Chapter 4 मानो हि महतां धनम्

Textbook Questions and Answers

प्रश्न: 1. 
अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तरं संस्कृतेन देयम् 
(क) ‘मानो हि महतां धनम्’ इत्ययं पाठः कस्मात् ग्रन्थात् संकलितः ? 
उत्तरम् : 
‘मानो हि महतां धनम्’ इत्ययं पाठः महाभारत ग्रन्थात् संकलितः। 

(ख) विदुरा कुत्र विश्रुता आसी?
उत्तरम् : 
विदुरा राजसंसत्सु विश्रुता आसीत्। 

(ग) विदुरायाः पुत्रः केन पराजितः अभवत् ? 
उत्तरम् : विदुरायाः पुत्रः सिन्धुराजेन पराजितः अभवत्। 

(घ) कः स्त्री पुमान् वा न भवति? 
उत्तरम् : 
मानवाः यस्य महदद्भुतम् वृत्तं न जल्पन्ति यश्च राशिवर्धनमात्रं सः नैव स्त्री न पुनः पुमान् भवति। 

(ङ) कः अमात्यानां हर्ष न आदधाति ? 
उत्तरम् : 
यः आत्मनः प्रियसुखं न जहाति सः अमात्यानां हर्षं न आदधाति। 

(च) अपुत्रया मात्रा किं आभरणकृत्यं न भवति? 
उत्तरम् : 
अपुत्रया मात्रा पुत्रोपेक्षणम् आभरणकृत्यं न भवति। 

(छ) कस्य जीवितम् अर्थवत् भवति? 
उत्तरम् : 
यं आश्रित्य सर्वभूतानि जीवन्ति, तस्य जीवितम् अर्थवत्। 

प्रश्न: 2. 
‘यः आत्मन:… अचिरेण सः’ अस्य श्लोकस्य आशयं हिन्दी भाषया स्पष्टी कुरुत। 
उत्तरम् : 
हिन्दी भाषा में आशय-इस श्लोक का आशय यह है कि जो व्यक्ति अपनी सुख-सुविधा को त्याग कर सफलता अथवा समृद्धि की आशा करता है ऐसा व्यक्ति शीघ्र ही अपने मंत्रियों की प्रसन्नता की वृद्धि करता है। भाव यह है कि त्याग के बिना सफलता संभव नहीं है। 

प्रश्न: 3. 
रिक्तस्थानम् पूर्तिः विधेया – 
(क) विदुरा ओरसपुत्र …………….। 
उत्तरम् : 
विदुरा ओरसपुत्रं जगहें। 

(ख) हे कापुरुष …………………… मा शेष्व। 
उत्तरम् : 
हे कापुरुष एवं पराजितः मा शेष्व। 

(ग) त्वत्कृते स्वयमेव मग्नं ………………….. उद्भावय। 
उत्तरम् :
त्वत्कृते स्वयमेव मग्नं कुलम् उद्भावय। 

(घ) यः प्रियसुखे. श्रियम् मृगयते। 
उत्तरम् : 
यः प्रियसुखे हित्वा श्रियम् मृगयते। 

(ङ) मामपश्यन्त्याः… अपि सर्वथा किम्? 
उत्तरम् : 
मामपश्यन्त्याः पृथिव्या अपि सर्वथा किम्? 

(च) सर्वभूतानि…………. यमाजीवन्ति। 
उत्तरम् : 
सर्वभूतानि संजय यमाजीवन्ति। 

(छ) स यथावत् …………….. चकार। 
उत्तरम् : 
स यथावत् अनुशासनं तथा तत् सर्वं चकार। 

प्रश्न: 4. 
अधोलिखितानां शब्दानां विलोमान् लिखत विश्रुता, सत्या, अधर्मज्ञम्, अमित्रान्, कापुरुषः, अचिरेण, आसाद्य। 
उत्तरम् :  
शब्दाः – विलोम शब्दाः

प्रश्नः 5.
पञ्चभिः वाक्यैः विदुरायाः चरित्रम् वर्णयत् 
उत्तरम् :  

  1. विदुरा क्षात्रधर्मरता आसीत्। 
  2. सा दीर्घदर्शिनी श्रुतवाक्या चासीत्।
  3. सा राजसंसत्सु विश्रुता आसीत्। 
  4. सा बहुश्रुता आसीत्। 
  5. सा सत्यवादिनी आसीत्। 

प्रश्नः 6. 
यमाजीवन्तिः ………………………………… जीवितमर्थवत्-अस्य श्लोकस्य अन्वयं लिखत। 
उत्तरम् : 
अन्वयः – सञ्जय! सर्वभूतानि यम् पुरुषम् पक्वम् द्रुमम् इव आसाद्य आजीवन्ति तस्य जीवितम् अर्थवत्।

प्रश्नः 7. 
अधोलिखितपदानां संस्कृत वाक्येषु प्रयोगं कुरुत विश्रुता, शयानम्, द्विषताम्, गतिम्, पक्वम्, क्षिप्तः। 
उत्तरम् : 

  1. विश्रुता-विदुरा राजसभासु विश्रुता आसीत्। 
  2. शयानम्-सा शयानम् पुत्रं निनिन्द। 
  3. द्विषताम्-रामः द्विषताम् हर्षवर्धनः आसीत्। 
  4. गतिम्-भाग्यस्य गतिं कोऽपि न जानाति। 
  5. पक्वम्-पक्वं फलं खादेत्। 
  6. क्षिप्त:-धनुषा क्षिप्तः अयं शरः। 

mportant Questions and Answers

संस्कृतभाषया उत्तरम् दीयताम् – 

प्रश्न: 1. 
महतां किं धनम्? 
उत्तरम् : 
मानो हि महतां धनमस्ति। 

प्रश्नः 2. 
क्षात्रधर्मरता का आसीत? 
उत्तरम् : 
क्षात्रधर्मरता विदुरा आसीत्। 

प्रश्न: 3. 
विदुरा कं जगहे? 
उत्तरम् : 
विदुरा ओरसपुत्रं जगहें । 

प्रश्न: 4.
द्विषतां हर्षवर्धनम् कः आसीत्? 
उत्तरम् : 
द्विषतां हर्षवर्धनम् विदुरायः पुत्र आसीत् । 

प्रश्न: 5. 
विदुरा स्वपुत्रं किं उक्तवती?
उत्तरम् : 
विदुरा स्वपुत्रं उक्तवती-‘हे कापुरुष! उत्तिष्ठ एवं पराजितः मा शेष्व।’ 

प्रश्नः 6. 
विदुरयानुसारेण कः लोके कीर्तिं लभते? 
उत्तरम् : 
विदुरयानुसारेण यः मानवः स्वबाहुबलमाश्रित्य अभ्युज्जीवति सः लोके कीर्तिं लभते। 

प्रश्नः 7. 
वाक्यसायकैः प्रणुन्नः सः किमिव क्षिप्तः? 
उत्तरम् : 
वाक्यसायकैः प्रणुन्नः सः सदश्व इव क्षिप्तः। 

प्रश्न: 8. 
‘मानो हि महतां धनम्’ पाठे विदुरया स्वपुत्राय किं उपदिष्टम? 
उत्तरम् :
‘मानो हि महतां धनम्’ पाठे विदुरया स्वपुत्राय कायरतां विहाय स्व स्वाभिमानं पुनः प्राप्तुं उपदिष्टम्। 

प्रश्न: 9.
परत्र शुभां गतिं कः लभते? 
उत्तरम् : 
यः स्वबाहुबलमाश्रित्य अभ्युज्जीवति परत्र सः शुभां गतिं प्राप्नोति।

प्रश्न: 10. 
विदुरायाः पुत्रस्य किं नाम आसीत्? 
उत्तरम् : 
विदुरायाः पुत्रस्य सञ्जयः नाम आसीत्। 

प्रश्न: 11. 
दीर्घदर्शिनी श्रुतवाक्या का आसीत्? 
उत्तरम् : 
दीर्घदर्शिनी श्रुतवाक्या विदुरा आसीत्। 

प्रश्न: 12. 
निर्मानो बन्धुशोकदः कस्य विशेषणे स्तः? 
उत्तरम् : 
निर्मानो बन्धुशोकदः सञ्जयस्य विशेषणे स्तः।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

0:00
0:00

tipobet-onwin-güvenilir casino siteleri-güvenilir casino siteleri-slot siteleri-yeni slot siteleri-sahabet-matadorbet-sweet bonanza-aviator-güvenilir casino siteleri-deneme bonusu veren siteler-deneme bonusu veren siteler 2026-deneme bonusu veren yeni siteler-deneme bonusu-bahis siteleri-güvenilir bahis siteleri-aviator-slot siteleri-casino siteleri-deneme bonusu veren siteler-deneme bonusu veren yeni siteler-deneme bonusu veren siteler-yeni slot siteleri-matadorbet-sahabet-yeni slot siteleri-deneme bonusu veren siteler 2026-matadorbet-bahis siteleri-tipobet-sahabet-deneme bonusu-deneme bonusu veren yeni siteler-güvenilir bahis siteleri-onwin-onwin-tipobet-casino siteleri-sweet bonanza-slot siteleri-deneme bonusu-güvenilir bahis siteleri-sweet bonanza-aviator-casino siteleri-bahis siteleri-deneme bonusu veren siteler 2026-