Chapter-3 Deep Water

By-William O. Douglas

(Lesson with Vocabulary & Hindi Translation)

It had happened, when I was ten or eleven years old. I had decided, to learn to swim. There was a pool at the Y.M.C.A. in Yakima, that offered exactly the opportunity. The Yakima River was treacherous. Mother continually warned against it, and kept fresh in my mind, the details of each drowning in the river. But the Y.M.C.A. pool was safe. It was only two or three feet deep at the shallow end; and while it was nine feet deep at the other, the drop was gradual. I got a pair of water wings, and went to the pool. I hated to walk naked into it, and show my skinny legs. But I subdued my pride, and did it.

From the beginning, however, I had an aversion to the water when I was in it. This started when I was three or four years old and father took me to the beach in California. He and I stood together in the surf. I hung on to him, yet the waves knocked me down and swept over me. I was buried in water. My breath was gone. I was frightened. Father laughed, but there was terror in my heart at the overpowering force of the waves.

My introduction to the Y.M.CA. swimming pool revived unpleasant memories and stirred childish fears. But in a little while I gathered confidence. I paddled with my new water wings, watching the other boys and trying to learn by aping them. I did these two or three times on different days and was just beginning to feel at ease in the water when the misadventure happened.

I went to the pool when no one else was there. The place was quiet. The water was still, and the tiled bottom was as white and clean as a bathtub. I was timid about going in alone, so I sat on the side of the pool to wait for others.

कठिन शब्दार्थ : Treacherous जोखिमभरी। drowning डूब जाने की घटना। gradual धीरे-धीरे। water wings तैरने के पंख। skinny पतली-दुबली। subdued काबू पा लिया। aversion नफरत । surf लहरों का झाग। hung on पकड़े रहा। terror आतंक। overpowering शक्तिशाली। revived पुनर्जागृत कर दिया। stirred जगा दिए। paddled बतख की भाँति तैरा। aping नकल करके। at ease निश्चिन्त। misadventure दुर्घटना । timid डरा हुआ।

हिन्दी अनुवाद- ऐसा तब हुआ जब मैं 10 अथवा 11 वर्ष की उम्र का था। मैंने तैरना सीखने का निश्चय किया था। याकिमा में वाइ.एम.सी.ए. में एक तरणताल था जो ठीक ऐसा करने का अवसर प्रदान करता था। याकिमा नदी जोखिमभरी थी। माँ लगातार इस नदी के विरुद्ध चेताती रहती थी तथा मेरे दिमाग में इस नदी में डूब जाने की प्रत्येक घटना के विवरण को ताजा बनाये रखती थी। लेकिन वाइ.एम.सी.ए. ताल सुरक्षित था। यह उथले सिर की तरफ केवल 2-3 फीट गहरा था और यद्यपि दूसरे सिर पर यह 9 फीट गहरा था तथापि ढलान । मैंने पानी के ऊपर तैरने के पंख लिए और ताल पर चला गया। मुझे इस ताल में नंगे वदन चलकर जाने तथा अपनी पतली-दुबली टाँगों को प्रदर्शित करने से नफरत थी। लेकिन मैंने अपने अभिमान पर काबू पा लिया और ऐसा कर गया।

फिर भी, प्रारम्भ से ही जब मैं पानी में होता था, मुझे इससे डर लगता था। ऐसा तब शुरू हुआ था जब मैं 3-4 साल का था और पिता मुझे कैलिफोर्निया में समुद्र के किनारे ले गये थे। वह एवं मैं लहरों के झाग में साथ खड़े थे। मैं उन्हें पकड़े हुए था फिर भी लहरों ने मुझे धकेल कर गिरा दिया और मेरे ऊपर से चली गयीं। मैं पानी में डूब गया। मेरी सांस चली गयी। मैं भयभीत हो गया। पिता हँसे, लेकिन मेरे दिल में लहरों की जबरदस्त ताकत का खौफ (आतंक) था।

वाइ.एम.सी.ए. के तरणताल में जाने से मेरी बुरी यादें पुनर्जीवित हो उठीं और बचकाना भय जाग उठे। लेकिन कुछ ही समय में मैंने आत्मविश्वास बटोर लिया। अपने नये जल-पंखों की मदद से मैं बतख की भाँति तैरने लगा, अन्य लड़कों को देखने तथा उनकी नकल करके तैरना सीखने की कोशिश करने लगा। अलग अलग दिनों में मैंने ऐसा 2-3 बार किया और मैंने पानी के भीतर थोड़ा निश्चिंत महसूस करना शुरू किया ही था कि दुर्घटना घट गयी।

मैं तालाब पर गया था जब कोई दूसरा व्यक्ति वहाँ मौजूद नहीं था। स्थान शान्त था। पानी स्थिर था तथा ताल का टाइलें लगा पेंदा उतना सफेद एवं स्वच्छ था जितना स्नान करने का टब हुआ करता है। मैं अकेला ताल – में जाने से भयभीत था। इसलिए मैं ताल के पास दूसरों का इन्तजार करने हेतु बैठ गया।

I had not been there long when in came a big bruiser of a boy, probably eighteen years old. He had thick hair on his chest. He was a beautiful physical specimen, with legs and arms that showed rippling muscles. He yelled, “Hi, Skinny! How’d you like to be ducked?”

With that he picked me up and tossed me into the deep end. I landed in a sitting position, swallowed water, and went at once to the bottom. I was frightened, but not yet frightened out of my wits. On the way down I planned: When my feet hit the bottom, I would make a big jump, come to the surface, lie flat on it, and paddle to the edge of the pool.

It seemed a long way down. Those nine feet were more like ninety, and before I touched bottom my lungs were ready to burst. But when my feet hit bottom, I summoned all my strength and made what I thought was a great spring upwards. I imagined I would bob to the surface like a cork. Instead, I came up slowly. I opened my eyes and saw nothing but water — water that had a dirty yellow tinge to it. I grew panicky. I reached up as if to grab a rope and my hands clutched only at water. I was suffocating. I tried to yell but no sound came out. Then my eyes and nose came out of the water — but not my mouth.

I flailed at the surface of the water, swallowed and choked. I tried to bring my legs up, but they hung as dead weights, paralysed and rigid. A great force was pulling me under. I screamed, but only the water heard me. I had started on the long journey back to the bottom of the pool.

I struck at the water as I went down, expending my strength as one in a nightmare fights an irresistible force. I had lost all my breath. My lungs ached; my head throbbed. I was getting dizzy. But I remembered the strategy — I would spring from the bottom of the pool and come like a cork to the surface. I would lie flat on the water, strike out with my arms, and thrash with my legs. Then I would get to the edge of the pool and be safe.

I went down, down, endlessly. I opened my eyes. Nothing but water with a yellow glow — dark water that one could not see through.

कठिन शब्दार्थ : Bruiser मुक्केबाज। specimen नमूना। rippling उभरी हुई। yelled चिल्लाया। ducked पानी में डुबाया जाना। tossed फेंक दिया। out of wits किंकर्तव्यविमूढ़ हो जाना। lungs फेफड़े। summoned जुटायी, बटोरी। spring उछाल । bob ऊपर आना। cork बोतल का ढक्कन । tinge रंग। panicky आतंकित । grab पकड़ना । clutched at को पकड़ा। suffocating दम घुट रहा। flailed जोर से पटके। choked सांस रुक गयी। paralysed शक्तिहीन। rigid कठोर। screamed चीखा। nightmare दु:स्वप्न। irresistible जिसे रोका जा न सके। ached दर्द करते थे। throbbed धड़कता था। dizzy चक्कर आना। strategy योजना। thrash जोर से मारना।

हिन्दी अनुवाद-मुझे वहाँ अधिक समय नहीं हुआ था कि एक लम्बा-तगड़ा मुक्केबाज-सा लड़का, जो करीब 18 वर्ष का था, वहाँ आया। उसकी छाती पर घने बाल थे। वह एक सुन्दर शारीरिक मॉडल (नमूना) था जिसकी टाँगों एवं भुजाओं पर उभरी हुई मांसपेशियाँ दिखाई देती थीं। उसने चिल्लाकर कहा, “अरे, पतलू ! तुम्हें पानी में डुबाया जाना कैसा लगेगा?”

ऐसा कहने के साथ ही उसने मुझे उठा लिया एवं मुझे ताल के गहराई वाले सिरे की तरफ फेंक दिया। मैं बैठी हुई मुद्रा में गिरा, पानी निगल गया और तुरन्त पेंदे पर जा पहुंचा। मैं डरा हुआ था किन्तु इतना भी डरा हुआ नहीं था कि कुछ सोच ही न पाऊँ अथवा किंकर्तव्यविमूढ़ हो जाऊँ। गिरते हुए मैंने योजना बनाई : जब मेरे पैर ताल के पेंदे से टकरायेंगे तो मैं बड़ी छलाँग लगाऊँगा, सतह पर आ पहुँचूँगा तथा इस पर सपाट लेट जाऊंगा और बतख की भाति तैरता हुआ ताल के किनारे पहुच जाऊंगा।

नीचे जाने में काफी देर लगी प्रतीत हुई। वे नौ फीट नब्बे फीट जैसे अधिक प्रतीत हुए और मेरे पैर पेंदे को छूते उससे पूर्व ही मेरे फेफड़े फटने को तैयार हो गये। लेकिन जब मेरे पैर पेंदे से टकराये तो मैंने अपनी सारी ताकत बटोरी और जैसा मैंने सोचा था मैंने ऊपर की ओर बड़ी छलाँग लगाई। मैंने कल्पना की थी कि मैं बोतल के ढक्कन की भाँति तुरन्त सतह पर आ पहुँचूँगा। बजाय इसके, मैं धीरे-धीरे ऊपर आया। मैंने आँखें खोली और पानी के अतिरिक्त और कछ न देख सका। पानी जो भददा-सा पीलापन लिए हा हो गया। मैंने हाथों को ऊपर की ओर किया जैसे कि मुझे कोई रस्सी पकड़नी हो और मेरे हाथ केवल पानी को ही पकड़ सके। मेरा दम घुट रहा था। मैंने चिल्लाने की कोशिश की लेकिन कोई आवाज नहीं आयी। फिर मेरी आँखें एवं नाक पानी से बाहर आये लेकिन मेरा मुँह नहीं।

मैंने पानी की सतह पर हाथ मारे, पानी निगल गया और सांस अवरुद्ध हो गयी। मैंने अपनी टाँगों को ऊपर लाने की कोशिश की लेकिन वे निर्जीव भार के समान लटक गयीं, गतिहीन एवं कठोर। मुझे एक बडी ताकत नीचे की ओर खींच रही थी। मैं चिल्लाया किन्तु केवल पानी ने मेरी चीख सुनी। मैं ताल के पेंदे की ओर लम्बी यात्रा पर वापस रवाना हो चुका था।..

मैंने पानी को पीटा, डूबते हुए, अपनी शक्ति इस तरह खर्च करते हुए जैसे कोई व्यक्ति दुःस्वप्न में किसी न रोके जा सकने वाली ताकत से संघर्ष करता है। मैंने अपनी समस्त सांस खो दी थी। मेरे फेफड़े दर्द करते थे, मेरा सिर धड़कता था। मैं चक्कर खा रहा था । लेकिन मुझे योजना याद थी.—मैं ताल के पेंदे से उछाल मारूँगा और कॉर्क की भाँति पानी की सतह पर आ जाऊँगा। मैं पानी पर सपाट लेटा रहूँगा, अपनी भुजाओं से पानी पर चोटें मारूँगा, और टाँगों को फटकारूँगा। फिर मैं तालाब के किनारे पर आ जाऊँगा, और सुरक्षित हो जाऊँगा।

मैं अनन्त रूप से नीचे गिरता गया। मैंने अपनी आँखें खोलीं। पीली चमक वाले पानी के अतिरिक्त कुछ नहीं था—.काला पानी जिसमें से होकर कोई देख नहीं सकता था।

And then sheer, stark terror seized me, terror that knows no understanding, terror that knows no control, terror that no one can understand who has not experienced it. I was shrieking under water. I was paralysed under water — stiff, rigid with fear. Even the screams in my throat were frozen. Only my heart, and the pounding in my head, said that I was still alive.

And then in the midst of the terror came a touch of reason. I must remember to jump when I hit the bottom. At last I felt the tiles under me. My toes reached out as if to grab them. I jumped with everything I had.

But the jump made no difference. The water was still around me. I looked for ropes, ladders, water wings. Nothing but water. A mass of yellow water held me. Stark terror took an even deeper hold on me, like a great charge of electricity. I shook and trembled with fright. My arms wouldn’t move. My legs wouldn’t move. I tried to call for help, to call for mother. Nothing happened.

And then, strangely, there was light. I was coming out of the awful yellow water. At least my eyes were. My nose was almost out too.

Then I started down a third time. I sucked for air and got water. The yellowish light was going out. Then all effort ceased. I relaxed. Even my legs felt limp; and a blackness swept over my brain. It wiped out fear; it wiped out terror. There was no more panic. It was quiet and peaceful. Nothing to be afraid of. This is nice… to be drowsy… to go to sleep… no need to jump… too tired to jump… it’s nice to be carried gently… to float along in space… tender arms around me… tender arms like Mother’s… now I must go to sleep…

I crossed to oblivion, and the curtain of life fell.

The next I remember I was lying on my stomach beside the pool, vomiting. The chap that threw me in was saying, “But I was only fooling.” Someone said, “The kid nearly died. Be all right now. Let’s carry him to the locker room.”

Several hours later, I walked home. I was weak and trembling. I shook and cried when I lay on my bed. I couldn’t eat that night. For days a haunting fear was in my heart. The slightest exertion upset me, making me wobbly in the knees and sick to my stomach.

I never went back to the pool. I feared water. I avoided it whenever I could.

कठिन शब्दार्थ: sheer शुद्ध | stark कठोर। seized वशीभूत कर लिया। shrieking चीख रहा। pounding धड़कन। ladders सीढ़ी। mass बड़ी मात्रा। awful भयानक। sucked for अन्दर खींचा। ceased बन्द हो गये। wiped out मिटा दिया। drowsy उनींदा, नींद में। tender मुलायम। oblivion विस्मृति की दशा । locker room कपड़े बदलने का कमरा । haunting बार-बार आने वाला। exertion थकान। wobbly कंपनशील। sick उल्टी करने जैसा।

हिन्दी अनुवाद- और फिर शुद्ध, कठोर आतंक ने मुझे जकड़ लिया, आतंक जिसमें कोई समझ-बूझ नहीं रहती, आतंक जिस पर कोई नियन्त्रण नहीं होता, आतंक जो कोई समझ नहीं सकता, जिसे स्वयं ने अनुभव न किया हो। मैं पानी के नीचे चीख रहा था। मैं पानी के नीचे शक्तिहीन एवं निष्क्रिय हो गया था भय से कठोर, अकड़ा हुआ। मेरे गले की चीखें भी जम गयी थीं। केवल मेरा हृदय तथा सिर के भीतर की धड़कन बताती थी कि, मैं अभी भी जीवित था।

और फिर आतंक के बीच तर्कपूर्ण विचार का स्पर्श हुआ। मुझे उछलने की बात याद रखनी है जब मैं ताल के पेंदे से टकराऊँ। अन्त में मैंने मेरे नीचे पेंदे की टाइलों को महसूस किया। मेरे पैरों की अंगुलियाँ पेंदे की ओर बढ़ी जैसे कि वे टाइलों को पकड़ना चाहती हों। मैं पूरे जोर के साथ उछला।

किन्तु इस उछलने से कोई अन्तर नहीं पड़ा। पानी अभी भी मेरे चारों ओर था। मैंने रस्सियों, सीढ़ियों, जल-पंखों की तलाश की। कुछ नहीं था सिवाय पानी के। पीले रंग की विशाल जल-राशि मुझे पकड़े थी। कठोर भय ने मुझ पर और कठोर पकड़ बना ली जैसे विद्युत का बड़ा आघात करता है। मैं भय से हिलने काँपने लगा। मेरी भुजाएँ नहीं हिलती थीं। मेरी टाँगें भी नहीं हिलती थीं। मैंने मदद के लिए चिल्लाना चाहा, माँ को बुलाना चाहा। कुछ नहीं हुआ।

और फिर, आश्चर्य की बात थी, रोशनी हो गयी। मैं भयानक पीले पानी से बाहर आ रहा था। कम से-कम मेरी आँखें तो बाहर आ रही थीं। मेरी नाक भी करीब-करीब बाहर निकल गयी थी।

फिर मैं तीसरी बार नीचे की ओर चला। मैंने हवा खींचनी चाही, किन्तु खींच गया पानी। पीली रोशनी गायब होने लगी।

फिर सारा प्रयास ठहर गया। मैं ढीला पड़ गया। मेरी टाँगें भी ढीली महसूस होने लगीं। और एक कालापन मेरे दिमाग पर छा गया। इसने भय को मिटा दिया; इसने आतंक को मिटा दिया। अब कोई हड़कम्प न रहा। सब शान्त हो गया। डरने को कुछ न था। यह अच्छा है” “नींद में होना नींद में चले जाना “उछलने की आवश्यकता न रहना “इतने थके होना कि उछल न पाना अच्छा है. धीरे धीरे आहिस्ता से ले जाये जाना “अन्तरिक्ष में तैरना…”मेरे चारों ओर मुलायम भुजाओं का होना..”माँ के जैसी मुलायम भुजाएँ अब मुझे नींद में जाना ही होगा।

मैं भुलावे (विस्मृति) की स्थिति में पहुँच गया, और जीवन का पर्दा गिर गया।

अगली बात जो मुझे याद है मैं पेट के बल तालाब के पास लेटा था, उल्टियाँ करता हुआ। जिस लड़के ने मझे ताल में फेंक दिया था कह रहा था, “लेकिन मैं तो केवल मजाक कर रहा था।” किसी ने कहा, “बच्चा तो मर ही गया था। अब सब ठीक हो जायेगा। चलो हम उसे कपड़े बदलने वाले कमरे में ले चलें।”

कई घण्टों बाद, मैं घर चला गया। मैं कमजोर था तथा काँप रहा था। मैं काँपता था और रोता था जब मैं अपने बिस्तर पर लेटा। मैं उस रात्रि खा-पी न सका। कई दिनों तक मेरे दिल में बार-बार छा जाने वाला भय रहा। थोड़ी-सी भी थकान मुझे परेशान कर देती थी, मेरे घुटनों को कम्पनशील कर देती थी और मुझे उल्टी आने को होती थी।

मैं ताल पर कभी वापस नहीं गया। मैं पानी से डरने लगा। मैं पानी से यथासम्भव दूर ही रहता।

A few years later when I came to know the waters of the Cascades, I wanted to get into them. And whenever I did — whether I was wading the Tieton or Bumping River or bathing in Warm Lake of the Goat Rocks — the terror that had seized me in the pool would come back. It would take possession of me completely. My legs would become paralysed. Icy horror would grab my heart.

This handicap stayed with me as the years rolled by. In canoes on Maine lakes fishing for landlocked salmon, bass fishing in New Hampshire, trout fishing on the Deschutes and Metolius in Oregon, fishing for salmon on the Columbia, at Bumping Lake in the Cascades —wherever I went, the haunting fear of the water followed me. It ruined my fishing trips; deprived me of the joy of canoeing, boating, and swimming.

I used every way I knew to overcome this fear, but it held me firmly in its grip. Finally, one October, I decided to get an instructor and learn to swim. I went to a pool and practiced five days a week, an hour each day. The instructor put a belt around me. A rope attached to the belt went through a pulley that ran on an overhead cable. He held on to the end of the rope, and we went back and forth, back and forth across the pool, hour after hour, day after day, week after week. On each trip across the pool a bit of the panic seized me. Each time the instructor relaxed his hold on the rope and I went under, some of the old terror returned and my legs froze. It was three months before the tension began to slack. Then he taught me to put my face under water and exhale, and to raise my nose and inhale. I repeated the exercise hundreds of times. Bit by bit I shed part of the panic that seized me when my head went under water.

Next, he held me at the side of the pool and had me kick with my legs. For weeks I did just that. At first my legs refused to work. But they gradually relaxed; and finally I could command them.

Thus, piece by piece, he built a swimmer. And when he had perfected each piece, he put them together into an integrated whole. In April he said, “Now you can swim. Dive off and swim the length of the pool, crawl stroke.”

I did. The instructor was finished.

कठिन शब्दार्थ : cascades जलप्रपात। wading पानी में चलना। possession अधिकार | icy बर्फ जैसा ठंडा। handicap बाधा। canoes पैडलों से चलाये जाने वाली हल्की नावें। land locked जमीन से घिरा हुआ। salmon बड़ी चमकीले चकत्तों वाली मछलियाँ। bass एक प्रकार की मछली। trout सैमन जैसी मछली। pulley घिरनी। cable मजबूत रस्सा। tension तनाव। slack ढीला पड़ना । exhale सांस बाहर फेंकना। inhale सांस अन्दर लेना। shed त्याग दिया। perfected त्रुटिरहित, पूर्ण बनाया। integrated समग्र, सम्पूर्ण। crawl stroke धीरे-धीरे तैरना।

हिन्दी अनुवाद-कुछ वर्षों बाद जब मैंने प्रपातों के जल के बारे में जाना तो मुझे उसमें प्रवेश करने की इच्छा हई। और जब कभी भी मैंने ऐसा किया, चाहे मैं टाइटन या बम्पिंग नदी में से चलकर जा रहा था, या गोट रोक्स की वार्म झील में नहा रहा था, वही भय जिसने मुझे ताल में जकड़ लिया था, वह लौट आता। वह मुझ पर पूरी तरह छा जाता। मेरी टाँगें गतिहीन हो जाती थीं। कंपकंपी पैदा करने वाला बर्फ जैसा ठंडा भय मेरे हृदय को जकड़ लेता था।

यह बाधा मेरे साथ रही ज्यों-ज्यों वर्ष बीतते चले गये। मेन झीलों में हल्की नावों से जमीन से घिरी सैमन मछलियाँ पकड़ने में, न्यू हैम्पशायर में बैस मछलियाँ पकड़ने में, ऑरेगन में डैशयुट्स एवं मैटोलियस पर ट्राउट मछलियाँ पकड़ने में, कास्केड में बम्पिंग झील पर कोलम्बिया में सैमन मछली पकड़ने में जहाँ कहीं भी मैं गया, पानी का बार-बार छा जाने वाला भय मेरा पीछा करता रहा। इस भय ने मेरी मछली पकड़ने की यात्राओं को बर्बाद कर दिया; मैं पैडल वाली हल्की नावें चलाने, नौका-विहार व तैरने के आनन्द से वंचित रहा।

मैंने प्रत्येक तरीका जिसे मैं जानता था इन भय को काबू करने हेतु काम में लिया, लेकिन यह दृढ़ता से मुझे अपनी पकड़ में जकड़े रहा। अन्त में, अक्टूबर के एक माह में मैंने एक प्रशिक्षक लेकर तैरना सीखने का निश्चय कर लिया। मैं एक ताल पर गया तथा हफ्ते में 5 दिन तथा प्रत्येक दिन एक घण्टा मैंने अभ्यास किया। प्रशिक्षक ने मेरे चारों ओर एक बेल्ट बाँधी । बेल्ट से जुड़ी रस्सी एक घिरनी में से गुजरती थी जो स्वयं एक सिर के ऊपर लगे मजबूत रस्से पर चलती थी। वह प्रशिक्षक रस्सी के सिरे को पकड़े रहता, और हम ताल के पार इधर से उधर जाते, घण्टों, दिनों तथा सप्ताहों तक। ताल के पार की प्रत्येक यात्रा के दौरान भय का एक अंश मुझे जकड़ लेता था। हर बार जब प्रशिक्षक रस्सी पर से अपनी पकड़ को ढीली करता था और मैं पानी के नीचे जाता था तो कुछ पुराना भय वापस लौट आता था और मेरी टाँगें जम जाती थीं। तनाव को ढीले पड़ने में तीन माह का समय लगा। फिर उसने मुझे पानी के नीचे चेहरा रखने एवं सांस छोड़ना तथा नाक को ऊपर उठा कर सांस भीतर लेना सिखाया। मैंने यह व्यायाम सैकड़ों बार दोहराया। थोड़ा-थोड़ा कर मैंने उस आतंक के हिस्से को त्याग दिया जो मुझे तब जकड़ लेता था जब मेरा सिर पानी के नीचे जाता था।

इसके पश्चात् वह मुझे ताल के एक ओर पकडे रहता और मुझसे लातें मारने को कहता। सप्ताहों तक मैं वैसा ही करता रहा। पहले तो मेरी टाँगों ने काम करने से इनकार किया लेकिन धीरे-धीरे वे तनावरहित हो गयीं और अन्त में मैं उन पर नियन्त्रण कर सका।

इस प्रकार एक-एक भाग करके उसने एक तैराक बना दिया। और जब उसने प्रत्येक भाग को त्रुटिरहित कर दिया, उसने उन्हें इकट्ठा कर सम्पूर्ण रूप प्रदान कर दिया। अप्रेल में उसने कहा, “अब तुम तैर सकते हो। डुबकी मारो तथा क्रोल स्ट्रोक से तैर कर ताल की पूरी लम्बाई पार करो।”

मैंने कर ली। प्रशिक्षक का कार्य पूरा

But I was not finished. I still wondered if I would be terror-stricken when I was alone in the pool. I tried it. I swam the length up and down. Tiny vestiges of the old terror would return. But now I could frown and say to that terror, “Trying to scare me, eh? Well, here’s to you! Look!” And off I’d go for another length of the pool.

This went on until July. But I was still not satisfied. I was not sure that all the terror had left. So I went to Lake Wentworth in New Hampshire, dived off a dock at Triggs Island, and swam two miles across the lake to Stamp Act Island. I swam the crawl, breast stroke, side stroke, and back stroke. Only once did the terror return. When I was in the middle of the lake, I put my face under and saw nothing but bottomless water. The old sensation returned in miniature. I laughed and said, “Well, Mr Terror, what do you think you can do to me?” It fled and I swam on.

Yet I had residual doubts. At my first opportunity I hurried west, went up the Tieton to Conrad Meadows, up the Conrad Creek Trail to Meade Glacier, and camped in the high meadow by the side of Warm Lake. The next morning, I stripped, dived into the lake, and swam across to the other shore and back — just as Doug Corpron used to do. I shouted with joy, and Gilbert Peak returned the echo. I had conquered my fear of water.

The experience had a deep meaning for me, as only those who have known stark terror and conquered it can appreciate. In death there is peace. There is terror only in the fear of death, as Roosevelt knew when he said, “All we have to fear is fear itself.” Because I had experienced both the sensation of dying and the terror that fear of it can produce, the will to live somehow grew in intensity.

At last I felt released — free to walk the trails and climb the peaks and to brush aside fear.

कठिन शब्दार्थ : terror-stricken भयाक्रान्त । tiny छोटे-छोटे। vestiges अवशेष। frown नफरत से देखना । scare डराना। bottomless अथाह। sensation अनुभूति। miniature लघु रूप। residual बचे-खुचे। meadow घास का मैदान। stripped कपड़े उतारे। echo गूंज। intensity तीव्रता | trails पगडडिया।

हिन्दी अनुवाद-लेकिन मेरा काम समाप्त नहीं हुआ। मुझे अभी भी सन्देह था कि क्या मैं तब भयाक्रान्त हो जाऊँगा जब मैं ताल में अकेला होऊँगा। मैंने उसे आजमाया। मैंने ताल की लम्बाई इधर से उधर तक तैर कर पार की। पुराने भय के छोटे-छोटे अवशेष लौट आते थे। लेकिन अब मैं नफरत के साथ गुर्राते हुए उस भय से कहता, “मुझे डराने की कोशिश करते हो, क्यों? अच्छा यह लो! देखो!” और मैं ताल की लम्बाई पुनः पार करने हेतु कूद पड़ता था।

ऐसा जुलाई के महीने तक चलता रहा। लेकिन मैं अभी भी सन्तुष्ट नहीं था। मैं निश्चित नहीं था कि सारा भय चला गया था। इसलिए मैं वेन्टवर्थ नामक झील पर गया जो न्यू हैम्पशायर में थी और ट्रिग्ज द्वीप में नौका घाट से डुबकी मारी और झील में दो मील तैर कर स्टैम्प एक्ट द्वीप पर पहुँचा। मैं क्राल स्ट्रोक, ब्रैस्ट स्ट्रोक, साइड स्ट्रोक और बैक स्ट्रोक से तैरा। केवल एक बार भय लौटा। जब मैं झील के मध्य में था, मैंने अपना चेहरा अन्दर किया और मुझे अथाह पानी के सिवाय कुछ दिखाई नहीं दिया। पुरानी अनुभूति का लघु रूप लौट आया। मैंने हँस कर कहा, “अच्छा मि. आतंक, तुम मेरा क्या बिगाड़ने का सोचते हो?” वह भाग गया और मैं तैरता रहा।

फिर भी मुझे बचे-खुचे सन्देह थे। प्रथम अवसर मिलते ही मैं पश्चिम की ओर तुरन्त चल पड़ा, टाइटन पर चढ़ता हुआ कोरेड घास के मैदानों पर पहुंचा, कोरेड क्रीक पगडंडी से मीड ग्लेशियर पहुँचा तथा वार्म झील के पास ऊँचे घास के मैदान पर अपना शिविर लगाया। अगली सुबह मैंने कपड़े उतारे, झील में कूदा तथा दूसरे किनारे पर तैर कर गया और वापस आया-जैसाकि ड्रग कॉरप्रोन किया करता था। मैं आनन्द से चीखा तथा गिल्बर्ट पीक (चोटी) ने प्रतिध्वनि की। मैंने पानी के भय को जीत लिया था।

यह अनुभव मेरे लिए गहरा अर्थ रखता था। केवल वे ही जिन्होंने कठोर आतंक को जाना है और इसे जीता है, वे ही इस अर्थ को समझ सकते हैं। मृत्यु में शान्ति होती है। केवल मृत्यु के भय में ही आतंक होता है, जैसाकि रूजवेल्ट जानते थे जब उन्होंने कहा था, “हमें केवल भय से ही भयभीत होना पड़ता है।” क्योंकि मैंने मरने की अनुभूति तथा आतंक जो मृत्यु का भय उत्पन्न कर सकता है, दोनों को अनुभव किया था, इस कारण जीने की इच्छा किसी तरह अधिक तीव्र हो गयी।

अन्त में मैंने मुक्त महसूस किया—,पगडंडियों पर चलने और, चोटियों पर चढ़ने एवं भय को नकार देने हेतु मुक्त।