Chapter 5 आधुनिक विश्व में चरवाहे

In Text Questions and Answers

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प्रश्न 1. 
संक्षेप में बताइए कि चरवाहा परिवारों के औरत-मर्द क्या-क्या काम करते हैं? 
उत्तर:
चरवाहा परिवारों के औरत-मर्द निम्न कार्य करते हैं-

प्रश्न 2. 
आपकी राय में चरवाहे जंगलों के आसपास ही क्यों रहते हैं? 
उत्तर:
मेरी राय में चरवाहे निम्न कारणों से जंगलों के आसपास ही निवास करते हैं-

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प्रश्न 1.
मान लीजिए कि जंगलों में जानवरों को चराने पर रोक लगा दी गई है। इस बात पर निम्नलिखित की दृष्टि से टिप्पणी कीजिये : 
(1) एक वन अधिकारी 
(2) एक चरवाहा। 
उत्तर:
(1) एक वन अधिकारी-एक वन अधिकारी का यह कर्त्तव्य है कि वह वनों की सुरक्षा तथा देख-रेख करे। इसके लिए वह किसी चरवाहे को जंगल में अपने मवेशियों को चराने से रोके तथा उन्हें जंगल में प्रवेश करने से मना करे। 

(2) एक चरवाहा-चरवाहे जंगलों पर निर्भर होते हैं। वे भेड़-बकरियाँ तथा अन्य दुधारू पशु पालते हैं जिन्हें चराने की आवश्यकता होती है। इन जानवरों को वे जंगलों में चराते हैं। जंगलों में प्रवेश पर रोक लगाने से इनके मवेशियों का पेट भरने की समस्या उत्पन्न होगी तथा उनके जीवन को खतरा होगा। साथ ही चरवाहों की आजीविका भी व्यापक रूप से प्रभावित होगी। 

Textbook Questions and Answers

प्रश्न 1. 
स्पष्ट कीजिए कि घुमंतू समुदायों को बार-बार एक जगह से दूसरी जगह क्यों जाना पड़ता है? इस निरन्तर आवागमन से पर्यावरण को क्या लाभ हैं?
उत्तर:
घुमंतू समुदायों को निम्न कारणों से बार-बार एक जगह से दूसरी जगह जाना पड़ता है- 
(1) घुमंतू समुदायों का मुख्य कार्य अपने जानवरों को चराना होता है। अतः वे चारे के लिए अनुकूल जगहों पर घूमते रहते हैं। इसमें मौसमी दशाएँ मुख्य भूमिका निभाती हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले घुमंतू समुदाय के लोग सर्दी-गर्मी के अनुसार अपना स्थान परिवर्तन करते हैं। दक्षिण के गोल्ला, कुरुमा तथा कुरुबा समुदाय के लोग बरसात 3 अनुसार एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं। ये लोग सूखे महीनों में तटीय इलाकों की तरफ चले जाते हैं तथा वर्षा आने पर वापस चले आते हैं। इसी प्रकार राजस्थान के राइका भी बरसात और सूखे मौसम के अनुसार जगह बदलते हैं। 

(2) घुमंतू समुदाय अच्छे चरागाहों की तलाश में जगह बदलते रहते हैं। 

(3) रोजी-रोटी की तलाश तथा जीवनयापन की अनुकूल दशाओं हेतु वे एक से दूसरे स्थान पर घूमते रहते थे। 

निरन्तर आवागमन से पर्यावरण को लाभ- 

प्रश्न 2. 
इस बारे में चर्चा कीजिये कि औपनिवेशिक सरकार ने निम्नलिखित कानून क्यों बनाए? यह भी बताइये कि इन कानूनों से चरवाहों के जीवन पर क्या असर पड़ा? 
(1) परती भूमि नियमावली 
(2) वन अधिनियम 
(3) अपराधी जनजाति अधिनियम 
(4) चराई कर। 
उत्तर:
(1) परती भूमि नियमावली 
कारण-

चरवाहों के जीवन पर प्रभाव-

(2) वन अधिनियमों-औपनिवेशिक सरकार ने निम्नलिखित कारणों से वन अधिनियम बनाए- 

वन अधिनियमों का चरवाहों के जीवन पर प्रभाव-

(3) अपराधी जनजाति अधिनियम-औपनिवेशिक सरकार ने अपराधी जनजाति अधिनियम निम्न कारणों से बनाया- 

चरवाहों के जीवन पर प्रभाव-

(4) चराई कर- 
कारण-अंग्रेजी सरकार ने अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए चराई कर लगाया। इसके लिए चरागाहों में चरने वाले एक-एक जानवर पर टैक्स वसूल किया जाने लगा। प्रति मवेशी टैक्स की दर तेजी से बढ़ती चली गई। 

चरवाहों पर प्रभाव-

प्रश्न 3. 
मासाई समुदाय के चरागाह उससे क्यों छिन गये? कारण बताएँ। 
उत्तर:
मासाई समुदाय के चरागाह छिनने के प्रमुख कारण निम्न प्रकार हैं- 
(1) उपनिवेशवाद-19वीं शताब्दी के अन्त में, यूरोपीय साम्राज्यवादी शक्तियों के बीच, अफ्रीका के, क्षेत्रीय अधिकारों के लिए छीना-झपटी हो गई, जिस कारण क्षेत्र अनेक छोटे-छोटे उपनिवेशों में बँट गया। 1885 में ब्रिटिश कीनिया तथा जर्मन तांगायिका के बीच एक अन्तर्राष्ट्रीय सीमा खींचकर मासाईलैण्ड के दो बराबर टुकड़े कर दिये गये। श्रेष्ठ चरागाहों पर धीरे-धीरे गोरों को बसा दिया गया तथा मासाई लोगों को दक्षिण कीनिया तथा उत्तर तन्जानिया में एक छोटे से क्षेत्र में धकेल दिया गया। मासाई लोगों ने अपनी पूर्व उपनिवेशीय भूमि का 60% खो दिया। वे एक शुष्क प्रदेश तक ही सीमित हो गए जहाँ अनिश्चित वर्षा होती थी तथा घटिया चरागाह थे। 

(2) कृषि का विस्तार-पूर्वी अफ्रीका में ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार ने स्थानीय किसानों को कृषि का विस्तार करने के लिए प्रेरित किया। जैसे-जैसे कृषि का विस्तार हुआ, चरागाह कृषि-खेतों में बदल गए। 

(3) आरक्षित क्षेत्रों की स्थापना-बहुत से चरागाहों को शिकार के लिए आरक्षित कर दिया गया जैसे कीनिया में मासाई मारा तथा सांबरु नेशनल पार्क तथा तंजानिया में सेरेन्गेटी पार्क। चरवाह जाने की आज्ञा न थी। इनमें से अधिकतर क्षेत्र मासाई पशुओं के लिए नियमित चरागाह भूमियाँ थीं। उदाहरण के लिए सेरेंगेटी नेशनल पाके का 14,760 वर्ग कि.मी. से भी अधिक क्षेत्र मासाइयों के चरागाहों पर कब्जा करके बनाया गया था। 

(4) चरागाहों की गुणवत्ता में कमी-अच्छे चराई क्षेत्रों के छिन जाने तथा जल संसाधनों के अभाव से मासाई क्षेत्र पर दबाव पड़ा। छोटे से क्षेत्र में निरन्तर चराई से चरागाहों का स्तर गिर गया तथा चारे की हमेशा कमी रहने लगी। 

(5) सरहदें बन्द होना-19वीं सदी के आखिरी दशकों से पहले मासाई चरवाहे चरागाहों की खोज में दूर-दूर तक चले जाते थे, किन्तु 19वीं सदी के आखिरी दशकों से औपनिवेशिक सरकार ने उनकी आवाजाही पर अनेक पाबन्दियाँ लगा दी। इससे भी इनके चरागाह छिन गये। 

प्रश्न 4. 
आधुनिक विश्व ने भारत और पूर्वी अफ्रीकी चरवाहा समुदायों के जीवन में जिन परिवर्तनों को जन्म दिया उनमें कई समानताएँ थीं। ऐसे दो परिवर्तनों के बारे में लिखिए जो भारतीय चरवाहों और मासाई गडरियों, दोनों के बीच समान रूप से मौजूद थे। 
उत्तर:
वे परिवर्तन जो भारतीय चरवाहा समुदायों तथा मासाई पशुपालकों के लिये समान थे, वे हैं- 
(1) सरहदें बन्द करना-औपनिवेशिक काल से पहले मासाई भूमि उत्तरी तंजानिया के घास के मैदानों से उत्तरी कीनिया तक विस्तृत क्षेत्र में फैली थी। अफ्रीका में, जब यूरोपीय शक्तियों की क्षेत्रीय अधिकारों के लिए छीना-झपटी हुई, तो मासाई क्षेत्र को आधा कर दिया गया, जिसकी अन्तर्राष्ट्रीय सीमाएँ ब्रिटिश कीनिया तथा तंजानिया से लगती थीं। श्रेष्ठ भूमि पर गोरों ने अधिकार कर लिया तथा स्थानीय लोगों को प्रतिबन्धित चरागाहों के एक छोटे से क्षेत्र की ओर धकेल दिया। 

भारत में देश के विभाजन ने राइका चरवाहा समुदाय को हरियाणा में नए चरागाह खोजने के लिए मजबूर किया क्योंकि राजनैतिक विभाजन के कारण अब उन्हें पाकिस्तान के सिन्ध में जाने की आज्ञा न थी। 

(2) वन अधिनियम-विभिन्न वन कानन भी भारत तथा अफ्रीका में चरवाहों के जीवन में परिवर्तन लाने के लिए उत्तरदायी थे। भारत में वनों को आरक्षित तथा सुरक्षित दो वर्गों में विभाजित किया गया। किसी भी चरवाहे को आरक्षित वनों में जाने की आज्ञा न थी। सुरक्षित वनों में उनकी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाती थी। 

अफ्रीका में चरागाह भूमियों के बड़े क्षेत्र को शिकार के लिए आरक्षित कर दिया गया था। चरवाहों का इनमें प्रवेश प्रतिबन्धित कर दिया गया। 

श्रेष्ठ चरागाहों के छिन जाने तथा चरवाहों की गतिक्रियाओं पर प्रतिबन्धों ने उनकी जीवनशैली पर बुरा प्रभाव डाला। 

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