Chapter 11 सावित्री बाई फुले
पाठ-परिचय – शिक्षा हमारा अधिकार है। हमारे समाज में कई समुदाय इससे लम्बे समय तक वञ्चित रहे हैं। उन्हें इस अधिकार को पाने के लिए लम्बा संघर्ष करना पड़ा है। लड़कियों को तो और ज्यादा अवरोध झेलना पड़ता रहा है। प्रस्तुत पाठ इस संघर्ष का नेतृत्व करने वाली सावित्री बाई फुले के योगदान पर केन्द्रित है।
पाठ के गद्यांशों का हिन्दी-अनुवाद एवं पठितावबोधनम् –
1. उपरि निर्मितं …………………………………. फुले नामधेया।
कठिन-शब्दार्थ :
- आदाय = लेकर।
- उपरि = ऊपर।
- प्रस्तरखण्डान् = पत्थर के टुकड़ों को।
- क्षिपति = फेंकता है।
- आलपन्ती = बात करती हुई।
- सहैव = (सह + एव) साथ ही।
- जानीथ = जानते हो।
हिन्दी अनुवाद – (ऊपर निर्मित) (पाठ्यपुस्तक में दिये गये) चित्र को देखो। यह चित्र किसी पाठशाला का है। यह सामान्य पाठशाला नहीं है। यह महाराष्ट्र की प्रथम कन्या पाठशाला है। एक शिक्षिका घर से पुस्तकें लेकर चलती है। मार्ग में कोई उसके ऊपर धूल और कोई पत्थर के टुकड़ों को फेंकता है। किन्तु वह अपने दृढ़ निश्चय से विचलित नहीं होती है। अपने विद्यालय में बालिकाओं के साथ हँसी-मजाक से बात करती हुई वह अध्यापन कार्य में संलग्न यन भी साथ ही चलता है। यह महिला कौन है? क्या तुम इस महिला को जानते हो? यही महाराष्ट्र की सावित्री बाई फुले नामक प्रथम महिला शिक्षिका है।
पठितावबोधनम् :
निर्देश: – उपर्युक्तं गद्यांशं पठित्वा प्रदत्तप्रश्नानाम् उत्तराणि यथानिर्देशं लिखत प्रश्ना :
(क) गद्यांशस्य उपयुक्तं शीर्षकं किम्?
(ख) शिक्षिका गृहात् कानि आदाय चलति? (एकपदेन उत्तरत)
(ग) शिक्षिका कस्मात् न विचलति? (एकपदेन उत्तरत)
(घ) महाराष्ट्रस्य प्रथमा महिला शिक्षिका का आसीत्? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
(ङ) ‘जानीथ’ इति क्रियापदस्य गद्यांशे कर्तृपदं किमस्ति? .
(च) ‘सा अध्यापने संलग्ना भवति’-अत्र ‘सा’ सर्वनामस्थाने संज्ञापदं किम्?
उत्तराणि :
(क) सावित्री बाई फुले।
(ख) पुस्तकानि।
(ग) स्वदृढ़निश्चियात्।
(घ) महाराष्ट्रस्य प्रथमा महिला शिक्षिका ‘सावित्री बाई फुले’ आसीत्।
(ङ) यूयम्।
(च) शिक्षिका।
2. जनवरी मासस्य …………………… अध्ययनं कृतवती।
कठिन-शब्दार्थ :
- अजायत = उत्पन्न हुई।
- अभिहितौ = कहे गये हैं।
- नववर्ष-देशीया = नौ वर्ष की आयु वाली।
- परिणीता = ब्याही गयी।
- उत्सम् = प्रवाहित।
हिन्दी अनुवाद – तीन जनवरी सन् 1831 ई. को महाराष्ट्र के नायगांव नामक स्थान पर सावित्री का जन्म हुआ। उसकी माता का नाम लक्ष्मीबाई और पिता खंडोजी कहे गये हैं। नौ वर्ष की आयु वाली वह सावित्री ज्योतिबा फुले महोदय के द्वारा ब्याही गयी अर्थात् उनके साथ विवाह हुआ। वह भी उस समय तेरह वर्ष की आयु का ही था। क्योंकि वह स्त्री-शिक्षा का प्रबल समर्थक था, इसलिए सावित्री के मन में स्थित अध्ययन की अभिलाषा प्रवाहित होने लगी। इसके बाद उसने आग्रहपूर्वक अंग्रेजी भाषा का भी अध्ययन किया।
पठितावबोधनम् प्रश्ना :
(क) गद्यांशस्य उपयुक्तं शीर्षकं किम्?
(ख) सावित्र्याः मनसि स्थिता का उत्सं प्राप्तवती? (एकपदेन उत्तरत)
(ग) सावित्री केन सह परिणीता? (एकपदेन उत्तरत)
(घ) सावित्र्याः माता-पिता च कौ अभिहितौ? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
(ङ) अजायत’ इति क्रियापदस्य गद्यांशे कर्तृपदं किमस्ति?
(च) ‘सोऽपि’ इति पदस्य सन्धिच्छेदं किं भवति?
उत्तराणि-
(क) सावित्री बाई।
(ख) अध्ययनाभिलाषा।
(ग) ज्योतिबाफुलेमहोदयेन।
(घ) सावित्र्याः माता लक्ष्मीबाई पिता च खंडोजी इति अभिहितौ।
(ङ) सावित्री।
(च) सः + अपि।
3. १८४८ तमे ……………………………… विद्यालयः प्रारब्धः।
कठिन-शब्दार्थ :
- आरभत = आरम्भ किया।
- अस्पृश्यत्वात् = छुआछूत के कारण।
- अपरः = दूसरा, अन्य।
- प्रारब्धः = प्रारम्भ किया।
हिन्दी अनुवाद – सन् 1848 ई. में पुणे (पूना) नगर में सावित्री ने ज्योतिबा महोदय के साथ कन्याओं के लिए प्रदेश का प्रथम विद्यालय आरम्भ किया। उस समय वह केवल सत्रह वर्ष की आयु की थी। सन् 1851 में छुआछूत के कारण तिरस्कृत समुदाय की बालिकाओं के लिए अलग से उसके द्वारा दूसरा विद्यालय आरम्भ किया गया।
पठितावबोधनम् प्रश्नाः
(क) पुणे नगरे कन्यानां कृते प्रदेशस्य प्रथमं विद्यालयं का आरभत? (एकपदेन उत्तरत)
(ख) तदानी सावित्री कति वर्षीया आसीत्? (एकपदेन उत्तरत)
(ग) 1851 तमे खिस्ताब्दे सावित्र्या कीदृशः अपरः विद्यालयः प्रारब्धः? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
(घ) ‘आरभत’ इति क्रियापदस्य गद्यांशे कर्तृपदं किमस्ति?
(ङ) ‘विद्यालयः’ इति पदस्य गद्यांशे विशेषणपदं किं प्रयुक्तम्?
(च) ‘महोदयेन’ इति पदे का विभक्तिः?
उत्तराणि-
(क) सावित्री।
(ख) सप्तदशवर्षीया।
(ग) 1851 तमे खिस्ताब्दे सावित्र्या अस्पृश्यत्वात् तिरस्कृतस्य समुदायस्य बालिकानां कृते पृथक्तया अपरः विद्यालयः प्रारब्धः।
(घ) सावित्री।
(ङ) अपरः।
(च) तृतीया।
4. सामाजिककुरीतीन …………………………. सर्वथा समर्थितः।
कठिन-शब्दार्थ :
- निकषा = निकट, समीप।
- शीर्ण वस्त्रावृताः = फटे-पुराने वस्त्र पहने हुई।
- जलोद्धरणम् = जल निकालना।
- अवारयन् = मना कर दिया।
- सोदुम् = सहन करने में।
- तडागम् = तालाब को।
हिन्दी अनुवाद : सामाजिक कुरीतियों का सावित्री ने मुखर विरोध किया। विधवाओं के शिर-मुण्डन की प्रथा को दूर करने के लिए वह नाइयों से मिली। फलस्वरूप कुछ नाइयों ने इस रूढ़ि में साथ देना छोड़ दिया। एक बार सावित्री ने मार्ग में देखा कि कुएँ के निकट फटे-पुराने वस्त्र पहने हुई तथाकथित निम्न जाति की कुछ स्त्रियाँ जल पीने के लिए याचना कर रही थीं।
उच्च वर्ग के लोग उपहास करते हुए कुएँ से जल निकालने के लिए मना कर रहे थे। सावित्री इस अपमान को सहन करने में समर्थ नहीं हुई। वह उन स्त्रियों को अपने घर ले गई और तालाब दिखलाकर बोली कि इच्छानुसार जल ले जाओ। यह तालाब सार्वजनिक है। इससे जल ग्रहण करने में जाति का बन्धन नहीं है। उसके द्वारा मनुष्यों की समानता और स्वतन्त्रता के पक्ष का हमेशा सभी प्रकार से समर्थन किया गया।
पठितावबोधनम् :
(क) गद्यांशस्य उपयुक्तं शीर्षकं किम्?
(ग) विधवानां शिरोमुण्डनस्य निराकरणाय सा कैः मिलिता? (एकपदेन उत्तरत)
(घ) एकदा सावित्र्या मार्गे किं दृष्टम्? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
(ङ) ‘याचन्ते स्म’ इति क्रियापदस्य गद्यांशे कर्तृपदं किं प्रयुक्तम् ?
(च) ‘पातुम्’ इति पदे कः प्रत्ययः?
उत्तराणि :
(क) सावित्री बाई।
(ख) सामाजिककुरीतीनाम्।
(ग) नापितैः।
(घ) एकदा सावित्र्या मार्गे दृष्टं यत् कूपं निकषा शीर्णवस्त्रावृत्ताः तथाकथिताः निम्नजातीयाः काश्चित् नार्यः जलं पातुं याचन्ते स्म।
(ङ) नार्यः।
(च) तुमुन्।
5. ‘महिला सेवामण्डल’ …………………………. अवश्यम् अध्येतव्यम्।
कठिन-शब्दार्थ :
अवदानम् = योगदान।
उत्पीडितानाम् = सताए गए का।
दुर्भिक्षकाले = अकाल के समय।
अश्रान्तम् = बिना थके हुए।
अविरतम् = लगातार।
महारोगप्रसारकाले = महामारी फैलने के समय में।
गहनावबोधनाय = गहराई से समझने के लिए।
हिन्दी अनुवाद : ‘महिला सेवामण्डल’, ‘शिशुहत्या प्रतिबन्धक गृह’ इत्यादि संस्थाओं की स्थापना में फुले दम्पती का योगदान महत्त्वपूर्ण है। सत्यशोधक मण्डल की गतिविधियों में भी सावित्री अत्यधिक सक्रिय थी। इस मण्डल का उद्देश्य था-सताए गए समुदायों को अपने अधिकारों के प्रति जगाना।
सावित्री ने अनेकों संस्थाओं का प्रशासनिक कौशल से सञ्चालन किया। अकाल के समय और प्लेग के समय उसने पीड़ित लोगों की बिना थके हुए और लगातार सेवा की। सहायता-सामग्री की व्यवस्था के सभी प्रकार से प्रयास किये। महामारी फैलने के समय सेवा करते हुए स्वयं वह असाध्य रोग से पीड़ित होकर सन् 1897 ई. में मृत्यु को प्राप्त हो गई।
साहित्य रचना में भी सावित्री बढ़-चढ़कर है। उसके दो काव्य-संकलन हैं…’काव्यफुले’ और ‘सुबोध रत्नाकर’। भारत देश में महिला-उत्थान को गहराई से समझने के लिए सावित्री महोदया के जीवन-चरित्र का भी अवश्य अध्ययन करना चाहिए।
पठितावबोधनम्
प्रश्न 1.
(क) गद्यांशस्य उपयुक्तं शीर्षकं किम्?
(ख) कस्य गतिविधिषु.अपि सावित्री अतीव सक्रिया आसीत्? (एकपदेन उत्तरत)
(ग) सत्यशोधकमण्डलस्य उद्देश्य केषां समुदायानां स्वाधिकारान् प्रति जागरणम् आसीत्? (एकपदेन उत्तरत)
(घ) कासा संस्थाना स्थापनाया फुलेदम्पत्योः अवदान महत्त्वपूर्णम्? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
(ङ) ‘योगदानम्’ इत्यर्थे गद्यांशे किं पदं प्रयुक्तम्?
(च) ‘स्वाधिकारान्’ इति पदे का विभक्तिः ?
उत्तराणि :
(क) सावित्र्याः अवदानम्।
(ख) सत्यशोधकमण्डलस्य।
(ग) उत्पीडितानाम्।
(घ) ‘महिला सेवामण्डल’, ‘शिशुहत्या प्रतिबन्धक गृह’ इत्यादीनां संस्थानां स्थापनायां फुलेदम्पत्योः अवदानम् महत्त्वपूर्णम्।
(ङ) अवदानम्।
(च) द्वितीया।