Chapter 9 अहमपि विद्यालयं गमिष्यामि

अभ्यासः

प्रश्न: 1.
उच्चारणं कुरुत
अग्रिमदिने, षड्वादने, अष्टवर्षदेशीया, अनुगृह्णातु, भवत्सदृशानाम्, गृहसञ्चालनाय, व्यवस्थाये, महार्घताकाले, अद्यै वास्या:, करतलवादसहितम्।
उत्तर:
अध्यापककस्य । अध्यापिकायाः सहायतया उच्चारण

प्रश्न: 2.
एकपदेन उत्तराणि लिखत-
(क) गिरिजायाः गृहसेविकायाः नाम किमासीत्?
(ख) दर्शनायाः पुत्री कति वर्षीया आसीत्?
(ग) अद्यत्वे शिक्षा अस्माकं कीदृशः अधिकारः?
(घ) दर्शनायाः पुत्री कथं नृत्यति?
उत्तर:
(क) दर्शना।
(ख) अष्टवर्गीया।
(ग) मौलिकः।
(घ) करतलवादनसहितम्।

प्रश्न: 3.
पूर्णवाक्येन उत्तरत
(क) अष्टवर्षदेशीया दर्शनायाः पुत्री कि समर्थाऽसीत्?
(ख) दर्शना कति गृहाणां कार्य करोति स्म?
(ग) मालिनी स्वप्रतिवेशिनी प्रति किं कथयति?
(घ) अद्यत्वे छात्राः विद्यालये किं कि निःशुल्क प्राप्नुवन्ति?
उत्तर:
(क) अष्टवर्षदेशीय दर्शनायाः पुत्री सर्वकार्येषु समर्था आसीत्।
(ख) दर्शना पञ्च-षड्गृहाणां कार्य करोति स्म।
(ग) मालिनी स्वप्रतिवेशिनी प्रति कथयति स्म यत्-“गिरिजे! मम पुत्रः मातुल गृहं प्रस्थितः, काचिद् अन्यां कामपि महिला कार्यार्थं जानासि तर्हि प्रेषय” इति।
(घ) अद्यत्वे छात्राः विद्यालये निःशुल्क शिक्षा, गणवेशं, पुस्तकानि, पुस्तकस्यूतं, पादत्राणं, मध्याह्नभोजन, छात्रवृत्तिम् इत्यादिकं प्राप्नुवन्ति।

प्रश्न: 4.
रेखांकितपदमाधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत
(क) मालिनी द्वारमुद्घाटयति?
(ख) शिक्षा सर्वेषां बालानां मौलिकः अधिकारः।
(ग) दर्शना आश्चर्येण मालिनी पश्यति।
(घ) दर्शना तस्याः पुत्री च मिलित्वा परिवारस्य भरणपोषणं कुरुतः स्मा
उत्तर:
(क) का द्वारमुद्घाटयति?
(ख) शिक्षा केषां मौलिकः अधिकारः?
(ग) दर्शना आश्चर्येण काम् पश्यति?
(घ) दर्शना तस्याः पुत्री च मिलित्वा कस्य भरणपोषणं कुरुतः स्म?

प्रश्नः 5.
सन्धि विच्छेवं पूरयत

उत्तर:

प्रश्नः 6.
(अ) समानार्थकपदानि मेलयत

(आ) विलोमपदानि मेलयत

प्रश्न: 7.
विशेषणपदैः सह विशेष्यपदानि योजयत

ध्यातव्यम् (ध्यान दें)

‘सर्व पठन्तु अग्रे सरन्तु’ च इति भावनामङ्गीकृत्य विकसितोऽयं एकः संवादात्मकः पाठः। प्रायेण आर्थिकदृष्ट्या दरिद्रपरिवारेषु लघु लघु बालकाः चायादिविपणिसु अन्येषु च गृहेषु कार्य नियोजिताः क्रियन्ते येन धनस्य अर्जनं भवेत् तेषां गृहस्य कार्य चलेत्। एवं कृते ते जनाः स्वसंतती: शिक्षायाः मौलिकाधिकारात् वञ्चयन्ति। प्रारम्भे शिक्षा यः केवलं संवैधानिकोऽधिकार आसीत् स इदानी मौलिकाधिकारः जातः। इमामेव भावनां बोधयितुं पाठेऽस्मिन् प्रयत्नो विहितः।

हिन्दी अनुवाद-‘सब पढ़े, सब बढ़े’ इस भावना को स्वीकार करके विकसित यह एक संवादात्मक पाठ है। प्रायः आर्थिक दृष्टि से गरीब परिवारों में छोटे-छोटे लड़के चाय आदि की दुकानों में या दूसरे घरों में काम पर लगाए जाते हैं जिससे पैसा कमाया जा सके और उनके घर का कार्य चले। इसके लिए वे लोग अपनी औलाद को शिक्षा के मूल अधिकार से वंचित करते हैं। शुरू में जो सिर्फ संवैधानिक अधिकार था, अब वह मौलिक अधिकार हो गया है। इस पाठ में इसी भावना को बताने के लिए प्रयास किया गया है।

Summary

अहमपि विद्यालयं गमिष्यामि मूलपाठः

मालिनी – (प्रतिवेशिनी प्रति) गिरिजे! मम पुत्रः मातुतलगृह प्रति प्रस्थितः काचिद् अन्यां कामपि महिलां जानासि तहिं प्रेषय।

गिरिजा – आम् सखि! अद्य प्रातः एव मम सहायिका स्वसुतायाः कृते कर्मार्थं पृच्छति स्म। श्वः प्रातः एव तया सह वातां करिष्यामि।

(अग्रिमदिने प्रात:काले षट्वादने एव मालिन्याः गृहघण्टिका आगन्तारं कमपि सूचयति मालिनी द्वारमुदघाटयति पश्यति यत् गिरिजायाः सेविकया दर्शनया सह एका अष्टवर्षदेशीय, बालिका तिष्ठति।)

दर्शना – महोदये! भवती कार्यार्थ गिरिजामहोदयां पृच्छति स्म कृपया मम सुतायै अवसरं प्रदाय अनुगृहातु भवती।

मालिनी – परमेषा तु अल्पवयस्का प्रतीयते। किं कार्य करिष्यत्येषा? अयं तु अस्याः अध्ययनस्य क्रीडनस्य च कालः।

वर्शना – एषा एकस्य गृहस्य संपूर्ण कार्य करोति स्म। सः परिवारः अधुना विदेशं प्रति प्रस्थितः। कार्याभावे अहमेतस्यै कार्यमेवान्वेषयामि स्म येन भवत्सदृशानां कार्य प्रचलेत् अस्मद्सदृशानां गृहसञ्चालनाय च धनस्य व्यवस्था भवेत्।

मालिनी – परमेतत्तु सर्वथाऽनुचितम्। किं न जानासि यत् शिक्षा तु.सर्वेषां बालकाना सर्वासां बालिकानां च मौलिक: अधिकारः।

वर्शना – महोदये! अस्मद् सदृशानां तु मौलिकाः अधिकाराः केवलं स्वोदरपूर्ति-रेवास्ति। एतस्य व्यवस्थायै एव अहं सर्वस्मिन् दिने पञ्च-षगृहाणां कार्य करोमि। मम रुग्णः पतिः तु किञ्चिदपि कार्य न करोति। अतः अहं मम पुत्री च मिलित्वा परिवारस्य भरण-पोषणं कुर्वः। अस्मिन् महार्घताकाले मूलभूतावश्यकतानां कृते एव धनं पर्याप्त न भवति तर्हि कथं विद्यालयशुल्क, गणवेषं पुस्तकान्यादीनि क्रेतुं धनमानेष्यामि।

मालिनी – अहो! अज्ञानं भवत्याः। कि न जानासि यत् नवोत्तर-द्वि-सहस्र (2009) तमे वर्षे सर्वकारेण सर्वेषां बालकानां, सर्वासां बालानां कृते शिक्षायाः मौलिकाधिकारस्य घोषणा कृता। यदनुसारं षड्वर्षेभ्यः आरभ्य चतुर्दशवर्षपर्यन्तं सर्वे बालाः समीपस्थं सर्वकारीयं विद्यालयं प्राप्य न केवलं निःशुल्क शिक्षामेव प्राप्स्यन्ति अपितु निःशुल्कं गणवेषं पुस्तकानि, पुस्तकस्यूतम्, पादत्राणम्, माध्याह्नभोजनम्, छात्रवृत्तिम् इत्यादिकं सर्वमेव प्राप्स्यन्ति।

वर्शना – अप्येवम् (आश्चर्येण मालिनी पश्यति)

मालिनी – आम्। वस्तुतः एवमेव।

वर्शना – (कृतार्थतां प्रकटयन्ती) अनुगृहीताऽस्मि महोदये! एतद् बोधनाय। अहम् अद्यैवास्याः प्रवेशं समीपस्थे विद्यालये कारयिष्यामि।

दर्शनाया:-पुत्री-(उल्लासेन सह) अहं विद्यालयं गमिष्यामि! अहमपि पठिष्यामि! (इत्युक्त्वा करतलवादनसहितं नृत्यति मालिनी प्रति च कृतज्ञतां ज्ञापयति)

अहमपि विद्यालयं गमिष्यामि शब्दार्थाः

सन्धिच्छेदाः – कार्यार्थम् = कार्य + अर्थम्।
करिष्यत्येषा – करिष्यति + एषा।
अयं तु = अयम् + तु।
कार्याभावे – काम की कमी में।
एवान्वेषयामि = एव + अन्वेषयामि।
सर्वथाऽनुचितम् = सर्वथा + अनुचितम्।
स्वोदरपूर्ति-रेवास्ति = स्व + उदरपूर्ति + एव + अस्ति।
महार्घता = महा + अर्घता।
मूलभूतावश्यकतानाम् = मूलभूत + आवश्यकतानाम्।
पुस्तकान्यादीनि = पुस्तकानि + आदीनि।
नवोत्तर = नव + उत्तर।
मौलिकाधिकारस्य – मौलिक + अधिकारस्य।
इत्यादिकम् – इति + आदिकम्।
कृतार्थताम् = कृत + अर्थताम्।
अनुगृहीताऽस्मि – अनुगृहीता + अस्मि।
अद्यैवास्याः – अद्य + एव + अस्या।
विद्यालये – विद्या + आलये।
उल्लासेन – उत् + लासेन।
इत्युक्त्वा = इति + उक्त्वा।

अहमपि विद्यालयं गमिष्यामि हिन्दी – अनुवाद:

मालिनी – (पड़ोसन से) अरे गिरिजा! मेरा बेटा मामा के घर गया है। किसी दूसरी कामवाली महिला को जानती हो तो भेजो।

गिरिजा – हाँ सखी! आज सुबह ही मेरी सहायिका अपनी बेटी के लिए काम हेतु पूछ रही थी। कल सुबह ही उससे बात करूंगी। (अगले दिन सुबह छः बजे ही मालिनी के घर की घंटी आने वाले किसी की सूचना देती है, मालिनी दरवाजा खोलती, देखती है कि गिरिजा की नौकरानी दर्शना के साथ एक आठ साल की लड़की खड़ी है।)

दर्शना – मैडम! आप काम के लिए गिरिजा मैडम से पूछ रही थीं, कृपा करके मेरी बेटी को यह अवसर देकर हमें अनुगृहीत करें।

मालिनी – लेकिन यह तो छोटी उम्र की लगती है। यह क्या काम करेगी? यह तो इसके पढ़ने-लिखने और खेलने का समय है।

दर्शना – यह एक घर के सब काम करती थी। वह परिवार अभी विदेश गया हुआ है। काम न होने के कारण मैं इसके लिए काम ढूँढ रही थी जिससे आप जैसे लोगों का काम चलता रहे और हम जैसों की घर चलाने के लिए रुपयों की व्यवस्था होती रहे।

मालिनी – लेकिन यह तो सरासर गलत है। क्या तुम नहीं जानती कि सभी लड़के-लड़कियों के लिए शिक्षा मौलिक अधिकार है।

वर्शना – मैडम! हमारा मौलिक अधिकार तो अपना पेट भरना ही है। इसकी व्यवस्था के लिए ही मैं पूरे दिन पाँच-छ: घरों का काम करती हूँ। मेरा पति बीमार है और कुछ काम नहीं करता है। इसलिए मैं और मेरी बेटी मिलकर परिवार चलाती हैं। इस महंगाई के समय में रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी रुपया पर्याप्त नहीं होता तो मैं कैसे स्कूल की फीस, वर्दी, किताबें आदि खरीदने के लिए पैसा लाऊँगी। ओह! तुम जानती नहीं कि साल 2009 में सरकार ने सभी लड़के-लड़कियों के लिए शिक्षा के मौलिक अधिकार की घोषणा की थी जिसके अनुसार छः साल से चौदह साल तक के सभी बच्चे घर के पास ही सरकारी स्कूल में न सिर्फ मुफ्त शिक्षा ही प्राप्त करेंगे, बल्कि मुफ्त वर्दी, किताबें, बैग, जूते, दोपहर का खाना, छात्रवृत्ति (वजीफा) आदि सब मुफ्त पायेंगे।

वर्शना – अच्छा जी! ऐसा है। (आश्चर्य से मालिनी को देखती है)

मालिनी – हाँ! ऐसा ही है।

दर्शना – (कृतज्ञता दिखाती हुई)। मैडम! मैं शुक्रगुजार हूँ। यह जानकारी देने के लिए। मैं आज ही इसका दाखिला पास के स्कूल में कराऊँगी। दर्शना की बेटी-(खुशी के साथ) मैं स्कूल जाऊँगी। मैं भी पढूँगी! (ऐसा बोलकर ताली बजाती है नाचती है और मालिनी को अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करती है, शुक्रगुजार होती है।)

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