ सामने सीट ग्रहण करें। कृपया, प्रत्येक एक तरफ हो जाएँ मैडम के लिए रास्ता बनाएँ (दें)।”

यह दिन का कम ग्राहकी का समय था, और बस में केवल 6 या 7 यात्री ही थे। वे सभी वल्लि की ओर ध्यान से देख रहे थे और कंडक्टर के साथ हँस रहे थे। वल्लि संकोच से अभिभूत हो गई अर्थात् झेंप गई। प्रत्येक से आँख बचाते हुए, वह एक खाली सीट तक गई और बैठ गई।
“क्या अब हम चल सकते हैं, मैडम?” कंडक्टर ने पूछा, मुस्कराते हुए। फिर उसने दो बार अपनी सीटी बजाई, और बस एक घरघराहट (गुर्राहट) के साथ आगे की तरफ चल दी।

यह एक नई बस थी, इसके बाहरी तरफ चमकीला श्वेत रंग किया था, व इसकी बगलों के साथ-साथ हरे रंग की कछ पटियाँ थीं। अन्दर, ऊपरी डंडे चाँदी के जैसे चमक रहे थे। वल्लि के सीधे सामने विन्डशील्ड (ड्राइवर के आगे के शीशों) के ऊपर एक सुन्दर घड़ी थी। सीटें मुलायम व आरामदायक थीं। वल्लि ने अपनी आँखों से प्रत्येक चीज का भक्षण/अवलोकन किया। किन्तु जब उसने बाहर देखना आरम्भ किया, तो उसने अपनी नजर को तिरपाल के एक पर्दे से कटा हुआ पाया जिसने उसकी खिड़की का निचला भाग ढका हुआ था। इसलिए वह सीट पर खड़ी हो गई और पर्दे के ऊपर से झाँकने लगी।

बस अब एक नहर के किनारे के साथ-साथ जा रही थी। सड़क बहुत सकड़ी थी। एक तरफ नहर थी और, इससे परे, ताड़ के वृक्ष, घास का मैदान, दूरस्थ पर्वत, और नीला, नीला आकाश था। दूसरी तरफ एक गहरी खाई थी और फिर एकड़ के एकड़ हरे खेत-हरे, हरे, हरे इतनी दूरी तक जितनी आँखें देख सकती थीं।
ओह! यह सब कितना आश्चर्यजनक था! अचानक उसे एक आवाज द्वारा चकित कर दिया गया।”सुनो बच्ची”, उस आवाज ने कहा, “तुम्हें ऐसे खड़ा नहीं होना चाहिए। नीचे बैठ जाओ।”

Sitting down, she……………….and staring out. (Pages 121-122)

कठिन शब्दार्थ : concerned (कन्सन्ड्) = चिन्तित । annoyed (अनॉइड्) = नाराज। haughtily (हॉटिलि) = घमण्डपूर्वक। shot an angry glance (शॉट् ऐन् एंग्रि ग्लांस) = क्रोध की नजर से देखा। chimed in (चाइम्ड इन्) = बातचीत में दखल देकर अपनी टिप्पणी जोड़ना । mimicking (मिमिकिङ्) = नकल करते हुए। comfortable (कम्फ्ट ब्ल) = आरामदायक। bump (बम्प) = खुरदरी सतह । irritably (इरिटअब्लि ) = रोष के साथ। absolutely (ऐब्सलूट्लि) = पूर्णतया। repulsive (रिपल्सिव्) = घृणास्पद/प्रतिकर्षी । chewing (चूइंग) = चबा रही थी। curtly (कट्लि) = संक्षिप्त एवं रूखेपन से। mind your own business (माइन्ड् याँ(र) ऑन् बिज्नस्) = अपना काम करो। drivel (ड्रिवल) = बकबक।

हिन्दी अनुवाद – नीचे बैठते हुए, उसने यह जानने के लिए देखा कि किसने बोला था। यह एक वयोवृद्ध व्यक्ति था जो ईमानदारी से उसके लिए चिन्तित रहा था, किन्तु वह उसके ध्यान से नाराज थी। “यहाँ कोई व्यक्ति ऐसा नहीं है जो बच्ची है”, उसने घमण्ड से कहा। “मैंने सभी के जैसे 30 पैसे का भुगतान किया है।” कंडक्टर बीच में ही बोल पड़ा, “अरे, श्रीमान् ! पर यह तो एक बहुत वयस्क मैडम है। क्या आप सोच सकते हैं कि एक केवल लड़की अप यात्रा कर सकती है?”

वल्लि ने कंडक्टर की ओर क्रोधपूर्ण दृष्टि से देखा और कहा, “मैं एक मैडम नहीं हूँ। कृपया इस बात का ध्यान रखें। और आपने अभी तक मेरा टिकट मुझे नहीं दिया है।” “मैं याद रखूगा” कंडक्टर ने कहा, उसके स्वर की नकल करते हुए। सभी हँसने लगे और धीरे-धीरे (फिर) वल्लि भी हँसी में शामिल हो गई। कंडक्टर ने एक टिकट में छेद किया और इसे उसे सौंप दिया। “केवल पीछे बैठ जाओ और अपने को सहज/आरामदायक कर लो। आपको खड़ा क्यों रहना चाहिए जब आपने एक सीट के लिए भुगतान किया है?”

“क्योंकि मैं (ऐसा) चाहती हूँ”, उसने जवाब दिया, पुनः खड़े होते हुए।
“लेकिन यदि तुम सीट पर खड़ी रहोगी, तो तुम गिर सकती हो और स्वयं को घायल कर सकती हो। जब बस तेजी से मुड़ेगी या एक खुरदरी जगह से टकराती है। इसीलिए हम चाहते हैं कि तुम नीचे बैठ जाओ, बच्ची।”

“मैं बच्ची नहीं हूँ, मैं आपको बता देती हूँ”, उसने रोष से कहा, “मैं आठ वर्ष की हूँ।”
“निःसन्देह, निःसन्देह । मैं भी कितना मूर्ख हूँ! आठ वर्ष-मेरे!” बस रुकी, कुछ नये यात्री चढ़े, और कंडक्टर कुछ समय के लिए व्यस्त हो गया। अपनी सीट खोने के डर से, वल्लि अन्त में नीचे बैठ गई।

एक बुजुर्ग महिला आई और उसकी बगल में बैठ गई। “क्या तुम बिल्कुल अकेली हो, प्रिय?” उसने वल्लि से पूछा जब बस पुनः चल दी।
वल्लि ने उस महिला को पूर्ण रूप से घृणास्पद/अरुचिकर पायाउसकी कर्णपालि (कान के पेंदे वाला भाग) में कितने बड़े छिद्र थे और उनमें कितने भद्दे कर्णफूल! और वह उस सुपारी की गंध महसूस कर सकती थी जो वह औरत चबा रही थी और उस सुपारी के रस को देख सकती थी जो किसी भी क्षण उसके होंठों के ऊपर से छलक सकता था। उफ! ऐसे व्यक्ति के साथ कौन सामाजिक/मिलनसार हो सकता था?

“हाँ, मैं अकेले ही यात्रा कर रही हूँ” उसने रूखेपन से उत्तर दिया, “और मैंने एक टिकट भी लिया
“हाँ, वह अपने कस्बे के रास्ते में है (अर्थात् कस्बे तक जा रही है)”, कंडक्टर ने कहा। “30 पैसे के टिकट के साथ।”
“ओह! आप अपने काम से काम क्यों नहीं रखते हैं” वल्लि ने कहा। किन्तु वह फिर भी हँस पड़ी और कंडक्टर भी हँसने लगा।
किन्तु वह वृद्ध महिला अपनी बकबक जारी रखती है। “क्या इतनी छोटी बच्ची के लिए. अकेले यात्रा करना उचित है? क्या तुम्हें ठीक से पता है कि कस्बे में तुम कहाँ जा रही हो? गली क्या है (अर्थात् कौनसी गली में)? घर का नम्बर क्या है?”
“आपकों मेरे बारे में चिन्ता करने की आवश्यकता नहीं है। मैं मेरी स्वयं की देखभाल कर स वल्लि ने कहा, अपना चेहरा खिड़की की ओर घुमाते हुए व बाहर की ओर एकटक देखते हुए।

III. Her first journey……………in front of the bus. (Pages 122-123)

कठिन शब्दार्थ : painstaking (पेन्जटेकिङ्) = श्रमसाध्य। thriftily (थ्रिफ्ट्रलि) = मितव्ययिता/किफायत से। resisting (रिजिस्टिङ्) = रोक कर। temptation (टेम्पटेशन्ज) = प्रलोभन । resolutely stifled (रेजलूटलि स्टाइफ्ल्ड ) = दृढ़ता से दबा दिया। excursions (इक्स्क शन्ज) = सैर-सपाटे। ventured out (वेन्च(र)ड आउट) = सावधानीपूर्वक व साहसपूर्वक गई। cutting across (कटिङ् अक्रॉस्) = सीमा से बाहर जाते हुए। a bare landscape (अ बेअ(र) लैन्ड्स्के प्) = एक असज्जित/खाली भू-दृश्य। hamlet (हैम्लट) = ढाणी। gobbling up (गॉब्लिङ् अप्) = भक्षण करने के। pedestrian (पडेस्ट्रिअन्) = पैदल चलने वाला। obstacles (आब्स्टक्ल्ज ) = बाधाएँ। honked (हॉफ्ट) = हॉर्न बजाया।

हिन्दी अनुवाद – उसकी पहली यात्रा – कितनी सावधानीपूर्वक, श्रमसाध्य, विस्तृत योजनाएँ उसने इसे कराने (पूरा करने) के लिए बनाई थीं! जो भी छुटपुट सिक्के उसके पास आए उसने मितव्ययिता से बचाया था, पेपरमिन्ट्स, खिलौनों, गुब्बारों और ऐसे ही अन्य चीजें खरीदने के प्रत्येक प्रलोभन को दबा कर, और अन्त में उसने कुछ 60 पैसे बचा लिये थे। यह कितना कठिन रहा था, विशेषकर उस दिन ग्राम मेले में, किन्तु उसने झूले पर झूलने की तीव्र इच्छा को भी दृढ़ता से दबा दिया था यद्यपि उसके पास पैसे थे।

जब वह पर्याप्त पैसा बचा चुकी थी, उसकी अगली समस्या थी कि माँ की जानकारी के बिना वह घर खसके। लेकिन उसने बिना अधिक कठिनाई के इसकी व्यवस्था कर ली। प्रतिदिन.लंच के पश्चात् उसकी माँ लगभग 1 से 4 बजे या कुछ ऐसे ही एक झपकी लेती थी। वल्लि इन घण्टों का प्रयोग अपनी यात्राओं के लिए करती थी जैसे कि अपने द्वार मार्ग से बाहर देखते हुए खड़ी रहती या कभी-कभी यहाँ तक कि गाँव के अन्दर सावधानी से व साहसपूर्वक चली जाती; आज, ये वही घण्टे गाँव से बाहर की अपनी प्रथम यात्रा के लिए प्रयुक्त कर सकती थी।

बस चलती गई, अब एक खाली भू-दृश्य की सीमा से बाहर जाते हुए, अब एक छोटी ढाणी के बीच से दौड़ती हुई या सड़क के बगल की एक अजीब-सी दुकान के पास से दौड़ती हुई। कभी ऐसा लगता था कि बस सामने से आने वाली दूसरी गाड़ी को या पैदल चलने वाले का भक्षण कर जायेगी अर्थात् उनके ऊपर चढ़ जायेगी। किन्तु देखो! सभी बाधाओं को पीछे छोड़ती हुई यह किसी तरह से आराम से गुजर गई।

वृक्ष उनकी ओर दौड़ते प्रतीत होते जैसे ही बस उन तक पहुँच जाती तो वे रुक जाते और फिर सड़क की बगल में साधारण रूप से कुछ क्षण के लिए असहाय खड़े हो जाते तथा फिर दूसरी दिशा में दौड़ जाते। अचानक वल्लि ने प्रसन्नता से अपने हाथों से ताली बजाई। एक जवान गाय, पूँछ हवा में ऊँची करके, बस के ठीक सामने, सड़क के ठीक बीचों-बीच, बहुत तेजी से दौड़ रही थी। बस धीमी होकर रेंगने लगी और ड्राइवर तेजी से बार-बार हॉर्न बजाने लगा। किन्तु जितना अधिक वह हॉर्न बजाता वह जानवर (गाय) उतना ही अधिक भयभीत हो जाता और यह सरपट दौड़ने लगता-लगातार ठीक बस के सामने।

Somehow this was…………….many passengers. (Pages 124-125)

कठिन शब्दार्थ : Tremendous (ट्रमेन्डस्) = अत्यधिक। traversed (ट्रैवस्ट) = पार किया। thoroughfare (थराफेअ(र)) = एक व्यस्त सार्वजनिक सड़क/आम रास्ता। merchandise (मचन्डाइस्) = बिक्री की वस्तुएँ। struck dumb with wonder (स्ट्रक् डम् विद् वन्ड(र)) = विस्मय से बुत बन जाना । gaped at (गेप्ट ऐट्) = मुँह खोले एकटक देखा। amused (अम्यूज्ड्) = मनोरंजन से।

हिन्दी अनुवाद – कैसे भी यह वल्लि के लिए बहुत विनोदपूर्ण था। वह हँसती गई और हँसती गई जब तक कि उसकी आँखों में आँसू नहीं आ गये थे।
“ऐ, बहनजी, क्या आप पर्याप्त नहीं हँस ली हैं?” कंडक्टर ने पुकारा, “अच्छा होगा कि कुछ कल के लिए भी बचाकर रख लो।” अन्त में गाय सड़क से बाहर हट गई। और शीघ्र ही बस एक रेलरोड क्रॉसिंग (रेल फाटक) पर आ गई। दूर से रेलगाड़ी को एक बिन्दु के जैसे देखा जा सकता था, जो इसके नजदीक आते जाने से बडा व बड़ा होता जा रहा था। फिर यह फाटक के गेट के पास से अत्यधिक शोरगुल व खड़खड़ाहट के साथ, बस को हिलाती हुई, तेजी से निकल गई।

फिर बस आगे बढ़ी और रेलवे स्टेशन को पार किया। वहाँ से इसने एक व्यस्त, सुव्यवस्थित कारोबारी गली को पार किया और, घूमते हुए, एक अधिक चौड़ी व्यस्त सार्वजनिक सड़क पर प्रवेश किया। इतनी बड़ी, चमकदार दिखने वाली दुकानें! वस्त्रों व अन्य व्यापारिक वस्तुओं का कितना जगमगाता प्रदर्शन! इतनी भारी भीड़! ‘ विस्मय से मूक होकर वल्लि मुँह खोले प्रत्येक चीज को एकटक देखती रहती। फिर बस रुकी और वल्लि के अतिरिक्त प्रत्येक उतर गया।
“ऐ बहनजी” कंडक्टर ने कहा, “क्या आप उतरने के लिए तैयार नहीं हैं? यह इतनी दूर है जितनी दूर तुम्हारे 30 पैसे तुम्हें ला सकते हैं।”
“नहीं”, वल्लि ने कहा, “मैं इस ही बस से लौट रही हूँ।” उसने अपनी जेब से 30 पैसे और लिये और सिक्कों को कंडक्टर को सौंप दिया।

“क्यों, कुछ और मामला है?” “नहीं, कोई बात नहीं है। मैंने केवल बस की सवारी करने जैसा महसूस किया (अर्थात् मैं बस की सवारी करना चाहती थी), बस यह बात है।” “अब जबकि तुम यहाँ हो, क्या तुम दृश्यों पर एक नजर डालना नहीं चाहती?” “बिल्कुल अकेले? ओह, मैं अत्यधिक भयभीत हो जाऊँगी।” लड़की के बोलने की शैली से अत्यधिक मनोरंजन करते हुए, कंडक्टर ने कहा, “किन्तु बस में आने में तुम्हें डर नहीं लगा?” “उसके बारे में डरने जैसी कोई बात ही नहीं है”.उसने उत्तर दिया।

“ठीक है, फिर वहाँ उस स्टॉल पर क्यों नहीं जाती और कुछ पी क्यों नहीं लेती? इसके बारे में भी डरने जैसी कोई चीज नहीं है?”
“ओह, नहीं, मैं यह नहीं कर सकती।” “ठीक है, फिर, मैं ही तुम्हारे लिए एक ठंडा पेय ले आता हूँ।” “नहीं, मेरे पास पर्याप्त पैसे नहीं हैं। केवल मुझे मेरी टिकट दे दो, बस।” “यह मेरी तरफ से पार्टी होगी और तुम्हें इसकी कोई कीमत नहीं देनी होगी।” “नहीं, नहीं,” उसने दृढ़ता से कहा, “कृपया, नहीं।”
कंडक्टर ने कंधे उचकाए, और उन्होंने तब तक प्रतीक्षा की जब तक वापसी यात्रा आरम्भ करने का समय नहीं हो गया। वहाँ पर पुनः अधिक यात्री नहीं थे।

IV “Won’t your mother………………..was there? (Pages 125-126)

कठिन शब्दार्थ : looking for (लुकिङ् फॉ(र)) = तलाश कर रही होगी। spreadeagled (स्प्रेड्ईग्ल्ड ) = फैलाई हुई। haunted (हॉन्ट्ड) = बार-बार दिमाग में आना, विस्मृत करना असम्भव था। dampening her enthusiasm (डैम्पनिङ् ह(र) इन्थ्यूजिऐजम्) = उसके उत्साह को मंद करते हुए। chatterbox (चैट(र)बॉक्स्.) = बातून।
हिन्दी अनुवाद-“क्या तुम्हारी माँ तुम्हारी तलाश नहीं कर रही होगी?” कंडक्टर ने पूछा जब उसने लड़की को उसका टिकट दिया।

“नहीं, कोई भी मेरी तलाश नहीं कर रहा होगा”, उसने कहा। बस चली, और पुनः वही आश्चर्यजनक दृश्य आए। वल्लि जरा भी नीरस नहीं थी और प्रत्येक चीज का उस ही उत्तेजना से अभिवादन किया जो उसने पहली बार महसूस की थी। किन्तु अचानक उसने छोटी गाय को सडक की बगल में मरे पडे हीक वहाँ जहाँ इसे किसी तेज चलने वाले वाहन द्वारा टक्कर मारी गई थी।

“क्या यह वही गाय नहीं है जो हमारी बस के कस्बे की यात्रा पर उसके सामने दौड़ी थी?” उसने कंडक्टर से पूछा। कंडक्टर ने हाँ में सिर हिलाया और वह दु:ख से भर गई। थोड़ी देर पहले तक वह कितना प्रिय, सुन्दर प्राणी थी और अब अचानक अपना आकर्षण, और अपना जीवन खो चुकी थी और कितनी भयानक दिख रही थी, कितनी डरावनी, वहाँ पड़े हुए, टाँगें फैली हुईं, इसकी जीवन रहित आँखें थमी हुईं, चारों तरफ रक्त.बस आगे बढ़ी। मृतक गाय की स्मृति उसके दिमाग में बार-बार आ रही थी जिससे उसका उत्साह ठंडा हो रहा था। वह अब खिड़की से बाहर और अधिक नहीं देखना चाहती थी।

वह अपनी सीट से चिपके हुए इस प्रकार बैठी रही, जब तक कि बस 3.40 बजे उसके गाँव नहीं पहुँच गई। वह खड़ी हुई और स्वयं को फैलाया (अंगड़ाई ली)। फिर वह कंडक्टर की ओर घूमी और कहा, “ठीक है, श्रीमान्,. मैं आशा करती हूँ कि आप से फिर मिलूँगी।” “ठीक है, मैडम” उसने मुस्कराते हुए उसे उत्तर दिया, “जब भी आप बस की सवारी करने जैसा .. महसूस करें, तो आएँ व हमारे साथ शामिल हो जाएँ। और अपना किराया लाना मत भूलना।” से एक जो ‘दक्षिणी गली

वह हँसी और बस से नीचे कूद गई। फिर वह आगे चली गई, घर के लिए सीधे दौड़ लगाती हुई। जब उसने अपने घर में प्रवेश किया उसने अपनी माँ को जागा हुआ और वल्लि की मौसियों/चाचियों में दक्षिणी गली’ में रहती थी, से बात करते हुए पाया। यह मौसी/चाची वास्तव में एक बातून थी, एक बार बात करना आरम्भ कर दे तो फिर अपना मुँह बन्द ही नहीं करती थी।

“और तुम कहाँ रहीं?” जब वल्लि अन्दर आई तो उसकी मौसी/चाची ने कहा। वह, एक उत्तर की आशा किये बिना, एक साधारण तरीके से बोली। इसलिए वल्लि केवल मुस्कराई, और उसकी माँ व मौसी/चाची ने अपनी बातचीत जारी रखी। “हाँ, तुम ठीक कह रही हो” उसकी माँ ने कहा। “हमारे बीच और बाहर संसार में कितनी चीजें हैं। हम प्रत्येक चीज के बारे में सम्भवतः कैसे जान सकते हैं? और यदि हम कुछ चीजों के बारे में जानते भी हैं तो भी हम प्रायः इसके बारे में पूर्ण रूप से नहीं समझ सकते, क्या हम समझ सकते हैं?” “अरे, हाँ!” वल्लि ने सांस भरते हुए कहा। “क्या?” उसकी माँ ने पूछा, “तुमने क्या कहा?”

“अरे” वल्लि ने कहा, “मैं केवल आपकी उस बात से सहमत हो रही थी कि चीजें बिना हमारी जानकारी के घटती रहती हैं।”
“केवल एक छोटी-सी लड़की है, यह”, उसकी मौसी/चाची ने कहा, “और देखो यह हमारे . वार्तालाप में अपनी टाँग कैसे अड़ा रही है, ऐसे जैसे कि यह एक वयस्क नारी हो।” वल्लि मन ही मन मुस्कराई। वह नहीं चाहती कि वे उसकी मुस्कराहट का अर्थ समझें। किन्तु, फिर भी, ऐसा होने की ज्यादा उम्मीद नहीं थी, क्या थी?

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