Chapter 2 यूरोप में समाजवाद एवं रूसी क्रांति

In Text Questions and Answers

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प्रश्न 1.
निजी संपत्ति के बारे में पूँजीवादी और समाजवादी विचारधारा के बीच दो अंतर बताइए। 
उत्तर:

पूँजीवादी विचारधारा

समाजवादी विचारधारा

(1) पूँजीवादी निजी सम्पत्ति के पक्षधर थे।

(1) समाजवादी मानते थे कि समस्त संपत्ति समाज के नियंत्रण में होनी चाहिए।

(2) पूँजीवादी मानते थे कि लाभ के अधिकारी फैक्ट्री मालिक ही होंगे।

(2) समाजवादी मानते थे कि संपत्ति मजदूरों के कठिन श्रम का ही परिणाम है, इसलिए वे ही इसके अधिकारी हैं।

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प्रश्न 1.
रूस में 1905 में क्रांतिकारी उथल-पुथल क्यों पैदा हुई थी? क्रांतिकारियों की क्या माँगें थीं? 
उत्तर:
(1) 1905 में क्रांतिकारी उथल-पुथल पैदा होने के कारण- आवश्यक वस्तुओं की कीमतें इतनी तेजी से बढ़ीं कि वास्तविक वेतन में 20 प्रतिशत तक की गिरावट आ गई थी। प्युतिलोव आयरन वर्क्स से अनेक श्रमिकों को निकाल दिया गया था। इसलिए मजदूरों ने हड़ताल कर दी। मजदूर स्त्रियाँ, पुरुष तथा बच्चे शांतिपूर्ण ढंग से एक जुलूस के रूप में पादरी गैपॉन के नेतृत्व में जार को ज्ञापन देने जा रहे थे। परन्तु विन्टर पैलेस के सामने पहुंचने पर पुलिस तथा कोसैक्स द्वारा उन पर गोलियां बरसाई गईं, जिससे 100 से अधिक मजदूर मारे गए व 300 से अधिक घायल हुए। रूस में 1905 की क्रांतिकारी गतिविधियाँ इसी कारण हुईं। 

(2) क्रांतिकारियों की माँगें थीं- केवल आठ घंटे काम, वेतनों में बढ़ोतरी, कार्य की परिस्थितियों में सुधार तथा नागरिक स्वतन्त्रता के अधिकारों की प्राप्ति। 

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प्रश्न 1.
बॉक्स 2 देखें और वर्तमान कैलेण्डर के हिसाब से अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस की तिथि का पता लगाएँ। 

बॉक्स 2 
रूसी क्रान्ति की तारीख 

रूस में 1 फरवरी, 1918 तक जूलियन कैलेंडर का अनुसरण किया जाता था। इसके बाद रूसी सरकार ने ग्रेगोरियन कैलेंडर अपना लिया जिसका अब सब जगह इस्तेमाल किया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर जूलियन कैलेंडर से 13 दिन आगे चलता है। इसका मतलब है कि हमारे कैलेंडर के हिसाब से ‘फरवरी क्रांति’ 12 मार्च को और ‘अक्टूबर क्रांति’ 7 नवम्बर को सम्पन्न हुई थी।

उत्तर:
जूलियन कैलेंडर के अनुसार रूस में 23 फरवरी को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस का नाम दिया गया था। वर्तमान कैलेंडर जूलियन कैलेंडर से आगे चलता है अतः 23 फरवरी से 13 दिन आगे 8 मार्च आता है। अतः वर्तमान कैलेंडर के हिसाब से अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस की तिथि 8 मार्च है। 

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प्रश्न 1.
भारतीयों (शौकत उस्मानी और रबीन्द्रनाथ टैगोर) को सोवियत संघ में सबसे प्रभावशाली बात क्या दिखाई दी? 
उत्तर:
शौकत उस्मानी ने उस समानता की प्रशंसा की जो रूसी क्रांति अपने साथ लाई थी। उन्होंने कहा कि वे असली समानता की भूमि में आ गए हैं। उनका मत था कि यहाँ गरीबी के बावजूद लोग खुश और संतुष्ट थे। लोगों को आपस में मिलने-जुलने से रोकने के लिए जाति या धर्म की कोई दीवार नहीं थी। 

रबीन्द्रनाथ टैगोर रूसी क्रांति के परिणामों से प्रभावित थे। उनका कहना था कि अभिजात वर्ग का कोई भी सदस्य गरीबों या मजदूरों का शोषण नहीं कर सकता था। अब कोई भी अंधकार में नहीं था क्योंकि सदियों से छुपे लोग अब खुले में आ गये थे। इन्हें सबसे प्रभावशाली यह लगा कि बहुत कम समय में ही इन लोगों ने अज्ञानता और बेसहारेपन के पहाड़ को उतार फेंका था। 

प्रश्न 2.
ये लेखक किस चीज को नहीं देख पाए? 
उत्तर:
दोनों लेखक ये देख पाने में असफल रहे कि बोल्शेविक पार्टी ने किस प्रकार सत्ता हथियाई और समाजवाद के नाम पर दमनकारी नीतियाँ अपनाकर देश पर राज किया। यह न तो न्यायपूर्ण था और न ही स्थायी। इसीलिए अंत में इसकी हार हुई। 

Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1. 
रूस के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हालात 1905 से पहले कैसे थे? 
उत्तर:
1905 से पहले रूस के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक हालात निम्न बिन्दुओं से स्पष्ट हैं- 
(1) सामाजिक हालात-

(2) आर्थिक हालात-

(3) राजनीतिक हालात-

प्रश्न 2. 
1917 से पहले रूस की कामकाजी आबादी यूरोप के बाकी देशों के मुकाबले किन-किन स्तरों पर भिन्न थी? 
उत्तर:
1917 से पहले रूस की कामकाजी आबादी यूरोप के बाकी देशों के मुकाबले निम्न स्तरों पर भिन्न थी- 

प्रश्न 3. 
1917 में जार का शासन क्यों खत्म हो गया? 
उत्तर:
1917 में जार का शासन खत्म होने के निम्न कारण थे-
(1) निरंकुश एवं स्वेच्छाचारी शासक-रूस में निरंकुश राजशाही थी। तत्कालीन जार निकोलस II भी निरंकुश एवं स्वेच्छाचारी शासक था। उसकी नीतियों से प्रजा में असंतोष व्याप्त था। 

(2) 1905 की क्रांति-1905 की क्रांति ने जार के शासन के खात्मे की भूमिका तैयार कर दी थी। 1905 की क्रांति के दौरान जार को एक निर्वाचित परामर्शदाता संसद या ड्यूमा के गठन पर अपनी सहमति देनी पड़ी थी। 25 फरवरी, 1917 को इस ड्यूमा की बर्खास्तगी भी जार के शासन के अन्त का प्रमुख कारण बनी। 

(3) प्रथम विश्व युद्ध-1914 में प्रथम विश्व युद्ध शुरू होने पर जार ने रूस के भी युद्ध में भाग लेने की घोषणा कर दी। शुरू में जनता ने जार का साथ दिया। युद्ध लम्बा खिंचने पर जार ने ड्यूमा में मौजूद मुख्य पार्टियों से सलाह लेना छोड़ दिया। इससे जार के प्रति जनसमर्थन कम होने लगा। 

इसके साथ ही जर्मनी और आस्ट्रिया में रूस की भारी पराजय हुई। 1917 तक 70 लाख व्यक्ति मारे जा चुके थे तथा 30 लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गये थे। सैनिक युद्ध के विरुद्ध हो गये थे। सेना की शक्ति बढ़ाने के लिए किसानों तथा श्रमिकों को सेना में जबरदस्ती भर्ती किया जाने लगा। इससे लोगों में असन्तोष था।

(4) तात्कालिक कारण-

इस प्रकार उपर्युक्त कारणों से 1917 में जार का शासन खत्म हो गया। 

प्रश्न 4. 
दो सूचियाँ बनाइये : एक सूची में फरवरी क्रांति की मुख्य घटनाओं और प्रभावों को लिखिए और दूसरी सूची में अक्टूबर क्रांति की प्रमुख घटनाओं और प्रभावों को दर्ज कीजिए। 
उत्तर: 
सूची I 
फरवरी क्रांति की मुख्य घटनाएँ तथा प्रभाव 

प्रभाव-

सूची II 
अक्टूबर क्रांति की मुख्य घटनाएँ तथा प्रभाव 

प्रभाव-

प्रश्न 5. 
बोल्शेविकों ने अक्टूबर क्रांति के फौरन बाद कौन-कौन से प्रमुख परिवर्तन किए? 
उत्तर:
बोल्शेविकों ने अक्टूबर क्रांति के तुरंत बाद निम्नलिखित परिवर्तन किये- 

प्रश्न 6.
निम्नलिखित के बारे में संक्षेप में लिखिये : 
(1) कुलक 
(2) ड्यूमा 
(3) 1900 से 1930 के बीच महिला कामगार 
(4) उदारवादी 
(5) स्तालिन का सामूहिकीकरण कार्यक्रम। 
उत्तर:
(1) कुलक-रूस में सम्पन्न किसानों को कुलक कहा जाता था। 1928 में साम्यवादी पार्टी के सदस्यों ने ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा किया तथा कुलकों के खेतों में अनाज उत्पादन व संग्रहण का निरीक्षण किया। कुलकों के ठिकानों पर छापे भी मारे गये। स्टालिन के सामूहिकीकरण कार्यक्रम के अन्तर्गत रूस में कुलकों का सफाया किया गया। 

(2) ड्यूमा-रूस में निर्वाचित परामर्शी संसद को ड्यूमा कहते हैं। इसे 1905 की क्रांति के पश्चात् जार द्वारा गठित किया गया था। अपनी सत्ता पर किसी भी तरह की जवाबदेही या अंकुश से बचने के लिए जार इसे बार-बार बर्खास्त कर देता था। उसने प्रथम ड्यूमा 75 दिनों के भीतर स्थगित कर दी। दूसरी ड्यूमा को 3 महीने के भीतर बर्खास्त कर दिया। तीसरी ड्यूमा में उसने रूढ़िवादी राजनेताओं को भर डाला। 

(3) 1900 से 1930 के बीच महिला कामगार-फैक्ट्री मजदूरों का 31 प्रतिशत महिला कामगारों का था। परंतु उन्हें पुरुष श्रमिकों से कम मजदूरी मिलती थी। अधिकतर फैक्ट्रियों में उन्हें पुरुषों की मजदूरी का आधा या तीन-चौथाई ही दिया जाता था। इसी कारण उन्होंने विद्रोह में पुरुषों का साथ दिया। 23 फरवरी, 1917 को कई फैक्ट्रियों में महिला कामगारों ने हड़ताल की। बाद में इस दिन को ‘अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस’ का नाम दिया गया। वर्तमान कैलेंडर के अनुसार यह तिथि 8 मार्च है। रूसी क्रांति के दौरान महिलाएँ पुरुष क्रांतिकारियों को प्रेरित करती थीं। मार्फा वासीलेवा नामक एक महिला श्रमिक ने अकेले ही हड़ताल की घोषणा की। जब मालिकों ने उसके पास डबलरोटी का टुकड़ा भेजा, तो उसने वह ले लिया परंतु काम पर वापस जाने से इनकार कर दिया। उसने कहा, “जब बाकी सारे भूखे हों तो मैं अकेले पेट भरने की नहीं सोच सकती।” 

(4) उदारवादी- 

(5) स्तालिन का सामूहिकीकरण कार्यक्रम-

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