Rajasthan Board RBSE Class 12 Practical Geography Chapter 6 क्षेत्रीय अध्ययन

RBSE Class 12 Practical Geography Chapter 6 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.
क्षेत्रीय अध्ययन को संक्षेप में समझाइये।
उत्तर:
क्षेत्रीय अध्ययन का आशय:
किसी भी क्षेत्र में जाकर भौगोलिक पर्यावरण से सम्बन्धित आँकड़ों, सूचनाओं एवं जानकारियों को एकत्र करना, समस्याओं को समझना एवं उनका विश्लेषण करना ही क्षेत्रीय अध्ययन कहलाता है। क्षेत्रीय अध्ययन की आवश्यकता-भूगोल एक क्षेत्रीय विज्ञान है। सभी भौगोलिक लक्षण भूपटल पर असमान रूप में फैले हुए है।

अतः भौगोलिक पर्यावरण तथा उसकी प्रक्रियाओं को समझने के लिए आवश्यक है कि भूगोल का विद्यार्थी भौगोलिक अवयवों के बीच होने वाली अन्यान्य क्रियाओं को अपनी आँखों से देखकर समंझे तभी क्षेत्रीय समस्याओं के मूल तक पहुँचा जा सकता है। अतः भूगोल के विद्यार्थियों को मनोवैज्ञानिक ज्ञान प्रदान करने के साथ-साथ क्षेत्र में जाकर व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करने हेतु भूगोल में क्षेत्रीय अध्ययन की आवश्यकता महसूस होती है।

क्षेत्रीय अध्ययन का महत्त्व:
मानव तथा उसके पर्यावरण (वातावरण) के मध्य जानकारी प्राप्त करने के लिए क्षेत्र सर्वेक्षण द्वारा काफी सहायता मिल जाती है। भौगोलिक अध्ययन के लिए आँकड़ी का एकत्रण क्षेत्र सर्वेक्षण द्वारा ही संभव है। इसकी सहायता से क्षेत्र की सभी सूचनाएँ प्राप्त हो जाती हैं। इस प्रकार भौगोलिक अध्ययन के लिए तथा सूचनाओं को एकत्रित करने के लिए क्षेत्र सर्वेक्षण आवश्यक माना जाता है।

प्रश्न 2.
क्षेत्रीय अध्ययन भूगोल के विद्यार्थियों के लिए क्यों आवश्यक है?
उत्तर:
क्षेत्रीय अध्ययन भूगोल के विद्यार्थियों के लिए इसलिए आवश्यक है क्योंकि इसके द्वारा विद्यार्थी प्रारम्भिक स्तर पर भौगोलिक तथ्यों पर पारस्परिक जटिलताओं का अनुमान और भौगोलिक विश्लेषण एवं मानचित्रण के विषय में स्वयं सक्षम हो जाता है। क्षेत्र में जाकर अध्ययन करने से उसे भौगोलिक दशाओं, क्षेत्र के आर्थिक स्वरूप, वहाँ की सामाजिक व सांस्कृतिक स्थिति व जनसंख्या सम्बन्धी दशाओं का ज्ञान होता है।

इस प्रकार के अध्ययन से विद्यार्थी का व्यावहारिक ज्ञान अधिक मजबूत होता है तथा सम्वन्धित क्षेत्र की जानकारी विद्यार्थी को प्रवीणता प्रदान करती हैं इस प्रकार का अध्ययन विद्यार्थियों को नवीन क्षेत्रों के अध्ययन के प्रति रूचि जागृत करता है। उन्हें समस्याओं व उनके समाधान के अनुमानों का पता चलता है। यह समस्त प्रक्रिया विद्यार्थियों को परिपक्वता प्रदान करती है।

प्रश्न 3.
क्षेत्रीय अध्ययन का चार्ट बनाइए।
उत्तर:
क्षेत्रीय अध्ययन का चार्ट निम्नानुसार है –

प्रश्न 4.
क्षेत्रीय अध्ययन के पीछे क्या उद्देश्य छिपा हुआ है?
उत्तर:
क्षेत्रीय अध्ययन के पीछे मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में व्यावहारिकता के माध्यम से शिक्षा को बढ़ावा देकर उसे अधिक स्थायी बनाना है। वास्तव में भूगोल का विद्यार्थी जो कुछ भी उपलब्ध मानचित्रों एवं पुस्तकों में पढ़ता है, वह क्षेत्रीय अध्ययन द्वारा और अधिक संतुष्ट हो सकता है। भौगोलिक तथ्यों की यथार्थता समझाना क्षेत्रीय अध्ययन की आधारशिला है। क्षेत्रीय अध्ययन के दौरान एकत्रित आंकडों व नमूनों का निष्कर्ष के रूप में लिखने तक विद्यार्थी मानचित्रण, रेखाचित्र, सारणीयण, प्रतिवेदन लेखन जैसी कलाओं को सीखता है, जो विद्यार्थी का सर्वांगीण विकास करने में सहायक होती है।

प्रश्न 5.
क्षेत्रीय प्रतिवेदन किसे कहते हैं?
उत्तर:
क्षेत्रीय अध्ययन हेतु चुने गए क्षेत्र की विभिन्न दशाओं ‘अवस्थिति उच्चवच, अपवाह तंत्र, जलवायु, मृदा, खनिज, वनस्पति, पशु सम्पदा, कृषि, उद्योग-धन्धों, व्यापार, यातायात व संचार, अधिवास, जनसंख्या, क्षेत्र की समस्याएँ योजनाओं का सारगर्भित अध्ययन एक रिपोर्ट के रूप में लिखना क्षेत्रीय प्रतिवेदन कहलाता है। क्षेत्रीय प्रतिवेदन में संक्षेप में सभी काम में ली गई प्रक्रियाओं, विधियों, उपकरणों व तकनीकों के विस्तृत विवरण का समावेश अवश्य होना चाहिए।

रिपोर्ट के बड़े भाग के अन्तर्गत संकलित की गई व्याख्या तथा विश्लेषण का समावेश किया जाता है। यह उन आँकडों व पोषक त के अवकलन पर आधारित होता है जो सूचियों, सांख्यिकीय अनुमानों, मानचित्रों व संदर्भो के रूप में प्राप्त किया जाता है। अंत में अन्वेषण का सारांश दिया जाता है।

प्रश्न 6.
क्षेत्रीय प्रतिवेदन के सोपान बताइये।
उत्तर:
क्षेत्रीय प्रतिवेदन निम्नलिखित सोपान के अनुसार तैयार करते हैं –

  1. क्षेत्र की अवस्थिति
  2. क्षेत्र की भौतिक विशेषताएं (उध्वावच)
  3. अपवाह तन्त्र
  4. जलवायु
  5. मृदा
  6. खनिज
  7. वनस्पति
  8. पशु-सम्पदा
  9. कृषि एवं भूमि उपयोग
  10. उद्योग-धन्धे
  11. व्यापार एवं वाणिज्य
  12. यातायात एवं संचार के साधन
  13. अधिवास
  14. जनसंख्या
  15. ग्रामीण विकास की नवीन योजनाएँ।

प्रश्नावली प्रारूप

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