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The Trees Summary and Translation in Hindi


क्या बिना वृक्ष के कोई वन हो सकता है? इस कविता में वृक्ष कहाँ है और वे कहाँ जाते हैं?

कठिन शब्दार्थ एवं हिन्दी अनुवाद

The trees inside……………….trees by morning. (Page 99)

कठिन शब्दार्थ – insect (इन्सेक्ट) = कीट। bury (बेरि) = गाड़ना।

हिन्दी अनुवाद – कवयित्री कहती है कि वे वृक्ष जो (अभी तक घर के) अन्दर थे अब बाहर जंगलों में जा रहे हैं। यह जंगल इतने दिनों से खाली था। जहाँ कोई पक्षी नहीं बैठ सकता था। कोई कीट नहीं छिप सकता था। कोई सूरज अपने किरण रूपी पैर छाँव में नहीं गाड़ (रख) सकता था। यह जंगल जो इतनी रातों से खाली था, प्रात:काल तक वृक्षों से भर जायेगा।

भावार्थ – कवयित्री उन लोगों पर व्यंग कसती है जो कि वृक्षों का प्रयोग घरों को सजाने के लिए करते हैं जबकि वृक्षों को इस कैद से बाहर निकालने की आवश्यकता है।

All night the …………… the clinic doors. (Page 99)

कठिन शब्दार्थ : disengage (डिसइन्गेज्) = काम से मुक्त करना। cracks (क्रैक्स) = दरारें। veranda (वरैन्डा) = बरामदा। strain (स्ट्रेन्) = झुकना (यहाँ)। glass (ग्लास्) = शीशा। twigs (ट्विग्ज) = छोटी टहनियाँ । stiff (स्टिफ्) = सख्त/सीधी। exertion (इग्जश्न्) = अत्यधिक कार्य करने से/उद्यम से। long-cramped (लॉङ्-क्रैम्प्ट) = लम्बी मुड़ी हुई। boughs (बाउज) = शाखा/डाल। shuffling (शक्लिङ्) = अदल-बदल/बार-बार हिलने से रगड़ खाना (यहाँ) । discharged (डिस्चाज्ड) = छुट्टी प्राप्त। half-dazed (हाफ्-डेज्ड्) = आधा भौचक्का।

हिन्दी अनुवाद – पूरी रात जड़ें अपने आपको बरामदे के फर्श की दरारों से मुक्त कराने का प्रयत्न करती रहीं। पत्ते, शीशे की ओर झुकते हैं। छोटी टहनियाँ अत्यधिक मेहनत के कारण सख्त या सीधी हो जाती हैं। लम्बी, मुड़ी हुई शाखाएँ बार-बार हिलने से छत के नीचे रगड़ खाकर ऐसी हो गई हैं जैसे अभी-अभी अस्पताल से छुट्टी प्राप्त मरीज आधा-भौचक्का हो अस्पताल के दरवाजों की ओर चलने लगता है।

भावार्थ – कवयित्री यह बताना चाहती है कि किस प्रकार से पेड़-पौधे अपने प्राकृतिक आवास की ओर बढ़ने के लिए प्रयास करते हैं। प्रकृति को मानव की दखलंदाजी पसन्द नहीं है। नोट- इस कविता में कवयित्री (Poetess) Adrienne Rich को पाठ्यपुस्तक में ‘poet’ कहकर संबोधित किया गया है। अतः अंग्रेजी में ‘poet’ तथा हिन्दी में ‘कवयित्री’ शब्द का प्रयोग किया गया है।

sit inside…….into the rooms. (Page 99)

कठिन शब्दार्थ : scarcely (स्केअस्लि) = मुश्किल से ही। lichen (लाइकन/लिचन्) = शैवाक।

हिन्दी अनवाद – मैं अन्दर बैठी हूँ, दरवाजे बरामदे में खले हैं, और मैं लम्बे पत्र लिख रही हैं जिनमें मैं शायद ही (मुश्किल से ही) अपने घर से जंगल के प्रस्थान का जिक्र करती हूँ। रात्रि ताजी है, पूरा चन्द्रमा आकाश में अभी भी खुला चमक रहा है। पत्तों और शैवाक की गंध कमरों में एक आवाज की भाँति पहुँच रही है।

भावार्थ – कवयित्री रात्रि में भी ताजगी का एहसास घर के अन्दर बैठे-बैठे भी करती है। वह पत्र रूपी जागरण से लोगों को समझाने का प्रयास कर रही है।

My head is full………………….the tallest oak. (Page 100)

कठिन शब्दार्थ : whispers (विस्प(र)ज) = कानाफूसी। stumbling (स्टब्लिङ्) = लड़खड़ाते

हिन्दी अनुवाद – मेरा मस्तिष्क कानाफूसियों से भरा है जो कल शान्त हो जायेंगी। सुनो काँच टूट रहा है। वृक्ष रात्रि में लड़खड़ाते हुए आगे की ओर जा रहे हैं। पवनें उनसे मिलने के लिए तेजी से चलने लगती हैं । चन्द्रमा, काँच की तरह टूट गया है, इसके टुकड़े अब सबसे ऊँचे बलूत वृक्ष के मुकुट में चमक रहे हैं।

भावार्थ – शैवाक की फुसफुसाहट व पत्तों की सरसराहट कवयित्री के मस्तिष्क में है जो कल नहीं रहेगी क्योंकि रात्रि में वृक्ष जंगल में चले जायेंगे। जब वृक्ष जंगल की ओर जा रहे होते हैं और पवन चल रही होती है व पत्ते हिल रहे होते हैं तो पत्तों के बीच से चन्द्रमा कांच की तरह टूटा हुआ दिखाई देता है और ऊँचे बलूत के वृक्ष पर तो ऐसे दिखता है जैसे मुकुट में इसके टुकड़े चमक रहे हों।

कवयित्री के विषय में – एड्रिएन रिच का जन्म बाल्टिमोर, मैरिलैंड, यू.एस.ए. में 1929 में हुआ था। वह काव्य की लगभग 20 पुस्तकों की लेखिका हैं, और उन्हें नारीवादी व उग्र सुधारवादी कवयित्री कहा गया है।

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