Chapter 14 सविनय अवज्ञा आन्दोलन तथा भारत छोड़ो आन्दोलन (अनुभाग – एक)

विरतृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
सविनय अवज्ञा आन्दोलन के क्या कारण थे ? उसके परिणामों पर प्रकाश डालिए। [2010, 11]
          या
सविनय अवज्ञा आन्दोलन किन परिस्थितियों में प्रारम्भ किया गया ? इसका क्या प्रभाव पड़ा ? [2010]
          या
सविनय अवज्ञा आन्दोलन का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करें। [2018]
उत्तर :
सविनय अवज्ञा आन्दोलन का अर्थ है–विनम्रतापूर्वक आज्ञा या कानून की अवमानना करना। मार्च, 1930 ई० में गांधी जी ने यह आन्दोलन चलाया। इस आन्दोलन में गुजरात में स्थित डाण्डी नामक स्थान से समुद्र तट तक उन्होंने पैदल यात्रा की, जिसमें हजारों नर-नारियों ने उनका साथ दिया। वहाँ उन्होंने स्वयं नमक बनाकर नमक कानून तोड़ा। शीघ्र ही हजारों लोगों तथा राष्ट्रीय नेताओं को जेल में डाल दिया गया। सविनय अवज्ञा आन्दोलन निम्नलिखित परिस्थितियों में बाध्य होकर आरम्भ किया गया था –

  1. अंग्रेजों द्वारा पारित नमक कानून के कारण भारत की निर्धन जनता पर बुरा प्रभाव पड़ा था; अत: उनमें अंग्रेजों के इस अन्यायपूर्ण कानून के विरुद्ध भारी रोष था।
  2. साइमन कमीशने में भारतीयों को प्रतिनिधित्व न मिलने के कारण जनता में रोष व्याप्त था।
  3. अंग्रेजों ने नेहरू रिपोर्ट के तहत भारतीयों को डोमिनियन स्तर देना अस्वीकार कर दिया था।
  4. बारदोली के किसान-आन्दोलन’ की सफलता ने गांधी जी को अंग्रेजों के विरुद्ध आन्दोलन चलाने को प्रोत्साहित किया।

आन्दोलनको प्रारम्भ(सन् 1930-31 ई०) – सविनय अवज्ञा आन्दोलन गांधी जी की डाण्डी-यात्रा से आरम्भ हुआ। उन्होंने 12 मार्च, 1930 ई० को पैदल यात्रा आरम्भ की और 6 अप्रैल, 1930 ई० को डाण्डी के निकट समुद्र तट पर पहुँचे। वहाँ उन्होंने समुद्र के पानी से नमक बनाया और नमक कानून भंग किया। वहीं से यह आन्दोलन सारे देश में फैल गया। अनेक स्थानों पर लोगों ने सरकारी कानूनों का उल्लंघन किया। सरकार ने इस आन्दोलन को दबाने के लिए दमन-चक्र आरम्भ कर दिया। गांधी जी सहित अनेक आन्दोलनकारियों को जेलों में बन्द कर दिया गया, परन्तु आन्दोलन की गति में कोई अन्तर न आया। इसी बीच गांधी जी और तत्कालीन वायसराय में एक समझौता हुआ। समझौते के अनुसार गांधी जी ने दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लेना तथा आन्दोलन बन्द करना स्वीकार कर लिया। इस तरह सन् 1931 ई० में सविनय अवज्ञा आन्दोलन कुछ समय के लिए रुक गया।

आन्दोलन की प्रगति (सन् 1930-33 ई०) तथा अन्त – सन् 1931 ई० में लन्दन में दूसरा गोलमेज सम्मेलन बुलाया गया। इसमें कांग्रेस की ओर से गांधी जी ने भाग लिया, परन्तु इस सम्मेलन में भी भारतीय प्रशासन के लिए उचित हल न निकल सका। गांधी जी निराश होकर भारत लौट आये और उन्होंने अपना आन्दोलन फिर से आरम्भ कर दिया। सरकार ने आन्दोलन के दमन के लिए आन्दोलनकारियों पर फिर से अत्याचार करने आरम्भ कर दिये। सरकार के इन अत्याचारों से आन्दोलन की गति कुछ धीमी पड़ गयी। कांग्रेस ने 1933 ई० में इस आन्दोलन को बन्द कर दिया।

परिणाम / प्रभाव

इस आन्दोलन के निम्नलिखित परिणाम/प्रभाव थे –

  1. इस आन्दोलन में पहली बार बहुत बड़ी संख्या में भारतीयों ने भाग लिया।
  2. इस आन्दोलन में मजदूर, किसानों, महिलाओं से लेकर उच्चवर्गीय लोग तक सम्मिलित थे।
  3. सरकारी अत्याचारों के बावजूद लोगों ने अहिंसा का रास्ता नहीं छोड़ा, जिससे भारतीयों में आत्म-बल की वृद्धि हुई।
  4. इस आन्दोलन ने कांग्रेस की कमजोरियों को भी स्पष्ट कर दिया। कांग्रेस के पास भविष्य के लिए आर्थिक-सामाजिक कार्यक्रम न होने के कारण वह भारतीय जनता में व्याप्त रोष का पूर्णतया उपयोग न कर सकी।

प्रश्न 2.
भारत छोड़ो आन्दोलन के कारण एवं परिणाम पर विस्तृत टिप्पणी लिखिए।
          या
कांग्रेस ने ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ क्यों प्रारम्भ किया ? इसकी असफलता के क्या कारण थे?
          या
भारत छोड़ो आन्दोलन के तीन कारण लिखिए। ब्रिटिश सरकार की इस पर क्या प्रतिक्रिया थी ? क्या आपके मत में यह असफल रहा ? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दीजिए। [2013]
          या
भारत छोड़ो आन्दोलन क्या था ? इसका क्या प्रभाव पड़ा ? (2013)
          या
भारत छोड़ो आन्दोलन की असफलता के दो प्रमुख कारणों का उल्लेख कीजिए [2016]
          या
भारत छोड़ो आन्दोलन किसने चलाया ? इसके कोई दो कारण बताइए। [2016]
          या
‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ के तीन प्रमुख बिन्दुओं को इंगित कीजिए। [2017]
          या
भारत छोड़ो आन्दोलन का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करें। [2018]
उत्तर :
मार्च, 1942 ई० में सर स्टेफर्ड क्रिप्स कुछ प्रस्तावों के साथ भारत आये। प्रस्ताव के अनुसार, सुरक्षा के अतिरिक्त भारतीयों को भारत सरकार के सभी विभाग हस्तान्तरित करने की बात कही गयी थी। क्रिप्स का प्रस्ताव स्वीकार करो अथवा छोड़ दो।’ की भावना पर आधारित था। इसे भारतीयों ने स्वीकार नहीं किया। अन्ततः अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने 8 अगस्त, 1942 को ‘भारत छोड़ो’ वाला प्रसिद्ध प्रस्ताव स्वीकार कर लिया तथा आन्दोलन की बागडोर गांधी जी को सौंप दी। भारत छोड़ो आन्दोलन महात्मा गांधी द्वारा चलाया गया था।

भारत छोड़ो आन्दोलन के कारण

भारत छोड़ो आन्दोलन को चलाने के निम्नलिखित कारण थे –

1. पहला कारण यह था कि जापान के आक्रमण का भय बढ़ रहा था। गांधी जी चाहते थे कि भारत को उस आक्रमण से बचाया जाए। यह तभी हो सकता था जब अंग्रेज लोग भारत को छोड़ देते।

2. दूसरा कारण यह था कि अंग्रेजों की हर जगह हार हो रही थी। उनके हाथों से सिंगापुर और बर्मा निकल 1गये। गांधी जी का यह विचार था कि यदि अंग्रेजों ने हिन्दुस्तान को न छोड़ा तो इस देश के लोगों की भी वही दुर्दशा होगी जो बर्मा और मलाया के लोगों की हुई थी। गांधी जी का विचार था कि यदि अंग्रेज लोग भारत छोड़ जाएँ तो जापान भारत पर आक्रमण नहीं करेगा।

3. आन्दोलन को आरम्भ करने का एक और कारण यह था कि हिटलर और उसके साथियों का प्रोपेगण्डा बढ़ रहा था और उसका प्रभाव भारतीयों पर भी पड़ रहा था। सुभाषचन्द्र बोस स्वयं बर्लिन से हिन्दुस्तानी भाषा में ब्रॉडकास्ट कर रहे थे। ऐसा महसूस किया गया कि भारत की रक्षा के लिए उत्साह पैदा किया जाए और ऐसा तभी हो सकता था जब देश में एक व्यापक आन्दोलन हो।

4. बर्मा (म्यांमार) छोड़ने के समय हिन्दुस्तान के लोगों से अच्छा व्यवहार नहीं किया गया। उनको भारत लौटते समय अनगिनत कष्ट सहने पड़े। इसका परिणाम यह हुआ कि भारत में अंग्रेजों के विरुद्ध बहुत रोष उत्पन्न हो गया। इस वातावरण ने भी गांधी जी को आन्दोलन चलाने के लिए विवश किया।

5. द्वितीय विश्वयुद्ध के दिनों में अंग्रेजों ने भारत में सब-कुछ जलाने की नीति को अपनाया। इस नीति से बहुत-से हिन्दुस्तानियों की हानि हुई। कई लोगों की जमीनें नष्ट हो गयीं और उनको पर्याप्त मुआवजा न दिया गया। कइयों की रोटी छिन गयी, चीजों की कीमतें बढ़ गयीं, देश में असन्तोष बढ़ गया। ऐसी स्थिति से लाभ उठाने के लिए गांधी जी ने अपना आन्दोलन आरम्भ किया।

भारत छोड़ो आन्दोलन के परिणाम / प्रभाव
अथवा
असफलता के कारण

भारत छोड़ो आन्दोलन के अग्रलिखित परिणाम/प्रभाव हुए –

1. आन्दोलन का तात्कालिक परिणाम यह था कि ब्रिटिश सरकार ने महात्मा गांधी और कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सभी सदस्यों को जेल भेज दिया। कांग्रेस संस्था को कानून के विरुद्ध घोषित कर दिया गया। उसके कार्यालय पर पुलिस ने कब्जा कर लिया। यह नीति सरकार ने कांग्रेस को कुचलने के लिए अपनायी।

2. साधारण जनता हाथ-पर-हाथ रखकर बैठी न रही, उसने भी सरकार के विरुद्ध विद्रोह आरम्भ कर दिया। गांधी जी के मन में यह विचार ही न था कि सरकार उन्हें अकस्मात् बन्दी बना लेगी। इसका परिणाम यह हुआ कि गांधी जी और कांग्रेस के अन्य नेताओं के गिरफ्तार होने के बाद आन्दोलन का पथ-प्रदर्शन करने के लिए कोई नेता न रहा। जैसा लोगों के मन में आया उन्होंने वैसा ही किया।

3. जब सरकार ने निर्दोष पुरुषों, स्त्रियों तथा बच्चों को गोली से उड़ा दिया, तब लोगों ने भी हिंसा की नीति अपनायी। जहाँ कहीं विदेशी मिले, उनको मार डाला गया। बहुत कठिनाइयों के बाद ब्रिटिश सरकार अपनी सत्ता को देश में फिर से स्थापित करने में सफल हुई।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
गांधी-इरविन समझौते के मुख्य चार बिन्दुओं पर प्रकाश डालिए।
उतर :
गांधी-इरविन समझौते (दिल्ली पैक्ट) के चार मुख्य बिन्दु निम्नलिखित हैं –

  1. जिन राजनीतिक बन्दियों पर हिंसा के आरोप हैं, उन्हें छोड़कर शेष को रिहा कर दिया जाएगा।
  2. भारतीय लोग समुद्र के किनारे नमक बना सकते हैं।
  3. भारतीय लोग शराब व विदेशी वस्त्रों की दुकान पर कानून की सीमा के भीतर धरना दे सकते हैं।
  4. सरकारी नौकरी से त्याग-पत्र देने वालों को सरकार वापस लेने में उदारता दिखाएगी।

प्रश्न 2.
स्वराज पार्टी का गठन क्यों किया गया था ?
उत्तर :
महात्मा गांधी को बन्दी बनाये जाने से जनता का उत्साह क्षीण पड़ गया। उधर कौन्सिल में प्रवेश के प्रश्न को लेकर कांग्रेस दो दलों में विभक्त हो गयी। एक दल का कहना था कि कौन्सिल में प्रवेश कर सरकार के कार्यों में बाधा उत्पन्न करनी चाहिए। यह दल परिवर्तनवादी कहलाया। दूसरा दल अपरिवर्तनवादी कहलाया, जिसका कहना था कि कौन्सिल का परित्याग कर दिया जाए। परिवर्तनवादियों जिनमें मोतीलाल नेहरू तथा चितरंजनदास प्रमुख थे, ने एक नयी पार्टी ‘स्वराज पार्टी’ का निर्माण किया। स्वराज पार्टी को विधानसभाओं में बहुत स्थान मिले। इस पार्टी ने सरकार के कार्यों में विघ्न डालने प्रारम्भ किये और अपने लक्ष्य में आंशिक सफलता प्राप्त की, किन्तु सन् 1925 ई० में इसके नेता सी०आर० दास की मृत्यु से इस पार्टी का प्रभाव क्षीण हो गया।

प्रश्न 3.
1930-1942 ई० के बीच की प्रमुख घटनाओं को एक चार्ट द्वारा तिथिक्रमबद्ध कीजिए।
उत्तर :
1930-1942 ई० के मध्य घटित हुई प्रमुख घटनाएँ निम्नलिखित हैं –

  1. मार्च, 1930 : दाण्डी मार्च, सविनय अवज्ञा आन्दोलन की शुरुआत।
  2. मार्च, 1931 : सविनय अवज्ञा आन्दोलन वापस लिया गया।
  3. दिसम्बर, 1931 : दूसरा गोलमेज सम्मेलन, सविनय अवज्ञा आन्दोलन पुनः शुरू।
  4. मार्च, 1942 : सर स्टेफर्ड क्रिप्स का भारत आगमन।
  5. अगस्त, 1942 : भारत छोड़ो आन्दोलन का प्रारम्भ।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
गांधी जी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन की शुरुआत किस कानून को तोड़कर प्रारम्भ की ?
उतर :
गांधी जी ने ‘नमक कानून’ को तोड़कर सविनय अवज्ञा आन्दोलन की शुरुआत की।

प्रश्न 2.
स्वराज पार्टी का गठन किसने किया था ? [2011]
उत्तर :
स्वराज पार्टी का गठन मोतीलाल नेहरू तथा चितरंजन दास ने किया था।

प्रश्न 3.
प्रथम गोलमेज सम्मेलन कहाँ पर आयोजित किया गया ?
उत्तर :
प्रथम गोलमेज सम्मेलन लन्दन में आयोजित किया गया।

प्रश्न 4.
भारत छोड़ो आन्दोलन में गांधी जी ने कौन-सा नारा दिया ? [2017]
उत्तर :
भारत छोड़ो आन्दोलन में गांधी जी ने “करो या मरो’ का नारा दिया।

प्रश्न 5.
गांधी जी द्वारा चलाये गये किन्हीं दो आन्दोलनों के नाम लिखिए। सविनय अवज्ञा आन्दोलन आरम्भ होने के क्या कारण थे? कोई दो कारण लिखिए। [2012]
          या
महात्मा गांधी द्वारा प्रारम्भ किये गये किन्हीं दो आन्दोलनों के नाम लिखिए। (2015)
उत्तर :
गांधी जी द्वारा चलाये गये दो आन्दोलनों के नाम हैं –

  1. सविनय अवज्ञा आन्दोलन तथा
  2. भारत छोड़ो आन्दोलन

सविनय अवज्ञा आन्दोलन प्रारम्भ होने के दो कारण निम्नलिखित हैं –

  1. साइमन कमीशन में भारतीयों को प्रतिनिधित्व न मिलने के कारण रोष।
  2. अंग्रेजों ने नेहरू रिपोर्ट के तहत भारतीयों को डोमिनियन स्तर देना अस्वीकार किया।

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. साइमन कमीशन कब भारत पहुँचा ? [2011]

(क) 1923 ई० में
(ख) 1928 ई० में
(ग) 1929 ई० में
(घ) 1930 ई० में

2. सविनय अवज्ञा आन्दोलन का मुख्य केन्द्र कहाँ था ? [2017]

(क) साबरमती आश्रम
(ख) पोरबन्दर
(ग) खेड़ा
(घ) सूरत

3. गांधी-इरविन समझौता कब हुआ ?

(क) 1932 ई० में
(ख) 1930 ई० में
(ग) 1931 ई० में
(घ) 1928 ई० में

4. भारत छोड़ो आन्दोलन का प्रस्ताव किस स्थान पर स्वीकार किया गया ?
          या
कांग्रेस ने सन् 1942 में ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ प्रस्ताव कहाँ पारित किया था ? (2013)

(क) मुम्बई में
(ख) दिल्ली में
(ग) गुजरात में
(घ) वाराणसी में

5. साइमन कमीशन का विरोध करते हुए निम्नलिखित में से कौन पुलिस की लाठियों के प्रहार से शहीद हुए ? [2011]

(क) मोतीलाल नेहरू
(ख) लाला लाजपत राय
(ग) गोपालकृष्ण गोखले
(घ) देशबन्धु चितरंजन दास

6. गांधी जी ने डाण्डी यात्रा की थी [2011]

(क) रोलेट ऐक्ट के विरोध में
(ख) क्रिप्स प्रस्ताव के विरोध में
(ग) उत्तरदायी शासन की स्थापना हेतु
(घ) नमक कानून तोड़ने हेतु

7. गांधी जी के अतिरिक्त किसका जन्मदिन दो अक्टूबर को मनाया जाता है? [2013]

(क) इन्दिरा गांधी
(ख) लाल बहादुर शास्त्री
(ग) गोविन्द वल्लभ पन्त
(घ) मोरारजी देसाई

8. गांधी जी ने नमक सत्याग्रह कहाँ प्रारम्भ किया था? (2017)

(क) पोरबन्दर
(ख) डाण्डी
(ग) वर्धा
(घ) चम्पारन

उत्तरमाला

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