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The Summit Within

Summary and Translation in Hindi

पढ़ने से पूर्व :
 
मेजर एच. पी. एस. अहलूवालिया 1965 में माउंट एवरेस्ट के प्रथम सफल भारतीय अभियान दल के सदस्य थे। जब वे विश्व के उच्चतम बिन्दु पर खड़े हुए तब उन्होंने कैसी अनुभूति की? आइए उनकी कहानी उनके ही शब्दों में सुनते हैं – पर्वत शिखर पर चढ़ना और, फिर, इससे भी अधिक कठिन कार्य है आन्तरिक शिखर पर चढ़ना। Heavenly bodies (आकाशीय पिण्डों) के साथ हम ‘the’ (article) का प्रयोग करते हैं, जैसे – the sun, the moon, the star, the earth आदि। 

कठिन शब्दार्थ एवं हिन्दी अनुवाद 

Of all the emotions………..no easier to climb. (Page 75) 

कठिन शब्दार्थ : emotions (इमोशन्ज) = भावनाएँ, surged (सॅज्ड) = उमडी, through me (थ्र मी) = मेरे अंदर, summit (समिट) = शिखर, miles (माइल्ज) = मीलों, panorama (पैनॅरामा) = परिदृश्य, dominant (डॉमिनॅन्ट) = प्रमुख, humility (ह्यूमिलॅटि) = विनयशीलता, however (हाउएवर) = फिर भी, instead of (इंस्टेड ऑव) = की बजाय, being (बीइंग) = होने के, jubilant (जूबिलॅन्ट) = आनंदविभोर, tinge (टिन्ज) = किसी रंग या मनोभाव का हलका पुट/आभायुक्त, sadness (सैडनॅस) = उदासी, ultimate

(अल्टिमेट) = सबसे बड़ा/सबसे ऊँची चढ़ाई, climbing (क्लाइम्बिंग) = चढ़ाई, overwhelmed (ओवॅवेल्म्ड) = अभिभूत होना, lasts (लास्ट्स) = चलता है, lifetime (लाइफटाइम) = जीवनभर, experience (इक्सपिअरिअन्स) = अनुभव, changes (चेन्जिज) = परिवर्तन कर देता है, completely (कम्पलीटलि) = पूर्ण रूप से, mountains (माउंटॅन्ज) = पर्वत, remarking (रिमाकिंग) = उल्लेख करना, formidable (फोमिडॅबल) = विकट। 

हिन्दी अनुवाद : जब मैं एवरेस्ट के शिखर पर खड़ा हुआ हमारे नीचे मीलों दूरी के परिदृश्य को देख रहा था तब मेरे अंदर उमड़ी सभी भावनाओं में से जो सबसे प्रमुख थी वह ‘विनम्रता’ की थी। मेरे अन्दर की शारीरिक प्रकृति ऐसा कहती हुई प्रतीत हुई, “धन्यवाद हे ईश्वर, यह सब समाप्त हो गया है! (अर्थात् चढ़ाई सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुकी है)” फिर भी, आनन्दविभोर होने के बजाय, वहां उदासी का एक हल्का पुट था। क्या यह इस कारण था कि मैंने पहले ही सबसे ऊँची चढ़ाई तय कर ली थी और अब ऊँचा चढ़ने के लिए कुछ नहीं होगा और यहाँ के बाद सभी सड़कें (मार्ग) नीचे की ओर ही ले जायेंगी?

एवरेस्ट शिखर पर चढ़कर आप हर्ष व कृतज्ञता की गहरी भावना से अभिभूत होते हैं। यह एक वह आनन्द होता है जो जीवनभर चलता है। यह अनुभव आपको पूर्णरूप से परिवर्तित कर देता है। व्यक्ति जो पर्वतों पर हो आया है (अर्थात् चढ़ चुका है) वह पुनः (आगे भी) वैसे का वैसा ही नहीं रहता है (अर्थात् उसकी सोच में अत्यधिक सकारात्मक परिवर्तन हो जाता है)। जैसा कि एवरेस्ट शिखर पर चढ़ाई के उपरान्त, मैं जीवन की ओर मुड़कर देखता हूँ तो मैं एक अन्य शिखर का उल्लेख किए बिना नहीं रह सकता हूँ मस्तिष्क (सोच) का शिखर-न कम विकट और न चढ़ने में आसान।। 

Even when getting down……….. …………………..difficult to resist. (Pages 76-77) 

कठिन शब्दार्थ : getting down (गेटिंग डाउन) = नीचे उतरते हुए, physical (फिजिकल) = शारीरिक, exhaustion (इगजोस्चन) = गहरी थकान, question (क्वेश्चन) = प्रश्न, have such a hold (हैव सच अ होल्ड) = इतनी अधिक पकड़ बनाए रखना, imagination (इमैजिनेशन) = कल्पना, remote (रिमोट) = दूर होना, remain (रिमेन) = शेष रहना, memories (मेमॅरिज) = यादें, fade away (फेड अवे) = धूमिल होना, led (लेड) = ले जाना,

answer (आन्सॅर) = उत्तर, delight (डिलाइट) = प्रसन्नता, overcoming (ओवॅकमिंग) = नियंत्रित कर लेना, obstacles (आब्सटैकल्ज) = बाधाएँ, endurance (इनड्युअरन्स) = सहनशक्ति, persistence (पॅसिसटॅन्स) = करते रहने को कृत- संकल्प, will power (विल पाउअर) = इच्छा शक्ति, demonstration (डेमॅनस्ट्रेशन) = प्रदर्शन, exhilarating (इगजिलरेटिंग) = रोमांचकारी, personal (पॅसॅनल) = व्यक्तिगत, attracted (अट्रैक्टिड) = आकर्षित किया, miserable (मिजरॅबल) = बहुत उदास, lost (लॉस्ट) = गुमशुदा, plains (प्लेन्ज) = मैदान,

majesty (मैजेंस्टि) = प्रभावशीलता, challenge (चैलिंज) = चुनौती, believe (बिलीव) = विश्वास करना, means (मीन्ज) = साधन, communion (कॅम्यूनिअन) = विचार आदान-प्रदान, granted (ग्रांटिड) = मान लेने पर, mightiest (माइटिअस्ट) = सबसे शक्तिशाली, defied (डिफाइंड) = असंभव किया, previous (प्रिविअस) = पूर्व के, attempts (अटेम्प्ट्स ) = प्रयासों,

ounce (आउन्स) = न्यून मात्रा, energy (एनॅजि) = ऊर्जा, brutal (ब्रटल) = प्रतिरोधी/पाश्विक, struggle (स्ट्रगल) = संघर्ष, rock (रॉक) = चट्टानों, ice (आइस) = बर्फ, halfway (हाफवे) = आधे रास्ते में, at stake (एट स्टेक) = दांव पर, passage (पैसिज) = रास्ता, exhilaration (इगजिलरेशन) = आह्लाद/रोमांच, battle (बैटल) = युद्ध, fought (फोट) = लड़ा, won (वन) = जीता, victory (विक्टॅरि) = विजय, glimpsing * विशेषण (adjectives) में ness लगाने पर संज्ञा (noun) बन जाता है,

जैसे..-.sad + ness = sadness, happy + ness = happiness, good + (ग्लिम्पसिंग) = झलक देखकर, peak (पीक) = चोटी/शिखर, distance (डिस्टॅन्स) = दूरी पर, transported (ट्रैन्सपोटिड) = पहुंच गया, mystical (मिस्टिकल) = आध्यात्मिक, aloofness (अलूफनॅस) = अलगाव/पार्थक्य, ruggedness (रगिडनॅस) = ऊबड़-खाबड़, encountered (इनकाउन्टॅड) = सामना हुआ, draws (ड्रोज) = खींचना/आकर्षित करना, resist (रिजिस्ट) = अपने को रोकना। 

हिन्दी अनुवाद : यहाँ तक कि शिखर से नीचे उतरते हुए जब एक बार शारीरिक थकान जा चुकी थी, मैंने स्वयं से प्रश्न पूछना आरम्भ कर दिया कि मैं एवरेस्ट पर क्यों चढ़ा था। शिखर पर पहुँचने के कार्य की मेरी कल्पना पर इतनी पकड़ क्यों थी? यह पहले ही भूतकाल की एक चीज़ थी।

कुछ (बीते हुए) कल किया गया (कार्य) था। व्यतीत होते हुए प्रत्येक दिन के साथ, यह (कार्य) और अधिक दूरस्थ होता जायेगा। और फिर क्या शेष रहेगा? क्या मेरी स्मृतियाँ धीरे मल होती जायेंगी? ये सभी विचार मुझे स्वयं से प्रश्न करने की ओर ले गए जैसे कि लोग पर्वतों पर क्यों चढ़ते हैं। इस प्रश्न का उत्तर देना आसान नहीं है। सरलतम उत्तर होगा, जैसा कि अन्य कह चुके हैं, “क्योंकि यह वहाँ है (अर्थात् यह कठिनतम पर्वत वहाँ स्थित है)।

यह (पर्वत) बड़ी कठिनाइयाँ पेश करता है। व्यक्ति बाधाओं पर काबू पाने में आनंद लेता है। एक पर्वत पर चढ़ाई करने में जो बाधाएं हैं वे शारीरिक हैं। एक शिखर पर एक चढ़ाई का अर्थ है सहनशक्ति, कृत संकल्पना और इच्छाशक्ति। इन शारीरिक गुणों का प्रदर्शन निःसंदेह रोमांचकारी है, जैसा कि यह मेरे लिए भी था।” 

मेरे पास इस प्रश्न का एक और अधिक निजी उत्तर है। मेरे बचपन से ही मुझे पर्वतों द्वारा आकर्षित किया गया है। मैं मैदानों में, जब पर्वतों से दूर हुआ, तो बहुत उदास व गुमशुदा सा रहा था। पर्वत प्रकृति का श्रेष्ठतम रूप हैं। उनकी सुन्दरता व प्रभावशीलता एक बड़ी चुनौती पेश करती है, और बहुत से (लोगों) की भाँति मैं विश्वास करता हूँ कि पर्वत ईश्वर से विचारों के आदान-प्रदान करने का एक साधन है।

एक बार यह मान लेने पर, प्रश्न यह बना रहता है : एवरेस्ट ही क्यों? क्योंकि यह उच्चतम है, सबसे शक्तिशाली (अर्थात् कठिन) है, और इसने पूर्व के काफी प्रयासों को असंभव किया है। यह व्यक्ति की ऊर्जा का अंतिम आउन्स (छोटा अंश) तक ले लेता है। यह चट्टान व बर्फ के साथ एक प्रतिरोधी संघर्ष है। एक बार अपनाने पर (अर्थात् चढ़ाई आरम्भ करने पर), इसे आधे रास्ते में नहीं छोड़ा जा सकता है चाहे जब उसका जीवन ही दांव पर हो।

वापसी का रास्ता उतना ही कठिन है जितना कि आगे की ओर का। और तब जब शिखर पर चढ़ा जाता है, तो वहाँ आह्लाद होता है, कुछ कर चुके होने का हर्ष, युद्ध लड़ने व जीतने का भाव। वहां एक विजय का व प्रसन्नता का भाव है। 

एक चोटी को दूरी से देखने पर मैं दूसरे लोक में पहुंच जाता हूँ। मैं स्वयं के भीतर जो परिवर्तन महसूस करता हूँ उसे केवल आध्यात्मिक कहा जा सकता है। अपनी सुन्दरता, एकांतता, शक्ति, ऊबड़-खाबड़ स्थिति और कठिनाइयां जिनका मार्ग में सामना किया जाता है, के द्वारा पर्वत चोटी मुझे अपनी ओर खींचती है जैसा कि एवरेस्ट ने किया यह एक चुनौती है जिससे अपने को रोकना कठिन है। 

Looking back I find ………………… are at the summit. (Pages 77-78) 

कठिन शब्दार्थ :

explained (इक्सप्लेन्ड) = स्पष्ट किया, breathe (ब्रीद) = श्वास लेना, neighbour (नेबर/नेइ.) = पड़ौसी, acts (एक्ट्स) = कार्य, conscious (कॉनॉस) = जागरूक होना, special (स्पेशल) = विशेष, manner (मैनॅर) = तरीका, smallness (स्मॉलनैस) = लघुता, large (लार्ज) = विशाल, universe (यूनिवर्स) = विश्व, conquest (कॉन्क्वेस्ट) = जीत, achievement (अचीवमॅन्ट) = उपलब्धि, followed (फॉलोड) = के बाद आना,

sense (सेन्स) = भाव, fulfilment (फुलफिलमॅन्ट) = पूर्णता/सम्पादनता, satisfaction (सैटिसफैक्शन) = संतुष्टि, urge (ॲर्ज) = लालसा, rise (राइज) = ऊपर उठना, surroundings (सॅराउन्डिंग्ज) = परिवेश, eternal (इटॅनल) = शाश्वत, adventure (अडवेन्चर) = साहसिक कार्य, merely (मिअलि) = केवल, emotional (इमोशनल) = भावुक/संवेदनशील, spiritual (स्पिरिचुअल) = आध्यात्मिक, consider (कॅनसिडॅर) = विचार करना,

typical (टिपिकल) = कठिन, towards (टॅवोड्ज) = की ओर, heignts (हाइट्स) = ऊँचाइयां, sharing (शेअरिंग) = साझेदारी करना, rope (रोप) = रस्सा, firm in (फॅर्म इन) = दृढ़ हो जाना, steps (स्टेप्स) = सीढ़ियां, ice (आइस) = बर्फ, belays (बिलेज) = लपेटकर बांधना, grim (ग्रिम) = (यहाँ) कठिन, strain (स्ट्रेन) = खिंचाव पैदा करना, nerve (नर्व) = नस, records (रिकोड्ज) = अभिलेख/विवरण, else (एल्स) = अन्यथा,

given up (गिन अप) = परित्याग करना, curse (कॅर्स) = शाप, wonder (वन्डर) = आश्चर्य करना, undertook (अंडरटुक) = प्रारम्भ की, ascent (असेन्ट) = चढ़ाई, moments (मॉमॅन्ट्स) = क्षण/पल, sheer (शिअर) = केवल, relief (रिलीफ) = राहत, snap out (स्नैप  आउट) = से बाहर आना, struggle (स्ट्रगल) = संघर्ष, companion (कॅमपैनिअन) = साथी, go on (गो ऑन) = आगे बढ़ते चलना, keeps up (कीप्स अप) = साथ चलते रहना, inspiration (इंसपिरेशन) = प्रेरणा। 

हिन्दी अनुवाद : 

पीछे मुड़कर देखने पर मैं पाता हूँ कि मैंने अभी तक पूर्णतः स्पष्ट नहीं किया है कि मैं एवरेस्ट पर क्यों चढा। यह एक ऐसे प्रश्न का उत्तर देना है जैसे आप क्यों श्वास लेते हैं? आप अपने पड़ौसी की सहायता क्यो करते हैं? आप अच्छे काम क्यों करना चाहते हैं? कोई अंतिम उत्तर संभव नहीं है। और फिर यह तथ्य है कि एवरेस्ट केवल एक शारीरिक चढ़ाई नहीं है (अर्थात् हम शरीर से ही ऊँचाई पर नहीं पहुंचते हैं बल्कि हमारी सोच, हमारी क्रियाएं आदि भी ऊँची हो जाती हैं)।

व्यक्ति जो पर्वत शिखर पर हो आया है वह इस विशाल विश्व में अपनी स्वयं की लघुता के प्रति विशेष तरीके से जागरूक हो जाता है। एक पर्वत की भौतिक विजय (अर्थात् शारीरिक रूप से पर्वत पर चढ़ना) उपलब्धि का केवल एक भाग है। उसकी बजाय (अर्थात् शारीरिक विजय की बजाय) इसका और अधिक महत्व है।

इसके (शारीरिक विजय के) बाद कार्यपूर्णता का भाव आता है। अपने परिवेश से ऊपर उठने की गहन लालसा की संतुष्टि होती है। यह व्यक्ति में साहसिक कार्यों के प्रति शाश्वत प्रेम है। अनुभूति केवल शारीरिक नहीं होती है। यह संवेगात्मक होती है। यह आध्यात्मिक होती है। 

शिखर की ओर अंतिम ऊँचाइयों पर एक कठिन चढाई का विचार करें। आप दूसरे आरोहक के साथ एक रस्से में साझेदारी कर रहे हैं। आप दृढ़ बने रहते हैं। वह (साथी आरोहक) कठोर बर्फ को काटकर सीढ़ियां बनाता है। फिर | वह (रस्से को) लपेटकर बांधता है और आप अपना रास्ता धीरे-धीरे तय करते हैं। चढ़ाई कठिन है।

आप प्रत्येक नस खींचते हैं (अर्थात् पूरी शक्ति लगाते हैं) जैसे ही आप एक-एक कदम उठाते हैं। प्रसिद्ध पर्वतारोहियों ने दूसरों द्वारा (उन्हें) दी गई सहायता का रिकार्ड छोड़ा है। उन्होंने यह भी दर्ज किया है कि उन्हें केवल वह सहायता कैसे आवश्यक थी। अन्यथा वे परित्याग कर चुके होते (अर्थात् चढ़ाई बीच में ही छोड़ चुके होते) ।

श्वसन कठिन है (अर्थात् श्वास लेना कठिन हो जाता है)। आप, इसके (चढ़ाई के लिए अपने आपको अनुमति देने के लिए, स्वयं को कोसते हैं। आप हैरान होते हैं कि आपने कभी भी चढ़ाई प्रारम्भ क्यों की। ऐसे क्षण आते हैं जब आप वापिस जाने जैसा महसूस करते हैं। ऊपर की बजाय नीचे जाना यह केवल राहत ही देगा।

किन्तु लगभग तुरन्त ही आप उस मनःस्थिति से बाहर आते हैं। आप में कुछ है जो आपको संघर्ष छोड़ देने की अनुमति नहीं देता है। और आप बढ़ना जारी रखते हैं। आपका साथी आपका साथ बनाए रखता है । मात्र 50 फीट और । या शायद एक सौ। आप स्वयं से पूछते हैं : क्या कोई अंत नहीं है? आप अपने साथी की ओर देखते हैं और वह आपकी ओर देखता है। आप एक प्रेरणा ग्रहण करते हैं। और फिर, इसके बारे में प्रथम जानकारी हुए बिना ही, आप शिखर पर होते हैं। 

Looking round from……………………………………..higher than Everest. (Pages 78-79) 

कठिन शब्दार्थ : worthwhile (वर्थवाइल) = सार्थक, silvery (सिल्वरि) = चांदी जैसी/श्वेत, appear (अपिअर) = दिखाई पड़ना, clouds (क्लाउड्ज) = बादल, jewelled (जूअल्ड) = रत्नजड़ित, necklace (नेकलॅस) = गले का हार, valleys (वैलिज) = घाटियाँ, ennobling (इनोबलिंग) = परिष्कृत करने वाला, enriching (एनरिचिंग) = समृद्ध करने वाला, bow down (बो डाउन) = श्रद्धा से झुकना, make obeisance to (मेक ऑब्रेसॅन्स टु) = के प्रति श्रद्धा दिखाना/को नमन करना,

relic (रेलिक) = अवशेष, cairn (केअन) = चट्टानों व पत्थरों का एक ढेर, reverence (रेवरॅन्स) = सम्मान, fuller (फुलर) = अधिक पूर्ण, fearful (फिअरफल) = डरावना, unscalable (अनस्केलॅबल) = जिस पर चढ़ा न जा सके, akin to (अकिन टु) = सदृश, certainly (सेंटनलि) = निश्चित रूप से, venture (वेन्चर) = जोखिम उठाना, provided (पॅवाइडिड) = प्रदान किया, ordeals (ओडील्ज) = अग्निपरीक्षा, resolutely (रेजलूटलि) = दृढ़ता से, intermal (इन्टॅन्ल) = आंतरिक।

हिन्दी अनुवाद : 

शिखर से चारों ओर देखते हुए आप स्वयं से कहते हैं कि यह सार्थक था। बादलों के बीच से अन्य श्वेत चोटियाँ दिखाई पड़ती हैं। यदि आप सौभाग्यशाली हैं तो सूर्य उन पर हो सकता है। चारों ओर की चोटियाँ आपके शिखर की गर्दन के चारों ओर एक रत्नजडित गले के हार की भांति दिखाई देती हैं।

नीचे, आप देखते हैं कि विस्तृत घाटियाँ दूर तक ढालू (फैली) हैं। एक पर्वत शिखर से केवल नीचे देखना ही एक उन्नत, समृद्ध करने वाला अनुभव है। आप सादर झुकते हैं व नमन करते हैं, आप जिस भी इष्ट की आराधना करते हैं। – मैंने एवरेस्ट पर गुरुनानक का एक चित्र छोडा। रावत ने देवी दुर्गा का एक चित्र छोडा। फ दोरजी ने भगवान बद्ध का एक अवशेष छोड़ा। एडमंड हिलेरी ने बर्फ में चट्टानों व पत्थरों के एक ढेर के नीचे क्रास को दबाया था। ये विजय के चिन्ह नहीं बल्कि सम्मान के प्रतीक हैं। 

शिखर पर चढ़ चुके होने का अनुभव आपको पूर्णरूप से परिवर्तित कर देता है। एक दूसरा शिखर भी है। यह स्वयं आपके अन्दर है। यह आपके स्वयं के मस्तिष्क में है। प्रत्येक व्यक्ति स्वयं के अन्दर अपने स्वयं का पर्वत शिखर लिये चलता है। उसे स्वयं के और अधिक पूर्ण ज्ञान तक पहुंचने के लिए इसे अवश्य चढ़ना चाहिए। यह डरावना है, और न चढ़ पाने वाला है। इस पर किसी अन्य द्वारा नहीं चढ़ा जा सकता है। आपको स्वयं को इसे करना पड़ता है। बाह्य पर्वत शिखर पर चढ़ाई का शारीरिक कार्य आंतरिक पर्वत पर चढ़ाई के कार्य के सदृश (समान) है। दोनों की चढ़ाई के प्रभाव समान हैं ।

चाहे पर्वत जिस पर आप चढ़ते हैं वह शारीरिक है या संवेगात्मक है व आध्यात्मिक है, चढ़ाई आपको निःसन्देह परिवर्तित कर देगी। यह आपको विश्व व आपके स्वयं के बारे में बहुत कुछ शिक्षा देती है।  मैं यह सोचने का जोखिम लेता हूँ (अर्थात् साहस करता हूँ) कि एक एवरेस्ट विजेता के रूप में मेरे अनुभव ने मुझे वह प्रेरणा प्रदान की है कि जीवन की अग्नि- परीक्षाओं का दृढ़ता से सामना करूँ। पर्वत पर चढ़ना एक सार्थक अनुभूति थी। आंतरिक शिखर की विजय उतनी ही सार्थक है। आंतरिक शिखर, शायद, एवरेस्ट से भी ऊँचे हैं। 

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