Chapter 8 संस्कृतियों का टकराव

In Text Questions and Answers

प्रश्न 1. 
अरावाकों और स्पेनवासियों के बीच पाए जाने वाले अन्तरों को स्पष्ट कीजिए। इनमें से कौन-से अन्तरों को आप सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानते हैं और क्यों ?
उत्तर:
अरावाकों और स्पेनवासियों के बीच पाए जाने वाले अन्तर

  1. अरावाकी समुदाय के लोग कैरीबियन सागर में स्थित छोटे-छोटे सैकड़ों द्वीप समूहों (जो आज बहामा कहलाता है) और वृहत्तर ऐंटिलीज में रहते थे। जबकि स्पेनवासी यूरोप के इस आधुनिक और शक्तिशाली देश में रहते थे।
  2. अरावाक लोग लड़ने की अपेक्षा बातचीत से झगड़ा निपटाना अधिक पसन्द करते थे। वे कुशल नौका-निर्माता थे। जबकि स्पेनी भी नौका-निर्माता तो उच्चकोटि के थे परन्तु वे हिंसक गतिविधियों में अधिक विश्वास करते थे।
  3. अरावाक लोग अपने वंश के बुजुर्गों के अधीन संगठित थे, वे जीववादी थे अर्थात् जिन्हें वैज्ञानिक निर्जीव मानते थे, वे उनमें भी जीव या आत्मा होना मानते थे। इसके विपरीत स्पेनी समाज अभिजात वर्ग, व्यापारी वर्ग तथा सैनिक वर्ग आदि में विभक्त था।
  4. अरावाकों के समाज में न कोई राजा था, न सेना और न ही कोई चर्च था, जो जिन्दगी को नियन्त्रित कर सके। अतः वह एक स्वतन्त्र समाज था। जबकि स्पेनी समाज में राजा, सेना, चर्च तथा पोप समाज के प्रमुख भाग थे, जो समाज को नियन्त्रित करते थे।
  5. अरावाकों का व्यवहार बहुत उदारतापूर्ण होता था और वे सोने की तलाश में स्पेनी लोगों का साथ देने के लिए सदैव तैयार रहते थे। किन्तु जब स्पेनी नीति क्रूरतापूर्ण हो गई तब उन्होंने उसका विरोध किया जिसके उन्हें विनाशकारी परिणाम भुगतने पड़े।
  6. अरावाक लोग सोने के गहने पहनते थे किन्तु यूरोपवासियों की तरह सोने को इतना महत्व नहीं देते थे। उन्हें यदि कोई यूरोपवासी सोने के बदले काँच के मनके देता था तो वे खुश होते थे क्योंकि उन्हें काँच के मनके अधिक सुन्दर दिखाई देते थे।

प्रश्न 2. 
दक्षिणी अमरीका के प्राकृतिक मानचित्र का अवलोकन करें। आपके अनुसार किस हद तक भूगोल ने इंका साम्राज्य के विकास को प्रभावित किया?
उत्तर-दक्षिणी अमरीका के मानाचित्र का अवलोकन करने के पश्चात यह पता चलता है कि इंका साम्राज्य एंडीज पर्वत श्रेणी के ऊपर से लेकर नीचे तक फैला हुआ था। यह सभ्यता उत्तर से लेकर दक्षिण तक 5500 किमी. के क्षेत्र में निवास करती थी जो वर्तमान समय के पेरू नामक देश में विस्तृत थी। वहीं आज का कोलंबिया, चिली, बोलीविया, इक्वाडोर और अर्जेंटीना भी इस साम्राज्य का हिस्सा थे। इंका साम्राज्य का क्षेत्र मुख्य रूप से पहाड़ी, पठारी एवं शुष्क प्रदेश था।

इस क्षेत्र की शुष्क पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियों ने इंका’साम्राज्य के विकास को काफी प्रभावित किया। इन्होंने पत्थरों को खूबसूरती से तराशकर भवनों का निर्माण किया एवं पहाड़ों को काटकर मार्ग भी निकाले। यहाँ कृषि योग्य भूमि नहीं थी फलस्वरूप यहाँ पहाड़ी क्षेत्रों में भूमि को समतल करके सीढ़ीनुमा खेत तैयार किये एवं जल-निकासी करके व सिंचाई की प्रणालियाँ विकसित करके इस क्षेत्र में कृषि को संभव बनाया गया। श्रम के लिए इंकाई लोग लामा नामक पशु पालते थे। ये पशु इस क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों की ही देन था। पथरीला क्षेत्र होने के उपरांत भी इंकाई लोग मिट्टी के बर्तन बनाने की कला जानते थे।


यह बात सही है कि इंका साम्राज्य एक पहाड़ी एवं शुष्क भौगोलिक परिस्थितियों में था, किन्तु इंकाई लोगों ने इन विषम भौगोलिक परिस्थितियों का सफलतापूर्वक सामना करके अपने साम्राज्य को विकसित किया। दिलचस्प बात तो यह है कि तब उनके पास न तो कोई बाजार था और न ही कोई मुद्रा।

प्रश्न 3. 
आपके विचार से ऐसे कौन-से कारण थे जिनसे प्रेरित होकर यूरोप के भिन्न-भिन्न देशों के लोगों ने खोज यात्राओं पर जाने का जोखिम उठाया ?
उत्तर:
निम्नलिखित कारणों से प्रेरित होकर यूरोप के भिन्न-भिन्न देशों के लोगों ने खोज यात्राओं पर जाने का जोखिम उठाया
(i) पुराने व्यापारिक मार्गों पर तुर्की आधिपत्य-यूरोप का भारत तथा एशिया के लिए जो प्राचीन व्यापारिक मार्ग था, वह 1453 ई. में कुस्तुनतुनिया की जीत के बाद तुर्की के पास चला गया था। अतः अब उससे व्यापार होने के मार्ग में कई कठिनाइयाँ थीं। अतः यूरोप के लोगों ने भारत की ओर लाल सागर और अरबसागर होते हुए व्यापार करने के लिए नए समुद्री मार्ग की खोज प्रारम्भ कर दी।

(ii) पुनर्जागरण के कारण-पुनर्जागरण ने यूरोपियों की सोच और मानसिकता को मध्यकालीन संकीर्ण दृष्टिकोण के स्थान पर आधुनिक बना दिया था। अब लोग साहसी बन गए थे और उनमें दूर-दूर की यात्रा करने का उत्साह तथा नयी-नयी खोजों की ललक पैदा हो गयी थी।

(iii) कुतुबनुमा का आविष्कार-1380 ई. में कुतुबनुमा (दिशासूचक यन्त्र) का आविष्कार हो चुका था जिससे यात्रियों को खुले समुद्र में दिशाओं की सही जानकारी लेने में सहायता मिल सकती थी। 15वीं शताब्दी में इसका प्रयोग समुद्री यात्राओं में होने लगा। यूरोपियों में पूर्वी देशों विशेषकर भारत पहुँचने का इस यन्त्र ने विश्वास पैदा कर दिया था।

(iv) पृथ्वी के गोल होने का ज्ञान-1477 ई. में टॉलेमी की ज्योग्राफी नामक पुस्तक मुद्रित हुई और इसे लोगों द्वारा व्यापक रूप से पढ़ा गया। मिस्रवासी टॉलेमी ने विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति का अक्षांश और देशान्तर रेखाओं के रूप में व्यवस्थित वर्णन किया था। उसने यह भी बताया था कि दुनिया गोल है लेकिन उसने महासागरों की चौड़ाई कम आँकी थी। पृथ्वी के गोल होने की बात ने नाविकों में जोश भर दिया और वे लोग पश्चिमी मार्ग से भारत तथा पूर्वी द्वीप समूह तक पहुँचने लगे। 

(v) यूरोप की आर्थिक स्थिति-चौदहवीं शताब्दी के मध्य में यूरोपीय अर्थव्यवस्था गिरावट के दौर से गुजर रही थी। प्लेग और युद्धों ने यूरोप के अनेक भागों में आबादी कम कर दी। व्यापार उजाड़ दिए तथा सोने-चाँदी की कमी कर दी। इसलिए धन प्राप्ति (सोने-चाँदी को पाने) और व्यापार करने के लिए यह आवश्यक हो गया कि नये-नये देशों की खोज की जाए। 

(vi) ईसाईयत के प्रचार की इच्छा-बाहरी दुनिया के लोगों को ईसाई बनाने की सम्भावना ने भी यूरोप के धर्मपरायण ईसाइयों को इन साहसिक कार्यों के लिए प्रेरित किया। यह रुचि विशेषरूप से रोमन कैथोलिक ईसाइयों में अधिक थी। 

प्रश्न 4.
दक्षिणी अमरीका के मूल निवासियों पर यूरोपीय लोगों के सम्पर्क से क्या प्रभाव पड़ा ? विश्लेषण कीजिए।
उत्तर:
दक्षिणी अमरीका के मूल निवासियों पर यूरोपीय लोगों के सम्पर्क से निम्नलिखित प्रभाव पड़े
(i) दक्षिणी अमरीकी खोज और बाद में बाहरी लोगों अर्थात् यूरोपीय लोगों का वहाँ बस जाना वहाँ के मूल निवासियों और उनकी संस्कृतियों के लिए विनाशकारी साबित हुआ। इसी से दास-व्यापार की शुरुआत हुई, जिसके अन्तर्गत यूरोपवासी अफ्रीका से गुलाम पकड़कर या खरीदकर उत्तरी और दक्षिणी अमरीका की खानों तथा बागानों में काम करने के लिए लाने लगे।

(ii) यूरोपवासियों की मार-काट के कारण दक्षिणी अमरीका के मूल निवासियों की जनसंख्या बहुत कम हो गई तथा उनकी जीवन शैली का विनाश हो गया।

(iii) दक्षिण अमरीका में दास प्रथा को प्रोत्साहन मिला। यूरोपीय यहाँ के पराजित लोगों को अपना गुलाम बना लेते थे।

(iv) दक्षिणी अमरीका में उत्पादन की पूँजीवादी प्रणाली का प्रादुर्भाव हुआ। अधिकाधिक धन कमाने के लिए यूरोपवासी यहाँ के स्थानीय लोगों का शोषण करते थे, जिससे उनकी स्थिति अत्यन्त शोचनीय हो गई।

(v) दक्षिणी अमरीका में नई-नई आर्थिक गतिविधियाँ शुरू हो गईं। जंगलों का सफाया करके प्राप्त की गई भूमि पर पशु-पालन किया जाने लगा। 1700 ई. में सोने की खोज के बाद खानों का काम बड़े पैमाने पर चलने लगा।

(vi) अमरीका में दो बड़ी सभ्यताओं-एज़टेक और इंका को यूरोपियों के सम्पर्क में आने से पूर्णत: नष्ट हो जाना पड़ा।

Textbook Questions and Answers 

संक्षेप में उत्तर दीजिए

प्रश्न 1. 
एज़टेक और मेसोपोटामियाई लोगों की सभ्यता की तुलना कीजिए।
उत्तर:
एज़टेक और मेसोपोटामियाई लोगों की सभ्यता की तुलना- एज़टेक लोगों की सभ्यता-12वीं शताब्दी में एज़टेक लोग उत्तर से आकर मैक्सिको की मध्यवर्ती घाटी में बस गए थे। इन लोगों ने अनेक जनजातियों को परास्त करके अपने साम्राज्य का विस्तार किया। यह समाज श्रेणीबद्ध था। इस समाज में पुरोहित, योद्धा, व्यापारी, शिल्पी, चिकित्सक, शिक्षक एवं दास आदि सम्मिलित थे। इन लोगों ने मैक्सिको झील में कृत्रिम टापू बनाए। इनके मन्दिर युद्ध के देवताओं व सूर्य भगवान को समर्पित थे। इनका साम्राज्य ग्रामीण आधार पर टिका हुआ था। ये लोग मक्का, फलियाँ, कद्दू, कसावा व आलू आदि की फसलें उगाते थे।

एज़टेक लोगों की लिपि चित्रात्मक थी। ये बच्चों की शिक्षा का भी बहुत ध्यान रखते थे। ये बच्चों को विद्यालय भेजते थे। इस सभ्यता काल में कृषि दास प्रथा का प्रचलन था। कई बार गरीब लोग अपने बच्चों को भी गुलामों के रूप में बेच देते थे। लेकिन यह बिक्री आमतौर पर कुछ वर्षों के लिए ही की जाती थी और गुलाम अपनी आजादी फिर से प्राप्त कर लेते थे। मेसोपोटामियाई लोगों की सभ्यता-मेसोपोटामिया की सभ्यता के अन्तर्गत तीन सभ्यताओं-सुमेरिया, बेबीलोनिया व सीरिया की गणना की जाती है।

इन सभ्यताओं का विकास वर्तमान इराक में दजला व फ़रात नदियों के मध्य हुआ था। यह सभ्यता तीन वर्गों-उच्च, मध्यम व निम्न वर्ग में विभाजित थी। ये लोग अनेक देवी-देवताओं की पूजा करते थे। उर व इन्नाना प्रमुख देवी-देवता थे। ये लोग गेहूँ, जौ, मटर व मसूर की खेती करते थे तथा भेड़-बकरी आदि जानवर पालते थे। ये लोग लकड़ी, ताँबा, सोना, चाँदी, राँगा व सीपी आदि तुर्की और ईरान अदि से मँगाते थे तथा अपना कपड़ा व कृषि-जन्य उत्पाद उन्हें निर्यात करते थे। इस सभ्यता के लोगों ने सर्वप्रथम लेखन कला का विकास किया। इनकी लिपि क्यूनीफार्म कहलाती थी। इस सभ्यता काल में भी दास प्रथा का प्रचलन था।

प्रश्न 2. 
ऐसे कौन-से कारण थे जिनसे 15वीं शताब्दी में यूरोपीय नौचालन को सहायता मिली ? 
उत्तर:
निम्नलिखित कारणों से 15वीं शताब्दी में यूरोपीय नौचालन को सहायता मिली
(i) पन्द्रहवीं शताब्दी में यूरोपीय विशेषकर पुर्तगाली व स्पेनी लोग और उनके शासक सोना व चाँदी प्राप्त करना एवं ईसाई धर्म का प्रचार करना चाहते थे।

(ii) 1380 ई. में ‘कुतुबनुमा’ अर्थात् दिशासूचक यंत्र का आविष्कार हो चुका था। अब यात्रियों को खुले समुद्र में दिशाओं की सही जानकारी लेने में सहायता प्राप्त होने लगी थी।

(iii) 1477 ई. में टॉलेमी की ‘ज्योग्राफी’ नामक पुस्तक का प्रकाशन हुआ। इसको पढ़कर यूरोपवासियों को दुनिया के बारे में जानकारी प्राप्त हुई तथा वे यह जान गये कि पृथ्वी गोल है।(iv) पन्द्रहवीं शताब्दी के अन्तर्गत यात्रा वृत्तान्तों, सृष्टि-वर्णन वाले भूगोल की पुस्तकों के प्रसार ने यूरोपीय लोगों में समुद्री खोजों के प्रति रुचि उत्पन्न की।

(v) 1453 ई. में तुर्कों द्वारा कुस्तुनतुनिया पर विजय प्राप्ति के पश्चात् यूरोपीय लोगों के लिए स्थल मार्ग से व्यापार की मुश्किलें पैदा हो गयी थीं फलस्वरूप उन्हें नये समुद्री मार्गों को खोजने की आवश्यकता हुई।

(vi) कुछ देशों के विशेषकर स्पेन व पुर्तगाल के वीर, साहसी व महत्वाकांक्षी लोग व शासक नये देशों की खोज कर वहाँ अपना साम्राज्य स्थापित करके अपने यश तथा नाम को ऊँचा करना चाहते थे। 

(vii) बाहरी दुनिया के लोगों को ईसाई बनाने की संभावना ने भी यूरोप के धर्मपरायण ईसाइयों को इन साहसिक कार्यों की ओर उन्मुख किया।

प्रश्न 3. 
किन कारणों से स्पेन और पुर्तगाल ने पन्द्रहवीं शताब्दी में सबसे पहले अटलांटिक महासागर के पार जाने का साहस किया ?
उत्तर:
स्पेन और पुर्तगाल ने पन्द्रहवीं शताब्दी में सबसे पहले अटलांटिक महासागर के पार जाने का निम्नलिखित कारणों से साहस किया
(i) स्पेन और पुर्तगाल की भौगोलिक स्थिति ऐसी थी कि दोनों देश अटलांटिक महासागर के तट पर ही स्थित थे। इन देशों की तटवर्ती स्थिति के कारण ही यहाँ के लोगों ने नौकायन एवं बड़े-बड़े जलीय जहाज़ बनाने में विशेष दक्षता प्राप्त कर ली थी।

(ii) स्पेन और पुर्तगाल के शासकों ने भी कोलम्बस, वास्कोडिगामा, कोर्टेस व पिज़ारो जैसे साहसी यात्रियों व शूरवीरों को इन यात्राओं हेतु प्रेरित किया तथा उन्हें पद, धन, जलयान व सैनिक सहायता आदि प्रदान की।

(iii) यूरोप के लिए 1453 ई. में तुर्कों द्वारा कुस्तुनतुनिया के आधिपत्य के पश्चात् प्राचीन मार्गों से व्यापार करना बहुत मुश्किल हो गया था। अतः यूरोपीय लोगों को नये मार्गों की तलाश की आवश्यकता महसूस हुई। 

(iv) धर्मयुद्धों के पश्चात् यूरोप की आर्थिक स्थिति खराब हो गयी थी। दूसरे इन युद्धों के पश्चात् कैपिटुलैसियोन नामक इकरारनामे की शुरुआत हो गयी थी, जिसके अनुसार स्पेन का शासक नये जीते हुए प्रदेशों पर अपना अधिकार स्थापित कर लेता था।

(v) 14र्वी शताब्दी के मध्य से यूरोप की अर्थव्यवस्था गिरावट के दौर से गुजर रही थी। प्लेग व युद्धों ने अनेक भागों में आबादी को उजाड़ दिया। व्यापार में गिरावट आती गई और वहाँ सोने व चाँदी की कमी हो गयी जो कि उन दिनों यूरोप में सिक्के बनाने के काम आती थी।

(vi) धर्मयुद्धों स्पेन और पुर्तगाल के लोग सोने और मसालें की खोज में नये-नये प्रदेशों में जाने के लिए उत्सुक रहते थे।

(vii) स्पेन और पुर्तगाल के धर्मपरायण लोगों ने बाहरी दुनिया के लोगों को ईसाई बनाने के उद्देश्य से इन यात्राओं में सहयोग दिया।

प्रश्न 4. 
कौन-सी नयी खाद्य वस्तुएँ दक्षिणी अमरीका से बाकी दुनिया में भेजी जाती थीं ?
उत्तर:
दक्षिणी अमरीका से मक्का, कसावा, आलू, कुमाला, तम्बाकू, गन्ने से निर्मित चीनी, रबड़, लाल मिर्च, कुम्हड़ा, कद्दू आदि खाद्य वस्तुएँ बाकी दुनिया में भेजी जाती थीं। संक्षेप में निबन्ध लिखिए

प्रश्न 5. 
गुलाम के रूप में पकड़कर ब्राज़ील ले जाए गए एक सत्रह वर्षीय अफ्रीकी लड़के की यात्रा का वर्णन करें। 
उत्तर:
गुलाम के रूप में पकड़कर ब्राज़ील ले जाए गए एक सत्रह वर्षीय अफ्रीकी लड़के की यात्रा ब्राजील में 1700 ई. में स्वर्ण धातु की खोज के पश्चात् उसका खनन तीव्र गति से हो रहा था। इन खानों पर कार्य करने के लिए सस्ते श्रम की आवश्यकता होती थी। स्वर्ण धातु की खानों में खनन कार्य को सुचारु रूप से चलाने के लिए गुलाम अफ्रीका से मँगाए गये। गुलामी के इस घृणित व्यापार की शुरुआत पुर्तगालियों ने पन्द्रहवीं शताब्दी में की थी। वे या उनके एजेंट अफ्रीका के विभिन्न गाँवों पर हमला करके वहाँ के निवासियों को गुलाम बना लेते थे।

ये व्यापारी गुलामों से पशुवत् व्यवहार करते थे। जो गुलाम भागने की कोशिश करते थे उन्हें अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ता था। एक सत्रह वर्षीय लड़के को गुलाम के रूप में अफ्रीका के एक गाँव से पकड़ा जाता है। वहाँ से उसे यूरोपीय व्यापारी ब्राज़ील भेज देते हैं। रास्ते में बालक को विभिन्न प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उसे सैकड़ों अन्य गुलामों के साथ ही एक जल जहाज द्वारा ब्राज़ील लाया जाता है। इस लम्बी यात्रा में उसे किसी भी प्रकार की कोई सुविधा नहीं दी गई।

उसे पशुओं की भाँति जहाज में ठूसकर ब्राज़ील लाया गया। ब्राज़ील पहुँचने पर उसकी गतिविधियों पर कठोर नजर रखी जाती थी ताकि वह भाग न जाए। उससे कठोर परिश्रम करवाया जाता था फिर भी उसे भरपेट भोजन नहीं दिया जाता था। कोई गलती होने पर उसके साथ पशुवत् व्यवहार किया जाता था। उसे काम के बदले कोई भी पारिश्रमिक नहीं दिया जाता था। उसे अपने घर की याद आती थी परन्तु वह अब स्वतंत्र नहीं था इसलिए वह कुछ नहीं कर सकता था। इस तरह उस सत्रह वर्षीय अफ्रीकी लड़के का गुलामी का जीवन बड़ा ही दुखदायी था।

प्रश्न 6. 
दक्षिणी अमरीका की खोज ने यूरोपीय उपनिवेशवाद के विकास को कैसे जन्म दिया ?
उत्तर:
दक्षिणी अमरीका से सोने-चाँदी की बड़ी मात्रा में प्राप्ति हुई थी। इससे यूरोप के देश विशेषकर स्पेन और पुर्तगाल आश्चर्यचकित हुए। स्पेन और पुर्तगाल के अतिरिक्त इंग्लैण्ड, फ्रांस, हालैंड व इटली जैसे देशों के निवासी भी दक्षिणी अमरीका में अपने-अपने उपनिवेश स्थापित करने का प्रयत्न करने लगे। इस प्रकार सोने-चाँदी की लालसा व धनी बनने की इच्छा ने यूरोपीय लोगों को अमरीकी महाद्वीपों में जाने के लिए और अपने-अपने उपनिवेश स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। इन लोगों ने अपने सैन्य बल व बारूद के प्रयोग से वहाँ अपना शासन स्थापित कर लिया व उपनिवेश बनाये। विरोध होने पर उन्होंने वहाँ के स्थानीय लोगों को बुरी तरह मारा-पीटा।

उन्होंने वहाँ के स्थानीय लोगों से कर वसूल किया तथा सोने-चाँदी की खानों में काम करने के लिए बाध्य किया। स्थानीय लोगों को नये-नये प्रदेश व सोने के नये-नये स्रोत खोजने के लिए भर्ती किया जाता था। धीरे-धीरे सोने-चाँदी के विशाल भण्डारों का पता चलता गया और अधिकतर यूरोपवासी भी वहाँ बसने लगे। उन्होंने स्थानीय लोगों को अपना गुलाम बना लिया तथा उन्हें खानों में काम करने के लिए विवश किया। इस प्रकार दक्षिणी अमरीका में यूरोपीय उपनिवेशवाद विकसित होता गया।

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