कार्यालयी हिंदी और रचनात्मक लेखन – कार्यालयी पत्र

कार्यालयी पत्र

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह अपने भावों, सूचनाओं, विचारों को दूसरों तक संप्रेषित करना चाहता है। पत्र इस कार्य हेतु सर्वाधिक उत्तम साधन है। इसके माध्यम से व्यक्ति अपने इच्छित व्यक्ति से अपने मन की बात आसानी से कह सकता है। इसके अतिरिक्त, आज का दैनिक जीवन बहुत जटिल हो गया है। मनुष्य को सरकारी, गैर-सरकारी संस्थाओं आदि से संबंध स्थापित करने पड़ते हैं। इस कार्य में पत्र बहुत ही सहायक सिद्ध होता है।

पत्र के प्रकार

पत्र अनेक प्रकार के होते हैं। विषय, संदर्भ, व्यक्ति और स्थिति के अनुसार भिन्न-भिन्न प्रकार के पत्रों को लिखने का तरीका भी अलग-अलग होता है। आमतौर पर पत्र दो प्रकार के होते हैं-(क) अनौपचारिक पत्र (ख) औपचारिक पत्र।

(क) अनौपचारिक पत्र- इस तरह के पत्र नजदीकी या रिश्तेदार को लिखे जाते हैं। इसमें पत्र पाने वाले तथा लिखने वाले के बीच घनिष्ठ संबंध होता है। यह संबंध पारिवारिक तथा मित्रता का भी हो सकता है। ऐसे पत्रों को व्यक्तिगत पत्र भी कह सकते हैं। इन पत्रों की विषयवस्तु निजी व घरेलू होती है। इनका स्वरूप संबंधों के आधार पर निर्धारित होता है। इन पत्रों की भाषा-शैली में कोई औपचारिकता नहीं होती तथा इनमें आत्मीयता का भाव व्यक्त होता है।

(ख) औपचारिक पत्र- इस तरह के पत्रों में एक निश्चित शैली का प्रयोग किया जाता है। सरकारी, गैर-सरकारी संदभों में औपचारिक स्तर पर भेजे जाने वाले पत्रों को ‘औपचारिक पत्र’ कहा जाता है। इनमें व्यावसायिक, कार्यालयी और सामान्य जीवन-व्यवहार के संदर्भ में लिखे जाने वाले पत्रों को शामिल किया जाता है।

औपचारिक पत्रों के दो प्रकार होते हैं-

(i) सरकारी, अर्ध-सरकारी और व्यावसायिक संदभों में लिखे जाने वाले पत्र- इनकी विषयवस्तु प्रशासन, कार्यालय और कारोबार से संबंधित होती है। इनकी भाषा-शैली का स्वरूप निश्चित होता है। इनका प्रारूप भी प्राय: निश्चित होता है। सरकारी कार्यालयों, बैंकों और व्यावसायिक संस्थाओं द्वारा किया जाने वाला पत्र-व्यवहार इस वर्ग के अंतर्गत आता है। विभिन्न पदों के लिए लिखे गए आवेदन-पत्र भी इसी वर्ग में आते हैं।

(ii) सामान्य जीवन व्यवहार तथा अन्य विशिष्ट संदभों में लिखे जाने वाले पत्र- ये पत्र परिचित एवं अपरिचित व्यक्तियों को तथा विविध क्षेत्रों से संबद्ध अधिकारियों को लिखे जाते हैं। इनकी विषयवस्तु आम जीवन से संबद्ध होती है। इनके प्रारूप में स्थिति व संदर्भ के अनुसार परिवर्तन हो सकता है। इनके अंतर्गत शुभकामना-पत्र, बधाई-पत्र, निमंत्रण-पत्र, शोक संवेदना-पत्र, शिकायती-पत्र, समस्यामूलक पत्र, संपादक के नाम पत्र आदि आते हैं।

पत्र के अंग

पत्र का वर्ग कोई भी हो, उसके चार अंग होते हैं –

(i) पता और दिनांक (ii) संबोधन तथा अभिवादन (iii) पत्र की सामग्री या कलेवर (iv) पत्र को समाप्ति या समापन भाग

(i) पता और दिनांक
अनौपचारिक पत्र के बाई ओर ऊपर कोने में पत्र-लेखक का पता लिखा जाता है और उसके नीचे तिथि दी जाती है। औपचारिक पत्र में बाई ओर प्रेषक के विभाग का नाम, पता व दिनांक दिया जाता है। इसके बाद बायीं ओर ही प्राप्तकर्ता का नाम, पद, विभाग आदि दिया जाता है।

(ii) संबोधन तथा अभिवादन
दोनों तरह के पत्रों में पत्र पाने वाले के लिए किसी-न-किसी संबोधन शब्द का प्रयोग किया जाता है, जैसे-पूज्य/ आदरणीय/पूजनीय/प्रियवर/मान्यवर/महोदय/महोदया/श्रीमान आदि।

● औपचारिक पत्रों में संबोधन से पहले पत्र का विषय अवश्य लिखा जाता है।
अनौपचारिक स्थिति में

‘प्रिय’ संबोधन का प्रयोग निम्नलिखित स्थितियों में किया जाता है –

• अपने से छोटों के लिए
• अपने बराबर वालों के लिए
• घनिष्ठ व्यक्तियों के लिए

औपचारिक स्थिति में

• मान्यवर/प्रिय महोदय/महोदया
• प्रिय श्री/श्रीमती/सुश्री/नाम या उपनाम
• प्रिय नाम/श्री आदि।

(ख) औपचारिक पत्रों में पदनाम के बाद अल्पविराम का प्रयोग नहीं किया जाता।
(ग) अनौपचारिक पत्रों में अपने से बड़ों के लिए ‘नमस्कार’, ‘नमस्ते’, ‘प्रणाम’ जैसे अभिवादनों का प्रयोग होता है ।
जबकि औपचारिक पत्रों में इस तरह के अभिवादन की जरूरत नहीं होती।
अभिवादन शब्द लिखने के बाद पूर्ण-विराम अवश्य लगाना चाहिए; जैसे –
पूज्य पिता जी,
प्रUाम।

(iii) पत्र की सामग्री या कलेवर
अभिवादन के बाद पत्र में मूल विषय या कथन लिखना चाहिए। इसे हम ‘कलेवर’ भी कह सकते हैं। इसमें हम अपनी बात कहते हैं। कलेवर के संबंध में निम्नलिखित सावधानियों को ध्यान में रखना चाहिए –

● कलेवर की भाषा सरल होनी चाहिए तथा वाक्य छोटे-छोटे होने चाहिए।
● लेखक द्वारा लिखी गई बातों का अर्थ स्पष्ट होना चाहिए।
● कलेवर बहुत विस्तृत नहीं होना चाहिए।
● सरकारी पत्र में यदि काटकर कुछ लिखा जाता है तो उस पर छोटे हस्ताक्षर कर देने चाहिए।
● पत्र में पुनरुक्ति नहीं होनी चाहिए।
● पत्र लिखते समय ‘गागर में सागर’ भरने की शैली को अपनाया जाना चाहिए।

(iv) पत्र की समाप्ति या समापन भाग

● अनौपचारिक पत्र के अंत में लिखने वाले और पाने वाले की आयु, अवस्था तथा गौरव-गरिमा के अनुरूप स्वनिर्देश बदल जाते हैं; जैसे-तुम्हारा, आपका, स्नेही, शुभचिंतक, विनीत आदि।
● औपचारिक पत्रों का अंत प्राय: निर्धारित स्वनिर्देश द्वारा होता है; यथा-भवदीय, आपका, शुभेच्छु आदि। इसके बाद पत्र लेखक के हस्ताक्षर होते हैं। औपचारिक पत्रों में हस्ताक्षर के नीचे प्राय: प्रेषक का पूरा नाम और पद का नाम लिखा जाता है। विशेष-परीक्षा में प्रेषक के नाम के स्थान पर ‘क० ख० ग० ‘ लिखना चाहिए। पते के स्थान पर ‘परीक्षा भवन’ तथा नगर के स्थान पर ‘अ० ब० स० ‘ लिख देना चाहिए। इससे उत्तर पुस्तिका की गोपनीयता भंग नहीं होती है।

I. आवेदन-पत्र

1. मानव संसाधन विभाग के महाप्रबंधक को ‘मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव’ पद के लिए एक आवेदन-पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 23 मार्च, 20XX
महाप्रबंधक
मानव संसाधन विभाग
(दिल्ली)
विषय- मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव पद हतु आवेदन।
महोदय
मुझे ‘रोजगार समाचार’ दिनांक ……………… · में प्रकाशित विज्ञापन से पता चला कि आपके विभाग में ‘मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव’ की जरूरत है। मैं अपनी योग्यता व अनुभव के आधार पर स्वयं को इस पद के लिए उम्मीदवार के रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ। मेरा संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है –
नाम- क०ख०गा० नारंग
पिता का नाम- श्री अ०ब०स० नारंग
जन्मतिथि- 10.12.1982
शैक्षणिक योग्यताएँ-

1. दसवीं, सी०बी०एस०ई० 1996, 75% अंक
2. 10 + 2 मानविकी, सी०बी०एस०ई० 1998, 80% अंक
3. बी०ए०, राजधानी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, 2001, 60% अंक
4. पीजीडी बी०एम०, दिल्ली विश्वविद्यालय, 2003, 70% अंक

अनुभव- विक्रय प्रतिनिधि के रूप में हिंदुस्तान लीवर कंपनी का कार्यानुभव।
मैं वचन देता हूँ कि यदि आप मुझे सेवा का मौका देंगे तो मैं पूरी निष्ठा के साथ कार्य करते हुए आपको संतुष्ट रखने का पूर्ण प्रयास  करूँगा।
धन्यवाद।
भवदीय

ह° ……………………
(क०खoगo नारंग)
संलग्नक-

1. 10वीं की सत्यापित प्रतिलिपि
2. 10 + 2 की सत्यापित प्रतिलिपि
3. बी०ए० की सत्यापित प्रतिलिपि
4. पीजीडी बी०एम० की सत्यापित प्रतिलिपि

2. मेरठ स्थिति ‘ लोकायन ‘ संस्था ‘ को घर-घर जाकर वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं के बारे में एक सवक्षण करना हो। नवयुवकों की आवश्यकता है। अभ्यर्थी दवारा संस्था के सचिव को अपनी योग्यता और रुचियों काविवरण देते हुए आवेदन-पत्र ।

परीक्षा भवन
मेरठ
दिनांक: 1 अप्रैल 20XX
सचिव महोदय
‘ लोकायन ‘ संस्था
मेरठ (उत्तर प्रदेश)।
विषय- ‘सर्वेक्षणकर्ता’ हतु आवेदन-पत्र।
महोदय
मुझे ‘ दैनिक भास्कर ‘ समाचार-पत्र दिनांक 10 अप्रैल ……… में प्रकाशित विज्ञापन से ज्ञात हुआ कि आपकी संस्था को वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं के बारे में सर्वेक्षण करने के लिए युवाओं की जरूरत है। मैं स्वयं को इस कार्य के लिए अभ्यर्थी के रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ। मेरा संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है- नाम- क०ख०गo कुमार
पिता का नाम- श्री अ०ब०स० दास
जन्मतिथि- 15.07.1981
शैक्षणिक योग्यताएँ-

1. दसवीं, सी०बी०एस०ई० 1997, प्रथम श्रेणी
2. 10 + 2 मानविकी, सी०बी०एस०ई० 1999, प्रथम श्रेणी
3. बी०ए०, दिल्ली विश्वविद्यालय, 2002, द्वतीय श्रेणी
4. लोक संपर्क, डिप्लोमा, इग्नू 2003, प्रथम श्रेणी

मैं वायदा करता हूँ कि यदि आप मुझे सेवा का मौका देंगे तो इस कार्य को मैं पूरी निष्ठा से करूंगा। आशा है आप मेरे आवेदन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे।
धन्यवाद।
भवदीय

ह° ……………………
(क०ख०ग० कुमार)
संलग्न- सभी शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों की सत्यापित प्रतिलिपियाँ।

3. गांधी जी के जीवन और दर्शन पर लगाई जाने वाली प्रदर्शनी में काम करने के लिए कुछ युवक-युवतियों की आवश्यकता है। व्यवस्थापक, गांधी दर्शन, राजघाट, नई दिल्ली को स्ववृत्त का उल्लेख करते हुए आवेदन पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 16 मार्च 20XX

व्यवस्थापक
गांधी दर्शन,
राजघाट, नई दिल्ली।

विषय- प्रदर्शनी में कार्य करने हतु आवेदन-पत्र।
महोदय
मुझे समाचार-पत्र से ज्ञात हुआ कि आपके संस्थान द्वारा गांधी जी के जीवन और दर्शन पर प्रदर्शनी लगाई जा रही है। इसके लिए कुछ युवक-युवतियों की आवश्यकता है। मैं इस प्रदर्शनी में कार्य करना चाहता हूँ क्योंकि गांधी जी मेरे आदर्श हैं। उनके दर्शन से मैं बहुत प्रभावित हूँ। आज की अनेक समस्याएँ गांधी-दर्शन का पालन करने से समाप्त हो सकती हैं। आशा है कि आप मुझे इस प्रदर्शनी में काम करने का अवसर प्रदान करेंगे। मेरा स्ववृत्त इस प्रकार है नाम- कoख०ग कुमार
पिता का नाम- श्री अ०ब०स० कुमार
जन्मतिथि- 20.09.1989
शैक्षणिक योग्यताएँ-

1. दसवीं, सी०बी०एस०ई०, दिल्ली, 2004, 75% अंक
2. 10 + 2 मानविकी, सी०बी०एस०ई०, दिल्ली, 2006, 60% अंक
3. बी०ए०, दिल्ली विश्वविद्यालय, 2009, 50% अंक

विशेष रुचि- गांधी-दर्शन का विशेष अध्ययन।।
भवदीय

ह° ……………………
(क०ख०ग० कुमार)
संलग्नक- सभी प्रमाण-पत्रों की सत्यापित प्रतिलिपियाँ।

4. एक बहुराष्ट्रीय बैंक को अपनी ग्राहक-संख्या में विस्तार के लिए कुछ सहायक चाहिए। अभ्यर्थी दवारा अपनी रुचि, योग्यता और अनुभव का उल्लेख करते हुए बैंक के प्रबंधक को आवेदन-पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 16 मार्च 20XX

प्रबंधक
………….. बैंक
दिल्ली।

विषय- सहायकों की भर्ती के सबध में आवेदन-पत्र/
महोदय
मुझे दिनांक …………….. के ‘दैनिक जागरण’ समाचार-पत्र में प्रकाशित विज्ञापन से पता चला कि आपके बैंक को कुछ सहायकों की जरूरत है। मैं इस कार्य के लिए स्वयं को अभ्यर्थी के रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ। मेरा संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है –
नाम-कoख०ग० दास
पिता का नाम-श्री अ०ब०स० दास
जन्मतिथि-10.10.1988

शैक्षणिक योग्यताएँ-

1. दसवीं, सी०बी०एस०ई० 2003, 65% अंक
2. 10+2 वाणिज्य, सी०बी०एस०ई० 2005, 60% अक
3. बी०कॉम० जामिया मिलिया विश्वविद्यालय 2008, 55% अंक
4. कंप्यूटर कोर्स–एक-वर्षीय डिप्लोमा

रुचि- वाणिज्य का ज्ञान प्राप्त करना।
अनुभव- दिल्ली के सहकारी बैंक में दो वर्ष का सहायक पद का अनुभव।
आशा है आप मेरे आवेदन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे तथा मुझे अवसर देंगे।
धन्यवाद।
भवदीय

ह° ……………………
(क०ख०ग० दास)
संलग्नक- सभी प्रमाण-पत्रों की सत्यापित प्रतिलिपियाँ।

5. ‘हस्तक्षेप’ अलीगढ़, उत्तर प्रदेश को ऐसे युवक-युवतियों की आवश्यकता है जो गरीब तथा श्रमिक व्यक्तियों में जाकर हुए उक्त संस्था के सचिव को आवेदन-पत्र।

परीक्षा भवन
अलीगढ़
दिनांक: 15 मार्च 20XX
सचिव
हस्तक्षेप
अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश)।
विषय- ‘एड्स ‘ के विषय में जागरूकता फैलाने के सबध में आवेदन-पत्र।
महोदय

मुझे समाचार-पत्र ‘दैनिक भास्कर’ से पता चला है कि आपकी संस्था को ऐसे युवक-युवतियों की आवश्यकता है जो गरीब और श्रमिकों में ‘एड्स’ के बारे में जागरूकता फैला सकें। यह समाज-कल्याण का कार्य है और मैं इस कार्य में अपना योगदान करना चाहता हूँ। मेरी रुचि भी समाज-सेवा में रही है। आशा है आप मुझे इस सेवा का अवसर प्रदान करके कृतार्थ करेंगे।
मेरा विवरण निम्नलिखित है-
नाम- क०ख०ग० गुप्ता
पिता का नाम- श्री अ०ब०स० गुप्ता
जन्मतिथि– 15.03.1985
शैक्षणिक योग्यताएँ-

1. दसवीं, उत्तर प्रदेश शिक्षा बोर्ड 2000, प्रथम श्रेणी
2. बारहवीं 2002, प्रथम श्रेणी
3. बी०ए०, मेरठ विश्वविद्यालय, मेरठ 2005, द्रवितीय श्रेणी
4. ‘लोक संपर्क’ में स्नातकोत्तर डिप्लोमा (एक-वर्षीय), मेरठ विश्वविद्यालय, मेरठ

रुचि- लोगों से मेलजोल बढ़ाना।
भवदीय
ह° ………………….
क०ख०ग० गुप्ता
संलग्नक- सभी शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों की सत्यापित प्रतिलिपियाँ।

6. कल्पना कीजिए कि कोई अभ्यर्थी पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना अध्ययन पूरा कर लिया है और ‘नवभारत टाइम्स’ अखबार में पत्रकार पद के लिए आवेदन भेजना चाहता है। इसके लिए अभ्यर्थी दवारा लिखा गया आवेदन-पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 1 मार्च 20XX
संपादक
नवभारत टाइम्स,
नई दिल्ली।
विषय- पत्रकार पद के लिए आवदन।
महोदय
आपके समाचार- पत्र में दिनांक ’ को प्रकाशित विज्ञापन से ज्ञात हुआ कि आपके समाचार-पत्र में पत्रकार के कुछ पद रिक्त हैं। मैं स्वयं को इस पद के लिए योग्य मानता हूँ। मैं आपको आश्वस्त करता हूँ कि यदि आप मुझे अवसर देंगे तो मैं अपना कार्य निष्ठा के साथ  करूँगा।
मेरा परिचय निम्नलिखित है-

नाम- क०ख०ग० कुमार
पिता का नाम- अ०ब०स० कुमार
जन्मतिथि- 15.06.1982
शैक्षणिक योग्यताएँ-

1. दसवीं, सी०बी०एस०ई० 1997, 65% अंक
2. बारहवीं, सी०बी०एस०ई० 1999, 55% अंक
3. बी०ए०, दिल्ली विश्वविद्यालय, 2002, 50% अंक
4. पत्रकारिता में दो-वर्षीय डिप्लोमा, जे०एन०यू० से प्रथम श्रेणी

कार्यानुभव- सांध्य दैनिक में एक वर्ष का अनुभव
सधन्यवाद!
भवदीय

ह° ………………….
(क०ख०गo कुमार)
संलग्नक- सभी प्रमाण-पत्रों की सत्यापित प्रतिलिपियाँ।

7. अपनी ग्राहक संख्या बढ़ाने के लिए एक प्रतिष्ठित समाचार-पत्र को ग्रीष्मावकाश में घर-घर जाकर प्रचार करने वाले -नवयुवतियों की आवश्यकता है। अभ्यार्थी दवारा अपनी रुचि, कुशलता, अनुभव आदि का उल्लेख हुए मुख्य प्रबंधक को आवेदन-पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 1 अप्रैल 20XX
मुख्य प्रबंधक

क०खoगo समाचार-पत्र .
नई दिल्ली।
विषय- प्रचार के लिए सहायकों के पद हतु आवेदन-पत्र।
महोदय
मुझे आपके समाचार-पत्र में दिनांक ’ को प्रकाशित विज्ञापन से पता चला कि आपके समूह को ग्रीष्मावकाश मैं घर-घर जाकर प्रचार करने के लिए नवयुवक/नवयुवतियों की आवश्यकता है। मैं उक्त पद हेतु स्वयं को उपयुक्त उम्मीदवार समझता हूँ।
मेरा संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है-
नाम- अ०ब०स० सोलंकी
पिता का नाम- श्री यoर०ल० सोलकी
जन्मतिथि- 10.07.1988
शैक्षणिक योग्यताएँ-

1. दसवीं, सी०बी०एस०ई० 2004, प्रथम श्रेणी
2. बारहवीं, सी०बी०एस०ई०, 2006, द्रवितीय श्रेणी
3. सेल्स मैनेजमेंट का एक-वर्षीय डिप्लोमा 2007

कार्यानुभव- दो वर्ष का स्थानीय अखबारों में बिक्री सहायक का अनुभव।
मान्यवर, यदि आप मुझे सेवा का मौका देंगे तो मैं पूरी निष्ठा से काम करूंगा तथा समाचार-समूह के लक्ष्यों को पूरा करने की कोशिश करूंगा। आशा है कि आप मेरे आवेदन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे।
धन्यवाद।
भवदीय
ह° ………………….
(अ०ब०स० सोलंकी)
संलग्नक- सभी प्रमाण-पत्रों की सत्यापित प्रतिलिपियाँ।

8. राजीव गांधी फ़ाउंडेशन उच्च शिक्षा हेतु छात्रवृत्ति प्रदान करती है। अभ्यर्थी दवारा अपनी योग्यताओं का परिचय देते हुए संस्था के सचिव को आवेदन-पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 16 अप्रैल 20XX

सचिव
राजीव गांधी फ़ाउंडेशन
नई दिल्ली।
विषय- छात्रवृत्ति के लिए आवेदन-पत्र ।
महोदय
मुझे दिनांक……………. · को ‘दैनिक हिंदुस्तान’ में प्रकाशित विज्ञापन से पता चला कि आपकी संस्थान उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति प्रदान करती है। मैं इस छात्रवृत्ति के लिए आवेदन-पत्र प्रस्तुत कर रहा हूँ। मेरा विवरण इस प्रकार है-
नाम- क०ख०ग० कुमार
पिता का नाम- श्री अ०ब०स० सिंह
जन्मतिथि- 20.09.1998
शैक्षणिक योग्यता- बी०ए०, दिल्ली विश्वविद्यालय, 2009, 80% अंक
वर्तमान कक्षा-स्नातकोत्तर (प्रथम वर्ष)
कॉलेज- हसराज कॉलेज
परिवार की मासिक आय- 7000 रुपये प्रतिमाह
परिवार के सदस्य- सात
आशा है आप यह छात्रवृत्ति प्रदान करके मुझे भविष्य में पढ़ाई जारी रखने की सुविधा प्रदान करेंगे।
धन्यवाद।
भवदीय

ह° …………………
(कoखoगo कुमार)
संलग्नक-बी०ए० तथा पिता की आय का प्रमाण-पत्र।
प्रधानाचार्य की टिप्पणी
मैं पवन कुमार के उपर्युक्त विवरण को सत्यापित करता हूँ तथा इस मेधावी छात्र को छात्रवृत्ति देने की अनुशंसा करता हूँ।
हo
प्रधानाचार्य
दिनांक – ………………….. .
मुहर

9. आपको कक्षा बारहवीं में हिंदी विषय में 95 अंक आए हैं। हिंदी में अपनी विशिष्ट योग्यता का उल्लेख करते हुए हिंदी अकादमी, दिल्ली को पत्र लिखकर उनकी पुरस्कार योजना व छात्रवृत्ति के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए। [CBSE Sample Paper, 2015]

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 3 अप्रैल 20XX

सचिव
हिंदी अकादमी, पद्मानगर , नई दिल्ली।
विषय- विशिष्ट योग्यता वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार एवं छात्रवृत्ति योजना की जानकारी के संबंध में ।
महोदय
विनम्र निवेदन यह है कि मैं सी०बी०एस०ई०, नई दिल्ली द्वारा मार्च 2015 में आयोजित बारहवीं की वार्षिक परीक्षा में शामिल हुआ था। इस परीक्षा में मुझे हिंदी में 95 प्रतिशत अंक हासिल हुए हैं। हमारे विद्यालय के हिंदी शिक्षक द्वारा ज्ञात हुआ कि विशिष्ट योग्यता वाले विद्यार्थियों को हिंदी अकादमी द्वारा पुरस्कार एवं छात्रवृत्ति दी जाती है। मैंने इस संबंध में कई जगह से जानकारी लेने का प्रयास किया, किंतु इस संबंध में यथेष्ट जानकारी न मिल सकी। मुझे हिंदी विषय में विशिष्ट योग्यता अर्जित करने वालों को इस संस्था द्वारा प्रोत्साहित करने के लिए जो कदम उठाए जाते हैं, उनकी जानकारी चाहिए।
मैं दिल्ली विश्वविद्यालय के उत्तरी कैंपस के किसी प्रतिष्ठित कॉलेज से हिंदी विषय में बी०ए० ऑनर्स करना चाहता हूँ। इस संस्था द्वारा प्राप्त पुरस्कार एवं छात्रवृत्तियाँ एक ओर मेरा उत्साहवर्धन करेंगी तो दूसरी ओर छात्रवृत्ति द्वारा मिली सहायता मेरी आर्थिक कठिनाइयों को दूर करके उच्च शिक्षा के मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करेगी। आशा ही नहीं, वरन विश्वास है कि इस संबंध में आप जानकारी देकर मेरा मार्गदर्शन एवं उत्साहवर्धन अवश्य करेंगे। धन्यवाद सहित,
भवदीय
कoखoगo कुमार

II. शिकायत/समस्या/अन्य पत्र

10. आपके क्षेत्र की कानून-व्यवस्था इतनी बिगड़ गई है कि हर व्यक्ति अपने को असुरक्षित महसूस करता है। इसके कारणों की चर्चा करते हुए समाधान हेतु पुलिस आयुक्त को पत्र।

अथवा

दिन-दिन बिगड़ती कानून-व्यवस्था की समस्या के प्रति चिंता प्रकट करते हुए नगर के पुलिस-कमिश्नर को पत्र ।

परीक्षा भवन
मेरठ
दिनांक: 1 अप्रैल 20XX

पुलिस आयुक्त
मेरठ (उत्तर प्रदेश)
विषय- बिगड़ती कानून-व्यवस्था के सबध में।
महोदय
इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान अपने क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ।
इस क्षेत्र के निवासी भय के साये में रहने को विवश हैं। कुछ शरारती तत्व छीना-झपटी करते हैं। वे स्थानीय दुकानदारों व रेहड़ी वालों से हफ़्ता-वसूली भी करते हैं। उनकी माँग पूरी न करने पर वे मारपीट करते हैं। सूरज छिपने के बाद सड़कों पर सन्नाटा छा जाता है, गलियों में चोरी की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। स्थानीय पुलिस के पास शिकायत की जाती है तो वे ऊपर के दबाव या रिश्वत के कारण उनके खिलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं करते। शाम को बस स्टैंड के पास कुछ असामाजिक तत्व खड़े रहते हैं। वे आती-जाती महिलाओं एवं लड़कियों पर अश्लील फ़ब्तियाँ कसते हैं। सायं सात-आठ बजते ही ये लोग यात्रियों के सामान एवं रुपये-पैसे छीन लेते हैं तथा विरोध करने पर चाकू मारने का दुस्साहस कर बैठते हैं।
आशा है कि आप इस समस्या पर गंभीरता से विचार करेंगे तथा ठोस कदम उठाएँगे ताकि क्षेत्र में शांति स्थापित हो सके।
सधन्यवाद
भवदीय
कoखoगo

11. दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों की समीक्षा एवं सुझाव देते हुए दूरदर्शन के निदेशक को पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 1 मार्च 20XX

निदेशक
दूरदर्शन केंद्र
नई दिल्ली।
विषय- दूरदर्शन के कार्यक्रमों की समीक्षा के संबंध में।
महोदय
मैं आपका ध्यान दिल्ली दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। आजकल दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों में बदलाव नजर आ रहा है। पहले के मुकाबले आजकल के कार्यक्रमों में विविधता, गुणवत्ता में वृद्ध, आकर्षक प्रस्तुतीकरण शैली का प्रयोग मिलता है। निजी चैनलों की तुलना में दूरदर्शन के कार्यक्रम अश्लीलता से कोसों दूर हैं। ये कार्यक्रम भारतीय संस्कृति की गरिमा को बनाए हुए हैं। इन सबके बावजूद दूरदर्शन के कार्यक्रम सभी आयु-वर्गों को प्रभावित नहीं कर पा रहे हैं। खासतौर पर बच्चे, युवा व गृहणियाँ अन्य चैनलों की तरफ अधिक आकर्षित हैं। इसका कारण दर्शकों की बदलती अभिरुचि तथा दूरदर्शन की परंपरागत कार्यशैली भी हो सकती है। दूरदर्शन पर सरकारी दबाव भी उसे सभी तरह के कार्यक्रम प्रसारित करने की छूट नहीं देता। समाचार-प्रसारण में दूरदर्शन को अपनी शैली में बदलाव की जरूरत है। उसे सरकारी प्रवक्ता का रूप छोड़कर जनता की आवाज बनना होगा।
आशा है आप मेरे सुझावों को ध्यान में रखकर कार्यक्रमों की गुणवत्ता में सुधार करेंगे।
धन्यवाद।
भवदीय
क०खoगo

12. ग्रीष्मावकाश में आप भुवनेश्वर, पुरी आदि जाना चाहते हैं। इस संदर्भ में ओडिशा के दर्शनीय स्थलों, परिवहन, अवस आव के बारे में वित्त सूचना माँगने के लिए प्रबंधक, ओडिशा पर्यटन विकास निगम, भुवनेश्वर को पत्र।

परीक्षा भवन
पटना
दिनांक: 3 मार्च 20XX

प्रबंधक महोदय
ओडिशा पर्यटन विकास निगम
भुवनेश्वर।
विषय- आोडिशा के पर्यटन स्थलों की जानकारी के सबध म।

महोदय
मैं इस ग्रीष्मावकाश में अपने परिवार के साथ भुवनेश्वर, पुरी आदि दर्शनीय स्थानों की यात्रा करना चाहता हूँ। मुझे इस क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था, आवास-सुविधा तथा सभी दर्शनीय स्थलों की जानकारी नहीं है। यदि मुझे आपके विभाग द्वारा प्रकाशित दर्शनीय स्थलों की जानकारी, परिवहन सुविधा, गाइड आदि संबंधी पुस्तिका उपलब्ध करा दी जाए तो भ्रमण के दौरान होने वाली परेशानियों से मुक्ति पाई जा सकती है।
आपसे अनुरोध है कि मुझे ओडिशा के प्रमुख दर्शनीय स्थलों के रोड मैप, उपयुक्त होटल, धर्मशाला तथा खान-पान के संबंध में जानकारी देने की कृपा करें। इसके लिए मैं निर्धारित शुल्क भी प्रेषित कर रहा हूँ।
धन्यवाद।
भवदीय
क०ख०ग०

13.आपका पानी का मीटर काफी समय से खराब है। इसकी शिकायत नगर निगम के कार्यपालक अभियंता से करते हुए पत्र।

परीक्षा भवन
पटना
दिनांक: 27 मार्च 20XX

कार्यपालक अभियंता
नगर निगम
पटना।
विषय- पानी का मीटर खराब होन के संदर्भ में।

महोदय
मैं आपका ध्यान अपने घर पर लगे पानी का मीटर खराब होने की ओर आकर्षित करता हूँ। पानी का यह मीटर पिछले पाँच माह से खराब है। इस बारे में मीटर की रीडिंग लेने वाले कर्मचारी से लिखित शिकायत भी की गई थी, परंतु अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद जल बोर्ड ने एक निश्चित रकम का बिल भेजना शुरू कर दिया। वास्तव में मीटर के खराब होने से पानी की खपत का अनुमान नहीं लग पा रहा है। अत: यथाशीघ्र पानी का मीटर ठीक करवाने अथवा इसे बदलवाने की व्यवस्था कराएँ। मैं यह भी उल्लेख कर दूँ कि मीटर ठीक करवाने या बदलवाने का जो भी व्यय होगा, उसे मैं वहन करूंगा। आपसे प्रार्थना है कि इस मामले में व्यक्तिगत रुचि लेकर यथोचित कार्यवाई करने की कृपा करें।
सधन्यवाद
भवदीय
कoखoगo
संलग्नक- भुगतान किए गए पुराने बिलों की छायाप्रति।

14. नवीन के घर का फोन खराब पड़ा रहता है। क्षेत्र के टेलीफोन एक्सचेंज में प्रबंधक को शिकायती पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 1 सितंबर 20XX

प्रबंधक महोदय
टेलीफोन एक्सचेंज
दरियागंज, दिल्ली।
विषय- टलीफोन के खराब होने के संबंध में।
महोदय
इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान अपने खराब पड़े टेलीफोन की ओर आकर्षित कराना चाहता हूँ। मेरा टेलीफोन, जिसका नं० 22015XXX है, पिछले एक महीने से समुचित रूप से काम नहीं कर रहा है। यह कभी खराब हो जाता है तो कभी अपने-आप ठीक हो जाता है। इस बारे में विभाग से कई बार शिकायत की जा चुकी है, परंतु कोई कार्रवाई अभी तक नहीं हुई है। हमारे काम पर जाने के बाद घर में वृद्ध माता-पिता रह जाते हैं। वे अपनी विभिन्न जरूरतों के लिए इस फोन का सहारा लेते थे, पर फोन खराब होने से वे पंगु बनकर रह गए हैं। ऑफ़िस से आने के बाद ही उनके स्वास्थ्य के बारे में हमें कुछ पता चल पाता है। इस कारण मुझे घोर असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। आपके विभाग के निचले स्तर के कर्मचारियों का व्यवहार संतोषजनक नहीं रहा है।
आपसे प्रार्थना है कि इस मामले में व्यक्तिगत रुचि लेते हुए हस्तक्षेप करें तथा संबंधित कर्मचारियों को फोन ठीक करने का आदेश देने का कष्ट करें। इसके लिए हम आपके आभारी रहेंगे।
धन्यवाद।
भवदीय
नवीन

15. एक दिन सुबह जागने के बाद आपने पाया कि रात में आपके घर में चोरी हो गई है । आपने पुलिस को सूचित किया, किंतु पुलिस नहीं आई। थाने जाने पर आपकी शिकायत लिखी भी नहीं गई है । पूरी जानकारी देते हुए क्षेत्र के पुलिस उपयुक्त को पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 23 मार्च 20XX

पुलिस उपायुक्त
य०र०ल० कॉलोनी
अoबoसo नगर ।
विषय- पुलिस के गैर-जिम्मेदाराना रवैये के सबध में।
महोदय
इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान मोतीनगर थाने की पुलिस के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। श्रीमान जी, मैं च०छ०ज० मोहल्ले में डी०-90 का निवासी हूँ। दो दिन पहले मंगलवार की रात को कुछ चोर हमारे घर में घुस गए। वे कुछ कीमती सामान चुरा ले गए। सुबह उठने पर हमें पता चला कि घर में चोरी हो गई। हमने तुरंत ही 100 नंबर पर पुलिस को सूचना दी। काफी देर तक पुलिस नहीं आई तो मैं स्वयं थाने गया तथा सारी घटना बताई। वहाँ तैनात पुलिस ने मेरी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया और न ही प्राथमिकी दर्ज की। उलटे मुझसे ऊटपटाँग सवाल पूछे गए तथा मुझे ही लापरवाह बताया गया। उनके इस रवैये से मैं बहुत परेशान हुआ।
आपसे निवेदन है कि इस मामले में व्यक्तिगत रुचि लेकर यथोचित कदम उठाने का कष्ट करें तथा थाने के पुलिसक. र्मियों को चोरों को पकड़ने का आदेश देने की कृपा करें।
धन्यवाद।
भवदीय
कoखoगo

16. वन-महोत्सव के अवसर पर लगाए गए वृक्ष उदयान विभाग के उपेक्षा भरे व्यवहार के कारण सूखते जा रहे हैं। उदयान विभाग के निदेशक को पत्र लिखकर उचित कार्यवाही के लिए अनुरोध कीजिए।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 2 मार्च 20XX

निदेशक महोदय
उद्यान विभाग
नई दिल्ली।
विषय-विभागीय उपेक्षा से सूखते वृक्षों के संध संबंध में।
महोदय
मैं आपका ध्यान इस विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही की तरफ दिलाना चाहता हूँ जिसके कारण वन-महोत्सव के अवसर पर लगाए गए वृक्ष सूखते जा रहे हैं।
श्रीमान जी, इस वर्ष वन विभाग ने वन-महोत्सव बड़े जोर-शोर से मनाया। हमारे क्षेत्र में लोगों ने बड़ी संख्या में पौधारोपण कार्य किया। इन पौधों की देखभाल का जिम्मा उद्यान विभाग का था। विभाग के कर्मचारियों ने इन पौधों में न तो समय पर पानी दिया और न ही आवारा पशुओं से इनकी रक्षा की। सिंचाई तथा देखरेख के अभाव में ये पौधे सूखते जा रहे हैं। यदि विभाग को इन पौधों की देखभाल नहीं करनी थी तो वन-महोत्सव पर पौधे लगवाने की खाना-पूर्ति नहीं करनी चाहिए थी। विभाग की यह लापरवाही पर्यावरण की दृष्टि से हानिकारक है।
आपसे अनुरोध है कि आप अधीनस्थ कर्मियों को अपने कर्तव्य का बोध कराएँ तथा इन पौधों की देखभाल के लिए उपयुक्त निर्देश दें ताकि वन-महोत्सव मनाने का उद्देश्य सार्थक हो सके।
धन्यवाद।
भवदीय
कoखoगo

17. प्राथमिक कक्षाओं में प्रवेश दिलाने में अभिभावकों को विशेष समस्या का सामना करना पड़ता है। इस समस्या के निदान के लिए राज्य के शिक्षा निदेशक को पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 3 मार्च 20XX

निदेशक
शिक्षा निदेशालय
अ०ब०स० नगर, य०र०ल० शहर।
विषय-प्राथमिक कक्षाआों में प्रवश-सबधी समस्या के सबध म।
महोदय
इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान प्राथमिक कक्षाओं में प्रवेश-संबंधी समस्या की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। श्रीमान जी, फरवरी माह से स्कूलों में प्राइमरी कक्षाओं में दाखिले प्रारंभ हो जाते हैं। अनेक स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया अत्यंत जटिल है। अभिभावकों को तरह-तरह से परेशान किया जाता है। कुछ स्कूलों’ में फ़ॉर्म समाप्त हो जाते हैं तो कुछ स्कूल में ‘सीट नहीं है’ का बोर्ड बाहर लगा देते हैं। कुछ स्कूल छोटे बच्चों व अभिभावकों को साक्षात्कार के नाम पर परेशान करते हैं। प्रवेश के समय बच्चे की आयु में भी एकरूपता का अभाव है। अधिकतर स्कूल दाखिले के नाम पर भारी-भरकम रकम वसूलते हैं।
आपसे अनुरोध है कि आप व्यक्तिगत रुचि लेकर प्राथमिक कक्षाओं में प्रवेश संबंधी नियम बनाकर एकरूपता प्रदान करें तथा डोनेशन लेने वाले स्कूलों के खिलाफ़ कार्रवाई करने का कष्ट करें।
धन्यवाद।
भवदीय
क०खoग०

18.आपके नगर/कस्बे का एक नवयुवक सैनिक देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गया। एक वर्ष बीत जाने पर भी उसकी बेसहारा माँ को कोई सहायता नहीं मिली। उसकी दयनीय दशा बताते हुए तुरंत राहत के लिए रक्षा मंत्री, रक्षा मंत्रालय, नई दिल्ली के नाम पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 17 जनवरी 20XX

माननीय रक्षा मंत्री
रक्षा मंत्रालय
नई दिल्ली।
विषय- शहीद सेनिक की माँ की आर्थिक सहायता दिलवाने के सबध में।
महोदय
इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान एक शहीद सैनिक की माँ की आर्थिक अभाव में होने वाली कठिनाइयों की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ। हमारे जिले के सूबेदार अ०ब०स० सीमा पर आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। सरकार ने उनकी शहादत पर पाँच लाख रुपये और पेंशन देने की घोषणा की थी। इस घटना को एक वर्ष बीत गया, परंतु उनके परिवार को कोई राहत नहीं दी गई। उनकी माँ बेसहारा हैं तथा वे अपना गुजर-बसर करने में सक्षम नहीं हैं। सरकार सैनिकों के परिवारों की देखभाल का दंभ भरती है, परंतु ऐसी घटनाएँ आम नागरिक का हौसला तोड़ती हैं। सरकार का यह उपेक्षा-भाव सेना की सेवा के प्रति उदासीनता को बढ़ा रहा है। सरकारी सहायता से माँ को बेटा तो नहीं मिल पाएगा, परंतु उसे दैनिक जीवन में आर्थिक संघर्ष से राहत अवश्य मिलेगी।
आपसे विनम्र निवेदन है कि आप इस मामले में व्यक्तिगत रुचि लेकर स्व० अ०ब०स० की माँ को शीघ्रातिशीघ्र आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने हेतु संबंधित अधिकारियों को आदेश प्रदान करने की कृपा करें।
धन्यवाद सहित।
भवदीय
क०खoग०

19. सड़क को चौड़ा करने के बहाने आवश्यकता से अधिक पेड़ काटे गए। इसकी विस्तृत जानकारी देते हुए वन एवं पर्यावरण विभाग को एक पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 3 अक्टूबर 20XX

वन अधिकारी
वन एवं पर्यावरण विभाग
चoछoजo नगर।
विषय-आवश्यकता से अधिक पेड़ काट जाने के सबध में)
महोदय
मैं आपका ध्यान सड़क चौड़ा करने के बहाने अनावश्यक रूप से काटे गए पेड़ों की ओर ले जाना चाहता हूँ।
श्रीमान जी, ट०ठ०ड०-त०थ०द० राजमार्ग को चौड़ा करने के लिए इस क्षेत्र में जरूरत से अधिक पेड़ काटे गए हैं। केंद्र सरकार की योजना के अनुसार कुछ सड़कों को चौड़ा करना था। क्षेत्र में चुनाव नजदीक है इसलिए हर कार्य शीघ्रता से किया जा रहा है। अनाधिकृत कब्जों को हटाया जा रहा है। इसी क्रम में सड़क चौड़ा करने के लिए सड़क के दोनों तरफ पाँच-पाँच मीटर तक के पेड़ काटे जाने थे, परंतु सड़क-निर्माण करने वालों ने सात-सात मीटर तक की भूमि पर हरे-भरे पेड़ काट दिए हैं। इससे हरियाली एवं पर्यावरण को भारी नुकसान हुआ है। इन पेड़ों को अवैध तरीके से बेचा भी जा रहा है।
आपसे विनम्र निवेदन है कि इस संदर्भ में शीघ्रातिशीघ्र कदम उठाकर दोषियों के खिलाफ़ आवश्यक कार्यवाई करने की कृपा करें।
धन्यवाद।
भवदीय
कoखoगo

20. रेल के वातानुकूलित डिब्बे में मुंबई से अमृतसर की यात्रा के दौरान रात के समय आपकी अटैची चोरी हो गई। अटैची और सामान का पूरा विवरण देते हुए संबदध स्टेशन के पुलिस अधिकारी के नाम शिकायती पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 3 मार्च 20XX

पुलिस अधिकारी
पुलिस स्टेशन
अंबाला।
विषय- मुबई-अमृतसर यात्रा के दौरान चोरी के सबध में।
महोदय
निवेदन यह है कि दिनांक ………. को गाड़ी नं० …………….. की कोच क्रमांक B-3 में मैं मुंबई से अमृतसर की यात्रा कर रहा था। यह डिब्बा वातानुकूलित था। यात्रा के दौरान रात को मुझे नींद आ गई। अंबाला स्टेशन पहुँचने पर मुझे पता चला कि मेरी अटैची चोरी हो गई है। मेरी अटैची काले रंग की थी और इसमें मेरा जरूरी सामान था। इस अटैची में पाँच हजार रुपये, दो पैंट, दो शर्ट व एक मकान की रजिस्ट्री संबंधी कागजात थे। इसमें मेरे विजिटिंग कार्ड भी हैं, जिनसे यह साबित होगा कि वह मेरी अटैची है। आपसे अनुरोध है कि इस विषय में उचित कार्रवाई करने का कष्ट करें। मैं आपका आभारी रहूँगा।
धन्यवाद!
भवदीय
कoखoगo

21. आपके मोहल्ले में बिजली प्राय: रात्रि के समय कई-कई घंटों के लिए चली जाती है। बिजली संकट से उत्पन्न कठिनाइयों से अवगत कराते हुए बिजली विभाग के संबंधित अधिकारी को पत्र। परीक्षा भवन

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांकः 11 जून 20XX

विद्युत अधिकारी
दिल्ली विद्युत प्रदाय संस्थान
दिल्ली।
विषय- बिजली की अपर्याप्त आपूर्ति के सबध में।
महोदय
मैं आपका ध्यान अपने क्षे 4 में बिजली की अपर्याप्त आपूर्ति की तरफ आकृष्ट करना चाहता हूँ। बिजली-संकट चरम सीमा पर है। यहाँ बिजली की बार-बार कटौती की जा रही नहीं आती। इसके अलावा, जब भी बिजली आती है, उसकी वोल्टेज बहुत कम है कि बिजली के उपकरण ठीक ढंग से काम नहीं करते ही है। ऐसे समय में बिजली न आने से बच्चे, बीमार, बुजुर्ग बहुत अत: आपसे निवेदन है कि इस मामले में व्यक्तिगत रुचि लेकर लोगों को इस समस्या से छुटकारा दिलाने हेतु संबंधित कर्मचारियों को आदेश देने की कृपा करें।
धन्यवाद।
भवदीय
कoखoगo

22. रेल में यात्रा करते हुए वाराणसी में उतरने पर आपने पाया कि आपका कुछ सामान डिब्बे में ही छूट गया। स्टेशन मास्टर को अपने छूटे हुए सामान का विवरण और पहचान बताते हुए पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 17 जून 20XX

स्टेशन मास्टर
उत्तर रेलवे
वाराणसी।
विषय- डिब्बे में छूटे हुए सामान के सदर्भ में।
महोदय
मैं कल दिनांक …………. को दोपहर 2 बजे नई दिल्ली स्टेशन से राजधानी एक्सप्रेस में बैठा तथा रात्रि 11 बजे वाराणसी स्टेशन पर उतर गया। गाड़ी से उतरने के लगभग आधा घंटे बाद मुझे ध्यान आया कि नींद के प्रभाव के कारण मेरा एक बैग ट्रेन में ही छूट गया। उस समय तक गाड़ी जा चुकी थी। इस बैग में मेरे कुछ कपड़े व जरूरी कागजात थे। मेरे बैग का रंग काला है तथा वह मध्यम आकार का है। इस पर लोहे की पतली चेन भी है। इस बैग की छोटी पॉकेट में मेरा पता एवं फोन नंबर लिखा विजिटिंग कार्ड है, जिससे इसे आसानी से पहचाना जा आपसे निवेदन है कि आप मेरे सामान को खोजने में मदद करें तथा यदि कहीं ‘खोया-पाया’ विभाग में ऐसा कोई बैग जमा हुआ हो तो इस फोन नंबर 99994XXXXX पर सूचित करने का कष्ट करें।
सधन्यवाद।
भवदीय
कoखoगo मौर्य

23. आपके क्षेत्र में स्थित एक औदयोगिक संस्थान का गंदा पानी आपके नगर की नदी को दूषित कर रहा है। इस समस्या से अवगत कराते हुए प्रदूषण नियंत्रण विभाग के मुख्य अधिकारी को पत्र।

परीक्षा भवन
पानीपत
दिनांक: 3 मार्च 20XX

मुख्य अधिकारी
प्रदूषण नियंत्रण विभाग
पानीपत, हरियाणा।
विषय- औद्योगिक सस्थान द्वारा नदी के पानी को दूषित करना।
महोदय
मैं आपका ध्यान औद्योगिक संस्थानों के द्वारा छोड़े गए दृषित पानी से बढ़ रहे जल-प्रदूषण की ओर आकर्षित करना चाहता हू।
श्रीमान जी, पानीपत शहर में अनेक उद्योग-धंधे हैं। वस्त्र तथा रसायनों का निर्माण करने वाले तथा अन्य कारखाने अनेक प्रकार के अपशिष्ट पदार्थ उत्सर्जित करते हैं, जिन्हें नदी में डाल या बहा दिया जाता है। इससे नदी का जल प्रदूषित हो रहा है। नदी में बढ़ते जल-प्रदूषण से अनेक जल-जीव तथा मछलियाँ मरने लगी हैं। स्थानीय अधिकारियों से इस विषय में कई बार शिकायत की जा चुकी है, परंतु किसी ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की।
आपसे अनुरोध है कि ऐसे संस्थानों को प्रदूषण-संबंधी नोटिस भेजकर उन पर दंड लगाया जाए तथा औद्योगिक कचरा ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का भी आदेश दिया जाए।
धन्यवाद।
भवदीय
क०खoग० मलहोत्रा

24. खादय पदार्थों में, विशेषत: दूध और दूध से बनी वस्तुओं में, मिलावट की समस्या विकट रूप धारण करती जा रही है। उचित कार्रवाई के लिए अनुरोध करते हुए अपने प्रांत/नगर के खादय विभाग के आयुक्त को पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 20 मार्च 20XX

आयुक्त महोदय
खाद्य विभाग
दिल्ली।
विषय- दूध और दूध से बनी वस्तुओं में मिलावट के सबध में।
महोदय
मैं आपका ध्यान खाद्य पदार्थों में मिलावट की प्रवृत्ति की तरफ आकर्षित करना चाहता हूँ। समाज के कुछ अराजक तत्व खाद्य पदार्थों, विशेषत: दूध और दूध से बनी वस्तुओं, में मिलावट करके लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। भारी मुनाफ़े के लिए रासायनिक दूध व विषैले पदार्थों का प्रयोग किया जाता है। यहाँ यूरिया, साबुन, पेंट, चर्बी आदि का प्रयोग दूध व घी बनाने में किया जा रहा है। पनीर, आइस-क्रीम, दही, मक्खन आदि सभी में मिलावट है। मावे से बनी मिठाइयाँ तो जहर हैं। इन पदार्थों को तैयार करने वालों की साठ-गाँठ स्थानीय प्रशासन से भी है। इस कारण वे धड़ल्ले से अपना व्यापार चला रहे हैं। इन पदार्थों के इस्तेमाल से लीवर, किडनी, पेट की खराबी तथा अनेक बीमारियाँ हो जाती हैं।
आपसे अनुरोध है कि इस गंभीर समस्या पर उचित योजना बनाकर कार्रवाई करें तथा मानवता के हत्यारों व दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ़ सख्त कार्रवाई करें।
धन्यवाद।
भवदीय
क०ख०ग० मेहता

25. रेल-यात्रा के दौरान साधारण श्रेणी के यात्रियों को स्टेशनों एवं चलती गाड़ियों में मिलने वाली खान-पान की सामग्री संतोषजनक नहीं होती। इस समस्या की ओर अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट करने के लिए अधीक्षक, खान-पान विभाग, रेल भवन, नई दिल्ली के नाम पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 22 मई 20XX

अधीक्षक
खान-पान विभाग
रेल भवन
नई दिल्ली।
विषय-रेल-यात्रियों को मिलने वाली घटिया खाद्य सामग्री के सबध में।
महोदय
मैं आपका ध्यान रेल-यात्रा के दौरान साधारण श्रेणी के यात्रियों को स्टेशनों व चलती गाड़ियों में मिलने वाली खान-पान की घटिया सामग्री की तरफ दिलाना चाहता हूँ।
साधारण श्रेणी के यात्री स्टेशन पर से सामान खरीदते हैं, परंतु रेलवे स्टेशनों पर खाद्य सामग्री की गुणवत्ता बेहद घटिया होती है तथा उनके ‘रेट’ भी काफी अधिक होते हैं। कभी-कभी वे नकली सामान भी बेचते हैं। स्टेशनों पर खाद्य सामग्री के निर्माण में सफ़ाई का ध्यान नहीं रखा जाता तथा सामग्री भी प्राय: बासी होती है। चलती गाड़ियों में सामान बेचने वाले पंजीकृत नहीं होते। वे मनमर्जी की कीमत से सामान बेचते हैं। इन समस्याओं के बारे में स्थानीय अधिकारियों से कई बार शिकयतें की जा चुकी हैं, परंतु उन्होंने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की।
आपसे अनुरोध है कि आपू इस समस्या पर गंभीरता से कार्रवाई करें तथा खाद्य सामग्री की गुणवत्ता में सुधार लाने हेतु आवश्यक कदम उठाएँ।
धन्यवाद।
भवदीय
क०ख०ग० शर्मा

26. आपने ‘लोक सभा’ चैनल पर कुछ दिन संसद की कार्यवाही देखी। कुछ विदवतापूर्ण भाषणों के बीच हो-हल्ला और अन्य प्रकार की बाधाओं को देखकर आपको कैसा लगा? अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए अध्यक्ष, लोक सभा, संसद भवन, नई दिल्ली को पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 20 मार्च 20XX
माननीय अध्यक्ष
लोक सभा
संसद भवन
नई दिल्ली।
विषय- लोक सभा में सांसदों के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार के सबध में ।
महोदय
मैं आपका ध्यान लोक सभा में होने वाली कार्यवाही के दौरान उत्पन्न शोरगुल तथा अन्य बाधाओं की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ।
पिछले दिनों मैं ‘लोक सभा’ चैनल पर प्रसारित की जाने वाली संसदीय कार्यवाही देख रहा था। मेरे दिमाग पर संसद के गरिमापूर्ण व्यवहार की छाप थी, परंतु टी०वी० पर जब यथार्थ का ज्ञान हुआ तो लोकतंत्र से विश्वास ही हिल गया। कुछ सांसद बहुत विद्वान थे। देश की समस्याओं के विषय में उनका ज्ञान अच्छा था, परंतु अधिव तर सांसद शोर ही मचा रहे थे। उनका व्यवहार तो उन्हें सांसदों की श्रेणी में रहने का अधिकार नहीं देता। उनके शोर-शराबे से संसद की कार्यवाही कई बार स्थगित की गई। इन कार्यों से देश का धन व समय खराब होता है। इससे अनेक महत्वपूर्ण निर्णयों में देरी भी हो जाती है।
आपसे निवेदन है कि इस तरह बाधा पहुँचाने वालों से सख्ती से निपटें तथा उन पर संसद में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाएँ जिससे धन एवं समय की बर्बादी रोकी जा सके।
धन्यवाद।
भवदीय
कoख०ग० वर्मा

27. पर्वतारोहण में अपनी गहरी रुचि का उल्लेख करते हुए निदेशक, पर्वतारोहण प्रशिक्षण संस्थान, उत्तरकाशी में चलाए जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रमों, उनकी प्रशिक्षण अवधि, शुल्क आदि से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनाक: 1 फरवरी 20XX
निदेशक
पर्वतारोहण प्रशिक्षण संस्थान
उत्तरकाशी।
विषय- पवतारोहण के प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी के सबध में।
महोदय
निवेदन यह है कि मुझे दैनिक समाचार-पत्र में दिए गए विज्ञापन से आपके संस्थान के विषय में जानकारी मिली। यह संस्थान पर्वतारोहण के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है। बचपन से ही पर्वतों में मेरी विशेष रुचि रही है। पर्वतों की ऊँचाई मुझे वहाँ तक पहुँचने के लिए आमंत्रित करती है। मैं अपनी इच्छा को पूरा करना चाहता हूँ. परंतु पर्वतों की चढ़ाई बेहद कठिन होती है। आपके संस्थान से प्रशिक्षण लेने के पश्चात मैं अपने स्वप्नों को साकार कर सकूंगा सकूँगा।
आपसे निवेदन है कि अपने संस्थान द्वारा चलाए जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम, उनकी अवधि, निर्धारित शुल्क आदि के संबंध में संपूर्ण जानकारी शीघ्र भेजने का कष्ट करें।
धन्यवाद।
भवदीय
ह° ……………………
क०ख०ग० सोलंकी

28. आपके विधायक चुनाव जीतने के बाद आपके क्षेत्र में नहीं आए। क्षेत्र में विकास का कोई काम नहीं हुआ। सड़क, बिजली, पानी की समस्याएँ ज्यों-की-त्यों हैं। क्षेत्र की स्थिति से की याद दिलाते हुए विधायक को पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 16 जून 20XX

माननीय विधायक महोदय
अ०ब०स० विधान सभा क्षेत्र
य०रoल० नगर।
विषय- चुनावी वायदों को याद दिलाने के सबध में।
महोदय
इस पत्र के माध्यम रने मैं आपकी विधान सभा चुनाव के समय किए गए वायदों की याद दिलाना चाहता हूँ। आपने इस क्षेत्र से तीन वर्ष पहले विधान सभा का चुनाव लड़ा तथा जनता के समक्ष विकास के अनेक वायदे किए। आपने पक्की सड़कें बनवाने, पानी की आपूर्ति बने बढाने, बिजली की निबधि आपूर्ति करने, उदृयोग लगवाने आदि के अनेक वायदे जनता के समक्ष किए तथा जनता ने उन पर भरोसा करके आपको अच्छे मत देकर विधान सभा में भेजा, परंतु आपने तो श्री कृष्ण जैसा कार्य किया। मथुरा जाकर गोकुल गाँव को भूल ही गए। आम जनता को पानी नहीं मिलता। क्षेत्र में गलियाँ व सड़कें टूटी-फूटी हैं। इनमें जहाँ-तहाँ जो गड्ढे बने हुए हैं, उनसे आए दिन दुर्घटनाएँ होती हैं। गली की लाइटें तो गायब ही हो चुकी हैं तथा अँधेरे को ही लोगों ने अपनी नियति मान लिया है। भयंकर गरमी में बिजली यदा-कदा ही आती है। कानून-व्यवस्था भी खराब है। अधिकारी आम जनता की कोई सुनवाई नहीं करते। आपने कभी क्षेत्र की सुधि ही नहीं ली। आपसे अनुरोध है कि आप चुनावी समय में किए गए वायदों तथा अपने कर्तव्यों को पूरा करें और जनता की समस्याएँ सुलझाने की कृपा करें।
धन्यवाद ।
भवदीय
क०ख०ग०

29. विद्यालय में होने वाले नाटक के पूर्वाभ्यास के दौरान एक दिन आपने देखा कि कुछ बच्चे छिपकर धूम्रपान कर रहे हैं। इस समस्या के निराकरण का अनुरोध करते हुए प्रधानाचार्य को पत्रा ।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 7 मार्च 201)

प्रधानाचार्य जी
प०फ०ब० विद्यालय
त०थ०द० नगरा
विषय- बच्चों में धूम्रपान की प्रवृत्ति के सबंध संबंद में।
प०फ०ब० विद्यालय
त०थ०द० नगर।
विषय- बच्चों में धूम्रपान की प्रवृत्ति के सबध में।
महोदय
निवेदन यह है कि मैं आपके विद्यालय का कक्षा 12 का विद्यार्थी हूँ। मैं आपका ध्यान विद्यालय में हो रही कुछ अनुचित गतिविधियों की तरफ आकर्षित करना चाहता हूँ। आपको ज्ञात है कि पिछले सप्ताह विद्यालय में वार्षिको. त्सव की तैयारियाँ चल रही थीं। इसके लिए गीत, नाटक, नृत्य आदि का पूर्वाभ्यास किया जा रहा था। दसवीं कक्षा के विद्यार्थी एक नाटक का पूर्वाभ्यास कर रहे थे। इस समय कक्षाओं में पढ़ाई नहीं हो पाती। कुछ विद्यार्थी खाली समय का लाभ उठाकर धूम्रपान आदि व्यसन करते हैं। यह उनकी सेहत के लिए हानिकारक है। उनकी यह प्रवृत्ति विद्यालय के माहौल को खराब कर रही है। आपसे निवेदन है कि इस तरह के अनुचित कार्यों पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाएँ तथा व्यसनी विद्यार्थियों को सजा व सलाह से सही मार्ग पर लाने की कोशिश करें।
धन्यवाद।
आपका आज्ञाकारी शिष्य
प०ख०ग०
कक्षा-XII
अनुक्रमांक-XX .

30. आपके कुछ साथी विदयालय में छोटी कक्षाओं के विदयार्थियों को बहुत सताते हैं। इस समस्या की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए प्रधानाचार्य को पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 1 मार्च 20XX

प्रधानाचार्य जी
अ०ब०स० विद्यालय,
क०ख०ग० बाग, नई दिल्ली।
विषय- बड़ विद्यार्थियों द्वारा छोटी कक्षाओं के विद्यार्थियों को सताने के सबध में।
महोदय
निवेदन यह है कि मैं 12वीं कक्षा के सेक्शन ‘सी’ का विद्यार्थी हूँ। इस विद्यालय में अनुशासन पर बहुत अधिक बल दिया जाता है, परंतु हमारी कक्षा के कुछ विद्यार्थी विद्यालय के नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। वे छोटी कक्षाओं के विद्यार्थियों को तंग करते हैं। कभी वे उनका मजाक उड़ाते हैं तो कभी उनकी पुस्तकें छीनकर छिपा देते हैं। कभी-कभी तो वे उनके पैसे तक छीन लेते हैं। वे उनको डराते-धमकाते भी हैं। उनके इस उद्दंड व्यवहार से छोटे बच्चे भयभीत रहते हैं। फलस्वरूप स्कूल में सौहाद्र का भाव समाप्त होता जा रहा है।
आपसे निवेदन है कि ऐसे शरारती विद्यार्थियों के खिलाफ़ सख्त अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए ताकि भविष्य में नए विद्यार्थी उनसे सबक ले सकें।
सधन्यवाद।
आपका आज्ञाकारी शिष्य
क्ष०त्र०ज्ञ० मौर्य
कक्षा-12-सी
अनुक्रमांक -XX

31. आपके मोहल्ले के आस-पास के धार्मिक संस्थान अपने कार्यक्रमों को ऊंचे स्वर में लाउडस्पीकर लगाकर देर एक प्रतिकते हैं। इससे उपना कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए नगर निगम के संबंधित अधिकरी शिकायत-पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 7 मार्च 20XX

प्रशासनिक अधिकारी
दिल्ली नगर निगम
सिविल लाइंस क्षेत्र
16, राजपुरा रोड, दिल्ली।
विषय- धार्मिक सस्थानों द्वारा किए जा रह ध्वनि-प्रदूषण के सबध में।
महोदय
इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान अपने मोहल्ले में हो रहे ध्वनि-प्रदूषण की ओर आकर्षित कराना चाहता हूँ। श्रीमान जी, हमारे मोहल्ले अ०ब०स० नगर के ‘ए’ ब्लॉक में एक धार्मिक संस्थान है। यह संस्थान प्राय: धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करता रहता है। ये कार्यक्रम अकसर देर रात तक चलते हैं। इनमें लाउडस्पीकरों का प्रयोग होता है जो बहुत तेज आवाज में देर रात तक चलते हैं। इस तेज आवाज के कारण आम व्यक्ति की नींद में बाधा पड़ती है, मरीज परेशान होते हैं। बच्चों की पढ़ाई नहीं हो पाती। उनकी एकाग्रता ऊँची आवाज के कारण भंग हो जाती है। बुजुर्ग उच्च रक्तचाप से पीड़ित हो जाते हैं। नींद पूरी न होने के कारण हर व्यक्ति के कार्यों में बाधा आती है। धार्मिक संस्थान को इस बारे में कई बार बताया गया है, परंतु उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। आपसे निवेदन है कि संस्थान पर कानूनी कार्रवाई करने की कृपा करें, जिससे मोहल्ले वालों को चैन से जीने का अवसर प्राप्त हो सके।
धन्यवाद।
भवदीय
क०ख०ग० आर्य

32. भोपाल स्थित ‘प्रोन्नति’ नामक संस्था केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की बारहवीं कक्षा में. हिंदी विषय में 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वालों को सम्मानित करती है। हिंदी के प्रति अपने लगाव, लगन और परिश्रम का उल्लेख करते हुए उन्हें अपने अंकों की जानकारी देकर सम्मान प्राप्त करने वालों की सूची में अपना भी नाम दर्ज कराने हेतु पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 20 मई 20XX

सचिव प्रोन्नति संस्था
भोपाल, (मध्य प्रदेश)।
विषय- सम्मान के लिए चयनित विद्यार्थियों की सूची में नाम जोड़ने के सबंध में।
महोदय
मुझे 15 मई, 20’ के ‘नवभारत’ दैनिक समाचार-पत्र में प्रकाशित एक विज्ञापन से पता चला कि आपकी संस्था ‘प्रोन्नति’ सी०बी०एस०ई० की बारहवीं कक्षा में हिंदी विषय में 90 प्रतिशत से अधिक अंक लेने वालों को सम्मानित करती है। मैंने भी हिंदी का गहन अध्ययन किया है तथा बारहवीं कक्षा में मुझे 93 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए हैं। हिंदी भाषण, हिंदी कविता प्रतियोगिताओं में मैं हमेशा भाग लेता रहा हूँ। मैंने कई बार पुरस्कार भी प्राप्त किए हैं। मैं विद्यालय की ‘हिंदी परिषद’ का सचिव रहा हूँ।
अत: आपसे निवेदन है कि सम्मान पाने वालों की सूची में मेरा भी नाम शामिल करके मुझे कृतार्थ करें।
धन्यवाद।
भवदीय
क०खoगा० शाक्य

33. सार्वजानिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध नियम के उल्लंघन को लेकर अपने राज्य के पर्यावरण मंत्री को पत्र। [CBSE (Delhi), 2013]

परीक्षा भवन
पoफoल০ নগর।
दिनांक: 13 मई 20XX

पर्यावरण मंत्री
अoजoसo सरकार
तoथoदo नगर।
विषय- सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध नियम के उल्लधन के सबध में।
महोदय
मैं आपका ध्यान सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध नियम का जिस तरह खुलेआम मजाक उड़ाया जा रहा है, उसकी ओर आकर्षित करना चाहता हूँ।
श्रीमान जी, धूम्रपान की प्रवृत्ति को हतोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा कानून बनाया गया था, जिसके अंतर्गत सार्वजानिक स्थलों पर धूम्रपान न करने का प्रावधान था। इसका उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाने, जेल भेजने या दोनों का ही प्रावधान किया गया था। इसका उद्देश्य युवाओं में बढ़ती धूम्रपान की प्रवृत्ति को रोकना, पर्यावरण को स्वच्छ एवं स्वस्थ रखने के अलावा लोगों को स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों से बचाना था। दुर्भाग्य से धूम्रपान के खतरों को जानते हुए भी लोग धूम्रपान कर रहे हैं। वे धूम्रपान संबंधी नियम की परवाह न करके खुले आम सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि उन्हें न तो नियम का डर है और न जुर्माने या सजा के दंड का। ऐसा करके वे इस कानून का खुलेआम मजाक उड़ा रहे हैं। ऐसा करके वे समाज और विशेषकर युवाओं के सामने गलत उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। उनका यह कृत्य न उनके हित में है और न समाज के। धूम्रपान निषेध नियम का उल्लंघन करने वालों से सख्ती से निपटने का समय आ गया है।
अत: आपसे प्रार्थना है कि युवाओं और समाज के साथ पर्यावरण के लिए हानिकारी धूम्रपान तथा सार्वजानिक स्थानों पर उसका उपभोग करने वाले के विरुद्ध ठोस कार्यवाही करने का कष्ट करें।
धन्यवाद सहित।
भवदीय
कoखoगo

34. पुरातात्विक महत्व के स्थानों पर हो रहे अनधिकृत कब्जे की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे रोकने के समुचित उपाय करने हेतु क्षेत्रीय पुलिस अधिकारी को पत्र। [CBSE (Delhi), 2014)]

परीक्षा भवन
लखनऊ
दिनांक: 1 अप्रैल 20XX

क्षेत्रीय पुलिस अधिकारी
ग्रामीण क्षेत्र,
जनपद (क०ख०ग० नगर)
विषय- पुरातात्विक महत्त्व के स्थानों पर हो रहे अनधिकृत कब्जे के संबंध में।
महोदय
मैं आपका ध्यान क०ख०ग० जनपद से लगभग बीस किलोमीटर दूर स्थित पुरातात्विक महत्व के दो स्थानों पर अनधिकृत रूप से किए जा रहे कब्जे की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ।
श्रीमान जी, क०ख०ग० जनपद प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही देश में अपनी गतिविधियों के कारण चर्चा में रहा है। अवध के नवाबों ने स्वतंत्रता पाने के लिए प्रयास भी किए। अंग्रेजों से लोहा लेने में यहाँ के लोग आगे रहे। ऐसे शहीदों से संबंधित यादें और पुरातात्विक महत्व वाले दो स्थान त०थ०द० क्षेत्र में हैं, जो ड०ढ०ण०-ब०भ०म० मार्ग पर स्थित हैं। वहाँ अब भी कुछ पुराने जर्जर भवन, किले, मंदिर तथा स्वाधीनता संग्राम से संबंधित वस्तुएँ बिखरी पड़ी हैं, जो देखरेख के अभाव में अपनी चमक खोती जा रही हैं। यहाँ पिछले कुछ वर्षों से लोगों ने पहले अस्थायी घर बनाए जो बाद में स्थायी रूप में बदल गए। इस अनधिकृत कब्जे के कारण यह स्थान सिकुड़ता जा रहा है। इससे इसका महत्व एवं सौंदर्य नष्ट हो रहा है।
यदि रही तो कुछ समय बाद ये स्थान अनधिकृत रूप से बेतरतीब बसी बस्ती में बदलकर रह जाएँगे और हमारे शहीदों एवं देशभक्तों की स्मृतियाँ धूमिल होती चली जाएँगी।
अत: आपसे विनम्र निवेदन है कि पुरातात्विक महत्व वाले इन स्थानों से अनधिकृत कब्जे हटवाकर इसके प्राचीन गौरव को बनाए रखने की कृपा करें।
सधन्यवाद ।
भवदीय
य०र०ल० कुमार

35. अस्पताल में किसी रोगी के इलाज में बरती गई लापरवाही का विवरण देते हुए वरिष्ठ चिकित्साधिकारी को पत्र।
[CBSE (Foreign), 2014 ]

परीक्षा भवन
अoबoसo केंद्र
दिनांक: 5 मार्च 20XX

वरिष्ट चिकात्सधिकारी
अ०ब०सo अस्पताल
चoछoजo नगर।
विषय- मरीज के इलाज में बरती गई लापरवाही के संबंध में।
मान्यवर
मैं आपका ध्यान इस अस्पताल में एक मरीज के इलाज में बरती गई लापरवाही की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। महोदय, 10 जुलाई,…………. को विद्यालय जाते हुए मैंने सड़क पर एक व्यक्ति को घायल देखा जिसे कोई अज्ञात वाहन टक्कर मार गया था। मैं उस व्यक्ति को अस्पताल ले आया और डॉक्टर से तुरंत इलाज शुरू करने का अनुरोध किया परंतु डॉक्टरों ने पहले पुलिस को बुलवाया और आवश्यक कार्यवाही पूरी किए बिना इलाज शुरू नहीं किया। इससे उस घायल व्यक्ति के शरीर से अधिक रक्त बह चुका था। डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया। चार दिन तक जिंदगी और मौत के बीच झूलने के बाद वह हार गया और उसकी मृत्यु हो गई। यदि डॉक्टर उस समय कागजी कार्यवाही पूरी में समय न घायल की जान बचाई जा सकती थी।
आपसे प्रार्थना है कि आप ऐसा आदेश जारी करें जिसमें मरीज का इलाज सर्वप्रथम करने तथा कागजी कार्यवाही बादक्रा में पूरी करने का निर्देश हो ताकि फिर इलाज में लापरवाही के कारण किसी अन्य मरीज की जान न जाए।
सधन्यवाद।
भवदीय
क०खoगo

36. रेलगाड़ियों में बढ़ती चोरी-डकैती इत्यादि की घटनाओं का हवाला देते हुए यात्रियों की सुरक्षा के लिए रेल-प्रबंधक को पत्र। [CBSE Sample Paper, 2015 ]

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 3 मार्च 20XX

रेल प्रबंधक
बड़ौदा हाउस, नई दिल्ली।
विषय- रेलगाड़ियों में बढ़ती चोरी-डकैती एव यात्रियों की सुरक्षा के संबंध में।
महोदय
मैं आपका ध्यान रेलगाड़ियों में बढ़ती जा रही चोरी-डकैती एवं यात्रियों के मन में उत्पन्न असुरक्षा की भावना की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ।
श्रीमान जी, भारतीय रेलें लंबी यात्रा के लिए सरल, सफल, सस्ती एवं सुरक्षित साधन समझी जाती रही हैं। कुछ समय पूर्व तक इनके द्वारा की जाने वाली यात्रा सुखद एवं मंगलमय हुआ करती थी, परंतु विगत कुछ वर्षों से रेलवे की यात्रा सुखद कम दुखद ज्यादा हो गई है। प्राय: लंबी दूरियों की रेलगाड़ियों में आरक्षित डिब्बे भी चोरी-डकैती की घटना से सुरक्षित नहीं रह गए हैं। चोरों-लुटेरों का दुस्साहस इतना बढ़ गया है कि वे यात्रियों के साथ लूट-पाट करते हैं, मार-पीट करते हुए घायल कर देते हैं और विरोध करने पर चलती ट्रेन से धक्का देकर गिरा देते हैं और मनोनुकूल स्थान पर चेन पुलिंग करके आराम से उतर जाते हैं। लुटे-पिटे यात्री विवशता से इन्हें देखने के अलावा कुछ नहीं कर पाते। अगले स्टेशन पर यात्रियों की रिपोर्ट लिखने के लिए नाना प्रकार के बहाने करते हुए उन्हें खिसकने का प्रयास किया जाता है। ऐसी स्थिति से निपटने का प्रयास किया जाना अत्यावश्यक है।
आपसे प्रार्थना है कि रेलगाड़ियों की यात्रा को सुखद व मंगलमय बनाने के लिए चोरी-डकैती की अवांछित घटनाओं की पुनरावृत्ति न होने देने के लिए आवश्यक कदम उठाएँ ताकि रेलवे की छवि पूर्ववत बनी रहे और यात्री निर्भय होकर यात्रा कर सकें।
सधन्यवाद।
भवदीय
मोहित कुमार

37. दूरदर्शन केंद्र निदेशक को प्रायोजित कार्यक्रमों की अधिकता एवं उनके गिरते हुए स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए पत्र। [CBSE (Delhi), 2015]

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 23 अप्रैल 20XX

निदेशक :
दूरदर्शन केंद्र
संसद भवन मार्ग
नई दिल्ली।
विषय- दूरदर्शन पर प्रायोजित कार्यक्रमों की अधिकता एव उनके गिरते स्तर के संबंध में।
महोदय
मैं आपका ध्यान दिल्ली दूरदर्शन पर प्रसारित किए जाने वाले कार्यक्रमों की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ जिनमें आजकल प्रायोजित कार्यक्रमों की बाढ़-सी आ गई है। इस कारण अन्य कार्यक्रमों की गुणवत्ता पर कुप्रभाव पड़ रहा है। श्रीमान जी, भारतीय दर्शकों के बीच दूरदर्शन की विशेष छवि बनी है। इस पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों की गुणवत्ता, आकर्षक प्रस्तुति, कार्यक्रमों की विविधता के कारण इसने दर्शकों में विशिष्ट स्थान बनाया है। गत कुछ वर्षों से निजी चैनलों की देखा-देखी दूरदर्शन ने अपनी प्रस्तुति शैली में बदलाव किया है। भौतिकवाद एवं बढ़ते आर्थिक प्रभाव के कारण अब दूरदर्शन पर प्रायोजित कार्यक्रमों का आवश्यकता से अधिक प्रसारण किया जाने लगा है। इन कार्यक्रमों से भारतीय संस्कृति की गरिमा को गहरी ठेस पहुँच रही है। इससे कार्यक्रमों की गुणवत्ता गिर रही है। इसका कुप्रभाव दर्शकों, विशेषकर युवाओं और बच्चों, पर पड़ रहा है तथा दूरदर्शन की स्वच्छ छवि भी धूमिल हो रही है। इसके लिए दूरदर्शन को अपने कार्यक्रमों के चयन में ध्यान रखने की तथा प्रायोजित कार्यक्रमों को कम करने की आवश्यकता है ताकि दूरदर्शन की स्वच्छ छवि एवं इसकी लोकप्रियता में गिरावट न आने पाए।
आपसे प्रार्थना है कि इस मामले में आप व्यक्तिगत रूप से रुचि लेकर हस्तक्षेप करने की कृपा करें ताकि दर्शकों का भरपूर मनोरंजन एवं ज्ञानवर्धन हो सके।
सधन्यवाद।
भवदीय
कoरघoगo

III. संपादक के नाम पत्र

38. कुछ लोगों के मत में मनोरंजन चैनलों से प्रसारित होने वाले पारिवारिक सीरियलों की कहानियाँ वास्तविकता सुंदु होती हैं। इस विषय पर अप्ने विचर व्यक्त कते हुए किसी दैनिक समाचारपत्र के संपादक को पत्र ।

पारीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 27 मई 20XX

संपादक महोदय
अ०ब०स० टाइम्स
तoथ०द० नगर।
विषय- मनोरजन चेनलों से प्रसारित होने वाल कार्यक्रमों के संबंध में।
महोदय
मैं आपके लोकप्रिय समाचार-पत्र के माध्यम से मनोरंजन चैनलों से प्रसारित होने वाले पारिवारिक सीरियलों की काल्पनिक कहानियों के संबंध में अपने विचार प्रकट करना चाहता हूँ। संचार क्रांति से आम जनता के सामने मनोरंजन का संसार खुल गया है। सैकड़ों चैनल लोकप्रिय होने के लिए तरह-तरह के कार्यक्रम विभिन्न शैलियों में प्रस्तुत कर रहे हैं। पारिवारिक सीरियलों की कहानियों का वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं रह गया है। वे किसी सार्थक उद्देश्य को व्यक्त करने में असमर्थ हैं। कई सीरियल ऐसे हैं, जिनमें कुछ पात्र कई-कई पीढ़ियों तक जीवित दिखाए जाते हैं। परिवार में स्नेह की बजाय षड्यंत्र ही दिखाए जाते हैं। इन सीरियलों का कथानक भी अधिकतर उच्च वर्ग या उच्च मध्यवर्ग से संबंधित होता है। महिलाओं का हर क्षेत्र में जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप समाज की व्यवस्था को खराब कर रहा है। समाज पर इनका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। मनोरंजन चैनलों को चाहिए कि वे परिवारों में कलह न बढ़ाएँ, अपितु प्रेम व शांति बढ़ाने वाले सीरियल बनाएँ तभी समाज का विकास हो सकेगा।
आशा है कि इसे आप अने समाचर-पित्र में स्थान देंगे ताकि इन धरावाहकों के निर्माता उद्देश्यपूर्ण कहानियों का चयन कर।
धन्यवाद।
भवदीय
कoखoगo

39. स्कूल जाने की उम्र में बच्चों को काम करते और भीख माँगते देखकर आपको कैसा लगता है? अपने विचारों को व्यक्त करते हुए किसी प्रतिष्ठित दैनिक के संपादक के नाम पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 22 मार्च 20XX

संपादक महोदय
अoब०सo टाइम्स
यoरoलo नगर।
विषय- बलश्रम व शिक्षा के सबंध मं।
महोदय
मैं आपके लोकप्रिय समाचार-पत्र के माध्यम से बच्चों की भिक्षावृत्ति व बालश्रम के संबंध में अपने विचारों को समाज के सामने प्रस्तुत करना चाहता हूँ। आशा है आप इन विचारों को अपने समाचार-पत्र में उपयुक्त स्थान देंगे। बच्चे समाज के भविष्य होते हैं। बचपन सीखने की अवधि होती है। इस आयु-वर्ग में बच्चे शिक्षा पाते हैं, खेलते हैं तथा कुछ नया सीखते हैं, परंतु हमारे देश में गरीबी का भयावह रूप बालश्रम के रूप में दिखाई देता है। सुबह घूमने निकलता हूँ तो चाय की ों पर छोटे बच्चे काम करते दिखाई देते हैं। यातायात के सिग्नलों पर बच्चे भीख माँगते नजर आते हैं। जो उम्र खेलने-कूदने की है, उस उम्र में उनसे काम करवाया जाता है। यह समाज के लिए चिंता का विषय है। बाल-कल्याण के लिए सरकार की सैकड़ों योजनाएँ हैं, परंतु यह स्थिति देखकर वे सब केवल काल्पनिक लगती हैं। समाज में इस वर्ग के उत्थान के लिए कार्य करने का कोई उत्साह नहीं है। समाज व सरकार को चाहिए कि वे ख्याली पुलाव पकाना छोड़कर जमीनी हकीकत को देखें तथा उसके अनुरूप योजनाएँ बनाएँ।
भवदीय
कoखoगo

40. दिल्ली में हुए बम धमाकों के एक चश्मदीद नाबालिग गवाह का फोटो और उसका इंटरव्यू कुछ समाचार चैनलों दवारा दिखाया जाना बच्चे की सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। इस संबंध में अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए किसी प्रतिष्ठित समाचार-पत्र के संपादक को पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 23 मार्च 20XX

संपादक महोदय
अ०ब०स० टाइम्स
चoछoजo नगर
विषय- नाबालिक बच्चे की सुरक्षा के संबंध में।
महोदय
निवेदन यह है कि पिछले दिनों दिल्ली में कुछ बम धमाके हुए। इन बम धमाकों का चश्मदीद गवाह एक बालक पुलिस के सामने आया। जैसे ही मीडिया को इसका पता चला, उन्होंने उस बच्चे का इंटरव्यू लिया तथा उसे चैनलों, अखबारों व पत्रिकाओं में प्रकाशित किया। उसमें उस नाबालिक बच्चे का संपूर्ण विवरण भी दिया गया। मेरी आपत्ति मीडिया की भूमिका के बारे में है। सुरक्षा एजेंसियों का कार्य गवाहों को गुप्त रखना होता है, न कि अपनी पीठ थपथपाने के लिए उन्हें मीडिया के सामने प्रस्तुत करना। इसके अतिरिक्त मीडिया के भी नैतिक व राष्ट्रीय दायित्व होते हैं। उन्हें भी उस बच्चे की सुरक्षा करनी चाहिए थी। उन्हें उसके फोटो व विवरण न देकर घटना के बारे में जानकारी ही देनी चाहिए थी। उन्हें चैनल या समूह की ख्याति के लिए बच्चे को मोहरा नहीं बनाना चाहिए था। उन्हें अपनी इस प्रकृत्ति पर रोक लगानी चाहिए।
धन्यवाद।
भवदीय
क०खoगo

41. ‘स्टिग ऑपरेशन’ खोजी पत्रकारिता का महत्वपूर्ण अंग है, पर इसका निजी जीवन में दखल बढ़ता जा रहा है। इस विषय पर अपना दृष्टिकोण व्यक्त करते हुए किसी समाचार-पत्र के संपादक को पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 25 अप्रैल 20XX

संपादक महोदय
दैनिक भास्कर
नई दिल्ली
विषय- स्टिग आपरेशन का निजी जीवन पर प्रभाव के संबंध में।
महोदय
मैं आपके लोकप्रिय समाचार-पत्र के माध्यम से समाज को स्टिग ऑपरेशन के निजी जीवन में बढ़ते दखल विषय पर अपने विचार व्यक्त करना चाहता हूँ। आशा है कि आप मेरे विचारों को अपने समाचार-पत्र में उपयुक्त स्थान देंगे। मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। इसमें स्टिग ऑपरेशन खोजी पत्रकारिता का महत्वपूर्ण अंग है। इसके माध्यम से अनेक बड़े-बड़े घोटाले जनता के सामने उजागर हुए हैं। इनके माध्यम से जनता को अपने माननीयों की हकीकत का पता चला है, परंतु अब इसकी आड़ में व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित किया जा रहा है। किसी प्रसिद्ध व्यक्ति के निजी जीवन की हर घटना को चटपटा बनाकर प्रस्तुत किया जाता है। यह मौलिक अधिकार का हनन है। जो हथियार जनता की सहायता के लिए प्रयोग किया जाता था, अब उससे ब्लैकमेलिंग का व्यवसाय किया जा रहा है। सरकार को इस पर कड़े कानून बनाने चाहिए ताकि हर व्यक्ति निजी जीवन अपने तरीके से जी सके।
धन्यवाद।
भवदीय
क्रoखoगo अग्रवाल

42. भारत के कुछ राज्यों में पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की संख्या बहुत कम है। इसका क्या कारण हो सकता है और प्रवृत्ति को रोकने के क्या किया जा सकता है? इस संबंध में राय व्यक्त करते हुए किसी दैनिक पत्र के संपादक को एक पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 22 जून 20XX

संपादक महोदय
पंजाब केसरी
अंबाला ।
विषय- महिला’अ’ की घाटती सख्या के संबंध में।
महोदय
मैं आपके लोकप्रिय दैनिक के माध्यम से समाज का ध्यान कुछ राज्यों में महिलाओं की कम होती संख्या की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। आशा है आप इसे अपने समाचार-पत्र में अवश्य प्रकाशित करेंगे।
भारत के कुछ राज्यों, जैसे-पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश में महिलाओं की संख्या पुरुषों की अपेक्षा काफी कम है। पंजाब व हरियाणा में तो यह चिंताजनक स्तर तक पहुँच चुकी है। ये सभी राज्य आर्थिक रूप से संपन्न हैं, इसके बावजूद महिलाओं की संख्या में कमी होना चिंता का विषय है। मेरी राय में इसके पीछे सबसे जिम्मेदार कारक है-कन्या-भ्रूण-हत्या। अत: इन राज्यों के लोग लिंग-परीक्षण तकनीक में होने वाले खर्च को आसानी से वहन कर लेते हैं और पुत्र लालसा के कारण लड़कियों को गर्भ में ही समाप्त करवा देते हैं। समय रहते यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो समाज का संतुलन बिगड़ जाएगा तथा यौन-अपराधों में वृद्ध होगी। इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए सरकार को लिंग–परीक्षण पर पूर्णतः रोक लगानी होगी।
समाज में जागरूकता कार्यक्रम चलाने होंगे। समाज के लोगों को भी लड़की के जन्म को प्रोत्साहित करना होगा, तभी यह असंतुलन दूर हो पाएगा।
धन्यवाद।
भवदीय
कoखoगo चौधरी

43. महिलाओं की असुरक्षा की बढ़ती घटनाओं पर चिंता प्रकट करते हुए तथा इसके समाधान हेतु समुचित उपाय बताते हुए किसी प्रतिष्ठित समाचार-पत्र के संपादक को पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 1 मई 20XX

संपादक महोदय
दैनिक जागरण
सेक्टर 62, गौतम बुद्ध नगर (उ०प्र०)।
विषय- महिलाओं की असुरक्षा की बढ़ती घटनाओं के संबंध में।
महोदय
मैं आपके लोकप्रिय समाचार-पत्र के माध्यम से समाज व सरकार का ध्यान महिलाओं की असुरक्षा की समस्या की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। आशा है कि आप मेरे विचारों को अपने समाचार-पत्र में स्थान देंगे। आज कोई भी समाचार-पत्र हो या समाचार-चैनल, हर जगह दुष्कर्म, छेड़-छाड़, मार-पिटाई, गैंगरेप की खबरें देखने-सुनने एवं पढ़ने को मिलती हैं। आम जनजीवन में कहीं किसी महिला से अभद्र व्यवहार किया जाता है तो कहीं उसका अपहरण किया जाता है। हर जगह भय का माहौल व्याप्त हो गया है। इन घटनाओं के कारण महिलाएँ मध्ययुगीन जीवन जीने के लिए विवश हो गई हैं। समाज का रवैया महिलाओं के प्रति असहयोगपूर्ण है। वह हर घटना के लिए महिला को दोषी मानता है।
इस समस्या से निपटने के लिए कानून-व्यवस्था को सुधारना होगा। दोषी व्यक्तियों को सजा देनी होगी। इसके अलावा महिलाओं को अपनी सुरक्षा के बारे में जागरूक होने की आवश्यकता बढ़ गई है।
भवदीय
क०ख०ग० पांडे

44. भ्रूण-हत्या में हो रही वृदधि पर चिंता प्रकट करते हुए एवं व्यावहारिक समाधान बताते हुए हिंदी के किसी समाचार-पत्र के संपादक को पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 21 जनवरी 20XX

संपादक महोदय
नवभारत टाइम्स
नई दिल्ली।
विषय- भ्रूण-हत्या में हो रही वृद्ध पर चिंता एव समाधान के संबंध में।
महोदय
मैं आपके लोकप्रिय समाचार-पत्र के माध्यम से भ्रूण-हत्या में हो रही वृद्ध पर अपने विचारों को आम जनता तथा सरकार तक पहुँचाना चाहता हूँ। आशा है कि आप मेरे विचारों को अपने समाचार-पत्र में स्थान देंगे। आज समाज में नर-नारी के अनुपात में असमानता है। अधिकतर राज्यों में लड़कियों की संख्या बेहद कम है। इसका कारण है-समाज में पुत्र-प्राप्ति की लालसा। धार्मिक व सामाजिक मान्यताओं के कारण जनता में पुत्र से मोक्ष मिलने की धारणा व्याप्त है। इस कारण लड़कियों की भ्रूण-हत्या की जाने लगी। पहले जन्म के बाद नवजात लड़कियों की हत्या की जाती थी, अब विज्ञान उसे गर्भ में ही मारने की तकनीक देने लगा है। यह प्रवृत्ति बेहद खतरनाक है। इस कारण समाज में लड़कियों की संख्या बहुत कम होती जा रही है। भ्रूण-हत्या की वजह से समाज में यौन-अपराधों की संख्या बढ़ रही है।
इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार को भ्रूण-परीक्षण पर सख्त प्रतिबंध लगाना चाहिए तथा दोषियों को कड़ी सजा देनी चाहिए। समाज में जागरूकता अभियान चलाने चाहिए ताकि लड़के-लड़की के अंतर को समाप्त किया जा सके।
भवदीय
क०खoग० गर्ग

44. आप जिस क्षेत्र में रहती/रहते हैं, वहाँ अभी तक डाकघर नहीं खुला है। डाकघर खोलने के लिए अनुरोध करते हुए ‘हिंदुस्तान’ दैनिक के ‘पाठकों के पत्र’ स्तंभ के लिए पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनाक: 1 जनवरी 20XX

संपादक महोदय
दैनिक हिंदुस्तान
नई दिल्ली।
विषय- नया डाकघर खोलन के संबंध में।
महोदय
मैं आपके लोकप्रिय समाचार-पत्र के माध्यम से अपने क्षेत्र में डाकघर न होने की बात अधिकारियों तक पहुँचाना चाहता हू। हमारे क्षेत्र विलास नगर में कोई डाकघर
नहीं है। आज के जमाने में डाकघर की बेहद आवश्यकता है। लोगों को मनी-ऑर्डर भेजना होता है। विद्यार्थियों तथा युवाओं को तरह-तरह के पत्र भेजने पड़ते हैं। गरीब व मध्य वर्ग के लोग अपनी छोटी-छोटी बचत को यहाँ जमा करवा सकते हैं। इसके अलावा डाकसामग्री की उपलब्धता न होने से लोगों को उसके लिए काफी दूर तक जाना पड़ता है। आपसे अनुरोध है आप इसे ‘पाठकों के पत्र’ नामक स्तंभ में प्रकाशित करके हमारी माँग को संबंधित विभाग तक पहुँचाने का कष्ट करें, ताकि संबंधित अधिकारियों का ध्यान इस तरफ आकृष्ट हो और वे नया डाकघर खोलें।
भवदीय
क०खoग०

46. दिन-प्रतिदिन बढ़ती महँगाई के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए ‘नवभारत टाइम्स’ के संपादक को पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 22 मार्च 20XX

संपादक महोदय
नवभारत टाइम्स
बहादुरशाह जफ़र मार्ग, नई दिल्ली।
विषय- बढ़ती महँगाई के संधर्भ में।
महोदय
मैं आपके लोकप्रिय समाचार-पत्र के माध्यम से प्रशासन व नेताओं का ध्यान बढ़ती महँगाई की तरफ दिलाना चाहता हूँ। आज जीवन के लिए उपयोगी हर वस्तु आम आदमी की पहुँच से बाहर होती जा रही है। रोजमर्रा की वस्तुओं जैसे-सब्जी, दूध, फल, दालें आदि-के दाम नित नई ऊँचाइयों को छू रहे हैं। सरकार इस महँ करने की कोशिश नहीं करती, अपितु कम पैदावार का बहाना बनाकर अपनी कमजोरी को छिपा रही है। जनता की आमदनी महँगाई के अनुपात में बढ़ नहीं रही है। गरीब को दाल-रोटी के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। जमाखोरी बड़े स्तर पर हो रही है परंतु प्रशासन उन पर कोई कारवाई नहीं करता। महँगाई की चौतरफा मार से जनता बेहद आक्रोशित है।
आशा है आप मेरे विचारों को अपने समाचार-पत्र में स्थान देंगे, ताकि सरकार का ध्यान इस समस्या की ओर आकृष्ट हो।
धन्यवाद।
भवदीय
अ०बoस० हुसैन

47. हुई ओर करते इसके 47. युवा | बढ़ती हुई अपराधवृत्ति की ओर सरकार व जनता का ध्यान आकृष्ट हुए तथा समाधान के लिए कुछ सुझाव देते हुए किसी दैनिक समाचार-पत्र के संपादक को पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 27 मार्च 20XX

संपादक महोदय
नवभारत टाइम्स
बहादुरशाह जफ़र मार्ग, नई दिल्ली।
विषय- युवा वर्ग में बढ़ती अपराधवृति के संबंध में।
महोदय
मैं आपके लोकप्रिय समाचार-पत्र के माध्यम से युवा वर्ग में बढ़ती अपराधवृत्ति की तरफ सरकार व जनता का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ।
आजकल समाज में हर तरफ युवाओं की भूमिका पर चर्चा होती है। अखबारों में अपहरण, छीना-छपटी, चोरी, नशाखोरी, छेड़छाड़ आदि की खबरें छपती रहती हैं। इनमें से अधिकांश घटनाओं के दोषी युवा ही पाए जाते हैं। युवा पैसे तथा ऐश के लिए ऐसे घृणित कार्य करते हैं। जो युवा राष्ट्र-निर्माण का कार्य कर सकते हैं, वे ही नीतियाँ भी हैं। युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार काम नहीं मिलता। वे भौतिक चकाचौंध से प्रभावित हो जाते हैं। स समास्या के निवान के लिए युवाओं को भी गह बली हगी तथा सकर को रोगर के अक्सर बढ़ने  होंगे।
आशा है आप मेरे पत्र को अपने समाचार-पत्र में स्थान देंगे, ताकि युवा वर्ग प्रेरित होकर अपराधवृत्ति से दूर हो सके।
धन्यवाद।
भवदीय
कoरgoगo बंसल

48. दूरदर्शन पर दिखाए जाने वाले अश्लील विज्ञापनों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए तथा इसके समाधान हेतु सुझाव देते हुए संपादक को पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 1 अप्रैल 20XX

संपादक महोदय
दैनिक भास्कर
नई दिल्ली।
विषय- दूरदर्शन पर दिखाए जाने वाले अश्लील विज्ञापनों के संधर्भ में।
मैं आपके प्रतिष्ठित समाचार-पत्र के माध्यम से जनता व सरकार को दूरदर्शन पर दिखाए जाने वाले अश्लील विज्ञापनों के प्रभावों के बारे में बताना चाहता हूँ।
दूरदर्शन का समाज पर व्यापक प्रभाव है। इसी प्रभाव का लाभ उठाने के लिए कंपनियाँ अपने उत्पादों का विज्ञापन देती हैं। कुछ विज्ञापन समाज की मान्यताओं के दायरे में होते हैं, परंतु अब कुछ कंपनियाँ अश्लील तरीके से विज्ञापन दे रही हैं। ये विज्ञापन बच्चों व युवाओं की मानसिकता को विकृत करते हैं। गर्भनिरोधकों, साबुनों तथा प्राय: सभी विग्नापनों में नारी देह का प्रदर्शन किया जा रहा है। इनके कारण समाज में छेड़छाड़ व बलात्कार आदि की घटनाएँ बढ़ रही हैं। सरकार को चाहिए कि वह अश्लील विज्ञापनों को प्रतिबंधित करे तथा उन पर जुर्माना भी लगाए।
आशा है आप मेरे विचारों को अपने समाचार-पत्र में प्रकाशित करेंगे, जिससे सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट हो तथा वह अश्लील विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाए।
धन्यवाद।
भवदीय
क०ख०ग० दहिया

49. मोहल्ले की सड़कें बहुत टूटी-फूटी व कूड़े आदि की गंदगी लिए हैं। सड़कों की मरम्मत व सफाई की ओर नगर निगम के अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट करते हुए किसी प्रमुख दैनिक समाचार-पत्र के संपादक को पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 22 मार्च 20XX

संपादक महोदय
दैनिक पंजाब केसरी
वजीरपुर, दिल्ली।
विषय- सड़कों की मरम्मत व संफाई के संबंध में।
महोदय
मैं आपके लोकप्रिय समाचार-पत्र के माध्यम से नगर निगम के अधिकारियों का ध्यान अपने क्षेत्र बुराड़ी की टूटी-फूटी सड़कों व गंदगी की तरफ आकर्षित करना चाहता हूँ। यह कालोनी 30 साल पहले विकसित की गई थी। उस समय यहाँ पर कुछ बुनियादी सुविधाएँ, जैसे-सड़कें, नालियाँ आदि, उपलब्ध करवाई गई थीं। उसके बाद यहाँ की आबादी बहुत बढ़ गई, परंतु सुविधाओं में बढ़ोतरी नहीं हुई। पिछले साल भारी बारिश से पुरानी सड़कें टूट-फूट गई। जगह-जगह गड्ढे बन गए, जिनमें पानी भरा रहता है। ये गड्ढे रात के समय दुर्घटना का कारण बन रहे हैं। कॉलोनी में कचरा उठाने की समुचित व्यवस्था नहीं है। जगह-जगह कचरे के ढेर दिखाई देते हैं। इनसे बीमारियाँ फैलने का डर रहता है। सफ़ाई कर्मचारी कभी-कभार ही आते हैं।
आपसे अनुरोध है कि मेरे पत्र को अपने समाचार-पत्र में स्थान दें ताकि संबंधित अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकृष्ट हो।
धन्यवाद।
भवदीय
अ०ब०स० गुप्ता

50. वरिष्ट नागरकों की सुक्षा के प्रत चिंता व्यिक्त कते हुए तथा सुहाव देते हुए वैनक जगण के संपादक पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनाक: 22 मार्च 20XX

संपादक महोदय
दैनिक जागरण
सेक्टर 62, गौतम बुद्ध नगर (उ०प्र०)
विषय- वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के संबंध में।
महोदय
मैं आपके प्रतिष्ठित समाचार-पत्र के माध्यम से समाज व सरकार का ध्यान वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा की तरफ आकर्षित करना चाहता हूँ। आज चिकित्सा सुविधाओं व जीवन-यापन के स्तर में सुधार के कारण देश में वृद्धों की संख्या बढ़ रही है। शहरों में युवा पीढ़ी रोजगार के कारण दूर-दराज तक कार्य करने जाती है, जिनके कारण वरिष्ठ सदस्य घर में अकेले रह जाते हैं। उनकी अशक्तता का लाभ उठाकर असामाजिक तत्व लूटपाट, यहाँ तक कि उनकी हत्या भी कर देते हैं। कलब में वृों की हाल कपालोर आर्थक क्षमता के कण दन्य है उन्के साथ अमान्य व्यावहार किया जाता हैं। सरकार को चाहिए कि वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षा, चिकित्सा व आर्थिक सहायता मुहैया कराए ताकि वे भी सम्मानित जीवन जी सकें। समाज को भी उनके प्रति उपेक्षात्मक दृष्टिकोण त्यागना होगा। आशा है आप मेरे विचारों को अपने समाचार-पत्र में स्थान देंगे।
भवदीय
गिरीश वर्मा

51. दशहरा-दीपावली आदि त्योहारों में रावण-दहन, आतिशबाजी आदि पर करोड़ों रुपये चंद मिनटों में फूंक दिए जाते हैं। इस फ़िजूलखर्ची की चर्चा करते हुए अपने विचार किसी प्रतिष्ठित समाचार-पत्र के संपादक को पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 22 जुलाई 20XX

संपादक महोदय
दैनिक जागरण
सेक्टर 62, गौतम बुद्ध नगर (उ०प्र०)
विषय- त्योहारों पर फ़िजूलखचों के संबंध में।
महोदय
मैं आपके लोकप्रिय समाचार-पत्र के माध्यम से आम जनता का ध्यान त्योहारों के अवसर करोड़ों रुपये व्यर्थ में खर्च करने की तरफ दिलाना चाहता हूँ। आशा है कि आप अपने समाचार-पत्र में मेरे विचारों को स्थान देंगे।
भारत त्योहारों का देश है। यहाँ दशहरा व दीपावली पूरे उल्लास के साथ मनाए जाते हैं। दशहरे के अवसर के लाखों पुतले बनाए जाते हैं। इनमें करोड़ों रुपये की आतिशबाजी की सामग्री रखी जाती है। चंद मिनटों में रावणदहन हो जाता है तथा करोड़ों रुपये स्वाहा हो जाते हैं। इतनी आतिशबाजी चलने से पर्यावरण भी प्रदूषित होता है। इसी तरह दीवाली पर अरबों की आतिशबाजी की जाती है। यह पैसा यदि शिक्षा, स्वास्थ्य आदि क्षेत्रों में खर्च किया जाए तो देश की कायापलट हो सकती है। अगर हर व्यक्ति इस खर्च में कुछ प्रतिशत कमी करके उस धन का सदुपयोग करे तो न जाने कितने स्कूल, अस्पताल आदि खुल सकते हैं। त्योहार खुशी व स्नेह का परिचायक होते हैं। इन पर व्यर्थ की बरबादी उचित नहीं।
धन्यवाद।
क०ख०ग० सक्सेना

52. अपने राज्य में परिवहन-व्यवस्था की प्रमुख समस्याओं और उनके निदान को सुझाते हुए किसी प्रतिष्टित समाचार-पत्र के संपादक को पत्र।

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 22 मार्च 20XX

संपादक महोदय
दैनिक भास्कर
नई दिल्ली
विषय- परिवहन-व्यवस्था की समस्या व निदान के संबंध में।
महोदय
मैं आपके लोकप्रिय समाचार-पत्र के माध्यम से सरकार का ध्यान परिवहन-व्यवस्था की प्रमुख समस्याओं की तरफ दिलाना चाहता हूँ। आशा है कि आप मेरे विचारों को अपने समाचार-पत्र में स्थान देंगे ताकि उन्हें दूर किया जा सके। दिल्ली भारत की राजधानी है। यह व्यापार, सत्ता व उद्योग का प्रमुख केंद्र है। यहाँ पर लाखों व्यक्ति प्रतिदिन समीपवर्ती क्षेत्रों से रोजगार के लिए आते हैं। आने-जाने के लिए वे परिवहन के विभिन्न साधनों का इस्तेमाल करते हैं। दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था भी है, परंतु उसमें काफी कमियाँ हैं। सबसे प्रमुख समस्या बसों की अपर्याप्त संख्या है। इतनी बड़ी जनसंख्या के लिए पर्याप्त संख्या में बसें नहीं गई हैं। इसके अलावा, यात्रा करने वाले विभिन्न वर्गों के लिए सुविधायुक्त बसें बहुत कम हैं। यह वर्ग निजी वाहनों का प्रयोग करता है। फलत: सड़कों पर जाम लगता है। इसके अतिरिक्त सड़कों का अतिक्रमण भी परिवहन की व्यवस्था को खराब कर रहा है। इस समस्या से निजात पाने का उपाय है कि सरकार उचित समय में पहुँचाने के लिए हर वर्ग के लिए पर्याप्त संख्या में बसें चलाए तथा दूसरे, आम जनता को सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का अधिक प्रयोग करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए।
धन्यवाद।
भवदीय

53. दूरदर्शन पर ‘वयस्क फ़िल्में” दिखाने के पक्ष या विपक्ष में अपने विचार प्रकट करते हुए किसी प्रतिष्ठित समाचार-पत्र के संपादक के नाम पत्र। [CBSE (Delhi), 2013)]

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 1 मई 20XX

संपादक महोदय
अ०ब०स० टाइम्स
यoर०ल० नगर
विषय- दूरदर्शन पर ‘वयस्क फिल्में” दिखाने के संबंध में।
महोदय
मैं आपके सम्मानित एवं लोकप्रिय समाचार-पत्र के माध्यम से दूरदर्शन पर दिखाई जाने वाली वयस्क फ़िल्मों के संबंध में अपनी राय प्रकट कर रहा हूँ। आजकल दूरदर्शन पर भी भौतिकवाद का प्रभाव बढ़ गया है। कुछ निजी चैनलों से प्रतिस्पर्धा और टी०आर०पी० बढ़ाने के चक्कर में दूरदर्शन पर वयस्क फ़िल्में दिखाई जा रही हैं, जो भारतीय संस्कृति की दृष्टि से तनिक भी उचित नहीं एक ओर हमारे जीवन-मूल्यों का क्षरण हो रहा है तो दूसरी ओर पाश्चात्य अपसंस्कृति को पैर फैलाने का रहा है। वयस्क फ़िल्मों के अश्लील दृश्य, द्वअर्थी संवाद और उत्तेजक दृश्य युवा पीढ़ी के ही नहीं, नैतिक एवं मर्यादित आचरण के लिए खतरनाक सिद्ध हो रहे हैं। इससे समाज पतनोन्मुख हो रहा है तथा बलात्कार जैसी घटनाएँ बढ़ रही हैं। इन फ़िल्मों के करने लगा है। इससे समाज में छेड़छाड़ न भारतीय संस्कृति के अनुरूप है और न समाज के लिए शुभ संदेश। छिपे ऐसी फ़िल्में देखना उनकी रुचि बन गई है। ऐसे में समाज को पतन से बचाने के लिए लगाए जाने की आवश्यकता है।
आपसे प्रार्थना है कि दूरदर्शन पर वयस्क फ़िल्में न दिखाए जाने के संबंध में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करते हुए ठोस नीति बनाने की कृपा करें ताकि ऐसी फ़िल्मों के प्रसारण पर शीघ्र अंकुश लग सके।

54. प्लास्टिक थैलियों के प्रयोग पर कानूनी पाबंदी लगाए जाने पर भी उनके बढ़ते प्रयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए किसी समाचार-पत्र के संपादक को एक सुझाव देते हुए पत्र। [CBSE (Delhi), 2014]

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 22 अप्रैल 20XX

संपादक महोदय
दैनिक अ०ब०स०
चoछoजo नगर।
विषय- प्लास्टिक की थैलियों के बढ़ते प्रयोग पर रोक लगाने के संबंध में।
महोदय
मैं आपके सम्मानित एवं लोकप्रिय समाचार-पत्र के माध्यम से देशवासियों का ध्यान प्लास्टिक की थैलियों के बढ़ते प्रयोग और उससे होने वाली हानियों की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ।
महोदय, प्लास्टिक की थैलियों का प्रयोग लोग धड़ल्ले से कर रहे हैं। ये थैलियाँ सस्ती, मजबूत, हल्की और सर्वसुलभ होती हैं, इसलिए लोग इनका प्रयोग सर्वाधिक करते हैं। इन थैलियों का प्रभाव यह हुआ है कि लोग अब सामान लेने के लिए थैला लेकर चलना भूल गए हैं। इन थैलियों का दूसरा पक्ष बहुत ही हानिकारक है। एक ओर ये थैलियाँ ! तो दूसरी ओर ये प्राकृतिक वातावरण के लिए अनुपयुक्त होती हैं। ये में নত ‘ और मृदा को प्रदूषित करती हैं। इन्हें जलाने से जहरीला धुआँ निकलता है जो मनुष्य और पर्यावरण दोनों के लिए बेहद हानिकारक होता है। नष्ट न होने के कारण ये थैलियाँ नालियों और नालों में । हवा के साथ उड़कर ये जगह-जगह कूड़ा-करकट बिखराती हैं। अपशिष्ट खाद्य वस्तुओं फेंकते हैं। इन खाद्य वस्तुओं की लालच में गाएँ इनको खाती हैं। ये थैलियाँ गायों की फैस जाती हैं, और जानलेवा साबित होती हैं। इनसे होने वाली हानियों को ध्यान में रखते हुए। इनके प्रयोग -विक्रय पर कानूनी रोक लगाने की आवश्यकता है।
आपसे प्रार्थना है कि आप अपने समाचार-पत्र में इसे स्थान दें ताकि लोग इन थैलियों के दुष्प्रभाव से अवगत हों और इनका प्रयोग न करने के लिए जन-जागरूकता फैल सके।
सधन्यवाद
भवदीय
कoखoगo

55. देश में क्षेत्रीयतावाद के कारण उत्पन्न समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए किसी प्रतिष्ठित समाचार-पत्र के संपादक को पत्र। [CBSE (Foreign), 2014]

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक: 22 मार्च 20XX

संपादक महोदय
दैनिक अ०ब०स०
ट०ख०ग०
विषय- क्षेत्रीयतावाद के कारण उत्पन्न समस्याआों के संबंध में।
महोदय
मैं आपके सम्मानित एवं लोकप्रिय समाचार-पत्र के माध्यम से अपने देशवासियों का ध्यान क्षेत्रीयतावाद के कारण उत्पन्न कठिनाइयों की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। क्षेत्रीयतावाद हमारे देश की ऐसी समस्या है जो हमारी एकता में बाधक बनी हुई है। इससे लोगों की समग्र राष्ट्रीय भावना पूर्ण रूप में विकसित नहीं हो पाती। लोग अपने-अपने क्षेत्र को उतना प्रेम करने लगते हैं क़ि अपने ही देश के अन्य भू-भागों तथा प्रांतों को पराया समझने लगते हैं और अपनी संकीर्ण मानसिकता का परिचय देते हैं। लोग क्षेत्रीयतावाद के नाम पर लड़ते-मरते हैं और आपस में दिलों की दूरियाँ बढ़ा लेते हैं। ऐसी भावना हमारे देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा है। लोगों को अपने क्षेत्र से लगाव रखने के साथ-साथ संपूर्ण राष्ट्र से प्रेम करना चाहिए और राष्ट्रीयता की भावना को मजबूत बनाना चाहिए।
आपसे प्रार्थना है कि इसे अपने समाचार-पत्र में स्थान दें ताकि देशवासी क्षेत्रीयतावाद की संकीर्ण भावना से ऊपर उठकर राष्ट्रीयता की उदात्त भावना को मजबूत बनाएँ।
सधन्यवाद,
भवदीय
कoखoगo

56. भारतीय युवाओं में क्रिकेट खेल के प्रति अत्यधिक लगाव की चर्चा करते हुए अन्य खेलों के प्रति उदासीनता के बारे में किसी समाचार-पत्र के संपादक को पत्र। [CBSE (Delhi), 2015]

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांकः 1 अप्रैल 20XX

संपादक महोदय
अ०ब०स० टाइम्स
चoछoजo नगर
विषय- क्रिकेट के प्रति अत्यधिक लगाव एव अन्य खेलों के प्रति उदासीनता के संबंध में।
महोदय
मैं आपके सम्मानित एवं लोकप्रिय समाचार-पत्र के माध्यम से भारतीय युवाओं में क्रिकेट के प्रति  बढ़ते अत्यधिक लगाव एवं अन्य खेलों के प्रति उदासीनता के बारे में युवाओं और अन्य खेलों का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ । हमारे देश में क्रिकेट के खेल की लोकप्रियता चरम पर है। पाँच दिवसीय (टेस्ट) क्रिकेट के प्रति लोगों की रूचि कुछ कम थी, परंतु एक-दिवसीय क्रिकेट के प्रारूप ने इसे बहुत अधिक लोकप्रिय बना दिया। युवावर्ग तो इस पीछे दीवाना-सा नजर आता है। इस खेल के नए प्रारूप ट्वेंटी-ट्वेंटी क्रिकेट ने इसकी लोकप्रियता शीर्ष पर है। युवावर्ग और उनके अभिभावकों की दृष्टि में अन्य खेल उपेक्षित होते जा रहे हैं। आज हर बच्चा सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली और भुवनेश्वर कुमार बनना चाहता है। युवावर्ग इस खेल के कई खिलाड़ियों के नाम बता सकता है,पर दुसरे खेलों के एक भी खिलाड़ी का नाम तक नहीं। इस खेल को इस स्तर तक पहुँचाने में मीडिया, कार्पोरेट भी योगदान है, जिससे अन्य खेलों के प्रति युवाओं की उदासीनता बढ़ती गई। अन्य खेलों के प्रति सरकार का रवैया भी बहुत अच्छा नहीं है। अब इस बात की आवश्यकता महसूस की जाने लगी है। अत: अन्य खेलों को लोकप्रिय बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाया जाना चाहिए।
अत: आपसे प्रार्थना है कि आप इसे अपने समाचार-पत्र में स्थान दें ताकि युवावर्ग के साथ-साथ उनके अभिभावकों और खेल विभाग के अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित हो और अन्य खेलों के प्रति बढ़ती उदासीनता कम हो।
सधन्यवाद,
भवदीय
कoखoगo
परीक्षा-भवन

IV. कार्यालयी पत्र

सरकार को सुचारु रूप से चलाने के लिए विभिन्न विभाग होते हैं और उन विभागों का कार्य फ़ाइलों के जरिये होता हैं विभाग कई ताह के पोंक पर आसान प्रश्नकते हैं। इसप्रकरक पत्र-व्यावहार कर्याली पत्र-व्यवहार कहलाता हैं।

सरकारी कार्यालयों की जरूरतों के अनुसार ये पत्र कई प्रकार के होते हैं; जैसे-कुछ पत्र सूचना प्राप्त करने या भेजने के लिए लिखे जाते हैं तो कुछ पत्रों के द्वारा मुख्यालय या बड़े अधिकारी अपने अधीनस्थ कार्यालयों/कर्मचारियों को आदेश भेजते हैं। कुछ पत्र अखबारों को विभागीय गतिविधियों की जानकारी देने के लिए भेजे जाते हैं। हर श्रेणी के पत्र का विशिष्ट स्वरूप होता है।

सरकारी पत्र

सरकारी पत्र-लेखन संबंधी ध्यातव्य बिंदु-

  1. सरकारी पत्र औपचारिक पत्र की श्रेणी में आते हैं।
  2. ये पत्र एक कार्यालय, विभाग या मंत्रालय से दूसरे कार्यालय, विभाग या मंत्रालय को लिखे जाते हैं।
  3. पत्र के शीर्ष पर कार्यालय, विभाग या मंत्रालय का नाम व पता लिखा जाता है।
  4. उसके नीचे पत्र के बायीं तरफ फ़ाईल संख्या लिखी जाती है।  इससे पत्र का विषय, विभाग का नाम तथा समय का पता चलता है ।
  5. प्रेषिती का नाम, पता आदि बायीं ओर लिखा जाता है।
  6. ‘सेवा में’ का प्रयोग समाप्ति की ओर है।
  7. ‘विषय’ शीर्षक के अंतर्गत संक्षेप में पत्र का प्रयोजन या संदर्भ लिखा जाता है।
  8. विषय के बाद बायीं तरफ ‘महोदय’ संबोधन लिखते हैं।
  9. पत्र की भाषा सहज व सरल होनी चाहिए। सटीक अर्थ के लिए प्रशासनिक शब्दावली का प्रयोग करना चाहिए।
  10. पत्र के बायीं ओर प्रेषक का पता व तारीख दी जाती है।
  11. 11. पत्र के अंत में ‘भवदीय’ शब्द का प्रयोग किया जाता है।
  12. भवदीय के नीचे प्रेषक के हस्ताक्षर होते हैं। हस्ताक्षर के नीचे कोष्ठक में पत्र लेखक का नाम तथा पदनाम लिखा जाता है।

उदाहरण

1. भारत सरकार के गृह मंत्रालय की तरफ से पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को नक्सलवादी घटनाओं के संबंध में चिंता व्यक्त करते हुए पत्र।

भारत सरकार
गृह मंत्रालय
नई दिल्ली। फा० संख्या 45 (गृ० प०बं०)/09/545
दिनांक : 20 अक्तूबर, 20XX
प्रति
मुख्य सचिव
पश्चिम बंगाल सरकार
कोलकाता।
विषय- राज्य म’ नक्सलवादी घटनाअों के संदर्भ में।
महोदय
मुझे यह सूचना देने का निर्देश दिया गया है कि-(1) पश्चिम बंगाल राज्य में नक्सलवादियों की गतिविधियाँ बढ़ती जा रही हैं। इन गतिविधियों के बढ़ने से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ रही है। केंद्र सरकार इस समस्या से चिंतित है तथा कड़े कदम उठाने का निश्चय किया गया है। नक्सलवादियों के विरुद्ध राज्य सरकार को भी कठोर कार्यवाही करनी चाहिए।
(2) हाल ही में आदिवासियों द्वारा अपहृत राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन के घटनाक्रम की तमाम जानकारी शीघ्र भेजी जाए।
भवदीय
ह° ····················
(क०ख०ग० कुमार)
सचिव, गृह मंत्रालय, भारत सरकार
नई दिल्ली।

2. भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के सचिव की ओर से ओडिशा सरकार के मुख्य सचिव को सूखा-पीड़ितों के लिए सहायता/अनुदान देने के लिए पत्र।

भारत सरकार
वित्त मंत्रालय
नई दिल्ली।
पत्र क्रमांक-फा० 35/सू०रा०/गृ०/20″-10/301 दिनांक-15 अक्तूबर, 20XX
प्रति
मुख्य सचिव
ओडिशा सरकार
भुवनेश्वर।
विषय- सूखा पीड़ितों को सहायता के संदर्भ में।
महोदय
आपके पत्र क्रमांक फा०30/20………../सू० रा०/150/ दिनांक : 20-07-20…………… के संदर्भ में मुझे यह सूचना देने का | निर्देश हुआ है कि केंद्र सरकार ओडिशा राज्य में सूखे की भयंकर स्थिति को देखते हुए जनता को राहत देने के लिए दो सौ करोड़ रुपये की अनुदान राशि राज्य को भेज रही लोगों में किया जाए तथा अनुदान संबंधी संपूर्ण विवरण इस कार्यालय को भी भेजा जाए।
भवदीय
ह° ····················
(क०ख०ग० कुमार)
सचिव, वित्ति मंत्रालय
नई दिल्ली।
संलग्नक- दो सौ करोड़ रुपये का ड्राफ्ट ड्राफ़

अद्र्ध-सरकारी पत्र

अद्र्ध-सरकारी पत्र में अनौपचारिकता का भी समावेश होता है। इसमें मैत्रीभाव होता है। ये पत्र तब लिखे जाते हैं जब लिखने वाले अधिकारी के संबंधित अधिकारी से व्यक्तिगत संबंध हों।
यह पत्र उस समय लिखा जाता है जब किसी खास मसले पर संबंधित अधिकारी का ध्यान व्यक्तिगत रूप से आकर्षित कराया जाता है या उसका व्यक्तिगत परामर्श लिया जाए।

ध्यातव्य बिंदु-
1. अद्र्ध-सरकारी पत्र में सामान्यत: कार्यालय के ‘लेटर हेड’ का प्रयोग होता है।
2. इस श्रेणी के पत्र में बायीं ओर शीर्ष पर प्रेषक का नाम होता है तथा इसके नीचे उसका पदनाम होता है।
3. पत्र के प्रारंभ में आमतौर पर ‘ प्रिय श्री ……………… ‘ या  ‘ प्रियवर श्री …………………… ‘ का संबोधन किया जाता है।
4. पत्र के अंत में अधोलेख के रूप में दायीं ओर ‘ भवदीय’ के स्थान पर ‘आपका’ का प्रयोग हो सकता है।
5. पत्र के अंत में संबंधित अधिकारी का नाम, पदनाम और पूर्ण पता दिया जाता है।

उदाहरण

1. सचिव, मानव संसाधन मंत्रालय, नई दिल्ली की तरफ से रेल मंत्रालय के सचिव को कर्मचारियों को हिंदी सिखाने के संदर्भ में एक अदर्ध-सरकारी पत्र।

भारत सरकार
मानव संसाधन मंत्रालय, नई दिल्ली।
पत्र संख्या : 4/3/20××/(अ०स०)
दिनांक : 14 सितंबर, 20xx
डाँ० अ०व०स०
सचिव
प्रिय श्री क०खoग०,
आपके पत्र सं० 275 दिनांक 10 मार्च, 20×× के संदर्भ में मैं आपको कुछ सुझाव देना चाहता हूँ-
(1) हिंदी सीखने वाले गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों के कर्मचारियों के वर्तमान पाठ्यक्रम में नए परिवेश के अनुसार संशोधन करना चाहिए।
(2) अच्छे अंक प्राप्त करने वाले कर्मचारियों को पदोन्नति, वेतन- वृद्धि तथा पुरस्कार आदि के ज़रिए प्रोत्साहित  किया जा सकता हैं।
इस विषय पर विचार करने के लिए मेरे कार्यालय में कुछ विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है। आप भी इसमें भाग लेने का कष्ट करें तथा अपने उपयोगी सुझावों से हमें लाभान्वित करें।

आपका
हo
(डॉ० अ०ब०स०)

प्रति
श्री क०ख०गo
सचिव
रेल मंत्रालय
नई दिल्ली।

2. मुख्य अभियंता, सार्वजानिक निर्माण विभाग, रोहतक की ओर से कार्यकारी अभियंता, दूरसंचार विभाग को एक अदर्थ-सरकारी पत्र, जिसमें उनसे भूमिगत केबल को बिछाने के लिए सड़कों के किनारे खोदी गई खाइयों को बंद करने का अनुरोध किया गया है।

हरियाणा सरकार
सार्वजनिक निर्माण विभाग
रोहतक (हरियाणा) पत्रः क्रमक-15/04/2013/अ० स०
दिनांक : 15 जून, 20xx
अ०ब०स० चौधरी
मुख्य अभियंता
प्रिय श्री  क०ख०गo
आपके विभाग ने लगभग तीन माह पहले विभिन्न काँलोनियों में भूमिगत केबल बिछाने के लिय सड़कों के किनारों पर दो से तीन फुट गहरी खाईयाँ खुदवाई थीं। यह कार्य लगभग एक माह पहले समाप्त हो चूका है, पंरतु अभी तक इन खाईयों को बंद नहीं किया गया है। जैसे कि वर्षा ऋतु नज़दीक है, पानी भरने से मच्छर पनपेंगे, साथ ही दुर्घटनाएँ  भी हो सकती हैं।  कृपया इन्हें शीघ्र बंद कराने का आदेश जारी करें।

आपका
हo
(डॉ० अ०ब०स०)

प्रति
श्री क०ख०गo
कार्यकारी अभियंता
दूरसंचार विभाग
रोहतक (हरियाणा)।

परिपत्र

यह पत्र तभी जारी होता है जब किसी बैठक में कोई महत्वपूर्ण निर्णय लिया जाता है। यह पत्र एक साथ अनेक व्यक्तियों अथवा विभागों को बिना किसी संबोधन के भेजा जाता है। इसकी भाषा औपचारिक तथा आडंबररहित होती है।

उदाहरण

1. हरियाणा शिक्षा विभाग की ओर से हड़ताली प्राध्यापकों की हड़ताल को गैर-कानूनी करार देने के संबंध में परिपत्र।

हरियाणा सरकार
शिक्षा विभाग
पंचकूला।
पत्रक- 15/13/शि० वि०/20× ×
दिनांक : 20 सितंबर, 20xx ।
विषय- गैर-कानूनी हड़ताल के संदर्भ में ।
हरियाणा शिक्षा विभाग के प्राध्यापक पिछले दस दिन से हड़ताल पर हैं। उन्हें सूचित किया जाता है कि उनकी यह हड़ताल गैर-कानूनी घोषित कर दी गई है। उन प्राध्यापकों को राय दी जाती है कि वे दिनांक 30 सितंबर, 20×× ककों में अपना कर्यगुरुक, लि तििथ के बाद माध्यापकों एअनुवासनापाककर्थवाह कीज सकती है।
ह° ····················
(क०ख०ग० प्रेम)
सचिव, शिक्षा विभाग
प्रति-
1. समस्त कार्यालयों को 2. समस्त प्राध्यापक यूनियन कार्यालयों को 3. प्रमुख समाचार-पत्रों को

2. विदेश व्यापार विभाग दवारा फोन पर होने वाले व्यय के लिए सीमा निर्धारित करने के संदर्भ में परिपत्र।

विदेश व्यापार विभाग
नई दिल्ली।
पत्रक : 15/16/20×x
दिनांक : 17 मई, 20××
विषय- फोन पर होने वाले व्यय के लिए सीमा-निधारण के संदर्भ में ।
विदेश व्यापार विभाग ने कार्यालयों में फोन पर होने वाले व्यय पर विचार किया तथा निर्णय लिया कि फोन पर व्यय की सीमा तीन हजार रुपये प्रतिमाह होगी। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि महानगरों में फोन-व्यय की सीमा छह हजार रुपये प्रतिमाह होगी।
यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
ह° ····················
(क०ख०ग० कुमार)

अनुस्मारक

जब किसी पत्र, ज्ञापन इत्यादि का उत्तर समय पर प्राप्त नहीं होता तो याद दिलाने के लिए जो पत्र लिखे जाते हैं, उन्हें अनुस्मारक कहते हैं। इन्हें ‘स्मरण-पत्र’ भी कहते हैं।
ध्यातव्य बिंदु-

  1. इनका प्रारूप सरकारी पत्र की तरह होता है, परंतु इनका आकार छोटा होता है।
  2. अनुस्मारक के शुरू में पूर्व पत्र का हवाला दिया जाता है।
  3. एक से अधिक अनुस्मारक भेजने पर उन्हें क्रमांक दिया जाता है; जैसे-अनुस्मारक-1, अनुस्मारक-2 आदि।

उदाहरण

1. दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली के कुलसचिव की तरफ से विश्वविदयालय अनुदान आयोग को छठे वेतन मान के संदर्भ में अनुस्मारक।

दिल्ली विश्वविद्यालय
नई दिल्ली।
पत्र क्रमांक : यू०जी०सी०/5/20××/570
दिनांक : 15/10/20×x
प्रति
सचिव
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग
नई दिल्ली।
विषय- छठे वेतनमान के संदर्भ में ।
महोदय
उपर्युक्त विषय पर हम आपका ध्यान अपने पत्र क्रमांक यू०जी०सी०/3/20××/260 दिनांक 5/6/20×× के संदर्भ में आकर्षित करना चाहते हैं। कृपया इस संदर्भ में दिशा-निर्देश शीघ्र भिजवाने का कष्ट करें ताकि नए वेतनमान सही तरीके से लागू किए जा सकें।
भवदीय

ह० (क०ख०ग० कुमार)
कुल सचिव

2. गृह मंत्रालय, पंजाब की ओर से उपायुक्त, को एक अनुस्मारक लिखिए जिसमें वहाँ बाहरी व्यक्तियों के बारे में वांछित सूचना शीघ्र भेजने का वर्णन हो ।

पंजाब सरकार
गृह मंत्रालय
पत्र क्रमांक : गृ० म०/5/20xx/5407
दिनांक : i6 अगस्त, 20xx
प्रति
उपायुक्त
गुरदासपुर।
विषय- बाहरी व्यक्तियों की जानकारी के संदर्भ में।
महोदय
आपका ध्यान उपर्युक्त विषय पर मंत्रालय के पत्र क्रमांक गृ० मं०/4/20xx/3025 दिनांक 15 अप्रैल, 20×× की ओर दिलाया जाता है। आपने अभी तक वांछित सूचना नहीं भेजी है। कृपया शीघ्र जानकारी भेजने का कष्ट करें।
भवदीय
ह०
(क०ख०ग० सिंह)
सचिव

कार्यालय आदेश

कार्यालय आदेश का प्रयोग आंतरिक प्रशासन के संदर्भ में होता है। इसमें कर्मचारियों का स्थानांतरण, अनुशासनात्मक कार्यवाही, काम के वितरण आदि की सूचना होती है।

ध्यातव्य बिंदु-
1. कार्यालय आदेश में संबोधन या आभार नहीं होता।
2. इसकी भाषा सहज, सरल व औपचारिक होती है।
3. इसके प्रारंभ में पत्र संख्या, कार्यालय का नाम, पता, तिथि आदि का वर्णन होता है।
4. पत्र के अंत में प्रेषक अधिकारी के हस्ताक्षर तथा पद का नाम लिखा जाता है।
5. आदेश की प्रतिलिपि संबंधित व्यक्तियों तथा अनुभागों को भेजी जाती है।

उदाहरण

1. श्रीमती रजनी को राजकीय उच्च विदयालय, नांगलोई से राजकीय उच्च विद्यालय, यमुना विहार के हिंदी विभाग में अध्यापिका के रूप में स्थानांतरण संबंधी कार्यालय दवारा जारी आदेश।

शिक्षा विभाग
नई दिल्ली।
पत्र क्रमांक : (स्था०) 8-9/2075
दिनांक : 2 जुलाई, 20xx

कार्यालय आदेश

विषय- श्रीमती रजनी का स्थानांतरण।
श्रीमती रजनी का स्थानांतरण राजकीय उच्च विद्यालय, नांगलोई से राजकीय उच्च विद्यालय, यमुना विहार के हिंदी विभाग में अध्यापिका के पद पर दिनांक 20 जुलाई, 20×× से कर दिया गया है। श्रीमती रजनी को 20 जुलाई, 20×× को नए स्थान पर कार्यभार ग्रहण की रिपोर्ट कार्यालय भेजनी होगी।
(हo)
अधीक्षक
शिक्षा विभाग।
प्रतिलिपि-

1. प्राचार्य, राजकीय उच्च विद्यालय, नांगलोई।
2. प्राचार्य, राजकीय उच्च विद्यालय, यमुना विहार।
3. श्रीमती रजनी, हिंदी अध्यापिका, राजकीय उच्च विद्यालय, नांगलोई।

(ह०)
अधीक्षक

2. महर्षि दयानंद विश्वविदयालय, रोहतक की ओर से दो व्यक्तियों को क्लर्क के पद पर नियुक्ति के संबंध में कार्यालय दवारा जारी आदेश।

महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय
रोहतक।
पत्र क्रमांक : (नि०): 8/9/2635
दिनांक : 17/08/20xx

कार्यालय आदेश

विषय- क्लर्क पद पर नियुक्ति के संदर्भ में।
निम्नलिखित व्यक्तियों को परीक्षा अनुभाग में क्लर्क के पद पर निर्धारित वेतनमान रुपये 7,000 तथा स्वीकृत भत्तों पर अस्थायी रूप से नियुक्त किया जाता है। संबंधित व्यक्ति दिनांक 26/09/20×× तक अपना कार्यभार सँभाल लें, अन्यथा उनकी नियुक्ति रद्द समझी जाएगी।

1. मनोज कुमार सुपुत्र श्री तारा सिंह
2. अञ्जय शर्मा सुपुत्र श्री दीनानाथ शर्मा

(हo)
कुलसचिव
म०द०वि०, रोहतक।

प्रतिलिपि- 1. मनोज कुमार 2. अजय शर्मा 3. स्थापना शाखा 4. लेखा विभाग 5. परीक्षा अनुभाग

(हo)
कुलसचिव

कार्यालय ज्ञापन

एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के बीच जिन पत्रों का आदान-प्रदान किया जाता है, उन्हें ‘कार्यालय ज्ञापन’ कहते हैं।
ध्यातव्य बिंदु-

1. कार्यालय ज्ञापन सदैव अन्य पुरुष में ही लिखे जाते हैं।
2. इनमें किसी प्रकार का संबोधन नहीं होता।
3. पत्र के अंत में प्रेषक के हस्ताक्षर व उसका नाम लिखा जाता है।
4. प्रेषिती का नाम स्वनिर्देश की बायीं ओर लिखा जाता है।

उदाहरण

1. भारत सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से सभी कर्मचारियों को हिंदी शिक्षण योजना में शामिल होने के लिए ज्ञापन।

मानव ससाधन मंत्रालय
नई दिल्ली। पत्र क्रमांक : (हि० शि०)/5/3015
दिनांक : 10 फरवरी, 20xx

कार्यालय ज्ञापन

विषय- हिदी शिक्षण योजना के संदर्भ में।
अधोहस्ताक्षरी को यह सूचित करने का निर्देश प्राप्त हुआ है कि हिंदी प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण कार्यक्रम इस मंत्रालय द्वारा मार्च, 20×× में आयोजित किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण एक सप्ताह तक चलेगा। जो कर्मचारी इस प्रशिक्षण में भाग लेना चाहते हैं, वे अपना नाम अपने अनुभाग अधिकारी द्वारा अनुशासित कराकर इस मंत्रालय के प्रशिक्षण अनुभाग को 28 फरवरी, 20×× तक भेज दें। हo (अभिनव सिंह) अवर सचिव,

स्वयं करें

  1. थानाध्यक्ष को पत्र लिखिए, जिसमें रात को गश्त बढ़ाने का अनुरोध किया गया हो।
  2. खाद्य पदार्थों में बढ़ती मिलावट को रोकने के लिए अपने क्षेत्र के खाद्य निरीक्षक को संचित/शर्मीला की ओर से पत्र लिखिए।
  3. कुछ असामाजिक तत्व आपके मोहल्ले में रात-भर जुआ खेलते हैं और शराब पीते हैं। पत्र द्वारा इसकी शिकायत थानाध्यक्ष को कीजिए।
  4. प्रधानाचार्य को पत्र लिखिए, जिसमें विद्यालय और कक्षाओं में सफ़ाई व्यवस्था सुधारने की प्रार्थना हो।
  5. किसी समाचार-पत्र के संपादक को लिखकर बताइए कि आपके शहर में गुंडागर्दी कितनी बढ़ गई है।
  6. नवभारत टाइम्स के संपादक को पत्र लिखकर बताइए कि लोग अपने वातावरण को स्वच्छ रखने की तरफ बिल्कुल ध्यान नहीं देते।
  7. अनियमित डाक-वितरण के संबंध में पोस्ट-मास्टर को पत्र लिखिए।
  8. अपने गाँव के विद्यालय की स्थिति से अवगत कराते हुए किसी प्रसिद्ध दैनिक समाचार-पत्र के संपादक को पत्र लिखिए।
  9. ओडिशा के ‘नंदन कानन’ में बाघों की मृत्यु पर अपने विचार पल्लवी वर्मा की ओर से ‘नई दुनिया’ दैनिक समाचार-पत्र के संपादक के नाम पत्र में लिखिए।
  10. अपने परीक्षा केंद्र पर नकल रोकने के उपाय सुझाते हुए सी०बी०एस०ई० बोर्ड के परीक्षा निदेशक को पत्र लिखिए।
  11. क्लर्क पद के रिक्त स्थानों की पूर्ति के लिए किसी कंपनी के मैनेजर को एक आवेदन-पत्र लिखिए।
  12. निदेशक, सैन्य निदेशालय, नई दिल्ली ने आपको किसी पद के साक्षात्कार के लिए बुलाया है। भयंकर बाढ़ के कारण आप निर्धारित तिथि पर पहुँचने में असमर्थ हैं। निदेशक को पत्र लिखकर किसी अन्य तिथि के निर्धारण के लिए अनुरोध कीजिए।
  13. अस्पताल के प्रबंध पर संतोष व्यक्त करते हुए चिकित्सा अधीक्षक को पत्र लिखिए।
  14. आपके पड़ोस में एक संदिग्ध आतंकवादी रह रहा है। आपने उस मकान में कुछ आतंकवादी गतिविधियाँ देखी हैं। आप अपने नगर के उच्च पुलिस अधिकारी को पत्र लिखकर इसकी पूर्ण जानकारी दीजिए ताकि किसी दुर्घटना से पूर्व ही उचित कार्यवाही हो सके।
  15. अपने क्षेत्र में भीषण बाढ़ के कारण मची तबाही और राहत-कार्यों की अपर्याप्तता की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर तुरंत कदम उठाने का अनुरोध कीजिए।
  16. यात्रा में रेल कर्मचारी के अभद्र व्यवहार की शिकायत करते हुए रेल अधिकारी को पत्र लिखिए।
  17. किसी दैनिक समाचार-पत्र के संपादक को नितिन/नलिनी की ओर से एक पत्र लिखिए, जिसमें कार्यालयों में बढ़ते भ्रष्टाचार की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित कराया गया हो।
  18. आपके शहर में परिवहन व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इस समस्या की ओर संबद्ध अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने के लिए अपने स्थानीय समाचार-पत्र के संपादक के नाम पत्र लिखिए।
  19. हरियाणा ट्रेडर्स, चंडीगढ़ के मुख्य कार्यालय में एक टेलीफोन ऑपरेटर की आवश्यकता है। उम्मीदवार ने विज्ञान विषय के साथ-साथ सीनियर सेकेंडरी या समकक्ष परीक्षा अच्छे अंकों में उत्तीर्ण की हो तथा टेलीफोन ऑपरेटर का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया हो। इस विज्ञापन के संदर्भ में नियुक्ति हेतु आवेदन-पत्र प्रस्तुत कीजिए।
  20. आंध्र बैंक, हैदराबाद, कार्यालय सहायक के पद हेतु आवेदन-पत्र आमंत्रित करता है। उम्मीदवार ने किसी मान्यता-प्राप्त विश्वविद्यालय की बी०कॉम० या उसके समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण की हो। अनुभवी उम्मीदवार को प्राथमिकता दी जाएगी। इस विज्ञापन के संदर्भ में आवेदन-पत्र प्रस्तुत कीजिए।
  21. स्थानीय रेलवे अधिकारियों को इस आशय का शिकायती पत्र लिखिए कि दिल्ली से भेजा गया पार्सल लंबी अवधि के बाद भी आपको प्राप्त नहीं हुआ।
  22. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक की ओर से 12वीं कक्षा के परीक्षार्थी के लिए पत्र लिखिए कि उसने अपनी जन्मतिथि का प्रमाण-पत्र नहीं भेजा है।
  23. आपके मोहल्ले में काफी गंदगी इधर-उधर पड़ी रहती है, मच्छरों का प्रकोप है, जानवर इधर-उधर घूमते रहते हैं और गंदगी फैलाते हैं। सफ़ाई की कोई व्यवस्था नहीं है। कई-कई दिन सफ़ाई कर्मचारी नहीं आते। बीमारी के फैलने की संभावना है। इस संदर्भ में नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र लिखिए।
  24. किसी दैनिक समाचार-पत्र के संपादक को कौटिल्य की ओर से पत्र लिखिए जिसमें एन०सी०ई०आर०टी० की पुस्तकों की कमी की ओर ध्यान आकृष्ट किया गया हो।
  25. दिल्ली के उपभोक्ता मंत्रालय के निदेशक को पत्र लिखिए जिसमें खाद्य वस्तुओं के संबंध में भ्रामक और मिथ्यापूर्ण विज्ञापन पर चिंता प्रकट की गई हो।
  26. किसी स्थानीय समाचार-पत्र के संपादक को पत्र लिखकर ध्यान आकृष्ट कीजिए कि फलों को अप्राकृतिक ढंग से पकाना तथा उनपर रंग करना स्वास्थ्य के लिए घातक है।
  27. दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों की गिरती गुणवत्ता पर चिंता प्रकट करते हुए राज्य के सूचना प्रसारण मंत्रालय के निदेशक को पत्र लिखिए।
  28. अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भारत के खराब प्रदर्शन पर चिंता व्यक्त करते हुए देश के खेल मंत्री को पत्र लिखिए तथा इस दिशा में सार्थक कदम उठाने का अनुरोध कीजिए।
  29. दूरदर्शन पर शैक्षिक कार्यक्रमों के प्रसारण का अनुरोध करते हुए सूचना प्रसारण मंत्रालय के निदेशक को पत्र लिखिए।
  30. ‘दैनिक जागरण’ समाचार-पत्र के कार्यालय में कंप्यूटर टाइपिस्ट के कुछ पद रिक्त हैं। अपनी उम्मीदवारी प्रस्तुत करने के लिए कार्यालय प्रमुख को पत्र लिखिए।
  31. भ्रष्टाचार और उसके दुष्प्रभावों का उल्लेख करते हुए छोटे भाई को पत्र लिखिए।
  32. दिल्ली विश्वविद्यालय के बी०ए० पाठ्यक्रम में प्रवेश न मिल पाने के कारण आप पुस्तक प्रकाशन में डिप्लोमा करना चाहते हैं। अपनी इस इच्छा की अभिव्यक्ति करते हुए अपने बड़े भाई को पत्र लिखिए।
  33. कन्या भ्रूण-हत्या को बढ़ावा देने के लिए लिंग-परीक्षण करने वाले केंद्रों पर तुरंत रोक लगाने के लिए स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखिए।
  34. आजकल चौराहों पर भीख माँगने वाले बच्चों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। भीख माँगने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने हेतु बाल विकास मंत्रालय के निदेशक को पत्र लिखिए।
  35. प्रत्येक जनगणना के बाद पता चलता है कि महिलाओं की संख्या में निरंतर गिरावट आती जा रही है। इसके कारणों का उल्लेख करते हुए तथा इसके दुष्परिणामों की ओर ध्यान आकृष्ट कराते हुए किसी समाचार-पत्र के संपादक को पत्र लिखिए।
  36. ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ लागू होने के बाद उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों की संख्या में वृद्ध हुई है, पर शिक्षा के स्तर में गिरावट आई है। इससे IX में फेल होने वालों की संख्या में अचानक वृद्ध हो गई है। इस ओर ध्यान आकर्षित करते हुए राज्य शिक्षा निदेशक को पत्र लिखिए।
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