प्रत्यय 6
प्रत्यय 6 शब्दों के अंत में लगाए गए शब्दांश प्रत्यय कहलाते हैं; जैसे नेहा पढ़ाकू है। दुकानदार दालों में मिलावट करते हैं। ऊपर दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों को आपने देखा। इनमें मूल शब्दों के अंत में शब्दांश जोड़कर नए शब्द बनाए हैं, जैसे पढ़ + आकू, मिल + आवटे। हिंदी में प्रत्यय के […]
पत्र-लेखन 6
पत्र-लेखन 6 पत्र-लेखन विचारों के आदान-प्रदान को सशक्त माध्यम है। इसी के माध्यम से लोग अपने मन की बात अपने से दूर रहने वाले व्यक्ति तक पहुँचाते हैं। पत्र-लेखन एक कला है। पत्र लिखने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए। पत्र की भाषा सरल, स्पष्ट व सरस होनी चाहिए। पत्र भेजने वाले का […]
निबंध-लेखन 6
निबंध-लेखन 6 निबंध का अर्थ है-बँधा हुआ यानी एक सूत्र में बँधी हुई रचना। जब किसी विषय पर क्रमबद्धता के साथ विचारों को प्रकट किया जाता है, तो ऐसा लेख निबंध कहलाता है। निबंध किसी भी विषय पर लिखा जा सकता है। साधारण रूप से निबंध के विषय परिचित होते हैं यानी जिनके बारे में […]
क्रिया 6
क्रिया 6 ‘क्रिया’ का अर्थ होता है-करना। प्रत्येक भाषा के वाक्य में क्रिया का बहुत महत्त्व होता है। प्रत्येक वाक्य क्रिया से पूरा होता है। क्रिया किसी कार्य के करने या होने को दर्शाती है। क्रिया को करने वाला कर्ता कहलाता है। जिन शब्दों से किसी काम के करने या होने का पता चले, वे […]
काल 6
काल 6 काल का अर्थ है – समय। क्रिया के जिस रूप से उसके होने के समय का बोध हो उसे काल कहते हैं। काल के भेद – काल के तीन भेद होते हैं। 1. भूतकाल – क्रिया के जिस रूप से उसके बीते हुए समय का बोध हो, वह भूतकाल कहलाता है; जैसे नेहा ने गीत […]
कारक 6
कारक 6 कारक का शाब्दिक अर्थ है-‘क्रिया को करने वाला’ अर्थात क्रिया को पूरी करने में किसी-न-किसी भूमिका को निभाने वाला। यानी अर्थपूर्ण बनाने वाला। संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से क्रिया तथा वाक्य के अन्य शब्दों के साथ संबंध का पता चलता है, उसे कारक कहते हैं। कारक के भेद – कारक के […]
उपसर्ग 6
उपसर्ग 6 ‘उपसर्ग’ शब्द ‘उप’ + ‘सर्ग’ शब्द के मेल से बना है, जिसमें ‘सर्ग’ मूल शब्द है, जिसका अर्थ होता है ग्रंथ का अध्याय जोड़ना, रचना, निर्माण करना आदि। अतः ‘सर्ग’ मूल शब्द से पूर्व उप’ शब्दांश लगने से उसका अर्थ हुआ पहले जोड़ना। इस प्रकार मूल शब्दों के पहले अथवा आगे जो शब्दांश […]
अशुद्ध वाक्यों का संशोधन 6
अशुद्ध वाक्यों का संशोधन 6 वाक्य लिखते अथवा बोलते समय अकसर कई प्रकार की अशुधियाँ होती हैं। सामान्यतः ये अशुद्धियाँ उच्चारण की अशुद्धियों के कारण होती हैं। भारत एक विविध प्रांतीय देश है। इसमें विविध प्रांतों के लोग रहते हैं, जहाँ अलग-अलग प्रकार की भावनाओं और बोलियों का प्रयोग किया जाता है, जिनका उच्चारण क्षेत्रीयता […]
अव्यय या अविकारी शब्द 6
अव्यय या अविकारी शब्द 6 अ + विकारी जिससे विकार (परिवर्तन) न हो। अविकारी शब्द वे होते हैं जिनमें लिंग, वचन, कारक आदि के कारण परिवर्तन नहीं होता। इसी कारण इन शब्दों को ‘अव्यय’ भी कहा जाता है। अव्यय का शाब्दिक अर्थ है-जिसका कुछ भी व्यय न हो। यानी ऐसे शब्द जिनका वाक्य में प्रयोग […]
अपठित पद्यांश 6
अपठित पद्यांश 6 अपठित काव्यांश भी गद्यांश की भाँति बिना पढ़ा अंश होता है। यह पाठ्यक्रम के बाहर से लिया जाता है। इसके द्वारा छात्रों की काव्य संबंधी समझ का मूल्यांकन किया जाता है। इसके अंतर्गत विषय वस्तु का मूल्यांकन किया जाता है। इसके अंतर्गत विषय वस्तु, अलंकार, भाषिक योग्यता संबंधी समझ की परख की […]