Chapter 6 The Challenges of Cultural Diversity (Hindi Medium)

[NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED] (पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न)

प्र० 1. सांस्कृतिक विविधता का क्या अर्थ है? भारत को एक अत्यंत विविधतापूर्ण देश क्यों कहा जाता है?
उत्तर-

प्र० 2. सामुदायिक पहचान क्या होती है और वह कैस बनती है?
उत्तर –

  1. सामुदायिक पहचान जन्म तथा अपनापन पर आधारित होती है न कि किसी अर्जित योग्यता | अथवा उपलब्धि के आधार पर।
  2. इस प्रकार की पहचानें प्रदत्त कहलाती हैं। अर्थात् ये जन्म से निर्धारित होती हैं तथा संबंधित व्यक्तियों की पसंद अथवा नापसंद इसमें शामिल नहीं होती।
  3. लोग उन समुदायों से संबंधित होकर अत्यंत सुरक्षित एवं संतुष्ट महसूस करते हैं।
  4. प्रदत्त पहचाने जैसे कि सामुदायिक पहचान से मुक्ति पाना कठिन होता है। यहाँ तक कि यदि हम इसे अस्वीकार करने की कोशिश करते हैं तब भी लोग उन्हीं चिह्नों से जोड़कर हमारी पहचान हूँढ़ने की कोशिश करते हैं।
  5. सामुदायिक संबंधों के बढ़ते हुए दायरे; जैसे – परिवार, रिश्तेदारी, जाति, भाषा हमारी सार्थकता प्रदान करते हैं तथा हमें पहचान देते हैं।
  6. प्रदत्त पहचाने तथा सामुदायिक भावना सर्वव्यापी होती हैं। प्रत्येक व्यक्ति की एक मातृभूमि होती है, एक मातृभाषा होती है तथा एक निष्ठा होती है। हम सभी अपनी-अपनी पहचान के प्रति प्रतिबद्ध होते हैं।
  7. समुदाय हमें मातृभाषा, मूल्य एवं संस्कृति प्रदान करता है, जिसके माध्यम से हम विश्व का आकलन करते हैं। यह हमारी स्वयं की पहचान को भी संबंध प्रदान करता है।
  8. समाजीकरण की प्रक्रिया में हमारे आसपास से जुड़े लोगों के साथ निरंतर संवाद शामिल होता है। इसमें माता-पिता, संबंधी, परिवार तथा समुदाय सम्मिलित होता है। अतएव समुदाय हमारी पहचान का एक
    प्रमुख हिस्सा है।
  9. सामुदायिक प्रतिद्वंद्विता से निपटना बहुत कठिन होता है। इसका कारण यह है कि प्रत्येक पक्ष एक-दूसरे को अपना दुश्मन समझता है तथा अपनी अच्छाइयों को तथा दूसरों की बुराइयों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करने की उनकी प्रवृत्ति होती है।
  10. यह बात उनके लिए समझना कठिन है, जो कि रचनात्मक जोड़े हैं किंतु दोनों की छवियाँ एक-दूसरों के विपरीत हैं।
  11. कभी दोनों ही पक्ष बिलकुल सही या गलत हो सकते हैं तो कभी इतिहास यह तय करता है कि कौन आक्रामक है और कौन पीड़ित।
  12. लेकिन यह तब होता है जब मामला शांत हो गया होता है।
  13. पहचान संबंधी द्वंद्व की स्थिति में परस्पर सम्मत सच्चाई के किसी भाव को स्थापित करना बहुत कठिन होता है।

प्र० 3. राष्ट्र को परिभाषित करना क्यों कठिन है? आधुनिक समाज में राष्ट्र और राज्य कैसे संबंधित हैं?
उत्तर-

प्र० 4. राज्य अकसर सांस्कृतिक विविधता के बारे में शंकालु क्यों होते हैं?
उत्तर- राज्यों ने अपने राष्ट्र निर्माण की रणनीतियों के माध्यम से अपनी राजनीतिक वैधता को स्थापित करने के प्रयास किए हैं।

प्र० 5. क्षेत्रवाद क्या होती है? आमतौर पर यह किन कारकों पर आधारित होता है?
उत्तर-

प्र० 6. आपकी राय में, राज्यों के भाषाई पुनगठन ने भारत का हित या अहित किया है?
उत्तर-

प्र० 7. ‘अल्पसंख्यक’ (वर्ग) क्या होता है? अल्पसंख्यक वर्गों को राज्य से संरक्षण की क्यों ज़रूरत होती है?
उत्तर-

प्र० 8. सांप्रदायवाद या सांप्रदायिकता क्या है?
उत्तर-

प्र० 9. भारत में वह विभिन्न भाव (अर्थ) कौन से हैं, जिनमें धर्मनिरपेक्षता या धर्मनिरपेक्षतावाद को समझा जाता है?
उत्तर-

  1. भारत में धर्मनिरपेक्षतावाद से तात्पर्य यह है कि राज्य किसी भी धर्म का समर्थन नहीं करेगा। यह सभी धर्मों को समान रूप से आदर प्रदान करता है। यह धर्मों से दूरी बनाए रखने का भाव प्रदर्शित नहीं करता।
  2. पश्चिमी देशों में धर्मनिरपेक्षतावाद का अर्थ चर्च तथा राज्य के बीच अलगाव से लिया जाता है। यह सार्वजनिक जीवन से धर्म को अलग करने का एक प्रगतिशील कदम माना जाता है, क्योंकि धर्म का एक अनिवार्य दायित्व के बजाय स्वैच्छिक व्यक्तिगत व्यवहार के रूप में बदल दिया गया।
  3. धर्मनिरपेक्षीकरण स्वयं आधुनिकता के आगमन और विश्व को समझने के धार्मिक तरीकों के विकल्प के रूप में विज्ञान और तर्कशक्ति के उदय से संबंधित था।
  4. कठिनाई तथा तनाव की स्थिति तब पैदा हो जाती है, जबकि पाश्चात्य राज्य सभी धर्मों से दूरी बनाए रखने के पक्षधर हैं, जबकि भारतीय राज्य सभी धर्मों को समान रूप से आदर देने के पक्षधर हैं।

प्र० 10. आज नागरिक समाज संगठनों की क्या प्रासंगिकता है?
उत्तर- नागरिक समाज उस व्यापक कार्यक्षेत्र को कहते हैं।
जो परिवार के निजी क्षेत्र से परे होता है किंतु राज्य तथा बाज़ार दोनों ही क्षेत्रों से बाहर होता है।

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