RBSE Class 9 English Beehive

Poem 2 Wind

कठिन शब्दार्थ एवं हिन्दी अनुवाद 

1. Wind, come………………………….them all.

कठिन शब्दार्थ : softly (सॉफ्ट्ल ) = धीरे से, shutters (शट(र)ज्) = झिलमिली, शटर, scatter (स्कैट(र)) = बिखेरना, poking fun at (पोक्ङ् फन ऐट) = खिल्ली उड़ाना, weaklings (वीक्लङ्ज) = कमजोरों, frail (फ्रेल) = कमजोर, जल्द टूटने वाला, crumbling (क्रम्ब्लु ङ्) = भुरभुरे, टूटने वाले, rafter (राफ्ट(र)) = कड़ी/शहतीर (लकड़ी का), winnows (विनोज) = फटकना, ओसाना, crushes (क्रश्ज ) = रौंदता है।

हिन्दी अनुवाद : पवन, धीरे-धीरे चलो।

खिड़कियों की झिलमिली को मत तोड़ो। कागजों को मत बिखेरो। शेल्फ (ताक) पर रखी पुस्तकों को नीचे न गिराओ। वहाँ, देखो तुमने क्या कर दिया – तुमने उन सभी को नीचे गिरा दिया। तुमने पुस्तकों के पृष्ठों को फाड़ दिया। तुम पुनः वर्षा ले आई। कमजोरों की खिल्ली उड़ाने में तुम बहुत चतुर हो।

कमजोर टूटते हुए घर, टूटते हुए दरवाजे, टूटते हुए शहतीर। टूटती हुई लकड़ी, टूटते हुए शरीर, टूटता हुआ जीवन। टूटते हुए दिल पवन देव इन सभी को फटकता व रौंदता है। भावार्थ-ताकतवर से आप कितना ही अनुनय-विनय करें लेकिन वह कमजोरों की खिल्ली ही उड़ाता है, उन्हें रौंदने की ही चेष्टा करता है। 

2. He won’t……………….every day. 

कठिन शब्दार्थ : firmly (फम्लि) = मजबूती से, steadfast (स्टेड्फास्ट्) = विश्वसनीय एवं निष्ठावान/वफादार, blow out (ब्लो आउट) = बुझाना (वायु वेग से), roar (रॉ(र)) = तेजी से जलते हुए (आग), flourish (फ्लरिश्) = बढ़ते जाना, praise (प्रेज) = प्रशंसा करना। 

हिन्दी अनुवाद : वह (पवन देव) वे कार्य नहीं करेंगे जो आप उनसे करने को कहेंगे।

अतः, आइए, मजबूत घर बनाएँ। हम दरवाजों को मजबूती से बन्द करें। शरीर को मजबूत बनाने का अभ्यास करें। हृदय को विश्वासी व निष्ठावान बनाएँ। यह करें, तो (और) पवन देव हमारे मित्र बन जाएँगे। पवन कमजोरी से (धीमे) जल रही अग्नि को बुझा देती है। वह (पवन देव) शक्तिशाली आग को तेजी से जलाते हैं व बढ़ाते हैं। उनकी मित्रता अच्छी है। हम उनकी नित्यप्रति प्रशंसा करते हैं। भावार्थ-अतः हमें स्वयं को शारीरिक, मानसिक व अन्य सभी तरह से मजबूत बनाना चाहिए। फिर ताकतवर भी आपसे मित्रता करेगा। यह संसार का नियम है कमजोर को और कमजोर करते हैं व ताकतवर को और ताकतवर करते हैं।

Explanations with Reference to the Context

(सन्दर्भ सहित व्याख्याएँ)

Stanza 1.

Wind, come softly. 
Don’t break the shutters of the windows. 
Don’t scatter the papers.
Don’t throw down the books on the shelf. 

Reference : These are the opening lines of the poem ‘Wind’ composed by Subramania Bharati, a great Tamil poet.

Context: The poet requests the wind to blow softly so that no damage is done to the shutters of the windows, the papers are not scattered and the books are not thrown down the shelf.

Explanation : The poet makes an appeal to the wind to blow softly. He is aware of the destruction caused by a strongly blowing wind to his belongings. Therefore, he requests it not to cause damage to his window shutters, papers and books.

सन्दर्भ : ये पंक्तियाँ सुब्रमनिया भारती की कविता ‘Wind’ की प्रारम्भिक पंक्तियाँ हैं। सुब्रमनिया भारती एक महान् तमिल कवि थे।

प्रसंग : कवि पवन से प्रार्थना करता है कि वह धीमे-धीमे बहे ताकि खिड़कियों के शटरों को नुकसान न पहुँचे, कागज़ात न बिखरें तथा पुस्तकें शेल्फ (ताक) पर से नीचे न गिर जाएं।

व्याख्या : कवि पवन से निवेदन करता है कि वह धीमे-धीमे बहे। कवि उस नुकसान के प्रति जागरूक है जो तीव्रता से बहने वाली पवन उसके व्यक्तिगत सामान को पहुँचाती है। इसलिए वह पवन से प्रार्थना करता है कि वह उसकी खिड़कियों के शटरों, कागजातों तथा पुस्तकों को नुकसान न पहुँचाए।

Stanza 2.

There, look what you did-you threw them all down. 
You tore the pages of the books. 
You brought rain again.
You’re very clever at poking fun at weaklings.

Reference : These lines have been taken from Subramania Bharati’s poem ‘Wind’. The poet requests the wind not to cause any harm to his things.

Context: The poet makes an appeal to the wind to blow slowly and softly, so that his things don’t receive any damage. However, the wind doesn’t heed his requests.

Explanation : The wind ignores the poet’s request to it to blow softly and causes damage to his things. The wind has blown strongly, throwing all his books down from the shelf and tearing their pages. Further, the wind has brought the rain again by blowing as a storm. It seems the wind very cleverly pokes fun at weak and helpless persons and things.

सन्दर्भ : ये पंक्तियाँ सुब्रमनिया भारती की कविता ‘Wind’ से ली गयी हैं। कवि पवन से प्रार्थना करता है कि वह उसकी वस्तुओं को नुकसान न पहुँचाए।

प्रसंग : कवि पवन से निवेदन करता है कि वह धीरे तथा आहिस्ता-आहिस्ता बहे ताकि उसकी वस्तुओं को कोई नुकसान न पहुँचे। किन्तु पवन उसकी प्रार्थना पर ध्यान नहीं देता है।

व्याख्या : पवन कवि की इस प्रार्थना की उपेक्षा कर देता है कि वह धीमे-धीमे बहे और उसकी चीज़ों को हानि पहुँचा देता है। पवन बलपूर्वक बही है तथा उसने कवि की सभी पुस्तकों को ताक से नीचे फेंक दिया है तथा उनके पन्ने फाड़ दिये हैं। इसके अतिरिक्त पवन बरसात को पुनः लेकर आ गया है, तूफान के रूप में बह कर। ऐसा प्रतीत होता है कि पवन कमजोर एवं असहाय लोगों तथा वस्तुओं का बड़े चतुराई पूर्ण तरीके से मज़ाक बनाता है।

Stanza 3.

Frail crumbling houses, crumbling doors, crumbling rafters, 
crumbling wood, crumbling bodies, crumbling lives, 
crumbling hearts
the wind god winnows and crushes them all.

Reference : These lines have been taken from Subramania Bharti’s poem, Wind’. The poet talks about the destruction that the wind causes by blowing strongly.

Context : The poet expresses his anger at the destruction that the wind has caused to his things by blowing strongly. The poet says that the wind is unfeeling and clever at poking fun at weaklings.

Explanation : The poet says angrily that the wind god jolts and crushes very cruelly the weak and crumbling (breaking) houses, doors, rafters, wood, bodies and lives of men and animals, and their hearts. In a way, it winnows them all and then destroys them completely. The wind god seems to go on his destructive mission pitilessly.

सन्दर्भ : ये पंक्तियाँ सुब्रमनिया भारती की कविता ‘Wind’ से ली गयी हैं । कवि उस विनाश की बात करता है जो पवन जोर से बहकर कर देता है।

प्रसंग : कवि उस विनाश पर क्रोध व्यक्त करता है जिसे पवन ने जोर से बह कर उसकी वस्तुओं का किया है। कवि का कहना है कि कमजोर वस्तुओं एवं व्यक्तियों का मजाक उड़ाने में पवन बड़ा निष्ठुर एवं चतुर होता है। – व्याख्या : कवि क्रोध के साथ कहता है कि पवन देव कमजोर एवं जर्जर घरों, दरवाजों, शहतीरों, लकड़ी, शरीरों तथा मनुष्य एवं जीवधारियों की जिन्दगियों एवं उनके दिलों को बड़ी निर्दयता के साथ झकझोरता है एवं कुचल डालता है। एक प्रकार से वह इन सबको फटकता है और फिर इन्हें पूर्णतः नष्ट कर देता है। पवन देव उनकी विनाश-लीला को बड़ी निर्दयता से सम्पादित करते हुए दिखाई देते हैं।

Stanza 4.

He won’t do what you tell him. 
So, come, let’s build strong homes. 
Let’s joint the doors firmly. 
Practise to firm the body. 
Make the heart steadfast.
Do this, and the wind will be friends with us. 

Reference : These lines are from Subramania Bharti’s poem ‘Wind’. The wind blows strongly and causes a lot of destruction. But the wind can be befriended despite its unfeeling and stubborn nature.

Context : The wind blows strongly and destroys the poet’s things. His request to the wind to blow softly remains unheard. The poet shows us the way to deal with the wind and make it our friend.

Explanation : The poet says that the wind is so powerful and proud that it will not hear our prayer to it to blow softly. He suggests a way to deal with the power of the wind. We can befriend the wind by becoming as powerful as the wind itself.

The poet advises us to make our houses strong with their doors firmly jointed, to make our bodies strong by exercise and to make our hearts strong and unchanging. If we do all these things, the poet says, the wind will be our friend. The poet means to say that the strong wind can be befriended only by becoming strong. Friendship is possible only between the equals. 

सन्दर्भ : ये पंक्तियाँ सुब्रमनिया भारती की कविता ‘Wind’ से ली गयी हैं। पवन बड़े बल के साथ बहता है तथा बहुत सारा विनाश कर देता है । लेकिन पवन को उसके जिद्दी एवं निष्ठुर स्वभाव के बावजूद भी मित्र बनाया जा सकता है।

प्रसंग : पवन तीव्रता के साथ बहता है तथा कवि की चीज़ों को नष्ट कर डालता है। पवन से कवि द्वारा धीमे बहने की प्रार्थना भी अनसुनी रह जाती है। कवि हमें पवन से मुकाबला करने तथा उसे हमारा मित्र बनाने का उपाय दिखाता है। 

व्याख्या : कवि कहता है कि पवन इतना शक्तिशाली एवं अभिमानी है कि वह धीमे-धीमे बहने की हमारी प्रार्थना को नहीं सुनता है। वह पवन की शक्ति से निपटने का मार्ग सुझाता है। हम पवन को हमारा मित्र बना सकते हैं। ऐसा हम स्वयं को पवन के समान बलवान बना कर कर सकते हैं।

कवि हमें सलाह देता है कि हम हमारे मकानों को मजबूत बनावें और उनके दरवाजों के जोड़ों को मजबूती दें, हम हमारे शरीरों को व्यायाम द्वारा मजबूत करें तथा हमारे दिलों को मजबूत एवं दृढ़ बनावें। कवि कहता है, अगर हम यह सब चीजें कर लेते हैं तो पवन हमारा मित्र बन जाएगा। कवि का तात्पर्य यह है कि बलवान पवन से मित्रता तभी संभव है जब हम स्वयं को बलवान बना लें। मित्रता समान लोगों के बीच ही संभव होती है।

Stanza 5.

The wind blows out weak fires. 
He makes strong fires roar and flourish. 
His friendship is good.
We praise him every day.

Reference : These are the concluding lines of Subramania Bharati’s poem, ‘Wind’. The poet talks about the destruction caused by the strongly blowing wind. He also suggests the way to befriend the wind.

Context : The wind causes a lot of destruction by blowing strongly. The poet suggests that we can deal with the wind by befriending it. This is possible if we ourselves become as strong as the wind itself.

Explanation : The poet says that the destruction caused by the wind can be avoided if we make ourselves strong in body and spirit. Similarly, we shall have to make strong houses. Once we are strong enough to face the fury of the wind, the wind will become our friend, but it will go on causing us harm if we remain weak.

The wind blows out weak fires, but makes strong fires more furious and makes them grow in volume. The wind god’s friendship is good. We worship him daily.The poet’s message here is that we should make ourselves strong, so that we may face hardships and challenges of life better. Otherwise, they will crush us.

सन्दर्भ : प्रस्तुत पंक्तियाँ सुब्रमनिया भारती की कविता ‘Wind’ की अन्तिम पंक्तियाँ हैं। कवि तेजी से बहती हुई पवन द्वारा किए जाने वाले विनाश के बारे में चर्चा करता है । वह पवन से मित्रता करने का मार्ग भी सुझाता है।

प्रसंग : पवन जोर से बहकर बहुत सारा नुकसान कर देता है। कवि सुझाव देता है कि हम पवन से मित्रता कर उससे निपट सकते हैं। यह तभी संभव है जब हम स्वयं उतने ही बलवान बन जाएँ जितना बलवान पवन है।

व्याख्या : कवि कहता है कि पवन द्वारा किए जाने वाले विनाश से तभी बचा जा सकता है जब हम स्वयं को शारीरिक एवं मानसिक रूप से बलवान बना लेते हैं। इसी प्रकार हमें मजबूत घर बनाने होंगे। एक

बार जब हम पवन के क्रोध का सामना करने हेतु पर्याप्त रूप से मजबूत बन जाएंगे तो पवन हमारा मित्र बन जाएगा, लेकिन यह हमें हानि पहुँचाता रहेगा, अगर हम कमजोर बने रहेंगे। पवन कमजोर आग को बुझा देता है किन्तु जोरदार आग को और अधिक भड़का देता है तथा उन्हें आकार में बढ़ा देता है।

पवन देव की मित्रता अच्छी होती है। हम रोज उसकी पूजा करते हैं। यहाँ कवि का संदेश यह है कि हमें स्वयं को बलवान बनाना चाहिए ताकि हम जीवन की कठिनाइयों एवं चुनौतियों का मुकाबला बेहतर ढंग से कर सकें। अन्यथा वे हमें कुचल देंगी।

Poem 2 Wind Hindi Translation