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Chapter 11 समवायो हि दुर्जयः

पाठ-परिचय – प्रस्तुत पाठ में एक रोचक कथा के माध्यम से संगठन (समूह) के महत्त्व को बतलाते हुए कहा गया है कि संगठन (एकता) में रहने से छोटे-छोटे जीव भी विशालकाय हाथी को परास्त कर देते हैं। वास्तव में एकता में ही ताकत होती है। 

पाठ के गद्यांशों का हिन्दी-अनुवाद एवं पठितावबोधनम् – 

1. पुरा एकस्मिन् वृक्षे एका ……………………………. किमर्थं विलपसि?” इति। 

हिन्दी अनुवाद – पुराने समय में एक वृक्ष पर एक चिड़िया रहती थी। समयानुसार उसके सन्तान उत्पन्न हुई। एक बार किसी मदमस्त हाथी ने उस वृक्ष के नीचे आकर उसकी शाखा को सूंड से तोड़ दिया। चिड़िया का घोंसला धरती पर गिर पड़ा। उससे उसके अण्डे नष्ट हो गए। इसके बाद वह चिड़िया विलाप करने लगी। उसका विलाप सुनकर काष्ठकूट नामक पक्षी ने दुःखपूर्वक उससे पूछा- “हे भद्रे ! किसलिए विलाप कर रही हो?” पठितावबोधनम्

निर्देश: – उपर्युक्तं गद्यांशं पठित्वा एतदाधारितप्रश्नानाम् उत्तराणि यथानिर्देशं लिखतप्रश्ना :
(क) वृक्षस्य शाखां गजः केन अत्रोटयत्? (एकपदेन उत्तरत) 
(ख) कस्याः नीडं भुवि अपतत्? (एकपदेन उत्तरत) 
(ग) चटकायाः विलापं श्रुत्वा कः दुःखेन ताम् अपृच्छत्? (पूर्णवाक्येन उत्तरत) 
(घ) ‘प्रतिवसति स्म’ इति क्रियायाः गद्यांशे कर्तृपदं किम् अस्ति?
(ङ) ‘पक्षी’ इत्यर्थे गद्यांशे किं पदं प्रयुक्तम्? 
उत्तराणि : 
(क) शुण्डेन।
(ख) चटकायाः। 
(ग) चटकायाः विलापं श्रुत्वा काष्ठकूटः नाम खगः दुःखेन ताम् अपृच्छत्। 
(घ) चटका।
(ङ) खगः।

2. चटकावदत-“दष्टेनैकेन गजेन …………………………………. सर्वं वृत्तान्तं न्यवेदयताम्। 

हिन्दी अनुवाद – चिड़िया बोली-“एक दुष्ट हाथी ने मेरे बच्चों को नष्ट कर दिया है। उस हाथी की मृत्यु से ही मेरा दु:ख दूर होगा।” इसके बाद काष्ठकूट उस चिड़िया को वीणारवा नामक मक्खी के पास ले गया। उन दोनों की बात सुनकर मक्खी बोली-“मेरा भी मित्र मेंढक मेघनाद है। शीघ्र ही उसके पास जाकर यथोचित करेंगे।” तब उन दोनों ने मक्खी के साथ जाकर मेघनाद के सामने सम्पूर्ण वृत्तान्त निवेदन किया। 

पठितावबोधनम्प्रश्ना :
(क) मक्षिकाया: किन्नाम आसीत्? (एकपदेन उत्तरत) 
(ख) मण्डूकस्य नाम किम् आसीत्? (एकपदेन उत्तरत) 
(ग) चटकायाः सन्तति: केन नाशिता? (पूर्णवाक्येन उत्तर) 
(घ) ‘मक्षिकया सह गत्वा’- अत्र रेखातिपदे का विभक्तिः प्रयुक्ता?
(ङ) ‘समक्षम्’ इत्यर्थे गद्यांशे किं पदम् अस्ति? 
उत्तराणि : 
(क) वीणारवा।
(ख)मेघनादः। 
(ग) चटकाया सन्ततिः दुष्टेनैकेन गजेन नाशिता। 
(घ) तृतीया।
(ङ) पुरः।

3. मेघनादः अवदत्-“यथाहं …………………………………………… गजः अन्धः भविष्यति।” 

हिन्दी अनुवाद – मेघनाद बोला-जैसा मैं कहता हूँ वैसा ही तुम दोनों करो। मक्खी! पहले तुम दोपहर में उस हाथी के कान में आवाज करना, जिससे वह नेत्र बन्द करके रुक जाएगा। तब काष्ठकूट चोंच से उसकी दोनों आँखों को फोड़ देगा। इस प्रकार वह हाथी अन्धा हो जायेगा। 

पठितावबोधनम्प्रश्नाः
(क) गजस्य कर्णे शब्दं कः करिष्यति? (एकपदेन उत्तरत) 
(ख) क: नयने निमील्य स्थास्यति? (एकपदेन उत्तरत) 
(ग) काष्ठकूटः चञ्च्या कस्य नयने स्फोटयिष्यति? (पूर्णवाक्येन उत्तरत) 
(घ) ‘स्फोटयिष्यति’ इति क्रियायाः कर्तृपदं गद्यांशे किमस्ति?
(ङ) ‘नेत्रे’ इति पदस्य गद्यांशे पर्यायपदं किं प्रयुक्तम्? 
उत्तराणि : 
(क) मक्षिका।
(ख) गजः। 
(ग) काष्ठकूट: चञ्च्या गजस्य नयने स्फोटयिष्यति। 
(घ) काष्ठकूटः।
(ङ) नयने।

4. “तृषार्तः सः जलाशय. ………………………………. समवायो हि दुर्जयः। 

हिन्दी अनुवाद – प्यास से पीड़ित वह तालाब पर जायेगा। रास्ते में बहुत बड़ा गड्ढा है। उसके पास मैं बैठ जाऊँगा और आवाज करूँगा। मेरी आवाज से उस गड्ढे को तालाब मानकर वह उसी गड्ढे में गिर जाएगा और मर जाएगा। इसके बाद वैसा ही करने पर वह हाथी दोपहर में मेंढक की आवाज का अनुसरण करके उस बहुत बड़े गड्ढे के अन्दर गिर गया और मर गया। और जैसा कि कहा भी गया है-“अनेक निर्बलों के समूह को भी जीतना अत्यन्त कठिन होता है।” 

पठितावबोधनम्प्रश्ना :
(क) बहूनामप्यसाराणां कः दुर्जयः? (एकपदेन उत्तरत) 
(ख) महान् गर्तः कुत्र अस्ति? (एकपदेन उत्तरत) 
(ग) गजः केन प्रकारेण मृतः? (पूर्णवाक्येन उत्तरत) 
(घ) ‘तृषार्तः’ इति कर्तृपदस्य गद्यांशे क्रियापदं किम् अस्ति?
(क) ‘महान्’ इति विशेषणस्य गद्यांशे विशेष्यपदं किम्? 
उत्तराणि : 
(क) समवायः।
(ग) गजः मण्डूकस्य शब्दम् अनुसृत्य महतः गर्तस्य अन्तः पतितः मृतः च। 
(घ) गमिष्यति।
(ङ) गर्तः।
(ख) मार्गे।

पाठ के कठिन-शब्दार्थ : 

  • पुरा = पहले, पुराने समय में। 
  • शुण्डेन = सूंड से।
  • नीडम् = घोंसले को। 
  • विशीर्णानि = नष्ट हो गए। 
  • तमुपेत्य (तम् + उपेत्य) = उसके पास जाकर। 
  • मध्याह्ने = दोपहर में। 
  • निमील्य = बन्द करके। 
  • स्थास्यति = रुक जाएगा। 
  • स्फोटयिष्यति = फोड़ देगा। 
  • तृषार्तः (तृषा + आर्तः) = प्यास से पीड़ित। 
  • गर्तः = गड्ढा। 
  • तथा कृते = वैसा करने पर। 
  • अनुसृत्य = अनुसरण करके। 
  • पतितः = गिर गया। 
  • मृतः = मर गया। 
  • चोक्ताम् (च + उक्तम्) = और कहा गया है। 
  • दुर्जयः = कठिनता से जीतने योग्य। 
  • बहूनामप्यसाराणाम् (बहुनाम् + अपि + असाराणाम्) = अनेक निर्बलों का।
  • समवायः = समूह, संगठन।
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