4 Childhood [बचपन]

-Markus Natten

कठिन शब्दार्थ, हिन्दी अनुवाद एवं व्याख्या

When did my childhood go ?

Was it the day I ceased to be eleven,

Was it the time I realised that Hell and Heaven,

Could not be found in Geography,

And therefore could not be,

Was that the day ! (Page 58)

कठिन शब्दार्थ : ceased (सीस्ड) = समाप्त होना, अन्त होना, realised (रीअलाइज्ड) = समझने लगा,

Geography (जिऑग्रफि) = भूगोल।

हिन्दी अनुवाद : मेरा बचपन कब चला गया? क्या उस दिन चला गया जब मैं ग्यारह वर्ष की उम्र परी कर चुका और मैंने 12वें वर्ष में प्रवेश किया, क्या तब चला गया जब मैंने समझा कि नर्क एवं स्वर्ग भूगोल की पुस्तकों में नहीं ढूंढ़े जा सकते और इसलिए वे हो ही नहीं सकते थे। क्या उसी दिन मेरा बचपन चला गया!

Explanation : The poet suddenly realises that his childhood has come to an end. This realization leaves him guessing about the exact point of time when he lost his childhood. He asks himself if it was the day he completed his eleventh year of life and entered the twelfth. Or, if he lost it when he came to understand that Hell and Heaven were not real places. And that they were a thing of man’s imagination. This is why, he reasoned they were not found in the books of Geography. The poet feels that childhood comes to an end as soon as innocence is replaced by rationalism. A child has firm faith in God and so many other things, but when he starts thinking rationally, he stops believing in them. The poet wonders what day it could be when he lost his childhood.

व्याख्या कवि अचानक महसूस करता है कि उसका बचपन समाप्त हो गया है। यह अनुभूति उसे इस बात का अनुमान लगाने को बाध्य कर देती है कि वह कौनसा सही समय था जब उसने बचपन को खो दिया था। वह स्वयं से प्रश्न करता है कि क्या यह वो दिन था जब उसने अपने जीवन का ग्यारहवाँ वर्ष पूरा किया था और बारहवें वर्ष में प्रवेश किया था। अथवा, क्या उसने इसे तब खो दिया जब वह यह समझने लगा कि नर्क एवं स्वर्ग वास्तविक स्थान नहीं थे और कि वे मनुष्य की कल्पना की चीजें थीं। इसी कारण, उसने समझा, कि ये चीजें भूगोल की पुस्तकों में नहीं पायी जाती थीं। कवि महसूस करता है कि बचपन त्यों ही समाप्त हो जाता है ज्यों ही भोलेपन का स्थान तार्किकता ले लेती है। एक बच्चे की ईश्वर आदि में दृढ़ आस्था होती है लेकिन जब वह तार्किकता के साथ सोचने लगता है, तो वह उन चीजों में विश्वास करना बंद कर देता है। कवि को आश्चर्य है कि वह कौनसा दिन हो सकता था जब उसने अपना बचपन खोया।

When did my childhood go ?

Was it the time I realised that adults were not

all they seemed to be,

They talked of love and preached of love,

But did not act so lovingly,

Was that the day !

कठिन शब्दार्थ : Adults (अडल्ट्स) = वयस्क, बालिग, preached (प्रीच्ट) = उपदेश देते थे, प्रचार करते थे, lovingly (लविलि ) = स्नेहपूर्ण तरीके से।

हिन्दी अनुवाद : मेरा बचपन कब गया? क्या उस समय गया जब मैंने यह समझ लिया कि वयस्क लोग वैसे नहीं होते थे जैसे दिखाई देते थे। वे प्रेम की बातें करते थे तथा प्रेम का ही उपदेश देते थे लेकिन उनके कृत्य उतने प्रेम-भरे नहीं होते थे। क्या यह वह दिन था जिस दिन मैंने यह सब जाना!

Explanation : The poet has lost his childhood but he does not know when. Perhaps, he thinks, he lost it when he realized that adults were not as good as they appeared to be. Adults talked of love and preached of love, but they behaved in a way that was hardly full of love. They said one thing and did another. Their was a big gap in what they said and what they did. Preaching of love did not get translated into loving actions. The poet wonders whether it was not this very day when he came to know about the hypocrisy of adults, that he lost his childhood.

Note : The poet believes that childhood is another name for innocence. When innocence goes childhood too, goes. In his innocence of childhood, he believed that adults were true to their word. Later on, he realized that he was wrong. It was the hypocrisy of adults that made him grow out of childhood.

व्याख्या : कवि ने अपना बचपन खो दिया है लेकिन वह नहीं जानता है कि कब ऐसा हुआ। वह सोचता है कि शायद ऐसा तब हुआ जब उसे महसूस हुआ कि वयस्क लोग उतने अच्छे नहीं होते जितने अच्छे दिखाई देते हैं । वयस्क लोग प्रेम की बातें करते थे तथा प्रेम का ही उपदेश देते थे, किन्तु वे जिस तरह का व्यवहार करते थे वह प्रेमपूर्ण नहीं होता था। वे कहते कुछ थे और करते कुछ और थे। उनकी कथनी और करनी में बड़ा फासला था। प्रेम का उपदेश करना, प्रेम के कृत्यों में नहीं बदल पाता था। कवि को आश्चर्य होता है कि कहीं यही दिन तो नहीं था (जिस दिन उसने बचपन को खो दिया) जिस दिन उसने वयस्कों के पाखंड को जाना।

टिप्पणी : कवि का मानना है कि बचपन भोलेपन का ही दूसरा नाम है। जब भोलापन चला जाता है तो बचपन भी चला जाता है। अपने बचपन को भोलेपन की स्थिति में वह मानता था कि वयस्क लोग अपनी कथनी के प्रति सच्चे होते हैं। बाद में उसने जाना कि उसकी मान्यता गलत थी। बड़ों के पाखंड ने ही उसे बचपन से बाहर निकलने को बाध्य किया।

When did my childhood go?

Was it when I found my mind was really mine,

To use whichever way I choose,

Producing thoughts that were not those of other people

But my own, and mine alone

Was that the day !(Page 58)

कठिन शब्दार्थ : mind (माइन्ड्) = मन, choose (चूज़) = चाहना, चुनना, producing (पॅड्यूसिङ्) = पैदा करते हुए।

हिन्दी अनुवाद : मेरा बचपन कब चला गया? क्या उस समय जब मैंने पाया कि मेरा मन वास्तव में मेरा ही था जिसे मैं जिस तरह चाहता काम में ले सकता था और जो ऐसे विचारों को जन्म दे रहा था जो अन्य लोगों के विचार नहीं थे, बल्कि मेरे अपने ही थे। क्या यही वह दिन था जब मेरा बचपन गया।

Explanation : In the given lines, the poet asks with a sense of surprise whether he lost his childhood the day he found that he had his own independent mind and thoughts. As an innocent child, he thought what others thought, without using his own mind. In other words, he had no mind of his own. But, the moment he found that his mind was his alone and his thoughts were his own thoughts, he felt his childhood was lost. A sense of ego had developed in him. He no longer thought himself as one among others. He thought himself a unique person. The poet says that it was perhaps in this ego that he lost his childhood.

व्याख्या : प्रस्तुत पंक्तियों में कवि आश्चर्य के साथ प्रश्न करता है कि क्या उसका बचपन उसी दिन खो गया जिस दिन उसने पाया कि उसके अपने ही मन एवं विचार थे। एक अबोध बच्चे के रूप में, वह वही सोचता था जो अन्य सोचते थे, बिना अपना दिमाग काम में लिए। अन्य शब्दों में, उसका अपना कोई मन था ही नहीं। लेकिन ज्यों ही उसने पाया कि उसका मन उसी का था और उसके विचार उसके अपने विचार थे, त्यों ही उसे लगा उसका बचपन खो गया। उसमें एक अहंकार पैदा हो गया था। अब वह स्वयं को अन्य लोगों में से एक नहीं मानता था। वह स्वयं को एक अनूठा व्यक्ति मानने लगा था। कवि कहता है कि शायद इसी अहंकार में उसने अपना बचपन खो दिया।

Where did my childhood go ?

It went to some forgotten place,

That’s hidden in an infant’s face,

That’s all I know.(Page 58)

कठिन शब्दार्थ : forgotten place (फ(र)गोटन प्लेस्) = भुला चुके स्थान, hidden (हिड्न) = छिपा हुआ, infant’s face (इन्फन्ट्स फेस्) = शिशु का चेहरा ।

हिन्दी अनुवाद : मेरा बचपन कहाँ चला गया? यह किसी शिशु के चेहरे में छिपे किसी भूले-बिसरे स्थान पर चला गया, मैं केवल इतना ही जानता हूँ।

Explanation : The poet wants to know where his childhood has gone to. He says that he thinks it has gone to some place now lost to memory. That place is likely to be hidden in the innocent face of an infant. The poet wants to say that childhood lasts as long as the innocence of infancy does. As one grows in years, the innocence of infancy starts disappearing. With the disappearance of innocence, childhood too, ends.

व्याख्या : कवि यह जानने की कोशिश करता है कि उसका बचपन कहाँ चला गया है। वह कहता है कि उसके विचार से वह किसी ऐसे स्थान पर चला गया है जो स्मृति से लुप्त हो चुका है। वह स्थान संभवतया किसी शिशु के भोले चेहरे के भीतर छिपा है। कवि कहना चाहता है कि बचपन तभी तक रहता है जब तक

शैशव अवस्था का भोलापन रहता है। ज्यों-ज्यों व्यक्ति की उम्र बढ़ती है, त्यों-त्यों शैशवकाल का भोलापन भी गायब होने लगता है। भोलेपन के गायब होने के साथ ही, बचपन भी समाप्त हो जाता है।

TEXTBOOK QUESTIONS

Q. 1. Identify the stanza that talks of each of the following

(पद्यांश को पहचानिए जो निम्न की बात करते हैं-)

Individuality, Rationalism, Hypocrisy

Ans. Stanza-1 talks of rationalism.

Stanza-2 talks of hypocrisy..

Stanza-3 talks of individuality.

Q. 2. What according to the poem is involved in the process of growing up ?

कविता के अनुसार बड़ा होने की प्रक्रिया में क्या-क्या आ जाता है?

Ans. The process of growing up, first and foremost, involves a loss of innocence. The place of innocence is taken by rationalism, hypocrisy and individuality. As an innocent child, one believes in what others say. He believes in the existence of God, Heaven and Hell. As he grows up he loses faith in all these things. He starts thinkingly rationally and finds such things are a product of imagination.

As a grown-up person, he finds that there is a big gap between what people say and what they do. He realises that those who talk and preach of love, do not act so lovingly. Thus the realization of hypocrisy in people’s behaviour is also involved in the process of growing up.

The third thing that is involved in the process of growing up is egoism. A grown up person starts thinking in his own individual way. He has his own mind and his thoughts are his only. He no longer thinks in the way others do. He considers himself different from others.

In short, it may be said that the process of growing up involves development of rationalism, hypocrisy and individuality.

बड़ा होने की प्रक्रिया सर्वप्रथम भोलेपन के मिट जाने को शामिल करती है। भोलेपन का स्थान तार्किकता, पाखंड एवं अहंभाव ले लेते हैं। एक भोले बच्चे के रूप में व्यक्ति वही मान लेता है जैसा दूसरे लोग कहते हैं। वह ईश्वर, स्वर्ग एवं नर्क के अस्तित्व में विश्वास करता है। जब वह बड़ा होता है तो इन चीज़ों में अपनी श्रद्धा खो देता है। वह तार्किकता के साथ सोचना शुरू कर देता है और यह पाता है कि ये चीजें मनुष्य की कल्पना की उपज हैं।

वयस्क व्यक्ति के रूप में वह पाता है कि लोगों की कथनी एवं करनी के बीच बड़ी खाई होती है। वह महसूस करता है कि जो लोग प्रेम की बात करते हैं और उसी के बारे में प्रवचन करते हैं, उनका व्यवहार उतना प्रेमभरा नहीं होता। इस प्रकार लोगों के व्यवहार में कपट को महसूस करना भी बड़े होने की प्रक्रिया में शामिल होता है।

तीसरी चीज जो इस प्रक्रिया में शामिल होती है वह है, अहंवाद। एक वयस्क व्यक्ति का सोचने का अपना ही विशेष तरीका होता है। उसका अपना ही मन होता है और अपने ही विचार । अब वह औरों की भाँति नहीं सोचता। वह स्वयं को अन्य लोगों से भिन्न मानता है।

संक्षेप में कहा जा सकता है कि बड़े होने की प्रक्रिया तार्किकता, पाखंड एवं अहंवाद के विकास को शामिल करती है।

Q. 3. What is the poet’s feeling towards childhood ?

बचपन के बारे में कवि की भावना क्या है?

Ans. According to the poet, childhood is a period of heavenly innocence and purity of heart. A child believes in God, Heaven and Hell. He believes in God, Heaven and Hell. He believes in what adults say and what he reads in books. A child knows no hypocrisy. He always means what he says. There is no difference between his thoughts and actions. A child is free from any sense of ego. He does not think himself to be different from or superior to others. In short, childhood is a state of heavenly innocence and purity of heart.

___ कवि के अनुसार बचपन स्वर्गिक निर्दोषता एवं हृदय की शुद्धता का समय होता है। एक बच्चा ईश्वर, स्वर्ग एवं नर्क में विश्वास करता है। वह बड़ों की कही हुई तथा पुस्तकों में पढ़ी हुई बात में विश्वास करता है। वह पाखंड नहीं जानता। हमेशा उसका तात्पर्य वही होता है जो वह कहता है। उसके विचारों एवं कार्यों के बीच अन्तर नहीं होता है। एक बच्चा अहंकार के भाव से मुक्त होता है। वह स्वयं को दूसरों से भिन्न अथवा श्रेष्ठ नहीं समझता । संक्षेप में कहा जा सकता है कि बचपन स्वर्गिक निर्दोषता एवं हृदय की शुद्धता का समय होता है।

Q.4. Which lines do you think are the most poetic lines ? Why ?.

आपके अनुसार कविता में सर्वाधिक काव्यात्मक पंक्तियाँ कौनसी हैं? क्यों?

Ans. The last four lines of the poem are the most poetic. Here the poet creates a lovely image of an infant’s face. He conveys the idea that the innocence of childhood stays only as long as one is an infant. As one grows in years, the heavenly innocence of childhood is replaced by rational, hypocritical and egoistic thinking

कविता की अंतिम चार पंक्तियाँ सर्वाधिक काव्यात्मक हैं । यहाँ कवि एक शिशु के चेहरे का सुन्दर चित्र खींचता है। वह यह विचार देता है कि बचपन का भोलापन तभी तक रहता है जब तक व्यक्ति शिशु की अवस्था में होता है। जब व्यक्ति की उम्र बढ़ती है तो बचपन की स्वर्गिक निर्दोषता का स्थान तर्कसम्मत, पाखंडपूर्ण तथा अहंकार से भरी सोच ले लेती है।

ADDITIONAL QUESTIONS

Short-Answer Type Questions (around 10-15 words)

Q. 1. What did the poet think of Hell and Heaven when he was a child ?

कवि जब बच्चा था तब नर्क एवं स्वर्ग के बारे में क्या सोचता था?

Ans. When a child, he thought that Hell and Heaven were real places one goes to after one’s death.

जब वह बच्चा था, तब सोचता था कि नर्क एवं स्वर्ग वास्तविक स्थान थे जहाँ व्यक्ति मरने के बाद जाते

Q. 2. Why does he think now that Hell and Heaven “could not be” ?

वह अब ऐसा क्यों सोचता है कि नर्क एवं स्वर्ग “नहीं हो सकते?”

Ans. He thinks, were these places real, they would have been mentioned in the books of Geography.

वह सोचता है कि अगर ये स्थान वास्तविक होते तो इनका उल्लेख भूगोल की पुस्तको में किया जाता।

Q. 3. How does rationalism affect childhood ?

तर्कवाद बचपन को किस प्रकार प्रभावित करता है?

Ans. As a child grows up, he becomes a rationalist. He no longer lives in the innocence of childhood.

जब बच्चा बड़ा होता है, वह तर्कवादी बन जाता है। वह बचपन के भोलेपन में नहीं रहता है।

Q. 4. What did the poet realize about the adults ?

वयस्कों के बारे में कवि ने क्या महसूस किया?

Ans. He realised that adults were not as good people as they appeared to be.

उसने महसूस किया कि वयस्क लोग उतने अच्छे लोग नहीं थे जितने वे दिखाई देते थे।

Q.5. What did the adults talk of ? Were they true to what they said ?

वयस्क लोग किस चीज के बारे में बात करते थे? क्या वे अपने वचनों के प्रति सच्चे थे।

Ans. They talked of love and preached of love, but they did not follow their own words in their actions.

वे प्रेम की बात करते थे और इसी का उपदेश देते थे किन्तु वे अपने कार्यों में अपने ही शब्दों का अनुसरण नहीं करते थे।

Q. 6. What did the poet find about his mind ?

कवि ने अपने मन के बारे में क्या पाया?

Ans. He found his mind was really his. He had a right to use it in any way he liked.

उसने पाया कि उसका मन वास्तव में उसी का था। उसे अधिकार था कि वह इसका इस्तेमाल जिस तरह करना चाहे, करे।

Q.7. How did the poet think he was different from others ?

कवि किस प्रकार यह सोचता था कि वह दूसरों से भिन्न था?

Ans. He thought he was different from others as he could think in a different way from others.

वह सोचता था कि वह अन्य लोगों से भिन्न था क्योंकि वह दूसरों से भिन्न तरीके से सोच सकता था। Q. 8. Where can the innocence of childhood be found according to the poet ?

कवि के अनुसार बचपन का भोलापन कहाँ पाया जा सकता है?

Ans. The innocence of childhood can be found hidden in the face of an infant.