बालकौतुकम् Class 12 Sanskrit

(1) संस्कृतेन उत्तरं दीयताम्

(क) उत्तररामचरितम् इति नाटकस्य रचचिता कः ?

उत्तर – उत्तररामचरितम् इति नाटकस्य रचयिता भवभूतिः ।

(ख) नेपथ्ये कोलाहलं श्रुत्वा जनकः किं कथयति ?

उत्तर – नेपथ्ये कोलाहलं श्रुत्वा जनकः कथयति – शिष्टानध्याय : इति

 क्रीडतां बहूनां कोलाहलः ।

(ग) लवः रामभद्रं कथमनुसरति ?

उत्तर – लवः रामभद्रं देहबन्धनेन स्वरेन च अनुसरति ।

( घ) बटवः अश्वं कथं वर्णयन्ति ?

उत्तर – बहवः अश्वं भूतविशेषं वर्णयन्ति ।

(ङ) लवः कथं जानाति यत् अयम् अश्वमेधिक : अश्वः ?

उत्तर – लवः अश्वमेध – काम्डेन जानाति यत् अयम् अश्वमेधिक : अश्वः!

( च) राजपुरुषस्य तीक्ष्णतरा आयुधश्रेणयः किं न सहन्ते ?

उत्तर – राजपुरुषस्य तीक्ष्णतरा आयुधश्रेणयः दृप्तां वाचं न सहन्ते ।

(2) रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिमाणं कुरत –

( क) अश्वमेध इति नाम क्षत्रियाणाम् महान उत्कर्षनिकष : I

उत्तर – केषां

( ख) हे बटवः! लोष्ठै : अभिधन्तः उपनयत् एनम् अश्वम् ।

उत्तर – कैः

( ग) रामभद्रस्य एषः दारकः अस्माकं लोचने शीतलयति ।

उत्तर – किम्

(घ) उत्पथै : मम् मनः परिप्लवं धावति ।

उत्तर – कस्य ।

( ङ) अतिजवेन दुरमतिक्रात : स चपलः दृश्यते ।

उत्तर – कीदृशः

( च ) विस्फारितशशसनाः आयुधीश्रेणयः कुमारं तर्जयन्ति । 

उत्तर – कम्

( छ ) निपुणं निरुप्यमाणः लवः मुखचन्द्रेण सीतया संवदत्येव ।

उतर – कया ।

(3) हिन्दीभाषाया सप्रसङ्गव्याख्यां कुरुत ।

( क ) सर्वक्षत्रपरिभावी महान् उत्कर्षनिकष : I

व्याख्या – प्रस्तुत पंक्तिहमारी पाठ्यपुस्तक शाश्वती भाग दो के तृतीय पाठ बालकौतुकम् से ली गई है । बालकौतुकम् पाठ भवभूति विरचित उत्तररामचरितम् के चौथे अंक से लिया गया है। प्रस्तुत पंक्ति के अनुसार लव ब्रहमचारियों को कहते है यह घोडा समस्त ( शत्रु ) राजाओं को पराजित करने वाली उत्कर्ष की कसौटी है ।

( ख ) किं व्याख्यानैव्रजति स पुनरदूरमेहेयहि यामः ।

व्याख्या – प्रस्तुत पंक्ति हमारी पठ्यपुस्तक शाश्वती भाग दो के तृतीय पाठ बालकौतुकम् से ली गई है । यह पाठ भवभूति विरचित उत्तरामचरितम् के चौथे अंक से लिया गया है । इस पंक्ति मे ब्रहमचारी ( बटवः) लव को कहते है किअत्यधिक वर्णन करने से क्या लाभ है वह घोड़ा दूर जा रहा है । इसलिए आओ – आओ चलते है ।

( ग ) सुलभसौख्यमिदानीं बालत्वं भवति

व्याख्या – प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्य पुस्तक शाश्वती भाग दो के तृतीय पाठ बालकौतुकम् से ली गई है । प्रस्तुत पाठ महाकवि भवभूति द्वारा रचित उत्तरामचरितम् के चौथे अंक से लिया गया है । इस पंक्ति मे कौशल्या जनक को कहते है कि बचपन का सुख आसानी से प्राप्त होने वाला सुख है ।

( घ ) झटति कुरुते दृष्टः कोडयं दशोरमृताञ्जनम् ?

व्याख्या – प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्य पुस्तक शाश्वती भाग दो के तृतीय पाठ बालकौतुकम् से ली गई है । यह पाठ महाकवि भवभूति . द्वारा रचित उत्तररामचरितम् के चौथे अंक से ली गई है इस पंक्ति में कौशल्या और अरुन्धती कह रही है यह बालक कौन है जो देखने पर ऑखो में अमृततुल्य अञ्जन लगा रहा है

(4) अधोलिखितानी कथनानि कः कं प्रति कथयति । 

( क ) अस्ति ते माता ? स्मरसि वा तातम् ?

उत्तर – कौशल्या लवम् प्रति कथयति ।

( ख ) दिष्टया न केवलमुत्सङ्ग मनोरथोsपि में पूरितः

उत्तर – अरुन्धती लवम् प्रति कथयति ।

( ग ) वत्सायाश्च रघूद्वहस्य च शिशावस्मिन्नभिव्यज्यते । 

उत्तर – राजा जनकः कौशल्याम् प्रति कथयति ।

(घ) सोSयमधुनाsस्माभिः स्वयं प्रत्यक्षीकृतः ।

उत्तर – लवम् प्रति कभयति ।

(ङ ) इतोSन्यतो भूत्वा प्रेक्षामहे तावत्पलायमानं दीपीयुषम् ।

उत्तर – कौशल्या अरुन्धतीम् प्रति कथयति

(च) धिक् चपल ! किमुक्तवानसि । 

उत्तर – राजपुरुषः लवम् प्रति कथयति ।

(5 )अधोलिखितवाक्यानां रिक्तस्थानानि निदेशानुसारं पुरयत ।

( क ) क एष अनुसरथि रामभद्रस्य मुग्ध ललितैरङ्गैर्दाकोडऽस्माकं लोचने शीतलयति । ( क्रियापदेन )

( ख ) एष बलवान् मे सम्मोहनस्थिररमपि मनः हरति । ( कर्तृपदेन )

(ग) जात ! इतोऽपि तावदेहि ! ( सम्बोधनेन )

(घ) अश्वोऽश्व इति नाम पशुसम्मानाये संग्रामिके च पठ्यते(अव्ययेन )

( ङ) युष्माभिरपि तत्काण्डं पठितं एव हि । ( कृदन्तपदेन )

( च ) एष वो लवस्य शिरसा प्रणामपर्याय : I (करणपदे )

( 6 ) अधः समस्तपदानां विग्रहाः दत्ता : । उदाहरणमनुसृत्य

 समस्तपदानि रचयन समासनामापि च लिखत |

उदाहरणम् – पशूनां समाम्नाय : तस्मिन् पशुसमाम्नाये – षष्ठी तत्पुरुष :

(क) विनयेन शिशिर : – विनियशिशिर: ( तृतीया तत्पुरुष समास )

(ख) अयस्कान्तस्य शकलः- अयस्कान्तशकलः ( षष्ठीतत्पुरुष समास )

(ग) दीर्घा ग्रीवा यस्य सः – दीर्घग्रीवः ( बहुव्रीहि समास )

(घ) मुखम् एव पुण्डरीकम् – मुखपुण्डरीकम् ( कर्मधारय समास )

( ङ) पुण्य: चासौ अनुभाव: – पुण्यानुभाव – ( कर्मधारय समास )

( च ) न स्खलितम् – अस्खलितं ( नञ तत्पुरुष समास )

(7) अधोलिखितपारिभाषिकशब्दानां समुचितार्थेन मेलनं कुरुत ।

क . नेपथ्ये —————— (ग ) पर्दे के पीछे

ख . आत्मगतम्————-( घ ) अपने मन मे

ग . प्रकाशम्—————–( क ) प्रकटरूप मे

घ . निरूप्य——————( ख ) देखकर

ङ . उत्सङ्गे गृहीत्वा———( छ ) गोद में बिठा कर

च . प्रविश्य——————-( ङ) प्रवेश करके

छ . सगर्वम्——————-( ज ) गर्व के साथ

ज . स्वगतम्——————( च ) अपने मन में

( 9 ) अधोलिखितेषु श्लोकेषु धन्दोनिर्देशः क्रियताम् –

( क ) महिम्नामेतस्मिन् विनयशिशिरो मोग्ध्यमसृणो । 

 शिखरिणी छन्द 

( ख ) वत्सायश्च रघूद्वहस्य च शिशावमिस्मन्नभित्यज्यते ।

शार्दूलविक्रिडित छन्द ।

( ग ) पश्चात्पुछं वहति तच्च धुनोत्यजस्रम ।

मन्द्राक्रान्ता छन्द 

 ———इति——

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