Chapter 5 Rulers and Buildings (Hindi Medium)

पाठगत प्रश्न

1. राजेन्द्र प्रथम तथा महमूद गजनवी की नीतियाँ किन रूपों में समकालीन समय की देन थीं और किन रूपों में ये एक-दूसरे से भिन्न थीं? (एन०सी०ई०आर०टी० पाठ्यपुस्तक, पेज-66)
उत्तर चोल राजा राजेन्द्र प्रथम ने दूसरे राज्यों पर जब आक्रमण किया था तो वहाँ से प्राप्त मूर्तियों को अपनी राजधानी में निर्मित मंदिरों में लगवाया था। इसी तरह से महमूद गजनवी ने जो भारत से धन प्राप्त किया था, उसे अपनी राजधानी को भव्य बनाने में खर्च किया।

दोनों में कई रूपों में भिन्नता थी। महमूद गजनवी ने भारत के कई मंदिरों को विध्वंस कर दिया था, लेकिन राजेंद्र प्रथम ने मंदिरों को विध्वंस नहीं किया था। महमूद गजनवी भारत से धन लूटकर गजनी ले गया था, लेकिन राजेन्द्र प्रथम ने जो दूसरे राज्यों से धन प्राप्त किया, उसे अपने राज्य में ही रहने दिया।

2. वास्तुकला की ‘गोथिक’ शैली के बारे में व्याख्या कीजिए। (एन०सी०ई०आर०टी पाठ्यपुस्तक, पेज-72)
उत्तर बारहवीं शताब्दी से फ्रांस में आरंभिक भवनों की तुलना में अधिक ऊँचे व हल्के चर्चे के निर्माण के प्रयास शुरू हुए। वास्तुकला की यह शैली गोथिक नाम से जानी जाती है। इस शैली की विशेषताएँ-नुकीले ऊँचे मेहराब, रंगीन काँच का प्रयोग, जिसमें प्रायः बाइबिल से लिए गए दृश्यों का चित्रण है तथा उड़ते हुए पुश्ते। दूर से ही दिखने वाली ऊँची मीनारें और घंटी वाले बुर्ज बाद में चर्च से जुड़े। इस वास्तुकलात्मक शैली के सर्वोत्कृष्ट ज्ञात उदाहरणों में से एक पेरिस का नाट्रेडम चर्च है। बारहवीं और तेरहवीं शताब्दियों के कई दशकों में इसका निर्माण हुआ।

प्रश्न-अभ्यास
(पाठ्यपुस्तक से)

फिर से याद करें

1. वास्तुकला का ‘अनुप्रस्थ टोडा निर्माण’ सिद्धांत ‘चापाकार’ सिद्धांत से किस तरह भिन्न है?
उत्तर अनुप्रस्थ टोडा निर्माण – सातवीं और दसवीं शताब्दी के मध्य वास्तुकार भवनों में और अधिक कमरे, दरवाजे और खिड़कियाँ बनाने लगे। छत, दरवाजे और खिड़कियाँ अभी भी दो ऊर्ध्वाकार खंभों के आर-पार एक अनुप्रस्थ शहतीर रखकर बनाए जाते थे। वास्तुकला की यह शैली ‘अनुप्रस्थ टोडा निर्माण’ कहलाई जाती है।
चापाकार सिद्धांत – दरवाज़ों और खिड़कियों के ऊपर की अधिरचना का भार कभी-कभी मेहराबों पर डाल दिया जाता था। वास्तुकला का यह ‘चापाकार’ रूप था।

2. ‘शिखर’ से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर मंदिर का शीर्ष जिसके नीचे गर्भगृह स्थित होता है, मंदिर का ‘शिखर’ कहलाता है।

3. ‘पितरा-दूरा’ क्या है?
उत्तर उत्कीर्णित संगमरमर अथवा बलुआ पत्थर पर रंगीन, ठोस पत्थरों को दबाकर बनाए गए सुंदर तथा अलंकृत नमूने ‘पितरा-दूरा’ कहलाता है।

4. एक मुगल चारबाग की क्या खास विशेषताएँ हैं?
उत्तर मुगल चारबाग की विशेषताएँ

  1. चारबाग चार समान हिस्सों में बँटे होते थे।
  2. यह बाग दीवार से घिरे होते थे।
  3. बाग कृत्रिम नहरों द्वारा चार भागों में विभाजित आयताकार अहाते में स्थित थे। आइए समझें

5. किसी मंदिर से एक राजा की महत्ता की सूचना कैसे मिलती थी?
उत्तर सभी विशालतम मंदिरों का निर्माण राजाओं ने करवाया था। दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मंदिर राजराजेश्वर मंदिर का निर्माण राजा राजदेव ने अपने देवता राजराजेश्वरम की उपासना हेतु किया था। इनके देवताओं के नाम राजा से मिलते-जुलते थे। राजा स्वयं को ईश्वर के रूप में दिखाना चाहता था। धार्मिक अनुष्ठान के जरिए मंदिर में एक देवता दूसरे देवता का सम्मान करता था।

मंदिर के अन्य लघु देवता शासक के सहयोगियों तथा अधीनस्थों के देवी-देवता थे। यह मंदिर शासक और सहयोगियों द्वारा शासित विश्व का एक लघु रूप ही था। जिस तरह से वे राजकीय मंदिरों में इकट्ठे होकर अपने देवताओं की उपासना करते थे।

6. दिल्ली में शाहजहाँ के दीवान-ए-खास में एक अभिलेख में कहा गया है-‘अगर पृथ्वी पर कहीं स्वर्ग है तो वह यहीं है, यहीं है, यहीं है।’ यह धारणा कैसे बनी?
उत्तर शाहजहाँ की पत्नी मुमताज की 1631 ई. में मृत्यु हो गई थी उसके बाद शाहजहाँ का मन आगरा से हट गया था। इसलिए उसने 1639 ई. में यमुना नदी के समीप लाल किला का निर्माण करवाया। लाल किला के अंदर बनाया गया दीवान-ए-खास संगमरमर का बना हुआ अद्भुत इमारत है, जिसमें कई तरह की नक्काशियाँ बनाई गई हैं। इसकी सुंदरता को देखते हुए ही दीवान-ए-खास में एक अभिलेख में कहा गया है-‘अगर पृथ्वी पर कहीं स्वर्ग है तो वह यहीं है, यहीं है, यहीं है।’

7. मुगल दरबार से इस बात को कैसे संकेत मिलता था कि बादशाह से धनी, निर्धन, शक्तिशाली, कमज़ोर सभी को समान न्याय मिलेगा?
उत्तर मुगल दरबार में निम्न बातों से संकेत मिलता है कि धनी, निर्धन, शक्तिशाली, कमजोर सभी को बादशाह
से समान न्याय मिलेगा

  1. बादशाह के सिंहासन के पीछे पितरा-दूरा के जड़ाऊ काम की एक श्रृंखला बनाई गई थी, जिसमें पौराणिक यूनानी देवता आर्फियस को वीणा बजाते हुए चित्रित किया गया था।
  2. ऐसा माना जाता था कि आर्फियस का संगीत आक्रामक जानवरों को भी शांत कर सकता है और वे शांतिपूर्वक एक-दूसरे के साथ रहने लगते हैं।
  3. शाहजहाँ के सार्वजनिक सभा भवन का निर्माण यह सूचित करता था कि न्याय करते समय राजी ऊँचे और निम्न सभी प्रकार के लोगों के साथ समान व्यवहार करेगा और सभी सद्भाव के साथ रह सकेंगे।

8. शाहजहाँनाबाद में नए मुगल शहर की योजना में यमुना नदी की क्या भूमिका थी?
उत्तर शाहजहाँ ने दिल्ली में यमुना नदी के तट पर स्थित सलीमगढ़ स्थान पर शाहजहाँनाबाद की नींव रखी थी, क्योंकि यह स्थान कई दृष्टि से उपयुक्त था

  1. यमुना नदी के तट पर होने के कारण इस शहर को पीने के लिए पानी आसानी से उपलब्ध था।
  2. यमुना नदी के तटवर्ती भाग प्रायः समतल था।
  3. दिल्ली में शाहजहाँनाबाद में उसने जो नया शहर निर्मित करवाया उसमें शाही महल नदी पर स्थित था। आइए विचार करें

9. आज धनी और शक्तिशाली लोग विशाल घरों का निर्माण करवाते हैं। अतीत में राजाओं तथा उनके दरबारियों के निर्माण किन मायनों में इनसे भिन्न थे?
उत्तर अतीत में राजाओं तथा उनके दरबारियों के निर्माण निम्न प्रकार से आज के धनी और शक्तिशाली लोगों के विशाल घरों से भिन्न थे

  1. अतीत के राजाओं के अधिकांश घर पत्थर के किले के रूप में निर्मित थे।
  2. किले को सुरक्षित करने के लिए किले के चारों ओर गड्ढे खोदे जाते थे।
  3. उनके आवास ऊँचे स्थल पर बनाए जाते थे।
  4. सुरक्षा को विशेष महत्त्व दिया जाता था।

10. चित्र-4 पर नज़र डालें। यह इमारत आज कैसे तेजी से बनवाई जा सकती है?
उत्तर छात्र स्वयं करें। आइए करके देखें

11. पता लगाएँ कि क्या आपके गाँव या कस्बे में किसी महान व्यक्ति की कोई प्रतिमा अथवा स्मारक है? इसे वहाँ क्यों स्थापित किया गया था? इसका प्रयोजन क्या है?
उत्तर छात्र स्वयं करें।

12. अपने आस-पास के किसी पार्क या बाग की सैर करके उसका वर्णन करें। किन मायनों में ये मुगल बागों से समान अथवा भिन्न हैं?
उत्तर छात्र स्वयं करें।

0:00
0:00

venombet-venombet-ritzbet-ritzbet-slotday-slotday-leogrand-leogrand-palazzobet-palazzobet-sloto-sloto-bahibom-bahibom-betsin-betsin-romabet-romabet-betgar-betgar-roketbet-roketbet-tipobet-tipobet-marsbahis-marsbahis-jojobet-jojobet-casibom-casibom-bets10-bets10-mobilbahis-mobilbahis-bet365-bet365-betturkey-betturkey-onwin-onwin-holiganbet-holiganbet-meritking-meritking-bahsegel-bahsegel-bettilt-bettilt-mostbet-mostbet-misty-misty-betenerji-betenerji-sahabet-sahabet-betmatik-betmatik-mariobet-mariobet-madridbet-madridbet-pusulabet-pusulabet-betcio-betcio-betano-betano-celtabet-celtabet-hitbet-hitbet-pincocasino-pincocasino-meritbet-meritbet-almanbahis-almanbahis-mersobahis-mersobahis-baywin-baywin-piabellacasino-piabellacasino-limanbet-limanbet-artemisbet-artemisbet-1xbet-1xbet-misli-misli-oleybet-oleybet-superbahis-superbahis-nesine-nesine-youwin-youwin-betboo-betboo-bilyoner-bilyoner-sbahis-sbahis-maximumbet-maximumbet-betwin-betwin-royalbet-royalbet-asyabahis-asyabahis-stake-stake-dumanbet-dumanbet-7slots-7slots-safirbet-safirbet-pokerklas-pokerklas-klasbahis-klasbahis-imajbet-imajbet-perabet-perabet-betkanyon-betkanyon-portbet-portbet-betgit-betgit-tipobet-tipobet-marsbahis-marsbahis-jojobet-jojobet-casibom-casibom-bets10-bets10-mobilbahis-mobilbahis-bet365-bet365-betturkey-betturkey-onwin-onwin-holiganbet-holiganbet-meritking-meritking-bahsegel-bahsegel-bettilt-bettilt-mostbet-mostbet-misty-misty-betenerji-betenerji-sahabet-sahabet-betmatik-betmatik-mariobet-mariobet-madridbet-madridbet-pusulabet-pusulabet-betcio-betcio-betano-betano-celtabet-celtabet-hitbet-hitbet-pincocasino-pincocasino-meritbet-meritbet-almanbahis-almanbahis-mersobahis-mersobahis-baywin-baywin-piabellacasino-piabellacasino-limanbet-limanbet-artemisbet-artemisbet-1xbet-1xbet-misli-misli-oleybet-oleybet-superbahis-superbahis-nesine-nesine-youwin-youwin-betboo-betboo-bilyoner-bilyoner-sbahis-sbahis-maximumbet-maximumbet-betwin-betwin-royalbet-royalbet-asyabahis-asyabahis-stake-stake-dumanbet-dumanbet-7slots-7slots-safirbet-safirbet-pokerklas-pokerklas-klasbahis-klasbahis-imajbet-imajbet-perabet-perabet-betkanyon-betkanyon-portbet-portbet-betgit-betgit-