Chapter 2 वन एवं वन्यजीव संसाधन

अभ्यास प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्नोत्तर

1. निम्नलिखित में से कौन-सी लुप्त जाति है?

a. एशियाई चीता

b. निकोबारी कबूतर

c. एशियाई हाथी

d. काला हिरण (a)

2. भारत में संकटग्रस्त पादप जाति में सम्मिलित है-

a. आम

b. सागौन

c. शीशम

d. चंदन। (d)

3. जैव विविधता के कृत्रिम आवासीय संरक्षण का उदाहरण है-

a. अभयारण्य

b. राष्ट्रीय उद्यान

c. जीवमंडलकोश

d. चिड़ियाघर । (d)

4. किस राज्य की जनजातियों में विवाह के अवसर पर आम और इमली की पूजा की जाती है?

a. उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड

b. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़

c. ओडिशा और बिहार

d. तमिलनाडु व केरल | (c)

5. चिपको आंदोलन सुंदरलाल बहुगुणा द्वारा उत्तराखंड के किस जिले में चलाया गया?

a. चमोली

b. उत्तरकाशी

c. नैनीताल

d. पिथौरागढ़। (a)

6. इनमें से कौन-सी टिप्पणी प्राकृतिक वनस्पतिजात और प्राणिजात के हास का सही कारण नहीं है?

a. कृषि प्रसार

b. वृहत् स्तरीय विकास परियोजनाएँ

c. पशुचारण और ईंधन लकड़ी एकत्रित करना

d. तीव्र औद्योगीकरण और शहरीकरण । (c)

7. इनमें से कौन-सा संरक्षण तरीका समुदायों की सीधी भागीदारी नहीं करता?

a. संयुक्त वन प्रबंधन

b. बीज बचाओ आंदोलन

c. चिपको आंदोलन

d. वन्य जीव पशु विहार (sanctuary) का परिसीमन । (d)

8. चिपको आंदोलन का क्या उद्देश्य था?

a. हिमालय क्षेत्र में महिला मंगल दल द्वारा वृक्षों से चिपककर उसकी रक्षा करना।

b. जंगली जानवरों की रक्षा के लिए चलाया गया आंदोलन।

c. राजस्थान में खेजड़ी वृक्ष रक्षा अभियान |

d. पर्यावरणविदों द्वारा वनों को बचाने के लिए अभियान । (a)

9. निम्नलिखित राज्यों में से किस राज्य में कॉर्बेट राष्ट्रीय पार्क (Corbett National Park) स्थित है?

a. असम

b. मध्य प्रदेश

c. राजस्थान

d. उत्तराखंड । (d)

10. भारत के किस राज्य में स्थायी वनों के अंतर्गत सबसे अधिक क्षेत्र है?

a. पंजाब

b. अरुणाचल प्रदेश

c. मध्य प्रदेश

d. गुजरात | (c)

11. देश में कितने प्रतिशत वनस्पतिजात और स्तनधारियों के सम्मुख विलुप्त होने का संकट उपस्थित है?

a. 10% वन्य वनस्पतिजात और 20% स्तनधारी

b. 12% वन्य वनस्पतिजात और 30% स्तनधारी

c. 14% वन्य वनस्पतिजात और 32% स्तनधारी

d. 15% वन्य वनस्पतिजात और 33% स्तनधारी । (a)

12. विलुप्तप्राय वन्य प्राणियों में निम्न में से कौन शामिल हैं?

a. जंगली चित्तीदार उल्लू, चीता

b. गुलाबी सिर वाली बत्तख, पहाड़ी कोयल

c. मधुका इनसिगनिस, हुबरड़िया हेप्टांयूरोन

d. उपर्युक्त सभी। (d)

13. संयुक्त वन प्रबंधन का प्रस्ताव पारित करने वाला भारत का पहला राज्य है—

a. बिहार सन् 1982

b. छत्तीसगढ़ सन् 1986

c. ओडिशा सन् 1988

d. महाराष्ट्र सन् 1990 (c)

14. सुंदरवन राष्ट्रीय पार्क किस राज्य में स्थित है?

a. असम

b. ओडिशा

c. प० बंगाल

d. मध्य प्रदेश (c)

15. स्थानांतरी कृषि को पूर्वोत्तर भारत में किस नाम से जाना जाता है?

a. झूमिंग कृषि

b. आदिम कृषि

c. मिल्पा कृषि

d. टाल्मा कृषि | (a)

16. भूदान आंदोलन किसके द्वारा आरंभ किया गया?

a. महात्मा गांधी

b. जवाहरलाल नेहरू

c. विनोबा भावे

d. इंदिरा गांधी । (c)

17. वन्य जीव अधिनियम किस वर्ष लागू किया गया?

a. सन् 1972 में

b. सन् 1974 में

c. सन् 1976 में

d. सन् 1980 में। (a)

18. सरिस्का बाघ रिजर्व किस राज्य में स्थित है?

a. उत्तर प्रदेश

b. मध्य प्रदेश

c. राजस्थान

d. गुजरात। (c)

19. निम्न में से कौन एक सुभेद्य जातियों का उदाहरण नहीं है?

a. नीली भेड़

b. एशियाई हाथी

c. गंगा नदी की डॉल्फिन

d. अंडमानी जंगली सुअर । (d)

20. निम्न में से कौन-सा वन सरकार के प्रबंधन क्षेत्र में शामिल नहीं है?

a. आरक्षित वन

b. रक्षित वन

c. अवर्गीकृत वन

d. भैरोंदेव डाक सेंचुरी । (d)

21. वर्ष 1952 से नदी घाटी परियोजनाओं के कारण लगभग कितने वन क्षेत्र को साफ करना पड़ा है?

a. 4000 वर्ग किमी

b. 5000 वर्ग किमी

c. 6000 वर्ग किमी

d. 7000 वर्ग किमी। (b)

22. भारत के किस राज्य का 4,00,000 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र नर्मदा सागर परियोजना के पूर्ण होने से जलमग्न हो जाएगा?

a. राजस्थान

b. गुजरात

c. मध्य प्रदेश

d. आंध्र प्रदेश (c)

23. बक्सा टाइगर रिजर्व अवस्थित है—

a. केरल में

b. तेलंगाना में

c. कर्नाटक में

d. पश्चिम बंगाल में। (d)

24. देश के मूल्यवान वन पदार्थों, खनिजों और अन्य संसाधनों के संचय कोष हैं-

a. पारिस्थितिक तंत्र

b. अजैव तंत्र

c. मानवीय तंत्र

d. इनमें से कोई नहीं। (a)

25. भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम किस वर्ष लागू हुआ?

a. वर्ष 1970 में

b. वर्ष 1972 में

c. वर्ष 1975 में

d. वर्ष 1978 में। (b)

26. वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत शामिल है-

a. संकटग्रस्त जातियों का बचाव

b. शिकार प्रतिबंधन

c. वन्यजीव आवासों का कानूनी रक्षण

d. उपर्युक्त सभी। (d)

27. भारत के किस राज्य में एक सींग वाला गैंडा पाया जाता है?

a. मेघालय

b. मिजोरम

c. असम

d. मणिपुर | (c)

28. निम्न में से किस वन्यजीव के शिकार और व्यापार पर संपूर्ण अथवा आंशिक प्रतिबंध लगाकर कानूनी संरक्षण दिया गया है?

a. भारतीय हाथी

b. काला हिरण

c. चिंकारा

d. ये सभी। (d)

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. प्राणिजात किसे कहते हैं?

उत्तर- सभी प्रकार के पशु-पक्षी, जीवाणु, सूक्ष्म जीवाणु एवं मनुष्य समेकित रूप से प्राणिजात कहलाते हैं।

प्रश्न 2. भारत का कितने प्रतिशत भू-भाग वनों से ढका है?

उत्तर- भारत का 678 लाख हेक्टेयर क्षेत्र वनाच्छादित है जो भौगोलिक क्षेत्रफल का 20.64% भाग है।

प्रश्न 3. भारत में जंगली जीवों के लिए पाँच प्रमुख आरक्षित क्षेत्र कौन से हैं?

उत्तर – भारत में जंगली जीवों के लिए पाँच प्रमुख आरक्षित क्षेत्र नीलगिरी, नंदादेवी, नोकरेक, अंडमान-निकोबार तथा कंचनजंघा हैं।

प्रश्न 4. पारिस्थितिक तंत्र किसे कहते हैं?

उत्तर- मानव और दूसरे जीवधारी मिलकर एक पारस्परिक जटिल तंत्र का निर्माण करते हैं, जिसे पारिस्थितिक तंत्र कहते हैं।

प्रश्न 5. जैव विविधता से क्या आशय है?

उत्तर- पेड़-पौधों एवं प्राणी जगत् में जो विभिन्न प्रकार की प्रजातियाँ मिलती हैं, वे जैव विविधता के अंतर्गत आती हैं। ये प्रकृति की धरोहर हैं। इनका संरक्षण और सुरक्षा प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।

प्रश्न 6. नीलगिरी आरक्षित क्षेत्र का विस्तार किन राज्यों में है?

उत्तर- नीलगिरी आरक्षित क्षेत्र कर्नाटक, तमिलनाडु तथा केरल तक विस्तृत है।

प्रश्न 7. कौन-सा टाइगर रिजर्व पश्चिम बंगाल में डोलोमाइट खनन के कारण अस्तित्व के संकट का सामना कर रहा है?

उत्तर – पश्चिम बंगाल में यह टाइगर रिजर्व है-बक्सा टाइगर रिजर्व ।

प्रश्न 8. भारत में कितने प्रतिशत जीव-जंतुओं के विलुप्त होने का संकट उत्पन्न हो गया है?

उत्तर- भारत में लगभग 10 प्रतिशत वन्य वनस्पतिजात और 20 प्रतिशत स्तनधारियों के लुप्त होने का खतरा है। इनमें से चीता, गुलाबी सिर वाली बत्तख, पहाड़ी कोयल, जंगली चित्तीदार उल्लू और मधुका इनसिंगनिस और हुबरड़िया हेप्टांयूरोन जैसे पौधे शामिल हैं।

प्रश्न 9. उन पाँच राज्यों के नाम बताइए जिनमें सर्वाधिक क्षेत्र संरक्षित वनों के अंतर्गत हैं?

उत्तर- सर्वाधिक संरक्षित वनों वाले राज्य – बिहार, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा हैं।

प्रश्न 10. वन्य प्राणियों की संकटग्रस्त प्रजातियों को बचाने हेतु दो सुझाव दीजिए।

उत्तर- (1) शिकार पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

(2) राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य अधिक संख्या में स्थापित किए जाने चाहिए।

प्रश्न 11. भूदान ग्रामदान आंदोलन किसने शुरू किया था?

उत्तर- भूदान ग्रामदान आंदोलन विनोबा भावे ने शुरू किया था।

प्रश्न 12. सुरक्षित वन क्या हैं?

उत्तर- सुरक्षित वन वे वन हैं जो इमारती लकड़ी अथवा वन उत्पादों को प्राप्त करने के लिए स्थायी रूप से सुरक्षित कर लिए गए हैं और इनमें पशुओं को चराने एवं खेती करने की अनुमति नहीं दी जाती है देश में कुल वन क्षेत्र का 54.4% भाग सुरक्षित वनों की श्रेणी में सम्मिलित है।

प्रश्न 13. जैव आरक्षित क्षेत्र किसे कहते हैं?

उत्तर- जैव विविधता संरक्षण हेतु बनाए गए क्षेत्र को जैव आरक्षित क्षेत्र कहते हैं। फूलों की घाटी (उत्तराखंड) तथा नीलगिरी (दक्षिण) जैव आरक्षित क्षेत्र के उदाहरण हैं।

प्रश्न 14. पारिस्थितिकी तंत्र को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर- पेड़-पौधों, जानवरों, मनुष्यों तथा अन्य वस्तुओं के बीच संबंध पारिस्थितिक तंत्र कहलाता है ये एक-दूसरे पर निर्भर हैं। एक के बिना दूसरे का अस्तित्व संभव नहीं है।

प्रश्न 15. दुर्लभ जातियाँ किसे कहते हैं?

उत्तर- इन जातियों की संख्या बहुत कम या सुभेद्य है और यदि इनको प्रभावित करने वाली विषम परिस्थितियाँ परिवर्तित नहीं होतीं तो यह संकटग्रस्त जातियों की श्रेणी में आ सकती हैं।

प्रश्न 16. वनों और वन्यजीवन का विनाश किस विषय से जुड़ा हुआ है?

उत्तर- वनों और वन्यजीवन का विनाश मात्र जीव विज्ञान का विषय नहीं है। जैव संसाधनों का विनाश सांस्कृतिक विविधता के विनाश से भी जुड़ा हुआ है।

प्रश्न 17. वनों पर आधारित समुदाय निर्धन क्यों होते जा रहे हैं?

उत्तर – वनों पर आधारित समुदाय खाने-पीने, औषधि, संस्कृति, अध्यात्म इत्यादि के लिए वनों और वन्य जीवों पर निर्भर हैं। जैव विनाश के कारण कई मूल जातियाँ और वनों पर आधारित समुदाय निर्धन होते जा रहे हैं तथा हाशिये पर पहुँच गए हैं।

प्रश्न 18. वनों के विनाश से महिलाओं की समस्याएँ क्यों बढ़ जाती हैं?

उत्तर- कई समाज में खाना, चारा, जल और अन्य आवश्यकताओं की वस्तुएँ एकत्र करने का उत्तरदायित्व महिलाओं का ही होता है। जैसे-जैसे इन संसाधनों की कमी होती है, महिलाओं पर कार्यभार बढ़ता है। उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ झेलनी पड़ती हैं। कार्य का समय बढ़ने के कारण घर और बच्चों की उपेक्षा होती है जिसके गंभीर सामाजिक दुष्परिणाम होते हैं।

प्रश्न 19. वन कटाई के कोई दो परोक्ष परिणाम बताइए।

उत्तर- वन कटाई के परोक्ष परिणाम सूखा तथा बाढ़ हैं।

प्रश्न 20. चिपको आंदोलन का उद्देश्य बताइए।

उत्तर – हिमालय में वन कटाई को रोकने एवं सामुदायिक वनीकरण अभियान चलाने के लिए चमोली (उत्तराखंड) में सुंदरलाल बहुगुणा द्वारा चिपको आंदोलन चलाया गया।

प्रश्न 21. बीज बचाओ आंदोलन तथा नवदानय से क्या संभव हुआ है?

उत्तर- टिहरी में किसानों का बीज बचाओ आंदोलन तथा नवदानय ने दिखा दिया है कि रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग के बिना भी विविध फसल उत्पादन द्वारा आर्थिक रूप से व्यवहार्य कृषि उत्पादन संभव है।

प्रश्न 22. भारत में संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रम की शुरुआत कब हुई?

उत्तर- भारत में संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 1988 में हुई, जब ओडिशा राज्य ने संयुक्त वन प्रबंधन का पहला प्रस्ताव पारित किया।

प्रश्न 23. संयुक्त वन प्रबंधन’ क्या कार्य करता है?

उत्तर- वन विभाग के अंतर्गत ‘संयुक्त वन प्रबंधन क्षरित वनों के बचाव के लिए कार्य करता है। इसमें ग्रामीण स्तर पर संस्थाएँ बनाई जाती हैं जिसमें ग्रामीण और वन विभाग के अधिकारी संयुक्त रूप से

कार्य करते हैं।

प्रश्न 24. संकटग्रस्त प्रजातियों से क्या अभिप्राय है?

उत्तर – संकटग्रस्त प्रजातियाँ वे हैं जिनके लुप्त होने का खतरा उत्पन्न हो गया है। यह खतरा जिन कारणों से उत्पन्न हुआ है वे अभी भी जारी हैं, जैसे- कटाई, पर्यावरण प्रदूषण, भीषण अग्निकांड या फिर अनियंत्रित शिकार |

प्रश्न 25. स्थानिक प्रजातियाँ कौन-सी होती हैं?

उत्तर – प्राकृतिक या भौगोलिक सीमाओं से अलग विशेष क्षेत्रों में पाई जाने वाली प्रजातियाँ, जैसे- अंडमानी टील, निकोबारी मेगापोड, अंडमानी जंगली सुअर आदि ।

प्रश्न 26. लुप्त प्रजातियाँ किसे कहते हैं?

उत्तर- वे प्रजातियाँ जो अपने स्थान पर नहीं पाई जाती हैं, उन्हें लुप्त प्रजातियाँ कहते हैं।

प्रश्न 27. दुर्लभ प्रजातियों से क्या आशय है?

उत्तर- इन प्रजातियों की संख्या बहुत कम या सुभेद्य है और यदि इनको प्रभावित करने वाली विषम परिस्थितियाँ परिवर्तित नहीं होती हैं तो ये संकटग्रस्त प्रजातियों की श्रेणी में आ सकती हैं।

प्रश्न 28. राष्ट्रीय उद्यान से क्या अभिप्राय है?

उत्तर- ऐसे उद्यान जिनमें जंगली जीवों को उनके प्राकृतिक पर्यावरण में संरक्षित रखा जाता है। राष्ट्रीय उद्यान कहलाते हैं।

प्रश्न 29. भारत के किस राज्य में एक सींग वाले गैंडे के संरक्षण के लिए विशेष योजना चलाई जा रही है?

उत्तर- भारत के असम राज्य में एक सींग वाले गैंडे से संबंधित विशेष योजना चलाई जा रही है।

प्रश्न 30. वन्यजीव संरक्षण नीति के अंतर्गत क्या शामिल है?

उत्तर- वन्य प्राणियों, जीव-जंतुओं के विभिन्न पहलुओं तथा इनसे जुड़े विविध तथ्यों को वन्य संरक्षण नीति में शामिल किया गया है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. जैव विविधता का अर्थ व मानव जीवन के लिए इसका महत्त्व बताइए।

उत्तर-

जैव विविधता का अर्थ

जैव विविधता जीवमंडलों में पाए जाने वाले जीवों की विभिन्न जातियों में पायी जाने वाली विविधता है। दूसरे शब्दों में कहें तो जैव विविधता वनस्पति एवं प्राणियों में पाए जाने वाले जातीय विभेद को प्रकट करती है। भू-पृष्ठ पर वर्तमान जैव विविधता अरबों वर्षों से हो रहे जीवन के सतत् विकास की प्रक्रिया का परिणाम है। पर्यावरण हास के कारण जैव-विविधता का क्षय हुआ है। जीवों की अनेक प्रजातियाँ लुप्त हो गई हैं तथा कई संकटग्रस्त हैं।

मानव जीवन के लिए महत्त्व

मानव अपने उत्पत्तिकाल से ही विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति जीव जगत से ही करता चला आ रहा है। मानव को भोजन, आवास एवं परिवेश संबंधी विभिन्न आवश्यकताओं और अपने अस्तित्व के लिए जैव विविधता पर ही निर्भर रहना पड़ता है। जैव विविधता के उपभोग की दृष्टि से ही मानव ने अधिक उपयोगी प्राणियों और पौधों का पालतूकरण किया है। कृषि एवं पशुपालन इसी आवश्यकता का परिणाम है।

प्रश्न 2. मानव क्रियाएँ किस प्रकार प्राकृतिक वनस्पतिज्ञात और प्राणिजात के हास की कारक हैं?

उत्तर- मानव ने अपनी विभिन्न प्रकार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रकृति के अनेक पदार्थों को संसाधनों में परिवर्तित कर लिया है। इसी कारण मानव ने वन एवं वन्य जीवों को भारी नुकसान पहुँचाया है। भारत में वनों एवं वन्य जीवों की सबसे अधिक हानि उपनिवेश काल में रेललाइन, कृषि व्यवसाय, वाणिज्य, वानिकी और खनन क्रियाओं में वृद्धि से हुई है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जैसे-जैसे जनसंख्या में वृद्धि हुई, जैव विविधता का विनाश और भी अधिक तीव्र गति से हुआ। कृषि के अतिरिक्त मानव ने बड़े बाँध और आवास भी बनाए हैं। भूमि के इस उपयोग से भी जैव विविधता का ह्रास हुआ है। अतः मानव अन्य सभी कारकों की अपेक्षा जैव विविधता के हास एवं विनाश के लिए अपेक्षाकृत अधिक उत्तरदायी है।

प्रश्न 3. पारिस्थितिक तंत्र किसे कहते हैं? वन एवं वन्य जीवों के लिए इसका क्या महत्त्व है?

उत्तर- पेड़-पौधे (वनस्पति), जीव-जंतु, सूक्ष्म जीवाणु तथा भौतिक पर्यावरण मिलकर पारितंत्र की रचना करते हैं। इसे पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) भी कहते हैं। “पारिस्थितिकी जीव विज्ञान का वह भाग है जिसके द्वारा हमें जीव तथा पर्यावरण की पारस्परिक प्रतिक्रियाओं का बोध होता है।” इस प्रकार विभिन्न जीवों के पारस्परिक संबंधों द्वारा पुनः उनका भौतिक पर्यावरण से संबंधों का अध्ययन पारिस्थितिक विज्ञान (Ecology) कहलाता है। जीव और उसका पर्यावरण प्रकृति के जटिल तथा गतिशील घटक हैं। पर्यावरण अनेक कारकों द्वारा निर्धारित होता है। ये कारक जीवों को प्रभावित करते रहते हैं। जीव भी अपनी वृद्धि, व्यवहार तथा जीवनवृत्त के पारस्परिक प्रभाव से पर्यावरण को प्रभावित करते हैं। किसी क्षेत्र में रहने वाले जीव-जंतु एवं पादप एक- दूसरे को प्रभावित करते हैं, उनमें परस्पर तथा भौतिक पर्यावरण के साथ पदार्थों एवं ऊर्जा का विनिमय होता रहता है। निरंतर पारस्परिक क्रियाओं के कारण पारितंत्र भी उतना ही गतिशील हो जाता है जितना कि भौतिक पर्यावरण विभिन्न प्रकार के जीव भौतिक पर्यावरण में होने वाले किसी भी परिवर्तन के अनुसार स्वयं को ढाल लेते हैं अर्थात् वे भौतिक पर्यावरण का अपनी आवश्यकतानुसार अनुकूलन कर लेते हैं।

प्रश्न 4. ‘चिपको आंदोलन’ क्या है?

उत्तर- ‘चिपको आंदोलन पर्यावरण सुरक्षा का एक आंदोलन है। यह आंदोलन भारत के उत्तराखंड (तब उत्तर प्रदेश) में किसानों ने वृक्षों की कटाई का विरोध करने के लिए किया था। वे राज्य के वन विभाग के ठेकेदारों द्वारा वनों की कटाई का विरोध कर रहे थे और उन पर अपना परंपरागत अधिकार मानते थे।

यह आंदोलन तत्कालीन उत्तर प्रदेश के चमोली जिले में सन् 1970 में प्रारंभ हुआ। इसके प्रणेता सुंदरलाल बहुगुणा, कामरेड गोंविद सिंह रावत, चंडीप्रसाद भट्ट तथा श्रीमती गौरादेवी थे।

प्रश्न 5. अंतर कीजिए— विलुप्त और संकटग्रस्त प्रजातियाँ।

उत्तर- विलुप्त और संकटग्रस्त प्रजातियों में अंतर

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. वन्य जीवों के संरक्षण के लिए भारत में क्या प्रयास किए गए हैं?

उत्तर- भारत में वन्य जीवों का विनाश निरंतर हो रहा है। इसके लिए प्राकृतिक एवं मानवीय दोनों प्रकार के कारक उत्तरदायी हैं। अनेक प्रजातियाँ पूर्णरूप से विलुप्त हो चुकी हैं। इस विलुप्तता पर मानवीय कारकों का सर्वाधिक प्रभाव रहा है। तीव्र औद्योगीकरण, वनों का भारी विनाश, प्राकृतिक संसाधनों का अविवेकपूर्ण दोहन, प्राकृतिक स्थल विनाश ने वन्य जीवों के प्राकृतिक आवासों को संकुचित कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप अनेक प्रजातियाँ संकटग्रस्त हैं।

भारत में वन्य जीवों को संरक्षण प्रदान करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। संकटापन्न प्रजातियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस विषय में नवीनतम स्थिति तथा प्रवृत्तियों की जानकारी के लिए पशु-पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों की गणना की जाती है। भारतीय वन्यप्राणी बोर्ड द्वारा सन् 1973 में बाघ संरक्षण परियोजना आरंभ की गई है, जिसमें बाघों की सुरक्षा एवं संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया है। वन्य जीव संरक्षण की दिशा में अन्य प्रयासों के अंतर्गत राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्यों की स्थापना की गई है। इसके साथ-साथ कस्तूरी मृग, हांगुल (मृग की एक प्रजाति), थामिन (मृग) गिरिसिंह, हाथी, रायनो (गैंडा) आदि के संरक्षण की परियोजनाएँ भी आरंभ की गई हैं।

इस प्रकार वन्य जीवों के संरक्षण में इन परियोजनाओं तथा आंदोलनों के प्रयासों से उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं तथा कई ऐसी प्रजातियों को संरक्षित किया गया है, जो विनाश के कगार पर थीं। वन्यजीवों के संरक्षण के लिए मानव का जागरूक होना आवश्यक है। वर्तमान में जैविक संपदा के संरक्षण हेतु विभिन्न महत्त्वपूर्ण स्थल विकसित किए गए हैं। ये स्थल जैविक विविधता, अपनी प्राकृतिक विशेषता एवं प्रभाविता के कारण बने रहने वाले हैं। वस्तुतः वन्य जीवों तथा वनस्पति, दोनों का ही संरक्षण स्वयं मानव समुदाय की प्रगति के लिए आवश्यक है।

प्रश्न 2. प्रशासनिक आधार पर वन कितने प्रकार के होते हैं? वर्णन कीजिए।

उत्तर – प्रशासनिक आधार पर वनों के प्रकार

भारत की धरातलीय संरचना, जलवायविक विभिन्नताओं और मृदा में असमानता के कारण प्राकृतिक वनस्पति में भी भिन्नता पायी जाती है। प्राकृतिक वनस्पति के अंतर्गत उष्णकटिबंधीय वर्षा वन, उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन, उष्णकटिबंधीय कँटीले वन और झाड़ियाँ, शीतोष्ण कटिबंधीय वन, अल्पाइन और टुंड्रा वनस्पति पाए जाते हैं। विभिन्न भौगोलिक कारक प्राकृतिक वनस्पति की जातियों, उनकी प्रकृति और उनके वितरण को निर्धारित करते हैं। प्रशासनिक उद्देश्यों के आधार पर भी वनों का विभाजन किया जाता है। इन्हें तीन वर्गों में बाँटा जाता है-

(i) आरक्षित वन (ii) संरक्षित वन (iii) अवर्गीकृत वन ।

(i) आरक्षित वन- वे वन, जो इमारती लकड़ी अथवा वन उत्पादों को प्राप्त करने के लिए स्थायी रूप से सुरक्षित कर लिए गए हैं और इनमें पशुओं को चराने तथा खेती करने की अनुमति नहीं दी जाती है। देश के कुल वन क्षेत्र का 54.4% भाग आरक्षित वनों की श्रेणी में सम्मिलित है।

(ii) संरक्षित वन- वे वन, जिनमें पशुओं को चराने व खेती करने की अनुमति कुछ विशिष्ट प्रतिबंधों के साथ प्रदान की जाती है। भारत में 29.29% वन क्षेत्रफल पर संरक्षित वनों का विस्तार है।

(iii) अवर्गीकृत वन- वे वन, जो अधिकांशतः दुर्गम हैं। अत्यधिक ऊँचाई एवं सघनता के कारण इन वनों में प्रवेश करना बड़ा ही कठिन होता है। इसी कारण इन वनों को अवर्गीकृत श्रेणी में रखा गया है। देश कै कुल वन क्षेत्र के 16.4% भाग पर इन वनों का विस्तार पाया जाता है।

वनों को सघनता के आधार पर भी विभाजित किया जाता है जिन्हें सघन वन, खुले वन तथा मैंग्रोव वन के नाम से विभाजित किया जाता है। देश में 59% सघन वन 40% खुले वन तथा 19% से भी कम क्षेत्र पर मैंग्रोव वनों का विस्तार है।

प्रश्न 3. भारत में जैव विविधता की समृद्धि एवं विलुप्ति पर प्रकाश डालिए।

उत्तर- भारत जैव विविधता की दृष्टि से विश्व के सबसे समृद्ध देशों में सम्मिलित है। यहाँ विश्व की सभी जैव उपजातियों का लगभग 8 प्रतिशत अर्थात् 16 लाख उपजातियों की संख्या मिलती है। इसीलिए भारत को वृहद् जैव विविधता वाला देश कहा जाता है। एक अनुमान के अनुसार, देश में 46,000 प्राणियों की 90,000 जातियाँ पायी जाती हैं। यहाँ पुष्पी पादपों की 13,000: कवकों की 20,000 कीट-पतंगों की 60,000 कीड़े-मकोड़ों की 4,000: मछलियों की 2,000 पक्षियों की 1,200 सरीसृपों की 420 स्तनधारियों की 370 तथा उभयचरों की लगभग 200 जातियाँ पायी जाती हैं।

उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है कि भारत वास्तव में जैव विविधता की दृष्टि से एक समृद्ध देश है किंतु वर्तमान में मानव के प्रकृति के विरुद्ध कार्य के कारण वन एवं वन्यजीवों की अनेक जातियाँ विलुप्त हो गई हैं या संकटग्रस्त हैं। कुछ विद्वान यह कहते हैं कि देश में 10 प्रतिशत वन्य वनस्पतिज्ञात और 20 प्रतिशत स्तनधारियों को लुप्त होने का खतरा है। इनमें चीता, गुलाबी सिर वाली बतख, पहाड़ी कोयल (quail), जंगली चित्तीदार उल्लू, मधुका आदि मुख्य हैं। ऐसा भी अनुमान है कि भारत में स्तनधारियों की 79. पक्षियों की 44, सरीसृपों की 15. जलस्थल चरों की 3 तथा पादपों की लगभग 1,500 जातियों (लगभग) के लुप्त होने का खतरा है।

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