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Chapter 10 The Great Stone Face 2

कठिन शब्दार्थ एवं हिन्दी अनुवाद

The years hurried ………….. at a stranger. (Pages 128-129)

कठिन शब्दार्थ –

hurried on (हरिड ऑन) = जल्द निकले, furrows (फरोज) = झुर्रियां, numerous (न्यूमॅरेंस) = बड़ी संख्या में, ceased (सीस्ड) = बंद हो गया, obscure (अबस्क्यु अर) = अप्रसि (अनसोट) = ‘बिना कोशिश, undesired (अनडिजाइअड) = अनचाही, converse (कॅनवॅस) = बात करना, sincerity (सिनसेरॅटि) = सच्चाई/ईमानदारी, uppermost (अपमोस्ट) = उच्चतम, unawares (अनॅवेअज) = अनजाने में,

pouring out (पोरिंग आउट) = उँडेलते हुए, forgotton (फॅगॉटन) = विस्मृत, celebrated (सेलिब्रेटिड) = ख्याति दी, customary (कसटॅमॅरि) = सामान्य/दैनिक, toil (टॉइल) = परिश्रम, worthy (दि) = योग्य, shelter (शेल्टर) = शरण, gladly (ग्लैडलि) = हर्ष से, hospitably (हॉस्पिटॅबलि) = उदारता से।

हिन्दी अनुवाद –

वर्ष शीघ्रता से निकलते गए और अर्नेस्ट के सिर पर सफेद बाल उग आए और उसके ललाट पर झुर्रियाँ बन गई और उसके गालों में रेखाएँ। वह एक वृद्ध व्यक्ति था। लेकिन व्यर्थ में ही वह बूढ़ा नहीं हो गया था; उसके सिर के बालों से अधिक बड़ी संख्या उसके मस्तिष्क में विचार थे। और अर्नेस्ट का अप्रसिद्धि में रहना समाप्त हो चुका था। बिना कोशिश के, बिना चाहे वह प्रसिद्धि आ चुकी थी जिसे बहुत से तलाशते हैं, वह घाटी की सीमा से परे तक प्रसिद्ध बन चुका था।

कॉलेज के प्रोफेसर और यहाँ तक कि शहर के क्रियाशील व्यक्ति, अर्नेस्ट से मिलने व वार्ता करने दूर-दूर से आते थे, और वह सभी का विनम्र सदभाव से स्वागत करता था और उनसे स्वतन्त्र रूप से (उन विषयों पर) करता था जो उसके हृदय में या उनके में सबसे ऊँचे थे या गहनतम स्थापित थे। जबकि वे साथ बातचीत करते, तो भी उसका चेहरा

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चमक उठता, अकस्मात् ही, और एक मंद सायंकालीन रोशनी के जैसे उन पर चमकने लगता। जबकि अर्नेस्ट वृद्ध होता जा रहा था, ईश्वर ने इस पृथ्वी को एक नया कवि प्रदान कर दिया था। वह भी घाटी का उसने अपना मधर संगीत सभी जगह उँडेलते हए, जीवन का बड़ा हिस्सा दर के शहर में व्यतीत किया था।

न ही विशाल प्रस्तर चेहरा भुलाया गया था, क्योंकि कवि ने इसे अपनी कविता में प्रख्यात किया था। इस कवि के गीत अपना रास्ता अर्नेस्ट तक निकाल पाये। वह अपनी नित्य की मेहनत के उपरान्त, अपने छोटे से घर के दरवाजे के सामने रखी बेन्च पर बैठ जाता व इनको पढ़ता। जैसे ही वह पढ़ता साथ ही वह पर्वत की ओर अपने नेत्र उठाता। “अरे विशाल प्रस्तर चेहरे”, उसने कहा, “क्या यह व्यक्ति तुम्हारा प्रतिरूप बनने के योग्य नहीं है?”

वह चेहरा मुस्कराता-सा प्रतीत होता, लेकिन उत्तर नहीं देता था। – अब ऐसा घटित हुआ कि कवि, यद्यपि वह बहुत दूर रहता था, ने न केवल अर्नेस्ट के बारे में सुन रखा था बल्कि उसके चरित्र के बारे में बहुत विचार किया था और इस व्यक्ति से मिलना चाहता था जिसकी बुद्धिमानी तथा उसके जीवन की उदात्त सरलता हाथ में हाथ लिये साथ चलती थी।

इसलिए, ग्रीष्म ऋतु के एक दिन, वह अर्नेस्ट के दरवाजे पर साथ आया, जहाँ उसने उस भले वृद्ध व्यक्ति को अपने हाथ में एक पुस्तक थामे पाया, जो उसने पढ़ी थी और, फिर, पन्नों के बीच में एक उँगली के साथ, विशाल प्रस्तर चेहरे की ओर प्रेम से देखा। “नमस्कार”, कवि ने कहा, “क्या आप एक यात्री को एक रात की शरण दे सकते हो?” “खुशी से”, अर्नेस्ट ने उत्तर दिया; और फिर उसने आगे कहा, मुस्कराते हुए, “मैं सोचता हूँ मैंने इस विशाल प्रस्तर चेहरे को किसी अजनबी पर इतनी उदारता से देखते हुए नहीं देखा।”

The poet sat down ………………….. be its likeness. (Page 130)

कठिन शब्दार्थ –

flung out (फ्लंग आउट) = बाहर आई, sighed (साइड) = आह भरी, awaited (अवेटिड) = प्रतीक्षा की, fulfilment (फुलफिलमॅन्ट) = पूर्णता।

हिन्दी अनवाद –

कवि उसकी बगल में बैठ गया और उसने व अर्नेस्ट ने एकसाथ बातें कीं। पहले कभी कवि ने अर्नेस्ट जैसे व्यक्ति से बातें नहीं की थीं, इतना बुद्धिमान, और सज्जन, और दयालु। दूसरी तरफ, अर्नेस्ट कवि के मस्तिष्क से बाहर आये जीवन्त बिम्ब-चित्रण से प्रभावित था। जब अर्नेस्ट कवि को सुन रहा था, तो उसने कल्पना की कि विशाल प्रस्तर चेहरा भी सुनने के लिए आगे झुका हुआ था। वह कवि की आँखों में टकटकी लगाकर देख रहा था।

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“आप कौन हैं, मेरे प्रतिभाशाली मेहमान?” उसने पूछा। कवि ने अपनी अंगुली उस पुस्तक पर रखी जिसे अर्नेस्ट पढ़ रहा था। “आपने इन कृविताओं को पढ़ लिया है,” उसने कहा, “तब तो आप मुझे जानते हैं, क्योंकि मैंने उनको लिखा बारंबार, अर्नेस्ट ने कवि की विशेषताओं का परीक्षण किया; वह विशाल प्रस्तर चेहरे की ओर मुड़ा फिर पीछे घूमा।

उसने अपना सिर हिलाया और आह भरी। “आप उदास क्यों हैं?” कवि ने पूछा। “क्योंकि”, अर्नेस्ट ने उत्तर दिया, “पूरे जीवनभर मैंने एक भविष्यवाणी के पूर्ण होने का इन्तजार किया है, और जब मैंने ये कविताएँ पढ़ीं, तो मैंने आशा की कि यह आप में पूर्ण हो सकती हैं।” “आपने आशा की”, कवि ने, धीमे से, मुस्कराते हुए उत्तर दिया, “मुझ में विशाल प्रस्तर चेहरे का प्रतिरूप ढूँढ़ने की आशा की। मैं इस प्रतिरूपता के योग्य नहीं हूँ।”

And why not ……………………… Great Stone Face. (Pages 131-132)

कठिन शब्दार्थ –

heavenly (हेवनलि) = ईश्वरीय, correspond (कॉरस्पॉन्ड) = मेल खाना, custom (कसटॅम) = आदत, audience (ओडिअन्स) = श्रोतागण, harmonised with (हामॅनाइज्ड विथ) = परस्पर
सामंजस्य बैठाना, preacher (प्रीचर) = धर्मोपदेशक, good deeds (गुड डीड्ज) = शुभ कर्म, selfless love (सेल्फलॅस लव) = निःस्वार्थ प्रेम, sage (सेज) = मनीषी, diffused (डिफ्यूज्ड) = विसरण करना।

हिन्दी अनुवाद –

“और क्यों नहीं?” अर्नेस्ट ने पूछा। उसने पुस्तक की ओर इशारा किया। “क्या वो विचार योग्य नहीं हैं?” – “आप उनमें ईश्वरीय गीत की दूरस्थ आवाज सुन सकते हैं। किन्तु मेरा जीवन, प्रिय अर्नेस्ट, मेरे विचारों से मेल नहीं खा पाया है। मैंने भव्य स्वप्न देखे हैं, किन्तु वे केवल स्वप्न ही रहे हैं। कभी-कभी मैं अपने स्वयं के विचारों में ही विश्वास की कमी पाता हूँ। फिर, भला आप जो नेकी व सच्चाई के विशुद्ध खोजक रहे हैं, मुझ में उस पर्वत जैसा |

चेहरा तलाशने की आशा क्यों करते हैं?” कवि उदासी से बोला और उसकी आँखें आँसुओं से गीली हो गई थीं। उसी प्रकार से अर्नेस्ट की आँखें भी गीली हो गई थीं। सूर्यास्त के समय, जैसे कि लम्बे समय से उसकी आदत थी, अर्नेस्ट को अपने पड़ोसियों के समूह को खुली हवा में सम्बोधित करना था। वह और कवि साथ-साथ सभा-स्थल हाथ में हाथ लिये गये। वहाँ से विशाल प्रस्तर चेहरे को देखा जा सकता था।

अर्नेस्ट ने अपने श्रोतागण पर जानी-पहचानी नजर डाली। उसने उसके दिल व दिमाग में जो कुछ था उसे लोगों को बताना आरम्भ किया। उसके शब्दों में शक्ति थी, क्योंकि वे उसके विचारों से सहमत थे और उसके विचारों में यथार्थ व गहरापन था, क्योंकि वे उस जीवन से मेल खाते थे जो वह हमेशा जीता था।

ये केवल श्वास (शब्द) नहीं थे जो धर्मोपदेशक बोलता था; वे जीवन के शब्द थे। एक शुभ कर्मों व नि:स्वार्थ प्रेम का जीवन जो उनमें द्रवित हो गया था। कवि ने, जैसे ही सुना, अनुभूति की कि अर्नेस्ट का जीवन व चरित्र उसकी अब तक की काव्य-रचना से अधिक श्रेष्ठ राग की कविता थी।

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उसकी आँखें आँसुओं से भर गईं और उसने स्वयं से कहा कि कभी भी इतना योग्य मनीषी नहीं हुआ था जितना कि यह मदुल, मधुर व विचारशील चेहरा जो अपने फैले हुए श्वेत बालों के यश के साथ था। दूरी पर, किन्तु स्पष्ट दृष्टिगोचर होते हुए, सूर्यास्त की स्वर्णिम रोशनी में ऊपर ऊँचे, विशाल प्रस्तर चेहरा अपने चारों ओर श्वेत कोहरे के साथ, अर्नेस्ट की भौंहों के चारों ओर के श्वेत बालों के जैसे, प्रकट हुआ।

ठीक उस ही क्षण, अर्नेस्ट के चेहरे ने इतनी भव्य अभिव्यक्ति ले ली कि कवि ने भावुक होकर अपने हाथ ऊपर उठाये और चिल्लाया। “देखो! देखो! अर्नेस्ट स्वयं विशाल प्रस्तर चेहरे का प्रतिरूप है।” फिर सभी लोगों ने देखा, और पाया कि कवि ने जो कहा था वह सत्य था। भविष्यवाणी पूर्ण हो गई थी। किन्तु अर्नेस्ट ने, जो उसे कहना था, को समाप्त कर, कवि का हाथ थामा, और धीरे-धीरे घर की ओर चलने लगा, अभी भी यह आशा करते हुए कि उससे अधिक बुद्धिमान व श्रेष्ठ व्यक्ति शीघ्र ही प्रकट होगा, जिसका चेहरा विशाल प्रस्तर चेहरे के सादृश्य होगा।

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