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Chapter 1 ईदगाह

Textbook Questions and Answers

Chapter 1 ईदगाह

प्रश्न 1. 
"ईदगाह' कहानी के उन प्रसंगों का उल्लेख कीजिए जिनसे ईद के अवसर पर ग्रामीण परिवेश का उल्लास प्रकट होता है। 
उत्तर :
कहानी के प्रारम्भ में 'ईद' के अवसर पर उल्लास का दृश्य प्रकट किया है। ग्रामीण परिवेश की प्रकृति और निवासियों में उत्साह और उमंग व्याप्त है। वृक्षों पर हरियाली व्याप्त है, खेतों में अजीब रौनक है, आसमान में लालिमा व्याप्त है, सूर्य भी प्यारा और शीतल लग रहा है। मानो प्रकृति भी ईद की मुबारकवाद दे रही है। सारे गाँव में हलचल थी। बच्चे ईदगाह जाने के लिए उत्सुक थे और आनन्द मना रहे थे। युवक और वृद्ध तैयारी में लगे थे। कोई कुरते में बटन लगाने के लिए पड़ोस के घर से सुई-धागा लेने दौड़ रहा था तो कोई जूतों को नरम करने के लिए तेल के लिए तेली के पास दौड़ रहा था। किसी को बैलों की चिन्ता थी इसलिए उन्हें सानी-पानी देने का प्रयत्न कर रहा था। इस प्रकार ग्रामीण परिवेश का उल्लास प्रकट किया है।

प्रश्न 2. 
'उसके अन्दर प्रकाश है, बाहर आशा। विपत्ति अपना सारा दलबल लेकर आए, हामिद की आनन्द भरी चितवन उसका विध्वंस कर देगी।' इस कथन से लेखक का क्या आशय है? 
उत्तर :
हामिद की दादी अमीना ईद के दिन उदास थी पर हामिद को उदासीनता से कोई मतलब नहीं था। उसकी दादी ने उसे कह रखा था कि उसके अब्बाजान कमाकर रुपयों की बहुत-सी थैलियाँ लेकर आयेंगे और अम्मीजान अल्लाह मियाँ के घर से उसके लिए बड़ी अच्छी-अच्छी चीजें लेने गई हैं। इसी करण हामिद प्रसन्न है। हामिद आशान्वित है। उसे रुपये मिलेंगे और वह अच्छी चीजें खरीदेगा। अमीना अभावों के कारण दुखी है, किन्तु हामिद को अभावों का आभास भी नहीं है। वह तो आशा की उमंग से भरा हुआ है। - वह आशा के आगे सारी कठिनाइयों को भूल गया है। आशा व्यक्ति को शक्ति देती है, अभावों से लड़ने की क्षमता देती है। वह तो कल्पना के पंख लगाकर उड़ रहा था। दादी की उदासीनता भी उसे प्रभावित नहीं कर सकी।

प्रश्न 3. 
'उन्हें क्या खबर कि चौधरी आज आँखें बदल लें, तो यह सारी ईद मुहर्रम हो जाए। इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए। 
उत्तर :
ईद के दिन बालक प्रसन्न थे और मेले में जाने को उत्सुक थे किन्तु परिवार के बड़ों को तो गृहस्थी का उत्तरदायित्व निभाना था। उन्हें सेवैयों को पकाने के लिए दूध और शक्कर की व्यवस्था करने की चिन्ता थी। पैसों की कमी के कारण उन्हें चौधरी कायम अली के घर जाना पड़ रहा है। बच्चे क्या जाने कि कायम अली अगर आँखें बदल लें तो ईद की खुशी मुहर्रम के मातम में बदल जाएगी। गरीबी के कारण चौधरी की चौखट पर चढ़ना जरूरी है। बच्चे बड़ों की इस मजबूरी को नहीं समझते हैं। उन्हें तो ईद मनाने और ईदगाह के मेले में जाने की जल्दी है।

प्रश्न 4.
'मानो भ्रातृत्व का एक सूत्र इन समस्त आत्माओं को एक लड़ी में पिरोए हुए है।' इस कथन के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए कि 'धर्म तोड़ता नहीं जोड़ता है।' 
उत्तर : 
धर्म सब को एक सूत्र में बाँधता है, भ्रातृत्व और प्रेम का भाव जाग्रत करता है। कहानीकार ने ईदगाह में रोजेदारों द्वारा नमाज अदा करने की घटना का वर्णन कर इस कथन की पुष्टि की है। रोजेदार पंक्तिबद्ध एक दूसरे के पीछे खड़े हो जाते हैं। पीछे आने वाले पीछे खड़े होते हैं। लाखों सिर एक साथ सिजदे में झुकते हैं, फिर सब एक साथ खड़े होते हैं, एक साथ झुकते हैं और एक साथ घुटनों के बल बैठ जाते हैं। यह क्रिया कई बार होती है। ऐसा लगता है मानो जैसे बिजली की लाखों बत्तियाँ एक साथ प्रदीप्त हों और एक साथ बुझ जाएँ। यहाँ धन और पद के कारण कोई भेदभाव नहीं। इस्लाम की निगाह में सब बराबर हैं। नमाज अदा के बाद सभी आपस में गले मिलते हैं। इसे देखकर यह लगता है मानो भ्रातृत्व का एक सूत्र इन समस्त आत्माओं को एक लड़ी में पिरोए हुए है।। 

प्रश्न 5. 
निम्नलिखित गद्यांशों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए - 
(क) कई बार यही क्रिया होती है ......... आत्माओं को एक लड़ी में पिरोए हुए है। 

उत्तर :

संदर्भ एवं प्रसंग - प्रस्तुत गद्यांश उपन्यास सम्राट, प्रेमचंद की सुप्रसिद्ध कहानी 'ईदगाह' से लिया गया है। प्रस्तुत अवतरण में कहानीकार ने ईद की नमाज अदा करने का यथार्थ वर्णन किया है। रोजेदार सामूहिक रूप में एक साथ सिज़दे में सिर झुकाते हैं, उठते हैं और घुटनों के बल बैठते हैं। 

व्याख्या - कहानीकार प्रेमचंद ने ईदगाह के दृश्य का सजीव एवं चित्रोपम वर्णन किया है। रोजेदार पंक्तिबद्ध खड़े होकर नमाज अदा करते हैं। नमाज अदा करते समय लाखों सिर एक साथ सिजदे में झुक जाते हैं। सामूहिक रूप में एक साथ खड़े होते हैं, एक साथ झुकते और घुटनों के बल बैठते हैं। नमाज अदा करने की यह क्रिया बार-बार होती है। उनकी सामूहिक रूप में एक साथ की हुई क्रिया ऐसी प्रतीत होती है, मानो बटन दबाने पर बिजली की लाखों बत्तियाँ एक साथ प्रकाश बिखेर रही हैं और एक साथ बुझ जाती हैं। 

यह दृश्य बड़ा अद्भुत था। दूर तक लम्बी कतार में खड़े इन रोजेदारों की क्रियाएँ उनके हृदय में श्रद्धा, गर्व और आत्मिक प्रसन्नता भर रही थीं। दर्शकों का हृदय भी श्रद्धा और आनन्द से भर जाता था। उनमें भाईचारे भाव भरा था, लगता था जैसे माला में एक धागा सारे मोतियों को बांधे रखता है उसी प्रकार भ्रातृत्व के सूत्र ने उनकी आत्मा को बाँध रखा हो। सभी में एकता की भावना विद्यमान थी। 

विशेष :

  • नमाज अदा करने वालों की भावना का सुन्दर वर्णन किया है। 
  • इस्लाम धर्म में भ्रातृत्व भाव है, इसे स्पष्ट किया है। 
  • भाषा आलंकारिक है। 
  • भाषा सरल, सुबोध एवं प्रवाहपूर्ण है। 
  • वर्णनात्मक शैली है।


(ख) बुढ़िया. का क्रोध ........ स्वाद से भरा हुआ।
उत्तर :

संदर्भ-प्रस्तुत गद्यावतरण प्रेमचंद की बाल मनोविज्ञान पर आधारित कहानी 'ईदगाह' से उद्धृत है। प्रसंग मेले में हामिद ने कुछ नहीं खाया और तीन पैसे में अपनी दादी के लिए चिमटा खरीद लिया। चिमटे को देखकर अमीना को क्रोध आया किन्तु हामिद का कथन सुनकर उसका क्रोध शान्त हो गया और हामिद के प्रति स्नेह उत्पन्न हो गया, जिसे वह शब्दों में अभिव्यक्त नहीं कर सकी। 

व्याख्या - हामिद के हाथ में चिमटा देखकर बुढ़िया अमीना को क्रोध आ गया। दिनभर इसने कुछ नहीं खाया और तीन पैसे खर्च करके केवल चिमटा खरीद लिया। उसकी बेसमझी पर अमीना को क्रोध आया। किन्तु हामिद का सरल उत्तर सुनकर अमीना का क्रोध शान्त हो गया और तुरन्त ही स्नेह का भाव जाग्रत हो गया। वह स्नेह ऐसा नहीं था जिसे वह बोलकर व्यक्त करती। अन्दर ही अन्दर उसका हृदय स्नेह से अभिभूत हो गया। 

यदि वह उस स्नेह को बोलकर व्यक्त करती तो उसमें कुछ क्रोध का पुट हो सकता था जो अमीना को कष्ट देता। उसका वह स्नेह अव्यक्त था जिसे वह मौन रूप में व्यक्त कर रही थी। उसका स्नेह हृदय के अन्तरतम में व्याप्त था, वह वास्तविक था, उसमें गहराई थी। अमीना के स्नेह में वात्सल्य का रस भरा था और हामिद के भोलेपन तथा अपने प्रति स्नेह का स्वाद भरा था, आनन्द का स्वाद भरा था। अमीना सोचने लगी हामिद ने अपनी इच्छाओं का दमन करके कितना बड़ा त्याग किया है। उसके हृदय में मेरे प्रति कितना सद्भाव है। 

वह कितना विवेकी है जो उपयोगी वस्तु को खरीदकर लाया है। जब अन्य सभी खिलौने खरीद रहे होंगे और मिठाई खा रहे होंगे तब उसका मन भी ललचाया होगा तब इस संयमी बच्चे ने मन पर नियंत्रण कर मेरी चिन्ता करके चिमटा खरीदा, यह उसके त्याग और सद्भाव का प्रमाण है। उस मेले में भी वह अपनी बुढ़िया दादी को नहीं भूला। यह सोचकर अमीना का मन गद्गद हो गया। 

विशेष :

  • मनोवैज्ञानिक वर्णन है। अमीना की मनः स्थिति का मार्मिक चित्रण है। 
  • भाषा सरल एवं भावानुकूल है। 
  • अमीना के हृदय का थोड़ा-सा अन्तर्द्वन्द्व दिखाया है।

प्रश्न 6.
हामिद ने चिमटे की उपयोगिता को सिद्ध करते हुए क्या-क्या तर्क दिए ? 
उत्तर : 
हामिद के साथियों के पास पैसे थे। उन्होंने खिलौने और मिठाई खरीदी। हामिद तीन पैसे का धनी था, उसने चिमटा खरीदा। साथियों ने उसकी हँसी उड़ाई। हामिद ने अपने तर्कों से उन्हें परास्त कर दिया। उसने कहा-मेरा चिमटा जमीन पर गिरा तो टूटेगा नहीं, तुम्हारे खिलौने टूट जायेंगे। कन्धे पर रखने से यह बन्दूक हो जाएगा। हाथ में लेने पर फकीरों का चिमटा हो जाएगा। यह मंजीरे का काम कर सकता है।

चिमटे से तुम्हारे खिलौनों पर प्रहार करूँ तो उनकी जान निकल म्हारी खंजरी का पेट फाड़ देगा, मेरा यह चिमटा। मेरा चिमटा बहादर है, यह आग में, पानी में, आँधी और तफानों में डटा खड़ा रहेगा। शेर के आने पर तुम्हारे खिलौने डरकर भाग जायेंगे पर मेरा चिमटा रुस्तमे-हिन्द है, शेर की गरदन पर सवार होकर उसकी आँखें निकाल लेगा। हामिद के तर्क सुनकर सारे साथी निरुत्तर हो गए। 

प्रश्न 7. 
गाँव से शहर जाने वाले रास्ते के मध्य पड़ने वाले स्थलों का ऐसा वर्णन लेखक ने किया है मानो आँखों के सामने चित्र उपस्थित हो रहा हो। अपने घर और विद्यालय के मध्य पड़ने वाले स्थानों का अपने शब्दों में वर्णन कीजिए। 
उत्तर :
मेरा विद्यालय शहर में है। मैं गाँव से विद्यालय जाता हूँ। रास्ते में लहलहाते खेतों को देखता हूँ। खेतों पर उड़ते पक्षियों को देखता हूँ, वृक्षों पर बैठे पक्षियों की चहकने की आवाज सुनता हूँ। शहर में प्रवेश करते ही शिवालय मिलता है जहाँ पूजा की थाली लिए-स्त्री-पुरुषों को जाते देखता हूँ। पास ही फूल माला और मिठाई की दुकान है जहाँ से श्रद्धालु माला और प्रसाद खरीदते हैं। पास ही एक बगीचा है जहाँ लोग हरी घास पर घूमते दिखते हैं, कुछ व्यायाम करते दिखते हैं। विभिन्न प्रकार के पुष्प खिले हैं, जिनकी सुगन्ध से वातावरण महक जाता है। विद्यालय में प्रवेश करते ही खेल के मैदान में लड़कों को क्रिकेट खेलते देखता हूँ। 

प्रश्न 8. 
'बच्चे हामिद ने बूढ़े हामिद का पार्ट खेला था। बुढ़िया अमीना बालिका अमीना बन गई।' इस कथन में 'बूढ़े हामिद' और 'बालिका अमीना' से लेखक का क्या आशय है ? स्पष्ट कीजिए। 
उत्तर :
परिवार में मुखिया या बड़े-बूढ़े परिवार और पारिवारिक जनों का ध्यान रखते हैं, उनके उपयोग की वस्तुएँ जुटाते हैं। उसी प्रकार हामिद ने अपनी बूढ़ी दादी के कष्ट को ध्यान में रखकर चिमटा खरीदा। उसने बड़े-बूढ़ों की तरह दांदी अमीना का ध्यान रखा। अमीना पोते का स्नेह देखकर फूट-फूटकर रो रही थी और हामिद बड़े-बूढ़ों की तरह दादी को समझा रहा था। यह हामिद का बूढ़ों का सा व्यवहार था। 

अमीना चिमटे को देखकर दुखी हुई। बच्चे जैसे बिना सोचे-समझे क्रोध करने लगते हैं, वैसे ही अमीना भी क्रोधित हो गई। किन्तु हामिद का स्नेह और विवेक देखकर वह गद्गद हो गई और बच्चों की तरह रोने लगी। उसका यह रुदन बालिका की तरह था। इसी से लेखक ने कहा-"बच्चे हामिद ने बूढ़े हामिद का पार्ट खेला था। बुढ़िया अमीना बालिका अमीना बन गई थी।"

प्रश्न 9. 
'दामन फैलाकर हामिद को दुआएँ देती जाती थी और आँसू की बड़ी-बड़ी बूंदें गिराती जाती थी। हामिद इसका रहस्य क्या समझता।'-लेखक के अनुसार हामिद अमीना की दुआओं और आँसुओं के रहस्य को क्यों नहीं समझ पाया ? कहानी के आधार पर स्पष्ट कीजिए। 
उत्तर : 
ईद के मेले में खिलौनों और मिठाई की उपेक्षा कर दादी अमीना के कष्ट को ध्यान में रखकर हामिद ने चिमटा खरीदा। जब अमीना ने हामिद के स्नेह और विवेक को समझा तो वह रोने लगी और दुआएँ देने लगी। भोला बच्चा यह नहीं समझ पाया कि दादी क्यों रो रही है। उसने सोचा होगा कि दादी को चिमटा देखकर दुख हुआ है इसलिए रो रही है। वह क्या जाने कि इसके पीछे कितना स्नेह भरा है। दादी का वात्सल्य आँखों के द्वारा आँसुओं के रूप में पिघल कर बाहर आ रहा है। ये दुआएँ उसकी छिपी भावनाएँ हैं जो वाणी से बाहर निकल रही हैं। नासमझ हामिद दादी अमीना की भावनाओं को नहीं समझ पाया।

प्रश्न 10. 
हामिद की जगह आप होते तो क्या करते ? 
उत्तर : 
हामिद की जगह यदि मैं होता तो मैं भी वही करता जो हामिद ने किया। दादी अमीना के सिवा हामिद का दुनिया में कोई और नहीं था। वह प्रतिदिन रोटी सेकते वक्त अपनी दादी के हाथों को जलता देखता था, अतः उन्हें कष्ट से बचाने के लिए उसने उनके लिए चिमटा खरीदा। यदि मेरी दादी माँ के साथ ऐसी ही समस्याएँ होती तो मैं भी उनकी आवश्यकता का सामान ही खरीदता, जिससे उन्हें आराम मिलता। 

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