Chapter 4 क्रान्तियों का सामान्य परिचय (अनुभाग – एक).

विस्तृत उत्तरीय प्रत

प्रश्न 1.
इंग्लैण्ड की क्रान्ति के प्रमुख कारणों पर प्रकाश डालिए।
      या
इंग्लैण्ड में 1688 ई० में होने वाली गौरवपूर्ण अथवा रक्तहीन क्रान्ति के प्रमुख कारण क्या थे ? वर्णन कीजिए।
      या
इंग्लैण्ड की क्रान्ति के क्या कारण थे ?
उत्तर

इंग्लैण्ड की क्रान्ति के कारण

इंग्लैण्ड की क्रान्ति विश्व इतिहास में ‘गौरवपूर्ण क्रान्ति’, ‘शानदार क्रान्ति’, ‘रक्तहीन क्रान्ति तथा महान् क्रान्ति’ नामों से प्रसिद्ध है। इसे शानदार क्रान्ति’ इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इसके द्वारा बिना खून की एक बूंद बहाये तथा बिना युद्ध लड़े इंग्लैण्ड में निरंकुश शासन का अन्त करके संसद की सत्ता स्थापित कर दी गयी। इंग्लैण्ड की रक्तहीन क्रान्ति 1688 ई० में राजा जेम्स द्वितीय के शासनकाल (सन् 1685-88 ई०) में हुई थी। जेम्स द्वितीय भी अपने पिता की तरह ही अहंकारी, हठी और निरंकुश शासक था। फलस्वरूप उसके शासनकाल के तीसरे वर्ष में ही क्रान्ति का आरम्भ हो गया। इस क्रान्ति के प्रमुख कारण निम्नलिखित

1. कैथोलिकों के प्रति उदारता – जेम्स द्वितीय कैथोलिक धर्म का अनुयायी था। इसलिए वह प्रोटेस्टेण्ट धर्म के लोगों की अपेक्षा कैथोलिकों के प्रति पक्षपात करता था और उनके प्रति उदारता का व्यवहार करता था। उसने कैथोलिकों को सेना में उच्च पदों पर नियुक्त किया। इन नियुक्तियों को ब्रिटिश संसद ने अवैध घोषित कर दिया। इस पर जेम्स द्वितीय ने संसद को ही भंग कर दिया। संसद को भंग करने के पश्चात् जेम्स द्वितीय का साहस बढ़ता ही गया और उसने मनमाने ढंग से अन्य उच्च सरकारी पदों पर भी कैथोलिकों की नियुक्तियाँ कीं। इससे जनता के मन में जेम्स द्वितीय के विरुद्ध भावना पैदा हुई।

2. कोर्ट ऑफ हाईकमीशन की स्थापना – संसद को भंग करने के बाद जेम्स द्वितीय ने कैथोलिकों की नियुक्तियों को वैधानिक बनाने के लिए कोर्ट ऑफ हाईकमीशन की स्थापना की। संसद ने इस प्रकार की संस्थाओं और न्यायालयों की स्थापना पर रोक लगा रखी थी, क्योंकि ये सभी राजाओं की निरंकुशता की प्रतीक थीं। जेम्स द्वितीय ने संसद की परवाह न करते हुए कोर्ट ऑफ हाई कमीशन के माध्यम से कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के चांसलर और लन्दन के बिशप को पदच्युत करके उनके स्थान पर कैथोलिकों की नियुक्ति करवा दी। जेम्स द्वितीय के इस कार्य से इंग्लैण्ड की प्रोटेस्टेण्ट जनता बहुत असन्तुष्ट हो गयी और राजा को हटाने की सोचने लगी।

3. कानूनों का स्थगन ( रद्द करना) – जेम्स द्वितीय ने 1687 ई० में इंग्लैण्ड के कैथोलिकों पर नियन्त्रण लगाने वाले अन्य अनेक कानूनों को भी रद्द कर दिया। इन कानूनों में क्लैरेण्डन कोड, टेस्ट ऐक्ट तथा चर्च सम्बन्धी कानून प्रमुख थे। इन कानूनों के स्थगन से कैथोलिकों को सरकारी पद प्राप्त करने और धार्मिक कार्यों का सम्पादन करने की पूर्ण स्वतन्त्रता प्राप्त हो गयी। जनता को राजा की ये बाते बहुत बुरी लगीं।

4. धार्मिक घोषणा – जेम्स द्वितीय ने 1768 ई० में एक घोषणा करते हुए पादरियों को आदेश दिया कि वे उसके द्वारा की गयी कैथोलिक धर्म सम्बन्धी घोषणाओं को चर्च में पढ़कर सुनायें। जेम्स द्वितीय को यह आदेश इंग्लैण्ड के चर्च के विरुद्ध था; अत: ब्रिटिश जनता में रोष फैल गया और वह उत्तेजित हो उठी।.

5. सात बिशपों पर अभियोग – जेम्स द्वितीय के आदेश की तीखी प्रतिक्रिया हुई। कैण्टरबरी के आर्क बिशप और छह अन्य बिशपों ने राजा के पास एक आवेदन-पत्र भेजा जिसमें उन्होंने राजा से विनती की कि उन्हें अनुचित घोषणाएँ पढ़ने को बाध्य ने किया जाए। इस पर जेम्स द्वितीय ने क्रोधित होकर सातों बिशपों को बन्दी बना लिया और उन पर राजद्रोह के अपराध में मुकदमा चलाया गया। इस घटना ने इंग्लैण्ड में क्रान्ति का वातावरण तैयार कर दिया।

6. हॉलैण्ड के राजा के विचार – हॉलैण्ड के राजा विलियम ऑफ ऑरेन्ज ने अपने एक लेख में विचार प्रकट किया कि कैथोलिकों को धार्मिक स्वतन्त्रता कभी नहीं मिलनी चाहिए। इस विचार से इंग्लैण्ड की जनता बहुत प्रसन्न हुई तथा जेम्स द्वितीय के और अधिक विरुद्ध हो गयी।

7. अन्य कारण – जेम्स द्वितीय के पक्षपातपूर्ण कार्यों तथा दमन-नीति ने इंग्लैण्ड में क्रान्ति की लहर उत्पन्न कर दी। 12 जून, 1688 ई० को राजा जेम्स के यहाँ पुत्र के जन्म की सूचना ने क्रान्ति को अनिवार्य बना दिया; क्योंकि जनता यह सोचने लगी कि अब इंग्लैण्ड में कैथोलिक राजवंश ही सदैव के लिए स्थायी हो जाएगा।

प्रश्न 2.
इंग्लैण्ड की क्रान्ति के परिणामों का वर्णन कीजिए।
      या
इंग्लैण्ड की क्रान्ति ने विश्व इतिहास को कहाँ तक प्रभावित किया ?
      या
इंग्लैण्ड की गौरवपूर्ण क्रान्ति (1688 ई०) के दो परिणाम लिखिए। [2009]
      या
इंग्लैण्ड की क्रान्ति को गौरवपूर्ण क्रान्ति’ की संज्ञा क्यों दी गयी है ? इसके प्रमुख परिणामों को वर्णित कीजिए।
      या
इंग्लैण्ड के इतिहास में रक्तहीन क्रान्ति किस प्रकार एक युगान्तकारी घटना थी ? [2011]
उत्तर
इंग्लैण्ड की क्रान्ति इतिहास में गौरवपूर्ण क्रान्ति के नाम से क्यों प्रसिद्ध है ?
उक्ट, इंग्लैण्ड की क्रान्ति इतिहास में गौरवपूर्ण क्रान्ति के नाम से इसलिए प्रसिद्ध है, क्योंकि बिना खून की एक बूंद बहाये तथा बिना युद्ध लड़े इंग्लैण्ड में जेम्स द्वितीय के निरंकुश शासन का अन्त करके संसद की सत्ता स्थापित कर दी गयी।

इंग्लैण्ड की क्रान्ति के परिणाम (प्रभाव)

इंग्लैण्ड के इतिहास में इस क्रान्ति का बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान है। इस क्रान्ति के विश्व-इतिहास पर भी बड़े दूरगामी व व्यापक परिणाम हुए, जो निम्नवत् हैं –

1. राजा के दैवी अधिकारों का अन्त – क्रान्ति से पूर्व इंग्लैण्ड के अधिकांश सम्राट ‘राजा के दैवी अधिकारों के सिद्धान्त में विश्वास करते आ रहे थे। वे अपने को पृथ्वी पर ईश्वर का प्रतिनिधि मानने के साथ-साथ यह भी मानते थे कि राजा को अपनी स्वेच्छा से शासन करने का अधिकार था। इस क्रान्ति ने यह स्पष्ट कर दिया कि राजा का पद जनता की इच्छा पर निर्भर करता है, न कि दैवी अधिकार पर।

2. संसद की सर्वोच्चता की स्थापना – इंग्लैण्ड में गौरवपूर्ण क्रान्ति की सफलता के पश्चात् संसद की सर्वोच्चता स्थापित हो गयी। इससे यह सिद्ध हो गया कि जनता की प्रतिनिधि संसद की शक्ति अधिक है और राजा को संसद की इच्छा के अनुसार ही शासन करना चाहिए।

3. राजा और संसद के संघर्ष का अन्त – गौरवपूर्ण क्रान्ति के पश्चात् राजा और संसद के संघर्ष का अन्त हो गया, जिससे इंग्लैण्ड के आर्थिक विकास की गति में तेजी आ गयी।

4. राजा की निरंकुशता पर प्रतिबन्ध – संसद ने 1689 ई० में बिल ऑफ राइट्स पारित करके राजा की निरंकुशता पर अंकुश लगा दिया। निरंकुशता समाप्त होने पर स्वतन्त्रता और समानता के आदर्शों की स्थापना की गयी। इस बिल के द्वारा यह निश्चित कर दिया गया कि इंग्लैण्ड में प्रोटेस्टेण्ट धर्म का अनुयायी ही राजा बन सकेगा।

5. स्वतन्त्र न्यायपालिका की स्थापना – इंग्लैण्ड में क्रान्ति की सफलता के पश्चात् न्यायपालिका की स्थापना की गयी। अब न्यायाधीश स्वतन्त्र हो गये थे, क्योंकि न्यायाधीशों पर राजा का कोई नियन्त्रण नहीं रहा।

6. यूरोप में क्रान्तियों का प्रचलन – इंग्लैण्ड की गौरवपूर्ण क्रान्ति की सफलता से प्रोत्साहित होकर यूरोप में राजनीतिक क्रान्तियों की एक श्रृंखला प्रारम्भ हो गयी।

7. इंग्लैण्ड और फ्रांस में विरोध – फ्रांस यूरोप में कैथोलिक धर्म का नेतृत्व कर रहा था; अतः जेम्स द्वितीय के साथ फ्रांस के मधुर सम्बन्ध थे, परन्तु इंग्लैण्ड में प्रोटेस्टेण्ट धर्म की मान्यता स्थापित हो जाने से इंग्लैण्ड और फ्रांस के सम्बन्धों में कटुता उत्पन्न हो गयी।

8. इंग्लैण्ड की विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति – गौरवपूर्ण क्रान्ति के पश्चात् इंग्लैण्ड ने औपनिवेशिक, राजनीतिक आदि क्षेत्रों में पर्याप्त प्रगति की। प्रशासन ने देश के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास की ओर ध्यान दिया।

9. इंग्लैण्ड में संसदीय शासन का विकास – उन्नीसवीं सदी में इंग्लैण्ड में संसदीय शासन प्रणाली का तेजी से विकास हुआ। सन् 1832 ई० में पहला सुधार अधिनियम पारित हुआ, जिससे लोगों को मताधिकार प्राप्त हुआ। सन् 1867 ई०, 1884-85 ई० तथा 1911 ई० में इंग्लैण्ड में सभी वयस्क पुरुषों को मताधिकार मिल गया। सन् 1918 ई० में इंग्लैण्ड में महिलाओं को भी मताधिकार प्राप्त हो गया। इस प्रकार इंग्लैण्ड में संसदीय शासन मजबूती से स्थापित हो गया और ब्रिटिश संसद संसार की ‘संसदों की जननी’ कही जाने लगी।

प्रश्न 3.
अमेरिकावासी इंग्लैण्ड से क्यों सम्बन्ध विच्छेद करना चाहते थे? उनके असन्तोष के तीन कारण लिखिए। (2018)
      या
अमेरिका के स्वतन्त्रता-संग्राम के प्रमुख कारणों का वर्णन कीजिए।
      या
अमेरिका की क्रान्ति के क्या कारण थे ? विवेचना कीजिए। (2018)
उत्तर
इंग्लैण्ड की शानदार क्रान्ति ने ब्रिटिश उपनिवेशों की जनता में स्वतन्त्रता और अधिकार-प्राप्ति की भावना की लहर उत्पन्न कर दी। इसे लहर का तूफान सर्वप्रथम अमेरिका के ब्रिटिश उपनिवेशों में उठा। 1942 ई० में जब कोलम्बस ने अमेरिका की खोज करके यूरोप में सनसनी फैला दी तो यूरोप के व्यापारी इस महाद्वीप की प्राकृतिक सम्पदा को लूटने तथा यहाँ के निवासियों को गुलाम बनाने के लिए परस्पर प्रतिस्पर्धा करने लगे। व्यापारियों को प्रोत्साहन देने के लिए स्पेन, हॉलैण्ड, फ्रांस तथा इंग्लैण्ड के राजाओं ने अमेरिका में अपने उपनिवेश बसाने शुरू कर दिये। 150 वर्षों के अन्दर ही अंग्रेजों ने अमेरिका में 13 उपनिवेश स्थापित करने में सफलता प्राप्त कर ली। ट्यूडर तथा स्टुअर्ट राजाओं के काल में अंग्रेजों ने अमेरिकी उपनिवेशों का जमकर शोषण किया, परन्तु पुनर्जागरण की लहर के कारण अमेरिकियों में राष्ट्रीयता की भावना विकसित होने लगी। दूसरी ओर इंग्लैण्ड के सम्राट जॉर्ज तृतीय की अयोग्यता तथा ब्रिटिश प्रधानमन्त्रियों (लॉर्ड चैथम आदि) की उपेक्षापूर्ण नीतियों ने अमेरिकी उपनिवेशों की जनता के असन्तोष को अत्यधिक बढ़ा दिया। टॉमस पेन, एडमण्ड बर्क तथा थॉमस जेफरसन जैसे विद्वानों, लेखकों तथा वक्ताओं ने अपने विचारों से अमेरिका में क्रान्ति की पृष्ठभूमि तैयार कर दी।

अमेरिका की क्रान्ति (असन्तोष) के कारण

सम्राट जॉर्ज द्वितीय की अयोग्यता एवं ब्रिटिश प्रधानमन्त्रियों की उपेक्षापूर्ण नीतियों के कारण अमेरिकियों ने 1775 ई० में जॉर्ज वाशिंगटन के नेतृत्व में फ्रांस तथा स्पेन की सहायता से अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया, जिसे अमेरिका का स्वतन्त्रता संग्राम कहते हैं। इस स्वतन्त्रता-संग्राम के निम्नलिखित कारण थे

1. दोषपूर्ण शासन – अमेरिका में इंग्लैण्ड के 13 उपनिवेश थे। इन उपनिवेशों में इंग्लैण्ड का शासन बहुत दोषपूर्ण था। प्रत्येक उपनिवेश में एक अंग्रेज गवर्नर होता था तथा एक विधानसभा होती थी, जिसमें उपनिवेश के निर्वाचित सदस्य होते थे। यह सभा स्थानीय मामलों सम्बन्धी कानून बनाती तथा कर लगाती थी। उनके ऊपर इंग्लैण्ड की सरकार जो भी नियम लागू करती थी, उनमें इंग्लैण्ड का हित निहित होता था। परस्पर विरोधी हितों के कारण अंग्रेज गवर्नर तथा निर्वाचित सभा के मध्य संघर्ष चलता रहता था। अमेरिकावासियों को उच्च पदों के लिए अयोग्य माना जाता था और अंग्रेजों को उच्च पदों पर नियुक्त किया जाता था; अतः अमेरिका की जनता अंग्रेजों के दोषपूर्ण शासन के विरुद्ध एकजुट होकर स्वतन्त्रता पाने के लिए लालायित हो उठी।

2. आर्थिक शोषण – इंग्लैण्ड की सरकार उपनिवेशों का बुरी तरह से शोषण कर रही थी। ब्रिटिश शासन ने उपनिवेशों में ऐसे व्यापारिक नियम लागू कर रखे थे, जिनसे इंग्लैण्ड को तो अधिकाधिक लाभ पहुँच रहा था, किन्तु ऐसे नियम उपनिवेशों के विकास में बाधक सिद्ध हो रहे थे। उदाहरण के लिए, उपनिवेशों की मुख्य उपज कपास, तम्बाकू तथा चीनी का निर्यात केवल इंग्लैण्ड को ही किया जा सकता था। उपनिवेशों में लोहे व ऊन के सामान, ईंट आदि के उत्पादन पर प्रतिबन्ध था। इन वस्तुओं को केवल इंग्लैण्ड से ही आयात किया जा सकता था। उपनिवेशों से अन्य देशों को माल केवल इंग्लैण्ड के जहाजों द्वारा ही भेजा जा सकता था। उपनिवेशों के निवासी इस आर्थिक शोषण को अधिक दिन तक सहन न कर सके; अत: उन्होंने स्वतन्त्रता संग्राम छेड़ दिया।

3. स्टाम्प ऐक्ट लगाना – इंग्लैण्ड की सरकार ने उपनिवेश के निवासियों के व्यापारिक सौदों पर भारी कर लगा रखे थे, जिनसे जनता बहुत असन्तुष्ट थी। उपनिवेशों की सुरक्षा के लिए इंग्लैण्ड की सरकार ने यह निश्चय किया कि उपनिवेशों की एक स्थायी सेना रखी जाए, जिसका व्यय उपनिवेशों द्वारा ही वहन किया जाए। धन की प्राप्ति के लिए ब्रिटेन की संसद ने स्टाम्प ऐक्ट पारित करके उपनिवेशों पर अतिरिक्त कर लगा दिया। इसके अनुसार अदालती कागजों पर स्टाम्प लगाने पड़ते थे। उपनिवेशवासियों ने इस ऐक्ट का कड़ा विरोध किया और कहा कि यदि ‘प्रतिनिधित्व नहीं, तो कर भी नहीं।

4. दार्शनिकों का प्रभाव – इस काल में अमेरिका के लोगों को लॉक, हेरिंगटन, टॉमस पेन, जेफरसन, मिल्टन आदि दार्शनिकों के विचारों ने बहुत प्रभावित किया। इनके विचारों से अमेरिकियों में राजनीतिक चेतना जाग उठी, जिसने क्रान्ति का रूप धारण कर लिया। इन दार्शनिकों ने अपने लेखों में लोगों की भावनाओं को स्वतन्त्रता के प्रति जाग्रत किया। उपनिवेशों के लोगों ने इनसे प्रभावित होकर स्वतन्त्र होने के लिए संग्राम छेड़ दिया।

5. अन्य देशों के लोगों को बसना- इन उपनिवेशों में धीरे-धीरे यूरोप के अन्य देशों के लोग भी आकर बसने लगे थे, जिनमें प्रमुख रूप से आयरलैण्ड और हॉलैण्ड के लोग थे, जो इंग्लैण्ड से नाराज होकर अमेरिका आये थे। इस समय अमेरिका में रहने वाले ऐसे लोगों की संख्या अधिक थी, जिनका इंग्लैण्ड से कोई लगाव नहीं था।

6. स्वावलम्बन की इच्छा – अमेरिका में उपनिवेश स्थापित करने वाले लोग लगभग 150 वर्षों से रह रहे थे। प्रारम्भ में अनेक कठिनाइयों का सामना करने के बाद वे अब अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आत्म-निर्भर हो गये थे। उपनिवेशवासियों ने यह अनुभव किया कि अब उनके लिए इंग्लैण्ड के संरक्षण में रहना लाभदायक नहीं है; अतः वे इंग्लैण्ड के साथ अपने सम्बन्ध विच्छेद करने के लिए प्रयत्नशील हो गये।

7. धार्मिक मतभेद – इंग्लैण्ड छोड़कर अमेरिका में बसने वाले अंग्रेज वहाँ होने वाले धार्मिक अत्याचारों से दु:खी होकर यहाँ आये। उनके साथ ही कुछ लोग आर्थिक लाभ हेतु भी यहाँ आ बसे। इनमें से अधिकांश लोग ऐसे थे जो ‘आंग्ल चर्च’ को नहीं मानते थे, जबकि इंग्लैण्ड में उन दिनों केवल ‘आंग्ल चर्च’ को ही मान्यता प्राप्त थी। इस प्रकार इंग्लैण्ड तथा उपनिवेशवासियों में गहरा धार्मिक मतभेद था।

8. फ्रांसीसी आक्रमण का भय समाप्त – फ्रांस तथा अमेरिका क्रमशः रोमन कैथोलिक धर्म तथा प्रोटेस्टेण्ट धर्म के समर्थक एवं अनुयायी थे। इसलिए दोनों वर्गों में आपस में कटुता के कारण सम्बन्ध तनावपूर्ण थे। आरम्भ में तो अमेरिकावासी अंग्रेजों को भय था कि यदि उन्होंने इंग्लैण्ड से झगड़ा किया तो उस अवसर का लाभ उठाकर कनाडा के फ्रांसीसी उन पर आक्रमण कर सकते हैं। लेकिन जब सप्तवर्षीय युद्ध के बाद कनाडा भी अंग्रेजों के अधिकार में आ गया तब उपनिवेशवासी अंग्रेजों को कनाडा में बसे फ्रांसीसियों के आक्रमण का भय समाप्त हो गया। अतः उन्होंने निडर होकर अंग्रेजों से युद्ध करने के लिए अपनी तैयारी शुरू कर दी।

प्रश्न 4.
अमेरिका की क्रान्ति की उपलब्धियों का वर्णन कीजिए।
      या
अमेरिका की क्रान्ति के प्रमुख परिणामों का संक्षेप में उल्लेख कीजिए।
उत्तर

अमेरिकी क्रान्ति के परिणाम (उपलब्धियाँ)

अमेरिका की क्रान्ति के निम्नलिखित परिणाम हुए –

1. लोकतन्त्र की स्थापना – अमेरिका की क्रान्ति ने लोकतन्त्रात्मक शासन-व्यवस्था की स्थापना के मार्ग खोल दिये। इस क्रान्ति ने ‘जनताकाशासन, जनता द्वारा, जनता के लिए’ का सन्देश विश्व को दिया। इससे प्रभावित होकर विश्व के अनेक राष्ट्रों में लोकतन्त्र शासन की स्थापना की गयी।

2. लिखित संविधान – अमेरिका में स्वतन्त्रता-संग्राम के पश्चात् 1789 ई० में विश्व का प्रथम लिखित संविधान तैयार किया गया, जिससे अन्य राष्ट्रों में भी लिखित संविधान लागू करने की परम्परा चल निकली।

3. संघात्मक शासन – प्रणाली–स्वतन्त्रता संग्राम के पश्चात् अमेरिका में ही सर्वप्रथम संघीय शासन-प्रणाली लागू की गयी। इस व्यवस्था में सर्वोच्च सत्ता संघीय सरकार के हाथों में होती है तथा राज्यों की व्यवस्था राज्य सरकारों को दी जाती है। बाद में विश्व के अन्य राष्ट्रों ने भी इस प्रणाली को अपनाया।

4. अन्य देशों की क्रान्तियों को प्रेरणा – अमेरिका की क्रान्ति की सफलता से उत्साहित होकर फ्रांस आदि देशों में भी महत्त्वपूर्ण क्रान्तियाँ हुईं। स्वतन्त्रता, समानता और मूल अधिकारों की प्रेरणा ने विश्व के क्रान्तिकारियों को बड़ी प्रेरणा दी। फ्रांस की सेना और जनता पर इस क्रान्ति का विशेष प्रभाव पड़ा : और 1789 ई० में फ्रांस में भी राज्य क्रान्ति आरम्भ हो गयी।

5. समानता और स्वतन्त्रता का महत्त्व – अमेरिका में लोकतन्त्र की स्थापना होने पर व्यक्ति की समानता और स्वतन्त्रता स्थापित हो गयी। समानता, स्वतन्त्रता तथा बन्धुत्व ने विश्व के सभी देशों को प्रभावित किया।

6. संयुक्त राज्य अमेरिका का जन्म – अमेरिका के स्वतन्त्रता-संग्राम के कारण ब्रिटेन ने 13 उपनिवेशों को स्वतन्त्र कर दिया, जिन्हें मिलाकर संयुक्त राज्य अमेरिका नामक राष्ट्र का जन्म हुआ।

7. गृह-युद्ध तथा दास-प्रथा का अन्त – अमेरिका के स्वतन्त्रता-संग्राम के पश्चात् गृह-युद्ध समाप्त हो गया तथा राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने दास-प्रथा को समाप्त करने के लिए सफल प्रयास किये।

8. अंग्रेजों की नीति में उदारता – अमेरिका के स्वतन्त्रता-संग्राम के फलस्वरूप अनेक उपनिवेशों तथा समुद्री स्थानों के छिन जाने के कारण ब्रिटिश सरकार ने अपने अन्य उपनिवेशों के प्रति नम्रता और उदारता की नीति अपनानी प्रारम्भ कर दी। कुछ पुराने मन्त्रियों को हटाकर सुधारवादी विचारों के व्यक्तियों को मन्त्री बनाया गया। संसद को अधिक लोकतान्त्रिक बनाने के प्रयास किये गये। आयरलैण्ड की कानून बनाने की माँग को स्वीकार कर लिया गया।

9. अन्य अंग्रेजी साम्राज्य की स्थापना – अमेरिकन उपनिवेश हाथ से निकल जाने के पश्चात् बहुत-से अंग्रेज कनाडा में बस गये। धीरे-धीरे कनाडा में अंग्रेजों का उपनिवेश स्थापित हो गया। बाद में ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैण्ड में भी इंग्लैण्ड ने अपने उपनिवेश बसाये। इस प्रकार दूसरे अंग्रेजी साम्राज्य की नींव पड़नी प्रारम्भ हो गयी, जो पहले से भी बड़ा था।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
इंग्लैण्ड की गौरवपूर्ण क्रान्ति किस प्रकार सम्पन्न हुई ?
उत्तर
क्रॉमवेल की शासन-नीति (1649-60) से अंग्रेज जनता तंग आ चुकी थी। परिणामस्वरूप सन् 1660 ई० में इंग्लैण्ड में पुनः राजतन्त्र की स्थापना हुई तथा चार्ल्स द्वितीय को राजा बनाया गया। उसकी मृत्यु के बाद उसको उत्तराधिकारी जेम्स द्वितीय गद्दी पर बैठा। वह एक निरंकुश शासक तथा कट्टर कैथोलिक था, जब कि इंग्लैण्ड में प्रोटेस्टेण्ट धर्म का बहुमत था। जेम्स के घर पुत्र-जन्म की सूचना से भी जनता में रोष फैल गया। जनतो यह सोचने लगी कि अब इंग्लैण्ड में कैथोलिक राजवंश ही सदैव के लिए स्थायी हो जाएगा। अतः संसद ने राजा जेम्स द्वितीय के दामाद वे हॉलैण्ड के शासक विलियम ऑफ ऑरेज को जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए सेना सहित आने का निमन्त्रण भेजा। विलियम के इंग्लैण्ड आगमन पर जेम्स द्वितीय अपनी पत्नी व नवजात पुत्र के साथ देश छोड़कर फ्रांस भाग गया। संसद ने विलियम तृतीय (विलियम ऑफ ऑरेन्ज) तथा रानी मेरी (विलियम तृतीय की पत्नी तथा भगोड़े राजा जेम्स द्वितीय की पुत्री) को इंग्लैण्ड को संयुक्त शासक बना दिया। इस प्रकार 1688 ई० में इंग्लैण्ड में रक्तहीन गौरवपूर्ण क्रान्ति सम्पन्न हुई।

प्रश्न 2.
अमेरिका के उपनिवेशों की जनता अंग्रेजों से क्यों असन्तुष्ट थी ?
उत्तर
अमेरिका के उपनिवेशों की जनता के अंग्रेजों से असन्तुष्ट होने के अग्रलिखित कारण थे –

  1. इंग्लैण्ड की सरकार उपनिवेशों को इंग्लैण्ड के लिए लाभ का एक अच्छा साधन मानती थी, इसलिए उसने उपनिवेशों से होने वाले व्यापार के सम्बन्ध में एक विशेष नीति अपनायी। सन् 1765 ई० में ब्रिटेन की सरकार ने उपनिवेशों के लिए ‘स्टाम्प ऐक्ट’ बनाया, जिसके अनुसार उपनिवेशों में कानूनी दस्तावेजों पर स्टाम्प लगाना अनिवार्य कर दिया गया। इससे अमेरिकी जनता अंग्रेजों से रुष्ट हो गयी।
  2. सन् 1767 ई० में इंग्लैण्ड की सरकार ने अमेरिका में बाहर से आने वाले सीसा, चाय, कागज तथा रंग | पर आयात-कर लगा दिया। इसका उपनिवेश के लोगों ने भारी विरोध किया।
  3. सन् 1770-73 ई० के काल में अनेक उत्तेजक घटनाएँ घटीं, जिनमें बोस्टन हत्याकाण्ड प्रमुख है। बोस्टन नगर में ब्रिटिश सैनिकों ने गोलीबारी की, जिसमें कुछ अमेरिकी नागरिकों की मृत्यु हो गयी। इससे जनता भड़क उठी।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
क्रान्ति का क्या अर्थ है ? क्रान्ति क्यों होती है ?
उत्तर
क्रान्ति का सामान्य अर्थ एकाएक हुए या किये गये दूरगामी परिवर्तन से है। राजनीतिक निरंकुशता, सामाजिक तथा आर्थिक असमानताओं को दूर करने तथा सत्ता-परिवर्तन के लिए क्रान्ति होती है।

प्रश्न 2.
इंग्लैण्ड की क्रान्ति को ‘गौरवमयी क्रान्ति’ क्यों कहा जाता है ?
उत्तर
रक्त की एक बूंद बहाये बिना ही राजसत्ता में परिवर्तन होने के कारण इंग्लैण्ड की क्रान्ति को गौरवमयी, रक्तहीन या शानदार क्रान्ति कहा जाता है।

प्रश्न 3.
सन् 1688 ई० में हुई इंग्लैण्ड की क्रान्तिको किन अन्य नामों से सम्बोधित किया जाता है?
उत्तर
सन् 1688 ई० में हुई इंग्लैण्ड की क्रान्ति को ‘गौरवपूर्ण क्रान्ति’, ‘शानदार क्रान्ति’, ‘रक्तहीन क्रान्ति’, ‘महान् क्रान्ति’ आदि नामों से सम्बोधित किया जाता है।

प्रश्न 4.
मैग्नाकार्टा कब और किसके शासनकाल में तैयार हुआ ?
उत्तर
‘मैग्नाकार्टा’ घोषणा-पत्र 15 जून, 1215 ई० को इंग्लैण्ड के राजा जॉन के शासनकाल में तैयार हुआ।

प्रश्न 5.
चार्ल्स प्रथम को फाँसी कब दी गयी ?
उत्तर
इंग्लैण्ड के राजा चार्ल्स प्रथम को 30 जनवरी, 1649 ई० को फाँसी दी गयी थी।

प्रश्न 6.
इंग्लैण्ड में रक्तहीन क्रान्ति कब हुई थी ? उस समय वहाँ का राजा कौन था ? [2009]
उत्तर
इंग्लैण्ड में रक्तहीन क्रान्ति सन् 1688 ई० में हुई थी। उस समय वहाँ का राजा जेम्स द्वितीय था।

प्रश्न 7.
बिल ऑफ राइट्स कब पारित किया गया ?
उत्तर
इंग्लैण्ड में बिल ऑफ राइट्स सन् 1689 ई० में पारित किया गया।

प्रश्न 8.
अमेरिका में ब्रिटेन के कितने उपनिवेश थे? अमेरिका की क्रान्ति किसके नेतृत्व में हुई ? [2017]
उत्तर
अमेरिका में ब्रिटेन के कुल तेरह उपनिवेश थे तथा इसकी क्रान्ति जॉर्ज वाशिंगटन के नेतृत्व में हुई।

प्रश्न 9.
‘स्टाम्प ऐक्ट’ क्या था ? यह कब पास हुआ ?
उत्तर
‘स्टाम्प ऐक्ट’ सन् 1765 ई० में पारित किया गया, जिसके तहत उपनिवेशों के सभी व्यापारिक सौदों पर कर (20 शिलिंग का स्टाम्प) लगाने की नीति निर्धारित की गयी थी।

प्रश्न 10.
‘बोस्टन टी पार्टी की घटना का उल्लेख कीजिए।
उत्तर
सन् 1773 ई० में अंग्रेज गवर्नर के चाय उतारने के आदेश पर रेड इण्डियनों की वेशभूषा में अमेरिकनों के द्वारा चाय की पेटियाँ समुद्र में फेंक देने की घटना को ‘बोस्टन टी पार्टी’ कहा जाता है।

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. चार्ल्स प्रथम को पराजित करने में मुख्य भूमिका किसकी थी?

(क) चार्ल्स द्वितीय की
(ख) क्रॉमवेल की
(ग) जेम्स द्वितीय की
(घ) हॉलैण्ड के विलियम की

2. चार्ल्स द्वितीय की मृत्यु कब हुई?

(क) 1665 ई० में।
(ख) 1675 ई० में
(ग) 1685 ई० में
(घ) 1695 ई० में

3. विश्व की किस क्रान्ति को शानदार क्रान्ति’ से सम्बोधित किया जाता है?

(क) फ्रांस की
(ख) इंग्लैण्ड की
(ग) अमेरिका की
(घ) रूस की।

4. इंग्लैण्ड की गौरवपूर्ण क्रान्ति कब हुई? [2013]

(क) 1660 ई० में
(ख) 1688 ई० में
(ग) 1717 ई० में
(घ) 1917 ई० में।

5. अमेरिका की क्रान्ति कब हुई थी?

(क) 1775 ई० में
(ख) 1776 ई० में
(ग) 1875 ई० में
(घ) 1765 ई० में

6. संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रथम राष्ट्रपति कौन थे?

(क) अब्राहम लिंकन
(ख) वुडरो विल्सन
(ग) जॉर्ज वाशिंगटन
(घ) जेफरसन

7. अमेरिका का स्वतन्त्रता-दिवस कब मनाया जाता है? [2012, 13, 15, 16, 17]

(क) 13 दिसम्बर को
(ख) 6 जुलाई को
(ग) 4 जुलाई को
(घ) 11 अगस्त को

8. अमेरिकी स्वतन्त्रता संग्राम का नेतृत्व किसने किया? [2011, 13, 16]

(क) अब्राहम लिंकन ने।
(ख) थॉमस जेफरसन ने
(ग) जॉन लॉक ने।
(घ) जॉर्ज वाशिंगटन ने

9. बोस्टन चाय पार्टी की घटना हुई थी [2011]

(क) 1770 ई० में
(ख) 1771 ई० में
(ग) 1773 ई० में
(घ) 1775 ई० में

10. ‘बोस्टन चाय पार्टी’ घटना किस देश की क्रान्ति से सम्बन्धित है ? (2013)

(क) अमेरिका
(ख) रूस
(ग) फ्रांस
(घ) इंग्लैण्ड

11. जॉर्ज वाशिंगटन कौन थे? [2014]

(क) अमेरिका के राष्ट्रपति
(ख) इंग्लैण्ड के राजा
(ग) फ्रांस के सम्राट
(घ) रूस के जार

12. इंग्लैण्ड की गौरवपूर्ण क्रान्ति किस राजा के समय में हुई? [2015, 16, 18]

(क) जेम्स प्रथम
(ख) जेम्स द्वितीय
(ग) चार्ल्स प्रथम
(घ) हेनरी द्वितीय

13. इंग्लैण्ड में रक्तहीन क्रान्ति कब हुई? [2016, 17, 18]

(क) 1688 ई० को
(ख) 1689 ई० को
(ग) 1660 ई० को
(घ) 1670 ई० को।

उत्तरमाला

UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 4 क्रान्तियों का सामान्य परिचय 1

Chapter 4 क्रान्तियों का सामान्य परिचय (अनुभाग – एक).