Rajasthan Board RBSE Class 12 Geography Chapter 18 कृषि

RBSE Class 12 Geography Chapter 18 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Geography Chapter 18 बहुचयनात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारतीय कृषि को कहा जाता है –
(अ) किसान की खेती
(ब) मानसून का जुआ
(स) मजदूर की खेती
(द) व्यापारिक खेती
उत्तर:
(अ)

प्रश्न 2.
प्रथम पूर्ण जैविक कृषि वाला राज्य है –
(अ) सिक्किम
(ब) बिहार
(स) असम
(द) राजस्थान
उत्तर:
(अ)

प्रश्न 3.
भारत में मसालों का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है –
(अ) तमिलनाडु
(ब) कर्नाटक
(स) गुजरत
(द) महाराष्ट्र
उत्तर:
(स)

प्रश्न 4.
गेहूँ उत्पादन में प्रथम स्थान किस राज्य का है?
(अ) पंजाब
(ब) हरियाणा
(स) गुजरात
(द) उत्तर प्रदेश
उत्तर:
(द)

प्रश्न 5.
तमिलनाडु की कौन-सा जिला चावल उत्पादन में अग्रणी है?
(अ) तंजावूर
(ब) मदुरै
(स) रामनाथपुरम
(द) चेन्नई
उत्तर:
(अ)

प्रश्न 6.
गुजरात देश कितना प्रतिशत कपास उत्पादित करता है?
(अ) 20 प्रतिशत
(ब) 34 प्रतिशत
(स) 38 प्रतिशत
(द) 40 प्रतिशत
उत्तर:
(ब)

प्रश्न 7.
गन्ना उत्पादन में कौन-सा राज्य प्रथम है?
(अ) तमिलनाडु
(ब) पंजाब
(स) महाराष्ट्र
(द) उत्तर प्रदेश
उत्तर:
(द)

प्रश्न 8.
चाय निर्यात में भारत का स्थान है –
(अ) प्रथम
(ब) द्वितीय
(स) तृतीय
(द) चतुर्थ
उत्तर:
(ब)

प्रश्न 9.
असम देश की कितनी प्रतिशत चाय उत्पादित करता है?
(अ) 50 प्रतिशत
(ब) 60 प्रतिशत
(स) 54 प्रतिशत
(द) 45 प्रतिशत
उत्तर:
(स)

RBSE Class 12 Geography Chapter 18 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 10.
भारत की अधिकांश जनसंख्या किस व्यवसाय में कार्यरत/संलग्न है?
उत्तर:
भारत की अधिकांश जनसंख्या (54.6 प्रतिशत ) कृषि व्यवसाय में कार्यरत/संलग्न है।

प्रश्न 11.
राजस्थान में स्थानान्तरित कृषि को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर:
दक्षिणी-पूर्वी राजस्थान में स्थानान्तरित कृषि को वालरा के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 12.
भारत के किस राज्य का सब्जी उत्पादन में प्रथम स्थान है?
उत्तर:
पश्चिमी बंगाल का भारत में सब्जियों के उत्पादन में प्रथम स्थान है।

प्रश्न 13.
चाय उत्पादन में असम का भास्त में कौन सा स्थान है?
उत्तर:
चीय उत्पादने में असम का भारत में प्रथम स्थान है।

प्रश्न 14.
भारत में पूर्ण जैविक खेती वाले राज्य को गौरव किस राज्य को मिला है?
उत्तर:
भारत में पूर्ण जैविक खेती वाले राज्य का गौरव सिक्किम राज्य को मिला है।

RBSE Class 12 Geography Chapter 18 लघूत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 15.
टूक फार्मिंग कृषि की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
ट्रक फार्मिंग उद्यान कृषि का ही एक प्रकार है। महानगरों में जनसंख्या की अधिकता व भूमि की कमी के कारण वहाँ से दूर अनुकूल जलवायु और मिट्टी वाले क्षेत्रों में फलों और सब्जियों को उगाकर ट्रकों एवं प्रशीतनयुक्त गाड़ियों द्वारा महानगरों तक पहुँचाया जाता है। इस प्रकार की फलों वे सब्जियों की खेती को टूक फार्मिंग कहते हैं। ट्रक फार्मिंग कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  1. खेतों को छोटा आकरि।
  2. गहन कृषि (वर्ष में सब्जियों की तीन-चार फसलें पैदा करना)।
  3. श्रम की अधिकता।
  4. वैज्ञानिक विधि द्वारा खेतों का प्रबन्धन।
  5. खादों एवं उर्वरकों का अधिकाधिक उपयोग।
  6. पूँजी की अधिकता।
  7. प्रशीतनयुक्त गाड़ियों तथा ट्रकों की व्यवस्था आदि।

प्रश्न 16.
भारतीय अर्थव्यवस्थों को मानसून का जुआ क्यों कहते हैं?
उत्तर:
भारतीय अर्थव्यवस्था कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था है। भारत के कुल कृषिगत क्षेत्र का लगभग दो-तिहाई भाग फसलों के उत्पादन के लिए मानसून पर निर्भर करता है। भारतीय मानसून की प्रमुख विशेषता उसकी अनियमितता वे अनिश्चितता है। दक्षिणी-पश्चिमी मानसूनी हवाओं से होने वाली वर्षा देश के कुछ भागों में बहुत कम तथा अविश्वसनीय तथा अनिश्चित होती है जबकि अन्य कुछ क्षेत्रों में धुआंधार, औसत से अधिक तथा समस्याग्रस्त स्थिति उत्पन्न कर देती है।

परिणाम यह होता है कि कुछ क्षेत्र तो बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में आ जाते हैं जबकि अन्यत्र सूखा की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ये परिस्थितियाँ प्रतिवर्ष परिवर्तित होती रहती हैं। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है। अनुकूल मानसूनी स्थिति सकारात्मक तथा प्रतिकूल स्थिति नकारात्मक परिणाम देती है। फलत: अर्थव्यवस्था में उतार-चढ़ाव बना रहता है। इसीलिए भारतीय अर्थव्यवस्था को मानसून का जुआ कहते हैं।

प्रश्न 17.
भारतीय कृषि की कोई चार विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर:
प्रारम्भ में भारत में परम्परागत एवं खाद्यान्न प्रधान कृषि की जाती रही है। विगत दशकों में हरित क्रान्ति के फलस्वरूप कृषि प्रारूप में परिवर्तन आया है। भारतीय कृषि की प्रमुख चार विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  1. खाद्यान्न फसलों की प्रधानता।
  2. कृषि जोतों का छोटा आकार।
  3. मानसून पर निर्भरता।
  4. प्रति हेक्टेअर कम उत्पादन आदि।

प्रश्न 18.
भारत के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों के नाम लिखिए।
उत्तर:
भारत को गन्ना की जन्मस्थली होने का गौरव प्राप्त है। विश्व के कुल गन्ना क्षेत्र का लगभग 35 प्रतिशत भारत में पाया जाता है। भारत के कुल गन्ना उत्पादन का 60 प्रतिशत उत्तर भारत से प्राप्त होता है। भारत के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य निम्नलिखित हैं –

  1. उत्तर प्रदेश-देश के कुल उत्पादन का 38.56 प्रतिशत (2013-14 में)।
  2. महाराष्ट्र-देश के कुल उत्पादन का 22.89 प्रतिशत (2013-14)।
  3. तमिलनाडु-देश के कुल उत्पादन का 10.68 प्रतिशत।
  4. अन्य राज्य-कर्नाटक, आन्ध्रप्रदेश, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, बिहार, उड़ीसा तथा मध्यप्रदेश हैं।

RBSE Class 12 Geography Chapter 18 निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 19.
भारत में जैविक कृषि के विकास को समझाते हुए जैविक एवं रासायनिक कृषि में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
भारत में जैविक कृषि की शुरुआत कृषि के साथ ही हुई। वस्तुतः जैविक खाद (कम्पोस्ट, हरीखाद, गोमूत्र, वर्मीकम्पोस्ट, वनस्पतियों के अवशेषों आदि के सड़ने-गलने से) एवं परम्परागत तरीकों से की जाने वाली कृषि जैविक कृषि कहलाती है। पर्यावरण के अनुकूल होने के कारण इसे प्राकृतिक कृषि भी कहते हैं। भारत में 7.23 लाख हेक्टेअर क्षेत्र पर यह कृषि की जा रही है।

महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, पंजाब, उत्तर प्रदेश, आन्ध्रप्रदेश, कर्नाटक, झारखण्ड, बिहार, राजस्थान आदि राज्य जैविक कृषि को अपनाने में आगे आ रहे हैं। सिक्किम देश का पहला पूर्ण जैविक खेती वाला राज्य है। इसकी घोषणा 18 जनवरी, 2016 को गंगटोक में आयोजित ‘टिकाऊ कृषि सम्मेलन’ में की गई। यहाँ जैविक खेती की शुरुआत 2003 से की गई थी। यहाँ पर्यावरण सुरक्षा की दृष्टि से रासायनिक उर्वरकों को पूर्णतः निषिद्ध कर दिया गया है।

जैविक एवं रासायनिक कृषि में अन्तर:
स्वभाव, उत्पादन की विधि, प्रकृति से सामञ्जस्य एवं प्रभाव के आधार पर जैविक एवं रासायनिक कृषि में निम्नलिखित अन्तर प्राप्त होते हैं –

जैविक कृषि रासायनिक कृषि
1. जैविक खाद एवं परम्परागत तरीकों से की जाने वाली कृषि जैविक कृषि कहलाती है। 1. रासायनिक खादों तथा कीटनाशक दवाओं के प्रयोग से  की जाने वाली कृषि रासायनिक कृषि कहलाती है।
2. जैविक खाद में कम्पोस्ट, गोमूत्र, वर्मी कम्पोस्ट, नीम केक तथा पौधों की पत्तियों से बनी खादों को सम्मिलित करते हैं। यह जीवों के सड़े-गले पदार्थों से बनायी जाती है। 2. रासायनिक खादों में फॉस्फेट, नाइट्रोजन, अमोनिया, जैसे रासायनिक तत्व होते हैं जिनके नकारात्मक प्रभा मिट्टी पर पड़ते हैं।
3. जैव पदार्थों द्वारा निर्मित खादों का उपयोग किया जाता है। 3. रासायनिक खादों एवं कीटनाशक दवाओं का उपयोग किया जाता है।
4. जैविक कृषि से जैव-विविधता पर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है। 4. रासायनिक कृषि से जैव विविधता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता।
5. जैविक कृषि से प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाते हुए कृषि उत्पादन को बढ़ाया जाता है। 5. रासायनिक कृषि में पर्यावरण के लाभ-हानि को सोचे  बिना रासायनिक खादों का उपयोग करके कृषि उत्पादन बढ़ाया जाता है।
6. जैविक खाद घर अथवा फार्म पर तैयार की जाती है। 6. रासायनिक खाद औद्योगिक केन्द्रों (कारखानों) में तैयार की जाती है।
7. जैविक खाद मिट्टी के उपजाऊपन को बढ़ाने में सहायक होती है। 7. रासायनिक खाद से भूमि की उर्वरा शक्ति नष्ट हो जाती होती है।
8. जैविक खाद से उत्पादित खाद्यान्न मानव स्वास्थ्य पर अनुकूल प्रभाव डालते हैं। 8. रासायनिक खादों से उत्पन्न खाद्यान्न मानव तथा अन्य जीवों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।
9. जैविक कृषि द्वारा भूमि की उर्वरा शक्ति व उत्पादन दोनों में धीरे-धीरे वृद्धि होती है। 9. रासायनिक कृषि से भूमि की उर्वरा शक्ति कुछ दिनों तक बनी रहती है। इसके बाद उर्वरा शक्ति का ह्रास होने लगता है।
10. जैविक कृषि में जल की कम आवश्यकता पड़ती है। 10. रासायनिक कृषि में जल की अधिक आवश्यकता पड़ती है।
11. जैविक कृषि भूमिगत जल की शुद्धता पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं डालती। 11. रासायनिक कृषि में प्रयुक्त रसायनों का भूमिगत जल पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
12. जैविक कृषि से प्राप्त उपज स्वास्थ्य के लिए उपयोगी होने से इसकी मांग अधिक रहती है। 12. रासायनिक कृषि से प्राप्त उपजे स्वास्थ्य के लिए  अपेक्षाकृत कम उपयोगी है। इससे अनेक बीमारियों की सम्भावनाएँ बढ़ जाती हैं।
13. जैविक कृषि प्रकृति पर आधारित है। अधिकांश आवश्यक चीजें प्रकृति से व मानव श्रम द्वारा प्राप्त हो जाती हैं। 13. रासायनिक कृषि पूर्णत: बाजार पर निर्भर है। बीज, खाद, दवाइयाँ, यन्त्र, तकनीक आदि सब बाजार से ही प्राप्त होती हैं।
14. जैविक कृषि मानव श्रम प्रधान कृषि है। 14. यह तकनीक प्रधान कृषि है।
15. प्रति हेक्टेअर उत्पादन कम किन्तु गुणवत्ता अधिक होती है। 15. प्रति हेक्टेअर उत्पादन अधिक किन्तु गुणवत्ता कम होती है।

प्रश्न 20.
भारतीय कृषि के महत्व को स्पष्ट करते हुए प्रमुख कृषि प्रकारों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहाँ की लगभग 54.6 प्रतिशत जनसंख्या प्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। इसके महत्व को निम्नलिखित प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है –

  1. भारत में कृषि जीवन-निर्वाह का प्रमुख साधन है।
  2. भारत में बहुत से उद्योग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर हैं।
  3. कृषि आधारित उद्योगों में बहुत से लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है।
  4. भारत में कृषि क्षेत्र का योगदान सकल घरेलू उत्पाद का 17.5 प्रतिशत (2014-15) रहा है।
  5. भारत के कुल निर्यात मूल्य का लगभग 12.7 प्रतिशत कृषि उत्पादों से प्राप्त होता है।
  6. भारतीय अर्थव्यवस्था, समाज एवं संस्कृति का मूलाधार कृषि है।

कृषि के प्रकार:

प्राकृतिक दशा; जलवायु तथा मिट्टी की विभिन्नता के कारण भारत में कृषि के कई प्रकार मिलते हैं। भारतीय कृषि को अग्रलिखित प्रकारों में बाँटा गया है –
RBSE Solutions for Class 12 Geography Chapter 18 कृषि
1. निर्वहन कृषि:
(a) आदिम निर्वहन कृषि:
यह कृषि मुख्यतः जीविका प्रधान कृषि है जिसमें खाद्यान्नों को प्रधानता दी जाती है। प्रारम्भिक समय में जंगलों को जलाकर जनजातियों द्वारा स्थानान्तरित कृषि की गई जिसमें खेत एवं आवास दोनों स्थानान्तरित होते रहते हैं। जनसंख्या बढ़ने पर स्थानान्तरित कृषि स्थायी कृषि में परिवर्तित होने लगी।

(b) गहन निर्वहन कृषि:
यह कृषि भारत के उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ जनसंख्या अधिक व कृषि क्षेत्र कम मिलता है। इस कृषि में मानवीय श्रम अधिक होता है। इसे पुनः दो भागों में बांटा गया है –

  • चावल प्रधान गहन कृषि
  • गेहूँ प्रधान गहने कृषि।

2. आर्द्र एवं शुष्क कृषि:
(a) आर्द्र कृषि:
100 सेमी. से 200 सेमी. वर्षा वाले क्षेत्रों में विशेषकर गंगा की मध्यवर्ती घाटी, प्रायद्वीपीय भारत के उत्तरी-पूर्वी भागों तथा तटीय क्षेत्रों में यह कृषि की जाती है।
(b) शुष्क कृषि;
50 सेमी. से कम वर्षा वाले भागों में गेहूँ, जौ, ज्वार, बाजरा आदि की कृषि की जाती है।

3. गहन एवं विस्तीर्ण कृषि:
(a) गहन कृषि:
इसमें कर्म क्षेत्र में अधिक उत्पादन का लक्ष्य रहता है। इसका प्रमुख कारण सघन आबादी और कृषि भूमि की कमी है। उत्तर भारत के अधिकांश भागों में यह कृषि की जाती है।
(b) विस्तीर्ण कृषि:
यह यान्त्रिक कृषि है। पंजाब, हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में यह कृषि की जा रही है।

4. उद्यान कृषि:
यह व्यापारिक कृषि है। यह विशेषीकृत कृषि है जो अधिकतर छोटे पैमाने पर की जाती है। इसके छ: उपभेद हैं –

  • बाजार के समीप सब्जी उत्पादन
  • ट्रक कृषि
  • ग्रीन हाउस फार्मिंग
  • पुष्प कृषि
  • पादप नर्सरी तथा
  • व्यापारिक फलोत्पादन आदि।

इसमें सब्जी उत्पादन तथा ट्रक कृषि एवं व्यापारिक फलोत्पादन अधिक महत्वपूर्ण है।
5. जैविक कृषि:
भारत में जैविक कृषि प्राचीनकाल से ही चली आ रही है। यह कृषि पर्यावरण अनुकूल कृषि है। भारत के लगभग 7.23 लाख हेक्टेअर क्षेत्रफल पर यह कृषि की जाती है। महाराष्ट्र, मेघालय, पंजाब, उत्तरप्रदेश, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक, झारखण्ड, बिहार, राजस्थान, जैविक कृषि को अपना रहे हैं। सिक्किम देश का पूर्ण जैविक कृषि करने वाला राज्य है।

प्रश्न 21.
भारत में गेहूं के उत्पादन के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं का उल्लेख करते हुए वितरण एवं उत्पादन का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
गेहूँ एक शीतोष्ण कटिबन्धीय फसल है। भारत में चावल के पश्चात् गेहूँ दूसरी महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसल है। भारत में गेहूँ की कृषि अति प्राचीन काल से की जा रही है। भारत विश्व का लगभग 12 प्रतिशत गेहूँ उत्पादित करता है। देश के कुल बोये गये क्षेत्र के लगभग 14 प्रतिशत भाग पर गेहूँ की कृषि की जाती है।

आवश्यक भौगोलिक दशाएँ:
गेहूँ की कृषि के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाएँ अग्रलिखित हैं –

  • तापमान:
    गेहूँ मुख्य रूप से शीतोष्ण कटिबन्धीय पौधा है। गेहूँ को बोते समय 10°C बढ़ते समय 15°C तथा पकते व काटते समय 20°C से 28°C तापमान की आवश्यकता होती है।
  • वर्षा:
    गेहूँ की कृषि के लिए 50 से 75 सेमी. वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है। अधिक वर्षा इसकी कृषि के लिए हानिकारक होती है। लेकिन कम वर्षा होने पर सिंचाई की आवश्यकता होती है।
  • मृदा:
    गेहूँ की कृषि विभिन्न प्रकार की मिट्टियों में की जा सकती है। परन्तु इसकी कृषि के लिए दोमट, बलुई दोमट एवं काली मिट्टी अधिक उपयुक्त होती है।
  • धरातल:
    गेहूँ की कृषि के लिए समतल एवं उपयुक्त जल निकास वाली भूमि होनी चाहिए।
  • श्रम:
    गेहूँ की कृषि के लिए अधिक श्रम की आवश्यकता होती है, लेकिन वर्तमान में बढ़ते हुए यंत्रीकरण ने इसकी कृषि में श्रम के महत्व को कम कर दिया है।

उत्पादन एवं वितरण:
भारत में विश्व का लगभग 12 प्रतिशत गेहूँ उत्पादित किया जाता है। शीतोष्ण कटिबन्धीय फसल होने के कारण इसे भारत में शीतकालीन अवधि में रबी की फसल के रूप में उत्पादित किया जाता है। रबी की फसल होने के कारण गेहूँ। की कृषि सिंचाई की सुविधा रखने वाले क्षेत्रों में प्रमुख रूप से की जाती है। लेकिन हिमालय के उच्च पर्वतीय भागों तथा मध्य प्रदेश में मालवा के पठारी भागों पर गेहूँ की कृषि पूर्ण रूप से वर्षा पर निर्भर रहती है।

भारत के प्रमुख गेहूँ उत्पादक क्षेत्र:
भारत में गेहूं उत्पादन की दृष्टि से सतलज, यमुना के ऊपरी गंगा का मैदान सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में भारत का लगभग 68 प्रतिशत गेहूँ उत्पादित किया जाता है। भारत के प्रमुख गेहूँ उत्पादक राज्यों व उनके क्षेत्रों का संक्षिप्त विवरण निम्नानुसार है।

उत्तर प्रदेश:
यह भारत का अग्रणी गेहूँ उत्पादक राज्य है। इस राज्य में गंगा-यमुना, गंगा-घाघरा दोआबे गेहूं की कृषि के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। जहाँ राज्य का 75 प्रतिशत गेहूँ पैदा होता है। इस राज्य के मुख्य उत्पादक जिले सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, मुरादाबाद, रामपुर, बदायूं, बुलन्दशहर आदि। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2014-15 में 25.2 मिलियन टन गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ।

पंजाब:
यह दूसरा बड़ा गेहूँ उत्पादक राज्य है। हरित क्रान्ति के प्रभाव से पंजाब में गेहूं की उपज में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यहाँ कुल कृषि भूमि के 30 प्रतिशत भाग पर गेहूँ की कृषि की जाती है। सिंचाई सुविधा एवं उपजाऊ मिट्टी उन्नत खाद बीज के उपयोग से राज्य की औसत उपज 5017 किग्रा प्रति हेक्टेयर पर है जो देश का सर्वाधिक है। 2014-15 में राज्य में 15.8 मिलियन टन गेहूं का उत्पादन हुआ। इस के मुख्य उत्पादक जिले-लुधियाना, जालन्धर, अमृतसर, कपूरथला, फिरोजापुर, भटिण्डा, पटियाला तथा संगरूर है।

हरियाणा:
क्षेत्रफल की दृष्टि से छोटा लेकिन सिंचाई सुविधाओं के कारण 13.5 प्रतिशत गेहूँ उत्पादन कर बड़ा उत्पादक राज्य बन गया है यहाँ रोहतक, हिसार, जिंद, कुरुक्षेत्र, सिरसा, फतेहाबाद, अम्बाला, गुड़गाँव, फरीदाबाद जिलों में देश का 8 प्रतिशत गेहूँ उत्पादन क्षेत्र स्थित है।

मध्यप्रदेश:
मैदानी भागों और मालवा की काली मिट्टी क्षेत्रों में सिंचाई द्वारा गेहूं उत्पादन किया जाता है। वर्ष 2014-15 में राज्य में 14.2 मिलियन टन गेहूं का उत्पादन हुआ। मध्य प्रदेश देश का तीसरा बड़ा गेहूँ उत्पादक राज्य है। इसके प्रमुख उत्पादक जिले गुना, भिण्ड, ग्वालियर, उज्जैन, सागर, इंदौर, जबलपुर आदि हैं।

राजस्थान:
इस राज्य में वर्षा की कमी के कारण सिंचाई द्वारा गेहूं की फसल बोई जाती है। राज्य की कुल कृषि भूमि के 18 प्रतिशत भाग पर गेहूं की कृषि की जाती है। इन्दिरा गाँधी नहर के निर्माण पश्चात् राजस्थान में गेहूं की उपज में वृद्धि हुई है। यहाँ देश को 7-9 प्रतिशत गेहूँ उत्पादन किया जाता है। इसके प्रमुख उत्पादक जिले श्रीगंगानगर, भरतपुर, कोटा, अलवर, बाँरा, जयपुर, भीलवाड़ा, सवाई माधोपुर, बाँसवाड़ा आदि है।

बिहार:
बिहार के उत्तरी मैदानी भागों में गेहूं उत्पादन किया जाता है। राज्य में देश का 6 प्रतिशत गेहूँ उत्पादन होता है। चम्पारन, शाहबाद, दरभंगा, गया, मुजफ्फरनगर, पटना आदि प्रमुख उत्पादक गेहूं जिले हैं।

अन्य गेहूँ उत्पादक राज्य:
पश्चिम बंगाल (मुर्शिदाबाद, नादिया, वीरभूमि, दीनाजपुर), हिमाचल प्रदेश (कांगड़ा मण्डी, शिमला), कर्नाटक (बिजापुर, धारवाड़, बेलगाम), महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु तथा आन्ध्र प्रदेश 500 किग्रा प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन कर सबसे पीछे हैं।
RBSE Solutions for Class 12 Geography Chapter 18 कृषि

RBSE Class 12 Geography Chapter 18 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 12 Geography Chapter 18 बहुचयनात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत की कितनी प्रतिशत जनसंख्या प्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है?
(अ) 40.6 प्रतिशत
(ब) 54.6 प्रतिशत
(स) 60.0 प्रतिशत
(द) 62.3 प्रतिशत
उत्तर:
(ब)

प्रश्न 2.
कृषि के लिए अनुकूल भौगोलिक परिस्थिति है –
(अ) समतल भूमि
(ब) पर्याप्त जलापूर्ति
(स) उपजाऊ मिट्टी
(द) ये सभी
उत्तर:
(द)

प्रश्न 3.
निम्नलिखित में से जो भारतीय कृषि की समस्या है, बताइए –
(अ) खाद्यान्नों की प्रधानता
(ब) फसलों की विविधता
(स) चारा फसलों की कमी
(द) भूमि पर जनसंख्या का बढ़ता भार
उत्तर:
(द)

प्रश्न 4.
हरित क्रान्ति का सम्बन्ध है –
(अ) मत्स्य विकास से
(ब) दुग्ध विकास से
(स) कृषि विकास से
(द) इन सभी से
उत्तर:
(स)

प्रश्न 5.
फलों के उत्पादन में भारत में प्रथम स्थान है –
(अ) उत्तर प्रदेश को
(ब) महाराष्ट्र को
(स) गुजरात को
(द) तमिलनाडु का
उत्तर:
(ब)

प्रश्न 6.
निम्नलिखित में से जो रबी की फसलों का समूह है, बताइए –
(अ) चावल, ज्वार, बाजरा, मक्का, कपास
(ब) ककड़ी, तरबूज, खरबूजा, चरी
(स) गेहूँ, जौ, चना, सरसों, मटर
(द) बाजरा, मक्का, कपास, ककड़ी चारा
उत्तर:
(स)

प्रश्न 7.
भारत में आलू के उत्पादन में किस राज्य का प्रथम स्थान है?
(अ) उत्तर प्रदेश
(ब) महाराष्ट्र
(स) बिहार
(द) राजस्थान
उत्तर:
(अ)

प्रश्न 8.
निम्नलिखित में से जो जैविक कृषि की विशेषता है, बताइए –
(अ) जैवविविधता पर विपरीत प्रभाव
(ब) अधिक उत्पादन
(स) कृषि उपज स्वास्थ्य के लिए उपयोगी
(द) रासायनिक खादों का उपयोग
उत्तर:
(स)

प्रश्न 9.
निम्नलिखित में से जो खाद्यान्न फसल नहीं है, बताइए –
(अ) चावल
(ब) बाजरा
(स) दालें
(द) जूट
उत्तर:
(द)

प्रश्न 10.
शक्कर के उत्पादन में भारत में किस राज्य का प्रथम स्थान है?
(अ) उत्तर प्रदेश
(ब) महाराष्ट्र
(स) तमिलनाडु
(द) कर्नाटक
उत्तर:
(ब)

प्रश्न 11.
भारत में चाय के उत्पादन में किस राज्य का प्रथम स्थान है?
(अ) असम
(ब) पश्चिम बंगाल
(स) तमिलनाडु
(द) केरल
उत्तर:
(अ)

प्रश्न 12.
सब्जियों के उत्पादन में विश्व में भारत का स्थान है –
(अ) प्रथम
(ब) द्वितीय
(स) तृतीय
(द) चतुर्थ
उत्तर:
(ब)

सुमेलन सम्बन्धी प्रश्न
निम्न में स्तम्भ (अ) को स्तम्भ (ब) से सुमेलित कीजिए
(क)

स्तम्भ (अ)
(राज्य का नाम/क्षेत्र का नाम)
स्तम्भ (ब)
(स्थानान्तरित कृषि का नाम)
1. मध्यप्रदेश (अ) पोनम
2. आन्ध्रप्रदेश (ब) वालरा
3. केरल (स) खील
4. राजस्थान (द) बेवर
5. कुमारी हिमालय (य) पोदू

उत्तर:
(i) द (ii) य (iii) अ (iv) ब (v) स

(ख)

स्तम्भ (अ)
(फसल का नाम)
स्तम्भ (ब)
(अग्रणी उत्पादक राज्य)
1. गेहूँ (अ) पश्चिमी बंगाल
2. चावल (ब) असम
3. कपास (स) उत्तरप्रदेश
4. चाय (द) गुजरात

उत्तर:
(i) स (ii) अ (iii) द (iv) ब।

RBSE Class 12 Geography Chapter 18 अतिलघूउत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
किस रूसी विद्वान ने भारत को एक कृषि उद्भव केन्द्र माना है?
उत्तर:
रूसी विद्वान् वेविलोव ने भारत को एक कृषि उद्भव केन्द्र माना है।

प्रश्न 2.
भारत की संस्कृति और समाज का मूलाधार कृषि है-कैसे?
उत्तर:
भारतीय संस्कृति कृषि से ओत-प्रोत है। हमारे अनेक त्योहार और उत्सव कृषि से सम्बन्धित हैं। इससे स्पष्ट होता है कि भारतीय समाज और संस्कृति का मूलाधार कृषि है।

प्रश्न 3.
प्रकृति ने भारत को कृषि के क्षेत्र में विशिष्ट देश कैसे बनाया है?
उत्तर:
प्रकृति ने भारत को जो उत्कृष्ट भौगोलिक स्थिति, समतल भूमि, उपजाऊ मृदा, पर्याप्त जलापूर्ति, मानसूनी, जलवायु की स्थिति प्रदान की है उन्होंने भारत को कृषि के क्षेत्र में विशिष्ट देश बना दिया है।

प्रश्न 4.
भारत के कुल क्षेत्रफल के कितने प्रतिशत, भाग परं कृषि कार्य होता है?
उत्तर:
भारत के कुल क्षेत्रफल के 40.5 प्रतिशत भाग पर कृषि कार्य होता है।

प्रश्न 5.
भारतीय कृषि का अत्यधिक महत्व क्यों है?
उत्तर:
भारतीय कृषि रोजगार प्रदान करने, उद्योगों को कच्चा माल प्रदान करने, राष्ट्रीय आय का साधन होने, विदेशी मुद्रा की प्राप्ति, पौष्टिक पदार्थों के उत्पादन व यातायात साधनों के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसका अत्यधिक महत्व है।

प्रश्न 6.
भारत में कृषि जोतों का आकार छोटा क्यों हो रहा है?
उत्तर:
भारत में जनसंख्या वृद्धि से कृषि भूमि के विभाजन एवं विखण्डन (पीढ़ी-दर-पीढ़ी) के कारण कृषि जोतों को आकार छोटा होता जा रहा है।

प्रश्न 7.
भारतीय कृषि के प्रकार कौन-कौन से हैं ?
उत्तर:
भारतीय कृषि के प्रमुख प्रकारों से आदिम निर्वहन कृषिगहन निर्वहन कृषि, आर्द व शुष्क कृषि, गहन व विस्तीर्ण कृषि, उद्योग कृषि व जैविक कृषि प्रमुख है।

प्रश्न 8.
निर्वहन कृषि की कोई दो विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
निर्वहन कृषि की प्रमुख दो विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  1. यह एक परम्परागत कृषि विधि रही है।
  2. कृषि जोतों का छोटा आकार तथा बैलों से हल चलाकर कृषि करना इसकी मुख्य विशेषता है।

प्रश्न 9.
स्थानान्तरित कृषि को भारत के विभिन्न भागों में किन नामों से जानते हैं?
उत्तर:
स्थानान्तरित कृषि को भारत के उत्तर-पूर्वी भाग 3 में झूमिंग, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ में बेवर, आन्ध्र प्रदेश में पोदू, केरल में पोनम्, दक्षिणी भारत में दिप्पा छिप्पा (गोंड जनजाति द्वारा), पैण्डा, पश्चिमी घाट में कुमारी, हिमालय में खील तथा दक्षिणी पूर्वी राजस्थान में विभिन्न नामों से जाना जाता है।

प्रश्न 10.
स्थाई आदिम निर्वहन कृषि के कोई दो क्षेत्र बताइए।
उत्तर:
स्थाई आदिम निर्वहन कृषि के प्रमुख दो क्षेत्र हैं –

  1. मध्य हिमालय तथा
  2. प्रायद्वीपीय भारत का उत्तरी-पूर्वी भाग।

प्रश्न 11.
गहन निर्वहन कृषि के दो प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
गहन निर्वहन कृषि के दो प्रमुख क्षेत्र हैं –

  1. भारत का उत्तरी विशाल मैदान तथा
  2. समुद्र तटीय मैदान।

प्रश्न 12.
गहन निर्वहन कृषि में हो रहे। आधुनिकीकरण का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
गहन निर्वहन कृषि में निम्नलिखित आधुनिकीकरण तेजी से हो रहा है –

  1. कृषि में मशीनों का प्रयोग बढ़ रहा है।
  2. फसल आवर्तन (अदला-बदली) पर बल दिया जा रहा है।

प्रश्न 13.
चावल प्रधान गहन निर्वहन कृषि के प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
चावल प्रधान गहन निर्वहन कृषि के प्रमुख क्षेत्र पश्चिमी बंगाल, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश तथा तटीय मैदान है।

प्रश्न 14.
गेहूँ प्रधान गहन निर्वहन कृषि के प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
गेहूँ प्रधान निर्वहन कृषि के प्रमुख क्षेत्र पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी मध्य प्रदेश, राजस्थान तथा प्रायद्वीपीय पठार के पश्चिमी भागं हैं।

प्रश्न 15.
व्यापारिक कृषि की कोई दो विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
व्यापारिक कृषि की कोई दो विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  1. निर्यात की दृष्टि से अतिरिक्त उत्पादन किया जाता है।
  2. कई फसलों के स्थान पर भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल एक ही फसल को वरीयता दी जाती है।

प्रश्न 16.
आर्दकृषि किसे कहते हैं?
उत्तर:
वह कृषि जिसमें फसलों के आवश्यक मात्रा से अधिक वर्षा की प्राप्ति होती है उसे आई कृषि कहते हैं।

प्रश्न 17.
शुष्क कृषि से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
50 सेमी. से कम वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में की जाने वाली कृषि शुष्क कृषि कहलात है।

प्रश्न 18.
शुष्क कृषि के प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
भारत में शुष्क कृषि के प्रमुख क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश, अरावली के पश्चिम में पश्चिमी राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, आन्ध्र प्रदेश आदि कम वर्षा वाले राज्य हैं।

प्रश्न 19.
भारत में शुष्क कृषि अनुसन्धान कार्यालय कहाँ स्थापित है?
उत्तर:
भारत में शुष्क कृषि अनुसन्धान कार्यालय राँची में स्थापित किया गया है।

प्रश्न 20.
शुष्क कृषि अनुसन्धान कार्यालय का क्या प्रमुख कार्य है?
उत्तर:
शुष्क कृषि अनुसन्धान कार्यालय का प्रमुख कार्य शुष्क क्षेत्रों की जलवायु, प्राकृतिक दशा तथा बीजों का उचित चयन करके शुष्क क्षेत्रों हेतु कृषि की योजना बनाना है।

प्रश्न 21.
विस्तीर्ण कृषि क्या है?
उत्तर:
जिन देशों में जनसंख्या के अनुपात में भूमि अधिक होती है। वहाँ बड़े-बड़े खेतों में मशीनों व यांत्रिक उपकरणों से कृषि की जाती है। इसके लिए अधिक पूँजी की आवश्यकता होती है ऐसी कृषि विस्तीर्ण कृषि कहलाती है।

प्रश्न 22.
चकबन्दी के क्या उद्देश्य हैं?
उत्तर:
चकबन्दी का उद्देश्य बिखरे हुए खेतों को इकट्ठा करके जोत के आकार को बड़ा करना होता है। जिसके कारण खेतों की देखभाल और सिंचाई करने में आसानी होती हैं।

प्रश्न 23.
चकबन्दी के कोई दो लाभ बताइए।
उत्तर:
चकबन्दी के प्रमुख दो लाभ निम्नलिखित हैं –

  1. चक बना देने से खेतों की देखभाल आसान हो जाती है।
  2. एक जगह चक हो जाने से सिंचाई की उचित व्यवस्था की जा सकती है।

प्रश्न 24.
भारत के किन राज्यों में चकबन्दी का कार्य हो चुका है?
उत्तर:
भारत के तीन राज्यों – पंजाब, हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश में चकबन्दी का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है।

प्रश्न 25.
उद्यान कृषि के प्रमुख उपभेद बताइए।
उत्तर:
उद्यान कृषि के निम्न छः उपभेद हैं –

  1. बाजार के समीप सब्जी उत्पादन।
  2. ट्रक कृषि।
  3. ग्रीन हाउस फार्मिंग।
  4. पुष्प कृषि।
  5. पादप नर्सरी तथा।
  6. व्यापारिक फलोत्पादन कृषि।

प्रश्न 26.
भारत में फूलों के उत्पादन में किस राज्य का प्रथम से का | प्रथम स्थान है?
उत्तर:
भारत में फूलों के उत्पादन में तमिलनाडु का प्रथम स्थान है।

प्रश्न 27.
गैर जैविक कृषि (रासायनिक कृषि) की ओर लोग क्यों अग्रसर हुए?
उत्तर:
बढ़ती आबादी के कारण भरण-पोषण तथा अनाज संकट को दूर करने के लिए 60 के दशक में लोगों का आकर्षण गैर जैविक कृषि की ओर बढ़ा।

प्रश्न 28.
विश्व में कितने क्षेत्रफल पर जैविक कृषि, की जा रही है?
उत्तर:
वर्तमान समय में विश्व में लगभग 3.7 करोड़ हेक्टेअर भूमि पर जैविक कृषि की जा रही है जो विश्व की कुल कृषि भूमि का 0.9 प्रतिशत है।

प्रश्न 29.
भारत के किन राज्यों में जैविक कृषि का प्रचलन बढ़ रहा है?
उत्तर:
भारत के महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, पंजाब, उत्तर प्रदेश, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक, झारखण्ड, बिहार तथा राजस्थान आदि राज्यो में जैविक कृषि का प्रचलन बढ़ रहा है।

प्रश्न 30.
खरीफ की फसल में कौन-कौन सी फसले आती हैं ?
उत्तर:
खरीफ की फसलों में चावल, ज्वार, बाजरा, मक्का कपास, जूट, मूंगफली, तिल, गन्ना, उड़द, मूंग, सोंठ आदि फसलें आती हैं।

प्रश्न 31.
रबी की फसलों के नाम लिखिए।
उत्तर:
रबी की फसलों में गेहूँ, जौ, चना, सरसों, मटर, अरहर, मसूर आदि फसलें आती हैं।

प्रश्न 32.
जायद की फसलों से क्या अभिप्राय है?
उत्तर:
ऐसी फसलें जो रबी व खरीफ के अतिरिक्त मध्यवर्ती समय में बोई जाती है उन्हें जायद की फसल कहते हैं। इनमें ककड़ी तरबूज, खरबूजा चरी (ज्वार) व सब्ज़ियाँ शामिल की जाती हैं।

प्रश्न 33.
जैविक कृषि से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर:
जैविक खाद वे परम्परागत तरीकों से की जाने वाली कृषि को जैविक कृषि कहते हैं।

प्रश्न 34.
रासायनिक कृषि किसे कहते हैं?
उत्तर:
रासायनिक खादों व कीटनाशक दवाओं के प्रयोग से की जाने वाली कृषि को रासायनिक कृषि कहते हैं।

प्रश्न 35.
उपयोग के आधार पर फसलों को कितने भागों में बाँटा गया है?
उत्तर:
उपयोग के आधार पर फसलों को चार भागों खाद्यान्न बागानी रेशेदार व नकदी फसलों में बाँटा गया है।

प्रश्न 36.
गेहूँ की कृषि के लिए तापमान की क्या स्थिति होनी चाहिए?
उत्तर:
गेहूँ शीतोष्ण कटिबन्धीय उपज है। बोते समय तापमान 10° सेग्रे. बढ़ते समय 15° सेग्रे. तथा पकते व 1 काटते समय 20° से 28° सेग्रे. तापमान आवश्यक होता है। इसके लिए 100 दिन पालारहित होना आवश्यक है।

प्रश्न 37.
भारत में चावल की कृषि के सम्बन्ध में रूसी विद्वान वेविलोव का क्या कथन है?
उत्तर:
रूसी विद्वान वेविलोव के अनुसार, भारत चावल का मूल स्थान है। यहाँ से इसका प्रसार पूर्व की ओर चीन तक 3000 ई. पू. तक हो चुका था। मोहनजोदड़ो एवं हड़प्पा व समकालिक सभ्यताओं में चावल के अवशेष मिले हैं। वैदिक काल में चावल का उपयोग धार्मिक, सांस्कृतिक कार्यों में होता था।

प्रश्न 38.
उत्तर प्रदेश के प्रमुख चावल उत्पादक जिलों के नाम बताइए।
उत्तर:
उत्तर प्रदेश के प्रमुख चावल उत्पादक जिलेसहारनपुर, देवरिया, गोरखपुर, लखनऊ, बहराइच, गोण्डा, बलिया, फैजाबाद, बस्ती, रायबरेली, पीलीभीत आदि हैं।

प्रश्न 39.
चावल के प्रति हेक्टेअर उत्पादन की दृष्टि से (2014 – 15 में) किस राज्य का प्रथम स्थान रहा है?
उत्तर:
चावल के प्रति हेक्टेअर उत्पादन (3952 किग्रा.) की दृष्टि से पंजाब का प्रथम स्थान रहा है।

प्रश्न 40.
चावल उत्पादन में छत्तीसगढ़ की स्थिति क्या है?
उत्तर:
छत्तीसगढ़ के मैदानी भाग को चावल का कटोरा’ कहा जाता है छत्तीसगढ़ के प्रमुख चावल उत्पादक जिले बिलासपुर, बस्तर, सरगुजा, रायगढ़, दंतेवाड़ा तथा
नारायणपुर हैं।

प्रश्न 41.
भारतीय चावल अनुसन्धान संस्थान केन्द्र कहाँ स्थित है?
उत्तर:
भारतीय चावल अनुसन्धान संस्थान केन्द्र कटक (उड़ीसा) में स्थित है।

प्रश्न 42.
भारत की प्रमुख दो मुद्रादायिनी फसलों के नाम बताइए।
उत्तर:
भारत की प्रमुख दो मुद्रादायिनी फसलें हैं –

  1. चाय
  2. कपास

प्रश्न 43.
भारत की दो प्रमुख रेशेदार फसलें कौन-सी हैं?
उत्तर:
भारत की दो प्रमुख रेशेदार फसलें हैं –

  1. कपास तथा
  2. जूट।

प्रश्न 44.
कपास के प्रति हेक्टेअर उत्पादन में हरियाणा का कौन-सा स्थान है?
उत्तर:
कपास के प्रति हेक्टेअर उत्पादन में हरियाणा का दूसरा स्थान है।

प्रश्न 45.
कपास का प्रति हेक्टेअर उत्पादने भारत के किस राज्य में सर्वाधिक है?
उत्तर:
कपास का प्रति हेक्टेअर उत्पादन भारत में पंजाब राज्य में सर्वाधिक है।

प्रश्न 46.
कपास की फसल हेतु आवश्यक भौतिक दशाएँ क्या हैं ?
उत्तर:
कपास की फसल हेतु आवश्यक भौतिक दशाओं में 21° – 25°C तापमान 50 – 100 सेमी. वर्षा व कछारी/काली मिट्टी सर्वाधिक उपयुक्त रहती है।

प्रश्न 47.
गुजरात के प्रमुख कपास उत्पादक जिलों के नाम बताइए।
उत्तर:
गुजरात राज्य की 70 प्रतिशत कपास बड़ोदरा, अहमदाबाद, सूरत, भड़ौच, साबरमती, पंचमहल, सुरेन्द्रनगर आदि जिलों में उत्पन्न की जाती है।

प्रश्न 48.
महाराष्ट्र के प्रमुख कपास उत्पादक जिलों के नाम बताइए।
उत्तर:
महाराष्ट्र में प्रमुख कपास उत्पादक जिले नागपुर, अकोला, अमरावती, वर्धा, नादेड, जलगाँव तथा बुलढ़ाना हैं।

प्रश्न 49.
भारत में प्रति हेक्टेअर कपास उत्पादन किस राज्य में सर्वाधिक है?
उत्तर:
भारत में प्रति हेक्टेअर कपास उत्पादन पंजाब में सर्वाधिक है।

प्रश्न 50.
हरियाणा के दो प्रमुख कपास उत्पादक जिलों के नाम बताइए।
उत्तर:
हरियाणा के हिसार और सिरसा जिले राज्य के कुल कपास उत्पादन का 80 प्रतिशत कपास उत्पन्न करते हैं।

प्रश्न 51.
राजस्थान में कपास उत्पादन में कौन-सा जिला अग्रणी है?
उत्तर:
राजस्थान में हनुमानगढ़ जिला कपास उत्पादन में अग्रणी है। जो राज्य की 30 प्रतिशत उत्पादित करता है।

प्रश्न 52.
कर्नाटक के दो प्रमुख कपास क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
कर्नाटक के निम्नलिखित दो प्रमुख कपास क्षेत्रों में राज्य की 50 प्रतिशत से अधिक कपास उत्पन्न की जाती है –

  1. काली मिट्टी का क्षेत्र-सलहट्टी-बेलारी, शिमोगा, चिकमंगलूर, चित्तलदुर्ग जिले।
  2. लाल मिट्टी का क्षेत्र-दौड़हट्टी-रायचूर एवं धारवाड़ जिले।

प्रश्न 53.
गन्ना उत्पादन हेतु आवश्यक भौगोलिक दशाएँ कौन सी है?
उत्तर:
गन्ना उत्पादन हेतु 20°C – 30°C तापमान, 100-200 सेमी. वर्षा व दोमट गहरी चिकनी एवं लावायुक्त काली मिट्टी उपयुक्त रहती है।

प्रश्न 54.
महाराष्ट्र में कहाँ-कहाँ गन्ने का उत्पादन किया जाता है?
उत्तर:
महाराष्ट्र में अहमदनगर नासिक, पुणे, शोलापुर व रत्नागिरी क्षेत्रों में गन्ने का उत्पादन किया जाता है।

प्रश्न 55.
राष्ट्रीय गन्ना अनुसन्धान संस्थान कहाँ स्थित है?
उत्तर:
राष्ट्रीय गन्ना अनुसन्धान संस्थान कोयम्बटूर में स्थित है।

प्रश्न 56.
राजस्थान के प्रमुख गन्ना उत्पादक जिले कौन से हैं?
उत्तर:
राजस्थान में मुख्यत: बूंदी, उदयपुर, भीलवाड़ा, श्री गंगानगर, चित्तौड़गढ़ व कोटा जिलों में गन्ना का उत्पादन किया जाता है।

प्रश्न 57.
भारत में चाय उत्पादन में किस जिले का प्रथम स्थान है?
उत्तर:
भारत में चाय उत्पादन की दृष्टि से केरल का त्रिचूर जिला 3145 किग्रा. प्रति हेक्टेअर चायं उत्पादन कर प्रथम स्थान पर रहा है।

प्रश्न 58.
असम के प्रमुख चाय उत्पादक जिलों के नाम बताइए।
उत्तर:
असम के प्रमुख चाय उत्पादक जिले शिव . सागर, लखीमपुर, दरांग, गोलपाड़ा, नौगाँव आदि हैं।

प्रश्न 59.
प. बंगाल के किन जिलों में चाय का उत्पादन होता है?
उत्तर:
प. बंगाल के दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार, पुरुलिया आदि जिलों में चाय का उत्पादन होता है। दार्जिलिंग की चाय उत्तम वे सुगन्धित होती है। जिससे इसकी माँग विदेशों में अधिक है।

प्रश्न 60.
ट्रक फार्मिंग कृषि का प्रारम्भ कहाँ हुआ?
उत्तर:
ट्रक फार्मिंग कृषि की शुरुआत संयुक्त राज्य अमेरिका के कैलीफोर्निया से हुई। उसके पश्चात् उत्तरी-पश्चिमी यूरोप में ब्रिटेन, बेल्जियम, जर्मनी तथा डेनमार्क में प्रारम्भ हुई।

प्रश्न 61.
फलों तथा सब्जियों के उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?
उत्तर:
फलों तथा सब्जियों के उत्पादन में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है।

प्रश्न 62.
हिमालय पर्वतीय शीतोष्ण क्षेत्र में किन-किन फलों का उत्पादन होता है?
उत्तर:
हिमालय पर्वतीय शीतोष्ण क्षेत्र में श्रीनगर की घाटियाँ कुल्लू, कांगड़ा, कुमाऊ की पहाड़ियाँ, हिमाचल प्रदेश आदि आते हैं। यहाँ सेव, अंगूर, नाशपाती, लीची, अंजीर, आलू-बुखारा, बादाम, अखरोट, बेर-खुबानी, स्ट्राबेरी आदि फलों का उत्पादन होता है।

प्रश्न 63.
फलों के उत्पादन में भारत में प्रथम स्थान किस राज्य का है?
उत्तर:
फलों के उत्पादन में भारत में प्रथम स्थान महाराष्ट्र का है।

प्रश्न 64.
सब्जियों के उत्पादन में भारत में प्रथम स्थान किस राज्य का है?
उत्तर:
सब्जियों के उत्पादन में भारत में प्रथम स्थान पश्चिमी बंगाल का है।

प्रश्न 65.
दक्षिणी प्रदेश के प्रमुख फल उत्पादक राज्य तथा फलों के नाम बताइए।
उत्तर:
दक्षिणी प्रदेश के प्रमुख फल उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु तथा आन्ध्र प्रदेश हैं। आम, सन्तरा, केला, नीबू, अनार, खजूर, अंगूर, बेर, पपीता, अमरूद, अंजीर आदि प्रमुख फल हैं।

प्रश्न 66.
भारत के तटीय प्रदेशों में कौन-कौन से फलों का उत्पादन होता है ?
उत्तर:
प्रायद्वीपीय भारत के तटीय प्रदेशों में नारियल, केला, आम, पपीता, सन्तरा आदि फलों का उत्पादन होता है।

प्रश्न 67.
पूर्वोत्तर आर्दै प्रदेशों में किन-किन फलों का उत्पादन होता है?
उत्तर:
पूर्वोत्तर आर्द्र प्रदेशों के अन्तर्गत प. बंगाल, झारखण्ड, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा आदि राज्यों को सम्मिलित किया जाता है। यहाँ आम, केला, अमरूद, नाशपाती, लीची, अनन्नास, चीकू, पपीता आदि फल उगाये जाते हैं।

प्रश्न 68.
मटर उत्पादन में भारत का विश्व में कौन सा स्थान है?
उत्तर:
मटर उत्पादन में भारत का विश्व में प्रथम स्थान है।

प्रश्न 69.
सब्जियों के उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?
उत्तर:
सब्जियों के उत्पादन में भारत का विश्व में चीन के बाद दूसरा स्थान है।

प्रश्न 70.
बैंगन तथा गोभी के उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?
उत्तर:
बैंगन तथा गोभी के उत्पादन में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है।

RBSE Class 12 Geography Chapter 18 लघूत्तरात्मक प्रश्न (SA-I)

प्रश्न 1.
भारतीय कृषि के महत्व को बताइए।
उत्तर:
कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की धुरी है। इसके महत्व को निम्नलिखित बिन्दुओं द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है –

  1. सर्वाधिक रोजगार का साधन प्रदान करने वाली।
  2. उद्योगों के लिए कच्चे माल का प्रमुख स्रोत।
  3. राष्ट्रीय आय का प्रमुख साधन।
  4. विदेशी मुद्रा की प्राप्ति।
  5. पौष्टिक पदार्थों का प्रमुख स्रोत।
  6. यातायात के साधनों का विकास आदि।

प्रश्न 2.
भारतीय कृषि की विशेषताओं को संक्षेप में बताइए।
उत्तर:
भारतीय कृषि का प्रारम्भिक एवं परम्परागत स्वरूप खाद्यान्न प्रधान रहा। वर्तमान समय में कृषि में तकनीकी परिवर्तन हो रहे हैं। भारतीय कृषि की प्रमुख विशेषताएँ अग्रलिखित हैं –

  1. अत्यधिक जनसंख्या की निर्भरता।
  2. मानसून पर निर्भरता।
  3. सिंचाई की अपर्याप्त व्यवस्था।
  4. प्रति हेक्टेयर कम उत्पादकता।
  5. खाद्यान्नों की प्रधानता तथा फसलों की विविधता।
  6. कृषि जोतों का छोटा आकार आदि।
  7. चारा फसलों की कमी।

प्रश्न 3.
वर्तमान में भारतीय कृषि की प्रमुख समस्याएँ क्या हैं? बताइए।
उत्तर:
वर्तमान समय में भारतीय कृषि की प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं –

  1. अनियमित एवं अनिश्चित मानसून पर निर्भरता।
  2. निम्न उत्पादकता।
  3. भूमि सुधारों की कमी।
  4. छोटे खेत एवं विखण्डित जोत।
  5. असिंचित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अल्प बेरोजगारी।
  6. वाणिज्यीकरण का अभाव।
  7. कृषि भूमि का निम्नीकरण।
  8. वित्तीय संसाधनों की बाध्यताएँ एवं ऋणग्रस्तता।
  9. समुचित विपणन सुविधाओं की कमी आदि।

प्रश्न 4.
चावल प्रधान गहन निर्वहन कृषि तथा गेहूँ प्रधान गहन निर्वहन कृषि में अन्तर बताइए।
उत्तर:
चावल प्रधान गहन निर्वहन कृषि तथा गेहूँ प्रधान गहन निर्वहन कृषि में प्रमुख अन्तर निम्नलिखित हैं-

चावल प्रधान गहन निर्वहन कृषि गेहूँ प्रधान गहन निर्वहन कृषि
1. यह कृषि 100 सेमी. से अधिक वर्षा वाले भागों में की जाती है। 1. यह कृषि कम वर्षा वाले भागों में की जाती है।
2. यहाँ सिंचाई की अधिक आवश्यकता नहीं होती। 2. इन भागों में सिंचाई के साधनों की आवश्यकता होती है।
3. चावल यहाँ की प्रधान उपज है। 3. गेहूँ यहाँ की प्रधान उपज है।
4. यहाँ वर्ष में चावल की 2 या तीन फसलें उगायी जाती हैं। 4. गेहूं की केवल एक ही फसल उगाई जाती है।
5. यह कृषि पश्चिमी बंगाल, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्यप्रदेश तथा तटीय मैदानों में की जाती है। 5. यह कृषि पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी मध्यप्रदेश, राजस्थान तथा प्रायद्वीपीय पठार के पश्चिमी भागों में प्रचलित है।

प्रश्न 5.
व्यापारिक कृषि की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
व्यापारिक कृषि की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  1. व्यापारिक कृषि में निर्यात की दृष्टि से अतिरिक्त उत्पादन पर बल दिया जाता है।
  2. यह कृषि परिवहन, यातायात व संचार के साधनों के विकास पर भी निर्भर करती है।
  3. भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल एक ही फसल को वरीयता दी जाती है।
  4. व्यापारिक कृषि का प्रचलन पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र तथा केरल में बढ़ रहा है।

प्रश्न 6.
शुष्क कृषि एवं आर्द्र कृषि में क्या अन्तर है?
उत्तर:
शुष्क कृषि एवं आर्द्र कृषि में निम्नलिखित अन्तर हैं –

शुष्क कृषि आर्द्र कृषि
1. यह कृषि 50 सेमी. से कम वर्षा वाले भागों में की जाती है। 1. यह कृषि 100 से 200 सेमी. वर्षा वाले भागों में की जाती है।
2. इस कृषि में जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जाता है। 2. जल की अधिकता के कारण जल संसाधनों का न्यूनतम उपयोग होता है।
3. यहाँ उन्हीं फसलों को बोया जाता है जिनमें पानी की कम आवश्यकता होती है। 3. यहाँ उन फसलों को बोते हैं जिसमें पानी की अधिक आवश्यकता होती है।
4. गेहूँ, जौ, ज्वार, बाजरा, चना; केपास प्रमुख फसलें हैं। 4. इन भागों में चांवल प्रमुख उत्पादन है। वर्ष में दो या तीन फसलें पैदा की जाती हैं।
5. यह कृषि प. उत्तर प्रदेश, अरावली के पश्चिम में राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, आन्ध्र प्रदेश आदि राज्यों में की जाती है। 5. यह कृषि गंगा की मध्यवर्ती घाटी, प्रायद्वीपीय उत्तरी पूर्वी भागों तथा तटीय आर्द्र क्षेत्रों, उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग से अरुणाचल प्रदेश तक आर्द्र कृषि की जाती है।

प्रश्न 7.
भारत में आई भूमि कृषि की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आई भूमि कृषि की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं –

  1. आर्द्र भूमि कृषि अधिक वर्षा उपलब्धता वाले क्षेत्रों में की जाती है।
  2. अधिक वर्षा के कारण ऐसी कृषि के क्षेत्रों को बाढ़ एवं मृदा अपरदन का सामना करना पड़ता है।
  3. इस कृषि में मुख्यतः चावल, गन्ना एवं जूट की फसल उत्पादित की जाती हैं।
  4. इस कृषि वाले क्षेत्रों में वर्षा ऋतु के दौरान आवश्यकता से अधिक जल फसलों हेतु उपलब्ध रहता है।

प्रश्न 8.
भारत में शुष्क भूमि कृषि की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
शुष्क भूमि कृषि की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  1. वर्षा से पहले खेत जोत दिए जाते हैं, ताकि भूमि नर्म हो जाए।
  2. प्रत्येक वर्षा के बाद गहरी जुताई की जाती है ताकि वर्षा का जल भूमि के अन्दर जो सके।
  3. वर्षा के. जल को नियंत्रित करने के लिए भूमि पर मेड़ बनाकर कई भागों में बांट कर जल व्यर्थ बहने से रोका जाता है।
  4. जोती हुई भूमि में नमी सुरक्षित रखने के लिए सूखी मिट्टी की एक परत बिछा दी जाती है।
  5. जल का दुरूपयोग रोकने के लिए अनावश्यक वनस्पति को निकाल दिया जाता है।
  6. इसमें शुष्कता को सहन करने वाली फसलों को ही उगाया जाता है।

प्रश्न 9.
गहन कृषि की विशेषता बताइये।
उत्तर:
गहन कृषि की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं –

  1. गहन कृषि क्षेत्रों में जनसंख्या के अनुपात में भूमि कम होती है।
  2. प्रति हेक्टेयर भूमि में खेतिहर श्रमिकों की संख्या अधिक होती है।
  3. वर्ष में एक से अधिक फसलें उगाई जाती हैं।
  4. इसमें फसल चकण को अपनाया जाता है।
  5. भूमि पर जनसंख्या का भार अधिक होने से सीमित भूमि से अधिक पैदावार की जाती है।
  6. गहन कृषि में पूंजी निवेश व यांत्रिक उपयोग की अपेक्षा मानवीय श्रम की प्रधानता होती है।

प्रश्न 10.
विस्तीर्ण कृषि से आप क्या समझते हैं?
उत्तर:
विस्तीर्ण कृषि उन भागों में की जाती है। जहाँ जनसंख्या के अनुपात में भूमि की अधिकता होती है। इस प्रकार की कृषि की निम्नलिखित विशेषताएँ होती हैं –

  1. इनमें खेतों का आकार बड़ा होता है।
  2. कृषि में बड़ी मशीनों एवं यान्त्रिक उपकरणों का उपयोग किया जाता है।
  3. कृषि में रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशक दवाओं का भरपूर उपयोग होता है।
  4. कृषि में अधिक पूंजी की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 11.
उद्यान कृषि की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
उद्यान कृषि व्यापारिक कृषि है। यह ऐसी सघन कृषि है जिसमें उच्च स्तर पर विशेषीकरण होता है और जो अधिकांशतः छोटे पैमाने पर की जाती है। उद्यान कृषि का विकास संसार के नगरीय बाजारों के द्वारा शाक-सब्जियों और फलों की माँग के कारण विकसित हुई है। इस कृषि पद्धति में छोटे से क्षेत्रफल से ही भोजन की बहुत बड़ी मात्रा उत्पन्न कर ली जाती है।

प्रश्न 12.
सिक्किम देश का पहला पूर्ण जैविक खेती वाला राज्य है-स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
18 जनवरी, 2016 को गंगटोक (सिक्किम) में आयोजित टिकाऊ कृषि सम्मेलन में सिक्किम को पूर्ण जैविक कृषि वाले राज्य का दर्जा दिया गया यहाँ जैविक कृषि की शुरुआत 2003 में शुरु की गई थी। यहाँ 75000 हेक्टेअर भूमि को टिकाऊ कृषि के लिए जैविक कृषि में परिवर्तित कर दिया गया है। पर्यावरण सुरक्षा के लिए सिक्किम में रासायनिक उर्वरकों को पूर्णतः निषिद्ध कर दिया गया है। सिक्किम देश का सबसे स्वच्छ राज्य के रूप में भी 2016 में चुना गया है।

प्रश्न 13.
रबी और खरीफ की फसलों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
रबी और खरीफ की फसलों में अग्रलिखित अंतर हैं –

रबी फसल खरीफ फसल
1. वर्षा ऋतु के पश्चात् शीतकाल में अक्टूबर-नवम्बर में बोई जाने वाली फसलें रबी की फसलें कहलाती हैं। 1. दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के समय ग्रीष्मकाल में बोयी जाने वाली फसलें खरीफ की फसलें कहलाती हैं।
2. इसके अन्तर्गत मुख्यतः शीतोष्ण व उपोष्ण कटिबन्धीय फसलें; जैसे-गेहूँ, चना व सरसों आदि की बुआई की जाती है। 2. इसके अन्तर्गत मुख्य रूप से कटिबन्धीय फसलें; जैसे चावल, ज्वार, कपास, जूट, बाजरा व अरहर आदि की कृषि की जाती है।
3. ये फसलें ग्रीष्मकाल से पूर्व मार्च-अप्रैल में पक कर तैयार हो जाती हैं। 3. ये फसलें शीतकाल से पहले पक कर तैयार हो जाती हैं।

प्रश्न 14.
खाद्यान्न फसलों के वर्गीकरण एवं महत्व बताइए।
उत्तर:
अनाज की संरचना के आधार पर खाद्यान्नों को अनाज एवं दालों में वर्गीकृत किया जाता है। भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था में खाद्यान्न फसलों का महत्व बहुत अधिक है। देश के समस्त बोये गए क्षेत्र के दो तिहाई भाग पर खाद्यान्न फसलें उगायी जाती हैं। देश के समस्त भागों में खाद्यान्न फसलों का महत्त्वपूर्ण स्थान है, चाहे वहाँ जीविका निर्वाह अर्थव्यवस्था अथवा व्यापारिक कृषि अर्थव्यवस्था पर आधारित हो । भारत विश्व का लगभग 11 प्रतिशत अनाज तथा लगभग 20 प्रतिशत दालें उत्पादित करता है।

प्रश्न 15.
चावल की प्रमुख किस्में बताइए।
उत्तर:
भारत में चावल की लगभग 200 किस्में पाई जाती हैं। वृहद रूप में इसे दो भागों में बाँटा गया है –

1. निम्न भूमि चावल:
यह चावल अधिक स्वादिष्ट होता है और प्रति हेक्टेअर उत्पादन भी अधिक होता है। भारत का अधिकांश चावल दलदलों या निम्न भूमि में ही उत्पन्न किया जाता है।

2. उच्च भूमि चावल:
यहाँ चावल का पौधा छोटा होता है। इसको दाना छोटा तथा लाल रंग का होता है। यह चावल कम वर्षा वाले क्षेत्रों में ही उत्पन्न हो जाता है। यह जल्दी ही पक जाता है। यह सख्त तथा खाने में कम स्वादिष्ट होता है।

प्रश्न 16.
पंजाब और हरियाणा राज्यों में वर्षा की कमी के बावजूद चावल की कृषि की जाती है, क्यों?
उत्तर:
पंजाब और हरियाणा पारम्परिक रूप से चावल उत्पादक राज्य नहीं हैं। हरित क्रांति के अन्तर्गत.पंजाब व हरियाणा के सिंचित क्षेत्रों में चावल की कृषि सन् 1970 से प्रारम्भ की गई। उत्तम किस्म के बीजों, अपेक्षाकृत अधिक खाद एवं कीटनाशकों का प्रयोग तथा शुष्क जलवायु के कारण फसलों में रोग प्रतिरोधकता आदि कारकों ने इन राज्यों में चावल की पैदावार बढ़ाने में सहायता प्रदान की है। साथ ही सिंचाई की पर्याप्त सुविधा ने चावल की कृषि को बढ़ाया है।

प्रश्न 17.
भारत देश कपास का जन्मस्थान है-स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
कपास का जन्मस्थान भारत देश को माना जाता है। ऋग्वेद तथा मनुस्मृति में कपास के धागे का विवरण मिलता है। सिन्धु नदी की घाटी की खुदाई से सूती वस्त्रों से प्राप्त अवशेषों से यह स्पष्ट होता है कि भारत में 5000 से 8000 वर्ष पूर्व सूती वस्त्रों का उपयोग होता था। यूनानी भूगोलवेत्ता हेरोडोट्स तथा मार्कोपोलो के स्मरणपत्रों तथा आलेखों में भारत में कपास के उपयोग और उत्पादन का पता चलता है।

प्रश्न 18.
भारत में कपास उत्पादन के प्रमुख क्षेत्रों का विवरण दीजिए।
उत्तर:
भारत में कपास उत्पादन के निम्नलिखित तीन क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं –

  1. उत्तर-पश्चिम भारत में पंजाब, हरियाणा तथा उत्तरी राजस्थान।
  2. पश्चिमी भारत में गुजरात व महाराष्ट्र।
  3. दक्षिणी भारत में आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक तथा तमिलनाडु राज्य।

इनमें महाराष्ट्र, गुजरात, आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना, पंजाब तथा हरियाणा भारत के अग्रणी कपास उत्पादक राज्य हैं। महाराष्ट्र के वर्षा निर्भर कपास क्षेत्रों में कपास की प्रति हेक्टेयर उत्पादन बहुत कम मिलता है जबकि पंजाब, हरियाणा तथा उत्तरी राजस्थान के सिंचित क्षेत्रों में कपास का प्रति हेक्टेयर उत्पादन अधिक रहता है।

प्रश्न 19.
उत्तर प्रदेश के गन्ना उत्पादक क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
वर्ष 2013 – 14 में उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादक क्षेत्र व उत्पादन की दृष्टि से प्रथम स्थान पर रहा है। उत्तर प्रदेश में गन्ना उत्पादक प्रमुख दो क्षेत्र हैं –

1. तराई क्षेत्र:
इसके अन्तर्गत रामपुर से बरेली, पीलीभीत, सीतापुर, खीरी, मुरादाबाद, फैजाबाद, आजमगढ़, जौनपुर, गोरखपुर होते हुए बिहार के चम्पारन जिले तक विस्तृत है।

2. दोआब क्षेत्र:
इसके अन्तर्गत गंगायमुना का दोआब क्षेत्र सम्मिलित है। यह क्षेत्र मेरठ से प्रारम्भ होकर इलाहाबाद तक विस्तृत है। मेरठ का गन्ना उत्तम कोटि का है। इसका उपयोग यहाँ गुड़ बनाने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 20.
भारत में गन्ना उत्पादक क्षेत्रों को विवरण दीजिए।
उत्तर:
गन्ना उष्णकटिबन्धीय फसल है। भारत में इसकी खेती अधिकांशतया सिंचित क्षेत्रों में की जाती है। विश्व के गन्ना उत्पादक राष्ट्रों में भारत का ब्राजील के बाद दूसरा स्थान है। भारत में विश्व का लगभग 23 प्रतिशत गन्ना उत्पादित किया जाता है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना के उत्तरी-पश्चिमी भाग, गुजरात तथा कर्नाटक भारत के महत्वपूर्ण गन्ना उत्पादक राज्य हैं। उत्तर प्रदेश राज्य में देश का लगभग 40 प्रतिशत गन्ना उत्पादित किया जाता है। उत्तर भारत की तुलना में दक्षिणी भारत के गन्ना उत्पादक राज्यों में गन्ने की प्रति हेक्टेयर उपज अधिक है।

प्रश्न 21.
चाय की कृषि पहाड़ियों के निचले ढालों पर क्यों की जाती है?
उत्तर:
चाय उष्णकटिबन्धीय रोपण कृषि है। चाय का पेय पदार्थ के रूप में उपयोग किया जाता है। चाय की कृषि पहाड़ियों के निचले ढालों पर की जाती है क्योंकि चाय के पौधों के विकास के लिए इसकी जड़ों में जल एकत्रित होना हानिकारक होता है। पहाड़ी ढालों पर इसकी खेती करने से जल का अपवाह सरलता से हो जाता है एवं चाय के पौधों की जड़ों में जल एकत्रित नहीं हो पाता है। यही कारण है कि चाय की कृषि पहाड़ियों के निचले ढालों पर की जाती है।

प्रश्न 22.
फलोत्पादन के प्रमुख प्रदेशों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:
फलोत्पादन की दृष्टि से भारत को निम्नलिखित प्रदेशों में विभाजित किया गया है –

  1. हिमालय पर्वतीय शीतोष्ण क्षेत्र
  2. पूर्वोत्तर आर्द्र प्रदेश
  3. शुष्क एवं अर्द्ध शुष्क प्रदेश
  4. दक्षिणी प्रदेश
  5. तटीय प्रदेश

प्रश्न 23.
बागवानी कृषि की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
बागवानी कृषि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  1. उर्वरकों का अधिकाधिक उपयोग।
  2. सर्वाधिक सघन कृषि।
  3. दक्ष श्रम वर्ग की आवश्यकता।
  4. अधिकाधिक सिंचाई की आवश्यकता।
  5. कीड़ों से बचाव के लिए रासायनिक पाउडर एवं दवाओं का उपयोग।
  6. पैकिंग की उचित व्यवस्था।
  7. तीव्र परिवहन साधनों की आवश्यकता।
  8. अधिक लाभपूर्ण कृषि।

RBSE Class 12 Geography Chapter 18 लघूत्तरात्मक प्रश्न (SA-II)

प्रश्न 1.
स्थानान्तरित कृषि के स्थाई कृषि में क्या अन्तर है?
उत्तर:
स्थानान्तरित कृषि व स्थाई कृषि में निम्नलिखित अन्तर मिलते हैं –

स्थानान्तरित कृषि स्थाई कृषि
1. यह कृषि वनवासियों द्वारा आदिम कालीन ढंग से की जाती है। 1. यह कृषि उन आदिवासी क्षेत्रों में की जाती है जहाँ कृषि भूमि पर जनसंख्या का दबाव बढ़ जाता है।
2. इस कृषि में कृषि करने की जगह बदलती रहती है। 2. यहाँ कृषि का स्थान स्थाई होने लग जाता है।
3. इस कृषि में केवल परिवार की आवश्यकतानुसार जीवित रहने के लिए खेती की जाती है। 3. इस कृषि में आवश्यकता से अधिक अन्न उत्पादन किया जाता है।
4. इसमें भूमि की उर्वरता को बनाये रखने के लिए वनों को जलाकर खाद प्राप्त किया जाता है। 4. इसमें भूमि की उर्वरता को बनाये रखने के लिए पशुओं से प्राप्त खाद का प्रयोग किया जाता है।
 5. इस प्रकार की कृषि भारत में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, आन्ध्रप्रदेश, केरल पश्चिमी घाट व द०पू० राजस्थान में की जाती है। 5. इस प्रकार की कृषि भारत में मध्य हिमालय तथा प्रायद्वीप के उत्तरी-पूर्वी भागों में की जाती है।

प्रश्न 2.
रासायनिक कृषि के कोई सात दुष्परिणाम बताइए।
उत्तर:
अधिक उत्पादन की लालसा में रासायनिक कृषि को वरीयता दी गई है। किन्तु इसके अनेक दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। प्रमुख दुष्परिणाम निम्नलिखित हैं –

  1. रासायनिक कृषि से अनाज, दूध, सब्जियाँ, फल-फूल आदि प्रदूषित हुए हैं जिसका दुष्परिणाम मानव पर पड़ा है।
  2. रासायनिक कृषि का विनाशकारी प्रभाव जीवधारियों व कीड़ों-मकोड़ों पर भोजन श्रृंखला के माध्यम से पड़ा है।
  3. इससे जीव-विविधता का तीव्र गति से क्षरण हो रहा है।
  4. मिट्टी की गुणवत्ता में कमी।
  5. कई जीवधारियों के कीड़े-मकोड़ों की प्रजातियों का विलुप्त होना।
  6. बढ़ती कृषि जल की माँग के कारण भूमिगत जल स्तर में गिरावट।
  7. भूमि की उर्वरा शक्ति का तीव्रता से ह्रास।

प्रश्न 3.
भारत में विभिन्न फसल ऋतुएँ कौन-कौन सी हैं? प्रत्येक का विवरण दीजिए।
अथवा
भारतीय कृषि वर्ष में कौन-कौन से शस्य मौसम पाये जाते हैं ? संक्षिप्त विवरण दीजिए।
अथवा
खरीफ, रबी एवं जायद फसल ऋतुओं का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
अथवा
भारतीय कृषि ऋतुओं के बारे में बताते हुए उनकी विशेषताओं का उल्लेख करो।
उत्तर:
भारत में तीन प्रमुख फसल ऋतुएँ (शस्य मौसम) हैं जिनका विवरण निम्नलिखित है –

1. खरीफ:
खरीफ का मौसम दक्षिण-पश्चिमी मानसून के प्रारम्भ होते ही आ जाता है। इस मौसम की प्रमुख फसलें-चावल, कपास, जूट, ज्वार, बाजरा व अरहर आदि हैं। खरीफ ऋतु का समय जून से सितम्बर के मध्य माना जाता है। इस फसल ऋतु में बोयी जाने वाली फसलों को मुख्य रूप से अधिक तापमान एवं अपेक्षाकृत अधिक आर्द्रता की आवश्यकता पड़ती है।

2. रबी:
खरीफ का मौसम समाप्त होने के पश्चात् ही रबी का मौसम प्रारंभ हो जाता है। यह फसल ऋतु शीत ऋतु के मौसम के अनुरूप अक्टूबर से मार्च तक मानी जाती है। इस मौसम में वे फसलें उगायी जाती हैं जो कम तापमान तथा अपेक्षाकृत कम वर्षा में पनप सकती हैं। इस मौसम में कम तापमान की आवश्यकता वाली शीतोष्ण एवं उपोष्ण कटिबन्धीय फसलें उगायी जाती हैं। इन फसलों में गेहूँ, चना, सरसों आदि प्रमुख हैं।

3. जायद:
जायद एक अल्पकालिक ग्रीष्मकालीन फसल ऋतु है। यह फसल ऋतु रबी की कटाई के पश्चात् ही प्रारम्भ हो जाती है। इसकी प्रमुख फसलें चावल, सब्जियाँ, फल, तरबूज, खरबूज, खीरा, ककड़ी एवं चारे आदि की हैं। इस फसल ऋतु में विभिन्न फसलों की कृषि सिंचित भूमि पर की जाती है।

प्रश्न 4.
बी.टी. काटन/जी.एम. फसल पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
जेनेटिक मोडिफाइड फसल के अन्तर्गत कपास पर लगने वाले डोडा कीट को मारने, सक्षम विष उत्पादक बैक्टीरिया, ‘बसिलस थोरेजियोसिस’ में उपलब्ध इस विष के जनक वंशाणु या जीन को कपास में प्रत्यारोपित करके ऐसा बी.टी. कपास विकसित किया गया है। जिससे उस कपास में डोडा कीट को मारने की आंशिक सामर्थ्य आ जाती है। इससे पंजाब व अन्य राज्यों में कपास में प्रति हेक्टेअर उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है लेकिन कुछ वर्षों में ही अब वह डोडा कीट ऐसे सुपर कीट में सम्वर्द्धित हो रहा है कि वह अब बी.टी. कॉटन के इस विष को सह लेता है। अब पंजाब में उसी कीट रोधी बी.टी. कपास पर हाल में सुपर पेस्ट रूपी सफेद मक्खी का प्रकोप अत्यन्त घातक सिद्ध हुआ है।

प्रश्न 5.
भारत में गन्ना उत्पादन की प्रमुख समस्याएँ क्या हैं?
उत्तर:
भारत गन्ने का जन्मस्थान रहा है और यहीं से गन्ने की खेती का प्रसार विश्व के अन्य देशों में हुआ। यह भारत की प्रमुख मुद्रादायिनी फसल है और विश्व का लगभग 35 प्रतिशत गन्ना क्षेत्र भारत में ही है। किन्तु आज भारत में गन्ने की कृषि को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है –

  1. गन्ना उत्पादन के लिए आदर्श भौगोलिक दशाएँ दक्षिणी भारत में सागर तटीय भागों में मिलती हैं। किन्तु उत्तर भारत में भी गन्ने का उत्पादन होता है। इस क्षेत्र में ऋतु लम्बी होने से रस शुष्क की मात्रा कम होती है।
  2. गन्ने की कृषि में उन्नत तकनीकी का भरपूर उपयोग नहीं हो पा रहा है।
  3. गन्ना किसानों का समय पर उनकी फसल का मूल्य नहीं मिल पाता है।
  4. गन्ना तोलने में गड़बड़ी की समस्या।
  5. मौसम का विपरीत प्रभाव।
  6. गन्ने की फसल का उचित मूल्य निर्धारण का न हो पाना आदि।

प्रश्न 6.
ट्रक फार्मिंग कृषि की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर:
महानगरों से दूर उपयुक्त भौगोलिक दशाओं वाले क्षेत्रों में सब्जियों व फलों को उगाकर ट्रकों तथा प्रशीतनयुक्त वाहनों से महानगरों में पहुँचाने के क्रिया-कलाप को ट्रक फार्मिंग कहते हैं। यह गहन व्यापारिक कृषि है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  1. खेतों का छोटा आकार।
  2. गहन कृषि के अन्तर्गत वर्ष में सब्जियों की तीन-चार फसलें उगाना।
  3. श्रम प्रधान कृषि।
  4. खेतों के प्रबन्धन में वैज्ञानिक विधियों का उपयोग।
  5. भूमि की उर्वराशक्ति बनाये रखने के लिए खादों एवं उर्वरकों का अधिकधिक उपयोग।
  6. प्रशीतनयुक्त ट्रकों व वाहनों द्वारा माल को त्वरित पहुँचाने की सुविधा।
  7. पूँजी प्रधान कृषि आदि।

प्रश्न 7.
भारत में सब्जियों की कृषि पर टिप्पणी लिखिए।
उत्तर:
सब्जियों के उत्पादन में भारत का चीन के बाद दूसरा स्थान है। यहाँ सब्जियों की खपत प्रति व्यक्ति 357 ग्राम है। मटर के उत्पादन में भारत का प्रथम, बैंगन, गोभी के उत्पादन में दूसरा तथा आलू एवं टमाटर के उत्पादन में तीसरा स्थान है। भारत में प्राकृतिक विविधता के कारण विविध प्रकार की सब्जियाँ पैदा की जाती हैं। भिण्डी, कद्द, तुरई, मूली, गाजर, लौकी, गोभी, टमाटर, मटर, पालक, मेथी, चुकन्दर, शलजम, रतालू, जमीकन्द, फलियाँ, करेला, बैंगन, प्याज, आलू, लहसुन, धनियाँ, पुदीना, पत्तागोभी जैसी अनेक सब्जियाँ लगभग सभी जगह उगाई जाती हैं। वहाँ से नगरों तथा महानगरों को ट्रकों या अन्य परिवहन माध्यमों से पहुँचाई जाती हैं।

प्रश्न 8.
भारत के फल उत्पादक क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
अथवा
फल उत्पादन की दृष्टि से भारत को कितने प्रदेशों में विभाजित किया गया है?
उत्तर:
फल उत्पादन की दृष्टि से भारत को निम्नलिखित क्षेत्रों में बाँटा गया है –

  1. हिमालय पर्वतीय शीतोष्ण क्षेत्र
  2. पूर्वोत्तर आर्द्र क्षेत्र
  3. शुष्क व आर्द्ध शुष्क क्षेत्र
  4. दक्षिणी क्षेत्र
  5. तटीय क्षेत्र

भारत के इन सभी फल उत्पादक क्षेत्रों को वर्णन निम्नानुसार है –

1. हिमालय पर्वतीय शीतोष्ण क्षेत्र:
इसमें श्रीनगर की घाटियाँ कुल्लू, काँगड़ा, कुमाऊँ की पहाड़ियाँ, हिमाचल प्रदेश आदि क्षेत्र सम्मिलित हैं। सेव, अँगूर, नाशपाती, लीची, अंजीर, आलू-बुखारा, बादाम, अखरोट, बेर खुबानी, स्ट्राबेरी यहाँ के प्रमुख फल हैं।

2. पूर्वोत्तर आर्द्र क्षेत्र:
इसके अन्तर्गत पश्चिमी बंगाल, झारखण्ड, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा जैसे राज्य आते हैं।,आम, केला, अमरूद, नाशपाती, लीची, अनन्नास, चीकू, पपीता, सीताफल प्रमुख फल है।

3. शुष्क एवं अर्द्ध शुष्क क्षेत्र:
इस क्षेत्र में पंजाब, राजस्थान, प. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश राज्य आते हैं। आम, जामुन, मौसमी, माल्टा, केला, नींबू, अनार, खंजूर, अंगूर, बेर, पपीता, अमरूद, अंजीर प्रमुख फल है।

4. दक्षिणी क्षेत्र:
इसके अन्तर्गत महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश राज्य सम्मिलित हैं। आम, संतरा, केला, अमरूद, अनन्नास, अंगूर, अनार, नारियल, काजू, पपीता आदि।

5. तटीय क्षेत्र:
इसके अन्तर्गत प्रायद्वीपीय भारत के तटीय भाग सम्मिलित है। यहाँ नारियल, केला, आम, पपीता, संतरा मुख्य रूप से उत्पादित किये जाते हैं।

RBSE Class 12 Geography Chapter 18 निबन्धात्मक प्रश्न

प्रश्न 1.
भारत में चावल उत्पादन के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं को उल्लेख करते हुए उत्पादन एवं वितरण की विवेचना कीजिये।
उत्तर:
चावल भारत की एक महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसल है। देश की अधिकांश जनसंख्या का मुख्य भोजन चावल है। विश्व के चावल उत्पादक राष्ट्रों में भारत का चीन के बाद दूसरा स्थान है। भारत में विश्व का लगभग 22 प्रतिशत चावल उत्पादित होता है। देश के कुल बोये गए क्षेत्र के लगभग एक-चौथाई भाग पर चावल की कृषि की जाती है।

आवश्यक भौगोलिक दशाएँ:
चावल उष्ण आर्द कटिबन्धीय फसल है। इसकी लगभग 3000 से भी अधिक किस्में हैं जो विभिन्न कृषि जलवायु प्रदेशों में उगाई जाती हैं। इसकी कृषि के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाएँ निम्नलिखित हैं –

1. तापमान:
चावल की कृषि के लिए कम से कम 20° सेण्टीग्रेड तापमान होना चाहिए। इसे बोते समय 20° सेण्टीग्रेड तथा फसल पकते समय 27° सेन्टीग्रेड तापमान की आवश्यकता होती है।

2. वर्षा:
चावल की कृषि के लिए अधिक पानी की आवश्यकता होती है। सामान्यतया 100 से 200 सेमी. वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में इसकी कृषि की जाती है। 100 सेमी. से कम वार्षिक वर्षा वाले क्षेत्रों में सिंचाई की सहायता से चावल की कृषि की जाती है।

3. मृदा:
चावल की कृषि के लिए बहुत उपजाऊ मिट्टी की आवश्यकता होती है। इसके लिए चिकनी दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है क्योंकि यह मिट्टी अधिक समय तक आर्द्रता धारण कर सकती है। नदियों द्वारा लायी गई जलोढ़ मिट्टी में चावल का पौधा अधिक अच्छे ढंग से विकसित होता है।

4. धरातल:
चावल की कृषि के लिए समतल मैदानी भाग अनुकूल होते हैं ताकि वर्षा अथवा सिंचाई द्वारा प्राप्त जल पर्याप्त पर्याप्त समय तक खेतों में रह सके। पहाड़ी क्षेत्रों में चावल की कृषि ढालों पर सीढ़ीदार खेत बनाकर की जाती है।

5. श्रम:
चावल की कृषि में मशीनों से काम नहीं लिया जा सकता इसलिए इसकी कृषि के लिए अधिक श्रम की आवश्यकता होती है।

उत्पादन एवं वितरण:
भारत में चावल की कृषि समुद्र तल से 200 मीटर की ऊँचाई तक एवं पूर्वी भारत के आर्दै प्रदेशों से लेकर उत्तर-पश्चिमी भारत के शुष्क परन्तु सिंचित क्षेत्र पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश उत्तरी राजस्थान में सफलतापूर्वक की जाती है। भारत में 2015-16 में 103.36 मिलियन टन चावल का उत्पादन हुआ जो कुल खाद्यान्न उत्पादन को 40.97 प्रतिशत था। देश के विभिन्न राज्यों में चावल के उत्पादन का प्रतिशत निम्नांकित प्रकार रहा है –

1. पश्चिम बंगाल:
यहाँ राज्य देश का 14 प्रतिशत चावल क्षेत्र है। वर्ष 2014-15 के आधार पर 14.32% चावल उत्पादन कर प्रथम स्थान पर है। कुल उत्पादन का 75 प्रतिशत अमन फसल से प्राप्त होता है। मुख्य उत्पादक जिले कूच बिहार, जलपाई गुड़ी, बाँकडा मिदनापुर, दार्जिलिंग है। यहाँ ओस, अमन एवं बोरो तीनों फसलें पाई जाती हैं। बाढ़ की उपजाऊ मिट्टी के कारण खाद की कम आवश्यकता रहती है।

2. उत्तर प्रदेश:
हरित क्रान्ति के पश्चात् उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। यहाँ चावल का उत्पादन बढ़कर देश का 12% हो गया है। प्रमुख उत्पादक जिलों में सहारनपुर, देवरिया, गोरखपुर, लखनऊ, बहराइच, गोंडा, बलिया, रायबरेली, पीलीभीत आदि है। 2014 – 15 में 12.2 मि. टन चावल का उत्पादन किया गया जो देश का 11.7% था।

3. आन्ध्र प्रदेश:
यह राज्य देश वर्ष 2014 – 15 के उत्पादन आधार पर 11 प्रतिशत उत्पादन कर तीसरे स्थान पर है।

4. पंजाब:
परम्परागत रूप से गेहूं उत्पादक राज्य ने हरित क्रान्ति के बाद चावल उत्पादन में देश में सबसे ज्यादा वृद्धि दर्ज की है। सन् 2011 – 12 में पंजाब में लगभग 108.3 लाख टन चाचल पैदा किया गया जो उत्पादन का 11.29 प्रतिशत था। प्रमुख उत्पादक जिले यहाँ होशियारपुर, गुरदासपुर, जालन्धर, अमृतसर, रूपनगर, लुधियाना, कपूरथला आदि जिले हैं। राज्य 2014 – 15 के अनुसार प्रति हेक्टेयर 3952 किग्रा उत्पादन कर प्रथम स्थान है।

5. बिहार:
इस राज्य में चावल की वर्ष में 2 फसलें पैदा की जाती है। कुल कृषि भूमि के 40 प्रतिशत भाग पर चावल उगाया जाता है। प्रमुख उत्पादक जिलों में सारन, चम्पारन, गया, दरभंगा, मुंगेर, पूर्णिया आदि जिलों में धान पैदा किया जाता है।

6. तमिलनाडु:
इस राज्य की देश के कुल चावल उत्पादन में 6 – 10 प्रतिशत तक भागीदारी है। यहाँ काबेरी नदी के डेल्टा में स्थित अकेला तंजावूर जिला तमिलनाडु का 25 प्रतिशत चावल पैदा करता है।

7. छत्तीसगढ़:
छत्तीसगढ़ का मैदानी भाग चावल कृषि के लिए महत्वपूर्ण है और इसे प्राय: चावल का कटोरा कहां जाता है। बिलासपुर, बस्तर, सरगुजा, रायगढ़, दंतेवाड़ा नारयाणपुर आदि प्रमुख उत्पादन जिले हैं।

8. मध्यप्रदेश:
9. ओडिसा:
इस राज्य की कुल कृषि भूमि के 58 प्रतिशत भाग पर चावल उत्पादन किया जाता है। यह राज्य देश का 6 से 8 प्रतिशत भाग उत्पादित करता है। बालासोर, कटक, पुरी, मयूरभंज, कालाहाँडी आदि जिले हैं। भारतीय चावल अनुसंधान संस्थान कटंक में है।

10. राजस्थान:
डूंगरपुर, बूंदी, बाँसवाड़ा, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, जिलों में चावल की फसल पैदा होती है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, असम, केरल, मेघालय, गोवा, मणिपुर, नागालैण्ड, मिजोरम अन्य चावल उत्पादक राज्य है। भारत के इन सभी चावल उत्पादक क्षेत्रों को निम्नलिखित मानचित्र की सहायता से दर्शाया गया है –
RBSE Solutions for Class 12 Geography Chapter 18 कृषि
प्रश्न 2.
भारत में कपास उत्पादन के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं का उल्लेख करते हुए उत्पादन एवं वितरण की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
भारत कपास का जन्मस्थान कहलाता है। यहाँ से विश्व की लगभग 12 प्रतिशत कपास प्राप्त होती है। सूती वस्त्र उद्योग के लिए कच्चे माल के रूप में कपास का उपयोग होता है।

आवश्यक भौगोलिक दशाएँ:
1. तापमान:
कपास उष्ण एवं उपोष्ण कटिबन्धीय पौधा है। इसके लिए 21° से 25° सेग्रे. तापमान उपयुक्त होता है। किन्तु 40° सेग्रे. तापमान तक भी इसे उगाया जा सकता है। इसके लिए 200 दिन पाला रहित आकाश होना चाहिए।

2. वर्षा:
कपास की कृषि हेतु 50 से 100 सेमी. वर्षा पर्याप्त है। वर्षा कम होने पर सिंचाई द्वारा कपास का उत्पादन किया जा सकता है।

3. मिट्टी:
कपास सामान्यत: सब प्रकार की मिट्टियों में पैदा की जा सकती है। कछारी, उत्तर भारत तथा दक्षिणी पठारी प्रदेश की काली मिट्टी इसके लिए सर्वाधिक उपयुक्त मानी जाती है।

4. धरातल:
कपास की कृषि के लिए जलप्रवाहे युक्त धरातल आवश्यक होता है। खेतों में जल भराव फसल के लिए हानिकारक होता है। अम-कपास की खेती में बीज बोने, सिंचाई, कपास चुनने जैसे कार्यों के लिए अधिक मानव श्रम की आवश्यकता होती है।

उत्पादन एवं वितरण:
भारत में कुल कपास उत्पादन की 60 प्रतिशत चार राज्यों-गुजरात, महाराष्ट्र, आन्ध्र प्रदेश और तेलंगाना में उत्पन्न की जाती है। भारत के प्रमुख राज्यों में कपास उत्पादन का क्षेत्र निम्नानुसार है –

1. गुजरात:
गुजरात भारत के कुल उत्पादन का 34.09 प्रतिशत कपास उत्पादित कर प्रथम स्थान पर है। यहाँ की जलवायु एवं मिट्टी कपास के लिए आदर्श है। यहाँ की 70 प्रतिशत कपास बड़ोदरा, अहमदाबाद, सूरत, भड़ौच, साबरमती, पंचमहल, सुरेन्द्र नगर, जिलों में उत्पादित होती है।

2. महाराष्ट्र:
यह देश की 20.45 प्रतिशत कपास उत्पादन कर दूसरे स्थान पर है। यहाँ अब लम्बे रेशे वाली कपास उगाई जाती है। राज्य की लावायुक्त काली मिट्टी कपास की कृषि हेतु बहुत उपयुक्त है। नागपुर, आकोला, अमरावती, वर्धा, नॉदेड, जलगाँवा, बुलढ़ाना आदि प्रमुख उत्पादक जिले हैं।

3. आन्ध्र प्रदेश:
आन्ध्र प्रदेश तीसरा बड़ा उत्पादक है। यह देश का 13.92 प्रतिशत उत्पादन करता है। राज्य में कपास की खेती कृष्णा नदी की घाटी में की जाती है। यहाँ गन्तूर, अवन्तपुर, कर्नूल, कृष्णा प्रमुख उत्पादक जिले हैं।

4. पंजाब:
पिछले वर्षों में उत्पादन क्षेत्र उत्पादन में तेजी से वृद्धि हुई है। उपजाऊ मिट्टी तथा सिंचाई की सुविधा के कारण यहाँ पर कपास की प्रति हेक्टेयर उपज भी देश में सर्वाधिक है। अधिकतम उत्पादन में अमेरिकन-पंजाब कपास पैदा की जाती है। फिरोजपुर, भटिण्डा, लुधियाना, अमृतसर तथा संगरूर मुख्य उत्पादक जिले हैं।

5. हरियाणा:
उपजाऊ मिट्टी एवं सिंचाई सुविधा के रहते प्रति हेक्टेयर उत्पादन में दूसरा स्थान है। यहाँ लम्बे रेशे वाली कपास पैदा की जाती है। हरियाणा में हिसार और सिरसा दोनों जिले राज्य की 80 प्रतिशत कपास पैदा करते हैं।

6. राजस्थान:
राज्य में सिंचाई की सहायता से ही कपास की कृषि की जाती है। देश का 6.6 प्रतिशत कपास उत्पादन राज्य में होता है। अकेला हनुमानगढ़ जिला राज्य का 30 प्रतिशत कपास का उत्पादन करता है। अन्य जिलों में श्रीगंगानगर, भीलवाड़ा, अजमेर, बूंदी, टोंक, पाली, कोटा, झालावाड़ा आदि है।

7. तमिलनाडु:
यह राज्य पाँच प्रतिशत उत्पादन करता है। तमिलनाडु लम्बे रेशे एवं उच्च गुणवत्ता वाली कपास के लिए प्रसिद्ध है। मदुरई, कोयम्बटूर, तिरूचिरापल्ली, सलेम, तंजावूर प्रमुख उत्पादक जिले हैं।

8. कर्नाटक:
राज्य के कपास उत्पादन के दो प्रमुख क्षेत्र हैं। प्रथम क्षेत्र काली मिट्टी का है, जिसे सलहट्टी कहते हैं। इसके अन्तर्गत बेलारी, शिमोगा, चिकमंगलूर, चितल दुर्ग आते हैं। द्वितीयं दक्षिणी क्षेत्र लाल मिट्टी का है, इसे दौड़हट्टी कहते हैं।

अन्य उत्पादक क्षेत्र:
मध्यप्रदेश, अनुकूल दशायें नर्मदा, ताप्ती की घाटी एंव मालवा के पठार राज्य का 80 प्रतिशत उत्पादन किया जाता है। कुछ मात्रा में केरल, उड़ीसा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, असम, बिहर में भी कपास का उत्पादन किया जाता है। भारत के इन कपास उत्पादक क्षेत्रों को निम्नलिखित मानचित्र की सहायता से दर्शाया गया है –
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प्रश्न 3.
भारत में गन्ने की कृषि के लिए आवश्यक भौगोलिक दशाओं का उल्लेख करते हुए उत्पादन एवं वितरण की विवेचना कीजिए।
उत्तर:
गन्ना उष्ण कटिबन्धीय फसल है। वर्षा पर निर्भर दशाओं में यह केवल आर्द्र एवं उपार्द्र जलवायु वाले क्षेत्रों में भी उत्पादित की जाती है। गन्ने की कृषि के लिए निम्नलिखित भौगोलिक दशाओं का होना आवश्यक है।

1. तापमान:
गन्ने की कृषि के लिए ऊँचे तापमान की आवश्यकता होती है। इसकी कृषि के लिए सामान्यत: 20° से 25° सेंग्रे. तापक्रम आवश्यक होता है। पाला गन्ने के लिए हानिकारक होता है।

2. वर्षा:
गन्ने के लिए पर्याप्त मात्रा में वर्षा की आवश्यकता होती है। सामान्यतः 100 से 200 सेमी. वर्षा आदर्श मानी जाती है। कम वर्षा होने पर सिंचाई की आवश्यकता होती है। भारत में गन्ने की कृषि प्रमुख रूप से सिंचित क्षेत्रों में की जाती है।

3. मिट्टी:
गन्ने की कृषि के लिए नमीयुक्त, उपजाऊ एवं गहरी दोमट मिट्टी उपयोगी होती है। मिट्टी में चूने का अंश महत्वपूर्ण माना जाता है। लावा मिट्टी भी गन्ने की कृषि के लिए उपयोगी है।

4. श्रम:
गन्ने की कृषि के लिए पर्याप्त मात्रा में मानव-श्रम की आवश्यकता होती है, क्योंकि बुवाई से लेकर कटाई तथा मिलों में ले जाने अथवा उपयोग में लाये जाने तक अधिकांश कार्य हाथ से ही करना पड़ता है।

भारत में गन्ना उत्पादन एवं वितरण:
विश्व के गन्ना उत्पादक राष्ट्रों में भारत का ब्राजील के बाद दूसरा स्थान है। भारत में विश्व का लगभग 23 प्रतिशत गन्ना उत्पादित किया जाता है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आन्ध्र प्रदेश, गुजरात तथा कर्नाटक भारत के महत्वपूर्ण गन्ना उत्पादक राज्य हैं। उत्तर प्रदेश राज्य में देश का लगभग 40 प्रतिशत गन्ना उत्पादित किया जाता है। उत्तर भारत की तुलना में दक्षिणी भारत के गन्ना उत्पादक राज्यों में गन्ने की प्रति हेक्टेयर उपज अधिक है। भारत के विभिन्न राज्यों में गन्ना उत्पादन क्षेत्र निम्नानुसार है –

1. उत्तर प्रदेश:
वर्ष 2013-14 के अनुसार उत्तर प्रदेश देश का 38.56 प्रतिशत गन्ना उत्पादन कर प्रथम स्थान पर रहा, साथ ही कृषि क्षेत्रफल की दृष्टि से भी प्रथम रहा है। यहाँ दो प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं –

  • तराई क्षेत्र:
    रामपुर से बरेली, पीलीभीत, सीतापुर, खीरी, मुरादाबाद, फैजाबाद, आजमगढ़, जौनपुर, गोरखपुर होते हुए बिहार के चम्पारन जिलों तक विस्तृत है।
  • दोआब क्षेत्र:
    गंगा-यमुना का दो आब क्षेत्र जो मेरठ से प्रारम्भ होकर इलाहाबाद तक विस्तृत है।

2. महाराष्ट्र:
दूसरा सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है। 2013-14 में 818.60 लाख गन्ने का उत्पादनं हुआ, जो देश का 22-89 प्रतिशत है। यहाँ गोदावरी नदी की ऊपरी घाटी गन्ने की कृषि के लिए प्रसिद है। अधिकाँश गन्ने से शक्कर बनाई जाती है। राज्य शक्कर के उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। अहमदनगर, नासिक, पुणे, शोलापुर, रत्नागिरी प्रमुख गन्ना उत्पादक जिले हैं।

3. तमिलनाडु:
गन्ने का तीसरा बड़ा उत्पादक राज्य है। प्रति हेक्टेअर उत्पादन (113.41 टन) में देश के अधिकतम उत्पादन करने वाले राज्यों में से है। भारत के कुल उत्पादन का 10.68 प्रतिशत गन्ना उत्पादित होता है। राज्य में समुद्रतटीय जलवायु के कारण गन्ने में मिठास अधिक होती है।

4. कर्नाटक:
यहाँ गन्ने की कृषि नदी घाटियों में होती है। तटीय क्षेत्र में उपजाऊ मिट्टी अनुकूल समुद्री जलवायु से उत्पादकता अधिक और निरन्तर क्षेत्र में वृद्धि हो रही है। देश का 10 से 12 प्रतिशत गन्ने का उत्पादन होता है। बेलगाँव, बेलारी, माण्डवा, कोलार, मैसूर, तुमकूर, रायचूर प्रमुख उत्पादक जिले हैं।

5. आन्ध्र प्रदेश:
राज्य में कृष्णा-गोदावरी नदियों के डेल्टाई क्षेत्र में स्थित है। यहाँ देश का 4.67 प्रतिशत गन्ना पैदा होता है। मुख्य उत्पादक जिले पूर्वी एवं पश्चिमी गोदावरी, श्रीकाकुलम, विशाखापट्टनम तथा चितूर है।

6. गुजरात:
यहाँ देश का 3.17 प्रतिशत गन्ना उत्पादन होता है। सूरत, भावनगर, जामनगर, राजकोट तथा जूनागढ़ प्रमुख उत्पादक जिले हैं।

7. पंजाब:
यहाँ भारत वर्ष का 2.21 प्रतिश गन्ना पैदा किया जाता है। अमृतसर, जालंधर, फिरोजपुर, गुरदासपुर प्रमुख उत्पादक जिले हैं।

8. हरियाणा:
देश का 2.04 प्रतिशत गन्ना पैदा किया जाता है। पंजाब की तरह यहाँ भी उपजाऊ मृदा एवं सिंचाई साधनों के कारण गन्ना क्षेत्र एवं उत्पादन व प्रति हेक्टेअर में निरन्तर वृद्धि हो रही है।

9. राजस्थान:
बूंदी, उदयपुर, भीलवाड़ा, श्रीगंगानगर, चितौड़गढ़, कोटा जिले प्रमुख हैं।

अन्य उत्पादक क्षेत्र:
बिहार के उत्पादक क्षेत्र तराई के समीपवर्ती चम्पारन, गया, दरभंगा, सारन प्रमुख उत्पादित जिले हैं।, उड़ीसा में-पुरी, कटक, अम्बलपुर तथा मध्य प्रदेश में-मुरैना, ग्वलियर, शिवपुरी आदि हैं।
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प्रश्न 4.
भारत में चाय उत्पादन के लिए उपयुक्त भौगोलिक दशाओं का उल्लेख करते हुए प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आवश्यक भौगोलिक दशाएँ:
1. तापमान:
यह विष्णु कटिबन्धीय पौधा है। इसके लिए 25 से 30°C तापमान आदर्श रहता है।

2. वर्षा:
200 से 250 सेमी. आवश्यक है। वर्ष में बार-बार वर्षा की बोछारें उपयुक्त रहती हैं।

3. मिट्टी:
चाय के लिए मिट्टी गहरी और गंधक युक्त होनी चाहिए। वनों का साफ करके तैयार की गई भूमि अच्छी मानी जाती है।

4. धरातल:
सुप्रवाहित धरातल आवश्यक होता है। पौधे की जड़ों में पानी का एकत्र होना हानिकारक रहता है। चाय के बागान ढालू पहाड़ियों पर ही उगाये जाते हैं।

भारत में चाय की कृषि सन् 1840 में असम राज्य की ब्रह्मपुत्र घाटी में सबसे पहले प्रारम्भ की गई। वर्तमान में भी ब्रह्मपुत्र घाटी चाय उत्पादन की दृष्टि से भारत का सर्वप्रमुख क्षेत्र है। भारत के प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्र निम्नानुसार हैं –

1. असम:
सभी आवश्यक भौगोलिक दशायें अनुकूल होने से यहाँ देश का 52 प्रतिशत चाय क्षेत्र एवं 54 प्रतिशत चाय उत्पादन कर दोनों तरफ से प्रथम स्थान पर है। शिवसागर, लखीमपुर, दरांग, गोलपाड़ा, नौगांव आदि जिले मुख्य हैं। देश के अन्य राज्यों विशेष दक्षिण में उत्पादन बढ़ने से असम में चाय सापेक्षिक महत्व कुछ कम होता जा रहा है।

2. प. बंगाल: यह दूसरा बड़ा उत्पादक राज्य है जहाँ देश की 22.36 प्रतिशत चाय का उत्पादन किया जाता है। दार्जलिंग, जलपाई गुड़ी;, कूचबिहार, पुरूलिंया मुख्य उत्पादक जिले हैं। दार्जलिंग की चाय उत्तम, सुगन्धित चाय होती है। जिसकी देश व विदेश में बहुत अधिक माँग रहती है।

3. तमिलनाडु:
देश की 12 प्रतिशत, चाय उत्पादन कर तृतीय स्थान पर है। नीलीगिरी व अन्नामलाई की पहाड़ियाँ क्रमशः 46 एवं 33 प्रतिशत उत्पादन करती हैं। यहाँ की चाय की माँग यूरोपियन देशों में अधिक रहती है।

4. केरल:
यहाँ देश की 8.5 प्रतिशत चाय पैदा होती है। त्रिचूर, पालघाट, कन्नानोर, त्रिवेन्द्रम, कोजीकोड़, मालापुरम प्रमुख उत्पादक जिले हैं।

अन्य उत्पादक राज्य: हिमाचल प्रदेश-कांगड़ा मण्डी जिले में हरी चाय, उत्तराखण्ड में देहरादून, अल्मोड़ा, गढ़वाल जिले कर्नाटक-कुर्ग, मैसूर, चिकमंगलूर जिले। मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, अरूणाचल प्रदेश में भी अल्प मात्रा में चाय पैदा की जाती है। यह सभी राज्य मिल कर देश की 1 प्रतिशत चाय का उत्पादन करते हैं।
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