चार्ली चैप्लिन यानी हम सब

Textbook Questions and Answers
पाठ के साथ –

प्रश्न 1.
लेखक ने ऐसा क्यों कहा है कि अभी चैप्लिन पर करीब 50 वर्षों तक काफी कुछ कहा जाएगा?
उत्तर :
चार्ली चैप्लिन के विषय में अभी पचास वर्षों तक काफी कुछ कहा जायेगा। क्योंकि चार्ली ने भारतीय जन-जीवन पर कितना प्रभाव छोड़ा है, इसका अभी तक मूल्यांकन नहीं हुआ है तथा चार्ली की कुछ फिल्में या रीलें ऐसी मिली हैं, जो अभी तक प्रदर्शित नहीं हुई हैं। इस कारण उनकी भी चर्चा होगी

प्रश्न 2.
‘चैप्लिन ने न सिर्फ फिल्म-कला को लोकतान्त्रिक बनाया बल्कि दर्शकों की वर्ग तथा वर्ण व्यवस्था को तोड़ा।’ इस पंक्ति में लोकतान्त्रिक बनाने का और वर्ण-व्यवस्था तोड़ने का क्या अभिप्राय है? क्या आप इससे सहमत हैं?
उत्तर :
चार्ली चैप्लिन ने दर्शकों के किसी वर्ग-विशेष या वर्ण-विशेष को महत्त्व न देकर अपनी फिल्मों को आम आदमी से जोड़कर लोकतान्त्रिक रूप दिया। इस तरह चैप्लिन ने फिल्म जगत् में चल रही वर्ण-व्यवस्था को तोड़ा। चैप्लिन का किसी राजनीतिक विचारधारा, वाद या उच्च जाति-वर्ग आदि से लगाव नहीं था। इस कारण कलाकारों की रूढ़ मान्यताओं को न मानकर चैप्लिन ने ऐसी फिल्में बनायीं, जो समाज के सर्वसाधारण लोगों एवं सभी देशों में लोकप्रिय हुईं।

प्रश्न 3.
लेखक ने चार्ली का भारतीयकरण किसे कहा और क्यों? गांधी और नेहरू ने भी उनका सान्निध्य क्यों चाहा?
उत्तर :
लेखक ने राजकपूर द्वारा बनाई गई ‘आवारा’ फिल्म को चार्ली का भारतीयकरण कहा। राजकपूर ने ‘दि ट्रैम्प’ का शब्दानुवाद किया था। ‘आवारा’ एवं ‘श्री 420’ फिल्म में राजकपूर ने चार्ली की परम्परा का अनुकरण कर दर्शकों को खूब हँसाया। इसी क्रम में देवानन्द, दिलीप कुमार, शम्मी कपूर, अमिताभ बच्चन तथा श्रीदेवी ने भी स्वयं पर हँसने-हँसाने की परम्परा को आगे बढ़ाया। महात्मा गाँधी और नेहरूजी भी कभी-कभी चार्ली की तरह अपने पर हँसते थे। गाँधीजी चैप्लिन के साथ रहकर प्रसन्न होते थे। वे चाली की इस कला के बड़े प्रशंसक भी थे।

प्रश्न 4.
लेखक ने कलाकृति और रस के सन्दर्भ में किसे श्रेयस्कर माना है और क्यों? क्या आप कुछ ऐसे उदाहरण दे सकते हैं जहाँ कई रस साथ-साथ आए हों?
उत्तर :
लेखक ने माना है कि कलाकृति में एक से अधिक रस हों। इससे कलाकृति समृद्ध और रुचिकर बनती है। जीवन में हर्ष और विषाद के क्षण तो आते रहते हैं। उसी प्रकार काव्यों में भी शृंगार और वीर, रौद्र और वीर, हास्य और शृंगार आदि रसों का समावेश एक साथ किया जाता है। परन्तु रसशास्त्र में हास्य और करुण को तथा श्रृंगार और शान्त रस को परस्पर विरोधी बताया गया है। संस्कृत के नाटकों में एक रस मुख्य तथा अन्य रस सहयोगी रूप में रखे गये हैं।

प्रश्न 5.
जीवन की जद्दोजहद ने चार्ली के व्यक्तित्व को कैसे सम्पन्न बनाया?
उत्तर :
चार्ली चैप्लिन को बचपन में परित्यक्ता माँ के साथ बहुत गरीबी में रहना पड़ा। बीमार होने पर माँ ने उसे स्नेह, करुणा और मानवता का पाठ पढ़ाया। बाद में माँ पागल हो गई तो उसे भी संभालना पड़ा। चार्ली को बड़े-बड़े पूँजीपतियों, सामन्तों तथा उद्योगपतियों ने बहुत दुत्कारा-अपमानित किया। जटिल परिस्थितियों से सतत संघर्ष करके तथा साथ ही घुमन्तू रहने पर बड़े-बड़े लोगों, शासकों एवं पूँजीपतियों के जीवनगत यथार्थ को नजदीक से देखा और बाद में करोड़पति हो जाने पर भी अपने मूल्यों पर स्थिर रहा।

प्रश्न 6.
चार्ली चैप्लिन की फिल्मों में निहित त्रासदी/करुणा/हास्य का सामंजस्य भारतीय कला और सौन्दर्यशास्त्र की परिधि में क्यों नहीं आता?
उत्तर :
भारतीय कला और सौन्दर्यशास्त्र रस को महत्त्व देता है, परन्तु इसमें हास्य और करुण रस को परस्पर विरोधी मानकर दोनों को एकसाथ नहीं रखा जाता है। इसके विपरीत चार्ली चैप्लिन की फिल्मों में त्रासदी, करुणा और हास्य का सामंजस्य दिखाई देता है। भारतीय काव्यशास्त्र में हास्य दूसरों को लेकर होता है, हँसी में करुणा की स्थिति नहीं रहती है। इसी कारण चार्ली चैप्लिन की फिल्मों में निहित त्रासदी, करुणा एवं हास्य भारतीय कला एवं सौन्दर्यशास्त्र की परिधि में नहीं आता है।

RBSE Solutions for Class 12 Hindi Anivarya Chapter 15 चार्ली चैप्लिन यानी हम सब

प्रश्न 7.
चार्ली सबसे ज्यादा स्वयं पर कब हँसता है?
उत्तर :
चार्ली स्वयं पर सबसे ज्यादा तब हँसता है. जब वह स्वयं को गर्वोन्नत, आत्मविश्वास से लबरेज, सफलता, सभ्यता, संस्कृति तथा समृद्धि की प्रतिमूर्ति, दूसरों से अधिक शक्तिशाली तथा श्रेष्ठ रूप में दिखाता है। तब वह ऐसा अवसर निर्मित कर देता है कि सारी गरिमा को त्याग कर हास्य का पात्र बन जाता है।

पाठ के आसपास –

प्रश्न 1.
आपके विचार से मूक और सवाक् फिल्मों में से किसमें ज्यादा परिश्रम करने की आवश्यकता है और क्यों?
उत्तर :
हमारे विचार से मूक फिल्मों में ज्यादा परिश्रम करने की आवश्यकता है। मूक फिल्मों के सभी भावों को शारीरिक चेष्टाओं द्वारा ही व्यक्त किया जाता है, जो कि अत्यधिक श्रम-साध्य है। जबकि सवाक् फिल्मों में वाणी अथवा संवादों के द्वारा करुणा, स्नेह, शोक आदि भावों को व्यक्त करना काफी सरल रहता है।

प्रश्न 2.
सामान्यतः व्यक्ति अपने ऊपर नहीं हँसते, दूसरों पर हँसते हैं। कक्षा में ऐसी घटनाओं का जिक्र कीजिए जब
(क) आप अपने ऊपर हँसे हों;
(ख) हास्य करुणा में या करुणा हास्य में बदल गई हो।
उत्तर :
(क) एक बार मैंने अपने मित्र को मजाक में बेवकूफ बनाने का प्रयास किया, परन्तु उसने बातों-बातों में मुझे ही बेवकूफ बना दिया। तब मैं अपने आप पर ही हँसने लगा।
(ख) एक बार एक भिखारी जैसा व्यक्ति नशे में धुत्त होकर घूम रहा था। उसकी वेशभूषा और बोलने के ढंग पर सब बच्चे खूब हँस रहे थे और उसे चिढ़ा रहे थे। तभी एक कुत्ता उसे देखकर भौंकने लगा, तो वह भागने लगा। उसी समय वह एक गाड़ी से टकरा गया और बेहोश होकर सड़क पर गिर पड़ा। ऐसा लगा कि उसके जीवन का अन्त हो गया है। तब सारा हास्य करुणा में बदल गया।

प्रश्न 3.
‘चार्ली हमारी वास्तविकता है, जबकि सुपरमैन स्वप्न’-आप इन दोनों में खुद को कहाँ पाते हैं?
उत्तर :
चार्ली चैप्लिन की फिल्मों में हमारे जीवन की वास्तविकता का वर्णन है। उसका अभिनय हमारे जीवन से। जुड़ा हुआ है, उसमें हम अपना रूप देखते हैं। सुपरमैन की संकल्पना तो एक स्वप्न है कल्पनाएँ, जिसकी पूर्ति यथार्थ जीवन में सम्भव नहीं है। अतः हम स्वयं को सुपरमैन के रूप में नहीं देख पाते हैं।

प्रश्न 4.
भारतीय सिनेमा और विज्ञापनों ने चार्ली की छवि का किन-किन रूपों में उपयोग किया है? कुछ फिल्में (जैसे-आवारा, श्री 420, मेरा नाम जोकर, मिस्टर इंडिया और विज्ञापनों (जैसे चैरी ब्लॉसम) को गौर से देखिए और कक्षा में चर्चा कीजिए।
उत्तर :
विद्यार्थी स्वयं चर्चा करें।

प्रश्न 5.
आजकल विवाह आदि उत्सव समारोहों एवं रेस्तराँ में आज भी चार्ली चैप्लिन का रूप धरे किसी व्यक्ति से आप अवश्य टकराए होंगे। सोचकर बताइए कि बाजार ने चार्ली चैप्लिन का कैसा उपयोग किया है?
उत्तर :
आजकल विवाहोत्सवों, समारोहों एवं होटलों में चार्ली के रूप एवं वेशभूषा में सुसज्जित व्यक्ति को मेहमानों के स्वागतार्थ रखा जाता है। लोगों के ध्यानाकर्षण एवं हँसी-मजाक के लिए भी बाजार ने चाल चैप्लिन की सहायता को अनदेखा करके उसके नकली रूप का उपयोग किया है।

भाषा की बात –

प्रश्न 1.
…. तो चेहरा चार्ली-चार्ली हो जाता है। वाक्य में चाली शब्द की पुनरुक्ति से किस प्रकार की अर्थ छटा प्रकट होती है? इसी प्रकार के पुनरुक्त शब्दों का प्रयोग करते हुए कोई तीन वाक्य बनाइए। यह भी बताइए कि संज्ञा किन स्थितियों में विशेषण के रूप में प्रयुक्त होने लगती है?
उत्तर :
‘चार्ली-चार्ली’ प्रयोग से पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार प्रयुक्त हुआ है। इसमें चार्ली का अर्थ वास्तविकता है। चेहरा चार्ली-चार्ली हो जाता है, का आशय है – चेहरे पर वास्तविकता का भाव उजागर होना।
पुनरुक्त-प्रयोग के तीन वाक्य –

  1. क्रोध में चेहरा लाल-लाल दिखाई दे रहा था।
  2. नौकर रोज-रोज छुट्टी कर देता है।
  3. यहाँ डाल-डाल पर फल लगे हैं।

प्रश्न 2.
नीचे दिए वाक्यांशों में हुए भाषा के विशिष्ट प्रयोगों को पाठ के सन्दर्भ में स्पष्ट कीजिए
(क) सीमाओं से खिलवाड़ करना।
(ख) समाज से दुरदुराया जाना।
(ग) सुदूर रूमानी सम्भावना।
(घ) सारी गरिमा सुई-चुभे गुब्बारे जैसी फुस्स हो उठेगी।
(ङ) जिसमें रोमांस हमेशा पंक्चर होते रहते हैं।
उत्तर :
(क) चार्ली चैप्लिन की फिल्मों का प्रभाव काल, स्थान एवं संस्कृति आदि की सीमाओं से खिलवाड़ कर भविष्य को रेखांकित कर रहा है।
(ख) नानी खानाबदोश, माँ साधारण कलाकार और परिवार अत्यन्त गरीब होने से चार्ली का प्रारंभिक जीवन घुमन्तू बना, इस कारण वह उच्च वर्ग द्वारा दुत्कारा गया था।
(ग) स्ववंशानुगत पूर्व सम्बन्धों के कारण चार्ली की फिल्मों के दृश्य आँखों के सामने सुन्दर रूमानी सम्भावना प्रकट करते हैं।
(घ) चार्ली ने सामन्तों, शासकों एवं उद्योगपतियों का सारा बड़प्पन एकदम ऐसे निकाल दिया जैसे सुई चुभने से गुब्बारा फुस्स हो जाता है।
(ङ) चार्ली की फिल्मों में ऐसे प्रसंगों का चित्रण हुआ है, जिनमें रोमांस किसी-न-किसी हास्यास्पद घटना से मजाक में बदल जाता है।

गौर करें –

प्रश्न :
(क) दरअसल सिद्धान्त कला को जन्म नहीं देते, कला स्वयं अपने सिद्धान्त या तो लेकर आती है या बाद में उन्हें गढ़ना पड़ता है।
(ख) कला में बेहतर क्या है-बद्धिको प्रेरित करने वाली भावना या भावना को उकसाने वाली बन्दि?
(ग) दरअसल मनुष्य स्वयं ईश्वर या नियति का विदूषक, क्लाउन, जोकर या साइड किक है।
(घ) सत्ता, शक्ति, बुद्धिमता, प्रेम और पैसे के चरमोत्कर्ष में जब हम आईना देखते हैं तो चेहरा चार्ली-चाली हो जाता है।
(ङ) मॉडर्न टाइम्स, द ग्रेट डिक्टेटर आदि फिल्में कक्षा में दिखाई जाएँ और फिल्मों में चार्ली की भूमिका पर चर्चा की जाए।
उत्तर :
(क) कला तो हृदयगत भावों की सहज अभिव्यक्ति होती है। कला पहले साकार होती है, उसके सिद्धान्त बाद में गढ़े जाते हैं।
(ख) भावना को उकसाने वाली बुद्धि कला में बेहतर है।
(ग) मनुष्य ईश्वर या नियति के अनुसार ही जीवन में सभी भावों एवं क्रियाओं को अपनाता है।
(घ) जीवन-जगत् में वास्तविकता का बोध होने पर प्रत्येक व्यक्ति अपना यथार्थ परिचय पा लेता है।।
(ङ) शिक्षक के सहयोग से फिल्म देखकर चर्चा करें।

RBSE Class 12 चार्ली चैप्लिन यानी हम सब Important Questions and Answers
लघूत्तरात्मक प्रश्न –

प्रश्न 1.
‘चार्ली’ की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं? संक्षेप में लिखिए।
उत्तर :
चार्ली सार्वभौमिक कलाकार है। वह अपनी फिल्मों में चिर युवा अथवा युवकों जैसा दिखाई देता है। वह किसी भी संस्कृति में विदेशी नहीं लगता है। एक प्रकार से वह सभी दर्शकों को अपना और जाना-पहचाना लगता है। उसमें समाज के साधारण जनों की छवि दिखाई देती है, किसी सुपरमैन की नहीं। वह स्वयं पर हँसने में हास्य और करुणा में अद्भुत सामञ्जस्य रखता है।

प्रश्न 2.
चार्ली चैप्लिन ने भारतीयों को किस प्रकार प्रभावित किया?
उत्तर :
चार्ली चैप्लिन ने भारतीय फिल्मों एवं अभिनेताओं को भी प्रभावित किया। राजकपूर ने चार्ली चैप्लिन की नकल पर ‘आवारा’ और ‘श्री 420’ फिल्में बनाईं। इसके पश्चात् तो हिन्दी फिल्म अभिनेताओं में जानी वाकर, दिलीप कुमार, देवानन्द, शम्मी कपूर, अमिताभ बच्चन तथा श्रीदेवी आदि ने चार्ली के किसी-न-किसी रूप का प्रभाव ग्रहण किया तथा स्वयं को हँसी का पात्र बनाया। चार्ली चैप्लिन ने भारतीयों को अपने अभिनय से काफी प्रभावित किया।

प्रश्न 3.
अन्य कामेडियनों से बढ़कर क्या विशेषताएँ चार्ली चैप्लिन में हैं, जिनसे वह हमें ‘हम’ लगते हैं? बताइये।
उत्तर :
चार्ली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे किसी भी संस्कृति को विदेशी नहीं लगते। क्योंकि चार्ली आम आदमी की पीड़ा व दर्द को व्यक्त करता है। स्वपीड़ा से जुड़ाव व संवेदना ही चार्ली को ‘हम’ में परिवर्तित कर देता जो व्यक्ति को देश-सीमाओं से परे ले जाकर, मैं और तुम की परिधि से निकालकर ‘हम’ बना देता है। यही विशेषता चार्ली के व्यक्तित्व और उसके अभिनय में है।

प्रश्न 4.
किन परिस्थितियों ने चार्ली को हमेशा एक ‘बाहरी’ तथा ‘घुमन्तू’ चरित्र बना दिया था?
उत्तर :
चार्ली की नानी खानाबदोश और माँ परित्यक्ता व सांधारण कलाकार थी। उसका बचपन भयानक गरीबी में बीता जिसमें उसे माँ के पागलपन से भी संघर्ष करना पड़ा। वह समाज के उच्च वर्ग द्वारा सदा दुत्कारा गया। इन सभी जटिल परिस्थितियों ने चार्ली को हमेशा एक ‘बाहरी’ और ‘घुमन्तू’ चरित्र बना दिया था।

प्रश्न 5.
चार्ली के मन पर हास्य और करुणा के संस्कार कैसे पड़े?
उत्तर :
लेखक के अनुसार चार्ली के घर के पास कसाईखाने में रोज सैकड़ों जानवर लाये जाते थे। एक दिन एक ह वहाँ से भाग निकली। उसे पकडने वाले लोग उसका पीछा करते हए कई बार फिसले और गिरे। तब देखने वाले सभी लोग सड़क पर ठहाके लगाने लगे। बाद में भेड़ पकड़ी गई। तब उसका अन्त समझ चार्ली का मन रो पड़ा। इस घटना से पहले तो हास्य तथा फिर करुणा का संस्कार चार्ली के मन में पड़ गया।

प्रश्न 6.
चार्ली की फिल्मों का चमत्कार क्या है? बताइये।
उत्तर :
चार्ली की फिल्में भावनाओं पर टिकी हुई हैं, बुद्धि पर नहीं। उनका चमत्कार यही है कि वे पागलखाने के मरीजों से लेकर महान् वैज्ञानिक आइन्स्टाइन जैसे प्रतिभाशाली तक को आनन्द प्रदान करती हैं। चार्ली ने फिल्म कला को लोकतान्त्रिक बनाया तथा समाज की वर्ण एवं वर्ग-व्यवस्था को तोड़ा। चार्ली ने अपनी फिल्मों में उच्च वर्ग तथा शासक वर्ग की कमजोरियों पर सशक्त व्यंग्य किये।

प्रश्न 7.
‘पश्चिम में तो बार-बार चाली का पुनर्जीवन होता है।’ इसका आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
चार्ली की फिल्में कला स्थान. काल. संस्कति एवं जाति-वर्ग की सीमाओं से मक्त रहीं। पश्चिम में सभी फिल्म निर्माता चार्ली की कला से प्रभावित रहे हैं। इस कारण वे अपनी फिल्मों में चार्ली के विभिन्न रूपों का चित्रांकन करते रहे हैं। वहाँ पर नये अभिनेताओं ने चार्ली के प्रभाव को ग्रहण करने के प्रयास किये हैं। यही कारण है कि वहाँ चार्ली बार-बार जन्म लेता रहा है।

प्रश्न 8.
चार्ली की फिल्मों के पूरे विश्व में सफल होने के क्या कारण रहे हैं?
उत्तर :
चार्ली ऐसे सार्वभौमिक कलाकार रहे, जिनके लिए काल एवं भूगोल की बाध्यता नहीं रही है। चार्ली की फिल्मों में संवादों का प्रयोग अत्यल्प है, उनमें मानवीय भावों की अधिकता है। उनकी क्रियाएँ एवं अभिनय के दृश्य अतीव सहज एवं सम्प्रेप्य हैं। संवाद न होने से दर्शकों पर गहरा प्रभाव पड़ता है तथा हास्य एवं करुणा का संयोग ही उनकी फिल्मों की सफलता का प्रमुख कारण रहा है।

प्रश्न 9.
भारतीय परम्परा के हास्य और चाली के हास्य में क्या अन्तर बताया गया है?
उत्तर :
भारत में अपने आप पर हँसने अथवा जानबूझकर स्वयं को हास्यास्पद बनाने की परम्परा नहीं है। यहाँ हास्य दूसरों पर किया जाता है। चार्ली का हास्य भारतीय परम्परा से इसलिए भिन्न है क्योंकि चार्ली के पात्र अपनी कमजोरियों एवं विकृतियों पर स्वयं हँसते हैं और दूसरों को भी हँसाते हैं। वे करुणाजनक दृश्य के साथ हँसा भी देते हैं या हँसाते-हँसाते रुला भी देते हैं। इस तरह चार्ली ने भारतीय परम्परा से अलग हटकर करुणा और हास्य का मेल कराया है, यही उसकी विशेषता है।

प्रश्न 10.
चार्ली चैप्लिन के व्यक्तित्व को लेकर लेखक ने क्या धारणा व्यक्त की है? बताइये।
उत्तर :
लेखक की यह धारणा है कि चार्ली का प्रभाव सारे संसार पर रहा है और आगे भी काफी वर्षों तक रहेगा। चार्ली का भारतीय फिल्म जगत् पर भी काफी प्रभावी रहा है। अनेक अभिनेताओं ने उसके अभिनय का अनुसरण भी किया। चार्ली का जीवन कठिनाइयों एवं संघर्षों से भरा रहा, फिर भी उसने दुनिया को अपने आप पर हँसना सिखाया तथा हास्य एवं करुण रस में अनोखा सामंजस्य स्थापित किया।

प्रश्न 11.
“हम सब चार्ली हैं क्योंकि हम सुपरमैन नहीं हो सकते।” इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
लेखक का अभिप्राय है कि चार्ली चैप्लिन को जीवन में काफी संघर्ष करना पड़ा, काफी अपमान झेलना पड़ा और अनेक संकटों का सामना करना पड़ा तथा जमीन से जुड़ा रहा। इसी प्रकार प्रत्येक मनुष्य को जीवन में संघर्षों का सामना करना पड़ता है। इस कारण हम भी चार्ली हैं, जबकि ‘सुपरमैन’ एक काल्पनिक चरित्र या एक महत्त्वाकांक्षी सपना है, वास्तविक रूप में हम सुपरमैन नहीं हो सकते।

निबन्धात्मक प्रश्न –

प्रश्न 1.
चाली के जीवन पर प्रभाव डालने वाली मुख्य घटनाएँ कौन-सी थीं?
उत्तर :
चार्ली के जीवन में प्रथम घटना उस समय की है जब चार्ली बीमार थे और उसकी माँ उन्हें ईसा मसीह की जीवनी पढ़कर सुना रही थी। ईसा के सूली पर चढ़ने के प्रसंग तक आते-आते माँ-बेटा दोनों रोने लगे। इस घटना ने चार्ली को स्नेह, करुणा और मानवता जैसे उच्च जीवन मूल्य दिए। दूसरी घटना बालक चार्ली कसाईखाने में रोज सैकड़ों जानवरों को कटते देखता था।

एक दिन एक भेड़ कसाई की पकड़ से छूट भागी। उसे पकड़ने की कोशिश में कसाई कई बार फिसला, जिसे देखकर लोग हँसने लगे, ठहाके लगाने लगे। जब भेड़ को कसाई ने पकड़ लिया तब उसके मरने की सोच कर बालक चार्ली रोने लगा। इन्हीं दो घटनाओं ने उसकी भावी फिल्मों में त्रासदी और हास्योत्पादक तत्त्वों की भूमिका तय कर दी।

प्रश्न 2.
चार्ली चेप्लिन के फिल्मों की विशेषताएँ बताइये।
उत्तर :
चार्ली की फिल्मों में हास्य और करुणा का अदभत सामंजस्य है। उनकी फिल्मों में भाषा का प्रयोग बहुत कम है। चार्ली की फिल्मों में बुद्धि की अपेक्षा भावना का महत्त्व अधिक है। उनकी फिल्मों में सार्वभौमिकता है। चार्ली किसी को भी विदेशी नहीं लगते वरन् सभी उनमें अपनी छवि देखते हैं।

चार्ली ने फिल्मों को लोकतांत्रिक बनाया और फिल्मों में व्याप्त वर्ण तथा वर्ग व्यवस्था को तोड़ा। चार्ली सदैव अपनी फिल्मों में युवा दिखते हैं और यह युवापन उनके जोश, साहस, बुद्धि व अद्भुत समझ का भी प्रतीक बनता है। कालस्थिति को बदलने का सामर्थ्य भी युवाओं द्वारा ही संभव माना जाता है। यही कारण है कि उनकी फिल्मों में उनकी सामर्थ्यपूर्ण भूमिका एक नवीन संदेश प्रसारित करती है।

प्रश्न 3.
चार्ली चैप्लिन व उनकी फिल्में दर्शक वर्ग पर क्या छाप छोड़ती हैं?
उत्तर :
चार्ली चैप्लिन ने हास्य कलाकार के रूप में पूरी दुनिया के बहुत बड़े दर्शक वर्ग को हँसाया है। उनकी फिल्मों ने फिल्म-कला को लोकतांत्रिक बनाने के साथ-साथ दर्शकों की वर्ग एवं वर्ण व्यवस्था को भी तोड़ा। चार्ली ने कला में बुद्धि की अपेक्षा भावना को महत्त्व दिया है। बचपन के संघर्षों ने चार्ली के भावी फिल्मों की भूमि तैयार कर दी थी।

भारतीय कला और सौन्दर्यशास्त्र में करुणा का हास्य में परिवर्तन भारतीय परम्परा में नहीं मिलता लेकिन चार्ली का जादुई अभिनय हर देश, संस्कृति व सभ्यता को अपना लगता है। भारतीय जनता ने भी चार्ली को सहज भाव से स्वीकार किया है। भारतीय सिनेमा जगत के सुप्रसिद्ध कलाकार राजकपूर को चार्ली का भारतीयकरण कहा गया है। चार्ली की फिल्मों ने करुणा और हास्य में सामंजस्य स्थापित कर फिल्मों को सार्वभौमिक रूप प्रदान किया

प्रश्न 4.
चार्ली चैप्लिन के भारतीयकरण से क्या अभिप्राय है?
उत्तर :
चार्ली ने स्वयं पर हँसना सिखाया है जबकि भारतीय हास्य परम्परा में सदैव दूसरों पर हँसा जाता है। इसमें दूसरों को पीड़ित करने वालों की प्रायः हँसी उड़ाई जाती है। जबकि चार्ली स्वयं अपनी कमजोरियों, अपनी फजीहतों, अपनी विवशताओं तथा अपनी नाकामियों पर हँसता और हँसाता है। भारतीय हास्य परम्परा में करुण और हास्य रस का मेल नहीं दिखाया जाता जबकि चार्ली करुण दृश्य के फौरन बाद एकाएक हँसा देते हैं और हँसते हुए को पलभर बाद रुला देते हैं। ऐसा कर वे करुण और हास्य रस में समन्वय करा देते हैं। चार्ली ने भारतीयों को अपने पर हँसना सिखाया और यही चार्ली का भारतीयकरण है।

प्रश्न 5.
चार्ली चैप्लिन के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
चार्ली चैप्लिन का व्यक्तित्व मुखर, प्रभावशाली एवं सुलझा हुआ था। वह हँसमुख आदमी थे। प्रत्येक व्यक्ति के लिए दूसरों पर हँसना आसान कार्य है लेकिन स्वयं को हँसी का पात्र बनाना उतना ही मुश्किल होता है। चार्ली के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता यही रही कि उन्होंने इस कठिन कार्य को आसान कर दिखाया। वह फिल्मों में गंभीर से गंभीर विषयों पर स्वयं हँसते थे और कब करुणा को हास्य में परिवर्तित कर देते थे, पता ही नहीं चलता था।

चार्ली ने अपने जीवन में इतनी बेहतरीन फिल्में बनाईं कि आज भी आम आदमी आनन्द का अनुभव करता है। चार्ली चैप्लिन हास्य फिल्मों का महान अभिनेता और निर्देशक था। उसका चमत्कार था कि पागलखाने के मरीज से लेकर आईंस्टाइन जैसे महान प्रतिभा सम्पन्न व्यक्ति भी उसकी फिल्मों को सूक्ष्मतम रसास्वादन के साथ देख सकते थे।

रचनाकार का परिचय सम्बन्धी प्रश्न –

प्रश्न 1.
लेखक विष्णु खरे के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :
हिन्दी कविता और आलोचना में विष्णु खरे एक विशिष्ट हस्ताक्षर हैं। इनका जन्म 1940 ई. में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में हुआ। ये विश्व सिनेमा के अच्छे जानकार हैं। ये फिल्मों को समाज, समय और विचारधारा के आलोक में देखते हैं। इनकी प्रमुख रचनाएँ कविता संग्रह-एक गैर रूमानी समय में, खुद अपनी आँख से, सबकी आवाज पर्दे में, पिछला बाकी। आलोचना-आलोचना की पहली किताब, सिनेमा पढ़ने के तरीके आदि। इनको रघुवीर सहाय सम्मान, शिखर सम्मान, मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, फिनलैंड का राष्ट्रीय सम्मान, नाइट ऑफ द ऑर्डर ऑफ दि व्हाइट रोज आदि से सम्मानित किया किया जा चुका है।

0:00
0:00

slot siteleri-sahabet-matadorbet-sweet bonanza-mariobet-deneme bonusu veren siteler 2026-radissonbet-kaçak iddaa-aviator-slot siteleri-trwin-deneme bonusu veren yeni siteler-superbahis-matadorbet-sahabet-matadorbet-superbet-tipobet-sahabet-deneme bonusu veren yeni siteler-slotday-xslot-kralbet-sweet bonanza-bahibom-anadoluslot-slotday-casino siteleri-radissonbet-casibom-casinofast-cratosroyalbet-asyabahis-asyabahis-stake-betboo-betboo-youwin-youwin-superbahis-superbahis-oleybet-oleybet-1xbet-ngsbahis-betmatik-artemisbet-bets10-deneme bonusu veren siteler 2026-tarafbet-piabellacasino-baywin-superbahis-mersobahis-tipobet-slotella-yeni slot siteleri-ritzbet-slot siteleri-canlı bahis siteleri-hitbet-celtabet-pusulabet-betano-betano-betewin-pusulabet-madridbet-1xbet-mariobet-betmatik-betmatik-betenerji-misty-misty-güvenilir casino siteleri-misli-bahis siteleri-dedebet-bahsegel-bahsegel-meritking-meritking-holiganbet-holiganbet-bets10-ramadabet-bets10-casibom-casibom-ngsbahis-jojobet-marbahis-marbahis-asyabahis-asyabahis-tarafbet-stake-betboo-yeni slot siteleri-superbahis-superbahis-oleybet-oleybet-misli-misli-1xbet-artemisbet-slot siteleri-limanbet-limanbet-piabellacasino-piabellacasino-baywin-baywin-mersobahis-mersobahis-almanbahis-almanbahis-pincocasino-pincocasino-savoycasino-hitbet-exonbet-anadoluslot-betano-betano-pusulabet-madridbet-mariobet-mariobet-goldenbahis-betmatik-betenerji-misty-misty-betmatik-mostbet-bettilt-bahsegel-maxwin-meritking-venombet-holiganbet-betturkey-güvenilir casino siteleri-bet365-matadorbet-goldenbahis-cratosroyalbet-grandpashabet-casibom-jojobet-jojobet-marsbahis-marsbahis-sweet bonanza-bahibom-aviator-venombet-mariobet-sahabet-aviator-aviator-aviator-bahis siteleri-superbet-grandpashabet-casino siteleri-betkom-palacebet-deneme bonusu-dedebet-deneme bonusu-spinco-deneme bonusu veren siteler-kaçak bahis-deneme bonusu veren siteler 2026-deneme bonusu veren siteler 2026-deneme bonusu veren siteler 2026-betkom-deneme bonusu veren yeni siteler-deneme bonusu veren yeni siteler-casinofast-tipobet-casibom-maxwin-deneme bonusu-güvenilir casino siteleri-spinco-betwild-güvenilir bahis siteleri-sweet bonanza-sweet bonanza-sweet bonanza-misli-betsin-yeni slot siteleri-stake-stake-sweet bonanza-asyabahis-ramadabet-betboo-xslot-superbahis-deneme bonusu veren siteler-oleybet-kaçak iddaa-misli-misli-deneme bonusu veren yeni siteler-damabet-pusulabet-artemisbet-limanbet-limanbet-piabellacasino-1xbet-betewin-betsin-canlı casino siteleri-almanbahis-betturkey-tokyobet-meritbet-pincocasino-pincocasino-gates of olympus-royalbet-celtabet-ritzbet-deneme bonusu-pusulabet-pusulabet-betenerji-betenerji-misty-misty-mostbet-mostbet-bettilt-bahsegel-nerobet-meritking-meritking-trwin-holiganbet-matadorbet-kaçak bahis-canlı bahis siteleri-casibom-betwild-jojobet-sahabet-aviator-marsbahis-casino siteleri-enbet-palacebet-savoycasino-enbet-enbet-mariobet-bet365-damabet-canlı casino siteleri-exonbet-deneme bonusu veren yeni siteler-gates of olympus-tokyobet-deneme bonusu veren siteler 2026-kaçak bahis-sweet bonanza-yeni slot siteleri-sweet bonanza-deneme bonusu veren siteler-slot siteleri-aviator-güvenilir casino siteleri-bahis siteleri-güvenilir bahis siteleri-casino siteleri-deneme bonusu veren yeni siteler-kralbet-güvenilir bahis siteleri-gates of olympus-deneme bonusu veren siteler-slotella-deneme bonusu-casino siteleri-casino siteleri-bahis siteleri-royalbet-aviator-nerobet-betturkey-yeni slot siteleri-canlı casino siteleri-sweet bonanza-slot siteleri-slot siteleri-kaçak iddaa-kaçak iddaa-kaçak bahis-kaçak bahis-güvenilir casino siteleri-güvenilir casino siteleri-güvenilir bahis siteleri-güvenilir bahis siteleri-gates of olympus-gates of olympus-deneme bonusu veren yeni siteler-deneme bonusu veren yeni siteler-deneme bonusu veren siteler 2026-deneme bonusu veren siteler 2026-deneme bonusu veren siteler-deneme bonusu veren siteler-deneme bonusu-deneme bonusu-casino siteleri-casino siteleri-canlı casino siteleri-canlı casino siteleri-canlı bahis siteleri-canlı bahis siteleri-bahis siteleri-bahis siteleri-aviator-aviator-