Chapter 3 Latitude, Longitude and Time (अक्षांश, देशांतर और समय)

पाठ्य-पुस्तक के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें:
(i) पृथ्वी पर दो प्राकृतिक सन्दर्भ बिन्दु कौन-से हैं?
उत्तर-पृथ्वी के अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व घूर्णन करने से दो प्राकृतिक सन्दर्भ बिन्दु प्राप्त होते हैं, जो उत्तरी ध्रुव एवं दक्षिणी ध्रुव कहलाते हैं।

(ii) बृहत् वृत्त क्या है?
उत्तर-उत्तरी ध्रुव एवं दक्षिणी ध्रुव के मध्य विषुवत रेखा को सबसे बड़ा अक्षांश या बृहत् वृत्त कहा जाता है। यह अक्षांश रेखाओं द्वारा बना सबसे बड़ा बृहत् है जो ग्लोब (पृथ्वी) को दो बराबर भागों में बाँटता है। |

(iii) निर्देशांक क्या है?
उत्तर-अक्षांश एवं देशान्तर रेखाओं को सामान्यतः भौगोलिक निर्देशांक (Co-ordinate) कहा जाता है, क्योंकि ये रेखाओं के जाल का एक तन्त्र बनाती हैं, जिस पर हम धरातल के विभिन्न लक्षणों की स्थिति को प्रदर्शित कर सकते हैं। इन निर्देशांकों की सहायता से विभिन्न बिन्दुओं की अवस्थिति, दूरी तथा दिशा को आसानी से निर्धारित किया जा सकता है।

(iv) सूर्य पूर्व से पश्चिम जाता हुआ क्यों दिखाई देता है?
उत्तर–हम जानते हैं कि पृथ्वी अपनी धुरी पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है। इसीलिए सूर्य पूर्व में उदय और पश्चिम में अस्त होता है। अतः हमें सूर्य पूर्व से पश्चिम की ओर जाता हुआ दिखाई देता है।

(v) स्थानीय समय से आप क्या समझते हैं?
उत्तर–किसी देश का स्थानीय समय वहाँ के प्रमुख याम्योत्तर पर होने वाला समय होता है अर्थात् किसी स्थान के देशान्तर पर जब सूर्य ठीक ऊपर होता है तो दोपहर के 12 बजे होते हैं। यह उस स्थान का स्थानीय समय कहलाता है।

प्रश्न 2. अक्षांशों एवं देशान्तरों के बीच अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तर-अक्षांश एवं देशान्तर रेखाओं के मध्य अन्तर

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परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. जब ग्रिनिच पर दोपहर के 12 बजे हैं, तब 90° पूर्व देशान्तर पर स्थत थिम्पू, भूटान का स्थानीय समय क्या होगा? (पा० पु० पृ० सं० 28)
प्रकथन-प्रमुख याम्योत्तर के पूर्व में प्रति 1° देशान्तर पर समय 4 मिनट की दर से बढ़ता है।
उत्तर–ग्रिनिच एवं थिम्पू के बीच का अन्तर = 90° देशान्तर
समय को कुल अन्तर = 90 x 4 = 360 मिनट
= [latex s=2]\\ \frac { 360 }{ 60 } [/latex] = 6 घण्टा।
अत: थिम्पू का स्थानीय समय ग्रिनिच से 6 घण्टे कम आया अर्थात् अपराह्न 6.00 बजे का होगा।

प्रश्न 2. जब ग्रिनिच पर दोपहर के 12 बजे हों, तब 90° पश्चिम देशान्तर पर स्थित न्यू औरलियेंस (अक्टूबर 2005 में कैटरीना तूफान से सबसे अधिक प्रभावित होने वाला क्षेत्र) का स्थानीय समय क्या होगा? (पा० पु० पृ० सं० 28)
प्रकथन–प्रमुख याम्योत्तर के पश्चिम में 1° देशान्तर पर समय 4 मिनट की दर से घटता है।
उत्तर–ग्रिनिच एवं न्यू औरलियेंस के बीच का अन्तर = 90° देशान्तर
समय का कुल अन्तर = 90 x 4 =360 मिनट
= [latex s=2]\\ \frac { 360 }{ 60 } [/latex] = 6 घण्टा
अत: न्यू औरलियेंस का स्थानीय समय ग्रिनिच से 6 घण्टा कम आया अर्थात् अपराह्न 6.00 बजे का होगा।

प्रश्न 3. मानक याम्योत्तर का चुनाव किस प्रकार किया जाता है? भारत के मानक समय का निर्धारण बताइए। विश्व में कितने समय कटिबन्ध हैं?
उत्तर-मानक याम्योत्तर का चुनाव इस प्रकार किया जाता है कि यह 150° या 7° 30′ द्वारा विभाजित हो, ताकि मानक समय एवं ग्रिनिच माध्य समय के बीच के अन्तर को 1 या आधे घण्टे के गुणांक को बताया जा सके।

भारत के मानक समय का निर्धारण 82° 30′ पू० (E) से किया जाता है, जोकि मिर्जापुर से गुजरती है। अतः भारतीय मानक समय (IST) ग्रिनिच माध्य समय (GMT) से [latex s=2]5 \frac { 1 }{ 2 } [/latex] घण्टे आगे है। (82°30′ x 4) * (60 मिनट) = 5 घण्टे 30 मिनट।.

विश्व के सभी देश अपनी प्रशासनिक सीमाओं के अन्दर तक मानक याम्योत्तर तय करके देश के स्थानीय समय का निर्धारण करते हैं। पूर्व-पश्चिम में अधिक विस्तार वाले देश एक से अधिक याम्योत्तर चुन सकते हैं, जैसा कि रूस, कनाडा तथा संयुक्त राज्य अमेरिका में है।

विश्व को मानक याम्योत्तर समय के आधार पर 24 कटिबन्धों में विभाजित किया गया है। (चित्र 3.1)

प्रश्न 4. किस देशान्तर के समय में 0° देशान्तर से ठीक 12 घण्टे का अन्तर होता है, चाहे प्रमुख याम्योत्तर से पूर्व जाएँ या पश्चिम?
उत्तर-180° देशान्तर पर समय में 0° देशान्तर से ठीक 12 घण्टे का अन्तर होता है। हम जानते हैं कि जहाँ विश्व को 24 टाइम जोन में विभाजित किया गया है, वहीं एक स्थान तो ऐसा होगा जहाँ ग्रिनिच समय से पूरे दिन का अन्तर होगा; अत: ऐसा स्थान, जहाँ से पृथ्वी पर सचमुच दिन का प्रारम्भ होता है, 180° देशान्तर रेखा लगभग उसी स्थान पर स्थित है, जहाँ से अन्तर्राष्ट्रीय तिथि रेखा गुजरती है। अत: इस देशान्तर के समय में 0° देशान्तर से ठीक 12 घण्टे का अन्तर होता है, चाहे प्रमुख याम्योत्तर से पूर्व जाएँ या पश्चिम।।

प्रश्न 5. सूर्य पूर्व से पश्चिम गोलार्द्ध में जाने में कितना समय लेता है? प्रति घण्टा या प्रति मिनट के आधार पर यह कितनी देशान्तर पार कर लेता है? समझाइए।
उत्तर-पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती हुई 360° देशान्तर अर्थात् एक चक्कर लगभग 24 घण्टे में पूरा करती है। चूंकि 180° देशान्तर प्रमुख याम्योत्तर के पूर्व एवं पश्चिम दोनों ओर स्थित है; अत: सूर्य पूर्व से पश्चिमी गोलार्द्धमें जाने में 12 घण्टे का समय लेता है।

इस प्रकार सूर्य पूर्व से पश्चिम प्रति घण्टा 15° देशान्तर या 4 मिनट में 1° देशान्तर को पार कर लेता है। इस आधार पर हम यह भी कह सकते हैं कि जब हम पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ते हैं तब स्थानीय समय बढ़ता है और जब हम पूर्व से पश्चिम की ओर बढ़ते हैं तब समय घटता है।

प्रश्न 6. ग्लोब (पृथ्वी) पर अक्षांश समान्तर एवं देशान्तर याम्योत्तर को चित्र द्वारा प्रदर्शित कीजिए।
उत्तर-चित्र 3.2 एवं 3.3 का अवलोकन कीजिए।

प्रश्न 7. भारत का मानक समय ज्ञात करो जबकि ग्रीनविच पर दोपहर के 12.00 बजे हैं। भारत का मानक समय इलाहाबाद में [latex s=2]82\frac { { 1 }^{ O } }{ 2 } [/latex] पूर्व से मापा जाता है।

प्रश्न 8. अक्षांश समान्तर क्या हैं?
उत्तर–वे काल्पनिक रेखाएँ जो भूमध्य रेखा के समान्तर पूर्व से पश्चिम को खिंची हुई मानी गई हैं, अक्षांश समान्तर कहलाती हैं (चित्र 3.2)।

प्रश्न 9. देशान्तर याम्योत्तर क्या है?
उत्तर–उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव को मिलाने वाली काल्पनिक रेखाओं को देशान्तर याम्योत्तर कहते हैं। (चित्र 3.3)।

प्रश्न 10. पृथ्वी पर दो अक्षांशों के बीच की दूरी लगभग कितनी होती है?
उत्तर–दो अक्षांशों के बीच की दूरी लगभग 111 किलोमीटर होती है।’

प्रश्न 11. याम्योत्तर के बीच की दूरी विषुवैत वृत्त, ध्रुव तथा मध्य में कितनी होती है?
उत्तर-याम्योत्तर के बीच की दूरी सर्वत्र समान नहीं होती। यह दूरी विषुवत् वृत्त पर अधिकतम (111.3 किलोमीटर), ध्रुवों पर न्यूनतम (0 किलोमीटर) तथा मध्य में अर्थात् 45° अक्षांश पर यह 79 किलोमीटर होती है।

प्रश्न 12. ग्लोब के लिए 20° दक्षिणी अक्षांश समान्तर आप किस प्रकार बनाएँगे। चित्र द्वारा स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-एक किसी भी आकार का वृत्त बनाएँ तथा केन्द्र में से एक क्षैतिज रेखा खींचकर इसे दो बराबर भागों में बाँटें। यह आपकी विषुवत् रेखा होगी। इस वृत्त पर चॉदा (प्रोटेक्टर) को इस प्रकार से रखें कि चॉदा की 0° एवं 180° की रेखा वृत्त के मध्य खिंची रेखा से मिल जाए। अब 20° दे० (S) दर्शाने के लिए वृत्त के निचले आधे भाग में विषुवत् वृत्त से 20° का कोण बनाते हुए पूर्व एवं पश्चिम में दो बिद् लगाएँ जैसा कि चित्र 3.5 में दिखाया गया है। कोण की दोनों भुजाएँ वृत्त के दो बिन्दुओं को काटती हैं। विषुवत् वृत्त के समान्तर रेखा खींचते हुए इन दो बिन्दुओं को मिला दें। यही 20° दे० (S) होगा।