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1 (क) देवसेना का गीत (ख) कार्नेलिया का गीत

जयशंकर प्रसाद

प्रश्न

प्रश्न-अभ्यास

देवसेना का गीत

  1. "मैंने भ्रमवश जीवन संचित, मधुकरियों की भीख लुटाई"-पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर मालवा के शासक बंधुवर्मा की बहन देवसेना स्कंदगुप्त से गोपन प्रेम करती है, किंतु स्कंदगुप्त मालवा के एक धन कुबेर की पुत्री विजया के प्रति आकर्षित है। देवसेना की कोमल भावनाओं को इससे चोट पहुँचती है। हूणों के साथ युद्ध में बंधु-वर्मा की मृत्यु के बाद देवसेना अकेली हो जाती है। वह स्कंदगुप्त के प्रणय-निवेदन को ठुकरा कर राष्ट्र-सेवा के लिए स्वयं को समर्पित कर देती है।

देवसेना अपने जीवन की संध्या में जब अतीत की ओर झाँकती है तो उसे स्कंदगुप्त का प्रेम, उसका प्रणय निवेदन तथा उसे ठुकराना दुखी करता है। उसे लगता है कि उसने भ्रमवश स्कंदगुप्त के प्रेम को स्वार्थ भावना से प्रेरित मान लिया था। उसे अनुभव होता है कि जीवन की संचित पूँजी, जो मधुकरियों की तरह थी, को उसने व्यर्थ ही गँवा दिया।

2. कवि ने आशा को बावली क्यों कहा है ?

उत्तर 'आशा' जीने का संदेश है। वह जिजीविषा को तीव्र करने वाली मनोवृत्ति है। व्यक्ति आशा के सहारे जीवन की अंधी-गुफाओं को पार कर जाता है। आशा मनुष्य को सपने दिखाती है। देवसेना स्कंदगुप्त से गोपन प्रेम करती हुई आशान्वित थी कि एक दिन वह सामने होगा। लेकिन जब वह सामने था तो देवसेना आगे निकल गई थी। प्रायः मनुष्य इच्छित वस्तु की आशा में बहुत कुछ गँवा देता है। देवसेना की आशा 'चंचल-सी' है, वह अपनी प्रवृत्तियों को परिवर्तित करती रहती है। कवि ने 'आशा' की चंचलता के कारण उसे 'बावली' कहा है।

3. "मैंने निज दुर्बल ........ होड़ लगाई" इन पंक्तियों में 'दुर्बल पद बल'

और 'हारी होड़' में निहित व्यंजना स्पष्ट कीजिए।

उत्तर देवसेना अपने आत्मविश्वास तथा अपनी दुर्बलता से परिचित है। अपने उत्कट आत्मविश्वास के बल पर उसने स्वयं को राष्ट्र-सेवा के लिए समर्पित कर दिया है, लेकिन वह अपनी दुर्बलताओं को भी जानती है। नारी होने का अर्थ ही संघर्षों से घिरे रहना है। मजबूत इरादों वाली स्त्री भी अपने आप को संघर्ष-पथ पर दुर्बल महसूस करने लगती है। 'दुर्बल पद-बल' देवसेना की इसी आंतरिक भावना

प्रकार से प्रभातकालीन सौंदर्य की लालिमा इन शब्दों के द्वारा अभिव्यक्त हुई है, 'हेम कुंभ ले उषा सवेरे-भरती ढुलकाती सुख मेरे।'

6. कविता में व्यक्त प्रकृति-चित्रों को अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर 'कार्नेलिया का गीत' कविता में भारत की प्रकृति को आकर्षक रूप में वर्णित किया गया है। भारत की भूमि हरियाली से आवृत्त है। इसका सौंदर्य विश्व में अनूठा है। बहती नदियाँ, पर्वत शृंखलाएँ, शीतल मंद बयार, पक्षियों का कलरव तथा वृक्षों की लंबी पंक्तियाँ भारत की प्राकृतिक सुषमा का मनोहारी चित्र प्रस्तुत करते हैं।

सूर्योदय से पूर्व निवासियों का जगकर अपनी दिनचर्या में लगना तथा दुनिया को आध्यात्मिक शांति का संदेश देना, यहाँ की विशेषता है। जब पूरी दुनिया रात्रिकालीन निद्रा में मग्न होती है, उस समय भारत के आकाश पर सूर्य की लालिमा छा जाती है और उषा अपने अमृत-कलश से लोगों को अमरता के रस का पान कराती है। सूर्य की किरणें जीवन का संचार करती हैं।

भारत की प्राकृतिक सुषमा को कमल के फूल, इंद्रधनुषी रंगों के पंखों वाले उड़ते पक्षी, वसंत ऋतु और वर्षा की करुणामयी बूँदों से रूपाकार देते हैं। कवि प्रसाद ने भारत के प्राकृतिक सौंदर्य के वर्णन द्वारा देश के प्रति भावात्मक चेतना को स्पष्ट करने की चेष्टा की है।

3. काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए

हेम कुंभ ले उषा सवेरे-भरती ढुलकाती सुख मेरे

मदिर ऊँघते रहते जब-जगकर रजनी भर तारा।

उत्तर प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने भारतवर्ष में प्रभातकालीन सौंदर्य का चित्रात्मक वर्णन किया है। कवि ने उषाकाल को एक स्त्री का रूप प्रदान किया है जो सूर्य उदित होने की बेला में अपने स्वर्णिम कलश से पृथ्वी पर समस्त सुखों को उड़ेल देती है और तारे सारी रात जागने के कारण ऊँघ रहे हैं।

भाषा तत्सम प्रधान, लाक्षणिक प्रयोग तथा प्रतीकात्मकता

अलंकार रूपक अलंकार - 'हेम कुंभ ले उषा'

अनुप्रास अलंकार - जब-जग'

मानवीकरण - मंदिर........तारे।

गुण माधुर्य, संगीतात्मकता

राष्ट्रीयता का भाव सम्प्रेषित, प्रकृति के माध्यम से भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक प्रवृत्तियों का भी।

  1. "जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा"-पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

उत्तर भारत एक आध्यात्मिक और शांतिप्रिय लोगों का देश है। यहाँ अतिभौतिकता से तंग विदेशियों को शांति मिलती है। इतिहास इस बात का गवाह है कि भारत-भूमि ने अनजान लोगों को पनाह दी है। अज्ञानता के सागर से निकल कर ज्ञान की खोज करने वाले लोगों की खोज यहाँ पूर्ण हुई है। ह्वेनसांग तथा फाह्यान ने नालंदा विश्वविद्यालय से बौद्ध-दर्शन का ज्ञान प्राप्त कर चीन में उसे फैलाया। कई आक्रमणकारी आकर यहाँ बस गए। इस देश ने हर आने वालों का हृदय खोलकर स्वागत किया है। भारतीय संस्कृति समन्वय तथा सामंजस्य की परंपरा के कारण ही अद्वितीय है।

  1. प्रसाद शब्दों के सटीक प्रयोग से भावाभिव्यक्ति को मार्मिक बनाने में कैसे कुशल हैं? कविता से उदाहरण देकर सिद्ध कीजिए।

उत्तर प्रसाद शब्द-प्रयोग से भावाभिव्यक्ति को मार्मिक बनाने में अत्यंत कुशल हैं। 'कार्नेलिया का गीत' कविता में कवि के इस मार्मिकता से परिपूर्ण रूप के दर्शन होते हैं। प्रसाद जी ने भारतवर्ष को सर्वप्रथम 'अरुण यह मधुमय देश' कहकर भारतवर्ष को प्रेम से परिपूर्ण देश की संज्ञा दी है। अनजान क्षितिज को सहारा मिलने

मालवराज बंधुवर्मा के हूणों के साथ युद्ध में मरने के कारण वह अकेली हो जाती है। इस निराशा के बीच देवसेना स्कंदगुप्त का प्रणय-निवेदन ठुकरा देती है तथा राष्ट्र-सेवा का व्रत लेती है। विजया द्वारा ठुकराया गया स्कंदगुप्त भी आजीवन अविवाहित रहने की प्रतिज्ञा करता है।

देवसेना अपने जीवन की संध्या में अतीत की स्मृति में जाती है तो उसे संघर्षों से प्राप्त वेदनापूर्ण जीवन को देख कर घोर निराशा होती है। वह यह जानकर और अधिक निराश है कि उसकी हार निश्चित है। देवसेना की हार या निराशा उसके अकेलेपन में निहित है।

कार्नेलिया का गीत

  1. 'कार्नेलिया का गीत' कविता में प्रसाद ने भारत की किन विशेषताओं की ओर संकेत किया है?

उत्तर 'कार्नेलिया का गीत' में भारत की संस्कृति तथा प्राकृतिक सुषमा की विशेषताओं की ओर संकेत किया गया है। भारत की प्राकृतिक सुंदरता संसार में अद्वितीय है। यह शस्य श्यामल धरती मनुष्य को ही नहीं पशु-पक्षियों को भी प्यारी है। सूर्योदय के समय पक्षियों का कलरव, क्षितिज का इंद्रधनुषी रंगों से भर जाना तथा उषा का प्राणियों में अमृत-रस का दान दुनिया को इस ओर आकर्षित करता है।

पक्षी इस ओर उड़ते हुए इसलिए आते हैं कि यहाँ उनके लिए सुरक्षित स्थान है। यहाँ अहिंसा को धर्म माना जाता है। यहाँ के लोग दयालु हैं। वे अज्ञानी को ज्ञान देते हैं। अनजान लोगों को यहाँ पनाह मिलती है। जयशंकर प्रसाद ने इस कविता में भारतीय संस्कृति के गौरव को स्थापित किया है तथा इसे दुनिया के सामने उदाहरण के रूप में रखा है।

2. 'उड़ते खग' और 'बरसाती आँखों के बादल' में क्या विशेष अर्थ व्यंजित है?

उत्तर 'उड़ते खग' से कवि का अभिप्राय है कि पक्षी धरती पर उतरने के लिए जगह की तलाश में भारत-भूमि तक आते हैं क्योंकि यहाँ उन्हें सुरक्षा तथा स्नेह मिलने की संभावना है। पक्षी का निर्द्वंद्व विचरण इससे यह स्पष्ट होता है।

'बरसाती आँखों के बादल' से कवि यह बताता है कि जिस प्रकार बरसाती बादल धरती के ताप को अपने जल से शीतल कर देते हैं, वैसे ही भारतीयों की करुणा दुनिया के दुख को समाप्त करती है। भारतीय हमेशा सुख, शांति तथा सहयोग के लिए प्रस्तुत रहते हैं।

को अभिव्यक्त करता है। वह जानती है कि संघर्षों के अंत में उसकी हार निश्चित है। इसलिए वह अपने संघर्ष को 'हारी-होड़' की संज्ञा देती है।

  1. काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए

(क) श्रमित स्वप्न की मधुमाया तान उठाई।

(ख) लौटा लो. लाज गँवाई।

उत्तर (क) देवसेना अपने जीवन में व्यतीत मधुर क्षणों को स्मरण करती है। मधुर स्मृतियाँ हल्की नींद में साकार हो रही हैं और उसकी आसक्ति ज्यों-की-त्यों बनी हुई है। अतीत के क्षणों की स्मृति भी उसके लिए दुखद बन गई है।

श्रमित स्वप्न के माध्यम से अथक परिश्रम के बाद आँखों में साकार होने वाले दृश्यों को ध्वनित करने का प्रयास किया गया है।

'विहाग राग' - नायक-नायिका के प्रणय उत्प्रेरित करने वाला राग

'दीठ' - देशज शब्द है। दृष्टि के लिए प्रयुक्त होने वाली क्षेत्रीय (देशज) भाषा का महत्त्वपूर्ण प्रयोग

भाषा - तत्सम प्रधान और लाक्षणिक अनुप्रास अलंकार का प्रयोग शृंगार रस के वियोग पक्ष का मार्मिक चित्रण

गुण - माधुर्य तथा गेयता विद्यमान छायावादी दुखवाद का चित्रण

(ख) प्रस्तुत पंक्तियों में देवसेना के हृदय की समस्त वेदना मुखरित हो उठी है। नारी की आंतरित भाव-चेतना प्रकाशित हुई है।

भाषा - तत्सम प्रधान तथा लाक्षणिक

रस - शृंगार के वियोग पक्ष का मार्मिक चित्रण

गुण - माधुर्य तथा संगीतात्मकता

अलंकार - पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार 'हा-हा'

  • छायावादी दुखवाद का सजीव अंकन
  • गेयता का गुण विद्यमान

5. देवसेना की हार या निराशा के क्या कारण हैं?

उत्तर देवसेना गुप्त साम्राज्य के युवराज स्कंदगुप्त से गोपन प्रेम करती है। वह स्कंदगुप्त को विजया के प्रति आसक्त देखकर निराश हो जाती है। अपने भाई

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