प्रश्न-अभ्यास

छाया मत छूना
  1. कवि ने कठिन यथार्थ के पूजन की बात क्यों कही है?

उत्तर कवि ने कठिन यथार्थ के पूजन की बात इसलिए कही है, क्योंकि इसी से हमारा जीवन गतिशील होगा। विगत जीवन से चिपके रहना और वर्तमान से पलायन करना व्यर्थ है। हमें जीवन के कठोर यथार्थ का सामना करना चाहिए। इसीलिए कठिन यथार्थ के पूजन की बात कही गई है। इसे स्वीकार करने में ही व्यक्ति का कल्याण है।

2. भाव स्पष्ट कीजिए

प्रभुता का शरण-बिंब केवल मृगतृष्णा है,

हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है।

उत्तर इन काव्य पंक्तियों का भाव यह है कि मनुष्य प्रभुता यानि वैभव, सत्ता आदि प्राप्त करने के लिए जीवन भर दौड़ता है, परंतु उसकी दौड़ निरर्थक सिद्ध होती है। प्रभुता एक लालसा है, एक भ्रम है। जीवन में सुख-दुख के दो पहलू हैं। यही यथार्थ है। इसी से जीवन की गति प्रवाहित है। सुख के बाद दुख आता है।

  1. 'छाया' शब्द यहाँ किस संदर्भ में प्रयुक्त हुआ है? कवि ने उसे छूने के लिए मना क्यों किया है?

उत्तर इस कविता में 'छाया' शब्द भ्रम या दुविधा की स्थिति के लिए प्रयुक्त हुआ है। यहाँ 'छाया' शब्द अतीत की स्मृतियों के लिए भी है। कवि छाया को छूने से इसलिए मना करता है क्योंकि यह यथार्थ से दूर होती है। यह सच्चाई से परे की स्थिति है। अतीत की स्मृतियों के सहारे जीवन नहीं जिया जा सकता। इसीलिए वर्तमान में जीना सबसे अधिक आवश्यक एवं महत्वपूर्ण है।

  1. कविता में विशेषण के प्रयोग से शब्दों के अर्थ में विशेष प्रभाव पड़ता है, जैसे कठिन यथार्थ।

कविता में आए ऐसे अन्य उदाहरण छाँटकर लिखिए और यह भी लिखिए कि इससे शब्दों के अर्थ में क्या विशिष्टता पैदा हुई?

उत्तर विशेषण-विशेष्य के उदाहरण इस प्रकार हैं-दुख दूना, सुरंग सुधियाँ सुहावनी, मन भावनी चित्र गंध, कृष्णा रात, दुविधा-हत-साहस, सुखी देह, शरद-रात।

यहाँ दूना शब्द दुख की विशेषता बताता है। यहाँ सुरंग एवं सुहावनी विशेषणों का प्रयोग जीवन की सुखद स्मृतियों की ओर संकेत करता है। मन भावनी चित्र गंध के विशेषण के रूप में प्रयुक्त होकर पुरानी यादों को और गहरा कर देता है। 'कृष्णा' विशेषण अमावस्या की काली रात की विशेषता बताता है। दुविधा-हत-साहस यहाँ दुखों की विशेषता बताता है कि दुविधा में साहस क्षीण पड़ जाता है।

'सुखी' शब्द देह का विशेषण है। शरद यहाँ रात का विशेषण है, जो अच्छे समय की ओर संकेत करता है।

5. 'मृगतृष्णा' किसे कहते हैं, कविता में इसका प्रयोग किस अर्थ में हुआ है?

उत्तर मृग को मरुभूमि में दूर चमकती रेत पर जल का आभास होता है। प्यासा मृग जब वहाँ पहुँचता है, तो उसे जल नहीं मिलता और इसी तरह जल की खोज में भटकते-भटकते वह अपने प्राण दे देता है।

मनुष्य भी सुख, संपत्ति, प्रभुता, वैभव आदि की चाह में मृग की भाँति भटकता है। अंततः उसे निराशा ही हाथ लगती है।

कविता में कवि ने इसका प्रयोग बड़प्पन, सम्मान, प्रतिष्ठा के लिए किया है, जिसे पाने के लिए मनुष्य का प्यासा मन आजीवन भटकता रहता है किंतु जब वह उसके निकट पहुँचता है, तो वास्तविकता कुछ और ही होती है।

  1. 'बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि ले' यह भाव कविता की किस पंक्ति में झलकता है?

उत्तर 'बीती ताहि …‥ 'यह भाव कविता की इन पंक्तियों में व्यक्त होता है-'जो न मिला भूल उसे कर तू भविष्य वरण।'

  1. कविता में व्यक्त दुखों के कारणों को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर कविता में व्यक्त दुखों के कारण ये हैं कि हम वर्तमान अर्थात् यथार्थ को भूल अतीत की सुखद छाया में खोए रहते हैं। सामाजिक मान-प्रतिष्ठा, पूँजी, यश-वैभव आदि की मृगतृष्णा में भटकते रहते हैं और जो जीवन में नहीं मिला उसी के दुख में डूबे रहते हैं।

रचना और अभिव्यक्ति

  1. 'जीवन में हैं सुरंग सुधियाँ सुहावनी' से कवि का अभिप्राय जीवन की मधुर स्मृतियों से है। आपने अपने जीवन की कौन-कौन-सी स्मृतियाँ संजो रखी हैं?

उत्तर हमने भी अपने जीवन में अनेक मधुर स्मृतियों को संजो कर रखा हुआ है

पहली मधुर स्मृति वह है जब पहली बार स्कूल गया था। तब घर भर में बड़ा उत्साह था। मुझे नए वस्त्र पहनाए गए थे और सभी को मिठाई खिलाई गई थी। सभी का ध्यान मेरी ओर था।

दूसरी मधुर र्मृति तब की है, जब मैं कक्षा में प्रथम आया था। इस उपलक्ष्य में एक शानदार पार्टी दी गई। सभी मुझे बधाई दे रहे थे। उस दिन मेरा मन सातवें आसमान पर था।

तीसरी मधुर स्मृति वह है जब मैं हैड ब्वाय चुना गया था। करतल ध्वनि से हाल गूँज रहा था, तब मैं अत्यधिक रोमांचित था।

  1. 'क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर?' कवि का मानना है कि समय बीत जाने पर भी उपलब्धि मनुष्य को आनंद देती है। क्या आप ऐसा मानते हैं? तर्क सहित लिखिए।

उत्तर दोनों ही बातें अपने-अपने स्थान पर ठीक हैं। किसी के घर में जीवन के ढलान पर संतान सुख की प्राप्ति होती है तो उनका नीरस जीवन आनन्द से भर जाता है। परंतु कभी-कभी जीवन में तब सुख मिलता है जब वह उस उपभोग के लायक ही नहीं रहता। आँखों की रोशनी चले जाने पर कोई बसंत का आनंद कैसे ले सकता है। दाँत चले जाने पर भोजन करना भी कठिन हो जाता है। समय का चक्र चलता ही रहता है। असमय की खुशी दुख का कारण बन सकती है।

पाठेतर सक्रियता

  1. आप गर्मी की चिलचिलाती धूप में कभी सफर करें तो दूर सड़क पर आपको पानी जैसा दिखाई देगा पर पास पहुँचने पर वहाँ कुछ नहीं होता। अपने जीवन में भी कभी-कभी हम सोचते कुछ हैं, दिखता कुछ है लेकिन वास्तविकता कुछ और होती है। आपके जीवन में घटे ऐसे किसी अनुभव को अपने प्रिय मित्र को पत्र लिखकर अभिव्यक्त कीजिए।

उत्तर छात्र स्वंय अपना अनुभव लिखें।

  1. कवि गिरिजाकुमार माथुर की 'पंद्रह अगस्त' कविता खोजकर पढ़िए और उस पर चर्चा कीजिए।

उत्तर छात्र स्वयं करें।

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